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Incest सबकी प्यारी..गरिमा हमारी

arushi_dayal

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बड़ी बहना के टांगों के बीच में है स्वर्ग का द्वार

इस स्वर्ग के द्वार का मेरा प्यारा भैया हकदार

कल कल बह रही है इस द्वार से प्रेम की धारा

होंठ लगा कर पी लो भैया यह प्रेम रस सारा


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rhyme_boy

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बड़ी बहना के टांगों के बीच में है स्वर्ग का द्वार

इस स्वर्ग के द्वार का मेरा प्यारा भैया हकदार

कल कल बह रही है इस द्वार से प्रेम की धारा

होंठ लगा कर पी लो भैया यह प्रेम रस सारा


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अति उत्तम व कामुक।

पिक्स भी बेहद सेक्सी।
 
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karan77

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नमस्ते दोस्तों... मैं गरिमा हूँ और यह कहानी मेरे बचपन से लेकर युवावस्था तक के सफर और इस यात्रा के दौरान मेरे अनुभवों के बारे में है।

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तो सबसे पहले मैं अपना और अपने परिवार का परिचय करा दूं।
शुरूआत मैं अपनी ससुराल से करती हूं।

मेरे ससुराल में कुल चार लोग हैं:
मैं गरिमा, उम्र 24 साल
मेरे पति रोहित, उम्र 27 वर्ष
मेरी ननद पायल, उम्र 21 साल
और मेरे ससुर- उम्र- 50 साल।
मेरी सास की मौत मेरी शादी से पहले ही हो चुकी थी।

ये तो रहा मेरे ससुराल का परिचय।
अब मैं आपको अपने घर यानि अपने घर का परिचय दे दूँ।
वह इसलिए कि मैं अपनी कहानी अपने घर से ही शुरू करूंगी क्योंकि अपनी पहली चुदाई का अनुभव मैंने वहीं लिया था।

मैं एक छोटे से शहर की एक बेहद मध्यम वर्गीय परिवार से हूं।
मेरे घर में मुझे छोड़ कर कुल तीन लोग ही हैं।



मेरे पापा, उम्र 49 वर्ष
मेरी मम्मी, उम्र 47 वर्ष
और मेरा छोटा भाई सोनू, उम्र 23 वर्ष

इसके अलावा कहानी में और भी किरदार आएंगे जिनका मैं आपसे समय-समय पर परिचय कराती रहूंगी।

तो चलिए अब शुरू करते हैं कहानी का सफर जिसकी शुरुआत मैं अपने घर से करूंगी।

जब मैं 19 साल की थी, 12वीं में थी, तभी मैंने पहली चुदाई का पहला आनंद उठाया था।
और मेरी पहली चुदाई का सौभाग्य मिला था मेरे छोटे भाई सोनू को।

सबसे पहले मैं अपने बारे में आप लोगों को बता दूं।
मैं एक गर्ल्स स्कूल में पढ़ती थी।
मैं तब तक चूत और लंड के रिश्ते के बारे में मुझे अच्छी तरह जान चुकी थी।

जवानी का रंग भी मेरे ऊपर तेजी से चढ़ रहा था।
स्कूल जाते वक्त जब मैं स्कर्ट पहन कर घर से निकलती थी तो अक्सर आने जाने वालों की निगाहें मेरे गोरी-गोरी जांघों पर ठहर जाती थी।
छोटा शहर होने की वजह से स्कूल के लिए कोई बस नहीं थी इसलिए मैं रिक्शे से स्कूल जाती थी।

जब मैं रिक्शे पर बैठती थी तो जानबूझ कर कभी-कभी अपनी टांगों को थोड़ा सा फैला देती थी जिससे मेरी गोरी-गोरी मांसल जांघें दिखाई देने लगती थी।
जिसके बाद सामने से आने वाले या खड़े हुए लोग लार टपकते हुए मेरी जांघों को घूरते रहते थे।
जिसमें मुझे बड़ा मजा आता था।

मेरी एक बहुत अच्छी सहेली ज्योति थी जो हमारे पड़ोस में रहती थी.
हम एक स्कूल और एक ही क्लास में पढ़ती थी।

मैं उसके घर जाया करती थी.
उसके घर ज्यादा जाने की एक वजह यह भी थी कि उसके पास लैपटॉप था जिसमें हम दोनों अक्सर पॉर्न मूवी देखती थी।

मूवी देखते समय हम एक दूसरे की छोटी-छोटी चूचियां जो धीरे-धीरे बड़ी हो रही थी, भी हंसी मजाक में दबा देती थी।
इतना ही नहीं, हम कभी-कभी एक दूसरे को अपनी चूत दिखाती थी और सहलाती भी थी।
इसमें बहुत मजा आता था।

घर में मेरे छोटे भाई सोनू से भी मेरी बहुत अच्छी दोस्ती थी।
चूंकि वह मुझसे सिर्फ डेढ़ साल ही छोटा था तो हम दोनों दोस्तों की तरह रहते थे और एक दूसरे से हंसी मज़ाक भी खूब करते थे।
हम दोनों अपने हर बात एक-दूसरे से साझा करते हैं जिसमें स्कूल, दोस्त और अपनी कॉलोनी के लड़के लड़कियों की बातें भी शामिल रहती थीं जैसे कौन लड़का किस लड़की पर लाइन मार रहा है या कौन लड़की किसके साथ पटी है।

हम एक-दूसरे को लेकर भी अक्सर मजाक करते थे।
जैसे वह मुझसे पूछता- कॉलोनी में कौन-कौन लड़के तुझे लाइन मारते हैं.
तो मैंने कहा था- तू कौन-कौन सी लड़कियों को लाइन मारता है?
उन लड़कियों में मेरी दोस्त ज्योति भी शामिल थी।

सोनू अक्सर मुझसे पूछता था- दीदी, तुम इतनी देर-देर तक ज्योति दीदी से उसके घर जाकर क्या बात करती हो?
मैं बात को हंसी में टाल दिया करती थी और कह देती थी- हम दोनों साथ पढ़ती हैं और मजे भी करती हैं।

तो वह पूछता- पढ़ाई के साथ कौन से मजे किये जाते हैं, मुझे भी बताओ।
मैं भी हंस कर जवाब देती- कुछ भी करती हूंगी तो तुझे क्या!

वह कहता- ज्योति दीदी (ज्योति मेरी दोस्त थी इसलिए सोनू उसे भी दीदी कहता था) से कह दो कि कभी मुझे भी बुला लिया करे, साथ में मजे करेंगे।
तो मैं कहती- तू उसे दीदी भी कहता है और लाइन भी मारता है।
इस पर सोनू हंसते हुए कहता- अरे वो तो दीदी तुम्हारी वजह से कहता हूं. नहीं तो मैं कौन सा उसे अपनी बहन मानता हूं. तुमसे इतनी बार कहा है कि ज्योति से मेरी बात करो. तुम अपने भाई की इतनी सी मदद भी नहीं कर पाती।
इस पर मैं कहती- कि तुम खुद ही पटा लो।

मैं कहती- तुम कौन सा कोई लड़का मुझे पटा कर देते हो जो मैं तुम्हें ज्योति को पटा कर दूं।
तो वह कहता है- तू क्या करेगी लड़का पटा कर?
मैं कहती- जो तू करेगा लड़की पटा कर!
फ़िर हम हंस देते थे।
Good
 
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komaalrani

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इस फोरम ,में सभी विधाओं में

अगर सहज और सायास का कोई अंतर समझता है तो वो आप हैं और ये दोनों पोस्ट उसका ज्वलंत उदाहरण है

लेकिन एक शिकायत है आपसे, एरोटिक कविताओं में तो अपने झंडे गाड़े ही थे, अब एक इलाका था, जहँ हम जैसे लोग भी कलम चलाने की हिम्मत करते थे, गद्य का, अब आपने उसमे भी प्रवेश ले लिया, और दूसरो को क्या कहूं, खुद मेरा मन इस पोस्ट पे आ के रस ले ले के एक एक पोस्ट पढ़ने का करता है,

अक्सर इस फोरम की कहानियों में सेक्स और सेक्सुअल अट्रैक्शन कन्ट्राइव्ड लगता है, और मैं भी इस दोष की दोषी हूँ। पर इन्सेस्ट में यह ज्यादा नजर आता है, बस लगता है कहानी के ऊपर अगर इन्सेस्ट का टैग लगा है तो फिर जो भी पुरुष होगा, वो सबसे सेक्स करेगा ही और जो बोरियत पॉर्न फिल्मो में उपजती है, यांत्रिकता और दुहराव की, पहले लड़की ब्लो जॉब करेगी, फिर कनिलिंगुअस, फिर वोमेन ऑन टॉप, फिर डॉगी, और सब कुछ इस तरह की कैमरे के लेंस के सामने हो,

तो बस इसी तरह का सायास सा लगता है

लेकिन आपकी इन दोनों पोस्टों में करीब करीब एक उमर, आती जवानी की दस्तक, और आपने जिन डायलॉग्स का सहारा लिया है

उस खुलेपन को दिखाने के लिए


व तक जाने के लिए किसी को हमें लेने के लिए स्टेशन तक आना पड़ता था।

स्टेशन एकदम वीरान जगह था, वहां आस-पास कोई भी बस्ती नहीं थी और स्टेशन पर इक्का-दुक्का ही कोई उतरता था इसलिए वहां कोई गाड़ी भी नहीं मिलती थी।

इसलिए पापा ने मां को फोन कर बता दिया कि स्टेशन पर कोई हम लोगों को लेने आ जाए।
पापा ने हम दोनों को कहा- जब स्टेशन आने में आधा घंटा रह जाए तो मां को फोन कर देना. कोई ना कोई तुम लोगों को लेने चला जाएगा।

खैर थोड़ी देर में ट्रेन चल दी।
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इस पर सोनू हंसते हुए कहता- अरे वो तो दीदी तुम्हारी वजह से कहता हूं. नहीं तो मैं कौन सा उसे अपनी बहन मानता हूं. तुमसे इतनी बार कहा है कि ज्योति से मेरी बात करो. तुम अपने भाई की इतनी सी मदद भी नहीं कर पाती।
इस पर मैं कहती- कि तुम खुद ही पटा लो।

मैं कहती- तुम कौन सा कोई लड़का मुझे पटा कर देते हो जो मैं तुम्हें ज्योति को पटा कर दूं।
तो वह कहता है- तू क्या करेगी लड़का पटा कर?
मैं कहती- जो तू करेगा लड़की पटा कर!
फ़िर हम हंस देते थे।


जबरदस्त
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जबरदस्त
 
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komaalrani

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Update 3

ट्रेन चलने के बाद सब अपनी-अपनी जगह आराम से एडजस्ट हो गए।

ट्रेन चले करीब आधा घण्टा हो गया.
अँधेरा गहरा हो चुका था।

जहां हम खड़े थे, वहां एक छोटा सा बल्ब था जिसमें बस एक दूसरे को देख पाने भर की रोशनी आ रही थी।
कोहरा होने की वजह से ट्रेन की स्पीड अब धीमी हो गई थी।
ट्रेन में हवा लगने की वजह से ठंड ज्यादा लग रही थी इसलिए जो जहां खड़ा था वहां धीरे-धीरे जगह बना कर नीचे बैठ गया था।

ठंडी हवा की वजह से सबने दूसरा दरवाजा भी बंद कर दिया था और सब उंघ रहे थे सिर्फ मैं और सोनू खड़े थे।
सोनू बॉक्स के दूसरे साइड में टॉयलेट के पास खड़ा था।

थोड़ी देर बाद सोनू ने मुझसे कहा- दीदी, मैं तुम्हारी तरफ आ जाऊं?
जहां मैं खड़ी थी वहां एक आदमी और खड़ा हो सकता था।

मैंने कहा- अगर वहां दिक्कत है तो इधर आ जाओ।
तो सोनू बॉक्स के ऊपर चढ़ के मेरे पास आकर खड़ा हो गया।

मगर जगह थोड़ी होने की वजह से हम एक दूसरे से सट कर खड़े थे।

धीरे-धीरे सोनू मेरे बगल से हटकर मेरे एकदम के पीछे आ गया।
थोड़ी देर तक तो सब ठीक रहा।

मगर थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि सोनू ट्रेन के हिलने का बहाना लेकर मुझसे बार-बार कुछ ज्यादा ही चिपक जा रहा था।
मेरे पीछे खड़ा होने की वजह से वह मेरी गांड से चिपका हुआ था।

अब मैं समझ गई कि सोनू मेरे पास आकर क्यों खड़ा हुआ है।
मैंने भी कुछ नहीं कहा और आराम से ऐसी खड़ी रही जैसे मुझे कुछ पता नहीं चल रहा है।

धीरे-धीरे मेरे कुछ ना बोलने से सोनू की हिम्मत बढ़ती जा रही थी और अब उसने अपने आप को पूरी तरह मेरी गांड से चिपका दिया था।

मैं उसके लंड का उभार अपनी गांड पर हल्का-हल्का महसूस कर रही थी।
मैंने कुर्ती और लेगिंग पहन रखी थी और ऊपर एक जैकेट डाली हुई थी।

सोनू ने स्पोर्ट्स वाली लोअर-फुल टी-शर्ट और ऊपर से जैकेट पहना हुआ था।

सोनू का दबाव मेरी गांड पर बढ़ता रहा.
लेकिन अब मैंने महसूस कर लिया था कि सोनू का लंड खड़ा हो गया है।

अपनी गांड पर अपने भाई के लंड को महसूस कर मुझे भी अलग फीलिंग हो रही थी … सच कहूँ तो अजीब सा मज़ा आ रहा था।

वहां बैठे सब दुबक कर बैठे ऊंघ रहे थे।
ट्रेन की खिड़की से ठंडी-ठंडी हवा आ रही थी।
और गांड पर लंड की हल्की-हल्की चुभन से माहौल सेक्सी हो रहा था।

अब मुझे भी मजा आने लगा था.
मैंने भी अपनी गांड से सोनू के लंड पर हल्का सा दबाव बनाया।

अब सोनू भी समझ चुका है कि मुझे उसकी हरकतों का पता चल चुका है और मेरी मौन सहमति उसे मिल चुकी है।

हम दरवाजे के पास खड़े थे हमारे सामने एक बड़ा बॉक्स उसके ऊपर दो बड़े-बड़े बैग फिर उसके ऊपर हमारा बैग होने की वजह से हम दोनों के सीने से नीचे का हिसा छिपा हुआ था। जिसका फ़ायदा हमें मिल रहा था और हमारी हरकतों को कोई देख नहीं पा रहा था।

ट्रेन के हिलने के साथ ही सोनू अब खुल कर अपना लण्ड लोअर के अंदर से मेरी गांड पर रगड़ रहा था।
मैं भी हल्के-हल्के अपनी गांड को हिला कर मजे लेने लगी।

थोड़ी देर तो ऐसा ही चलता रहा।
फिर सोनू थोड़ा पीछे हुआ और अपना लंड मेरी गांड से हटा लिया.
मुझे कुछ समझ नहीं आया.

तभी दोबारा वह मेरी गांड से चिपक गया।
लेगिंग के ऊपर से मुझे ऐसा लगा जैसे कोई कड़ी देख चीज़ मेरी गांड से रगड़ी जा रही हो।

मैं समझ गई कि सोनू ने अपना लण्ड लोअर से बाहर निकाल लिया है।
यह समझते ही कि सोनू लण्ड बाहर निकाल कर रगड़ रहा है, मेरी चूत पनिया गयी।

अब मैं एकदम चुदासी होती जा रही थी और खुलकर मजे लेने के मूड में आ गयी थी।
मैं अपने सामने रखे बैग का सहारा लेकर हल्का सा आगे झुक गई और अपनी गांड को थोड़ा सा पीछे कर दिया।

अब मेरी गांड और सोनू लंड के बीच में सिर्फ मेरी लेगिंग थी।

सोनू ने धीरे से अपने हाथ से मेरी कमर को पकड़ लिया और लेगिंग के ऊपर से ही अपने लंड को मेरी गांड से सटा कर हिलाने लगा।
मैं भी मस्त हो कर हल्के हल्के अपनी गांड हिला रही थी।

उधर मेरी चूत एक दम गीली हो चुकी थी।
सोनू समझ रहा था कि मैं भी अब खुल कर मजे ले रही हूं क्योंकि उसके अन्दर का डर भी निकल चुका है और वह भी खुल कर मजे ले रहा था।

सोनू अचानक धीमा हुआ, उसने अपने दोनों हाथ जो मेरी कमर पर रखे धीरे-धीरे आगे की तरफ सरकाया।
पहले तो मैं समझ नहीं पाई मगर तभी उसके इरादे सोच कर मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

दरअसल सोनू ने अपना हाथ आगे लाकर मेरी लेगिंग पर रख दिया।
पहले तो मैंने सोचा कि उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक दूं … मगर मैं इतनी मदहोश हो चुकी थी कि मना करने की स्थिति में नहीं थी।

सच कहूं तो मेरा तो मन ये कर रहा था कि मैं खुद ही अपनी लेगिंग उतार कर अपनी गांड को नंगी कर दूं।

तभी सोनू ने अपना हाथ मेरी कमर पर रखा और दोनों तरफ से उसके हाथों की उंगलियां मेरी लेगिंग के अंदर चली गईं।

मैं समझ गई कि सोनू मेरी लेगिंग नीचे खिसकाने वाला है।
मेरे दिल की धड़कन एकदम से बढ़ गयी।

फिर वही हुआ जो मैंने सोचा था।
सोनू थोड़ा सा पीछे हटा और धीरे-धीरे मेरी लेगिंग और पैंटी डोनो को एक साथ नीचे खिसकाने लगा।

लेगिंग टाइट होने की वजह से थोड़ा जोर लगाना पड़ा और आखिर उसने लेगिंग और पैंटी को खींच कर घुटनों तक कर दिया।
अब मेरी गांड एकदम नंगी हो चुकी थी।

सोनू ने अपने हाथ से मेरी नंगी गांड के दरार में हल्का फैलाया और अपने लंड को दरार के बीच में डाल दिया।

जैसे ही सोनू का गर्म-गर्म लंड मेरी गांड से टकराया मेरे शरीर में हल्की सी सिहरन दौड़ गई।
सोनू ने दोनों हाथों से मेरी कमर को पकड़ा और झुक कर हल्का-हल्का अपने कमर को हिलाने लगा उसका लंड मेरी गांड से होते हुए मेरी पनिया चुकी चूत से टकराने लगा।
मैं तो जैसे सातवें आसमान में थी।

हालांकि मैं कई बार बैगन और मूली अपनी चूत में डाल कर मुठ मार चुकी थी मगर आज पहली बार कोई लंड मेरी चूत से टकरा रहा था।
और वो भी मेरे सगे भाई का लंड।

मैं भी आगे झुक कर अपना सर बैग पर रख दिया और अपनी गांड को उठा कर हिलाने लगी।

अब सोनू ने मेरी कमर को पकड़ कर अपने लंड को मेरी चूत से रगड़ना शुरू कर दिया था और तेजी से अपने कमर को हिला रहा था।
मैं भी अपनी गांड को तेजी से हिला-हिला कर उसका साथ दे रही थी।

मुझे लगा जैसे मेरी नसें फटने जा रही हैं।
मैं और तेजी से अपनी गांड हिलाने लगी.

वहीं सोनू ने भी अचानक अपनी स्पीड बढ़ा दी और मेरी गांड को अपनी कमर से पूरा चिपका लिया.
वह तेज झटके लेने लगा तभी उसका गर्म-गर्म वीर्य मेरी चूत और जांघों पर निकलने लगा।

मुझे भी लगा जैसे मेरा शरीर अकड़ गया है और मेरी नसें फट गई हैं.
और मेरी चूत ने भी उसका वक्त पानी छोड़ दिया।
हम दोनों साथ झड़ गये।

सोनू अपना सर मेरी पीठ पर रख तेजी से सांस ले रहा था.

मैं भी निढाल होकर बैग पर अपने सर रख कर अपनी सांसों को काबू में करने की कोशिश कर रही थी।

उधर सोनू के लंड का रस और मेरी चूत का रस दोनों मेरी जाँघों पर बह रहे थे।

करीब पांच मिनट बाद सोनू खड़ा हुआ और उसने अपने रुमाल से धीरे से मेरी चूत और जांघों को साफ किया।
एक बात और,

कम शब्दों में अपनी बात कहना, और कहानी को तेज गति देना, लेकिन साथ साथ चित्राकात्मता में, दृश्य बाँधने में कोई कमी नहीं,

एक छोटी सी पोस्ट में आपने ट्रेन की भीड़, भाई बहन के बीच घटती दूरिया और माता पिता के न होने पे मिल के मजे लेने वाली बात कैसे कह दी

लघु कथाओं का यही आकर्षण है अपर लम्बे लम्बे सीरियल लिखने और पढ़ने के चक्कर में यह कला विलुप्त सी होती जा रही है।

ट्रेन चले करीब आधा घण्टा हो गया.

अँधेरा गहरा हो चुका था।



जहां हम खड़े थे, वहां एक छोटा सा बल्ब था जिसमें बस एक दूसरे को देख पाने भर की रोशनी आ रही थी।

कोहरा होने की वजह से ट्रेन की स्पीड अब धीमी हो गई थी।

ट्रेन में हवा लगने की वजह से ठंड ज्यादा लग रही थी इसलिए जो जहां खड़ा था वहां धीरे-धीरे जगह बना कर नीचे बैठ गया था।



ठंडी हवा की वजह से सबने दूसरा दरवाजा भी बंद कर दिया था और सब उंघ रहे थे सिर्फ मैं और सोनू खड़े थे।

सोनू बॉक्स के दूसरे साइड में टॉयलेट के पास खड़ा था।



थोड़ी देर बाद सोनू ने मुझसे कहा- दीदी, मैं तुम्हारी तरफ आ जाऊं?

जहां मैं खड़ी थी वहां एक आदमी और खड़ा हो सकता था।

मैंने कहा- अगर वहां दिक्कत है तो इधर आ जाओ।

तो सोनू बॉक्स के ऊपर चढ़ के मेरे पास आकर खड़ा हो गया।

मगर जगह थोड़ी होने की वजह से हम एक दूसरे से सट कर खड़े थे

इन चंद लाइनों में आपने ट्रेन के डिब्बे का पूरा माहौल खींच दिया,

बहुत खूब

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arushi_dayal

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इस फोरम ,में सभी विधाओं में

अगर सहज और सायास का कोई अंतर समझता है तो वो आप हैं और ये दोनों पोस्ट उसका ज्वलंत उदाहरण है

लेकिन एक शिकायत है आपसे, एरोटिक कविताओं में तो अपने झंडे गाड़े ही थे, अब एक इलाका था, जहँ हम जैसे लोग भी कलम चलाने की हिम्मत करते थे, गद्य का, अब आपने उसमे भी प्रवेश ले लिया, और दूसरो को क्या कहूं, खुद मेरा मन इस पोस्ट पे आ के रस ले ले के एक एक पोस्ट पढ़ने का करता है,

अक्सर इस फोरम की कहानियों में सेक्स और सेक्सुअल अट्रैक्शन कन्ट्राइव्ड लगता है, और मैं भी इस दोष की दोषी हूँ। पर इन्सेस्ट में यह ज्यादा नजर आता है, बस लगता है कहानी के ऊपर अगर इन्सेस्ट का टैग लगा है तो फिर जो भी पुरुष होगा, वो सबसे सेक्स करेगा ही और जो बोरियत पॉर्न फिल्मो में उपजती है, यांत्रिकता और दुहराव की, पहले लड़की ब्लो जॉब करेगी, फिर कनिलिंगुअस, फिर वोमेन ऑन टॉप, फिर डॉगी, और सब कुछ इस तरह की कैमरे के लेंस के सामने हो,

तो बस इसी तरह का सायास सा लगता है

लेकिन आपकी इन दोनों पोस्टों में करीब करीब एक उमर, आती जवानी की दस्तक, और आपने जिन डायलॉग्स का सहारा लिया है

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इस पर सोनू हंसते हुए कहता- अरे वो तो दीदी तुम्हारी वजह से कहता हूं. नहीं तो मैं कौन सा उसे अपनी बहन मानता हूं. तुमसे इतनी बार कहा है कि ज्योति से मेरी बात करो. तुम अपने भाई की इतनी सी मदद भी नहीं कर पाती।
इस पर मैं कहती- कि तुम खुद ही पटा लो।

मैं कहती- तुम कौन सा कोई लड़का मुझे पटा कर देते हो जो मैं तुम्हें ज्योति को पटा कर दूं।
तो वह कहता है- तू क्या करेगी लड़का पटा कर?
मैं कहती- जो तू करेगा लड़की पटा कर!
फ़िर हम हंस देते थे।


जबरदस्त
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जबरदस्त
सबसे पहले कोमल जी इस थ्रेड पर आने और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियाँ पोस्ट करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।मेरी कहानी लेखन क्षमता आपके लेखन कौशल से कभी मेल नहीं खा सकती...आपका दबदबा था....आपका दबदबा है और आपका ही दबदबा रहेगा। मेरी जैसी एक छोटी सी लेखिका के लिए आपा ये प्रोत्साहन किसी ट्रॉफी से कम नहीं..फिर से धन्यवाद
 

arushi_dayal

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एक बात और,

कम शब्दों में अपनी बात कहना, और कहानी को तेज गति देना, लेकिन साथ साथ चित्राकात्मता में, दृश्य बाँधने में कोई कमी नहीं,

एक छोटी सी पोस्ट में आपने ट्रेन की भीड़, भाई बहन के बीच घटती दूरिया और माता पिता के न होने पे मिल के मजे लेने वाली बात कैसे कह दी

लघु कथाओं का यही आकर्षण है अपर लम्बे लम्बे सीरियल लिखने और पढ़ने के चक्कर में यह कला विलुप्त सी होती जा रही है।

ट्रेन चले करीब आधा घण्टा हो गया.

अँधेरा गहरा हो चुका था।



जहां हम खड़े थे, वहां एक छोटा सा बल्ब था जिसमें बस एक दूसरे को देख पाने भर की रोशनी आ रही थी।

कोहरा होने की वजह से ट्रेन की स्पीड अब धीमी हो गई थी।

ट्रेन में हवा लगने की वजह से ठंड ज्यादा लग रही थी इसलिए जो जहां खड़ा था वहां धीरे-धीरे जगह बना कर नीचे बैठ गया था।



ठंडी हवा की वजह से सबने दूसरा दरवाजा भी बंद कर दिया था और सब उंघ रहे थे सिर्फ मैं और सोनू खड़े थे।

सोनू बॉक्स के दूसरे साइड में टॉयलेट के पास खड़ा था।



थोड़ी देर बाद सोनू ने मुझसे कहा- दीदी, मैं तुम्हारी तरफ आ जाऊं?

जहां मैं खड़ी थी वहां एक आदमी और खड़ा हो सकता था।

मैंने कहा- अगर वहां दिक्कत है तो इधर आ जाओ।

तो सोनू बॉक्स के ऊपर चढ़ के मेरे पास आकर खड़ा हो गया।

मगर जगह थोड़ी होने की वजह से हम एक दूसरे से सट कर खड़े थे

इन चंद लाइनों में आपने ट्रेन के डिब्बे का पूरा माहौल खींच दिया,

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arushi_dayal

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Update 6-
बहनों की अदला -बदली

चुदाई का खेल खत्म करने के बाद अमित और स्वीटी बैठ गये।


स्वीटी ने टाइम देखते हुए अमित से कहा- भैया 7.30 बज गए हैं, गरिमा दीदी और सोनू भी आते ही होंगे। चलो अब चलकर उधर बैठते हैं।
अमित- ठीक है, चलो उधर ही बैठते हैं।

अमित और स्वीटी अभी उठने ही वाले थे कि सोनू ने बैग उठाया और पेड़ के पीछे से सामने आते हुए कहा- अरे कहां जा रहे हो, हम भी यहीं हैं।

तब तक मैं भी सामने आ गई।

हम दोनों को देखते ही अमित और स्वीटी के चेहरे का रंग ही उड़ गया।
उनके मुंह से कुछ आवाज ही नहीं निकली।

इस पर सोनू हंसते हुए बोला- अरे क्या हुआ भाई, हमें देख कर अच्छा नहीं लगा क्या?
तब अमित ने थोड़ा संभलते हुए बोला- अरे ऐसी बात नहीं है। तुम लोग अचानक कैसे आ गए?
सोनू ने कहा- ‘अचानक कहां भाई, हम तो काफी देर से यहां हैं।’

अमित ने मेरी तरफ देखा तो मैं भी हंस पड़ी।

उधर स्वीटी का चेहरा शर्म से लाल हो गया था।

वे दोनों समझ गये थे कि हमने सब कुछ देख और सुन लिया है।

मैंने स्वीटी को छेड़ते हुए कहा- क्या हुआ स्वीटी, कुछ तो बोलो? अगर हमारा आना पसंद नहीं तो कहो, हम चले जाएं।
इस पर स्वीटी शर्माती हुई बोली- नहीं दीदी, ऐसी बात नहीं है, आओ बैठो।

सोनू ने कहा- अरे घबराओ मत भाई … मैंने कुछ नहीं देखा है क्योंकि मैंने अपनी आंखें बंद कर ली थीं। हां, गरिमा दीदी के बारे में नहीं कह सकता कि इन्होंने कुछ देखा है या नहीं!
इस पर हम चारों हंसने लगे।

लेकिन अमित और स्वीटी अभी भी शर्मा रहे थे कि उनकी पोल खुल गई है।

मैं जाकर स्वीटी के बगल चबूतरे पर बैठ गई और अपने हाथ को स्वीटी के बगल में डाल कर अपनी या खींच लिया और माहौल को नॉर्मल करने के लिए सोनू को चिढ़ाते हुए कहा- अच्छा बड़ा शरीफ बन रहे हो! मैं बताऊं अमित और स्वीटी को कि तुम क्या कर रहे थे। कहो तो तुम्हारी पोल खोलूं?

सोनू- और मैं बता दूँ कि तुम क्या कर रही थी तो?

फिर हम हंसने लगे.

हम दोनों की नोकझोंक से अमित और स्वीटी भी थोड़े नॉर्मल होने लगे।

अमित ने मुस्कुराते हुए कहा- अरे भाई, क्यों एक दूसरे की पोल खोल रहे हो।
मैंने स्वीटी के गाल पर चुटकी काटते हुए कहा- क्या हुआ मेरी रानी, चुप क्यों है?
इस पर स्वीटी हंसने लगी और बोली- नहीं दीदी, कुछ नहीं।

फिर हम सब कुछ देर चुप रहे.

थोड़ी देर बाद चुप्पी तोड़ते हुए अमित शर्माते हुए बोला- यार तुम लोग सब जान गए हो पर प्लीज किसी को कुछ बताना नहीं।
सोनू हंसते हुए बोला- अरे यार, बताने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता। अभी तुम्हें एक बात बताऊंगा तो तुम दोनों भी परेशान होकर रह जाओगे।
अमित ने पूछा- कौन सी बात?

सोनू मेरी या देख कर आँख मारते हुए बोला- क्यों दीदी, कहो तो बता दूँ?
मैं हंस पड़ी.

तब स्वीटी भी थोड़ी नॉर्मल होती हुई बोली- हां हां बताओ।

मैंने फिर स्वीटी के गाल पर चिकोटी काटते हुए कहा- अच्छा तुम्हें बहुत जल्दी है जानने की?
फ़िर हम सब हंस दिये।

अब हम सब नॉर्मल होने लगे और आपस में खुल कर बात करने लगे।

सोनू ने फिर मेरी या देख कर कहा- बोलो दीदी, बता दूँ?

अब मैं भी सोच रही थी कि जब अमित और स्वीटी के बारे में हम जान ही गए हैं तो हम भी अपने और सोनू के बारे में बता दें।
क्योंकि तब हमें एक दूसरे से कोई शर्म भी नहीं रहेगी और फिर हम खुलकर मजे कर सकते हैं।

मैंने सोनू से हंसते हुए कहा- चलो बता दो।
अमित ने कहा- अरे भाई, क्या बात है कुछ बताओगे भी?

सोनू ने अमित से कहा- तुम्हें पता है हम इतनी जल्दी क्यों आये थे?
अमित बोला- नहीं!

सोनू ने मेरी या देखकर मुस्कुराते हुए बोला- जो तुम दोनों कर रहे थे उसके चक्कर में मैं और गरिमा दीदी भी आये थे।
जैसे ही सोनू ने ये कहा, अमित और स्वीटी चौंक कर हंस दिये।

स्वीटी मेरे बगल में ही थी.
इस बार उसने मुझे चिकोटी काटते हुए कहा- अच्छा दीदी, तभी चोरी से यहां आकर बैठी थी।

अमित ने कहा- अच्छा ये बताओ कि जब हम यहां पहुंचे तो तुम दोनों भी वही कर रहे थे क्या?
सोनू बोला- नहीं यार, बस माहौल अभी बन ही रहा था कि तुम दोनों टपक पड़े। सच कहूं तो तुम दोनों को आते हुए देख कर मेरा मूड खराब हो गया था। मुझे लगा तुम लोगों ने सब गड़बड़ कर दी। मगर उसके बाद जो हुआ … भाई मजा आ गया।

स्वीटी ने हंसते हुए अमित से कहा- भैया, हमने थोड़ी जल्दी कर दी। अगर हम थोड़ी देर से आए होते तो शायद जो इन लोगों ने हमें करते देखा वही हम इन्हें करते हुए देख रहे होते।
हम सब हंसने लगे.

मैंने स्वीटी को छेड़ते हुए कहा- अरे वाह मेरी रानी, अभी तो मुंह से बोल नहीं पा रहे थे अब बहुत बोल रही हो।
सोनू ने स्वीटी से कहा- स्वीटी, तुम्हारे पास अभी अच्छा मौका है अपने सपने पूरे करने का!

इतना सुनते ही स्वीटी शर्मा गई।

तभी अमित ने मुस्कुराते हुए कहा- हां स्वीटी, तुम अपना सपना पूरा कर लो।

इस पर स्वीटी अमित को चिढ़ाते हुए बोली- अच्छा भैया … मुझे तो लगता है कि मेरा सपना पूरा होने के बहाने आप भी कुछ देखना चाहते हो।

इस पर हम सब फिर हंस पड़े।

सच कहूँ तो हमारे आपस की नोक-झोंक से माहौल एक बार फिर सेक्सी होने लगा था।

अमित ने सोनू से कहा- वैसे ये तो बेईमानी है। तुमने और गरिमा ने चोरी से ही सही मगर हमें और स्वीटी को तो सब करते हुए देख लिया। इसलिए अब तुम और गरिमा वो सब करो जो हमने किया था और मैं और स्वीटी देखेंगे.

फिर अमित ने स्वीटी की तरफ देखते हुए कहा- क्यों स्वीटी, ठीक कहा ना?
स्वीटी बोली- बिल्कुल सही भैया, अब इनकी बारी है।

इसके बाद स्वीटी मेरी तरफ देख कर बोली- गरिमा दीदी, प्लीज ये बेईमानी नहीं चलेगी। अब आप दोनों भी वही करिए जिसके लिए आप लोग इतनी जल्दी स्टेशन आए।
हम और सोनू दोनों हंस दिये।

सोनू ने कहा- जब तुम दोनों इधर लगे हुए थे, तभी हमने भी उधर अपना काम कर लिया था।
और यह कह कर उसने मेरी तरफ देखा और आंख मार दी।

मैं हल्का सा मुस्कुरा दिया।

अमित बोला- अच्छा जी … इसका मतलब तुम दोनों ने डबल मजा लिया। मगर अब कुछ भी हो तुम दोनों को दोबारा करना पड़ेगा।
फिर सोनू ने कहा- देखो ऐसा है, तुम दोनों को पता नहीं था कि हम यहां पर हैं इसलिए तुम्हें कोई परेशानी नहीं हुई और हमने और गरिमा दीदी ने मजा ले लिया। मगर अब ये तो नहीं हो सकता है कि तुम दोनों कपड़े पहन कर हमें देखो और मैं और दीदी नंगे होकर चुदाई करें।

फ़िर उसने मेरी ओर देख कर कहा- क्यों दीदी सही है ना?

सोनू अब खुल कर चुदाई, चूत और लंड जैसा शब्द बोल रहा था।
मैं भी अब गर्म और बेशर्म दोनों हो चुकी थी।

मैने- हाँ … यह बात तो सही है।
स्वीटी बोली- फिर क्या करें?

अमित- फिर तो यही है कि जो करना है हम सब एक साथ करें।
सोनू- हां … ये ठीक रहेगा। इसमें कोई एक दूसरे से शर्माएगा भी नहीं।

अमित- तो कौन शुरू करेगा?
स्वीटी तपाक से बोली- सबसे पहले भाई लोग!
हम सब फिर हंस दिये.

सोनू- ठीक है, हम तैयार हैं लेकिन बहनें भी तैयार होनी चाहियें।

मैं स्वीटी की ओर देखते हुए बोली- बहनें भी तैयार है! क्यों स्वीटी?
स्वीटी बोली- बिल्कुल।

अमित ने फिर मेरे और स्वीटी की तरफ देखे हुए कहा- पहले मैं और सोनू अपनी पैंट उतारेंगे, उसके बाद तुम दोनों अपनी सलवार और कुर्ते उतारोगी।
मैंने और स्वीटी ने हां में सर हिला दिया।

उसके बाद अमित ने अपनी जींस के बटन खोल कर उसे घुटनों तक सरका दिया और फिर अपने अंडरवियर को भी पकड़ कर घुटनों तक कर लिया।
सोनू ने भी एक ही झटके में अपना निचला खींच कर नीचे कर दिया।

अब दोनों के लंड हमारे आँखों के सामने थे।

दोनों लंड अभी कुछ ही देर पहले झड़े थे इसलिए धीरे थे मगर उन्हें हल्का तनाव आने लगा था।
थोड़ी देर पहले मैंने अमित का लंड थोड़ी दूरी से देखा था मगर अब एक दम पास से उसका लंड देख रही थी।

उधर स्वीटी भी एकटक सोनू के लंड को देख रही थी।
तभी सोनू ने कहा- अब तुम दोनों अपने कपड़े उतारो!

फिर मैंने और स्वीटी ने एक दूसरी की तरफ देखा और खड़ी होकर अपने सलवार का नाड़ा खोल दिया.
नाड़ा खुलते ही सलवार जमीन पर गिर गई, फिर उसे पैरों से बाहर कर दिया।

मैंने अंदर पैंटी नहीं पहनी थी इसलिए कमर से नीचे मैं पूरी नंगी हो गई।
हालांकि कुर्ती की वजह से चूत अभी भी ढकी हुई थी।

मुझे देख कर स्वीटी ने भी अपनी सलवार को पैर से बाहर कर दिया और फिर अपनी पैंटी भी उतार दी।

सोनू ने कहा- कुर्ते भी उतारो।
स्वीटी- कुरते रहने दो भैया, वरना हमें ठंड लग जाएगी।

अमित- यार, फिर ऐसे तो मजा नहीं आएगा।
मैं बोली- कोई बात नहीं, हम अपने कुर्ते के बटन खोल देती हैं।

यह कह कर मैंने अपने कुर्ते के आगे के सारे बटन खोल दिये।
मैंने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए कुर्ते का बटन खोलते ही मेरी दोनों चूचियां छलक कर बाहर आ गईं।

अमित एकटक मेरी चूचियों को देखने लगा।

वहीं मेरे कहने पर स्वीटी ने भी अपने कुर्ते के अगले बटन को खोला और फिर कुर्ते को दोनों ओर थोड़ा-थोड़ा फैला कर चूचियों को बाहर कर दिया।
स्वीटी ने भी अंदर ब्रा नहीं पहनी थी।

मैंने देखा कि स्वीटी भले ही उम्र में मुझसे छोटी थी लेकिन उसकी चूचियां मेरे से बड़ी तो नहीं मगर बहुत छोटी भी नहीं थी।

उधर अमित मेरी चूचियों को देख रहा था और सोनू स्वीटी की चूचियों को घूरे जा रहा था।

हमारी चूचियों को देखते ही दोनों के लंड हल्के झटके लेने लगे।

लंड देख कर मेरे मुँह में पानी आने लगा था.
मगर मैंने कुछ कहा नहीं.

तभी सोनू ने मुस्कुराते हुए अमित से कहा- क्यों अमित किसकी चूची ज्यादा अच्छी है? मेरी बहन की या तुम्हारी बहन की?

अमित ने हंसकर सोनू को आंख मारते हुए कहा- देखने में तो दोनों की चूची अच्छी है। बाकी तो स्वाद लेने पर पता चलेगा।
इस पर हम चारों हंस दिये।

सोनू- चलो फिर स्वाद भी लेते हैं।
अमित- ठीक है। तुम मेरी बहन का स्वाद करो, मैं तुम्हारी बहन का स्वाद लेता हूँ।

यह कह कर अमित मेरे सामने आ गया।
मैं पेड़ के किनारे बने चबूतरे पर बैठी थी।

पहले तो उसने अपने हाथ से मेरी दोनों चूचियों को बारी-बारी से दबाया।
फिर झुक कर एक चूची को मुंह में रख कर चूसने लगा और दूसरे को हाथ से दबाने लगा।

उधर सोनू ने भी स्वीटी की चूची को मुँह में लेकर चूस रहा था।

मैंने अपने हाथ अमित के सिर पर रख दिया था और अमित बारी-बारी से मेरी दोनों चूचियों को चूस रहा था।
थोड़ी देर तक मेरी चूचियों को चूसने के बाद खड़ा हुआ और फिर हाथ से अपने लंड को पकड़ कर उसकी स्किन को पीछे खींच दिया और फिर लंड के सुपारे को मेरी चूची की चूची पर रगड़ने लगा।

अमित का लंड अभी पूरा तरह खड़ा नहीं हुआ था मगर उसमें तनाव आने लगा था।
थोड़ी देर तक लंड के सुपारे को चूची से रगड़ने के बाद अमित ने लंड को मेरे मुँह के लाकर धीरे से बोला- इसे चूसो!

मैं तो कब से इसी दोस्त का इंतज़ार कर रही थी।
मैंने तुरंत अमित के लंड को हाथ पकड़ा और उसकी स्किन पूरी पीछे खींच कर लंड के सुपारे को मुँह में भर लिया और जीभ फेरती हुई चूसने लगी।

सच कहूं तो मुझे चूत चुदवाने में जितना मजा आता है उतना ही मजा लंड चूसने में भी आता है।

उधर सोनू भी स्वीटी की चूचियों को चूसने के बाद खड़ा हो गया था और स्वीटी उसके लंड को चूस रही थी।

इधर अमित अपने हाथ को मेरे सर पकड़ कर अपने कमर को हल्का-हल्का हिला कर लंड को मेरे मुँह में आगे-पीछे कर रहा था।

थोड़ी देर की चुसाई में ही उसका लंड एकदम टाइट हो गया था।
मैं भी मुंह को आगे पीछे कर अमित के लंड को लॉलीपॉप की तरह चुन रही थी।

थोड़ी देर बाद अचानक अमित ने मेरे सिर को कस कर पकड़ लिया और अपने कमर को थोड़ी तेजी से हिलाते हुए लंड को मेरे मुँह में डालने लगा।
मैं समझ गई कि अमित अब झड़ने वाला है।

पहले तो मैंने सोचा कि लंड को मुँह से निकाल दूँ।
फिर मैंने सोचा कि आज लंड के पानी का स्वाद भी चख लेती हूँ।

यह सोच कर मैं भी अमित के लंड को तेज-तेज चूसने लगी।

तभी अमित धीरे-धीरे बड़बड़ाने लगा- आआ आआआ बस … आआहाहा!
और फिर तेजी से कमर को झटके देते हुए मेरे मुंह में झड़ गया।
उसके गर्म-गर्म और गाढ़े वीर्य से मेरा मुंह भर गया।

अमित ने मेरे सर को इतनी कस कर पकड़ लिया था कि मेरा लंड मुँह से बाहर नहीं निकल पा रहा था।
मैं भी एक झटके से उसके वीर्य को पूरा गटक गई।
मुझे वीर्य का नमकीन का स्वाद बड़ा अच्छा लग रहा था।
झड़ने के बाद भी मैंने अमित के लंड को मुँह से नहीं निकाला और चूसती रही।

और सोनू और स्वीटी की ओर देखा तो सोनू भी शायद स्वीटी के मुंह में झड़ गया था.
क्योंकि वह आँख बंद किये खड़ा था और हाँफ रहा था.
उसका लंड अभी भी स्वीटी के मुंह में ही था और स्वीटी भी मेरी तरह शायद सोनू के झड़े लंड को चूस रही थी।

थोड़ी देर तक चूसने के बाद मैंने अमित का लंड मुँह से निकला और देखा तो उसका लंड गुलाबी सुपारा मेरे थूक और चूसने से चमक रहा था।

मुझे देख कर स्वीटी ने भी सोनू के लंड को चूसना बंद कर दिया।

स्वीटी मुझसे मुस्कुराते हुए पूछने लगी- क्यों दीदी, कैसा लगा मेरे भाई के लण्ड का स्वाद?
मैं हल्के से मुस्कुरा कर बोली- अच्छा था.

फिर मैंने स्वीटी को आँख मारते हुए कहा- अब तो इनकी बारी है. क्यों स्वीटी?
स्वीटी- हां … हमने तो चूसा भी और पिया भी अब इनकी बारी है चाटने की और पीने की!

सोनू- अरे हम तो कब से तैयार हैं। पहले एक बार दिखाओ तो सही!
मैं सोनू से बोली- तुम्हें बड़ी जल्दी है देखने की?

तब स्वीटी ने कहा- अरे दीदी, पहले यह तो पूछो कि देखना क्या चाहता है, आपकी या मेरी?
मैं- तुम्हारी ही देखना चाहता होगा। मेरी तो देख भी चुका है और चाट भी चुका है।

अब अमित ने कहा- अरे कोई मुझसे भी तो पूछ लो कि मैं किसको देखना चाहता हूं।
इस पर हम सब हंस दिये।

तभी सोनू ने मुझसे कहा- वैसे दीदी, मेरे और अमित के अलावा भी कोई है जो तुम्हारी देखना भी चाहता है और चाटना भी चाहता है।

फिर उसने स्वीटी की तरफ देख कर आंख मार दी।
अमित बोला- हां स्वीटी, पहले तुम अपनी इच्छा पूरी कर लो।

मैं और स्वीटी एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुराने लगे।

स्वीटी बोली- ठीक है मैं तैयार हूं।
फिर मेरी तरफ देखते हुए कहा- दीदी, मेरी एक बात मानोगी।
मैं- क्या बोलो?
स्वीटी- तुम्हें भी मेरी चाटनी होगी।

स्वीटी की यह फरमाइश सुनकर मैं चौंक गई।
मैं सोचने लगी कि क्या बोलूं.

तभी स्वीटी ने फिर कहा- दीदी प्लीज़।
तब मैंने भी सोचा कि लंड का स्वाद तो ले ही चुकी हूँ आज चूत का भी स्वाद ले लिया जाए और स्वीटी जैसी प्यारी लड़की फिर कहाँ मिलेगी.

यह सोच कर मैंने कहा- ठीक है।
स्वीटी खुश हो गई.

अमित हंसते हुए स्वीटी से बोला- चलो फिर देर मत करो, हम लोग भी लाइन में हैं।

स्वीटी बोली- चिंता मत करो, हम दोनों ज्यादा देर नहीं लगाएंगे। तुम लोगों को पूरा टाइम मिलेगा चाटने का!

हम सब हंस पड़े.

फिर स्वीटी मेरे सामने आकर खड़ी हो गई.
हम दोनों एक दूसरी की तरफ देख कर मुस्कुरा दी।

स्वीटी ने मेरे गालों पर चिकोटी काट ली और फिर घुटनों के बल बैठ गई और मेरे कुर्ते को ऊपर करते हुए मुझसे बोली- इसे पकड़ो दीदी!

मैंने कुर्ते को पकड़ कर पूरा ऊपर उठा दिया और पेट के पास घुमा कर गांठ लगा दी ताकि बार-बार खुले ना!
अब स्वीटी का मुँह ठीक मेरी चूत के सामने था।
वह गौर से मेरी चूत को देख रही थी।

फिर उसने हाथ बढ़ाया कर मेरी झांटों का सहलाया और मेरी चूत को भी सहलाने लगी।

मैंने अपनी जांघों को हल्का सा फैला कर कमर को आगे कर दिया जिससे मेरी चूट उसके मुंह के एकदम पास आ गई।

स्वीटी ने अपने दोनों हाथों से मेरी जांघें पकड़ कर थोड़ा सा फैलाया और आगे बढ़कर मेरी चूत को चूमा, फिर जीभ निकाल कर चाटने लगी।

जैसे ही स्वीटी ने मेरी चूत पर अपनी जीभ फेरी, मेरे शरीर में सिहरन सी दौड़ गई।

मैंने भी उसके सिर पर अपना हाथ रख दिया और अपने कमर को हल्का-हल्का हिलाकर चूत चटाने लगी।

उधर अमित और सोनू खड़े होकर हमें देख रहे थे।

तभी अमित आगे बढ़कर मेरी बगल आ गया और झुककर मेरी एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा।

यह देख कर सोनू भी मेरे दूसरे साइड आ गया और मेरी दूसरी चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा।

अब एक तरफ स्वीटी मेरी चूत चाट रही थी, दूसरी तरफ अमित और सोनू मेरी चूचियों को चूस रहे थे और अपने हाथों से मेरी गांड को भी सहलाते जा रहे थे।

करीब 5 मिनट तक ऐसा ही चलता रहा.
उसके बाद स्वीटी ने चूत से मुंह हटाया और खड़ी हो गई।

अमित और सोनू भी चूची चूसना छोड़ कर खड़े हो गए।

तभी सोनू मेरी एक चूची को हाथ से पकड़ कर दबाते हुए स्वीटी से बोला- एक बार इसे भी चूस कर देखो।

स्वीटी ने मुस्कुरा कर मेरी ओर देखा, फिर मेरी दोनों चूचियों को बारी-बारी से चूसने लगी।

थोड़ी देर तक चूचियों को चूसने के बाद खड़ी हो गई और मुझसे बोली- दीदी, अब तुम्हारी बारी है।

अब मैं उसके सामने घुटने के बल बैठ गई।
स्वीटी ने अपने कुर्ते को ऊपर उठा कर मेरी ही तरह पेट के पास घुमा कर गांठ लगा दी।

अब उसकी चूत ठीक मेरी आंख के सामने थी।
उसकी चूत पर हल्के-हल्के रेशमी झांटें उग चुकी थी और चूत की खुशबू मेरी नाक में घुस रही थी।

मैंने अपने हाथों से उसकी जांघों को पकड़ कर हल्का सा फैलाया.

स्वीटी ने भी जांघों को खोल कर कमर को आगे कर मुझे चूत चाटने की पूरी जगह दे दी।
मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर रख कर उसे चूम लिया और फिर जीभ निकल कर चाटने लगी।

मैं पहली बार किसी चूत को चाट रही थी इसलिये शुरुआत में थोड़ा अजीब लगा मगर थोड़ी ही देर में मुझे चूत का स्वाद भी अच्छा लगने लगा।

इधर मैं स्वीटी की चूत को चाट रही थी, वहीं अमित और सोनू अगल-बगल खड़े होकर स्वीटी की चूची पीने लगे।

अमित तो स्वीटी का चूची पीने के साथ ही अपने लंड को उसकी चिकनी जांघ पर रगड़ रहा है।

थोड़ी देर तक ऐसे ही चलता रहा.
फिर सोनू ने स्वीटी की चूची से मुंह हटाया और मुझसे बोला- अरे दीदी, स्वीटी की चूत का सारा रस तुम्हीं चाट लोगी क्या? थोड़ा मुझे भी मौका दो।

मैंने स्वीटी की चूत से मुंह हटाते हुए कहा- लो भाई तुम भी स्वाद ले लो।

और फिर मैं खड़ी हो गई। फिर वहां सोनू आकर घुटनों के बल बैठ गया और दोनों हाथों से स्वीटी की जांघों को फैला दिया, फिर जीभ से चूत को चाटने लगा।
इधर अमित अभी भी स्वीटी की एक चूची को मुँह में लेकर चूस रहा था।

मेरे खड़े होते ही अमित ने स्वीटी की चूची चूसना छोड़ कर मेरे पास आ गया और फिर मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गया।

मैंने अपने दोनों जांघों को फैला दिया।
फिर अमित ने मेरी दोनों जाँघों को हाथ से पकड़ कर थोड़ा और फैलाया और फिर मेरी झाँट पर हाथ फेरते हुए चूत के चने को उंगली से छेड़ने लगा।
मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।

फिर उसने उंगलियों से मेरी चूत की दोनों फांकों को फैलाया और जीभ निकाल कर चूत के गुलाबी हिस्से को चाटने लगा।

मेरी शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई।

हालांकि इसके पहले भी सोनू मेरी चूत को चाट चुका था।
मगर अमित तो ऐसा लग रहा था जैसे चूत चाटने में एक्सपर्ट हो।

अमित ने अब अपनी पूरी तरह से मेरी चूत में घुसेड़ दी और अंदर घुमाने लगा।
मेरी हालत ख़राब होने लगी.

मैंने हाथों से अमित के सिर को कस कर पकड़ लिया और अपनी कमर को हिलाने लगी।

उधर स्वीटी ने सोनू के सर को पकड़ा हुआ था और अपनी आंखें बंद कर कमर हिला-हिला कर चूत चटवा रही थी।

अमित ने अब अपना सिर मेरी दोनों जाँघों के बीच में एडजस्ट कर लिया, जीभ से चूत चाट रहा था और अपने हाथों से मेरी गांड को सहलाता जा रहा था।

करीब दस मिनट तक चटवाने के बाद मेरी हिम्मत ने जवाब दिया और मैंने तेजी से कमर हिलाते हुए अमित के मुंह में अपनी चूत का सारा पानी निकाल दिया।

अमित ने मेरी चूत का सारा रस पी लिया और आखिरी बूंद तक चाट लिया।

मैं अमित के सिर को दोनों जांघों में फंसाये हुए ही लंबी-लंबी सांस लेने लगी।

फ़िर अमित ने अपना मुँह मेरी जाँघों के बीच से निकाला और हाथ से अपने मुँह को साफ करने लगा।
मैंने देखा कि उसके मुँह और नाक पर मेरी चूत पानी लगा हुआ था।

अमित और मेरी निगाह मिली तो हम दोनों मुस्कुरा दिये।
उधर स्वीटी भी शायद सोनू के मुंह में ही झड़ चुकी थी क्योंकि सोनू भी स्वीटी के सामने ही बैठा था.

सोनू अपने मुंह को रुमाल से साफ कर रहा था और स्वीटी पीछे चबूतरे का टेक लेकर खड़ी थी और आंख बंद कर लंबी-लंबी सांसें ले रही थी।
अब तक हम चारों दो-दो बार झड़ चुके थे।

मैं भी अब नॉर्मल हो चुकी थी।

अमित और सोनू भी खड़े हो गए।

मेरी निगाह दोनों के लंड पर पड़ी तो देखा उनका लंड भी अब पूरा टाइट हो कर खड़ा था।

मैं थोड़े पीछे होकर चबूतरे का सहारा लेकर स्वीटी के बगल ही खड़ी हो गई।

थोड़ी देर हम चारों चुप होकर हमारी हालत में खड़े रहे।

अब तक स्वीटी भी नॉर्मल हो चुकी है।
उसकी भी निगाह दोनों के खड़े लंड पर चली गई।

तभी अमित आगे बढ़कर स्वीटी के पास आया और झुक कर उसकी चूचियों को मुंह में लेकर चूसने लगा साथ ही एक हाथ से मेरी चूचियों को भी दबाने लगा।

सोनू थोड़ी देर देखता रहा, फिर मेरे पास आकार पहले तो एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा.
फिर वह नीचे बैठ गया और हाथों से पकड़ कर मेरी दोनों जांघों को फैला दिया और मेरी चूत चाटने लगा।

हालांकि अभी कुछ मिनट पहले ही मेरी चूत का पानी निकला था लेकिन जब सोनू ने जब चाटना शुरू किया तो मुझ पर दोबारा मस्ती छाने लगी।

उधर अमित स्वीटी की चूची चूसते हुए अपनी उंगलियों को उसकी चूत में डाल कर आगे पीछे करने लगा।

स्वीटी पर भी दोबारा मस्ती छाने लगी थी और वह अपने कमर को हल्का-हल्का हिला रही थी।
इधर सोनू मेरी चूत के दाने को मुंह में भर लिया और हल्का सा उस पर दांत गड़ा कर चूसने लगा।

मेरे ऊपर फिर चुदासी छाने लगी।

कुछ देर इसी तरह चूत चाटने के बाद सोनू खड़ा हो गया और मुझसे बोला- दीदी थोड़ा घूमो।
मैं समझ गई कि अब चूत की चुदाई होनी है.

घूमकर मैंने अपने दोनों हाथ चबूतरे पर टिका दिए और पैरों को फैला कर खड़ी हो गई।

सोनू ने अपने लंड को मेरी चूत से सटाया और एक ही धक्के में जड़ तक पूरा लंड घुसा दिया और फिर धक्के मारने लगा।

मैंने हल्का सा पलट कर स्वीटी को देखा तो चबूतरे के एकदम किनारे बैठी थी और पीछे झुक कर अपने हाथ की कोहनी का टेक लिया हुआ था।
अमित ने उसके पैरों को पकड़ कर फैला दिया था और उसकी चूत में लंड डाल कर चोद रहा था।

थोड़ी देर तक दोनों भाई अपनी बहन की चुदाई करते रहे।
मैं भी गांड उछाल कर सोनू का साथ दे रही थी।

थोड़ी देर बाद अमित बोला- सोनू, अब तुम इधर आ जाओ।

मैंने पलट कर देखा तो अमित स्वीटी की चूत से अपना लंड निकाल कर मेरे पीछे आ गया था।

तब सोनू ने भी मेरी चूत से अपना लंड निकाला और स्वीटी के पास चला गया।

अब स्वीटी ने भी खड़ी होकर मेरी तरह की पोजीशन बना ली थी।
इधर अमित ने अपना लंड मेरी चूत पर रख कर जोरदार धक्का मारा।

एक ही धक्के में अमित का लंड मेरी चूत में घुस गया मेरे मुँह से हल्की सी सिसकारी निकल गई क्योंकि अमित का लंड सोनू के लंड से थोड़ा मोटा था।

फिर धीरे-धीरे कमर हिलाते हुए अमित ने मुझे चोदना शुरू कर दिया।
उधर सोनू भी स्वीटी को चोदने लगा था।

हम चारों दो-दो बार झड़ चुके थे इसलिए जल्दी झड़ने का नाम ही नहीं ले रहे थे.
और मस्त चुदाई चल रही थी।

करीब 15 मिनट की चुदाई के दौर के बाद सबसे पहले सोनू और स्वीटी झड़े.
और फिर कुछ ही देर बाद मैं और अमित भी झड़ गए।

हम चारों इतना थक गए थे कि उसकी तरह नंगी हालत में चबूतरे पर बैठ गए।

थोड़ी देर बाद जब हम सामान्य हुए तो सब अपने कपड़े ठीक से पहनने लगे।

इस बीच हमने आपस में कोई बात नहीं की।

जब हम सब कपड़े ठीक से पहन कर बैठ गए, तब स्वीटी अमित से बोली- भैया, अब अगले एक हफ्ते तक मुझे छूना भी मत, अगले एक हफ्ते की सारी कसर आज ही निकल गई है।
यह सुनते ही हम सब हंस पड़े।
 
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