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Incest पहाडी मौसम

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lovlesh2002

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सूरज और रानी दोनों अपनी उत्तेजना के चरम शिखर पर पहुंचे ही थे किउसकी मां आ गई थी जिससे दोनों एकदम से अलग हो गए थे वरना सूरज आज अपनी बहन को भी जवानी का मजा चढ़ा दिया होता और वैसे भी उसकी हरकतों से उसकी बहन रानी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार हो चुकी थीक्योंकि सूरज ने हरकत ही कुछ ऐसी की थी उससे पहले अपनी बातों में उलझा कर पूरी तरह से गर्म कर दिया था और गर्म करने के बाद उसकी गर्माहट पर तड़का लगाते हुए उसके हाथों में अपना लंड दे दिया था,,,यह हरकत किसी भी लड़की के लिए पूरी तरह से उत्तेजित कर देने वाली साबित होती है और ऐसा रानी के साथ भी हो रहा था,,,। वैसे भी रानी पूरी तरह से जवान हो चुकी थी इसलिए इस तरह के खेल का आनंद लेने की इच्छा उसके मन में भी जागरूक होने लगी थी।




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वैसे तो रानी ऐसी नहीं थी लेकिन इस तरह की इच्छा उसके मन मेंसूरज ही जागरूक किया था अगर वह अपने साथ उसे अांवला तोड़ने के लिए ना ले गया होता और उसे तालाब में नहाने के लिए मजबूर ना किया होता तो शायद यहां तक दोनों भाई बहन नहीं पहुंच पाते सूरज के मन में तो पहले से हीरानी को लेकर आकर्षण पैदा हो चुका था जब वह पहली बार उसे घर के बगल में पेशाब करते हुए देखा था उसकी गोरी गोरी जवानी से भरी हुई गांड को देखकर की मर्दानगी पूरी तरह से जागरूक होने लगी थी,,, इससे पहले वह कभी अपनी बहन को इस नजरिया से नहीं देखा था लेकिन मुखिया की बीवी के साथ-साथ मुखिया की लड़की की चुदाई कर लेने के बाद उसकी मां हर औरत में आकर्षण और हर एक रिश्ते में औरत को ढूंढने लगा था जिसमें उसकी मां और बहन दोनों शामिल थे,,, अब तो उसकी मर्दानगी का स्वाद सोनू की चाची ने भी चख ली थी,,और वह बड़ी सफलतापूर्वक सोनू की चाची को संतुष्ट करने में कामयाब हो गया था जिसके चलते उसका विश्वास बढ़ता चला जा रहा था और इसी विश्वास के चलते वह अपनी बहन रानी पर हाथ आजमानेकी सोच रहा था और अपनी सोच को पूरा भी कर लिया था अगर सही समय पर उसकी मां आ गई होती तो दूसरी औरतों की तरह और रानी को भी चोद चुका होता,,,।





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कुछ दिन तक दोनों भाई बहनको इतना मौका ही नहीं मिला कि दोनों एक दूसरे से बात कर सके और अपनी अधूरे खेल को पूरा कर सकें वैसे जितनी चाहत और उत्सुकता सूरज के मन में थी इस अधूरे खेल को पूरा करने की उतनी उत्सुकता रानी के मन में भी होने लगी थीऔर होती भी कैसे नहीं वह भी तो पूरी तरह से जवान हो चुकी थी अपने भाई के मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी हथेली में लेकर जिस तरह के आनंद की अनुभूति उसने की थी ऐसा अनुभव और आनंद उसने कभी भी नहीं महसूस की थी पहली बार तो उसे एहसास हो रहा था कि करने का लंड इतना लंबा और मोटा होने के साथ-साथ इतना गरम भी होता है,,,लंड की गर्माहट वह महसूस तो अपनी हथेली में कर रही थी लेकिन इसका सीधा असर उसे अपनी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में महसूस हो रही थी जिसमें से उसका लावा पिघल रहा था,,,रानी भी पूरी तरह से महसूस करने लगी थी उसके भाई का नजरिया पूरी तरह से बदल चुका है पहले वाला सूरज अब वह बिल्कुल भी नहीं रह गया था,,, अगर पहले वाला सूरज होता तो इस तरह की हरकत ही ना करता।





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लेकिन जहां एक तरफ अपने भाई की हरकत से हैरान थी वही उसकी इस तरह की हरकत से वह पूरी तरह से मंत्र मुग्ध भी थी क्योंकि उसने अपनी हरकतों से उसे अद्भुत आनंद का एहसास जो कराया था,,,वैसे तो वह भी अपने भाई के साथ एकांत ढूंढती थी लेकिन ऐसा कोई मौका ही नहीं मिलता था कि दोनों को एकांत में कुछ पल बिताने को मिल जाए जिससे सिर्फ उसका भाई आगे क्या होता है इस बारे में उसे कुछ सीख सके उसे अनुभव कर सके क्योंकि उसे दिन से उसकी मां भी दोपहर में बाहर नहीं जाती थी उसका कहना था कि गर्मी बहुत है बाहर बैठी रहो तो गर्म लू बहती है,,, उसकी मां का भी कहना ठीक था लेकिन रानी को यह पसंद नहीं आ रहा था । क्योंकि उसका मन भी इस बात से बेहद खुश था की बनेगी आज वहअपनी इच्छा की पूर्ति नहीं कर पाई लेकिन ऐसा मौका तो रोज मिलने वाला था क्योंकि इसी समय तो उसकी मां हमेशा घर से बाहर रहती थी लेकिन उसकी आशा पर पानी फिर चुका था,,,।




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दूसरी तरफ सूरज के पिताजी पूरी तरह से शराबी बन चुके थे शराब की लत ऐसी लगी थी कि शराब को वह नहीं बल्कि शराब उन्हें पी रही थी,, यह सब बदमाश कल्लु की वजह से हो रहा था,,, वह दोनों शराब की दुकान पर बैठे हुए थे दो बोतल शराब खत्म भी कर चुके थे लेकिन सूरज के पिताजी का मन और ज्यादा शराब पीने को कर रहा था इसलिए वह कल्लु से बोले,,,।

यार कल्लु तू ही एक मेरा सच्चा साथी है,,, लेकिन जितना शराब अभी पिया हूं उससे बात नहीं बन रही है दो बोतल और खरीद ले तो मजा आ जाए,,,।

तु कितना पीने लगा है,,, अभी-अभी तो दो बोतल खत्म किया और तुझे और चाहिए,,,।

क्या करूं दोस्त चार-पांच बोतल जब तक पी ना लो तब तक मजा नहीं आता,,,

चल कोई बात नहीं अभी खरीदे देता हूं,,,,।
(इतना कहकर कल्लु दो बोतल और खरीद कर ले आया,, और बोला,,)

ले पकड़ मेरा तो हो गया है तेरा ही पूरा नहीं पड़ता,,,।




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अरे मेरे दोस्त तू ही तो एक सहारा है तू ना होता तो पता नहीं मेरा क्या होता,,,(अपना हाथ आगे बढ़कर कल के हाथ में से शराब की दो बोतल थामते हुए वह बोला,,,)

कुछ नहीं होता बस तू बेकार पड़ा होता,,।

सच कह रहा है यार तू तेरे साथ तो जिंदगी एकदम जन्नत हो गई है शराब शबाब और कबाब ,,तेरे साथ ही रहकर तो जिंदगी का असली मजा मिल रहा है,,,बोतल का तो इंतजाम हो गया लेकिन खाने का भी इंतजाम हो जाता तो मजा आता और फिर खाना खाने के बाद कमला मिल जाती तो रात गुजारने में और आसान हो जाती,,,।

कमला का बंदोबस्त तो नहीं हो पाएगा वह कुछ दिन के लिए अपने बच्चों को लेकर मायके गई हुई है,,, लेकिन खाने का इंतजाम हो जाएगा,,,।

कहां पर,,?(दारू के नशे में आश्चर्य जताते हुए वह बोला)

राजा साहब के वहां,,,,।

सच में वहां इंतजाम हो जाएगा,,,।




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बिल्कुल हो जाएगातेरा शहर मैं हूं और हम दोनों का सहारा राजा साहब है लेकिन एक बात बोल दु वहां तमीज से पेश आना, अगर राजा साहब को जरा भी बुरा लगा तो फिर हम दोनों का हुक्का पानी बंद हो जाएगा,,,।

अरे बिल्कुल भी नहीं राजा साहब तो मैं आप है भला उनके सामने ऐसी वैसी हरकत करके अपने अच्छे दिन खत्म थोड़ी करने हैं,,,।

तो चल उठ राजा साहब के वहां चलते हैं,,,,,।

(ऐसा कहते हुए कलसूरज के पिताजी का हाथ पकड़ कर उसे उठाने की कोशिश करने लगा और थोड़ी देर में सूरज के पिताजी उठकर खड़े हो गए और दोनों एक दूसरे का सहारा लेकर राजा साहब के घर की तरफ चल दिए अभी तक सूरज के पिताजी राजा साहब से नहीं मिले थे बस उनके बारे में कल्लु के मुंह से सुने भर थे,,,इतना तो सूरज के पिताजी को मालूम था जो कि कल नहीं बताया था कि राजा साहब थोड़ा अय्याश किस्म के थे,,, नहीं-नई औरतें उन्हें अपनी बिस्तर पर बहुत अच्छी लगती थी,,, जिसका इंतजाम कभी कभार कल्लु कर देता था जिसके एवज में कल्लु को अच्छा खासा पैसा और राजा साहब के नाम का सहारा मिल जाता था,,, और यही वजह थी कि कल्लु की तरफ कोई आंख उठा कर नहीं देख पाता था,,,। थोड़ी ही देर में दोनों राजा साहब के कोठी पर पहुंच चुके थे,,,।




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राजा साहब की कोठी बड़ी आलीशान थी,, क्योंकि 20 25 गांव के वह जमींदार थे ,,, आम का बगीचा अमरूद का बगीचा गाने की खेती से लेकर के हर अनाज उनके खेतों में होता था और हर तरह के फल भी उनके बगीचों में होता था जिसे शहर बेचकर वह अच्छी खासी आमदनी कमाते थे और जमीदार का धंधा तो चली रहा था सब कुछ सही था बस एक ही गलत आदत थी सबाब और शराब की,,, खुद की बीवी हुस्न की मल्लिका थी खूबसूरती में चांद का टुकड़ा थी लेकिन फिर भी घर की मुर्गी दाल बराबर राजा साहब समझते थे इसलिए तो भले ही औरत सुंदर ना हो लेकिन बिस्तर पर नई नई औरत उन्हें चाहिए थी,,, जिसका जुगाड़ बहुत बार कल्लु कर चुका था और उसमें से एक कमला भी थी जिसकी चुदाई वह खुद और सूरज के पिताजी मिलकर किया करते थे,,,।




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शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो चुका था और राजा साहब अपनी कोठी के बाहर कुर्सी पर बैठकर हुक्का गुडगुडा रहे थे और उसी समय कल्लु और सूरज के पिताजी वहां पहुंच चुके थे,,,,, राजा साहब को हुक्का पीते देखकर कल एकदम से झुक कर नमस्कार करते हुए बोला।

राजा साहब की जय हो,,,,।
(कल्लु के मुंह से यह शब्द सुनकर सूरज के पिताजी भी समझ गए की यही राजा साहब है इसलिए वह भी कल्लु की तरह ही झुक कर बोले)

राजा साहब की जय हो,,,।

(राजा साहब जो हुक्का पीने में एकदम मस्त था वह दो बार राजा साहब की जय सुनकर नजर उठा कर देखने लगा तो सामने कल और सूरज के पिताजी को देखकर वह बोला)

अरे आओ कल्लु,,, आज लगता है रास्ता भूल गए हो,,,,
(कल समझ गया था कि राजा साहब व्यंग कस रहे थे क्योंकि वाकई में ज्यादा दिन हो गए थे राजा साहब की कोठी पर है इसलिए वह एकदम से मुस्कुराते हुए बोला)

कैसी बात कर रहे हैं राजा साहब आप तो हमारे माई बाप हैं भला माई बाप को कौन भूल सकता है,,,,।


तो इतने दिन कहां थे,,,।

बीवी की तबीयत थोड़ा नादुरस्त थी इसलिए यहां आ नहीं पाया,,,,।
(सूरज के पिताजी कल्लु की बातें सुनकर उसे आश्चर्य से देखने लगे क्योंकि वह जानते थे कि ऐसा कुछ भी नहीं था लेकिन उन्हें भी समझते देर नहीं लगी थी कि कल्लु बहाना बना रहा था,,, इसलिए कुछ बोल नहीं पाए और कल की बात सुनकर राजा साहब हुक्के को एक तरफ रखते हुए बोले,,)

तबीयत खराब थी,,, अब कैसी तबीयत है,,, कुछ पैसों की जरूरत हो तो बताना तुम्हारे लिए तो सब कुछ हाजिर है,,,।

अरे राजा साहबतुम्हारे सिवा किसी और का द्वारा मैं थोड़ी जानता हूं मैं जानता हूं की कितनी भी जरूरत होगी आपके द्वार पर आऊंगा तो सब पूरी हो जाएगी,,,।

लेकिन तुमने मुझे बहुत निराश किए हो,,, कोई अच्छी चिड़िया दिखाए नहीं,,,।

सही कहूं तो मालिक अभी आपके लायक कोई ऐसी चिड़िया दिखाई नहीं दी इसीलिए मैं यहां पर नहीं आ पा रहा था लेकिन अब मेरी नजर में एक चिड़िया है बस जाल में फंसने की देरी है,,, फिर उसके बाद तो उसका धागा तुम्हारे बिस्तर पर ही खुलेगा,,,।

(देर में सही लेकिन अब जाकर सूरज के पिताजी को पता चला कि दोनों किस बारे में बात कर रहे थे कल की बात सुनकर राजा साहब मुस्कुराते हुए बोले,,,)

बातें तुम बहुत अच्छी करते हो कल्लु इसीलिए मेरे दिल में तुम्हारे लिए बहुत जगह है,,,।

बस मालिक यह जगह बनाए रखना,,,,।

अच्छा बैठ जाओ खाना खाए हो कि नहीं,,,।

नहीं मालिक अभी तक तो नहीं खाना खाए,,,।

चलो कोई बात नहीं सही समय पर आए हो,,, हाथ मुंह धो मैं तुम्हारे लिए भी खाना मंगवाता हूं,,, और हां यह तुम्हारे साथ कौन है इन्हें पहले तो मैंने कभी नहीं देखा,,,।

यह मेरा दोस्त है मालिक अब समझ लीजिए ये भी तुम्हारा ही आदमी है,,,।

तो इन्हें भी बता देना कि अच्छी चिड़िया का बंदोबस्त हो तो इधर जरूर लेकर आना,।

जी मालिक में सब समझा दूंगा,,,।
(अब यह सब बात हो ही रही थी कि तभी एक 40 वर्ष ही खूबसूरत औरत गहनों से लदी हुई ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी राज्य की महारानी हो खूबसूरती तो कूट-कूट कर भरी हुई थी,,, वहचलती हुई वहां आई और उसके चलने से वातावरण में उसके चूड़ियों की खनक और पायलों की झलक एकदम साफ सुनाई दे रही थी जिसे सुनकर सूरज के पिताजी एकदम से नजर उठाकर उसे देखने लगे और उसे पास में आता देखकर कल एकदम से यहां से छोड़कर झुकते हुए बोला,,,)

महारानी की जय हो,,,,
(कल्लु की देखा देखी सुनकर सूरज के पिताजी भी महारानी की जय बोलकर हाथ जोड़कर खड़े हो गए,,, दोनों को इस तरह से जय-जय कर करते हुए देखकर राजा साहब की बीवी के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)

खुश रहो कल्लु बहुत दिनों बाद दिखाई दिए हो,,,।

की मालकिन थोड़ा उलझ गया था,,,।

मैं भी यही कह रहा था भाग्यवान,,,।


आप तो कहते ही रहते हैं चलिए उठीए भोजन का समय हो गया है,,,।

अभी उठकर चलता हूं लेकिन भाग्यवान इन दोनों के लिए भी खाना भिजवा देना यह लोग अभी तक खाना नहीं खाए हैं,,,।

कोई बात नहीं इनके लिए भी नौकर से कह कर खाना भिजवा देती हुं,,,,।
(इतना कहकर राजा साहब और उनकी बीवी कोठी के अंदर की तरफ जाने लगे,,,और जैसे ही बजाना थोड़ी-थोड़ी पर पहुंचे सूरज के पिताजी से रहने की आवाज धीरे से कल्लु से बोले,,)

यार राजा साहब को चिड़िया की क्या जरूरत है इनके पास तो खुद ही इतनी अच्छी चिड़िया है रात दिन मजा लूटते रहेंगे तो भी मन नहीं भरने वाला,,, कसम से स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा ही लग रही हैमैं तो यह सोच रहा हूं कि जब अपने कपड़े उतार कर नंगी होती होगी तो कितनी गजब की लगती होगी,,।

अरे चुप कर हरामी अगर किसी ने सुन लिया तो गजब हो जाएगा हुका पानी सब बंद हो जाएगा इसलिए तुझे कह रहा था की तमीज से पैश आना,,,।


अरे तो मैं कहां जोर-जोर से बोल रहा हूं तेरे कान में ही तो कह रहा हूं सच कहूं तो मुझे रहा नहीं गया इसलिए कह रहा हूं मैं तो महारानी को देखा ही रह गया सच में किसी रियासत की महारानी लग रही है और ऐसी खूबसूरत बीवी होने के बावजूद भी राजा साहब दूसरी औरतों के पीछे पागल है,,।

अरे पूछो तेरी बीवी तो किसी अप्सरा से कम नहीं लगती पता लगती है कि नहीं।

हां बात तो सही है,,।

लेकिन फिर भी तो कमला के पीछे पागल है ना।

हां,,,,।

बस यही बातहम सभी मर्दों को लागू होती है दूसरों की बीवी हमें बहुत अच्छी लगती है घर की मुर्गी दाल बराबर यही हर राजा साहब का भी है बिस्तर पर इतनी गरम और खूबसूरत औरत होने के बावजूद भी राजा साहब गांव की औरतों में सुख ढूंढते हैं और यह अपने दोनों के लिए अच्छा भी है यह शौक राजा साहब का हम लोगों का शौक पूरा करती हैसमझ में आया तुझे अगर राजा साहब को यह सब आदत ना होती तो हम दोनों उनके सामने खड़े भी ना रहे थे तू ही बात हम दोनों की राजा साहब के सामने खड़े रहने की हैसियत है नहीं ना लेकिन फिर भी बस उनकी आदत की वजह से राजा साहब हम दोनों को गले लगाए हुए हैं,,,।

(अभी यह सब दोनों बातें कर ही रहे थे कि तभी जल्दी-जल्दी राजा साहब उन दोनों के पास आए और कल्लु को धीरे से बोले,,,)

कल्लु तू खाना खाकर कहीं जाना नहीं तेरे लिए काम है,,।

जी राजा साहब कहीं नहीं जाऊंगा,,,,।

ठीक है अभी नौकर खाना लेकर आएगा तुम दोनों खाना खा लो और मेरा काम करने के बाद मन करे तो घर जाना वरना यही सो जाना,,।


ठीक है राजा साहब,,,,,।

(राजा साहब वापस चले गए और कल्लु सूरज के पिताजी से बोला)

इसलिए कहता हूं सोच समझ कर बोलना वरना सच में तु हुक्का पानी बंद करवा देगा,,,।

अरे यार इसमें क्या है मैं तो सच ही बोला था,,,।

चल अब रहने दे चल हाथ मुंह धो लेते हैं,,,।

(इतना कहकर वह दोनों हेड पंप की तरफ जाने लगे,,, और कल्लु अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

पता नहीं खाने में क्या होगा,,,लेकिन जो भी होगा स्वादिष्ट होता आखिरकार राजा साहब के घर का खाना है,,,।

मटन मुर्गा मिल जाता तो मजा आ जाता,,,।(सूरज के पिताजी भी सुर में सुर मिलाते हुए बोले,,,)

वह तो देखने पर ही पता चलेगा चल जल्दी से नल चला,,,।
(सूरज के पिताजी नल चलाने लगे और कल्लु हाथ में धोने लगा,,, और फिर से सूरज के पिताजी बोले,,,)

यार तेरे मन में राजा साहब की बीवी को देखकर कुछ-कुछ नहीं होता तु तो बहुत बार देखा होगा बहुत बार मिला होगा,,,।

तु फिर चालू हो गया,,,,मैं भी अच्छी तरह से जानता हूं कि राजा साहब की बीवी अप्सरा की तरह दिखती है पहली बार जब देखा था तो मेरे मन में भी बहुत कुछ होता था लेकिन इतना भी पता होना चाहिए कि वह किसकी बीवी है महारानी है महारानी और राजा साहब को जब पता चला कीउनकी बीवी को देखकर मन ही मन में मजा ले रहे हो तो काट कर फेंकवा देंगे पता भी नहीं चलेगा,,,। आइंदा से इस बारे में बात भी मत करना,,,।


चल ठीक है अब पानी चला मैं भी हाथ में धो लूं मेरा तो सारा नशा उतर गया राजा साहब की बीवी को देखकर,,,

फिर से तो शुरू हो गया,,,।

अच्छा नहीं बोलता यार तू नल तो चला,,,,।

(कल्लु नल चलाने लगा और सूरज के पिताजी हाथ में होने लगे उनका नशा सच में उतर चुका था राजा साहब की खूबसूरत बीवी को देखकर पल भर के लिए तो सूरज के पिताजी की आंखें चौंधिया गई थी,,, राजा साहब की बीवी वाकई में सर से लेकर पांव तक खूबसूरती के नशे में डूबी हुई थी,,, इसीलिए तो सूरज के पिताजी का नशा पूरी तरह से उतर चुका था,,, हाथ मुंह लेने के बाद दोनों वापस उसी जगह पर आ गए वहां पर लकड़े का तख्ता रखा हुआ था उसी पर दोनों बैठ गए और इंतजार करने लगे भोजन का,,, थोड़ी ही देर में एक नौकर आया उसके दोनों हाथों में थाली थी और जैसे ही वह थाली को दोनों के सामने रखा तो सूरज के पिताजी और कल थाली में देखकर प्रसन्न हो गए क्योंकि दोनों के लिए मुर्गा आया था,,,, सूरज के पिताजी तो एकदम खुश हो गए और एक बोतल कल्लु की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोले,,)

ले मार ले अब आएगा खाने का मजा,,,।

(कल्लु भी हाथ आगे बढ़ाकर बोतल को थाम लिया और ढक्कन खोलकर एक ही सांस में घट घट गया भले ही कल्लु कुछ बोल नहीं रहा था लेकिन उसके नजरों में भीराजा साहब की बीवी बसी हुई थी उसकी खूबसूरती उसका गदराया बदन पूरी तरह से उसके होश उड़ा देता था लेकिन वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर किसी को कानो कान खबर पड़ गया कि राजा साहब की बीवी पर गंदी नजर है तो बिल्कुल भी खैर नहीं होगी इसलिए कल्लु की हिम्मत नहीं होती थी राजा साहब की बीवी की तरफ नजर उठा कर देखने की,,,।

थोड़ी ही देर में दोनों खाना खा चुके थे और वहीं पर हाथ धोकर राजा साहब के आने का इंतजार कर रहे थे और थोड़ी ही देर में राजा साहबजल्दी-जल्दी दोनों की तरफ आने लगे सूरज के पिताजी देख कर समझ गए थे कि राजा साहब नजर बचाकर उन दोनों की तरफ आ रहे हैं,,,, राजा साहब को देखकर कल्लु और सूरज के पिताजी अपनी जगह से उठकर खड़े हो गए,,, और जैसे ही राजा साहबउन दोनों के करीब आए एक बार फिर से दोनों ने राजा को नमस्कार किया और राजा साहब कल्लु से बोले,,,।

तुम तो अच्छी तरह से जानते हो तो मैं क्या करना है,,, यही पास में ही आम का बगीचा होगा वहीं पर जाना गांव की एक औरत खड़ी होगी उसे लेकर जहां पर पहले औरतों को लेकर आते थे वहीं पर लेकर आ जाना मैं तुम्हारा वही इंतजार करूंगा,,, लेकिन वहां पहुंचने में मुझे थोड़ा समय लग जाएगा क्योंकि रानी साहिबा अभी तक जाग रही है,,, उनके सोने के बाद में तुरंत वहां आ जाऊंगा,,, हो जाएगा ना,,,।

बिल्कुल राजा साहब यह पहली बार थोड़ी है,,, जाओ जल्दी करो कहीं ऐसा ना हो कि डर के मारे वह औरत अपने घर चली जाए,,,।

ठीक है राजा साहब हम दोनों अभी जाते हैं,,,,(ऐसा कहकर दोनों चलने को हुए की तभी राजा साहब उन दोनों को रोकते हुए बोले,,,) रुको तुम तुम दोनों कुछ पैसे ले लो काम आएंगे,,,(इतना कहकर राजा साहबउन दोनों को कुछ रुपए दे दिए जिसे पाकर वह दोनों एकदम खुश हो गए और एक बार फिर सेनमस्कार करके वह दोनों राजा साहब के बताए पते पर पहुंच गए,,,.

वहां पर काफी अंधेरा था और सूरज के पिताजी को लग रहा था इतनी अंधेरे में भला गांव की कोई औरत कैसे आएगी वह तो डर के ही वापस चली जाएगी,,,, इसलिए वह कल्लु से बोले,,,।

यार मुझे नहीं लगता किआम के बगीचे में कोई औरत केले खड़ी होगी इंतजार करते हुए की कोई उसे लेने आएगा देख नहीं रहा है कितना दे रहा है अकेले में तो हम लोग ही डर जाए,,,।

अरे यार राजा साहब बोले हैं तो जरूर वह औरत आई होगी या तो आने वाली होगी रुक जा थोड़ी देर इंतजार करते हैं आखिरकार राजा साहब पैसे भी तो दिए हैं खाली हाथ जाएंगे तो ठीक नहीं लगेगा,,,।

बात तो तु ठीक कह रहा है,,, चल थोड़ा इंतजार कर लेते हैं अगर लालटेन लेकर आए होते तो और अच्छा होता,,,।

सही कह रहा है,,,, चल जाने दे थोड़ी देर इंतजार कर लेते हैं,,,।

(थोड़ी देर इंतजार करने के बाद दोनों को एक तरफ से पायल की आवाज सुनाई देने लगी और उसे आवाज को सुनकर सूरज के पिताजी बोले)

उस तरफ से लगता है कोई आ रहा है,,,।

हां यार पायल की आवाज तो सुनाई दे रही है लेकिन कोई दिखाई नहीं दे रहा है कौन है वहां,,,(जोर से कल्लु आवाज लगाता हुआ बोला,,,।

वाकई में गांव की औरत उसी तरफ से आ रही थी लेकिन कल्लु की आवाज सुनकर वह एकदम से डर गई उसे लगा कि कोई चोर उचक्का होगा इसलिए वह भी घबरा कर एकदम से रुक गई और एक पेड़ के पीछे छुप गई,,,कल्लु दो-तीन बार आवाज लगाया लेकिन अब तो पायल की आवाज भी आना एकदम से बंद हो गई थी,,, यह देखकर सूरज के पिताजी बोले।

यार सच में कोई था कि हम दोनों के कान बज रहे थे कहीं ऐसा ना हो कि कोई चुड़ैल हो,,,।

नहीं यार ऐसा कैसे हो सकता है पायल की आवाज तो एकदम साफ आ रही थी ऐसा लग रहा था कि कोई औरत उसी तरफ चलती चली आ रही है,,,। कुछ देर की खामोशी के बाद सूरज के पिताजी एकदम जोर से आवाज लगाते हुए बोले,,,।

हम दोनों को राजा साहब ने भेजा है,,,।

(इतना सुन कर वह औरत समझ गई की उसे ही लेने के लिए वह दोनों आए हैं इसलिए वह औरत पेड़ के पीछे से बाहर आई ऐर वहीं से आवाज लगाते हुए बोली,,,)

मुझे ही राजा साहब अपने वहां बुलाए हैं,..


ठीक है आ जाओ,,,,(सूरज के पिताजी जोर से आवाज लगाते हुए बोले,,, कुछ पल के लिए तो वह भी घबरा गए थे उन्हें लगा कि वाकई में कोई चुड़ैल होगी लेकिन उसकी आवाज सुनकर जान में जान आई थी थोड़ी देर में हुआ औरत चलते हुए उन दोनों के पास आ गई और बोली,,,)

चलो कहां चलना है,,,,।

राजा साहब की कोठी पर और कहां,,,?(सूरज के पिताजी बोले और उस औरत को साथ लेकर चलने लगे,,,)

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गरम गरम अपडेट आह मजा आ गया है, क्या राजा साहब की महारानी जी का भी कुछ कनेक्शन है इसमें ... ये तो वक्त आने पर ही पता चलेगा अभी तो कहानी को सूरज और रानी की और सूरज और उसकी मां को कैसे वो अपने जाल में फंसा कर शिकार करता है इस पर बहुत ज्यादा जिज्ञासा है , जल्दी अपडेट पोस्ट करो भाई कहानी की रफ्तार बहुत स्लो हो गई है, विनम्र निवेदन है।
 

Herry

Prince_Darkness
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rohnny4545

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गांव से आई हुई औरत उन दोनों के साथ में चलने लगी हालांकि चलते समय वह घुंघट से अपने चेहरे को छुपाने की पूरी कोशिश कर रही थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कोई उसे पहचाने इसलिए तो वह रात में आई थी,, और वैसे भी अंधेरा इतना घना था कि चाह कर भी उसका चेहरा देखा नहीं जा सकता था बस उसके चूड़ियों की खनक और पायलों की जनक की आवाज से उसके होने का अंदेशा हो रहा था, और वैसे भी चूड़ियों की खनक बता देती है औरतों की खूबसूरती,, चूड़ियों की खनक से मर्द की उत्तेजना बढ़ जाती है और इस समय सूरज के पिताजी के साथ भी ऐसा हो रहा था,,, सूरज के पिताजी उसे औरत का नाम गांव पूछने की बिल्कुल भी जेहमत नहीं कर रहे थे,, लेकिन कल्लु उसे औरत के बारे में जानने की मंशा जताते हुए उसे औरत से बोला,,,




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नाम क्या है तुम्हारा,,,?

जानकर क्या करोगे वैसे भी मैं नाम बताने वाली नहीं हूं,।

अगर नाम बता देगी तो तेरा कुछ बिगड़ जाएगा क्या,,,?

मैं राजा साहब से पहले ही बोल चुकी हूं कि मेरा नाम गांव और मेरे बारे में सारी बातें गुप्त होनी चाहिए तभी तो मैं यहां आने के लिए तैयार हूं और वैसे भी तुम दोनों जानते होंगे कि मैं यहां किस लिए आई हूं राजा साहब ने मुझे इतनी रात को क्यों बुलाया है,।

इसमें कोई शक नहीं है हम लोगों का काम ही यही है राजा साहब के इशारे पर गांव की खूबसूरत औरतों को उनके पास ले जाना,,,,(कल्लू मुस्कुराता हुआ बोला और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बोला,,,) लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आता कि तुम्हारे बारे में किसी ने बताया था या राजा साहब खुद तुमसे मिले थे,,,।





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यह सब जानकर क्या करोगे,,,,(उसे औरत ने सीधा और सपाट उत्तर दिया यह सुनकर सूरज के पिताजी बोले)

जाने दे यार क्यों परेशान कर रहा है अगर वह अपने बारे में कुछ नहीं बताना चाहती तो क्यों उससे पूछ कर अपना ही दिमाग खराब कर रहा है उसकी कोई मजबूरी होगी,,,, तभी तो हुआ इतनी रात को राजा साहब के पास जाने के लिए तैयार हुई है अब ज्यादा परेशान मत कर,,,,।


देखा तुमसे ज्यादा समझदार तो यह है,,, अपने काम से काम रखते हैं,,,,।

चल रहने दे अब ज्यादा उड़ मत थोड़ी देर में राजा साहब तेरा कबूतर उड़ा देंगे,,,,(बेशर्मी से बेशर्मी भरी बातें करके कल्लू हंसने लगा,,, उस औरत के पास कल्लू की बदतमीजी का कोई जवाब नहीं था,,, क्योंकि वह काम ही कुछ ऐसा करने जा रही थी अब वह मजबूरी में करने जा रही थी आप किसी शौक से या किसी दबाव में आकर यह तो वही जानती थी लेकिन अपने इस कार्य के लिए वह सफाई नहीं दे सकती थी इतना तोता इसलिए वह कुछ बोली नहीं बस चुपचाप चलती रही,,,, थोड़ी ही देर में तीनों राजा साहब की कोठी पर पहुंच चुके थे लेकिन कहां पर लेकर जाना है उसे औरत को यह सूरज के पिताजी को नहीं मालूम था इसलिए वह खड़ा होकरबोला,,,।



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आप कहां ले जाना है कल्लु,,,।

यहां नहीं जाना है कोठी के पीछे जाना पड़ेगा वही राजा साहब औरतों की चुदाई करते हैं,,,(कल्लु जानबूझकर चुदाई शब्द का प्रयोग कर रहा था,,,, उसे औरत को उसकी बात पर गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी और वैसे भी वह राजा साहब के साथ हम बिस्तर होने के लिए बड़ी मजबूरी में आई थी,,, उसे पैसों की जरूरत थी और उसके पास पैसे नहीं थे पति शराबी था वह बिल्कुल भी कमाता नहीं था,,,, उस औरत के ऊपर उधारी भी हो चुकी थी और उसकी जमीन भी गिरवी पड़ी थी जिसके चलते उसे इस कार्य को करने के लिए अपने मन को मनाना पड़ा वरना वह इस तरह का काम करने के लिए कभी तैयार नहीं थी और वैसे भी उधारी की रकम को ज्यादा नहीं थी इसीलिए तो राजा साहब तैयार हो गया था उसे रकम देने के लिए अगर ज्यादा रकम होती तो इस काम के लिए वह कभी इतना ज्यादा रकम नहीं देता,,, कल्लू की बात सुनकर सूरज के पिताजी बोले,)




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तू आगे आगे चल,,, हम तेरे पीछे चलते हैं क्योंकि मुझे नहीं मालूम कि कहां जाना है,,,।

ठीक है,,(और इतना कहकर वह आगे आगे चलने लगा सूरज के पिताजी उस औरत के साथ पीछे-पीछे चलने लगे सूरज के पिताजी को इतना तो समझ में आ रहा था कि एक माना जाना जमीदार पैसे वाला इस कार्य के लिए अपनी बीवी की मौजूदगी में अपने कोठी का उपयोग तो बिल्कुल भी नहीं करेगा वैसे सूरज के पिताजी को इतना तो मालूम था कि इस तरह की अय्याशी करने के लिए गांव के बाहर एक गोदाम था जिसमें अब वह खुद कल्लु के साथ मिलकर अय्याशी किया करता था,,, लेकिन इस समय उस गोदाम का उपयोग होने वाला नहीं था अगर ऐसा होता तो कल उसे औरत को उस गोदाम पर ही लेकर जाता यहां कोठी पर लेकर नहीं आता,,,,, तीनों चलते हुए कोठी के पीछे के मकान में पहुंच चुके थे जो की ईंधन रखने के काम में आता था और पशुओं के लिए घास जा रहा है रखे जाने के लिए उपयोग में लिया जाता था,,, इस जगह पर राजा साहब दूसरी औरतों के साथ अय्याशी करते होंगे इस बारे में तो महारानी को भी भनक तक नहीं होगी,, यह राज राजा साहब के कुछ खास लोग ही जानते थे जिनमें से कल्लु एक था और अब सूरज के पिताजी भी उनमें से एक बन चुके थे,,।



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थोड़ी ही देर में तीनों कोठी के पीछे वाले मकान पर पहुंच चुके थे लेकिन अभी तक जहां पर राजा साहब का कोई पता ठिकाना नहीं था,,,, यह देखकर कल्लु बोला,,,।

यार अभी तक राजा साहब नहीं आए काफी देर हो गई है मुझे तो लगा आ गए होंगे,,,।

समय तो लगेगा ही आखिरकार बिस्तर पर जवानी से भरी हुई महारानी जो है उसकी प्यास बुझाने में समय तो लगता ही होगा,,,(सूरज के पिताजी मुस्कुराते हुए बोले तो उसकी बातें सुनकर कल्लु फिर से इधर-उधर देखने लगा और बोला,,,)

यार फिर से तो शुरू हो गया तू सच में मरवाएगा तुझे कितनी बार बोला हूं कि इस बारे में बिल्कुल भी बात मत किया कर,।




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आप क्या करूं यार महारानी है इतनी खूबसूरत क्यों उसे देखा हूं तब से मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया है मुझे तो समझ में नहीं आता की मर्द की जात क्या होती है अप्सरा जैसी औरत बिस्तर पर होने के बावजूद भी हुआ है दूसरी औरतों के साथ मजा लूटने के लिए पागल हुआ जा रहा है,,,।

अरे बुद्धू मैंने कुछ देर पहले ही तेरा ही उदाहरण दिया हूं ना तेरी बीवी भी तो अप्सरा से काम नहीं है लेकिन तू बाहर मुंह मारता है कि नहीं,,,।

छोड़ यार महारानी जैसी खूबसूरत नहीं है,,,।

अरे बेवकूफ तभी तो वह महारानी है और तेरी बीवी गांव की रानी है,,,। अब इन सब के बारे में छोड़ काफी देर हो रही है,,, कहीं ईस औरत को नींद आ गई तो राजा साहब का मजा किरकिरा हो जाएगा और लंड खड़ा का खड़ा रह जाएगा,,,।
(इतना कहकर फिर से हुआ हंसने लगा और वह औरत उसकी बात पर फिर से गुस्सा होने लगे लेकिन कुछ बोल नहीं पाई और अपने मन में सोच की राजा साहब तो क्या एक साथ तुम तीनों की प्यास बुझाने के लिए मैं काफी हूं और वैसे भी उसका यह बात अपने मन में सोचना लाजमी था क्योंकि वाकई में वह भी भला की खूबसूरत थी घूंघट में होने के बावजूद भी उसकी बनावट लालटेन की पीली रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रही थी और वह लालटेन घर के पीछे वाले मकान के बाहर ही टंगी हुई थी और जल रही थी,, सूरज के पिताजी लालटेन की पीली रोशनी में तिरछी नजरों से उसे औरत को भी देख ले रहे थे और सूरज के पिताजी का इस तरह से उसे औरत को देखने का मतलब साफ था कि उसे औरतों में भी आकर्षक और जवानी कुट-कूट कर भरी हुई थी,,,, अगर यह राजा साहब के लिए तोहफा ना होता तो इस तोहफे का पूरा उपयोग वह खुद कर लेता,,,, लेकिन वह मजबूर था क्योंकि उसका मन भी बेहद उत्तेजित था,,,,।




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थोड़ी देर बाद और खड़े रहने के बाद राजा साहब छुपाते छुपाते हुए उसे तरफ आते हुए दिखाई दिए उन्हें देखकर सूरज के पिताजी बोले,,,)

वह देखो राजा साहब आ गए,,,,।
(सूरज के पिताजी की बात सुनकर वह औरत और कल्लु दोनों उस दिशा में देखने लगे,,, सूरज के पिताजी और कल तो राजा साहब को देखकर सहज थे लेकिन उस औरत के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी,,, क्योंकि उसके जीवन का यह पहला क्षण था जब वह किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाने जा रही थी और वह भी बड़ी मजबूरी में अगर उसकी मजबूरी ना होती तो शायद वह इस तरह के कम कभी ना उठाती इसलिए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था थोड़ी ही देर में राजा साहब उन तीनों के करीब आ गए और उसे औरत को देखकर मुस्कुराते हुए बोले,,,)





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अरे रानी अब घूंघट की क्या जरूरत है घूंघट उठा दो,,,।

माफी चाहती हूं राजा साहब लेकिन मे यह घूंघट सिर्फ आपके ही सामने उठाऊंगी,,,।

ओहहहहह ,,,, लाज शर्म,,,,, मुझे तुम्हारा यह अंदाज बहुत अच्छा लगा और वैसे भी लाज शर्म वाली औरत को छोड़ने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है,,,,,(राजा साहब एकदम उत्साहित होते हुए बोले लेकिन उनके द्वारा कहां गया यह शब्द उसे औरत के दिल पर हथौड़े की तरह चल रहा था,,,, अगर उसकी मजबूरी ना होती तो वह राजा साहब को भी लात मार कर चली गई होती लेकिन वह कुछ कर नहीं सकती थी और राजा साहब ने भी उसकी इस मर्यादा की लाज को रखते हुए बोले)

कोई बात नहीं जैसी तुम्हारी मर्जी,,,, थोड़ी देर बाद ही तुम्हारे बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं होगा घूंघट तो दूर की बात है तब मैं तुम्हारी खूबसूरत चेहरे को तुम्हारे चेहरे के हाव-भाव को देखता हुआ मजा लूटुंगा,,,, अब तुम दोनों जा सकते हो,,,,,।






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ठीक है मालिक लेकिन इस औरत को छोड़ने जाना पड़ेगा,,,,(कल्लु दोनों हाथ जोड़े हुए राजा साहब से बोला,,,)

नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ेगी मैं इसके साथ ज्यादा समय बिताऊंगा और सुबह होने से पहले यह खुद अपने घर चली जाएगी क्यों चली तो जाओगी ना या इन लोगों को तुम्हारे साथ भेजना होगा,,,।

जी नहीं राजा साहब में चली जाऊंगी,,,,।

ठीक है अब तुम दोनों जाओ अगर घर जाना हो तो घर चले जाना वरना वही सो जाना,,,,

ठीक है मालिक,,,,(इतना कहकर कल्लु और सूरज के पिताजी दोनों वहां से चलते बने अब घर जाने का कोई मतलब नहीं था इसलिए उन दोनों ने वही तख्ते पर सोने का फैसला किया था,,,, राजा साहब उसे औरत का हाथ पकड़ कर मकान के अंदर ले जाने लगे और बाहर जल रही लालटेन को अपने हाथ में लेकर कमरे में प्रवेश कर गए जहां पर चारों तरफ ईंधन और घास फूस रखा हुआ था,,, वह औरत शर्म से पिघलती चली जा रही थी,,,।





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दूसरी तरफ तख्ते पर लेटे हुए दोनों कुछ देर तक इधर-उधर की बातें करते रहे और थोड़ी देर बाद कल्लु गहरी नींद में सो गया और उसके सो जाने का ही इंतजार सूरज के पिताजी कर रही थी क्योंकि सूरज के पिताजी के मन में कुछ और चल रहा था वह उठकर बैठ गई और जब देखे की कल्लु गहरी नींद में सो रहा है तो वह धीरे से तख्ते पर से उठकर खड़े हो गए और दबे पांव कोठी की तरफ आगे बढ़ने लगे,,,, सूरज के पिताजी के मन में बहुत कुछ चल रहा था,,, आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,,, सिर्फ कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी और कोठी के अंदर नौकर नौकरानी भी गहरी नींद में सो रहे थे।

इधर-उधर देखते हुए सबसे नजर बचाते हुए यह तसल्ली कर लेने के बाद कोई उसे देख तो नहीं रहा है वह धीरे से कोठी के अंदर प्रवेश करने लगे कोठी का दरवाजा सिर्फ बंद किया हुआ था उसकी कड़ी खुली हुई थी यह देखकर सूरज के पिताजी का दिल झूम उठा और वह धीरे से कोठी के अंदर प्रवेश कर गए कोठी के अंदर प्रवेश करते ही वह चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगे वाकई में बेहद आलीशान कोठी बनी हुई थी कोठी में बहुत ही बेस्ट कीमती सजावट के सामान रखे हुए थे जिसे कोठी की सुंदरता और ज्यादा बढ़ गई थी,,,।





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जगह-जगह पर रोशनी के लिए रोशनदान बने हुए थे कोटी के बीचो-बीच से सीढ़ी ऊपर की तरफ जाती थी इतना तो सूरज के पिताजी को मालूम था कि अब उसे क्या करना है वह धीरे से सीढ़ियां चढ़ने लगी जैसे-जैसे सीढ़ियां चढ़ रहे थे वैसे-वैसे उनके दिल की धड़कन भी बढ़ती जा रही थी उन्हें मालूम नहीं था कि वह क्या करने जा रहे हैं लेकिन अपने मन पर वह काबू नहीं कर पाए थे जिसके चलते उन्हें न चाहते हुए भी यह कदम उठाना पड़ रहा था,,, धीरे-धीरे करके सूरज के पिताजी सारी सीढ़ियां चढ़कर दूसरे मंजिले पर पहुंच चुके थे,,, दूसरे मंजिले पर भी सजावट की बहुत अच्छी व्यवस्था थी चारों तरफ कीमती सजावट का सामान रखे हुए थे,,, और यह देखकर सूरज के पिताजी अपने मन में सोचने लगे कि राजा साहब के आगे तो मुखिया कुछ भी नहीं है राजा साहब के आगे मुखिया को एक नौकर ही लगेगा,,,, मुखिया की याद आते हैं सूरज के पिताजी के मन में मुखिया की बीवी का चेहरा नजर आने लगा,,,, और मुखिया की बीवी के चेहरे के बाद राजा साहब की बीवी का चेहरा नजर आने लगा,,,।





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मुखिया की गुलामी वह कर चुका था और अब बारी थी राजा साहब की,,, लेकिन दोनों की गुलामी में अंतर यह था कि वह मुखिया की बीवी की रोज चुदाई करता था गुलामी के साथ-साथ मुखिया की बीवी का मजा भी रोज लेता था लेकिन अभी राजा साहब की गुलामी का यह पहला दिन था और सूरज के पिताजी अपने मन में यही सोच रहे थे कि काशी यहां भी मुखिया की बीवी की तरह राजा साहब की बीवी भी चोदने के लिए मिल जाए तो उसे अच्छी किस्मत वाला दुनिया में कोई नहीं होगा,,,, यही सब सोचते हुए सूरज के पिताजी एक तरफ धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे जहां पर ढेर सारे कमरे थे धीरे-धीरे सभी कैमरे के आगे से सूरज के पिताजी गुजरते चले जा रहे थे और जाते-जाते हर एक कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश करते थे लेकिन सभी दरवाजे बंद थे।




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लेकिन तभी सूरज के पिताजी एक कमरे के पास पहुंच गए दरवाजा तो बंद था लेकिन उसकी खिड़की खुली हुई थी और खुली हुई खिड़की को देखकर सूरज के पिताजी का दिल जोरो से धड़कने लगा और वह समय धीरे-धीरे चलते हुए बस खुली हुई खिड़की के करीब पहुंच गए और उसे खिड़की से अंदर देखने की कोशिश करने लगे अंदर रोशनदान से रोशनी किया हुआ था और उसे पीली रोशनी में पहले तो सूरज के पिताजी को कुछ दिखाई नहीं दिया लेकिन थोड़ी कोशिश करने के बाद खिड़की से अंदर कमरे का दृश्य धीरे-धीरे साफ होने लगा और दृश्य साफ होने के बाद जो नजर सूरज के पिताजी को दिखाई दिया उसे देखकर उनका दिल जोरो से धड़कने लगा।





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वह नजारा था ही कुछ ऐसा कि अगर सूरज के पिताजी की जगह दुनिया का कोई भी मर्द होता तो उसका भी दिल जोरो से धड़कने लगता और उसका मन बेकाबू हो जाता,,,, सूरज के पिताजी ने अपनी आंखों से बहुत देख लिया जिसकी देखने की तमन्ना दिल में लिए वह इतना बड़ा खतरा मोड लेकर राजा साहब की कोठी में दाखिल हुए थे आखिरकार उनके मन का नजारा उनकी आंखों के सामने था सामने बिस्तर पर राजा साहब की बीवी मतलब महारानी एकदम नंगी पेट के बल लेटी हुई थी और उनकी बड़ी-बड़ी उबारी हुई गांड नरम नरम गद्दे पर भी एकदम बराबर नजर आ रही थी,,,, महारानी को एकदम नग्नअवस्था में देख कर और महारानी की बड़ी-बड़ी बाहर देखकर सूरज के पिताजी के अंदर वासना का शैतान जागने लगा जो की पूरी तरह से सूरज के पिताजी को अपनी गिरफत में ले चुका था,,,।





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राजा साहब की बीवी का आकर्षण सूरज के पिताजी के मन में इस तरह से बढ़ गया था कि उसे देखने की चाह में वह इतना बड़ा कदम उठा चुके थे जो कि खतरे से खाली नहीं था अगर किसी की भी नजर पड़ जाती तो इसके बदले में सूरज के पिताजी की जान जानी तय थी,, लेकिन ऐसा लग रहा था कि अपने मन की इच्छा पूरी करने के लिए सूरज के पिताजी को इस खतरे को उठाना ही इस समय जरूरी हो गया था कुछ देर तक वह खिड़की से खड़े होकर दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत को नंगी लेटे हुए देख रहे थे वह पूरी तरह से नींद की आगोश में थी,,,, वह गहरी नींद में होने के कारण गहरी गहरी सांस ले रही थी जिसकी वजह से उसके बदन में एक अद्भुत कामुक हलचल भी हो रही थी उसे कामुक हलचल के चलते उसके भारी भरकम नितंब भी ऊपर नीचे हो रहे थे जिसे देखकर सूरज के पिताजी का ईमान पूरी तरह से डगमगा गया था।



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राजा साहब की बीवी को नंगी बिस्तर पर सोते हुए देख कर सूरज के पिताजी अपने मन में अनुमान लगाने वालों की राजा साहब इसकी जमकर चुदाई करने के बाद ही उसे औरत के पास गए हैं तभी तो यह है बिना कपड़ों के सो रही है एकदम नंगी होकर इसकी प्यास बुझाने के बाद ही राजा साहब अपनी प्यास बुझाने के लिए सूरज के पास गए और सुबह तक वापस लौटकर आने वाले नहीं है,,, यह सब सोते हुए सूरज के पिताजी का दिमाग बड़ी तेजी से चलने लगा वह अपने मन में सोचने लगे कि अगर राजा साहब अपनी बीवी को बिना बताए कमरे से बाहर गए हैं तो कमरे का दरवाजा खुला ही होगा भले ही बाहर से बंद है लेकिन उसकी कड़ी नहीं लगी होगी,,,, इस बारे में ख्याल आते ही सूरज के पिताजी का दिल जोरो से धड़कने लगा और उनके चेहरे पर कामुक मुस्कान देने लगी,,,, जागने से पहले वह कुछ सोच नहीं थे कि यहां पर आने के बाद उन्हें क्या करना है लेकिन जो ख्याल उनके मन में आ रहा था वह बेहद खतरनाक था अगर पकड़े गए तो और अगर पकडे नहीं गए तो स्वर्ग का सुख बस उनसे तीन-चार मीटर की दूरी पर ही बिस्तर पर लेटी हुई थी।








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ऐसे में सूरज के पिताजी का दिमाग बड़ी तेजी से काम करता था वह तुरंत दरवाजे के पास आए और उसे खोलने की कोशिश करने लगे और पहले ही कोशिश में दरवाजा हल्का सा शोर करता हुआ खुल गया यह देखकर सूरज के पिताजी का दिल जोरो से धड़कने लगा हुआ पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूबने के लिए अपने आप को तैयार करने लगे उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि अगर पकड़े गए तो क्या होगा लेकिन इस बात का एहसास जरूर था कि अगर इस महारानी के साथ शरीर सुख प्राप्त कर लिया तो दुनिया का कोई सुख इसके आगे कोई मायने नहीं रखना इस बात का एहसास सूरज के पिताजी को हो गया था। और यही सोच कर वह धीरे से कमरे में प्रवेश कर गए और उसी तरह से दरवाजे को बंद कर दिए लेकिन कड़ी लगाना बिल्कुल भी नहीं भूले क्योंकि हो सकता है कि कोई आ जाए और दरवाजा खुला हो तो बना बनाया काम बिगड़ जाए।





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कमरे के अंदर रोशनी बरकरार थी दो रोशन दान जगमगा रहे थे,,, उसे रोशनी में वह जी भरकर महारानी के नंगे बदन का दर्शन कर लेना चाहते थे क्योंकि आगे क्या करना है वह अच्छी तरह से जानते थे जी भरकर महारानी के नंगे बदन को देख लेने के बाद उसके बदन की बनावट को देख लेने के बाद जो कि वाकई में बेहद गजब की बनावट थी बदन में हर कटाव बड़े सोच समझ कर बना हुआ था और वह भी इस बदन के बनावट को दुनिया का कोई भी मर्द देख ले तो शायद बिना संभोग किए हुए उसका पानी निकल जाए उसे तो राजा साहब पर तरस आ रहा था कि इतनी खूबसूरत औरत को छोड़कर वह बेवजह गांव की दूसरी औरतों के पीछे पागल बना है,,,, सूरज के पिताजी का दिल जोर से धड़क रहा था और पजामे में तंबू पूरी तरह से बन चुका था,, जिसे हाथ से दबे हुए वाहन धीरे से जाकर महारानी के बिस्तर पर बैठ गए महारानी के बिस्तर पर बैठना भी सूरज के पिताजी के लिए किसी राजा की किस्मत से काम नहीं था इस समय वह अपने आप को राजा ही समझ रहे थे क्योंकि वह महारानी के बिस्तर पर बैठे हुए थे और उस बिस्तर पर महारानी अपने पूरे कपड़े उतार कर एकदम नंगी लेटी हुई थी,,,,।




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पीली रोशनी में सूरज के पिताजी को सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था और यह भी दिखाई दे रहा था की महारानी के बुरे से निकलने वाला मदन रस उनकी जांघो तक बहा हुआ था,,, उस मदन रस को देख कर तो सूरज के पिताजी की हालत एकदम खराब होने लगी उनकी आंखों में वासना का तूफान उठने लगा वह पागल होने लगे वह एक औरत को काबू करना अच्छी तरह से जानते थे वह कुछ देर बिस्तर पर बैठकर नंगी लेटी हुई महारानी को देखते हुए आगे क्या होगा और अगर पकड़े गए तो क्या होगा इसके बारे में सोते हुए आगे की प्रक्रिया के बारे में सोच रहे थे उन्हें अच्छी तरह से मालूम था कि एक औरत को काबू में कैसे किया जाता है एक औरत को किस तरह से आनंद के सागर में डुबाया जाता है। सूरज के पिताजी को अच्छी तरह से मालूम था कि ऐसे में अगर वह कुछ भी बोलेंगे तो महारानी को समझते देर नहीं लगेगी कि उनके बिस्तर पर महाराज नहीं बल्कि कोई और है इसलिए बहुत सोच समझकर कदम उठाना था और इन सब के बारे में शायद सूरज के पिताजी बहुत अच्छे से सोच चुके थे,,,।





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इसलिए धीरे से महारानी के बिस्तर पर से उठकर खड़े हो गए,,, सूरज के पिताजी को अच्छी तरह से मालूम था कि अब जो कुछ भी करना है पूरी तरह से अंधेरे में ही करना है अगर जरा भी उजाला हुआ तो पकड़े जाने की गुंजाइश पूरी तरह से बढ़ जाएगी इसलिए वह धीरे से रोशनदान के पास पहुंचे और फूंक मार के रोशनी को बंद कर दिए और यही वह दूसरी रोशनदान के पास के और वह पर भी फूंक मार कर रोशनी को बंद कर दिया कमरे में पूरी तरह से अंधेरा जा चुका था और महारानी एक बार चुदवाने के बाद घोड़े बेचकर सो रहे थे,,,, सूरज के पिताजी जानते थे की औरत भले ही कितनी गहरी नींद में हो अगर उसके कोमल अंग पर हाथ रख दे तो तुरंत उसकी नींद खुल जाती है और ऐसा होना यहां पर भी मुमकिन था और इसके लिए अंधेरा करना बेहद जरूरी था और बेहद उत्तेजनात्मक स्थिति में भी खामोश रहना भी बहुत जरूरी था,,,।





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कमरे में पूरा अंधेरा करने के बाद सूरज के पिताजी धीरे से बिस्तर के पास पहुंचे और वैसे भी अब अपने हाथों से महसूस करके महारानी की जवानी का आनंद लूटना था और बिस्तर पर बैठकर हल्के सेवा अपने हथेली महारानी की उभरी हुई मदमस्त कर देने वाली जवानी से भरी हुई गांड पर रख दिए,, हथेली गांड पर रखते ही सूरज के पिताजी के बदन में उत्तेजना का तूफान उठने लगा उन्हें एहसास होने लगा कि वाकई में महाराज की महारानी कितनी गर्म औरत है उसकी गांड की गर्मी सूरज के पिताजी अपनी हथेली में महसूस कर रहे थे,,, और हल्के हल्के उसे सहला रही थी वाकई में इस समय महारानी की गांड रुई से भी ज्यादा मुलायम और नरम महसूस हो रही थी,,,, महारानी की गांड को सहलाने में सूरज के पिताजी को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उन्हें बहुत मजा आ रहा था पर निश्चित थे क्योंकि जानते थे कि महाराज इतनी जल्दी आने वाले नहीं है,,,,।






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गांड को सहलाते हुए सूरज के पिताजी पजामे के ऊपर से अपने लंड को भी दबा रहे थे क्योंकि वह बेकाबू हुआ जा रहा था,,,, देखते ही देखते हथेली का दबाव महारानी के नितंबों पर बढ़ने लगा और इसकी वजह से महारानी के बदन में कसमाशाहट भी महसूस होने लगी और जैसे ही सूरज के पिताजी अपने हथेली को अपनी उंगलियों को गांड के बीचों बीच की पतली दरार में प्रवेश करने लगे वैसे ही महारानी के बदन में कसमसाहट बढ़ने लगी,,,, और वह धीरे से अपनी जांघों को हल्का सा खोल दी सूरज के पिताजी यही चाहते ही थे,,,, देखते ही देखते सूरज के पिताजी की उंगलिया महारानी के बदन के सबसे बेशकीमती खजाने पर पहुंच चुकी थी,, महारानी की बुर पर उंगली का स्पर्श होते ही सुरज के पिताजी की हालत एकदम से खराब होने लगी उम्मीद से कहीं ज्यादा तपन महारानी की बुर में महसूस हो रहा,, सूरज के पिताजी की हालत खराब होने लगी उनसे रहा नहीं जा रहा था वह महारानी की बुर को अपनी हथेली में दबोच लेना चाहते थे,,,, लेकिन ऐसा तुरंत करने पर महारानी की नींद एकदम से टूट सकती थी,,,, और ऐसे में बना बनाया काम भी कर सकता था और सूरज के पिताजी ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहते थे वह पूरी तरह से नींद में होने के बावजूद भी महारानी को गर्म कर देना चाहते थे।




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और ऐसा ही हुआ यहां पर सूरज के पिताजी का अनुभव बहुत काम आ रहा था वह अपनी उंगलियों से ही महारानी की बुर को कुरेद रहे थे,,,, जिससे महारानी के बदन में उत्तेजना का एहसास हो रहा था भले ही वह गहरी नींद में थी लेकिन फिर भी उसे बहुत मजा आ रहा था ऐसा करते हुए एक हाथ से सूरज के पिताजी अपनी कमीज उतार कर एक तरफ रख दिए थे,,,,,,, धीरे-धीरे उत्तेजना का एहसास महारानी के बदन में बढ़ता जा रहा था वह मदहोश हुए जा रही थी,,,,, और देखते ही देखते सूरज के पिताजी महारानी की बुर में अपनी बीच वाली उंगली को अंदर प्रवेश कर कर उसे अंदर बाहर कर रहे थे ऐसे में महारानी का मजा बढ़ता जा रहा था अब वह धीरे-धीरे नींद से बाहर आ रही थी,,,, क्योंकि महारानी के मुंह से हल्की-हल्की अब सरकारी की आवाज आ रही थी और यही तो सूरज के पिताजी चाहते थे वह समझ गए थे कि उनकी हरकत का महारानी और पूरी तरह से मजा ले रही थी,,,।




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लेकिन अभी भी वह हल्की नींद में थी और पूरी तरह से नींद से बाहर लाने के लिए अभी भी सूरज के पिताजी को काफी मशक्कत करना था वह अपनी हथेली को महारानी की नंगी चिकनी पीठ पर रखकर उसे हल्के से सहलाते हुए अपनी बीच वाली उंगली को लगातार महारानी की बुर के अंदर बाहर कर रहे थे इस तरह से सूरज के पिताजी को भी मजा आ रहा था और महारानी भी आनंद के सागर में डूबती चली जा रही थी और देखते ही देखते सूरज के पिताजी अपनी दूसरी उंगली को भी उसकी बुर की गहराई में उतार कर अंदर बाहर करने लगे थे वह काफी चिपचिपी हो चुकी थी,,,, अब महारानी आनंद के सागर में गोते लगाने के लिए तैयार होती जा रही थी क्योंकि वह पूरी तरह से नींद से जाग चुकी थी लेकिन अपनी आंखों को अभी भी बंद किए हुए थे क्योंकि सूरज के पिताजी की उंगलियां उसके बदन में मदहोशी का रस घोल रही थी जिससे वह अपनी आंखों को खोल नहीं पा रही थी,,,,।




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सूरज के पिताजी लगातार अपनी उंगलियों को उसकी बुर के अंदर बाहर कर रहे थे वह पागल हुए जा रही थी और उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसके मुख से निकल रही शिसकारी की आवाज को सुनकर सूरज के पिताजी की हिम्मत बढ़ती जा रही थी,,,, और अगले ही पर सूरज के पिताजी अपने प्यासे होठों को उसकी गांड की दरार के बीचों बीच रखकर ऊपर से ही उसे पर चुम्मा लेने लगे,,,, जैसे ही महारानी को एहसास हुआ कि उनकी गांड के उपर होठ का स्पर्श हो रहा है,, वह और भी ज्यादा बावली होने लगी। महारानी का बदन कसमसाने लगा,,, वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को कसमाशाहट भरी हलनचलन करवा रही थी,,, यह उत्तेजना का असर था सूरज के पिताजी समझ गए थे की महारानी को मजा आ रहा है,,, बस यही वह चाहते थे की महारानी बिस्तर पर लेटे-लेटे बस गरमा गरम शिसकारी लेते रहे गरम आहे भरते रहे बस बोले कुछ नहीं,,,,,, कमरे में राजा साहब की बीवी की मदहोश कर देने वाली शिसकारी की आवाज गुंजने लगी थी,, सूरज के पिताजी उसकी किसी कार्य की आवाज सुनकर मदहोश हुए जा रहे थे अत्यधिक उत्तेजना का अहसास उन्हें होने लगा था क्योंकि इस तरह की गरमा गरम सिसकारी की आवाज अभी तक वह किसी भी औरत के मुंह से नहीं सुन पाए थे राजा साहब की बीवी की बात ही कुछ और थी,,।




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अभी तक सूरज के पिताजी नितंबों के ऊपर ऊपर ही चुंबन कर रहे थे अभी तो निचले स्थान पर जाना बाकी था जहां पर जीवन का असली सुख छुपा हुआ था संभोग का केंद्र बिंदु था,,, जब सूरज के पिताजी को लगने लगा कि राजा साहब की बीवी के बदन में कम से हाथ बढ़ने लगी थी ऐसे में वह कुछ भी बोल सकती थी तो वह धीरे-धीरे अपने होठों को नीचे की तरफ ले जाने लगे,,,, अब सूरज के पिताजी को लगने लगा था कि वाकई में राजा साहब की बीवी की गांड को ज्यादा ही बड़ी-बड़ी है क्योंकि उसका उठाओ कुछ ज्यादा ही था और नीचे अपने होंठ को ले जाते समय ऐसा लग रहा था कि जैसे वह किसी खाई में अपने होठों को ले जा रहे हैं,,,, महारानी की हालत खराब है जा रही थी आंखें मदहोशी में पूरी तरह से बंद थी,, इसलिए महारानी को एहसास ही नहीं हो रहा था कि कमरे में रोशनी है या नहीं अगर वह आंख खोल भी देती तो पता नहीं चलता कि उनके बिस्तर पर कौन है वह तो अभी तक राजा साहब को ही समझ रही थी,,,।



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और वैसे भी महारानी के पास शंका करने की कोई वजह नहीं थी क्योंकि वह राजा साहब को अच्छी तरह से जानती थी उनके कक्ष में किसी गैर मर्द का प्रवेश करना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन था यही सब वजह थी की महारानी को शंका करने की कोई वजह नहीं मिली थी कि एक बार चुदाई करने के बाद भी दूसरी बार उसके महाराज उसके साथ हम बिस्तर होने के लिए कैसे तैयार हो गए वैसे यह वर्षों के बाद हुआ था इसीलिए रानी पूरी तरह से उत्तेजित और बेहद खुश नजर आ रही थी वह पूरी तरह से नींद से बाहर आ चुकी थी लेकिन आंख खोलने में बिल्कुल भी समर्थ नहीं थी,,,, सूरज के पिताजी अपना पूरा अनुभव जो झोंक दे रहे थे। गहरी गहरी सांसों के साथ-साथ महारानी के गोलाकार नितंब भी ऊपर नीचे हो रहे थे और सूरज के पिताजी धीरे-धीरे उसकी दोनों जांघों के बीच अपने मुंह को लेते चले जा रहे थे जैसे-जैसे वह महारानी की गुलाबी छेद के करीब पहुंच रहे थे वैसे-वैसे उसमें से मादक खुशबू सूरज के पिताजी के नथुनों में प्रवेश कर रही थी और वह खुशबू उन्हें एकदम बावला बना रही थी उन्हें इस बात का एहसास था कि कुछ देर पहले राजा इसी बुर में अपने लंड को डालकर चुदाई किया था महारानी के बदन रस के साथ-साथ राजा के लंड से निकला पानी में उसमें मिश्रित होगा लेकिन अब यह सब जानकर भी सूरज के पिताजी को पीछे कम लेना भारी पड़ सकता था और इस बात को जानते हुए वह ऐसी गलती कभी नहीं करना चाहते थे और वैसे भी रानी की मदमस्त कर देने वाली जवानी की मदहोशी में वह पूरी तरह से डूब चुके थे इसलिए अब कोई फर्क नहीं पड़ता था कि कुछ देर पहले रानी की बुर में किसका लंड घुसा हुआ था,,,,।





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ओहहहहह मेरे राजा यह क्या हो गया है तुमको,,,,(ऐसा कहते हुए महारानी अपने एक हाथ को पीछे की तरफ लाते हुए सूरज के पिताजी के मजबूत कंधों पर रख दी,,, महारानी के मुंह से निकला यह शब्द सूरज के पिताजी की उत्तेजना को तो बड़ा ही रहा था लेकिन उनके किए कराए पर पानी भी फेर सकता था रानी की बोलती बंद करने का अब एक ही रास्ता था जो की सूरज के पिताजी के होठों के ठीक सामने था सूरज के पिताजी जानते थे की औरत की बोलती कि वक्त बंद हो जाती है अगर वह इस समय उसे युक्ति को नहीं आजमाएंगे तो महारानी बात करना शुरू कर देगी और ऐसे में सूरज के पिताजी का भांडा फूट सकता है,,,, इसलिए सूरज के पिताजी बिल्कुल भी तेरी नहीं करना चाहते थे और ना ही कोई गलती करना चाहते थे बहुत तुरंत अपने पैसे होठों को महारानी की दहकती हुई बुरके ऊपर एकदम से सटा दिए और उसे पर चुंबन करने लगे,,,।

महारानी पूरी तरह से मदहोश हो गई और कभी सोचा भी नहीं थी कि राजा साहब उसकी बुर पर इस तरह से चुंबन करेंगे,,,,, क्योंकि बरसों बीत चुके थे महारानी से इस तरह से राजा साहब प्यार नहीं किए थे बड़े उसकी चुदाई करते थे लेकिन उसकी बुर पर चुंबन करना छोड़ दिए थे,,,, इसलिए तो महारानी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,, और इसलिए उसकी बोलती भी एक दम से बंद हो गई थी,,, सूरज के पिताजी अपने होठों को दबाओ उसकी गुलाबी छेद पर बढ़ते हुए अपनी जीत निकाल कर उसमें प्रवेश कर कर उसे चाटना शुरू कर दिए थे सूरज के पिताजी की इस हरकत को महारानी पूरी तरह से बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और तुरंत सूरज के पिताजी के कंधे पर से अपने हाथ को हटाकर आगे की तरफ ले आई और तकिया को जोर से दबोच कर पकड़ ली थी और गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकालने लगी थी,,,, इस बीच सूरज के पिताजी अपने बीच वाली उंगली को लगातार उसकी बुर के अंदर बाहर कर रहे थे जिसमें से मदन रस बार-बार बाहर की तरफ झटक दे रहा था,,,,। और सूरज के पिताजी बड़े चावल से उसे मदन रस को अपने गले के अंदर गटक जा रहे थे।



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सूरज के पिताजी कभी सपने में भी नहीं सोचे थे कि वह किसी महारानी के बिस्तर पर इस तरह से मजा लूटेंगे और वह भी महारानी के साथ कुछ देर पहले ही वह एकदम शराबी घर फटे हालत में थे और कुछ देर बाद देखो वहां महारानी के बिस्तर पर महारानी के साथ ही रंगरेलियां बना रहे थे यह थी किस्मत,,, महारानी की गुलाबी बुर इस समय दुनिया की सबसे हसीन और बेश कीमती खजाना जान पड़ रहा था जो सूरज के पिताजी की मुट्ठी में कैद हो चुका था इस खजाने को वह अपने आप से दूर नहीं करना चाहते थे इस खजाने का पूरा मजा लेना चाहते थे,,,, देखते ही देखते सूरज के पिताजी पागलों की तरह महारानी की बुर को चाटना शुरू कर दिया महारानी मदहोश में जा रही थी वह बिस्तर पर करमा जा रहे थे बिस्तर पर किसी चादर को दोनों मुट्ठी में जोर से पकड़ कर वह अपनी उत्तेजना को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा था महारानी के बदन की कसमसाहट खास करके उसके नितंबो से प्रतीत हो रही थी,,। उसमें कुछ ज्यादा ही थिरकन थी,, जिसे सूरज के पिताजी दोनों हाथों से पकड़ कर उसे काबू में करने की कोशिश कर रहे थे इसमें महारानी की गांड को दोनों हाथों से पकड़ने में भी एक अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था,,,,, महारानी की गांड तेरी बड़ी थी कि उसकी दोनों फांको के बीच सूरज के पिताजी का चेहरा एकदम ढंक सा गया था। महारानी बिस्तर पर तड़प रही थी मदहोश हो रही थी उसकी बुर में आग लगी हुई थी वह जल्द से जल्द अपने राजा के लंड को अपनी बुर में महसूस करना चाहती थी इसलिए वह बोली,,,।




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ओ मेरे राजा मैं तो पागल हो जाऊंगी आज क्या हो गया है आपको कुछ खा लिए हो क्या अभी कुछ देर पहले तो चुदाई करके गए थे फिर से तुम्हारा मन हो गया,,,, लेकिन आप मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है मेरे राजा जल्दी से अपने लंड को मेरी बुर में डाल दो मेरी प्यास को बुझा दो ,,,आज तो आपने कमाल कर दिया है,,आहहहहहहह राजा मेरे महाराज,,,,,ओहहहहहबह,,,।

महारानी कि ईस तरह की बातें सुनकर सूरज के पिताजी मदहोश हुए जा रहे थे लेकिन अंदर ही अंदर घबरा भी रहे थे की कही रानी को जवाब ना देना पड़ता है अगर ऐसा हो गया तो रानी को पता चल जाएगा कि उसके बिस्तर पर उसके राजा नहीं बल्कि कोई गैर मर्द है,,,, और वैसे भी महारानी को रत्ती भर शक नहीं हो रहा था कि उनके बिस्तर पर उसके महाराज नहीं बल्कि गांव का कोई गरीब आदमी है मजदूर आदमी है अगर ऐसा वह जान जाए तो इसी समय उसकी जान ले ले लेकिन सूरज के पिताजी काफी चालाक नजर आ रहे थे और बेहद चालाकी भी दिखा रहे थे,,,, एहसास हो गया की महारानी पूरी तरह से तड़प रही है चुदवाने के लिए तो वह बिल्कुल भी देर किए बिना एक हाथ से अपनी धोती को उतार कर एक तरफ रख दिए ताकि जाते समय बड़े आराम से उसे पहन कर जा सके,,,,, एक हाथ से वह अपनी धोती उतार कर पूरी तरह से नंगा हो चुका था जैसा की महारानी बिस्तर पर नंगी लेटी हुई थी,,,,।




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देखते ही देखते सूरज के पिताजी अपने लिए जगह बनाने लगे और उसके बड़ी-बड़ी गांड के नीचे इस स्थिति में वह पेट केवल लेटी हुई थी और अपनी दोनों टांगों को उसकी मोटी मोटी जांघो को खोलकर उसके बीच में रखते हुए अपने मोटे तगड़े लंड को उसके गुलाबी छेद पर लगाकर धीरे-धीरे अंदर की तरफ धक्का मारने लगे,,, देखते ही देखते सूरज के पिताजी का लंड महारानी की बुर के अंदर प्रवेश करना शुरू कर दिया,,, इस समय सूरज के पिताजी को ऐसा एहसास हो रहा था कि मानो जैसे वह स्वर्ग के अंदर प्रवेश कर रहे हो क्योंकि महारानी उनकी सोच से भी दूर थी वह कभी महारानी के साथ संबंध बनाने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे क्योंकि वह अपनी हैसियत को जानते थे लेकिन आज अपनी हैसियत से आगे निकल चुके थे आज वह महारानी के कच्छ में उसके ही बिस्तर पर उसकी ही चुदाई कर रहे थे। वाकई में अगर इंसान को उम्मीद से दुगना मिल जाए तो वह अपनेआप को महाराजा समझने लगता है और वही स्थिति ईस समय सूरज के पिताजी की थी।




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देखते ही देखते सूरज के पिताजी अपने पूरे लंड को महारानी की बुर के अंदर प्रवेश करा दिए थे और महारानी की बड़ी-बड़ी और नरम नरम गांड को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिए थे इस स्थिति में महारानी की चुदाई करने में सूरज के पिताजी को बहुत मजा आ रहा था वह पागल हुए जा रहे थे इतना मजा उन्हें आज तक अपनी बीवी के साथ नहीं आया था और वैसे भी किसी औरत के साथ कितना ज्यादा मजा मिलता है यह मर्द की सोच पर और हालात स्थान और पद पर आधारित होता है,,, मतलब की औरत का पद क्या है,,,, इस समय बिस्तर पर सूरज के पिताजी जिसकी चुदाई कर रहे थे वह महारानी थी इसलिए सूरज के पिताजी की उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ गई थी और उन्हें ऐसा ही महसूस हो रहा था की महारानी के साथ ही ज्यादा मजा मिल रहा है और ऐसा कभी क्योंकि महारानी का बदन भी एकदम मांसल और गदराया हुआ था,,,,।



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सूरज के पिताजी की हर धक्के का माया महारानी ले रही थी इस तरह का मजा उन्हें अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि राजा के साथ पहले कभी नहीं प्राप्त हुआ था इस समय वह अपने बिस्तर पर चुदाई करने वाले इंसान को अपना पति ही समझ रही थी इसलिए उन्हें इस बात से थोड़ा अचंभित हो रहा था कि राजा इतने अच्छे से कैसे चुदाई कर रहा है,,,, लेकिन इस पल को वह पूरी तरह से जी लेना चाहती थी पीछे से चुदवाने में महारानी को कुछ ज्यादा ही मजा आता था सूरज के पिताजी दोनों हाथों से उसकी भारी भरकम गांड को पकड़ कर धक्के पर धक्का लगा रहे थे,,,, कुछ देर तक सूरज के पिताजी इसी तरह से महारानी की चुदाई करते रहे और महारानी भी पूरी तरह से मजा लूट रही थी और पानी छोड़ रही थी जिसके चलते महारानी की बुर पूरी तरह से गली और चिपचिपी हो गई थी जिसमें बड़े आराम से सूरज के पिताजी का लंड अंदर बाहर हो रहा था और फच्च फच्च की आवाज आ रही थी,,,।

कुछ देर तक इसी तरह से चुदाई करने के बाद सूरज के पिताजी अपना आसन बदलना चाहते थे जिस तरह से महारानी मजा लूट रही थी वह समझ गए थे कि अभी कुछ बोलने वाली नहीं है और वैसे भी कमरे में पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था एक दूसरे का चेहरा देखना नामुमकिन था लेकिन इस बात का डर था कि अगर महारानी उत्तेजित अवस्था में उसे अपनी बाहों में भर लेंगे तो शायद राजा के बदन की बनावट और उसके बदन की बनावट में भेद पता चलने लगेगा और ऐसे में उसके पकड़े जाने का डर बना रहा था लेकिन फिर भी सूरज के पिताजी अपने मन में युक्ति सोचने लगे और धीरे से अपने लंड को महारानी के पिछवाड़े से बाहर निकले और उसकी स्थिति को बदलने लगे उसे पीठ के बल लेट आने लगे,,, स्थिति को देखकर महारानी भी पीठ के बल लेट गई और अपनी दोनों टांगों को खोल दे सूरज के पिताजी उसकी दोनों टांगों के बीच जाकर उसकी गुदाज कमर में अपने दोनों हाथ को डालकर से अच्छी तरह से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसकी नंगी बड़ी-बड़ी आधी गांड को अपनी जांघों पर चढ़ा लिए,,,, और फिर एक बार अपने लंड को उसकी गुलाबी छेद में डालकर धक्का लगाते हुए उसके ऊपर पूरी तरह से झुकने लगे और उसके दोनों हाथों को पकड़कर वह बिस्तर से सटा दिए ताकि वह उन्हे अपनी बाहों में ना भर सके।

सूरज के पिताजी महारानी की दोनों कलाइयों को पकड़ कर धक्के पर धक्कालग रहे थे,,, महारानी की हालत खराब होती जा रही थी वह पागल हुए जा रही थी इतनी गजब की इतनी जबरदस्त चुदाई आज तक राजा साहब ने उसकी नहीं किए थे इसलिए तो वह एकदम मस्त भेज रही थी आज वह राजा साहब पर पूरी तरह से फिदा हो गई थी लेकिन वह नहीं जानती थी कि उसे चोदने वाला उनका पति नहीं बल्कि गांव का मजदूर है इसीलिए शायद मजदूर होने के कारण उसमें दम खम ज्यादा है,, आखिरकार महारानी अपने चरम सुख के करीब पहुंचने लगी और उसकी शिसकारी की आवाज एकदम से बढ़ने लगे सूरज के पिताजी उसके लाल लाल होठों का चुंबन करना चाहते थे लेकिन ऐसा करना खतरे से खाली नहीं था। इसलिए अपनी इच्छा को वह अपने अंदर दबा लिए क्योंकि इस समय भी उन्हें बहुत कुछ मिल चुका था किस्मत उन पर पूरी तरह से मेहरबान हो चुकी थी अब थोड़े से लिए वह खतरा मोल नहीं लेना चाहते थे सूरज के पिताजी भी चरम सुख के बेहद करीब पहुंच चुके थे इसलिए उनके धक्के एकदम तेज हो चुके थे,,,, और देखते ही देखते दोनों का एक साथ पानी निकल गया सूरज के पिताजी इसके बावजूद भी महारानी के बदन पर पसर नहीं गए थे बल्कि अपने आप को एकदम से रोके रह गए थे और जब तक पूरा पानी महारानी की बुर में उत्तर नहीं दिया तब तक अपने लंड को उसके घर से बाहर नहीं निकाले,,,,।

सूरज के पिताजी का मन अभी भरा नहीं था वह महारानी की और भी ज्यादा चुदाई करना चाहते थे लेकिन अब यहां पर ज्यादा देर रुकना उचित नहीं था वैसे तो राजा साहब सुबह होने से पहले आने वाले नहीं थे लेकिन फिर भी अगर ज्यादा देर रुकना होगा तो दोनों के बीच से बातचीत होना लाजमी है ज्यादा देर तक वह चुप नहीं रह सकते थे क्योंकि उनकी खामोशी महारानी के मन में शंका पैदा कर सकती थी इसलिए वह धीरे से अपने लंड को बाहर निकाल कर वहीं बिस्तर पर कुछ देर के लिए बैठ गए क्योंकि वह जानते थे की महारानी की भारत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी वह एकदम मस्त हो चुकी थी और गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी स्थिति को संभाल रही थी,,,,।

इतनी संतुष्टि भरी चुदाई करवा कर महारानी को बिल्कुल भी होश नहीं था वह अपनी आंखों को बंद किए हुए गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,, एकदम संतुष्ट होने की वजह से कुछ ही देर में वह नींद की आंखों में चली गई और यही मौका था महारानी के कमरे से बाहर निकलने का और यही मौका देकर सूरज के पिताजी धीरे से बिस्तर पर से उठे और अपने कपड़े ढूंढ कर पहनकर धीरे से इस तरह से दरवाजा खोल कर बाहर निकल गई और बाहर आकर तख्ते पर कल के साथ एक अद्भुत मुस्कान के साथ सो गए,,,।

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Bittoo

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गांव से आई हुई औरत उन दोनों के साथ में चलने लगी हालांकि चलते समय वह घुंघट से अपने चेहरे को छुपाने की पूरी कोशिश कर रही थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कोई उसे पहचाने इसलिए तो वह रात में आई थी,, और वैसे भी अंधेरा इतना घना था कि चाह कर भी उसका चेहरा देखा नहीं जा सकता था बस उसके चूड़ियों की खनक और पायलों की जनक की आवाज से उसके होने का अंदेशा हो रहा था, और वैसे भी चूड़ियों की खनक बता देती है औरतों की खूबसूरती,, चूड़ियों की खनक से मर्द की उत्तेजना बढ़ जाती है और इस समय सूरज के पिताजी के साथ भी ऐसा हो रहा था,,, सूरज के पिताजी उसे औरत का नाम गांव पूछने की बिल्कुल भी जेहमत नहीं कर रहे थे,, लेकिन कल्लु उसे औरत के बारे में जानने की मंशा जताते हुए उसे औरत से बोला,,,

नाम क्या है तुम्हारा,,,?

जानकर क्या करोगे वैसे भी मैं नाम बताने वाली नहीं हूं,।

अगर नाम बता देगी तो तेरा कुछ बिगड़ जाएगा क्या,,,?

मैं राजा साहब से पहले ही बोल चुकी हूं कि मेरा नाम गांव और मेरे बारे में सारी बातें गुप्त होनी चाहिए तभी तो मैं यहां आने के लिए तैयार हूं और वैसे भी तुम दोनों जानते होंगे कि मैं यहां किस लिए आई हूं राजा साहब ने मुझे इतनी रात को क्यों बुलाया है,।

इसमें कोई शक नहीं है हम लोगों का काम ही यही है राजा साहब के इशारे पर गांव की खूबसूरत औरतों को उनके पास ले जाना,,,,(कल्लू मुस्कुराता हुआ बोला और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बोला,,,) लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आता कि तुम्हारे बारे में किसी ने बताया था या राजा साहब खुद तुमसे मिले थे,,,।

यह सब जानकर क्या करोगे,,,,(उसे औरत ने सीधा और सपाट उत्तर दिया यह सुनकर सूरज के पिताजी बोले)

जाने दे यार क्यों परेशान कर रहा है अगर वह अपने बारे में कुछ नहीं बताना चाहती तो क्यों उससे पूछ कर अपना ही दिमाग खराब कर रहा है उसकी कोई मजबूरी होगी,,,, तभी तो हुआ इतनी रात को राजा साहब के पास जाने के लिए तैयार हुई है अब ज्यादा परेशान मत कर,,,,।


देखा तुमसे ज्यादा समझदार तो यह है,,, अपने काम से काम रखते हैं,,,,।

चल रहने दे अब ज्यादा उड़ मत थोड़ी देर में राजा साहब तेरा कबूतर उड़ा देंगे,,,,(बेशर्मी से बेशर्मी भरी बातें करके कल्लू हंसने लगा,,, उस औरत के पास कल्लू की बदतमीजी का कोई जवाब नहीं था,,, क्योंकि वह काम ही कुछ ऐसा करने जा रही थी अब वह मजबूरी में करने जा रही थी आप किसी शौक से या किसी दबाव में आकर यह तो वही जानती थी लेकिन अपने इस कार्य के लिए वह सफाई नहीं दे सकती थी इतना तोता इसलिए वह कुछ बोली नहीं बस चुपचाप चलती रही,,,, थोड़ी ही देर में तीनों राजा साहब की कोठी पर पहुंच चुके थे लेकिन कहां पर लेकर जाना है उसे औरत को यह सूरज के पिताजी को नहीं मालूम था इसलिए वह खड़ा होकरबोला,,,।

आप कहां ले जाना है कल्लु,,,।

यहां नहीं जाना है कोठी के पीछे जाना पड़ेगा वही राजा साहब औरतों की चुदाई करते हैं,,,(कल्लु जानबूझकर चुदाई शब्द का प्रयोग कर रहा था,,,, उसे औरत को उसकी बात पर गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी और वैसे भी वह राजा साहब के साथ हम बिस्तर होने के लिए बड़ी मजबूरी में आई थी,,, उसे पैसों की जरूरत थी और उसके पास पैसे नहीं थे पति शराबी था वह बिल्कुल भी कमाता नहीं था,,,, उस औरत के ऊपर उधारी भी हो चुकी थी और उसकी जमीन भी गिरवी पड़ी थी जिसके चलते उसे इस कार्य को करने के लिए अपने मन को मनाना पड़ा वरना वह इस तरह का काम करने के लिए कभी तैयार नहीं थी और वैसे भी उधारी की रकम को ज्यादा नहीं थी इसीलिए तो राजा साहब तैयार हो गया था उसे रकम देने के लिए अगर ज्यादा रकम होती तो इस काम के लिए वह कभी इतना ज्यादा रकम नहीं देता,,, कल्लू की बात सुनकर सूरज के पिताजी बोले,)

तू आगे आगे चल,,, हम तेरे पीछे चलते हैं क्योंकि मुझे नहीं मालूम कि कहां जाना है,,,।

ठीक है,,(और इतना कहकर वह आगे आगे चलने लगा सूरज के पिताजी उस औरत के साथ पीछे-पीछे चलने लगे सूरज के पिताजी को इतना तो समझ में आ रहा था कि एक माना जाना जमीदार पैसे वाला इस कार्य के लिए अपनी बीवी की मौजूदगी में अपने कोठी का उपयोग तो बिल्कुल भी नहीं करेगा वैसे सूरज के पिताजी को इतना तो मालूम था कि इस तरह की अय्याशी करने के लिए गांव के बाहर एक गोदाम था जिसमें अब वह खुद कल्लु के साथ मिलकर अय्याशी किया करता था,,, लेकिन इस समय उस गोदाम का उपयोग होने वाला नहीं था अगर ऐसा होता तो कल उसे औरत को उस गोदाम पर ही लेकर जाता यहां कोठी पर लेकर नहीं आता,,,,, तीनों चलते हुए कोठी के पीछे के मकान में पहुंच चुके थे जो की ईंधन रखने के काम में आता था और पशुओं के लिए घास जा रहा है रखे जाने के लिए उपयोग में लिया जाता था,,, इस जगह पर राजा साहब दूसरी औरतों के साथ अय्याशी करते होंगे इस बारे में तो महारानी को भी भनक तक नहीं होगी,, यह राज राजा साहब के कुछ खास लोग ही जानते थे जिनमें से कल्लु एक था और अब सूरज के पिताजी भी उनमें से एक बन चुके थे,,।

थोड़ी ही देर में तीनों कोठी के पीछे वाले मकान पर पहुंच चुके थे लेकिन अभी तक जहां पर राजा साहब का कोई पता ठिकाना नहीं था,,,, यह देखकर कल्लु बोला,,,।

यार अभी तक राजा साहब नहीं आए काफी देर हो गई है मुझे तो लगा आ गए होंगे,,,।

समय तो लगेगा ही आखिरकार बिस्तर पर जवानी से भरी हुई महारानी जो है उसकी प्यास बुझाने में समय तो लगता ही होगा,,,(सूरज के पिताजी मुस्कुराते हुए बोले तो उसकी बातें सुनकर कल्लु फिर से इधर-उधर देखने लगा और बोला,,,)

यार फिर से तो शुरू हो गया तू सच में मरवाएगा तुझे कितनी बार बोला हूं कि इस बारे में बिल्कुल भी बात मत किया कर,।

आप क्या करूं यार महारानी है इतनी खूबसूरत क्यों उसे देखा हूं तब से मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया है मुझे तो समझ में नहीं आता की मर्द की जात क्या होती है अप्सरा जैसी औरत बिस्तर पर होने के बावजूद भी हुआ है दूसरी औरतों के साथ मजा लूटने के लिए पागल हुआ जा रहा है,,,।

अरे बुद्धू मैंने कुछ देर पहले ही तेरा ही उदाहरण दिया हूं ना तेरी बीवी भी तो अप्सरा से काम नहीं है लेकिन तू बाहर मुंह मारता है कि नहीं,,,।

छोड़ यार महारानी जैसी खूबसूरत नहीं है,,,।

अरे बेवकूफ तभी तो वह महारानी है और तेरी बीवी गांव की रानी है,,,। अब इन सब के बारे में छोड़ काफी देर हो रही है,,, कहीं ईस औरत को नींद आ गई तो राजा साहब का मजा किरकिरा हो जाएगा और लंड खड़ा का खड़ा रह जाएगा,,,।
(इतना कहकर फिर से हुआ हंसने लगा और वह औरत उसकी बात पर फिर से गुस्सा होने लगे लेकिन कुछ बोल नहीं पाई और अपने मन में सोच की राजा साहब तो क्या एक साथ तुम तीनों की प्यास बुझाने के लिए मैं काफी हूं और वैसे भी उसका यह बात अपने मन में सोचना लाजमी था क्योंकि वाकई में वह भी भला की खूबसूरत थी घूंघट में होने के बावजूद भी उसकी बनावट लालटेन की पीली रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रही थी और वह लालटेन घर के पीछे वाले मकान के बाहर ही टंगी हुई थी और जल रही थी,, सूरज के पिताजी लालटेन की पीली रोशनी में तिरछी नजरों से उसे औरत को भी देख ले रहे थे और सूरज के पिताजी का इस तरह से उसे औरत को देखने का मतलब साफ था कि उसे औरतों में भी आकर्षक और जवानी कुट-कूट कर भरी हुई थी,,,, अगर यह राजा साहब के लिए तोहफा ना होता तो इस तोहफे का पूरा उपयोग वह खुद कर लेता,,,, लेकिन वह मजबूर था क्योंकि उसका मन भी बेहद उत्तेजित था,,,,।

थोड़ी देर बाद और खड़े रहने के बाद राजा साहब छुपाते छुपाते हुए उसे तरफ आते हुए दिखाई दिए उन्हें देखकर सूरज के पिताजी बोले,,,)

वह देखो राजा साहब आ गए,,,,।
(सूरज के पिताजी की बात सुनकर वह औरत और कल्लु दोनों उस दिशा में देखने लगे,,, सूरज के पिताजी और कल तो राजा साहब को देखकर सहज थे लेकिन उस औरत के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी,,, क्योंकि उसके जीवन का यह पहला क्षण था जब वह किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाने जा रही थी और वह भी बड़ी मजबूरी में अगर उसकी मजबूरी ना होती तो शायद वह इस तरह के कम कभी ना उठाती इसलिए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था थोड़ी ही देर में राजा साहब उन तीनों के करीब आ गए और उसे औरत को देखकर मुस्कुराते हुए बोले,,,)

अरे रानी अब घूंघट की क्या जरूरत है घूंघट उठा दो,,,।

माफी चाहती हूं राजा साहब लेकिन मे यह घूंघट सिर्फ आपके ही सामने उठाऊंगी,,,।

ओहहहहह ,,,, लाज शर्म,,,,, मुझे तुम्हारा यह अंदाज बहुत अच्छा लगा और वैसे भी लाज शर्म वाली औरत को छोड़ने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है,,,,,(राजा साहब एकदम उत्साहित होते हुए बोले लेकिन उनके द्वारा कहां गया यह शब्द उसे औरत के दिल पर हथौड़े की तरह चल रहा था,,,, अगर उसकी मजबूरी ना होती तो वह राजा साहब को भी लात मार कर चली गई होती लेकिन वह कुछ कर नहीं सकती थी और राजा साहब ने भी उसकी इस मर्यादा की लाज को रखते हुए बोले)

कोई बात नहीं जैसी तुम्हारी मर्जी,,,, थोड़ी देर बाद ही तुम्हारे बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं होगा घूंघट तो दूर की बात है तब मैं तुम्हारी खूबसूरत चेहरे को तुम्हारे चेहरे के हाव-भाव को देखता हुआ मजा लूटुंगा,,,, अब तुम दोनों जा सकते हो,,,,,।


ठीक है मालिक लेकिन इस औरत को छोड़ने जाना पड़ेगा,,,,(कल्लु दोनों हाथ जोड़े हुए राजा साहब से बोला,,,)

नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ेगी मैं इसके साथ ज्यादा समय बिताऊंगा और सुबह होने से पहले यह खुद अपने घर चली जाएगी क्यों चली तो जाओगी ना या इन लोगों को तुम्हारे साथ भेजना होगा,,,।

जी नहीं राजा साहब में चली जाऊंगी,,,,।

ठीक है अब तुम दोनों जाओ अगर घर जाना हो तो घर चले जाना वरना वही सो जाना,,,,

ठीक है मालिक,,,,(इतना कहकर कल्लु और सूरज के पिताजी दोनों वहां से चलते बने अब घर जाने का कोई मतलब नहीं था इसलिए उन दोनों ने वही तख्ते पर सोने का फैसला किया था,,,, राजा साहब उसे औरत का हाथ पकड़ कर मकान के अंदर ले जाने लगे और बाहर जल रही लालटेन को अपने हाथ में लेकर कमरे में प्रवेश कर गए जहां पर चारों तरफ ईंधन और घास फूस रखा हुआ था,,, वह औरत शर्म से पिघलती चली जा रही थी,,,।

दूसरी तरफ तख्ते पर लेटे हुए दोनों कुछ देर तक इधर-उधर की बातें करते रहे और थोड़ी देर बाद कल्लु गहरी नींद में सो गया और उसके सो जाने का ही इंतजार सूरज के पिताजी कर रही थी क्योंकि सूरज के पिताजी के मन में कुछ और चल रहा था वह उठकर बैठ गई और जब देखे की कल्लु गहरी नींद में सो रहा है तो वह धीरे से तख्ते पर से उठकर खड़े हो गए और दबे पांव कोठी की तरफ आगे बढ़ने लगे,,,, सूरज के पिताजी के मन में बहुत कुछ चल रहा था,,, आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,,, सिर्फ कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी और कोठी के अंदर नौकर नौकरानी भी गहरी नींद में सो रहे थे।

इधर-उधर देखते हुए सबसे नजर बचाते हुए यह तसल्ली कर लेने के बाद कोई उसे देख तो नहीं रहा है वह धीरे से कोठी के अंदर प्रवेश करने लगे कोठी का दरवाजा सिर्फ बंद किया हुआ था उसकी कड़ी खुली हुई थी यह देखकर सूरज के पिताजी का दिल झूम उठा और वह धीरे से कोठी के अंदर प्रवेश कर गए कोठी के अंदर प्रवेश करते ही वह चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगे वाकई में बेहद आलीशान कोठी बनी हुई थी कोठी में बहुत ही बेस्ट कीमती सजावट के सामान रखे हुए थे जिसे कोठी की सुंदरता और ज्यादा बढ़ गई थी,,,।

जगह-जगह पर रोशनी के लिए रोशनदान बने हुए थे कोटी के बीचो-बीच से सीढ़ी ऊपर की तरफ जाती थी इतना तो सूरज के पिताजी को मालूम था कि अब उसे क्या करना है वह धीरे से सीढ़ियां चढ़ने लगी जैसे-जैसे सीढ़ियां चढ़ रहे थे वैसे-वैसे उनके दिल की धड़कन भी बढ़ती जा रही थी उन्हें मालूम नहीं था कि वह क्या करने जा रहे हैं लेकिन अपने मन पर वह काबू नहीं कर पाए थे जिसके चलते उन्हें न चाहते हुए भी यह कदम उठाना पड़ रहा था,,, धीरे-धीरे करके सूरज के पिताजी सारी सीढ़ियां चढ़कर दूसरे मंजिले पर पहुंच चुके थे,,, दूसरे मंजिले पर भी सजावट की बहुत अच्छी व्यवस्था थी चारों तरफ कीमती सजावट का सामान रखे हुए थे,,, और यह देखकर सूरज के पिताजी अपने मन में सोचने लगे कि राजा साहब के आगे तो मुखिया कुछ भी नहीं है राजा साहब के आगे मुखिया को एक नौकर ही लगेगा,,,, मुखिया की याद आते हैं सूरज के पिताजी के मन में मुखिया की बीवी का चेहरा नजर आने लगा,,,, और मुखिया की बीवी के चेहरे के बाद राजा साहब की बीवी का चेहरा नजर आने लगा,,,।

मुखिया की गुलामी वह कर चुका था और अब बारी थी राजा साहब की,,, लेकिन दोनों की गुलामी में अंतर यह था कि वह मुखिया की बीवी की रोज चुदाई करता था गुलामी के साथ-साथ मुखिया की बीवी का मजा भी रोज लेता था लेकिन अभी राजा साहब की गुलामी का यह पहला दिन था और सूरज के पिताजी अपने मन में यही सोच रहे थे कि काशी यहां भी मुखिया की बीवी की तरह राजा साहब की बीवी भी चोदने के लिए मिल जाए तो उसे अच्छी किस्मत वाला दुनिया में कोई नहीं होगा,,,, यही सब सोचते हुए सूरज के पिताजी एक तरफ धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे जहां पर ढेर सारे कमरे थे धीरे-धीरे सभी कैमरे के आगे से सूरज के पिताजी गुजरते चले जा रहे थे और जाते-जाते हर एक कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश करते थे लेकिन सभी दरवाजे बंद थे।

लेकिन तभी सूरज के पिताजी एक कमरे के पास पहुंच गए दरवाजा तो बंद था लेकिन उसकी खिड़की खुली हुई थी और खुली हुई खिड़की को देखकर सूरज के पिताजी का दिल जोरो से धड़कने लगा और वह समय धीरे-धीरे चलते हुए बस खुली हुई खिड़की के करीब पहुंच गए और उसे खिड़की से अंदर देखने की कोशिश करने लगे अंदर रोशनदान से रोशनी किया हुआ था और उसे पीली रोशनी में पहले तो सूरज के पिताजी को कुछ दिखाई नहीं दिया लेकिन थोड़ी कोशिश करने के बाद खिड़की से अंदर कमरे का दृश्य धीरे-धीरे साफ होने लगा और दृश्य साफ होने के बाद जो नजर सूरज के पिताजी को दिखाई दिया उसे देखकर उनका दिल जोरो से धड़कने लगा।

वह नजारा था ही कुछ ऐसा कि अगर सूरज के पिताजी की जगह दुनिया का कोई भी मर्द होता तो उसका भी दिल जोरो से धड़कने लगता और उसका मन बेकाबू हो जाता,,,, सूरज के पिताजी ने अपनी आंखों से बहुत देख लिया जिसकी देखने की तमन्ना दिल में लिए वह इतना बड़ा खतरा मोड लेकर राजा साहब की कोठी में दाखिल हुए थे आखिरकार उनके मन का नजारा उनकी आंखों के सामने था सामने बिस्तर पर राजा साहब की बीवी मतलब महारानी एकदम नंगी पेट के बल लेटी हुई थी और उनकी बड़ी-बड़ी उबारी हुई गांड नरम नरम गद्दे पर भी एकदम बराबर नजर आ रही थी,,,, महारानी को एकदम नग्नअवस्था में देख कर और महारानी की बड़ी-बड़ी बाहर देखकर सूरज के पिताजी के अंदर वासना का शैतान जागने लगा जो की पूरी तरह से सूरज के पिताजी को अपनी गिरफत में ले चुका था,,,।

राजा साहब की बीवी का आकर्षण सूरज के पिताजी के मन में इस तरह से बढ़ गया था कि उसे देखने की चाह में वह इतना बड़ा कदम उठा चुके थे जो कि खतरे से खाली नहीं था अगर किसी की भी नजर पड़ जाती तो इसके बदले में सूरज के पिताजी की जान जानी तय थी,, लेकिन ऐसा लग रहा था कि अपने मन की इच्छा पूरी करने के लिए सूरज के पिताजी को इस खतरे को उठाना ही इस समय जरूरी हो गया था कुछ देर तक वह खिड़की से खड़े होकर दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत को नंगी लेटे हुए देख रहे थे वह पूरी तरह से नींद की आगोश में थी,,,, वह गहरी नींद में होने के कारण गहरी गहरी सांस ले रही थी जिसकी वजह से उसके बदन में एक अद्भुत कामुक हलचल भी हो रही थी उसे कामुक हलचल के चलते उसके भारी भरकम नितंब भी ऊपर नीचे हो रहे थे जिसे देखकर सूरज के पिताजी का ईमान पूरी तरह से डगमगा गया था।

राजा साहब की बीवी को नंगी बिस्तर पर सोते हुए देख कर सूरज के पिताजी अपने मन में अनुमान लगाने वालों की राजा साहब इसकी जमकर चुदाई करने के बाद ही उसे औरत के पास गए हैं तभी तो यह है बिना कपड़ों के सो रही है एकदम नंगी होकर इसकी प्यास बुझाने के बाद ही राजा साहब अपनी प्यास बुझाने के लिए सूरज के पास गए और सुबह तक वापस लौटकर आने वाले नहीं है,,, यह सब सोते हुए सूरज के पिताजी का दिमाग बड़ी तेजी से चलने लगा वह अपने मन में सोचने लगे कि अगर राजा साहब अपनी बीवी को बिना बताए कमरे से बाहर गए हैं तो कमरे का दरवाजा खुला ही होगा भले ही बाहर से बंद है लेकिन उसकी कड़ी नहीं लगी होगी,,,, इस बारे में ख्याल आते ही सूरज के पिताजी का दिल जोरो से धड़कने लगा और उनके चेहरे पर कामुक मुस्कान देने लगी,,,, जागने से पहले वह कुछ सोच नहीं थे कि यहां पर आने के बाद उन्हें क्या करना है लेकिन जो ख्याल उनके मन में आ रहा था वह बेहद खतरनाक था अगर पकड़े गए तो और अगर पकडे नहीं गए तो स्वर्ग का सुख बस उनसे तीन-चार मीटर की दूरी पर ही बिस्तर पर लेटी हुई थी।

ऐसे में सूरज के पिताजी का दिमाग बड़ी तेजी से काम करता था वह तुरंत दरवाजे के पास आए और उसे खोलने की कोशिश करने लगे और पहले ही कोशिश में दरवाजा हल्का सा शोर करता हुआ खुल गया यह देखकर सूरज के पिताजी का दिल जोरो से धड़कने लगा हुआ पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूबने के लिए अपने आप को तैयार करने लगे उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि अगर पकड़े गए तो क्या होगा लेकिन इस बात का एहसास जरूर था कि अगर इस महारानी के साथ शरीर सुख प्राप्त कर लिया तो दुनिया का कोई सुख इसके आगे कोई मायने नहीं रखना इस बात का एहसास सूरज के पिताजी को हो गया था। और यही सोच कर वह धीरे से कमरे में प्रवेश कर गए और उसी तरह से दरवाजे को बंद कर दिए लेकिन कड़ी लगाना बिल्कुल भी नहीं भूले क्योंकि हो सकता है कि कोई आ जाए और दरवाजा खुला हो तो बना बनाया काम बिगड़ जाए।

कमरे के अंदर रोशनी बरकरार थी दो रोशन दान जगमगा रहे थे,,, उसे रोशनी में वह जी भरकर महारानी के नंगे बदन का दर्शन कर लेना चाहते थे क्योंकि आगे क्या करना है वह अच्छी तरह से जानते थे जी भरकर महारानी के नंगे बदन को देख लेने के बाद उसके बदन की बनावट को देख लेने के बाद जो कि वाकई में बेहद गजब की बनावट थी बदन में हर कटाव बड़े सोच समझ कर बना हुआ था और वह भी इस बदन के बनावट को दुनिया का कोई भी मर्द देख ले तो शायद बिना संभोग किए हुए उसका पानी निकल जाए उसे तो राजा साहब पर तरस आ रहा था कि इतनी खूबसूरत औरत को छोड़कर वह बेवजह गांव की दूसरी औरतों के पीछे पागल बना है,,,, सूरज के पिताजी का दिल जोर से धड़क रहा था और पजामे में तंबू पूरी तरह से बन चुका था,, जिसे हाथ से दबे हुए वाहन धीरे से जाकर महारानी के बिस्तर पर बैठ गए महारानी के बिस्तर पर बैठना भी सूरज के पिताजी के लिए किसी राजा की किस्मत से काम नहीं था इस समय वह अपने आप को राजा ही समझ रहे थे क्योंकि वह महारानी के बिस्तर पर बैठे हुए थे और उस बिस्तर पर महारानी अपने पूरे कपड़े उतार कर एकदम नंगी लेटी हुई थी,,,,।

पीली रोशनी में सूरज के पिताजी को सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था और यह भी दिखाई दे रहा था की महारानी के बुरे से निकलने वाला मदन रस उनकी जांघो तक बहा हुआ था,,, उस मदन रस को देख कर तो सूरज के पिताजी की हालत एकदम खराब होने लगी उनकी आंखों में वासना का तूफान उठने लगा वह पागल होने लगे वह एक औरत को काबू करना अच्छी तरह से जानते थे वह कुछ देर बिस्तर पर बैठकर नंगी लेटी हुई महारानी को देखते हुए आगे क्या होगा और अगर पकड़े गए तो क्या होगा इसके बारे में सोते हुए आगे की प्रक्रिया के बारे में सोच रहे थे उन्हें अच्छी तरह से मालूम था कि एक औरत को काबू में कैसे किया जाता है एक औरत को किस तरह से आनंद के सागर में डुबाया जाता है। सूरज के पिताजी को अच्छी तरह से मालूम था कि ऐसे में अगर वह कुछ भी बोलेंगे तो महारानी को समझते देर नहीं लगेगी कि उनके बिस्तर पर महाराज नहीं बल्कि कोई और है इसलिए बहुत सोच समझकर कदम उठाना था और इन सब के बारे में शायद सूरज के पिताजी बहुत अच्छे से सोच चुके थे,,,।

इसलिए धीरे से महारानी के बिस्तर पर से उठकर खड़े हो गए,,, सूरज के पिताजी को अच्छी तरह से मालूम था कि अब जो कुछ भी करना है पूरी तरह से अंधेरे में ही करना है अगर जरा भी उजाला हुआ तो पकड़े जाने की गुंजाइश पूरी तरह से बढ़ जाएगी इसलिए वह धीरे से रोशनदान के पास पहुंचे और फूंक मार के रोशनी को बंद कर दिए और यही वह दूसरी रोशनदान के पास के और वह पर भी फूंक मार कर रोशनी को बंद कर दिया कमरे में पूरी तरह से अंधेरा जा चुका था और महारानी एक बार चुदवाने के बाद घोड़े बेचकर सो रहे थे,,,, सूरज के पिताजी जानते थे की औरत भले ही कितनी गहरी नींद में हो अगर उसके कोमल अंग पर हाथ रख दे तो तुरंत उसकी नींद खुल जाती है और ऐसा होना यहां पर भी मुमकिन था और इसके लिए अंधेरा करना बेहद जरूरी था और बेहद उत्तेजनात्मक स्थिति में भी खामोश रहना भी बहुत जरूरी था,,,।

कमरे में पूरा अंधेरा करने के बाद सूरज के पिताजी धीरे से बिस्तर के पास पहुंचे और वैसे भी अब अपने हाथों से महसूस करके महारानी की जवानी का आनंद लूटना था और बिस्तर पर बैठकर हल्के सेवा अपने हथेली महारानी की उभरी हुई मदमस्त कर देने वाली जवानी से भरी हुई गांड पर रख दिए,, हथेली गांड पर रखते ही सूरज के पिताजी के बदन में उत्तेजना का तूफान उठने लगा उन्हें एहसास होने लगा कि वाकई में महाराज की महारानी कितनी गर्म औरत है उसकी गांड की गर्मी सूरज के पिताजी अपनी हथेली में महसूस कर रहे थे,,, और हल्के हल्के उसे सहला रही थी वाकई में इस समय महारानी की गांड रुई से भी ज्यादा मुलायम और नरम महसूस हो रही थी,,,, महारानी की गांड को सहलाने में सूरज के पिताजी को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उन्हें बहुत मजा आ रहा था पर निश्चित थे क्योंकि जानते थे कि महाराज इतनी जल्दी आने वाले नहीं है,,,,।

गांड को सहलाते हुए सूरज के पिताजी पजामे के ऊपर से अपने लंड को भी दबा रहे थे क्योंकि वह बेकाबू हुआ जा रहा था,,,, देखते ही देखते हथेली का दबाव महारानी के नितंबों पर बढ़ने लगा और इसकी वजह से महारानी के बदन में कसमाशाहट भी महसूस होने लगी और जैसे ही सूरज के पिताजी अपने हथेली को अपनी उंगलियों को गांड के बीचों बीच की पतली दरार में प्रवेश करने लगे वैसे ही महारानी के बदन में कसमसाहट बढ़ने लगी,,,, और वह धीरे से अपनी जांघों को हल्का सा खोल दी सूरज के पिताजी यही चाहते ही थे,,,, देखते ही देखते सूरज के पिताजी की उंगलिया महारानी के बदन के सबसे बेशकीमती खजाने पर पहुंच चुकी थी,, महारानी की बुर पर उंगली का स्पर्श होते ही सुरज के पिताजी की हालत एकदम से खराब होने लगी उम्मीद से कहीं ज्यादा तपन महारानी की बुर में महसूस हो रहा,, सूरज के पिताजी की हालत खराब होने लगी उनसे रहा नहीं जा रहा था वह महारानी की बुर को अपनी हथेली में दबोच लेना चाहते थे,,,, लेकिन ऐसा तुरंत करने पर महारानी की नींद एकदम से टूट सकती थी,,,, और ऐसे में बना बनाया काम भी कर सकता था और सूरज के पिताजी ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहते थे वह पूरी तरह से नींद में होने के बावजूद भी महारानी को गर्म कर देना चाहते थे।

और ऐसा ही हुआ यहां पर सूरज के पिताजी का अनुभव बहुत काम आ रहा था वह अपनी उंगलियों से ही महारानी की बुर को कुरेद रहे थे,,,, जिससे महारानी के बदन में उत्तेजना का एहसास हो रहा था भले ही वह गहरी नींद में थी लेकिन फिर भी उसे बहुत मजा आ रहा था ऐसा करते हुए एक हाथ से सूरज के पिताजी अपनी कमीज उतार कर एक तरफ रख दिए थे,,,,,,, धीरे-धीरे उत्तेजना का एहसास महारानी के बदन में बढ़ता जा रहा था वह मदहोश हुए जा रही थी,,,,, और देखते ही देखते सूरज के पिताजी महारानी की बुर में अपनी बीच वाली उंगली को अंदर प्रवेश कर कर उसे अंदर बाहर कर रहे थे ऐसे में महारानी का मजा बढ़ता जा रहा था अब वह धीरे-धीरे नींद से बाहर आ रही थी,,,, क्योंकि महारानी के मुंह से हल्की-हल्की अब सरकारी की आवाज आ रही थी और यही तो सूरज के पिताजी चाहते थे वह समझ गए थे कि उनकी हरकत का महारानी और पूरी तरह से मजा ले रही थी,,,।

लेकिन अभी भी वह हल्की नींद में थी और पूरी तरह से नींद से बाहर लाने के लिए अभी भी सूरज के पिताजी को काफी मशक्कत करना था वह अपनी हथेली को महारानी की नंगी चिकनी पीठ पर रखकर उसे हल्के से सहलाते हुए अपनी बीच वाली उंगली को लगातार महारानी की बुर के अंदर बाहर कर रहे थे इस तरह से सूरज के पिताजी को भी मजा आ रहा था और महारानी भी आनंद के सागर में डूबती चली जा रही थी और देखते ही देखते सूरज के पिताजी अपनी दूसरी उंगली को भी उसकी बुर की गहराई में उतार कर अंदर बाहर करने लगे थे वह काफी चिपचिपी हो चुकी थी,,,, अब महारानी आनंद के सागर में गोते लगाने के लिए तैयार होती जा रही थी क्योंकि वह पूरी तरह से नींद से जाग चुकी थी लेकिन अपनी आंखों को अभी भी बंद किए हुए थे क्योंकि सूरज के पिताजी की उंगलियां उसके बदन में मदहोशी का रस घोल रही थी जिससे वह अपनी आंखों को खोल नहीं पा रही थी,,,,।

सूरज के पिताजी लगातार अपनी उंगलियों को उसकी बुर के अंदर बाहर कर रहे थे वह पागल हुए जा रही थी और उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसके मुख से निकल रही शिसकारी की आवाज को सुनकर सूरज के पिताजी की हिम्मत बढ़ती जा रही थी,,,, और अगले ही पर सूरज के पिताजी अपने प्यासे होठों को उसकी गांड की दरार के बीचों बीच रखकर ऊपर से ही उसे पर चुम्मा लेने लगे,,,, जैसे ही महारानी को एहसास हुआ कि उनकी गांड के उपर होठ का स्पर्श हो रहा है,, वह और भी ज्यादा बावली होने लगी। महारानी का बदन कसमसाने लगा,,, वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को कसमाशाहट भरी हलनचलन करवा रही थी,,, यह उत्तेजना का असर था सूरज के पिताजी समझ गए थे की महारानी को मजा आ रहा है,,, बस यही वह चाहते थे की महारानी बिस्तर पर लेटे-लेटे बस गरमा गरम शिसकारी लेते रहे गरम आहे भरते रहे बस बोले कुछ नहीं,,,,,, कमरे में राजा साहब की बीवी की मदहोश कर देने वाली शिसकारी की आवाज गुंजने लगी थी,, सूरज के पिताजी उसकी किसी कार्य की आवाज सुनकर मदहोश हुए जा रहे थे अत्यधिक उत्तेजना का अहसास उन्हें होने लगा था क्योंकि इस तरह की गरमा गरम सिसकारी की आवाज अभी तक वह किसी भी औरत के मुंह से नहीं सुन पाए थे राजा साहब की बीवी की बात ही कुछ और थी,,।

अभी तक सूरज के पिताजी नितंबों के ऊपर ऊपर ही चुंबन कर रहे थे अभी तो निचले स्थान पर जाना बाकी था जहां पर जीवन का असली सुख छुपा हुआ था संभोग का केंद्र बिंदु था,,, जब सूरज के पिताजी को लगने लगा कि राजा साहब की बीवी के बदन में कम से हाथ बढ़ने लगी थी ऐसे में वह कुछ भी बोल सकती थी तो वह धीरे-धीरे अपने होठों को नीचे की तरफ ले जाने लगे,,,, अब सूरज के पिताजी को लगने लगा था कि वाकई में राजा साहब की बीवी की गांड को ज्यादा ही बड़ी-बड़ी है क्योंकि उसका उठाओ कुछ ज्यादा ही था और नीचे अपने होंठ को ले जाते समय ऐसा लग रहा था कि जैसे वह किसी खाई में अपने होठों को ले जा रहे हैं,,,, महारानी की हालत खराब है जा रही थी आंखें मदहोशी में पूरी तरह से बंद थी,, इसलिए महारानी को एहसास ही नहीं हो रहा था कि कमरे में रोशनी है या नहीं अगर वह आंख खोल भी देती तो पता नहीं चलता कि उनके बिस्तर पर कौन है वह तो अभी तक राजा साहब को ही समझ रही थी,,,।

और वैसे भी महारानी के पास शंका करने की कोई वजह नहीं थी क्योंकि वह राजा साहब को अच्छी तरह से जानती थी उनके कक्ष में किसी गैर मर्द का प्रवेश करना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन था यही सब वजह थी की महारानी को शंका करने की कोई वजह नहीं मिली थी कि एक बार चुदाई करने के बाद भी दूसरी बार उसके महाराज उसके साथ हम बिस्तर होने के लिए कैसे तैयार हो गए वैसे यह वर्षों के बाद हुआ था इसीलिए रानी पूरी तरह से उत्तेजित और बेहद खुश नजर आ रही थी वह पूरी तरह से नींद से बाहर आ चुकी थी लेकिन आंख खोलने में बिल्कुल भी समर्थ नहीं थी,,,, सूरज के पिताजी अपना पूरा अनुभव जो झोंक दे रहे थे। गहरी गहरी सांसों के साथ-साथ महारानी के गोलाकार नितंब भी ऊपर नीचे हो रहे थे और सूरज के पिताजी धीरे-धीरे उसकी दोनों जांघों के बीच अपने मुंह को लेते चले जा रहे थे जैसे-जैसे वह महारानी की गुलाबी छेद के करीब पहुंच रहे थे वैसे-वैसे उसमें से मादक खुशबू सूरज के पिताजी के नथुनों में प्रवेश कर रही थी और वह खुशबू उन्हें एकदम बावला बना रही थी उन्हें इस बात का एहसास था कि कुछ देर पहले राजा इसी बुर में अपने लंड को डालकर चुदाई किया था महारानी के बदन रस के साथ-साथ राजा के लंड से निकला पानी में उसमें मिश्रित होगा लेकिन अब यह सब जानकर भी सूरज के पिताजी को पीछे कम लेना भारी पड़ सकता था और इस बात को जानते हुए वह ऐसी गलती कभी नहीं करना चाहते थे और वैसे भी रानी की मदमस्त कर देने वाली जवानी की मदहोशी में वह पूरी तरह से डूब चुके थे इसलिए अब कोई फर्क नहीं पड़ता था कि कुछ देर पहले रानी की बुर में किसका लंड घुसा हुआ था,,,,।


ओहहहहह मेरे राजा यह क्या हो गया है तुमको,,,,(ऐसा कहते हुए महारानी अपने एक हाथ को पीछे की तरफ लाते हुए सूरज के पिताजी के मजबूत कंधों पर रख दी,,, महारानी के मुंह से निकला यह शब्द सूरज के पिताजी की उत्तेजना को तो बड़ा ही रहा था लेकिन उनके किए कराए पर पानी भी फेर सकता था रानी की बोलती बंद करने का अब एक ही रास्ता था जो की सूरज के पिताजी के होठों के ठीक सामने था सूरज के पिताजी जानते थे की औरत की बोलती कि वक्त बंद हो जाती है अगर वह इस समय उसे युक्ति को नहीं आजमाएंगे तो महारानी बात करना शुरू कर देगी और ऐसे में सूरज के पिताजी का भांडा फूट सकता है,,,, इसलिए सूरज के पिताजी बिल्कुल भी तेरी नहीं करना चाहते थे और ना ही कोई गलती करना चाहते थे बहुत तुरंत अपने पैसे होठों को महारानी की दहकती हुई बुरके ऊपर एकदम से सटा दिए और उसे पर चुंबन करने लगे,,,।

महारानी पूरी तरह से मदहोश हो गई और कभी सोचा भी नहीं थी कि राजा साहब उसकी बुर पर इस तरह से चुंबन करेंगे,,,,, क्योंकि बरसों बीत चुके थे महारानी से इस तरह से राजा साहब प्यार नहीं किए थे बड़े उसकी चुदाई करते थे लेकिन उसकी बुर पर चुंबन करना छोड़ दिए थे,,,, इसलिए तो महारानी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,, और इसलिए उसकी बोलती भी एक दम से बंद हो गई थी,,, सूरज के पिताजी अपने होठों को दबाओ उसकी गुलाबी छेद पर बढ़ते हुए अपनी जीत निकाल कर उसमें प्रवेश कर कर उसे चाटना शुरू कर दिए थे सूरज के पिताजी की इस हरकत को महारानी पूरी तरह से बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और तुरंत सूरज के पिताजी के कंधे पर से अपने हाथ को हटाकर आगे की तरफ ले आई और तकिया को जोर से दबोच कर पकड़ ली थी और गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकालने लगी थी,,,, इस बीच सूरज के पिताजी अपने बीच वाली उंगली को लगातार उसकी बुर के अंदर बाहर कर रहे थे जिसमें से मदन रस बार-बार बाहर की तरफ झटक दे रहा था,,,,। और सूरज के पिताजी बड़े चावल से उसे मदन रस को अपने गले के अंदर गटक जा रहे थे।

सूरज के पिताजी कभी सपने में भी नहीं सोचे थे कि वह किसी महारानी के बिस्तर पर इस तरह से मजा लूटेंगे और वह भी महारानी के साथ कुछ देर पहले ही वह एकदम शराबी घर फटे हालत में थे और कुछ देर बाद देखो वहां महारानी के बिस्तर पर महारानी के साथ ही रंगरेलियां बना रहे थे यह थी किस्मत,,, महारानी की गुलाबी बुर इस समय दुनिया की सबसे हसीन और बेश कीमती खजाना जान पड़ रहा था जो सूरज के पिताजी की मुट्ठी में कैद हो चुका था इस खजाने को वह अपने आप से दूर नहीं करना चाहते थे इस खजाने का पूरा मजा लेना चाहते थे,,,, देखते ही देखते सूरज के पिताजी पागलों की तरह महारानी की बुर को चाटना शुरू कर दिया महारानी मदहोश में जा रही थी वह बिस्तर पर करमा जा रहे थे बिस्तर पर किसी चादर को दोनों मुट्ठी में जोर से पकड़ कर वह अपनी उत्तेजना को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा था महारानी के बदन की कसमसाहट खास करके उसके नितंबो से प्रतीत हो रही थी,,। उसमें कुछ ज्यादा ही थिरकन थी,, जिसे सूरज के पिताजी दोनों हाथों से पकड़ कर उसे काबू में करने की कोशिश कर रहे थे इसमें महारानी की गांड को दोनों हाथों से पकड़ने में भी एक अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था,,,,, महारानी की गांड तेरी बड़ी थी कि उसकी दोनों फांको के बीच सूरज के पिताजी का चेहरा एकदम ढंक सा गया था। महारानी बिस्तर पर तड़प रही थी मदहोश हो रही थी उसकी बुर में आग लगी हुई थी वह जल्द से जल्द अपने राजा के लंड को अपनी बुर में महसूस करना चाहती थी इसलिए वह बोली,,,।

ओ मेरे राजा मैं तो पागल हो जाऊंगी आज क्या हो गया है आपको कुछ खा लिए हो क्या अभी कुछ देर पहले तो चुदाई करके गए थे फिर से तुम्हारा मन हो गया,,,, लेकिन आप मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है मेरे राजा जल्दी से अपने लंड को मेरी बुर में डाल दो मेरी प्यास को बुझा दो ,,,आज तो आपने कमाल कर दिया है,,आहहहहहहह राजा मेरे महाराज,,,,,ओहहहहहबह,,,।

महारानी कि ईस तरह की बातें सुनकर सूरज के पिताजी मदहोश हुए जा रहे थे लेकिन अंदर ही अंदर घबरा भी रहे थे की कही रानी को जवाब ना देना पड़ता है अगर ऐसा हो गया तो रानी को पता चल जाएगा कि उसके बिस्तर पर उसके राजा नहीं बल्कि कोई गैर मर्द है,,,, और वैसे भी महारानी को रत्ती भर शक नहीं हो रहा था कि उनके बिस्तर पर उसके महाराज नहीं बल्कि गांव का कोई गरीब आदमी है मजदूर आदमी है अगर ऐसा वह जान जाए तो इसी समय उसकी जान ले ले लेकिन सूरज के पिताजी काफी चालाक नजर आ रहे थे और बेहद चालाकी भी दिखा रहे थे,,,, एहसास हो गया की महारानी पूरी तरह से तड़प रही है चुदवाने के लिए तो वह बिल्कुल भी देर किए बिना एक हाथ से अपनी धोती को उतार कर एक तरफ रख दिए ताकि जाते समय बड़े आराम से उसे पहन कर जा सके,,,,, एक हाथ से वह अपनी धोती उतार कर पूरी तरह से नंगा हो चुका था जैसा की महारानी बिस्तर पर नंगी लेटी हुई थी,,,,।

देखते ही देखते सूरज के पिताजी अपने लिए जगह बनाने लगे और उसके बड़ी-बड़ी गांड के नीचे इस स्थिति में वह पेट केवल लेटी हुई थी और अपनी दोनों टांगों को उसकी मोटी मोटी जांघो को खोलकर उसके बीच में रखते हुए अपने मोटे तगड़े लंड को उसके गुलाबी छेद पर लगाकर धीरे-धीरे अंदर की तरफ धक्का मारने लगे,,, देखते ही देखते सूरज के पिताजी का लंड महारानी की बुर के अंदर प्रवेश करना शुरू कर दिया,,, इस समय सूरज के पिताजी को ऐसा एहसास हो रहा था कि मानो जैसे वह स्वर्ग के अंदर प्रवेश कर रहे हो क्योंकि महारानी उनकी सोच से भी दूर थी वह कभी महारानी के साथ संबंध बनाने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे क्योंकि वह अपनी हैसियत को जानते थे लेकिन आज अपनी हैसियत से आगे निकल चुके थे आज वह महारानी के कच्छ में उसके ही बिस्तर पर उसकी ही चुदाई कर रहे थे। वाकई में अगर इंसान को उम्मीद से दुगना मिल जाए तो वह अपनेआप को महाराजा समझने लगता है और वही स्थिति ईस समय सूरज के पिताजी की थी।

देखते ही देखते सूरज के पिताजी अपने पूरे लंड को महारानी की बुर के अंदर प्रवेश करा दिए थे और महारानी की बड़ी-बड़ी और नरम नरम गांड को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिए थे इस स्थिति में महारानी की चुदाई करने में सूरज के पिताजी को बहुत मजा आ रहा था वह पागल हुए जा रहे थे इतना मजा उन्हें आज तक अपनी बीवी के साथ नहीं आया था और वैसे भी किसी औरत के साथ कितना ज्यादा मजा मिलता है यह मर्द की सोच पर और हालात स्थान और पद पर आधारित होता है,,, मतलब की औरत का पद क्या है,,,, इस समय बिस्तर पर सूरज के पिताजी जिसकी चुदाई कर रहे थे वह महारानी थी इसलिए सूरज के पिताजी की उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ गई थी और उन्हें ऐसा ही महसूस हो रहा था की महारानी के साथ ही ज्यादा मजा मिल रहा है और ऐसा कभी क्योंकि महारानी का बदन भी एकदम मांसल और गदराया हुआ था,,,,।

सूरज के पिताजी की हर धक्के का माया महारानी ले रही थी इस तरह का मजा उन्हें अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि राजा के साथ पहले कभी नहीं प्राप्त हुआ था इस समय वह अपने बिस्तर पर चुदाई करने वाले इंसान को अपना पति ही समझ रही थी इसलिए उन्हें इस बात से थोड़ा अचंभित हो रहा था कि राजा इतने अच्छे से कैसे चुदाई कर रहा है,,,, लेकिन इस पल को वह पूरी तरह से जी लेना चाहती थी पीछे से चुदवाने में महारानी को कुछ ज्यादा ही मजा आता था सूरज के पिताजी दोनों हाथों से उसकी भारी भरकम गांड को पकड़ कर धक्के पर धक्का लगा रहे थे,,,, कुछ देर तक सूरज के पिताजी इसी तरह से महारानी की चुदाई करते रहे और महारानी भी पूरी तरह से मजा लूट रही थी और पानी छोड़ रही थी जिसके चलते महारानी की बुर पूरी तरह से गली और चिपचिपी हो गई थी जिसमें बड़े आराम से सूरज के पिताजी का लंड अंदर बाहर हो रहा था और फच्च फच्च की आवाज आ रही थी,,,।

कुछ देर तक इसी तरह से चुदाई करने के बाद सूरज के पिताजी अपना आसन बदलना चाहते थे जिस तरह से महारानी मजा लूट रही थी वह समझ गए थे कि अभी कुछ बोलने वाली नहीं है और वैसे भी कमरे में पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था एक दूसरे का चेहरा देखना नामुमकिन था लेकिन इस बात का डर था कि अगर महारानी उत्तेजित अवस्था में उसे अपनी बाहों में भर लेंगे तो शायद राजा के बदन की बनावट और उसके बदन की बनावट में भेद पता चलने लगेगा और ऐसे में उसके पकड़े जाने का डर बना रहा था लेकिन फिर भी सूरज के पिताजी अपने मन में युक्ति सोचने लगे और धीरे से अपने लंड को महारानी के पिछवाड़े से बाहर निकले और उसकी स्थिति को बदलने लगे उसे पीठ के बल लेट आने लगे,,, स्थिति को देखकर महारानी भी पीठ के बल लेट गई और अपनी दोनों टांगों को खोल दे सूरज के पिताजी उसकी दोनों टांगों के बीच जाकर उसकी गुदाज कमर में अपने दोनों हाथ को डालकर से अच्छी तरह से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसकी नंगी बड़ी-बड़ी आधी गांड को अपनी जांघों पर चढ़ा लिए,,,, और फिर एक बार अपने लंड को उसकी गुलाबी छेद में डालकर धक्का लगाते हुए उसके ऊपर पूरी तरह से झुकने लगे और उसके दोनों हाथों को पकड़कर वह बिस्तर से सटा दिए ताकि वह उन्हे अपनी बाहों में ना भर सके।

सूरज के पिताजी महारानी की दोनों कलाइयों को पकड़ कर धक्के पर धक्कालग रहे थे,,, महारानी की हालत खराब होती जा रही थी वह पागल हुए जा रही थी इतनी गजब की इतनी जबरदस्त चुदाई आज तक राजा साहब ने उसकी नहीं किए थे इसलिए तो वह एकदम मस्त भेज रही थी आज वह राजा साहब पर पूरी तरह से फिदा हो गई थी लेकिन वह नहीं जानती थी कि उसे चोदने वाला उनका पति नहीं बल्कि गांव का मजदूर है इसीलिए शायद मजदूर होने के कारण उसमें दम खम ज्यादा है,, आखिरकार महारानी अपने चरम सुख के करीब पहुंचने लगी और उसकी शिसकारी की आवाज एकदम से बढ़ने लगे सूरज के पिताजी उसके लाल लाल होठों का चुंबन करना चाहते थे लेकिन ऐसा करना खतरे से खाली नहीं था। इसलिए अपनी इच्छा को वह अपने अंदर दबा लिए क्योंकि इस समय भी उन्हें बहुत कुछ मिल चुका था किस्मत उन पर पूरी तरह से मेहरबान हो चुकी थी अब थोड़े से लिए वह खतरा मोल नहीं लेना चाहते थे सूरज के पिताजी भी चरम सुख के बेहद करीब पहुंच चुके थे इसलिए उनके धक्के एकदम तेज हो चुके थे,,,, और देखते ही देखते दोनों का एक साथ पानी निकल गया सूरज के पिताजी इसके बावजूद भी महारानी के बदन पर पसर नहीं गए थे बल्कि अपने आप को एकदम से रोके रह गए थे और जब तक पूरा पानी महारानी की बुर में उत्तर नहीं दिया तब तक अपने लंड को उसके घर से बाहर नहीं निकाले,,,,।

सूरज के पिताजी का मन अभी भरा नहीं था वह महारानी की और भी ज्यादा चुदाई करना चाहते थे लेकिन अब यहां पर ज्यादा देर रुकना उचित नहीं था वैसे तो राजा साहब सुबह होने से पहले आने वाले नहीं थे लेकिन फिर भी अगर ज्यादा देर रुकना होगा तो दोनों के बीच से बातचीत होना लाजमी है ज्यादा देर तक वह चुप नहीं रह सकते थे क्योंकि उनकी खामोशी महारानी के मन में शंका पैदा कर सकती थी इसलिए वह धीरे से अपने लंड को बाहर निकाल कर वहीं बिस्तर पर कुछ देर के लिए बैठ गए क्योंकि वह जानते थे की महारानी की भारत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी वह एकदम मस्त हो चुकी थी और गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी स्थिति को संभाल रही थी,,,,।

इतनी संतुष्टि भरी चुदाई करवा कर महारानी को बिल्कुल भी होश नहीं था वह अपनी आंखों को बंद किए हुए गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,, एकदम संतुष्ट होने की वजह से कुछ ही देर में वह नींद की आंखों में चली गई और यही मौका था महारानी के कमरे से बाहर निकलने का और यही मौका देकर सूरज के पिताजी धीरे से बिस्तर पर से उठे और अपने कपड़े ढूंढ कर पहनकर धीरे से इस तरह से दरवाजा खोल कर बाहर निकल गई और बाहर आकर तख्ते पर कल के साथ एक अद्भुत मुस्कान के साथ सो गए,,,।
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Ajju Landwalia

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गांव से आई हुई औरत उन दोनों के साथ में चलने लगी हालांकि चलते समय वह घुंघट से अपने चेहरे को छुपाने की पूरी कोशिश कर रही थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कोई उसे पहचाने इसलिए तो वह रात में आई थी,, और वैसे भी अंधेरा इतना घना था कि चाह कर भी उसका चेहरा देखा नहीं जा सकता था बस उसके चूड़ियों की खनक और पायलों की जनक की आवाज से उसके होने का अंदेशा हो रहा था, और वैसे भी चूड़ियों की खनक बता देती है औरतों की खूबसूरती,, चूड़ियों की खनक से मर्द की उत्तेजना बढ़ जाती है और इस समय सूरज के पिताजी के साथ भी ऐसा हो रहा था,,, सूरज के पिताजी उसे औरत का नाम गांव पूछने की बिल्कुल भी जेहमत नहीं कर रहे थे,, लेकिन कल्लु उसे औरत के बारे में जानने की मंशा जताते हुए उसे औरत से बोला,,,

नाम क्या है तुम्हारा,,,?

जानकर क्या करोगे वैसे भी मैं नाम बताने वाली नहीं हूं,।

अगर नाम बता देगी तो तेरा कुछ बिगड़ जाएगा क्या,,,?

मैं राजा साहब से पहले ही बोल चुकी हूं कि मेरा नाम गांव और मेरे बारे में सारी बातें गुप्त होनी चाहिए तभी तो मैं यहां आने के लिए तैयार हूं और वैसे भी तुम दोनों जानते होंगे कि मैं यहां किस लिए आई हूं राजा साहब ने मुझे इतनी रात को क्यों बुलाया है,।

इसमें कोई शक नहीं है हम लोगों का काम ही यही है राजा साहब के इशारे पर गांव की खूबसूरत औरतों को उनके पास ले जाना,,,,(कल्लू मुस्कुराता हुआ बोला और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बोला,,,) लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आता कि तुम्हारे बारे में किसी ने बताया था या राजा साहब खुद तुमसे मिले थे,,,।

यह सब जानकर क्या करोगे,,,,(उसे औरत ने सीधा और सपाट उत्तर दिया यह सुनकर सूरज के पिताजी बोले)

जाने दे यार क्यों परेशान कर रहा है अगर वह अपने बारे में कुछ नहीं बताना चाहती तो क्यों उससे पूछ कर अपना ही दिमाग खराब कर रहा है उसकी कोई मजबूरी होगी,,,, तभी तो हुआ इतनी रात को राजा साहब के पास जाने के लिए तैयार हुई है अब ज्यादा परेशान मत कर,,,,।


देखा तुमसे ज्यादा समझदार तो यह है,,, अपने काम से काम रखते हैं,,,,।

चल रहने दे अब ज्यादा उड़ मत थोड़ी देर में राजा साहब तेरा कबूतर उड़ा देंगे,,,,(बेशर्मी से बेशर्मी भरी बातें करके कल्लू हंसने लगा,,, उस औरत के पास कल्लू की बदतमीजी का कोई जवाब नहीं था,,, क्योंकि वह काम ही कुछ ऐसा करने जा रही थी अब वह मजबूरी में करने जा रही थी आप किसी शौक से या किसी दबाव में आकर यह तो वही जानती थी लेकिन अपने इस कार्य के लिए वह सफाई नहीं दे सकती थी इतना तोता इसलिए वह कुछ बोली नहीं बस चुपचाप चलती रही,,,, थोड़ी ही देर में तीनों राजा साहब की कोठी पर पहुंच चुके थे लेकिन कहां पर लेकर जाना है उसे औरत को यह सूरज के पिताजी को नहीं मालूम था इसलिए वह खड़ा होकरबोला,,,।

आप कहां ले जाना है कल्लु,,,।

यहां नहीं जाना है कोठी के पीछे जाना पड़ेगा वही राजा साहब औरतों की चुदाई करते हैं,,,(कल्लु जानबूझकर चुदाई शब्द का प्रयोग कर रहा था,,,, उसे औरत को उसकी बात पर गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी और वैसे भी वह राजा साहब के साथ हम बिस्तर होने के लिए बड़ी मजबूरी में आई थी,,, उसे पैसों की जरूरत थी और उसके पास पैसे नहीं थे पति शराबी था वह बिल्कुल भी कमाता नहीं था,,,, उस औरत के ऊपर उधारी भी हो चुकी थी और उसकी जमीन भी गिरवी पड़ी थी जिसके चलते उसे इस कार्य को करने के लिए अपने मन को मनाना पड़ा वरना वह इस तरह का काम करने के लिए कभी तैयार नहीं थी और वैसे भी उधारी की रकम को ज्यादा नहीं थी इसीलिए तो राजा साहब तैयार हो गया था उसे रकम देने के लिए अगर ज्यादा रकम होती तो इस काम के लिए वह कभी इतना ज्यादा रकम नहीं देता,,, कल्लू की बात सुनकर सूरज के पिताजी बोले,)

तू आगे आगे चल,,, हम तेरे पीछे चलते हैं क्योंकि मुझे नहीं मालूम कि कहां जाना है,,,।

ठीक है,,(और इतना कहकर वह आगे आगे चलने लगा सूरज के पिताजी उस औरत के साथ पीछे-पीछे चलने लगे सूरज के पिताजी को इतना तो समझ में आ रहा था कि एक माना जाना जमीदार पैसे वाला इस कार्य के लिए अपनी बीवी की मौजूदगी में अपने कोठी का उपयोग तो बिल्कुल भी नहीं करेगा वैसे सूरज के पिताजी को इतना तो मालूम था कि इस तरह की अय्याशी करने के लिए गांव के बाहर एक गोदाम था जिसमें अब वह खुद कल्लु के साथ मिलकर अय्याशी किया करता था,,, लेकिन इस समय उस गोदाम का उपयोग होने वाला नहीं था अगर ऐसा होता तो कल उसे औरत को उस गोदाम पर ही लेकर जाता यहां कोठी पर लेकर नहीं आता,,,,, तीनों चलते हुए कोठी के पीछे के मकान में पहुंच चुके थे जो की ईंधन रखने के काम में आता था और पशुओं के लिए घास जा रहा है रखे जाने के लिए उपयोग में लिया जाता था,,, इस जगह पर राजा साहब दूसरी औरतों के साथ अय्याशी करते होंगे इस बारे में तो महारानी को भी भनक तक नहीं होगी,, यह राज राजा साहब के कुछ खास लोग ही जानते थे जिनमें से कल्लु एक था और अब सूरज के पिताजी भी उनमें से एक बन चुके थे,,।

थोड़ी ही देर में तीनों कोठी के पीछे वाले मकान पर पहुंच चुके थे लेकिन अभी तक जहां पर राजा साहब का कोई पता ठिकाना नहीं था,,,, यह देखकर कल्लु बोला,,,।

यार अभी तक राजा साहब नहीं आए काफी देर हो गई है मुझे तो लगा आ गए होंगे,,,।

समय तो लगेगा ही आखिरकार बिस्तर पर जवानी से भरी हुई महारानी जो है उसकी प्यास बुझाने में समय तो लगता ही होगा,,,(सूरज के पिताजी मुस्कुराते हुए बोले तो उसकी बातें सुनकर कल्लु फिर से इधर-उधर देखने लगा और बोला,,,)

यार फिर से तो शुरू हो गया तू सच में मरवाएगा तुझे कितनी बार बोला हूं कि इस बारे में बिल्कुल भी बात मत किया कर,।

आप क्या करूं यार महारानी है इतनी खूबसूरत क्यों उसे देखा हूं तब से मेरा दिमाग काम करना बंद कर दिया है मुझे तो समझ में नहीं आता की मर्द की जात क्या होती है अप्सरा जैसी औरत बिस्तर पर होने के बावजूद भी हुआ है दूसरी औरतों के साथ मजा लूटने के लिए पागल हुआ जा रहा है,,,।

अरे बुद्धू मैंने कुछ देर पहले ही तेरा ही उदाहरण दिया हूं ना तेरी बीवी भी तो अप्सरा से काम नहीं है लेकिन तू बाहर मुंह मारता है कि नहीं,,,।

छोड़ यार महारानी जैसी खूबसूरत नहीं है,,,।

अरे बेवकूफ तभी तो वह महारानी है और तेरी बीवी गांव की रानी है,,,। अब इन सब के बारे में छोड़ काफी देर हो रही है,,, कहीं ईस औरत को नींद आ गई तो राजा साहब का मजा किरकिरा हो जाएगा और लंड खड़ा का खड़ा रह जाएगा,,,।
(इतना कहकर फिर से हुआ हंसने लगा और वह औरत उसकी बात पर फिर से गुस्सा होने लगे लेकिन कुछ बोल नहीं पाई और अपने मन में सोच की राजा साहब तो क्या एक साथ तुम तीनों की प्यास बुझाने के लिए मैं काफी हूं और वैसे भी उसका यह बात अपने मन में सोचना लाजमी था क्योंकि वाकई में वह भी भला की खूबसूरत थी घूंघट में होने के बावजूद भी उसकी बनावट लालटेन की पीली रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रही थी और वह लालटेन घर के पीछे वाले मकान के बाहर ही टंगी हुई थी और जल रही थी,, सूरज के पिताजी लालटेन की पीली रोशनी में तिरछी नजरों से उसे औरत को भी देख ले रहे थे और सूरज के पिताजी का इस तरह से उसे औरत को देखने का मतलब साफ था कि उसे औरतों में भी आकर्षक और जवानी कुट-कूट कर भरी हुई थी,,,, अगर यह राजा साहब के लिए तोहफा ना होता तो इस तोहफे का पूरा उपयोग वह खुद कर लेता,,,, लेकिन वह मजबूर था क्योंकि उसका मन भी बेहद उत्तेजित था,,,,।

थोड़ी देर बाद और खड़े रहने के बाद राजा साहब छुपाते छुपाते हुए उसे तरफ आते हुए दिखाई दिए उन्हें देखकर सूरज के पिताजी बोले,,,)

वह देखो राजा साहब आ गए,,,,।
(सूरज के पिताजी की बात सुनकर वह औरत और कल्लु दोनों उस दिशा में देखने लगे,,, सूरज के पिताजी और कल तो राजा साहब को देखकर सहज थे लेकिन उस औरत के दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी,,, क्योंकि उसके जीवन का यह पहला क्षण था जब वह किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाने जा रही थी और वह भी बड़ी मजबूरी में अगर उसकी मजबूरी ना होती तो शायद वह इस तरह के कम कभी ना उठाती इसलिए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था थोड़ी ही देर में राजा साहब उन तीनों के करीब आ गए और उसे औरत को देखकर मुस्कुराते हुए बोले,,,)

अरे रानी अब घूंघट की क्या जरूरत है घूंघट उठा दो,,,।

माफी चाहती हूं राजा साहब लेकिन मे यह घूंघट सिर्फ आपके ही सामने उठाऊंगी,,,।

ओहहहहह ,,,, लाज शर्म,,,,, मुझे तुम्हारा यह अंदाज बहुत अच्छा लगा और वैसे भी लाज शर्म वाली औरत को छोड़ने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है,,,,,(राजा साहब एकदम उत्साहित होते हुए बोले लेकिन उनके द्वारा कहां गया यह शब्द उसे औरत के दिल पर हथौड़े की तरह चल रहा था,,,, अगर उसकी मजबूरी ना होती तो वह राजा साहब को भी लात मार कर चली गई होती लेकिन वह कुछ कर नहीं सकती थी और राजा साहब ने भी उसकी इस मर्यादा की लाज को रखते हुए बोले)

कोई बात नहीं जैसी तुम्हारी मर्जी,,,, थोड़ी देर बाद ही तुम्हारे बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं होगा घूंघट तो दूर की बात है तब मैं तुम्हारी खूबसूरत चेहरे को तुम्हारे चेहरे के हाव-भाव को देखता हुआ मजा लूटुंगा,,,, अब तुम दोनों जा सकते हो,,,,,।


ठीक है मालिक लेकिन इस औरत को छोड़ने जाना पड़ेगा,,,,(कल्लु दोनों हाथ जोड़े हुए राजा साहब से बोला,,,)

नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ेगी मैं इसके साथ ज्यादा समय बिताऊंगा और सुबह होने से पहले यह खुद अपने घर चली जाएगी क्यों चली तो जाओगी ना या इन लोगों को तुम्हारे साथ भेजना होगा,,,।

जी नहीं राजा साहब में चली जाऊंगी,,,,।

ठीक है अब तुम दोनों जाओ अगर घर जाना हो तो घर चले जाना वरना वही सो जाना,,,,

ठीक है मालिक,,,,(इतना कहकर कल्लु और सूरज के पिताजी दोनों वहां से चलते बने अब घर जाने का कोई मतलब नहीं था इसलिए उन दोनों ने वही तख्ते पर सोने का फैसला किया था,,,, राजा साहब उसे औरत का हाथ पकड़ कर मकान के अंदर ले जाने लगे और बाहर जल रही लालटेन को अपने हाथ में लेकर कमरे में प्रवेश कर गए जहां पर चारों तरफ ईंधन और घास फूस रखा हुआ था,,, वह औरत शर्म से पिघलती चली जा रही थी,,,।

दूसरी तरफ तख्ते पर लेटे हुए दोनों कुछ देर तक इधर-उधर की बातें करते रहे और थोड़ी देर बाद कल्लु गहरी नींद में सो गया और उसके सो जाने का ही इंतजार सूरज के पिताजी कर रही थी क्योंकि सूरज के पिताजी के मन में कुछ और चल रहा था वह उठकर बैठ गई और जब देखे की कल्लु गहरी नींद में सो रहा है तो वह धीरे से तख्ते पर से उठकर खड़े हो गए और दबे पांव कोठी की तरफ आगे बढ़ने लगे,,,, सूरज के पिताजी के मन में बहुत कुछ चल रहा था,,, आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था,,, सिर्फ कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी और कोठी के अंदर नौकर नौकरानी भी गहरी नींद में सो रहे थे।

इधर-उधर देखते हुए सबसे नजर बचाते हुए यह तसल्ली कर लेने के बाद कोई उसे देख तो नहीं रहा है वह धीरे से कोठी के अंदर प्रवेश करने लगे कोठी का दरवाजा सिर्फ बंद किया हुआ था उसकी कड़ी खुली हुई थी यह देखकर सूरज के पिताजी का दिल झूम उठा और वह धीरे से कोठी के अंदर प्रवेश कर गए कोठी के अंदर प्रवेश करते ही वह चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगे वाकई में बेहद आलीशान कोठी बनी हुई थी कोठी में बहुत ही बेस्ट कीमती सजावट के सामान रखे हुए थे जिसे कोठी की सुंदरता और ज्यादा बढ़ गई थी,,,।

जगह-जगह पर रोशनी के लिए रोशनदान बने हुए थे कोटी के बीचो-बीच से सीढ़ी ऊपर की तरफ जाती थी इतना तो सूरज के पिताजी को मालूम था कि अब उसे क्या करना है वह धीरे से सीढ़ियां चढ़ने लगी जैसे-जैसे सीढ़ियां चढ़ रहे थे वैसे-वैसे उनके दिल की धड़कन भी बढ़ती जा रही थी उन्हें मालूम नहीं था कि वह क्या करने जा रहे हैं लेकिन अपने मन पर वह काबू नहीं कर पाए थे जिसके चलते उन्हें न चाहते हुए भी यह कदम उठाना पड़ रहा था,,, धीरे-धीरे करके सूरज के पिताजी सारी सीढ़ियां चढ़कर दूसरे मंजिले पर पहुंच चुके थे,,, दूसरे मंजिले पर भी सजावट की बहुत अच्छी व्यवस्था थी चारों तरफ कीमती सजावट का सामान रखे हुए थे,,, और यह देखकर सूरज के पिताजी अपने मन में सोचने लगे कि राजा साहब के आगे तो मुखिया कुछ भी नहीं है राजा साहब के आगे मुखिया को एक नौकर ही लगेगा,,,, मुखिया की याद आते हैं सूरज के पिताजी के मन में मुखिया की बीवी का चेहरा नजर आने लगा,,,, और मुखिया की बीवी के चेहरे के बाद राजा साहब की बीवी का चेहरा नजर आने लगा,,,।

मुखिया की गुलामी वह कर चुका था और अब बारी थी राजा साहब की,,, लेकिन दोनों की गुलामी में अंतर यह था कि वह मुखिया की बीवी की रोज चुदाई करता था गुलामी के साथ-साथ मुखिया की बीवी का मजा भी रोज लेता था लेकिन अभी राजा साहब की गुलामी का यह पहला दिन था और सूरज के पिताजी अपने मन में यही सोच रहे थे कि काशी यहां भी मुखिया की बीवी की तरह राजा साहब की बीवी भी चोदने के लिए मिल जाए तो उसे अच्छी किस्मत वाला दुनिया में कोई नहीं होगा,,,, यही सब सोचते हुए सूरज के पिताजी एक तरफ धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे जहां पर ढेर सारे कमरे थे धीरे-धीरे सभी कैमरे के आगे से सूरज के पिताजी गुजरते चले जा रहे थे और जाते-जाते हर एक कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश करते थे लेकिन सभी दरवाजे बंद थे।

लेकिन तभी सूरज के पिताजी एक कमरे के पास पहुंच गए दरवाजा तो बंद था लेकिन उसकी खिड़की खुली हुई थी और खुली हुई खिड़की को देखकर सूरज के पिताजी का दिल जोरो से धड़कने लगा और वह समय धीरे-धीरे चलते हुए बस खुली हुई खिड़की के करीब पहुंच गए और उसे खिड़की से अंदर देखने की कोशिश करने लगे अंदर रोशनदान से रोशनी किया हुआ था और उसे पीली रोशनी में पहले तो सूरज के पिताजी को कुछ दिखाई नहीं दिया लेकिन थोड़ी कोशिश करने के बाद खिड़की से अंदर कमरे का दृश्य धीरे-धीरे साफ होने लगा और दृश्य साफ होने के बाद जो नजर सूरज के पिताजी को दिखाई दिया उसे देखकर उनका दिल जोरो से धड़कने लगा।

वह नजारा था ही कुछ ऐसा कि अगर सूरज के पिताजी की जगह दुनिया का कोई भी मर्द होता तो उसका भी दिल जोरो से धड़कने लगता और उसका मन बेकाबू हो जाता,,,, सूरज के पिताजी ने अपनी आंखों से बहुत देख लिया जिसकी देखने की तमन्ना दिल में लिए वह इतना बड़ा खतरा मोड लेकर राजा साहब की कोठी में दाखिल हुए थे आखिरकार उनके मन का नजारा उनकी आंखों के सामने था सामने बिस्तर पर राजा साहब की बीवी मतलब महारानी एकदम नंगी पेट के बल लेटी हुई थी और उनकी बड़ी-बड़ी उबारी हुई गांड नरम नरम गद्दे पर भी एकदम बराबर नजर आ रही थी,,,, महारानी को एकदम नग्नअवस्था में देख कर और महारानी की बड़ी-बड़ी बाहर देखकर सूरज के पिताजी के अंदर वासना का शैतान जागने लगा जो की पूरी तरह से सूरज के पिताजी को अपनी गिरफत में ले चुका था,,,।

राजा साहब की बीवी का आकर्षण सूरज के पिताजी के मन में इस तरह से बढ़ गया था कि उसे देखने की चाह में वह इतना बड़ा कदम उठा चुके थे जो कि खतरे से खाली नहीं था अगर किसी की भी नजर पड़ जाती तो इसके बदले में सूरज के पिताजी की जान जानी तय थी,, लेकिन ऐसा लग रहा था कि अपने मन की इच्छा पूरी करने के लिए सूरज के पिताजी को इस खतरे को उठाना ही इस समय जरूरी हो गया था कुछ देर तक वह खिड़की से खड़े होकर दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत को नंगी लेटे हुए देख रहे थे वह पूरी तरह से नींद की आगोश में थी,,,, वह गहरी नींद में होने के कारण गहरी गहरी सांस ले रही थी जिसकी वजह से उसके बदन में एक अद्भुत कामुक हलचल भी हो रही थी उसे कामुक हलचल के चलते उसके भारी भरकम नितंब भी ऊपर नीचे हो रहे थे जिसे देखकर सूरज के पिताजी का ईमान पूरी तरह से डगमगा गया था।

राजा साहब की बीवी को नंगी बिस्तर पर सोते हुए देख कर सूरज के पिताजी अपने मन में अनुमान लगाने वालों की राजा साहब इसकी जमकर चुदाई करने के बाद ही उसे औरत के पास गए हैं तभी तो यह है बिना कपड़ों के सो रही है एकदम नंगी होकर इसकी प्यास बुझाने के बाद ही राजा साहब अपनी प्यास बुझाने के लिए सूरज के पास गए और सुबह तक वापस लौटकर आने वाले नहीं है,,, यह सब सोते हुए सूरज के पिताजी का दिमाग बड़ी तेजी से चलने लगा वह अपने मन में सोचने लगे कि अगर राजा साहब अपनी बीवी को बिना बताए कमरे से बाहर गए हैं तो कमरे का दरवाजा खुला ही होगा भले ही बाहर से बंद है लेकिन उसकी कड़ी नहीं लगी होगी,,,, इस बारे में ख्याल आते ही सूरज के पिताजी का दिल जोरो से धड़कने लगा और उनके चेहरे पर कामुक मुस्कान देने लगी,,,, जागने से पहले वह कुछ सोच नहीं थे कि यहां पर आने के बाद उन्हें क्या करना है लेकिन जो ख्याल उनके मन में आ रहा था वह बेहद खतरनाक था अगर पकड़े गए तो और अगर पकडे नहीं गए तो स्वर्ग का सुख बस उनसे तीन-चार मीटर की दूरी पर ही बिस्तर पर लेटी हुई थी।

ऐसे में सूरज के पिताजी का दिमाग बड़ी तेजी से काम करता था वह तुरंत दरवाजे के पास आए और उसे खोलने की कोशिश करने लगे और पहले ही कोशिश में दरवाजा हल्का सा शोर करता हुआ खुल गया यह देखकर सूरज के पिताजी का दिल जोरो से धड़कने लगा हुआ पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूबने के लिए अपने आप को तैयार करने लगे उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि अगर पकड़े गए तो क्या होगा लेकिन इस बात का एहसास जरूर था कि अगर इस महारानी के साथ शरीर सुख प्राप्त कर लिया तो दुनिया का कोई सुख इसके आगे कोई मायने नहीं रखना इस बात का एहसास सूरज के पिताजी को हो गया था। और यही सोच कर वह धीरे से कमरे में प्रवेश कर गए और उसी तरह से दरवाजे को बंद कर दिए लेकिन कड़ी लगाना बिल्कुल भी नहीं भूले क्योंकि हो सकता है कि कोई आ जाए और दरवाजा खुला हो तो बना बनाया काम बिगड़ जाए।

कमरे के अंदर रोशनी बरकरार थी दो रोशन दान जगमगा रहे थे,,, उसे रोशनी में वह जी भरकर महारानी के नंगे बदन का दर्शन कर लेना चाहते थे क्योंकि आगे क्या करना है वह अच्छी तरह से जानते थे जी भरकर महारानी के नंगे बदन को देख लेने के बाद उसके बदन की बनावट को देख लेने के बाद जो कि वाकई में बेहद गजब की बनावट थी बदन में हर कटाव बड़े सोच समझ कर बना हुआ था और वह भी इस बदन के बनावट को दुनिया का कोई भी मर्द देख ले तो शायद बिना संभोग किए हुए उसका पानी निकल जाए उसे तो राजा साहब पर तरस आ रहा था कि इतनी खूबसूरत औरत को छोड़कर वह बेवजह गांव की दूसरी औरतों के पीछे पागल बना है,,,, सूरज के पिताजी का दिल जोर से धड़क रहा था और पजामे में तंबू पूरी तरह से बन चुका था,, जिसे हाथ से दबे हुए वाहन धीरे से जाकर महारानी के बिस्तर पर बैठ गए महारानी के बिस्तर पर बैठना भी सूरज के पिताजी के लिए किसी राजा की किस्मत से काम नहीं था इस समय वह अपने आप को राजा ही समझ रहे थे क्योंकि वह महारानी के बिस्तर पर बैठे हुए थे और उस बिस्तर पर महारानी अपने पूरे कपड़े उतार कर एकदम नंगी लेटी हुई थी,,,,।

पीली रोशनी में सूरज के पिताजी को सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था और यह भी दिखाई दे रहा था की महारानी के बुरे से निकलने वाला मदन रस उनकी जांघो तक बहा हुआ था,,, उस मदन रस को देख कर तो सूरज के पिताजी की हालत एकदम खराब होने लगी उनकी आंखों में वासना का तूफान उठने लगा वह पागल होने लगे वह एक औरत को काबू करना अच्छी तरह से जानते थे वह कुछ देर बिस्तर पर बैठकर नंगी लेटी हुई महारानी को देखते हुए आगे क्या होगा और अगर पकड़े गए तो क्या होगा इसके बारे में सोते हुए आगे की प्रक्रिया के बारे में सोच रहे थे उन्हें अच्छी तरह से मालूम था कि एक औरत को काबू में कैसे किया जाता है एक औरत को किस तरह से आनंद के सागर में डुबाया जाता है। सूरज के पिताजी को अच्छी तरह से मालूम था कि ऐसे में अगर वह कुछ भी बोलेंगे तो महारानी को समझते देर नहीं लगेगी कि उनके बिस्तर पर महाराज नहीं बल्कि कोई और है इसलिए बहुत सोच समझकर कदम उठाना था और इन सब के बारे में शायद सूरज के पिताजी बहुत अच्छे से सोच चुके थे,,,।

इसलिए धीरे से महारानी के बिस्तर पर से उठकर खड़े हो गए,,, सूरज के पिताजी को अच्छी तरह से मालूम था कि अब जो कुछ भी करना है पूरी तरह से अंधेरे में ही करना है अगर जरा भी उजाला हुआ तो पकड़े जाने की गुंजाइश पूरी तरह से बढ़ जाएगी इसलिए वह धीरे से रोशनदान के पास पहुंचे और फूंक मार के रोशनी को बंद कर दिए और यही वह दूसरी रोशनदान के पास के और वह पर भी फूंक मार कर रोशनी को बंद कर दिया कमरे में पूरी तरह से अंधेरा जा चुका था और महारानी एक बार चुदवाने के बाद घोड़े बेचकर सो रहे थे,,,, सूरज के पिताजी जानते थे की औरत भले ही कितनी गहरी नींद में हो अगर उसके कोमल अंग पर हाथ रख दे तो तुरंत उसकी नींद खुल जाती है और ऐसा होना यहां पर भी मुमकिन था और इसके लिए अंधेरा करना बेहद जरूरी था और बेहद उत्तेजनात्मक स्थिति में भी खामोश रहना भी बहुत जरूरी था,,,।

कमरे में पूरा अंधेरा करने के बाद सूरज के पिताजी धीरे से बिस्तर के पास पहुंचे और वैसे भी अब अपने हाथों से महसूस करके महारानी की जवानी का आनंद लूटना था और बिस्तर पर बैठकर हल्के सेवा अपने हथेली महारानी की उभरी हुई मदमस्त कर देने वाली जवानी से भरी हुई गांड पर रख दिए,, हथेली गांड पर रखते ही सूरज के पिताजी के बदन में उत्तेजना का तूफान उठने लगा उन्हें एहसास होने लगा कि वाकई में महाराज की महारानी कितनी गर्म औरत है उसकी गांड की गर्मी सूरज के पिताजी अपनी हथेली में महसूस कर रहे थे,,, और हल्के हल्के उसे सहला रही थी वाकई में इस समय महारानी की गांड रुई से भी ज्यादा मुलायम और नरम महसूस हो रही थी,,,, महारानी की गांड को सहलाने में सूरज के पिताजी को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उन्हें बहुत मजा आ रहा था पर निश्चित थे क्योंकि जानते थे कि महाराज इतनी जल्दी आने वाले नहीं है,,,,।

गांड को सहलाते हुए सूरज के पिताजी पजामे के ऊपर से अपने लंड को भी दबा रहे थे क्योंकि वह बेकाबू हुआ जा रहा था,,,, देखते ही देखते हथेली का दबाव महारानी के नितंबों पर बढ़ने लगा और इसकी वजह से महारानी के बदन में कसमाशाहट भी महसूस होने लगी और जैसे ही सूरज के पिताजी अपने हथेली को अपनी उंगलियों को गांड के बीचों बीच की पतली दरार में प्रवेश करने लगे वैसे ही महारानी के बदन में कसमसाहट बढ़ने लगी,,,, और वह धीरे से अपनी जांघों को हल्का सा खोल दी सूरज के पिताजी यही चाहते ही थे,,,, देखते ही देखते सूरज के पिताजी की उंगलिया महारानी के बदन के सबसे बेशकीमती खजाने पर पहुंच चुकी थी,, महारानी की बुर पर उंगली का स्पर्श होते ही सुरज के पिताजी की हालत एकदम से खराब होने लगी उम्मीद से कहीं ज्यादा तपन महारानी की बुर में महसूस हो रहा,, सूरज के पिताजी की हालत खराब होने लगी उनसे रहा नहीं जा रहा था वह महारानी की बुर को अपनी हथेली में दबोच लेना चाहते थे,,,, लेकिन ऐसा तुरंत करने पर महारानी की नींद एकदम से टूट सकती थी,,,, और ऐसे में बना बनाया काम भी कर सकता था और सूरज के पिताजी ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहते थे वह पूरी तरह से नींद में होने के बावजूद भी महारानी को गर्म कर देना चाहते थे।

और ऐसा ही हुआ यहां पर सूरज के पिताजी का अनुभव बहुत काम आ रहा था वह अपनी उंगलियों से ही महारानी की बुर को कुरेद रहे थे,,,, जिससे महारानी के बदन में उत्तेजना का एहसास हो रहा था भले ही वह गहरी नींद में थी लेकिन फिर भी उसे बहुत मजा आ रहा था ऐसा करते हुए एक हाथ से सूरज के पिताजी अपनी कमीज उतार कर एक तरफ रख दिए थे,,,,,,, धीरे-धीरे उत्तेजना का एहसास महारानी के बदन में बढ़ता जा रहा था वह मदहोश हुए जा रही थी,,,,, और देखते ही देखते सूरज के पिताजी महारानी की बुर में अपनी बीच वाली उंगली को अंदर प्रवेश कर कर उसे अंदर बाहर कर रहे थे ऐसे में महारानी का मजा बढ़ता जा रहा था अब वह धीरे-धीरे नींद से बाहर आ रही थी,,,, क्योंकि महारानी के मुंह से हल्की-हल्की अब सरकारी की आवाज आ रही थी और यही तो सूरज के पिताजी चाहते थे वह समझ गए थे कि उनकी हरकत का महारानी और पूरी तरह से मजा ले रही थी,,,।

लेकिन अभी भी वह हल्की नींद में थी और पूरी तरह से नींद से बाहर लाने के लिए अभी भी सूरज के पिताजी को काफी मशक्कत करना था वह अपनी हथेली को महारानी की नंगी चिकनी पीठ पर रखकर उसे हल्के से सहलाते हुए अपनी बीच वाली उंगली को लगातार महारानी की बुर के अंदर बाहर कर रहे थे इस तरह से सूरज के पिताजी को भी मजा आ रहा था और महारानी भी आनंद के सागर में डूबती चली जा रही थी और देखते ही देखते सूरज के पिताजी अपनी दूसरी उंगली को भी उसकी बुर की गहराई में उतार कर अंदर बाहर करने लगे थे वह काफी चिपचिपी हो चुकी थी,,,, अब महारानी आनंद के सागर में गोते लगाने के लिए तैयार होती जा रही थी क्योंकि वह पूरी तरह से नींद से जाग चुकी थी लेकिन अपनी आंखों को अभी भी बंद किए हुए थे क्योंकि सूरज के पिताजी की उंगलियां उसके बदन में मदहोशी का रस घोल रही थी जिससे वह अपनी आंखों को खोल नहीं पा रही थी,,,,।

सूरज के पिताजी लगातार अपनी उंगलियों को उसकी बुर के अंदर बाहर कर रहे थे वह पागल हुए जा रही थी और उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसके मुख से निकल रही शिसकारी की आवाज को सुनकर सूरज के पिताजी की हिम्मत बढ़ती जा रही थी,,,, और अगले ही पर सूरज के पिताजी अपने प्यासे होठों को उसकी गांड की दरार के बीचों बीच रखकर ऊपर से ही उसे पर चुम्मा लेने लगे,,,, जैसे ही महारानी को एहसास हुआ कि उनकी गांड के उपर होठ का स्पर्श हो रहा है,, वह और भी ज्यादा बावली होने लगी। महारानी का बदन कसमसाने लगा,,, वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को कसमाशाहट भरी हलनचलन करवा रही थी,,, यह उत्तेजना का असर था सूरज के पिताजी समझ गए थे की महारानी को मजा आ रहा है,,, बस यही वह चाहते थे की महारानी बिस्तर पर लेटे-लेटे बस गरमा गरम शिसकारी लेते रहे गरम आहे भरते रहे बस बोले कुछ नहीं,,,,,, कमरे में राजा साहब की बीवी की मदहोश कर देने वाली शिसकारी की आवाज गुंजने लगी थी,, सूरज के पिताजी उसकी किसी कार्य की आवाज सुनकर मदहोश हुए जा रहे थे अत्यधिक उत्तेजना का अहसास उन्हें होने लगा था क्योंकि इस तरह की गरमा गरम सिसकारी की आवाज अभी तक वह किसी भी औरत के मुंह से नहीं सुन पाए थे राजा साहब की बीवी की बात ही कुछ और थी,,।

अभी तक सूरज के पिताजी नितंबों के ऊपर ऊपर ही चुंबन कर रहे थे अभी तो निचले स्थान पर जाना बाकी था जहां पर जीवन का असली सुख छुपा हुआ था संभोग का केंद्र बिंदु था,,, जब सूरज के पिताजी को लगने लगा कि राजा साहब की बीवी के बदन में कम से हाथ बढ़ने लगी थी ऐसे में वह कुछ भी बोल सकती थी तो वह धीरे-धीरे अपने होठों को नीचे की तरफ ले जाने लगे,,,, अब सूरज के पिताजी को लगने लगा था कि वाकई में राजा साहब की बीवी की गांड को ज्यादा ही बड़ी-बड़ी है क्योंकि उसका उठाओ कुछ ज्यादा ही था और नीचे अपने होंठ को ले जाते समय ऐसा लग रहा था कि जैसे वह किसी खाई में अपने होठों को ले जा रहे हैं,,,, महारानी की हालत खराब है जा रही थी आंखें मदहोशी में पूरी तरह से बंद थी,, इसलिए महारानी को एहसास ही नहीं हो रहा था कि कमरे में रोशनी है या नहीं अगर वह आंख खोल भी देती तो पता नहीं चलता कि उनके बिस्तर पर कौन है वह तो अभी तक राजा साहब को ही समझ रही थी,,,।

और वैसे भी महारानी के पास शंका करने की कोई वजह नहीं थी क्योंकि वह राजा साहब को अच्छी तरह से जानती थी उनके कक्ष में किसी गैर मर्द का प्रवेश करना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन था यही सब वजह थी की महारानी को शंका करने की कोई वजह नहीं मिली थी कि एक बार चुदाई करने के बाद भी दूसरी बार उसके महाराज उसके साथ हम बिस्तर होने के लिए कैसे तैयार हो गए वैसे यह वर्षों के बाद हुआ था इसीलिए रानी पूरी तरह से उत्तेजित और बेहद खुश नजर आ रही थी वह पूरी तरह से नींद से बाहर आ चुकी थी लेकिन आंख खोलने में बिल्कुल भी समर्थ नहीं थी,,,, सूरज के पिताजी अपना पूरा अनुभव जो झोंक दे रहे थे। गहरी गहरी सांसों के साथ-साथ महारानी के गोलाकार नितंब भी ऊपर नीचे हो रहे थे और सूरज के पिताजी धीरे-धीरे उसकी दोनों जांघों के बीच अपने मुंह को लेते चले जा रहे थे जैसे-जैसे वह महारानी की गुलाबी छेद के करीब पहुंच रहे थे वैसे-वैसे उसमें से मादक खुशबू सूरज के पिताजी के नथुनों में प्रवेश कर रही थी और वह खुशबू उन्हें एकदम बावला बना रही थी उन्हें इस बात का एहसास था कि कुछ देर पहले राजा इसी बुर में अपने लंड को डालकर चुदाई किया था महारानी के बदन रस के साथ-साथ राजा के लंड से निकला पानी में उसमें मिश्रित होगा लेकिन अब यह सब जानकर भी सूरज के पिताजी को पीछे कम लेना भारी पड़ सकता था और इस बात को जानते हुए वह ऐसी गलती कभी नहीं करना चाहते थे और वैसे भी रानी की मदमस्त कर देने वाली जवानी की मदहोशी में वह पूरी तरह से डूब चुके थे इसलिए अब कोई फर्क नहीं पड़ता था कि कुछ देर पहले रानी की बुर में किसका लंड घुसा हुआ था,,,,।


ओहहहहह मेरे राजा यह क्या हो गया है तुमको,,,,(ऐसा कहते हुए महारानी अपने एक हाथ को पीछे की तरफ लाते हुए सूरज के पिताजी के मजबूत कंधों पर रख दी,,, महारानी के मुंह से निकला यह शब्द सूरज के पिताजी की उत्तेजना को तो बड़ा ही रहा था लेकिन उनके किए कराए पर पानी भी फेर सकता था रानी की बोलती बंद करने का अब एक ही रास्ता था जो की सूरज के पिताजी के होठों के ठीक सामने था सूरज के पिताजी जानते थे की औरत की बोलती कि वक्त बंद हो जाती है अगर वह इस समय उसे युक्ति को नहीं आजमाएंगे तो महारानी बात करना शुरू कर देगी और ऐसे में सूरज के पिताजी का भांडा फूट सकता है,,,, इसलिए सूरज के पिताजी बिल्कुल भी तेरी नहीं करना चाहते थे और ना ही कोई गलती करना चाहते थे बहुत तुरंत अपने पैसे होठों को महारानी की दहकती हुई बुरके ऊपर एकदम से सटा दिए और उसे पर चुंबन करने लगे,,,।

महारानी पूरी तरह से मदहोश हो गई और कभी सोचा भी नहीं थी कि राजा साहब उसकी बुर पर इस तरह से चुंबन करेंगे,,,,, क्योंकि बरसों बीत चुके थे महारानी से इस तरह से राजा साहब प्यार नहीं किए थे बड़े उसकी चुदाई करते थे लेकिन उसकी बुर पर चुंबन करना छोड़ दिए थे,,,, इसलिए तो महारानी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,, और इसलिए उसकी बोलती भी एक दम से बंद हो गई थी,,, सूरज के पिताजी अपने होठों को दबाओ उसकी गुलाबी छेद पर बढ़ते हुए अपनी जीत निकाल कर उसमें प्रवेश कर कर उसे चाटना शुरू कर दिए थे सूरज के पिताजी की इस हरकत को महारानी पूरी तरह से बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और तुरंत सूरज के पिताजी के कंधे पर से अपने हाथ को हटाकर आगे की तरफ ले आई और तकिया को जोर से दबोच कर पकड़ ली थी और गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकालने लगी थी,,,, इस बीच सूरज के पिताजी अपने बीच वाली उंगली को लगातार उसकी बुर के अंदर बाहर कर रहे थे जिसमें से मदन रस बार-बार बाहर की तरफ झटक दे रहा था,,,,। और सूरज के पिताजी बड़े चावल से उसे मदन रस को अपने गले के अंदर गटक जा रहे थे।

सूरज के पिताजी कभी सपने में भी नहीं सोचे थे कि वह किसी महारानी के बिस्तर पर इस तरह से मजा लूटेंगे और वह भी महारानी के साथ कुछ देर पहले ही वह एकदम शराबी घर फटे हालत में थे और कुछ देर बाद देखो वहां महारानी के बिस्तर पर महारानी के साथ ही रंगरेलियां बना रहे थे यह थी किस्मत,,, महारानी की गुलाबी बुर इस समय दुनिया की सबसे हसीन और बेश कीमती खजाना जान पड़ रहा था जो सूरज के पिताजी की मुट्ठी में कैद हो चुका था इस खजाने को वह अपने आप से दूर नहीं करना चाहते थे इस खजाने का पूरा मजा लेना चाहते थे,,,, देखते ही देखते सूरज के पिताजी पागलों की तरह महारानी की बुर को चाटना शुरू कर दिया महारानी मदहोश में जा रही थी वह बिस्तर पर करमा जा रहे थे बिस्तर पर किसी चादर को दोनों मुट्ठी में जोर से पकड़ कर वह अपनी उत्तेजना को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा था महारानी के बदन की कसमसाहट खास करके उसके नितंबो से प्रतीत हो रही थी,,। उसमें कुछ ज्यादा ही थिरकन थी,, जिसे सूरज के पिताजी दोनों हाथों से पकड़ कर उसे काबू में करने की कोशिश कर रहे थे इसमें महारानी की गांड को दोनों हाथों से पकड़ने में भी एक अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था,,,,, महारानी की गांड तेरी बड़ी थी कि उसकी दोनों फांको के बीच सूरज के पिताजी का चेहरा एकदम ढंक सा गया था। महारानी बिस्तर पर तड़प रही थी मदहोश हो रही थी उसकी बुर में आग लगी हुई थी वह जल्द से जल्द अपने राजा के लंड को अपनी बुर में महसूस करना चाहती थी इसलिए वह बोली,,,।

ओ मेरे राजा मैं तो पागल हो जाऊंगी आज क्या हो गया है आपको कुछ खा लिए हो क्या अभी कुछ देर पहले तो चुदाई करके गए थे फिर से तुम्हारा मन हो गया,,,, लेकिन आप मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है मेरे राजा जल्दी से अपने लंड को मेरी बुर में डाल दो मेरी प्यास को बुझा दो ,,,आज तो आपने कमाल कर दिया है,,आहहहहहहह राजा मेरे महाराज,,,,,ओहहहहहबह,,,।

महारानी कि ईस तरह की बातें सुनकर सूरज के पिताजी मदहोश हुए जा रहे थे लेकिन अंदर ही अंदर घबरा भी रहे थे की कही रानी को जवाब ना देना पड़ता है अगर ऐसा हो गया तो रानी को पता चल जाएगा कि उसके बिस्तर पर उसके राजा नहीं बल्कि कोई गैर मर्द है,,,, और वैसे भी महारानी को रत्ती भर शक नहीं हो रहा था कि उनके बिस्तर पर उसके महाराज नहीं बल्कि गांव का कोई गरीब आदमी है मजदूर आदमी है अगर ऐसा वह जान जाए तो इसी समय उसकी जान ले ले लेकिन सूरज के पिताजी काफी चालाक नजर आ रहे थे और बेहद चालाकी भी दिखा रहे थे,,,, एहसास हो गया की महारानी पूरी तरह से तड़प रही है चुदवाने के लिए तो वह बिल्कुल भी देर किए बिना एक हाथ से अपनी धोती को उतार कर एक तरफ रख दिए ताकि जाते समय बड़े आराम से उसे पहन कर जा सके,,,,, एक हाथ से वह अपनी धोती उतार कर पूरी तरह से नंगा हो चुका था जैसा की महारानी बिस्तर पर नंगी लेटी हुई थी,,,,।

देखते ही देखते सूरज के पिताजी अपने लिए जगह बनाने लगे और उसके बड़ी-बड़ी गांड के नीचे इस स्थिति में वह पेट केवल लेटी हुई थी और अपनी दोनों टांगों को उसकी मोटी मोटी जांघो को खोलकर उसके बीच में रखते हुए अपने मोटे तगड़े लंड को उसके गुलाबी छेद पर लगाकर धीरे-धीरे अंदर की तरफ धक्का मारने लगे,,, देखते ही देखते सूरज के पिताजी का लंड महारानी की बुर के अंदर प्रवेश करना शुरू कर दिया,,, इस समय सूरज के पिताजी को ऐसा एहसास हो रहा था कि मानो जैसे वह स्वर्ग के अंदर प्रवेश कर रहे हो क्योंकि महारानी उनकी सोच से भी दूर थी वह कभी महारानी के साथ संबंध बनाने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे क्योंकि वह अपनी हैसियत को जानते थे लेकिन आज अपनी हैसियत से आगे निकल चुके थे आज वह महारानी के कच्छ में उसके ही बिस्तर पर उसकी ही चुदाई कर रहे थे। वाकई में अगर इंसान को उम्मीद से दुगना मिल जाए तो वह अपनेआप को महाराजा समझने लगता है और वही स्थिति ईस समय सूरज के पिताजी की थी।

देखते ही देखते सूरज के पिताजी अपने पूरे लंड को महारानी की बुर के अंदर प्रवेश करा दिए थे और महारानी की बड़ी-बड़ी और नरम नरम गांड को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिए थे इस स्थिति में महारानी की चुदाई करने में सूरज के पिताजी को बहुत मजा आ रहा था वह पागल हुए जा रहे थे इतना मजा उन्हें आज तक अपनी बीवी के साथ नहीं आया था और वैसे भी किसी औरत के साथ कितना ज्यादा मजा मिलता है यह मर्द की सोच पर और हालात स्थान और पद पर आधारित होता है,,, मतलब की औरत का पद क्या है,,,, इस समय बिस्तर पर सूरज के पिताजी जिसकी चुदाई कर रहे थे वह महारानी थी इसलिए सूरज के पिताजी की उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ गई थी और उन्हें ऐसा ही महसूस हो रहा था की महारानी के साथ ही ज्यादा मजा मिल रहा है और ऐसा कभी क्योंकि महारानी का बदन भी एकदम मांसल और गदराया हुआ था,,,,।

सूरज के पिताजी की हर धक्के का माया महारानी ले रही थी इस तरह का मजा उन्हें अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि राजा के साथ पहले कभी नहीं प्राप्त हुआ था इस समय वह अपने बिस्तर पर चुदाई करने वाले इंसान को अपना पति ही समझ रही थी इसलिए उन्हें इस बात से थोड़ा अचंभित हो रहा था कि राजा इतने अच्छे से कैसे चुदाई कर रहा है,,,, लेकिन इस पल को वह पूरी तरह से जी लेना चाहती थी पीछे से चुदवाने में महारानी को कुछ ज्यादा ही मजा आता था सूरज के पिताजी दोनों हाथों से उसकी भारी भरकम गांड को पकड़ कर धक्के पर धक्का लगा रहे थे,,,, कुछ देर तक सूरज के पिताजी इसी तरह से महारानी की चुदाई करते रहे और महारानी भी पूरी तरह से मजा लूट रही थी और पानी छोड़ रही थी जिसके चलते महारानी की बुर पूरी तरह से गली और चिपचिपी हो गई थी जिसमें बड़े आराम से सूरज के पिताजी का लंड अंदर बाहर हो रहा था और फच्च फच्च की आवाज आ रही थी,,,।

कुछ देर तक इसी तरह से चुदाई करने के बाद सूरज के पिताजी अपना आसन बदलना चाहते थे जिस तरह से महारानी मजा लूट रही थी वह समझ गए थे कि अभी कुछ बोलने वाली नहीं है और वैसे भी कमरे में पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था एक दूसरे का चेहरा देखना नामुमकिन था लेकिन इस बात का डर था कि अगर महारानी उत्तेजित अवस्था में उसे अपनी बाहों में भर लेंगे तो शायद राजा के बदन की बनावट और उसके बदन की बनावट में भेद पता चलने लगेगा और ऐसे में उसके पकड़े जाने का डर बना रहा था लेकिन फिर भी सूरज के पिताजी अपने मन में युक्ति सोचने लगे और धीरे से अपने लंड को महारानी के पिछवाड़े से बाहर निकले और उसकी स्थिति को बदलने लगे उसे पीठ के बल लेट आने लगे,,, स्थिति को देखकर महारानी भी पीठ के बल लेट गई और अपनी दोनों टांगों को खोल दे सूरज के पिताजी उसकी दोनों टांगों के बीच जाकर उसकी गुदाज कमर में अपने दोनों हाथ को डालकर से अच्छी तरह से पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसकी नंगी बड़ी-बड़ी आधी गांड को अपनी जांघों पर चढ़ा लिए,,,, और फिर एक बार अपने लंड को उसकी गुलाबी छेद में डालकर धक्का लगाते हुए उसके ऊपर पूरी तरह से झुकने लगे और उसके दोनों हाथों को पकड़कर वह बिस्तर से सटा दिए ताकि वह उन्हे अपनी बाहों में ना भर सके।

सूरज के पिताजी महारानी की दोनों कलाइयों को पकड़ कर धक्के पर धक्कालग रहे थे,,, महारानी की हालत खराब होती जा रही थी वह पागल हुए जा रही थी इतनी गजब की इतनी जबरदस्त चुदाई आज तक राजा साहब ने उसकी नहीं किए थे इसलिए तो वह एकदम मस्त भेज रही थी आज वह राजा साहब पर पूरी तरह से फिदा हो गई थी लेकिन वह नहीं जानती थी कि उसे चोदने वाला उनका पति नहीं बल्कि गांव का मजदूर है इसीलिए शायद मजदूर होने के कारण उसमें दम खम ज्यादा है,, आखिरकार महारानी अपने चरम सुख के करीब पहुंचने लगी और उसकी शिसकारी की आवाज एकदम से बढ़ने लगे सूरज के पिताजी उसके लाल लाल होठों का चुंबन करना चाहते थे लेकिन ऐसा करना खतरे से खाली नहीं था। इसलिए अपनी इच्छा को वह अपने अंदर दबा लिए क्योंकि इस समय भी उन्हें बहुत कुछ मिल चुका था किस्मत उन पर पूरी तरह से मेहरबान हो चुकी थी अब थोड़े से लिए वह खतरा मोल नहीं लेना चाहते थे सूरज के पिताजी भी चरम सुख के बेहद करीब पहुंच चुके थे इसलिए उनके धक्के एकदम तेज हो चुके थे,,,, और देखते ही देखते दोनों का एक साथ पानी निकल गया सूरज के पिताजी इसके बावजूद भी महारानी के बदन पर पसर नहीं गए थे बल्कि अपने आप को एकदम से रोके रह गए थे और जब तक पूरा पानी महारानी की बुर में उत्तर नहीं दिया तब तक अपने लंड को उसके घर से बाहर नहीं निकाले,,,,।

सूरज के पिताजी का मन अभी भरा नहीं था वह महारानी की और भी ज्यादा चुदाई करना चाहते थे लेकिन अब यहां पर ज्यादा देर रुकना उचित नहीं था वैसे तो राजा साहब सुबह होने से पहले आने वाले नहीं थे लेकिन फिर भी अगर ज्यादा देर रुकना होगा तो दोनों के बीच से बातचीत होना लाजमी है ज्यादा देर तक वह चुप नहीं रह सकते थे क्योंकि उनकी खामोशी महारानी के मन में शंका पैदा कर सकती थी इसलिए वह धीरे से अपने लंड को बाहर निकाल कर वहीं बिस्तर पर कुछ देर के लिए बैठ गए क्योंकि वह जानते थे की महारानी की भारत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी वह एकदम मस्त हो चुकी थी और गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी स्थिति को संभाल रही थी,,,,।

इतनी संतुष्टि भरी चुदाई करवा कर महारानी को बिल्कुल भी होश नहीं था वह अपनी आंखों को बंद किए हुए गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,, एकदम संतुष्ट होने की वजह से कुछ ही देर में वह नींद की आंखों में चली गई और यही मौका था महारानी के कमरे से बाहर निकलने का और यही मौका देकर सूरज के पिताजी धीरे से बिस्तर पर से उठे और अपने कपड़े ढूंढ कर पहनकर धीरे से इस तरह से दरवाजा खोल कर बाहर निकल गई और बाहर आकर तख्ते पर कल के साथ एक अद्भुत मुस्कान के साथ सो गए,,,।

Gazab ki update he rohnny4545 BHai,

Suraj ke baap ki to lottery nikal gayi..............

Maja aa gaya Bhai
 
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lovlesh2002

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हम सोच रहे थे सूरज अपनी बहन रानी को इस अपडेट में अपने नीचे सुलाने का कोई पक्का जुगाड़ कर लेगा जिसमें रानी भी उसका साथ।देगी, लेकिन कहानी ने सूरज के पिता की और रुख मोड़ दिया, अद्भुत मस्त अपडेट है बस सूरज को जल्दी से अपने काम पर लगा दो
 
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