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Adultery तेरे प्यार में .....

Premkumar65

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#15

कहते है की दुनिया में सबसे प्यारा नाता भाई-बहन का होता है . चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाये पर भाई बहन कभी एक दुसरे को नहीं भूल सकते. कांपते हाथो से निशा ने अपने भाई के माथे को चूमा

“अन्दर चलो दीदी ” नकुल ने कहा

निशा- तुझे देख लिया बस बहुत है मेरे लिए ,

नकुल- दीदी आज का दिन बहुत खास है, मेरे लिए ही सही अन्दर तो चलो. इतने सालो बाद मेरी दीदी घर आई है मुझे स्वागत तो करने दो

“अरे नकुल कैसा हल्ला हो रहा है बाहर ” तभी निशा की मम्मी चबूतरे पर आयी उसकी नजरे निशा पर ठहर सी गयी थी माँ बेटी बस एक दुसरे को देखे ही जा रही थी.

“मेरी बच्ची ” निशा की माँ ने उसकी बलाइया ली.

“खुश तो हो न तुम लोग ” माँ ने मुझसे कहा

मैं- जी

निशा- कबीर, ये तूने ठीक नहीं किया. जानते हुए भी तू मुझे यहाँ लेकर आया

मैं- यहाँ नहीं आएगी तो कहाँ जाएगी , तेरा घर है .

निशा- ये जानते हुए भी की इसी चोखट पर क्या हुआ था

मैं- तूने ही कहा था न की बात करने से बात बनती है तो बात कर लेते है . नकुल की कलाई आज सूनी तो रहेगी नहीं तू अन्दर जा न जा तेरी मर्जी पर राखी जरुर बाँध इसे. हमारे भाग के दुःख हम इसे तो नहीं दे सकते न, इसका हक़ है ये हक़दार है तेरी राखी का. ये तेरी माँ है दो घडी बात कर ले इस से फिर अपन चल ही देंगे इधर से. हम यहाँ किसी को सफाई देने नहीं आये है , ना मैं कुछ भुला हु .मेरी बस इतनी इच्छा है की एक बहन भाई को राखी जरुर बांधे.

निशा- कबीर , इतना विष भी मत पी लेना की संभले न

मैं- जब तक मेरी सरकार मेरे साथ है मुझे ज़माने की परवाह ना थी ना है ना आगे होगी.

निशा ने नकुल को राखी बाँधी तो बहुत खुश हो गया वो .

“तेरी जिद है बेटी तो तू अन्दर मत आ, पर बेटी- जंवाई आये है तो मुझे दो घडी का इतना हक़ तो दे की मैं जी भर कर देख सकू , क्या मालूम तू कब आएगी. फिर ” माँ ने कहा

निशा कुछ कहती उस से पहले ही मैं बोल पड़ा- माँ, अभी तक हमने शादी नहीं की है . ना ही हम साथ थे, तेरी बेटी बड़ी पुलिस अधिकारी बन गयी है . संजोग ये है की एक बार फिर इस दर पर हम साथ आये है , तेरी बेटी बहुत खुद्दार है , मुझसे ज्यादा इसे बाप की पगड़ी की चिंता है , ज़माने में चाहे सब ये कहे की भाग गयी तेरी बेटी पर माँ सच ये है की आज भी इसे ठाकुर साहब की हाँ का इंतजार है .

“कबीर चल यहाँ से ” निशा ने मेरी बांह पकड़ ली .

मैं- दो बात माँ से कर लू फिर चलते है . माँ, हमेशा गर्व करना जो तुझे ऐसी बेटी मिली. इसने कोई गुनाह नहीं किया, इसकी बस इतनी इच्छा थी की ये अपने पसंदीदा मर्द से शादी करे. ठाकुर साहब कभी न कभी तो समझेंगे इस बात को . मैं सिर्फ नकुल की इच्छा के लिए आया था अब हमें जाना होगा ठाकुर साहब को मालूम होगा तो फिर त्यौहार का रंग फीका हो जायेगा.

मैंने माँ के पांवो में सर रखा और बोला- दुआ देना, इसी चौखट से ज़माने के सामने ले जाऊ अपनी सरकार को .

माँ की भीगे पलके मेरे सीने में दर्द पैदा कर गयी. वापिसी में दिल साला बहुत भारी हो रहा था .

“ठेके पर चल ” निशा ने बिना आँखे खोले कहा . एक के बाद एक बोतले खुलती चली गयी. कभी वो हंसती कभी रोती . परिवार किसी भी इन्सान की शक्ति होती है, मैंने अपने परिवार को खोया अपने कर्मो की वजह से, निशा ने घर छोड़ा मेरी वजह से . नशे में निशा ने अपने तमाम दर्द को ब्यान कर दिया. मैं धैर्यपूर्वक उसे सुनता रहा . वापिसी में गाड़ी मैंने चाचा के घर के पास रोक दी, मेरी कलाई को पूरा विशवास था की छोटी जरुर आएगी राखी बंधने पर शाम रात में बदल गई वो ना आई. उस भाई का क्या ही जीना जिसे उसकी बहन भुला दे. अपना हाल कहे भी तो किसे सो एक बोतल और खोल ली .

“हवेली चलेगी क्या ” मैंने उस से कहा

“ नहीं, फिलहाल मैं बस सोना चाहती हु ” निशा ने कहा तो मैंने उसे बिस्तर पर जाने दिया. मंजू न जाने कहा गयी हुई थी. मैंने दरवाजे को हल्का सा बंद किया और चबूतरे पर बैठ गया. कडवा पानी सीने में जलन पैदा कर रहा था पर अपना दर्द कहे भी तो किस से सुनने वाला कौन ही था . जिसे भी कहना चाहे वो हमसे ज्यादा दुखी था.

“अरे कबीर इधर क्यों बैठा है ” मंजू ने आते हुए पुछा.

मैं- बस ऐसे ही , मन थोडा विचलित था छोटी आई नहीं राखी बंधने

मंजू- माँ चुदाय न आई तो . जब उसे ही परवाह नहीं तू भी छोड़ इन झमेलों को . ये दुनिया वैसी नहीं कबीर जैसी हमने किताबो में पढ़ी थी . यहाँ हर कोई जानवर है , हर कोई शिकार है . जब तक उनको तेरी जरुरत थी तब तक ठीक था . माल माल सब ले गया चाचा तेरा , क्या छोड़ा है तेरे लिए जाके पूछ तो सही . तेरे पिता की मौत के बाद बीमे के सारे पैसे खा गया वो . कितना कुछ दबा क्या तब उन्हें तेरी याद ना आई अब क्या घंटा याद करेंगे वो.

मैं- बात रूपये पैसे की तो है ही नहीं

मंजू- तो फिर क्या बात है .गलती अकेले तेरी तो नहीं थी चाची भी तो बराबर की गुनेहगार थी .

मैं- सुन मैं हवेली जा रहा हूँ अन्दर निशा सोयी पड़ी है. दारू ज्यादा खींची है उसने थोडा देख लेना . मैं थोड़ी देर में आऊंगा

मंजू- अब इस वक्त क्या करेगा तू उधर जाके

मैं- बैग उधर है मेरा बस अभी गया और यूँ आया.

मैंने उसके गाल पर पप्पी ली और हवेली की तरफ चल दिया. बहनचोद गाँव के सरपंच से मिलना पड़ेगा हमारे घर वाले रस्ते पर साली एक भी लाइट नहीं थी .ऊपर से बारिश में कीचड वाला रास्ता , जैसे तैसे मैं दरवाजे तक पहुंचा और मैं चौंक गया दरवाजे को मैं बंद करके गया था जबकि अब उसका पल्ला खुला था , खैर मैं अन्दर गया तो लालटेन की रौशनी थी जो मेरे कमरे से आ रही थी


“तो तुम हो यहाँ ” मैंने जैसे ही कहा उसके चेहरे का रंग बदल गया................
Ek aur surprise milega?
 

Premkumar65

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#16

“कबीर तुम ” सकपकाते हुए बोली वो .

“मैं नहीं तो और कौन भाभी, जब मैंने इस कमरे को खोला था तभी मैं समझ गया था की वो सिर्फ और सिर्फ तुम ही हो जो मेरे बाद भी यहाँ आती हो ” मैंने कहा

भाभी- दूर होकर भी यहाँ से दूर नहीं हो पाई.

मैं- उफ्फ्फ ये बाते , क्या रखा है इन बातो में

भाभी- समझो तो बहुत कुछ न समझो तो कुछ भी नहीं

मैं- तुम्ही समझा दो फिर

भाभी- तुम सब जानते हो

मैं- तो बताओ फिर उस रात क्यों मारना चाहती थी मुझे

भाभी के आँखे फैलती चली गयी .

“सब पूछते है मेरे जख्मो के बारे में और झूठ कहता हूँ सबसे की पता नहीं कौन था वो पर हम दोनों जानते है . अब कातिल भी सामने है और शिकार भी यही है तो भाभी बड़ी शिद्दत से जानना चाहता हु मैं मेरी सबसे प्यारी मेरी दुश्मन कैसे हुई. ” मैंने लालटेन की लौ थोड़ी मंदी करते हुए कहा.

“मजबूर थी मैं कबीर , गोलिया चली तुझ पर थी पर छलनी मेरी छाती हुई थी ” भाभी बोली.

मैं- इस राज को राज रखने के लिए हर रोज झूठ बोलता हु मैं भाभी, और तुम कहती हो की मजबूर थी . ये बात बहुत हलकी है भाभी.

भाभी- और कोई रास्ता नहीं था कबीर, मुझे वार करना पड़ा कबीर . मैं दो राहे पर खड़ी थी एक तरफ तुम थे दूसरी तरफ मेरा संसार. चुनाव बहुत मुश्किल था , मैं हार गयी कबीर. मैं हार गयी.

मैं- अब तो सुख में हो न फिर

भाभी- तुम्हे लगता है की सुख मिलेगा हर पल बंदिश में जीती हु . सबसे नाता तोडना पड़ा यहाँ भी बहाने से आती हु की घर संभालना है तुम्हारे भाई ने अपना तो लिया मुझे पर माफ़ नहीं किया

मैं – वो तो है ही लोडू. अपनी कमिया छिपाने के लिए दुसरो को दोष देता है . छोड़ क्यों नहीं देती तुम उसको . अपनी जिन्दगी जी सकती हो तुम

भाभी- अगर मैंने माँ से वादा नहीं किया होता तो मैं ये कदम भी उठा लेती .

मैं – बहुत बढ़िया.

भाभी- तुम्हारी माफ़ी के लायक नहीं हु मैं .

मैं- माफ़ करने भी नहीं वाला मैं .मैं लौट आया हु , अब हर उस कारण की तलाश करूँगा जिसकी वजह से ये सब हुआ और जो भी उसके पीछे हुआ उसकी खाल उतारूंगा. जाकर भाई से भी कह देना की दुश्मन मेरा हो सकता है वो कोई ऐतराज नहीं पर औरतो के पल्लू में न छिपे.

“मुझे जाना चाहिए अब ” भाभी खड़ी हुई.

मैं- अभी मेरी बात ख़त्म नहीं हुई भाभी . ताऊ की मौत कैसे हुई बताओ मुझे

भाभी- किसी को कुछ नहीं पता चला. वैसे भी परिवार बिखरने के बाद सब अलग अलग ही रहते है आपस में संपर्क रखा नहीं किसी ने.

मैं- नंगे लोग , इस गुमान में की कौन कम नंगा है . मुझे नहीं लगता की ताऊ की मौत सामान्य थी मुझे तो अब ये भी नहीं लगता की माँ-पिताजी की मौत सामान्य थी .

भाभी- परिवार में ऐसा कोई नहीं जो अपने ही खून की बर्बादी करे

मैं- अच्छा जी, हमे तो मालूम ही नहीं .

भाभी उठ खड़ी हुई जाने के लिए मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.

“कहाँ न अभी नहीं , जिस चूत के लिए सीने पर गोलिया खाई उसे ऐसे तो नहीं जाने दूंगा मैं ”मैंने कहा और भाभी की कमर में हाथ डाल कर उसे सीने से लगा लिया.

भाभी- कबीर, पीछे छोड़ आई हूँ मैं इन रास्तो को

मैं- रास्ते कहीं नहीं जाते वो हमेशा वही रहते है जहाँ लोग उन्हें छोड़ जाते है . ऐसे तो नहीं जाने दूंगा.

भाभी- मान जा कबीर, मत शरू कर . अतीत के पन्ने मत पलट

मैं- जिया तो अतीत में ही था मैं अब तो बस सांसे चल रही है.

मैंने भाभी के नाजुक होंठो को अपने होंठो से जोड़ लिया. बरसो बाद इन होंठो का स्वाद महसूस किया था मैंने . कुछ देर चूमने के बाद मैंने भाभी को पलंग के किनारे पर झुका दिया.और उसकी साडी को ऊपर कर दिया. भाभी की गोल गांड जिसका दीवाना किसी ज़माने में हुआ करता था . भाभी की अदा थी की वो कच्छी नहीं पहनती थी . मैंने लंड पर थूक लगाया और भाभी की को थोडा सा और झुकाते हुए चुदाई शुरू कर दी.

“जाने दे कबीर, तेरा भाई इधर आ निकला तो गजब हो जायेगा ” कसमसाते हुए बोली वो.

मैं- वो भी देख लेगा

भाभी की चूत मेरे कुछ ही धक्को में गर्म हो गयी थी .

“पच पच ” की आवाज आ रही थी . भाभी की साँसे भारी होने लगी थी. बेशक किसी भी औरत को मजबूर करके चोदना मेरी फितरत नहीं थी पर मुझे उसे चोदना ही था . थोड़ी देर बाद मैंने उसे गोद में उठा लिया और उपर निचे करने लगा.

“कैसा लग रहा है ” मैंने पुछा

भाभी- बहुत बुरा , तूने उसूल तोड़ दिया कबीर. औरत को उसकी मर्जी के बिना जोर जबरदस्ती करना ठीक नहीं

मैं- उसूल अब बचे ही कहाँ भाभी, जब सब बर्बाद हो गया तो उसूलो का क्या ही करना

भाभी- राख में चिंगारी भड़काई है तूने .

भाभी की बाकी बात अधूरी रह गयी क्योंकि उसने मेरे कान पर काट लिया था चूत टाइट हो गयी थी उसकी हाँफते हुए झड रही थी वो . उसकी चूत ने लंड को इतना कस लिया था की मेरा वीर्य बह ही चला चूत में . मेरी गोद से उतर कर उसने साडी से ही चूत को साफ़ किया और बिना कुछ बोले वो बाहर चली गयी. मैंने लालटेन बुझा दी. मैं उसके पीछे आया वो बड़े दरवाजे तक आ पहुंची थी .

मैं- पिताजी के बीमे पर अधिकार क्यों नहीं जमाया तुम दोनों ने .

भाभी- पैसो का किसे मोह था कबीर.........


भाभी ने बिना मेरी तरफ देखे कहा और अँधेरे में खो गया. पैसे नहीं तो फिर क्या .. मैं वही खड़ा सोचता रहा ....
Uffff family me sabki le rakhi hai Kabir ne. Bahut erotic story hai.
 

Premkumar65

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#17

“पैसे नहीं तो क्या ” पिताजी के सामान को खंगालते हुए मैं बस ये ही सोचता रहा .पिताजी की तमाम किताबे उल्ट-पलट दी पर कुछ नहीं मिला. मैंने कल दिन में जंगल में ही खोजबीन का निर्णय लिया. सुबह सुबह ही मैं शिवाले पहुँच गया . ये कहानी शुरू ही नहीं होती अगर इस शिवाले से प्रेम नहीं होता. जब से होश संभाला था या तो ये था या मैं था ,मेरी भोर यहाँ जल चढाने से शुरू होती मेरी शाम यहाँ माथा टेकने से ख़तम होती, इसने मेरी ख़ुशी भी देखि थी इसने मेरा दर्द भी देखा था . शिवाले की चोखट पर बैठे मैं सामने उस सजे धजे घर को देख रहा था जहाँ दो दिन बाद शादी थी. परिवार के रंडी-रोने साले ख़त्म ही नहीं हो रहे थे , कल रात भाभी को तड़पते देखा पर बहन की लौड़ी वहां रहेगी नहीं. ये किस किस्म का प्यार था इन चुतिया लोगो का की ये साथ भी नहीं रह रहे थे , अलग भी ना हो सके.

सामने से आती निशा को जो देखा , दिल धड़क सा उठा. बरसो पहले उसे ऐसे ही तो देखा था . इसी चोखट पर एक हाथ में लोटा लिए और दुसरे हाथ से जुल्फों को संवारते हुए. सरकारी स्कूल में पढने वाले सब इसी शिवाले में जल चढ़ा कर आगे बढ़ते थे . इस चोखट पर बैठा था मैं . मुस्कुराते हुए निशा अन्दर गयी मैंने दिल को थाम लिया .

“क्या सोचने लगे कबीर ” मेरी पीठ से पीठ लगा कर बैठते हुए पुछा उसने .

मैं- बरसो पहले किसी को यूँ ही देखा था

निशा- देखा क्या था घूर ही रहे थे तुम

मैं- निहार रहा था मैं सरकार

निशा- बड़ी गहरी उतरी तुम्हारी निगाहे दिल में , फिर मैं , मैं नहीं रही .

मैं-कभी कभी सोचता हूँ जिन्दगी तो तभी जी ली मैंने अभी तो बस सांसे चल रही है .

निशा- तो फिर से जिए वो जिन्दगी

मैं- तू साथ है तो जी ही लेंगे.

निशा- कभी कभी मन करता है वो दिन लौट आये , साइकिल उठा कर चल दू उस पगडण्डी पर .

मैं- उसमे क्या है , तू कहे तो चलते है खेतो की तरफ

निशा- वहां से एक रास्ता मेरे घर की तरफ भी जाता है कबीर .

मैं- घर तो घर होता है सरकार, हम चाहे कहीं भी चले जाये हमारे सीनों में घर हमेशा ही रहेगा.

निशा- वक्त आगे बढ़ गया हम वहीँ पर रह गए.

मैं- खेतो पर जाना होगा मुझे, हो सके तो तू दोपहर का खाना लेकर उधर ही आ जाना.

निशा- वहां क्या करेगा तू

मैं- बताया था न तुझे खेतो की हालात ठीक कर रहा हूँ

निशा- ठीक है ,एक बार शहर जाउंगी. फिर खेतो पर आती हु.

थोडा वक्त और उस से बाते करने के बाद मैं खेतो पर आ गया. खेत तो बहाना थे मुझे जंगल में जाना था . बाड को पार करके एक बार फिर मैं झोपडी तक आ पहुंचा था.

“पैसा नहीं तो क्या , पैसा किसे चाहिए था ” इस सवाल ने मुझे पागल किये हुए था. जर, जोरू और जमीन इसके सिवा आखिर क्या हो सकता था . तीनो ही चीजे तो मोजूद थी इस घर की बर्बादी में फिर और क्या बचता था . घूमते घूमते मैं खान की तरफ आ गया , बड़े बड़े पत्थर बिखरे पड़े थे. ख़ामोशी पसरी पड़ी थी. बारिश के मौसम की वजह से उमस बनी पड़ी थी. थोडा सा रास्ता बनाते हुए मैं खान के मुहाने की तरफ चल दिया. पत्थरों और प्रकृति का अद्भुद संगम , झाड़ियो को हटाते हुए मैं मुहाने तक पहुंचा, गहराई के कारण बारिश का पानी जमा हो गया था , उसी के बीच से होते हुए मैं अन्दर की तरफ चला. मार्बल की खुशबु , कुछ सीलन और बरसात का असर . जैसे जैसे मैं अन्दर की तरफ जा रहा था अँधेरा बढ़ने लगा था. पत्थर काटने के औज़ार पड़े देखे मैंने. जब तक की सब कुछ दिखाई देना बंद नहीं हो गया मैं चलता रहा .

“टप टप ” कही से पानी रिस रहा था . खान बहुत ही शांत थी , अक्सर ऐसी जगहों पर शराबी , जुआरी लोग अपना अड्डा बना लेते है पर ये धारणा जम नहीं रही थी जंगल के इस हिस्से में लोगो की आवाजाही ना के बराबर थी . ना ही जंगली जानवरों ने इधर आशियाँ बनाया था जबकि जानवर लोगो को और क्या ही चाहिए. खैर, कब तक रहता उधर , बाहर तो आना ही था.

खेतो पर आकर सोचा की थोड़ी और सफाई कर ली जाए. एक बार फिर गोडी लगाने का काम शुरू कर दिया. ना लायक परिवार की वजह से इतनी उपजाऊ जमीन की माँ चुद गयी थी. दिन ढलने को था निशा शायद भूल ही गयी थी. मैंने ट्रेक्टर छोड़ा और नहाने का सोचा . टीनो के निचे मैंने चारपाई पर अपने कपडे रखे और चला ही था की तभी मेरे पैर में कुछ चुभा. गाली देते हुए मैंने पैर को ऊपर करके देखा तो वो काँटा तो हरगिज नहीं था . बेख्याली में मैंने उस टुकड़े को फेंका , नहा ही रहा था की निशा आ गयी.

“सॉरी, यार. थोडा देर हो गयी, शहर में ज्यादा समय लग गया फिर सोचा तेरी पसंद का कुछ बना लू ” उसने कहा

मैं- तेरी पसंद तो सिर्फ तुम हो सरकार.

निशा- हर टाइम आशिकी ठीक नहीं

मैं- ला परोस दे फिर.

निशा- देख तो ले पहले क्या लाई हु

मैं- दाल चूरमा ही लाइ होगी

निशा- तुझे ना जाने कैसे मालूम हो जाता है हमेशा

मैं- दुनिया में बस दो लोगो के हाथ का चूरमा पसंद रहा है एक तेरा और एक माँ का .

माँ का जिक्र होते ही दिल ने एक आह भरी.

“खेतो का तो हाल बुरा है ” उसने दाल देते हुए कहा.

मैं- इन्ही खेतो में तेरे संग वक्त बिताया था तब क्या था अब क्या हो गया है.

निशा- कोई ना, फिर करेंगे मेहनत .

स्कूल टाइम में निशा इसी रस्ते से आती थी पढने के लिए . कभी खेतो पर मिलते कभी उस चबूतरे पर बैठते. चूरमा अक्सर ही लाती थी वो मेरे लिए.

“भाभी मिली थी आज मुझे ” निशा ने कहा

मैं- क्या बोली

निशा- हाल चाल पूछ रही थी .

मैं- कुछ और नहीं कहा

निशा- पुछा न कबीर कब तक रुकेगा गाँव में

मैं- तुमने क्या कहा

निशा- मैंने कहा पता नहीं उसकी मर्जी है रुके तो रुके ना भी रुके.

मैं- तुम्हे कहना चाहिए था की मिल ले वो मुझसे

निशा- कहा न मैंने. फिर वो टालने लगी. भाभी के हाव भाव अजीब से लगे मुझे

मैं- कैसे

निशा- कबीर, मैं तुम्हारे परिवार में हर किसी को जानती हु. वो भाभी ही थी जिनको सबसे पहले अपने इश्क के बारे में मालूम हुआ . भाभी के व्यवहार में नकलीपन सा लगा मुझे. खोखली बाते

मैं- वक्त बदल गया है

निशा- माना , पर इतना भी नहीं बदला की लोग आँखे चुरा ले कुछ तो हुआ है परिवार में जो मैं नहीं जानती . बताओ कबीर .

मैं- मुझे क्या मालूम

निशा- कबीर पुलिसवाली हु मैं. आदमी यु पहचान लेती हु. और ये तो अपने परिवार की बात है . लोग अक्सर अलग होते है परिवारों में , मैंने बहुत लोगो को देखा है परिवार में लड़ते-झगड़ते हुए बंटवारे के लिए. हिस्सों के लिए पर ये तुम्हारा कैसा परिवार है जो अलग हो गया, एक दुसरे को देखना तक नहीं चाहते और मजे की बात ये है की किसी को कोई लालच नहीं है.


निशा ने मेरी दुखती रग पकड़ ली थी और मेरे पास कोई जवाब नहीं था.........
woww what a interesting story. Suru karne ke baad rukne ka man hi nahin kar raha hai.
 

Tiger 786

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#20

भीड़ जमा थी , चीखपुकार मची थी , भीड़ हटाते हुए मैं आगे गया और मैंने अपनी आँखे बंद कर ली. सामने चाचा की लाश पड़ी थी. बस यही नहीं देखना था. जैसे ही चाची की नजर मुझ पर पड़ी वो चिल्ला पड़ी ,”तूने , कबीर तूने मारा है मेरे पति को ” चाची ने मेरा गला पकड़ लिया.

मैंने उसे अपने से दूर किया.

“होश में रह कर बात कर चाची , तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझ पर आरोप लगाने की ” मैंने गुस्से से कहा

चाची- तूने ही मेरी बेटी की शादी में तमाशा किया तू ही है वो जिसे हमारी खुशिया रास नहीं . गाँव वालो ये ही है कातिल इसी ने मेरा पति मारा है मुझे इंसाफ चाहिए.

मैं- खुशिया, बहन की लौड़ी . अपने करम देख . अरे भूल गयी तू वो मैं ही था जिसने तेरे पाप अपने सर लिए. मेरा मुह मत खुलवा , मैंने लिहाज छोड़ा न तो बहुत कुछ याद आ जायेगा मुझे भी और तुझे भी . तेरा पति अपने कर्मो की मौत मरा है . और गाँव वाले क्या करेंगे सारे गाँव को पता है तुम्हारी औकात . तेरे से जो हो वो तू कर ले , जहाँ जाना है जा , किसी भी थाने -तहसील में जा . मैंने मारा ही नहीं इस चूतिये को तो मुझे क्या परवाह .

गुस्से से मैंने थूका और वहां से चल दिया. पर आने वाले कठिन समय का अंदेशा मुझे हो गया था चाची ने जिस प्रकार आरोप लगाया था , गाँव वालो ने शादी में तमाशा देखा ही था तो सबके मन में शक का बीज उपज जाना ही था . मुझे जरा भी दुःख नहीं था चाचा के मरने का . हवेली आकर मैंने पानी पिया और गहरी सोच में डूब गया . परिवार का एक स्तम्भ और डूब गया था , तीन भाई तीनो अब दुनिया से रुखसत हो चुके थे .

शाम होते होते पुलिस आ पहुंची थी मैं जानता था की शिकायत तो देगी ही वो . दरोगा को मैंने अपनी तरफ से संतुष्ट करने की पूरी कोशिश की पर चूँकि मर्डर का मामला था तो वो भी अहतियात बरत रहा था

“दरोगा , चाहे कितनी बार पूछ लो मेरा जवाब यही रहेगा की पूरी रात मैं हवेली में ही था . ”मैंने जोर देते हुए कहा

दरोगा- गाँव में बहुत लोगो ने बताया की तुम्हारी दुश्मनी थी तुम्हारे चाचा के साथ , उसकी बेटी की शादी में भी तुमने हंगामा किया

मैं- दुश्मनी , बरसो पहले परिवार ख़तम हो गया था दरोगा साहब . परिवार के इतिहास के बारे में गाँव वालो से आपने पूछताछ कर ही ली होगी ऐसा मुझे यकीं है .फिर भी आप अपनी तहकीकात कीजिये , यदि आपको मेरे खिलाफ कोई सबूत मिले तो गिरफ्तार कर लेना. लाश आपने देख ली ही होगी. पोस्ट मार्टम रिपोर्ट भी आएगी

मेरी बातो से दरोगा के चेहरे पर असमंजस के भाव आ गए.

दरोगा- तुम्हारी बाते जायज है पर फिर भी आरोप तुम पर ही है . कोई ऐसा सबूत दे सकते हो जो ये पुष्टि करे की तुम तमाम रात हवेली में ही थे.

“मैं हूँ गवाह की कबीर पूरी रात हवेली में ही था ” मंजू ने आते हुए कहा और मैंने माथा पीट लिया

“और आप कौन मोहतरमा ” दरोगा ने सवाल किया

मंजू- मैं मंजू, इसी गाँव की हूँ और आपका वो सबूत जो कहता है की कबीर पूरी रात हवेली में था क्योंकि उसके साथ मैं थी .

दरोगा की त्योरिया चढ़ गयी पर वो कुछ बोल नहीं पाया .क्योंकि ठीक तभी हवेली के दर पर एक गाडी आकर रुकी और उसमे से जो उतरा मैं कभी सोच भी नहीं सकता था की वो यहाँ आयेगा.

“ठाकुर साहब” दरोगा ने खड़े होते हुए हाथ जोड़ लिए

निशा के पिताजी हवेली आ पहुंचे थे .

“दरोगा, कबीर का सेठ की मौत में कोई हाथ नहीं है ऐसा हम आपको आश्वस्त करते है ” उन्होंने कहा

दरोगा- जी ठाकुर साहब पर इसकी चाची ने शिकायत इसके नाम की है तो पूछताछ करनी ही होगी.

“बेशक, तुम अपनी कार्यवाही करो , यदि जांच में ये दोषी निकले तो कानून अनुसार अपना कार्य करना पर गिरफ़्तारी नहीं होगी ” ठाकुर ने कहा

मैं हैरान था की मुझसे नफरत करने वाला ये इन्सान मेरे पक्ष में इतना मजबूती से खड़ा था .

दरोगा- जैसा आपका आदेश पर ये गाँव से बाहर नहीं जायेगा और जब भी जरुरत पड़ेगी तो इसे थाने आना हो गा.

ठाकुर- कोई दिक्कत नहीं.

दरोगा – मंजू जी , आपको लिखित में बयान देना होगा.

मंजू ने हाँ कहा और वो दोनों चले गये. रह गए हम दोनों और हमारे बीच का सन्नाटा. पर किसी न किसी को तो बर्फ पिघलाने की कोशिस करनी ही थी .

मैं- आपको इस मामले में नहीं पड़ना था .

ठाकुर- मुझे विश्वास है तुम पर

मैं- सुन कर अच्छा लगा.

ठाकुर- कैसी है वो

मैं- कौन

ठाकुर- हम दोनों बहुत अच्छी तरह से जानते है की मैं क्या कह रहा हूँ और तुम क्या सुन रहे हो .

मैं- - आपके आशीर्वाद के बिना कैसी हो सकती है वो . आज वो इतनी बड़ी हो गयी है की जमाना उसके सामने झुकता है और एक वो है की अपने बाप के मुह से बेटी सुनने को तरसती है .

“तो फिर क्यों गयी थी बाप को छोड़ कर ” ठाकुर ने कहा

मैं- कभी नहीं गयी वो आपको छोड़ कर.

ठाकुर- तुमने मुझसे मेरी आन छीन ली कबीर.

मैं- इस ज़माने की तरह आप भी उसी गुमान में हो. क्या माँ ने आपको बताया नहीं

ठाकुर- तो फिर भागे क्यों

मैं- कोई नहीं भागा, मेरी परिस्तिथिया अलग थी और निशा ने घर छोड़ा नौकरी के लिए. बस दोनों काम साथ हुए इसलिए सबको लगता है की हमने भाग कर शादी कर ली.

ठाकुर- सच कहते हो

मैं- हाथ थामा है निशा का , मान है वो मेरे मन का उसे बदनाम कैसे कर सकता हूँ, भाग कर ही शादी करनी होती तो कौन रोक सकता था हमें, ना तब ना आज पर उसकी भी जिद है की विदा होगी तो अपने आँगन से ही. बाप की इज्जत का ख्याल था उसे तभी वनवास का चुनाव किया उसने. हम आज भी साथ होकर अलग है ठाकुर साहब पर हमें उम्मीद है की एक दिन हमें हमारे हिस्से का सुख जरुर मिलेगा.

ठाकुर- मैं अपनी बेटी को देखना चाहता हु

मैं- आपकी बेटी है जब चाहे मिलिए एक पिता को बेटी से मिलने से कौन रोक सकता है .

ठाकुर- गाँव समाज में प्रेम का कोई महत्त्व नहीं

मैं- मेरे प्रेम पर तो थोड़ी देर पहले ही आपने स्वीक्रति प्रदान कर दी है

ठाकुर के चेहरे पर छिपी मुस्कुराहट को मैंने पहचान लिया.

“दरोगा बहुत इमानदार है , तह तक जायेगा मामले की वो ” बोले वो

मैं- अगर मैं गलत नहीं तो फिर मुझे भय नहीं


ठाकुर ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और बोले- उसे ले आओ कबीर, उसे ले आओ..............
Awesome update
 

Tiger 786

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#21

“वो जरुर आएगी , एक पिता बुलाये और बेटी ना आये ऐसा हो नहीं सकता ” मैंने कहा

ठाकुर- बस एक बार उसे देखने की ख्वाहिश है, अभी जाना होगा पर तुम ध्यान रखना , कोशिश करना इस इल्जाम को दूर करने की.

मैंने हाँ में सर हिलाया एक दो नसीहत और देने के पश्चात निशा के पिता चले गए. रिश्तेदार इकठ्ठा होने लगे थे. अजीब सी हालत हो गयी थी , आदमी गुस्से में चाहे जो कह दे पर परिवार में मौत को सहना आसान तो नहीं होता. शिवाले पर बैठा मैं सोच रहा था की किसी ज़माने के क्या ही रुतबा था हमारे परिवार का और अब ऐसी भद्द पिट रही थी की कुछ बचा ही नहीं था . गाँव के कुछ लोग हॉस्पिटल गए थे पोस्ट मार्टम के लिए , अब वहां पता नहीं कितना समय लगता तब तक अंतिम संस्कार भी नहीं हो सकता था . पर एक बात अच्छी थी की मंजू लौट आई थी .

“कबीर,” मेरे पास बैठते हुए बोली वो.

मैं- तुझे बीच में पड़ने की क्या जरुरत थी

मंजू- बावला है क्या तू , अगर मैं ब्यान नहीं देती तो थानेदार धर लेता तुझे, मामला गरम है न जाने क्या से क्या हो जाता.

मैं- फिर भी तुझे झूट नहीं बोलना था

मंजू- मुझे यकीन है की इसमें तेरा कुछ लेना देना नहीं है.

मैं- तेरी कसम मैं तो सोया पड़ा था तूने ही तो उठाया न मुझे.

मंजु- कबीर एक बात तो गाँव के सबसे चूतिया से चूतिया की भी समझ में आ गयी है की तुम्हारे परिवार का दुश्मन गाँव में ही है, तू नहीं था तो सब शांत था जैसे ही तू आया ये काण्ड हो गया. कोई तो है जो हद्द खुन्नस खाए हुए है तुझसे.

मैं- मालूम कर लूँगा

मंजू- अभी तू शांत रहना, लोग आयेंगे कोई कुछ बोलेगा कोई कुछ किसी को सफाई नहीं देनी.

मैं-जी घुट रहा है यहाँ थोडा बाहर चले क्या

मंजू- घर चल फिर

मैं – नहीं थोडा बाहर की तरफ चलते है , ताज़ी हवा मिलेगी तो अच्छा लगेगा.

मंजू- उसके लिए भी तुझे घर चलना ही होगा. मुझे कपडे बदलने है

हम दोनों मंजू के घर आ गए . मैने हाथ मुह धोये , मंजू कपडे बदलने लगी.

मैं- एक काम कर चाय बना ले , उधर ही कही बैठ कर पियेंगे

मंजू- ये बढ़िया है .

मैंने जीप स्टार्ट की और जल्दी ही हम खेतो के पास उसी पेड़ के निचे बैठे थे .

“कबीर, क्या रंडी-रोना है तेरे कुनबे का , मैं जानती हु तू कुछ बाते छिपा लेता है मुझसे पर तू चाहे तो मुझसे अपने मन की बात कर सकता है , और एक बात ये की चाची की इज्जत नहीं उछालनी थी तुझे गाँव के बीच ” बोली वो

मैं- आज तक उसकी ही इज्जत बचाते आया हूँ मैं, पर उसे कद्र ही नहीं . उसको बचाने के लिए मैं सब से ख़राब हुआ चाचा से भी , यहाँ तक तू भी यही जानती है की मैं चोदता था उसे पर ये सच नहीं है

मंजू कसम से, फिर तू क्यों जलील हुआ ऐसी क्या वजह थी

मैं- वो वजह जा चुकी है अब मंजू पर तू अजीज है मुझे तो आज मैं तुझे वो सच बता ही देता हूँ चाची में अवैध सम्बन्ध मुझसे नहीं बल्कि पिताजी से थे .

जैसे ही मैंने ये बात कही मंजू के हाथ से बिस्कुट गिर गया.

मंजू- शर्म कर ले कबीर.

मैं- जिज्ञासा है तो फिर सच सुनने की क्षमता भी रख मंजू. जीजा साली का प्रेम-प्रसंग था कब से मैं ये तो नहीं जानता था पर अगर उस दिन तुड़े के कमरे में मैंने दोनों की चुदाई नहीं देखी होती तो मियन भी यकीं नहीं करता .

मंजू- यकीन नहीं होता की ताऊ जी ऐसा कर सकते है

मैं- ये दुनिया उतनी भी शरीफ नहीं जितना लोग समझते है

मंजू- पर फिर तूने अपने ऊपर क्यों लिया वो इल्जाम

मैं- मैं झूठ नहीं कहूँगा, जब से मैने चाची को देखा था मैं चोदना चाहता था उसे , मैंने प्रयास भी किया था पर उसने ऐसी बात बोल दी की फिर मुझे दो में से एक चुनाव करना था और मैंने उसकी इच्छा का मान रखा.

मंजू- क्या

मैं- चाची भी समझ रही थी की मेरे मन में क्या था उसके प्रति और फिर एक शाम ऐसी आई जब हम दोनों घर पर अकेले थे , चाची उस रात मेरे पास आई और उसने कहा कबीर तेरे मन में क्या है

“मेरे मन में क्या होगा चाची ” मैंने कहा

चाची- कबीर, हम दोनों जानते है की क्या बात है , मुझे भली भाँती मालूम है की तुम्हे पूर्ण जानकारी है मेरे गलत रिश्ते के बारे में

मैंने सर झुका लिया.

चाची- कबीर तुम्हारी उम्र में ये स्वाभाविक है की तुम मोह करो इस जिस्म का , और मेरे हालात ऐसे है की मुझे तुम्हारी इच्छा पूरी करनी होगी. पर कबीर तुमने इस जिस्म को पा भी लिया थो तुम कुछ नहीं पा सकोगे. जेठ जी और मैं प्रेम करते है एक दुसरे से , आज तो नहीं पर एक दिन तुम जरुर इसे समझ पाओगे. मैं तुम्हे अपना बेटा मानती हु , बेशक तुम चाहो तो मुझे इस बिस्तर पर लिटा सकते हो पर उस से केवल तुम्हारी भूख शांत होगी और मेरा मन घायल . औरत को कभी हासिल नहीं किया जाता कबीर, औरत के मन को जीता जाता है और इस जन्म में मेरा मन कहीं और है . तुम्हे चुनाव का पूर्ण अधिकार है , मैं कुण्डी नहीं लगा रही , तुम्हारा जो भी निर्णय मुझे मंजूर है , मेरी गरह्स्थी की लाज तुम्हारे पास छोड़ कर जा रही हु , आगे तुम जानो



“मंजू , उस रात मेरे पास मौका था पर मेरी हिम्मत नहीं हुई. मन का चोर हार गया. मैं नहीं जा पाया उसके कमरे में ” मैंने कहा

मंजू- फिर वो तमाशा क्यों हुआ

मैं- इस घर की गिरती नींव को बचाने के लिए. चाचा ने जीजा-साली को देख लिया था पर वो गलत समझ गया उसे लगा की मैं हु पर थे पिताजी ने हुबहू दो शर्ट खरीदी थी , वो ही पहन कर मैं दो रात पहले चाचा के साथ एक शादी में गया था , चाचा ने पिताजी की पीठ देखी और वो मुझे समझ बैठा, चूतिये को मैंने समझाने की भरपूर कोशिश की पर उसने तमाशा कर दिया. मारने लगा चाची को अब वो इस से पहले की पिताजी का नाम ले देती , अजीब सी बदनामी को बचाने के लिए मैंने विष का प्याला उठा लिया और फिर जो भी हुआ वो तो तू जानती ही है .

मंजू- फिर भी वो तुझी को कातिल बता रही है , भूल गयी कम से कम उसे तो तेरा लिहाज करना था .

मैं- यही तो समझ नहीं आ रहा की ऐसा क्या हुआ जो वो इतना बदल गयी. ................
Kuch to raaj hai jo chachi kabir pe aroop laga rahi hai
Lazwaab shandar update
 

dhparikh

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#21

“वो जरुर आएगी , एक पिता बुलाये और बेटी ना आये ऐसा हो नहीं सकता ” मैंने कहा

ठाकुर- बस एक बार उसे देखने की ख्वाहिश है, अभी जाना होगा पर तुम ध्यान रखना , कोशिश करना इस इल्जाम को दूर करने की.

मैंने हाँ में सर हिलाया एक दो नसीहत और देने के पश्चात निशा के पिता चले गए. रिश्तेदार इकठ्ठा होने लगे थे. अजीब सी हालत हो गयी थी , आदमी गुस्से में चाहे जो कह दे पर परिवार में मौत को सहना आसान तो नहीं होता. शिवाले पर बैठा मैं सोच रहा था की किसी ज़माने के क्या ही रुतबा था हमारे परिवार का और अब ऐसी भद्द पिट रही थी की कुछ बचा ही नहीं था . गाँव के कुछ लोग हॉस्पिटल गए थे पोस्ट मार्टम के लिए , अब वहां पता नहीं कितना समय लगता तब तक अंतिम संस्कार भी नहीं हो सकता था . पर एक बात अच्छी थी की मंजू लौट आई थी .

“कबीर,” मेरे पास बैठते हुए बोली वो.

मैं- तुझे बीच में पड़ने की क्या जरुरत थी

मंजू- बावला है क्या तू , अगर मैं ब्यान नहीं देती तो थानेदार धर लेता तुझे, मामला गरम है न जाने क्या से क्या हो जाता.

मैं- फिर भी तुझे झूट नहीं बोलना था

मंजू- मुझे यकीन है की इसमें तेरा कुछ लेना देना नहीं है.

मैं- तेरी कसम मैं तो सोया पड़ा था तूने ही तो उठाया न मुझे.

मंजु- कबीर एक बात तो गाँव के सबसे चूतिया से चूतिया की भी समझ में आ गयी है की तुम्हारे परिवार का दुश्मन गाँव में ही है, तू नहीं था तो सब शांत था जैसे ही तू आया ये काण्ड हो गया. कोई तो है जो हद्द खुन्नस खाए हुए है तुझसे.

मैं- मालूम कर लूँगा

मंजू- अभी तू शांत रहना, लोग आयेंगे कोई कुछ बोलेगा कोई कुछ किसी को सफाई नहीं देनी.

मैं-जी घुट रहा है यहाँ थोडा बाहर चले क्या

मंजू- घर चल फिर

मैं – नहीं थोडा बाहर की तरफ चलते है , ताज़ी हवा मिलेगी तो अच्छा लगेगा.

मंजू- उसके लिए भी तुझे घर चलना ही होगा. मुझे कपडे बदलने है

हम दोनों मंजू के घर आ गए . मैने हाथ मुह धोये , मंजू कपडे बदलने लगी.

मैं- एक काम कर चाय बना ले , उधर ही कही बैठ कर पियेंगे

मंजू- ये बढ़िया है .

मैंने जीप स्टार्ट की और जल्दी ही हम खेतो के पास उसी पेड़ के निचे बैठे थे .

“कबीर, क्या रंडी-रोना है तेरे कुनबे का , मैं जानती हु तू कुछ बाते छिपा लेता है मुझसे पर तू चाहे तो मुझसे अपने मन की बात कर सकता है , और एक बात ये की चाची की इज्जत नहीं उछालनी थी तुझे गाँव के बीच ” बोली वो

मैं- आज तक उसकी ही इज्जत बचाते आया हूँ मैं, पर उसे कद्र ही नहीं . उसको बचाने के लिए मैं सब से ख़राब हुआ चाचा से भी , यहाँ तक तू भी यही जानती है की मैं चोदता था उसे पर ये सच नहीं है

मंजू कसम से, फिर तू क्यों जलील हुआ ऐसी क्या वजह थी

मैं- वो वजह जा चुकी है अब मंजू पर तू अजीज है मुझे तो आज मैं तुझे वो सच बता ही देता हूँ चाची में अवैध सम्बन्ध मुझसे नहीं बल्कि पिताजी से थे .

जैसे ही मैंने ये बात कही मंजू के हाथ से बिस्कुट गिर गया.

मंजू- शर्म कर ले कबीर.

मैं- जिज्ञासा है तो फिर सच सुनने की क्षमता भी रख मंजू. जीजा साली का प्रेम-प्रसंग था कब से मैं ये तो नहीं जानता था पर अगर उस दिन तुड़े के कमरे में मैंने दोनों की चुदाई नहीं देखी होती तो मियन भी यकीं नहीं करता .

मंजू- यकीन नहीं होता की ताऊ जी ऐसा कर सकते है

मैं- ये दुनिया उतनी भी शरीफ नहीं जितना लोग समझते है

मंजू- पर फिर तूने अपने ऊपर क्यों लिया वो इल्जाम

मैं- मैं झूठ नहीं कहूँगा, जब से मैने चाची को देखा था मैं चोदना चाहता था उसे , मैंने प्रयास भी किया था पर उसने ऐसी बात बोल दी की फिर मुझे दो में से एक चुनाव करना था और मैंने उसकी इच्छा का मान रखा.

मंजू- क्या

मैं- चाची भी समझ रही थी की मेरे मन में क्या था उसके प्रति और फिर एक शाम ऐसी आई जब हम दोनों घर पर अकेले थे , चाची उस रात मेरे पास आई और उसने कहा कबीर तेरे मन में क्या है

“मेरे मन में क्या होगा चाची ” मैंने कहा

चाची- कबीर, हम दोनों जानते है की क्या बात है , मुझे भली भाँती मालूम है की तुम्हे पूर्ण जानकारी है मेरे गलत रिश्ते के बारे में

मैंने सर झुका लिया.

चाची- कबीर तुम्हारी उम्र में ये स्वाभाविक है की तुम मोह करो इस जिस्म का , और मेरे हालात ऐसे है की मुझे तुम्हारी इच्छा पूरी करनी होगी. पर कबीर तुमने इस जिस्म को पा भी लिया थो तुम कुछ नहीं पा सकोगे. जेठ जी और मैं प्रेम करते है एक दुसरे से , आज तो नहीं पर एक दिन तुम जरुर इसे समझ पाओगे. मैं तुम्हे अपना बेटा मानती हु , बेशक तुम चाहो तो मुझे इस बिस्तर पर लिटा सकते हो पर उस से केवल तुम्हारी भूख शांत होगी और मेरा मन घायल . औरत को कभी हासिल नहीं किया जाता कबीर, औरत के मन को जीता जाता है और इस जन्म में मेरा मन कहीं और है . तुम्हे चुनाव का पूर्ण अधिकार है , मैं कुण्डी नहीं लगा रही , तुम्हारा जो भी निर्णय मुझे मंजूर है , मेरी गरह्स्थी की लाज तुम्हारे पास छोड़ कर जा रही हु , आगे तुम जानो



“मंजू , उस रात मेरे पास मौका था पर मेरी हिम्मत नहीं हुई. मन का चोर हार गया. मैं नहीं जा पाया उसके कमरे में ” मैंने कहा

मंजू- फिर वो तमाशा क्यों हुआ

मैं- इस घर की गिरती नींव को बचाने के लिए. चाचा ने जीजा-साली को देख लिया था पर वो गलत समझ गया उसे लगा की मैं हु पर थे पिताजी ने हुबहू दो शर्ट खरीदी थी , वो ही पहन कर मैं दो रात पहले चाचा के साथ एक शादी में गया था , चाचा ने पिताजी की पीठ देखी और वो मुझे समझ बैठा, चूतिये को मैंने समझाने की भरपूर कोशिश की पर उसने तमाशा कर दिया. मारने लगा चाची को अब वो इस से पहले की पिताजी का नाम ले देती , अजीब सी बदनामी को बचाने के लिए मैंने विष का प्याला उठा लिया और फिर जो भी हुआ वो तो तू जानती ही है .

मंजू- फिर भी वो तुझी को कातिल बता रही है , भूल गयी कम से कम उसे तो तेरा लिहाज करना था .

मैं- यही तो समझ नहीं आ रहा की ऐसा क्या हुआ जो वो इतना बदल गयी. ................
Nice update....
 

Ajju Landwalia

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#21

“वो जरुर आएगी , एक पिता बुलाये और बेटी ना आये ऐसा हो नहीं सकता ” मैंने कहा

ठाकुर- बस एक बार उसे देखने की ख्वाहिश है, अभी जाना होगा पर तुम ध्यान रखना , कोशिश करना इस इल्जाम को दूर करने की.

मैंने हाँ में सर हिलाया एक दो नसीहत और देने के पश्चात निशा के पिता चले गए. रिश्तेदार इकठ्ठा होने लगे थे. अजीब सी हालत हो गयी थी , आदमी गुस्से में चाहे जो कह दे पर परिवार में मौत को सहना आसान तो नहीं होता. शिवाले पर बैठा मैं सोच रहा था की किसी ज़माने के क्या ही रुतबा था हमारे परिवार का और अब ऐसी भद्द पिट रही थी की कुछ बचा ही नहीं था . गाँव के कुछ लोग हॉस्पिटल गए थे पोस्ट मार्टम के लिए , अब वहां पता नहीं कितना समय लगता तब तक अंतिम संस्कार भी नहीं हो सकता था . पर एक बात अच्छी थी की मंजू लौट आई थी .

“कबीर,” मेरे पास बैठते हुए बोली वो.

मैं- तुझे बीच में पड़ने की क्या जरुरत थी

मंजू- बावला है क्या तू , अगर मैं ब्यान नहीं देती तो थानेदार धर लेता तुझे, मामला गरम है न जाने क्या से क्या हो जाता.

मैं- फिर भी तुझे झूट नहीं बोलना था

मंजू- मुझे यकीन है की इसमें तेरा कुछ लेना देना नहीं है.

मैं- तेरी कसम मैं तो सोया पड़ा था तूने ही तो उठाया न मुझे.

मंजु- कबीर एक बात तो गाँव के सबसे चूतिया से चूतिया की भी समझ में आ गयी है की तुम्हारे परिवार का दुश्मन गाँव में ही है, तू नहीं था तो सब शांत था जैसे ही तू आया ये काण्ड हो गया. कोई तो है जो हद्द खुन्नस खाए हुए है तुझसे.

मैं- मालूम कर लूँगा

मंजू- अभी तू शांत रहना, लोग आयेंगे कोई कुछ बोलेगा कोई कुछ किसी को सफाई नहीं देनी.

मैं-जी घुट रहा है यहाँ थोडा बाहर चले क्या

मंजू- घर चल फिर

मैं – नहीं थोडा बाहर की तरफ चलते है , ताज़ी हवा मिलेगी तो अच्छा लगेगा.

मंजू- उसके लिए भी तुझे घर चलना ही होगा. मुझे कपडे बदलने है

हम दोनों मंजू के घर आ गए . मैने हाथ मुह धोये , मंजू कपडे बदलने लगी.

मैं- एक काम कर चाय बना ले , उधर ही कही बैठ कर पियेंगे

मंजू- ये बढ़िया है .

मैंने जीप स्टार्ट की और जल्दी ही हम खेतो के पास उसी पेड़ के निचे बैठे थे .

“कबीर, क्या रंडी-रोना है तेरे कुनबे का , मैं जानती हु तू कुछ बाते छिपा लेता है मुझसे पर तू चाहे तो मुझसे अपने मन की बात कर सकता है , और एक बात ये की चाची की इज्जत नहीं उछालनी थी तुझे गाँव के बीच ” बोली वो

मैं- आज तक उसकी ही इज्जत बचाते आया हूँ मैं, पर उसे कद्र ही नहीं . उसको बचाने के लिए मैं सब से ख़राब हुआ चाचा से भी , यहाँ तक तू भी यही जानती है की मैं चोदता था उसे पर ये सच नहीं है

मंजू कसम से, फिर तू क्यों जलील हुआ ऐसी क्या वजह थी

मैं- वो वजह जा चुकी है अब मंजू पर तू अजीज है मुझे तो आज मैं तुझे वो सच बता ही देता हूँ चाची में अवैध सम्बन्ध मुझसे नहीं बल्कि पिताजी से थे .

जैसे ही मैंने ये बात कही मंजू के हाथ से बिस्कुट गिर गया.

मंजू- शर्म कर ले कबीर.

मैं- जिज्ञासा है तो फिर सच सुनने की क्षमता भी रख मंजू. जीजा साली का प्रेम-प्रसंग था कब से मैं ये तो नहीं जानता था पर अगर उस दिन तुड़े के कमरे में मैंने दोनों की चुदाई नहीं देखी होती तो मियन भी यकीं नहीं करता .

मंजू- यकीन नहीं होता की ताऊ जी ऐसा कर सकते है

मैं- ये दुनिया उतनी भी शरीफ नहीं जितना लोग समझते है

मंजू- पर फिर तूने अपने ऊपर क्यों लिया वो इल्जाम

मैं- मैं झूठ नहीं कहूँगा, जब से मैने चाची को देखा था मैं चोदना चाहता था उसे , मैंने प्रयास भी किया था पर उसने ऐसी बात बोल दी की फिर मुझे दो में से एक चुनाव करना था और मैंने उसकी इच्छा का मान रखा.

मंजू- क्या

मैं- चाची भी समझ रही थी की मेरे मन में क्या था उसके प्रति और फिर एक शाम ऐसी आई जब हम दोनों घर पर अकेले थे , चाची उस रात मेरे पास आई और उसने कहा कबीर तेरे मन में क्या है

“मेरे मन में क्या होगा चाची ” मैंने कहा

चाची- कबीर, हम दोनों जानते है की क्या बात है , मुझे भली भाँती मालूम है की तुम्हे पूर्ण जानकारी है मेरे गलत रिश्ते के बारे में

मैंने सर झुका लिया.

चाची- कबीर तुम्हारी उम्र में ये स्वाभाविक है की तुम मोह करो इस जिस्म का , और मेरे हालात ऐसे है की मुझे तुम्हारी इच्छा पूरी करनी होगी. पर कबीर तुमने इस जिस्म को पा भी लिया थो तुम कुछ नहीं पा सकोगे. जेठ जी और मैं प्रेम करते है एक दुसरे से , आज तो नहीं पर एक दिन तुम जरुर इसे समझ पाओगे. मैं तुम्हे अपना बेटा मानती हु , बेशक तुम चाहो तो मुझे इस बिस्तर पर लिटा सकते हो पर उस से केवल तुम्हारी भूख शांत होगी और मेरा मन घायल . औरत को कभी हासिल नहीं किया जाता कबीर, औरत के मन को जीता जाता है और इस जन्म में मेरा मन कहीं और है . तुम्हे चुनाव का पूर्ण अधिकार है , मैं कुण्डी नहीं लगा रही , तुम्हारा जो भी निर्णय मुझे मंजूर है , मेरी गरह्स्थी की लाज तुम्हारे पास छोड़ कर जा रही हु , आगे तुम जानो



“मंजू , उस रात मेरे पास मौका था पर मेरी हिम्मत नहीं हुई. मन का चोर हार गया. मैं नहीं जा पाया उसके कमरे में ” मैंने कहा

मंजू- फिर वो तमाशा क्यों हुआ

मैं- इस घर की गिरती नींव को बचाने के लिए. चाचा ने जीजा-साली को देख लिया था पर वो गलत समझ गया उसे लगा की मैं हु पर थे पिताजी ने हुबहू दो शर्ट खरीदी थी , वो ही पहन कर मैं दो रात पहले चाचा के साथ एक शादी में गया था , चाचा ने पिताजी की पीठ देखी और वो मुझे समझ बैठा, चूतिये को मैंने समझाने की भरपूर कोशिश की पर उसने तमाशा कर दिया. मारने लगा चाची को अब वो इस से पहले की पिताजी का नाम ले देती , अजीब सी बदनामी को बचाने के लिए मैंने विष का प्याला उठा लिया और फिर जो भी हुआ वो तो तू जानती ही है .

मंजू- फिर भी वो तुझी को कातिल बता रही है , भूल गयी कम से कम उसे तो तेरा लिहाज करना था .

मैं- यही तो समझ नहीं आ रहा की ऐसा क्या हुआ जो वो इतना बदल गयी. ................

Bhaut hi shandar update he HalfbludPrince Fauji Bhai,

Kabir ne chachi aur apne pita ki izzat bachane ke liye sab ilzam apne upar le liya tha............

Chachi sabkuch jante huye bhi kabir ke upar hatya ka ilzam laga rahi he.......

Kahi chachi ne hi to chacha ke game baja diya he........

Keep rocking Bro
 

parkas

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#21

“वो जरुर आएगी , एक पिता बुलाये और बेटी ना आये ऐसा हो नहीं सकता ” मैंने कहा

ठाकुर- बस एक बार उसे देखने की ख्वाहिश है, अभी जाना होगा पर तुम ध्यान रखना , कोशिश करना इस इल्जाम को दूर करने की.

मैंने हाँ में सर हिलाया एक दो नसीहत और देने के पश्चात निशा के पिता चले गए. रिश्तेदार इकठ्ठा होने लगे थे. अजीब सी हालत हो गयी थी , आदमी गुस्से में चाहे जो कह दे पर परिवार में मौत को सहना आसान तो नहीं होता. शिवाले पर बैठा मैं सोच रहा था की किसी ज़माने के क्या ही रुतबा था हमारे परिवार का और अब ऐसी भद्द पिट रही थी की कुछ बचा ही नहीं था . गाँव के कुछ लोग हॉस्पिटल गए थे पोस्ट मार्टम के लिए , अब वहां पता नहीं कितना समय लगता तब तक अंतिम संस्कार भी नहीं हो सकता था . पर एक बात अच्छी थी की मंजू लौट आई थी .

“कबीर,” मेरे पास बैठते हुए बोली वो.

मैं- तुझे बीच में पड़ने की क्या जरुरत थी

मंजू- बावला है क्या तू , अगर मैं ब्यान नहीं देती तो थानेदार धर लेता तुझे, मामला गरम है न जाने क्या से क्या हो जाता.

मैं- फिर भी तुझे झूट नहीं बोलना था

मंजू- मुझे यकीन है की इसमें तेरा कुछ लेना देना नहीं है.

मैं- तेरी कसम मैं तो सोया पड़ा था तूने ही तो उठाया न मुझे.

मंजु- कबीर एक बात तो गाँव के सबसे चूतिया से चूतिया की भी समझ में आ गयी है की तुम्हारे परिवार का दुश्मन गाँव में ही है, तू नहीं था तो सब शांत था जैसे ही तू आया ये काण्ड हो गया. कोई तो है जो हद्द खुन्नस खाए हुए है तुझसे.

मैं- मालूम कर लूँगा

मंजू- अभी तू शांत रहना, लोग आयेंगे कोई कुछ बोलेगा कोई कुछ किसी को सफाई नहीं देनी.

मैं-जी घुट रहा है यहाँ थोडा बाहर चले क्या

मंजू- घर चल फिर

मैं – नहीं थोडा बाहर की तरफ चलते है , ताज़ी हवा मिलेगी तो अच्छा लगेगा.

मंजू- उसके लिए भी तुझे घर चलना ही होगा. मुझे कपडे बदलने है

हम दोनों मंजू के घर आ गए . मैने हाथ मुह धोये , मंजू कपडे बदलने लगी.

मैं- एक काम कर चाय बना ले , उधर ही कही बैठ कर पियेंगे

मंजू- ये बढ़िया है .

मैंने जीप स्टार्ट की और जल्दी ही हम खेतो के पास उसी पेड़ के निचे बैठे थे .

“कबीर, क्या रंडी-रोना है तेरे कुनबे का , मैं जानती हु तू कुछ बाते छिपा लेता है मुझसे पर तू चाहे तो मुझसे अपने मन की बात कर सकता है , और एक बात ये की चाची की इज्जत नहीं उछालनी थी तुझे गाँव के बीच ” बोली वो

मैं- आज तक उसकी ही इज्जत बचाते आया हूँ मैं, पर उसे कद्र ही नहीं . उसको बचाने के लिए मैं सब से ख़राब हुआ चाचा से भी , यहाँ तक तू भी यही जानती है की मैं चोदता था उसे पर ये सच नहीं है

मंजू कसम से, फिर तू क्यों जलील हुआ ऐसी क्या वजह थी

मैं- वो वजह जा चुकी है अब मंजू पर तू अजीज है मुझे तो आज मैं तुझे वो सच बता ही देता हूँ चाची में अवैध सम्बन्ध मुझसे नहीं बल्कि पिताजी से थे .

जैसे ही मैंने ये बात कही मंजू के हाथ से बिस्कुट गिर गया.

मंजू- शर्म कर ले कबीर.

मैं- जिज्ञासा है तो फिर सच सुनने की क्षमता भी रख मंजू. जीजा साली का प्रेम-प्रसंग था कब से मैं ये तो नहीं जानता था पर अगर उस दिन तुड़े के कमरे में मैंने दोनों की चुदाई नहीं देखी होती तो मियन भी यकीं नहीं करता .

मंजू- यकीन नहीं होता की ताऊ जी ऐसा कर सकते है

मैं- ये दुनिया उतनी भी शरीफ नहीं जितना लोग समझते है

मंजू- पर फिर तूने अपने ऊपर क्यों लिया वो इल्जाम

मैं- मैं झूठ नहीं कहूँगा, जब से मैने चाची को देखा था मैं चोदना चाहता था उसे , मैंने प्रयास भी किया था पर उसने ऐसी बात बोल दी की फिर मुझे दो में से एक चुनाव करना था और मैंने उसकी इच्छा का मान रखा.

मंजू- क्या

मैं- चाची भी समझ रही थी की मेरे मन में क्या था उसके प्रति और फिर एक शाम ऐसी आई जब हम दोनों घर पर अकेले थे , चाची उस रात मेरे पास आई और उसने कहा कबीर तेरे मन में क्या है

“मेरे मन में क्या होगा चाची ” मैंने कहा

चाची- कबीर, हम दोनों जानते है की क्या बात है , मुझे भली भाँती मालूम है की तुम्हे पूर्ण जानकारी है मेरे गलत रिश्ते के बारे में

मैंने सर झुका लिया.

चाची- कबीर तुम्हारी उम्र में ये स्वाभाविक है की तुम मोह करो इस जिस्म का , और मेरे हालात ऐसे है की मुझे तुम्हारी इच्छा पूरी करनी होगी. पर कबीर तुमने इस जिस्म को पा भी लिया थो तुम कुछ नहीं पा सकोगे. जेठ जी और मैं प्रेम करते है एक दुसरे से , आज तो नहीं पर एक दिन तुम जरुर इसे समझ पाओगे. मैं तुम्हे अपना बेटा मानती हु , बेशक तुम चाहो तो मुझे इस बिस्तर पर लिटा सकते हो पर उस से केवल तुम्हारी भूख शांत होगी और मेरा मन घायल . औरत को कभी हासिल नहीं किया जाता कबीर, औरत के मन को जीता जाता है और इस जन्म में मेरा मन कहीं और है . तुम्हे चुनाव का पूर्ण अधिकार है , मैं कुण्डी नहीं लगा रही , तुम्हारा जो भी निर्णय मुझे मंजूर है , मेरी गरह्स्थी की लाज तुम्हारे पास छोड़ कर जा रही हु , आगे तुम जानो



“मंजू , उस रात मेरे पास मौका था पर मेरी हिम्मत नहीं हुई. मन का चोर हार गया. मैं नहीं जा पाया उसके कमरे में ” मैंने कहा

मंजू- फिर वो तमाशा क्यों हुआ

मैं- इस घर की गिरती नींव को बचाने के लिए. चाचा ने जीजा-साली को देख लिया था पर वो गलत समझ गया उसे लगा की मैं हु पर थे पिताजी ने हुबहू दो शर्ट खरीदी थी , वो ही पहन कर मैं दो रात पहले चाचा के साथ एक शादी में गया था , चाचा ने पिताजी की पीठ देखी और वो मुझे समझ बैठा, चूतिये को मैंने समझाने की भरपूर कोशिश की पर उसने तमाशा कर दिया. मारने लगा चाची को अब वो इस से पहले की पिताजी का नाम ले देती , अजीब सी बदनामी को बचाने के लिए मैंने विष का प्याला उठा लिया और फिर जो भी हुआ वो तो तू जानती ही है .

मंजू- फिर भी वो तुझी को कातिल बता रही है , भूल गयी कम से कम उसे तो तेरा लिहाज करना था .

मैं- यही तो समझ नहीं आ रहा की ऐसा क्या हुआ जो वो इतना बदल गयी. ................
Bahut hi badhiya update diya hai HalfbludPrince bhai....
Nice and beautiful update....
 
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HalfbludPrince

मैं बादल हूं आवारा
12,964
90,437
259
अखिरकार चाचा को किसी ने कबीर के आते ही मार दिया
.


कोई तो ऐसा हैं जिसे पूरे खानदान से ही नफरत है...


ठाकुर साहब अखिर औलाद के सामने पिघल ही गए.... बहुत शानदार अपडेट.....
अभी कोई भी अनुमान मत लगाओ भाई
 
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