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परमने अपनी माँ की चूत को देखा। लंड और टाइट हो गया और फिर से जोर जोर से चोदने लगा। महक ने सुधा को चिल्लाने का मौका नहीं दिया। उसके मुँह को अपनी चूत पर दबाया। परम सुधा के चूत में धक्का लगता था और मजा महक को आ जाता था। सुंदरी कुछ देर देखती रही।

अब आगे...............

************


Update 16​



सुधा चूस तो रही थी महक की चूत को लेकिन उसका मुन सुंदरी की उठी हुई चूत में था। सुधा ने महक के चूत पर से मुँह हटाया ओर बोली;

“महक तू जरा हट जा,मुझे काकी का चूत का मजा लेने दे!”

महेक अभी भी संतुष्ट नहीं थी, उसने हाथ खींच लिया और बोली, “माँ जरा इस कुतिया को अपनी चूत चटा दे!”

“बेटा, चूत तो चूत है, मेरी हो या तेरी!”

“नहीं काकी, चुतरस का स्वाद हर चूत का अलग होता है। मैं और महक तो कभी भी एकदूसरे की चूत का स्वाद ले सकते है, लेकिन आप की चूत कब मिलेगी!”

“पर बेटी तुम सहेलिया एक दुसरे की चाटो और मजे करो,मेरी उतनी टाईट नहीं जितनी तुम लोगो की होती है।”

“काकी, आपको आपकी चूत की कीमत मालूम नहीं, जरा बाहर जाके देखो कितने लंड उबल रहे है आपकी चूत को छेदने के लिए!”

उसने अब जानबुज के जोड़ा: “उसमे मेरा बाप भी है जो आपकी चूत समज के ही मेरी माँ को चोदता है।“

“मम्मी,अब तुम्हारी चूत से उसका मुंह बंद करो।”
फनलवर की प्रस्तुति

हाँ यह भी ठीक है, किसी को बोलते बंद करना हो तो चूत एक मस्त हथियार है। उसने ठहाका लगाया और अपना घाघरा ऊपर उठा लिया।

सुंदरी ने अपनी योनि सुधा के मुँह के ऊपर रख दी, उसने सुंदरी की जाँघों को खींच लिया और योनि के पूरे त्रिकोण को मुँह में लेने की कोशिश की।

सुंदरी ने कहा, "सुधा, मेरी चूत को खा जाएगी तो तेरे काका चोदेगा किसको। तेरी माँ को!"

“तु चिंता क्यों करती है,” महक ने जवाब दिया “ये हरामजादी तो मेरा भाई और बाप दोनों का लंड खा चुकी है कुतिया।“

सुधा ने सुंदरी की खुली हुई चूत की पंखुड़ी को खींच लिया और जितना हो सके उतनी अंदर जाने की कोशिश करने लगी तभी सुधा को अच्छी तरह से परम के लंड चूत में पंप किया। सुंदरी ने सुधा का सिर अपनी जांघों के बीच दबाया और सुधा की चूत को चूसती रही आखिर सुधा थक गई और सुंदरी के होंठ गिर गइ। परम फिर भी सुधा को चोदता रहा और आख़िर में सुधा कि भूखी चूत को अपने रस से भर दिया।

वो सुधा के ऊपर चिपक कर लेट गया और सुधा के सिर को सुंदरी की चूत के ऊपर से हटा दिया और खुद अपनी माँ की चूत को चूसने लगा। सुंदरी ने चूत को ऊपर उछाला और परम के दोनों हाथों को खींचकर अपने बोबले पर रखा। परम अब सुधा के सामने माँ के बोब्लो को मसलने लगा माँ की चूत का मजा लेने लगा। करीब 10 मिनट तक बेटा और सुधा से चूत चटवाने के उनके दोनों के मुंह में अपना स्त्राव दिया, सुधा खुश हो गई हो ऐसा उसके चहरे से लग रहा था। वह बार अपनी जीभ से अपने होठो को बचे हुए सुंदरी की बुँदे साफ़ कर के चाट रही थी। लेकिनाभी भी वह सुंदरी के चूत खुरेद रही थी, जो भी माल मिले उसे गवाना नहीं चाहती थी।
फनलवर की पेशकश

आखिरकार सुंदरी ने धीरे से अपनी चूत को सुधा के मुंह से हटाया और सुंदरी उठ गई और बाथरूम की ओर चली गई। महक भी बहार चली गई थी। परम और सुधा चुम्मा चाटी करने लगे। सुधा ने कहा;

“परम मैं एक बार तुम दोनो बाप-बेटे से चुदवाना चाहती हूँ, देखना है कौन ज्यादा मजा देता है…तू या तेरा बाप।”

परमने पूछा कि “तेरे बाप ने तुझे चोदा की नहीं।“

“ना रे, साला रोज़ अपना लंड दिखता है लेकिन चुदाई नहीं करता है बेटीचोद…लेकिन तू बोल, तेरा लंड अपनी माँ सुंदरी की चूत में घुसेड़ा की नहीं?”

परम ने उठकर जवाब दिया, “ना रे जैसा तेरा बाप तुझको रोज लंड दिखाकर चुदाई नहीं करता है वैसे ही मेरी माँ भी चूत चटवाती है लेकिन चोदने नहीं देती। अभी अभी तो तूने देखा, माँ ने अपनी चूत सिकुड़ के चली गई और मेरा लंड तेरी चूत मार के संतोषी होक देख आराम से तेरे सामने झुक जो गया है।“

सुधा ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटा, ट्राई करते रहो,जल्दी चुदवाएगी कुतिया तेरे लंड से भी।” उसने परम का लंड दबाया और कहा;

“मुझे जाने दे, माँ ने जल्दी बुलाया था, पता नहीं क्यों!”

परम जानता है, क्यों? आज सुंदरी सुधा के बाप से चुदवायेगी और परम सुधा की माँ की गांड मारेगा। ।

अगले 10 मिनट में सभी तैयार हो गये। सुंदरी ने महेक को कुछ दिनों के लिए बारात के मनोरंजन के लिए विनोद के घर जाकर बात करने का निर्देश दिया। उसने कहा कि वह सुधा की माँ को सुधा और उसकी नौकरानी रिंकू को बारात में शामिल होने के लिए मना लेगी। महक बहुत खुश थी कि वह अपने प्रेमी विनोद के साथ समय बिता सकेगी। उसने सुधा को अपना साथ देने के लिए मना लिया। सुधा अपनी इच्छा के विरुद्ध महक के साथ चली गई और सुंदरी परम को सुधा के घर ले गई।

विनोद महक को देखकर खुश हुआ। वह उसे अपनी माँ और बहन के पास ले गया। उन्होंने बातचीत की और जब महक ने बारात के स्वागत के लिए ज़रूरी लड़कियों के बारे में बताया, तो वह भड़क गई।

“यह सेठजी साला, क्या समजता है अपने आप को? गाव के हर माल उसके है क्या?

"मेरे गाँव की लड़कियाँ रंडी नहीं हैं कि बारात का मनोरंजन करेंगी।“ लग तो रहा था की सही तरीके से गुस्से में नहीं बोल रही थी।

“और तू यहाँ उसकी दलाल बन के आई है क्या?” विनोद की माँ ने उसे पुकारते हुए कहा।

महक ने कहा “आंटीजी, ऐसा नहीं है, पर अब बारात आ ही रही है तो कुछ माल का बंदोबस्त किया हो तो अच्छा, ऐसा सेठजी सोच रहे थे और उन्हों ने मेरी माँ को कहा की थोडा ताज़ा माल जो अच्छे हो उनके लिए व्यव्श्था करे। माँ ने मुझे कहा तो मैं यहाँ आ गई आपसे मिलने को और बात करने के लिए। अगर आप ना चाहो तो कोई बात नहीं, वैसे सेठजी ने आपको भी आमंत्रित किया है और आपकी बड़ी लड़की को भी, अगर हो सके तो आप दोनों आके बाराती के लिए कुछ अपना पेश कर सके!”

आंटी हस दी और बोला “अच्छा है, साला ने मुझे आमंत्रण तो दिया। खेर तो तुम चाहती हो की मैं और मेरी बेटी बरातियो का स्वागत अपने माल दिखाके करे!”

महक की गांड थोड़ी फटी लेकिन अपनी बात को जोर देते हुए कहा :”अगर आंटी आप और बड़ी बेटी चाहे तो वरना नहीं। यहाँ इस गाँव में किसी पर कोई बंधन तो नहीं। यह आप अच्छे से जानती है। मैंने सिर्फ कोशिश की है।”

थोड़ी बहस के बाद वोनोद की माँ ने सहमती दे दी।

“सेठजी को बोल देना, मैं 5 नहीं, 10-10 माल (लड़कियाँ) सेठजी के पास भेज दूँगी। वो चाहे तो खुद भी सबका मज़ा लेले।" उसने वहीं विनोद और अपनी बेटी को निर्देश दिया कि वे जाए और जो मजदुर अपने लिए काम पर आये है वह मज़दूरों के बीच से अलग-अलग उम्र की 10 सेक्सी मालो (लड़कियों) को चुनें और शादी वाले दिन सुबह उन्हें सेठजी से मिलवाएँ।

महक और सुधा ने कुछ देर बातें कीं, कुछ नाश्ता किया और चली गईं। विनोद उनके साथ महक के घर गया। दरवाज़े पर ही सुधा ने माफ़ी मांगी और अपने घर चली गई।

महक ने अपने घर का दरवाज़ा खोला, चारों ओर देखा और विनोद को अपने साथ अंदर खींच लिया। उसने दरवाज़ा बंद किया और विनोद को उसी बिस्तर पर अपने ऊपर खींच लिया जहाँ पिछली सुबह विनोद ने सुंदरी और बड़ी बहू को चोदा था।
फनलवर की रचना है

महक: “क्या इरादा है मिस्टर?”

विनोद: “जो तेरा है उस से कही ज्यादा मेरा है।“और उसने महक के बोबले पर आक्रमण करने की कोशिश की पर महक हट गई।

महक: “साले तू बहोत चोदु किसम का है रे,सीधा माल पर हमला करता है।“

विनोद: “अब क्या करू जैसी माँ है वैसी बेटी है उसका माल भी तो चख ही लेना चाहिए!”

महक: साले तू मेरी माँ के पीछे क्यों पड़ा है? जब की उसकी बेटी का माल के पीछे नहीं है!”

विनोद: “देखो डार्लिंग, तेरी माँ के सपने हर कोई देखता है उसका माल सच में मस्त है और हर छोटा बड़ा उसकी चूत में सफ़र करना चाहेगा, लेकिन तुम भी तो कम नहीं है और दूसरी बात यह है की तेरी माँ को अगर चांस मिले तो चोद लू। तू तो मेरा ही माल है जब चाहे तुजे चोद सकता हु चाहे शादी के बाद ही सही।“

महक: “देखो विनोद माँ और बेटी को चोदना अच्छी बात नहीं है।” उसने अपने बोब्लो को फ्रॉक के ऊपर से ही थोडा सहलाया और विनोद को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश करती रही।

विनोद थोडा आगे बढ़ा और महक के बोब्लो पर हमला कर दिया। इस बार महक तैयार नहीं थी या फिर खुद ही वह हमले होने की राह देख रही थी। खेर जो भी हो विनोद के हाथ में उसका एक बोबला आ गया था और वह उसी को दबाने लगा।

महक ने सिर्फ एक छोटी सी सिसकारी दी और विनोद का हाथ पकड़ कर अपने दुसरे स्तन पर रख दिया।

“अब भोसडिके, इसको क्यों छोड़ रहा है मादरचोद! दो बोबले होते है लड़की के एक को दबाएगा तो दुसरे को दुःख नहीं होगा क्या?”

विनोद ने भी “ह्म्म्म” के साथ दुसरे बोबले को मसलना चालू कर दिया। और दोनों के होठ अब एक हो गए।

थोड़ी देर के बार महक थोडा खिसकी।

महक ने अपने फ्रॉक को उठाया और अपना माल विनोद के सामने दिखाया।

अब चिकना माल सामने था तो विनोद का लंड उसको सलामी देने लगा और अपनी पेंट को निचे कर दी अंडरवियर तो था ही नहीं तो उसके लंड ने महक की चूत के सामने आके उसको सलामी देने लगा।

विनोद: “देख, मेरा लंड अपने माल (चूत) को सलामी दे रहा है अब उसके जाने के लिए जगह बनाने दे मेरी जान!”

महक:”जल्दी है क्या! आराम से। यह माल तेरा ही है और होगा शादी के बाद तो बस यह लंड और मेरी चूत हर रोज अपनी लड़ाई करते रहेंगे।” कह कर महक ने अपनी चूत के फांको को थोडा फैलाया और विनोद के लंड को अपने हाथ में ले लिया।

विनोद ने भी उसे कपनी तरफ खिंचा और फिर से उसके होठो पर अपने होठ रख के एक कर दिया, दोनों प्रेमी एक दुसरे के होठो के रस चूसने लगे। उस दरमियान दोनों के हाथ भी एक दुसरे के गुप्तांगो को सहला रहे थे।

थोड़े समय के फोरप्ले के बाद दोनों में एक मस्त आग लगी हुई थी जो ठंडी होनी चाहिए थी। विनोद ने पहल करते हुए महक को बिस्तर पर लेटा दिया। जैसे ही महक बिस्तर पर लेती उसने अपनी टांगो को हवा में फैला दी और अपनी चूत को उजागर करते हुए प्रेमी का लंड को आमंत्रित कर दिया।

विनोद ने अपने लंड को सहलाते हुए महक को फ्रॉक उतारने का इशारा किया और महक उस इशारों पे चली गई। अपने आप को नंगा कर दिया और साथ ही उसने विनोद को भी नंगा कर दिया।

विनोद ने अपना लंड को चूत के द्वार पर रखा और एक धक्का मारा, लंड उसकी चूत को चीरते हुए बड़े आराम से अन्दर चला गया। विनोद को लगा की इतनी आसानी से उसकी माँ की भोस में भी नहीं गया था जितनी आसानी से महक की छोटी सी चूत में गया।

महक समज गई की वोनोद क्या सोच रहा था। उसने तुरंत कहा कब से चूत गीली पड़ी हुई है, बस तेरे इस लंड का इंतज़ार करती थी और झरती रही थी।

और थोड़ी देर में “फ्च्च्क, फच्चक” की मधुर आवाजे कमरे में गूंजने लगी।

इसके बाद विनोद ने महक ने उसे पूरी तरह से संतुष्ट किया। उन्होंने दो घंटे से ज़्यादा समय तक मज़े किए और थकने के बाद विनोद ने कसम खाई कि वह महक से ही शादी करेगा और वह भी बहुत जल्द। यह महक की अब तक की सबसे बेहतरीन चुदाई थी, उसके पिता द्वारा की गई चुदाई से भी थोडा अलग, क्यों की वह प्रेमी था। विनोद के साथ चुदाई में कुछ खास बात है, शायद उसने सोचा होगा कि उसकी चूत में लंड के तेज़ झटके के साथ विनोद ने उसके शरीर पर प्यार की बारिश कर दी थी। दोनों सो गए और तभी उठे जब उन्होंने दरवाजे पर ज़ोरदार दस्तक सुनी।


*******************


आज के लिए बस इतना ही, कल फिर एक नए एपिसोड के साथ मिलेंगे.


तब तक आप अपने मंतव्यो दे।.


। जय भारत
 
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परमने अपनी माँ की चूत को देखा। लंड और टाइट हो गया और फिर से जोर जोर से चोदने लगा। महक ने सुधा को चिल्लाने का मौका नहीं दिया। उसके मुँह को अपनी चूत पर दबाया। परम सुधा के चूत में धक्का लगता था और मजा महक को आ जाता था। सुंदरी कुछ देर देखती रही।

अब आगे...............

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Update 16​



सुधा चूस तो रही थी महक की चूत को लेकिन उसका मुन सुंदरी की उठी हुई चूत में था। सुधा ने महक के चूत पर से मुँह हटाया ओर बोली;

“महक तू जरा हट जा,मुझे काकी का चूत का मजा लेने दे!”

महेक अभी भी संतुष्ट नहीं थी, उसने हाथ खींच लिया और बोली, “माँ जरा इस कुतिया को अपनी चूत चटा दे!”

“बेटा, चूत तो चूत है, मेरी हो या तेरी!”

“नहीं काकी, चुतरस का स्वाद हर चूत का अलग होता है। मैं और महक तो कभी भी एकदूसरे की चूत का स्वाद ले सकते है, लेकिन आप की चूत कब मिलेगी!”

“पर बेटी तुम सहेलिया एक दुसरे की चाटो और मजे करो,मेरी उतनी टाईट नहीं जितनी तुम लोगो की होती है।”

“काकी, आपको आपकी चूत की कीमत मालूम नहीं, जरा बाहर जाके देखो कितने लंड उबल रहे है आपकी चूत को छेदने के लिए!”

उसने अब जानबुज के जोड़ा: “उसमे मेरा बाप भी है जो आपकी चूत समज के ही मेरी माँ को चोदता है।“

“मम्मी,अब तुम्हारी चूत से उसका मुंह बंद करो।”
फनलवर की प्रस्तुति

हाँ यह भी ठीक है, किसी को बोलते बंद करना हो तो चूत एक मस्त हथियार है। उसने ठहाका लगाया और अपना घाघरा ऊपर उठा लिया।

सुंदरी ने अपनी योनि सुधा के मुँह के ऊपर रख दी, उसने सुंदरी की जाँघों को खींच लिया और योनि के पूरे त्रिकोण को मुँह में लेने की कोशिश की।

सुंदरी ने कहा, "सुधा, मेरी चूत को खा जाएगी तो तेरे काका चोदेगा किसको। तेरी माँ को!"

“तु चिंता क्यों करती है,” महक ने जवाब दिया “ये हरामजादी तो मेरा भाई और बाप दोनों का लंड खा चुकी है कुतिया।“

सुधा ने सुंदरी की खुली हुई चूत की पंखुड़ी को खींच लिया और जितना हो सके उतनी अंदर जाने की कोशिश करने लगी तभी सुधा को अच्छी तरह से परम के लंड चूत में पंप किया। सुंदरी ने सुधा का सिर अपनी जांघों के बीच दबाया और सुधा की चूत को चूसती रही आखिर सुधा थक गई और सुंदरी के होंठ गिर गइ। परम फिर भी सुधा को चोदता रहा और आख़िर में सुधा कि भूखी चूत को अपने रस से भर दिया।

वो सुधा के ऊपर चिपक कर लेट गया और सुधा के सिर को सुंदरी की चूत के ऊपर से हटा दिया और खुद अपनी माँ की चूत को चूसने लगा। सुंदरी ने चूत को ऊपर उछाला और परम के दोनों हाथों को खींचकर अपने बोबले पर रखा। परम अब सुधा के सामने माँ के बोब्लो को मसलने लगा माँ की चूत का मजा लेने लगा। करीब 10 मिनट तक बेटा और सुधा से चूत चटवाने के उनके दोनों के मुंह में अपना स्त्राव दिया, सुधा खुश हो गई हो ऐसा उसके चहरे से लग रहा था। वह बार अपनी जीभ से अपने होठो को बचे हुए सुंदरी की बुँदे साफ़ कर के चाट रही थी। लेकिनाभी भी वह सुंदरी के चूत खुरेद रही थी, जो भी माल मिले उसे गवाना नहीं चाहती थी।
फनलवर की पेशकश

आखिरकार सुंदरी ने धीरे से अपनी चूत को सुधा के मुंह से हटाया और सुंदरी उठ गई और बाथरूम की ओर चली गई। महक भी बहार चली गई थी। परम और सुधा चुम्मा चाटी करने लगे। सुधा ने कहा;

“परम मैं एक बार तुम दोनो बाप-बेटे से चुदवाना चाहती हूँ, देखना है कौन ज्यादा मजा देता है…तू या तेरा बाप।”

परमने पूछा कि “तेरे बाप ने तुझे चोदा की नहीं।“

“ना रे, साला रोज़ अपना लंड दिखता है लेकिन चुदाई नहीं करता है बेटीचोद…लेकिन तू बोल, तेरा लंड अपनी माँ सुंदरी की चूत में घुसेड़ा की नहीं?”

परम ने उठकर जवाब दिया, “ना रे जैसा तेरा बाप तुझको रोज लंड दिखाकर चुदाई नहीं करता है वैसे ही मेरी माँ भी चूत चटवाती है लेकिन चोदने नहीं देती। अभी अभी तो तूने देखा, माँ ने अपनी चूत सिकुड़ के चली गई और मेरा लंड तेरी चूत मार के संतोषी होक देख आराम से तेरे सामने झुक जो गया है।“

सुधा ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटा, ट्राई करते रहो,जल्दी चुदवाएगी कुतिया तेरे लंड से भी।” उसने परम का लंड दबाया और कहा;

“मुझे जाने दे, माँ ने जल्दी बुलाया था, पता नहीं क्यों!”

परम जानता है, क्यों? आज सुंदरी सुधा के बाप से चुदवायेगी और परम सुधा की माँ की गांड मारेगा। ।

अगले 10 मिनट में सभी तैयार हो गये। सुंदरी ने महेक को कुछ दिनों के लिए बारात के मनोरंजन के लिए विनोद के घर जाकर बात करने का निर्देश दिया। उसने कहा कि वह सुधा की माँ को सुधा और उसकी नौकरानी रिंकू को बारात में शामिल होने के लिए मना लेगी। महक बहुत खुश थी कि वह अपने प्रेमी विनोद के साथ समय बिता सकेगी। उसने सुधा को अपना साथ देने के लिए मना लिया। सुधा अपनी इच्छा के विरुद्ध महक के साथ चली गई और सुंदरी परम को सुधा के घर ले गई।

विनोद महक को देखकर खुश हुआ। वह उसे अपनी माँ और बहन के पास ले गया। उन्होंने बातचीत की और जब महक ने बारात के स्वागत के लिए ज़रूरी लड़कियों के बारे में बताया, तो वह भड़क गई।

“यह सेठजी साला, क्या समजता है अपने आप को? गाव के हर माल उसके है क्या?

"मेरे गाँव की लड़कियाँ रंडी नहीं हैं कि बारात का मनोरंजन करेंगी।“ लग तो रहा था की सही तरीके से गुस्से में नहीं बोल रही थी।

“और तू यहाँ उसकी दलाल बन के आई है क्या?” विनोद की माँ ने उसे पुकारते हुए कहा।

महक ने कहा “आंटीजी, ऐसा नहीं है, पर अब बारात आ ही रही है तो कुछ माल का बंदोबस्त किया हो तो अच्छा, ऐसा सेठजी सोच रहे थे और उन्हों ने मेरी माँ को कहा की थोडा ताज़ा माल जो अच्छे हो उनके लिए व्यव्श्था करे। माँ ने मुझे कहा तो मैं यहाँ आ गई आपसे मिलने को और बात करने के लिए। अगर आप ना चाहो तो कोई बात नहीं, वैसे सेठजी ने आपको भी आमंत्रित किया है और आपकी बड़ी लड़की को भी, अगर हो सके तो आप दोनों आके बाराती के लिए कुछ अपना पेश कर सके!”

आंटी हस दी और बोला “अच्छा है, साला ने मुझे आमंत्रण तो दिया। खेर तो तुम चाहती हो की मैं और मेरी बेटी बरातियो का स्वागत अपने माल दिखाके करे!”

महक की गांड थोड़ी फटी लेकिन अपनी बात को जोर देते हुए कहा :”अगर आंटी आप और बड़ी बेटी चाहे तो वरना नहीं। यहाँ इस गाँव में किसी पर कोई बंधन तो नहीं। यह आप अच्छे से जानती है। मैंने सिर्फ कोशिश की है।”

थोड़ी बहस के बाद वोनोद की माँ ने सहमती दे दी।

“सेठजी को बोल देना, मैं 5 नहीं, 10-10 माल (लड़कियाँ) सेठजी के पास भेज दूँगी। वो चाहे तो खुद भी सबका मज़ा लेले।" उसने वहीं विनोद और अपनी बेटी को निर्देश दिया कि वे जाए और जो मजदुर अपने लिए काम पर आये है वह मज़दूरों के बीच से अलग-अलग उम्र की 10 सेक्सी मालो (लड़कियों) को चुनें और शादी वाले दिन सुबह उन्हें सेठजी से मिलवाएँ।

महक और सुधा ने कुछ देर बातें कीं, कुछ नाश्ता किया और चली गईं। विनोद उनके साथ महक के घर गया। दरवाज़े पर ही सुधा ने माफ़ी मांगी और अपने घर चली गई।

महक ने अपने घर का दरवाज़ा खोला, चारों ओर देखा और विनोद को अपने साथ अंदर खींच लिया। उसने दरवाज़ा बंद किया और विनोद को उसी बिस्तर पर अपने ऊपर खींच लिया जहाँ पिछली सुबह विनोद ने सुंदरी और बड़ी बहू को चोदा था।
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महक: “क्या इरादा है मिस्टर?”

विनोद: “जो तेरा है उस से कही ज्यादा मेरा है।“और उसने महक के बोबले पर आक्रमण करने की कोशिश की पर महक हट गई।

महक: “साले तू बहोत चोदु किसम का है रे,सीधा माल पर हमला करता है।“

विनोद: “अब क्या करू जैसी माँ है वैसी बेटी है उसका माल भी तो चख ही लेना चाहिए!”

महक: साले तू मेरी माँ के पीछे क्यों पड़ा है? जब की उसकी बेटी का माल के पीछे नहीं है!”

विनोद: “देखो डार्लिंग, तेरी माँ के सपने हर कोई देखता है उसका माल सच में मस्त है और हर छोटा बड़ा उसकी चूत में सफ़र करना चाहेगा, लेकिन तुम भी तो कम नहीं है और दूसरी बात यह है की तेरी माँ को अगर चांस मिले तो चोद लू। तू तो मेरा ही माल है जब चाहे तुजे चोद सकता हु चाहे शादी के बाद ही सही।“

महक: “देखो विनोद माँ और बेटी को चोदना अच्छी बात नहीं है।” उसने अपने बोब्लो को फ्रॉक के ऊपर से ही थोडा सहलाया और विनोद को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश करती रही।

विनोद थोडा आगे बढ़ा और महक के बोब्लो पर हमला कर दिया। इस बार महक तैयार नहीं थी या फिर खुद ही वह हमले होने की राह देख रही थी। खेर जो भी हो विनोद के हाथ में उसका एक बोबला आ गया था और वह उसी को दबाने लगा।

महक ने सिर्फ एक छोटी सी सिसकारी दी और विनोद का हाथ पकड़ कर अपने दुसरे स्तन पर रख दिया।

“अब भोसडिके, इसको क्यों छोड़ रहा है मादरचोद! दो बोबले होते है लड़की के एक को दबाएगा तो दुसरे को दुःख नहीं होगा क्या?”

विनोद ने भी “ह्म्म्म” के साथ दुसरे बोबले को मसलना चालू कर दिया। और दोनों के होठ अब एक हो गए।

थोड़ी देर के बार महक थोडा खिसकी।

महक ने अपने फ्रॉक को उठाया और अपना माल विनोद के सामने दिखाया।

अब चिकना माल सामने था तो विनोद का लंड उसको सलामी देने लगा और अपनी पेंट को निचे कर दी अंडरवियर तो था ही नहीं तो उसके लंड ने महक की चूत के सामने आके उसको सलामी देने लगा।

विनोद: “देख, मेरा लंड अपने माल (चूत) को सलामी दे रहा है अब उसके जाने के लिए जगह बनाने दे मेरी जान!”

महक:”जल्दी है क्या! आराम से। यह माल तेरा ही है और होगा शादी के बाद तो बस यह लंड और मेरी चूत हर रोज अपनी लड़ाई करते रहेंगे।” कह कर महक ने अपनी चूत के फांको को थोडा फैलाया और विनोद के लंड को अपने हाथ में ले लिया।

विनोद ने भी उसे कपनी तरफ खिंचा और फिर से उसके होठो पर अपने होठ रख के एक कर दिया, दोनों प्रेमी एक दुसरे के होठो के रस चूसने लगे। उस दरमियान दोनों के हाथ भी एक दुसरे के गुप्तांगो को सहला रहे थे।

थोड़े समय के फोरप्ले के बाद दोनों में एक मस्त आग लगी हुई थी जो ठंडी होनी चाहिए थी। विनोद ने पहल करते हुए महक को बिस्तर पर लेटा दिया। जैसे ही महक बिस्तर पर लेती उसने अपनी टांगो को हवा में फैला दी और अपनी चूत को उजागर करते हुए प्रेमी का लंड को आमंत्रित कर दिया।

विनोद ने अपने लंड को सहलाते हुए महक को फ्रॉक उतारने का इशारा किया और महक उस इशारों पे चली गई। अपने आप को नंगा कर दिया और साथ ही उसने विनोद को भी नंगा कर दिया।

विनोद ने अपना लंड को चूत के द्वार पर रखा और एक धक्का मारा, लंड उसकी चूत को चीरते हुए बड़े आराम से अन्दर चला गया। विनोद को लगा की इतनी आसानी से उसकी माँ की भोस में भी नहीं गया था जितनी आसानी से महक की छोटी सी चूत में गया।

महक समज गई की वोनोद क्या सोच रहा था। उसने तुरंत कहा कब से चूत गीली पड़ी हुई है, बस तेरे इस लंड का इंतज़ार करती थी और झरती रही थी।

और थोड़ी देर में “फ्च्च्क, फच्चक” की मधुर आवाजे कमरे में गूंजने लगी।

इसके बाद विनोद ने महक ने उसे पूरी तरह से संतुष्ट किया। उन्होंने दो घंटे से ज़्यादा समय तक मज़े किए और थकने के बाद विनोद ने कसम खाई कि वह महक से ही शादी करेगा और वह भी बहुत जल्द। यह महक की अब तक की सबसे बेहतरीन चुदाई थी, उसके पिता द्वारा की गई चुदाई से भी थोडा अलग, क्यों की वह प्रेमी था। विनोद के साथ चुदाई में कुछ खास बात है, शायद उसने सोचा होगा कि उसकी चूत में लंड के तेज़ झटके के साथ विनोद ने उसके शरीर पर प्यार की बारिश कर दी थी। दोनों सो गए और तभी उठे जब उन्होंने दरवाजे पर ज़ोरदार दस्तक सुनी।


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आज के लिए बस इतना ही, कल फिर एक नए एपिसोड के साथ मिलेंगे.


तब तक आप अपने मंतव्यो दे।.


। जय भारत

बहुत ही कामुक और जबरदस्त अपडेट दिया है ! विनोद बहुत कमीना है बेटी के सामने ही माँ के लिए बोल रहा है !

बहुत अच्छा लिख रहे हैं आप 👏🏻👏🏻👏🏻
 

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कहानी को आगे बढ़ाते हुए एक अच्छा अपडेट लिखा है । जैसा कि प्रतीक्षा थी सुधा और सुन्दरी का लेस्बियन देखने को मिला मगर महक और विनोद का यू अचानक मिलन ने पाठकों को चौंका दिया है । मगर राइटर बदलने से इस अपडेट में वो मजा नही आया । कहानी का एक फ्लो था वो टूट गया है । ऊपर से बहुत सारे शब्दों की अशुद्धियों ने अर्थ का अनर्थ और कन्फ्यूज़ कर दिया है कि क्या अर्थ निकाले क्या समझे । सच कहूँ तो महक और विनोद वाले सीन में कुछ भी समझ नही आया कि लेखिका क्या लिखना चाहती है क्या समझाना चाहती है । पढ़ते हुए सर खुजलाते रहे हम तो । यह अपडेट आपकी विशेषताओं के बिल्कुल विपरीत है । उत्कृष्ट से निकृष्ट है । आपका लिखा अपडेट दुर्भाग्य से डिलीट हो जाने से शायद आपने दूसरे राइटर से जल्दबाजी में लिखवा लिया था । इससे मामला गड़बड़ा गया है । मुझे मानिए तो इस अपडेट को सुधार कर फिर से लिखिए । और जरूरी नही की हर हाल में रोज ही अपडेट दिया जाय । क़्वालिटी बनाये रखना जरूरी है चाहे टाइम लग जाये । आप टाइम ले लेते तो ये गड़बड़ नही होती । अगले अपडेट का इंतजार रहेगा । राइटर का बहुत बहुत धन्यवाद ।
मुझे बहुत खेद है कि यह एपिसोड आपकी नज़र से उभरा नहीं जा रहा। आपकी आकांक्षाओं को मिल ने सफल नहीं किया।


वैसे तो इस एपिसोड के जारी हम अब शादी की तरफ बढ़ने की शुरुआत मात्र थी।


हर एपिसोड की ज़िम्मेदारी मैं लेती हूँ। अच्छा हो या बुरा, सब के लिए मैं ही जवाबदार हूँ।


आगे से बेहतर करने की कोशिश करेंगे। अब हम रेखा की शादी और चलेंगे, हां धीरे-धीरे।

जहां आप कन्फ्यूज्ड हो रहे हैं, मुझे हाइलाइट कर दीजिए, कोशिश करूंगी हर असमंजस से निवारण करने की।


बहुत अच्छा लगा कि आपने एपिसोड उम्मीद से काफी नीचे स्टार पर दिया।


आगे ध्यान रखेंगे.

आभार आपका.
 

Funlover

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जी सही कहा आपने. लेकिन एक बात जरूर है कि जब मर्यादा नहीं रहती तब शर्म या किसी भी प्रकार की मर्यादा नहीं रहती।

Shukriya dost.
बहुत ही कामुक और जबरदस्त अपडेट दिया है ! विनोद बहुत कमीना है बेटी के सामने ही माँ के लिए बोल रहा है !

बहुत अच्छा लिख रहे हैं आप 👏🏻👏🏻👏🏻
 

Ek number

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परमने अपनी माँ की चूत को देखा। लंड और टाइट हो गया और फिर से जोर जोर से चोदने लगा। महक ने सुधा को चिल्लाने का मौका नहीं दिया। उसके मुँह को अपनी चूत पर दबाया। परम सुधा के चूत में धक्का लगता था और मजा महक को आ जाता था। सुंदरी कुछ देर देखती रही।

अब आगे...............

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Update 16​



सुधा चूस तो रही थी महक की चूत को लेकिन उसका मुन सुंदरी की उठी हुई चूत में था। सुधा ने महक के चूत पर से मुँह हटाया ओर बोली;

“महक तू जरा हट जा,मुझे काकी का चूत का मजा लेने दे!”

महेक अभी भी संतुष्ट नहीं थी, उसने हाथ खींच लिया और बोली, “माँ जरा इस कुतिया को अपनी चूत चटा दे!”

“बेटा, चूत तो चूत है, मेरी हो या तेरी!”

“नहीं काकी, चुतरस का स्वाद हर चूत का अलग होता है। मैं और महक तो कभी भी एकदूसरे की चूत का स्वाद ले सकते है, लेकिन आप की चूत कब मिलेगी!”

“पर बेटी तुम सहेलिया एक दुसरे की चाटो और मजे करो,मेरी उतनी टाईट नहीं जितनी तुम लोगो की होती है।”

“काकी, आपको आपकी चूत की कीमत मालूम नहीं, जरा बाहर जाके देखो कितने लंड उबल रहे है आपकी चूत को छेदने के लिए!”

उसने अब जानबुज के जोड़ा: “उसमे मेरा बाप भी है जो आपकी चूत समज के ही मेरी माँ को चोदता है।“

“मम्मी,अब तुम्हारी चूत से उसका मुंह बंद करो।”
फनलवर की प्रस्तुति

हाँ यह भी ठीक है, किसी को बोलते बंद करना हो तो चूत एक मस्त हथियार है। उसने ठहाका लगाया और अपना घाघरा ऊपर उठा लिया।

सुंदरी ने अपनी योनि सुधा के मुँह के ऊपर रख दी, उसने सुंदरी की जाँघों को खींच लिया और योनि के पूरे त्रिकोण को मुँह में लेने की कोशिश की।

सुंदरी ने कहा, "सुधा, मेरी चूत को खा जाएगी तो तेरे काका चोदेगा किसको। तेरी माँ को!"

“तु चिंता क्यों करती है,” महक ने जवाब दिया “ये हरामजादी तो मेरा भाई और बाप दोनों का लंड खा चुकी है कुतिया।“

सुधा ने सुंदरी की खुली हुई चूत की पंखुड़ी को खींच लिया और जितना हो सके उतनी अंदर जाने की कोशिश करने लगी तभी सुधा को अच्छी तरह से परम के लंड चूत में पंप किया। सुंदरी ने सुधा का सिर अपनी जांघों के बीच दबाया और सुधा की चूत को चूसती रही आखिर सुधा थक गई और सुंदरी के होंठ गिर गइ। परम फिर भी सुधा को चोदता रहा और आख़िर में सुधा कि भूखी चूत को अपने रस से भर दिया।

वो सुधा के ऊपर चिपक कर लेट गया और सुधा के सिर को सुंदरी की चूत के ऊपर से हटा दिया और खुद अपनी माँ की चूत को चूसने लगा। सुंदरी ने चूत को ऊपर उछाला और परम के दोनों हाथों को खींचकर अपने बोबले पर रखा। परम अब सुधा के सामने माँ के बोब्लो को मसलने लगा माँ की चूत का मजा लेने लगा। करीब 10 मिनट तक बेटा और सुधा से चूत चटवाने के उनके दोनों के मुंह में अपना स्त्राव दिया, सुधा खुश हो गई हो ऐसा उसके चहरे से लग रहा था। वह बार अपनी जीभ से अपने होठो को बचे हुए सुंदरी की बुँदे साफ़ कर के चाट रही थी। लेकिनाभी भी वह सुंदरी के चूत खुरेद रही थी, जो भी माल मिले उसे गवाना नहीं चाहती थी।
फनलवर की पेशकश

आखिरकार सुंदरी ने धीरे से अपनी चूत को सुधा के मुंह से हटाया और सुंदरी उठ गई और बाथरूम की ओर चली गई। महक भी बहार चली गई थी। परम और सुधा चुम्मा चाटी करने लगे। सुधा ने कहा;

“परम मैं एक बार तुम दोनो बाप-बेटे से चुदवाना चाहती हूँ, देखना है कौन ज्यादा मजा देता है…तू या तेरा बाप।”

परमने पूछा कि “तेरे बाप ने तुझे चोदा की नहीं।“

“ना रे, साला रोज़ अपना लंड दिखता है लेकिन चुदाई नहीं करता है बेटीचोद…लेकिन तू बोल, तेरा लंड अपनी माँ सुंदरी की चूत में घुसेड़ा की नहीं?”

परम ने उठकर जवाब दिया, “ना रे जैसा तेरा बाप तुझको रोज लंड दिखाकर चुदाई नहीं करता है वैसे ही मेरी माँ भी चूत चटवाती है लेकिन चोदने नहीं देती। अभी अभी तो तूने देखा, माँ ने अपनी चूत सिकुड़ के चली गई और मेरा लंड तेरी चूत मार के संतोषी होक देख आराम से तेरे सामने झुक जो गया है।“

सुधा ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटा, ट्राई करते रहो,जल्दी चुदवाएगी कुतिया तेरे लंड से भी।” उसने परम का लंड दबाया और कहा;

“मुझे जाने दे, माँ ने जल्दी बुलाया था, पता नहीं क्यों!”

परम जानता है, क्यों? आज सुंदरी सुधा के बाप से चुदवायेगी और परम सुधा की माँ की गांड मारेगा। ।

अगले 10 मिनट में सभी तैयार हो गये। सुंदरी ने महेक को कुछ दिनों के लिए बारात के मनोरंजन के लिए विनोद के घर जाकर बात करने का निर्देश दिया। उसने कहा कि वह सुधा की माँ को सुधा और उसकी नौकरानी रिंकू को बारात में शामिल होने के लिए मना लेगी। महक बहुत खुश थी कि वह अपने प्रेमी विनोद के साथ समय बिता सकेगी। उसने सुधा को अपना साथ देने के लिए मना लिया। सुधा अपनी इच्छा के विरुद्ध महक के साथ चली गई और सुंदरी परम को सुधा के घर ले गई।

विनोद महक को देखकर खुश हुआ। वह उसे अपनी माँ और बहन के पास ले गया। उन्होंने बातचीत की और जब महक ने बारात के स्वागत के लिए ज़रूरी लड़कियों के बारे में बताया, तो वह भड़क गई।

“यह सेठजी साला, क्या समजता है अपने आप को? गाव के हर माल उसके है क्या?

"मेरे गाँव की लड़कियाँ रंडी नहीं हैं कि बारात का मनोरंजन करेंगी।“ लग तो रहा था की सही तरीके से गुस्से में नहीं बोल रही थी।

“और तू यहाँ उसकी दलाल बन के आई है क्या?” विनोद की माँ ने उसे पुकारते हुए कहा।

महक ने कहा “आंटीजी, ऐसा नहीं है, पर अब बारात आ ही रही है तो कुछ माल का बंदोबस्त किया हो तो अच्छा, ऐसा सेठजी सोच रहे थे और उन्हों ने मेरी माँ को कहा की थोडा ताज़ा माल जो अच्छे हो उनके लिए व्यव्श्था करे। माँ ने मुझे कहा तो मैं यहाँ आ गई आपसे मिलने को और बात करने के लिए। अगर आप ना चाहो तो कोई बात नहीं, वैसे सेठजी ने आपको भी आमंत्रित किया है और आपकी बड़ी लड़की को भी, अगर हो सके तो आप दोनों आके बाराती के लिए कुछ अपना पेश कर सके!”

आंटी हस दी और बोला “अच्छा है, साला ने मुझे आमंत्रण तो दिया। खेर तो तुम चाहती हो की मैं और मेरी बेटी बरातियो का स्वागत अपने माल दिखाके करे!”

महक की गांड थोड़ी फटी लेकिन अपनी बात को जोर देते हुए कहा :”अगर आंटी आप और बड़ी बेटी चाहे तो वरना नहीं। यहाँ इस गाँव में किसी पर कोई बंधन तो नहीं। यह आप अच्छे से जानती है। मैंने सिर्फ कोशिश की है।”

थोड़ी बहस के बाद वोनोद की माँ ने सहमती दे दी।

“सेठजी को बोल देना, मैं 5 नहीं, 10-10 माल (लड़कियाँ) सेठजी के पास भेज दूँगी। वो चाहे तो खुद भी सबका मज़ा लेले।" उसने वहीं विनोद और अपनी बेटी को निर्देश दिया कि वे जाए और जो मजदुर अपने लिए काम पर आये है वह मज़दूरों के बीच से अलग-अलग उम्र की 10 सेक्सी मालो (लड़कियों) को चुनें और शादी वाले दिन सुबह उन्हें सेठजी से मिलवाएँ।

महक और सुधा ने कुछ देर बातें कीं, कुछ नाश्ता किया और चली गईं। विनोद उनके साथ महक के घर गया। दरवाज़े पर ही सुधा ने माफ़ी मांगी और अपने घर चली गई।

महक ने अपने घर का दरवाज़ा खोला, चारों ओर देखा और विनोद को अपने साथ अंदर खींच लिया। उसने दरवाज़ा बंद किया और विनोद को उसी बिस्तर पर अपने ऊपर खींच लिया जहाँ पिछली सुबह विनोद ने सुंदरी और बड़ी बहू को चोदा था।
फनलवर की रचना है

महक: “क्या इरादा है मिस्टर?”

विनोद: “जो तेरा है उस से कही ज्यादा मेरा है।“और उसने महक के बोबले पर आक्रमण करने की कोशिश की पर महक हट गई।

महक: “साले तू बहोत चोदु किसम का है रे,सीधा माल पर हमला करता है।“

विनोद: “अब क्या करू जैसी माँ है वैसी बेटी है उसका माल भी तो चख ही लेना चाहिए!”

महक: साले तू मेरी माँ के पीछे क्यों पड़ा है? जब की उसकी बेटी का माल के पीछे नहीं है!”

विनोद: “देखो डार्लिंग, तेरी माँ के सपने हर कोई देखता है उसका माल सच में मस्त है और हर छोटा बड़ा उसकी चूत में सफ़र करना चाहेगा, लेकिन तुम भी तो कम नहीं है और दूसरी बात यह है की तेरी माँ को अगर चांस मिले तो चोद लू। तू तो मेरा ही माल है जब चाहे तुजे चोद सकता हु चाहे शादी के बाद ही सही।“

महक: “देखो विनोद माँ और बेटी को चोदना अच्छी बात नहीं है।” उसने अपने बोब्लो को फ्रॉक के ऊपर से ही थोडा सहलाया और विनोद को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश करती रही।

विनोद थोडा आगे बढ़ा और महक के बोब्लो पर हमला कर दिया। इस बार महक तैयार नहीं थी या फिर खुद ही वह हमले होने की राह देख रही थी। खेर जो भी हो विनोद के हाथ में उसका एक बोबला आ गया था और वह उसी को दबाने लगा।

महक ने सिर्फ एक छोटी सी सिसकारी दी और विनोद का हाथ पकड़ कर अपने दुसरे स्तन पर रख दिया।

“अब भोसडिके, इसको क्यों छोड़ रहा है मादरचोद! दो बोबले होते है लड़की के एक को दबाएगा तो दुसरे को दुःख नहीं होगा क्या?”

विनोद ने भी “ह्म्म्म” के साथ दुसरे बोबले को मसलना चालू कर दिया। और दोनों के होठ अब एक हो गए।

थोड़ी देर के बार महक थोडा खिसकी।

महक ने अपने फ्रॉक को उठाया और अपना माल विनोद के सामने दिखाया।

अब चिकना माल सामने था तो विनोद का लंड उसको सलामी देने लगा और अपनी पेंट को निचे कर दी अंडरवियर तो था ही नहीं तो उसके लंड ने महक की चूत के सामने आके उसको सलामी देने लगा।

विनोद: “देख, मेरा लंड अपने माल (चूत) को सलामी दे रहा है अब उसके जाने के लिए जगह बनाने दे मेरी जान!”

महक:”जल्दी है क्या! आराम से। यह माल तेरा ही है और होगा शादी के बाद तो बस यह लंड और मेरी चूत हर रोज अपनी लड़ाई करते रहेंगे।” कह कर महक ने अपनी चूत के फांको को थोडा फैलाया और विनोद के लंड को अपने हाथ में ले लिया।

विनोद ने भी उसे कपनी तरफ खिंचा और फिर से उसके होठो पर अपने होठ रख के एक कर दिया, दोनों प्रेमी एक दुसरे के होठो के रस चूसने लगे। उस दरमियान दोनों के हाथ भी एक दुसरे के गुप्तांगो को सहला रहे थे।

थोड़े समय के फोरप्ले के बाद दोनों में एक मस्त आग लगी हुई थी जो ठंडी होनी चाहिए थी। विनोद ने पहल करते हुए महक को बिस्तर पर लेटा दिया। जैसे ही महक बिस्तर पर लेती उसने अपनी टांगो को हवा में फैला दी और अपनी चूत को उजागर करते हुए प्रेमी का लंड को आमंत्रित कर दिया।

विनोद ने अपने लंड को सहलाते हुए महक को फ्रॉक उतारने का इशारा किया और महक उस इशारों पे चली गई। अपने आप को नंगा कर दिया और साथ ही उसने विनोद को भी नंगा कर दिया।

विनोद ने अपना लंड को चूत के द्वार पर रखा और एक धक्का मारा, लंड उसकी चूत को चीरते हुए बड़े आराम से अन्दर चला गया। विनोद को लगा की इतनी आसानी से उसकी माँ की भोस में भी नहीं गया था जितनी आसानी से महक की छोटी सी चूत में गया।

महक समज गई की वोनोद क्या सोच रहा था। उसने तुरंत कहा कब से चूत गीली पड़ी हुई है, बस तेरे इस लंड का इंतज़ार करती थी और झरती रही थी।

और थोड़ी देर में “फ्च्च्क, फच्चक” की मधुर आवाजे कमरे में गूंजने लगी।

इसके बाद विनोद ने महक ने उसे पूरी तरह से संतुष्ट किया। उन्होंने दो घंटे से ज़्यादा समय तक मज़े किए और थकने के बाद विनोद ने कसम खाई कि वह महक से ही शादी करेगा और वह भी बहुत जल्द। यह महक की अब तक की सबसे बेहतरीन चुदाई थी, उसके पिता द्वारा की गई चुदाई से भी थोडा अलग, क्यों की वह प्रेमी था। विनोद के साथ चुदाई में कुछ खास बात है, शायद उसने सोचा होगा कि उसकी चूत में लंड के तेज़ झटके के साथ विनोद ने उसके शरीर पर प्यार की बारिश कर दी थी। दोनों सो गए और तभी उठे जब उन्होंने दरवाजे पर ज़ोरदार दस्तक सुनी।


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आज के लिए बस इतना ही, कल फिर एक नए एपिसोड के साथ मिलेंगे.


तब तक आप अपने मंतव्यो दे।.


। जय भारत
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