• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

curious1964

Member
295
209
43
दोनों अलग हो गये। तुरंत सुंदरी बेड पर सीधा हो गयी। लेकिन परम ने लोडे को अंदर नहीं घुसाया। उसने सुंदरी की टांगों को पूरा फैला दिया और पूरी चूत को मुँह में भरकर चूसने लगा। चूत को चूसते-चूसते क्लिट को काट लेता था और सुंदरी उछल पड़ती थी। अभी तक सुंदरी ने 8 लंड का मजा लिया था लेकिन कभी किसी मर्द ने उसकी चूत को चूमा या चाटा नहीं था। सिर्फ़ उसकी एक नौकरानी और माँ ने कभी-कभी चूत को चूमा चाटा था लेकिन ऐसा मजा कभी नहीं आया था। परम पूरी जीभ चूत में डालकर चूत का स्वाद ले रहा था और दो उंगली गांड में घुसाकर मजा ले रहा था। पिछली रात बहन ने चूत को चटवाकर मजा लेना सिखाया था और परम माँ की चूत को चूस-चूस कर मजा ले रहा था। उंगली करते-करते गांड बिल्कुल गीली हो गयी थी और परम को लगा की गांड में लंड भी घुस जाएगा लेकिन पहले वो चूत का पूरा मजा लेना चाहता था। उसने एक बार फिर पूरी चूत को चूसा और आगे बढ़कर माँ के होंठों को चूमने लगा और एक हाथ से लंड को चूत में डालकर चोदने लगा। जोर-जोर से धक्का मारने लगा। हर धक्के के साथ सुंदरी की आह्ह निकल जाती थी। आप यह कहानी मैत्री और नीता के द्वारा अनुवादित कहानी पढ़ रहे है


सुंदरी- “कैसा लग है बेटे, माँ को चोदने में…”

परम- “आह्ह माँ बहुत अच्छा लग रहा है। रोज चुदवाओगी?”

सुंदरी- “मैं हमेशा लंड लेने को तैयार हूँ। बहुत साल पहले एक साथ 5-5 आदमियों से चुदवाई थी उस दिन भी इतना मजा नहीं आया था। लेकिन बेटा धीरे-धीरे चोदो…अन्दर दुखता है साला।”

परम चुदाई करता रहा। कभी रुक कर धइले को मसलने लगता था।

सुंदरी चीख उठती थी- “मादरचोद, रुकता क्यों है? गांड में दम नहीं है तो चोदना शुरू क्यों किया?”

और परम जोर-जोर से धक्का मारने लगा और पूछता- “विनोद का लंड अपनी चूत में लोगी?”

सुंदरी- “हाँ… बेटा, विनोद से चुदवाऊँगी…और उसका लंड भी शांत कर दूंगी।”

परम- “शेठ का लंड चूत में लोगी?”

सुंदरी- “हाँ… शेठ से भी चुदवाऊँगी…मुझे तो बस लंड चाहिए बेटे।”

परम- “शेठानी के सामने शेठ का लंड चूसोगी?”

सुंदरी- “हाँ… चूसूँगी…”

परम- “अपनी बेटी के सामने मेरा लंड चूत और गांड में लोगी?”

सुंदरी- “हाँ… लूँगी…और गांड भी मस्ती से मरवाउंगी।”

परम- “मेरे और दोस्तों से भी चुदवाओगी?”

सुंदरी- “हाँ… सबसे चुदवाऊँगी…”

परम- “साली, वेश्या बनोगी?”

सुंदरी- “हाँ… मैं वेश्या हूँ… हाँ…”

दोनों गंदी-गंदी बातें करते-करते चुदाई कर रहे थे। दोनों ने एक दूसरे को कसकर जकड़ लिया और परम ने माँ की चूत में वीर्यदान कर दिया। सुंदरी उसे चूमने लगी और तब तक चूमती रही जब तक दोनों बिल्कुल ठंडे ना हो गये। परम बेड से उतरकर खड़ा हो गया और घूर-घूर कर प्यार से सुंदरी के बदन को देखने लगा।

परम- “आखिर क्या है सुंदरी में की सभी मर्द उसकी जवानी से खेलना चाहते हैं…” परम ने अबतक सुंदरी के अलावा अपनी बहन महेक और रेखा को ही ध्यान से देखा था।

कल शेठानी को जोश में आकर चोद लिया लेकिन आज जो मजा माँ को चोदने में आया वैसा कल नहीं आया था। शेठानी थोड़ी मोटी थी और कोई खास सुंदर भी नहीं थी।


लेकिन सुंदरी का एक-एक अंग छील-छील कर बनाया गया था, करीब 5’5” लंबी, घने काले और लंबे बाल, आलमोस्ट गोल चेहरा, बहुत गोरा नहीं लेकिन बहुत आकर्षक रंग, बड़ी और चमकीली आँखें, गालों में बड़े-बड़े गड्ढे, आकर्षक होंठ, ऊपरी होंठ पतले जब की निचले होंठ मोटे और कूबसूरत कताव, जब वो हँसती थी तो उसके सफेद चमकदार दाँत दिखाई देते थे। उसकी आँखों और चेहरे पर हमेशा मुशकुराहट रहती थी। परम की नजर उसकी लंबी गर्दन और चौड़े कंधों के नीचे फिसली, उसकी बांहें मोटी नहीं लेकिन मांसल थीं बिना मोटापा के, कुहनी तक शंकु के आकार में। उसके बोबले पूरे गोल, कसी और रसीली थीं, जिसका मज़ा वो ले चुका था। अब निपल्स सामान्य आकार में थे, आधा इंच लंबे और मोटे।

परम अपनी कुँवारी बहन, शेठानी और अपनी प्रेमिका रेखा कि धइले मसल चुका था। हालांकी महेक और रेखा की बोबले कसे थे, जब की सुंदरी की बोबले स्पंजी थी। ये अपने भार के कारण थोड़ा लटक गईं थीं।

सुंदरी मुश्कुराई और परम से पूछा- “अब तो चोद लिया, फिर क्या देख रहा है?” उसने अँगड़ाई ली- “फिर चोदना है तो चढ़ जाओ। मेरी चूत तैयार है…मेरी चूत का भोसड़ा बनाओगे!!!”

परम- “मैं देख रहा हूँ की आखिर तुममें क्या है की सभी तुम्हें चोदना चाहते हैं…”

आशा करती हु आपको यह एपिसोड्स पसंद आये होंगे!!!!!!!!!!!!

प्लीज़ कोमेंट कर के अपनी राय देते रहिये..............
Maa Bete ke bich pyar aise hi bane rahe .....Lajwab 👌👌👌.......jitni baar bhi padhe mann bharta hi nahi 😊
Lekhika Mohodaya ko Ashes Ashes Dhanyabaad !😊
 

Ek number

Well-Known Member
9,440
20,615
188
अब आगे.................



महक को एक अजनबी के साथ बंद कमरे में छोड़कर परम बहुत उदास हो गया। उसे पता था कि वह अजनबी का लंड उसकी बहन का कौमार्य भंग करेगा, वह उसकी बहन की चूत चोद-चोद के कितनी बड़ी कर देगा, जिसकी उसे पिछले दो हफ़्तों से चाहत थी। उसे अपनी बहन के साथ की सारी मस्ती याद आ गई। उसने कल्पना की कि वह उस सेठ से कैसे चुद रही होगी। वह उसकी मस्त जवानी का मज़ा ले रहा होगा। वह सचमुच बहुत दुखी था और अपनी सेक्सी माँ सुंदरी पर गुस्सा हो रहा था। उस मादरचोद माँ ने ही पैसों के लिए महक को अपनी चूत का कौमार्य भंग करवाने के लिए उकसाया था और वह भी दुसरे कोई धनपति के द्वारा। परम अपने आप पर भी उतना ही गुस्से में था उसका मन यह मानने को तैयार ही नहीं था की उसकी बहन किसी और के सामने अपना पैर फैलाए और वह अजनबी उसकी चूत को फाड़े। यह शायद उसके लिए असहनीय था। उसी समय सुंदरी भी अपने आप को कोस रही थी की यह उसके द्वारा लिया गया सब से गन्दा काम था। वह “अब” नहीं चाहती थी की कोई अजनबी उसकी बेटी की चूत और गांड से खेले। हाँ वह एक व्याभिचार (इन्सेस्ट) में मानती थी और वह चाहती थी की महक उसके पापा की बनी रहे और वह खुले आम अपने विचारो से अपने पैर मनपसंद आदमी के लिए खुले रखे। पर पैसा उसके लिए महत्त्व था और उसीका नतीजा यह था की आज उसकी बेटी उसकी मरजी से किसी और के लंड को अपने में समा रही थी। मैत्री और नीता की रचना

वह यही सब सोच रहा था कि तभी उसने पूनम के पिता और उसकी छोटी बहन को वहाँ से गुजरते देखा। उन्होंने भी उसे देखा और रुक गए। जैसे ही परम ने पूनम की छोटी बहन पूमा (असली नाम पूर्णिमा) को देखा, वह सब कुछ भूल गया। वह महक, छोटी बहू और सुंदरी को भी भूल गया। वह उसकी खूबसूरती पर मंत्रमुग्ध हो गया। हालाँकि उसने पूमा को पहले भी देखा था, लेकिन उसने कभी ध्यान नहीं दिया था। लेकिन अब, जब उसने उसे अच्छे कपड़े पहने और थोड़ा सा मेकअप किए देखा, तो वह उससे प्यार करने लगा और उसने उससे शादी करने का फैसला कर लिया।

वह कितनी मनमोहक सुंदरी थी। पुमा एक पतली लड़की थी, अपनी बहन पूनम वाह से दो साल छोटी थी, जिसे कल रात बाप (मुनीम) और बेटे दोनों ने चोदा था। जब परम उनसे बात कर रहा था तो वह सुधा के सामने मुनीम के मोटे और बड़े सुपारे से अपनी चूत भरवा रही थी। परम ने पुमा और उसके पिता के साथ खुशियों का आदान-प्रदान किया। वह खुद को रोक नहीं सका।

परम ने पुमा के गाल को सहलाते हुए पूछा कि वे लोग कह जा रहे हैं। परम ने बताया कि वो सेठजी के काम से बाजार आया था और करीब दो घंटे के बाद वापस सेठजी के घर जाएगा। बात करते करते परम पुमा के गालो को सहलाता रहा और पुमा की नजरें नीचे की हुई खड़ी रही। पुमा के पापा ने परम को डांटा कि वो उनके घर आता नहीं है और कहा कि वो भी एक दोस्त के घर 'पूजा' में जा रहे हैं और वहां से वापस आने के लिए 1.5 से 2 घंटे लग जाएंगे। परम उनकी बात सुनता रहा और पुमा को घूरता रहा।

पुमा अभी कच्ची कली थी। उसकी चुची टमाटर के आकार की है। फ्रॉक के ऊपर से छोटी चुचियों का कसाव साफ़ साफ़ दिख रहा था। परम का मन किया कि हाथ बढ़ा कर उन चुचियों को मसल डाले। परम ने पुमा को आंखो से ही चोदना चालू किया। पतली कमर और घुटनों के ऊपर टाइट निचली जांघ को देखकर परम का लंड पैंट के नीचे धमाल करने लगा था। उसके कपडे हलका और खुला था इस लिए पुमा के पापा को और पुमा को पैंट के नीचे से लंड का कसाव नहीं दिखाई दिया।

कल रात ही परम ने पुमा की बड़ी बहन पूनम को चोदा था और उसकी टाइट और मस्त चूत का मजा रात भर लिया था लेकिन अब परम का मन कर रहा था कि वही पुमा को नंगी कर पूरा का पूरा लंड उसकी टाइट चूत में घुसेड़ डाले। पुमा की अनदेखी और टाइट चूत के बारे मे सोचते-सोचते परम को लगा कि उसके लंड फाड़ कर बहार निकल आएगा। परम ने पुमा के गालो पर से हाथ हटा कर उसकी कंधे पर रख कर थोड़ा जोर से दबाया। पुमा ने आंखें उठाई कर परम को देखा और मुस्कुराइ। और अपने पापा की ओर देखा। पापा भी परम की हरकत देख ही रहे थे पर उनके मुंह पर ऐसा गुस्सेवाला कोई भाव नहीं था क्योकि वह इस हरकत को सामान्यरूप से ले रहा था। उसे क्या पता की परम के मन में क्या चल रहा है और वह इस हरकत क्यों कर रहा है। लेकिन कब तक!

परम तो पुमा की प्यारी प्यारी आँखों को देखता ही रहता अगर पुमा का पापा उसका हाथ पकड़ कर आगे नहीं बढ़ता। जाते समय उसने परम को बताया कि पुमा की माँ घर पर अकेली है और अगर परम के पास कोई काम नहीं है तो वह उनके लौटने तक उसके साथ समय बिता सकता है।

दोनों चले गए और परम अकेले रह गया। उसे सेठजी के घर वापस जाना था, सुंदरी को अपने साथ लेना था और महक को लेना था और उसके बाद ही उसे घर जाना था। वह सेठजी के घर वापस जा सकता था और बहू और रेखा दोनों के साथ कुछ मस्ती करने की कोशिश कर सकता था लेकिन उसने पुमा के घर जाने का फैसला किया। उसने पुमा की मां से अपने मन की बात कहने का फैसला किया कि वह पुमा से शादी करेगा।

उसके पैर अपने आप ही पुमा के घर की तरफ चल पड़े। परम ने उसे उसके पति और पुमा से हुई अपनी छोटी सी मुलाक़ात के बारे में बताया। पुष्पा कमरे में एक चारपाई पर बैठ गई और परम को बैठने को कहा। परम ने उसके पास कुर्सी खींच ली। वे बातें करने लगे और अचानक परम बोला,

"काकी, पुमा से मेरी शादी करा दो.."

काकी ज़ोर से हँस पड़ीं। “अरे बेटा, पुमा तो अभी बच्ची है, कच्ची कली है…लेकिन अब तक तू पूनम के पीछे पागल था…मुझे पता है।”

“काकी, तुम तो जानती हो, पूनम और रेखा दोनों ने मुझसे शादी करने से मना कर दिया है…साली कहती है कि मैं उनके लिए बहुत छोटा हूँ…” परम ने कहा और जोड़ा..

"पुमा तो मुझसे छोटी है...मैं उससे ही शादी करूंगा..."

परम कुर्सी से उतर गया और अपने घुटनों के बल उसके पैरों के पास फर्श पर बैठ गया। उसने दोनों हाथ उसकी जाँघों पर रखे और कहा,

“नहीं काकी, मुझे तो पूमा चाहिए…उससे ही शादी करूंगा…”
मैत्री और नता की रचना

काकी ने परम के बालों पर हाथ रखा और उसके बालों को सहलाया। बालो को सहलते सहलते काकी ने कहा,

“अरे बेटा, वो अभी कच्ची है, उसे पूरा जवान होने में 2-3 साल लगेंगे… तब बोलेगा तो मैं उससे तेरी शादी करवा दूंगी।”

काकी ने अपनी उंगलियों को परम के बालो में फंसाते हुए कहा “क्या पता तब तक पुमा किसी और को पसंद कर ले..।”

“कुछ भी हो… मैं इंतजार करूंगा और पुमा की जवानी का मजा मैं ही लूंगा… मैं ही उससे शादी करूंगा… वो बस मेरी ही है।”

परम को अब होश आया कि उसके हाथ काकी की मोटी और सख्त जाँघों पर हैं। वह कपड़ों, पेटीकोट और साड़ी के ऊपर से भी उसकी जाँघों की गर्मी महसूस कर सकता था.. पहले तो सामने नहीं थे, परम ने अभी काकी को ही चोदने का मन बनाया।

"जानती हो काकी, पुमा को देखते ही पता नहीं क्या हुआ, मेरा पूरा बॉडी टाइट हो गया है। लगता है पैंट फट जाएगा..।"

बोलते-बोलते परम ने अपने दोनों हाथों को काकी के जांघों के बीच डाल कर दबाया।
मैत्री और नीता की रचना

*******

रात का समय, घर में अकेली एक लड़का के साथ। पति-बेटियों के इतनी जल्दी आने और परम की इतनी सेक्सी बातों की उम्मीद नहीं थी। प्रतिक्रिया स्वरूप उसने अपनी जाँघें अलग कर दीं लेकिन साथ ही उसने अपनी जाँघों के अंदरूनी हिस्से को सहलाते हुए परम के हाथों को खींच लिया और उसे अपने घुटनों के ठीक ऊपर ही रहने दिया। परम की माँ, उसकी अच्छी सहेली थी और दोनों मौका मिलने पर खूब बातें करते थे।

पुष्पा (पुमा और पूनम की मां) को अच्छा लगा कि परम उसकी बेटी की तारीफ कर रहा है। और खास कर पुष्पा को परम के बात करने का तरीका अच्छा लगा। परम जिस तरह से उसकी जाँघो को मसल रहा था, पुष्पा को अच्छा लगा। पुमा के पापा तो दो-तीन बार चुची को दबाते थे, जांघों को सहलाते थे और चूत में लौड़ा घुसा कर खूब चुदाई करते थे। वो कभी मस्ती नहीं करते थे, जब पुष्प चाहते थे तो चुदाई के पहले कोई उसे घंटो सहलाए, मसले, चूमे, चाटे टब चुदाई करे..

लेकिन पुष्पा को अभी भी अपने पति से चुदवाने में वही मजा मिला था जो पहली बार की चुदाई में मिला था। चुदाई की बात सोचते ही पुष्पा की चूत पनिया गई और उसने परम के बालों को सहलाते हुए अपनी जांघों को झुका दिया। ऐसा करने में उसकी चुची परम के हेड से टकरा गई लेकिन तुरंत ही परम के हेड को ऊपर उठा दिया और कहा,

“अच्छा बता, पुमा मे क्या है जो तुम इतना गरम हो गए हो, जब की पूनम पूरी जवान और तैयार है, और अच्छा माल भी बन चुकी है।”

परम के हाथों को ऊपर पुष्पा ने अपना हाथ रखा हुआ था फिर भी परम ने अपने हाथों को पुष्पा की जांघों को ऊपर की तरफ बढ़ाया। पुष्पा का हाथ परम के हाथों को दबाया जा रहा है और परम को पुष्पा की टाइट और गुदाज़ जांघों का मज़ा मिल रहा है।

“मुझे पता नहीं, लेकिन उसको देखते ही मैं और मेरा नीचेवाला पूरा गर्म हो गया।”

परम हौले-हौले जांघो को मसल रहा था और पुष्पा को भी मजा आ रहा था। पुष्पा ने मन ही मन सोच लिया था कि वो परम को कपड़े के ऊपर से पूरा मजा लेने देगी, जहां भी हाथ लगाना चाहेगा, सहलाने देगी, उसने फैसला किया कि वो परम को अपनी नंगी चूची भी दिखाएगी लेकिन चूत नहीं.. परम ने सहलाते-सहलाते जांघो को बाहर की तरफ फैलाया और पहली बाद खुलकर कहा,

“काकी दोनो टैंगो को पूरा फैलाओ प्लीज़!”

पुष्पा ने एक पैर को उठाकर बिस्तर पर रख दिया और दूसरे पैर को नीचे ही लटका दिया।

“टांग को फैला कर क्या करेगा…?”
मैत्री और नीता की रचना

पुष्पा ने मुस्कुराते हुए पुछा,फिर पुछा,

“तू बोला नहीं! पूमा में तुम्हे क्या दिखाई दिया। जो इतना प्यार उमड़ पड़ा है तेरे दिल में और निचे भी!”

पुष्पा अब जैसे बैठी थी उसमें उसकी एक जांघें ऊर्ध्वाधर स्थिति में थीं और दूसरे जांघों के बिस्तर पर क्षैतिज (हॉरिजॉन्टल) स्थिति में थीं। परम ने अपने बाएं हाथ को क्षैतिज जांघों पर जांघों के केंद्र पर रखा और दाहिने हाथ से ऊर्ध्वाधर जांघों को ऊपर से नीचे तक सहलाने लगा।

"काकी तुम्हारी जाँघ (जाँघें) बहुत मस्त, भरी हुई और टाइट है और साथ में चिकनी भी। बिलकुल केला के अंगूठा (केले का तना) जैसा।"

और परम ने जोर से दोनों जांघों को मसल दिया।

"ISSSSSSSSSSSS। पुष्पा ने जोर से सिस्कारी मारी. "इतना जोर से मसला। बोल ना पुमा मे क्या देखा..जो भी तेरे मन में है वह सब बता, डर मत बेटे।"


“काकी, टमाटर के साइज़ की टाइट चुची, उसके गोरे और चिकनी गाल और उसकी चिकनी चिकनी जाँघें, मैंने उसकी चूत के बारे में सोचा है की वह मस्त माल होगी।“ उसने फिर से एक जांघों को बिल्कुल चूत के पास जोर से मसला कि पुष्पा की चूत भी खिंच गई।
आज के लिए बस इतना ही कल फिर से एक नए अपडेट के साथ आपके समक्ष हाजिर होंगी.............तब तक के लिए क्षमा................


शुभरात्री


।जय भारत
Nice update
 

Funlover

I am here only for sex stories No personal contact
16,559
25,109
259
Mam, aap thik to hai kal se koi khair khabar nahi hai. Itna lambe time aap gayab nahi rahte isliye puchha. Update late ho jay koi baat nahi magar apni presence show kare.

Ohh sorry dosto.....

Unfortunately I met with small accident so unable to attend.... And it will take another couple of days to recover. But I will try to resume here and post an update as soon as my fingers get able to type.

Till then, Please accept my apologies. Thank you in advance for all your high standard cooperation. See you soon.



ओह, सॉरे दोस्तो...

दुर्भागयवश मेरा एक छोटा सा एक्सिडेंट हो गया है, इसलिए मैं नहीं आ पाऊंगी... और मुझे ठीक होने में अभी 2 दिन और लगेंगे। लेकिन जैसे ही मेरी उंगलियां टाइप करें लायक हो जाएंगी, मैं यहां फिर से अपडेट पोस्ट करूंगी।

तब तक, कृपाया मेरी क्षमायाचना स्वीकार करें। आपके उच्च स्तर के सहयोग के लिए अग्रिम धन्यवाद। जल्दी ही फिर मिलेंगे.
 
Last edited:

prkin

Well-Known Member
5,622
6,465
189
Ohh sorry dosto.....

Unfortunately I met with small accident so unable to attend.... And it will take another couple of days to recover. But I will try to resume here and post an update as soon as my fingers get able to type.

Till then, Please accept my apologies. Thank you in advance for all your high standard cooperation. See you soon.



ओह, सॉरे दोस्तो...

दुर्भागयवश मेरा एक छोटा सा एक्सिडेंट हो गया है, इसलिए मैं नहीं आ पाऊंगी... और मुझे ठीक होने में अभी 2 दिन और लगेंगे। लेकिन जैसे ही मेरी उंगलियां टाइप करें लायक हो जाएंगी, मैं यहां फिर से अपडेट पोस्ट करूंगी।

तब तक, कृपाया मेरी क्षमायाचना स्वीकार करें। आपके उच्च स्तर के सहयोग के लिए अग्रिम धन्यवाद। जल्दी ही फिर मिलेंगे.

Aap thik ho jao. Yahan ki chinta na karein.
 

Mass

Well-Known Member
11,109
23,531
229
Ohh sorry dosto.....

Unfortunately I met with small accident so unable to attend.... And it will take another couple of days to recover. But I will try to resume here and post an update as soon as my fingers get able to type.

Till then, Please accept my apologies. Thank you in advance for all your high standard cooperation. See you soon.



ओह, सॉरे दोस्तो...

दुर्भागयवश मेरा एक छोटा सा एक्सिडेंट हो गया है, इसलिए मैं नहीं आ पाऊंगी... और मुझे ठीक होने में अभी 2 दिन और लगेंगे। लेकिन जैसे ही मेरी उंगलियां टाइप करें लायक हो जाएंगी, मैं यहां फिर से अपडेट पोस्ट करूंगी।

तब तक, कृपाया मेरी क्षमायाचना स्वीकार करें। आपके उच्च स्तर के सहयोग के लिए अग्रिम धन्यवाद। जल्दी ही फिर मिलेंगे.

Take care and get well soon!!

Funlover
 

supriya dave

New Member
70
135
33
Ohh sorry dosto.....

Unfortunately I met with small accident so unable to attend.... And it will take another couple of days to recover. But I will try to resume here and post an update as soon as my fingers get able to type.

Till then, Please accept my apologies. Thank you in advance for all your high standard cooperation. See you soon.



ओह, सॉरे दोस्तो...

दुर्भागयवश मेरा एक छोटा सा एक्सिडेंट हो गया है, इसलिए मैं नहीं आ पाऊंगी... और मुझे ठीक होने में अभी 2 दिन और लगेंगे। लेकिन जैसे ही मेरी उंगलियां टाइप करें लायक हो जाएंगी, मैं यहां फिर से अपडेट पोस्ट करूंगी।

तब तक, कृपाया मेरी क्षमायाचना स्वीकार करें। आपके उच्च स्तर के सहयोग के लिए अग्रिम धन्यवाद। जल्दी ही फिर मिलेंगे.
GET WELL SOON
 
Top