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Note :-सिर्फ़ कहानी को मजेदार और उत्तेजक बनाने के लिए Physical Violence और Dominance (मार,पीट) का इस्तेमाल किया गया है तो कहानी को मनोरंजन के माध्यम से पढ़े और प्रेरणा लेकर निजी जीवन में इसका प्रयोग ना करे...... धन्यवाद।
अपडेट - 25
जैसे तूफान के बाद चारों तरफ शांति छा जाती है इस तरह हमारे जिस्मों के अंदर का तूफान भी इस वक्त थमा हुआ था आंटी इस वक्त आंखें बंद करके निढ़ाल होकर मेरे बगल में लेटी हुई थी। Bath Oli से सने उनके बदन पर पसीने की बूंदे मिलकर उनके कामिनी देह को उग्रता प्रदान कर रही थी,उनका पूरा बदन इस वक्त किसी नागीन के देह समान चमक रहा था, जिसकी मधुमता का एहसास करने के लिए मैने पीछे से अपनी बाहों में लिया हुआ था,उनकी गांड़ के हुड़दंग मचाने के बाद मेरा लंड उन्ही दो मांसल कूल्हों के बीच दबा हुआ था जिस पर अभी भी आंटी के योनि का रस और वीर्य लगा हुआ था। सहवास को इस आक्रामकता और दीर्घ पलों के बाद भोगने की वजह से उनका शरीर पूरी तरह थक चुका था और जिस तरह विशाल ने उनको रौंदा था उसकी वजह से उनका पूरा बदन टूट रहा था,उसके साथ ही वो आंखे बंध किए लंबी सांसे ले रही थी।आंटी थोड़ी थक जरूर गई थी किन्तु हम दोनों के अंदर की प्राणयाग्नि अभी भी भड़क रही थी जो कोमल बदन के स्पर्श से बढ़ती जा रही थी।कुछ देर लेटे रहने के बाद मैं बेड से उठा और उनके चेहरे के पास बैठ गया,मुख पर काली पलकों के साथ मिलकर सजे वो नैन उनके चेहरे को कितना सुंदर बना रहे थे,उसके साथ ही अधरो की गुलाबी जोड़ जिसका रसपान किसी शहद से कम नहीं था। मैंने उनके गाल पर हाथ रखा और पास ही टेबल पर पड़ी पानी की बोतल लेने ही लिए आगे झुका जिससे नग्न अवस्था में होने की वजह से मेरा लंड उनके मुलायम गालों पर टिक गया,वीर्य निकलने के बाद भी मेरा लंड अभी भी 4 इंच जितना लंबा था, जिस्म की गर्मी और वीर्य की वीर्य की सुवास आंटी की नाक में पड़ते ही उनकी आँखें खुल गई और अपने मुंह को खोलकर उसे अंदर भर लिया। एक गर्म सा एहसास महसूस होते ही मैने देखा तो दो गुलाबी होठ मेरे लंड को अपने मुंह में लिए उसे अपने मुखरस से भिगो रहे थे। "आआहहहअअ्......... आंटी आप कब जाग गई? मुझे लगा आप सो रही है।" मेरी बात सुनकर उन्होंने लंड चूसते हुए अपनी नजरे ऊपर उठाई और लिंग को बाहर निकालकर जवाब दिया,"इसकी खुशबू कामुकता के इत्र सामान है जिसके पास आने पर नींद में भी पता चल जाता है,कितना बड़ा और लचीला है.........आआऊउममहह्.......... ऊंऊउफफफ्........ ऊंऊउन्न्ननहहह्.........." कहकर उन्होंने फिर लंड को मुंह में भर लिया। उनके मुंह की दीवार, मुलायम जीभ,गले की गहराई से आती गर्मी और मुंह के अंदर का गीलापन सब कुछ मुझे महसूस हो रहा था,इसके चलते मेरे बदन में अलग सा नशा छाने लगा था। "आंटीईई........ओओअअहहह्..........Yeaahhhh.........आप क्या क़यामत ढा रही हो,किसी शायर की प्रेरणा से भी ऊपर,कामवात्सल्य से भरपूर, अप्सराओं से भी सुंदर औरत आज मेरे लिंग को मुंह में भरकर अपने प्यार से भिगो रही है........ आआअह्ह्हअअअह्ह्ह्..............Succkkkk It Deeperrrr.........Auntyyyyyy" मेरी बातों से जैसे आंटी का जिस्म ओर भी भड़क उठा हो,उन्होंने मेरे लंड को बाहर निकाला जो इस वक्त पूरे शबाब में तना हुआ था,जिससे उसकी लंबाई 10 इंच जितनी हो गई थी जो लंबाई आंटी के चेहरे से भी ज्यादा थी,उन्होंने उसे अपने गाल से चिपका लिया,"ऊंऊउन्न्ननहहह्........... इस फौलाद को छूकर मन तो करता है इसका हमेशा ऐसे ही स्वाद लेती रहूं, This Feeling is beyond the Heaven..........Aaahhhhahhh............ ऊंऊऊउपपपहहह्........." बोलते हुए उन्होंने लंड के सुपाड़े को अपने पूरे चेहरे पर घुमाया,उनके गाल,होठ,आंखों पर घूमते वक्त उसकी नर्माश मुझे महसूस हो रही थी,जब उन्होंने चेहरे से अलग किया तो उनके मुंह के थूक की चिकनेपन से तरंगें उठ गई,आंटी ने एक पल लाल हो चुके सुपाड़े को देखा जो किसी शोले सा तप रहा था,जिस पर वीर्य को एक बूंद छलक आई थी,"Give it to Me Babyyyy........... आआहाहाहहहअअअ्...........सुसऊंऊउउपप्...........ओओअअपपपप्...........ऊउमम्........ऊंऊउउममम्.........हांहाआआहहह्.........." आवाजें निकालते हुए उन्होनें लंड के अच्छे से चूसना शुरू कर दिया,वो उसे चूमती,मुंह में भरकर उस पर जीभ घुमाती और किसी लॉलीपॉप की तरह पूरे मुंह में भरने लगती,अब मेरे अंदर का लावा उमड़ने लगा था,"Noooo......Aunnttyyy.........I can't Control.......... आआअह्ह्हअअअह्ह्ह्........हहांआआहह्.......... ओओअअहहह्..........." कहकर मैने उनके बालों को पकड़कर धक्के के साथ लंड उनके गले तक उतारने लगा। कुछ देर बाद एक धार छुटी .........Sssspprruucchhh.........इसके साथ ही एक गाढ़ा रस से उनका मुंह भरने लगा पर इस बार कुछ अलग हुआ दो-तीन झटकों में बाहर आ जानेवाला वीर्य की मात्रा इस वक्त बहुत ज्यादा हो रही थी,जिससे Ssppraachhh...........Sspruuchhhh..........Ssccruuchhhh...........की आवाज के साथ मेरा रस बहते ही जा रहा था इसके साथ ही मैंने आंटी के सर को पकड़कर लंड को अंदर उतारते ही जा रहा था। .........ओओऊऊउह्ह्.......... ऊंऊउन्न्ननहहह्..........की दबी आवाज मेरे कानों मे पड़ी,मैं समझ गया था कि यह Situation Excessive Ejaculation की स्थिति थी जिसमें उत्तेजना हद से ज्यादा बढ़ जाने की वजह से काफी मात्रा में वीर्य निकलता है,ये सिलसिला करीब 1 मिनट तक चला उसके साथ ही........Gwwoouukkk..........Ghhoowwppp.........Ghhwaaakkk.........Awwookkkk......... जैसी आवाज कमरे में गूंज रही थी।मेरा माल इतना निकला था कि उसके साथ मैंने अपना लंड आंटी के गर्दन से नीचे धकेल दिया था,आज वीर्य से पूरा ग्लास भर जाता मेरा इतना माल निकला था। मैने धीरे से अपना लंड उनके मुंह से निकाला और उनका चेहरा देखा तो थूक, आंसू, पसीने से सन गया था,उनकी आँखें लाल हो गई थी जो उनके साथ हुई जबरदस्ती को बयां कर रही थी पर हैरानी की बात यह थी कि उनके चेहरे पर खुशी के भाव थे और उनके मुंह से थोड़ा ही वीर्य बाहर निकला था बाकी वो सारा अपने गले से नीचे उतार गई थी,वीर्य की वो बूंदे उनके मुंह से नीचे होकर गले को भिगोते हुए स्तनों में जाकर मिल रही थी,वो आंखों में एक चमक लिए मेरे चेहरे के पास आई,"मैने नहीं सोचा था कि मेरा बेटू इस तरह से मेरी पास बुझाएगा, इतने सालों में मुझे तुम्हारी तरह कोई संतुष्ट नहीं कर पाया,क्या गजब की ताकत दी है भगवान ने तुम्हे।" इतना कहकर वो मेरा लंड सहलाने लगी। उनकी बाते सुनकर मेरा दिल बैठा जा रहा था मैंने उनके साथ इतना बुरा सुलूक किया फिर भी वो सब कुछ भूलकर मेरे बारे में सोच रही थी यह सोचकर मैने उन्हें पकड़कर साइड पर लिटाया और उनके ऊपर चढ़कर उनके होठों पर टूट पड़ा। मैं अपनी एक किस में अपना सारा प्यार झोंक देना चाहता था इसलिए मैंने उनके चेहरे को ठुड्ढी से पकड़ रखा था ताकि उन्हें चूमने में आसानी हो,मुखरस के साथ वीर्य का गाढ़ा स्वाद भी मुझे महसूस हुआ, मैंने अपनी जीभ को उनके गले तक उतारने की कोशिश करने लगा जिससे हम दोनों का चेहरा एक हो गया था। दोनों की नाक आपस में जुड़ने की वजह से हम दोनों की सांस उसके अंदर जा रही थी,मुंह से बाहर निकलते थूक के साथ आंटी के चेहरा भीगने लगा था,मुख की ये क्रीड़ा खत्म करने मैं उनसे अलग हुआ तो उनकी गर्म सांसे मुझे महसूस हुई मैंने अपने मुंह के चिकनेपन को इक्कठा करके उनकी आँख,माथे और गालों पर थूका जिसे वो आंखे बंध करके सिर्फ मेहसूस करने लगी, मैंने अब जीभ की मदद से उसे पूरे चेहरे पर एक लेप की तरह लगा दिया और आखिर में उनकी पलकों पर एक किस किया तो उन्होंने अपनी आंखे खोल दी। उनके सामने मेरा वहीं भाव मग्न चेहरा था जिसमें एक ग्लानि भरी हुई थी,मेरे यह भाव उनकी आंखों से छिप न सके इसलिए उन्होंने मुख पर ममता भरी मुस्कान से साथ अपना हाथ मेरे चेहरे पर रख दिया,"बेटा तुमने जो किया उससे मैं बिलकुल भी नाराज़ नहीं हूं इसलिए खुदको दोष देना बंद करो" उनकी बात सुनकर मेरा दिल पसीज उठा।
"पर आंटी मैंने जो किया वो बदसलूखी थी,पहले मुझे आपसे पूछना चाहिए था फिर भी आप इतना बड़ा दिल रखके........." इतना बोलते ही मेरा दिल भर आया, मैंने रुचि के साथ भी यही व्यवहार किया था इसलिए मैंने अपनी नजरें घुमा ली और बेड पर अपने सर झुकाकर बैठ गया,मेरी बात सुनकर आंटी बैठ गई अपने घने बाल जो उनके स्तनों को धक रहे थे जिसे उन्होंने पीछे किए और नग्न कामिनी की तरह मेरे गोद में आकर बैठ गई जिससे उनकी गर्म चूत मेरे लंड को छूने लगी। उन्होंने मेरे चेहरे को अपने नर्म हाथों से पकड़कर ऊपर उठाया और मेरी आंखों में देखकर कहा,"ध्यान से सुनो बेटा तुम एक मर्द हो,ऊपरवाले ने तुम्हे जो तोहफ़ा दिया है उसकी कदर करो,आज के समय में कई नौजवान भी औरत के योनि की प्यास नहीं बुझा पाते पर तुम उन सबसे विपरीत हो।" उनकी आंखों में एक गहरापन साफ़ नजर आ रहा था। "तुम्हारे लिंग एक साथ कई औरतों की प्यास बुझाने में सक्षम हैं,ऊपर से तुम्हारे मूल स्वभाव में ही Dominance समाया है जो एक उग्र पुरुष की निशानी है जो तुम्हारे पुरुषत्व को सहवास के समय में काफी निखारता है,अगर तुम अपने Nature के विपरीत कार्य करोगे तो किसी को खुश नहीं रख पाओगे।" आंटी की कही हर एक बात मेरे मस्तिष्क में किसी शिलालेख के सामान छप गई थी। पूरे बदन में एक नई ऊर्जा दौड़ रही थी तभी वो मधुर स्वर फिर मेरे कानों में पड़े,"चरम सुख वो होता है जो दिल को तसल्ली से भरकर शारीरिक सुख की पूर्ति करता है और तुम्हारी वजह से मैंने ज़िंदगी में पहली बार उसकी सीमा को महसूस किया है, तुम्हारी यही Wildeness वीर्य स्खलन को सबसे ज्यादा उतेजित बनाती है.........हांहाआआअअहह्........." एक आह भरते हुए वो मेरे कानों को भिगोने लगी, मैंने दोनों हाथ उनकी गांड़ पर रखकर उसके छेद में 2-2 उंगलियां डाल दी जिससे उसकी चिपचिपाहट को मेहसूस कर सकूं।
"हहांआआहह्........आआहहहह्.........Yessss....... That's My Boyyyy........Dig it More.........." हम दोनों के जिस्म एक बार फिर तपने लगे थे जिसकी तपिश पहले से कई ज्यादा थी,एक फ़ौलादी बदन वाले मर्द की बाहों में एक कोमल सी औरत Beauty And Beast के समान लग रहे थे,ये दर्शाता था कि वो नाजुक जरूर थी पर प्यार में मिलते हर दर्द को सहने में वो सक्षम थी।कुछ पल बाद मैंने गांड़ से निकालकर दोनों उंगलियां नाक से मिलाकर उसकी खुशबू अपने अंदर उतारने लगा,उसके बाद मुंह में घोलकर उसका नमकीन स्वाद लेने लगा। मेरी यह हरकत देख आंटी ने अपने नीचे भाग को ऊपर किया और मेरे लंड के ऊपर रख दिया,मेरे लंड के टोपे को छूते ही पानी की एक धार छुटी जिसने मेरे लंड को पूरा भिगो दिया,आंटी ने टोपे को अपनी चूत में उतारकर मेरी प्रतिक्रिया का इंतजार करने लगी, मैंने एक हाथ उनकी कमर पर लपेटा और दूसरे हाथ से उनके बालों को खींचकर कहा,"Get Ready to Endure Pain, मैं आपके चूत की गहराई तक जानेवाला हूँ जिसे आपने पहले कभी नहीं महसूस किया होगा।" मेरी बात सुनकर एक पल लिए आंटी की सांस थम गई और दूसरे ही पल बदन में दर्द की ऐसी लहर उठी जैसे किसी ने उनके शरीर को बीच से चीर दिया हो.........Ttttthwwwooooppppp...........Frrrraaaccchhhh........Frriiiccchhh...........एक ही झटके में पूरा लंड आंटी की चूत के द्वार को चीरते हुए पूरा अंदर घुस गया था, यहां तक तो ठीक था पर लंड की मोटाई की वजह से उसने Cervix (ग्रीवा - स्त्री की चूत और बच्चेदानी के बीच की दीवार) को चीरते हुए सीधे गर्भाशय की दीवार से जा टकराया, "आआआआहाहांहाहाआआआआहाहाहहह्..............ऊंऊउन्न्न्ननननह्ह्ह्ह्हअअअ्..............Noooooohhhhh............This is Terrible........... ओओओअअअअअहहह्.................Saavvveee Meeeaahhhh................Ooouuuhhh Fuuckkkkk.............." आंटी पूरे जोर से चीखी और ये चीख इतनी तेज़ थी कि मेरे कान सुन्न पड़ गए। मैंने बाल खिंचकर उनका चेहरा मेरे सामने किया,जो दर्द से पूरा थरथरा रहा था,उनकी आँखोंने पानी बहाकर उसे लाल कर दिया था, चेहरे पर आती कुछ जुल्फे जो पसीने से उनके चेहरे पर चिपक गई थी, सांसे इतनी तेज हो गई थी जिसे संभालने के लिए उन्होंने मुंह खोल दिया था,उन्होंने अटकते हुए अपनी बात कही,"This behaviour is too Harsh, मैंने इतना ज्यादा Expect नहीं किया था......I request You.......Plzzz थोड़ा प्यार से करो।" उनकी बात सुनकर मैंने जीभ बाहर निकालकर गाल को थूक से गिला किया और एक जोर से थप्पड़ जड़ दिया। "तुम्ही ने मेरे अंदर के इस जानवर को जगाया है,तुम्हे एक Dominance से भरा Alpha Male चाहिए था जो तुम्हारे सामने हाजिर है,अब ये हवसी भेड़िए को भूख लगी है जो तुम्हारे बदन को नोच-नोचकर खाएगा।"
"पर मैं तो........ ऊंऊउन्न्नममहह्.......ऊंऊउहहह्........ ऊउउममममहहह्............." मैंने अपने होठों से उनके मुंह पर ताला लगा दिया जो सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए था,उसी वक्त मैंने आंटी की चूत से अपना लंड टोपे तक बाहर निकाला...........Khhooaawwacchhh.........Fiiissshhhh.........Tapp......Tappp.......Taaapppp........ की आवाज के साथ खून की एक तेज धार बाहर निकली और उसके साथ ही खून की बूंदे दोबारा उस बेडशीट को भिगोने लगी। मैंने आंटी के मुंह को आजाद किया तो वो एक आस से मेरी ओर देख रही थी,"मुझे अब सिर्फ आपकी मदद की गुहार और बिलखती हुई चीखे सुननी है" इतना बोलकर फिर पूरा लंड धंसधंसते हुए अंदर जाकर दीवार से टकराया।
Fwwooaaachhhh...............आआहहहअअअ्............. Fwwoooakkkkk............ आआआहाहाहा.......हाहाहाआआआ........हहहहहअअ्............ Fwwooopppp.............ओओओअअअअहहह्.............Fwwuucckkkkk.............ऊंऊउन्न्न्ननहनहहह्...............Taapp.......Taappp......Taappp.......... की आवाज के साथ मैं उनकी चूत में दनादन धक्के मार रहा था। पानी के साथ वीर्य और खून बूंदों में मिलकर आसपास उड़ रहा था,दर्द से उन्होंने अपने होठ भींच लिए थे और मेरे गले से लिपटकर उसे सहने की कोशिश कर रही थी। बढ़ती रफ़्तार के साथ उनकी दर्दभरी आवाजें सिसकियों में बदलने लगी थी,"ऊंऊउहहह्.........Aahhhh.....Yeaahhhh.......... तुम्हारे लंड में मेरी फुद्दी को फाड़ के रख दिया........Eeeaaahhhhh.........Mmmmm" "तुम्हारे बदन का हर एक उभार कितना मुलायम और मादक है पता नहीं रोज कितने लोग तुम्हे अपने सपनों में चोदते होंगे?"
"उन्हीं सबकी हवस से भरी नजरों का ही तो जादू है जो मेरा बदन समय के साथ निखरता गया और देखो आज इसी के बदौलत आज एक बेटा अपनी मां को नंगी करके बेरहमी से चोद रहा है........Aahhhh Right There..........Yesss You Made me CUMMM..........." "घर में ही ऐसी ग़दराई महिला को कौन छोड़ सकता है इसीलिए देखो आज तुम्हे चोदकर मैं भी मादरचोद बन गया?"
"हांहाहाआआखहह्...........तुम मादरचोद हो पर मेरी विडंबना तो देखो मैं भी वैश्या से गई गुजरी हूं जो अपने बेटे से बेशर्मों की तरह चुद रही हूं...........आआहुहूऊंऊउन्न्नहहहह्..........पता नहीं पर ये चीज इतना मज़ा क्यों दे रही है? हर बार तुम्हरा स्पर्श अलग ही चरम सीमा तक पहुंचा देता है.........Yaaa......Yeeaa........Yeeaahhhh......... I'm about to Explode.........Oouuuuhhhhhh........." बोलते हुए वो पीछे की तरफ झुक गई, मैंने भी अब उनके दोनों जांघो को पकड़ा और चूत का द्वार सीधा होने की वजह से धक्के उनके पेट में मेहसूस हो रहे थे।
"आंटी मेरा भी छूटने वाला है,आपके चूत की गर्म आज मेरे लंड को पिघला कर रहेगी।" मेरी बात सुनकर आंटी ने अपने बाल पकड़कर खींच दिए
"ओओओहोहोहहहअअअ्...........इस उत्तेजना से मैं पागल हो जाऊंगी.......... तुम्हारा इतना बड़ा लौड़ा..........हांहाहाआअ्.........हांहहाहाआआहह्............हांहाहहहाओ़ओओऊंउन्ननहहहहअअअअ्........... मुझे चाहिए........Yeasss.........Yeeaahhsss.........मुझे पूरा भर दो।" दोनों तरफ से हम दोनों के बदन अकड़े और हमारे शरीर का वो सारा रस फटते हुए बाहर आ गया..........Ssspraaschhhhh............Sccrrriiiieeechhhhh............... कुदरत के दो तत्वों का समागम हुआ और दोनों के घटक रस छुटकर आंटी की योनि में घुलने लगे, मैंने उनके दोनों पैरों को फैलाकर अपने होठों से उस वीर्य को पीने लगा। .........हहांआआहह्.........हहअअहह्.........मेरा बच्चा पीले इसे.........हहऊंऊउहहह्..........सब लोग भ्रम में जीते है क्योंकि इंसान की हर खुशियों का रास्ता हो उसके लिंग से ही जुड़ा होता है,यही है तो हमे इस धरती पर स्वर्ग का एहसास कराता है।" आंटी के यह शब्द मेरे कान में पड़े फिर चारों ओर खामोशी छा गई। मैंने ऊपर से ही वीर्य को पीकर साफ कर दिया पर अभी भी मुझे उनकी गांड़ की मादकता महसूस करनी थी इसलिए मैंने उनके पीछे घुमा दिया पर तभी उन्होंने मुझे रोकते हुए कहा,"रुको बेटा पहले मैं Vibrator निकाल लूं जिससे तुम्हे कोई परेशानी ना हो" यह कहकर उन्होंने छेद के पास हाथ घुमाया पर उनके हाथ में कुछ महसूस नहीं हुआ इसलिए वो बेड पर टांगे फैलाकर देखने लगी पर उन्हें कुछ दिखाई नहीं दिया इसीलिए उनका चेहरा परेशानी से घिरने लगा। उनके चेहरे के ये भाव पढ़ते हुए मैंने उनसे पूछा," आंटी क्या हुआ आप चिंतित लग रही है।" पर मेरी बातों का जवाब दिए बिना उन्होंने Vibrator का Remote लेकर ऑन किया, Vibrator On होते ही उन्हें अपने पेट तक उसकी Vibration महसूस हुई।
"बेटा यह Egg Vibrator को बाहर निकालने के लिए उसकी Pulling Rope होती है जिससे हम उसे खींचकर निकाल सके पर तुम्हारे साथ चुदाई में इतनी खो गई कि मुझे इसका ध्यान ही नहीं रहा।" इतना कहकर वो तनाव ग्रस्त चेहरा लिए बैठ गई, मैंने कुछ पल तक सोचा और इसके चेहरे को थामते हुए कहा,"मेरे पास एक रास्ता है शायद उससे काम बन जाए।" मेरी बात सुनते ही वो आशा भरी नजरों से मेरी ओर देखने लगी।
अभी के लिए सिर्फ इतना ही Guys,कहानी आगे के अपडेट्स में जारी रहेगी तब तक नीचे Comment करके अपनी राए देना ना भूलें,जल्द ही मिलेंगे एक ओर गर्मा गरम अपडेट के साथ......Stay Tuned
जैसे तूफान के बाद चारों तरफ शांति छा जाती है इस तरह हमारे जिस्मों के अंदर का तूफान भी इस वक्त थमा हुआ था आंटी इस वक्त आंखें बंद करके निढ़ाल होकर मेरे बगल में लेटी हुई थी। Bath Oli से सने उनके बदन पर पसीने की बूंदे मिलकर उनके कामिनी देह को उग्रता प्रदान कर रही थी,उनका पूरा बदन इस वक्त किसी नागीन के देह समान चमक रहा था, जिसकी मधुमता का एहसास करने के लिए मैने पीछे से अपनी बाहों में लिया हुआ था,उनकी गांड़ के हुड़दंग मचाने के बाद मेरा लंड उन्ही दो मांसल कूल्हों के बीच दबा हुआ था जिस पर अभी भी आंटी के योनि का रस और वीर्य लगा हुआ था। सहवास को इस आक्रामकता और दीर्घ पलों के बाद भोगने की वजह से उनका शरीर पूरी तरह थक चुका था और जिस तरह विशाल ने उनको रौंदा था उसकी वजह से उनका पूरा बदन टूट रहा था,उसके साथ ही वो आंखे बंध किए लंबी सांसे ले रही थी।आंटी थोड़ी थक जरूर गई थी किन्तु हम दोनों के अंदर की प्राणयाग्नि अभी भी भड़क रही थी जो कोमल बदन के स्पर्श से बढ़ती जा रही थी।कुछ देर लेटे रहने के बाद मैं बेड से उठा और उनके चेहरे के पास बैठ गया,मुख पर काली पलकों के साथ मिलकर सजे वो नैन उनके चेहरे को कितना सुंदर बना रहे थे,उसके साथ ही अधरो की गुलाबी जोड़ जिसका रसपान किसी शहद से कम नहीं था। मैंने उनके गाल पर हाथ रखा और पास ही टेबल पर पड़ी पानी की बोतल लेने ही लिए आगे झुका जिससे नग्न अवस्था में होने की वजह से मेरा लंड उनके मुलायम गालों पर टिक गया,वीर्य निकलने के बाद भी मेरा लंड अभी भी 4 इंच जितना लंबा था, जिस्म की गर्मी और वीर्य की वीर्य की सुवास आंटी की नाक में पड़ते ही उनकी आँखें खुल गई और अपने मुंह को खोलकर उसे अंदर भर लिया। एक गर्म सा एहसास महसूस होते ही मैने देखा तो दो गुलाबी होठ मेरे लंड को अपने मुंह में लिए उसे अपने मुखरस से भिगो रहे थे। "आआहहहअअ्......... आंटी आप कब जाग गई? मुझे लगा आप सो रही है।" मेरी बात सुनकर उन्होंने लंड चूसते हुए अपनी नजरे ऊपर उठाई और लिंग को बाहर निकालकर जवाब दिया,"इसकी खुशबू कामुकता के इत्र सामान है जिसके पास आने पर नींद में भी पता चल जाता है,कितना बड़ा और लचीला है.........आआऊउममहह्.......... ऊंऊउफफफ्........ ऊंऊउन्न्ननहहह्.........." कहकर उन्होंने फिर लंड को मुंह में भर लिया। उनके मुंह की दीवार, मुलायम जीभ,गले की गहराई से आती गर्मी और मुंह के अंदर का गीलापन सब कुछ मुझे महसूस हो रहा था,इसके चलते मेरे बदन में अलग सा नशा छाने लगा था।
"आंटीईई........ओओअअहहह्..........Yeaahhhh.........आप क्या क़यामत ढा रही हो,किसी शायर की प्रेरणा से भी ऊपर,कामवात्सल्य से भरपूर, अप्सराओं से भी सुंदर औरत आज मेरे लिंग को मुंह में भरकर अपने प्यार से भिगो रही है........ आआअह्ह्हअअअह्ह्ह्..............Succkkkk It Deeperrrr.........Auntyyyyyy" मेरी बातों से जैसे आंटी का जिस्म ओर भी भड़क उठा हो,उन्होंने मेरे लंड को बाहर निकाला जो इस वक्त पूरे शबाब में तना हुआ था,जिससे उसकी लंबाई 10 इंच जितनी हो गई थी जो लंबाई आंटी के चेहरे से भी ज्यादा थी,उन्होंने उसे अपने गाल से चिपका लिया,"ऊंऊउन्न्ननहहह्........... इस फौलाद को छूकर मन तो करता है इसका हमेशा ऐसे ही स्वाद लेती रहूं, This Feeling is beyond the Heaven..........Aaahhhhahhh............ ऊंऊऊउपपपहहह्........." बोलते हुए उन्होंने लंड के सुपाड़े को अपने पूरे चेहरे पर घुमाया,उनके गाल,होठ,आंखों पर घूमते वक्त उसकी नर्माश मुझे महसूस हो रही थी,जब उन्होंने चेहरे से अलग किया तो उनके मुंह के थूक की चिकनेपन से तरंगें उठ गई,आंटी ने एक पल लाल हो चुके सुपाड़े को देखा जो किसी शोले सा तप रहा था,जिस पर वीर्य को एक बूंद छलक आई थी,"Give it to Me Babyyyy........... आआहाहाहहहअअअ्...........सुसऊंऊउउपप्...........ओओअअपपपप्...........ऊउमम्........ऊंऊउउममम्.........हांहाआआहहह्.........." आवाजें निकालते हुए उन्होनें लंड के अच्छे से चूसना शुरू कर दिया,वो उसे चूमती,मुंह में भरकर उस पर जीभ घुमाती और किसी लॉलीपॉप की तरह पूरे मुंह में भरने लगती,अब मेरे अंदर का लावा उमड़ने लगा था,"Noooo......Aunnttyyy.........I can't Control.......... आआअह्ह्हअअअह्ह्ह्........हहांआआहह्.......... ओओअअहहह्..........." कहकर मैने उनके बालों को पकड़कर धक्के के साथ लंड उनके गले तक उतारने लगा। कुछ देर बाद एक धार छुटी .........Sssspprruucchhh.........इसके साथ ही एक गाढ़ा रस से उनका मुंह भरने लगा पर इस बार कुछ अलग हुआ दो-तीन झटकों में बाहर आ जानेवाला वीर्य की मात्रा इस वक्त बहुत ज्यादा हो रही थी,जिससे Ssppraachhh...........Sspruuchhhh..........Ssccruuchhhh...........की आवाज के साथ मेरा रस बहते ही जा रहा था इसके साथ ही मैंने आंटी के सर को पकड़कर लंड को अंदर उतारते ही जा रहा था। .........ओओऊऊउह्ह्.......... ऊंऊउन्न्ननहहह्..........की दबी आवाज मेरे कानों मे पड़ी,मैं समझ गया था कि यह Situation Excessive Ejaculation की स्थिति थी जिसमें उत्तेजना हद से ज्यादा बढ़ जाने की वजह से काफी मात्रा में वीर्य निकलता है,ये सिलसिला करीब 1 मिनट तक चला उसके साथ ही........Gwwoouukkk..........Ghhoowwppp.........Ghhwaaakkk.........Awwookkkk......... जैसी आवाज कमरे में गूंज रही थी।मेरा माल इतना निकला था कि उसके साथ मैंने अपना लंड आंटी के गर्दन से नीचे धकेल दिया था,आज वीर्य से पूरा ग्लास भर जाता मेरा इतना माल निकला था। मैने धीरे से अपना लंड उनके मुंह से निकाला और उनका चेहरा देखा तो थूक, आंसू, पसीने से सन गया था,उनकी आँखें लाल हो गई थी जो उनके साथ हुई जबरदस्ती को बयां कर रही थी पर हैरानी की बात यह थी कि उनके चेहरे पर खुशी के भाव थे और उनके मुंह से थोड़ा ही वीर्य बाहर निकला था बाकी वो सारा अपने गले से नीचे उतार गई थी,वीर्य की वो बूंदे उनके मुंह से नीचे होकर गले को भिगोते हुए स्तनों में जाकर मिल रही थी,वो आंखों में एक चमक लिए मेरे चेहरे के पास आई,"मैने नहीं सोचा था कि मेरा बेटू इस तरह से मेरी पास बुझाएगा, इतने सालों में मुझे तुम्हारी तरह कोई संतुष्ट नहीं कर पाया,क्या गजब की ताकत दी है भगवान ने तुम्हे।" इतना कहकर वो मेरा लंड सहलाने लगी। उनकी बाते सुनकर मेरा दिल बैठा जा रहा था मैंने उनके साथ इतना बुरा सुलूक किया फिर भी वो सब कुछ भूलकर मेरे बारे में सोच रही थी यह सोचकर मैने उन्हें पकड़कर साइड पर लिटाया और उनके ऊपर चढ़कर उनके होठों पर टूट पड़ा। मैं अपनी एक किस में अपना सारा प्यार झोंक देना चाहता था इसलिए मैंने उनके चेहरे को ठुड्ढी से पकड़ रखा था ताकि उन्हें चूमने में आसानी हो,मुखरस के साथ वीर्य का गाढ़ा स्वाद भी मुझे महसूस हुआ, मैंने अपनी जीभ को उनके गले तक उतारने की कोशिश करने लगा जिससे हम दोनों का चेहरा एक हो गया था। दोनों की नाक आपस में जुड़ने की वजह से हम दोनों की सांस उसके अंदर जा रही थी,मुंह से बाहर निकलते थूक के साथ आंटी के चेहरा भीगने लगा था,मुख की ये क्रीड़ा खत्म करने मैं उनसे अलग हुआ तो उनकी गर्म सांसे मुझे महसूस हुई मैंने अपने मुंह के चिकनेपन को इक्कठा करके उनकी आँख,माथे और गालों पर थूका जिसे वो आंखे बंध करके सिर्फ मेहसूस करने लगी, मैंने अब जीभ की मदद से उसे पूरे चेहरे पर एक लेप की तरह लगा दिया और आखिर में उनकी पलकों पर एक किस किया तो उन्होंने अपनी आंखे खोल दी। उनके सामने मेरा वहीं भाव मग्न चेहरा था जिसमें एक ग्लानि भरी हुई थी,मेरे यह भाव उनकी आंखों से छिप न सके इसलिए उन्होंने मुख पर ममता भरी मुस्कान से साथ अपना हाथ मेरे चेहरे पर रख दिया,"बेटा तुमने जो किया उससे मैं बिलकुल भी नाराज़ नहीं हूं इसलिए खुदको दोष देना बंद करो" उनकी बात सुनकर मेरा दिल पसीज उठा।
"पर आंटी मैंने जो किया वो बदसलूखी थी,पहले मुझे आपसे पूछना चाहिए था फिर भी आप इतना बड़ा दिल रखके........." इतना बोलते ही मेरा दिल भर आया, मैंने रुचि के साथ भी यही व्यवहार किया था इसलिए मैंने अपनी नजरें घुमा ली और बेड पर अपने सर झुकाकर बैठ गया,मेरी बात सुनकर आंटी बैठ गई अपने घने बाल जो उनके स्तनों को धक रहे थे जिसे उन्होंने पीछे किए और नग्न कामिनी की तरह मेरे गोद में आकर बैठ गई जिससे उनकी गर्म चूत मेरे लंड को छूने लगी। उन्होंने मेरे चेहरे को अपने नर्म हाथों से पकड़कर ऊपर उठाया और मेरी आंखों में देखकर कहा,"ध्यान से सुनो बेटा तुम एक मर्द हो,ऊपरवाले ने तुम्हे जो तोहफ़ा दिया है उसकी कदर करो,आज के समय में कई नौजवान भी औरत के योनि की प्यास नहीं बुझा पाते पर तुम उन सबसे विपरीत हो।" उनकी आंखों में एक गहरापन साफ़ नजर आ रहा था। "तुम्हारे लिंग एक साथ कई औरतों की प्यास बुझाने में सक्षम हैं,ऊपर से तुम्हारे मूल स्वभाव में ही Dominance समाया है जो एक उग्र पुरुष की निशानी है जो तुम्हारे पुरुषत्व को सहवास के समय में काफी निखारता है,अगर तुम अपने Nature के विपरीत कार्य करोगे तो किसी को खुश नहीं रख पाओगे।" आंटी की कही हर एक बात मेरे मस्तिष्क में किसी शिलालेख के सामान छप गई थी। पूरे बदन में एक नई ऊर्जा दौड़ रही थी तभी वो मधुर स्वर फिर मेरे कानों में पड़े,"चरम सुख वो होता है जो दिल को तसल्ली से भरकर शारीरिक सुख की पूर्ति करता है और तुम्हारी वजह से मैंने ज़िंदगी में पहली बार उसकी सीमा को महसूस किया है, तुम्हारी यही Wildeness वीर्य स्खलन को सबसे ज्यादा उतेजित बनाती है.........हांहाआआअअहह्........." एक आह भरते हुए वो मेरे कानों को भिगोने लगी, मैंने दोनों हाथ उनकी गांड़ पर रखकर उसके छेद में 2-2 उंगलियां डाल दी जिससे उसकी चिपचिपाहट को मेहसूस कर सकूं।
"हहांआआहह्........आआहहहह्.........Yessss....... That's My Boyyyy........Dig it More.........." हम दोनों के जिस्म एक बार फिर तपने लगे थे जिसकी तपिश पहले से कई ज्यादा थी,एक फ़ौलादी बदन वाले मर्द की बाहों में एक कोमल सी औरत Beauty And Beast के समान लग रहे थे,ये दर्शाता था कि वो नाजुक जरूर थी पर प्यार में मिलते हर दर्द को सहने में वो सक्षम थी।कुछ पल बाद मैंने गांड़ से निकालकर दोनों उंगलियां नाक से मिलाकर उसकी खुशबू अपने अंदर उतारने लगा,उसके बाद मुंह में घोलकर उसका नमकीन स्वाद लेने लगा। मेरी यह हरकत देख आंटी ने अपने नीचे भाग को ऊपर किया और मेरे लंड के ऊपर रख दिया,मेरे लंड के टोपे को छूते ही पानी की एक धार छुटी जिसने मेरे लंड को पूरा भिगो दिया,आंटी ने टोपे को अपनी चूत में उतारकर मेरी प्रतिक्रिया का इंतजार करने लगी, मैंने एक हाथ उनकी कमर पर लपेटा और दूसरे हाथ से उनके बालों को खींचकर कहा,"Get Ready to Endure Pain, मैं आपके चूत की गहराई तक जानेवाला हूँ जिसे आपने पहले कभी नहीं महसूस किया होगा।" मेरी बात सुनकर एक पल लिए आंटी की सांस थम गई और दूसरे ही पल बदन में दर्द की ऐसी लहर उठी जैसे किसी ने उनके शरीर को बीच से चीर दिया हो.........Ttttthwwwooooppppp...........Frrrraaaccchhhh........Frriiiccchhh...........एक ही झटके में पूरा लंड आंटी की चूत के द्वार को चीरते हुए पूरा अंदर घुस गया था, यहां तक तो ठीक था पर लंड की मोटाई की वजह से उसने Cervix (ग्रीवा - स्त्री की चूत और बच्चेदानी के बीच की दीवार) को चीरते हुए सीधे गर्भाशय की दीवार से जा टकराया, "आआआआहाहांहाहाआआआआहाहाहहह्..............ऊंऊउन्न्न्ननननह्ह्ह्ह्हअअअ्..............Noooooohhhhh............This is Terrible........... ओओओअअअअअहहह्.................Saavvveee Meeeaahhhh................Ooouuuhhh Fuuckkkkk.............." आंटी पूरे जोर से चीखी और ये चीख इतनी तेज़ थी कि मेरे कान सुन्न पड़ गए। मैंने बाल खिंचकर उनका चेहरा मेरे सामने किया,जो दर्द से पूरा थरथरा रहा था,उनकी आँखोंने पानी बहाकर उसे लाल कर दिया था, चेहरे पर आती कुछ जुल्फे जो पसीने से उनके चेहरे पर चिपक गई थी, सांसे इतनी तेज हो गई थी जिसे संभालने के लिए उन्होंने मुंह खोल दिया था,उन्होंने अटकते हुए अपनी बात कही,"This behaviour is too Harsh, मैंने इतना ज्यादा Expect नहीं किया था......I request You.......Plzzz थोड़ा प्यार से करो।" उनकी बात सुनकर मैंने जीभ बाहर निकालकर गाल को थूक से गिला किया और एक जोर से थप्पड़ जड़ दिया। "तुम्ही ने मेरे अंदर के इस जानवर को जगाया है,तुम्हे एक Dominance से भरा Alpha Male चाहिए था जो तुम्हारे सामने हाजिर है,अब ये हवसी भेड़िए को भूख लगी है जो तुम्हारे बदन को नोच-नोचकर खाएगा।"
"पर मैं तो........ ऊंऊउन्न्नममहह्.......ऊंऊउहहह्........ ऊउउममममहहह्............." मैंने अपने होठों से उनके मुंह पर ताला लगा दिया जो सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए था,उसी वक्त मैंने आंटी की चूत से अपना लंड टोपे तक बाहर निकाला...........Khhooaawwacchhh.........Fiiissshhhh.........Tapp......Tappp.......Taaapppp........ की आवाज के साथ खून की एक तेज धार बाहर निकली और उसके साथ ही खून की बूंदे दोबारा उस बेडशीट को भिगोने लगी। मैंने आंटी के मुंह को आजाद किया तो वो एक आस से मेरी ओर देख रही थी,"मुझे अब सिर्फ आपकी मदद की गुहार और बिलखती हुई चीखे सुननी है" इतना बोलकर फिर पूरा लंड धंसधंसते हुए अंदर जाकर दीवार से टकराया।
Fwwooaaachhhh...............आआहहहअअअ्............. Fwwoooakkkkk............ आआआहाहाहा.......हाहाहाआआआ........हहहहहअअ्............ Fwwooopppp.............ओओओअअअअहहह्.............Fwwuucckkkkk.............ऊंऊउन्न्न्ननहनहहह्...............Taapp.......Taappp......Taappp.......... की आवाज के साथ मैं उनकी चूत में दनादन धक्के मार रहा था। पानी के साथ वीर्य और खून बूंदों में मिलकर आसपास उड़ रहा था,दर्द से उन्होंने अपने होठ भींच लिए थे और मेरे गले से लिपटकर उसे सहने की कोशिश कर रही थी। बढ़ती रफ़्तार के साथ उनकी दर्दभरी आवाजें सिसकियों में बदलने लगी थी,"ऊंऊउहहह्.........Aahhhh.....Yeaahhhh.......... तुम्हारे लंड में मेरी फुद्दी को फाड़ के रख दिया........Eeeaaahhhhh.........Mmmmm" "तुम्हारे बदन का हर एक उभार कितना मुलायम और मादक है पता नहीं रोज कितने लोग तुम्हे अपने सपनों में चोदते होंगे?"
"उन्हीं सबकी हवस से भरी नजरों का ही तो जादू है जो मेरा बदन समय के साथ निखरता गया और देखो आज इसी के बदौलत आज एक बेटा अपनी मां को नंगी करके बेरहमी से चोद रहा है........Aahhhh Right There..........Yesss You Made me CUMMM..........." "घर में ही ऐसी ग़दराई महिला को कौन छोड़ सकता है इसीलिए देखो आज तुम्हे चोदकर मैं भी मादरचोद बन गया?"
"हांहाहाआआखहह्...........तुम मादरचोद हो पर मेरी विडंबना तो देखो मैं भी वैश्या से गई गुजरी हूं जो अपने बेटे से बेशर्मों की तरह चुद रही हूं...........आआहुहूऊंऊउन्न्नहहहह्..........पता नहीं पर ये चीज इतना मज़ा क्यों दे रही है? हर बार तुम्हरा स्पर्श अलग ही चरम सीमा तक पहुंचा देता है.........Yaaa......Yeeaa........Yeeaahhhh......... I'm about to Explode.........Oouuuuhhhhhh........." बोलते हुए वो पीछे की तरफ झुक गई, मैंने भी अब उनके दोनों जांघो को पकड़ा और चूत का द्वार सीधा होने की वजह से धक्के उनके पेट में मेहसूस हो रहे थे।
"आंटी मेरा भी छूटने वाला है,आपके चूत की गर्म आज मेरे लंड को पिघला कर रहेगी।" मेरी बात सुनकर आंटी ने अपने बाल पकड़कर खींच दिए
"ओओओहोहोहहहअअअ्...........इस उत्तेजना से मैं पागल हो जाऊंगी.......... तुम्हारा इतना बड़ा लौड़ा..........हांहाहाआअ्.........हांहहाहाआआहह्............हांहाहहहाओ़ओओऊंउन्ननहहहहअअअअ्........... मुझे चाहिए........Yeasss.........Yeeaahhsss.........मुझे पूरा भर दो।" दोनों तरफ से हम दोनों के बदन अकड़े और हमारे शरीर का वो सारा रस फटते हुए बाहर आ गया..........Ssspraaschhhhh............Sccrrriiiieeechhhhh............... कुदरत के दो तत्वों का समागम हुआ और दोनों के घटक रस छुटकर आंटी की योनि में घुलने लगे, मैंने उनके दोनों पैरों को फैलाकर अपने होठों से उस वीर्य को पीने लगा। .........हहांआआहह्.........हहअअहह्.........मेरा बच्चा पीले इसे.........हहऊंऊउहहह्..........सब लोग भ्रम में जीते है क्योंकि इंसान की हर खुशियों का रास्ता हो उसके लिंग से ही जुड़ा होता है,यही है तो हमे इस धरती पर स्वर्ग का एहसास कराता है।" आंटी के यह शब्द मेरे कान में पड़े फिर चारों ओर खामोशी छा गई। मैंने ऊपर से ही वीर्य को पीकर साफ कर दिया पर अभी भी मुझे उनकी गांड़ की मादकता महसूस करनी थी इसलिए मैंने उनके पीछे घुमा दिया पर तभी उन्होंने मुझे रोकते हुए कहा,"रुको बेटा पहले मैं Vibrator निकाल लूं जिससे तुम्हे कोई परेशानी ना हो" यह कहकर उन्होंने छेद के पास हाथ घुमाया पर उनके हाथ में कुछ महसूस नहीं हुआ इसलिए वो बेड पर टांगे फैलाकर देखने लगी पर उन्हें कुछ दिखाई नहीं दिया इसीलिए उनका चेहरा परेशानी से घिरने लगा। उनके चेहरे के ये भाव पढ़ते हुए मैंने उनसे पूछा," आंटी क्या हुआ आप चिंतित लग रही है।" पर मेरी बातों का जवाब दिए बिना उन्होंने Vibrator का Remote लेकर ऑन किया, Vibrator On होते ही उन्हें अपने पेट तक उसकी Vibration महसूस हुई।
"बेटा यह Egg Vibrator को बाहर निकालने के लिए उसकी Pulling Rope होती है जिससे हम उसे खींचकर निकाल सके पर तुम्हारे साथ चुदाई में इतनी खो गई कि मुझे इसका ध्यान ही नहीं रहा।" इतना कहकर वो तनाव ग्रस्त चेहरा लिए बैठ गई, मैंने कुछ पल तक सोचा और इसके चेहरे को थामते हुए कहा,"मेरे पास एक रास्ता है शायद उससे काम बन जाए।" मेरी बात सुनते ही वो आशा भरी नजरों से मेरी ओर देखने लगी।
अभी के लिए सिर्फ इतना ही Guys,कहानी आगे के अपडेट्स में जारी रहेगी तब तक नीचे Comment करके अपनी राए देना ना भूलें,जल्द ही मिलेंगे एक ओर गर्मा गरम अपडेट के साथ......Stay Tuned
काफी दिनों बाद अपडेट लेकर आया हूं इसलिए एक के बाद तुरंत दूसरा अपडेट दे रहा हूँ,जिन लोगों ने अभी तक अपना प्यार दिखाया उनके लिए मैं ये लिख रहा हूँ तो आगे भी अपना साथ ऐसे ही बनाएं रखना और अपने इस ठंड में कम्बल में घुसकर अपने लंड को रगड़ते हुए इसका मज़ा लीजिए।
Sunday Special अपडेट - 22
विशाल उनका सर थामे बैठा हुआ था पर दर्द की वजह से उनकी आँखें बंद थी,कुछ पल बाद जब दर्द कम हुआ तो उन्होंने अपनी आंखे खोली तो मुझे उनके पास बैठा हुआ पाया,जिससे उनके चेहरे पर डर,लज्जा,ग्लानि और हल्के गुस्से के भाव उभार आए,उन्होंने अपने हाथों से मुझे दूर करने का प्रयास करने लगी पर नीचे लेते होने की वजह से वो ठीक से खड़े नहीं हो सकती थी,"विशाल तुम मुझे इस तरह से......" कहते हुए उन्होंने अपना चेहरा घुमा लिया और एक हाथ से अपने सीने को ढंकने लगी जो तेज सांसों के चलते ऊपर नीचे हो रहा था,"तुम मुझे छोड़ो और इसी वक्त कमरे से बाहर चले जाओ" उन्होंने गुस्से के साथ कहा और मेरा हाथ छोड़कर खड़े होने का प्रयास जाने लगी,"पर आंटी?!! आपकी कमर......." उन्होंने मेरी बात को बीच में रोकते हुए कहा,"मुझे कुछ नहीं हुआ है पर तुम्हे मुझे इस हालत में नहीं देखना चाहिए" उनकी आवाज में अभी भी बेरुखी साफ झलक रही थी।
वो उठते हुए खड़े होने की कोशिश करने लगी पर जैसे ही वो कमर के हिस्से को सीधा करते हुए खड़ी हुई तभी दर्द की एक तेज लहर उनके पूरे बदन में फैल गई जिसकी वजह से उनके मुंह से चीख निकल गई 'आआआआहहहहअअ्.........' और इस दर्द की वजह से वो फिर आगे गिरने वाली थी पर तभी उन हाथों ने उसे थाम लिया, वेदिका सांसे संभालते हुए दर्द को सहने की कोशिश कर रही थी,जैसे ही उसकी नजर अपने पास खड़े उस नौजवान पर गई जो अपने चेहरे पर गंभीर भाव लिए उसकी आँखें में ही देख रहा था तभी वेदिका का ध्यान गया तो पता चला कि उसे गिरने से बचाते वक्त जल्दबाजी में विशाल का एक हाथ उसके कंधे को थामे हुए था और दूसरा हाथ उसके बाएं तरफ के स्तन को गिरफ्त में लिए खड़ा था। जिस पर उसके रूक्ष हाथों का स्पर्श महसूस हो रहा था पर इस बार वेदिका ने कुछ नहीं कहा जैसे वो उस पर चिल्ला कर उसका दिल नहीं दुखाना चाहती थी किन्तु इस स्पर्श ने उसके दिल की धड़कनों को बढ़ाने का काम कर दिया था जिसे विशाल अपने हाथ पर साफ महसूस कर सकता था, मैंने कंधे से दूसरा हाथ हटाया और वेदिका की गांड के थोड़ा ऊपर रखकर छाती पर दबाव बनाते हुए उसे सीधा खड़ा कर दिया। इस बीच स्तनों पर दबाव बढ़ने को वजह से उसके निपल्स सख्त होने लगे परंतु वो अपने मुंह से कुछ कहती उसके पहले उसके सामने वो चेहरा आ गया जिस पर प्यार और फिकर के भाव उमड़े हुए थे।
वेदिका ठीक से खड़ी हो सके इसलिए मैने अब कमर के नीचे हाथ बढ़ते हुए उसके मांसल कूल्हों को पकड़ा और अपने शरीर से सटा दिया,विशाल के सीने में उसके दो बड़े उरोज धंस चुके थे। नीचे उसका बड़ा सा मुसल उसकी जांघों के स्पर्श कर रहा था,दोनों के चेहरे इतने पास थे कि उन दोनों की सांसे आपस में टकरा रही थी,वेदिका ने आज से पहले विशाल का ये रूप कभी नहीं देखा था जिसे वो आज तक एक बच्चा समझती आ रही थी वो आज एक वयस्क पुरुष की भ्रांति दे रहा था इसलिए उसके चेहरे पर थोड़ी असमंजसता थी पर विशाल तो जैसे अपने सामने खड़ी इस मुखाकृति में जैसे खो ही गया था। विशाल ने अपनी कल्पना में जैसे सराहा था वास्तव में वेदिका उससे कई ज्यादा खूबसूरत थी उभरता ललाट,काले तीखे नयनक्श, गालों में पड़ते खंजन (Dimples) और गुलाबी आधारों की अद्भुत जोड़,जिसमें ऊपरी होठ समतल व मुलायम था तो नीचे का होठ गोल, उन्मात से भरा और रसमय प्रतीत हो रहा था,जो आने वाले पल को कल्पना किए कांप रहा था। मैं अपना चेहरा उनके बिल्कुल करीब ले आया जिससे हम दोनों के होठ से बस 5cm की दूरी पर थे, वेदिका का दिमाग अंदर से चीख रहा था कि ये गलत है वो रिश्तों की रेखा पार नहीं करना चाहती थी पर इस जवान मर्द के आगे उसकी जैसे ज़बान ही नहीं चल रही थी,आखिर में हालात को स्वीकारते हुए उसने अपनी आंखे बंद कर ली,विशाल ने यह देखकर एक सांस छोड़ी जो उसके मुंह में घुल गई।अपनी आंटी के होठों को शांत करने के लिए मैने अपने होठों से उनके नीचे वाले होठों के आगे के हिस्से को थोड़ा मुंह में लेकर दबाव बनाया। विशाल की इस हरकत से वेदिका के हाथ विशाल की गर्दन से लिपट गए।क्या ही नर्म एहसास था वो!
उनके होठ को आजाद करके मैंने आंखे खोली तो हम दोनों के नैन दुबारा मिल गए,एक दूसरे की आंखों में छिपे जज्बातों को पढ़ने की मैं कोशिश करने लगा,शायद वो होठों के जामो को ओर पीना चाहती थी,उसके बाद मैंने उनके का कान के पास आकर धीरे से कहा,"मेरे होते हुए मैं आपको कुछ नहीं होने दूंगा" इतना कहकर मैने अपनी जीभ वेदिका के कान में डाल दी,एक गिला और गर्म एहसास उसे कानों में हुआ। उसके साथ ही उसने विशाल के सर को पकड़कर अपनी बाहों में भर लिया, मैं जीभ को गोल घुमाते हुए कान के अंदर तक उसे भिगो रहा था इसके साथ ही कान के बाहरी नम हिस्से को भी दांत से काट लिया,"सीईईइइहह्.........ऊउउममहहह्......ओफफकक्........" कान के बाद उसकी गर्दन पर अपनी गर्म सांसों का एहसास कराते हुए अपने होठ उसकी गर्दन के तिल को चूम लिया,वेदिका इस एहसास में खोते हुए सिसकियां ले रही थी,"ऊंउन्न्नहहहहहह्......... आआअह्ह्ह्...... ऊउउममहहह्..........Yessss....... ओओहहहहह्......" मैंने दोनों हाथों से आंटी के नितंबों को पकड़ा और अपनी एक उंगली को गांड़ के छेद पर रखते हुए उसके चिकनेपन को महसूस करने लगा,वेदिका के शरीर का रोम-रोम इस स्पर्श से खड़ा होने लगा था किन्तु मर्यादा और असहजता का पत्थर उनके सर पे आके कब गिर गया पता ही नहीं चला,इसके चलते बड़ी मुश्किल से उन्होंने सांसे बटोरते हुए कहा,"बस बेटा अब बहुत हो गया,हमे इससे आगे नहीं बढ़ना चाहिए तुम जाओ अब में ठीक हूँ" यह बात सुनकर विशाल रुक गया,उसके दोनों हाथ अभी भी वेदिका की कमर पर ही थे।वेदिका अपनी आंखो में एक आस लिए देख रही थी कि काश विशाल मान जाए पर विशाल उसके पास आया,उसके हल्के से वेदिका के हाथ को पकड़ा और उनके बाएं हाथ की दो उंगलियों को अपने मुंह में भर लिया, उंगलियां मुंह में भरते ही वेदिका को नर्म एहसास उन्हें सराबोर करने लगा। मैं किसी लॉलीपॉप की तरह उनकी उंगलियों का स्वाद ले रहा था उन्हें पूरा मुंह में समाते हुए अपने लगे तक ले गया और बाहर निकाला तो मेरे थूक से भीगी लार से तरबतर बाहर आईं,उनके होठों पर हाथ रखकर मैंने उनके मुंह को हल्का सा खोला और दोनों उंगलियों को उनके मुंह में उतार दिया,अपनी आंखे बंद किए हम दोनों के मुंह एक रस का स्वाद ले रही थी। तभी मेरे पैर पर कुछ गिला महसूस हुआ जब मेरी नजर नीचे गई तो उनकी चूत पूरी तरह पानी में भीगी हुई फर्श को गिला कर रही थी,आंटी का ध्यान नहीं था इसलिए मैने धीरे से नीचे झुककर उसे अपनी बाहों में उठा लिया,वेदिका इस हरकत से हैरान रह गई,विशाल आखिर करना क्या चाहता है ये उसकी समझ में नहीं आ रहा था,वो किसी छोटे बच्चे की तरह मेरी बाहों में थी विशाल ने उसे बेड पर लिटाया और बेड के पास खड़े होकर अपने सारे कपड़े उतार दिए,अब वो पूरी तरह नग्न होकर उसके सामने खड़ा था। जिससे गर्दभ (गधे) सामान लंबा लंड वेदिका के सामने खड़ा था,इस जननांग को देखकर वो दोनों हाथ आश्चर्य के मारे मुंह पर चले गए, मैं उनके पास गया पर शर्म के चलते उन्होंने अपना चेहरा घुमा लिया पर मैने उनकी ठुड्ढी को पकड़ते उनका मुंह मेरी तरह किया और वेदिका के पास आकर धीरे से कहा,"आज मैं आपके सारे दर्द मिटा दूंगा।" इतना बोलकर मैने उनको घुमाते हुए पेट के बल लेटा दिया और उनका से कुशन पर रख दिया,वो शर्म के मारे उसमें अपना चेहरा छिपा रही थी पर रस झरती उनकी उन्मत्त गांड़ मेरे सामने थी। मैने Body Oil लेकर उनकी पूरी पीठ पर लगा दिया,,कंधे से लेकर कमर तक उनका पूरा शरीर Oil से लथपथ था,उसके बाद अपने दोनों हाथों से उनके कमर की मालिश करने लगा,कुशन में मुंह छिपाने की वजह से उनकी दबी सिसकियां मेरे कानों में पड़ रही थी,"आआहहहह्........ऊऊउमम्.......उउनन्नहह्....... ऊउउफफ्.......ईइइससहह्........सीईइइअअ्........" तभी मेरी नजर उनके गांड़ के छेद पर थी जो हर सांस के साथ फैलकर भींच रहा था, मैंने गांड़ और छेद पर Oil लगाया और अपनी उंगलियों को दरार ने रखकर उसे पूरा चिपचिपा करने लगा जैसे ही मैने वहां स्पर्श किया आंटी ने अपने पांव दबोचते हुए कहा,"आआआहह्........रुको बेटा यह तुम क्या कर रहे हो?!??" वो आगे कुछ बोलती उसके पहले 'चचटटाकक्......' की आवाज आई और उसका पूरा बदन सहम उठा '...आआआहाहाअअहह्ह्........' उसके मुंह से इतना ही निकल पाया और उसका आगे बदन ऊपर उठ गया तभी Oil से लथपथ दो हाथों ने उसके मम्मो को पकड़ लिया,इसके साथ ही उसे अपनी पीठ पर किसी के सख्त सीने का एहसास हुआ, पीछे विशाल अपने बदन को वेदिका पर ढालते हुए उस पर लेट गया था। इसके साथ ही उसे अपनी गांड़ पर किसी लोहे सा सख्त और गर्म चीज का एहसास हुआ जो पूरा उसकी गांड़ की दरार में समा गया था तभी उसे अपने कंधे के पास गर्म सांसे महसूस हुई और उसके कानों में ये बोल पड़े,"This Moment you'll be Mine,I take you edge of Intimacy."
जिस्मों की अग्नि वेदिका और विशाल को अपने आगोश में ले रही है,अब आगे ये देखना होगा कि उनका ये प्रणय प्रसंग कहा तक जाएगा,क्या विशाल अपने कामरस से वेदिका की योनि को भर पाएगा या वेदिका एतराज जताते हुए यही रुक जायेगी,आगे का अपडेट अब कुछ दिनों बाद आएगा तो मिलते है आगे के गर्मा गरम अपडेट के साथ।
वेदिका बेड के ऊपर अपने पेट के बल लेटी हुई थी,उसे अपनी पीठ पर विशाल के गर्म और सख्त बदन का एहसास हुआ दोनों के नग्न बदन इस वक्त एक-दूसरे की तपिश को महसूस कर रहे थे,वेदिका के घने बाल उसकी पीठ पर आ रहे थे जिसे विशाल ने एक तरफ हटाकर उसकी गर्दन पर अपने होठों को रख दिया था। वो कभी अपनी आंटी के गर्दन पर उस तिल को चूमता तो कभी अपनी जबान निकालकर वेदिका के गाल को चाटने लगता,उसके हाथ Oil से पूरी तरह सने हुए थे जिससे उसने वेदिका के दोनों स्तनों को पूरी तरह तेल से भींचकर हौले से दबा रहा था,वेदिका के दोनों समांतर स्तनयुगलों को झंझोड़ने से वो हल्के गुलाबी रंग के हो चुके थे 'चपपपप्.......चिकककक्........चपपाककक्.......' जैसी आवाजें उस कमरे से फैल रही थी, जैसे ही उसने दोनों निपल्स को पकड़ा दोनों निप्पल ने एक हल्का चिकना पन छोड़ दिया,विशाल को उस वक्त तो इस बात का पता नहीं चला पर उन हल्के गुलाबी और भूरे चनों को कुछ देर तक गूथने से वो लाल हो गए जिससे उन पर हल्की सफेद रंग की कुछ बूंदे उभर आई,दोनों इस वक्त हवस के सिरसागर में डूब चुके थे पर वेदिका के मन की चेतना अभी भी अतुल्य आनंद से पीछे खींच रही थी पर वो इस वक्त इस मनोस्थिति में थी जहां उसे यह सब अच्छा भी लग रहा था। आखिर वो भी एक औरत थी उसे भी किसी मर्द का सहवास चाहिए था फिर चाहे वो कोई भी हो,उसकी चूत स्त्राव द्रव्यों को छोड़कर उसे भिगोने लगती पर आज ये खेल जिस्मों की अलग ही सीमाओं तक पहुंच गया था जिससे उसकी चूत से पानी किसी थोड़े खुले हुए नल की तरह बह रहा था जैसे उसके जिस्म के अंदर इतने वक्त से जल रही आग को कोई बुझाने वाला मिल गया था। वेदिका के गर्दन को चूमते वक्त तब विशाल की जांघ जब बेडशीट से स्पर्श हुई तो कुछ देर के लिए वो भी चौक गया,वेदिका के योनि द्वार के नीचे हिस्से तक पूरी बेडशीट भीगी हुई थी और उसे हैरानी तब हुई जब उसका पैर चिपचिपी चीज़ पर पड़ा उसने देखा तो वो उसकी आंटी का वीर्य था मतलब पानी के साथ वेदिका हल्का वीर्य भी झड़ रही थी। उसके आंटी की वासना किस हद तक भड़क गई थी ये वो सोच भी नहीं सकता था,इंसान का अकेलापन किस हद तक तन्हा कर सकता है ये उसे आज समझ आ गया था पर अब ये उसका फ़र्ज़ बन गया था कि इस तन्हाई को वो दूर करे इसलिए वो थोड़ा पीछे आया,उनके दोनों नितंबों को पकड़कर थोड़ा दबाया फिर थोड़ा Oil लेकर अपने लंड पर लगा दिया और बीच में अपना लंड नीचे दरार में रखकर जोर से एक धक्का लगाया जोर से एक धक्का लगाया जिससे वो धंसधंसता हुए गांड़ की ऊपरी हिस्से से बाहर आया '.........हाहांहाआआआआहहहहअअअ............' आगे से वेदिका की आंखे ऊपर चढ़ गई थी,उनमें से आंसू निकलते हुए नीचे बह रहे थे,उनके मुंह से जीभ बाहर निकल आगी थी जिससे बहती लार कुशन को भिगो रही थी,मैने लंड अभी तक उनके एक भी छेद में नहीं डाला था तब भी उनका ये हाल था,मैने उनकी गांड़ को कसकर पकड़ा ताकि लंड बीच में अच्छे से सेट हो जाए,उसके बाद शुरू हुए दैहिक संयोग के पल। मैं लगातार जोरो से धक्के लगाए जा रहा था जिससे घर्षण की वो मधुर ध्वनि उत्पन्न हो रही थीं,'फोफोककअअ्.........फफाफाककअअअ्.........फफफचचहहह्.........फफचचाचाकक्........चचाचाआआअपप्..........चिपपप्.......चिपपअअ्.......चचपपहह्..........' इस ध्वनि से तालमेल मिलाते हुए आंटी की आवाज मेरे हर अंग को जैसे ओर भी भड़का रही थी,'ओओओहहहहअअअ्...........ये गलत है बेटाआआहह्.........आआअह्ह्ह्.......... ओओओहहहहह्............नोनोओओहहहह्............You Can't Do his to Me.........Ohhhhhh..........Myyyyy......Godddd........." इन सब चीखों से पूरा कमरा भर गया,यह सुनकर मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मैंने दोनों हाथों से बारी-बारी चमाट लगा दिए 'चचचाचाटटटअअअ्...........सससटटाटाकककक्..........' यह इतनी जोर से लगा था कि उनका पूरा बदन आगे से ऊपर उठ गया उनकी गांड़ पर मेरे उंगलियों के निशान छप गए,'आआआहाहहहहह्.........This is so Hard.......Plzzzz Spare Meeee........Fuucckkkk.......... इसके बाद हम एक दूसरे से कैसे नजरे मिलाएंगे............So...... Don't Do Thissss..........' वो अपना सर इधर उधर घुमाए बिलख रही थी तभी मुझे Vibrator का Remote पड़ा हुआ मिला जिसे वेदिका ने नहाने से पहले बेड पर रख दिया था,मैने उसे उठाया और Medium Speed पर रख दिया,जैसे ही वो शुरू हुआ उसका झटका आंटी के से सर तक पहुंचा,'Noooooohhhh........Are you Kidding Meee???!!.........Aaaahhhhhhh....Mmmm' मन के भीतर चलते द्वंद्व से वो कुछ ज्यादा ही विचलित हो गई थी तभी उनके कानो में एक आवाज गूंजी,'शशशईईईइहहहह्.........’ इसे सुनकर वो एक पल के लिए शांत हो गई,"इस एहसास से लड़ने की बजाए एक बार इस महसूस कीजिए,उसे अपनाइए, अपने शरीर की इस जरूरत को महसूस करो, आपको कोई चाहिए जो आपकी इस भूख को शांत कर सके,मुझे अपने बेटे की तरह मानकर बात को समझने की कोशिश कीजिए" विशाल के कहे गए आख़िरी शब्द उसके कानों में गूंजते रहे।आखिर क्या गलत कहा था उसने वो कब तक इस तरह तन्हाइयों में अपना जीवन व्यथित करती रहेगी पर उसे जो चाहिए था वो उसे इस रूप में मिलेगा उसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।
वो सोचने ने लगी हुई थी तभी Vibrator को मैने Full Speed पर कर दिया जिससे उन्होंने अपने होठ भींच लिए और अपनी सिसकियां दबाने की कोशिश करने लगी,'ऊऊउउममहहहह्............ऊउउफफ्.......उउफफहह्.......... ईईइइइससहह्.......... आआअह्ह्ह्....... ऊंऊउपपपहह्........ ओओअअहहहहह्.......... ऊंऊउन्न्ननहहह्............" मैं फिर से उनकी पीठ पर लेट गया था,रोने बिलखने से उनके गाल पर आंसुओं के निशान बन चुके थे,अपने होठों को भींचकर आंखे बंद करते हुए उन्होंने कुछ सोचा और मेरी तरफ देखते हुए कहा,"इस लम्हे के बाद शायाद हमारे रिश्ते पर इस चीज का असर पड़े पर आज जो कुछ हुआ ये बात इन दीवारों के बीच ही रहनी चाहिए और आखिरी बात........" यह कहकर उन्होंने मुझे एक झटका मारा और बेड पर पीठ के बल गिरा दिया वो मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे होठों के पास आते हुए कहा,"यह खत्म होने के बाद तुम सब कुछ भूलकर तुम पहले की तरह मुझे अपनी आंटी की तरह ही Treat करोगे।" यह बात उन्होंने मेरी आँखें में देखते हुए इस तरह से कही कि मैं बस अपना सर हा में ही हिला सका, उनकी आंखों में एक गंभीरता साफ नजर आ रही थी पर मैंने एक हाथ उनके गाल पर रखा और अंगूठा उनके होठ पर घुमाते हुए कहा,"आप गुस्से में भी कितनी प्यारी लगती हो" यह सुनकर उनका गुस्सा जैसे कही गायब हो गया उन्होंने मुझे धक्का देकर लिटाया और वो मेरे पेट पर बैठ गई,उनकी गांड़ से Vibration मुझे लेट पर महसूस हो रही थी तभी उन्होंने दाएं हाथ से मेरे लंड को पकड़ा उसे थोड़ा ऊपर नीचे किया और अपनी गांड़ को थोड़ा ऊपर करके अपने गांड़ के छेद पर रखा जिसमें Vibration की वजह से छेद थोड़ा खुल चुका था,उसके अगले पल उन्होंने मेरे टोपे को अपनी गांड़ की छेद पर रहकर अपनी कमर से भार दिया जिससे मेरे लॉलीपॉप सा लाल टोपा उसकी गांड़ के अंदर घुस चुका था,' ऊंऊउन्न्ननहहह्..........हाहाआआआकक्........Fuckkkk' बोलते हुए उन्होंने अपने होठों को काटा और अपने दोनों स्तनों को हाथ से दबोच लिया।उनकी हर एक अदा किसी मदन सुंदरी की तरह गहनशील लग रही थी,मैने अपने दोनों हाथ को उन्हें नितंब पर रखा जिससे वो आगे की तरफ झुकते हुए मेरे कान के पास आकर मादक शब्दों में कहा,"Now,Give me Everything That You Have To-"
दोनों के बीच जिस्मों का खेल चरम पर है और आगे के अपडेट में वासना की तपिश में जूझकर धुंआधार चुदाई करेंगे तब तक नीचे Comment करके बताईए कि यह पार्ट आपको कैसा लगा, मैं जल्द लौटूंगा एक नए अपडेट के साथ।
मैं और आंटी पूरी तरह नंगे होकर बेड पर लेटे हुए थे,उन्होंने मुझे एक तरफ लेटाकर मेरे ऊपर आकर बैठ गई,उनकी गांड़ Egg Vibrator Full Speed पर चल रहा था,जिसका Vibration मुझे मेरे पेट तक महसूस हो रहा था,इसी वजह से उनका शरीर उत्तेजना से शिथिल (डूब) हो चुका था,उनकी चूत लगातार पानी बहा रही थी और गांड भी पानी में लथपथ हो चुकी थी,उन्होंने मेरे लंड को पकड़कर अपनी गांड़ के छेद पर उसका टोपा रखा और गांड से ताकत लगाकर उसे अंदर उतार दिया। टोपा अंदर जाते ही उन्हें अपने अंदर किसी बड़ी चीज़ का एहसास हुआ जो किसी पत्थर जैसा सख्त और लोहे सा गर्म था,इस एहसास से उन्होंने अपने बालों को भींचकर सिसकियां लेते हुए अंगड़ाई ली फिर आगे झुककर अपने दोनों थनों को मेरी छाती में दबाकर मेरे कानों के पास आकर कहा,"ऊंऊउन्न्ननहहह्......ऊंऊउहहह्........... हांहाहाआआहहहअअ्.........हांहाहहह्.........हाहाहह्.......Give Me Everything That You Have To-"
मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस्म कि जरूरत पूरी करने के लिए मैने आंटी को इस संस्कारी औरत से लंबे लंड लेनेवाली रंडी की तरह बना दिया था।
उनके ये शब्द मेरे कानों में किसी शहद की तरह घुल गए,उनकी आवाज से वो कामना,मिठास,हवस और उत्तेजना साफ झलक रही थी,इन शब्दोंने जैसे मेरे बदन पर कामदेव के तीर समान असर किया,रोमांच का एक झटका मेरे सर से लेकर नीचे लंड तक दौड़ गया,इसकी वजह से शरीर में रक्तस्राव तेज हुआ जिससे मेरे लंड का सुपाड़ा फूलकर मोटा और लाल होने लगा,लंड की मोटाई बढ़ने लगी और पूरा बदन गर्म होने लगा। मेरे लंड की Tightness को वेदिका ने अपनी गांड़ पर महसूस किया जिसकी वजह से उसने अपना चेहरा पूरी तरह मेरे मुंह से चिपका लिया,हम दोनों एक-दूसरे की आंखों में देख रहे थे,मिलन की तड़प और दर्द में उसकी आँखें भीगी हुई थी जिसका एक कतरा उसकी आँखो से छलककर मेरी आंख में समा गया जिसकी गर्मी मुझे अंदर तक महसूस हुई,दोनों की नाक आपस में मिलने की वजह से एक-दूसरे के सांसों की ख़ुशबू महसूस कर पा रहे थे,उसने अपनी जीभ बाहर निकालकर मेरे होठों के ऊपर घुमाया,इस मोटे लंड को गांड़ ने उतारने की वजह से उनका मुंह खुला हुआ था और अपने दांतों से नीचे के होठ को काटकर वो अपनी सिसकियां रोकने की कोशिश कर रही थी,"हंहम्महह्........ऊउम्म्हहह्.........ईइंन्ननहह्....... ईईइइइससहह्..........ओउऊउम्महहह्..........." एक-दूसरे की बाहों में तपते जिस्म आज कुदरत की किसी खूबसूरत परिकल्पना जैसे लग रहे थे,मेरा पुरुषांग अभी 8 इंच जितना बाहर था इसलिए मैने दोनों हाथों से आंटी की उन्मात गांड़ को पकड़ा और थोड़ा जोर लगाते हुए अपने लंड को अंदर उतारने लगा पर उनकी गांड़ किसी कुंवारी लड़की की तरह Tight लग रही थी,एक बड़ा मूसल उनके अंदर के मांस को चीरकर छेद को चौड़ा करके अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था।
इस प्रक्रिया में उठती पीड़ा से उनका शरीर मुझसे किसी बच्चे की तरह लिपट गया,उन्होंने मेरे कान में आकर सिसकते हुए कहा,"ऊंऊउउअआआहाहाहह्...........हाहाआआहह्........ आआअह्ह्ह्......आआहह्.........Yessss........You're So Big.........ओओऊऊउउह्ह्ह्..........मैंने आज तक इतने बड़े लंड का एहसास नहीं किया" आंटी की इस तरह Openly बात करने से मुझे थोड़ा ताजुब्ब हुआ था पर इस वक्त उनकी कामवासना चरम पर थी जिसका वो आनंद लेना चाहती थी,मैने उनके चेहरे को थामकर सामने लाया,आंखों में आंसू,दर्द और शर्म से गुलाबी हुए गाल और होठों को काटने से हल्के लाल हुए गाल,कुदरत के इन प्राकृतिक रंगों को अपने चेहरे पर सजाएं वो काफी Cute लग रही थी पर मुझे इससे बढ़कर कुछ चाहिए था इसलिए मैने बेड के पास रखे टेबल से Crimson Red Lipstick उठाई और उसे हल्के हाथों से उनके होठों पर लगा दिया। जिससे उनका चेहरा काफी Sexy लग रहा था,उसके बाद मैने उनके चेहरे को पकड़ा और उन होठों को अपने मुंह में भरकर स्वाद लेने लगा,"हहमममम्म्म्......... आआअह्ह्ह्........ ऊंऊउपपपहह्........सीईईइपपप्.........सससहहह्.......सुसुऊऊउपपप्.........." मैं उनके नीचे के होठ को काटता,चूसता और उस पर अपनी जीभ घुमाने लगता,जिससे हम दोनों के मुंह में उस लिपस्टिक का स्वाद घुलने लगा था,एक दूसरे के मुंह के रस से खुदको मधुमय करने के बाद मैने कहा,"Fuucckk.......You're My Sweetest Bed Mommy Ever." मेरी बात सुनकर उनकी लालसा बढ़ी और उसके बाद उन्होंने मेरा चेहरा पकड़कर अपने स्तनों के बीच दबाते हुए कहा,"Haaahhhh.........Just Fuck Me As Much You Want." इस बार मैंने तुरंत उनके बालों को पकड़ा और उनके गले पर किस करते हुए कहा,"मेरा रूम Soundproof है इसलिए खुदको रोकना बंद करो, Scream for My Dick, Moan with Excitement and Loose Yourself Into Wildness." इतना कहकर मैंने उनकी गांड़ को पकड़कर लंड से ताकत लगाकर उसमें आधा लंड उतार दिया '.....Thwwooppp....!!..' की आवाज के साथ वो अंदर चला गया,"आआआआहांआआहाहहअअ्...........Your Dick Inside In My Pussyyy........ओओओहोहोहहअअअ्..........Fucckkkk Meee......... तुम्हारा लंड किसी जानवर की जितना बड़ा और मजबूत है" ..........Sqqueechhh.........उनकी चूत से वीर्य की एक धार निकली जिसने मेरे पेट को भिगो दिया,"हांहाआआहहह्...........हहफफफ्अअअ.........देखा तुम्हारे छूते ही इस निगोडी ने पानी छोड़ दिया.......Yeaahhhh............Aaahhhhh........" मेरा लंड 4 इंच अंदर घुसकर गांड़ में चल रहे Vibrator से जा टकराया जिससे Vibrator को झटका लगने से बाहर निकालने वाली डोर टूटकर बेड पर गिर गई और Vibrator उनकी गांड़ के फंस गया पर उन्हें अभी इस बात का पता नहीं था।
मेरे सामने आंटी का बिलखता चेहरा था और नीचे देखा तो खून की बूंद मेरे लंड से फिसलकर बेड पर गिर गई,आखिर इतने वक्त से सुनग्न (अकेली) पड़ी इस गुदा को मैने मिलन की तृप्ति से भर दिया था,वो अभी शांत नहीं हुई थी और लंबी सांसे लेकर दर्द को सहने की कोशिश कर रही थी,जिसकी वजह से उनके दोनों पैर कांप रहे थे,"हंहहअअअहह्..........हांहाआआहह्...... Your Cock Just Iike Ruthless Bull, जो औरतों के योनिदर्द से ज्यादा आक्रमक बनता है.......ईइंन्ननहह्........सही कहा ना मैंने?" आंटी की ये बात सुनकर मैंने एक हाथ से उनके बालों को कसकर पकड़ लिया,मैने उनका सर पीछे की तरफ किया और उनके गले पर किस करते हुए कहा,"सही कहा....... मैं किसी बेलगाम जानवर की तरह हूं जो दर्दनाक तरीके से अपना शिकार करता है,आपका ये जिस्म मुझे पागल बना रहा है मैं इसे चबाकर अपने मुंह से नोचना चाहता हूँ।" इतना कहकर मैंने उनके स्तन पर अपनी जीभ घुमाकर गिला करने लगा,उसके बाद मैने एक निप्पल को चूसने-चबाने लगा,निप्पल पर बढ़ाव बढ़ने की वजह से '.......Sqquurreechhh.......' की आवाज के साथ एक धार छुटी और मेरे मुंह में समा गई, मैंने देखा तो उनके स्तनों से दूध बाहर निकल रहा था,वेदिका का जिस्म जिस तरह से React कर रहा था ये देखकर मुझे अजीब लग रहा था क्योंकि प्रेग्नेंसी के बिना थनों में दूध कैसे आ सकता है?
मैने दोनों हाथों से पकड़कर उसे दबाया तो फिर एक धार छुटी,आंटी ने एक हाथ मेरे सर पर रखते हुए कहा,"आआहहहह्........ आखिर यह जिस्म भी हमारा रिश्ता समझ गया,एक बेटे के छूते ही औरत की छाती से दूध निकलना इस बात का गवाह है कि हमारा रिश्ता इन जिस्मों के बंधन से कई ज्यादा ऊपर है इसलिए बेटा इनके हर एक कतरे पर सिर्फ तुम्हारा अधिकार है......पी लो इसे....... हांहाआआअअहहहह्.......... Square It........Aaahhhhh........." इतना कहते हुए उनके मुंह से लार निकली जो उनके स्तनों के बीच आकर रुक गई,हम दोनों के थूक मिलने से उनके पूरे बूब्स चिकने हो गए इसके बाद मैने दोनों निपल्स को आपस में मिलाकर मुंह में भर लिया और उनके स्तनों से निकलते दूध का मीठा और Creamie स्वाद मेरे मुंह में घुलने लगा,आंटी ने मेरे सर को दोनों हाथों से अपने सीने में छुपा दिया था,"आआहाहाहहहअअअ्..........हांहाअअहहह्..........Suckkkk It Harder.........Yeaahhhh........ ऊंऊउन्न्ननहहह्.........पता नहीं कितने सालों से यह तमन्ना दिल में दबी हुई थी........ईइइससहह्..........जो आज पूरी हो रही है,मेरा बेटा आज स्तनपान कर रहा है........... ऊउउममममहहह्..........." आंटी को अब दर्द नहीं हो रहा है इसलिए सही मौका देखकर मैने उनकी गांड़ पर पकड़ बनाई और नीचे से पूरा जोर लगाते हुए एकसाथ पूरा लंड धंस-धंसते हुए उनकी गांड़ में पेल दिया '.......Thwooopppp........' वो अभी इसके लिए तैयार नहीं थी इसलिए उनकी आँखें इस तरह फैल गई जैसे अभी बाहर आ जाएंगी,उन्हें ऐसा लगा मानो किसी ने उन्हें दो पैरों के बीच में से चीर दिया हो। दर्द की वो लहर उनके जिस्म में इस तरह से गुजरी की उन्होंने अपने नाखून मेरे सीने में गड़ा दिए जिससे मेरा सीना खून की बूंदे से भीगने लगा,उनके मुंह से थूक बाहर निकलने लगा और उनकी चीखें कमरे में गूंज उठी,"हूंहुहुऊंऊउउन्नहहओओओओ..........Nooooo....... Fucckkkk.........इतनी क्या जल्दी थी तुम्हे!??........हांहाहाआआआहह्.........."
आंटी की गांड़ मारते वक्त दर्द में रोता,बिलखता,पसीने से भीगा हुआ उनका चेहरा।
( Snifff ) बोलते हुए वो सुबकने लगी,"I hate Youuuu.......Hate Youuu Son..........ऊंऊउउहुंहूउउउहहह्..........This is So Painful......... आआअह्ह्हअअअह्ह्ह्............." आंटी मेरी बांहों में पूरी तरह समा गई थी '.......Spurrrchhh.......' की आवाज के साथ उनकी गांड़ से गर्म खून की धारा निकली जिसने लंड के साथ पूरी बेडशीट को भिगो दिया,मेरे कानों में अभी भी उनके सुबकने की आवाज आ रही थी इसलिए मैने उनके कान में कहा,'Calm Down Vedi......' मेरे मुंह से अपना नाम सुनकर वो हैरानी से मेरी आंखों में देख रही थी। मैने अपनी एक उंगली उनकी गांड़ के छेद पर घुमाई जो मेरा लंड घुसने की वजह से थोड़ा सूजकर लाल हो गया था,मैने उस खून से उनके गुलाबी होठों को रंगते हुए कहा,"Mommy......... ये खून इस बात का सबूत है कि अब हमारा रिश्ता शारीरिक जरूरतों से कई ज्यादा ऊपर है,प्यार के हर रिश्ते में पीड़ा की आग में तपना ही पड़ता है और उसे जो सह लेता है उनका प्यार सोने की भांति चमकता है।"
अपने जिस्म के अंदर उठती वासना और पीड़ा उसके मस्तिष्क पर चढ़ने लगी थी,उसने विशाल के चेहरे को पकड़कर कहा,"इतने सालों तक मैंने तुम्हे आंचल से दूर रखा और अब तुम्हारी इच्छाओं को दबाकर मैं उस बोझ को ओर नहीं बढ़ाना चाहती.......आआहहहह्..........अब बिना कोई रहम किए बग़ैर रौंद डालो अपनी मॉम को..........Fuckkkk Meeee..........Fuckkkkk..........." आंटी की आंखों का यह जूनून और पागलपन देखकर मेरा बदन गर्म होने लगा,शरीर में एक झटका सा लगा जिसने मेरे जिस्म में एक नई ऊर्जा भर दी, मैंने उनकी गांड़ को कसकर पकड़ा और उनकी आंखों में देखकर कहा,"अगर हम दोनों ही यही चाहते है तो........ Prepare Yourself........My Dick will break Every part of Your body." इतना कहकर मैंने लंड बाहर निकालकर जोर से धक्का लगाया जिसकी वजह से......Thrruuuaasshh.......की आवाज के साथ गांड़ की अंदर के हिस्से तक जा टकराया,जिसकी वजह से Vibrator भी लंड के साथ अंदर के हिस्से तक पहुंच गया और इस वजह से आंटी को उसकी Vibration अपने पेट तक महसूस हो रही थी, मैं बिना रुके लगातार तेज़ी से धक्के मार रहा था जिससे आंटी का पूरा बदन हिल था था। उनके तेजी से हिलते स्तन देखकर मैंने उनके एक निप्पल को मुंह में दबोचा और दांतों से इतना जोर लगाया कि उनके निप्पल से निकलते दूध में खून का लाल रंग मिल गया,"ओओओहोहोहहअअअ्.............आआआ........ आआहह्..........ओओअअहहहहह्.............You're So Rough and Ruthless.......... ऊंऊउन्न्ननहहह्.........आआ.....आआह्.........आआआहहह्...........तुम्हारा लंड मेरे पेट तक पहुंच गया है............Fucckkkkk.........हांहाहाआआहहाहा..........." लगातार इतने धक्के मारने के बाद उनकी गांड़ का छेद अब खुलने लगा था जिसकी वजह से उन्हें अब मजा आ रहा था,पूरे कमरे में हमारे जिस्मों के मिलन से 'Flwooopp........Flwoppp.......Sqquuriichhh........Frichhhh.........Thaappp........Thaapppp........ Thwwooppp...........'की ध्वनि गूंज रही थी,आंटी के बाल पूरी तरह बिखर चुके थे, चेहरा लाल पड़ गया था और साथ ही उस पर आंसुओं के साथ पसीने की बूंदे मिली हुई थी,मैने उन्हें गले से दबोचकर उनके होठों को कसकर चूमा..........हहमममम्म्म्.........उउमममहह्...........आआहहहह्.......... ऊंऊउन्न्ननहहह्..........सीस्ईईइइपपप्............ऊंऊउफफफ्.......... आंटी भी मेरे होठों को पूरे जोश से चूस रही थी,कुछ देर बाद हम अलग हुए तो दोनों के होठ लाल पद गए थे,मैने आंटी के मुंह को खोलकर उसमें थूका जो उनके गले तक चला गया,वो आंखे बंद करके इस मधुमय संगम का आनंद ले रही थी,उनकी गांड़ में घुसते लंड के साथ पानी और खून के छिटे........फफफचचहहह्.........फाफाचचहहह्...........करके पूरे बेड पर गिर रहे थे। आखिर में मेरा बदन अकड़ गया और मैंने आंटी के सीने में अपना चेहरा छुपा लिया जिससे वो समझ गई कि क्या होने वाला है,"आआहहहह्..........हाहाआआहह्हह्...........मेरी गांड़ में सब उतार दो बेटा..........आआअह्ह्हअअअह्ह्ह्...........कितने वक्त से सुखी पड़ी है..........इसमें अपना सारा रस भर दो.......... ओओअअहहहहह्..........." तभी एक गर्म धार छुटी जिसने आंटी की गांड़ की तरबर कर दिया,"Aaahhhaaahh......... It's So Hottttt........." उनकी यह आवाज मेरे कानों में पड़ी और हम दोनों के बदन शांत पड़ गए,वो लंड के ऊपर से नीचे उतरी और मेरे बगल में आकर लेट गई,हम दोनों के गुप्तांग अभी भी वीर्य से सने हुए थे और उनकी गांड़ से झरता रस बेड पर गिर रहा था, मैंने वाइब्रेटर बंध किया और पीछे से उनके बदन को अपनी आगोश में लिए अपने जिस्म की गर्मी का एहसास कराने लगा।
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जैसे तूफान के बाद चारों तरफ शांति छा जाती है इस तरह हमारे जिस्मों के अंदर का तूफान भी इस वक्त थमा हुआ था आंटी इस वक्त आंखें बंद करके निढ़ाल होकर मेरे बगल में लेटी हुई थी। Bath Oli से सने उनके बदन पर पसीने की बूंदे मिलकर उनके कामिनी देह को उग्रता प्रदान कर रही थी,उनका पूरा बदन इस वक्त किसी नागीन के देह समान चमक रहा था, जिसकी मधुमता का एहसास करने के लिए मैने पीछे से अपनी बाहों में लिया हुआ था,उनकी गांड़ के हुड़दंग मचाने के बाद मेरा लंड उन्ही दो मांसल कूल्हों के बीच दबा हुआ था जिस पर अभी भी आंटी के योनि का रस और वीर्य लगा हुआ था। सहवास को इस आक्रामकता और दीर्घ पलों के बाद भोगने की वजह से उनका शरीर पूरी तरह थक चुका था और जिस तरह विशाल ने उनको रौंदा था उसकी वजह से उनका पूरा बदन टूट रहा था,उसके साथ ही वो आंखे बंध किए लंबी सांसे ले रही थी।आंटी थोड़ी थक जरूर गई थी किन्तु हम दोनों के अंदर की प्राणयाग्नि अभी भी भड़क रही थी जो कोमल बदन के स्पर्श से बढ़ती जा रही थी।कुछ देर लेटे रहने के बाद मैं बेड से उठा और उनके चेहरे के पास बैठ गया,मुख पर काली पलकों के साथ मिलकर सजे वो नैन उनके चेहरे को कितना सुंदर बना रहे थे,उसके साथ ही अधरो की गुलाबी जोड़ जिसका रसपान किसी शहद से कम नहीं था। मैंने उनके गाल पर हाथ रखा और पास ही टेबल पर पड़ी पानी की बोतल लेने ही लिए आगे झुका जिससे नग्न अवस्था में होने की वजह से मेरा लंड उनके मुलायम गालों पर टिक गया,वीर्य निकलने के बाद भी मेरा लंड अभी भी 4 इंच जितना लंबा था, जिस्म की गर्मी और वीर्य की वीर्य की सुवास आंटी की नाक में पड़ते ही उनकी आँखें खुल गई और अपने मुंह को खोलकर उसे अंदर भर लिया। एक गर्म सा एहसास महसूस होते ही मैने देखा तो दो गुलाबी होठ मेरे लंड को अपने मुंह में लिए उसे अपने मुखरस से भिगो रहे थे। "आआहहहअअ्......... आंटी आप कब जाग गई? मुझे लगा आप सो रही है।" मेरी बात सुनकर उन्होंने लंड चूसते हुए अपनी नजरे ऊपर उठाई और लिंग को बाहर निकालकर जवाब दिया,"इसकी खुशबू कामुकता के इत्र सामान है जिसके पास आने पर नींद में भी पता चल जाता है,कितना बड़ा और लचीला है.........आआऊउममहह्.......... ऊंऊउफफफ्........ ऊंऊउन्न्ननहहह्.........." कहकर उन्होंने फिर लंड को मुंह में भर लिया। उनके मुंह की दीवार, मुलायम जीभ,गले की गहराई से आती गर्मी और मुंह के अंदर का गीलापन सब कुछ मुझे महसूस हो रहा था,इसके चलते मेरे बदन में अलग सा नशा छाने लगा था। "आंटीईई........ओओअअहहह्..........Yeaahhhh.........आप क्या क़यामत ढा रही हो,किसी शायर की प्रेरणा से भी ऊपर,कामवात्सल्य से भरपूर, अप्सराओं से भी सुंदर औरत आज मेरे लिंग को मुंह में भरकर अपने प्यार से भिगो रही है........ आआअह्ह्हअअअह्ह्ह्..............Succkkkk It Deeperrrr.........Auntyyyyyy" मेरी बातों से जैसे आंटी का जिस्म ओर भी भड़क उठा हो,उन्होंने मेरे लंड को बाहर निकाला जो इस वक्त पूरे शबाब में तना हुआ था,जिससे उसकी लंबाई 10 इंच जितनी हो गई थी जो लंबाई आंटी के चेहरे से भी ज्यादा थी,उन्होंने उसे अपने गाल से चिपका लिया,"ऊंऊउन्न्ननहहह्........... इस फौलाद को छूकर मन तो करता है इसका हमेशा ऐसे ही स्वाद लेती रहूं, This Feeling is beyond the Heaven..........Aaahhhhahhh............ ऊंऊऊउपपपहहह्........." बोलते हुए उन्होंने लंड के सुपाड़े को अपने पूरे चेहरे पर घुमाया,उनके गाल,होठ,आंखों पर घूमते वक्त उसकी नर्माश मुझे महसूस हो रही थी,जब उन्होंने चेहरे से अलग किया तो उनके मुंह के थूक की चिकनेपन से तरंगें उठ गई,आंटी ने एक पल लाल हो चुके सुपाड़े को देखा जो किसी शोले सा तप रहा था,जिस पर वीर्य को एक बूंद छलक आई थी,"Give it to Me Babyyyy........... आआहाहाहहहअअअ्...........सुसऊंऊउउपप्...........ओओअअपपपप्...........ऊउमम्........ऊंऊउउममम्.........हांहाआआहहह्.........." आवाजें निकालते हुए उन्होनें लंड के अच्छे से चूसना शुरू कर दिया,वो उसे चूमती,मुंह में भरकर उस पर जीभ घुमाती और किसी लॉलीपॉप की तरह पूरे मुंह में भरने लगती,अब मेरे अंदर का लावा उमड़ने लगा था,"Noooo......Aunnttyyy.........I can't Control.......... आआअह्ह्हअअअह्ह्ह्........हहांआआहह्.......... ओओअअहहह्..........." कहकर मैने उनके बालों को पकड़कर धक्के के साथ लंड उनके गले तक उतारने लगा। कुछ देर बाद एक धार छुटी .........Sssspprruucchhh.........इसके साथ ही एक गाढ़ा रस से उनका मुंह भरने लगा पर इस बार कुछ अलग हुआ दो-तीन झटकों में बाहर आ जानेवाला वीर्य की मात्रा इस वक्त बहुत ज्यादा हो रही थी,जिससे Ssppraachhh...........Sspruuchhhh..........Ssccruuchhhh...........की आवाज के साथ मेरा रस बहते ही जा रहा था इसके साथ ही मैंने आंटी के सर को पकड़कर लंड को अंदर उतारते ही जा रहा था। .........ओओऊऊउह्ह्.......... ऊंऊउन्न्ननहहह्..........की दबी आवाज मेरे कानों मे पड़ी,मैं समझ गया था कि यह Situation Excessive Ejaculation की स्थिति थी जिसमें उत्तेजना हद से ज्यादा बढ़ जाने की वजह से काफी मात्रा में वीर्य निकलता है,ये सिलसिला करीब 1 मिनट तक चला उसके साथ ही........Gwwoouukkk..........Ghhoowwppp.........Ghhwaaakkk.........Awwookkkk......... जैसी आवाज कमरे में गूंज रही थी।मेरा माल इतना निकला था कि उसके साथ मैंने अपना लंड आंटी के गर्दन से नीचे धकेल दिया था,आज वीर्य से पूरा ग्लास भर जाता मेरा इतना माल निकला था। मैने धीरे से अपना लंड उनके मुंह से निकाला और उनका चेहरा देखा तो थूक, आंसू, पसीने से सन गया था,उनकी आँखें लाल हो गई थी जो उनके साथ हुई जबरदस्ती को बयां कर रही थी पर हैरानी की बात यह थी कि उनके चेहरे पर खुशी के भाव थे और उनके मुंह से थोड़ा ही वीर्य बाहर निकला था बाकी वो सारा अपने गले से नीचे उतार गई थी,वीर्य की वो बूंदे उनके मुंह से नीचे होकर गले को भिगोते हुए स्तनों में जाकर मिल रही थी,वो आंखों में एक चमक लिए मेरे चेहरे के पास आई,"मैने नहीं सोचा था कि मेरा बेटू इस तरह से मेरी पास बुझाएगा, इतने सालों में मुझे तुम्हारी तरह कोई संतुष्ट नहीं कर पाया,क्या गजब की ताकत दी है भगवान ने तुम्हे।" इतना कहकर वो मेरा लंड सहलाने लगी। उनकी बाते सुनकर मेरा दिल बैठा जा रहा था मैंने उनके साथ इतना बुरा सुलूक किया फिर भी वो सब कुछ भूलकर मेरे बारे में सोच रही थी यह सोचकर मैने उन्हें पकड़कर साइड पर लिटाया और उनके ऊपर चढ़कर उनके होठों पर टूट पड़ा। मैं अपनी एक किस में अपना सारा प्यार झोंक देना चाहता था इसलिए मैंने उनके चेहरे को ठुड्ढी से पकड़ रखा था ताकि उन्हें चूमने में आसानी हो,मुखरस के साथ वीर्य का गाढ़ा स्वाद भी मुझे महसूस हुआ, मैंने अपनी जीभ को उनके गले तक उतारने की कोशिश करने लगा जिससे हम दोनों का चेहरा एक हो गया था। दोनों की नाक आपस में जुड़ने की वजह से हम दोनों की सांस उसके अंदर जा रही थी,मुंह से बाहर निकलते थूक के साथ आंटी के चेहरा भीगने लगा था,मुख की ये क्रीड़ा खत्म करने मैं उनसे अलग हुआ तो उनकी गर्म सांसे मुझे महसूस हुई मैंने अपने मुंह के चिकनेपन को इक्कठा करके उनकी आँख,माथे और गालों पर थूका जिसे वो आंखे बंध करके सिर्फ मेहसूस करने लगी, मैंने अब जीभ की मदद से उसे पूरे चेहरे पर एक लेप की तरह लगा दिया और आखिर में उनकी पलकों पर एक किस किया तो उन्होंने अपनी आंखे खोल दी। उनके सामने मेरा वहीं भाव मग्न चेहरा था जिसमें एक ग्लानि भरी हुई थी,मेरे यह भाव उनकी आंखों से छिप न सके इसलिए उन्होंने मुख पर ममता भरी मुस्कान से साथ अपना हाथ मेरे चेहरे पर रख दिया,"बेटा तुमने जो किया उससे मैं बिलकुल भी नाराज़ नहीं हूं इसलिए खुदको दोष देना बंद करो" उनकी बात सुनकर मेरा दिल पसीज उठा।
"पर आंटी मैंने जो किया वो बदसलूखी थी,पहले मुझे आपसे पूछना चाहिए था फिर भी आप इतना बड़ा दिल रखके........." इतना बोलते ही मेरा दिल भर आया, मैंने रुचि के साथ भी यही व्यवहार किया था इसलिए मैंने अपनी नजरें घुमा ली और बेड पर अपने सर झुकाकर बैठ गया,मेरी बात सुनकर आंटी बैठ गई अपने घने बाल जो उनके स्तनों को धक रहे थे जिसे उन्होंने पीछे किए और नग्न कामिनी की तरह मेरे गोद में आकर बैठ गई जिससे उनकी गर्म चूत मेरे लंड को छूने लगी। उन्होंने मेरे चेहरे को अपने नर्म हाथों से पकड़कर ऊपर उठाया और मेरी आंखों में देखकर कहा,"ध्यान से सुनो बेटा तुम एक मर्द हो,ऊपरवाले ने तुम्हे जो तोहफ़ा दिया है उसकी कदर करो,आज के समय में कई नौजवान भी औरत के योनि की प्यास नहीं बुझा पाते पर तुम उन सबसे विपरीत हो।" उनकी आंखों में एक गहरापन साफ़ नजर आ रहा था। "तुम्हारे लिंग एक साथ कई औरतों की प्यास बुझाने में सक्षम हैं,ऊपर से तुम्हारे मूल स्वभाव में ही Dominance समाया है जो एक उग्र पुरुष की निशानी है जो तुम्हारे पुरुषत्व को सहवास के समय में काफी निखारता है,अगर तुम अपने Nature के विपरीत कार्य करोगे तो किसी को खुश नहीं रख पाओगे।" आंटी की कही हर एक बात मेरे मस्तिष्क में किसी शिलालेख के सामान छप गई थी। पूरे बदन में एक नई ऊर्जा दौड़ रही थी तभी वो मधुर स्वर फिर मेरे कानों में पड़े,"चरम सुख वो होता है जो दिल को तसल्ली से भरकर शारीरिक सुख की पूर्ति करता है और तुम्हारी वजह से मैंने ज़िंदगी में पहली बार उसकी सीमा को महसूस किया है, तुम्हारी यही Wildeness वीर्य स्खलन को सबसे ज्यादा उतेजित बनाती है.........हांहाआआअअहह्........." एक आह भरते हुए वो मेरे कानों को भिगोने लगी, मैंने दोनों हाथ उनकी गांड़ पर रखकर उसके छेद में 2-2 उंगलियां डाल दी जिससे उसकी चिपचिपाहट को मेहसूस कर सकूं।
"हहांआआहह्........आआहहहह्.........Yessss....... That's My Boyyyy........Dig it More.........." हम दोनों के जिस्म एक बार फिर तपने लगे थे जिसकी तपिश पहले से कई ज्यादा थी,एक फ़ौलादी बदन वाले मर्द की बाहों में एक कोमल सी औरत Beauty And Beast के समान लग रहे थे,ये दर्शाता था कि वो नाजुक जरूर थी पर प्यार में मिलते हर दर्द को सहने में वो सक्षम थी।कुछ पल बाद मैंने गांड़ से निकालकर दोनों उंगलियां नाक से मिलाकर उसकी खुशबू अपने अंदर उतारने लगा,उसके बाद मुंह में घोलकर उसका नमकीन स्वाद लेने लगा। मेरी यह हरकत देख आंटी ने अपने नीचे भाग को ऊपर किया और मेरे लंड के ऊपर रख दिया,मेरे लंड के टोपे को छूते ही पानी की एक धार छुटी जिसने मेरे लंड को पूरा भिगो दिया,आंटी ने टोपे को अपनी चूत में उतारकर मेरी प्रतिक्रिया का इंतजार करने लगी, मैंने एक हाथ उनकी कमर पर लपेटा और दूसरे हाथ से उनके बालों को खींचकर कहा,"Get Ready to Endure Pain, मैं आपके चूत की गहराई तक जानेवाला हूँ जिसे आपने पहले कभी नहीं महसूस किया होगा।" मेरी बात सुनकर एक पल लिए आंटी की सांस थम गई और दूसरे ही पल बदन में दर्द की ऐसी लहर उठी जैसे किसी ने उनके शरीर को बीच से चीर दिया हो.........Ttttthwwwooooppppp...........Frrrraaaccchhhh........Frriiiccchhh...........एक ही झटके में पूरा लंड आंटी की चूत के द्वार को चीरते हुए पूरा अंदर घुस गया था, यहां तक तो ठीक था पर लंड की मोटाई की वजह से उसने Cervix (ग्रीवा - स्त्री की चूत और बच्चेदानी के बीच की दीवार) को चीरते हुए सीधे गर्भाशय की दीवार से जा टकराया, "आआआआहाहांहाहाआआआआहाहाहहह्..............ऊंऊउन्न्न्ननननह्ह्ह्ह्हअअअ्..............Noooooohhhhh............This is Terrible........... ओओओअअअअअहहह्.................Saavvveee Meeeaahhhh................Ooouuuhhh Fuuckkkkk.............." आंटी पूरे जोर से चीखी और ये चीख इतनी तेज़ थी कि मेरे कान सुन्न पड़ गए। मैंने बाल खिंचकर उनका चेहरा मेरे सामने किया,जो दर्द से पूरा थरथरा रहा था,उनकी आँखोंने पानी बहाकर उसे लाल कर दिया था, चेहरे पर आती कुछ जुल्फे जो पसीने से उनके चेहरे पर चिपक गई थी, सांसे इतनी तेज हो गई थी जिसे संभालने के लिए उन्होंने मुंह खोल दिया था,उन्होंने अटकते हुए अपनी बात कही,"This behaviour is too Harsh, मैंने इतना ज्यादा Expect नहीं किया था......I request You.......Plzzz थोड़ा प्यार से करो।" उनकी बात सुनकर मैंने जीभ बाहर निकालकर गाल को थूक से गिला किया और एक जोर से थप्पड़ जड़ दिया। "तुम्ही ने मेरे अंदर के इस जानवर को जगाया है,तुम्हे एक Dominance से भरा Alpha Male चाहिए था जो तुम्हारे सामने हाजिर है,अब ये हवसी भेड़िए को भूख लगी है जो तुम्हारे बदन को नोच-नोचकर खाएगा।"
"पर मैं तो........ ऊंऊउन्न्नममहह्.......ऊंऊउहहह्........ ऊउउममममहहह्............." मैंने अपने होठों से उनके मुंह पर ताला लगा दिया जो सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए था,उसी वक्त मैंने आंटी की चूत से अपना लंड टोपे तक बाहर निकाला...........Khhooaawwacchhh.........Fiiissshhhh.........Tapp......Tappp.......Taaapppp........ की आवाज के साथ खून की एक तेज धार बाहर निकली और उसके साथ ही खून की बूंदे दोबारा उस बेडशीट को भिगोने लगी। मैंने आंटी के मुंह को आजाद किया तो वो एक आस से मेरी ओर देख रही थी,"मुझे अब सिर्फ आपकी मदद की गुहार और बिलखती हुई चीखे सुननी है" इतना बोलकर फिर पूरा लंड धंसधंसते हुए अंदर जाकर दीवार से टकराया।
Fwwooaaachhhh...............आआहहहअअअ्............. Fwwoooakkkkk............ आआआहाहाहा.......हाहाहाआआआ........हहहहहअअ्............ Fwwooopppp.............ओओओअअअअहहह्.............Fwwuucckkkkk.............ऊंऊउन्न्न्ननहनहहह्...............Taapp.......Taappp......Taappp.......... की आवाज के साथ मैं उनकी चूत में दनादन धक्के मार रहा था। पानी के साथ वीर्य और खून बूंदों में मिलकर आसपास उड़ रहा था,दर्द से उन्होंने अपने होठ भींच लिए थे और मेरे गले से लिपटकर उसे सहने की कोशिश कर रही थी। बढ़ती रफ़्तार के साथ उनकी दर्दभरी आवाजें सिसकियों में बदलने लगी थी,"ऊंऊउहहह्.........Aahhhh.....Yeaahhhh.......... तुम्हारे लंड में मेरी फुद्दी को फाड़ के रख दिया........Eeeaaahhhhh.........Mmmmm" "तुम्हारे बदन का हर एक उभार कितना मुलायम और मादक है पता नहीं रोज कितने लोग तुम्हे अपने सपनों में चोदते होंगे?"
"उन्हीं सबकी हवस से भरी नजरों का ही तो जादू है जो मेरा बदन समय के साथ निखरता गया और देखो आज इसी के बदौलत आज एक बेटा अपनी मां को नंगी करके बेरहमी से चोद रहा है........Aahhhh Right There..........Yesss You Made me CUMMM..........." "घर में ही ऐसी ग़दराई महिला को कौन छोड़ सकता है इसीलिए देखो आज तुम्हे चोदकर मैं भी मादरचोद बन गया?"
"हांहाहाआआखहह्...........तुम मादरचोद हो पर मेरी विडंबना तो देखो मैं भी वैश्या से गई गुजरी हूं जो अपने बेटे से बेशर्मों की तरह चुद रही हूं...........आआहुहूऊंऊउन्न्नहहहह्..........पता नहीं पर ये चीज इतना मज़ा क्यों दे रही है? हर बार तुम्हरा स्पर्श अलग ही चरम सीमा तक पहुंचा देता है.........Yaaa......Yeeaa........Yeeaahhhh......... I'm about to Explode.........Oouuuuhhhhhh........." बोलते हुए वो पीछे की तरफ झुक गई, मैंने भी अब उनके दोनों जांघो को पकड़ा और चूत का द्वार सीधा होने की वजह से धक्के उनके पेट में मेहसूस हो रहे थे।
"आंटी मेरा भी छूटने वाला है,आपके चूत की गर्म आज मेरे लंड को पिघला कर रहेगी।" मेरी बात सुनकर आंटी ने अपने बाल पकड़कर खींच दिए
"ओओओहोहोहहहअअअ्...........इस उत्तेजना से मैं पागल हो जाऊंगी.......... तुम्हारा इतना बड़ा लौड़ा..........हांहाहाआअ्.........हांहहाहाआआहह्............हांहाहहहाओ़ओओऊंउन्ननहहहहअअअअ्........... मुझे चाहिए........Yeasss.........Yeeaahhsss.........मुझे पूरा भर दो।" दोनों तरफ से हम दोनों के बदन अकड़े और हमारे शरीर का वो सारा रस फटते हुए बाहर आ गया..........Ssspraaschhhhh............Sccrrriiiieeechhhhh............... कुदरत के दो तत्वों का समागम हुआ और दोनों के घटक रस छुटकर आंटी की योनि में घुलने लगे, मैंने उनके दोनों पैरों को फैलाकर अपने होठों से उस वीर्य को पीने लगा। .........हहांआआहह्.........हहअअहह्.........मेरा बच्चा पीले इसे.........हहऊंऊउहहह्..........सब लोग भ्रम में जीते है क्योंकि इंसान की हर खुशियों का रास्ता हो उसके लिंग से ही जुड़ा होता है,यही है तो हमे इस धरती पर स्वर्ग का एहसास कराता है।" आंटी के यह शब्द मेरे कान में पड़े फिर चारों ओर खामोशी छा गई। मैंने ऊपर से ही वीर्य को पीकर साफ कर दिया पर अभी भी मुझे उनकी गांड़ की मादकता महसूस करनी थी इसलिए मैंने उनके पीछे घुमा दिया पर तभी उन्होंने मुझे रोकते हुए कहा,"रुको बेटा पहले मैं Vibrator निकाल लूं जिससे तुम्हे कोई परेशानी ना हो" यह कहकर उन्होंने छेद के पास हाथ घुमाया पर उनके हाथ में कुछ महसूस नहीं हुआ इसलिए वो बेड पर टांगे फैलाकर देखने लगी पर उन्हें कुछ दिखाई नहीं दिया इसीलिए उनका चेहरा परेशानी से घिरने लगा। उनके चेहरे के ये भाव पढ़ते हुए मैंने उनसे पूछा," आंटी क्या हुआ आप चिंतित लग रही है।" पर मेरी बातों का जवाब दिए बिना उन्होंने Vibrator का Remote लेकर ऑन किया, Vibrator On होते ही उन्हें अपने पेट तक उसकी Vibration महसूस हुई।
"बेटा यह Egg Vibrator को बाहर निकालने के लिए उसकी Pulling Rope होती है जिससे हम उसे खींचकर निकाल सके पर तुम्हारे साथ चुदाई में इतनी खो गई कि मुझे इसका ध्यान ही नहीं रहा।" इतना कहकर वो तनाव ग्रस्त चेहरा लिए बैठ गई, मैंने कुछ पल तक सोचा और इसके चेहरे को थामते हुए कहा,"मेरे पास एक रास्ता है शायद उससे काम बन जाए।" मेरी बात सुनते ही वो आशा भरी नजरों से मेरी ओर देखने लगी।
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