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Incest पहाडी मौसम

rohnny4545

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राॅनी भाई
सच मे आप बहौत अच्छा लिखते हो
कहानी का तो जवाब नही
आप से एक गुजारीश है की अब जब मा बेटा खेत मे काम करेंगे तो दोनो मे ढेर सारा seduction दिखाना जैसे की मा का low neck blouse, backless choli
और रात मे सिर्फ दोनोको ही खेत मे सोना पडे
कभी कभी रात मे बहेन के साथ मे की रोमांस हो

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Dhanyawad

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rohnny4545

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मेरे खयाल से ये सब रौनी भाई खुद से ही बहुत अच्छे से कर देंगे शायद इस से भी ज्यादा कुछ होगा वैसे भी रौनी भाई कुछ अलग हट कर ही करते हैं सोच से भी ज्यादा, देखते है क्या धमाकेदार अपडेट आने वाला है बेसब्री से इंतजार है अगले अपडेट का।
Thanks dear

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sunoanuj

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Sanju@

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सूरज ने जो कुछ भी अपनी आंखों से देखा थावह पूरी तरह से उसे उत्तेजना से भर दिया था और वैसे भी उसकी जगह कोई और भी होता तो शायद उसकी भी हालत होती क्योंकि एक जवान मर्द की आंखों के सामने एक जवानी से भरी हुई खूबसूरत औरत अगर अपनी गांड दिखाकर पेशाब करती हो तो शायद ही कोई मर्द होगा जो उत्तेजित न हो जाए, और सूरज की आंखों के सामने तो जवानी की पूरी परिभाषा जो प्यासी भी थी शादीशुदा भी थी और साथ में उसकी गोद भी सुनी थी और वह खुद इस इंतजार में थी कि कब उसकी गोद हरि हो कब एक जवान पुरुष का सॉन्ग उसे प्राप्त हो जिसके चलते वह अपनी काम अभिलाष को पूर्ण कर सके,,। और दोनों के लिए ऐसा लग रहा था कि जैसे वह समय आ चुका था।




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सोनू की चाची को पेशाब करते हुए देखकर सूरज अपनी भेजना पर काबू नहीं कर पाया था और पेशाब करने के बहाने ठीक सोनू की चाची के बगल में खड़ा होकर पेशाब कर रहा था उसके मोटे तगड़े लंड को देखकर सोनू की चाची की हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी वह अपने आप पर काबू नहीं कर पा रही थी और ऐसे हालात में वह पूरी तरह से मस्ताई घोड़ी बन चुकी थी,, जो किसी भी तरह से इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी। इसी लिए तो वह पूरी तरह से बेशर्मी दिखाते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाकर सूरज के लंड को पकड़ ली थी और सूरज पूरी तरह से मस्त हो चुका था।सोनू की चाची सूरज को पूरी तरह से नादान लड़का ही समझ रही थी क्योंकि जिस तरह से उसने उससे पूछी थी कि क्या कभी औरत की बुर देखा है तो उसने ना में ही सिर हिलाया था,,और सूरज भी पूरी तरह से अपने आप को नादान साबित करते हुए सोनू की चाची से यह कहा था कि मर्दों का लंड केवल पेशाब करने के ही काम आता है,,, और उसकी लंबाई और मोटाई से कुछ खास फर्क नहीं पड़ता।



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सूरज की बातों को सुनकर सोनू की चाची मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रही थीक्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि सूरज पूरी तरह से नादान है औरतों के बारे में कुछ नहीं जानता और चुदाई के बारे में तो इसे कुछ भी नहीं पता होगा यही जानकर वह उसे सब कुछ सीखना चाहती थी और अपना उल्लू सीधा करना चाहती थी जिसके चलते उसने उत्तेजना में उसके लंड को पकड़ लेती हो अपने कपड़ों को व्यवस्थित करके उसे मड़ई की तरफ ले जा रही थी यह कहते हुए की चल तुझे सब कुछ दिखाती हुं।सूरज भला क्यों इंकार करता हुआ तो खुद यही सब चाहता था और वैसे भी दोनों के पास समय भी पर्याप्त था सही समय पर दोनों घर से बाहर निकले थे अभी कड़ी धूप थी वातावरण में ठंडक फैलने में अभी काफी समय था और इसी मौके का फायदा दोनों उठा लेना चाहते थे।





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सोनू की चाची सूरज के लंड को हाथ में पकड़े हुए मड़ई की तरफ चली जा रही थी,, सूरज का पायजामा उसकी जांघों तक था जिसे वह पकड़े हुए था,,,, फिर भी सूरज नादानी का नाटक करते हुए बोला,,,।

अरे चाची पजामा तो पहन लेने दो,,,।

कोई जरूरत नहीं है पहनने की,,,(मुस्कुराते हुए) मड़ई में चलकर कपड़े उतारना ही पड़ेगा,,!

ऐसा क्यों चाची,,,(नादानी भरे स्वर में सूरज बोला)

तुझे बहुत कुछ दिखाना है तुझे औरतों के बारे में कुछ नहीं मालूम ना तो तू खुद को पहचान पाया है नहीं अपनी मर्दाना ताकत कोकभी इस्तेमाल कर पाया है इसीलिए मैं तुझे सब कुछ सीखाना चाहती हूं ताकि तुझे आगे कोई तकलीफ ना हो,,।

तुम क्या कर रही हो चाची मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,।

अंदर चल सब समझ जाएगा,,,।

अंदर क्यों यही समझाओ ना,,,




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अरे बेवकूफ भले ही यह एकांत जगह लग रही है लेकिन यहां से कोई भी कभी भी आ जा सकता है यहां पर अगर किसी ने हम दोनों को ईस अवस्था में देख लिया तो गजब हो जाएगा।

ऐसा क्या हो जाएगा चाची जो तुम इतना डर रही हो,,,,।

सब तुझे समझ में आ जाएगा थोड़ा सब्र रख वैसे भी तेरा लंड कुछ ज्यादा ही बड़ा है,,, पता नहीं कौन सी तेल से मालिश करता है गधा जैसा बना लिया है।

मैं किसी भी तेल से मालिश नहीं करता यह ऐसा ही है,,,।(नादानी भरे स्वर में सूरज बोला)

लगता तो बिल्कुल भी नहीं है ऐसा लगता है कि रोज सरसों का तेल पिलाता है तभी इतना खा पीकर मोटा और लंबा बना है।(सोनू की चाची लंड की गर्मी को अपनी हथेली में महसूस करके पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी इसका असर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में पड़ रहा था,,, उसमें से मदन रस टपक रहा था जिसके चलते वह पूरी तरह से चुदवासी हुए जा रही थी। और जल्द से जल्द अपनी इच्छा को पूरी करना चाहती थी सोनू की चाची की बात सुनकर सूरज बोला,,,)




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नहीं नहीं चाचा बिल्कुल भी नहीं मैंने तो आज तक इसे ठीक से देखा भी नहीं हो और वैसे भी से देख कर करना क्या है पेशाब करते समय ही सिर्फ हाथ में आता है,,।

तू सच में सबसे बड़ा बेवकूफ हैपूरी तरह से जवान हो गया लेकिन अपने लंड की सही उपयोग करना नहीं आता आज मैं तुझे बताती हूं कि इसका सही उपयोग क्या है पागल तो नहीं जानता कि तेरे पास जो हथियार है औरतों को तेरा गुलाम बनाने के लिए काफी है,,।

औरतों को गुलाम,,, में कुछ समझा नहीं चाची,,,(एकदम अनजान बनता हुआ सूरज बोला,,,वह जानता था कि सोनू की चाची जो कुछ भी बोल रही है उसमें पूरी तरह से सच्चाई है इसका उपयोग जिसके साथ भी उसने किया था वह सच में उसकी गुलाम बन चुकी थी,,, और वह अपने मन में सोच रहा था कि अब सोनू की चाची की बारी है,,)




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सब समझ जाएगा बस थोड़ा सब्र रख,,,,(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची मड़ई के पास पहुंच चुकी थी,,, अभी भी उसके हाथ में सूरज का लड था जो की पूरी अपनी औकात में खड़ा था,,,सोनू की चाची यह सोचकर ही पानी पानी में जा रही थी कि थोड़ी देर में वह उसे अपनी गुलाबी बुर में ले लेगी तब कितना मजा आएगा,,,। वहां पर खड़ी होकर एक बार फिर से तसल्ली कर लेने के लिए सोनू की चाची इधर-उधर देखकर ईत्मिनान कर लेना चाहती थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है,,,, लेकिन कहीं कोई दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा था और वह निश्चिंत होकर मड़ई में प्रवेश कर गई,,, वैसे तोउसे टूटी हुई झोपड़ी में कोई टूट सा दरवाजा भी नहीं था लेकिन फिर भी खुले से अच्छा था कि और दोनों अपने आप को चार दीवारी के अंदर तो महसूस कर सकते थे।सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि अब उसकी भी इच्छा पूरी होने वाली थी वह समझ गया था कि सोनू की चाची भी आज से बेइंतहा आनंद देने वाली है जिसका उसे बड़ी बेसब्री से इंतजार भी था,,,।



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सूरज इस बात को अच्छी तरह से जानता था की मुखिया की बीवी के मुकाबले सोनू की चाची का बदन कुछ ज्यादा ही कसा हुआ और गठीला है और सबसे सोने पर सुहागा यह था कि सोनू की चाची की गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी थी जिसे देखकर वह हमेशा चुड़वासा हो जाता था,, आज मौका मिला था उसे रोंदने का,,,, दोनों टूटी हुई झोपड़ी के अंदर प्रवेश कर चुके थे वैसे तो इस एकांत जगह पर यह झोपड़ी बनाया किसने यही सबसे बड़ा प्रश्न था लेकिन या कोई बड़ी बात नहीं थीहो सकता था कि कोई पहले यहां खेतों की रखवाली करने के लिए रहता हूं या कुछ दिन के लिए ऐसे ही रहने लगा हो और इधर-उधर से घास फूस इकट्ठा करके झोपड़ी बना लिया हो। खैर जिसने भी बनाया हो इस समय वह ज्यादा जरूरी नहीं थाबल्कि यह ज्यादा जरूरी था कि आप करना क्या है और वैसे भी जिसने भी बनाया था ऐसा लग रहा था कि इस दिन के लिए ही बनाया था तभी तो आज सोनू की चाची और सूरज के लिए काम आने वाला था। टूटी हुई झोपड़ी के अंदर कोई खास सामान तो बिल्कुल भी नहीं थाबस ढेर सारा घास का ढेर था जो कि उन दोनों के लिए बिस्तर का काम करने वाला था जिस पर नजर पडते ही सोनू की चाची की आंखों में चमक उतर आई थी।



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सोनू की चाचीसूरज के लंड पर से अपना हाथ हटाकर मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखते हुए बोली,,,।

उसे दिन खेत में मजा आया था ना मशीन चालू करते समय,,,।

हां चाची बहुत अच्छा लग रहा था,,,,।

आज भी वैसा ही करना है उसे दिन तो अधूरा रह गया था लेकिन आज अधूरा काम पूरा करना है,,,(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी और ब्लाउज का बटन खोलते खोलते अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) मालूम है ना क्या करना है,,,.

बिल्कुल चाची तुम ही तो बताई थी क्या करना है,,, कितने नरम नरम हैमैं तो सोच भी नहीं सकता था कि कठोर दिखाने वाली चीज इतनी नरम होगी,,।






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औरत के पास बहुत कुछ है जिसके बारे में तु अभी सो भी नहीं सकता लेकिन आज सारे राज पर से पर्दा हट जाएगा आज तु सबकुछ सीख जाएगा,,।(ऐसा कहते हुए सोनू की चाचीब्लाउज के सारे बटन खोल दी और कंधे पर से साड़ी का पल्लू हटाकर उसे नीचे गिरा दी, पल भर में हीसोनू की चाची की छाती पूरी तरह से उजागर हो चुकी थी जिसे देखकर सूरज की आंखों की चमक बढ़ने लगी थीसूरज पति आंखों से सोनू की चाची की जवानी को देख रहा था और सोनू की चाची अपने ब्लाउज के दोनों पट को दोनों हाथों में लेकर उसे खोल दी थी जिससे उसकी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम से अपनी आभा बिखैर रही थी,,,, सोनू की चाची खुद उत्तेजना से अपने होठों को दांत से काटते हुए अपने दोनों हाथों में दोनों चूचियों को लेकर उसे दबाते हुए बोली,,,)

देख क्या रहा है मेरे पास आ,,,, तुझे जिंदगी का असली सुख देता हूं,,,।




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(असली सुख के मतलब को सूरज अच्छी तरह से समझता था वह जानता था कि वाकई में मर्द के लिए यही जीवन का असली सुख है वह धीरे से आगे बढ़ने लगा हालांकि अभी भी पजामा उसकी जांघों में अटका हुआ था और उसका लंड अपनी औकात में आकर खड़ा था,,,,देखते ही देखते सूरज सोनू की चाची के करीब पहुंच गया और अपने हाथ को उसकी चूचियों की तरफ आगे बढ़ने लगा उत्तेजना के मारे उसके हाथ में कंपन साफ दिखाई दे रहा था और यह देखकर सोनू की चाची मन ही मन प्रसन्न हो रही थी देखते ही देखतेसूरज अपने दोनों हाथों को उसकी दोनों चूचियों पर रख दिया था लेकिन हल्के से और यह देखकर सोनू की चाची उसका हौसला बढ़ाते हुए बोली,,,)



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अरे बुद्धु ईसे सहलाना नहीं है बल्की जोर-जोर से दबाना है,,,,।

ओहहह चाची मुझे कुछ कुछ हो रहा है,,,।

पगले अभी बहुत कुछ होना बाकी है,,,,, बस इस जोर-जोर से दबा,,,,।

(सोनू की चाची की इजाजत पातें हीसूरज समझ गया था कि अब उसे क्या करना है वैसे भी उसे दिन सोनू की चाची ने उसे इतना तो सीखा ही दी थी और उसी पर सूरज को अमल भी करना थावैसे तो अगर सोनू की चाची के नजरों में सूरज नादान ना होता तो इस समय बहुत कुछ कर देता लेकिन नादानी के नाते उसे उतना ही करना था जितना कि उसे दिन सोनू की चाची ने करने को कही थी और इसकी इजाजत पाते हीसूरज सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी चूचियों को दशहरी आम की तरह दबाना शुरू कर दिया था और इस क्रिया में सूरज को भी अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,।




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स्तन मर्दन का आनंदसोनू की चाची के चेहरे पर भी साफ दिखाई दे रहा था वह पूरी तरह से उत्तेजना और कामुकता के सागर में डुबती चली जा रही थी,,,, सूरज जोर-जोर से उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया था हालांकि उसकी दोनों हथेलियां में उसकी दोनों चूचियां ठीक तरह से समा नहीं पा रही थी लेकिन फिर भी सूरज पूरी कोशिश कर रहा था इस तरह से सोनू की चाची को आनंद प्रदान करने के लिए और उसे मजा भी आ रहा था,,,। टूटी हुई झोपड़ीएक मर्द और एक औरत का काम क्रीड़ा शुरू हो चुका था,,, सोनू की चाचीइस सुख से पूरी तरह से वंचित थी लेकिन आज उसे लग रहा था कि उसकी इच्छा पूरी हो जाएगी,,, बरसों बाद वह अपनी अभिलाषा को पूरी होते हुए देख रही थी सूरज उत्तेजना औरमदहोशी में पड़े जोर-जोर से उसकी चूचियों को दबा रहा था दबोच रहा था मचल रहा था,,, थोड़ा-थोड़ा अपना अनुभव भी हुआ दिख रहा था जिसके चलते इसकी कड़ी हो चली छुहारा जैसी निप्पलको वह उंगली के बीच लेकर दबा दे रहा था जिससे सोनू की चाची की उत्तेजना और आनंद में बढ़ोतरी होती जा रही थी,,,,।




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कुछ देर तक इसी तरह से स्तन मर्दन का खेल चलता रहा और अपनी आंखों को बंद करके सोनू की चाची इस आनंद को पूरी तरह से अपने अंदर उतारने लगी लेकिन अब आगे बढ़ने का समय था,,,इसलिए सोनू की चाची तुमसे हाथ उसके लंड पर रखकर उसे कस के ढाबा चली और उसे एकदम से अपनी तरफ खींचकर उसे अपनी बाहों में भर ले इस तरह से करने से सूरज का चेहरा उसकी दोनों चूचियों के बीच समा गया यह देखकर सोनू की चाची की सांस ऊपर नीचे होने लगी उसकी सांसे गहरी चलने लगी और वह मदहोशी भरे स्वर में बोली,,,।

कभी जवान औरत की चूची को मुंह में लेकर पिया है,,

उत्तेजना के मारे सूरज कुछ बोल नहीं पाया बस ना सिर हिला दिया,,,,‌




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तो ले इसे मुंह में लेकर पी,,,,(इतना कहने के साथ ही सोनू की चाचीउसकी हां सुने बिना ही अपनी चूची को हाथ में लेकर उसकी तनी हुई निप्पल को सीधा उसके फोटो के बीच रगड़ने लगी उसकी यह हरकत सूरज की तन बदन में आग लग रही थीऔर वह तुरंत अपने होठों को खोलकर सोनू की चाची की छुहारे जैसी निप्पल को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से उसकी दुसरी चुची को लगातार दबा रहा था,,,,, सूरज की हरकतसोनू की चाची की तन बदन में मदहोशी का रस खोल रही थी वह पूरी तरह से पल में जा रही थी नतीजन उसके मुंह से सिसकारी की आवाज निकलना शुरू हो गई थी,,, और इस आवाज को सुनकर सूरज की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,,।फिर भी अपनी नादानी का प्रदर्शन करते हुए वहां सोनू की चाची की चूची को अपने मुंह से बाहर निकाल कर उसकी आंखों में देखते हुए बोला।

क्या हुआ चाची इस तरह की आवाज क्यों निकाल रही हो,,,,।




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कुछ नहीं रे पगले जब औरत को मजा आता है जब वह पूरी तरह से मस्त हो जाती है तब इसी तरह की आवाज निकलती है उसके मुंह से तु चिंता मत कर तू अपना काम जारी रख,,,,(ऐसा कहते हुए फिर से उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में लेकर उसे अपनी चूची से सताती और सूरज अपना मुंह खोलकर फिर से उसके छुहारे को मुंह लेकर पीना शुरू कर दिया,,, थोड़ी देर बादअपनी दूसरी चूची को हाथ में लेकर वह उसे उसके मुंह में डाल कर चूसाना शुरू कर दी,, और सूरज बारी-बारी से उसके दोनों चुचियों का स्तनपान करने लगा,,सूरज को बहुत मजा आ रहा था हालांकि वह इस तरह का खेल बहुत बार खेल चुका था लेकिन आज सोनू की चाची के साथ उसे बहुत मजा मिल रहा था,,,,उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर में घुसने की कोशिश कर रहा था,, इसका एहसास सोनू की चाची को बड़े अच्छे से हो रहा था इसलिए वह अपना हाथ तुरंत नीचे की तरफ लाकर उसका लंड को अपनी हथेली में दबोचते हुए बोली,,,।




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हाय दइया तेरा लंड कितना टन्नाया हुआ है रे साड़ी सहित बुर में घुसना चाहता है,,,।
(सोनू की चाची के मुंह से यह सुनकर सूरज की उत्तेजना और बढ़ने लगी वह पागलों की तरह उसकी दोनों सूचियां को दोनों हाथों में पकड़ कर दबाते हुए बारी-बारी से पीना शुरू कर दिया था और सोनू चाचा उसके लंड को पकड़कर हल्के हल्के मुठीया रही थी,,,सोनू की चाची इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज के पास जिस तरह का मर्दाना अंग है उसके जरिए सूरज किसी भी औरत को अपनागुलाम बन सकता है लेकिन सोनू की चाची भी एक जवानी से भरी हुई औरत थी और वह एक मर्द को अपना गुलाम बनाना अच्छी तरह से जानती थी वह तो उसका पति ही निकम्मा था वरना उसकी जगह कोई और होता तो जिंदगी भर उसके तलवे चाटता।




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अब खेल में आगे बढ़ने का समय आ रहा था सोनू के चाचा इस बात को अच्छी तरह से जानती थीऔर सोनू की चाची इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसे ही पहल करना है उसे ही आगे बढ़ाना है क्योंकि उसके नजर में सूरज पूरी तरह से नादान लड़का था उसे औरत के अंगों के बारे में और उनसे खेलने के बारे में कुछ नहीं मालूम उसे ही सूरज को दिशा निर्देश करना था कि अब क्या करना है कैसे करना हैइसीलिए वह कुछ देर तक इस तरह से आनंद लेने के बाद गहरी सांस लेते हुए सूरज की खूबसूरत मासूम चेहरे को अपनी हथेली में लेकर उसे अपनी चूची से दूर करते हुए गहरी सांस लेते हुए बोली,,,।



वाह रे पगले,,,तूने तो मुझे मस्त कर दिया आज तक ऐसा प्यार इन चूचियों से किसी ने भी नहीं किया था,,,,,




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चाची मुझे भी बहुत मजा आया मुझे नहीं मालूम था कि औरत की चूचियों से इतना आनंद आता है मैं तो यही समझता था कि बच्चे जब पैदा होते हैं तो बस इसे दूध पिया जाता है,,,(सूरज गहरी सांस लेते हुए बोले तो उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए सोनू की चाची बोली)

तुझे कैसा लगा दूध पीकर,,,।

मत पूछो चाची बहुत मजा आया,,,, मैं बात नहीं सकता,,,।

इस मजा को थोड़ा और बढ़ाया जाए,,,, अभी बहुत कुछ बाकी है मजा लेने के लिए,,,।

कैसे चाची,,,, चुची से तो मजा ले लिए,,,।

(सूरज की नादानी भरी बातें सुनकर मुस्कुराते हुए सोनू की चाची अपनी नजरों को नीचे करके उसके लंड की तरफ देखते हुए बोली,,,)

अभी बताती हूं,,,,(और इतना कहने के साथ हीवह अपने ब्लाउस को पूरी तरह से उतर कर घास के देर में फेंक दी कमर के ऊपर सेवा पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसका गदराया जिस्म देखकर सूरज के मुंह में पानी आ रहा था और उसके लंड कि अकड़ और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,, ब्लाउज उतार देने के बादसोनू की चाची एकदम से घुटनों के बल बैठ गई ठीक उसकी आंखों के सामने सूरज का पायजामा अभी भी उसके घुटनों में फंसा हुआ था जिसे वह अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसे निकालने लगी और सूरज भी इसमें उसकी मदद करने लगा देखते ही देखते वह कमर के नीचे से नंगा हो गया उसके लंड किया कर बहुत देर से बरकरार थी यह देखकर ही सोनू की चाची की बुर कचोरी की तरह फूल रही थी और पिचक रही थी क्योंकि उसे अंदाजा था कि यह कितना मजा देने वाला है।




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सूरज का पैजामा उतार देने के बादसोनू की चाची अपना हाथ आगे बढ़कर सूरज के लंड को पकड़ ली और उसे हल्के से मुठीयाते हुए सोनू की आंखों में आंखें डाल कर बोली,,,,।

सूरज आज तो सोच भी नहीं सकता तुझे ऐसा मजा दूंगी की तू जिंदगी भर याद रखेगा बस इस बात को किसी को बताना नहीं अगर नहीं बताया तो ऐसा मजा जिंदगी भर मिलता रहेगा,,,, बोल यह बात किसी को बताया तो नहीं,,, और अपनी मां से तो बिल्कुल भी नहीं बोल नहीं बताएगा ना,,,।


किसी बातें करती हो चाची भला ऐसी बात किसी को बताई जाती है इसमें तो अपनी खुद की बदनामी हो जाएगी तुम भरोसा रखो इस तरह की बात तो मैं किसी को नहीं बताऊंगा,,,,(सूरज की बात सुनकर सोनू की चाची के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली)

अरे वाह चलो इतनी तो समझदारी है तुझ में मुझे तो लगा बिल्कुल नादान है,,,,।

लेकिन चाची अब तुम करने क्या वाली हो,,,,!





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रुक जा अभी बताती हूं,,,(इतना कहने के साथ ही सोनू की चाची अपने लाल लाल होठों को एकदम से सूरज के लंड की गरमा गरम सूखने पर रख दी और उसके होठों को अपने लंड के सुपर पर महसूस करते हैं सूरज की तो सिट्टी पिटी गुम हो गई,,,, मैं एकदम से गहरी सांस लेता हूं अपनी कमर को पीछे की तरफ लेने लगा लेकिन सोनू की चाची तुरंत अपने दोनों हाथों कोउसके नितंबों पर रखकर उसे जकड़ी ली यह देखकर सूरज की हालत और ज्यादा खराब होने लगी लेकिन फिर भी वह अपनी नादानी को जानबूझकर दिखाते हुए बोला,,,)

यह क्या कर रही हो चाची इस पर कोई चुम्मा लेता है क्या इससे तो पेशाब किया जाता है,,।





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अरे पगले तू नहीं जानता तेरा यह लंड कितना प्यार करने के लिए बना है,,,(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची अपने मतलब को समझाते हुए तुरंत उसके लंड के सुपाडे पर चुंबनों की बारिश कर दी,,, और यह सिर्फ उसके सुपाडे तक नहीं था बल्कि उसकी जड़ तक था,सोनू की चाची की हरकत सूरज को पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद किया जा रही थी वह पागल हुआ जा रहा था उसका भजन पूरी तरह से करमा जा रहा था क्योंकि इस तरह से तोमुखिया की बीवी और मुखिया की लड़की ने भी उसके लंड से प्यार नहीं की थी हालांकि मुंह में लेकर चूसी जरूर थी,,, इसीलिए सूरज अपने मन में सोच रहा था किसोनू की चाची अगर इसे पूरी तरह से अपने मुंह में लेकर चूस तो कितना मजा आ जाएगा अगर कोई और होता तो शायद सूरजपहल करते हुए खुद ही अपने लंड को उसके मुंह में डाल देता लेकिन सोनू की चाची के आगे वह पूरी तरह से नादान था इसलिएऐसी कोई भी हरकत नहीं करना चाहता था जिससे उसे जरा भी शक हो कि इस तरह से वह पहले भी कई औरतों के साथ सुख भोग चुका है।)




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ओहहहहह चाची,,,,सहहहहहह,,, तुम तो मुझे पागल कर दोगी मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,,ओहहहहह चाची,,,,,,।

(सूरज का इतना कहना था कि उसकी मदहोशी को देखकर सोनू की चाची भी मदहोश होने लगी और तुरंत अपने लाल-लाल होठों को खोलकर उसके लंड के सुपाड़े को पूरा अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,, अद्भुत अविस्मरणीय आनंद के सागर मेंसोनू की चाची पूरी तरह से डुबकी लगा रही थी वह इस पल को बयां नहीं कर सकती थी इससे पहले वह कभी सोची भी नहीं थी कि किसी मर्द का लंड इतना मोटा और लंबा होता है इस समय सूरज का लंड उसके मुंह में पूरी तरह से भरा हुआ था और उसके होंठों का आकार मुर्गी के अंडे की तरह गोलाकार और थोड़ा लंब हो चुका था,,,, सूरज की तो हालत खराब हो गई थी,,, वह कभी सोचा भी नहीं था कि सोनू की चाची इस तरह की हरकत कर सकती है,,, वैसे तो जिस तरह से सब कुछ हो रहा था उसे देखते हुए सूरज की सोच के पड़े तो बिल्कुल भी नहीं था लेकिन इस तरह की हरकत की उसे उम्मीद नहीं थी,,,। एकदम मदहोश होता हुआ सूरज बोला,,,)





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यह क्या कर रही है चाची ऐसा कोई करता है क्या इससे तो पेशाब किया जाता है,,।

अरे पगले इससे पेशाब तो किया जाता है लेकिन औरतों को इस तरह से मजा भी दिया जाता है,,,(अपने मुंह में से सूरज कीटे लंड को कुछ पल के लिए बाहर निकाल कर इतना बोलकर वह वापस उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी मानो के जैसे उसे छोड़ना ही न चाहती हो,,,,टूटी हुई झोपड़ी में माहौल पूरी तरह से गर्म चुका था जेठ की दुपहरी में दोनों की गर्मी लग वातावरण को गर्माहट दे रही थी गांव से दूर सुनसान जगह पर टूटी हुई झोपड़ी मेंदोनों एक दूसरे में आनंद ढूंढ रहे थे दोनों को बहुत मजा आ रहा था ं,,, कोई सोच भी नहीं सकता की गांव का एक जवान लड़का और एक गांव की जवान औरत और वह भी शादीशुदा इस तरह से एकांत पाकर जवानी के जोश में पागल हो जाएंगे,,,।




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सोनू की चाची के लिए तो यह सब कुछ सपने जैसा ही था वह कभी सोची भी नहीं थी कि इस तरह से उसे सुख प्राप्त होगा क्योंकि आज तक उसने अपने पति के अलावा किसी के बारे में सोची भी नहीं थी,,, लेकिन अपनी किस्मत पर रोती भी थीएक तो उसे शरीर सुख नहीं मिल रहा था और ऊपर से उसकी गोद भी सुनी थी बरसों गुजर गए थे ना तो शरीर सुख ना हीं मां बनने का सुख दोनों तरफ से उसे तड़प ही मिल रही थी वह तो एक दिन मजाक में मजाक में गांव की ही औरतों से दूसरे के साथ संबंध बनाने के लिए बोली थी,,,तब उसका मन थोड़ा इधर-उधर होने लगा था और जब सूरज की मैन खुद उसे बाजार में एक पंडित जो की ज्योतिष थे उन्हें सोनू की चाची का हाथ दिखाई थी तोवहीं पर इस बात का खुलासा हुआ था कि उसकी गोद तो हरी होगी लेकिन उसके मर्द से नहीं बल्कि किसी गैर मर्द से और तब से उसका मन किसी गैर मर्द के साथ संबंध बनाने के लिए तड़प रहा था,,,।



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और वह गैर मर्द कोई और नहीं था बल्कि सूरज ही था सूरज के साथ वह हम बिस्तर होने के लिए तड़प रही थी सूरज के साथउसकी बात अच्छी तो और मुलाकात भी होती थी जिसके चलते उसकी इच्छा और ज्यादा प्रबलित होने लगी थी और आज ऐसा मौका मिल गया था कि आज वह अपनी इच्छा को पूरी कर सकती थी तब वह अपने कदम को पीछे लेना नहीं चाहती थी बस की इस खेल में आगे बढ़ जाना चाहती थी क्योंकि ज्योतिष को हाथ दिखाने के बाद उसे लगने लगा था कि शायद इसमें कुदरत की ही मंजूरी है,,,।

सूरज को वह पूरी तरह से पागल बना रही थी इतना मोटा तगड़ा लैंड उसने कभी अपने जीवन में अच्छी नहीं थी और उसे वह अपने मुंह में लेकर पूरी तरह से तृप्ति का एहसास कर रही थी,,, सूरज भी अब पूरी तरह से मत हुआ जा रहा था वह अपने दोनों हाथों को अपनी कमर पर रखकर धीरे-धीरे अपनी कमर को भी आगे पीछे कर रहा था,,,, उत्तेजना और मदहोशी में दोनों के चेहरे टमाटर की तरह लाल हो चुके थे सूरज के लिए तो यह खेल पहले भी हो चुका था और यह उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं लेकिन सोनू की चाची के साथ उसे ज्यादा ही आनंद प्राप्त हो रहा था और सोनू की चाची के लिए तो यह खेल पहली बार का था क्योंकिउसका पति कभी इस तरह की हरकत किया नहीं था और नहीं उसे करने दिया था और वैसे भी उसका खुद से आधा भी नहीं था एकदम पतलाऔर छोटा जिससे वह कभी भी संतुष्ट नहीं हुई थी और इसलिए ऐसे सूरज के लंड को पाकर वह पूरी तरह से सातवें आसमान में उड़ रही थी।



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सूरज के लंड को मुंह में लेकर चूसते हुए काफी देर हो चुका थाऔर इसलिए सोनू की चाची को इस बात का डर था कि कहीं उसका लंड पानी न छोड़ दे लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं था क्योंकि काफी देर से सूरज का लंड खड़ा का खड़ा था उसमें जरा भी ढीलापन नहीं आया था,,, इस बात की खुशी सोनू की चाची के चेहरे पर भी साफ नजर आ रही थी लेकिन अब समय इस खेल को आगे बढ़ने का हो गया था इसलिए कुछ देर तक ईसी तरह से अपने गले तक सूरज के लंड को लेकर चूसते हुए,,, वह धीरे से अपने मुंह में से उसे बाहर निकाल दी वैसे तो वह सूरज के लंड को अपने मुंह से बाहर नहीं निकालना चाहती थी,,,,लेकिन निकालना जरूरी था क्योंकि उसकी बर पानी पर पानी छोड़ रही थी और पूरी तरह से अकेली हो चुकी थी जिसका मतलब साफ था कि वह अब लंड के लिए तड़प रही थी,,,, फिर भी सूरज मदहोशी भरे स्वर में बोला,,,।

क्या हुआ चाची बाहर क्यों निकाल दी बहुत मजा आ रहा था,,,,।




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क्योंकि अब ईससे भी ज्यादा मजा आने वाला है,,,।

इससे भी ज्यादा मजा लेकिन कैसे चाची,,,!(आश्चर्य भरे स्वर में जानबूझकर नादानी का नाटक करते हुए बोला उसकी बात सुनकर सोनू की चाची गहरी सांस लेते हुए बोली)

अभी बताती हूंतूने अब तक मेरी बड़ी-बड़ी गांड और मेरी चूची के दर्शन तो कर लिए हैं लेकिन तूने अभी मेरी बुर नहीं देखा है सच बता देखा है कि नहीं,,,।

(सोनू की चाची की यह बात सुनते ही सूरज के दिन की धड़कन एकदम से बढ़ने लगी,,,, वह समझ गया था कि अब और ज्यादा मजा आने वाला है इसलिए वह धीरे से बोला,,,)

नहीं चाची तुम सच कह रही हो,,,जो कुछ भी देखा हूं सिर्फ तुम्हारी ही देखा हूं और इसके बारे में तुम बात कर रही हो उसे तो मैं कभी देखा ही नहीं हूं ना ही कभी सपने में भी देखा हूं कि वह कैसी होती है,,,।

सच कह रहा है ना तभी दिखाऊंगी,,,।

मैं सच कह रहा हूं चाची में बिल्कुल नहीं देखा हुं,,,।
(सूरज की बातों पर सोनू की चाची का विश्वास करना लाजमी था क्योंकि अभी तक सूरज ने अपने आप को उसके सामने ऐसा ही पेश किया था कि जैसे वह कुछ भी नहीं जानता हूं वह बिलकुल नादान हो इसलिए सूरज की बातों पर सोनू की चाची को भरोसा हो गया था और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)



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तो ठीक है आज मैं तुझे औरत का सबसे खूबसूरत अंग दिखाती हूं जिसे देखने के लिए दुनिया का हर मर्द तड़पता है और उसे पाने के लिए हमेशा मचलता रहता है,,,,(इतना कहने के साथ ही सोनू की चाची अपनी साड़ी खोलने लगी,,, कमर के ऊपर तो वह पहले से ही नंगी हो चुकी थी बस कमर के नीचे का कपड़ा उसे उतरना था ,फिर वह सूरज के सामने पूरी तरह से नंगी हो जाती और यही कार्य को करने के लिए वह कमर पर बंधी अपनी साड़ी को खोलने लगी थी,,, सूरज का दिल जोरो से धड़कता है कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगा थाऔर उसकी आंखों के सामने जवानी से भरी हुई सोनू की चाची अपने कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगी होने जा रही थी एक औरत को नग्न अवस्था में देखने में एक मर्दों को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति होती है और उत्तेजना का एहसास होता है और जब औरत खुद ही अपने कपड़े उतार कर मर्द के सामने नंगी होने लगे तो ऐसे में तो मर्द के लिए मुंह मांगी मुराद मिल जाती है।




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जेठ की दुपहरी में पूरा गांव अपने घर में आराम कर रहा था,,, कड़क धूप के चलते कोई घर से बाहर निकलने को तैयार नहीं होता लेकिन ऐसे कड़ी धूप में सोनू की चाची और सूरज गांव से दूर जंगल जैसे जगह में एक टूटी हुई झोपड़ी में जवानी का खेल खेल रहेबाहर की गर्मी लग और सोनू की चाची की जवानी की गर्मी लग एक अलग ही मौसम का आभास करा रही थी,,, सूरज की हालत खराब हो रही थी उसकी आंखों के सामने एक जवानी से भरी हुई कदराई बेलगाम घोड़ी में वस्त्र हो रही थी वैसे तो सूरज अच्छी तरह से जानता था कि साड़ी के अंदर कौन सा खजाना छुपा होता है लेकिन फिर भी वह उसे अंग को देखने के लिए तड़प रहा था वह देखना चाहता था कि सोनू की चाची की बुर कैसी दिखाई देती है,,, और यही चाहत उसके पसीने छुड़ा रही थीइसी चाहत में उसका हाथ कब उसके लंड पर पहुंच गया उसे खुद समझ में नहीं आया और वह उसे पकड़कर ऊपर नीचे करके हिलना शुरू कर दिया था,,उसकी हालत को देखकर सोनू की चाची एकदम गदगद हो गई उन्हें इस बात की खुशी थी कि उसकी जवानी का असर सूरज के ऊपर बहुत भारी पड़ रहा है तभी तो वह अपने लंड को हिला रहा है नहीं तो इस तरह की हरकत वह कभी कर ही नहीं सकता था।




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जैसे-जैसे सोनू की चाची अपने हाथों से साड़ी को खोल रही थी वैसे-वैसे सूरज की हालत पाल-पाल खराब होती जा रही थी और देखते ही देखते हो अपनी साड़ी को उतार कर सूखी हुई घास में फेंक दी,,ईस समय वह केवल सूरज की आंखों के सामने केवल पेटीकोट में खड़ी थी,,,,,,, उसकी मुस्कुराहट सूरज के दिल पर छुरिया चल रही थी सूरज जल्दी से जल्दी उसके खूबसूरत अंगों को देखना चाहता थाउसका मन तो कर रहा था कि आगे बढ़कर खुद ही उसके पेटिकोट का नाड़ा अपने हाथों से खोल दे और उसे नंगी कर दे,, लेकिन इस समय ऐसा करना उचित नहीं था क्योंकि सब कुछ वह खुद अपने हाथों से कर रही थीइस बात को अच्छी तरह से जानता था कि आज का दिन गुजर जाने के बाद आगे से जो कुछ भी करना है उसे ही करना होगा,,,।

पेटिकोट की डोरी पर हाथ रखते हुएसोनू की चाची सूरज की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी मानो कि इतरा रही हो जैसे कोई बच्चे को खिलौना दिखाकर लग जाता है इस तरह से इस समय सोनू की चाची अपनी बुर पर से पर्दा हटाने के लिए सूरज को ललचा रही थी। और सूरज ललच भी रहा था,,,,सोनू की चाची अभी भी पेटिकोट की डोरी पर हाथ रखी हुई थी और मुस्कुराते हुए सूरज की तरफ देखते हुए बोली,,,।





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बोल सूरज खोल दो पेटिकोट दिखा दु तुझे औरत का सबसे खूबसूरत अंग,,,,।

(उसकी बात सुनकर सूरज को तो समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि इस समय वह सोनू की चाची की नजरों में पूरी तरह से नादान थाफिर भी वह अच्छी से जानता था कि उसके न करने के बावजूद भी वह उसे अपनी बर दिखा कर ही रहेगी इसलिए वह हिम्मत दिखा कर बोला,,,)

चाची मैं बात नहीं सकता कि इस समय मुझे कैसा लग रहा है,,, मैं सच में तुम्हारे खूबसूरत अंग को देखना चाहता हूं,,,,(अभी भी सूरज का हाथ उसके लंड पर था जो की दर्शा रहा था कि वह कितना ज्यादा उत्तेजित था,, और उसकी यही अदा सोनू की चाची को भी अच्छी लग रही थी इसलिए वह मुस्कुराते हुए बिना कुछ बोले अपने पेटिकोट की डोरी को हल्के से खींच दी और पेटिकोट का नाड़ा एकदम से ढीला पड़ गया,,,, यह देखकर सूरज के दिल की धड़कन बढ़ने लगी,,,, और सोनू की चाची अपने दोनों हाथों की उंगलियों का करामत दिखाते हुए उसे पेटिकोट के दोनों तरफ डालकर पेटीकोट को कमर पर से ढीली करने लगी,,,,,और देखते ही देखते पेटिकोट ढीली होने के साथ ही वह अपनी पेटीकोट को कमर पर से इस तरह से छोड़ दी मनु जैसे कि किसी खूबसूरतनाटक को शुरू करने के लिए पर्दा ऊपर उठाया जाता हो लेकिन यहां पर खूबसूरत नाटक को शुरू करने के लिए पर्दे को नीचे गिराया जा रहा था और पेटीकोट हाथों से छोड़ते ही सीधे जाकर उसकी कदमों में गिर गई,,,और अगले ही पर सोनू की चाची सूरज की आंखों के सामने संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में खड़ी हो गई,,,।



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यह खूबसूरत नजारा इस समय सूरज को अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था गांव से दूर विरान जगह में और टूटी हुई मड़ई में वह कभी सोचा नहीं था कि उसे इस तरह का दृश्य देखने को मिलेगा,,,उसके दिल की धड़कन एकदम से बढ़ने लगी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वैसे तो उसे मालूम ही था कि उसे क्या करना है लेकिन यह समय में कुछ कर नहीं सकता था बस देखने के सिवा,,,,सोनू की चाची मुस्कुरा रही थी उसकी आंखों में शर्म बिल्कुल भी नहीं थी वह पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी,,, क्योंकि वह भीसमझ चुकी थी कि बेशर्म बनने के बाद ही जिंदगी का असली सुख प्राप्त होता है,,,।




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सोनू की चाची का गदराया जिस्म सूरज के होश उड़ा रहा था,,, क्या नहीं था सोनू की चाची के पासकिसी भी मर्द को आकर्षित करने के लिए उसके पास सब कुछ था,जो एक औरत के पास होना चाहिए था,,, खूबसूरत चेहरा बड़ी-बड़ी चूचियां एकदम खरबूजे की तरह गोल,,,, सुडौल काया,, मांसल कमर,,, खूबसूरत बड़ी-बड़ी उभरी हुई गांड,,,, और अब उसकी मोती मोती केले कितने की तरह चिकनी जाएंगे और उसके बीच में उसकी खूबसूरत पतली गुलाबी दरार जिस पर हल्के हल्के रेशमी बालों के हुए थे,,, बालों की जरूरत के बीच की हो पतली दरारे ऐसा लग रहा है कि मानो जैसे जंगल में से कोई खूबसूरत नहर बह रही हो,,, उसके गुलाबी छेद में से निकले मदन रस की बंदे उसके बालों की जरूरत पर मोती के दाने की तरह चमक रहे थे जिसे देखकर सूरज के मुंह में पानी आ रहा था वह पागल हुआ जा रहा थाऔर उसकी तरफ को और ज्यादा बढ़ाते हुए सोनू की चाची खुद अपनी हथेली को अपनी खूबसूरत बुर पर रखकर मसलते हुए बोली,,,।





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देख ले सूरज यही है औरत का खूबसूरत अंग जिसे देखने के लिए तु तड़प रहा था,,,,।


सच कह रही हो चाची,,,,,(ऐसा कहते हुए हाथ में लंड पड़े हुए सूरज एक कदम आगे बढ़ गया उसकी नजर सोनू की चाची की दोनों टांगों के बीच ही टिकी हुई थी और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) मैंने आज तक इतना खूबसूरत है तेरे से नहीं देखा और इससे ज्यादा खूबसूरत अंग कोई हो ही नहीं सकता सच में मैं पहली बार देख रहा हूं मैं तो पागल हो जाऊंगा ईसे देखकर,,,।

(सूरज की बातों को सुनकर सोनू की चाची मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए बोली)

तूने सच में नहीं देखा था ना इस अंग को,,,,।

बिल्कुल नहीं चाची इसी में से तुम्हारी पेशाब निकलती है ना,,,,।





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हा रे इसी छेद में से निकलती है और तो इसके दूसरे उपयोग को नहीं जानता,,,।


इसका दूसरा उपयोग,,,(जानबूझकर आश्चर्य जताने का नाटक करते हुए बोला हालांकि अभी भी उसका हाथ उसके लंड पर ही था)


हां इसका दूसरा उपयोग और तेरे लंड का भी दूसरा उपयोग आज मैं तुझे सबको सिखाऊंगी बस इस बात को किसी को भी मत बताना,,,, सीखना चाहता है ना दूसरा उपयोग,,,।


बिल्कुल चाची मैं सब कुछ सीखना चाहता हूं,,,,।

तो इस बात को किसी को मत बताना,,,,।


बिल्कुल भी नहीं बताऊंगा,,,,।

(सोनू की चाची मुस्कुराते हुए लगातार अपनी गुलाबी बुर को अपनी हथेली से मसलकर गर्म कर रही थी उसमें से लगातार उसका मदन रस निकाल रहा था जो उसकी हथेली को भिगो रहा था,,,,, ऐसा करते हुए वहां सूरज का हाथ पकड़ कर उसे अपने करीब लेकर आई और उसे,,,बोली,,,)




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अब जैसा भी मैं कहूं वैसे करते जाना,,,,। बोल करेगा ना,,,,।

(इस बार सूरज कुछ बोला नहीं बस हा में सिर हीला दिया,,,,)

तो शुरू करते हैं आगे के खेल को जिसने बहुत बचाने वाला है अब तुझे वही करना है जो मैं तेरे साथ कर रही थी,,,,(और ऐसा कहते हुएसोनू की चाची उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे पर दबाव देते हुए उसे नीचे बैठने का इशारा कर रही थी सूरज अच्छी तरह से जानता था कि सोनू की चाची क्या करवाना चाहती है इसलिए उसके आजा के अधीन होकर वह धीरे-धीरे अपने घुटनों के बाल हो गया और इस स्थिति में आने के बादसोनू की चाची की खूबसूरत बड़ा ठीक उसकी आंखों के सामने थी और उसमें से मदन रस लगातार बह रहा था जिसे पीकर चाट कर सूरज अपनी जवानी की प्यास बुझाना चाहता था,, देखते ही देखते सोनू की चाची की हालत खराब होने लगी,,, क्योंकि अब वह ऐसा कुछ करने जा रही थी जिसके बारे में वह पहले कभी सोचा नहीं थी आज वह पूरी तरह से एक अलग औरत बनाकर सूरज की आंखों के सामने आ चुकी थी उसका चरित्रउसके संस्कार आज धरे के धरे रह गए थे क्योंकि उसके बदन की जरूरत उसे मजबूर कर रही थी उसकी जिस्म की प्यास उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित कर रही थी।




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देखते ही देखते सोनू की चाचीदोनों हाथों से उसके सर पर हाथ रखकर उसे पकड़ ली और सूरज ऊपर नजर करके सोनू की चाची की आंखों में देखने लगा सोनू की चाची और सूरज दोनों की नजर आपस में टकराई,, अब सोनू की चाची से सबर करना मुश्किल हो जा रहा था और वहां तुरंत सूरज के चेहरे को अपनी बुर पर दबा दी,,,,सूरज को तो मालूम था क्या करना है लेकिन यहां पर ऐसा जताना था कि जैसे उसे कुछ मालूम ही नाऔर सोनू की चाची उसके चेहरे को पकड़ कर उसके चेहरे पर अपनी बुर को गोल-गोल घूमाकर रगड़ना शुरू कर दी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, उसमें से उठ रही मादक खुशबू सूरज के नसों में मदहोशी भर रही थी वह उसमें अपनी जब डालकर उसकी मलाई को चाटना चाहता था लेकिन बड़ी मुश्किल से अपने आप पर काबू किए हुए था और वह घुटते हुए स्वर में बोला,,,)

यह क्या कर रही हो चाची,,,,।



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सूरज अब तुझे भी वही करना है जो मैं तेरे लंड के साथ की थी,,,,इसे सिर्फ पैसाब ही नहीं किया जाता है बल्कि और भी बहुत कुछ काम लिया जाता है इनमें से एक काम यह भी है,,,,उफ्फ,,,, अब ज्यादा बातें मत कर कम पर लग जा,,,।

(फिर क्या था सोनू की चाची का की दिशा निर्देश मिल गया था,,, सूरजउसकी उपयोगिता को अच्छी तरह से जानता था कैसे क्या करना है कब करना है सब कुछ जानता था इसलिए तुरंत अपनी जीभ निकालकर उसके गुलाबी छेद में डाल दिया और उसका रस पान करना शुरू कर दिया सूरज पागलों की तरह उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया था यह देखकर सोनू की चाची मदहोश हो जा रही थी क्योंकिऐसा हुआ पहली बार कर रही थी ऐसा सिर्फ उसने गांव की औरतों से सुन रखी थी की मर्द औरत की बुर चाहते हैं लेकिन कभी भी उसका मर्द उसके साथ कभी भीनहीं इस क्रिया को किया था और जब भी सोनू की चाची ऐसा करने को कहती थी तो वह इनकार कर देता थाइसलिए तो आज सोनू की चाची को बहुत मजा आ रहा था वह पागल हुए जा रही थी उसके चेहरे का हाव-भाव एकदम मदहोशी में डूबता चला जा रहा था,,,,।




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सूरज भी अपना पूरा अनुभव दिखाते हुए दोनों हाथों को उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे दोनों हथेली से दबाते हुए उसकी बुर का रस पी रहा था उसे चाट रहा था उसमें से उठ रही मादक खुशबू उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा रही थी,,,,, टूटी हुई झोपड़ी में गांव से दूंगा एक शादीशुदा औरत पूरी तरह से बेशर्म होकर एक जवान लड़के के साथ हम बिस्तर होने के लिए तड़प रही थी और अपनी मंजिल पर पहुंचने की पहली सीढ़ी को चढ़ चुकी थी,,,,।


सहहहहलआहहहहह,,,,, सूरज बहुत मजा आ रहा है रे,,,,बस ऐसे ही चाट,,,,जैसे मैं तुझे खुश की थी वैसे तू भी मुझे खुश कर दे पागल कर दे मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,,आहहहहहहह,,,,, जीभ को अंदर तक डाल,,,,, आहहहहहहह,,,,,,,ऊममममममम,,,,,,ऊईईईईईईईई,,,,, सहहहहलआहहहहह,,,,,पागल कर देगा रे तू तो मुझे पहली बार में ही तू तो सीख गया औरत की बुर कैसे चाटी जाती है,,, तुझे भी बहुत मजा आ रहा है,,,,ओहहहहहबबब,,,,,,, ऐसे ही हां जोर-जोर से,,,,




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सोनू की चाची का दिशा निर्देश पातें ही सूरज अपने काम पर लग गया थाजितना हो सकता था उतने अंदर तक वह अपनी जीभ डालकर उसकी मलाई को चाटने की कोशिश कर रहा था उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर जो आनंद से मिल रहा था वह बयान करने के लिए शब्द नहीं थेवाकई में उसे एहसास हो रहा था कि सोनू की चाची की गांड को ज्यादा ही पड़ी थी और उसे पड़कर उसकी बुर चाटने में जो आनंद मिल रहा था उससे वह पूरी तरह से गदगद हुआ जा रहा था,,,,लंड की अकड़ बढ़ती जा रही थी उसकी नसें फूल चुकी थी ऐसा लग रहा था कि किसी भी वक्त उसकी नसें फट जाएगी,,, रह-रह कर सूरज अपने लंड को जोर-जोर से दबा दे रहा था। ऐसा करके वह अपनी उत्तेजना को काबू में लाने की कोशिश कर रहा था,,,,।




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कुछ देर तक इसी तरह से खड़े-खड़े अपनी बुर की चटाई करवाने के बाद,,,, वह सूरज के चेहरे को अपने हाथों से पकड़ कर उसे अपनी बुर से हटाने लगी और बोली,,,।


रुक जा मेरे पैर दर्द करने लगे हैं,,,(और ऐसा कहने के साथ ही टूटी हुई झोपड़ी में पड़ी हुई घास के ढेर को एक तरफ करके उसे बिस्तर की तरह बना दी ताकी लेटने में आराम रहे,,,, और घास के ढेर पर पीठ के बाल लेट गई और अपनी दोनों टांगों को खोल दी,,, और सूरज से बोली,,,)

अब आज इस तरह से चाटने में तुझे भी मजा आएगा,,,,,।

(फिर क्या था सूरज अपने हाथों से है अपनी कमीज को उतार कर एक तरफ कर दिया और टूटी हुई झोपड़ी में वह भी सोनू की चाची की तरह पूरी तरह से नंगा हो गया,,,, अपनी तरफ से की हुई इस हरकत को देखकर सोनू की चाची मन ही मन प्रसन्न होने लगेक्योंकि वह जानते थे कि इतना तो कोई भी मर्द कर सकता है बल्कि उसकी जगह कोई और होता तो शायद उसे कुछ भी बताने की जरूरत नहीं पड़ती वह खुद ही सब कुछ कर लेता लेकिन फिर भी एक अनजान मर्द को अनाड़ी खिलाड़ी को खिलाड़ी बनने का जो मजा है वह मजा किसी और में नहीं है इस बात का एहसास सोनू की चाची को अच्छी तरह से हो रहा था,,, और देखते ही देखते सूरज सोनू की चाची की दोनों टांगों के बीचघुटनों के बाल आगे और अपने प्यासे हो तो कोई एक बार फिर से उसके गुलाबी छेंद पर लगाकर उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दिया,,,इस दौरान सूरज को इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में सोनू की चाची अपनी जवानी का खुलकर मजा नहीं ले पाई थी क्योंकि उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि सोनू की चाची का गुलाबी छेद ज्यादा बड़ा नहीं था इससे अंदाजा लग जा रहा था कि सोनू के चाचा का लंड कितना मोटा होगा,,, इस समय सोनू के चाचा के एवज में सूरज को यही लग रहा था कि अंधे के हाथ बटेर लग गया।



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सोनू की चाची की हालत खराब हो रही थी एक तो जिंदगी में पहली बार उसकी बुर की चटाई हो रही थी और वह एकदम चरम सुख के करीब पहुंच गई थी इसलिए उसकी सांसों की गति बड़ी तेजी से चल रही थी और उसके मुंह से गरमा गरम शिसकारी की आवाज बड़ी जोरों से निकल रही थी लेकिन उसके सिसकारी की आवाज ईस सुनसान जगह में सुनने वाला केवल सूरज ही था,,, और सूरज ईस तरह की आवाज सुनकर और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था।सूरज जानता था कि उसका पानी निकलने वाला है लेकिन वह उसके ऊपर से अपने होठों को नहीं जाता रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसकी मदद का स्वाद और भी आनंद दायक और इस उत्तेजित कर देने वाला होगा इसलिए वह पागलों की तरह अपनी जीत जोर-जोर से अंदर बाहर करता हुआ उसकी बुर को चाट रहा था।





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और फिर देखते ही देखते सोनू की चाची पूरी तरह से मदहोश होने लगी उसका बदन एकदम से अकड़ने लगा,,,, और वह एकदम से अपने हाथ की कोहनी के सहारेबैठ गई और अपनी दोनों टांगों के बीच की स्थिति को देखने लगी जो की पूरी तरह से बिगड़ चुकी थी उसे साफ दिखाई दे रहा था कि सूरज पागलों की तरह उसकी बुर की चटाई कर रहा था,,, सोनू की चाची को इस बात की खुशी थी की पहली बार में ही सूरज इतना कुछ सीख गया था,,,।लेकिन अब इसकी उत्तेजना परम शिखर पर थी वह झड़ने वाली थी उसकी बुर से पानी निकलने वाला था और वह तुरंत अपना ही खाता आगे बढ़कर सूरज के बाल को जोरों से पकड़ ली औरउसे एकदम से अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी गुलाबी छेद पर दबा दी और फिर अगले ही पल उसकी बुर से भल भला कर मदन रस की बौछार होने लगी,,, और उसे बौछार में सूरज पूरी तरह से नहाने लगा,,, उसके मदन रस में उसका पूरा चेहरा गीला हो चुका था और उसकी नमकीन बुंदे उसके गले के नीचे उतर चुकी थी।





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थोड़ी देर मेंसूरज उसके पास में ही उसकी दोनों टांगों के बीच बैठा हुआ था वह जानता था कि सोनू की चाची का काम तमाम हो चुका था लेकिन अभी भी बहुत कुछ बाकी था सोनू की चाची गहरी गहरी सांस ले रही थी जिसके साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर सूरज की हालत खराब हो रही थी जब हालात शांत हुए तो सोनू की चाची सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली,,।

कैसा लगा सूरज,,,?

पूछो मत चाची आज तो मजा ही आ गया मैं कभी सोचा नहीं था कि औरत के इस अंग में इतना मजा आता होगा,,,,।(सूरज एकदम से गहरी सांस लेता हुआ बोला,,,)

तभी तो कहती थी की औरत की बुर सिर्फ पेशाब करने के लिए नहीं होती बहुत कुछ काम करने के लिए होती है जिसमें से एक काम तूने कर चुका है लेकिन अभी महत्वपूर्ण काम बाकी रह गया है,,,।





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महत्वपूर्ण काम बाकी रह गया है,,, मैं कुछ समझा नहीं,,,(सूरज फिर से अपनी नादानी दिखाते हुए बोला,,,)


अरे बुद्धू यह तो मेरी बुर का काम था लेकिन अभी तेरे लंड का काम बाकी है,,,,और अब तो जो काम तुझे बताने जा रही हूं उसमें इतना मजा आएगा कि तो ऐसा महसूस करेगा की हवा में उड़ रहा है,,,।

हवा में उड़ रहा हूंऐसा कौन सा काम बाकी है चाची मैं भी मजा लेना चाहता हूं मैं भी देखना चाहता हूं की हवा में कैसे उड़ा जाता है,,,।

(सूरज के मासूमियत को देख कर सोनू की चाची मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और वह मुस्कुराते हुए बोली)

हवा में उड़ना है तो जैसा मैं कहती हूं वैसा ही करना बहुत मजा आएगा,,,,।

लेकिन करना क्या होगा,,,?


अभी बताती हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही एक बार फिर से वह अपनी दोनों टांगों को खोल दी और अपनी गुलाबी छेद पर अपनी हथेली को फिर से रगडते हुए बोली,,,)




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ज्यादा कुछ करना नहीं है बस इसके अंदर तुझे अपने लंड को डालकर अंदर बाहर करना है,,,।

(सोनू की चाची की बेशर्मी मेरी बातें सुनकर सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था उसे अच्छी तरह से मालूम था कि क्या करना है लेकिन फिर भी अनजान बनने का नाटक करते हुए वह बोला)


अंदर बाहर में कुछ समझा नहीं,,,,


तु इधर आ में तुझे सब कुछ बताती हूं,,,,।

( इतना सुनते ही सूरज घुटने के बाद उसकी दोनों टांगों के बीच आ गया था और सोनू की चाची मुस्कुराते हुए बोली,,,,)

अब तुझे दोनों हाथ मेरी गांड के नीचे की तरफ लाकर अपनी जांघो के ऊपर खींचना है,,, मेरा भार उठा तो लेगा ना,,,


क्यों नहीं चाचा देखती हो ना कितना बड़ा-बड़ा बोझ में उठा लेता हूं,,,,.






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बोझ की बात अलग है लेकिन एक औरत की बात अलग है,,,, बोझ उठाने के लिए ताकत चाहिए लेकिन एक औरत को उठाने के लिए कलेजा चाहिए,,,,(ऐसा कहकर वह सूरज को उकसा रही थी सूरज भी एकदम से तेस में आ गया था और बोला,,)

यह बात है तो लो अभी बताता हूं,,,(सूरज को अच्छी तरह से मालूम था कि अब उसे क्या करना है क्योंकि ऐसा वह मुखिया की बीवी के साथ कर चुका था,,तुरंत अपने दोनों हाथों को नीचे से सोने की चाची की कहानी की तरफ लगी और उसकी कमर को पकड़कर सीधा अपनी जांघों पर उठाकर खींच लिया,,,, यह देख कर सोनू की चाची मुस्कुराते हुए बोली,,,)




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हाय दइया सच में तेरे में बहुत ताकत है रे,,,,,।

(अभी स्थिति पूरी तरह से समांतर बन चुकी थी सोने की चाची की गुलाबी पर ठीक सूरज के लंड के पास में थी,,,,, यह देख कर सोनू की चाची बोली,,,)

बस अब ठीक है अब तुझे अपना लंड मेरी बुर के अंदर डालना है,,,।
(इस तरह की बातों को सुनकर सूरज का रोम रोम पुलकित हुआ जा रहा था लेकिन इस समय सुबह एकदम नादानी भरे स्वर में आश्चर्य जताते हुए बोला,,)

क्या बात कर रही हो चाची इतने छोटे से छेद में यह कैसे घुसेगा,,,,।

अरे पगले यही तो करामात है मेरी बुर की और तेरे लंड की,,,, एक बार पकड़ कर डाल तो सही आराम से चला जाएगा,,,,।




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(सूरज की सांस ऊपर नीचे हो रही थी उसके माथे से पसीना टपक रहा था जवानी से भरी हुई नंगी औरत उसे छोड़ने के लिए बोल रही थी और इस समय वह सिर्फ नादानी के कारण रुका हुआ था,,, वरना अब तक तो सोनू की चाची की बुर के तार खोल दिया होताफिर भी जैसा सोनू की चाची कह रही थी वैसे तो उसे करना ही था इसलिए अपने लंड को पकड़कर उसकी बुर के गुलाबी छेद में डालने की जगह वह ऊपर नीचे बस रगड रहा था वह जानबूझकर यह दिखाना चाहता था कि उसे नहीं मालूम है कि कौन सी जगह डालना है,,,, यह देखकरसोनू की चाची से रहने जा रहा था क्योंकि गरमा गरम लंड का सुपाड़ा उसकी बुर पर रगड़ खा रहा था और यह बरसों बाद उसके साथ ऐसा हो रहा था इसलिए वह पूरी तरह से व्याकुल और उत्साहित हुई जा रही थी,,,उसे रानी जा रहा था इसलिए वह खुद अपना हाथ आगे बढ़कर सूरज के लंड को पकड़ लिया और उसे ठीक जगह पर अपनी बुर के छेद पर रख दी और बोली,,,)

बस सूरज अब धक्का मार और इसे अंदर जाने दे,,,।




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(सोनू की चाची इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा हैजिससे उसकी बुर की छोटे से छेद में जाने में थोड़ी सी तकलीफ ज़रूर होगी लेकिन आराम से चला जाएगा इतना भी वह जानती थी और सोनू की चाची की बात सुनते ही सूरज अपनी कमर को आगे की तरफ धक्का लगने लगा और ऐसा करने पर उसके लंड का सपना बुर की चिकनाहट पाकर अंदर की तरफ से सरकने लगा,,,,सूरज को भी मजा आ रहा था वह एक झटके में अपने लंड को उसकी बुर की जड़ तक घुसेड देना चाहता था,,, लेकिन अपने उत्तेजना पर और अपने आप पर पूरी तरह से काबू किए हुए था,,,। उत्तेजना की आग पूरी तरह से सूरज के बदन में लग चुकी थी,, इस समय उसे दुनिया का अनमोल खजाना मिल गया था और धीरे-धीरे वह अपने अस्तित्व को उसके अंदर उतर रहा था,,,वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी उसे सोनू की चाची चोदने के लिए मिल जाएगी,,, लेकिन यह सपना नहीं हकीकत था उम्मीद से दुगना मिल रहा था उसे,,, वह तो केवल यूं ही घूमने के लिए उसके घर पहुंच गया थाऔर जब देखा कि सोनू की तबीयत खराब है तो वहां बात हुई बातों में उसकी दवा के लिए एक वेद जी का नाम ले लिया और नतीजा देखो सोनू की चाची की चुदाई वह करने जा रहा था,,,।)

चाची क्या यह पूरा घुस जाएगा,,,!

बड़े आराम से रे बस तू धक्का लगाकर इसे अंदर तक डाल दे,,।

लेकिन तुम्हारी बुर बहुत कसी हुई है इसका छेद बहुत छोटा लग रहा है,,,, कैसे घुसेगा यह,,,।

आराम से घुस जाएगा,,, यही सब तो नहीं जानता औरत का यह अंग कितना कारामती है,,, बस तु अंदर डालने की सोच,,।

तुम कहती हो चाची तो सच ही होगा,,, मैं पूरा प्रयास करता हूंलेकिन ऐसा लग रहा है कि मेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा ही छोटे से छेद के लिए,,,,(सूरज जानबूझकर इस तरह की बातें कर रहा था इस तरह की बातें करके वह अपनी मां की बात भी सोनू की चाची को बता दे रहा था और उसकी इस तरह की बातें सुनकर सोनू की चाची मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि उसकी जवानी का जलवा पूरी तरह से उसके ऊपर बिखर चुका था जिसके चलते वह इस तरह की बातें कर रहा था.. सूरज की बात सुनकर सोनु की चाची बोली,,)

हां यह बात तो सच है मैं कहती थी ना तेरा लंड कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है लेकिन मैं जानती हूं कि बड़े आराम से चला जाएगा,,, बस तू डाल,,,।


ठीक है चाची मैं पूरी कोशिश करता हूं,,,(और इस बार थोड़ा जोर दिखा कर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा,, सूरज को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि सोनू की चाची की बुर को ज्यादा ही कसी हुई है एक शादीशुदा औरत की पूरी इतनी कसी हुई होगी वह कभी सोच नहीं सकता था क्योंकि उसने मुखिया की बीवी के साथ-साथ मुखिया की लड़की की चुदाई किया था और जैसा एहसास सूरज को मुखिया की लड़की को चोदने में हो रहा था वही ऐसा इस समय सोनू की चाची को चोदने नहीं हो रहा था,,, और इस बात की खुशी सूरज को थी,,,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसे क्या करना है,,,, सूरज का कामउसकी बुर से निकलने वाला मदन रस की चिकनाहट आसान करते रही थी थोड़ी बहुत दिक्कत है सूरज को महसूस हो रही थी लेकिन वह जानता था कि उसका लंड बुर के अंदर पूरा का पूरा घुस जरूर जाएगा,,,,।


टूटी हुई मडई में सोनू की चाची की जवानी पूरे तूफान पर थी बरसों की दबी हुई प्यास आज पूरी तरह से ऊपर आई थी और उसे बुझाने का पूरा मौका उसे मिल रहा था और अच्छी तरह से जानते थे कि उसकी जवानी की प्यास सिर्फ सूरज के मोटे तगड़े लंड से ही बुझ सकती है,,,, उसकी मोटी मोटी जांघें सूरज की जांघों पर चढ़ी हुई थी,,, और उसका लंड उसके गुलाबी छेद में धीरे-धीरे अंदर की तरफ घुस रहा था,,, इस तरह का कड़क और कसा हुआ एहसास उसे कभी नहीं हुआ था अपने पति के छोटे लंड से वह आज तक इस एहसास को कभी महसूस ही नहीं कर पाई थी,,, लेकिन आज उसकी औरत होना पूरी तरह से सफल होता नजर आ रहा था सूरज के लंड कीगर्मी और उसका घर्षण हुआ अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों में बड़े अच्छे से महसूस कर पा रही थी,,,, और यही घर्षण और रगड़ उसे बेहद आनंदित कर रही थी,,,सोनू की चाची सूरज के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में घुसता हुआ देखना चाहती थी इसलिए वह अपने हाथ की कोहनी का सहारा लेकर अपनी गर्दन को उठाकर अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच टिका दी थी,,, उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,,।

इस समय सूरज का लंड उसे मोटा तगड़ा सांप नजर आ रहा था और उसकी गुलाबी बुर कोई छेद नजर आ रही थी जिसमें वह प्रवेश कर रहा था,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी अपने भतीजे की दवाई लानेके लिए वह निकली जरूरत थी लेकिन रास्ते में वह सूरज के साथ ऐसा ही कुछ करना चाहती थी और सब कुछ ऐसा हो रहा था,, सूरज के साथ चुदाई की वह बहुत बार कल्पना कर चुकी थी लेकिन उसकी यह कल्पना आज हकीकत में बदल चुकी थी सूरज भी काफी मेहनत कर रहा था जेठ की दुपहरी में जवानी की गर्मी को सहन करके वह पूरी तरह से पागल हो जा रहा था इसलिए तो उसके माथे से पसीना टपक रहा थाऔर यही हाल सोनू की चाची का भी था वह भी पसीने से तरबतर हो चुकी थी उसकी मोटी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम पपाया के पेड़ पर पपिया की तरह लटकी हुई थी,,, देखते ही देखते सूरज धीरे-धीरे करके अपनी पूरे समुचे लंड को सोनू की चाची की गुलाबी बुर में उतार दिया था।जैसे ही सोनू की चाची को एहसास हुआ कि सूरज का लंड पूरी तरह से उसकी बुर में समा गया है वह यह देखकरखुश हो गई और यह खुशी और उत्तेजना उसके चेहरे पर साथ दिखाई दे रही थी और यही हाल सूरज का भी था सूरज भी एकदम से खुश होता हुआ बोला,,,)

देखो चाचा तुम सच कह रही थी सच में यह तो पूरा घुस गया हमने तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि इतने छोटे से छेद में इतना मोटा और लंबा लंड कैसे घुस पाएगा।

है ना अद्भुत,,,!

बिल्कुल चाची,,,, लेकिन अब मुझे क्या करना है,,,?

बस अब तुझे अपनी कमर को आगे पीछे करना है और इस लंड को अंदर बाहर करना है इतना जरूर देखना की पूरा का पूरा निकल ना जाए उसका सुपाड़ा अंदर ही रहना चाहिए ताकि दोबारा डालने में तकलीफ ना हो,,, बस अब शुरू हो जा बेटा,,,।

(सूरज को अच्छी तरह से मालूम था कि आप उसे क्या करना है वह तो सिर्फ जानबूझकर अपनी नादानी दिख रहा था और वह जैसा बोल रही थी वैसा ही करना शुरू कर दिया था सूरज अपनी कमर को आगे पीछे करके ही लाना शुरू कर दिया था और ऐसा करने पर उसका मोटा तगड़ा लड़की सोनू की चाची की बुर के अंदर बाहर होना शुरू हो गया था इसकी रगड़ उसे पूरी तरह से मस्त कर रही थी और यही हाल सोनू की चाची का भी था,,,सूरज के मोटे तगड़े लंड की रगड़ सोनू की चाची बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी इसलिए उसका पूरा बदन कसमसा रहा था,,,, उसके चेहरे के हाव-भाव बड़ी तेजी से बदल रहे थे,,,इस बात को सूरज अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह का सुख सोनू की चाची पहली बार भोग रही थी लेकिन वह तो इस तरह के सुख को कई बार पहुंच चुका था इसलिए वह पूरी तरह से मजा हुआ खिलाड़ी था,,,, अगर वह अपनी पर उतरा था तो उसके सामने सोनू की चाची ही पूरी तरह से अनाड़ी नजर आने लगती,, क्योंकि इस खेल में सोनू पूरी तरह से माहिर था और एक पक्का खिलाड़ी था।

कैसा लग रहा है सोनू,,,(उत्तेजित स्वर में सोनू की चाची बोली)

पूछो मत चाची बहुत मजा आ रहा है,,,तुम सच कहती थी कि लंड और बुर का पेशाब करने के अलावा दूसरा भी बहुत सा काम है,,, तुम अगर नहीं बताती तो मैं तो अब तक अनजान ही रहता कितना मजा आ रहा है मैं बात नहीं सकता,,,(एकदम मदहोश होकर अपनी आंखों को बंद करता हुआ सूरज बोला उसकी हालत देखकर सोनू की चाची मन ही मन बेहद प्रसन्न हो रही थी उसकी भी हालत कुछ ठीक नहीं थी वह भी पूरी तरह से उत्तेजना के घोड़े पर सवार हो चुकी थी और यह घोड़ा उसे कहां ले जा रहा था उसे खुद समझ में नहीं आ रहा थाजवानी से लेकर के इस उम्र के दौर तक उसने इस तरह का सुख कभी भोगी ही नहीं थी और ना हीं कभी कल्पना की थी,,, वह भी अपनी आंखों को बंद करके इस अपन को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी,,,, धीरे-धीरे सूरज अपनी कमर हिला रहा थालेकिन उसके धीरे-धीरे में सोनू की चाची को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसे पूरा अहसास हो रहा था कि सूरज का लंड काफी देर से एकदम खड़ा का खड़ा था उसमें बिल्कुल भी ढीलापन नहीं आया था यही उसकी मर्दानगी का सबुत था। लेकिन अब समय आ गया था जब वह सुरज से कहे कि अब जोर-जोर से अपनी कमर हिला कर जोर-जोर से धक्के लगा,,, इसलिए वह गरम आहे भरते हुए बोली,,,)

ओहहहहह सूरज बहुत मजा आ रहा है इससे भी ज्यादा मजा तब आएगा जब तू अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाएगा और अपने लंड को बड़ी तेजी से मेरी बुर के अंदर बाहर करेगा तब तुझे भी मजा आएगा और मुझे भी,,,,।

एकदम जोर से चाची,,,,

हां एकदम जोर से,,,,

तुम्हें चोट लग गई तो,,,

नहीं मुझे चोट नहीं लगेगी बल्कि बहुत मजा आएगा,,,,।

तो फिर मैं जोर-जोर से धक्के मारु,,,,

हां एकदम जोर-जोर से बिल्कुल भी रहम मत करना,,,।

ठीक है चाची जैसा तुम कहो,,,,(सूरज अच्छी तरह से समझ गया था कि अब असली खेल खेलने का समय आ चुका था अब सोनू की चाची को असली सूरज से मिलना था अभी तक तो वह एक नादान सूरत से मिल रही थी जो उसके दिशा निर्देश से ही आगे बढ़ रहा था लेकिन अब वह सोनू की चाची को दिखाएगा की एक असली मर्द से चुदवाने का क्या नतीजा होता है,,सूरज सोनू की चाची की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया था क्योंकि वह जानता था उसका हर एक धक्का उसे स्वर्ग की शेर कराएगा,,,, और फिर अपने आप को व्यवस्थित करके वह एक जोरदार करारा धक्का मारा और एकदम से सोनू की चाची की चीख निकल गई क्योंकि,,,उसके लंड की ठोकर सीधे उसके बच्चेदानी से झक रही थी और यह एहसास उसे पूरी तरह से पानी पानी करती थी लेकिन उसकी चीज की आवाज को सुनकर सूरज एकदम से रुक गया था और बोला,,,)

क्या हुआ चाचा दर्द तो नहीं हुआ ना,,,,।

बिल्कुल भी नहीं सूरज तू तो मुझे पागल कर देगा बस ऐसे ही धक्के लगा बहुत मजा आ रहा है,,,,।
(फिर क्या था सोनू की चाची की इजाजत बातें ही सूरज शुरू पड़ गया उसका हर एक तक का सोनू की चाची को स्वर्ग की राह ले जा रहा था वह हवा में उड़ रही थी,,,, वह पागल हो जा रही थी वाकई में उसका हर एक धक्का उसे मदहोश कर रहा था,,,,, सोनू की चाची और सूरज दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे बीछी हुई घास में दोनों काम क्रीड़ा का सुख भोग रहे थे,,,, सूरज पागलों की तरह ढके पर धक्का लगा रहा था सोनू की चाची काफी मजबूत और गदराए जिस्म की मालकिन थी,,, और वह जानता था कि उसका हर एक धक्का सोनू की चाची बड़ी आराम से जेल जाएगी उसकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम से उसकी जांघों से टकराकर एक अद्भुत आवाज पैदा कर रही थी उसके हर एक धक्के के साथ,,ठाप ठाप की आवाज आ रही थी यह आवाज दोनों की जांघों के टकराने से आ रही थी,,,,।

सोनू की चाची मदहोशी के सागर में गोते लगा रही थी वह पागल हुए जा रही थी वह अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर सूरज के हाथ को पकड़ लिया और उसकी दोनों हथेलियां को अपनी लहराती हुई चुचियों पर रखते हुए बोली,,,।

इसे जोर-जोर से मसलते हुए धक्के लगा,,,,।

फिर क्या था सूरज के हाथों में तो दसहरी आम लग चुके थे वह दोनों हाथों से उसे जोर-जोर से दबाता हुआ छक्के पर धक्का लगा रहा था,,,,सूरज के आगे सोनू की चाची जवाब दे गई थी वह चरमसुख पर पहुंचने वाली थी वह पागल हुए जा रही थी और वह तुरंतसूरज को अपनी बाहों में दबा चली थी सूरज भी समझ गया था कि वह झड़ने वाली है उसका काम तमाम होने वाला है इसलिए वह भी एकदम कस के उसे अपनी बाहों में जकड लिया था और अपनी कमर को बड़ी तेजी से ही लाना शुरू कर दिया था,,,सूरज अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह से चरम सुख के करीब पहुंची हुई औरत की चुदाई करने पर हो वह और ज्यादा आनंद और मस्ती महसूस करती है और ऐसा ही हो रहा था सूरज की यह हरकत सोनू की चाची को और भी ज्यादा उत्तेजित और मदहोश बना रहा था,,,,।

सोनू की चाची के मुंह से बड़ी जोरों की सिसकारी की आवाज निकल रही थीऔर वह जानबूझकर अपनी आवाज पर काबू नहीं कर पा रही थी क्योंकि वह जानते थे कि वह किस जगह पर है,,, वह जानती थी कि उसकी गरमा गरम सिसकारी की आवाज इस समय सुनने वाला वहां पर कोई नहीं था,,,, और फिर देखते ही देखते वह एकदम से झड़ने लगी वह पागल होने लगी,,,लेकिन फिर भी सूरज उसे अपनी बाहों में दबोचे हुए धक्के पर धक्का लगा रहा था उसकी बुर से मदन रस की फुहार फूट रही थी जो की उसके लंड को पूरी तरह से भीगो रही थी,,,, थोड़ी ही देर वह पूरी तरह से शांत हो गई लेकिन सूरजशांत नहीं हो रहा था और यह देखकर सोनू की चाची भी हैरान थी कि उसका पानी अभी तक नहीं निकला था लेकिन अब एक ही स्थिति में उसका बदन दर्द करने लगा था और अब उसका मन घोड़ी बनने को कर रहा था,,, जो कि आज तक उसके पति ने उसे नहीं बनाया था,,,,और इस बात को सोनू की चाची भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी-बड़ी है और घोड़ी बनाकर पीछे से चुदवाने में मजा तो आता है लेकिन घोड़ी बनकर चुदवाने के लिए एक मजबूत घोड़ा भी चाहिए जो कि उसका पति बिल्कुल भी नहीं था,,, वह सूरजका खूबसूरत मासूम चेहरा अपने हाथ में पकड़ कर उसकी आंखों में देखते हुए बोली,,,।

दैया रे दैया बहुत दम है रे तेरे में मेरा तो तूने पानी निकाल दिया लेकिन अभी तक तेरा पानी नहीं निकला,,,,,।

पानी कैसा पानी चाची,,,,(नादान बनते हुए और जोर-जोर से धक्का लगाते हुए वह बोला)

अभी पता चल जाएगा रुक जा मेरे ऊपर से उतर तो,,,।

लेकिन चाची मुझे तो मजा आ रहा है,,,।

अरे बुद्धु ईससे भी ज्यादा मजा आएगा बस मेरे ऊपर से थोड़ा हट जा,,,।

(ऐसे तो सूरज अपना नहीं चाहता था क्योंकि उसे बहुत मजा आ रहा था लेकिन इस समय सोने की चाची की बात माने ना उसके लिएबेहद जरूरी था इसलिए वह धीरे से सोनू की चाची के ऊपर से हट गया उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था और वह पूरी तरह से उसके मदन रस में डूबा हुआ था और बुर से निकला हुआ मदन रस उसके लंड से टपक रहा था,,,,सूरज गहरी गहरी सांस ले रहा था सोनू की चाची एक बार झड़ चुकी थी इसलिए वह धीरे से अपनी जगह से उठकर बैठ गई और सूरज के लंड की तरफ देखते हुए बोली,,)

बिल्कुल गधे के लंड की तरह है,,,,।


(इतना कहने के साथ ही सोनू की चाची अपनी बड़ी-बड़ी गांड को सूरज की आंखों के सामने लहराते हुए घोड़ी बन गई वह हाथ की कोहनी और घुटनों के बाल झुक गई थी और अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में एकदम तोप की तरह उठा दी थी,,,उसकी यह अदा देखकर सूरज समझ गया था कि वह क्या करवाना चाहती है और इस समय वाकई में उसकी बड़ी-बड़ी गांड बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक लग रही थी,,,, यह देखकर सूरज से रहा नहीं किया और वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर अपनी हथेली को उसकी गांड पर रखकर सहलाने लगा और नादानी पन दिखाते हुए बोला,,,)

अब क्या करना होगा चाची इस तरह तो तुम बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही हो,,,।
(उसकी बात सुनकरसोनू की चाची मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए पीछे की तरफ देखते हुए बोली)

तुझे वही करना है जो अभी कर रहा था लेकिन तू मेरे ऊपर चढ़कर कर रहा था लेकिन अब पीछे से करना होगा,,,,।

पीछे,,, से,,,,,।


हां पीछे से,,,(अपनी दोनों टांगों को धीरे से खोलते हुए अपना हाथ अपने दोनों टांगों के बीच से लाते हुए अपनी गुलाबी छेद पर रखते हुए बोली)

तुझे मेरी बुर दिखाई दे रही है ना,,,।

हां चाची एकदम साफ दिखाई दे रही है,,,।

बस अभी इसी में अपना लंड डाल दे और मेरी गांड पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगा देखना इस तरह से चोदने में तुझे भी बहुत मजा आएगा,,,,,।

(फिर क्या था सूरज को अच्छी तरह से मालूम था उसे क्या करना है और वह अपने घुटनों के पर बैठा नहीं बल्कि खड़े होकर अपनी दोनों टांगों कोफैला दिया और एक हाथ से सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी गांड को पकड़कर अपने लंड को उसके गुलाबी छेद से टिका दिया और दोनों गांड को पकड़ कर अपनी कमर पर जोरदार धक्का लगाया और ऐसा करने से तुरंत उसका लंड एक ही धक्के में सीधा उसके बच्चेदानी से टकरा गया,,, औरसोनू की चाची सोची नहीं थी कितनी तेज सेवा धक्का मारेगा और पहली बार में ही इसलिए अपने आप को संभाल नहीं पाई थी और एकदम से आगे की तरफ लुढ़क गई थीलेकिन सूरज पूरी तरह से चौक करना था वह अच्छी तरह से जानता था किस तरह से धक्का मारने पर वह आगे की तरफ लुढ़क जाएगी इसलिए दोनों हाथों से उसकी कमर को थाम लिया था और एकदम से उसे संभाल भी लिया था उसकी हरकत पर सोनू की चाची एकदम से मत हो गई थीइस तरह से चोदने में तो सूरज को भी बहुत मजा आता था और थोड़ी ही देर में सोनू की चाची भी फिर से एकदम से चुदवासी हो गई,,,

सूरज पागलों की तरह धक्के पर धक्का लगा रहा था,,,सोनू की चाची पागल हो जा रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि एक बार उसका पानी निकल गया था और वहदोबारा तैयार हो चुकी थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इतनी देर तक कोई मर्द चुदाई भी कर सकता है क्योंकि उसके पति का तो अंदर प्रवेश करते ही निकल जाता था लेकिन सूरज किसी और माटी का बना था,, वह ना तो झड़ा था और ना ही वह थकने का नाम ले रहा था,,, सोनू की चाची की सिसकारियां एक बार फिर से गूंजने लगी,,,,और थोड़ी ही देर बाद वह फिर से अपने चरम सुख के करीब पहुंच गई उसकी तेज चलती सांस और उसकी जोर-जोर से शिसकारी की आवाज को सुनकर सूरज समझ गया था कि वह फिर से झड़ने के करीब है,,,,इसलिए वह भी अपने धक्के तेज कर दिया और देखते ही देखते उसके मुंह से भी जोर-जोर से आवाज आने लगी और जानबूझकर इस तरह की आवाज निकल रहा था ताकि उसका नादानी पन जारी रहे,,,।

ओहहह चाची मुझे कुछ हो रहा है,,, बहुत अजीब हो रहा है लेकिन बहुत मजा आ रहा है,,,।

अब तेरा भी पानी निकलने वाला है जोर-जोर से धक्के लगा,,,।

और इतना सुनते ही उसके धक्को की गति और भी ज्यादा तेज हो गई,,, और फिर दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,, सूरज एकदम से उसकी कमर को अपनी बाहों में लेकर उसके ऊपर पसर गया थाऔर सोने की चाची एक बार फिर से चरम सुख को प्राप्त कर ली थी वह मदहोश हो चुकी थी,,, वह भी एकदम से घास पर लेट गई थी और उसके ऊपर सूरज था,, सूरज गहरी गहरी सांस ले रहा था आज पहली बार सोनू की चाची चुदाई की असली सुख को प्राप्त की थी और पूरी तरह से तृप्ति के एहसास को महसूस की थी वह कभी सोची नहीं थी कि इस तरह का सुख उसे भी प्राप्त होगा इसलिए वह गहरी सांस लेते हुए बोली,,,।

बाप रे तू तो पूरा घोड़ा निकला,,, अपनी घोड़ी की क्या हालत कीया है,,,, मेरी कमर दुखने लगी अब उठ मेरे ऊपर से,,,,।

बाप रे में तो सोचा भी नहीं था कि इस तरह से मजा लिया जाता है,,,(सूरज सोनू की चाची के ऊपर से उठता हुआ बोला,,,, सोनू की चाची भी उठकर बैठ गई दोनों पूरी तरह से तृप्त हो चुकी है वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)


अब यकीन हुआ ना,,,,,(ऐसा कहते हुए वह टूटे हुए झोपड़ी से बाहर नजर डाली तो देखेंगे शाम होने में थोड़ी देर रह गई है वह एकदम से चोंकते हुए बोली,,)

हाय दैया कितना समय हो गया,,,, हम दोनों को बहुत ज्यादा समय हो गया है,,,, बाप रे समय का पता ही नहीं चला,,,(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची एकदम से उठकर खड़ी हो गई और अपने कपड़ों को समेटने लगी उन दोनों को चुदाई का खेल खेलते हुए 2 घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका था लेकिन उन दोनों को समय का पता ही नहीं चला था उन दोनों को बाजार भी पहुंचना थाइसलिए सूरज की जल्दी से उठकर खड़ा होकर और अपने कपड़े पहनने लगा थोड़ी देर में दोनों कपड़े पहनकर टूटी हुई झोपड़ी से बाहर आ गई दोनों के चेहरे पर संतुष्टि एकदम साफ झलक रही थी,,,)


अब तो शाम हो जाएगीकहीं अंधेरा हो गया तो गजब हो जाएगा जल्दी-जल्दी चल सूरज,,,(सोनू की चाची जल्दी-जल्दी चलते हुए बोल रहे थे लेकिन जिस तरह की चुदाई उसकी हुई थी वहां थोड़ा-थोड़ा लंगड़ा रही थी यह देखकर सूरज बोला,)

क्या हुआ चाची तुम लंगड़ा कर क्यों चल रही है,,?

अरे हरामि ईस तरह की चुदाई करेगा तो कोई भी औरत लंगड़ा कर चलेगी,,,।

(शाम होते होते दोनों बाजार में पहुंच चुके थे लेकिन बाजार घूमने का समय उन दोनों के पास नहीं था सूरज सीधा उसे वेद के पास है क्या जहां पर वह सोने के लिए दवाई ले ली थीऔर दवाई लेकर दोनों वापस लौटने लगे थे लेकिन तब तक शाम भी ढलने लगी थी हल्का-हल्का अंधेरा होने लगा था,,, यह देखकर सोनु की चाची बोली,,)

बाप रे बहुत देर हो गई है दीदी गुस्सा करेंगी क्योंकि इतनी देर तो नहीं लगना चाहिए,,,।

तो क्या हुआ चाचा बोल देना कि वेद जी दूसरे गांव गए हुए थे और वहां पर बैठना पड़ गया था इसलिए देर हो गई,,,।
(सूरज की बात सुनते ही सोनू की चाची के चेहरे की चमक बढ़ने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली)

वह सूरज तू तो बहुत चालाक है के मैं तो तुझे बुद्धु समझती थी,,,।

तुमने ही चालाक बना दि हो,,,,।

(यह सुनकर सोनू की चाची मुस्कुराने लगी,,, और बोली,,,)

अच्छा हम दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ है इस बारे में किसी को भी मत बताना तो आगे से भी तुझे ऐसा मजा देती रहूंगी,,,।

सच कह रही हो चाची,,,।

एकदम सच कह रही हूं लेकिन किसी को बताना नहीं,,,।

बिल्कुल भी नहीं बताऊंगा चाची भला यह सब बातें बताने की होती है क्या,,,!

सच में तु बहुत समझदार है।


(धीरे-धीरे अंधेरा होने लगा था अभी भी गांव से हुआ दोनों काफी दूर थे चलते-चलते अंधेरा पूरी तरह से छा चुका था और अब गांव की शुरुआत हो चुकी थी लेकिन दोपहर से सोनू की चाची पेशाब नहीं करी थी और चुदवाने के बाद तो वह पेशाबबिल्कुल भी नहीं थी इसलिए उसे बड़े जोरों की पेशाब लगने लगी थी और उसकी बुर में कुलबुलाहट भी होने लगी थी वह अपने मन में सोच रही थी कि अपना जाने का मौका मिलेगा,,, इसलिए वह सूरज से बोली,,,।

मुझे फिर से बड़ी जोरों की पेशाब लगी है रुक जा मै पेशाब कर लेती हूं,,,।
(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची एक बड़े से पेड़ के नीचे खड़ी हो गई और इधर-उधर देखने लगीअंधेरा हो चुका था इसलिए किसी के भी देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी और वह दोनों अभी भी गांव से दूर थे गांव में प्रवेश करना बाकी था और वह देखना चाहती थी कि जो कुछ भी हुआ उससेसूरज की हिम्मत बड़ी है कि नहीं इसलिए वह सूरज की आंखों के सामने अपनी सारी कमर तक उठाकर खड़ी हो गई उसकी नंगी गांड सूरज की आंखों के सामने थी और वह पलट कर सूरज की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी अब सूरज के लिए नादानी पन दिखाना सबसे बड़ी मूर्खता थी,,,सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी गांड देखकर पल भर में उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और वह तुरंत सोने की चाची के पीछे आ गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया,,,, यह देख कर सोनू की चाची बहुत खुश हुई लेकिन फिर भी अपनी खुशी जाहिर नहीं होने दी और बोली,,,)

यह क्या सूरज मुझे पेशाब तो करने दे,,,।

नहीं चाची पता नहीं क्यों मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,(और ऐसा कहते हुए सूरज खुद उसकी एक टांग पड़करवहीं पास में ही एक बड़ा सा पत्थर था उसे पर रख दिया था कि वह अपने लिए जगह बना सके और जगह बनते ही तुरंत अपना पैजामा नीचे किया और अपने लंड को बाहर निकाल कर उसके गुलाबी छेद में फिर से डाल दिया और फिर से उसकी चुदाई करना शुरू कर दियासूरज की हरकत से वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हो गई और चुदाई का मजा लेने लगी,,,, थोड़ी देर में दोनों फिर से झड़ चुके थे और सोनू की चाची मुस्कुराते हुए नीचे बैठकर पेशाब करने लगी,,।

घर पहुंच कर सोनू की चाची ने वही बहन बताइए जो सूरज में उसे बताया था सूरज अपने घर चला गया था और उसकी बातों पर भरोसा करने के सिवासोनू की मां के पास कोई रास्ता भी नहीं था क्योंकि वह उसके ही बेटे के लिए दवा लाई थी और वाकई में वह दवा काम कर गई थी तीन-चार दिनों में सोनू एकदम ठीक हो गया था,,,,।
बहुत ही कामुक गरमा गरम और उत्तेजना से भरपूर अपडेट है सोनू की चाची आखिर सूरज से चूद गई सूरज ने नादान बनकर सोनू की चाची को तृप्त कर दिया
 

Sanju@

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(सोनू की चाची इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा हैजिससे उसकी बुर की छोटे से छेद में जाने में थोड़ी सी तकलीफ ज़रूर होगी लेकिन आराम से चला जाएगा इतना भी वह जानती थी और सोनू की चाची की बात सुनते ही सूरज अपनी कमर को आगे की तरफ धक्का लगने लगा और ऐसा करने पर उसके लंड का सपना बुर की चिकनाहट पाकर अंदर की तरफ से सरकने लगा,,,,सूरज को भी मजा आ रहा था वह एक झटके में अपने लंड को उसकी बुर की जड़ तक घुसेड देना चाहता था,,, लेकिन अपने उत्तेजना पर और अपने आप पर पूरी तरह से काबू किए हुए था,,,। उत्तेजना की आग पूरी तरह से सूरज के बदन में लग चुकी थी,, इस समय उसे दुनिया का अनमोल खजाना मिल गया था और धीरे-धीरे वह अपने अस्तित्व को उसके अंदर उतर रहा था,,,वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी उसे सोनू की चाची चोदने के लिए मिल जाएगी,,, लेकिन यह सपना नहीं हकीकत था उम्मीद से दुगना मिल रहा था उसे,,, वह तो केवल यूं ही घूमने के लिए उसके घर पहुंच गया थाऔर जब देखा कि सोनू की तबीयत खराब है तो वहां बात हुई बातों में उसकी दवा के लिए एक वेद जी का नाम ले लिया और नतीजा देखो सोनू की चाची की चुदाई वह करने जा रहा था,,,।)




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चाची क्या यह पूरा घुस जाएगा,,,!

बड़े आराम से रे बस तू धक्का लगाकर इसे अंदर तक डाल दे,,।

लेकिन तुम्हारी बुर बहुत कसी हुई है इसका छेद बहुत छोटा लग रहा है,,,, कैसे घुसेगा यह,,,।

आराम से घुस जाएगा,,, यही सब तो नहीं जानता औरत का यह अंग कितना कारामती है,,, बस तु अंदर डालने की सोच,,।

तुम कहती हो चाची तो सच ही होगा,,, मैं पूरा प्रयास करता हूंलेकिन ऐसा लग रहा है कि मेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा ही छोटे से छेद के लिए,,,,(सूरज जानबूझकर इस तरह की बातें कर रहा था इस तरह की बातें करके वह अपनी मां की बात भी सोनू की चाची को बता दे रहा था और उसकी इस तरह की बातें सुनकर सोनू की चाची मन ही मन प्रसन्न हो रही थी क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि उसकी जवानी का जलवा पूरी तरह से उसके ऊपर बिखर चुका था जिसके चलते वह इस तरह की बातें कर रहा था.. सूरज की बात सुनकर सोनु की चाची बोली,,)

हां यह बात तो सच है मैं कहती थी ना तेरा लंड कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है लेकिन मैं जानती हूं कि बड़े आराम से चला जाएगा,,, बस तू डाल,,,।



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ठीक है चाची मैं पूरी कोशिश करता हूं,,,(और इस बार थोड़ा जोर दिखा कर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा,, सूरज को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि सोनू की चाची की बुर को ज्यादा ही कसी हुई है एक शादीशुदा औरत की पूरी इतनी कसी हुई होगी वह कभी सोच नहीं सकता था क्योंकि उसने मुखिया की बीवी के साथ-साथ मुखिया की लड़की की चुदाई किया था और जैसा एहसास सूरज को मुखिया की लड़की को चोदने में हो रहा था वही ऐसा इस समय सोनू की चाची को चोदने नहीं हो रहा था,,, और इस बात की खुशी सूरज को थी,,,,, सूरज अच्छी तरह से जानता था कि उसे क्या करना है,,,, सूरज का कामउसकी बुर से निकलने वाला मदन रस की चिकनाहट आसान करते रही थी थोड़ी बहुत दिक्कत है सूरज को महसूस हो रही थी लेकिन वह जानता था कि उसका लंड बुर के अंदर पूरा का पूरा घुस जरूर जाएगा,,,,।




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टूटी हुई मडई में सोनू की चाची की जवानी पूरे तूफान पर थी बरसों की दबी हुई प्यास आज पूरी तरह से ऊपर आई थी और उसे बुझाने का पूरा मौका उसे मिल रहा था और अच्छी तरह से जानते थे कि उसकी जवानी की प्यास सिर्फ सूरज के मोटे तगड़े लंड से ही बुझ सकती है,,,, उसकी मोटी मोटी जांघें सूरज की जांघों पर चढ़ी हुई थी,,, और उसका लंड उसके गुलाबी छेद में धीरे-धीरे अंदर की तरफ घुस रहा था,,, इस तरह का कड़क और कसा हुआ एहसास उसे कभी नहीं हुआ था अपने पति के छोटे लंड से वह आज तक इस एहसास को कभी महसूस ही नहीं कर पाई थी,,, लेकिन आज उसकी औरत होना पूरी तरह से सफल होता नजर आ रहा था सूरज के लंड कीगर्मी और उसका घर्षण हुआ अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों में बड़े अच्छे से महसूस कर पा रही थी,,,, और यही घर्षण और रगड़ उसे बेहद आनंदित कर रही थी,,,सोनू की चाची सूरज के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में घुसता हुआ देखना चाहती थी इसलिए वह अपने हाथ की कोहनी का सहारा लेकर अपनी गर्दन को उठाकर अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच टिका दी थी,,, उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,,।




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इस समय सूरज का लंड उसे मोटा तगड़ा सांप नजर आ रहा था और उसकी गुलाबी बुर कोई छेद नजर आ रही थी जिसमें वह प्रवेश कर रहा था,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी अपने भतीजे की दवाई लानेके लिए वह निकली जरूरत थी लेकिन रास्ते में वह सूरज के साथ ऐसा ही कुछ करना चाहती थी और सब कुछ ऐसा हो रहा था,, सूरज के साथ चुदाई की वह बहुत बार कल्पना कर चुकी थी लेकिन उसकी यह कल्पना आज हकीकत में बदल चुकी थी सूरज भी काफी मेहनत कर रहा था जेठ की दुपहरी में जवानी की गर्मी को सहन करके वह पूरी तरह से पागल हो जा रहा था इसलिए तो उसके माथे से पसीना टपक रहा थाऔर यही हाल सोनू की चाची का भी था वह भी पसीने से तरबतर हो चुकी थी उसकी मोटी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम पपाया के पेड़ पर पपिया की तरह लटकी हुई थी,,, देखते ही देखते सूरज धीरे-धीरे करके अपनी पूरे समुचे लंड को सोनू की चाची की गुलाबी बुर में उतार दिया था।जैसे ही सोनू की चाची को एहसास हुआ कि सूरज का लंड पूरी तरह से उसकी बुर में समा गया है वह यह देखकरखुश हो गई और यह खुशी और उत्तेजना उसके चेहरे पर साथ दिखाई दे रही थी और यही हाल सूरज का भी था सूरज भी एकदम से खुश होता हुआ बोला,,,)



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देखो चाचा तुम सच कह रही थी सच में यह तो पूरा घुस गया हमने तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि इतने छोटे से छेद में इतना मोटा और लंबा लंड कैसे घुस पाएगा।

है ना अद्भुत,,,!

बिल्कुल चाची,,,, लेकिन अब मुझे क्या करना है,,,?

बस अब तुझे अपनी कमर को आगे पीछे करना है और इस लंड को अंदर बाहर करना है इतना जरूर देखना की पूरा का पूरा निकल ना जाए उसका सुपाड़ा अंदर ही रहना चाहिए ताकि दोबारा डालने में तकलीफ ना हो,,, बस अब शुरू हो जा बेटा,,,।

(सूरज को अच्छी तरह से मालूम था कि आप उसे क्या करना है वह तो सिर्फ जानबूझकर अपनी नादानी दिख रहा था और वह जैसा बोल रही थी वैसा ही करना शुरू कर दिया था सूरज अपनी कमर को आगे पीछे करके ही लाना शुरू कर दिया था और ऐसा करने पर उसका मोटा तगड़ा लड़की सोनू की चाची की बुर के अंदर बाहर होना शुरू हो गया था इसकी रगड़ उसे पूरी तरह से मस्त कर रही थी और यही हाल सोनू की चाची का भी था,,,सूरज के मोटे तगड़े लंड की रगड़ सोनू की चाची बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी इसलिए उसका पूरा बदन कसमसा रहा था,,,, उसके चेहरे के हाव-भाव बड़ी तेजी से बदल रहे थे,,,इस बात को सूरज अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह का सुख सोनू की चाची पहली बार भोग रही थी लेकिन वह तो इस तरह के सुख को कई बार पहुंच चुका था इसलिए वह पूरी तरह से मजा हुआ खिलाड़ी था,,,, अगर वह अपनी पर उतरा था तो उसके सामने सोनू की चाची ही पूरी तरह से अनाड़ी नजर आने लगती,, क्योंकि इस खेल में सोनू पूरी तरह से माहिर था और एक पक्का खिलाड़ी था




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कैसा लग रहा है सोनू,,,(उत्तेजित स्वर में सोनू की चाची बोली)

पूछो मत चाची बहुत मजा आ रहा है,,,तुम सच कहती थी कि लंड और बुर का पेशाब करने के अलावा दूसरा भी बहुत सा काम है,,, तुम अगर नहीं बताती तो मैं तो अब तक अनजान ही रहता कितना मजा आ रहा है मैं बात नहीं सकता,,,(एकदम मदहोश होकर अपनी आंखों को बंद करता हुआ सूरज बोला उसकी हालत देखकर सोनू की चाची मन ही मन बेहद प्रसन्न हो रही थी उसकी भी हालत कुछ ठीक नहीं थी वह भी पूरी तरह से उत्तेजना के घोड़े पर सवार हो चुकी थी और यह घोड़ा उसे कहां ले जा रहा था उसे खुद समझ में नहीं आ रहा थाजवानी से लेकर के इस उम्र के दौर तक उसने इस तरह का सुख कभी भोगी ही नहीं थी और ना हीं कभी कल्पना की थी,,, वह भी अपनी आंखों को बंद करके इस अपन को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी,,,, धीरे-धीरे सूरज अपनी कमर हिला रहा थालेकिन उसके धीरे-धीरे में सोनू की चाची को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसे पूरा अहसास हो रहा था कि सूरज का लंड काफी देर से एकदम खड़ा का खड़ा था उसमें बिल्कुल भी ढीलापन नहीं आया था यही उसकी मर्दानगी का सबुत था। लेकिन अब समय आ गया था जब वह सुरज से कहे कि अब जोर-जोर से अपनी कमर हिला कर जोर-जोर से धक्के लगा,,, इसलिए वह गरम आहे भरते हुए बोली,,,)





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ओहहहहह सूरज बहुत मजा आ रहा है इससे भी ज्यादा मजा तब आएगा जब तू अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाएगा और अपने लंड को बड़ी तेजी से मेरी बुर के अंदर बाहर करेगा तब तुझे भी मजा आएगा और मुझे भी,,,,।

एकदम जोर से चाची,,,,

हां एकदम जोर से,,,,

तुम्हें चोट लग गई तो,,,

नहीं मुझे चोट नहीं लगेगी बल्कि बहुत मजा आएगा,,,,।

तो फिर मैं जोर-जोर से धक्के मारु,,,,

हां एकदम जोर-जोर से बिल्कुल भी रहम मत करना,,,।



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ठीक है चाची जैसा तुम कहो,,,,(सूरज अच्छी तरह से समझ गया था कि अब असली खेल खेलने का समय आ चुका था अब सोनू की चाची को असली सूरज से मिलना था अभी तक तो वह एक नादान सूरत से मिल रही थी जो उसके दिशा निर्देश से ही आगे बढ़ रहा था लेकिन अब वह सोनू की चाची को दिखाएगा की एक असली मर्द से चुदवाने का क्या नतीजा होता है,,सूरज सोनू की चाची की कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया था क्योंकि वह जानता था उसका हर एक धक्का उसे स्वर्ग की शेर कराएगा,,,, और फिर अपने आप को व्यवस्थित करके वह एक जोरदार करारा धक्का मारा और एकदम से सोनू की चाची की चीख निकल गई क्योंकि,,,उसके लंड की ठोकर सीधे उसके बच्चेदानी से झक रही थी और यह एहसास उसे पूरी तरह से पानी पानी करती थी लेकिन उसकी चीज की आवाज को सुनकर सूरज एकदम से रुक गया था और बोला,,,)

क्या हुआ चाचा दर्द तो नहीं हुआ ना,,,,।

बिल्कुल भी नहीं सूरज तू तो मुझे पागल कर देगा बस ऐसे ही धक्के लगा बहुत मजा आ रहा है,,,,।
(फिर क्या था सोनू की चाची की इजाजत बातें ही सूरज शुरू पड़ गया उसका हर एक तक का सोनू की चाची को स्वर्ग की राह ले जा रहा था वह हवा में उड़ रही थी,,,, वह पागल हो जा रही थी वाकई में उसका हर एक धक्का उसे मदहोश कर रहा था,,,,, सोनू की चाची और सूरज दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे बीछी हुई घास में दोनों काम क्रीड़ा का सुख भोग रहे थे,,,, सूरज पागलों की तरह ढके पर धक्का लगा रहा था सोनू की चाची काफी मजबूत और गदराए जिस्म की मालकिन थी,,, और वह जानता था कि उसका हर एक धक्का सोनू की चाची बड़ी आराम से जेल जाएगी उसकी बड़ी-बड़ी गांड एकदम से उसकी जांघों से टकराकर एक अद्भुत आवाज पैदा कर रही थी उसके हर एक धक्के के साथ,,ठाप ठाप की आवाज आ रही थी यह आवाज दोनों की जांघों के टकराने से आ रही थी,,,,।



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सोनू की चाची मदहोशी के सागर में गोते लगा रही थी वह पागल हुए जा रही थी वह अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर सूरज के हाथ को पकड़ लिया और उसकी दोनों हथेलियां को अपनी लहराती हुई चुचियों पर रखते हुए बोली,,,।

इसे जोर-जोर से मसलते हुए धक्के लगा,,,,।

फिर क्या था सूरज के हाथों में तो दसहरी आम लग चुके थे वह दोनों हाथों से उसे जोर-जोर से दबाता हुआ छक्के पर धक्का लगा रहा था,,,,सूरज के आगे सोनू की चाची जवाब दे गई थी वह चरमसुख पर पहुंचने वाली थी वह पागल हुए जा रही थी और वह तुरंतसूरज को अपनी बाहों में दबा चली थी सूरज भी समझ गया था कि वह झड़ने वाली है उसका काम तमाम होने वाला है इसलिए वह भी एकदम कस के उसे अपनी बाहों में जकड लिया था और अपनी कमर को बड़ी तेजी से ही लाना शुरू कर दिया था,,,सूरज अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह से चरम सुख के करीब पहुंची हुई औरत की चुदाई करने पर हो वह और ज्यादा आनंद और मस्ती महसूस करती है और ऐसा ही हो रहा था सूरज की यह हरकत सोनू की चाची को और भी ज्यादा उत्तेजित और मदहोश बना रहा था,,,,।



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सोनू की चाची के मुंह से बड़ी जोरों की सिसकारी की आवाज निकल रही थीऔर वह जानबूझकर अपनी आवाज पर काबू नहीं कर पा रही थी क्योंकि वह जानते थे कि वह किस जगह पर है,,, वह जानती थी कि उसकी गरमा गरम सिसकारी की आवाज इस समय सुनने वाला वहां पर कोई नहीं था,,,, और फिर देखते ही देखते वह एकदम से झड़ने लगी वह पागल होने लगी,,,लेकिन फिर भी सूरज उसे अपनी बाहों में दबोचे हुए धक्के पर धक्का लगा रहा था उसकी बुर से मदन रस की फुहार फूट रही थी जो की उसके लंड को पूरी तरह से भीगो रही थी,,,, थोड़ी ही देर वह पूरी तरह से शांत हो गई लेकिन सूरजशांत नहीं हो रहा था और यह देखकर सोनू की चाची भी हैरान थी कि उसका पानी अभी तक नहीं निकला था लेकिन अब एक ही स्थिति में उसका बदन दर्द करने लगा था और अब उसका मन घोड़ी बनने को कर रहा था,,, जो कि आज तक उसके पति ने उसे नहीं बनाया था,,,,और इस बात को सोनू की चाची भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी-बड़ी है और घोड़ी बनाकर पीछे से चुदवाने में मजा तो आता है लेकिन घोड़ी बनकर चुदवाने के लिए एक मजबूत घोड़ा भी चाहिए जो कि उसका पति बिल्कुल भी नहीं था,,, वह सूरजका खूबसूरत मासूम चेहरा अपने हाथ में पकड़ कर उसकी आंखों में देखते हुए बोली,,,।




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दैया रे दैया बहुत दम है रे तेरे में मेरा तो तूने पानी निकाल दिया लेकिन अभी तक तेरा पानी नहीं निकला,,,,,।

पानी कैसा पानी चाची,,,,(नादान बनते हुए और जोर-जोर से धक्का लगाते हुए वह बोला)

अभी पता चल जाएगा रुक जा मेरे ऊपर से उतर तो,,,।

लेकिन चाची मुझे तो मजा आ रहा है,,,।

अरे बुद्धु ईससे भी ज्यादा मजा आएगा बस मेरे ऊपर से थोड़ा हट जा,,,।

(ऐसे तो सूरज अपना नहीं चाहता था क्योंकि उसे बहुत मजा आ रहा था लेकिन इस समय सोने की चाची की बात माने ना उसके लिएबेहद जरूरी था इसलिए वह धीरे से सोनू की चाची के ऊपर से हट गया उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था और वह पूरी तरह से उसके मदन रस में डूबा हुआ था और बुर से निकला हुआ मदन रस उसके लंड से टपक रहा था,,,,सूरज गहरी गहरी सांस ले रहा था सोनू की चाची एक बार झड़ चुकी थी इसलिए वह धीरे से अपनी जगह से उठकर बैठ गई और सूरज के लंड की तरफ देखते हुए बोली,,)

बिल्कुल गधे के लंड की तरह है,,,,।



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(इतना कहने के साथ ही सोनू की चाची अपनी बड़ी-बड़ी गांड को सूरज की आंखों के सामने लहराते हुए घोड़ी बन गई वह हाथ की कोहनी और घुटनों के बाल झुक गई थी और अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में एकदम तोप की तरह उठा दी थी,,,उसकी यह अदा देखकर सूरज समझ गया था कि वह क्या करवाना चाहती है और इस समय वाकई में उसकी बड़ी-बड़ी गांड बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक लग रही थी,,,, यह देखकर सूरज से रहा नहीं किया और वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर अपनी हथेली को उसकी गांड पर रखकर सहलाने लगा और नादानी पन दिखाते हुए बोला,,,)

अब क्या करना होगा चाची इस तरह तो तुम बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही हो,,,।
(उसकी बात सुनकरसोनू की चाची मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए पीछे की तरफ देखते हुए बोली)

तुझे वही करना है जो अभी कर रहा था लेकिन तू मेरे ऊपर चढ़कर कर रहा था लेकिन अब पीछे से करना होगा,,,,।

पीछे,,, से,,,,,।




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हां पीछे से,,,(अपनी दोनों टांगों को धीरे से खोलते हुए अपना हाथ अपने दोनों टांगों के बीच से लाते हुए अपनी गुलाबी छेद पर रखते हुए बोली)

तुझे मेरी बुर दिखाई दे रही है ना,,,।

हां चाची एकदम साफ दिखाई दे रही है,,,।

बस अभी इसी में अपना लंड डाल दे और मेरी गांड पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगा देखना इस तरह से चोदने में तुझे भी बहुत मजा आएगा,,,,,।

(फिर क्या था सूरज को अच्छी तरह से मालूम था उसे क्या करना है और वह अपने घुटनों के पर बैठा नहीं बल्कि खड़े होकर अपनी दोनों टांगों कोफैला दिया और एक हाथ से सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी गांड को पकड़कर अपने लंड को उसके गुलाबी छेद से टिका दिया और दोनों गांड को पकड़ कर अपनी कमर पर जोरदार धक्का लगाया और ऐसा करने से तुरंत उसका लंड एक ही धक्के में सीधा उसके बच्चेदानी से टकरा गया,,, औरसोनू की चाची सोची नहीं थी कितनी तेज सेवा धक्का मारेगा और पहली बार में ही इसलिए अपने आप को संभाल नहीं पाई थी और एकदम से आगे की तरफ लुढ़क गई थीलेकिन सूरज पूरी तरह से चौक करना था वह अच्छी तरह से जानता था किस तरह से धक्का मारने पर वह आगे की तरफ लुढ़क जाएगी इसलिए दोनों हाथों से उसकी कमर को थाम लिया था और एकदम से उसे संभाल भी लिया था उसकी हरकत पर सोनू की चाची एकदम से मत हो गई थीइस तरह से चोदने में तो सूरज को भी बहुत मजा आता था और थोड़ी ही देर में सोनू की चाची भी फिर से एकदम से चुदवासी हो गई,,,



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सूरज पागलों की तरह धक्के पर धक्का लगा रहा था,,,सोनू की चाची पागल हो जा रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि एक बार उसका पानी निकल गया था और वहदोबारा तैयार हो चुकी थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इतनी देर तक कोई मर्द चुदाई भी कर सकता है क्योंकि उसके पति का तो अंदर प्रवेश करते ही निकल जाता था लेकिन सूरज किसी और माटी का बना था,, वह ना तो झड़ा था और ना ही वह थकने का नाम ले रहा था,,, सोनू की चाची की सिसकारियां एक बार फिर से गूंजने लगी,,,,और थोड़ी ही देर बाद वह फिर से अपने चरम सुख के करीब पहुंच गई उसकी तेज चलती सांस और उसकी जोर-जोर से शिसकारी की आवाज को सुनकर सूरज समझ गया था कि वह फिर से झड़ने के करीब है,,,,इसलिए वह भी अपने धक्के तेज कर दिया और देखते ही देखते उसके मुंह से भी जोर-जोर से आवाज आने लगी और जानबूझकर इस तरह की आवाज निकल रहा था ताकि उसका नादानी पन जारी रहे,,,।

ओहहह चाची मुझे कुछ हो रहा है,,, बहुत अजीब हो रहा है लेकिन बहुत मजा आ रहा है,,,।

अब तेरा भी पानी निकलने वाला है जोर-जोर से धक्के लगा,,,।

और इतना सुनते ही उसके धक्को की गति और भी ज्यादा तेज हो गई,,, और फिर दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,, सूरज एकदम से उसकी कमर को अपनी बाहों में लेकर उसके ऊपर पसर गया थाऔर सोने की चाची एक बार फिर से चरम सुख को प्राप्त कर ली थी वह मदहोश हो चुकी थी,,, वह भी एकदम से घास पर लेट गई थी और उसके ऊपर सूरज था,, सूरज गहरी गहरी सांस ले रहा था आज पहली बार सोनू की चाची चुदाई की असली सुख को प्राप्त की थी और पूरी तरह से तृप्ति के एहसास को महसूस की थी वह कभी सोची नहीं थी कि इस तरह का सुख उसे भी प्राप्त होगा इसलिए वह गहरी सांस लेते हुए बोली,,,।

बाप रे तू तो पूरा घोड़ा निकला,,, अपनी घोड़ी की क्या हालत कीया है,,,, मेरी कमर दुखने लगी अब उठ मेरे ऊपर से,,,,।

बाप रे में तो सोचा भी नहीं था कि इस तरह से मजा लिया जाता है,,,(सूरज सोनू की चाची के ऊपर से उठता हुआ बोला,,,, सोनू की चाची भी उठकर बैठ गई दोनों पूरी तरह से तृप्त हो चुकी है वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)


अब यकीन हुआ ना,,,,,(ऐसा कहते हुए वह टूटे हुए झोपड़ी से बाहर नजर डाली तो देखेंगे शाम होने में थोड़ी देर रह गई है वह एकदम से चोंकते हुए बोली,,)

हाय दैया कितना समय हो गया,,,, हम दोनों को बहुत ज्यादा समय हो गया है,,,, बाप रे समय का पता ही नहीं चला,,,(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची एकदम से उठकर खड़ी हो गई और अपने कपड़ों को समेटने लगी उन दोनों को चुदाई का खेल खेलते हुए 2 घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका था लेकिन उन दोनों को समय का पता ही नहीं चला था उन दोनों को बाजार भी पहुंचना थाइसलिए सूरज की जल्दी से उठकर खड़ा होकर और अपने कपड़े पहनने लगा थोड़ी देर में दोनों कपड़े पहनकर टूटी हुई झोपड़ी से बाहर आ गई दोनों के चेहरे पर संतुष्टि एकदम साफ झलक रही थी,,,)


अब तो शाम हो जाएगीकहीं अंधेरा हो गया तो गजब हो जाएगा जल्दी-जल्दी चल सूरज,,,(सोनू की चाची जल्दी-जल्दी चलते हुए बोल रहे थे लेकिन जिस तरह की चुदाई उसकी हुई थी वहां थोड़ा-थोड़ा लंगड़ा रही थी यह देखकर सूरज बोला,)

क्या हुआ चाची तुम लंगड़ा कर क्यों चल रही है,,?

अरे हरामि ईस तरह की चुदाई करेगा तो कोई भी औरत लंगड़ा कर चलेगी,,,।

(शाम होते होते दोनों बाजार में पहुंच चुके थे लेकिन बाजार घूमने का समय उन दोनों के पास नहीं था सूरज सीधा उसे वेद के पास है क्या जहां पर वह सोने के लिए दवाई ले ली थीऔर दवाई लेकर दोनों वापस लौटने लगे थे लेकिन तब तक शाम भी ढलने लगी थी हल्का-हल्का अंधेरा होने लगा था,,, यह देखकर सोनु की चाची बोली,,)

बाप रे बहुत देर हो गई है दीदी गुस्सा करेंगी क्योंकि इतनी देर तो नहीं लगना चाहिए,,,।

तो क्या हुआ चाचा बोल देना कि वेद जी दूसरे गांव गए हुए थे और वहां पर बैठना पड़ गया था इसलिए देर हो गई,,,।
(सूरज की बात सुनते ही सोनू की चाची के चेहरे की चमक बढ़ने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली)

वह सूरज तू तो बहुत चालाक है के मैं तो तुझे बुद्धु समझती थी,,,।

तुमने ही चालाक बना दि हो,,,,।

(यह सुनकर सोनू की चाची मुस्कुराने लगी,,, और बोली,,,)

अच्छा हम दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ है इस बारे में किसी को भी मत बताना तो आगे से भी तुझे ऐसा मजा देती रहूंगी,,,।

सच कह रही हो चाची,,,।

एकदम सच कह रही हूं लेकिन किसी को बताना नहीं,,,।

बिल्कुल भी नहीं बताऊंगा चाची भला यह सब बातें बताने की होती है क्या,,,!

सच में तु बहुत समझदार है।


(धीरे-धीरे अंधेरा होने लगा था अभी भी गांव से हुआ दोनों काफी दूर थे चलते-चलते अंधेरा पूरी तरह से छा चुका था और अब गांव की शुरुआत हो चुकी थी लेकिन दोपहर से सोनू की चाची पेशाब नहीं करी थी और चुदवाने के बाद तो वह पेशाबबिल्कुल भी नहीं थी इसलिए उसे बड़े जोरों की पेशाब लगने लगी थी और उसकी बुर में कुलबुलाहट भी होने लगी थी वह अपने मन में सोच रही थी कि अपना जाने का मौका मिलेगा,,, इसलिए वह सूरज से बोली,,,।

मुझे फिर से बड़ी जोरों की पेशाब लगी है रुक जा मै पेशाब कर लेती हूं,,,।
(ऐसा कहते हुए सोनू की चाची एक बड़े से पेड़ के नीचे खड़ी हो गई और इधर-उधर देखने लगीअंधेरा हो चुका था इसलिए किसी के भी देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी और वह दोनों अभी भी गांव से दूर थे गांव में प्रवेश करना बाकी था और वह देखना चाहती थी कि जो कुछ भी हुआ उससेसूरज की हिम्मत बड़ी है कि नहीं इसलिए वह सूरज की आंखों के सामने अपनी सारी कमर तक उठाकर खड़ी हो गई उसकी नंगी गांड सूरज की आंखों के सामने थी और वह पलट कर सूरज की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी अब सूरज के लिए नादानी पन दिखाना सबसे बड़ी मूर्खता थी,,,सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी गांड देखकर पल भर में उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और वह तुरंत सोने की चाची के पीछे आ गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया,,,, यह देख कर सोनू की चाची बहुत खुश हुई लेकिन फिर भी अपनी खुशी जाहिर नहीं होने दी और बोली,,,)

यह क्या सूरज मुझे पेशाब तो करने दे,,,।

नहीं चाची पता नहीं क्यों मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,(और ऐसा कहते हुए सूरज खुद उसकी एक टांग पड़करवहीं पास में ही एक बड़ा सा पत्थर था उसे पर रख दिया था कि वह अपने लिए जगह बना सके और जगह बनते ही तुरंत अपना पैजामा नीचे किया और अपने लंड को बाहर निकाल कर उसके गुलाबी छेद में फिर से डाल दिया और फिर से उसकी चुदाई करना शुरू कर दियासूरज की हरकत से वह पूरी तरह से उत्तेजना से गदगद हो गई और चुदाई का मजा लेने लगी,,,, थोड़ी देर में दोनों फिर से झड़ चुके थे और सोनू की चाची मुस्कुराते हुए नीचे बैठकर पेशाब करने लगी,,।

घर पहुंच कर सोनू की चाची ने वही बहन बताइए जो सूरज में उसे बताया था सूरज अपने घर चला गया था और उसकी बातों पर भरोसा करने के सिवासोनू की मां के पास कोई रास्ता भी नहीं था क्योंकि वह उसके ही बेटे के लिए दवा लाई थी और वाकई में वह दवा काम कर गई थी तीन-चार दिनों में सोनू एकदम ठीक हो गया था,,,,।
बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है जंगल में एक टूटे झोपड़े में सोनू की चाची और सूरज के बीच दमदार चूदाई हो गई
 

Sanju@

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सोनू की चाची का काम बन चुका था सोनू की चाची कभी सोची भी नहीं थी किअपनी मर्यादा और संस्कार को त्याग कर उसे इस तरह का कदम उठाना पड़ेगा लेकिन अपनी किस्मत की मजबूरी और बदन की जरूरत को देखते हुए उसे वही करना पड़ा जो उसे नहीं करना चाहिए था,, लेकिन आप इसमें उसे कोई भी पछतावा महसूस नहीं हो रहा था क्योंकि जो कुछ भी हुआ था उसमें उसकी ही भलाई थी,,, सोनू की चाची मन ही मन में सोनू काशुक्रिया अदा कर रही थी और वह भी इसलिए कि अच्छा हुआ वह बीमार था और उसकी दवाई के चक्कर में हीउसे सूरज के साथ बाजार जाना पड़ा और जो कुछ भी हुआ वह उसके लिए अविस्मरणीय था जिसे वह कभी जिंदगी में भूल नहीं सकती थी,,, यह वो पल था जो पूरी तरह से उसके जीवन का यादगार पल बन गया था।




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जो कुछ भी हुआ था उसके जीवन में पहली बार हुआ था शादी करने के बाद जब से वह अपने ससुराल आई थी पहली रात से ही उसे असंतुष्टि का एहसास होने लगा था,, और कुछ ही वर्षों में वह समझ गई कि यह शादी है उसके लिए पूरी तरह से अभिशाप बंद करने गई है ना तो पति का सुख और ना ही कभी मां बनने का सुख उसे मिलने वाला है,,, पहले तो वह अपनी आशा को छोड़ चुकी थी लेकिन निराशा में उसे आशा की किरण नजर आने लगी,,,अनजाने में ही गांव की औरत ने उसे किसी गैर मर्द के साथ शारीरिक संबंध बनाने का परामर्श दी थी,,, पहले तो उसका यह सलाह सोनू की चाची को बड़ा अजीब लगा लेकिन इस बारे में वह सोचने लगी थी और जबसूरज की मां ही उसे एक ज्योतिष के पास ले गई और यह खुलासा उसे ज्योतिष ने किया कि उसे संतान सुख तो मिलेगा लेकिन किसी गैर मर्द से तब से उसके मन में सूरज के प्रति आकर्षण बढ़ने लगा और ज्योतिष के बताए अनुसार उसे सूरज मेंगैर मर्द की खूबी नजर आने लगी जोर से शरीर सुख के साथ-साथ मां बनने का भी सुख दे सकता था।



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और फिर वह सूरज के करीब आने का प्रयास करने लगी मर्दों की फितरत से तो वह अच्छी तरह से वाकिफ थी,,वह इस बात को अच्छी तरह से जानते थे कि उसकी जवानी का जलवा देखने के बाद सूरज तो क्या दुनिया का कोई भी मर्द उसके पास आने से बिल्कुल भी अपने आप को रोक नहीं पाएगाऔर ऐसा ही होगा थोड़ी हिम्मत दिखा कर सोनू की चाची अपनी जवानी का जलवा सूरज को दिखाने लगी और सूरज पागलों की तरह उसके करीब आने का बहाना ढूंढने लगा,,, और नतीजा यह निकला कि आज दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गया,,, लेकिन इसमें सोनु की चाची की गलतफहमी थी कि यह सारा खेल उसका राजा हुआ थावह सूरज को अनाड़ी समझती थी लेकिन इस बात को वह नहीं जानती थी कि वह अनाड़ी सबसे बड़ा खिलाड़ी था वह अनाड़ी बनकर उसकी दोनों टांगों के बीच जगह बनाना चाहता था उसमें अपना झंडा गाड़ना चाहता था,, और अनाड़ी बनकर वह अपना खेल खेल चुका था,,, सोनू की चाची को चोदने में उसे परम शांति परम आनंद का अनुभव हुआ था,,, और शराफत से उसने इस अनुभव को सोनू की चाची को भी कराया था सोनू की चाची भी सूरज से काफी संतुष्ट थी।




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सच बात तुझे था की पहली बारसोनू की चाची चुदाई की असली सुखों को प्राप्त की थी एक मोटे तगड़े लंड को अपनी गुलाबी छेद में लेकर उसे इस बात का एहसास हुआ था कि किसी मर्द का लंड बच्चेदानी तक भी जा सकता है,,, वरना उसने तो आज तक अपने पति के छोटे और पतले लंड से ही चुदवाने का असफल प्रयास की थी,,, लेकिन आज वह पूरी तरह से संतुष्टि थी और इस बात से खुश थी कि उसने भी दूसरी औरतों की तरह शरीर सुख को प्राप्त की हैएक औरत होने का सुख प्राप्त की है और उसे इस बात की उम्मीद भी थी कि जल्दी ही वह मां बनने का भी सुख प्राप्त कर लेगी,,,।

सूरज के द्वारा दिलाई गई दवा काम कर गई थी और 3 दिन में ही सोनू एकदम स्वस्थ हो चुका था,,, लेकिन इस बीच सोनू की चाची को सूरज से मिलने का मौका नहीं मिल रहा था क्योंकि जो आग सूरज ने उसके बदन में लगाई थी उसे केवल सूरज ही बुझा सकता था,,,,बार-बार सोनू की चाची को अपनी बुर में खुजली महसूस होने लगती थी जो की उंगली से नहीं बल्कि सूरज की मोटे तगड़े लंड से ही मिटने वाली थी,,,,, सूरज से मिलने के लिएवह खेत में काम का बहाना बनाकर सुबह-शाम खेत पर भी जाती थी लेकिन सूरज का वहां कोई ठिकाना नहीं मिलता था वह रोज निराश होकर घर चली जाती थी,,, वह उदास रहने लगी थी सूरज के साथ संबंध बनाने के लिए उसकी मन पूरी तरह से तड़प रहा था,,, अब उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि औरत के मन में शरीर सुख की भूख कितनी प्रबल होती है जिसे मिटाने के लिए स्त्री किसी भी हद तक जा सकती है,,,।




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दूसरी तरफ सूरज सोनू की चाची की जमकर चुदाई करने के बाद,, अपने पिताजी के बारे में सोच रहा था,,, सूरज समझ गया था कि जिस आकर्षण में उसके पिताजी घर परिवार त्याग कर चले गए हैं वह आकर्षण इतनी जल्दी कम होने वाला नहीं था लेकिन इसमें उसका ही भला था एक औरत की प्यास कब तक दबी रह सकती है इस बात को वह अच्छी तरह से जानता था,, जिसका ताजा उदाहरण थी सोनू की चाचीऔर इससे पहले मुखिया की बीवी जो पति के होने के बावजूद भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपनी प्यास बुझा रही थी,,,और उसे अच्छी तरह से मालूम था कि एक-एक दिन उसकी मां भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार हो जाएगी क्योंकि उसकी हरकत को अपनी आंखों से देख चुका था रात को चोरी छुपे अपनी मां के कमरे में देखकर वह समझ गया था कि उसकी मां अंदर ही अंदर से बहुत प्यासी है,,,, इसका एहसास भी उसे अच्छी तरह से हो गया था जब वह अपनी मां के गले लगा थाउत्तेजना में आकर वह पूरी तरह से अपनी मां को अपनी बाहों में भरकर अपनी हथेलियां को उसके नितंबों पर रखकर दबाने लगा था जिसका बिल्कुल भी विरोध उसकी मन नहीं की थी बल्कि उसकी हरकत से वह पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी वह तो ऐन समय पर रानी आ गई थी वरना उसी दिन बहुत कुछ हो जाता हैइसलिए तो सूरज का आत्मविश्वास बढ़ चुका था और इसीलिए वह अपने मन में यही सोचता था कि उसके पिताजी घर पर वापस ना आवे तो अच्छा हो,,,।




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दोपहर के समय वह अपने घर पर पहुंचा तो देखा कि उसकी मां घर पर नहीं थी पड़ोस में किसी के घर गई हुई थी घर में केवल रानी ही थी और वह भी बर्तन साफ कर रही थी अपनी बहन को देखकर सूरज के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह धीरे से जाकर अपनी बहन के पास बैठ गया और बोला,,,।

रानी उसे दिन जो आंवाला तोड़कर हम दोनों में लाए थे क्या मां ने तेल बना दी है,,,,।

अभी पूरा बना तो नहीं है लेकिन मां ने बनाना शुरु कर दी है,,,,।(कुछ इस तरह से सूरज उसके पास में ठीक उसके बगल में आकर बैठा था रानी केतन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी और आंवले का जिक्र सुनकर तो,,,उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी क्योंकि उसे अच्छी तरह से मालूम था कि आंवला तोड़ने के लिए जहां पर दोनों गए थे वहां पर क्या हुआ था,,, अपनी बहन की बात सुनकर सूरज बोला,,)



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अगर और वाला की जरूरत हो तो बोलना फिर से हम दोनों चलेंगे,,,(इतना कह कर वह अपनी बहन की तरफ देखकर मुस्कुराने लगा औरसूरज की यह बात सुनकर रानी के तन-बदन में अजीब सी हलचल होने लगी और वह शर्म के मारे अपनी नजर को नीचे झुका ली,,, और उसे शरमाता हुआ देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अच्छा तूने उसे दिन वाली बात मां को तो नहीं बताई थी ना,,,।

नहीं,,,(रानी शर्मा कर बोली,)

अच्छा हुआ तूने नहीं बताईतुझे ऐसी बहुत सी जगह है वहां भी लेकर जाऊंगा बहुत मजा आएगा,,, अच्छा सच सच बताना उस दिन नहाने में मजा आया था ना,,,।




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(सूरज की आवाज सुनकर रानी कुछ बोल नहीं पाई बस शर्म से शंकुचाए जा रही थी,,उसका दिन जोरों से ढक रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका भाई इस तरह की बातें उसके साथ क्यों कर रहा है और वह भी ऐसे समय जब उसकी मां घर पर नहीं है,,,, जब रानी कुछ बोली नहीं तो सूरज फिर से अपनी बात को दोहराते हुए बोला,,,)

बोल नहाने में मजा आया था ना,,,।

(रानी बोली कुछ नहीं बस हां में सिर हिला दि... उसकी हामी देखकरसूरज का दिल जोरो से धड़कने लगा और उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह है एकदम से मुद्दे पर आते हुए बोला,,,)

बिना कपड़ों में तु बहुत खूबसूरत लगती है,,,।

(अब तो रानी की हालत और ज्यादा खराब होने लगी,,,,, क्योंकि उसे इतना तो समझ में आ रहा था कि उसका भाई अश्लील बातें कर रहा था जो की एक भाई को अपनी बहन से नहीं करना चाहिए था लेकिन उसने अपने भाई की हरकत को जंगल में देख चुकी थी और उसे समय उसकी हरकत उसे बेहद उन्मादक लग रही थी,,, अच्छी लग रही थी इसलिए भले ही उसके मन में थोड़ी झिझक थी लेकिन फिर भी अपने भाई की तरह की बातें उसे अंदर ही अंदर अच्छी लग रही थी फिर भी वह अपने भाई से बोली,,,)




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यह कैसी बातें कर रहे हो भाई,,,।

सच कह रहा हूं,,,, तेरी खूबसूरती की तारीफ कर रहा हूं पूरे गांव में तेरी जैसी खूबसूरत लड़की नहीं है और तू सच में बिना कपड़ों के बहुत अच्छी लगती है,,,अगर मैं तुझे उसे दिन नहाने के लिए ना बोला होता तो शायद मुझे नहीं मालूम पडता कि तू इतनी खूबसूरत है,,,,।

क्या सच में मैं बहुत खूबसूरत हूं,,,,(अंदर ही अंदर प्रसन्न होते हुए रानी बोली वैसे भीऔरत की सबसे बड़ी कमजोरी यही होती है कि कोई अगर उसकी खूबसूरती की तारीफ कर दे तो वह बहुत जल्दी पिघल जाती है और यही रानी का भी था भला अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनना उसे क्यों खराब लगता,,,, और अपनी बहन की आवाज सुनकर सूरज को लगने लगा कि वह भी जल्दी लाइन पर आ जाएगी,,, इसलिए उसकी बात का जवाब देते हुए वह बोला,,,)

हां सच में तु बहुत खूबसूरत है,,,।




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(अपने भाई के मुंह से इतना सुन करो मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बाकी के बर्तन को साफ करने लगी,,,, यह देखकर सूरज पास में पड़े बर्तन को लेकर वह भी साफ करते हुए बोला,,,)

तेरे बदन की बनावट बहुत खूबसूरत है ऐसा लगता है कि जैसे भगवान ने तुझे फुर्सत में बनाया है,,।
(अपने भाई कि ईस तरह की बातों को सुनकर रानी शर्मा भी रही थी और प्रसन्न भी हो रही थी उसकी प्रसन्नता उसके चेहरे से साफ झलक रही थी जिसे देखकर सूरज की भी हिम्मत बढ़ने लगी थी वह जानता था कि इतनी जल्दी उसकी मां घर पर आने वाली नहीं है,,,और गर्मी का भी दिन था गांव की औरतें बड़े से पेड़ के नीचे बैठकर आपस में गप्पे लडाया करती थी जिसमें काफी समय गुजर जाता था,,, इसलिए अकेलापन पाकर सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी थी वह अपनी बहन से और भी ज्यादा खुले शब्दों में बात करना चाहता था और देखना चाहता था कि उसके अश्लील शब्दों का उस पर क्या प्रभाव पड़ता है,,, इसलिए वह हिम्मत जुटाते हुए बोला,,,)




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पहले तो मुझे लगा कि तू तालाब में नहाने के लिए तैयार नहीं होगी,,, लेकिन जब तू बड़े से पत्थर के पीछे जाकर कपड़े उतारने लगी तब मुझे यकीन हो गया कि तू भी झरने के उस ठंडे पानी में नहाने का मजा लेगी,,,।

सच कहूं तो झरने के पानी में नहाने का मेरा भी बहुत मन था लेकिन मैं कपड़े तो ले नहीं गई थी और मैं कपड़े उतार कर नहाना नहीं चाहती थी और वह भी तेरे सामने,,,।


तो अगर मेरी जगह कोई और होता तो उसके सामने कपड़े उतार कर नहाती,,,।

ऐसी बात नहीं है तू मेरा मतलब नहीं समझ रहा है भाई,,, तू मेरा बड़ा भाई है और तेरे सामने कपड़े उतारने में मुझे कितनी शर्म आती है पता है,,,।

लेकिन वहां तेरे और मेरे सिवा दूसरा कोई नहीं था,,, तभी तो मैं तुझे कपड़े उतार कर नहाने के लिए बोल रहा था,,,।




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मैं तैयार नहीं होती लेकिन सच में मैं तुम्हारी बात पर गौर की तोसच में यह मौका मैं भी यहां से जाने नहीं देना चाहती थी फिर तो पहली बार में जिंदगी में इतनी खूबसूरत जगह को देख रही थी,,, और झरने में नहाने का सुख लेना चाहती थी इसीलिए मैं तुम्हारी बात मान गई थी,,,,।(बर्तन मांजते हुए वह बोली,,,)

सच में उसे दिन मजा आ गया था जैसे ही तुम बड़े से पत्थर के पीछे से बाहर निकल मैं तो तुम्हें देखकर एकदम पागल हो गया देखता ही रह गया तुमको,,, बिना कपड़ों में तुम्हारी खूबसूरती और भी ज्यादा बढ़ जाती है,,,।
(बार-बार बिना कपड़ों वाली बात को सुनकर रानी शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की स्थिति अजीब सी हो चली थी,,,।लेकिन फिर भी इस अजीब स्थिति में उसे आनंद की अनुभूति हो रही थी जिसे वह इनकार नहीं कर सकती थी,,। शर्मा कर‌ वह अपने भाई से बोली,,,)




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धत्,,,, इस तरह की बात मुझसे मत करो मुझे शर्म आती है,,,।

जो बात हम दोनों के बीच हो चुके हैं उसके बारे में बात करने से कैसी शर्म,,,,।

नहीं मुझे शर्म आ रही है,,,(ऐसा कहते हुए वह आखरी बर्तन को पानी से धोकर एक तरफ रखनी और उठकर खड़ी हो गई उसके साथ ही सूरज भी उठकर खड़ा हो गया,,, वह उसके पीछे-पीछे घूमता हुए इधर-उधर चलते हुए बोला,,,)

तू शर्मा क्यों रही है हम दोनों तो सिर्फ बातें कर रहे हैं,,,।

नहीं फिर भी मुझे शर्म आती है,,,।

अच्छा चल खाना निकाल के मुझे भूख लगी है फिर खाना खाते खाते बात करेंगे,,,।




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(अपने भाई की बात सुनकर रानी उसके लिए खाना निकालने लगेऔर अपने लिए भी खाना निकालने लगी क्योंकि वह भी खाना नहीं खाई थीऔर इतना तो समझ गई थी कि उसका भाई उसका पीछा छोड़ने वाला नहीं है जिस तरह से उससे बातें कर रहा है,,, आज उससे इधर-उधर की बहुत सारी बातें करने वाला है,,, थोड़ी देर में वह दो थाली में खाना परोस दी,,,, एक थाली कर अपने भाई की तरफ आगे बढ़ा दी जो ठीक उसके सामने बैठकर खान का इंतजार कर रहा था और जल्दी से हाथ आगे बढ़कर थाली थाम लिया और खाना खाने लगा धीरे-धीरे शरमाते हुए रानी भी खाना खाने लगी सूरज चोर नजरों से अपनी बहन की तरफ देख ले रहा था,,,।

झरने के पानी में वह अपनी बहन के साथ पूरी तरह से नंगा होकर नहा चुका था अपनी बहन की मस्त-मस्त जवानी के दर्शन में कर चुका था उसकी संतरे जैसी चूचियां उसका गठीला बदन और सुगठित नितंबों का उभार अभी तक उसकी आंखों में बसा हुआ था,,, वह खाना खाते हुए फिर से वही बात छेढ़ते हुए बोला,,,।

अच्छा तो जब कुछ देर के लिए गायब हो गई थी तब तो मैं एकदम से घबरा गया था,,,,(गायब होने वाली बात को सुनकर रानी का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि वह समझ गई थी कि उसका भाई कौन सी बात का जिक्र करने वाला है वह शर्म के मारे अपनी नजर को नहीं उठा रही थी बस अपने भाई की बात सुन रही थी और सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) मुझे तो लगा जैसे कोई जंगली जानवर तुझे उठा ले गया हैअगर आइंदा मेरे साथ चलना तो हमेशा मेरे साथ ही रहना क्योंकि वहां पर जंगली जानवर सियार भेड़िया घूमते रहते हैं,,,,।
(जंगली जानवर सियार भेड़िया का जिक्र सुनकर रानी के मन में थोड़ी दहशत होने लगी और वहआश्चर्य से अपने भाई की तरफ देखने लगी तो सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अगर तुझे जोरों की पेशाब लगी हुई थी तो मुझे बताना चाहिए था ना अनजाने में ही मैंने तुझे पेशाब करते हुए देख लिया जबकि मुझे देखना नहीं चाहिए था,,,, सच कहूं तो कुछ पल के लिए तो भले हीमुझे डर लग रहा था कि कहीं तुझे जंगली जानवर उठाने लेकर आओ लेकिन जब मैं तुझे पेशाब करते हुए देखा तेरी नंगी गांड देखकर तो मैं तुझे देखता ही रह गया,,,,,(अब तो अपने भाई के मुंह से नंगी और गांड जैसी शब्दों को सुनकर उसकी हालत और भी ज्यादा खराब होने लगी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी,,, उसके बदन में उत्तेजना का संचार होने लगा,,,। वह कुछ बोल सके की स्थिति में नहीं थी बसहाथ मिलाने वाला लेकर इस तरह से आंखों को नीचे करके अपने भाई की बात को सुनते चली जा रही थी वह देखना चाहती थी कि उसका भाई और क्या बोलता है,,, सूरज अच्छी तरह समझ रहा था कि उसकी बहन के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

लेकिन सच में जंगल में बहुत मजा आया,,, अच्छा हुआ कि मैं किसी और को साथ नहीं लिया था सिर्फ हम दोनों थे,,,(निवाला मुंह में डालते हुए बोला) अच्छा एक बात बता जब तू तालाब में मेरे साथ नहा रही थी तो तुझे मछली से डर लग रही थी,,, तु अपने हाथ में क्या पकड़ कर रखी थी,,,।

(इतना सुनकर तो रानी की हालत और ज्यादा खराब होने लगी उसकी स्थिति उत्तेजना से स्वरूप और होने लगी उसकी बुर से मदन रस का बहाव होना शुरू हो गया क्योंकि उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि तालाब के अंदर जिसको वह कोई जानवर समझ रही थी वाकई में वह क्या था,,,,वह भी अपने मन में यही सोच रही थी कि उसका भाई एकदम खुले शब्दों में बोल दिया,,,)

तू अनजाने में मेरा लंड पकड़ ली थी,,,,।
(रानी के कानों में यह शब्द पढ़ते हैं उसके बदन में उत्तेजना का रस घुलने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, उसे अपनी बुर उत्तेजना में फूलती और पिचकती हुई महसूस हो रही थी,,,, अपने भाई के मदद कर देने वाले शब्दों को सुनकर वह खाना खाना भूल चुकी थी उसकी सांसों की गति के साथ उसके छोटे-छोटे अमरुद भी ऊपर नीचे हो रहे थे जिसे देखकर सूरज के मुंह में पानी आ रहा था,,,,सूरज भी अच्छी तरह से जानता था कि अगर उसे आगे बढ़ाना है तो इस तरह की बातें करना ही होगा तभी वह मुखिया की लड़की की तरह रानी के साथ भी मजे ले पाएगा इसलिए अपनी बात को वह आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

क्या सच में मेरा लंड ज्यादा बड़ा और मोटा था जिसकी वजह से तू घबरा गई थी,,,।


यह कैसी बातें कर रहे हो भाई क्या इस तरह की बातें मुझे करना तुम्हें अच्छा लग रहा है कोई सुन लेगा तो क्या रहेगा क्या सोचेगा हम दोनों के बारे में,,,।

अरे कोई सुनेगा कैसे घर में सिर्फ में और तू ही तो है,,, और इस तरह की बातें करने में तो मजा आता है और मुझे पूरा यकीन है कि ईस तरह की बातें सुनकर तुझे भी मजा आ रहा होगा,,,।

नहीं मुझे मजा नहीं आ रहा है मुझे बड़ा अजीब लग रहा है अगर मां को पता चल गया तो गजब हो जाएगा,,,।

मां को कैसे पता चलेगा तू बताएगी मां को अगर बताना होता तो तू कब से बता दी होती है लेकिन तूने नहीं बताई इसका मतलब है कि तुझे भी अच्छा लग रहा है,,,।

नहीं मैं इसलिए नहीं बताई कि आइंदा फिर मुझे तेरे साथ कहीं मां जाने नहीं देंगी,,,।

लेकिन सच बता तुझे भी मजा आ रहा है ना,,,।

(सूरज की बात सुनकर रानी कुछ बोली नहीं बस खामोश बैठी रही,,, रानी को इस तरह से खामोश बैठी देखकर सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी और वहां फिर से और भी ज्यादा खुले शब्दों में बोला,,,)

तू बात नहीं रही लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि तेरी बुर में से भी पानी निकल रहा होगा तेरी बुर पानी छोड़ रही होगी,,,।

(अपने भाई कि ईस तरह की बातें सुनकररानी उत्तेजना से मेरी जा रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह गहरी सांस लेते हुए अपने भाई की तरफ देख रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी हालत खराब हो रही थीउसके बदन में उत्तेजना का संचार बड़ी तीव्र गति से हो रहा था उसके पैर उत्तेजना से कांप रहे थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसका भाई खुले शब्दों में उसकी बुर के बारे में बोल रहा था,,,रानी को अपने भाई की नियत पर शक होने लगा था भलाई भाई अपनी बहन के साथ इस तरह की बातें कैसे कर सकता है लेकिन उसका भाई तो एकदम खुले शब्दों का प्रयोग कर रहा था जरूर उसके मन में कुछ गंदा ही चल रहा था लेकिन फिर भी न जाने क्यों रानी अपने भाई की बातों की तरफ आकर्षित होती जा रही थी वह आनंदित हुए जा रही थी। अपने भाई की तरफ देखते हुए वह मदहोशी भरे शब्दों में बोली,,,)

भाई तुझे शर्म नहीं आ रही है इस तरह की बातें कर रहा है,,,।

शर्म कैसी मैं तो सच कह रहा हूं,,,अगर तुझे मेरी बातों पर विश्वास नहीं है तो अपनी सलवार खोल कर देख तेरी बुर पानी छोड़ रही होगी,,,।

नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकती,,,।

(रानी की हालत को देखकरसूरज मन ही मन प्रसन्न हो रहा था क्योंकि वह समझ गया था कि उसकी बहन पूरी तरह से उत्तेजित हो गई हैवह अपने आप से ही बोला भले ही समय इनकार कर रही है लेकिन बहुत जल्दी वह खुद अपने हाथों से अपनी सलवार खोलकर मजा लेगी,,,कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही सूरज खाना खा चुका था लेकिन रानी की थाली में अभी भी भोजन पड़ा था वह खाना नहीं खा रही थी ऐसा लग रहा था कि उसका पेट सूरज की अश्लील बातों से ही भरत चला जा रहा है कुछ देर की खामोशी के बाद सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अच्छा एक बात बता तालाब के अंदर तुझे मेरा लंड बहुत ज्यादा मोटा और लंबा लग रहा था ना लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है इस समय मेरा लंड बहुत छोटा है,,, उसे दिन तुझे भ्रम हुआ था,,,(इस तरह की बातें करके सूरज किसी न किसी बहाने से रानी को अपना लंड दिखाना चाहता था जो कि इस समय ज्यादा उत्तेजित अवस्था में नहीं था लगभग शीथील अवस्था में था,,,, अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बोला,,) तुझे यकीन ना हो तो तुझे दिखा दु की कितना छोटा है,,,,।

(रानी समझ गई थी किसके भाई के मन में कुछ और ही चल रहा है इसलिए वह बड़ी हिम्मत करके अपनी जगह से उठते हुए बोली,,,)

नहीं मैं जा रही हूं मुझे बहुत काम है,,,।
(उसे अपनी जगह से उठता हुआ देखकर सूरज भी अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया,,, और रानीचलते हुए आंगन में पहुंच गई थी जहां पर सूरज उसका हाथ पकड़ कर उसे खड़ी कर दिया और बोला,,,)

देख तो ले पहले तेरा भ्रम दूर हो जाएगा नहीं तो किसी को बता दीजिए मेरा लंड ज्यादा मोटा और लंबा है तो,,, लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे,,,।

भला मैं क्यों बताने लगी यह सब,,,।

इसलिए तो कह रहा हूं देख ले एक बार,,,,(और ऐसा कहने के साथ ही सूरज फुर्ती दिखाता हुआ तुरंत अपने पजामा को खींचकर नीचे कर दिया और अपने लंड को बाहर निकाल दिया जो कि वास्तव में इस समय उत्तेजित अवस्था में नहीं था वह एकदम ढीला डाला और झूल रहा था,,,पहले तो जैसे ही सूरज अपनी पहचाने को नीचे करने लगा रानी शर्मा कर अपनी नजरों को दूसरी तरफ घूम ली थी लेकिन फिर सूरज हिम्मत दिखा कर उसके सर पर अपना हाथ रख दिया औरउसे अपने लंड की तरफ घूमाते हुए उसे दिखाते हुए बोला,,,)

ले देख ले कितना छोटा सा है,,,(रानी देखना नहीं चाहती थी वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी लेकिन सूरज जैसे जबरदस्ती दिख रहा था और रानी भी अपने मन में यही चाहती थी कि वह अभी एक बार फिर से अपने भाई के लंड को देखें इसलिए वह भी ज्यादा ना नूकर ना करते हुए,,, वह भी अपनी नजरों को नीचे की तरफ करके अपने भाई के लंड को देखने लगी,, और वाकई में अपने भाई के लंड को देखकर वह एकदम सोच में पड़ गई थी,,, उसे समयजिस तरह का लंड उसने अपनी आंखों के सामने देखी थी उसे तरह का तो बिल्कुल भी नहीं था इस समय उसके भाई का लंड एकदम छोटा था,,,यह रानी के लिए हैरानी वाली बात थी इससे वह काफी हैरान भी हो गई थी वाकई में उसे ऐसा लग रहा था कि क्या सच में उसे दिन उसे अपनी आंखों का भ्रम हुआ था,,,, लेकिन यह कैसे हो सकता है,,,।इस बात से वह काफी परेशान लग रही थी और सूरज अपने बहन की परेशानी को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह अपने झूलते हुए लंड को हाथ में लेते हुए बोला,,,।


देख ली ना कैसा है उस दिन तुझे भ्रम हुआ था,,,।
(अपने भाई की बात सुनकर रानी कभी अपने भाई की तरफ तो कभी उसके लंड की तरफ देख रही थी अपनी बहन की स्थिति को समझते हुए सूरज गहरी सांस लेते हुए बोला,,,)

लेकिन यह फिर से उस दिन की तरह मोटा और लंबा हो सकता है,,,।

(अपने भाई की बात सुनकर रानी फिर से आश्चर्य से अपने भाई की तरफ देखने लगी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे हुआ इस बात से हम जानते हैं की मर्द का लंड उत्तेजना की वजह से कड़क होकर टनटना जाता है,और इस बात का ज्ञान न होने की वजह से ही इस समय उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थी अपनी बहन की स्थिति को देखते हुए सूरज बोला,,,)

क्या फिर से उसे दिन की तरह देखना चाहती हो मोटा और लंबा एकदम कड़क,,,।

(रानी क्या बोलते बोलते के लिए उसके पास शब्द नहीं थे वह सिर्फ आश्चर्य से मुंह खुला रखकर कभी उसकी दोनों टांगों के बीच तो कभी उसके चेहरे की तरह देख रहे थे इसलिए सूरज ही अपनी बात को बढ़ाते हुए बोला)

अगर देखना चाहती है तो इसे हाथ में पकड़ कर हिला देख सच में उसे दिन की तरह हो जाएगा,,।

(अपने भाई की बात सुनकर उसके दिल की धड़कन और तेज चलने लगी,,, क्योंकि सीधे-सीधे उसका भाई उसे उसका लंड पकड़ने के लिए बोल रहा था,,,,वह अपने मन में ही बोल रही थी कि कितना बेशर्म भाई है जो अपनी बहन सिस्टर की हरकत करने के लिए कह रहा है लेकिन फिर उसका दूसरा मन यह कह रहा था कि पकड़ ले या मौका दोबारा मिलने वाला नहीं है,,,और वैसे भी भले ही यह सब उसे बड़ा अजीब लग रहा था लेकिन इससे उसे आनंद की मिल रहा था जिससे वह इनकार नहीं कर पा रही थी वह कुछ बोल नहीं पा रही थी तो,, सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी और सूरज बिना कुछ खोल उसका हाथ पकड़ लिया और,,,उसकी हथेली को अपने लंड पर रख दिया और उसकी हथेली पर खुद अपना हथेली रख दिया ताकि वह हटा ना सके,,,यह स्थिति रानी के लिए बेहद शर्मसार कर देने वाली थी वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी वह अपनी नजरों को एकदम से नीचे झुकाए हुएइस स्थिति को देखने की कोशिश कर रही थी लेकिन पल भर के लिए उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उत्तेजना से उसकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा है वह मदहोश हुए जा रही थी कुछ उसे समझ में नहीं आ रहा था,,,,,।

वह कुछ बोल पाती ईससे पहले ही सूरज अपनी हथेली को कस के उसकी हथेली पर पकड़ करऊपर नीचे करके हिलाने शुरू कर दिया और इसका असर बड़ी तेजी से उसके लंड की नसों में होने लगा उसने बड़ी तीव्रता से लहू काप्रसार होने लगा और देखते ही देखे उसमें गर्मी बढ़ने लगी और वह धीरे-धीरे कड़क होने लगा यह सब रानी अपनी हथेली में बड़े अच्छे से महसूस कर रही थी और यह सब उसके लिए अचंभित कर देने वाला थाउसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन हथेली में लंड की गर्माहट उसके मदन रस को पिघला रहा था,,,,सूरज पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में गोते लगाने लगा था वह अपने मन में सोच रहा था कि अगर सब कुछ सही हुआ तो इसी समय वह संभोग का सुख प्राप्त कर लेगा,,।

देखते ही देखते सूरज का लंड एकदम विकराल स्वरूप लेने लगा,,, उसकी गर्माहट और मोटाई बढ़ती जा रही थी उसकी लंबाई भी बढ़ती जा रही थी,, यह सबरानी को आश्चर्यचकित कर रहा था लेकिन वह इन सब में मदहोश में जा रही थी अपने आप को बोलती चली जा रही थी उसकी खुद की हथेली अपने भाई के लंड के इर्द गिर कसती चली जा रही थी जिसका एहसास सूरज को अच्छी तरह से हो रहा था,,, हालात बद से बत्तर हुए चले जा रहे थे,,,घर के आंगन में अपनी मां की गैर मौजूदगी में सूरज अपनी इच्छाओं की पूर्ति करना चाहता था जिसके चलते वह अपने कदम को आगे बढा चुका था और उसका साथ उसकी बहन एकदम बराबर दे रही थी,,, सूरज जानता था कि उसकी बहन को भी मजा आ रहा है,,,।

और देखते ही देखते सूरज का लंड पूरी तरह से तन तन कर खड़ा हो गया एकदम पहले की तरह झरने में जिस तरह रानी अपने भाई के लंड को देखी थी,,,ठीक उसी तरह के लंड को अपनी मुट्ठी में महसूस करके वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,,सूरज मौके की स्थिति को अच्छी तरह से समझ रहा था वह उसकी हथेली पर अपनी हथेली को रखकर आगे पीछे करके मुठिया रहा था,,, लेकिन जिस तरह का उत्तेजना का संचार उसकी बहन के बदन में हो रहा थावह धीरे से अपनी हथेली को उसकी हथेली पर से हटा दिया और देखा कि उसकी बहन खुद अपने आप से ही उसके लंड को पकड़ कर मुठिया रही थी यह देखकर उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा और वह धीरे से बोला,,,,।


आंख खोल कर देख रानी पहले की तरह हो गया है,,,,।

(रानी की हालत खराब हो रही थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी सूरज की बात सुनकर उसका दिल जोरो से धड़कने लगा था वह अपनी आंखों से एक बार फिर से अपने भाई के लंड को देखने जा रही थी और वह धीरे से अपनी आंखों को खोलकर अपने भाई के लंड को देखने लगी जो कि उसकी मुट्ठी में पूरी तरह से भरा हुआ था,,यह देख कर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गई खुली आंखों से देखने के बावजूद भी वह अपनी हथेली में उसे मुखिया रही थी यह दर्शा रहा था कि वह कितनी ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी और इसी का फायदा उठाते हुए सूरज अपने प्यास होठों को धीरे से उसके लाल लाल तैरते हुए होठों की तरफ ले जाने लगा लेकिन उसकी बहन बिल्कुल भी अपने होठों को पीछे लेने की कोशिश नहीं की,,,, और अगले ही पल वह अपने होठों को उसके लाल-लाल होठों पर रखकर उसके होंठों का रसपान करने लगाजिसमें रानी को भी आनंद की अनुभूति होने लगी वह पूरी तरह से मत होने लगी उसकी बुर से पानी भल भला कर बहने लगा,,,,।

इस स्थिति में वह अपने भाई के लड को बिल्कुल भी छोड़ नहीं रही थी उसे कस के दबोचे हुई थी और सूरज इस मौके का फायदा उठाते हुए उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठों का लगातार रसपान करते हुए अपने दोनों हाथों को,, उसके गोलाकार नितंबों पर रख दिया और उसे जोर-जोर से दबाने लगा,,, सूरज दो तरफ सेअपनी बहन की जवानी पर हमला कर रहा था एक नीचे से और एक पीछे सेएक तो उसके हाथ में अपना लंड थमा दिया था और दूसरा उसकी गांड को दोनों हाथों से दबा रहा था जिससेरानी की हालत और भी ज्यादा खराब होती चली जा रही थी वह पूरी तरह से मदहोश हो होती चली जा रही थी उसके चेहरे का रंग लाल सुर्ख हो चुका था,,,,।

दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दोनों एक दूसरे में पूरी तरह से खो चुके थे सूरज इसी मौके का फायदा उठाना चाहता था और उसके नितंबों पर से अपना एक हाथ हटाकर वह धीरे से अपनीहथेली को उसकी दोनों टांगों के बीच की उसकी बुर पर रख दिया और सलवार के ऊपर से ही बुर की स्थिति का जायजा लेने लगा,, और अगले ही पल उसे एहसास हो गया कि उसकी बहन कितना पानी छोड़ रही है,,, वह अपनी हथेली को उसकी सलवार में डालकर उसकी नंगी बुर पर अपनी हथेली रखना चाहता थाऔर ऐसा करने के लिए वह अपना हाथ उसकी दूर पर से हटाकर उसकी सलवार के ऊपर रखकर अपनी उंगलियों को उसमें अंदर प्रवेश करने ही जा रहा था कि तभी उसे बाहर दरवाजा खोलने की आवाज आई यह आवाज दोनों के कानों में पड़ी थी और दोनों एकदम से एक दूसरे से अलग हो गए,,,,।

रानी एकदम से घबरा गई थी और वह तुरंत रसोई में जाकर बैठ गई थी क्योंकि अभी भी उसकी थाली में भोजन था,,,, और सूरज तुरंत अपने पजामा को ऊपर करके अपने लंड की स्थिति को छुपाने के लिए अपना झूठा बर्तन लेकर दूसरी तरफ बैठ गया था जहां बर्तन मांजा जाता था,,, और यह कार्य दोनों एकदम ठीक समय पर किए थे इसलिए जैसे उसकी मां रसोई घर की तरफ आई उसे बिल्कुल भी शक नहीं हुआ और वह सूरज को इस तरह से बर्तन मांजते हुए देखकर बोली,,,।

अरे आज क्या बात है खुद अपने हाथों से बर्तन साफ कर रहा है ऐसा क्यों,,,?

मैं अभी अभी-अभी खाना खाया हूं और कुछ देर पहले ही रानी ने सारे बर्तन को साफ की थी इसलिए मुझे लगा कि मेरा बर्तन मुझे खुद साफ करना चाहिए,,,।

क्या बात है तू तो एकदम समझदार हो गया है,,, और रानी तू अभी खाना खा रही है,,,।

क्या करूं घर का काम करते-करते भूख नहीं लगी थी और जब सारा काम कर ली तो भूख लगने लगी इसलिए खाना खाने बैठ गई,,,,।

चल कोई बात नहीं,,,,।
(इतना कहकर हुआ अभी वहीं पर बैठ गई और इधर-उधर की बातें करने लगेरानी अपने मन में सोचने लगी कि अच्छा होगा कि दरवाजा खोलने की आवाज आ गई और अच्छा हुआ कि उसने दरवाजा बंद कर दी थी खुला छोड़ दी होती तो उसकी मां बिना आवाज के अंदर आ गई होती और उन दोनों कोई स्थिति में देखी तो गजब हो जाता यही सोचकर वह अपने मन में सोच रही थी कि सही समय पर दरवाजा खुलने की आवाज आ गई वरना आज जवानी का बुखार एकदम से उतर जाता,,,)

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बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है सूरज एक नए शिकार की कोशिश कर रहा है वह रानी से खुलकर बात कर रहा है और रानी को भी उसकी बाते सुनकर कुछ कुछ हो रहा है इसलिए वह भी उसकी बाते सुन रही है लेकिन सुनैना के आ जाने से दोनों को रुकना पड़ गया नहीं तो रानी का शिकार हो जाता
 

rohnny4545

Well-Known Member
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बहुत ही कामुक गरमा गरम और उत्तेजना से भरपूर अपडेट है सोनू की चाची आखिर सूरज से चूद गई सूरज ने नादान बनकर सोनू की चाची को तृप्त कर दिया
Dhanyawad dost

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