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Incest मुझे प्यार करो,,,

rohnny4545

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बहुत ही मस्त लाजवाब और शानदार मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गया
अरे ये क्या साला राहुल ही फस गया सुगंधा की बात करके अंकित ने उसे उसी की चाल में फसाकर नुपूर को राहुल के सामने चोदने का जुगाड कर लिया
बडा ही जबरदस्त
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
Dhanyawad dost

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Try and fail. But never give up trying
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Sanju@

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आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था,,, लेकिन मां बेटे दोनों की आंखों में नींद कोसों दूर नजर आ रही थी,,, दोनों बस जानबूझकर एक दूसरे को नींद में होने का बहाना बनाकर उलझा रहे थेसुगंधा अच्छी तरह से जानते थे कि जिस तरह की वार्तालाप मां बेटे के बीच हुई थी जिस तरह से उसका बेटा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था उसे देखते हुए उसे नींद आने वाली नहीं है और इसी का फायदा उठाकर वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो चुकी थी,,,उसे काफी जोर से पेशाब भी लगी हुई थी और बड़े देर से लगी हुई थी लेकिन शायद इसी समय के लिए वह अपने पेशाब को रोक कर रखी हुई थी ताकि सही समय पर इसका सही उपयोग कर सके,,,, अपनी युक्ति को आजमाने में भी उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था इस तरह से वहां कई बार अपने मन मेंउठ रही युक्ति को अपने बेटे पर आजमा चुकी थी और उसका असर भी वह अच्छी तरह से देख चुकी थी।





अंकित लेटा हुआ था,,, अंकित को लग रहा था कि उसकी मां को ऐसा लग रहा है कि वह सो रहा है और सिर्फ वह सोने का नाटक कर रहा था जबकि उसकी मां को अच्छी तरह से मालूम था कि उसका बेटा जाग रहा है बस वह सोने का नाटक कर रहा है,,,, और वैसे भी जिस तरह की हरकत वह करने जा रही थी ऐसे में अंकित का जागते रहना बेहद जरूरी है क्योंकि उसे मूड में होने से वह अपनी हरकत को अंजाम नहीं दे सकती थी,,,वैसे तो उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी और उसका पेशाब करना भी बेहद जरूरी था अगर अंकित गहरी नींद में सो रहा होता तो भीसहज रूप से उसका पेशाब करना जरूरी था लेकिन तब कोई मायने नहीं रह जाता सिर्फ उसे राहत महसूस होती ,उत्तेजना नहीं ,मदहोशी नहीं,,,, और एक मां के लिए कितनी शर्मसार कर देने वाली बात होती है जब वह वासना में युक्त होकर अपने बेटे के सामने इस तरह की हरकत करती है जिससे उसका खूबसूरत अंग नग्न अवस्था में उसके बेटे को देखने को मिल जाएएक अजीब सी हलचल उसके मन में होती है और इस समय वही हलचल वही शर्मसार कर देने वाला असर सुगंधा के तन बदन में महसूस हो रहा था,,, उसका दिल जोरो से धड़क रहा थाशांत वातावरण में उसके चूड़ियों की खनक और पायल की झनक वातावरण में एक मादकता सा भर दे रहे थे,,,अपनी मां की चूड़ियों की खनखन की आवाज अंकित के कानों में एकदम साफ सुनाई दे रहा था और वह इस आवाज को सुनकर मदहोश हुआ जा रहा था उसकी उत्तेजना चरम शिखर पर पहुंच चुकी थी।






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आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा है था लेकिनवातावरण में अंधेरा नहीं था क्योंकि चांदनी रात थी चांदनी रात में सब कुछ दिखाई दे रहा था,,, वैसे तो वासना की पूर्ति के लिए लोग अंधेरी रात का ही चयन करते हैं लेकिन इस समय हालात कुछ और थे और सुगंधा अपनी वासना की पूर्ति के लिए चांदनी रात का चयन की थीऔर उसे इस बात की खुशी थी कि इस समय अंधेरा बिल्कुल भी नहीं था चांदनी रात की चांदनी भरी उजाले में उसकी हरकत उसके बेटे को अच्छी तरह से देखने को मिलेगी। इसकी भारी भरकम गोरी गोरी गांड चांदनी रात में चमकती हुई उसके बेटे को दिखाई देगी और वह अच्छी तरह से जानते थे कि इस अद्भुत नजारे को देखकर उसके बेटे के तन बदन में वासना का तूफान उठने लगेगा वह देखना चाहती थी कि इसके बाद उसका बेटा क्या करता है,,,। अपने अंदर उठ रहे वासना को तूफान को कैसे शांत करता है यही देखने के लिए वह अंदर ही अंदर तड़प रही थी,,,,।






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अपनी युक्ति को आजमाने के लिए तो उसके तन-बदन मेंउत्तेजना की लहर उठ तो रही थी मदहोश हो रही थी लेकिन वह अपने आप से एक सवाल भी कर रही थी कि जब वह इतना कुछ करने को तैयार है तो क्यों नहीं एक कदम आगे बढ़ाकर खुद क्यों नहीं अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से पकड़ लेती,,,क्यों नहीं अपने बेटे से कह देती कि बस अब रहा नहीं जाता डाल दिया अपने लंड को मेरी बुर में और बन जा मादरचोद,,,, मत डर किसी से भी ना मुझसे ना समझ सकेकोई तेरा साथ देने वाला नहीं है तुझे अपनी जरूरत को मेरे साथ ही पूरी करनी पड़ेगी मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तू भी मुझे चोदने के लिए तड़प रहा है तेरा लंड मेरी बुर में जाने के लिए मचल रहा है,,, तो आज मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को तोड़ दे गिरा दे मर्यादा की दीवार को और समा जा मेरे अंदर,,,, बुझा दे अपनी मां की जवानी की प्यास,,,, बरसों से तेरी मां बिस्तर पर तड़प रही है बरसों से तेरी मां की बुर में लंड नहीं गया,,,, मैं तेरे लिए छिनार बनने को तैयार हूं तु भी मेरे लिए मादरचोद बन जा,,,,, सुगंधा अपने मन में इस तरह की बात तो को बार-बार सोचती थीबार-बार उसके मन में इस तरह के सवाल उठाते थे कि इतना कुछ होने के बावजूद भी अपने बेटे से इतना क्यों नहीं कह पा रही है जिसे दोनों का रास्ता आसान हो जाए दोनों अपनी मंजिल तक पहुंच पाए,,,।






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इस तरह का सवाल मन में बार-बारउठना देखकर वह खुद ही अपने सवालों का जवाब अपने आप को देते हुए बोलती थी कि नहीं ऐसा करना उचित नहीं है उसका बेटा उसके बारे में क्या सोचेगा कहीं ऐसा ना हो कि उसकी हरकत से उसका बेटा उसे छिनार कह दे रंडी का कर पुकारने लगेऔर वैसे भी इस तरह के हालात चल रहे हैं एक न एक दिन उसका बेटा इस तरह के शब्दों का प्रयोग करने वाला है लेकिन इस समय उसके पहल से मामला पूरी तरह से उसके पक्ष में नहीं होगा उसके बेटे को नाहक ही इस बात की शंका होने लगेगी क्योंकि जब उसकी मां अपने बेटे के सामने इतना बेशर्मी दिखा रही है तो,, बाहर न जाने कितने लोगों से चुदवाती होगी,,,, बस इसी बात का डर सुगंधा के मन में रहता था और इसीलिए वह इतना कुछ हो जाने के बावजूद भी, खुले शब्दों में अपने बेटे से कुछ कह नहीं पाती थी। और इसीलिए दिन रात तड़पती रहती थी,,,,।





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धीरे-धीरे सुगंधा अपनी गांड मटकाते हुए छत के कोने तक पहुंच चुकी थी,,, इसकी भारी भरकम बड़ी-बड़ी गांड कसी हुई साड़ी पहनने की वजह से कुछ ज्यादा ही उभरी हुई नजर आती थी और वह जानबूझकर अपनी गांड मटका कर चल रही थी क्योंकि वह जानती थी तो उसका बेटा देख रहा है अंकित अपनी मां की हरकत को उसके खूबसूरत नजारे को पीठ के बल लेटकर हल्की खुली नजरों से देख रहा था,, पल पल अपनी मां की हरकत देख कर अंकित का दील जोरों से धड़का था,,। सोचने को तो अंकित भी बहुत कुछ सोच रहा था और इस समय भी अपनी मां को देखकर उसके मन में ढेर सारी भावनाएं उमड़ रही थी,,, वह भी जानता था कि उसके उसकी मां के बीच बहुत सारी बातें हो चुकी थी और ऐसी बातें जो मां बेटे के बीच संभव नहीं है ऐसी बातें केवल पति पत्नी और प्रेमी प्रेमिका के बीच ही संभव होती है,,,, और वह अपनी मां की बातों के मतलब को अच्छी तरह से समझता था। सुषमा आंटी और अपनी नानी की चुदाई करने के बाद वह औरतों का अच्छी तरह से समझने लगा थावह अपनी मां के कहने का मतलब कुछ इस तरह से समझ रहा था वह जानता था कि उसकी मां का भी हाल पड़ोस की सुषमा आंटी और उसकी नानी की तरह ही है उसकी मां को भी मोटा तगड़ा लंड चाहिए,,,,।लेकिन पहल करने से उसे भी इस बात का डर था कि उसकी मां उसके बारे में क्या सोचेगी,,,, वह भी यही सोचेगी कि उसका बेटा उसेगंदी नजर से देखा है और इसमें सच्चाई भी है और उसकी मां को पता भी है लेकिन जाहिर करने में या पहल करने में उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां उसे गलत ना समझने लगेऔर सब कुछ हालात पर उसने छोड़ दिया था कि जो कुछ भी होगा वह हालात पर निर्भर करेगा।




अंकित का दिल जोरों से धड़कने लगा था क्योंकि उसकी मां अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ ली थीऔर अंकित को इस बात का आभास हो गया था कि अब क्या होने वाला है अंकित की आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था अपनी मां को कई बार नग्न अवस्था में देखने के बावजूद भीवह इस समय भी अपनी मां को कमर से नीचे नंगी होते हुए देखने के लिए तड़प रहा था। अौर सुगंधा जो उसका बेटा देखना चाहता था उसे वही नजारा दिखाने के लिए खुद उत्सुक थी। और इसके लिए उसने अपनी कमर कस ली थी,,, अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी को पकड़कर वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी,,,और यह नजारा देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी खूबसूरत नाटक के शुरू होने के पहले पर्दा ऊपर उठ रहा हो लेकिन यहां पर इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए दर्शक के रूप में केवल उसका बेटा ही था,,,, उसे ही अपनी मां की मदमस्त जवान देखकर शोर मचाना था सिटी बजाना था उसका हौसला बढ़ाना था और यह सब कुछ करने के लिए अंकित तैयार था लेकिन फर्क इतना था की नाटक देखकर लोग जोर-जोर से तालियां बजाते हैं सीटियां बजाते हैं यहां पर अंकित को सिर्फ अपनी आंखों का सहारा लेना था अपने हाथ का सहारा लेना था जितना खूबसूरत उत्तेजक नजर उतनी अत्यधिक मादकता भरी अंकित की हरकत होनी थी,,, और इसके लिए अंकित पूरी तरह से तैयार था।




अंकित की आंखों के सामने उसकी दुनिया की सबसे खूबसूरत हसीन औरत खड़ी थीजो अपने हाथों से अपनी साड़ी पकड़कर ऊपर की तरफ उठा रही थी,,, सुगंधा धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठा रही थी और देखते ही देखते उसकी खूबसूरत मांसल चिकनी पिंडलियां दिखाई देने लगी थी,,,, अंकित के होश उड़ते चले जा रहे थे अंकित अपनी आंखों को सेंक रहा था,,,,, वातावरण मेंठंडक का एहसास था लेकिन अपनी आंखों के सामने गरमा गरम दृश्य देखकर उसके माथे से पसीना टपक रहा था,,,देखते ही देखते सुगंध अपनी साड़ी को अपनी मोटी मोटी जांघों तक उठा दी थी उसकी मोटी मोटी जांघें केले के तने के समान दिखाई दे रही थी,, जिसे देख कर पेट के अंदर अंकित का लंड पूरी तरह से अकड़ने लगा था। अंकित को अब हल्का-हल्का अपने लंड में दर्द महसूस होने लगा था,,, क्योंकि जब से मां बेटे छत पर आए थे तब से अंकित का लंड खड़ा का खड़ा ही था वह बिल्कुल भी शांत होकर बैठा नहीं था। सुगंधा भी अपने बेटे को तिल तिल तडपा रही थी।और उसे ऐसा करने में बेहद आनंद की अनुभूति होती थी उसे अच्छा लगता था जब उसका बेटा उसकी नंगी जवानी देखकर तड़प उठता था।

जांघों तक अपनी साड़ी उठाकरसुगंधा यह तसल्ली कर लेना चाहती थी उसका बेटा उसे देख रहा है कि नहीं इसलिए वह हल्के से अपनी नजर पीछे घूमाकर अपने बेटे की तरफ देखने लगी चांदनी रात में सबको साथ दिखाई दे रहा थाऔर पीछे देखने के बाद उसके चेहरे पर प्रश्न आता के भाव में जलने लगे वह इस बात से खुश हो गई कि उसका बेटा उसे ही देख रहा था और अंकित अपनी मां की नजरों को देखकर तुरंत अपनी आंखों को बंद कर लिया था और अपनी आंखों को बंद किए हुए हैं वह अपने मन में सोच रहा था कि,,, उसकी मां उसकी तरफ क्यों देख रही है,,,वह तय नहीं कर पा रहा था कि उसकी मां यह देखने के लिए पीछे नजर घुमा कर देख रही है की कही वह जाग तो नहीं रहा है या फिर यह देखने के लिए की वह गहरी नींद में सो तो रहा है ना जब तो नहीं रहा है यही अंकित अब समझ नहीं पा रहा था,,, और कुछ देर तक अपनी आंखों को बंद किए रहा,,,हालांकि अंकित का दिल बड़ी जोरों से धड़कता है उसके दिल की धड़कन बड़ी रफ्तार से चल रही थी। अपनी मां की मदमस्त जवानी की गर्मी का असर उसे अपने बदन में अच्छी तरह से महसूस हो रहा था उसके माथे से पसीना टपक रहा था,,,कुछ देर खामोश रहने के बाद अपनी आंखों को बंद किए रहने के बाद वह धीरे से अपनी आंखों को खोलकर फिर से छत के कोने की तरफ देखने लगा जहां पर उसकी मां साड़ी को अभी भी जांघों तक उठाए खड़ी थी।



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अंकित का दिमाग ठनक रहा था,,क्योंकि वह जानता था की औपचारिक रूप से जब कोई औरत पेशाब करने जाती है तो तुरंत अपनी साड़ी कमर तक उठकर बैठ जाती है लेकिन उसकी मां अभी भी खड़ी थी साड़ी जांघों तक उठाएं, जिसका मतलब साफ था कि उसकी मां उसे ही दिखाने के लिए यह सब पैंतरा रच रही थी लेकिन यह बात उसे समझ में नहीं आ रही थी कि उसकी मां को तो ऐसा ही लग रहा था कि बस सो रहा है फिर वह ऐसा क्यों कर रही हैफिर अपने ही सवाल का बात खुद जवाब देते हो बोला कि शायद किसी तरह से वह सोच रही है कि अंकित जाग जाए और उसे पेशाब करते हुए देख ले क्योंकि गंदी किताब में जिस तरह का वर्णन था,,, इस किताब के बारे में दोनों के बीच देर तक बातचीत हुई थी शायद किसी का असर उसके दिलों दिमाग पर छाया हुआ था,,यह सब सोचने के बाद अंकित अपने मन में सोचा कि चलो चाहे जो भी हो, उसकी मां को एहसास नहीं होना चाहिए कि वह जाग रहा है। इसलिए वह फिर से कर नजरों से अपनी मां की तरफ देखने लगा, अंकित सोने के कुछ देर पहले ही अपने बदन पर चादर डाल लिया था इसलिए वह निश्चित था,, आंखों के सामने का नजारा पूरी तरह से गर्माहट पकड़ लिया था।





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सुगंधा अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दी थी उसकी नंगी बड़ी-बड़ी गांड एकदम साफ दिखाई दे रही थी और अंकित के लिए हैरानी की बात यह थी कि उसकी मां साड़ी के नीचे चड्डी नहीं पहनी थी,,,, अंकित को अच्छी तरह से याद था कि दोपहर में उसकी मां चड्डी पहनी थी लेकिन पंखा साफ करने से पहले अपनी चड्डी उतार दी थी और उसके बाद उसे खूबसूरत नजारा देखने को मिला था और उसमें से टपका हुआ मदन रस का स्वाद भी चखने को मिला था,,, उसके बाद वह नहाई भी थी लेकिन यह नहीं मालूम था कि नहाने के बाद वह चड्डी पहनी थी कि नहीं लेकिनआप अपनी आंखों के सामने अपनी मां को बिना चड्डी में देखकर सबको साफ हो गया था कि नहाने के बाद भी उसकी मां चड्डी नहीं पहनी थीएक औरत का इस तरह से साड़ी के अंदर चड्डी ना पहनना मर्द के लिए वाकई में उत्तेजित कर देने वाली बात होती है। और इस समय वही हो रहा था,,,सुगंधा अपने बेटे की आंखों के सामने कमर तक साड़ी उठाएं अपनी नंगी गांड दिखाते हुए खरीदी उसे बड़े जोरों के पेशाब लगी हुई थी लेकिन वह पूरा नजारा दिखा देना चाहती थी अपने बेटे को।





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चांदनी रात की चांदनी में सुगंध की चमकती हुई गांड अंकित के होश उड़ा रहे थे सुगंधा भी अपने बेटे की उत्तेजना को बढ़ाने के लिए,,अपनी दोनों हथेलियां को अपनी नंगी गांड पर रख कर हकीकत कैसे ला रही थी मानो कि जैसे अपने बेटे को इशारा कर रही हो अपने पास बुलाने के लिए,,,,वैसे तो सुगंध अपने बेटे को पहल करने के लिए अपनी तरफ से सारे हथकंडे अपना चुकी थी लेकिन,, अंकित भी टस से मस नहीं हो रहा था और वह भी केवल अपनी मां के लिए ही बाकी सुमन की मां और राहुल की मां के साथ वह अपनी तरफ से आगे बढ़ चुका था राहुल की मां के घर में जब डाइनिंग टेबल पर राहुल के पिताजी आ चुके थे तब वह धीरे से डाइनिंग टेबल के नीचे जाकर छुप कर राहुल की मां की बुर को तब तक चाटता रहा था जब तक की उसका पानी न निकल गया था,,, और सुमन की मां के साथ वह अपनी तरफ से ही मनमानी किया था,,, दोपहर में जब उसके घर आई थी तब वह राहुल की तरफ आकर्षित हुई थी लेकिन वह सुमन की मां की हरकतों को अच्छी तरह से समझ गया था और उसके साथमनमानी करते हुए उसकी चुदाई कर दिया था जिससे सुमन की मां भी बेहद प्रसन्न नजर आ रही थी लेकिन अपनी मां की सारी हरकतों को जानने के बावजूद भी वह अपनी मां के साथ ऐसा नहीं कर पा रहा था पहल नहीं कर पा रहा था यही उसकी भी सबसे बड़ी विवसता थी।,,,






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सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था उसकी बुर पानी छोड़ रही थी पेशाब निकलने से पहले उसकी बुर से मदन रस का बहाव लगातार हो रहा था जो उसकी जांघों को भीगो रहा था,,,, सुगंधा भी तिल तिल तड़प रही थी,,,, इस समय सुगंधा को बड़ी जोरों की पेशाब लग चुकी थी उससे अपनी पेशाब की तीव्रताबिल्कुल भी काबू में नहीं हो रही थी क्योंकि वहां पेशाब लगे हुए कुछ ज्यादा ही समय गुजर चुके थे इसलिए वह तुरंत एकदम से अपनी गांड अपने बेटे की तरफ लहराते हुए नीचे बैठ गई,,,और अंकित अपनी मां की ईस हरकत पर पूरी तरह से पानी पानी हो गया था,, वह तुरंत चादर के अंदर से ही अपने लंड को अपने पेंट के ऊपर से जोर से पकड़ लिया और उसे दबाने लगा और अगले ही पलअंकित के कानों में उसकी मां की बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज सुनाई देने लगी जो कि इसे शांत वातावरण में कुछ ज्यादा ही शोर मचा रही थी,,,अंकित अपनी मां की बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज को सुनकर उसकी मधुर ध्वनि को सुनकर पूरी तरह से मदहोश होने लगा था इस ध्वनी को वह पहले भी कई बार सुन चुका था जो कि उसकी मां की बुर से ही निकलती थी,,,, और यही उसे अपनी मां को नग्न अवस्था में देखने के लिए प्रेरित करता था।अंकित की सांस बड़ी तेजी से चल रही थी और वह धड़कते दिन के साथ अपनी मां को पेशाब करते हुए देख रहा था और सुगंध भी अपने बेटे की उत्तेजना को बढ़ाने के लिए अपने दोनों हथेलियां को अपनी भारी भरकम गांड पर रखकर हल्के हल्के सहला रही थी और मुत रही थी,,,,





सुगंधा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटाउसे पेशाब करता हुआ देखकर उसके मन में उसे चोदने की भावना जाती है लेकिन वह झूठ बोल रहा था कि ऐसी कोई भावना उसके मन में नहीं जाती क्योंकि वह अपने बेटे की हरकत को उसकी हालत को अच्छी तरह से गौर से देखी थी जब वह पेशाब करती थी,, और इस समय भी उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसके बेटे की भावनाएं उमड रही होगी उसे चोदने के लिए उसे पाने के लिए,,,, और यही तो वह चाहती थी,,,काफी देर से पेशाब रोके रहने की वजह से बड़े देर तक उसकी बुर से पेशाब की धार फूट रही थीऔर उसके शोर में पूरा वातावरण मदहोश हुआ जा रहा था लेकिन इसे दूर से निकलती हुई मधुर ध्वनि को सुनने वाला केवल इस समय उसका बेटा ही था और वह उसे ही सिर्फ सुनाना चाहती थी,,पहले जब मां बेटे में किसी भी प्रकार का शारीरिक आकर्षण नहीं था तब कभी जब बाथरूम मेंसुगंधा पेशाब करने के लिए बैठी थी तो अपने बेटे की मौजूदगी में अपने पर से निकलने वाली सिटी की आवाज को दबाने की कोशिश करती थी कि उसके बेटे को यह आवाज सुनाई ना दे लेकिन आज आलम और माहौल इस तरह का बन चुका है की वजह खोज कर अपने बेटे को दूर से निकलने वाली सिटी की आवाज को सुनाना भी चाहती थी और पेशाब करते हुए उसे दिखाना भी चाहती थी।

अपनी मां को पेशाब करता हुआ देखकर अंकित जोर-जोर से पेंट के ऊपर से अपने लंड को दबा रहा था मसल रहा था,,,और ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति भी हो रही थी क्योंकि उसकी आंखों के सामने इस समय उसकी मां पेशाब कर रही थी और अपनी मां को पेशाब करता हुआ देखकर इस तरह की हरकत करने में जो आनंद मिलता है वह किसी और चीज में नहीं मिलता इस बात का एहसास अंकित को अच्छी तरह से था। इसलिए तो इस तरह की क्रिया करने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,, लेकिन देखते ही देखते हैं बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज कमजोर पड़ने लगी उसका शोर मचाना कम होने लगा,, जो कि इस बात का संकेत था की सुगंधा की पेशाब का जत्था कम हो रहा था। देखते ही देखते सुगंधा की बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज एकदम से बंद हो गई और उनकी समझ गया कि उसकी मां पेशाब कर चुकी है,,,, अंकित अपनी मां की गोल-गोल गांड को देखकर एकदम चुदवासा हुआ जा रहा था,,, पेशाब कर लेने के बाद सुगंधा अपनी गांड को झटकने लगीऐसा करके वह अपनी बुर में फंसी हुई पेशाब की आखिरी बुंद को भी निकाल देना चाहती थी,,,, और ऐसा करने के बाद वह धीरे से खड़ी हो गईअंकित को लग रहा था कि उसकी मां एक खूबसूरत नाटक पर फिर से पर्दा गिरा देगी लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था उसकी मां उसी तरह से अपनी सारी कमर तक उठाए खड़ी थी अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां अभी भी ऐसा क्यों की है।





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फिर सुगंधा इस हालत में साड़ी कमर तक उठाए हुए ही छत की दूसरी तरफ जो की पास में ही पानी भर लोटा रखा हुआ था वह लोटे को उठाई और उसमें से पानी पीने लगी लेकिन इस बीच भी वह साड़ी कमर तक उठाए हुए थी,,,,अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां ऐसा क्यों कर रही है और वह पानी पीने के बाद लोटे को नीचे रख दी और फिर अंकित की तरफ देखने लगी और जैसे ही सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखी अंकित तुरंत अपनी आंखों को बंद कर लिया मानो कि जैसे गहरी नींद में सो रहा हो,,,, अपने बेटे की हरकत देखकर सुगंधा मन ही मन में मुस्कुराते हुए मन में ही बोली,,, वाह बेटा कितना शरीफ बनने का नाटक कर रहा है बस इशारा मिल जाए तो अभी बुर में लंड पेल दे,,,,,, चलो कोई बात नहीं यही तो मैं चाहती हूं,,,,,और अपने मन में ऐसा कहते हुए वह साड़ी कमर तक उठाए हुए ही अपने बेटे की पास कदम बढ़ाने लगी और बिस्तर के पास पहुंचकर,,,, मुस्कुराई और साड़ी कमर तक उठाए हुए ही लेट गई,,,, अंकित को अपनी मां के अपने पास होने का एहसास हो रहा था उसका बिस्तर तककरीब आना उसके चूड़ियों की खनक से उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसकी मां बिस्तर पर लेट चुकी थी लेकिन वह आंख खोलने से डर रहा था कि कहीं उसकी मां उसे देख ना ले,,,,।





तकरीबन आधा घंटा गुजर चुका था किसी भी तरह की हलचल उसे अपनी मां की तरफ से महसूस नहीं हो रही थी तो उसे यकीन होकर की उसकी मां सो गई है और वह धीरे से अपनी आंख खोल औरअपनी नजरों को अपनी मां की तरफ घूम कर देखा तो उसके होश उड़ गई उसकी मां दूसरी तरफ करवट लेकर लेटी हुई थी और हैरान कर देने वाली बात यह थी कि अभी भी उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी कमर के नीचे वह एकदम नंगी थी,,,, यह नजाराअंकित के लिए बेहद असहनीय था पल भर के लिए उसे लगाकर यह नजारा देखकर उसके लंड से पानी फेंक देगा लेकिन किसी तरह से वह अपने आप को संभाल ले गया था,,,,हालत अब बिल्कुल भी अंकित के काबू में नहीं था उसकी आंखों के सामने उसके बगल में एक ही चटाई पर उसकी खूबसूरत मदहोसी से भरी हुई मां कमर के नीचे एकदम नंगी होकर लेटी हुई उसकी भारी भरकम गांड ईतने करीब से देख कर अंकित की हालत खराब हो रही थी‌।लेकिन यह जानना चाहता था की गहरी नींद में है कि नहीं और यही देखने के लिए वह धीरे से बोला,,,।

मम्मी,,,, ओ मम्मी,,,,, मम्मी जाग रही हो कि सो रही है,,,,,,।
(सुगंधा की तरफ से कोई भी आवाज नहीं आई कोई भी जवाब नहीं आया वह जाग रही थी लेकिन गहरी नींद में होने का नाटक कर रही थी उसका दिल भी जोरों से धड़क रहा थाएक बार अपनी मां को आवाज लगाने के बाद वह फिर से पूरी तरह से तसल्ली कर लेना चाहता थाइसलिए इस बार वह अपना हाथ आगे बढ़कर अपनी मां के कंधे पर रखकर उसे हल्के से हिलाते हुए बोला)




मम्मी ,,,,,मम्मी सो गई हो क्या,,,,,

(लेकिन इस बार भी सुगंधा की तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं हुई तो उसकी आंखों में वासना की चमक नजर आने लगी उसकी आंखों के सामने उसकी मां की नंगी गांड थी और वगैरह लिखते सो रही थी यह मौका उसे पहले कभी मिला नहीं था आजइस अद्भुत नजारे को इस अद्भुत पल को महसूस करके वह पूरी तरह से मदहोश हो जा रहा था वह अपने आप में बिल्कुल भी नहीं था,,,,वह धीरे से अपने ऊपर से चादर हटाया उसकी मां उससे एक फिट की दूरी पर सो रही थी बस उसके करवट लेने की देरी थी और अंकित भी अपनी मां के बदन से सट जाता,,,, अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था वह अपने ऊपर से चादर हटाकर अपनी मां की तरफ देखता रहा अभी भी उसके बदन में किसी भी प्रकारकी प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी किसी भी प्रकार का हलचल नहीं हो रहा था यह देखकर वह मन ही मन खुश हो रहा था। पेंट में उसका लंड तंबू बनाए हुए था। जिसे वह हाथ से जोर-जोर से दबा रहा थालेकिन उसे एहसास होने लगा था कि अब इतने से काम चलने वाला नहीं है और यह मौका उसे मिलने वाला नहीं है,,,,दूसरी तरफ सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था वह बेहद उत्सुक हो चुकी थी यह देखने के लिए उसका बेटा क्या करता है,,,,,





अंकित की उत्तेजना और वासना दोनों बढ़ती जा रही थी अपनी मां की नंगी गांड देते हुए पेट के ऊपर से लंड दबाने में जो आनंद उसे मिल रहा था वह उसे खुल कर लेना चाहता था,,, इसलिए वह धीरे से पेंट की बटन खोलने लगा,,,, और देखते ही देख अपने पेट को अपने हाथ से सरका कर वह घुटनों के नीचे कर दिया,,,, अब उसके हाथ में उसका टन टनाया हुआ नंगा लंड था जिसे वह अपने मुट्ठी में दबाकर मुठिया रहा था यह क्रिया उसके लिए बेहद उतेजना से भर देने वाली साबित हो रही थी,,,,कुछ देर तक वह इस क्रिया को अपनी मां की नंगी गांड देखकर बार-बार दोहराता रहा लेकिन इतने से ही उसका मन नहीं भर रहा था अपनी मां को निश्चित होकर गहरी नींद में सोता हुआ देखकर उसका लालच बढ़ने लगा था,,,,और दूसरी तरफ उसकी मां की हालत खराब हो रही थी किसी भी प्रकार की हलचल प्रतिक्रिया न देखकर उसे लगने लगा था कि उसका बेटा आज भी बुद्धू बना वहाकर सो गया है इसलिएवह करवट लेकर उसकी तरफ देखना चाहती थी और ऐसा करने के लिए वह तैयार ही थी कि तभी अंकित भी अपनी तरफ से प्रतिक्रिया करते हुए अपनी मां की तरफ सरक गया था और जैसे ही उसकी मां पलटी लेने के लिए अपने आप को तैयार कर ही रही थी कि तभी उसे अपनी गांड पर अपने बेटे का लंड चूसता हुआ महसूस होने लगा और वह एकदम से गनगना गई,,,, उसके होश उड़ गए आज उसकी कामुक हरकत कम कर गई थी इसका एहसास उसे होने लगा,,,,उसका दिल जोरो से धड़कने लगा था उसकी सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी थी लेकिन वह किसी तरह से अपने आप को संभाले हुए थी।





अंकित की सांस उखड़ रही थी उसकी हालत एकदम से खराब हो रही थी क्योंकि यह पहला मौका था जब वह अपने लंड को अपनी मां की नंगी गांड से सटा दिया थाऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी लंड का मोटा तगड़ा सुपाड़ा गरमा गरम उसकी मां की नंगी गांड पर सटा हुआ था,,, इस एहसास से उसे इस बात का डर था कि उसके लंड से पानी न फेंक दे और अंकित की मां की बुर पानी पर पानी छोड़ रही थी,,,कुछ देर तक अंकित अपनी मां के बदन में हलचल न होता देखकर उसी तरह से अपने लंड को उसकी गांड से सटाए रहा और फिर धीरे सेजब मामला पूरी तरह से शांत रहा तो वह अपने लंड को अपने लंड कैसे पानी को अपनी मां की नंगी गांड से रगड़ना शुरू कर दिया ऐसा करने में उसे मदहोशी जा रही थी उसका दिल जवाब दे रहा था बार-बार उसका मन कह रहा था कि ऐसा मत कर बस डाल दे अपनी मां की बुर में लेकिन ऐसा करने में उसे इस बात का डर था कि अगर उसकी मां जाग जाएगी तो गजब हो जाएगा,,,,लेकिन फिर भी जो कुछ भी वह कर रहा था यह भी उसके लिए बेहद आनंद आया था उसके लिए भी और उसकी मां के लिए भी,,,,सुगंधा की तो हालत पाल-पाल खराब होती जा रही थी उसकी बुर कचोरी कि तरह फुल चुकी थी,,,अंकित की हिम्मत बढ़ने लगी थी उसे विश्वास हो गया था कि उसकी मां गहरी नींद में सो रही है और वह भी दिन भर काम की थकान की वजह से शायद वाकई में उसे गहरी नींद लग गई थी ऐसा वह सोचकर अपनी हरकत को बढ़ाने के लिए अपने आप को तैयार करने लगा।

अभी तक तो वह अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां की गांड की उभार पर रगड़ रहा था लेकिन अब उसका मन कुछ और करने को कर रहा था इसलिए वह अपने लंड को सुपाड़े को गांड की दरार मेंप्रवेश करने लगा अच्छी तरह से जानता था कुछ इस तरह से उसकी मां लेती हुई थी ऐसे हालात में उसके लंड का उसकी बुर के छेद तक पहुंचना नामुमकिन था,,, गांड की दरार में भी अपने लंड को हल्के हल्के से अंदर की तरफ डालकर मजा लेने लगा लेकिन उसे एहसास होने लगा था की सबसे बड़ी गंद होने की वजह से गांड की दरार भी गहरी हो जाती है,,,,और इसीलिए अंकित का लैंड गहराई तक जा रहा था उसका आधा घंटा उसकी मां की गांड की दरार की गहराई तक पहुंच चुका थाऔर यह अंकित के लिए बेहद खुशी की बात थी और उससे भी ज्यादा खुशी की बात यह थी कि अभी तक उसकी मां के बदन में हलचल बिल्कुल भी नहीं हुई थी,,,और अंकित धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया उसकी कमर के हिलने के साथ ही अंकित का लंड सुगंधा की गांड की दरार केऊपर से नीचे तक लहराने लगा जिसकी रगड़ जिसकी गर्माहट सुगंधा की बुर का पानी ढीला कर रही थी,,,, कुछ देर तक यह सिलसिला चलता रहा सुगंधा अपनी सांसों को काबू में किए हुए अपने बेटे की हरकत का आनंद ले रही थी,,,अपने बेटे के लंड की मोटाई और लंबाई का एहसास उसे बड़ी अच्छी तरह से हो रहा था और उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में उसका लंड अगर उसकी बुर में घुस गया तो ,, बुर का भोसड़ा बनकर ही बाहर निकलेगा,,,,

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सुगंधा का मन तो कर रहा था कि अपना हाथ पीछे की तरफ ले जाकर अपने बेटे का लंड पकड ले और उसे अपने गुलाबी छेद की गली का रास्ता दिखा दे,,,लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हुई और अपने बदन में जरा भी हलचल करने की भी उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि उसे इस बात का डर था कि उसके बदन में जरा सी भी हलचलउसके बेटे की हरकत को रोक देगा वह घबराकर फिर ऐसी हरकत नहीं करेगा और वह इस हरकत का मजा लेना चाहती थी उसे रोकना नहीं चाहती थी वह देखना चाहती थी कि इससे भी ज्यादा उसका बेटा क्या कर सकता है,,,, इसलिए वह निश्चित होकर इस तरह से लेती रही और अपने बेटे की हरकत का मजा लेती रही।

अंकित की सांस ऊपर नीचे हो रही थी,,, काफी देर तक उसकी मां के बदन में हलचल नहीं हो रही थी इसलिए वह अपने बदन में और भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था और वह धीरे से अपना हाथ अपनी मां की कमर पर रख दिया कमर के ऊपर वाले हिस्से पर जहां से नितंबों का शुरुआत होता है उसकी उभार का शुरुआत होता है अपनी मां की नंगी गांड पर हाथ रखते हुए उसके भजन में उत्तेजना का संचार बड़ी तेजी से होने लगा और सुगंधा को भी इस बात का एहसास होने लगा कि उसके बेटे का लंड फुल रहा
था,,, अपनी मां की कमर पर हाथ रखते हीअंकित की उत्तेजना बढ़ने लगी तो वह धीरे से अपने आप को थोड़ा नीचे की तरफ कर दिया और अपनी कमर पर आगे की तरफ ठेलने लगा जिसके चलते उसका लंड उसकी मां की गांड के निचले स्तर मैं उसके नितंबों से बीचों-बीच से अंदर की तरफ से सरकने लगाऔर धीरे-धीरे अंदर की तरफ जाने लगा यह एहसास अंकित के तन बदन में उसकी उत्तेजना को बढ़ाने के लिए काफी थाऔर सुगंधा भी मदहोश हुए जा रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उसके बेटे का लंड अब कौन सी दिशा में आगे बढ़ रहा है,,,,


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सुगंधा अपनी सांसों को रोके हुई थीऔर जिस तरह से उसके बेटे का लंड अंदर की तरफ आगे बढ़ रहा था उसे देखकर उसे अपने बेटे के लंड की मजबूती और उसकी ताकत का अंदाजा लग रहा था,,, जांघो के बीच से रगड़ता हुआ अंकित का लंड उसकी मां की गुलाबी छेद की तरफ आगे बढ़ रहा था,,,, अंकित के सुपाड़े में उसकी मां की बुर की गर्मी महसूस होने लगी थी और यही हाल सुगंधा का भी था,, सुगंधा भी अपनी बुर पर अपने बेटे के लंड के सुपाड़े की गर्मी को महसूस करके बार-बार पिघल रही थी,,,, देखते ही देखतेअंकित के लंड का सुपाड़ा उसकी मां की गुलाबी छेद द्वार पर एकदम से स्पर्श हो गया,,,, सुगंधा काफी देर से उत्तेजना का अनुभव कर रही थी मदहोश हो रही थी,,,लेकिन इस बार अपने बेटे के मजबूत लंड के सुपाड़े का स्पर्श उसकी गर्मी को वह बर्दाश्त नहीं कर पाई और भलभला कर झड़ने लगी उसकी बुर से मदन रस का फवारा फुट पड़ा,,,, जिसका एहसास अंकित को अपने लंड पर हो रहा था,,,, और अपनी मां के मदन रस का फवारावह भी अपने लंड पर बर्दाश्त नहीं कर पाया और वह भी एकदम से अपने लंड से पानी की पिचकारी फेंकने लगा जो कि सीधा सुगंध को अपनी बुर के गुलाबी छेद पर महसूस हो रहा था,,, सुगंधा एकदम से गदगद हो गई वह इस फव्वारे को अच्छी तरह से जानती थी,,,, वह एकदम से चादर को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी मुट्ठी में भींच लीऔर यही हाल अंकित का भी था झड़ने समय वह अपनी मां की कमर को जोर से पकड़ लिया था लेकिन जैसे उसे एहसास हुआ कि उसकी मां जाग जाएगी वह तुरंत अपने हाथ को उसकी कमर से हटा लिया था।


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वासना का तूफान शांत हो चुका था अंकित धीरे से अपनी मां की जांघों के बीच से अपने घंटे को बाहर निकाला जो कि इस समय भी पूरी तरह से खड़ा था लेकिन अबउसका पानी निकल चुका था जो कि जहां को पूरी तरह से भिगो दिया था यह देखकर अंकित थोड़ा सा कपड़ा गया और तुरंत अपनी चादर से अपनी मां की टांगों पर लगा हुआ उसके पानी को साफ करने लगाऔर फिर वापस पेट के बल लेट कर आसमान की तरफ देखने लगा और कब नींद की आगोश में चला गया उसे पता ही नहीं चला,,,, सुबह उसकी नींद जल्दीखुल चुकी थी लेकिन वह अपनी मां के सामने जल्दी जागना नहीं चाहता था क्योंकि अभी भी उसकी मां की साड़ी कमर तक उठी हुई थी,,,और वह अपनी मां को यह बिल्कुल भी जताना नहीं चाहता था कि रात को उसने उसके साथ कोई गलत हरकत किया था इसलिए वह सोने का नाटक करके लेट ही रह गया लेकिन इस बार दूसरी तरफ मुंह करके लेटा था ताकि उसकी मां उठे तो उसे बिल्कुल भी शक ना हो,,,,थोड़ी देर में सुगंधा की नींद खुली तो अपनी स्थिति को देखकर वह खुद ही शर्मा गई,,, अपनी बुर पर उसे चिपचिपाहट महसूस हो रही थीवह जानती थी कि ऐसा क्यों हुआ है लेकिन वह बिना कुछ बोले अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और वह अपने बेटे को जगाए बिना ही सीढ़ी से नीचे उतर आई,,,






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रात को देर तक जागने की वजह से सुबह जल्दी नींद नहीं खुली थी उजाला हो चुका था इसलिए आज वॉकिंग पर जाने के लिए वह तैयार नहीं थीवह घर की सफाई करने लगी थी अंकित भी धीरे से होकर अपनी जगह पर बैठ गया और वह भी धीरे से सीढ़ियां उतरकर नीचे आ गया लेकिन वह अपनी मां से नजर नहीं मिल पा रहा था। औरअपने आप को सहज करने के लिए दैनिक क्रिया में लग गया था मां बेटे दोनों को सब कुछ मालूम था कि रात को क्या हुआ था लेकिन दोनों एक दूसरे से अंजान बने थे अंकित को ऐसे लग रहा था कि उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी उसे कुछ नहीं मालूम था जबकि सुगंधा सब कुछ जानती थीऔर वह भी अपनी तरफ से खामोश थी अपने बेटे को कुछ बोलना नहीं चाहती थी क्योंकि उसे इस बात की खुशी थी कि उसका बेटा इतनी हिम्मत दिखा पाया था के बिना उसकी बुर में लंड डाले ही उसका पानी निकाल दिया था।
बहुत ही कामुक गरमागरम और उत्तेजना से भरपूर अपडेट है एक बार फिर से वासना का उठा हुआ तूफान बिना चूदाई किए हुए ही शांत हो गया लेकिन दोनों मां बेटे का पानी बिना चूदाई के ही निकल गया
 

Sanju@

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रात को जो कुछ भी हुआ था उसे लेकर सुगंधा काफी उत्साहित थी क्योंकिउसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसका बेटा कुछ ज्यादा हिम्मत दिखाया था बस थोड़ा और हिम्मत दिखा देगा तो रात को ही काम बन जाता है इस बात को सोचकर होगा मन ही मन मुस्कुरा रही थी लेकिन अपने आप पर गुस्सा भी कर रही थी कि जब उसका बेटे ने इतनी हिम्मत दिखाई तो वह थोड़ी हिम्मत क्यों नहीं दिखा पाई उसे भी तो कुछ करना चाहिए थाआखिरकार वह भी तो एक औरत है उसकी भी तो चाहत है उसकी भी तो प्यास है जिस चीज की भुख उसके बेटे को है उसी चीज की भुख तो उसे भी है,,,, फिर क्यों नहीं आगे बढ़ पाई क्यों नहीं अपने बेटे का साथ दे पाई,,,, सुगंधा को अच्छी तरह से हिसाब सो रहा था कि उसका बेटा उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए उत्साहित हो चुका था,,,वह तो शायद उसकी नादानी थी उसे औरत के गुलाबी छेद के बारे में कुछ ज्यादा मालूम नहीं था वरना वह अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में डाल देता,,,, इस बात को सोच कर वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,, उसी को समझ में नहीं आ रहा था मंजिल उसे ज्यादा दूर नजर नहीं आ रही थी,,, पवित्र रिश्ता की मर्यादा में भी अब उसे वासना की सुनहरी कीरन नजर आ रही थी।





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उसे एहसास होने लगा था कि आप बहुत दिन ज्यादा दूर नहीं है जब उसके बेटे का लंड उसके गुलाबी छेद की गहराई नाप रहा होगा,,, रसोई घर मेंरोटी को तवे पर रखकर वह अपने बेटे के बारे में और रात को जो कुछ विवाह उसके बारे में सोच कर मदहोश रही थी गरम हो रही थी जिसका सीधा असर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पर पड़ रहा था। उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसका बेटापूरे शिद्दत के साथ उसकी बुर में लंड डालने की कोशिश कर रहा था इसलिए तो उसकी दोनों जांघों के बीच से अंदर तक ठेलने की कोशिश कर रहा था,,,और उसकी रात की उस कोशिश को याद करके इस समय सुगंधा के चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी उसके होठों पर मुस्कुराहट थी,,इस बात के लिए नहीं कि उसका बेटा असफल कोशिश कर रहा था वहीं से बात से मुस्कुरा रही थी कि उसके बेटे को औरतों के बारे में भी कुछ ज्यादा ज्ञान नहीं है उसे यह भी नहीं मालूम की मर्द अपने लंड को औरत के किस अंग में डालता है शायद इसीलिए वहां असफल हो गया था वरना जिस तरह की उसकी कोशिश थी वह जरूर कामयाब हो जाता अगर उसे संभोग के बारे में जरा सा भी ज्ञान होता तो,,, अपने बेटे की इस अज्ञानता पर सुगंधा को ज्यादा गुस्सा नहीं आ रहा था वह इस बात से ज्यादा खुश थी की अगर दोनों के बीच कुछ हुआ तो उसे सीखाने में ज्यादा मजा आएगा,,,,।






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सुगंधा तवे पर रोटी को चिमटी से पलट रही थी क्योंकि वह एकदम गरम हो चुकी थी और गर्म होकर फूल रही थी यह देखकर सुगंधा को एहसास होने लगा कि इसी तरह से हीऔरत की बुर का ध्यान होता है जब वह गर्म हो जाती है तो एकदम से कचोरी की तरह फूल जाती है उसमें से रस टपकने लगता है जिसे पीने के लिए दुनिया का हर एक मर्द तड़पता है ,,, सुगंधा अपने मन में सोच रही थी दुनिया के हर एक मर्द की तरह उसका बेटा भी औरत की बुर से मज़ा लेना चाहता होगा वह भी उसे चाटना चाहता होगा उसमें अपना लंड डालना चाहता होगा,,, बस थोड़ा डर अपनी मर्यादा और अज्ञानता की वजह से कुछ कर नहीं पा रहा है और जब कल रात कुछ करने की कोशिश किया तो औरत की बुर के भूगोल का ज्ञान न होने की वजह से कुछ कर नहीं पाया,,,, सुगंधा रोटी को तवे पर से उतारकर थाली में रखते हुए सोच रही थी कि अब उसे भी कुछ करना होगातृप्ति के गए 2 दिन गुजर चुके हैं लेकिन दोनों के बीच कुछ हो नहीं पाया है अगर इसी तरह से आंख मिचोली चलती रही तो तृप्ति भी घर पर आ जाएगी और फिर दोनों के बीच कुछ भी नहीं हो पाएगा,,, मां बेटे के बीच कुछ हो इसीलिए तो तृप्ति को गांव भेजी थी। अपने मन में यह सोचकर वह थोड़ा परेशान हो गई और अपने आप को ही दिलासा देते हुए बोली।





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नहीं नहीं ऐसा नहीं होने दूंगी सुनहरा मौका में अपने हाथ से जाने नहीं दूंगी तृप्ति को जिस वजह से उसकी नानी के मन भेजी हूं उस वजह को पूरा जरूर करूंगी वरना मेरे जैसी बेवकूफ औरतकोई भी नहीं होगी आखिरकार इतना कुछ होने के बावजूद भी वह अभी भी प्यासी की प्यासी है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा अब मुझे ही कुछ करना होगा अपने आप को ऐसा दिलासा देकर वह फिर से खाना बनाने में लग गई,,,,।खाना बनाते समय वह बार-बार दरवाजे की तरफ देख रही थी लेकिन वह जानती थी कि इस समय अंकित घर पर नहीं था नहाने के बाद नाश्ता करके वह तुरंत बाहर निकल गया था,,, वैसे तोसुगंधा अपने बेटे को रोकना चाहती थी लेकिन वह रोक नहीं पाई थी रात को जो कुछ भी हुआ था उसकी खुमारी अभी भी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी और वह अपने बेटे से नजर नहीं मिला पाती इसलिए वह कुछ बोल नहीं पाई,,,।

दोपहर में खाना खाने के बादसुगंधा घर की सफाई में लग गई थी और बर्तन साफ कर रही थी,,,, साफ सफाई कर लेने के बाद वह अंकित के कमरे के पास आई और दरवाजा खोलकर देखी तो अंदर अंकित नहीं था वह सोच में पड़ गई कि अंकित गया कहां,,,, सुगंधा थोड़ा परेशान हो रही थीक्योंकि सुबह भी वह अपने बेटे से बात नहीं कर पाई थी और इस समय भी वह घर पर मौजूद नहीं था इसलिए वह घर के दरवाजे तक आई और बाहर की तरफ देखने लगी दोपहर का समय होने की वजह से सड़के सुनसान थी। इक्का दुक्का वहां नहीं सड़क पर आते जाते दिखाई दे रहा हैगर्मी इतनी थी की सुगंधा का खुद का मन घर से बाहर निकलने को नहीं हो रहा था इसलिए वह सोच रही थी कितनी गर्मी में उसका बेटा बाहर कहां चला गया,,,फिर अपने मन में सोचने लगी कि शायद रात वाली घटना को लेकर उसके मन में जरूर कुछ चल रहा है इसलिए वह उस नजर नहीं मिला पा रहा है,,, अगर सच में रात वाली घटना से उसका जमीर जाग गया तो सारे किए कराए पर पानी फिर जाएगा,,, इतना जो कुछ भी वह बेशर्मी दिखाई थी अपने बेटे के सामने सब बेकार हो जाएगा अपनी मंजिल तक पहुंचाने के लिए जिस तरह का रास्ता उसने चुना था जिस तरह से बेशर्मी को अपनाया था अपने अंदर एक रंडी पन को जगाया था वह सब कुछ बेकार हो जाएगा,,,,अपने मन में उठ रहे इस तरह के ख्याल से सुगंधा परेशान हो रही थी विचलित हो रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। फिर अपने आप से ही बोली नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं होगा,,,, और ऐसा वह अपने मन में सोचते हुए वह अपने कमरे की तरफ जाने लगी,,,,।




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अपने कमरे पर पहुंचते ही दरवाजे पर खड़े होकर वह फिर से कुछ सोचने लगी और फिर धीरे से दरवाजा खोली जो कि सिर्फ बंद था उस पर सिटकनी नहीं लगी थी,,,और जैसे ही दरवाजा खुला सामने बिस्तर पर अंकित बैठा था उसे देखकर सुगंधा के चेहरे पर मुस्कुराहट तैरने लगी और वह राहत की सांस लेने लगी लेकिन अपनी मां को दरवाजे पर देखकर अंकित तुरंत असहज हो गया और बिस्तर के नीचे को छुपाने की कोशिश करने लगा यह देखकर सुगंधा बोली,,।


क्या हुआ अंकित क्या छुपा रहा है,,,( कमरे में प्रवेश करते हुए सुगंधा बोली,,,,अपनी मां को कमरे में प्रवेश करता हुआ देखकर अंकित थोड़ा घबरा गया था और घबराहट भरे स्वर में बोला)


ककककक,,, कुछ नहीं कुछ भी तो नहीं,,,,,

(तब तक सुगंध बिस्तर तक पहुंच चुकी थी और वह बिस्तर पर ;बिछे गद्दे को उठाकर देखने लगी तो उसके नीचे वही गंदी किताब थी जिस किताब ने दोनों को अपने मंजिल तक पहुंचने में मदद कर रहा था,,, उसे किताब को देखकर सुगंधा मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए अपने बेटे से बोली,,,)


ओहहहह तो यह बात है किताब पड़े बिना रहा नहीं जा रहा है क्यों ऐसा ही है ना,,,


नहीं नहीं मम्मी ऐसा कुछ भी नहीं है,,,






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तो ईसे छुपा क्यों रहा था,,,,(किताब के पन्ने को पलटते हुए सुगंधा बोली,,,,,,सुगंधा जिस तरह से अपने हाथ से किताब का पन्ना पलट रही थी यह देखकर अंकित की हिम्मत बढ़ने लगी थी और वह अपने मन में सोचने लगा था कि इतना कुछ तो दोनों के बीच हो रहा है इतनी ढेर सारी गंदी बातें इस किताब को लेकर हो चुकी है तो अब क्यों अपनी मां से घबरा रहा है शर्मा रहा है,,,,,,, इसलिए वह थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए बोला,,,)

नहीं ऐसा कुछ भी नहीं मम्मी वह तो किताब ऐसी है ना की,,,,, अब क्या बताऊं किताब ही ऐसी है कि तुम्हें दरवाजे पर देखकर मैं थोड़ा डर गया,,,,,


डरने की जरूरत नहीं हैतुझे अच्छी तरह से याद होना चाहिए कि मैं ही तुझे इस किताब को पढ़ने के लिए बोलीअगर ऐसा कुछ होता तो मैं तुझे यह किताब देती ही नहींऔर इस किताब को पढ़ने पर तुझे थप्पड़ लगा दी होती लेकिन मैं जानती हूं कि तू अब बड़ा हो चुका है समझदार हो चुका है,,,,, वैसे पढ़ क्या रहा था तू,,, मैं तो ठीक हूं की पूरी किताब ही गजब की कहानी से भरी हुई है,,,,(किताब के पन्ने को पालते हुए सुगंधा अपने होठों पर मादक मुस्कान बिखेरते हुए बोली अपनी मां को इस तरह से मुस्कुराता हुआ देखकर अंकित के भी हिम्मत बढ़ने लगी और वह बोला,,,)






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तुम सच कह रही हो मम्मी पूरी किताब ही गजब की है एक बार पढ़ने बैठो तो पूरी किताब पड़े बिना उठ नहीं सकते मैं तो उसे दिन वाली कहानी के बारे में सोच रहा था और वही देखना चाहता था कि आगे क्या होता है जैसा कि तुम बताएं की हालत को देखकर दोनों में जरूर कुछ हुआ होगा और दोनों के बीच कुछ होने की आशंका दोनों के हालात पर निर्भर रखती है,,,।

अच्छा तो तूने क्या पढ़ा उन दोनों के बीच आगे कुछ हुआ कि नहीं,,,,,।

बहुत कुछ हुआ मम्मी मेरा तो पढ़ कर ही हालत खराब हो गई है,,,,,।

क्यों ऐसा क्या लिखा हुआ है कि तेरी हालत खराब हो गई और वह भी सिर्फ पढ़करअगर देखा होता है या कुछ उसे कहानी का हिस्सा होता तो मैं समझ सकती थी पढ़कर ही तेरी हालत कैसे खराब होने लगी,,,। मुझे भी तो बता,,,(ऐसा कहते हुए उसे किताब को अंकित की तरफ आगे बढ़ाते हुए) ले उस दिन की कहानी से आगे पढ़ कर बता,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे भी एहसास होने लगा था कि उसकी मां भी उत्सुक थी की मां बेटे के बीच आगे क्या हुआ,,,, और यह कहानी वाली घटना उन दोनों के लिए ही कारगर साबित होने वाली थी ऐसा अंकित को एहसास होने लगा था,,,,इसलिए वह भी तुरंत अपनी मां के हाथ से उस किताब को ले लिया उसकी मां ठीक उसके सामने खड़ी थीऔर अंकित नीचे बिस्तर पर बैठा हुआ था और धीरे-धीरे पन्नों को पलट रहा था कुछ पन्नों के बाद रंगीन चित्र थे जिसमेंमर्द और औरत के संभोग के बहुत सारे चित्र थे जिसमें औरत की बुर और मर्द का लंड एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,,अंकित उसे चित्र को बड़े गौर से देख रहा था देख क्या रहा था वह अपनी मां को चित्र को दिखा रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां भी उस किताब की तरफ ही देख रही थी,,, उस गरमा गरम चित्र को देखकर अंकित का लंड पेंट के अंदर अकड़ रहा था,,,खड़ा तो वह पहले से ही था लेकिन इस समय अब उसकी हालत और ज्यादा खराब हो रही थीतो दो तीन-तीन सेकंड तक उसे दृश्य पर अपनी नजर डालकर और अपनी मां को दिखाकर वह पन्ने को पलट दे रहा था हर एक पन्ने पर एक अद्भुत दृश्य था जिसे देखकर कोई भी मर्द और औरत चुदवासे हो जाए।





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सुगंधा अपने बेटे की हरकत को देखकर मस्त हो रही थी वह भी उसी द्रशय को देख रही थी जिस दृश्य को उसका बेटा देख रहा था,,,, सुगंधा की बुर की पानी छोड़ रही थी क्योंकि चित्र था ही कुछ ऐसा मर्द बिस्तर पर पीठ के बल लेटा हुआ था और एक औरत जो कि एकदम गदराए बदन की थीवह उसे मर्द के ऊपर पूरी तरह से छाई हुई थी उसे मर्द का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में घुसा हुआ था और औरत अपनी चूची को अपने हाथ से पड़कर उसे मर्द के मुंह में डालें हुई थी और वह मर्द उसकी दोनों चूचियों को पकड़े हुए था उसे मर्दों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि औरत की हरकत से उसकी काम कला से वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था। तभी अंकित पन्ने को पलट दिया और दूसरे दृश्य को देखने लगा यह दृश्य भी गजब का था,,, इसमें एक औरत खेत में काम करते हुए अपनी फ्रॉक को कमर तक उठाई हुई थी और झुक कर घास को काट रही थी और पीछे से एक आदमी उसकी चुदाई कर रहा था,,,इस नजारे को भी उसकी मां प्यासी नजर से देख रही थी और अपने मन में सोच रही थी की खास उसे औरत की जगह वह खुद होती है और पीछे खड़ा मर्द उसका बेटा होता तो कितना मजा आता।।






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अगले पन्ने को पलटते ही जो नजारा दिखाई दिया उसे देखकर सुगंधा की बुर मदन रस की बुंद नीचे टपका दी,,,, उस पन्ने पर चित्र छपा हुआ था जो बेहद मन मौत था और यह सुगंधा की भी ख्वाहिश थी,,,चित्र में एक मर्द बाथरूम के अंदर खड़ा था हो एक औरत अपने घुटनों के बल बैठकर उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके लंबे मोटे लंड को अपने मुंह में जड़ तक लेकर उसे कस रही थीऔर उसकी मोटाई और लंबाई से साफ पता चल रहा था कि उस औरत के गले तक पहुंच चुका था उस मर्द के लंड को मुंह में लेने पर उसे थोड़ी बहुत तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी इस तकलीफ के आगे जो आनंद उसे प्राप्त हो रहा था वह उसकी तकलीफ को पूरी तरह से कम कर दे रहा था। यही चाहतसुगंधा के मन में भी थी वह भी इसी तरह से अपने बेटे के मोटे-तगडे लंड को अपने मुंह में उसे चूसना चाहती थी,,, दो-तीन सेकंड के बाद अंकित पढ़ने को पलट दिया और अब कहानी शुरू हो गई थी अंकित कहानी को वहीं से शुरू करना चाहता था जहां से उस दिन खत्म किया था।वही पन्ना आंख के सामने आते ही अंकित अपनी मां की तरफ देखने लगा और अंकित को अपनी मां की आंखों में वासना का तूफान दिखाई दे रहा था जिसमे वह खुद डूबना चाहता थाकहानी को आगे पढ़ने से पहले वह अपनी मां की इजाजत लेना चाहता था इसलिए वह धीरे से बोला,,,।

आगे पढ़ु,,,,,?




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इसीलिए तो तुझे दी हूं,,,,,।

ठीक है,,,,,,, उस दिन अपने यहां तक पढे थे,,,,, अब आगे पढ़ कर बताता हूं,,,,(अंकित का इतना कहना था की सुगंधा पास में पड़ी कुर्सी को अपनी तरफ खींचकर उसे पर बैठ गई और ठीक अंकित के सामने बैठ गई थी वह अंकित के चेहरे के बदलते भाव को देखना चाहती थी,,)

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा थावैसे तो मैं यह नजारा देखना नहीं चाहता था अपने आप ही मेरी आंखों के सामने यह नजारा दिखाई दे गया था लेकिन आज पहली बार या नजारा देखकर मुझे लग रहा था कि मैं अब तक एक खूबसूरत दृश्य को नहीं देख पाया था लेकिन आज शायद मेरी किस्मत में यही लिखा था और आज मुझे वह देखने को मिल रहा है जिसके बारे में मैं कभी सपने में नहीं सोचा था,,,मां की गांड वाकई में कुछ ज्यादा ही पड़ी थी कई हुई साड़ी में अक्सर मैंने अपनी मां की गांड को देखा थालेकिन कभी मेरे मन में गलत भावना नहीं जगी थी लेकिन आज पहली बार मन को पेशाब करता हुआ देखकर मेरे मन में न जाने कैसे-कैसे भाव पैदा हो रहे थे और यह भावएक बेटे के मन में तो बिल्कुल भी नहीं पैदा हो सकते थे एक मर्द के मन में ही पैदा हो सकते थे और इस समय मुझे ऐसा ही लग रहा था कि मेरी आंखों के सामने जो औरत पेशाब कर रही है वह मेरी मां नहीं बस एक औरत है और मैं एक मर्द हूं हम दोनों को एक दूसरे की जरूरत है।





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मां की बुर लगातार सिटी की आवाज निकल रही थी और यह सिटी की आवाज किसी मधुर ध्वनि से बिल्कुल भी काम नहीं थी इस सिटी की आवाज सुनकर तो मेरा लंड एकदम से अपनी औकात में आ गया था,, अभी तक मां की नजर मेरे पर नहीं पड़ी थीवही तो ऐसा तक नहीं था कि बाहर दरवाजे पर खड़ा होकर में उन्हें पेशाब करता हुआ देख रहा हूं वरना अगर उन्हें एहसास हो गया होता तो वह कब सेमुझे जाने को कह देती और दरवाजा बंद कर देती और शायद गुस्सा भी करती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा था लेकिन मा को पेशाब करतेहुए देख कर मेरी हिम्मत पड़ रही थी बार-बार मेरा हाथ अपने आप ही पेंट के ऊपर से लंड को सहला दे रहा था। इस समय मुझे कुछ और नहीं सुझ रहा था। वैसे भी मैं निश्चिंत था क्योंकि घर में मेरे और मां के सिवा और कोई नहीं रहता थाइसलिए किसी के देखे जाने का या किसी के आ जाने का डर मुझे बिल्कुल भी नहीं था डर इस बात का था की मां मुझे देख लेगी तो क्या सोचेगी।(कहानी के एक-एक शब्दों को पढ़कर अंकित की हालत खराब हो रही थी वह अपनी मां की तरफ भी देख ले रहा था,, उसे साफ दिखाई दे रहा था कि,,कहानी को सुनकर उसकी मां की भी हालत खराब हो रही थी पाल-पाल उसके चेहरे का रंग बदल रहा था और उसकी सांसों की गति भी ऊपर नीचे हो रही थी यह देखकर अंकित को मजा आ रहा था और वह वापस कहानी आगे पढ़ते हुए बोला।)





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सच कहूं तो इस समय मन कर रहा था कि बाथरूम में घुस जाऊं और मां की चुदाई कर दुं,,,,, क्योंकि जहां तक मेरा मानना था बरसो हो गए थे मां की बुर में लंड नहीं गया था,,, क्योंकि हम दोनों अकेले ही रहते थे बरसों पहले ही पिताजी किसी और औरत के साथ शादी करके दूसरे शहर चले गए थेजहां तक मेरा मानना था की मां का किसी के साथ गलत संबंध बिल्कुल भी नहीं थाक्योंकि अगर होता तो इतने दिनों में भनक लग जाती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था और इतना पक्का था की मां की बुर में लंड ना जाने की वजह से उसे भी दूसरी औरतों की तरह पुरुषकी जरूरत पड़ती होगी लेकिन न जाने क्यों हुआ अपनी भावना को दबाए रह गई थी शायद उसके परवरिश के लिए,,, मुझे एहसास हो रहा था कि शायद मा को भी ईसी चीज की जरूरत है,,,,और अब मेरा करते तो बनता है कि मैं अपनी मां की जवानी की प्यास अपने लंड से बुझाऊं क्योंकि उसे भी अपनी शौक पूरा करने का पूरा हक है। और शायद मेरी वजह से ही मन अपनी ख्वाहिश को पूरा नहीं कर पा रही थी और अंदर ही अंदर घुट रही होगी,,,क्योंकि अगर मैं नहीं होता तो शायद वह दूसरी शादी कर ली होती और एक औरत की जिंदगी की रही होती यह सब मेरी वजह से ही हो रहा है,,,, आज तो मैं अपनी मां की जरूरत को पूरा करके रहूंगा,,,,,।






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अरे यह क्या मां तो पेशाब कर चुकी है अब जल्दी ही उठकर खड़ी हो जाएगी,,, नहीं नहीं मैं क्या देख रहा हूं मां तो अपनी बुर में उंगली डाल रही है,,ओहहहह इसका मतलब है कि मेरा सोचना बिल्कुल सही था मा को भी जरूरत है,,,, अब तो मेरा रास्ता एकदम साफ हो गया है आज तो मैं अपनी भी और अपनी मां की भी इच्छा पूरी कर दूंगा,,,,,,(ऐसा पढ़करअंकित अपनी मां की तरफ देखने लगा उसकी मां मुस्कुरा रही थी क्योंकिकहानी कुछ उसके जीवन जैसी ही थी जिसका एहसास अंकित को भी हो रहा था अंकित गहरी सांस लेते हुए कहानी को आगे पढ़ते हुए बोला )

मुझे रहा नहीं गया और मैं दरवाजे पर खड़ा होकर बोला,,,।

बस करो मम्मी बहुत तुमने उंगली से अपनी प्यास बुझाने की कोशिश कर ली अब मैं जानता हूं कि तुम्हें क्या चाहिए,,,,(मेरी बात सुनकर मा एकदम से चौंक गई और,,,घबरा कर तुरंत अपनी बुर में से उंगली को बाहर खींच ली और एकदम से खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को नीचे गिरा दि और अपनी गांड को ढंक ली और घबराहट भरे स्वर में बोली,,,)





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तततततत,,, तू यहां क्या कर रहा है,,,?

देख रहा हूं कि मेरी मां कितना तड़प रही है लंड के लिए,,,(ऐसा कहते हुए मैं बाथरूम में प्रवेश करके और अपने पेंट की बटन को खोलने लगा यह देखकर मा से घबरा गई और बोली,,,)


यह तु क्या कर रहा है,,?

वही जिसकी तुम्हें जरूरत है,,,,(ऐसा कहते हुए मैंने तुरंत अपने कपड़े उतार कर बाथरूम के अंदर एकदम नंगा खड़ा हो गया मां की हालत खराब हो रही थी वह थोड़ा गुस्से में भी थी लेकिन मेरे मोटे तगड़े लंबे लंड को देखकर वह एकटक उसे देखते ही रह गई,,,,, और धीरे से बोली)

यह गलत है,,,।

गलत क्या है सही क्या है यह हम दोनों जानते हैं और इस समय क्या सही है यह तुम भी अच्छी तरह से जानती हो इसलिए बिल्कुल भी दिखावा मत करो मैं अपनी आंखों से देख चुका हूं तुम अपनी उंगली से अपनी प्यास बुझाती हो,,,,,(ऐसा कहते हुए मैं मां के एकदम करीब पहुंच गया और उनका हाथ पकड़ कर तुरंत अपने लंड पर रख दिया जो कि एकदम गरम और एकदम कड़क था,,,पहले तो मन घबरा कर उसे पर से अपना हाथ हटाने की कोशिश करने लगी लेकिन मैं तुरंत अपने हाथ में मां की हथेली पकड़ कर उसे पैर दबा दिया तो थोड़ी ही देर मेंमां के बदन में लंड की गर्मी पूरी तरह से छाने लगी और वह मदहोश होने लगी और उनकी मदहोशी उनकी आंखों में दिख रही थी और वह धीरे से बोली,,,)

किसी को पता चल गया तो,,,,।


चार दिवारी के अंदर हम दोनों के बीच क्या हो रहा है यह बाहर किसी को कैसे पता चलेगा,,,,,,(मेरी बातें सुनकर मन मदहोश हो रही थी और धीरे-धीरे मेरे लंड को मुठीयाना शुरू कर दी थी जो कि उनकी तरफ से इशारा था आगे बढ़ने का,,,,मुझे बिल्कुल भी रहा नहीं यार मैं तुरंत ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते-देखते में अपनी मां की चूचियों को ब्लाउज की कैद से आजाद कर चुका था,,,, उनकी बड़ी-बड़ी चूचियांऔर भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी मैं दोनों हाथों से उसे पकड़ कर जोर-जोर से दबा रहा था और मां मेरे लंड को आगे पीछे करके मजा ले रहे थे देखते-देखते वह खुद मेरा सर पकड़ कर अपनी चूची पर कर दी और मुझेदूध पीने का इशारा करने लगी मैं भी मन का इशारा पाकर टूट पड़ा और बारी-बारी से दोनों चुचियों का रेस पीने लगा,,,, हम दोनों के बीच हालात पूरी तरह से बिगड़ रहे थे ऐसा लग रहा था कि बरसों के बाद मां के हाथों में उसका पसंदीदा खिलौना आ गया था जिससे वह जी भर कर खेल रही थी,,,देखते ही देखते मैं अपने घुटनों के बल बैठ गई और तुरंत मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी कि हम मेरे लिए बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय था क्योंकि मैंने ऐसा कभी सोचा नहीं था,,,,, कुछ देर तक मां इसी तरह से मजा लेती रही और मुझे मजा देती रही इसके बादमां तुरंत उठकर खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर मुझे अपनी बुर चाटने के लिए बोली,,,, मैं कर भी जा सकता थामेरा तो यह सपना था मैं तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गया और अपनी मां का रस पीना शुरू कर दिया हम दोनों पागल हुए जा रहे थे बाथरुम के अंदर हम दोनों पूरी तरह से मां बेटे की जगह औरत और मर्द बन चुके थे,,,,।





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बाथरूम के अंदर ही मा पेट के बल लेट गई और अपने दोनों टांगें खोलकर मुझे बताने लगी कि आगे क्या करना हैयह मेरा पहला मौका था मां की बात मानते हुए मैं धीरे-धीरे अपने लंड को उसकी गुलाबी छेद में डालना शुरू कर दिया और उसके बाद अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत मां भी मस्त हो रही थी और उसके बाद है तो यह सिलसिला रोज का हो गया हम दोनों एक ही कमरे में कहीं बिस्तर पर पति-पत्नी की तरह सोने लगे,,,,,,

(इतना पढ़कर अंकित की हालत खराब हो गई थी अंकित गहरी सांस लेता हूं अपनी मां की तरफ देखने लगासुगंधा भी मदहोश हो चुकी थी उसके चेहरे पर भी उत्तेजना साफ झलक रही थी वह भी वासना भरी आंखों से अपने बेटे की तरफ देख रही थी)
बहुत ही कामुक गरमागरम और मदहोश भरा अपडेट है कहानी पढ़ कर दोनों मां बेटे की हालत खराब हो रही है दोनों वासना की आग में जल रहे हैं
 

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रात को जो कुछ भी हुआ था उसे लेकर सुगंधा काफी उत्साहित थी क्योंकिउसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसका बेटा कुछ ज्यादा हिम्मत दिखाया था बस थोड़ा और हिम्मत दिखा देगा तो रात को ही काम बन जाता है इस बात को सोचकर होगा मन ही मन मुस्कुरा रही थी लेकिन अपने आप पर गुस्सा भी कर रही थी कि जब उसका बेटे ने इतनी हिम्मत दिखाई तो वह थोड़ी हिम्मत क्यों नहीं दिखा पाई उसे भी तो कुछ करना चाहिए थाआखिरकार वह भी तो एक औरत है उसकी भी तो चाहत है उसकी भी तो प्यास है जिस चीज की भुख उसके बेटे को है उसी चीज की भुख तो उसे भी है,,,, फिर क्यों नहीं आगे बढ़ पाई क्यों नहीं अपने बेटे का साथ दे पाई,,,, सुगंधा को अच्छी तरह से हिसाब सो रहा था कि उसका बेटा उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए उत्साहित हो चुका था,,,वह तो शायद उसकी नादानी थी उसे औरत के गुलाबी छेद के बारे में कुछ ज्यादा मालूम नहीं था वरना वह अपने लंड को उसके गुलाबी छेद में डाल देता,,,, इस बात को सोच कर वह पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,, उसी को समझ में नहीं आ रहा था मंजिल उसे ज्यादा दूर नजर नहीं आ रही थी,,, पवित्र रिश्ता की मर्यादा में भी अब उसे वासना की सुनहरी कीरन नजर आ रही थी।





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उसे एहसास होने लगा था कि आप बहुत दिन ज्यादा दूर नहीं है जब उसके बेटे का लंड उसके गुलाबी छेद की गहराई नाप रहा होगा,,, रसोई घर मेंरोटी को तवे पर रखकर वह अपने बेटे के बारे में और रात को जो कुछ विवाह उसके बारे में सोच कर मदहोश रही थी गरम हो रही थी जिसका सीधा असर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार पर पड़ रहा था। उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसका बेटापूरे शिद्दत के साथ उसकी बुर में लंड डालने की कोशिश कर रहा था इसलिए तो उसकी दोनों जांघों के बीच से अंदर तक ठेलने की कोशिश कर रहा था,,,और उसकी रात की उस कोशिश को याद करके इस समय सुगंधा के चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी उसके होठों पर मुस्कुराहट थी,,इस बात के लिए नहीं कि उसका बेटा असफल कोशिश कर रहा था वहीं से बात से मुस्कुरा रही थी कि उसके बेटे को औरतों के बारे में भी कुछ ज्यादा ज्ञान नहीं है उसे यह भी नहीं मालूम की मर्द अपने लंड को औरत के किस अंग में डालता है शायद इसीलिए वहां असफल हो गया था वरना जिस तरह की उसकी कोशिश थी वह जरूर कामयाब हो जाता अगर उसे संभोग के बारे में जरा सा भी ज्ञान होता तो,,, अपने बेटे की इस अज्ञानता पर सुगंधा को ज्यादा गुस्सा नहीं आ रहा था वह इस बात से ज्यादा खुश थी की अगर दोनों के बीच कुछ हुआ तो उसे सीखाने में ज्यादा मजा आएगा,,,,।






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सुगंधा तवे पर रोटी को चिमटी से पलट रही थी क्योंकि वह एकदम गरम हो चुकी थी और गर्म होकर फूल रही थी यह देखकर सुगंधा को एहसास होने लगा कि इसी तरह से हीऔरत की बुर का ध्यान होता है जब वह गर्म हो जाती है तो एकदम से कचोरी की तरह फूल जाती है उसमें से रस टपकने लगता है जिसे पीने के लिए दुनिया का हर एक मर्द तड़पता है ,,, सुगंधा अपने मन में सोच रही थी दुनिया के हर एक मर्द की तरह उसका बेटा भी औरत की बुर से मज़ा लेना चाहता होगा वह भी उसे चाटना चाहता होगा उसमें अपना लंड डालना चाहता होगा,,, बस थोड़ा डर अपनी मर्यादा और अज्ञानता की वजह से कुछ कर नहीं पा रहा है और जब कल रात कुछ करने की कोशिश किया तो औरत की बुर के भूगोल का ज्ञान न होने की वजह से कुछ कर नहीं पाया,,,, सुगंधा रोटी को तवे पर से उतारकर थाली में रखते हुए सोच रही थी कि अब उसे भी कुछ करना होगातृप्ति के गए 2 दिन गुजर चुके हैं लेकिन दोनों के बीच कुछ हो नहीं पाया है अगर इसी तरह से आंख मिचोली चलती रही तो तृप्ति भी घर पर आ जाएगी और फिर दोनों के बीच कुछ भी नहीं हो पाएगा,,, मां बेटे के बीच कुछ हो इसीलिए तो तृप्ति को गांव भेजी थी। अपने मन में यह सोचकर वह थोड़ा परेशान हो गई और अपने आप को ही दिलासा देते हुए बोली।





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नहीं नहीं ऐसा नहीं होने दूंगी सुनहरा मौका में अपने हाथ से जाने नहीं दूंगी तृप्ति को जिस वजह से उसकी नानी के मन भेजी हूं उस वजह को पूरा जरूर करूंगी वरना मेरे जैसी बेवकूफ औरतकोई भी नहीं होगी आखिरकार इतना कुछ होने के बावजूद भी वह अभी भी प्यासी की प्यासी है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा अब मुझे ही कुछ करना होगा अपने आप को ऐसा दिलासा देकर वह फिर से खाना बनाने में लग गई,,,,।खाना बनाते समय वह बार-बार दरवाजे की तरफ देख रही थी लेकिन वह जानती थी कि इस समय अंकित घर पर नहीं था नहाने के बाद नाश्ता करके वह तुरंत बाहर निकल गया था,,, वैसे तोसुगंधा अपने बेटे को रोकना चाहती थी लेकिन वह रोक नहीं पाई थी रात को जो कुछ भी हुआ था उसकी खुमारी अभी भी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी और वह अपने बेटे से नजर नहीं मिला पाती इसलिए वह कुछ बोल नहीं पाई,,,।

दोपहर में खाना खाने के बादसुगंधा घर की सफाई में लग गई थी और बर्तन साफ कर रही थी,,,, साफ सफाई कर लेने के बाद वह अंकित के कमरे के पास आई और दरवाजा खोलकर देखी तो अंदर अंकित नहीं था वह सोच में पड़ गई कि अंकित गया कहां,,,, सुगंधा थोड़ा परेशान हो रही थीक्योंकि सुबह भी वह अपने बेटे से बात नहीं कर पाई थी और इस समय भी वह घर पर मौजूद नहीं था इसलिए वह घर के दरवाजे तक आई और बाहर की तरफ देखने लगी दोपहर का समय होने की वजह से सड़के सुनसान थी। इक्का दुक्का वहां नहीं सड़क पर आते जाते दिखाई दे रहा हैगर्मी इतनी थी की सुगंधा का खुद का मन घर से बाहर निकलने को नहीं हो रहा था इसलिए वह सोच रही थी कितनी गर्मी में उसका बेटा बाहर कहां चला गया,,,फिर अपने मन में सोचने लगी कि शायद रात वाली घटना को लेकर उसके मन में जरूर कुछ चल रहा है इसलिए वह उस नजर नहीं मिला पा रहा है,,, अगर सच में रात वाली घटना से उसका जमीर जाग गया तो सारे किए कराए पर पानी फिर जाएगा,,, इतना जो कुछ भी वह बेशर्मी दिखाई थी अपने बेटे के सामने सब बेकार हो जाएगा अपनी मंजिल तक पहुंचाने के लिए जिस तरह का रास्ता उसने चुना था जिस तरह से बेशर्मी को अपनाया था अपने अंदर एक रंडी पन को जगाया था वह सब कुछ बेकार हो जाएगा,,,,अपने मन में उठ रहे इस तरह के ख्याल से सुगंधा परेशान हो रही थी विचलित हो रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। फिर अपने आप से ही बोली नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं होगा,,,, और ऐसा वह अपने मन में सोचते हुए वह अपने कमरे की तरफ जाने लगी,,,,।




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अपने कमरे पर पहुंचते ही दरवाजे पर खड़े होकर वह फिर से कुछ सोचने लगी और फिर धीरे से दरवाजा खोली जो कि सिर्फ बंद था उस पर सिटकनी नहीं लगी थी,,,और जैसे ही दरवाजा खुला सामने बिस्तर पर अंकित बैठा था उसे देखकर सुगंधा के चेहरे पर मुस्कुराहट तैरने लगी और वह राहत की सांस लेने लगी लेकिन अपनी मां को दरवाजे पर देखकर अंकित तुरंत असहज हो गया और बिस्तर के नीचे को छुपाने की कोशिश करने लगा यह देखकर सुगंधा बोली,,।


क्या हुआ अंकित क्या छुपा रहा है,,,( कमरे में प्रवेश करते हुए सुगंधा बोली,,,,अपनी मां को कमरे में प्रवेश करता हुआ देखकर अंकित थोड़ा घबरा गया था और घबराहट भरे स्वर में बोला)


ककककक,,, कुछ नहीं कुछ भी तो नहीं,,,,,

(तब तक सुगंध बिस्तर तक पहुंच चुकी थी और वह बिस्तर पर ;बिछे गद्दे को उठाकर देखने लगी तो उसके नीचे वही गंदी किताब थी जिस किताब ने दोनों को अपने मंजिल तक पहुंचने में मदद कर रहा था,,, उसे किताब को देखकर सुगंधा मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए अपने बेटे से बोली,,,)


ओहहहह तो यह बात है किताब पड़े बिना रहा नहीं जा रहा है क्यों ऐसा ही है ना,,,


नहीं नहीं मम्मी ऐसा कुछ भी नहीं है,,,






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तो ईसे छुपा क्यों रहा था,,,,(किताब के पन्ने को पलटते हुए सुगंधा बोली,,,,,,सुगंधा जिस तरह से अपने हाथ से किताब का पन्ना पलट रही थी यह देखकर अंकित की हिम्मत बढ़ने लगी थी और वह अपने मन में सोचने लगा था कि इतना कुछ तो दोनों के बीच हो रहा है इतनी ढेर सारी गंदी बातें इस किताब को लेकर हो चुकी है तो अब क्यों अपनी मां से घबरा रहा है शर्मा रहा है,,,,,,, इसलिए वह थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए बोला,,,)

नहीं ऐसा कुछ भी नहीं मम्मी वह तो किताब ऐसी है ना की,,,,, अब क्या बताऊं किताब ही ऐसी है कि तुम्हें दरवाजे पर देखकर मैं थोड़ा डर गया,,,,,


डरने की जरूरत नहीं हैतुझे अच्छी तरह से याद होना चाहिए कि मैं ही तुझे इस किताब को पढ़ने के लिए बोलीअगर ऐसा कुछ होता तो मैं तुझे यह किताब देती ही नहींऔर इस किताब को पढ़ने पर तुझे थप्पड़ लगा दी होती लेकिन मैं जानती हूं कि तू अब बड़ा हो चुका है समझदार हो चुका है,,,,, वैसे पढ़ क्या रहा था तू,,, मैं तो ठीक हूं की पूरी किताब ही गजब की कहानी से भरी हुई है,,,,(किताब के पन्ने को पालते हुए सुगंधा अपने होठों पर मादक मुस्कान बिखेरते हुए बोली अपनी मां को इस तरह से मुस्कुराता हुआ देखकर अंकित के भी हिम्मत बढ़ने लगी और वह बोला,,,)






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तुम सच कह रही हो मम्मी पूरी किताब ही गजब की है एक बार पढ़ने बैठो तो पूरी किताब पड़े बिना उठ नहीं सकते मैं तो उसे दिन वाली कहानी के बारे में सोच रहा था और वही देखना चाहता था कि आगे क्या होता है जैसा कि तुम बताएं की हालत को देखकर दोनों में जरूर कुछ हुआ होगा और दोनों के बीच कुछ होने की आशंका दोनों के हालात पर निर्भर रखती है,,,।

अच्छा तो तूने क्या पढ़ा उन दोनों के बीच आगे कुछ हुआ कि नहीं,,,,,।

बहुत कुछ हुआ मम्मी मेरा तो पढ़ कर ही हालत खराब हो गई है,,,,,।

क्यों ऐसा क्या लिखा हुआ है कि तेरी हालत खराब हो गई और वह भी सिर्फ पढ़करअगर देखा होता है या कुछ उसे कहानी का हिस्सा होता तो मैं समझ सकती थी पढ़कर ही तेरी हालत कैसे खराब होने लगी,,,। मुझे भी तो बता,,,(ऐसा कहते हुए उसे किताब को अंकित की तरफ आगे बढ़ाते हुए) ले उस दिन की कहानी से आगे पढ़ कर बता,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि उसे भी एहसास होने लगा था कि उसकी मां भी उत्सुक थी की मां बेटे के बीच आगे क्या हुआ,,,, और यह कहानी वाली घटना उन दोनों के लिए ही कारगर साबित होने वाली थी ऐसा अंकित को एहसास होने लगा था,,,,इसलिए वह भी तुरंत अपनी मां के हाथ से उस किताब को ले लिया उसकी मां ठीक उसके सामने खड़ी थीऔर अंकित नीचे बिस्तर पर बैठा हुआ था और धीरे-धीरे पन्नों को पलट रहा था कुछ पन्नों के बाद रंगीन चित्र थे जिसमेंमर्द और औरत के संभोग के बहुत सारे चित्र थे जिसमें औरत की बुर और मर्द का लंड एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,,अंकित उसे चित्र को बड़े गौर से देख रहा था देख क्या रहा था वह अपनी मां को चित्र को दिखा रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां भी उस किताब की तरफ ही देख रही थी,,, उस गरमा गरम चित्र को देखकर अंकित का लंड पेंट के अंदर अकड़ रहा था,,,खड़ा तो वह पहले से ही था लेकिन इस समय अब उसकी हालत और ज्यादा खराब हो रही थीतो दो तीन-तीन सेकंड तक उसे दृश्य पर अपनी नजर डालकर और अपनी मां को दिखाकर वह पन्ने को पलट दे रहा था हर एक पन्ने पर एक अद्भुत दृश्य था जिसे देखकर कोई भी मर्द और औरत चुदवासे हो जाए।





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सुगंधा अपने बेटे की हरकत को देखकर मस्त हो रही थी वह भी उसी द्रशय को देख रही थी जिस दृश्य को उसका बेटा देख रहा था,,,, सुगंधा की बुर की पानी छोड़ रही थी क्योंकि चित्र था ही कुछ ऐसा मर्द बिस्तर पर पीठ के बल लेटा हुआ था और एक औरत जो कि एकदम गदराए बदन की थीवह उसे मर्द के ऊपर पूरी तरह से छाई हुई थी उसे मर्द का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में घुसा हुआ था और औरत अपनी चूची को अपने हाथ से पड़कर उसे मर्द के मुंह में डालें हुई थी और वह मर्द उसकी दोनों चूचियों को पकड़े हुए था उसे मर्दों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि औरत की हरकत से उसकी काम कला से वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था। तभी अंकित पन्ने को पलट दिया और दूसरे दृश्य को देखने लगा यह दृश्य भी गजब का था,,, इसमें एक औरत खेत में काम करते हुए अपनी फ्रॉक को कमर तक उठाई हुई थी और झुक कर घास को काट रही थी और पीछे से एक आदमी उसकी चुदाई कर रहा था,,,इस नजारे को भी उसकी मां प्यासी नजर से देख रही थी और अपने मन में सोच रही थी की खास उसे औरत की जगह वह खुद होती है और पीछे खड़ा मर्द उसका बेटा होता तो कितना मजा आता।।






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अगले पन्ने को पलटते ही जो नजारा दिखाई दिया उसे देखकर सुगंधा की बुर मदन रस की बुंद नीचे टपका दी,,,, उस पन्ने पर चित्र छपा हुआ था जो बेहद मन मौत था और यह सुगंधा की भी ख्वाहिश थी,,,चित्र में एक मर्द बाथरूम के अंदर खड़ा था हो एक औरत अपने घुटनों के बल बैठकर उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके लंबे मोटे लंड को अपने मुंह में जड़ तक लेकर उसे कस रही थीऔर उसकी मोटाई और लंबाई से साफ पता चल रहा था कि उस औरत के गले तक पहुंच चुका था उस मर्द के लंड को मुंह में लेने पर उसे थोड़ी बहुत तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी इस तकलीफ के आगे जो आनंद उसे प्राप्त हो रहा था वह उसकी तकलीफ को पूरी तरह से कम कर दे रहा था। यही चाहतसुगंधा के मन में भी थी वह भी इसी तरह से अपने बेटे के मोटे-तगडे लंड को अपने मुंह में उसे चूसना चाहती थी,,, दो-तीन सेकंड के बाद अंकित पढ़ने को पलट दिया और अब कहानी शुरू हो गई थी अंकित कहानी को वहीं से शुरू करना चाहता था जहां से उस दिन खत्म किया था।वही पन्ना आंख के सामने आते ही अंकित अपनी मां की तरफ देखने लगा और अंकित को अपनी मां की आंखों में वासना का तूफान दिखाई दे रहा था जिसमे वह खुद डूबना चाहता थाकहानी को आगे पढ़ने से पहले वह अपनी मां की इजाजत लेना चाहता था इसलिए वह धीरे से बोला,,,।

आगे पढ़ु,,,,,?




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इसीलिए तो तुझे दी हूं,,,,,।

ठीक है,,,,,,, उस दिन अपने यहां तक पढे थे,,,,, अब आगे पढ़ कर बताता हूं,,,,(अंकित का इतना कहना था की सुगंधा पास में पड़ी कुर्सी को अपनी तरफ खींचकर उसे पर बैठ गई और ठीक अंकित के सामने बैठ गई थी वह अंकित के चेहरे के बदलते भाव को देखना चाहती थी,,)

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा थावैसे तो मैं यह नजारा देखना नहीं चाहता था अपने आप ही मेरी आंखों के सामने यह नजारा दिखाई दे गया था लेकिन आज पहली बार या नजारा देखकर मुझे लग रहा था कि मैं अब तक एक खूबसूरत दृश्य को नहीं देख पाया था लेकिन आज शायद मेरी किस्मत में यही लिखा था और आज मुझे वह देखने को मिल रहा है जिसके बारे में मैं कभी सपने में नहीं सोचा था,,,मां की गांड वाकई में कुछ ज्यादा ही पड़ी थी कई हुई साड़ी में अक्सर मैंने अपनी मां की गांड को देखा थालेकिन कभी मेरे मन में गलत भावना नहीं जगी थी लेकिन आज पहली बार मन को पेशाब करता हुआ देखकर मेरे मन में न जाने कैसे-कैसे भाव पैदा हो रहे थे और यह भावएक बेटे के मन में तो बिल्कुल भी नहीं पैदा हो सकते थे एक मर्द के मन में ही पैदा हो सकते थे और इस समय मुझे ऐसा ही लग रहा था कि मेरी आंखों के सामने जो औरत पेशाब कर रही है वह मेरी मां नहीं बस एक औरत है और मैं एक मर्द हूं हम दोनों को एक दूसरे की जरूरत है।





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मां की बुर लगातार सिटी की आवाज निकल रही थी और यह सिटी की आवाज किसी मधुर ध्वनि से बिल्कुल भी काम नहीं थी इस सिटी की आवाज सुनकर तो मेरा लंड एकदम से अपनी औकात में आ गया था,, अभी तक मां की नजर मेरे पर नहीं पड़ी थीवही तो ऐसा तक नहीं था कि बाहर दरवाजे पर खड़ा होकर में उन्हें पेशाब करता हुआ देख रहा हूं वरना अगर उन्हें एहसास हो गया होता तो वह कब सेमुझे जाने को कह देती और दरवाजा बंद कर देती और शायद गुस्सा भी करती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा था लेकिन मा को पेशाब करतेहुए देख कर मेरी हिम्मत पड़ रही थी बार-बार मेरा हाथ अपने आप ही पेंट के ऊपर से लंड को सहला दे रहा था। इस समय मुझे कुछ और नहीं सुझ रहा था। वैसे भी मैं निश्चिंत था क्योंकि घर में मेरे और मां के सिवा और कोई नहीं रहता थाइसलिए किसी के देखे जाने का या किसी के आ जाने का डर मुझे बिल्कुल भी नहीं था डर इस बात का था की मां मुझे देख लेगी तो क्या सोचेगी।(कहानी के एक-एक शब्दों को पढ़कर अंकित की हालत खराब हो रही थी वह अपनी मां की तरफ भी देख ले रहा था,, उसे साफ दिखाई दे रहा था कि,,कहानी को सुनकर उसकी मां की भी हालत खराब हो रही थी पाल-पाल उसके चेहरे का रंग बदल रहा था और उसकी सांसों की गति भी ऊपर नीचे हो रही थी यह देखकर अंकित को मजा आ रहा था और वह वापस कहानी आगे पढ़ते हुए बोला।)





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सच कहूं तो इस समय मन कर रहा था कि बाथरूम में घुस जाऊं और मां की चुदाई कर दुं,,,,, क्योंकि जहां तक मेरा मानना था बरसो हो गए थे मां की बुर में लंड नहीं गया था,,, क्योंकि हम दोनों अकेले ही रहते थे बरसों पहले ही पिताजी किसी और औरत के साथ शादी करके दूसरे शहर चले गए थेजहां तक मेरा मानना था की मां का किसी के साथ गलत संबंध बिल्कुल भी नहीं थाक्योंकि अगर होता तो इतने दिनों में भनक लग जाती लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था और इतना पक्का था की मां की बुर में लंड ना जाने की वजह से उसे भी दूसरी औरतों की तरह पुरुषकी जरूरत पड़ती होगी लेकिन न जाने क्यों हुआ अपनी भावना को दबाए रह गई थी शायद उसके परवरिश के लिए,,, मुझे एहसास हो रहा था कि शायद मा को भी ईसी चीज की जरूरत है,,,,और अब मेरा करते तो बनता है कि मैं अपनी मां की जवानी की प्यास अपने लंड से बुझाऊं क्योंकि उसे भी अपनी शौक पूरा करने का पूरा हक है। और शायद मेरी वजह से ही मन अपनी ख्वाहिश को पूरा नहीं कर पा रही थी और अंदर ही अंदर घुट रही होगी,,,क्योंकि अगर मैं नहीं होता तो शायद वह दूसरी शादी कर ली होती और एक औरत की जिंदगी की रही होती यह सब मेरी वजह से ही हो रहा है,,,, आज तो मैं अपनी मां की जरूरत को पूरा करके रहूंगा,,,,,।






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अरे यह क्या मां तो पेशाब कर चुकी है अब जल्दी ही उठकर खड़ी हो जाएगी,,, नहीं नहीं मैं क्या देख रहा हूं मां तो अपनी बुर में उंगली डाल रही है,,ओहहहह इसका मतलब है कि मेरा सोचना बिल्कुल सही था मा को भी जरूरत है,,,, अब तो मेरा रास्ता एकदम साफ हो गया है आज तो मैं अपनी भी और अपनी मां की भी इच्छा पूरी कर दूंगा,,,,,,(ऐसा पढ़करअंकित अपनी मां की तरफ देखने लगा उसकी मां मुस्कुरा रही थी क्योंकिकहानी कुछ उसके जीवन जैसी ही थी जिसका एहसास अंकित को भी हो रहा था अंकित गहरी सांस लेते हुए कहानी को आगे पढ़ते हुए बोला )

मुझे रहा नहीं गया और मैं दरवाजे पर खड़ा होकर बोला,,,।

बस करो मम्मी बहुत तुमने उंगली से अपनी प्यास बुझाने की कोशिश कर ली अब मैं जानता हूं कि तुम्हें क्या चाहिए,,,,(मेरी बात सुनकर मा एकदम से चौंक गई और,,,घबरा कर तुरंत अपनी बुर में से उंगली को बाहर खींच ली और एकदम से खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को नीचे गिरा दि और अपनी गांड को ढंक ली और घबराहट भरे स्वर में बोली,,,)





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तततततत,,, तू यहां क्या कर रहा है,,,?

देख रहा हूं कि मेरी मां कितना तड़प रही है लंड के लिए,,,(ऐसा कहते हुए मैं बाथरूम में प्रवेश करके और अपने पेंट की बटन को खोलने लगा यह देखकर मा से घबरा गई और बोली,,,)


यह तु क्या कर रहा है,,?

वही जिसकी तुम्हें जरूरत है,,,,(ऐसा कहते हुए मैंने तुरंत अपने कपड़े उतार कर बाथरूम के अंदर एकदम नंगा खड़ा हो गया मां की हालत खराब हो रही थी वह थोड़ा गुस्से में भी थी लेकिन मेरे मोटे तगड़े लंबे लंड को देखकर वह एकटक उसे देखते ही रह गई,,,,, और धीरे से बोली)

यह गलत है,,,।

गलत क्या है सही क्या है यह हम दोनों जानते हैं और इस समय क्या सही है यह तुम भी अच्छी तरह से जानती हो इसलिए बिल्कुल भी दिखावा मत करो मैं अपनी आंखों से देख चुका हूं तुम अपनी उंगली से अपनी प्यास बुझाती हो,,,,,(ऐसा कहते हुए मैं मां के एकदम करीब पहुंच गया और उनका हाथ पकड़ कर तुरंत अपने लंड पर रख दिया जो कि एकदम गरम और एकदम कड़क था,,,पहले तो मन घबरा कर उसे पर से अपना हाथ हटाने की कोशिश करने लगी लेकिन मैं तुरंत अपने हाथ में मां की हथेली पकड़ कर उसे पैर दबा दिया तो थोड़ी ही देर मेंमां के बदन में लंड की गर्मी पूरी तरह से छाने लगी और वह मदहोश होने लगी और उनकी मदहोशी उनकी आंखों में दिख रही थी और वह धीरे से बोली,,,)

किसी को पता चल गया तो,,,,।


चार दिवारी के अंदर हम दोनों के बीच क्या हो रहा है यह बाहर किसी को कैसे पता चलेगा,,,,,,(मेरी बातें सुनकर मन मदहोश हो रही थी और धीरे-धीरे मेरे लंड को मुठीयाना शुरू कर दी थी जो कि उनकी तरफ से इशारा था आगे बढ़ने का,,,,मुझे बिल्कुल भी रहा नहीं यार मैं तुरंत ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते-देखते में अपनी मां की चूचियों को ब्लाउज की कैद से आजाद कर चुका था,,,, उनकी बड़ी-बड़ी चूचियांऔर भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी मैं दोनों हाथों से उसे पकड़ कर जोर-जोर से दबा रहा था और मां मेरे लंड को आगे पीछे करके मजा ले रहे थे देखते-देखते वह खुद मेरा सर पकड़ कर अपनी चूची पर कर दी और मुझेदूध पीने का इशारा करने लगी मैं भी मन का इशारा पाकर टूट पड़ा और बारी-बारी से दोनों चुचियों का रेस पीने लगा,,,, हम दोनों के बीच हालात पूरी तरह से बिगड़ रहे थे ऐसा लग रहा था कि बरसों के बाद मां के हाथों में उसका पसंदीदा खिलौना आ गया था जिससे वह जी भर कर खेल रही थी,,,देखते ही देखते मैं अपने घुटनों के बल बैठ गई और तुरंत मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी कि हम मेरे लिए बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय था क्योंकि मैंने ऐसा कभी सोचा नहीं था,,,,, कुछ देर तक मां इसी तरह से मजा लेती रही और मुझे मजा देती रही इसके बादमां तुरंत उठकर खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर मुझे अपनी बुर चाटने के लिए बोली,,,, मैं कर भी जा सकता थामेरा तो यह सपना था मैं तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गया और अपनी मां का रस पीना शुरू कर दिया हम दोनों पागल हुए जा रहे थे बाथरुम के अंदर हम दोनों पूरी तरह से मां बेटे की जगह औरत और मर्द बन चुके थे,,,,।





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बाथरूम के अंदर ही मा पेट के बल लेट गई और अपने दोनों टांगें खोलकर मुझे बताने लगी कि आगे क्या करना हैयह मेरा पहला मौका था मां की बात मानते हुए मैं धीरे-धीरे अपने लंड को उसकी गुलाबी छेद में डालना शुरू कर दिया और उसके बाद अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत मां भी मस्त हो रही थी और उसके बाद है तो यह सिलसिला रोज का हो गया हम दोनों एक ही कमरे में कहीं बिस्तर पर पति-पत्नी की तरह सोने लगे,,,,,,

(इतना पढ़कर अंकित की हालत खराब हो गई थी अंकित गहरी सांस लेता हूं अपनी मां की तरफ देखने लगासुगंधा भी मदहोश हो चुकी थी उसके चेहरे पर भी उत्तेजना साफ झलक रही थी वह भी वासना भरी आंखों से अपने बेटे की तरफ देख रही थी)
बहुत ही कामुक गरमागरम और मदहोश भरा अपडेट है कहानी पढ़ कर दोनों मां बेटे की हालत खराब हो रही है दोनों वासना की आग में जल रहे हैं
अंकित कहानी पढ़ चुका था और कहानी पढ़ने के बाद जो भाव अंकित के चेहरे पर नजर आ रहे थे वही भाव उसकी मां के चेहरे पर नजर आ रहे थे दोनों कहानी को पढ़कर मंत्र मुग्ध हो चुके थेदोनों की आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था दोनों एक दूसरे को एक तक देख रहे थे ऐसा लग रहा था कि जैसे दोनों के बीच अभी कुछ हो जाएगा कहानी की गर्माहट दोनों बदन को उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच चुकी थी,,, दोनों की सांसों की गति एक दूसरे की सांसों की गति से मानो जैसे आगे बढ़ने की शर्त लगाई हो दोनों की सांस बड़ी तेजी से चल नहीं रही थी बल्कि दौड़ रही थी। अंकित के हाथों में वह गंदी किताब थी जिसने मां बेटे दोनों को आपस में खुलने में काफी मदद किया था,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि इस समय का क्या करें जिस तरह के दोनों के हालात थे अंकित के मन में हो रहा था किसी समय अपनी मां को अपनी बाहों में भर ले और उसके होठों पर उसके गालों पर चुंबनों की बौछार कर दें,,, लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी।





दोनों के बीच एकदम से खामोशी छा गई थी,,, सुगंधा के तन-बदन में आग लगी हुई थी सुगंधा अपने मन में यही सोच रही थी कि, जिस तरह से बाथरूम में घुस किया था काश उसका बेटा भी उसी तरह की हिम्मत दिखा कर उसे पलंग पर पटक कर चोद डाले तो मजा आ जाए,,,, यही सोच कर उसकी बुर पानी छोड़ रही थी उसका खुद का मन कर रहा था कि इस समय अपने बेटे को लेकर पलंग पर पसर जाए लेकिन यह भी उसके मन की केवल सोच थी जिसे अंजाम देने में उसे डर लग रहा था,,, दोनों के खामोशी के बीच अंकित की आवाज आई।

क्या सच में इन दोनों ने ऐसा ही किया होगा जैसा की किताब में लिखा हुआ है।

बिल्कुल किताब में सही लिखा हुआ है मैं कह रही थी ना दोनों के बीच जो भी होगा हालात को देखते हुए होगा,,

मेने कुछ समझा नहीं हालात को देखते हुए से मतलब,,,,(अंकित हैरान होते हुए अपनी मां से पूछा)

मैं तुझे कही थी नादोनों के बीच अगर आगे कुछ भी होता है तो हालात को देखते हुए होगा हालात का मतलब की दोनों के बीच घर के अंदर किस परिस्थिति से दोनों गुजर रहे हैं,,,।

अभी भी मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है सीधी शादी भाषा में समझाओ।

देख मैं तुझे बताती हूं बरसों सेवह औरत अकेली थी और अपने बेटे के साथ ही घर में रहती थी,,,, इसका मतलब साफ करके वह बरसों से अपने पति के प्यार से दूर थी,,,, जिसके चलते उसके बेटे ने उसके हालात का फायदा उठाते हुए,,बाथरूम में घुस गया था क्योंकि वह अपनी मां को गंदी हरकत करते हुए देख लिया था और वह समझ गया था कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है,,,,।




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अच्छा तो वह पेशाब करते हुए हरकत कर रही थी अपनी उंगली से वही ना,,,,(अंकित भी याद करते हुए बोला)

हां वहीउसकी हरकत देखकर उसका बेटा समझ गया था कि उसकी मां को क्या चाहिए,,,,।

क्या चाहिए,,,?(जानबूझकर हैरान होने का नाटक करते हुए बोला)


इतना समझ में नहीं आता मर्द का साथ जो उसे सुख दे सके उसे खुशी दे सके जो एक पति देता है उसे सुख के लिए वह भी तड़प रही थी तभी तो बाथरूम के अंदर हरकत कर रही थी,,,।

ओहहह,,,, मतलब कि उसके बेटे को समझ में आ गया था इसलिए उसने इतना बड़ा कदम उठाया,,,।

हां इसीलिए उसने इतना बड़ा कदम उठाया और नतीजा सामने है,,,, शुरू शुरू में उसकी मां इंकार करती रही उसे यह सब गलत होने की दुहाई देती रहीं लेकिन अंदर से वह भी यही चाहती थी,,,, और फिर वह भी मान गई,,,,।

बाप रे मेरा तो माथा ठनक रहा है,,,, मां बेटे के बीच में भी यह रिश्ता संभव है पहली बार देख रहा हूं,,,,।

मैं भी तो पहली बार ही तेरे मुंह से सुन रही हूं कहानी की किताब को नहीं तो मुझे नहीं मालूम था की मां बेटे के बीच में भी ऐसे रिश्ते भी होते होंगे तब तो ऐसे ना जाने कितने घर होंगे और उनकी घर की चार दिवारी के अंदर इसी तरह के रिश्ते पनप रहे होंगे मां बेटे दोनों मजा ले रहे होंगे,,,।

तो क्या सच में यह हो सकता है,,,।

बिल्कुल हो सकता है मैं तुझसे कही थी ना की कहानी ऐसे ही नहीं लिखी जाती,,, सच्चाई छुपी होती है तभी उसे सच्चाई को कलम के जरिए किताब में लिखी जाती है,,,,,,,





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बाप रे गजब की कहानी थी,,,,और वैसे देखा जाए तो कहानी के हालात और हम दोनों के हालात एक जैसे ही हैं,,,,।

(अपने बेटे की यह बात सुनकर सुगंधा के तन-बदन में भेजने की लहर उठने लगी और वह मुस्कुराते हुए अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली,,,)

ओहहहह कहीं तेरा इरादा भी उन दोनों की तरह तो नहीं है,,,।


नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मैं तो सिर्फ बता रहा था कि वह भी वर्षों से अपने पति के बगैर रही थी और हम दोनों भी पापा के बिना बरसों से रह रहे हैं,,,।

हम दोनों नहीं, तृप्ति भी है,,,


हां वह तो है लेकिन इस समय तो केवल हम दोनों ही हैं,,(अंकित हिम्मत करके अपने मन की बात अपनी मां से बता रहा था वह चाहता था कि उन दोनों के बीच भी कहानी वाली घटना हो जाए)


तुझे क्या लगता है अंकित कि मैं भी उस औरत की तरह हूं क्या,,,, एकदम निर्लज्ज,,,,


नहीं नहीं मैं ऐसा तो नहीं कह रहा हूं,,,।





नहीं तेरे कहने का मतलब क्या है क्या मैं भी उसे औरत की तरह गंदी हरकत करती हूं कहीं ऐसा तो नहीं कहानी पढ़कर तो भी मुझ पर उस लड़के की तरह आजमाना चाहता हो।


यह कैसी बातें कर रही हो मम्मी मैंने ऐसा तो नहीं कहा,,,,।
( अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसकी मां केवल दिखावा कर रही थी, नाटक कर रही थी अंदर से वह क्या चाहती है यह अंकित अच्छी तरह से भली-भांति जानता था,,,,)

चाहे जो भी हो लेकिन कहानी पढ़ने के बाद मुझे तेरा इरादा कुछ अच्छा नहीं लग रहा है,,,,।




चलो कोई बात नहीं,,(कुछ देर तक वहीं बैठे रहते हुए अपनी मां की बात सुनकर कुछ सोचने के बाद इतना के करवा तुरंत उस कीताब को लेकर खड़ा हो गया,,,लेकिन उसके खड़े होने के साथ-साथ उसका लंड भी पूरी तरह से खड़ा हो गया था इसका एहसास उसके पेट में बने तंबू को देखकर अच्छी तरह से समझ में आ रहा था और उसके पेट में बने तंबू पर सुगंधा की नजर पड़ चुकी थी,,,, सुगंधा तो देखते ही रह गई सुगंधा कुछ बात का एहसास हो रहा था की कहानी पढ़ने के बाद उसके बेटे की क्या हालत हो रही है जब उसकी खुद की हालत खराब हो चुकी थी तो उसके बेटे के बारे में क्या कहना,,,, बुर लगातार पानी पर पानी छोड़ रही थी,,,, जिससे उसकी चड्डी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। जिसके गीलेपन की वजह से वह अपने आप को असहज महसूस कर रही थी। और उसे अपनी चड्डी बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था) मैं इस किताब को रख देता हूं और अब ईसे हाथ नहीं लगाऊंगा,,, क्योंकि मुझे लगता है कि,,,,,(अलमारी खोलकर उसमें किताब रखते हुए,,,, लेकिन वह अपनी बात खत्म कर पता है इससे पहले ही सुगंधा बोल पड़ी)






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क्या लगता है तुझे,,,?

मुझे लगता है कि,,,(धीरे से अलमारी बंद करके अलमारी का सहारा लेकर खड़े होकर बड़े आराम से)अगर इस किताब को पढ़ते रहे तो फिर हम दोनों के बीच भी कुछ हो जाएगा,,,,,

(इस बार अंकित की बात सुनकर सुगंधा कुछ बोल नहीं पाई क्योंकि सुगंधा को भी यही लग रहा था और वह खुद ऐसा चाहती थी लेकिन अपने बेटे से खुलकर बोलने में शर्म महसूस हो रही थी इस समय सुगंधा की नजर अपने बेटे के पेंट में बने तंबु पर थी और इस बात का एहसास अंकित को भी हो रहा थाअंकित भी यही चाहता था इसलिए अंकित अपने पेंट में बने तंबू को छुपाने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं कर रहा था वह एक तरह से अपनी मां को यह जताना चाहता था कि देखो तुम्हारी वजह से मेरे लंड की हालत क्या हो गई है,,,, और सुगंधा अपने मन मेंअपने बेटे के पेट बने तंबू को लेकर कल्पना कर रही थी कि पेट के अंदर उसके बेटे का लंड कितना भयानक लग रहा होगा उसकी लंबाई मोटाई जब पेंट के अंदर इतना गजब का दिखाईवदे रहा है तो पूरी तरह से नंगा हो जाने के बाद तो बिना चोदे ही यह उसकी बुर से पानी निकाल देगा। अपने बेटे के तंबू को देखते हुए वह गहरी सांस लेते हुए बोली,,,)






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वैसे तो तू सच कह रहा है,,,, लेकिन ऐसा नहीं हो सकता,,, भले ही हम लोगों की परिस्थिति कहानी की तरह है लेकिन इन सबके बावजूद भी मेरी मर्यादा की डोरी तेरी कच्ची नहीं है कि जैसे हालात में टूट जाए मेरे माता-पिता ने मुझे जो संस्कार दिए हैं उस पर मैं हमेशा खरी उतरूंगी,,,,।

(अपनी मां के मुंह से अपनी मां का पिता के द्वारा दिए गए संस्कार की बात सुनते ही अंकित अपने मन में बोला तुम्हारे संस्कार और संस्कारी घर,,, और वाह रे तुम्हारी मांतुम्हारी मां के बारे में शायद तुम्हें पता नहीं है अगर मैं उसके बारे में बता दूं तो शायद तुम भी साड़ी उठाकर मेरे लंड पर अपनी बर रगड़ने लगोगी,,,, तुम्हें नहीं मालूम है कि तुम्हारी मां रात भर रंडी की तरह मुझसे चुदवा कर घर गई है,,,,लेकिन यह बात वह अपने मन में ही कह रहा था अपनी मां के सामने कहने में उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,,, अपनी मां की बात सुनने के बावजूद भी उसे उसकी बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि वह जानता था कि जब उसकी मां की मांमर्यादा में इतनी कच्ची है कि अपने ही नाती के साथ है मजा कर सकती है तो फिर उसकी बेटी तो अभी भी पूरी तरह से जवानी से भरी हुई है वह भला कैसे अपने आप को संभाल कर रख पाएगी,,,,,)

मैं तो यही चाहता हूं कि हम दोनों के बीच ऐसा कुछ भी ना हो,,,, वरना अगर ऐसा कुछ हो गया तो हम दोनों के बीच मां बेटे का पवित्र रिश्ता ही नहीं रह जाएगा,,,।




हां तु सच कह रहा है,,,,।(ऐसा कहते हुए वह गहरी सांस लेने लगी और अपने मन में सोचने लगी कि यह क्या हो गया गंदी किताब की गंदी कहानी के माध्यम से वह अपना निशाना साधना चाहती थी,,, लेकिन बातो का रुख एकदम से दूसरी तरफ घूम गया था,,,, जिसका उसे पता नहीं चला था औरयह सब उसके ही कारण हुआ था इसलिए उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा थाऔर वह अपने आप से ही बोल रही थी की बड़ी सती सावित्री बनाने चली है संस्कार का चोला पहनने चली है,,, ले अब बन जा संस्कारी,,,, खुद से ही खुद की दुश्मन बनी हुई है इतना अच्छा खासा चल रहा थाऐसा नहीं की थोड़ी हिम्मत दिखा कर खेल को आगे बढ़ाने में मदद करें लेकिन खेल को एकदम से दूसरी तरफ घुमा दे जहां पर सिर्फ वही रोज की घीसी पिटी जिंदगी है संस्कारों की चादर है मर्यादा की दीवार है जहां से बाहर निकलना नामुमकिन है,,,,, सुगंधा को अपने आप पर गुस्सा आ रहा था,,, लेकिन अंकितजानता था कि उसकी मां बिल्कुल भी मर्यादा में नहीं रह पाएगी सिर्फ वह बातें कर रही है।

शाम हो चली थी सुगंधा आईने में अपने आप को देखकर बालों को संवार रही थी उसे बाजार जाना था,,, लेकिन इस समय उसके बदन में उत्साह नहीं था,,, क्योंकि अपने चरित्र को ऊंचा बात कर उसने खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार दी थी लेकिन अब अपनी करनी को उसे ठीक करना था एक बार फिर से गाड़ी को पटरी पर चढ़ाना था,,,, इसलिए वह अपने बेटे को आवाज लगाने लगी।
बहुत ही शानदार अपडेट हैं एक बार फिर से संस्कार वाली बाते कर सुगंधा ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली
 

sunoanuj

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एक अद्भुत रोमांचक एहसास के साथ दुकान के बाहर ग्राहकों को देखकर मां बेटे दोनों तुरंत दर्जी की दुकान से बाहर निकल गए थे वह दोनों किसी की नजर में नहीं आना चाहते थे इसलिए वहां ज्यादा देर खड़े रहने का कोई मतलब नहीं था क्योंकि उन दोनों का मकसद पूरा हो चुका था उन दोनों को जो करना था उन दोनों ने दर्जी की आंखों के सामने उसकी दुकान में कर चुके थे और जल्दबाजी में सुगंधा अपना सीधा हुआ ब्लाउज लेना बिल्कुल भी नहीं भूली थी लेकिन जल्दबाजी में उसे पैसा देना भूल चुकी थी,,,, 5 मिनट के अंदर ही वह दोनों चौराहे पर पहुंच चुके थे दोनों का दिल बड़ी तेजी से धड़क रहा था दोनों के चेहरे पर संतुष्टि का एहसास था दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे और मन ही मन में कह रहे थे कि आज एक अद्भुत एहसास लेकर लौटे हैं।




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दोनों ऑटो में बैठ चुके थे अब उसे क्षेत्र में रुकना उन्हें ठीक नहीं लग रहा था इसलिए वह जल्द ही ऑटो पर बैठकर घर पहुंच चुके थे। वैसे तो सुगंधा को कुछ सब्जियां भी खरीदनी थी लेकिन जो कुछ भी मां बेटे में सर जी की दुकान के अंदर किए थे उसे देखते हुए वह कहीं भी खड़ी रहना नहीं चाहती थी और सीधा घर पहुंच चुकी थी। घर पर पहुंचते ही मां बेटे एक दूसरे को देखकर हंस रहे थे क्योंकि आज उन दोनों ने दरजी को बेवकूफ जो बना दिया था तभी सुगंधा को याद आया कि उसने तो दर्जी को ब्लाउज की सिलाई के पैसे दिए ही नहीं इसलिए वह अपने बेटे से बोली।

अरे अंकित उसे दरजी को तो ब्लाउज के पैसे दी ही नहीं वैसे ही ब्लाउज उठा लाइ।

तो क्या हो गया आज उसे उसके जीवन में पैसे से भी ज्यादा सुख जो मिल गया था उसके आगे पैसे की कोई अहमियत नहीं है और अच्छा हुआ कि उसे पैसे नहीं दी देख नहीं रही थी कैसे तुम्हारी चूचियों को दबा रहा था,,,,, (अंकित की बात सुनते ही सुगंधा शर्मा से लाल हो गई) तुम्हें लगता है कि इसके बाद उसे कुछ पैसे देने चाहिए बल्कि उसे हमें पैसे देने चाहिए थे.।

धत् तुझे क्या मैं धंधे वाली लगती हूं जो उससे पैसे लुं,,, (हाथ में लिया हुआ ठेला टेबल पर रखते हुए वह बोली और कुर्सी खींचकर उस पर बैठ गई,,,)



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दुकान के अंदर तो ऐसा ही लग रहा था कि जैसे तुम कोई धंधे वाली हो,,, (अंकित भी कुर्सी खींचकर ठीक अपनी मां के सामने बैठ गया )

अच्छा अब तुझे मैं धंधे वाली लगने लगी ना,,, (गुस्से से अपने बेटे की तरफ देखते हुए सुगंधा बोली)


नहीं नहीं ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं कि तुम धंधे वाली हो लेकिन तुम्हारी हरकतें जो थी लाजवाब थी तुम्हारे चरित्र से एकदम बाहर निकल कर जो तुमने काम की हो वह कोई फिल्म की हीरोइन हीं कर सकती है। अच्छी नहीं तुमने अपनी जवानी से दरजी के पसीने छुड़ा दि,,,,।

सच में दर्जी की तो हालत खराब हो गई,,, (आंखों में अद्भुत नशा लिए हुए सुगंधा बोली)

मैं दावे से कह सकता हूं अगर उसकी मर्दाना ताकत उसके साथ होती तो वह बिना कहे तुम्हारी चुदाई कर देता,,,,

हमममम,,,,, (अपने बेटे की तरफ देखकर अपनी आंखों को नचाते हुए वह बोली,,,)

हां मम्मी में सच कह रहा हूं देखी नहीं दरजी पूरी तरह से अपने अंदर जवानी महसूस कर रहा था। उस दिन तो तुम्हें बेटी कह रहा था लेकिन आज देखो इस बेटी की चूची जोर-जोर से दबा रहा था और पागल हुआ जा रहा था,,,,
(इस बार फिर से सुगंधा के चेहरे पर शर्म की लाली नजर आने लगी वह शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे कर ले और अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)




उसका चेहरा देखी होती जवानी से भरी हुई एक औरत को अपनी आंखों के सामने चुदवाते हुए देखकर कुछ ना कर सकने की तड़प उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी,,, आज तो वह भी अपनी बढ़ती उम्र से नाराज होकर होगा कितनी जल्दी उसकी उम्र क्यों बढ़ गई अगर उसकी उम्र भी कुछ तौर पर सही होती तो शायद अभी मजा ले पाता,,,।

तू बहुत उसे दरजी को मजा दिलाने के फिराक में है।

ऐसा नहीं है मुझे तो गर्व महसूस हो रहा है कि तुम्हारी जवानी देखकर दर्जी की हालत खराब हो गई थी तुम्हारी चूची दबाते दबाते देखी उसकी तड़प कितनी बढ़ गई थी कुछ न करने की स्थिति में वह केवल छूकर ही मजा ले रहा था देखी थी ना कैसे अपना हाथ आगे बढ़कर तुम्हारी बुर को हल्के से सहलाया था इतने से ही वह जन्नत का मजा लूट रहा था।

तू सच कह रहा है दरजी सच में आज पूरी तरह से पागल हो गया था मेरी बुर पर हाथ लगाकर उसके चेहरे की रूपरेखा जिस तरह से बदली थी मुझे तो लग रहा था कि वह अपने धीरे लंड से ही कुछ कर सकने की कोशिश कर सकता था।


और हां मुझे लग रहा था कि तुम भी दरजी को मजा देने के फिर आंख में थी और उसे पूरा मजा भी दी हो,,,।

वह तो खुद मजा ले रहा था।

वह तो ठीक है लेकिन तुम्हें क्या हो गया था कि उसकी लूंगी में से उसके लंड को बाहर निकाल ली थी।



(अपने बेटे की बात सुनकर एक तरफ बस शर्म से पानी पानी हो रही थी वहीं दूसरी तरफ वह हंस भी रही थी और हंसते हुए अपने बेटे सेबोली)

उसकी हरकत जिस तरह से थी मैं देखना चाहती थी कि उसकी टांगों के बीच कुछ हरकत हो रही है कि नहीं।

फिर तुमने क्या देखी,,,,?

वैसे लूंगी के अंदर जो मैंने देखी उससे अंदाजा लगा सकती हूं कि अपनी जवानी के दिनों में वह भी कहर बरसाया होगा,,,,।

यह बात है,,, (अंकितमुस्कुराते हुए बोला)

हां सच में उसका लंड पर अच्छा खासा ही था बस उम्र के हिसाब से उसमें अकड़ नहीं थी वह ढीला ही था।

लेकिन तुम्हारे हाथ लगाते ही उसमें जान आ गई थी मैंने देखा था।
(अपने बेटे की बात सुनकर वह फिर से हंसने लगी,,)

हां मैंने देखी थी उसके लंड को जैसे ही मैं हाथ में पड़ी उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो गई थी और मैं भी उसे पर थोड़ा दया खा गई थी।

दया खा गई थी मैं कुछ समझा नहीं,,,

अरे मेरा मतलब है कि हम दोनों को इतना अच्छा अनुभव उसकी दुकान में ही तो मिला अगर वह नहीं होता उसकी दुकान नहीं होती तो इतना अच्छा समय हम दोनों कैसे गुजार पाते एक अद्भुत अनुभव से कैसे गुजार पाते हैं यह सब उसे दरजी के ही कारण तो हुआ था इसलिए मैं सोच रही थी कि इसका थोड़ा सा एहसान चुका देना चाहिए और मैं वही की जो मेरी जगह कोई और औरत होती तो करती।





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साले का पानी निकाल दी तुमने,,,।

छी,,, सोच कर ही इस समय थोड़ा अजीब लग रहा है।

उसे समय तो बहुत मजा आ रहा था मुझे तो डर लग रहा था कि कहीं तुम उस बुड्ढे का लंड अपने मुंह में ना ले लो,,,,

पागल हो गया क्या,,,?

नहीं नहीं दर्जी की दुकान में सच में तुम एकदम छिनार हो गई थी और इतना मजा मुझे आया कि शायद ऐसा मजा अब कभी मिलेगा नहीं,,, वैसे सोच कर थोड़ा अजीब लगता है लेकिन एक अनजान के सामने चुदाई करने में जो मजा आता है उसका एहसास आज ही होरहा है।

तू सच कह रहा है अंकित पहले तो मुझे भी अजीब लग रहा था लेकिन जैसे-जैसे तेरी हरकतों से मेरे बदन में नशा छाने लगा मैं भी थोड़ा-थोड़ा खुलने लगी और उसके बाद तो जो मजा आया कि पूछ मत अभी तक मेरा शरीर झनझना रहा है,,,,।

तुम्हारी साड़ी उठाया कर तुम्हारी गांड पर जब चपत लगाया तो दर्जी का तो कलेजा ही मुंह को आ गया था शायद उसने अपनी जवानी में इस तरह की हरकत औरत के साथ नहीं किया था।

तू भी तो उसे पूरी तरह से पागल करने के इरादे में था मुझे लगा कि तू बस चोदना शुरू कर देगा लेकिन पीछे से मेरी गांड चाट रहा था।

आप क्या करूं तुम्हारी गांड देखता हूं तो न जाने क्या हो जाता है और वैसे भी तुम्हारी गांड चाटते हुए देख कर वह दर्जी पूरी तरह से पस्त हो गया था।

अभी तक उसको होश ही नहीं आया होगा,,,, (सुगंधा हंसते हुए बोली)





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मुझे तो लगता है आज के दिन को याद करके वह बार-बार अपने हाथ से ही काम चलाएगा। वैसे अब कब चलोगी दर्जी की दुकान पर।

अब इस बारे में सोचना भी मत उधर का रास्ता ही भूल जाना अब वहां कभी जाना ही नहीं है मैं नहीं चाहती कि भविष्य में उसे दरजी को पता चले कि हम दोनों के बीच का रिश्ता क्या है हो सकता है कभी उसे दर्जी की दुकान पर जाएं और कोई पहचान का मिल जाए तो सारा भांडा फूट जाएगा,,,।

तुम सच कह रही हो अब हमें वहां जाना नहीं चाहिए वैसे भी जो मजा है वहां मिला है उसके साथ हमें पैसे भी मिल गए हैं उसकी सिलाई ना देकर।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा हंसने लगी,,,, वैसे उसका बेटा सच ही कह रहा था दर्जी की दुकान से माया और पैसे दोनों वापस लेकर लौटे थे दोनों मां बेटे,,,,, सुगंधा को महसूस हो रहा था कि उसे नहाना चाहिए क्योंकि उसे समय जवानी के जोश में उसे उसे दर्जी का स्पर्श तो मजा दे रहा था और उसने खुद जवानी के नशे में चुदाई का सुख भोगते हुए उसके लंड को पकड़ ली थी और उसका पानी निकाल दी थी और उसका पानी उसके हथेली को भिगो दिया था उसे समय तो उसे अजीब नहीं लगा लेकिन अब सोच कर ही उसे बड़ा अजीब लग रहा था उसे घिन्न आ रही थी अपने ही बदन से कोई और समय होता तो वहां दरजी को कभी अपने पास भी भटकने नहीं देती लेकिन उसे समय का माहौल उसे पूरी तरह से पागल कर दिया था और उसे अच्छी तरह से याद था कि उसे दर्जी ने उसकी दोनों चूचियों को अपने हाथों से दबाया था मजा लिया था और उसकी बुर पर भी अपनी हथेली रगड़ा था इसलिए उसे इस समय नहाने की जरूरत थी ऐसा उसे महसूस हो रहा था और वह तुरंत कुर्सी पर से उठकर बाथरूम में चली गई नहाने के लिए।





अंकित भी कुर्सी पर से उठा और घर के पीछे की तरफ वह भी नहाने के लिए चल दिया थोड़ी देर में मां बेटे दोनों नहा कर कपड़े पहन चुके थे सुगंधा चाय बना रही थी,,,, चाय पीने के बाद अंकित बाहर टहलने के लिए चला गया क्योंकि थोड़ा अंधेरा हो गया था और उसकी मां खाना बना रही थी,,,, वह सड़क के किनारे इधर-उधर टहल ही रहा था कि तभी सामने से सुमन और उसकी मां आई हुई नजर आ गई सुमन और उसकी मां दोनों अंकित को देखकर मुस्कुराने लगे क्योंकि अंकित को लेकर दोनों के मन में अलग-अलग चाहती थी दोनों किसी भी तरह से अंकित को पाना चाहते थे जिसमें सुमन की मां कामयाब हो चुकी थी वह तीन बार अंकित से चुदाई का सुख भोग चुकी थी लेकिन अभी तक सुमन सिर्फ ऊपर से ही मजा ली थी अभी तक अंकित के लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस नहीं की थी जबकि एहसास उसे पहले दिन से ही हो गया था,,, जब वह सुमन के घर में किचन में अनजाने में ही उससे टकरा गया था और जिस स्थिति में सुमन अंकित से टकराई थी उसका पिछवाड़ा पूरी तरह से उसके आगे वाले भाग से सात गया था और इस समय सुमन को एहसास हुआ था कि अंकित कि टांगों के बीच गजब का हथियार है। उसी दिन से वह अंकित से चुदवाना चाहती थी लेकिन कामयाब नहीं हो पाई थी। अंकित के करीब पहुंचकर मां बेटी दोनों एक साथ बोले।

अरे अंकित यहां क्या कर रहे हो।




कुछ नहीं आंटी बस ऐसे ही टहल रहा था,,, (अंकित मुस्कुराते हुए बोला तो उसके मुस्कुराते हुए चेहरे को देखकर सुमन की मां मां ही मन में बोली कि देखो अभी कितना भोला भाला लग रहा है और अकेले में उसे पास आए तो उसकी बुर का भोसड़ा बनाने से बिल्कुल भी पीछे नहीं हटता,,,, अंकित की बात सुनकर सुमन की मां बोली।)

घर पर अब आते नहीं हो क्या बात है सिर्फ परीक्षा के दिन ही सुमन की याद आती थी। परीक्षा खत्म रिश्ता खत्म।

तुम सही कह रही हो मम्मी उसके बाद तो अंकित कहीं दिखाई ही नहीं देता,,,, मतलब निकल गया तो।

अरे नहीं नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं है,,,, तुम तो जानती हो तृप्ति दीदी घर पर नहीं है इसलिए थोड़ा बहुत काम में हाथ बंटाना पड़ता है,,, इसलिए समय नहीं मिलता।


तो चलो घर पर चाय पिलाती हूं,,, (सुषमा मुस्कुराते हुए बोली उसकी बात सुनकर अंकित अपने मन में ही बोला अब तो मुझे तुम्हारे दूध पीने की आदत पड़ गई है चाय से काम बनने वाला नहीं है,,,, लेकिन ऐसा सिर्फ वह मन में ही बोला अगर सुमन साथ में ना होती तो शायद वह ऐसा बोल भी देता लेकिन सुमन के सामने ऐसा हुआ बोल नहीं सकता था लेकिन फिर भी औपचारिकता निभाते हुए वह बोला)

और किसी दिन आंटी अभी तो खाना खाने का समय होगया है।

तो चलो ना खाना ही खा लेते हैं,,, (सुमन भीमुस्कुराते हुए बोली)

नहीं दीदी किसी और की घर पर खाना बन रहा है अगर तुम्हारे वहां खा लूंगा तो घर का खाना नुकसान हो जाएगा।


बहुत समझदार हो गया है तू,,, (सुषमा बोली)

ऐसी बात नहीं है आंटी फिर मम्मी को भी अकेले खाना खाना पड़ेगा,,,,,


हां वह तो है,,,,, (सुषमा बोली)

चलो कोई बात नहीं किसी और दिन और वैसे तुम घर पर आया जाया करो,,,,, और पढ़ाई में जरूरत हो तो पूछ लिया करो।


जी दीदी जरूर पूछ लूंगा,,,,, (पढ़ाई में मदद की बात को अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था और वैसे भी सुमन ही थी जो उसे पहली बार अपने खूबसूरत अंगों को दिखाई थी और उसे जी भर कर खेलने का मौका दे और वह अच्छी तरह से जानता था की पढ़ाई में मदद मांगने के बहाने अगर वह उसके घर जाएगा तो उसे पढ़ाई में मदद की जगह और भी ज्यादा कुछ मिलेगा जिसे वह खुद प्राप्त करना चाहता है,,,,




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थोड़ी ही देर में उन दोनों के जाने के बाद अंकित भी अपने घर पहुंच गया खाना बनकर तैयार हो चुका था मां बेटे दोनों साथ में खाना खाकर सोने के लिए छत पर पहुंच गए और फिर से एक बार घमासान चुदाई का खेल खेलते रहे जब तक की दोनों का मन भर नहीं गया यह सिलसिला रोज का हो गया था मां बेटे दोनों एक भी दिन एक भी पाल चुदाई का सुख भोगने से पीछे नहीं हट रहे थे,,,,, अंकित को साथ दिखाई दे रहा था कि अब उसकी मां कुछ ज्यादा ही खुश रहने लगी थी और उसकी खुशी का कारण अंकित अच्छी तरह से जानता था क्योंकि उसकी खुशी का कारण वह खुद था इसलिए वह अपनी मां को बेइंतहा मोहब्बत करने लगा था उसे पूरा सुख देने की कोशिश में लगा रहता था।

कुछ दिनों बाद मां बेटे दोनों सब्जी खरीदने के लिए बाजार पहुंच चुके थे,,,,, तभी बाजार में नूपुर और उसका बेटा राहुल भी मिल गया नूपुर को देखते ही सुगंधा खुश होते हुए बोली,,,,।

अरे नुपुर यहां कैसे,,,?

मैं भी सब्जी खरीदने आई हूं तुम भी तो सब्जी खरीदने आई हो ना,,, (अंकित की तरफ देखकर) और बेटा कैसे हो?

बिल्कुल ठीक हूं आंटी आप कैसी हैं।

देख लो कैसी हो जैसा तुम छोड़े थे वैसे ही हूं,,,,
(नूपुर की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुरा रही थी लेकिन वह नूपुर के कहने के मतलब को नहीं समझ पा रही थी,,,, जिसे अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था अंकित जानता था कि पिछली मुलाकात में नूपुर के साथ उसने क्या किया था डाइनिंग टेबल के नीचे छिपकर उसके पति की मौजूदगी में ही उसकी रसीली बर का स्वाद चखा था और वह पल उसके लिए बेहद अद्भुत और आनंददायक था निश्चित तौर पर अगर उस दिन राहुल के पिताजी घर पर मौजूद न होते तो उसी दिन अंकित नूपुर की चुदाई कर दिया होता लेकिन राहुल के पिता की मौजूदगी में ऐसा हो नहीं पाया था,,,,, सुगंधा भी राहुल की तरफ देखकर उसका भी हाल समाचार नहीं और बोली,,,)





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इस बार तुम पढ़ने के लिए गए नहीं,,,?

जाने वाला आंटी लेकिन अभी थोड़ा समय लग जाएगा,,,,।(अंकित अच्छी तरह से देख रहा था कि राहुल बात करते समय उसकी मां की चूचियों की तरफ ही देख रहा था क्योंकि पीले रंग की साड़ी और पीले रंग के ब्लाउज में गजब की लग रही थी,,,, अंकित जानता था कि उसकी मां लो कट ब्लाउज पहनी हुई थी जिसमें से उसकी आधी से ज्यादा चूचियां पारदर्शी साड़ी में दिखाई देती थी। और उसे देख कर राहुल मन ही मन ललच रहा था। अंकित यह देखकर मन ही मन गुस्सा हो रहा था वह जानता था कि राहुल उसकी मां की जवानी क्या आकर्षण में मस्त है,,,,, इधर-उधर की बात करने के बाद नूपुर बोली,,,)

तुम तो नहीं बैठ कर बातें करो हम दोनों सब्जियां खरीद कर आते हैं,,,,,।

ठीक है आंटी,,,,,।

(सुगंधा और नूपुर दोनों सब्जी खरीदने के लिए मार्केट के अंदर प्रवेश कर गई थी और उन्हें चाहते हुए राहुल देख रहा था और अंकित अच्छी तरह से जानता था कि राहुल किसे देख रहा था राहुल अंकित की मां को ही देख रहा था खास करके उसके भारी भरकम गोलाकार पिछवाड़े को देख रहा था सुगंधा की गांड देखकर वह पूरी तरह से मस्त हो गया था और पेट के ऊपर से अपने लंड को दबा दिया था यह देखकर अंकित को बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था,,,,, राहुल अंकित से बोला,,,)




चल जब तक दोनों सब्जी खरीद कर आते हैं सबसे कम दोनों चाय पी लेते हैं,,,,,,(और इतना कहकर राहुल अंकित का हाथ पकड़कर एक छोटी सी दुकान पर गया जहां पर चाय समोसे मिल रहे थे,,,, उस दुकान के बाहर तीन-चार बड़े-बड़े लंबे पत्थर रखे हुए थे जिस पर लोग बैठकर गप्पे लड़ाते हुए चाय समोसे का लुफ्त उठा रहे थे। राहुल जानबूझकर अंकित को ऐसी जगह पर ले जाकर बैठाया जहां पर दूसरा कोई नहीं था जहां पर वह आराम से अंकित से बात कर सकता था और वह खुद दुकान पर गया और चाय समोसे लेकर आया,,,,, एक समोसा और चाय अंकित को थमा कर खुद उसके पास बैठ गया और चाय की चुस्की लेते हुए अंकित से बोला,,,,)

एक बात कहूं अंकित बुरा मत मानना।
(अंकित समझ गया था कि राहुल किस बारे में बात करना चाहता था और वह देखना चाहता था कि वह क्या बोलना चाहता है इसलिए वह बोला)

हां बोलो क्या बात है,,,,।


यार तेरी मां गजब की लगती है एकदम फिल्म की हीरोइन,,,,।
(राहुल की बात सुनकर अंकित कुछ बोला नहीं बस उसकी तरफ देखने लगा और चाय की चुस्की लेने लगा अंकित का हाव भाव देखकर राहुल को लगने लगा था कि वह कुछ भी बोलेगा अंकित सुनेगा क्योंकि ऐसे भी राहुल अंकित को थोड़ा दब्बू किस्म का लड़का समझता था,,,,)

देख नाराज मत होना मैं एकदम सही कह रहा हूं तूने शायद गौर नहीं किया होगा लेकिन तुझे छोड़कर बाकी सब ने गौर किया होगा कि तेरी मां फिल्म की हीरोइन लगती है एकदम गजब की लगती है तेरी मां का जिस्म एकदम तराशा हुआ है,,,,,





यह सब क्या बोल रहे हो यार किसी और बारे में बात करो,,,,,(अंकित जानबूझकर अपना ले जा थोड़ा ठंडा रख कर बोल रहा था ताकि राहुल को लगेगी उसे फर्क नहीं पड़ रहा है और इसी बात का फायदा उठाते हुए राहुल बोला)

यार जब तेरी मां आसपास हो तो किसी और के बारे में बात करने का मतलब ही नहीं होता मैं तो तेरी मम्मी को देखा ही रह गया यार पीली साड़ी में एकदम कयामत लगती है मेरी मां तो तेरी मां के सामने कुछ भी नहीं है,,,,।


लेकिन मुझे तो तुम्हारी मम्मी ज्यादा ही अच्छी लगती है,,,,।

(राहुल को अंकित की तरफ से इस तरह का जवाब मिलेगा इसकी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए वह थोड़ा आश्चर्य से अंकित की तरफ देखने लगा लेकिन थोड़ी देर में सहज बनते हुए मुस्कुराने लगा और बोला)


घर की मुर्गी दाल बराबर ऐसा ही होता है लेकिन तुम हकीकत से वाकिफ नहीं हो तुम्हारी मम्मी मेरी मम्मी से लाख गुना ज्यादा खूबसूरत और गर्म औरत है उसकी चूची देख हो कितनी बड़ी-बड़ी है तुम्हें शायद गौर नहीं किया होगा लेकिन मैं अभी-अभी गौर किया ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने के लिए पागल रहती है तुम्हारी मां की चूचियां,,,,,।
(राहुल की बातें सुनकर अंकित को गुस्सा आ रहा था लेकिन वह किसी तरह से अपने गुस्से को दबा ले गया था क्योंकि वह भी उसकी मां के बारे में बातें जो करने लगा था इसलिए वह भी जवाब देते हुए बोला)

अपना अपना नजरिया है मैं भी तुम्हारी मां की चूचियां देखा थोड़ा सा अपना सीना आगे की तरफ कर दे तो शायद ब्लाउज का एक दो बटन अपने आप ही टूट जाए,,,,(चाय की चुस्की लेटा हुआ राहुल की तरफ देखते हुए वह बोला राहुल तो एकदम हैरान था)





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चाहे कुछ भी हो लेकिन मुझे तो तेरी मां बहुत अच्छी लगती है जाते समय देखा किसी भी साड़ी में तेरी मम्मी की गांड आहहहा हाहाकार मचा रही थी। मेरा तो लंड खड़ा हो गया।

मेरा भी कुछ ऐसा ही हालत था तुम्हारी मम्मी की गांड देखकर,,,,,।
(फिर से राहुल हैरान हो गया अभी तक वह जी अंकित से मिला था उसे अंकित में और आज के अंकित में जमीन आसमान का फर्क था,,,, दोनों का रवैया एकदम अलग था फिर भी ,,, राहुल को मजा आ रहा था अंकित से बात करने में,,,, थोड़ी देर खामोश रहने के बाद राहुल फिर से बोला,,,)

अच्छा एक बात बता अंकित तूने कभी अपनी मां को बिना कपड़ों के देखा है।

बिल्कुल भी नहीं और तुम,,,,,


मैंने तो बहुत बार देखा हूं यार कसम से औरत का जिस इतना खूबसूरत होता है कि मर्द पागल हो जाता है,,,,,,।

कैसे और कहां देखें तुमने,,,,।

कपड़े बदलते हुए नहाते हुए,,,,


ओहहह,,,,, तो क्या तुम्हारी मम्मी बिना कपड़ों के नहाती है,,,,,।


बिल्कुल सही और वह बाथरूम का दरवाजा भी बंद नहीं करती अनजाने में मैंने देख लिया था और मैं यही सोच रहा हूं कि अगर तुम भी अपनी मां को बिना कपड़ों के देखोगे तो तुम्हारी क्या हालत होगी मेरी तो सोच कर ही हालत खराब हो रही है लंड पूरी तरह से औकात में आकर खड़ा है सच कहूं तो तुम्हारी मां को याद करके मुठ मारने का मन कर रहा है।
(राहुल इस तरह की बातें करके अंकित का मन बहकाना चाहता था,,,, मौका देखकर राहुल बोला)

तो तुमने तो अपनी मां को बहुत बार बिना कपड़ों के देखे हो तो उसके बारे में भी सोच कर मुठ मारते होंगे।

बिल्कुल ठीक कह रहे हो तुम बहुत बार ऐसा हुआ है मैं अपनी मां के बारे में सोच कर बहुत बार मुठ मारा हूं और वैसे भी इसमें कोई गलत बात नहीं है। और तुम्हारी भी उम्र तो हो चुकी है मुठ मारने वाली और चोदने वाली। तुमने मारा है अपनी मां के बारे में सोचकर मुझे तो पूरा यकीन है कि कभी ना कभी तो तुम अपनी मां को बिना कपड़ों के देखे होंगे पेशाब करते हुए कपड़े बदलते हुए नहाते हुए,,,,,।

(राहुल की बात सुनकर अंकित थोड़ा सोचने लगा और फिर वह राहुल को थोड़ा जलाने के लिए बोला जो की हकीकत ही था)


हां तुम ठीक कह रहे हो एक बार अनजाने में मैंने मम्मी को पेशाब करते हुए देख लिया था,,,।

सचमें,,,(एकदम उत्साहित और खुश होते हुए राहुल बोला)

हां अनजाने में देख लिया था वैसे कोई मेरा इरादा नहीं था,,,।


कहां देखा था यार बताना,,,,,।

छत पर जब हम लोग सो रहे थे तब आधी रात को मेरी नींद खुली तो देखा मम्मी बगल में नहीं थी,,,।

बगल में नहीं थी मतलब कि तुम दोनों साथ में ही सोते हो,,,,।

पागल साथ में सोते हैं लेकिन एक ही बिस्तर पर नहीं सोते हैं समझे मेरी नींद खुली तो देखा कि बगल वाले बिस्तर पर मम्मी नहीं थी,,,,(अंकित जाने अनजाने में ऐसी बात नहीं करना चाहता था जिससे राहुल को शक होगी उसकी तरह उन दोनों के बीच भी कुछ हो रहा है)

फिर ,,,,फिर क्या हुआ,,,(चाय के कप से आखरी घूंट भरता हुआ वह बोला)


फिर क्या मैं नींद में इधर-उधर देखने लगा उठकर बैठ गया लेकिन सामने की तरफ देखा तो छत के कोने पर मम्मी पेशाब कर रहे थे।

हाए,,,,, क्या गजब का नजारा होगा यार,,,(अपने पेट के आगे वाले भाग पर हाथ रखते हुए) किस अवस्था में थी तेरी मम्मी,,,,.


किस अवस्था में क्या जैसे औरत पेशाब करने के लिए बैठी रहती है वैसे ही थी साड़ी कमर तक उठी हुई थी और पीछे से सब कुछ दिख रहा था।

ओहहहहह ऐसा लग रहा है कि जैसे मेरे सामने कोई फिल्म चल रही है और सच-सच बता तेरी हालत खराब हो गई होगी ना।


इसमें कौन सी हालत खराब होने वाली बात है मैं जब जान गया की मम्मी सामने है तो मैं फिर से सो गया,,,।

धत् तेरी की तू कैसा मर्द है रे मर्द है भी कि नहीं मुझे समझ में नहीं आ रहा है अपनी आंखों के सामने इतना खूबसूरत है तेरे से देखने के बाद भी तू शांत होकर सो गया मैं होता तो इस समय तेरी मां के पीछे पहुंच जाता और अपने लंड को बाहर निकाल कर उसकी गांड से रगड़ने लगता,,,,,।


तुम क्या अपनी मां के साथ ऐसा ही करते हो,,,,।

करने का तो बहुत मन करता है लेकिन मम्मी करने नहीं देती मैं वही सोच रहा हूं कि अगर तेरी जगह में तेरी मम्मी का बेटा होता तो अब तक तो तेरी मम्मी की चुदाई कर दिया होता,,,,,।


जैसे अपनी मम्मी की चुदाई करता है ना,,,,।
(राहुल एकदम से अंकित की तरफ देखने लगा और बोला)

पागल हो गया है क्या,,,,, बस सोचता हूं करता नहीं लेकिन हां मौका मिला तो तेरी मम्मी की चुदाई जरूर करूंगा,,,,,।

मेरी मम्मी के बारे में तो सोचना भी मत वह तेरी मां की तरह नहीं है,,,,।

तेरा क्या मतलब है कि मेरी मां की तरह नहीं है।


चल रहने दे मैं अपनी आंखों से देखा हूं तेरी मम्मी तेरे लंड पर कूद रही थी पागल की तरह चुदवा रही थी और तू अपनी मां को मस्त होकर चोद रहा था धक्के पर धक्के दे रहा था,,,,,।

(अंकित की बात सुनकर राहुल एकदम से घबरा गया उसे उम्मीद नहीं थी किया अंकित इस तरह से कुछ कह देगा जिसमें सच्चाई थी लेकिन फिर भी वह निकाल करते हुए बोला)

देख तू झूठ मत बोल समझा मैं तेरी मां के बारे में उल्टा सीधा बोल रहा हूं तो इस तरह से मेरे से बदला ले रहा है।


बदला नहीं ले रहा हूं मैं सच कह रहा हूं,,, मैंने यह सब अपनी आंखों से देखा दोपहर के समय मैं तुझसे मिलने तेरे घर आया था और तुम लोग जल्दबाजी में घर का दरवाजा बंद करना ही भूल गए थे हल्के से धक्का देने पर दरवाजा खुल गया था और मैं इधर-उधर ढूंढता हुआ तेरी मां के कमरे तक पहुंच गया था और खिड़की से मैं सब कुछ देख लिया था कि तुम दोनों किस तरह से चार दिवारी के अंदर मर्द और औरत का खेल खेलते हो,,,,, मैं तो उस दिन देख कर एकदम से चौंक गया कि कोई बेटा कैसे अपनी मां को चोद सकता है,,,, और कैसे एक मां अपने ही बेटे से खुलकर नंगी होकर मस्त होकर रंडी की तरह चुदवा सकती है मैं तो एकदम हैरान हो गया था मैं उसी समय तुम दोनों का आवाज लगाना चाहता था लेकिन मैं ऐसा कर नहीं पाया क्योंकि तुम दोनों एकदम से आपस में खो चुके थे दिन दुनिया से बेखबर होकर एक दूसरे में समा गए थे मुझे आज भी याद है,,,, कि तेरा लंड तेरी मां की बुर के अंदर बिना रुकावट के अंदर बाहर हो रहा था सच कहूं तो पहली बार में किसी औरत की चुदाई देख रहा था और मुझे उम्मीद नहीं नहीं था की पहली बार में ही मैं मां बेटे की चुदाई देखूंगा,,,, तभी मैं समझ गया था कि तेरी मां पूरी गर्म जवानी की है और शायद अपनी जवानी की गर्मी तेरे बाप से बुझा नहीं पाती है इसलिए तेरा सहारा ले रही है।
(मौका देखकर अंकित चौका मार दिया था चौका नहीं छक्का मार दिया था,,,,, अंकित के मन में इस समय कुछ और चल रहा था और राहुल के तो पसीने छूट रहे थे,,,, उसे यकीन नहीं हो रहा था किसकी चोरी इस तरह से पकड़ी जाएगी मां बेटे को ऐसा ही लग रहा था कि घर की चार दिवारी के अंदर जो कुछ भी वह दोनों कर रहे थे वह किसी को कानों कान खबर तक नहीं थी लेकिन राहुल कि यह गलतफहमी दूर हो चुकी थी क्योंकि अंकित अपनी आंखों से पूरी फिल्म देख लिया था अब इंकार करने का कोई रास्ता भी नहीं था इसलिए राहुल धीरे से बोला,,,)


देख अंकित यह बात किसी को मत बताना,,,,

इसके बदले मुझे क्या मिलेगा,,,,


चुप रहने के बदले तो दो-चार समोसे और खा ले,,,,।

तो सच में बेवकूफ है आंखों के सामने पकवान पड़ा है और तू चाय समोसे से मेरा मुंह बंद करना चाहता है।


मैं समझा नहीं,,,,।

देख बात एकदम सीधी है उसे दिन तुम मां बेटे की चुदाई देखकर मेरा भी लंड खड़ा हो गया था,,, मन तो मेरा उसी दिन कर रहा था कि तुम दोनों के साथ में भी जुड़ जाऊं और जिंदगी में पहली बार चुदाई का सुख प्राप्त करूं लेकिन मैं अपने आप को रोक रह गया था और इस तरह का ख्याल अपने मन में दोबारा कभी नहीं लाया था लेकिन आज तेरी बातें सुनकर एक बार फिर से मेरे अरमान जाग गए हैं।


तु कहना क्या चाहता है मे कुछ समझा नहीं।


मैं यह कहना चाहता हूं कि जैसे तू मजा लेना है वैसे मैं भी मजा लेना चाहता हूं मैं भी तेरी मां को चोदना चाहता हूं उसी दिन से तेरी मां के बारे में याद करके बार-बार मेरा लंड खड़ा हो जाता है।

तू पागल हो गया क्या,,,?(गुस्से में थोड़ा जोर से राहुल बोला तो आसपास बैठे हुए लोग उन दोनों की तरफ देखने लगे यह देखकर अंकित बोल)

थोड़ा धीरे बोल चिल्लाएगा तो तू ही बदनाम होगा,,,,,

देख अंकित में तेरे हाथ जोड़ता हूं,,, मैं तेरी मां के बारे में कुछ नहीं बोलूंगा लेकिन तु यह अपने मन से ख्याल निकाल दे।


मेरी मां के बारे में तो वैसे भी अब तु कुछ बोलने लायक नहीं है,,,, लेकिन तेरी मां को याद करके मेरी हालत खराब होने लगी है मैं सच में तेरी मां को चोदना चाहता हूं जिसमें तू ही मेरी मदद करेगा।

(अंकित की बात सुनकर राहुल एकदम क्रोधित हो रहा था लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था लेकिन फिर भी अंकित की बात सुनकर वह बोला)


अगर मैं इसमें तेरी मदद ना करूं तो,,,,।

तो तू ही सोच कर तुम मां बेटे की सच्चाई तेरे पापा को पता चल गई तो अगर तुम मां बेटे की सच्चाई धीरे-धीरे समझ में सबको पता चलने लगी तो,, तो सोच तेरी मम्मी भी टीचर है और अगर यह बात स्कूल में फैल गई तब क्या होगा तेरी मां कभी भी घर से बाहर नहीं निकल पाएगी लोग तेरी मां के बारे में तेरे बारे में कैसे किसी बातें करेंगे तुम मां बेटे की इज्जत एकदम से खाक में मिल जाएगी साथ में तुम दोनों अपने आप की भी इज्जत ले डुबोगे अगर मेरी बात नहीं मानोगे तो।

(अंकित पूरी तरह से खुले शब्दों में उसे धमकी दे रहा था और इसका अंजाम राहुल अच्छी तरह से समझ रहा था राहुल के पसीने छूट रहे थे वह जानता था कि अगर अंकित यह बात किसी को बता दिया तो मां बेटे का जीना मुश्किल हो जाएगा समझ में मुंह दिखाने के लायक दोनों नहीं रह जाएंगे और वह धीरे से बोला)


लेकिन मम्मी नहीं मानेगी,,,,(अपना चेहरा नीचे झुकाते हुए बोला,,,)


मम्मी तो तेरी मान ही जाएगी तू मानेगा कि नहीं यह बता,,,,, यही बात में तेरी मम्मी को बोल दूंगा तो वह मेरे सामने अपनी टांगे खोलने में बिल्कुल भी देर नहीं करेगी आखिरकार इज्जत बचाने के लिए वह इतना तो कर ही सकती है जब तेरे सामने टांग खोल सकती है तो मैं भी तो तेरी मां का बेटा जैसा ही हूं,,,,


लेकिन यह सब होगा कैसे,,,,,


तू तैयार है कि नहीं पहले यह बता,,,


तेरी बात मानने के सिवा मेरे पास और कोई रास्ता भी तो नहीं है,,,,,
(राहुल की बात सुनकर अंकित मन ही मन प्रसन्न होने लगा क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि अब उसे क्या करना है वैसे भी उसकी मां पहले सही तैयार थी बस इस खेल में उसके बेटे को शामिल करना था। राहुल की बात सुनकर अंकित खुश होता हुआ बोला,,,)


अब आएगा असली मजा,,,

लेकिन जो तू कह रहा है क्या तुझे लगता है की मम्मी तैयार हो जाएगी।


यह सब तु मुझ पर छोड़ दे,,, मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तेरी मां को क्या चाहिए उसे मोटा तगड़ा लंंड चाहिए जो कि मेरे पास है और अगर ऐसा ना होता तो वह तेरे पापा से ही खुश रहती तेरे साथ यह सब कभी नहीं करती इसलिए कैसे करना है यह सब तु मुझ पर छोड़ दे,,,, बस चल तू दोपहर में घर पर मौजूद मत रहना मैं तेरे घर पहुंच जाऊं और उसके बाद तू 1 घंटे बाद आना,,,,,,, वैसे तेरे पापा घर पर रहते हैं कि नहीं दोपहर में,,,।

नहीं वह तो ऑफिस में रहते हैं,,,।

तब तो सारा मामला फिट है तो तय रहा कल मैं तेरे घर आऊंगा,,,,,

(इतने में नूपुर और सुगंधा दोनों सब्जी लेकर वहां पहुंच गई,,,, राहुल का दांव पूरी तरह से उल्टा पड़ गया था,,,, उसे अपने आप पर ही गुस्सा आ रहा था कि ना वह इस तरह की बातें छेड़ता और ना ही अंकित इस तरह का खेल उसके साथ खेलता,,,, वैसे भी राहुल अपने मन में यही सोच रहा था कि जैसा अंकित चाहता है उसकी मां, वैसा कभी नहीं करेगी,,,, लेकिन फिर भी उसके मन में शंका बना हुआ था कि जिस तरह से अंकित उसे मां बेटे के बीच के रिश्ते के बारे में बोलकर उसे मजबूर कर दिया था वही बोलकर उसकी मां को भी मजबूर कर सकता है तब उसकी मां के पास भी उसके साथ हम बिस्तर होने के सिवा और कोई रास्ता नहीं होगा,,,,,,,, नूपुर अपने बेटे के साथ और सुगंधा अपने बेटे के साथ घर की तरफ निकल गए थे लेकिन अब अंकित के मन में कोई और ही खिचड़ी पक रही थी,,,,)
बहुत ही अच्छा और कामुक अपडेट अंकित ने तो राहुल को ही लपेट दिया बहुत बढ़िया !

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sunoanuj

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राहुल का दांव पूरी तरह से उल्टा पड़ गया था, वह कभी सोचा भी नहीं था कि दब्बू सा दिखने वाला अंकित मौका मिलने पर शेर की तरह हमला करेगा,, हकीकत अब यही थी कि राहुल पूरी तरह से दब चुका था राहुल कभी सोचा भी नहीं था कि घर की चार दिवारी के अंदर वह और उसकी मां मिलकर जो गुल खिलते हैं वह किसी को कानों कान तक खबर पड़ेगी लेकिन यहीं पर उसकी सोच मार खा गई थी,,, अब उसे पछतावा हो रहा था कि उसने अंकित के साथ दोस्ती किया ही क्यों क्योंकि ना तो वह उससे दोस्ती करता और ना ही उसका घर में आना-जाना होता और ना ही वह उन दोनों को चुदाई का सुख भोगते हुए देख पाता,, अब उसकी यही गलती उसके गले की हड्डी बन चुकी थी।




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कहां पर वह अंकित की मां की जवानी की तारीफ करके अपने मन में उसे भोगने की लालसा को उसके सामने जागरुक कर रहा था और कहां अंकित ने ही गांव पलट कर पूरी तरह से अब राहुल की मां को चोदने का इरादा बना दिया था जिसमें आप राहुल ही उसका साथ देने वाला था और इसके सिवा उसके पास कोई रास्ता भी नहीं था। राहुल इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि अगर अंकित उसके राज को किसी को बता दिया तो मां बेटे दोनों किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाएंगे और ना ही समझ में उनकी कोई इज्जत रह जाएगी घर से निकलना दुभर हो जाएगा,,,, राहुल अपने मन में यही सोच रहा था कि उसकी ही गलती है अभी तक अंकित इस राज को अपने सीने में दबा कर रखा था लेकिन उसकी वजह से ही वह एकदम से उसकी मां को चोदने का इरादा बता दिया था,,,, ना ही वह उसकी मां के बारे में कुछ असली बातें करता और ना हीं अंकित यह सब करने पर मजबूर होता,,,, राहुल को समझ में नहीं आ रहा था कि अब यह सब होगा कैसे,,,, क्योंकि एक मर्द होने के नाते वह अच्छी तरह से जानता था कि अगर किसी मर्द को इतना अच्छा मौका मिलेगा तो वह वाला इस मौके को अपने हाथ से कैसे जाने देगा,,,, वैसे भी वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां कोई सामान्य दीखाव वाली औरत नहीं थी पूरी तरह से जवानी से भरी हुई थी एक मर्द को अपनी तरफ ललचाने के काबिल उसका हर अंग सक्षम था उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां उसकी बड़ी-बड़ी गांड जिसे पाने के लिए मोहल्ले के हर मर्द तैयार रहते थे और न जाने कितने लोग उसकी मां को याद करके रोज अपना पानी निकाल देते थे ऐसी औरत को चोदने के लिए भला अंकित कैसे इंकार करेगा।





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राहुल के पास अब खामोश रहने के सिवा अब कोई रास्ता नहीं था उसे यकीन हो चुका था कि अंकित उसकी मां के साथ अपनी मनमानी करके ही रहेगा अगर उसकी मां नहीं मानेगी तो जैसा वह उसे बोलकर खामोश कर दिया है वही बात हुआ उसकी मां से भी बोलेगा और भला ऐसी कौन सी औरत होगी जो अपनी इज्जत को नीलाम होने देगी बल्कि और से अपनी इज्जत को बचाने के लिए कोई भी शर्त मानने को तैयार हो जाती है,,, अब वह समझ गया था कि उसे केवल अब मुख प्रेछक ही बनना था,,,, खिलाड़ी अब बदल चुका था उसकी मां की खूबसूरत नितंबों नुमा मैदान पर अंकीत बल्लेबाजी करने वाला था,,,, लेकिन यह ख्याल उसके मन में आते ही राहुल सोचने लगा के भला अंकित कर क्या लगा,,,, राहुल को ऐसा था कि अंकित दूसरे लड़कों की तरह चालक और औरतों के मामलों में तेज बिल्कुल भी नहीं है अगर किसी लालच वश वह उसकी मां को चोदने के लिए तैयार हो चुका है तो,,, वह टीक ही नहीं पाएगा,,,, जैसे ही उसकी मां अपने बदन से अपने कपड़े उतारना शुरू करेगी उसके नंगे बदन को देखकर अंकित का लंड पानी फेंक देगा,, और ऐसे हालात में उसकी खुद की बेइज्जती हो जाएगी और वह दोबारा उसकी मां के साथ संबंध बनाने के बारे में सोच भी नहीं सकेगा यह सोचकर राहुल मन ही मन में प्रसन्न हो रहा था,,,, क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां के साथ संबंध बनाने के लिए मां और तन दोनों से तैयार रहना पड़ता है उसकी मां की बेकाबू बेलगाम जवानी किसी सामान्य मरदे के काबिल है ही नहीं उसके लिए तो उसके जैसा सांड़ ही चाहिए,,,, अपने मन में यह सोचकर राहुल प्रसन्न होने लगा,,,,।




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दूसरी तरफ अंकित को ज्यादा ही उत्सुक था क्योंकि अब उसे एक नई बुर मिलने वाली थी चोदने के लिए जो पहले से ही उससे चुदवाने ने के लिए बेकरार थी। अंकित कुर्सी पर बैठकर राहुल के बारे में ही सोच रहा था कि कैसे वह उसकी मां के बारे में गंदी बातें करके मजा ले रहा था उसे नहीं मालूम है कि उसकी और उसकी मां की नाकाम उसके हाथ में है बस उसे खींचने की देरी है और लगाम खींचते ही कैसे काबू में आ गया एकदम से शांत पड़ गया अब तक मजा आएगा जब उसकी आंखों के सामने उसकी मां के कपड़ों को उतार कर नंगी करूंगा और उसके गुलाबी बुर में अपना लंड डालकर अपनी मर्दाना ताकत दिखाऊंगा तब उसे समझ में आएगा की असली मर्द किसे कहते हैं,,,, अंकित अपने मन में यह बात सोच कर बहुत खुश हो रहा था क्योंकि वह उन दोनों मां बेटों को हम बिस्तर होते हुए देखा था और इस समय वह राहुल के लंड को भी देखा था,,, और उसी समय उसे एहसास हो गया था कि अगर राहुल की जगह वह खुद होता तो उसकी मां की हालात पूरी तरह से खराब कर देता अपने मोटे तगड़े लंड से,,,, वैसे भी अंकित किसी भी तरह से राहुल से बदला लेना चाहता था क्योंकि वह आए दिन उसकी मां के बारे में कुछ ना कुछ बोला ही करता था उसकी खूबसूरती के बारे में उसके अंगों के बारे में जिसे सुनकर अंकित मन ही मन क्रोधित हो जाता था,,,, लेकिन अब उसे मौका मिल चुका था अब तक के सारे अपमान का बदला लेने का,,,, इसलिए अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर लेना चाहता था उसे बड़ी बेसब्री से दोपहर का इंतजार था,,,,।





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और उसका यह इंतजार खत्म भी हो गया दोपहर के 1:00 रहे थे उसकी मां अपने कमरे में आराम कर रही थी क्योंकि 20 मिनट पहले ही वह जमकर अपनी टांगें खोलकर अपने बेटे से चुदवाई थी,,,, अपने बेटे से जमकर चुदवा लेने के बाद उसे नींद भी बहुत गहरी आई थी,,,, लेकिन फिर भी वह अपनी मां से कुछ जरूरी काम के लिए बोलकर ही घर से निकला था और वैसे भी सुगंधा का काम हो चुका था इसलिए वह भी गहरी नींद में सो गई थी,,,, अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था वह मुख्य सड़क पर आकर ऑटो पकडकर सीधा उसके घर के सामने उतर गया,,,, घर के मुख्य गेट पर राहुल उसका इंतजार कर रहा था अंकित को देखते ही उसे थोड़ा तो गुस्सा आया लेकिन वह कर भी क्या सकता था,,,, जैसे ही अंकित उसके पास आया वह बोला,,,,।

देख अंकित अगर मम्मी नहीं मानी तो तु फिर यहां से चले जाना और फिर कभी भी इस राज को किसी को बताना नहीं,,,,।

तू चिंता मत कर मेरे दोस्त ऐसा हो ही नहीं सकता क्योंकि मेरा औजार तेरे से कुछ ज्यादा ही बड़ा है उसे दिन देखा था मैंने तेरे लंड को जब तेरी मां की बुर में अंदर बाहर हो रहा था,,,, बिस्तर पर तेरी मां बहुत मजे ले लेकर उछल रही थी मेरा तो मन उसी समय तेरी मां को चोदने के लिए तड़प उठा था लेकिन तुम दोनों का रिश्ता देखते हुए मैं तुम दोनों को शर्मिंदा नहीं करना चाहता था इसलिए वहां से चुपचाप चला गया था लेकिन रात दिन सोते जागते मेरी आंखों के सामने तेरी मां की नंगी गांड ही दिखाई देती थी आज मौका मिला है तेरी मां की मद मस्त जवानी को अपनी आंखों से पीने का अपने लंड से रगड़ने का,,,, (राहुल अंकित की इस बात पर की तेरे औजार से ज्यादा लंबा और मोटा उसका औजार है इस बात को सुनकर वह अंदर ही अंदर बहुत गुस्सा हुआ था लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था फिर भी अंकित की बात सुनकर वह बोला,,,)




बातों से कुछ नहीं होता करके दिखाना पड़ता है कहीं ऐसा ना हो कि मेरी मां कपड़े उतारे और तेरा लंड पानी फेंक दे,,,,।


देखना हो तो आधे घंटे बाद आ जाना दरवाजा खुला छोड़ दूंगा,,,, और अपनी आंखों से देखने की तेरी मां कितना मजा ले लेकर मुझसे चुदवाती है,,,,,, (और इतना कहकर वह आगे बढ गया और राहुल अपनी आंखों में क्रोध लिए हुए वहां से हट गया,,,,,, अंकित दरवाजे पर पहुंचकर डोर बेल बजाने लगा,,,, थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला दरवाजा खोलने वाली राहुल की मा ही थी और अंकित को दरवाजे पर देख कर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे वह खुश होते हुए बोली,,,,)

अंकित तु बहुत दिनों बाद आया,,,,।


बहुत दिनों बाद कहां परसों ही तो बाजार में तुमसे मुलाकात हुई थी,,,,,।


वह तो मुलाकात हुई थी लेकिन उस दिन के बाद तो तू दिखाई नहीं दिया,,,, मुझे लगा कि तू डर गया है,,,,।

मैं भला डर जाऊं ऐसा हो नहीं सकता,,,,।

ओ हो फिल्मी डायलॉग मारने लगा है,,,, सिर्फ डायलॉग ही करने आता है कि कुछ और भी मारने आता है,,,।

मौका देकर तो देखो बहुत कुछ मारने आता है,,,,,।


नूपुर की गदराई जवानी

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चल आजा अंदर दरवाजे पर ही खड़ा-खड़ा सब बातें करेगा क्या,,,, (मुस्कुराते हुए नूपुर बोली और नूपुर की बात सुनकर अंकित घर में प्रवेश कर गया और नूपुर दरवाजा बंद करके उसकी कड़ी लगा दी,,,,, और अंकित से बोली,,,)


बोल ठंडा पिएगा या गरम,,,,?


किसी बातें कर रही हो आंटी ना ठंडा ना गम मुझे तो कुछ नमकीन पिला दो,,,,।

ऊमममममम,,,, पहली बार में ही इतना शरारती हो गया है,,, (अंकित के कहने का मतलब को समझ कर नूपुर शरारती अंदाज में मुस्कुराते हुए बोली)

आप क्या करूं शरारती तो होना पड़ेगा जब टीचर ही इतनी शरारती है तो विद्यार्थी को तो थोड़ा बहुत असर दिखाना होगा,,,,।

ओहहह ,,,, बातें तो तू बहुत अच्छी करता है पता नहीं काम अच्छा करता है कि नहीं,,,।


क्यों उस दिन मेरा काम अच्छा नहीं लगा क्या,,,,,?

ऊमममम,, (अंकित की तरफ देखकर अपनी आंखों को गोल-गोल नचाते हुए) बहुत अच्छा लगा था तभी तो तेरी याद सता रही थी और तू है कि उस दिन के बाद तो दिखाई ही नहीं दिया,,,,


कोई बात नहीं आज आ गया हूं बाकी की कसर पूरी कर दूंगा,,,,


टिक तो पाएगा ना,,,


क्यों नहीं गीली पिच पर भी मैं कम से कम 35 40 मिनट आराम से बल्लेबाजी कर सकता हूं,,।

ऊमममम ऐसे ही बल्लेबाज कि मुझे जरूरत थी,,,,।


अच्छा आंटी सबसे पहले मुझे एक गिलास ठंडा पानी पिला दो वह क्या है ना धूप ज्यादा है तो प्यास लग गई।


पानी क्या तुझे मैं अपना दूध पिला देता लेकिन क्या है ना बीच में से दूध नहीं निकलता,,, लेकिन फिर भी चूसने में ज्यादा मजा आएगा,,,,।

वह कसर तो तुम्हारी बुर से पूरी हो जाएगी उसका नमकीन चटकार पानी चाटकर,,,,।
(अंकित के मुंह से बुर शब्द सुनकर नूपुर की सांस ऊपर नीचे हो गई उसे उम्मीद नहीं थी कि अंकित इस तरह से खुले शब्दों में उसके खूबसूरत अंग का नाम ले लेगा लेकिन उसने जिस तरह से नाम लिया था उसे यकीन हो गया था कि अंकित जैसा दिखता है वैसा ही नहीं नूपुर शर्म से पानी पानी हो रही थी और उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी और वह अंकित से मुस्कुराते हुए बोली,,,)




राहुल की मां की गांड देखकर अंकित की हालत खराब होने लगी

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अच्छा तु रुक मैं अभी पानी लेकर आती हूं,,,, (इतना कहकर वह किचन में चली गई और मौका देखकर जल्दी से दरवाजे की कड़ी खोल दिया दरवाजा बंद तो था लेकिन उसमें कड़ी नहीं लगी थी जिससे राहुल आराम से घर में आ सके और दरवाजा खोलकर वह तुरंत अपनी जगह पर आकर खड़ा हो गया तब तक नूपुर किचन में से ठंडे पानी का गिलास लेकर आई और उसे थमाते हुए बोली,,,)

पानी थोड़ा ज्यादा ठंडा है कहीं ईसे पीने के बाद ठंडा मत पड़ जाना नहीं तो मैं तड़पती रह जाऊंगी,,,, (नूपुर साड़ी के ऊपर से ही अपनी बर को खुजलाते हुए बोली यह उसकी तरफ से संपूर्ण रूप से आमंत्रण था लेकिन फिर भी ठंडा पानी पीते हुए अंकित बोला)

अंकल तो नहीं है,,?


नहीं वह तो ऑफिस गए हैं शाम को 7:00 बजे ही लौटेंगे और राहुल अभी अभी घर से बाहर के आए हैं वह भी एक-दो घंटे बाद ही वापस आएगा,,,,
(बिना पूछे ही नूपुर राहुल के बारे में बता दीजिए क्योंकि उसके पास अब समय नहीं था वह जल्द से जल्द अपने कमरे में अंकित को ले जाना चाहती थी और नूपुर का जवाब सुनकर अंकित मुस्कुराते हुए बोला)


मतलब है कि आज हम दोनों के पास बहुत मौका है और बहुत समय भी है,,,,।

समय तो बहुत है और मैं गंवाना नहीं चाहती चल मेरे कमरे में,,,,,(इतना कहने के साथ ही नूपुर उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने कमरे में ले गई और कमरे का दरवाजा बंद कर दी कमरे में प्रवेश करते ही अंकित ने खिड़की की तरफ देखा जो की खुली हुई थी उसका एक पट बंद था और दूसरा पट पूरा बंद नहीं था और इतना तो बहुत था राहुल को कमरे के अंदर देखने के लिए,,,,,, नूपुर की हालत देखकर अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था कि नूपुर की इस समय क्या हालत हो रही है इस समय उसकी दोनों टांगों के बीच आग लगी हुई थी जिसे बुझाना उसका फर्ज बन चुका था,,,,,, अब समय आ चुका था नूपुर के सामने अपनी कलाबाजियां दिखाने का औरत को खुश करने का कितना हुनर जानता है,,, वह सारे हुनर आजमाने का,,, इसलिए वह नूपुर का हाथ पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींच लिया नूपुर एकदम से उसके सीने से जा लगी और उसके खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हथेलियां में भरकर उसकी आंखों में देखने लगा नूपुर की आंखों में वासना साफ दिखाई दे रहा था,,,, अंकित का लंड पेट में तंबू बना लिया था और जिस तरह से नूपुर उसके बदन से सट गई थी नूपुर को अपनी दोनों टांगों के बीच अंकित का लंड दस्तक देता हुआ महसूस हो रहा था,,,। अंकित उसके होठों की तरफ अपने होठों को बढ़ाते हुए बोला,,,,)




तुम बहुत खूबसूरत हो आंटी,,,,।

आंटी नहीं नूपुर,,,,,,(नूपुर इतना बोली और खुद ही अपने होठों को ऊपर करके अंकित के होठों से सटा दी दोनों के होंठ जो एकदम प्यासे थे आपस में मिलते ही एक दूसरे में समा जाने की पूरी कोशिश करने लगे अंकित पागलों की तरह नूपुर के लाल लाल होठों का रसपान करने लगा और अपने दोनों हथेलियां को उसके भारी भरकम नितंबों पर रखकर साड़ी के ऊपर से उसे जोर-जोर से दबाने लगा मसलने लगा,,,, नूपुर के प्रति अंकित की झिझक उसी दिन खत्म हो चुकी थी जब वह डाइनिंग टेबल के नीचे बैठकर उसकी बुर की चटाई किया था,,,,, इसलिए तो आज खुलकर नूपुर से मजा ले रहा था नूपुर भी उसकी बाहों में पिघलने लगी थी इसकी मजबूत हथेलियां को अपनी गांड पर महसूस करके वह मदहोश हो रही थी,,,, अंकित पागलों की तरह उसके होठों का रसपान करते हुए उसकी बड़ी-बड़ी गांड से खेल रहा था और धीरे-धीरे उसकी साड़ी ऊपर की तरफ उठा रहा था देखते ही देखते वह नूपुर की साड़ी को कमर तक उठा दिया था और उसकी गुलाबी रंग की पेंटी में कैद उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर मसल रहा था दबा रहा था,,,,।




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दूसरी तरफ राहुल को घर की दूरी पर खड़े 20 मिनट हो चुके थे और वह अपने घर के मुख्य गेट को ही देख रहा था उसे ऐसा था कि कुछ ही देर में वह रोने वाली शक्ल लेकर उसके घर से निकलता हुआ दिखाई देगा लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ था तो वह कुछ देर तक और वहीं खड़ा होकर इंतजार करने की सोच और वैसे भी जो समय अंकित ने दिया था अभी वह समय नहीं हुआ था,,,,,, लेकिन बाहर इंतजार करके राहुल की भी हालत खराब हो रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अंदर क्या हो रहा होगा कहीं अंकित उसकी मां को भी ब्लैकमेल करके उसके साथ शारीरिक संबंध बना लिया तो क्या होगा और ऐसा भी तो हो सकता है कि एक टीचर होने के नाते उसकी मां पूरी तरह से अंकित को दबाव में लेकर यह भी कह सकती है कि जो कुछ भी तो कह रहा है मैं तेरी मां से बता दूंगी तब वह शायद इस डर से वहां से निकल जाए और अगर ऐसा हो गया तब तो मजा आ जाएगा लेकिन राहुल ने अंकित की आंखों में वासना का तूफान देखा था ऐसा लग रहा था कि जैसे आज पहली बार हुआ किसी औरत से हम बिस्तर होने जा रहा है पहली बार चुदाई का सुख भोगने जा रहा है इसलिए राहुल को एहसास हो रहा था कि उसकी मां को चोदने के लिए अंकित कुछ भी कर सकता है,, खैर अभी इन सब बातों का वक्त बिलकुल भी नहीं था सिर्फ बाहर खड़े होकर इंतजार करना था,,,,।





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कमरे के अंदर अंकित पूरी तरह से नूपुर की जवानी पर छाने लगा था,,,, वह नूपुर की बड़ी-बड़ी गांड को दबाते हुए उसकी पेंटिंग में हाथ डालकर उसकी नंगी गांड का स्पर्श महसूस करके पागल हुआ जा रहा था,,,,, अभी तक दोनों का चुंबन टूटा नहीं था दोनों की लार एक दूसरे के मुंह में आराम से चले जा रहे थे जिसे वह दोनों आराम से गले के नीचे उसे उतार भी ले रहे थे,,, अंकित नूपुर की गांड पर रह रहकर चपत भी लगा दे रहा था जिससे उसकी गोरी गोरी गांड टमाटर की तरह लाल हो गई थी लेकिन नूपुर को ईस चपत से नूपुर को बहुत मजा आ रहा था वैसे तो इस तरह का सुख वह अपने बेटे से भी ले चुकी थी लेकिन आज बात ही कुछ और थी आज पहली बार हुआ किसी गैर मर्द से इस तरह का आनंद ले रही थी,,,, जो कि वह भी उसके बेटे की ही उम्र का था। अंकित इस अवस्था में ही अपने दोनों बाजुओं को उसके नितंबों से टिका दिया और उसे अपनी गोद में उठाकर बिस्तर की तरफ ले जाने लगा नूपुर एकदम से घबरा गई उसे उम्मीद नहीं थी कि अंकित उसे उठा लेगा और वह घबराते हुए बोली,,,)

अरे रे यह क्या कर रहा है मैं गिर जाऊंगी मुझे नीचे उतार,,,,,।





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मुझ पर भरोसा नहीं है क्या,,,,, रोज कसरत करता हूं दो गिलास दूध रोज पीता हूं,,,, पर मुझे तो लग रहा है कि शायद इसी दिन के लिए कसरत करता हूं ताकि तुम्हें खुश कर सकूं,,,,(और ऐसा कहते हुए अंकित बिस्तर के पास पहुंच गया और नरम नरम करते पर नूपुर को पटक दिया नूपुर गद्दे पर गिरते ही एक दो बार ऊपर की तरफ उछल गई वह एकदम से मस्त हो चुकी थी,,, उसे यकीन नहीं था कि अंकित में इतनी ताकत होगी कि वह उसे आराम से उठा लेगा लेकिन आज उसकी ताकत देखकर उसकी बुर पानी छोड़ रहे थे उसे बहुत आनंद आ रहा था और वह मुस्कुरा रही थी,,,,, वह बिस्तर पर पीठ के बेलेटी हुई थी उसकी साड़ी जांघों तक उठी हुई थी उसकी मोटी मोटी जांघों को देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था,,,,, वह बिस्तर पर घुटनों के बल आगे बढ़ता हुआ बोला,,,)


वाह कसम से तुम्हारी जवानी तो बहुत गदराई है,,,, आज तो बहुत मजा आ जाएगा,,,,(और इतना कहने के साथ ही हुआ नूपुर की टांगों के बीच जगह बनाने लगा,,, और नूपुर भी अपनी टांगों को खोलने लगी वह मदहोश हुए जा रहे थे पागल हुए जा रही थी उसकी आंखों में खुमारी छाई हुई थी,,,,, आज वह उसे दिन का अधूरा कार्य पूरा कर लेना चाहते थे उसकी गहरी चलती सांसों के साथ-साथ ब्लाउज में कहे तो उसके दोनों कबूतर भी पंख फड़फड़ा कर बाहर आने को आतुर नजर आ रहे थे लेकिन शायद अभी अंकित का ध्यान उसके फड़फड़ाते हुए कबूतरों पर नहीं पहुंचा था,,,,, देखते ही देखते अंकित गहरी सांस लेता हुआ उसकी मोटी मोटी जांघो पर जीभ रखकर चाटना शुरू कर दिया अंकित की हरकत से नूपुर कसमसाने लगी वह आनंदित होने लगे उसे मजा आ रहा था क्योंकि अंकित उसकी जांघों को अपनी जीभ से चाट रहा था,,,, अंकित को शायद इस बात का ज्ञान था कि औरत का हर एक अंक मलाईदार होता है हर जगह चाटने पर केवल आनंद ही प्राप्त होता है इसलिए वह नूपुर की गोरी गोरी जांघों को चाटता हुआ ऊपर की तरफ बढ़ रहा था,,,, नूपुर सर के नीचे तकिया लगाए अंकित को ही देख रही थी,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,, और अगले ही पल अंकित उसकी गुलाबी रंग की पेंटि के बीचों बीच अपनी नाक रखकर उसकी बुर वाली जगह को सुंघने लगा,,, उसमें से उठ रही मादक खुशबू अंकित केतन बदन में उत्तेजना का तूफान भर रही थी।



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अंकित अपनी जी बाहर निकाल कर गुलाबी रंग की पेटी के ऊपर से ही उसकी बुर वाले हिस्से को चाटना शुरू कर दिया जो की बुर गीली होने की वजह से उसके आगे वाला हिस्सा गीला हो चुका था और चिपचिपा रहा था अंकित पागलों की तरह उस पर अपनी जीभ फिरा फिराकर उसे चाट रहा था,,,, नुपुर की सांसें उखड़ रही थी,,,, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि हम किस तरह की हरकत करेगा वह पूरी तरह से उसे अपनी हरकत से पागल कर रहा था,,,,, नूपुर केतन बदन में आग लगी हुई थी वह पागल हुए जा रही थी उसे अपनी उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी जिसकी वजह से वह खुद ही अपने दोनों हाथों को ब्लाउज के ऊपर से अपनी चूचियों पर रखकर उसे दबा रही थी और अपनी टांगों को मोड़ने की कोशिश कर रही थी जिसे अंकित अपने दोनों हथेलियां से दबाकर उसे स्थिर कर दिया था क्योंकि वह जानता था कि जिस तरह की हरकत हुआ कर रहा है उससे नूपुर की तड़प और ज्यादा बढ़ जाएगी।।।





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सहहहह आहहहहहह ऊमममममम,,,,आहहहहह अंकित तू तो मुझे पागल कर दिया है रे,,,ऊमममममम,,,,आहहहहहहहह मैं मर जाऊंगी मुझे इतना मत तड़पा,,,,,,,सहहहहहहहह,,,,(ऐसा कहते हुए वह खुद ही अपनी चूचियों को दबा रही थी मसाला रही थी यह देखकर अंकित भी समझ गया था कि नूपुर पूरी तरह से चुदवासी हो चुकी है,,,, इसलिए वह अगले ही पल अपनी दो उंगली को उसके गुलाबी रंग की पेंटिं के छोर को पकड़कर उसे दूसरी तरफ खींच दिया जिससे उसके गुलाबी पर एकदम से उजागर हो गई और उत्तेजना के मारे उसकी बुर पहले से कचोरी की तरह फुल चुकी थी जिससे पेंटी का दूसरा हिस्सा आराम से दूसरी ओर टिक गया था,,,,, नूपुर की बुर को देखकर अंकित की हालात पूरी तरह से खराब हो गई क्योंकि साफ दिखाई दे रहा था कि अभी कुछ घंटे ही हुए थे उसे अपनी बुर पर से बाल को साफ किए हुए इसलिए उसकी बुक एकदम चिकनी दिखाई दे रही थी एकदम गुलाबी,,,,, एेसी बुर को चाटने में अंकित को बहुत मजा आता था,,,,, वह पागलों की तरह राहुल की मां की बुर पर टुट पड़ा,,,, और जैसे ही नूपुर अंकित की के को अपनी बुर पर महसूस की एकदम से उत्तेजना से भर गई और अपनी कमर को एकदम से ऊपर की तरफ उछाल दी जिसे अंकित अपने दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ कर पागलों की तरह उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दिया उसकी बुर पहले से ही पानी छोड़ रही थी,,,, जिससे अंकित को चाटने में भी बहुत मजा आ रहा था। नूपुर पूरे बिस्तर पर तड़प रही थी पागल हो रही थी वह जिस तरह से उसकी बुर की चटाई कर रहा था शायद ही राहुल ने ऐसी चटाई किया हो। इसलिए तो नूपुर पागल हुए जा रही थी मदहोश हुए जा रही थी,,,। कुछ देर तक अंकित इसी तरह से नूपुर की बुर की चटाई करता रहा उसकी मलाई को गटकता रहा,,,,,।




दूसरी तरफ राहुल से रहा नहीं जा रहा था वह काफी देर से बाहर खड़ा इंतजार कर रहा था लेकिन अभी तक अंकित घर से बाहर नहीं निकला था इसलिए उसे भी कुछ संदेह होने लगा कि उसने उसकी मां को भी डरा धमका कर उसके साथ मनमर्जी करने लगा है इसलिए वह तुरंत अपने घर की ओर चल पड़ा,,,, घर पर पहुंच कर वह धीरे से दरवाजा खोलने के कोशिश किया तो दरवाजा अपने आप खुल गया जैसा कि अंकित ने उसे बता रखा था वह धीरे से कमरे में प्रवेश किया और दरवाजा बंद करके करिए लगा दिया और धीरे-धीरे इधर-उधर नजर घुमा कर देखने लगा कि आखिरकार दोनों है कहां वह दोनों ना तो डाइनिंग हॉल में थे और ना ही किचन में थे नहीं उसके कमरे में थे अब उसके पास उसकी मां का ही कमरा रह जाता था और अभी तक दोनों नजर नहीं आ रहे थे इसलिए राहुल का दिल जोरो से धड़क रहा था वह धीरे-धीरे चोर कदमों से अपनी मां के कमरे की तरफ आगे बढ़ने लगा,,,,, उसके मन में घबराहट भी हो रही थी कि ना जाने कमरे में क्या हो रहा होगा और वह मन ही मन दुआ भी कर रहा था कि ऐसा कुछ भी ना हो जैसा कि अंकित ने कहा था और यही सोचता हुआ वहां अपनी मां के कमरे के पास पहुंच गया तो दरवाजा बंद था लेकिन खिड़की खुली हुई थी उसका पट हल्का सा खुला हुआ था और वह खिड़की के पास खड़ा हो गया और अंदर देखने की कोशिश करने लगा दोपहर में भी अंदर ट्यूब लाइट जल रही थी जिसकी दूधिया रोशनी में सबको साफ नजर आ रहा था और जब राहुल ने अपनी नजरों को स्थिर किया तो उसकी आंखों के सामने उसकी मां का बिस्तर दिखाई देने लगा जिस पर वह खुद अपनी मां के साथ रोज मजा लेता था,,,,, और बिस्तर पर जो नजर उसे दिखाई दिया उसे देखकर वह पूरी तरह से स्तब्ध रह गया आश्चर्य और हैरानी से उसकी आंखें फटी के फटी रह गई।


नूपुर और अंकित की मस्ती

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अंदर की बिस्तर पर की स्थिति उसे साफ दिखाई दे रही थी उसे साथ दिखाई दे रहा है कि उसकी मां बिस्तर पर पीठ केवल लेटी हुई थी उसकी दोनों टांगें खुली हुई थी और यह शायद उसने अंकित के लिए ही खोल कर रखी थी और अंकित उसकी मां की दोनों टांगों के बीच छाया हुआ था और जिस तरह से उसका सर ऊपर नीचे हो रहा था उसे यकीन हो गया था कि अंकित उसकी मां की बुर चाट रहा था यह देखकर उसकी आंखों में शोले भड़कने लगे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, लेकिन जब गौर से अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को देखा तो उसके होश उड़ गए क्योंकि वह इस पल का आनंद ले रही थी मजा लूट रही थी उसके चेहरे के हाव-भाव बता रहे थे कि अंकित की हरकत से वह पूरी तरह से आनंदित हो चुकी थी,,,,,,, राहुल के पास अब करने के लिए कुछ नहीं रह गया था सिवाय अंदर का दृश्य देखने के,,,, कुछ देर तक अंकित इस तरह से उसकी मां की बुर की चटाई करता रहा यह देखकर ना चाहते हो कि ना जाने क्यों राहुल का लंड खड़ा होने लगा था वह पहली बार अपनी मां को इस रूप में देख रहा था पहली बार वह किसी गैर मर्द के साथ देख रहा था। अपनी मां की मस्ती को देखकर वह अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पा रहा था कि यह उसकी मां है क्योंकि नूपुर अपने बेटे से हमेशा कहती थी कि वह किसी गैर मर्द के बारे में सोच भी नहीं सकते लेकिन आज कैसे अपने कमरे के अपने ही बिस्तर पर उसके ही दोस्त के साथ मजा लूट रही थी।





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अब ऐसे मजा नहीं आ रहा है,,,(नूपुर की बुर से अपने होठों को हटाकर गहरी सांस लेते हुए वह नूपुर की तरफ देखते हुए बोला तो उसकी बात सुनकर नूपुर भी मदहोशी भरे स्वर में बोली)


तब कैसे मजा आएगा,,,,?
(दोनों कि ईस तरह की बातें राहुल के कानों में बड़े आराम से पहुंच रही थी राहुल अपनी मां की बात सुनकर एकदम हैरान था क्योंकि लगी नहीं रहा था कि जैसे वह पहली बार अंकित के साथ इस अवस्था में मजा ले रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे दोनों कई बार इस तरह से मजा लुट चुके हैं,,,,,, नूपुर की बात सुनकर अंकित बोल कुछ नहीं बस अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर उसकी चड्डी को पकड़ लिया और उसे नीचे की तरफ खींचने लगा,,,यह देख कर राहुल की आंखें उत्तेजना से और ज्यादा फटने लगी जब उसने देखा कि अंकित का साथ देते हुए उसकी मां भी अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठा दी थी ताकि वह उसकी चड्डी को आराम से उतार सके,,,, यह देख कर तो उसके हौसले एकदम से पस्त हो गए वह समझ गया कि उसकी मां को भी बहुत मजा आ रहा है,,,,, वह कभी सोचा नहीं था कि उसको छोड़कर उसकी मां किसी दूसरे लड़के से इस तरह से मजा लुटेगी,,,, लेकिन उसे यकीन करना ही पड़ा क्योंकि जो कुछ भी हो रहा था वह उसकी आंखों के सामने हो रहा था किसी से सुनी सुनाई बात नहीं थी,,,, इसलिए राहुल भी अपने दिल पर पत्थर रखकर अपनी मां की काम लीला को देखने लगा,,,, देखते ही देखते अंकित उसकी मां की चड्डी को उसके नंगी चिकनी टांगों से खींचकर बाहर कर दिया था और वह कमर के नीचे नंगी हो चुकी थी चड्डी के निकल जाने के बाद अंकित राहुल की मां की गुलाबी बुर को प्यासी आंखों से देख रहा था,,,, और गहरी सांस लेता हुआ बोला,,,)





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वाह नूपुर तुम्हारी बुर तो एकदम गुलाबी है एकदम चिकनी ऐसा लग रहा है कि जैसे अभी-अभी क्रीम लगाकर बुर की सफाई की हो,,,,।

तु एकदम ठीक कह रहा है,,,, सुबह ही क्रीम लगाकर साफ क्यों ऐसा लग रहा था कि जैसे तेरे आने का एहसास मुझे हो गया था,,,,।(नूपुर की बात सुनकर; अंकित मुस्कुराने लगा लेकिन राहुल सच में पड़ गया था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या यह हालात दोनों के बीच पहले भी मुकम्मल हो चुके हैं या आज पहली बार है क्योंकि ऐसा लग ही नहीं रहा था कि उसकी मां पहली बार उसके साथ हम बिस्तर हो रही थी यही सोचकर तो उसका दिमाग पूरी तरह से चकरा जा रहा था,,,, अंकित को और ना ही नूपुर को इस बात का एहसास हुआ था की खिड़की पर राहुल खड़ा है वह दोनों अनजान थे,,,, अंकित अपनी हथेली को नूपुर की गुलाबी बुर पर रखकर उसे पूरी तरह से ढंक लिया था और उसे मसल रहा था अंकित की हरकत से नूपुर कसमसा रही थी उत्तेजना से बदहवास हो रही थी। वह अपनी उत्तेजना पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रही थी इसलिए लगातार अपनी चूचियों से खेल रही थी उसे दबा रही थी और अपनी उत्तेजना को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन इस समय वहां अंकित के हाथों में थी और अंकित औरतों को खुश करने का तरीका अच्छी तरह से जानता था। इसलिए तो वह अपनी हथेली को जोर-जोर से नूपुर की दर पर रगड़ रहा था और उसकी हथेली पूरी तरह से उसके मदन रस से गीली हो चुकी थी। अंकित पागल हुआ जा रहा था मदहोशी के सागर में डूबता चला जा रहा था अपनी मां के बाद आज पहली बार उसे इतनी खूबसूरत औरत चोदने को मिलने वाली थी हालांकि दो औरतें उससे पहले भी चोदने को मिल चुकी थी जिसके साथ वह मजा लूट चुका था लेकिन वह दोनों थोड़ा उम्र दराज हो चुकी थी । लेकिन नूपुर उसकी मां की हम उम्र थी दोनों में केवल 19 ,,,20 का ही फर्क था दोनों लाजवाब थी जवानी से भरी हुई थी मर्दों को पानी पानी करने में पूरी तरह से सक्षम थी. कुछ देर तक इसी तरह से राहुल की मां की बुर से खेलने के बाद एक बार फिर से अंकित अपने प्यास होठों को उसकी बुर पर रखकर उसकी मलाई चाटना शुरू कर दिया,,,,, नूपुर एकदम व्याकुल होने लगी मदहोशी में और उत्तेजना में वह अपने सर को दाएं बाएं पटकने लगी उसे बहुत मजा आ रहा था अंकित अपनी हरकत से उसे पूरी तरह से आनंदित कर दिया था।





नूपुर को इस बात का एहसास हो रहा था कि इतना मजा उसे आज तक अपने बेटे से भी नहीं मिला था। अंकित तो अपनी काम लीला के सफर में उसे पूरी तरह से मदहोश बना दिया था अभी तो मंजिल पर पहुंचना बाकी था,,,,,, ट्यूबलाइट की दूधियां रोशनी में सब कुछ साफ दिखाई देरहा था वैसे तो दोपहर का समय था लेकिन कमरे में दोपहर में भी अंधेरा ही रहता था क्योंकि यह अंदर की तरफ कैमरा था और इसकी खिड़की भी बाहर की तरफ ना खुलकर कमरे के अंदर की तरफ ही खुलती थी जिससे बाहर की रोशनी कमरे में नहीं आ पाती थी और दोपहर में भी ट्यूबलाइट जलाना पड़ जाता था। अंकित पूरी तरह से राहुल की मां को मदहोश कर देने के इरादे से उसकी बुर की चढ़ाई कर रहा था वह अपनी नाक के आगे वाला भाग भी उसकी बुर पर रगड़ रहा था जिससे उसका आनंद दुगना होता जा रहा था,,,, और तभी अंकित राहुल की मां की उत्तेजना और आनंद दोनों एक साथ बढ़ाते हुए अपनी एक उंगली को उसकी बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया अंकित इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि जिस तरह की जवानी से भरी हुई है एक उंगली से कुछ होने वाला नहीं है लेकिन फिर भी यह तो बस शुरुआत थी क्योंकि थोड़ी देर बाद वह अपनी दूसरी उंगली भी उसकी बुर में डाल दिया था और उसे अंदर बाहर कर रहा था कमरे के अंदर राहुल की मां और अंकित दोनों पूरी तरह से मजा लूट रहे थे और खिड़की के बाहर खड़ा राहुल हैरानी से अपनी मां की बेशर्मी और उसका रंडीपन देख रहा था हालांकि यह सब देखकर उसके लंड में भी उत्तेजना आ चुकी थी,,, यह जानते हुए भी की बिस्तर पर उसकी मां दूसरे लड़के के साथ मजा लूट रही है यह नजारा नहीं देखने के बजाय वह अपनी मां को मजा लूटते हुए देख रहा था और न जाने की उसे यह सब देखकर मजा भी आ रहा था।




सससहहहहह आहहहहह ऊमममममम आहहहहहहहह सहहहहहहहह यह क्या कर रहा है रे,,,,आहहहहहहहह मुझे कुछ-कुछ होने लगा है,,,,ऊमममममम ,,,(ऐसा कहते हुए राहुल की मां अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठाकर उसे गोल-गोल घूमा रही थी ऐसा करने में उसे भी बहुत मजा आ रहा था,,,,, राहुल उसकी कमर था में उसे नियंत्रण में किए हुए था,,,,,,, थोड़ी ही देर में नूपुर की हालत खराब होने लगी उसका बदन अकड़ने लगा अंकित समझ गया कि उसका पानी निकलने वाला है इसलिए वह उसकी कमर को और जोर से अपने दोनों हथेलियां में दबोच लिया और राहुल की मां भल भला कर अंकित के मुंह में ही झड़ने लगी अपना मदन रस उसके मुंह में छोड़ने लगी और अंकित भी कहां पीछे हटने वाला था वह भी अमृत की बूंद की तरह राहुल की मां की बुर से निकलने वाले मदन रस को जीभ से तब तक चाटता रहा जब तक की उसका मदन रस का रिसाव बंद नहीं हो गया,,,, राहुल की मां का पानी निकल चुका था वह गहरी गहरी सांस ले रही थी आंखों को बंद किए हुए वह पूरी तरह से इस एहसास में डूब चुकी थी और अंकित धीरे से उसकी टांगों के बीच से उठने लगा और बिस्तर से नीचे उतरने पर उसकी नजर खिड़की पर गई तो देखा की खिड़की पर राहुल खड़ा था दोनों की नजर आपस में टकराई राहुल शर्मा के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका लिया और अंकित मुस्कुराने लगा,,,,, अंकित बिना कुछ बोले आंख के इशारे से ही राहुल को उसकी मां अधनंगी हालत में दिखाते हुए,,, अपने अंगूठे और उंगली को मोड़कर गोल बना लिया और अपने दूसरे हाथ की उंगली को उसे गोली के अंदर बाहर करके इशारे करने लगा कि अब तेरी मां की चुदाई करने जा रहा हूं,,,, अंकित के इस व्यवहार से राहुल पूरी तरह से शर्मिंदा हो गया था,,,,, और उसे अपनी गलती का एहसास भी हो रहा था ना वह अंकित को छेड़ता और ना उसे आज यह दिन देखना पड़ता,,,,।





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अंकित बिस्तर से नीचे उतर गया था उसके पेंट में पूरी तरह से तंबू बना हुआ था,,,, अब वह राहुल को भी और जलाना चाहता था उसे पूरी तरह से मजा चखना चाहता था क्योंकि पहले दिन से ही राहुल उसकी मां को प्यासी नजरों से देखा था उसके बारे में गंदे विचार अपने मन में लाता था और अपने विचारों को उसके सामने प्रकट भी कर देता था हालांकि उसे समय अंकित कुछ कर नहीं पता था लेकिन आज हालात उसके पक्ष में थे,,,, राहुल पूरी तरह से उसकी मुट्ठी में था और उसकी मां भी इसलिए वह इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठा लेना चाहता था कि भविष्य में राहुल अपनी गलती को दोबारा दोहरा ना सके,,,,, खिड़की पर खड़ा राहुल भी अंकित के पेंट में बने तंबू को देख रहा था,,, और अपने मन में सोच रहा था कि अब थोड़ी देर में अंकित का लंड उसकी मां की बुर की गहराई नाप रहा होगा,,,,, लेकिन अभी भी राहुल के मन में शंका थी कि अंकित उसकी मां को चोदने में टिक पाएगा कि नहीं। और अंकीत था की इस खेल में पूरी तरह से माहिर हो चुका था एक मंजा हुआ खिलाड़ी बन चुका था,,,,, इसलिए तो वह राहुल को और ज्यादा चिढ़ाने के उद्देश्य से अपने तंबू को अपनी हथेली में जोर से पकड़ कर एकदम से गहरी सांस लेते हुए मदहोश होने का नाटक करते हुए बिस्तर के करीब जाने लगा और अपने तंबू को पकड़े हुए ही वह बोला,,,,।

क्या हुआ आंटी सो गई क्या,,,,?





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(अंकित की बात सुनकर राहुल की मां ने अपनी आंखों को खोल दी और अंकित की तरफ देखने लगी लेकिन बोली कुछ नहीं वह पूरी तरह से इस मदहोशी के पल में डूब चुकी थी और अंकित राहुल की मां की तरफ आगे बढ़ते हुए उसी तरह से अपने तंबू को पकड़े हुए बोला,,,)


मुझे मालूम नहीं था कि तुम इतनी ज्यादा खूबसूरत हो लेकिन आज पता चल रहा है कि तुम सच में किसी अप्सरा से कम नहीं हो,,,,,,,(वैसे तो अंकित हकीकत में उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था लेकिन इस समय वहां राहुल को जल भी रहा था अपनी बातों से अपने हुनर से,,, और अंकित की बात सुनकर राहुल की मां के चेहरे पर मुस्कुराहट तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली)

वह तो मैं पहले से ही हूं लेकिन आज तेरी नजर मुझ पर पड़ी है इसलिए तू ऐसा कह रहा है,,,,,,।

चाहे जो भी हो,,, मुझे तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि मैं और तुम एक ही कमरे में हैं,,,,,(बिस्तर पर नूपुर के बेहद करीब बैठते हुए अंकित बोला और ईतना बोलने के साथ ही वह अपने दोनों हथेलियां को नूपुर के चूचियों पर रखकर जो कि अभी भी ब्लाउज में कैद थी वह जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,, एक बार फिर से राहुल की मां बिस्तर पर मचलने लगी और अंकित राहुल की मां की चूचियों से खेलते हुए बोला,,,)




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ओहहह आंटी तुम्हारी चुचीया तो एकदम खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी है,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा,,,,,,, और देखते ही देखते अंकित अपने हाथों से उसके ब्लाउज का बटन खोलकर ब्लाउज को उसकी बाहों से अलग कर दिया और इस समय उसके बदन पर साड़ी के साथ-साथ उसकी गुलाबी रंग की ब्रा भी थी जिसे वह खोला नहीं बल्कि उसे दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठा दिया और अगले ही पल उसकी खरबूजे जैसी दोनों चूचियां हवा में लहराने लगी यह देखकर अंकित से रहा नहीं गया और तुरंत वह उसकी एक चूची को अपने मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया यह देखकर राहुल की भी हालत खराब होने लगी एक तरफ उसके मन में अपनी मां के प्रति तिरस्कार की भावना भी प्रकट हो रही थी दूसरी तरफ वह अपनी मां की बेशर्मी को देखकर उत्तेजित भी हुआ जा रहा था वह अपनी आंखों के सामने अंकित को अपनी मां की चूची पीते हुए देख रहा था वह दोनों हाथों से दबा दबा कर पी रहा था,,,,, हैरानी की बात यह थी कि उसकी मां को भी बहुत मजा आ रहा था। फिर वह अपने मन में सोचने लगा कि जब उसे देखकर न जाने क्यों अच्छा लग रहा है तो उसकी मां तो बिस्तर पर एक अनजान लड़के से मजा ले रही है उसे तो अच्छा लग ही रहा होगा,,,,,,।




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माहौल पूरी तरह से बेशर्मी से भरा हुआ था क्योंकि राहुल की आंखों के सामने उसकी मां एक रंडी की तरह उसके दोस्त अंकित को मजा दे रही थी उसका पूरा साथ दे रही थी राहुल को तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि बिस्तर पर उसकी मां है क्योंकि वह कभी सोचा नहीं था कि उसकी मां इस तरह से किसी दूसरे लड़के के साथ भी मजा लेगी जैसा उसके साथ लेटी है,,,, फिर वह अपने आप को यह सोचकर संतुष्ट करने लगा कि आखिरकार औरत को उसकी बुर की गर्मी चरित्रवान रहने ही नहीं देती अगर ऐसा होता तो उसकी मां खुद अपने बेटे से ना चुदवाती,,,, ऐसा सोच कर राहुल अपने मन को मना रहा था अपने आप को दीलासा दे रहा था और फिर आंखों के सामने बिस्तर पर जिस तरह का गरमा गरम दृश्य दर्शाया जा रहा था उसे देखकर वह खुद भी आनंद लेने लगा उसका खुद का लंड पेंट में खड़ा हो चुका था। कमरे के अंदर का नजारा ही पूरी तरह से आनंदित कर देने वाला था अगर उसकी जगह कोई और होता तो शायद वह भी अंदर घुस जाने का प्रयास करता। लेकिन वह किसी तरह से अपने आप पर संयम रखें हुए था क्योंकि वह जानता था कि अंदर जो कुछ भी हो रहा है अभी उसमें उसका कोई भी किरदार नहीं है और अंकित भी अपना किरदार जबरदस्ती खड़ा कर दिया है और उसके किरदार को उसे मजबूरन देखना पड़ रहा है वरना वह अपनी मां के पास किसी को भटकने भी नहीं देता।




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राहुल इस बात से हैरान हुआ जा रहा था कि जब अंकित उसकी मां की दोनों चूचियों को भारी-बड़ी से मुंह में लेकर पी रहा था उसी समय उसकी मां अपने हाथों से अपनी साड़ी को खोल रही थी वह पूरी तरह से बेसब्र हुए जा रही थी,,,,, अपनी मां का उतावलापन देखकर अनायस ही राहुल अपने मन में बोला।

साली रंडी दूसरे का लंड लेने के लिए कितना तड़प रही है कि खुद ही अपनी साड़ी खोल रही है,,,,(रंडी शब्द उसके होठों पर अचानक ही आ गया था,,,, आज तक वह अपने मुंह से अपनी मां के लिए रंडी शब्द का प्रयोग नहीं किया था बल्कि यह जानते हुए भी की उसकी मां उससे चुदवाती है लेकिन आज अचानक ही अपनी मां को दूसरे लड़के के साथ मजा लेता देखकर उसके लिए वह रंडी शब्द का संबोधन कर रहा था,,,,, और देखते ही देखते उसकी मां अपनी साड़ी को खोल चुकी थी वैसे भी कपड़ा उतारने की कोई जरूरत नहीं थी ऊपर और नीचे दोनों जगह से वह नंगी हो चुकी थी बस उसके कपड़े उसकी कमर में फंसे हुए थे लेकिन ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी होकर मजा लूटना चाहती है। अंकित राहुल की मां को अपने हाथों से साड़ी खोलता हुआ देखकर उसकी एक हथेली अपने आप ही उसकी बुर पर आ गई और फिर से वह उसकी बुर से खेलना शुरू कर दिया ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपने हाथ को उसकी बुर से हटाना ही नहीं चाहता था क्योंकि कोई ना कोई बहाने से वह अपनी हथेली को उसकी बुर पर रख ही दे रहा था,,,, अंकित अपने हुनर से राहुल की मां की चूचियों को पी कर टमाटर की तरह लाल कर दिया था और राहुल की मां भी अंकित की हरकत से पूरी तरह से मत हो चुकी थी ऐसा लग रहा था कि जैसे अंकित ने उसके चूचियों के आकार को थोड़ा सा और ज्यादा बढ़ा दिया है क्योंकि उसे अपनी चूची आज कुछ ज्यादा बड़ी लग रही थी,,,,,,, जी भरकर स्तनपान करने के बाद,,, अंकित राहुल की मां की चूचियों से अपने मुंह को हटा लिया और गहरी गहरी सांस लेता हुआ नूपुर के खूबसूरत चेहरे को देख रहा था नूपुर का खूबसूरत चेहरा टमाटर की तरह उत्तेजना से लाल हो चुका था और एक बार फिर से उसके लाल-लाल होठों को देखकर अंकित व्याकुल हो गया और उसके होठों पर अपने होंठ रखकर फिर से चुंबन करना शुरू कर दिया और नूपुर की उसकी पीठ पर हाथ रखकर उसका हौसला बढ़ने लगी यह सब राहुल से देखा नहीं जा रहा था लेकिन यह सब देखकर उसे मजा भी आ रहा था।



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होठों की लाली चाटने के बाद अंकित धीरे से बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया और अपने आप ही अपने कपड़े उतारने लगा इसके लिए नूपुर खुद व्याकुल नजर आ रही थी उसकी नज़रें उसके पेंट में बने तंबू पर ही टिकी हुई थी और यह सब खिड़की पर खड़ा राहुल देख रहा था वह यह भी देख रहा था कि उसकी मां लाल चाहिए आंखों से अंकित के लंड की तरफ देख रही थी मानो जैसे उसे पूरा का पूरा गले के अंदर निगल जाएगी,,,,, राहुल का मन कुछ ज्यादा ही तड़प रहा था क्योंकि उसे पूरा यकीन था कि उसकी मां अंकित के लंड को मुंह में लेकर जरूर चूसेगी क्योंकि उसे ऐसा करने में बहुत मजा आता था एक तरह से का को की मर्द का लंड नूपुर के लिए खिलौना था जिसे सेवा जी भरकर खेलना चाहती थी और खेलती भी थी। अंकित नूपुर की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए अपने पेट की बटन खोल रहा था और देखते ही देखते वह अपने अंदर बियर सही थी अपनी पेट को अपने पैरों से निकलकर एक तरफ कर दिया और नूपुर की आंखों के सामने एकदम नंगा हो गया उसका लंड पूरी तरह से हवा में लहराने लगा जिसे देखकर नूपुर की आंखों की चमक एकदम से बढ़ने लगे और तो और राहुल की भी हालत एकदम से खराब हो गई जब वह अंकित के लंड को देखा,,,, और देखता ही रह गया उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि वाकई में अंकित का लंड उसके लंड से कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा था,,,, न जाने क्यों राहुल के तन बदन में भी सुरसुराहट होने लगी उसकी भी नजर अंकित के लंड से बिल्कुल भी हट नहीं रही थी। और नूपुर की तो आंखों में तूफान नजर आने लगा बहुत पागलों की तरह बदहवास सी आंखें फाड़े अंकित के लंड को देखती ही रह गई,,,, उसे रहा नहीं जा रहा था वह अपने दोनों हाथों की कोहनी का सहारा लेकर अपने आप को थोड़ा ऊपर उठे और प्यासी नजरों से देखते हुए बोली।





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बाप रे इतना मोटा और इतना लंबा कौन से तेल से मालिश करता है रे,।

किसी भी तेल से नहीं आंटी यह तो तुम्हारी जवानी देखकर कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया है,,,।

हाय दैया मैंने तो आज तक ऐसा लंड नहीं देखी,,,।

क्या आंटी बहुत सारे लंड देख चुकी हो क्या,,?
(अंकित की बातें सुनकर नूपुर एकदम से सकपका गई और खुद ही अपनी बात को संभालते हुए बोली,,,)


नहीं नहीं मेरा मतलब है कि मैं कभी सोच भी नहीं सकती की लंड इतना मोटा और लंबा भी हो सकता है,,,,
(जहां एक तरफ नूपुर की बात सुनकर उसका बेटा राहुल अंदर ही अंदर जल रहा था वहीं दूसरी तरफ अंकित मन ही मन प्रसन्न हो रहा था उसे यकीन हो जाना था कि वाकई में उसकी मां अब तक छोटे लंड से चुदवाती आ रही थी लेकिन आज उसका लंड अपनी बुर बर मे लेगी तो एकदम मस्त हो जाएगी,,,,, और यह सोचकर अंकित अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए उसे एकदम से नूपुर के चेहरे के करीब ले आया और धीरे से खिड़की की तरफ देखा ,वह जानबूझकर राहुल को यह सब दिखाना चाहता था राहुल यह सब देख भी रहा था,,,,, उसे न जाने क्यों यह सब अच्छा लगने लगा था वह देखना चाहता था कि उसकी मां किस तरह से उसके लंड को मुंह में लेकर चुसती है उसे संभालती है,,,, और उसके आश्चर्य के बीच उसकी मां खुद ही अपना उठाकर बधाई और एक हाथ से अंकित के लंड को पकड़ कर उसके मोटे आलू बुखारे जैसे सुपाड़े को अपने मुंह में भरकर चुसना शुरू कर दी।, वाकई में नूपुर को एहसास हो रहा था कि अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है जिसे वह ठीक तरह से अपने मुंह में नहीं ले पा रही थी। लेकिन आज जो एहसास जो आनंद उसे महसूस हो रहा था वह उसे कभी महसूस नहीं हुआ था जितना हो सकता था वह अपने मुंह को खोलकर अंकित के लंड का स्वागत कर रही थी।
नुपुर अंकीत के लंड से खेलती हुई


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अंकित बिस्तर के नीचे खड़ा था और राहुल की मां बिस्तर पर लेटी हुई थी और राहुल खिड़की पर खड़े होकर यह सब देख रहा था अपनी मां की बेशर्मी को देख रहा था उसके रंडी पन को देख रहा था लेकिन इस बात को वह भी झुटला नहीं सकता था कि उसे भी मजा आ रहा था,,,,, अंकित राहुल की जलन को और ज्यादा बढ़ाने के लिए खिड़की में मुस्कुराते हुए देखा और उसकी मां के सर पर हाथ रखकर उसके रेशमी बालों को अपनी मुट्ठी में भर लिया और अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दिया वह इस तरह से नूपुर के मुंह को चोद रहा था और अंकित को जला रहा था,,,,, देखते ही देखते अंकित अपना होना दिखाते हुए पूरा का पूरा लंड उसकी मां के गले तक उतार दिया था उसकी मां को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी वह पूरी तरह से मस्त थी उसके मुंह से गोगो,,,,,,गोगो,,,,,, की आवाज आ रही थी,,,,, और कुछ सेकेंड के बाद अंकित उसे वापस बाहर निकाल ले रहा था ऐसा वह दो-तीन बार किया उसे बहुत मजा आ रहा था। और नूपुर को भी बहुत मजा आ रहा था पहली बार लंड उसके गले की गहराई तक गया था क्योंकि राहुल का लंड उसके मुंह में ही खत्म हो जाता था,,,,, अंकित पूरी तरह से मस्त होकर राहु की मां को पूरा मजा दे रहा था वह कभी उसे चूसने देता तो खुद उसे चुसवाता तो कभी अपनी कमर आगे पीछे करके उसके मुंह को चोदना शुरू कर देता,,,, नूपुर खुद हैरान थी अंकित की कलाबाजियों को देखकर उसके हुनर को देखकर जिसे वह नादान लड़का समझती थी वह पूरा खिलाड़ी बन चुका था और कैसे खिलाड़ी बन गया यह वह नहीं जानती थी लेकिन आज बिस्तर पर उसे खिलाड़ी की जरूरत ही अनाड़ी की नहीं क्योंकि अंकित को कुछ सीखना नहीं पड़ रहा था बल्कि अंकित ही उसे सब कुछ एक नए अनुभव के साथ सीखा भी रहा था और अच्छे से एहसास भी करा रहा था।


कुछ देर इसी तरह से मजा लेने के बाद अंकित राहुल की मां के मुंह में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया जो कि उसके थूक और लार से पूरी तरह से सना हुआ था और यह अच्छा ही था क्योंकि ऐसे में उसकी बुर में डालने में आसानी रहती ,,,,, लेकिन मुंह से लंड निकल जाने के बाद अंकित का बुरा हाल था क्योंकि वह अभी राहुल की मां के मुंह में से अपने लंड को बाहर निकलना नहीं चाहता था वह कुछ देर तक और उसके मुंह में ही अपना लंड ठुंस कर अपना माल गिरा देना चाहताथा लेकिन उसकी बुर को चोदने की तड़प भी बढ़ चुकी थी जिसके चलते उसे अपने लंड को उसके मुंह में से बाहर निकालना पड़ा,,, और यही हाल नूपुर का भी था वह भी ललचाई आंखों से अंकित के लंड की तरफ देख रही थी जिस पर उसका थूक और लार लगा हुआ था,,, शायद वह भी अभी कुछ देर तक और उसे चूसना चाहती थी,,,,, अंकित अब बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था वह एकदम से राहुल की मां की कमर के नीचे अपने दोनों हाथ डाला और उसकी कमर पकड़ कर उसे बिस्तर की दूसरी तरफ खींच लिया जिससे उसका आधा शरीर बिस्तर के बाहर हो गया और वह बिस्तर पर लेटी रह गई,,,, अंकित जल्दबाजी दिखाते हुए पेटिकोट की डोरी खोलने लगा और पेटिकोट की डोरी खोलते ही एक बार फिर से उसके पेटीकोट को पकड़ कर बाहर की तरफ खींचने लगा और राहुल की मां उसका साथ देते हुए फिर से अपनी गांड को ऊपर उठा ले और अगले ही पल वह बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी थी उसके दोनों पैर जमीन पर टिके हुए थे और वह खुद बिस्तर पर लेटी हुई थी,,,,, अंकित अपने लंड को पकड़ कर ही आते हुए खिड़की की तरफ देखा राहुल उसे ही देख रहा था उसे मालूम था कि अब क्या होने वाला है वह जानता था कि थोड़ी ही देर में उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी मां की बुर की गहराई में खो जाएगा। अंकित राहुल की मां की दोनों टांगों के बीच आ गया और अपने लंड को हिलाते हुए बोला।



आज तो मजा आ जाएगा,,,(और इतना कहने के साथ ही वह अपने दोनों हाथों से उसकी मोटी मोटी जांघे पकड़ कर उसे खोल दिया और अपने मोटे आलू बुखारे जैसे सुपाड़े को राहुल की मां की बुर से सटा दिया,,,,, मोटे तगड़े सुपाड़े की गर्मी और स्पर्श अपनी बुर पर महसूस करते हैं राहुल की मां एकदम से मस्त हो गई और यह मस्ती राहुल ने भी अपनी मां के चेहरे पर देखा था और अगले ही पल बुर का गीलापन पाकर अंकित अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा बुर की चिकनाहट पाकर फिसलता हुआ अंकित का लैंड राहुल की मां की बुर में प्रवेश करने लगा हालांकि यह काम थोड़ा सा मुश्किल था क्योंकि अभी तक उसकी बुर में राहुल का लंड जाता था लेकिन आज अंकित का लंड उसमें जा रहा था जो मोटाऊ और लंबाई दोनों में अंकित से कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था। अंकित दोनों हाथों से उसकी मोटी जांघों को पकड़े हुए था,,,, राहुल की मां भी है सब अपनी आंखों से देखना चाहती थी इसलिए अपने हाथ की दोनों कहानी का सहारा लेकर अपने चेहरे को उठाकर अपनी नजरों को दोनों टांगों के बीच स्थिर कर दी थी और अपनी गुलाबी छेद में,,, अंकित के मोटे तगड़े लंड को घुसता हुआ देख रही थी उसके चेहरे का भाव पल-पल बदलता जा रहा था जैसे-जैसे अंकित का। लंड अंदर की तरफ सरक रहा था वैसे-वैसे राहुल की मां के चेहरे की रूपरेखा बदलती जा रही थी ,,,,, उसके लाल-लाल होठ खुले हुए थे उसकी नंगी चूचियां सांसों की गति के साथ ऊपर नीचे हो रही थी और पानी भरे गुब्बारे की तरह हिलोरें खा रही थी,,,,।




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अंकित की मेहनत धीरे-धीरे रंग ला रही थी हालांकि इस क्रिया को करने में वह भी पसीने से तरबतर हो चुका था लेकिन पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था वह पूरी मेहनत कर रहा था राहुल की मां पर छा जाने के लिए और वह अपने निश्चय पर अड़ग भी था देखते ही देखते हैं उसका बम पिलाट लंड उसकी बुर की गहराई में पूरी तरह से खो चुका था और यह देखकर राहुल की मां आश्चर्यचकित थी क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि राहुल का मोटा तगड़ा लंड पूरी तरह से उसकी बुर में घुस जाएगा,,, जो कि अब एक तरह से उसकी भी विजय थी वह पूरी तरह से सक्षम थी मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर की गहराई में छुपा लेने के लिए इसलिए उसके चेहरे पर भी मुस्कान तैरने लगी थी और वह अंकित से बोली,,,।

बाप रे मुझे तो उम्मीद ही नहीं थी कि तेरा लंड मेरी बुर में पूरा का पूरा घुस जाएगा,,,,(राहुल की मां की बात सुनकर अंकित मुस्कुरा दिया और तिरछी नजर से राहुल की तरफ देखने लगा जो की शर्म से पानी पानी हो जा रहा था वह सोच नहीं था कि उसकी मां इतनी बड़ी बेशर्म बन जाएगी उसकी बातें आज पूरी तरह से रंडी की तरह लग रही थी,,,,, राहुल की मां की बात सुनने के बाद अंकित बोला,,,,)




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आंटी तुम खूबसूरती की वह बला हो जो अपनी बुर में गधे के लंड को भी पूरा का पूरा ले लेगी,,,, ।

धत्,,,, बेशर्म,,,,,।


बेशर्म बनने में ज्यादा मजा है आंटी पहले में सीधा-साधा था तब तुम देती नहीं थी लेकिन आज बेशर्म बन गया हूं तो देखो तो आगे खोल कर दे रही हो,,,,(राहुल कीमां की कमर दोनों हाथों से पकड़ कर अंकित अपनी कमर हिलाता हुआ बोला,,,,)


मैं तो शुरू से तुझे देना चाहती थी लेकिन तू ही लेने से इनकार करता था ना जाने किस बात का डर था तेरे मन में कि मेरी ले नहीं पा रहा था,,,,,,,।


मुझे क्या मालूम था आंटी की तुम मुझे देना चाहती हो पहले दिन से ही तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरा लैंड बार-बार खड़ा हो जाता था तुम्हें किचन में खाना बनाते देखकर मेरे लंड की जो हालत हो रही थी ना बात नहीं सकता तुम्हारे बारे में रात दिन में सोचता रहता था,,,,,,, और अपने आप से ही बात करते हुए बोलता था कि कब मुझे आंटी को चोदने को मिलेगा,,,,,(अंकित तिरछी नजर से राहुल की तरफ देखते हुए बोला हुआ अपनी बातों से राहुल को पूरी तरह से शर्मिंदा कर देना चाहता था और राहुल हो भी रहा था)


आज मिल गया ना मौका तुझे,,,,।




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हां आंटी आज तुम्हारी दया से मुझे मौका भी मिल गया और सच कहूं तो मुझे बहुत मजा आ रहा है तुम्हारी बुर में लंड डालने में मैं कभी सोचा नहीं था कि तुम्हें चोदने में मुझे इतना मजा आएगा बस तुम्हें छोड़ना चाहता था लेकिन आज पता चल रहा है कि जैसे लग रहा है कि मैं किसी खूबसूरत हीरोइन की चुदाई कर रहा हूं,,,,,ऊफफ,,,, इस उम्र में भी तुम्हारी बुर कितनी कसी हुई है,,,,,,आहहहहहह हर झटका के साथ कितना मजा आ रहा है,,,,।


मुझे भी बहुत मजा आ रहा है,,,,,,आहहहहह आहहहहह ऊमममममम तेरा बहुत मोटा और लंबा भी तो है,,,,।

ऐसा कुछ भी नहीं है आंटी यह तो आज खुशी में कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा लगने लगा है अंकल जी से ज्यादा मोटा और लंबा नहीं होगा,,,,,।

धत् किसकी बात कर दिया तूने अगर वह इस लायक होते तो मुझे तेरे साथ यह सब करने की तकलीफ नहीं उठानी पड़ती,,,


क्यों आंटी,,,,,


अरे वह अब इस लायक नहीं है कि मेरी प्यास बुझा सके,,,, और उनके हथियार भी छोटा और पतला है,,,,,

ओहहहहह तब तो अच्छा ही है आंटी अगर ऐसा ना होता तो मुझे तुम्हारी सेवा करने का मौका कैसे मिल पाता,,,,,(राहुल की तरफ देखते हुए अंकित बोला ,,,,)

तू सच कह रहा है और मुझे आज एहसास हो रहा है कि यह मौका तुझे पहले ही दे देना चाहिए था मैं तो ऐसा लग रहा है की हवा में उड़ रही हूं तेरा लंड सीधा मेरे बच्चेदानी तक जाकर टकरा रहा है,,,,,आहहहहह आहहहहह ,,ऊईईईईई मां


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तो आंटी कहीं ऐसा ना हो जाएगी तुम्हारे बच्चेदानी में बच्चा रुक जाए और राहुल के लिए भाई मिल जाए (बेशर्मी से हंसते हुए अंकित राहुल की तरफ देखते हुए बोला तो राहुल भी अंकित की बात सुनकर एकदम से सन्न रह गया,,,,, वह अपनी मां का जवाब सुनना चाहता था और अंकित की बात सुनकर उसकीमां बोली,,,,)

काश ऐसा हो पाता मेरे पेट में तेरा बच्चा होता तो मुझे और मजा आ जाता लेकिन ऐसा हो नहीं सकता क्योंकि मैं ऑपरेशन करा ली हुं,,,,।

ओहहहहह आंटी यह क्या कि तुमने मेरे बाप बनने का सपना तोड़ दी,,,,,।

चल हरामी बडा आया बाप बनने अपना काम कर,,,।

वही काम तो कर रहा हूं आंटी,,,(और ऐसा कहते हुए जोर-जोर से धक्का लगाने लगा लेकिन अपनी मां की बात सुनकर राहुल एकदम शर्मिंदा हो गया था क्योंकि इस तरह की बात उसकी मां ने उसके साथ कभी नहीं की थी लेकिन अंकित के साथ मिलकर वह बच्चे की बात कर रहे थे उसके बच्चे की मां बनने की बात कर रही थी यह सब राहुल को शर्मिंदा कर रहा था लेकिन जिस तरह से अंकित उसकी मां की चुदाई कर रहा था वह देखकर उसकी उत्तेजना पूरी तरह से बढ़ चुकी थी और वह भी अपने पेटं से अपने लंड को बाहर निकाल कर हीलाना शुरू कर दिया था। इस समय तीन लोग मजा ले रहे थे दो लोग कमरे के अंदर और एक कमरे के बाहर तीनों अपने-अपने काम में लगे हुए थे लेकिन अंकित कुछ ज्यादा ही मजा ले रहा था,,,,, नूपुर की बड़ी-बड़ी चूचियों को उसकी छाती पर लहराते हुए देखकर अंकित से रहा नहीं गया और अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर उसकी दोनों चूचियों को थाम लिया और उन्हें जोर-जोर से दबाते हुए अपनी कमर लाना शुरू कर दिया उसे बहुत मजा रहा था राहुल की मां की चुदाई करने में,,,,,, लेकिन घंटों से अंकित का लंड खड़ा का खड़ा था जो कि अब राहुल की मां की बुर की गर्मी पाकर पिघलने के लिए तैयार हो चुका था वह झड़ने के कगार पर आ चुका था इसलिए वह अपने धक्को को तेज कर दिया था एकदम रफ्तार में,,,, खिड़की पर खड़ा राहुल यह सब देखकर पूरी तरह से मत हुआ जा रहा था वह भी जोर-जोर से मुठ मार रहा था,,,, नूपुर भी दूसरी बार झड़ने के कगार पर पहुंच चुकी थी उसका बदन आकर रहा था और अंकित उसके कंधों को दोनों हाथों से पकड़ कर एकदम से नियंत्रण में किए हुए जोर-जोर से उसे पेल रहा था,,, और अगले ही पल राहुल की मां और अंकित दोनों एक साथ झड़ने लगे साथ में दीवार पर राहुल भी झड़ने लगा,,,,, अंकित मस्त होता हुआ राहुल की मां पर झुक गया था और उसे अपनी बाहों में भरकर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था,,,, और झड़ रहा था ।



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बहुत ही कामुक और मजेदार अपडेट !
 

sunoanuj

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अंकित का यह पहला स्खलन था राहुल की मां की बुर में,,,, अंकित पूरी तरह से मस्त हो चुका था वह कभी सोचा नहीं था कि राहुल की मां उसे चोदने को मिलेगी,,,,, नूपुर भी मस्त हो चुकी थी वह भी, अंकित को अपनी बाहों में जकड़ कर उसके लंड से नीकली बौछार में पूरी तरह से डुब रही थी उस साफ तौर पर एहसास हो रहा था कि,,, अंकित के लंड से निकली पिचकारी उसके बच्चेदानी पर बौछार मार रही थी,,, वह पूरी तरह से संतुष्टि के एहसास में डूबती चली जा रही थी अपनी आंखों को बंद करके वह मदहोशी में खो गई थी और अंकित की कमर रहे रहकर झटका खा रही थी,,, यह सब राहुल अपनी आंखों से देख रहा था वह यह देखकर हैरान था कि उसकी मां को अंकित से चुदवाने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था। लेकिन अब कोई फायदा नहीं था। अब उसे भी एहसास हो गया था कि औरत के चरित्र का कोई भरोसा नहीं होता कल तक उसे ऐसा ही लगता था कि उसकी मां उसके साथ वफादार है लेकिन अगर वफादारी होती तो अपने ही बेटे के साथ संबंध क्यों बनाती ,,,, यही सोच कर वह अब अफसोस नहीं कर रहा था,,,। राहुल को ऐसा लग रहा था कि आप झड़ने के बाद अंकित चल जाएगा और वह यही सोचकर वहीं कुछ देर तक खड़ा रहा।



Ankit or rahul ki ma mast hote huye

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अंकित राहुल की मां की बुर में से अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाला जो कि उसके मदन रस में पूरी तरह से डूब कर टपक रहा था,,, नूपुर लेते-लेते ही अंकित के लंड की तरफ देखी जो कि अभी भी पूरी तरह से अपनी औकात में ही खड़ा था यह देखकर वह हैरान हो गई और। बोली।

बाप रे झड़ने के बाद भी तेरा तो खड़ा है,,,।

तो क्या आंटी मर्द का लंड है ढीला थोड़ी ना पड़ेगा,,,,।
(अंकित की बात सुनकर नूपुर मन ही मन मुस्कुरा रही थी लेकिन यह सोचकर हैरान भी थी कि उसके बेटे का लंड तो झडने के बाद तुरंत ढीला पड़ जाता था लेकिन अंकित का तो अभी भी बना हुआ था,,,,,, नूपुर गहरी गहरी सांस ले रही थी ,,,बिस्तर पर लेटी हुई उसका यह मादक रूप नग्न अवस्था में कुछ ज्यादा ही उत्तेजक लग रहा था अंकित बिस्तर से नीचे खड़ा था और वह भी अपनी कमर पर हाथ रखकर राहुल की मां की नंगी जवानी कोई देख रहा था उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि अभी-अभी उसने राहुल की मां की चुदाई किया है क्योंकि राहुल की मां को चोदने का सपना वह भी देखा करता था,,,, जब तक उसकी खुद की मां के साथ नजदीकियां नहीं बनी थी तब तक वह राहुल की मां के ही बारे में सोचकर मुठ मारा करता था । लेकिन जैसे ही उसकी नजदीकी अपनी मां के साथ बनी है उसका ध्यान नूपुर के ऊपर से हट गया था लेकिन आज फिर वह अपनी चाहत को राहुल की मां के साथ पूरा कर लिया था इसलिए वह अपने आपको बेहद भाग्यशाली समझ रहा था क्योंकि उसके जीवन में अब चुदने वाली चार औरतें थी एक उसकी नानी दूसरी उसकी मां तीसरी सुमन की मां और चौथी राहुल की मां अभी तक उसने उम्र दराज औरतों की चुदाई का सुख भोगा था,,,, लेकिन इस उम्र की औरतों को चोदने में जितना मजा उसे मिल रहा था वह सोच भी नहीं सकता था। नूपुर को भी लग रहा था कि उसकी चुदाई करने के बाद अंकित अपने घर चला जाएगा इसलिए वह उठकर बैठ गई थी,,,, और अंकित रह रहकर कर नजरों से खिड़की की तरफ देख ले रहा था जहां पर अभी भी राहुल अपनी जगह पर बना हुआ था। राहुल को जलाने के उद्देश्य से वह उसकी मां से बोला,,,)




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कैसा लगा आंटी,,,,?

पूछ मत कैसा लगा मैं बात नहीं सकती आज इतना मजा आया कि मैं कभी सोच भी नहीं सकती की चुदाई में इतना मजा आता होगा।


क्यों ईससे पहले चुदवाने में इतना मजा नहीं आया,,,

तभी तो तुझे कह रही हूं सच में मुझे इतना मजा पहले कभी नहीं आया क्योंकि तेरा लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है,,, इसकी रगड़ एकदम साफ तौर पर मुझे अंदर तक महसूस हो रही थी।

इसका मतलब कि तुमने अभी तक अपनी बुर में मोटा और लंबा लंड नहीं ली थी,,,,।

हां मैं सच कह रही हूं मैं तो पहली बार तेरे जैसा लंड देख रही हूं इससे पहले मैंने सिर्फ किताबों में ही देखी थी और वह भी अंग्रेज लोगों का लेकिन पहली बार उस तरह का देसी लंड देख रही हूं।


ओहहहहह तुम तो बहुत चालू हो गंदी किताबें पढ़ती हो,,,


तो इसमें क्या हो गया बहुत से लोग हैं जो छुप छुप कर यह किताबें पढ़ते हैं,,,,,।

क्या राहुल को यह सब मालूम है,,,,।(चोर नजरों से राहुल की तरफ देखते हुए)

नहीं उसे बिल्कुल भी नहीं मालूम,,,,, भला यह सब बातें बेटे को बताते हैं क्या,,,,?

अगर उसे पता चल गया तो की उसकी मां गंदी किताबें पढती है,, उसके ही दोस्त से चुदवाती है तब क्या होगा,,,,।




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लेकिन यह सब उसे पता ही नहीं चलेगा,,,,
(नूपुर इस बात से बेखबर थी की खिड़की पर उसका बेटा खड़ा होकर उसकी काम लीला को अपनी आंखों से देख रहा है और उसकी बातों को सुन भी रहा है,,, राहुल की मां की बात सुनकर अंकित अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए बोला,,,)

अगर मान लो उसे यह सब पता चल गया कि उसकी मां गंदी किताबों की शौकीन है और उसके ही दोस्त से चुदवा रही है, तब क्याहोगा,,,?

तब तो सच में गजब हो जाएगा,,,,,,

लेकिन उसका मुंह बंद करने का भी तरीका मेरे पास है ज्यादा चिंता करने की कोई बात नहीं है,,,,।

वह क्या,,,,?(एक हाथ से अपनी चूची दबाते हुए वह बोली,,)


उसके लिए भी अपनी टांगें खोल देना राहुल भी तो मेरे ही उम्र का है तुम्हारी जवानी देखकर उसका भी लंड खड़ा हो जाता होगा,,(खिड़की पर खड़े राहुल की तरफ देखते हुए) तुम्हारी गुलाबी बुर देखकर उसे रहा नहीं जाएगा और वह सारी बातों को बुलाकर तुम्हारी बुर में अपना लंड डाल देगा।

धत्,,,, कोई अपने बेटे के लिए ऐसा करता है क्या?

क्यों नहीं तुम्हें तो ऐसा करना ही होगा अगर हम दोनों के बीच क्या चल रहा है अगर राहुल को पता चल गया तो उसका मुंह बंद करने के लिए तुम्हें उसके मुंह में अपनी चूची ठुंसना ही पड़ेगा तभी वह शांत होगा,,,,।




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नहीं नहीं मुझसे तो ऐसा नहीं हो पाएगा,,,,
(नूपुर इस गलतफहमी में थी कि अंकित को उसके और उसके बेटे के बीच के रिश्ते के बारे में कुछ भी नहीं मालूम है जबकि अंकित सब कुछ जानता था और वह जानबूझकर इस तरह की बातें कर रहा था ताकि आगे चलकर राहुल के साथ मिलकर वह दोनों उसकी मां की चुदाई कर सके,,,, और दूसरी तरफ खिड़की पर खड़ा राहुल अपनी आंखों से अपनी मां की कम लीला देखकर और दोनों की बातें सुनकर इतना तो समझ गया था कि इन दोनों का रिश्ता आज का पहला तो बिल्कुल भी नहीं है यह दोनों पहले से ही इस काम लीला में लगे हुए हैं बस वही गलतफहमी में रह गया था,,,,, राहुल की मां की बात सुनकर अंकित बोला)

अभी तुम्हें ऐसा लगता है लेकिन जिस दिन हम दोनों की चोरी पकड़ी जाएगी तब तुम्हें समझ में आएगा तब तुम खुद ही अपने बेटे के लिए अपनी टांगें खोल दोगी अपनी गुलाबी बुर का छेद उसके सामने परोस दोगी,,,,
(अंकित की बातें सुनकर नूपुर की हालत खराब हो रही थी उसके बदन में फिर से उत्तेजना का तूफान उठ रहा था और अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) और तुम्हारा गुलाबी छेद देखकर तुम्हारे बेटे से भी रहा नहीं जाएगा आखिरकार अभी तो मेरी तरह जवान है तुम्हारी बुर देखकर उसका भी लंड खड़ा हो जाएगा वह यह नहीं देखेगा कि उसके सामने टांग खिलाए कौन लेटी है उसकी मां है या कोई और,,, उसे तो बस तुम्हारा गुलाबी छेद दिखाई देगा जिसमें वह जल्द से जल्द अपने लंड को डालकर अपना गरम लावा तुम्हारी बुर में डालने के लिए तड़प उठेगा।




क्या वह ऐसा कर सकता है,,,?

क्यों नहीं मेरी जान,,,, वह जरूर ऐसा करेगा,,,,
(राहुल की मां के लिए जान शब्द का प्रयोग करके अंकित ने आग में घी डालने का काम किया था क्योंकि उसकी यह बात सुनकर राहुल पूरी तरह से शर्मिंदा हो गया था,,,, लेकिन राहुल की मां बहुत खुश हो गई थी और वह तुरंत बोली,,,)

तुम मुझे मेरी जान का कर ही बुलाया कर मुझे अच्छा लगताहै,,,,,

तुम्हारी बुर में लंड डालने के बाद तुम मेरी जान बन गई हो,,,,,,।

अच्छा अगर तेरी मां दोनों टांगें खोल दे तो क्या तू भी बिना कुछ सोचे समझे उसकी बुर में लंड डाल देगा,,,,।
(राहुल की मां की बात सुनकर अंकित थोड़ा सोच में पड़ गया था वैसे तो वह अपनी मां की बुर में रोज ही लंड डालता था इसलिए इसमें कोई नई बात नहीं थी और राहुल की मां के मुंह से यह बात सुनकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी अगर यह बात उससे नहीं बहुत पहले की होती तो शायद वह गुस्से में उसके गाल पर तमाचा मार सकता था लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदल चुके थे इसलिए वह थोड़ा सोच समझ कर बोला)





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जैसा कि मैं बोला मैं भी जवान हूं अगर सच में मेरी मां मेरी आंखों के सामनेअपनी टांगे खोल देगी तो उसकी गुलाबी पर देखकर मेरा भी खड़ा हो जाएगा लेकिन मैं कुछ करुंगा कि नहीं करूंगा यह हालत पर निर्भर रखता है अगर मैं भी अपनी मां को किसी गैर मर्द के साथ रंगे हाथ पकड़ लूंगा तो शायद मैं भी वही करूं जो राहुल को करने को कह रहा हूं।

ओहहहहह तब तो तुझे मजा ही आ जाएगा क्योंकि तेरी मां तो मुझे भी ज्यादा खूबसूरत है यह बात मानता है ना तू।

बात तो तुम सही कह रही हो मेरी जान मेरी मां तुमसे भी ज्यादा खूबसूरत है लेकिन इस समय मेरे दिल की रानी तुम हो,,,,(और ऐसा कहते हुए अंकित अपनी लंड को पकड़े हुए राहुल की मां के करीब पहुंच गया अपने मोटे तगड़े लंड को हथौड़े की तरह उसके चेहरे पर पटकने लगा और रगड़ने लगा और राहुल की मां को यह अलग दुनिया की कल्पना करवाते हुए बोला,,,)

सोचो मेरी जान अगर ऐसा सच हो गया तो कितना मजा आएगा एक ही कमरे में एक ही बिस्तर पर मैं तुम और तुम्हारा बेटा तीनों नंगे होकर मजा लूटेंगे मैं तुम्हारी बुर चाटुंगा तो तुम्हारा बेटा तुम्हारी चुची दबाएगा तुम्हारी बारी से हम दोनों का लंड मुंह में लेकर चूसोगी,,,,, सोचो कितना मजा आएगा एक ही बिस्तर पर घमासान मच जाएगा कभी मैं तुम्हारी बुर में डालूंगा तो कभी तुम्हारा बेटा तुम्हारी बुर में डालेगा जब तुम तुम्हारे बेटे का लंड अपनी बुर मे लोगी तो मैं तुम्हारी गांड मारूंगा,,,,,।




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(गांड मारने वाली बात सुनकर राहुल की मां एकदम से मदहोश हो गई और अपने लाल-लाल होठों को खोलकर तुरंत अंकित के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी जिसपर उसके बुर का मदन रस लगा हुआ था,,,,,, यह सब खिड़की पर खड़ा राहुल अपनी आंखों से देख रहा था एक बार झड़ जाने के बाद अंदर का दृश्य देख कर अपनी मां की बेशर्मी देख कर फिर से उसका लंड अंगड़ाई ले रहा था। आज उसकी मां पूरी तरह से रंडी बन चुकी थी लेकिन आप उसकी मां का रूप राहुल को अच्छा लग रहा था और वह भी अंकित की बातों की कल्पना कर रहा था वह भी सोच रहा था कि अगर सच में अंकित जैसा कह रहा है वैसा हो जाए तो मजा ही आ जाए,,,,, राहुल सोच रहा था कि एक बार झड़ने के बाद अंकित अपने घर चला जाएगा लेकिन उसके आश्चर्य का ठिकाना न था क्योंकि झड़ने के बाद उसकी मां की बुर में से उसका लंड निकलने के बाद भी ज्यो का त्यों खड़ा का खड़ा ही था,,,, इस बात से राहुल पूरी तरह से हैरान था क्योंकि उसका एक बार झड़ने के बाद काफी समय लगता था खड़े होने में शायद इसीलिए उसकी मां पूरी तरह से अंकित पर पागल हो चुकी थी इसीलिए तो उसके लंड को फिर से मुंह में लेकर चूस रही थी जिस पर उसकी बुर की मलाई लगी हुई थी।


Nupur mast hoti hui

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गहरी सांस लेते हुए राहुल की मां एक बार फिर से अंकित को मस्त कर रही थी और अंकित दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर के उसके दोनों खरबुजो को पकड़ कर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया था,,,, उसे पूरा यकीन था कि उसने अपनी बातों से राहुल की मां के मन में कल्पनाओं का रंग भर दिया है जो की बहुत ही जल्द पूरा होने वाला है और वह भी इस अनुभव के लिए काफी उत्सुक था,,,, उसे भी देखना था कि एक ही बिस्तर पर तो मर्दों के साथ एक औरत कैसे निपटती है,,, और इस बात के लिए भी उत्सुक था कि इस समय पता भी चलेगा कि असली मर्द कौन है उसका बेटा या वह खुद और उसे पूरा यकीन था कि उसकी मां के सामने असली मर्द वह खुद ही साबित होने वाला है,,,, अंकित पागलों की तरह उसकी दोनों चूचियों को दबाता हुआ अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था। अंकित पूरी तरह से मस्त हो चुका था कमरे के अंदर एक बार फिर से कम लीला शुरू हो चुकी थी,,,, शुरू शुरू में जब अंकित नूपुर को इतना जानता नहीं था तब उसे देखकर वह कभी सोच भी नहीं सकता था कि वह एक शिक्षिका होने के बावजूद भी अंदर से एक प्यासी औरत है,,,, उसे नहीं मालूम था कि मौका मिलने पर मोटा तगड़ा लंड भी वह एक झटके में अपनी बुर की गहराई में ले लेती है। लेकिन अब सारे भ्रम टूट चुके थे। लेकिन यह भरम टूटने के बाद उसे जो आनंद प्राप्त हो रहा था वह अविस्मरणीय था इस पल को वह कभी भूलने वाला नहीं था,,,,





अंकित उसके बालों में लगे हुए बक्कल को अपने हाथों से खोल रहा था अभी तक उसके बाल उलझे हुए थे लेकिन अब अंकित राहुल की मां के रेशमी बालों को खोलना चाहता था खुले बालों में उसकी सुंदरता को देखना चाहता था और अगले ही पल वह बक्कल निकाल कर उसके उलझे हुए बालों को उलझाने लगा खुले बालों में राहुल की मां और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी जिससे अंकित की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती चली जा रही थी वह जोर-जोर से उसकी दोनों चूचियों को दबाना फिर से शुरू कर दिया,,,,,,,,, अंकित का लंड फिर से नूपुर के थुक और लार में सनने लगा था और यह सब खिड़की पर खड़ा राहुल देख कर मदहोश हुआ जा रहा था वह फिर से अपने लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया था मुठीयाना शुरू कर दिया था। अंदर का नजारा देखकर उसे भी मजा आ रहा था,,, अब अभी पूरी तरह से हकीकत से बाकी हो चुका था हालात को अपना लिया था इसलिए वह इस समय मजा ले रहा था वरना कमरे के अंदर का दृश्य देखकर वह अंदर ही अंदर झूलस जाता। अंकित की सांस ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि राहुल की मां अपनी जीभ की कलाबाजियां दिखा रही थी,,, जब जब वह लंड के पेशाब वाले छेद पर अपनी जीभ लगाकर घूमाती तो अंकित के बदन में सनसनी फैल जाती,,,, वह एकदम से मचल उठता। और नूपुर उसके नितंबों पर अपनी हथेली रखकर उसे अपनी ओर खींच लेती नूपुर का इस तरह से उसके नितंबों पर अपनी हथेली रखकर दबाना उसे भी बेहद आनंददायक लग रहा था,,,,,

कुछ देर तक इसी तरह से मजा लेने के बाद अंकित धीरे से अपने लंड को फिर से उसके मुंह में से बाहर खींच लिया।,,, और राहुल की मां से बोला।





घोड़ी बन जाओ मेरी रानी,,,,,।
(उसका इतना कहना था कि राहुल की मां बिल्कुल भी देर नहीं की घोड़ी बनने में,,,,, वह तुरंत बिस्तर के किनारे घुटनों के बल झुक गई और घोड़ी बन गई,, उसकी बड़ी-बड़ी फैली हुई गांड देखकर अंकित की हालत खराब हो गई और उसे रहने क्या वह तुरंत दो चार चपत उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर लगा दिया और उसकी गोरी गोरी गांड टमाटर कितने लाल हो गई यह सब राहुल अपनी आंखों से देख रहा था और यह भी देख रहा था कि अंकित के हर एक हरकत का उसकी मां खुलकर मजा ले रही थी उसकी गांड पर चपत लगाते हुए अंकित बोला,,,)

वह मेरी रानी कितनी मस्त गांड है तुम्हारी,,, मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हारी गांड देखकर तुम्हारे बेटे का भी लंड खड़ा हो जाता होगा,,,,,।

सहहहह आहहहहह,,,, धीरे से ,,,,लगती है,,,,(इससे ज्यादा नूपुर कुछ बोल नहीं पाई,,,,,, वह अंकित की बात का जवाब नहीं देना चाहती थी क्योंकि यह सच ही था उसकी बड़ी-बड़ी गांड देखकर अक्सर उसके बेटे का लंड खड़ा हो जाता था अंकित खिड़की की तरफ देखते हुए फिर से दो चार चपत उसकी मां की गांड पर लगा दिया,,,, और फिर झुककर गांड की बड़ी-बड़ी दोनों फांकों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसे थोड़ा सा फैलाते हुए उसके गुलाबी छेद पर अपने होंठ रखकर उसे चाटना शुरू कर दिया,,,,, और खुद ही लगातार अपने हाथ से ही अपने लंड को मुठिया रहा था यह देखकर राहुल की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी क्योंकि राहुल जानता था कि अगर वह इस तरह की हरकत करता तो तुरंत उसके लंड से पानी फेंक देता लेकिन अंकित अभी भी टिका हुआ था यही उसके लिए हैरानी की बात थी। थोड़ी देर तक अंकित इसी तरह से मजा लेता रहा और राहुल की मां को मजा देता रहा लेकिन अब उससे रहा नहीं जा रहा था क्योंकि राहुल की मां भी अपनी भारी भरकम बड़ी-बड़ी गांड को पीछे की तरफ ठेल दे रही थी जिसका मतलब साफ था कि अब वह अपनी बुर में उसके लंड को लेना चाहती थी। इसलिए अंकित धीरे से खड़ा हुआ और फिर अपने लंड को उसके गुलाबी छेद से सटाकर उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम लिया और पहले ही प्रयास में अपना पूरा का पुरा लंड कचकचा कर उसकी बुर में डाल दिया,,,,, उसके पहले ही प्रहार में राहुल की मन एकदम से अपने आप को संभाल नहीं पाई और आगे की तरफ लुढ़क गई,,, लेकिन अंकित उसकी कमर को पकड़कर उसे थाम लिया और फिर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,,।

Rahul ki kalpna


राहुल एकदम साफ तौर पर देख रहा था कि अंकित का मोटा तगड़ा लंड पुरा का पूरा अंदर जाता था और सुपाड़ा छोड़कर बाकी का हिस्सा बाहर आ जाता था और अंकित जोर लगाकर फिर से लंड को पूरा का पूरा अंदर ठेल देता था जिससे हर एक प्रयास में हर एक प्रहर में उसकी मां के मुंह से आह निकल जाती थी जिसे सुनकर अंकित के साथ-साथ वह खुद मस्त हो जाता था और जोर-जोर से अपने लंड को मुठीयाता था राहुल सोचा नहीं था कि अंकित कभी उसकी मां को घोड़ी बनाकर छोड़ पाएगा जबकि वह खुद अंकित की मां को चोदना चाहता था लेकिन सब कुछ उल्टा हो गया था,,,, मजबूरन उसे खिड़की पर खड़े होकर अपने ही मां को घोड़ी बने देखना पड़ रहा था,,, पूरे कमरे में उसकी मां की गरमा गरम सिसकारियां गुंज रही थी अंकित ताबड़तोड़ धक्के पर धक्के लगा रहा था,,,, उसकी काम ऐसी लग रही थी जैसे कोई मोटर हो जो बिना रुके चल रही थी और जो मजा हुआ राहुल की मां को दे रहा था राहुल पूरी तरह से हैरान था यह सब देखकर।

अंकित बिना रुके अपनी मंजिल पर पहुंचाना चाहता था और तकरीबन 25 मिनट की चुदाई के बाद दोनों की सांस ऊपर नीचे होने लगी राहुल की मां का बदन अकड़ने लगा वह अपनी गांड को झकझोर कर पीछे की तरफ मार रही थी और अंकित पूरी ताकत लगा दे रहा था अपने लंड को उसकी बुर में डालने में,,,, और फिर एकदम से राहुल की मां की चीख निकल गई और वह झड़ने लगी चार-पांच धक्के के बाद अंकित भी अपना गरम लावा राहुल की मां की बुर में डालना शुरू कर दिया वह दोबारा झड़ चुका था आज जो मजा उसे मिला था वह कभी भूलने वाला नहीं था। अपनी प्यास बुझा लेने के बाद,,, वह दोनों अपने-अपने कपड़े पहनने लगे,,,, यह देखकर राहुल समझ गया था कि अब नाटक पर पर्दा पड़ चुका है इसलिए उसका वहां खड़ा रहना उचित नहीं था इसलिए वह सीधा घर के बाहर निकल गया और सामने सड़क के आगे जाकर अंकित का इंतजार करने लगा थोड़ी ही देर में अंकित भी उसे घर से निकलता हुआ दिखाई देने लगा वह अंकित से मिलकर कुछ बातें करना चाहता था जो उसकी समझ के परे था।
बहुत ही शानदार अपडेट
 
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