मैं ने बुआ जी के पैर छुए और उन्हें अंदर आने को कहा बुआ जी अंदर आई और पापा जी के पास आ कर बोली भैया मैं आ गई
तो मैं ने बुआ जी के कान में चुपके से बोला बुआ जी ऐसे नहीं बताते भैया को की मैं आ गई गले मिल कर बताओ कि उनकी बहन आ गई उनके पास
तो बुआ जी ने बोला बहु सबके सामने कैसे गले लागू अपने भैया के तो मैं ने बोला बुआ जी सब घर के ही तो है
फिर बुआ जी थोड़ी हिम्मत कर के पापा जी के गले लग गई और पापा जी ने भी अपनी बहन को कस कर चिपका लिया
कुछ देर बाद मां जी ने बोला लगता है पहली बार मिल रहे हैं भाई बहन
तो दोनों अलग हो गए और बुआ जी पापा जी के पास बैठ गई और बोली भैया अब कुछ दिन भाभी को आराम मिलेगा कुछ दिन मैं अपने भैया की सेवा करूंगी
तभी मैं ने बोला बुआ जी आप को भूख लगी होगी मैं नाश्ता लाती हूं
तो बुआ जी ने बोला तुम रहने दो बहु मैं ले कर आती हूं फिर बुआ जी ने बोला बहु वो बेग में आम है निकालो तो
मैं ने आम निकाल कर बुआ जी को दिए बुआ जी ने पापा जी को दिखाते हुए बोली भैया देखिए कितने बड़े आम लाई हैं आपकी बहन आपके लिए इतने बड़े आम तो भाभी ने भी नहीं खिलाए होंगे आपको
तो मां जी ने बोला बीबी कितने बड़े आम ही क्यों ना खिला दे अपने पति को लेकिन पति को तो बहन के आम ही बड़े और मीठे लगते है
तो मैं ने बोला मां जी बीबी तो रोज आम खिलाती हैं लेकिन बहन के आम कभी कभी खाने को मिलते हैं
फिर बुआ जी किचन में चली गई और उनके पीछे मा जी भी चली गई मैं ने मां जी को बोला मां जी वो केला भी ले आना जो पापा जी बुआ जी के लिए लाएं है
फिर मैं पापा जी को छेड़ने लगी क्यों पापा जी कैसे लगे बुआ जी के आम तो पापा जी ने बोला बहु आम तो दिखा ही नहीं रही है तुम्हारी बुआ जी
तो मैं ने बोला पापा जी अभी तो आई है वो जरा रुकिए सबकुछ दिखाएगी आपको आपकी बहन
फिर मां जी और बुआ जी बात कर रही थी बुआ जी ने बोला भाभी लगता है आपकी सर्विस सही कर रहे हैं भैया जभी इतनी सुंदर लग रही हो आप
तो मां जी ने बोला ननद रानी तुम्हारे भैया का बस चले तो वो दिन में भी नहीं छोड़े मुझे
तो बुआ जी ने बोला भाभी बहुत किस्मत वाली हो आप जो भैया जैसा पति मिला है आपको नहीं तो कुछ औरतों को तो प्यार के नाम पर सिर्फ दर्द ही मिलता है
फिर बुआ जी ने आम कटे और मां जी ने केले लिए और दोनों हॉल में आ गई
बुआ जी ने पापा जी को आम खिलाया और बोली भैया कैसा लगा मेरे आम का स्वाद
तो मां जी ने बोला ननद रानी तुम भी क्या पूछ रही हो तुम्हारे आम खाने के लिए तो कब से तड़प रहे हैं तुम्हारे भैया अब अच्छे से खिलाओ अपने भैया को अपने आम
फिर बुआ जी ने पापा जी को एक और आम की फ़ाक खिलाई तो मां जी ने बोला बहन के आम ही खाते रहोगे या अपना केला भी खिलाओगे अपनी बहन को
तो पापा जी ने एक केला उठा कर बुआ जी को दिया तो मां जी ने बोला ऐसे खिलाते हैं क्या बहन को केला
फिर मां जी ने एक केला लिया और बुआ जी को बोली ननद रानी अपने भैया की गोद में बैठ कर खाओ उनका केला
तो बुआ जी पापा जी की गोद में बैठ गई तो पापा जी ने एक केला बुआ जी को खिला दिया बुआ जी ने थोड़ा सा केला खाया तभी मां जी ने बोला तुम्हे तो कुछ नहीं पता बहन को केला कैसे खिलते है
फिर मां जी ने एक केला लिया और पापा जी को दे कर बोली पहले अपनी बहन को केला चूसाओ तो बुआ जी ने बोला भाभी ये केला तो बहुत बड़ा है मेरे मुंह में नहीं जाएगा
तो मां जी ने बोला ननद रानी तुम्हारे भैया का केला मुझे भी पहली बार बड़ा लगा था लेकिन एक बार मुंह में लेते ही मजा आने लगा
फिर बुआ जी ने अपना मुंह खोला और पापा जी ने केला बुआ जी के मुंह में डाल दिया
बुआ जी केला चूस रही थी तभी मां जी ने पापा जी से बोला देख लीजिए आपकी बहन कैसे आपका केला चूस रही है लगता है जवानी में किसी ने केला नहीं चूसाया आपकी बहन को
तो बुआ जी ने मुंह से केला निकाल कर बोली भाभी जवानी में बहुत लोगों ने कोशिश की मुझे अपना केला चूसाने की भी और खिलाने की भी लेकिन मैं ने सबको मना कर दिया
तो मां जी ने बोला फिर तो तुम अपने भैया का केला भी नहीं खाती उन्हें भी मना कर देती
तो बुआ जी ने बोला भैया कभी लाए ही नहीं केला मेरे लिए
तो पापा जी ने बोला बहन मैं तो रोज लाता था तेरे लिए केला लेकिन कभी हिम्मत ही नहीं हुई तुझे बोलने की
तो मां जी ने बोला हिम्मत कैसे होगी कभी आपकी बहन में अपने आम भी तो नहीं दिखाए होंगे आपको
तो बुआ जी ने बोला भाभी मैं डरती थी कि कही भैया को मेरे आम साही नहीं लगे तो
फिर मां जी ने बोला तुम भी न ननद रानी इतनी गर्मी में भी ऐसे कपड़े पहनी हो गर्मी नहीं लग रही क्या तुम्हे और बुआ जी का पल्लू हटा दिया और बोली अब अच्छा लगा ना तुम्हे अपने भैया की गोद में