Bahut sundar.. ab iska arth bhi bata do
पहली लाइन का अर्थ है -
" कामिनी सोने की छड़ी की तरह है किंतू उसकी कमर इतनी पतली क्यों है ? "
यह दोहा आलम ने लिखा था ।
दूसरी लाइन का अर्थ है -
" वह यों है कि विधाता ने उसकी कमर के सोने को काटकर स्तनों मे भर दिया है । "
यह दोहा शेख मैडम ने लिखा है ।
आलम औरंगजेब के समकालीन थे । वो दरअसल ब्राह्मण थे । एक बार इन्होने एक चादर एक रंगरेज के यहां रंगाने को भेजा । रंगरेज की जवान लड़की ने उस चादर मे एक कागज का टुकड़ा पाया जिस मे आधा दोहा लिखा हुआ था ।
वह दोहा पहली लाइन है ।
इस दोहे को पढ़ने के बाद लड़की ने उस दोहे मे नीचे की लाइन जोड़ दी और ब्राह्मण को भेज दी ।
पुरे दोहे को पढ़कर ब्राह्मण जी बेतहासा रंगरेज कन्या के इश्क मे पड़ गए । उन्होने लड़की के बाप से कन्या का हाथ मांगा । बाप ने कहा आप कलमा पढ़ लीजिए फिर कोई दिक्कत नही ।
इस तरह से ब्राह्मण साहब आलम नाम से मशहूर हुए । उनकी उस रंगरेज लड़की जो पत्नी बनी , का नाम शेख था । धर्म बदलने के बाद भी आलम साहब कृष्ण के भक्ति मे लिन रहे ।