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ये कहानी अब समाप्त हो चुकी है।।
।।बहुत बहुत धन्यवाद।।
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Bahut badhiya kahani ja rahi hai aur thoda Gali daal do toh aur kamuk ho sakta hai aur Anjali ki thodi aur detail mein likho to behtar hota. Dhanyawadमहिपाल ने आगे बढ़ कर अंजली को बाहों में उठाया, तो अंजली की आंखे कुछ पल के लिए खुली पर खुद को अपने पापा की बाहों में देखा तो फिर से बंद कर ली, महिपाल ने उसे ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया, और सविता ने चादर ओढ़ा दी। दोनों कमरे से बाहर निकले इस एहसास के साथ की ये एक नया सवेरा हो रहा था उनके जीवन में एक नए जीवन की शुरुआत थी।
अपडेट 262
चोदम पुर की एक और सुहानी सुबह थी, कर्मा के घर में अभी खामोशी थी क्योंकि अधिकतर लोग घर पर नहीं थे, आज उन सब के लिए बहुत खुशी का दिन था सब सुबह सुबह ही नहा धो कर तैयार निकल हुए थे अभी सिर्फ गुंजन और सभ्या थे, सभ्या साड़ी बांध रही थी,
सभ्या: अरे गुंजन ये पीछे पिन लगा देना, मुई लग ही नहीं रही,
गुंजन: अरे जीजी तुम्हारे पीछे पिन लगाने को तो न जाने कितने तैयार बैठे हैं आओ लगा दें।
गुंजन ने सभ्या के पिछवाड़े को मसलते हुए कहा,
सभ्या: तुझे भी न हर समय मज़ाक ही चढ़ा रहता है, चल जल्दी पिन लगा, नहीं तो सूखा बेलन घुसा दूंगी तेरी गांड में।
गुंजन: हाय दैय्या, बेरहम नंद।
गुंजन सभ्या की साड़ी में पीछे से पिन लगाते हुए बोली, इतने में बाहर से सागर की आवाज़ आई, और अगले ही पल वो कमरे में था
सागर: अरे बुआ अभी तैयार नहीं हुई तुम वहां सब लोग इंतजार कर रहे हैं।
सभ्या: अरे बस हो गई लल्ला, ये तेरी मां है न ये ही देर करवा रही है।
गुंजन: ओ हो मैं तो देर करवा ही रही हूं, खुद के पतीले इतने बड़े कर लिए हैं कि साड़ी नहीं टिकती और हमारी गलती है। गुंजन हंसते हुए बोली,
सभ्या: अब चल नहीं तो तेरे पतीले सुजा दूंगी मैं।
सागर अब जल्दी चलो यार फूफाजी का फोन आ रहा है, आओ बैठो।
सागर मोटरसाइकिल पर बैठते हुए चश्मा लगाते हुए बोला,
सभ्या: इसे देखो गांव में भी इसे पूर हीरो बनके घूमना है, बैठ गुंजन।
सागर: अरे बुआ कभी कभी तो मौका मिलता है अब तुम रोक मत लगाओ और जल्दी बैठो।
सभ्या: हां लल्ला बैठ रही हूं,
जल्दी ही सागर दोनों को बिठाकर मोटर साइकिल से गांव के बाहर की ओर चल दिया, रास्ते भर दोनों बातें करती जा रही थी,
कुछ ही देर में सागर ने मोटर साइकिल को गांव के बाहर एक खेत के पास लगा दिया जहां बाकी सब लोग पहले से मौजूद थे और इंतज़ार कर रहे थे,
सविता: अरे बड़ी देर लगा दी बहन जी।
सभ्या: अरे बहन जी जिस दिन सोचो सब जल्दी निपटा लें उसी दिन देर हो जाती है।
गुंजन: ये साड़ी तो बड़ी खिल रही है तुम पर सविता जीजी।
नीलेश: अरे अब और बातों में मत लग जाओ अब मुहूर्त निकल जाएगा।
सभ्या: हां हां भाई चलो चलो।
कर्मा: अनुज और सागर सबकी वीडियो आनी चाहिए अच्छे से।
अनुज: हां भैया,
नीलेश: चलो भाई पहले सारी लड़कियां और फिर सारी औरतें काम पर लग जाओ।
नीलेश के कहने पर अंजली, किरन, पल्ली, लाड़ो, नीतू इन सब ने एक एक ईंट उठाई और खुदी हुई नींव में लगानी शुरू कर दी। सब ने ज़ोर से ताली मारकर अपनी खुशी जाहिर की।
वहीं बगल में खड़े महिपाल और शैलेश बातें कर रहे थे,
महिपाल: शैलेश बाबू आखिर हम लोगों की मेहनत रंग लाई और स्कूल का काम शुरू हो ही गया,
शैलेश: अरे वो तो होना ही था भाई साहब, अच्छे काम के लिए कर रहे हैं ऊपर से हमारी मेहनत।
महिपाल: शैलेश भाई समझ नहीं आता, कि आपका और नीलेश भाई का कैसे धन्यवाद करूं? मेरे इस सपने में आप लोग जुड़े और आपकी वजह से ही ये आज सच हो रहा है।
इतने में पीछे से नीलेश बोले: अरे महिपाल भाई अब तो समधी होने वाले हैं अब कहां इन बातों में पड़ते हो, जो हमारा है वो तुम्हारा है।
उधर लड़कियों के बाद अब औरतें भी एक एक ईंट लगा रही थी, ये नीलेश ने ही उपाय बताया था कि सभी लड़कियों और औरतों से ईंट लगवा कर शुभ काम की शुरुआत की जाएगी। ईंट लगने के बाद पूरे गांव में मिठाई बांटी गई, वहीं अपने करीबी परिवारों की दावत भी हुई। ये सब होने के बाद नीलेश, महिपाल, शैलेश, राजन, नाना, और जमुना, राजपाल और दीनू सब बाग में बैठे बातें कर रहे थे लड़के कर्मा, पीयूष, अनुज, सागर सरजू बिरजू और जग्गू भी वहीं थे
नाना: बड़के बाबू घर का काम भी पूरा हो गया है कब का सोचा है ग्रह प्रवेश?
नाना ने नीलेश से पूछा,
नीलेश: हां बाबा तुम बताओ क्या करें अब तैयार है तो क्यों देर करें?
राजपाल: अरे तो कोई शुभ मुहूर्त देख कर लो ग्रह प्रवेश और क्या?
कर्मा: अरे मैं बताऊं सबसे अच्छा दिन?
कर्मा ने बोला तो सब उसकी ओर देखने लगे,
नीलेश: हां बता।
कर्मा: 23 मार्च को करते हैं,
महिपाल: 23 मार्च को ऐसा क्या है?
शैलेश: अरे बिल्कुल सही सोचा है कर्मा तूने, अरे 23 मार्च को भैया और भाभी की सालगिरह होती है, इससे बढ़िया दिन क्या होगा क्यों भैया?
राजन: अरे कह तो सही रही हो शैलेश बाबू।
राजपाल: तो यही तय रखो 10-12 दिन ही तो हैं
कर्मा: पर सिर्फ ग्रह प्रवेश नहीं होगा, बड़ी दावत करते हैं, सभी रिश्तेदारो को बुलाते हैं।
नीलेश: कर्मा सही कह रहा है, काफी समय हो गया कोई दावत हुई भी नहीं है घर में, पर अब सुनो ये बात औरतों में नहीं जानी चाहिए़ खास कर इसकी मम्मी तक।
कर्मा: अरे वाह पापा मां को सरप्राइज़ दोगे।
नीलेश: हां वही देंगे, जो तू बोला।
इस पर सब हंसने लगते हैं,
राजन: तो फिर कल से ही तैयारी पर जुट जाते हैं, एक खेत को सपाट करवा देते हैं टेंट वगैरह लगवाने के लिए।
नीलेश: अरे खेत नहीं, इस बार की दावत खास होगी और खास जगह होगी।
शैलेश: खास जगह कहां भैया?
इस पर नीलेश मुस्कुराते हैं।
जहां इनकी दावत की तैयारियां चल रही हैं मैं बताता हूं कि आखिरी बार जो आपने देखा कैसे अंजली ने अपने पापा से चुदवाया था उस रात को दो महीने बीत चुके थे और इन दो महीनो में दोनों परिवार काफी करीब आ चुके थे, नीलेश के और बाकी सब के परिवार को तरह ही महिपाल के परिवार में भी अब कोई पर्दा नहीं बचा था। सब खुल कर एक दूसरे के साथ मज़ा कर रहे थे, कुछ नए रिश्ते भी बने थे ज़्यादा गहराई में न जाते हुए मैं आपको झलकियों में सब दिखा देता हूं, बाकी आप लोग समझदार हैं।
अंजली ने अपने होने वाले ससुर नीलेश की सेवा पहले ही शुरू कर दी थी। वो उनके लंड को मुंह में लेकर इतना गहरा चूस देती कि नीलेश की आंखें ऊपर चढ़ जातीं —गले तक उतारकर, आंखों में आंसू और मुंह से रस टपकाते हुए।
नीलेश ने भी अपनी होने वाली बहू अंजली के तीनों छेदों — मुंह, बुर और गांड — का पूरा स्वाद चख लिया था। ऐसी जवान, कसी हुई, रसीली बहू पाकर नीलेश का लंड हमेशा फूलकर खड़ा रहता। वो अंजली को घंटों चोदते, उसके चूचे दबाते, गांड पर थप्पड़ मारते उसे सहलाते और खूब लाड़ करते
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वहीं नीलेश ने भी अपनी होने वाली बहू के तीनों छेदों का स्वाद अच्छे से चख लिया था, और ये कहना गलत नहीं होगा कि ऐसी बहू पाकर नीलेश और उनका लंड दोनों ही फूले नहीं समा रहे थे,
दूसरी ओर कर्मा भी अपनी सास सविता और सलहज रानी से मेलजोल बढ़ाने में पीछे नहीं था। वो दोनों औरतें उसके मोटे, लंबे लंड की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़तीं। रानी और सविता मिलकर कर्मा के बदन को खूब चूसती चाटती — एक उसके लंड को चूसती तो दूसरी उसके मुंह पर बैठ जाती। कभी सविता उसके लंड की सवारी करती तो कभी रानी।
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रानी और सविता दोनों ही कर्मा और उसके मोटे लंड की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ती थी और छोड़ें भी कैसे आखिर होने वाला दामाद जो था, कर्मा भी दोनों औरतों को कसकर चोदता था।
बीच-बीच में महिपाल का पूरा परिवार चोदमपुर में रातें बिताने आता। अब जब सब खुल चुके थे, तो पीयूष और महिपाल ने चोदमपुर की जवान कलियों — किरन, पल्ली, नीतू और लाड़ो — का पूरा मजा लिया। ये चारों गरम-गरम लड़कियां उनके लंडों को अपनी बुर और गांड में लेकर चीख-चीखकर चुदतीं। महिपाल और पीयूष को अपनी किस्मत पर यकीन नहीं होता कि इतनी सुंदर, कामुक और भरी-पूरी देह वाली लड़कियां उन्हें मिल गईं।
रानी और प्रेमा दोनों बहुएं मर्दों की सेवा में हमेशा तैयार रहतीं। दोनों की जोड़ी बहुत खतरनाक थी — एक साथ दो-दो लंड चूसतीं, गांड और बुर एक साथ चुदवातीं। कभी प्रेमा अपने ससुर और देवर के साथ रानी को बांटती तो कभी रानी अपने पति और ससुर के साथ प्रेमा को।
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सभी मर्द भी दोनों बहुओं का साथ पाकर बहुत खुश रहते थे और संतुष्ट होकर ही निकलते थे।
सविता अपने समधियों के बीच सबसे लोकप्रिय हो गई थी। अकेली समधन होकर भी वो इतने सारे मर्दों को संतुष्ट करती — एक के बाद एक लंड लेकर, मुंह में, बुर में, गांड में। कभी-कभी तो सबको एक साथ सन्तुष्ट करती, उसकी चीखें अक्सर घरों में गूंजती रहती थी उसे अपनी जीवन का ये पढ़ाव बहुत भा रहा था। एक साथ जब मर्द उसके बदन को निचोड़ते तो उसे लगता वो जवान हो रही है
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वहीं अंजली अपने ससुराल में आने वाली जिम्मेदारी कैसे उठानी है और लोगों के साथ मेलजोल बढ़ाना सीख रही थी, आखिर पूरे घर को उसे ही चलाना था इसलिए वो इस बात को काफी गंभीरता से लेती थी
अंजली ससुराल की जिम्मेदारियां सीख रही थी। वो किरन के साथ लेस्बियन मस्ती करती, अपनी ननद की चूत चाटती। मौसा-ससुर या चाचा-ससुर के साथ अपनी ननद को मिलाकर चुदवाती।
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उसे सब काम अच्छे से आता था, बढ़ों के साथ साथ वो जवानों का भी पूरा ख्याल रखती थी, अनुज और सागर तो ऐसी भाभी पाकर बहुत खुश थे और अपनी होने वाली भाभी के साथ खूब समय बिताते थे
अनुज और सागर अपनी भाभी को पाकर फूले नहीं समाते — कभी अकेले, कभी कर्मा के साथ मिलकर तीनों अंजली को चोदते। अंजली तीनों लंडों की सेवा करती — एक मुंह में, एक बुर में, एक गांड में। सभ्या की उत्तराधिकारी बनने के सभी गुण अंजली सीख रही थी सभ्या भी उसे बड़े प्यार से सब कुछ बताती और सिखाती थी
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कभी कभी कर्मा भी अपने भाइयों के साथ मिलकर अंजली के साथ खूब खेलता और अंजली तीनों की खूब सेवा करती थी,
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इसी तरह से काम और कामलीला में पिछले दो महीने बीत चुके थे इसी बीच स्कूल के भी सारे कागजात तैयार हो चुके थे और आज स्कूल की नींव भी पड़ने की शुरुआत हो चुकी थी, वहीं नीलेश और सभ्या की सालगिरह पर लोगों ने एक बड़ी दावत रखने का निर्णय लिया था और ये बात तब तक सिर्फ मर्दों में रहने वाली थी,
अगले 10-12 दिन चोदमपुर में खूबसूरत और चुदाई भरी तैयारियों में ऐसे ही गुजर गए। मर्द लोग दिन-रात एक करके सारी व्यवस्था चुपके से कर रहे थे, ताकि औरतों को भनक तक न लगे। नीलेश ने खुद फोन उठा-उठाकर सभी खास रिश्तेदारों को निमंत्रण दिया।
दावत वाले दिन सुबह सबसे पहले गृह प्रवेश की पूजा हुई। औरतों को बस इतना ही बताया गया था कि “आज घर का ग्रह प्रवेश है, दिन में पूजा होगी।” सब औरतें खुश-खुश पूजा में शामिल हुईं। सभ्या तो और भी ज्यादा खुश थी नया घर जो बन कर तैयार था, पूजा समाप्त होते ही सबने खाना-पीना किया।
कर्मा, अनुज, सागर, पीयूष और बाकी जवान लड़कों ने मिलकर नीलेश द्वारा बताई हुई उस “खास जगह” को पूरी तरह साफ-सुथरा कर दिया। वो जगह गांव से थोड़ी दूर, एक खूबसूरत बाग के बीच में बनी छोटी सी हवेली थी जो नीलेश ने सभ्या के लिए ही बनवाई थी (अपडेट 159देखें और जानकारी के लिए), जो अब पूरी तरह नई जैसी चमक रही थी। फर्श चमकाए गए, दीवारों पर रंग-बिरंगी लाइटें लगाई गईं, बीच में बड़ा-सा स्टेज बनवाया गया, चारों तरफ कुर्सियां आदि बिछाई गईं । मेहमानों के ठहरने के लिए अलग-अलग कमरे तैयार किए गए, खाने-पीने का पूरा इंतजाम — शराब कोलड्रिंक, मिठाई, फल — सब कुछ तैयार था सुबह से ही हलवाई लग गए थे और स्वादिश्ट खाना बना कर तैयार कर दिया था शैलेश एक बड़ा सा केक ले आए थे। मेहमानों को सीधा वहीं ले जाया जा रहा था,
शाम ढलते ही असली खेल शुरू होने वाला था।
कर्मा ने पहले ही अंजली, किरन और पल्ली को चुपके से बता दिया था — “शाम को कुछ बहुत खास है। सब औरतों को तैयार कर दो, खासकर मां को। उन्हें इतना सजाओ कि देखने वाला बस देखता रह जाए।
शाम का समय आ गया। सूरज ढल चुका था और हवेली की लाइटें जल उठी थीं। अंजली, किरन और पल्ली तीनों मिलकर सभ्या को सजा रही थीं। सभ्या लाल रंग की भारी साड़ी में बेहद आकर्षक लग रही थी।
अंजली सभ्या के बाल संवार रही थी, किरन उसके गले में भारी सोने का हार डाल रही थी और पल्ली उसके कान में झुमके लगा रही थी। सभ्या बार-बार पूछ रही थी,
सभ्या: “अरे बच्चों बताओ तो सही, इतना क्यों सजा रही हो मुझे? ग्रह प्रवेश तो हो गया ना? अब ये सब क्या है?”
अंजली मुस्कुराते हुए उसके गाल पर किस करते हुए बोली, “अरे मां, अपनी मां को और सुंदर बना रही हूं आप क्यों परेशान हो रही हो।
किरन ने सभ्या की कमर पर हाथ फेरते हुए शरारत से कहा, “हां बुआ, आज तुम इतनी सुंदर लगोगी की फूफाजी देखते ही शुरू हो जाएंगे।
सभ्या शर्म से लाल हो गई, लेकिन खुश भी थी। “अरे पागल लड़कियां, तुम लोगों को भी न जाने क्या हो गया है।
सब औरतें तैयार हो चुकी थीं, लेकिन उन्हें अभी भी सिर्फ इतना पता था कि “शाम को कुछ खास प्रोग्राम है”।
जारी रहेगी
Tharkipo bhai mujhe to lagta h ye wahi jagah h jha ek bar jab sabhi log kalak gaon mai gye the tab nilesh nai apni behan or vineet ko bulaya tha or isi jagah pehli bar rajan nai uski behan ki chudai ki thi sayad aap usi jagah ki bat kr rahe hoमहिपाल ने आगे बढ़ कर अंजली को बाहों में उठाया, तो अंजली की आंखे कुछ पल के लिए खुली पर खुद को अपने पापा की बाहों में देखा तो फिर से बंद कर ली, महिपाल ने उसे ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया, और सविता ने चादर ओढ़ा दी। दोनों कमरे से बाहर निकले इस एहसास के साथ की ये एक नया सवेरा हो रहा था उनके जीवन में एक नए जीवन की शुरुआत थी।
अपडेट 262
चोदम पुर की एक और सुहानी सुबह थी, कर्मा के घर में अभी खामोशी थी क्योंकि अधिकतर लोग घर पर नहीं थे, आज उन सब के लिए बहुत खुशी का दिन था सब सुबह सुबह ही नहा धो कर तैयार निकल हुए थे अभी सिर्फ गुंजन और सभ्या थे, सभ्या साड़ी बांध रही थी,
सभ्या: अरे गुंजन ये पीछे पिन लगा देना, मुई लग ही नहीं रही,
गुंजन: अरे जीजी तुम्हारे पीछे पिन लगाने को तो न जाने कितने तैयार बैठे हैं आओ लगा दें।
गुंजन ने सभ्या के पिछवाड़े को मसलते हुए कहा,
सभ्या: तुझे भी न हर समय मज़ाक ही चढ़ा रहता है, चल जल्दी पिन लगा, नहीं तो सूखा बेलन घुसा दूंगी तेरी गांड में।
गुंजन: हाय दैय्या, बेरहम नंद।
गुंजन सभ्या की साड़ी में पीछे से पिन लगाते हुए बोली, इतने में बाहर से सागर की आवाज़ आई, और अगले ही पल वो कमरे में था
सागर: अरे बुआ अभी तैयार नहीं हुई तुम वहां सब लोग इंतजार कर रहे हैं।
सभ्या: अरे बस हो गई लल्ला, ये तेरी मां है न ये ही देर करवा रही है।
गुंजन: ओ हो मैं तो देर करवा ही रही हूं, खुद के पतीले इतने बड़े कर लिए हैं कि साड़ी नहीं टिकती और हमारी गलती है। गुंजन हंसते हुए बोली,
सभ्या: अब चल नहीं तो तेरे पतीले सुजा दूंगी मैं।
सागर अब जल्दी चलो यार फूफाजी का फोन आ रहा है, आओ बैठो।
सागर मोटरसाइकिल पर बैठते हुए चश्मा लगाते हुए बोला,
सभ्या: इसे देखो गांव में भी इसे पूर हीरो बनके घूमना है, बैठ गुंजन।
सागर: अरे बुआ कभी कभी तो मौका मिलता है अब तुम रोक मत लगाओ और जल्दी बैठो।
सभ्या: हां लल्ला बैठ रही हूं,
जल्दी ही सागर दोनों को बिठाकर मोटर साइकिल से गांव के बाहर की ओर चल दिया, रास्ते भर दोनों बातें करती जा रही थी,
कुछ ही देर में सागर ने मोटर साइकिल को गांव के बाहर एक खेत के पास लगा दिया जहां बाकी सब लोग पहले से मौजूद थे और इंतज़ार कर रहे थे,
सविता: अरे बड़ी देर लगा दी बहन जी।
सभ्या: अरे बहन जी जिस दिन सोचो सब जल्दी निपटा लें उसी दिन देर हो जाती है।
गुंजन: ये साड़ी तो बड़ी खिल रही है तुम पर सविता जीजी।
नीलेश: अरे अब और बातों में मत लग जाओ अब मुहूर्त निकल जाएगा।
सभ्या: हां हां भाई चलो चलो।
कर्मा: अनुज और सागर सबकी वीडियो आनी चाहिए अच्छे से।
अनुज: हां भैया,
नीलेश: चलो भाई पहले सारी लड़कियां और फिर सारी औरतें काम पर लग जाओ।
नीलेश के कहने पर अंजली, किरन, पल्ली, लाड़ो, नीतू इन सब ने एक एक ईंट उठाई और खुदी हुई नींव में लगानी शुरू कर दी। सब ने ज़ोर से ताली मारकर अपनी खुशी जाहिर की।
वहीं बगल में खड़े महिपाल और शैलेश बातें कर रहे थे,
महिपाल: शैलेश बाबू आखिर हम लोगों की मेहनत रंग लाई और स्कूल का काम शुरू हो ही गया,
शैलेश: अरे वो तो होना ही था भाई साहब, अच्छे काम के लिए कर रहे हैं ऊपर से हमारी मेहनत।
महिपाल: शैलेश भाई समझ नहीं आता, कि आपका और नीलेश भाई का कैसे धन्यवाद करूं? मेरे इस सपने में आप लोग जुड़े और आपकी वजह से ही ये आज सच हो रहा है।
इतने में पीछे से नीलेश बोले: अरे महिपाल भाई अब तो समधी होने वाले हैं अब कहां इन बातों में पड़ते हो, जो हमारा है वो तुम्हारा है।
उधर लड़कियों के बाद अब औरतें भी एक एक ईंट लगा रही थी, ये नीलेश ने ही उपाय बताया था कि सभी लड़कियों और औरतों से ईंट लगवा कर शुभ काम की शुरुआत की जाएगी। ईंट लगने के बाद पूरे गांव में मिठाई बांटी गई, वहीं अपने करीबी परिवारों की दावत भी हुई। ये सब होने के बाद नीलेश, महिपाल, शैलेश, राजन, नाना, और जमुना, राजपाल और दीनू सब बाग में बैठे बातें कर रहे थे लड़के कर्मा, पीयूष, अनुज, सागर सरजू बिरजू और जग्गू भी वहीं थे
नाना: बड़के बाबू घर का काम भी पूरा हो गया है कब का सोचा है ग्रह प्रवेश?
नाना ने नीलेश से पूछा,
नीलेश: हां बाबा तुम बताओ क्या करें अब तैयार है तो क्यों देर करें?
राजपाल: अरे तो कोई शुभ मुहूर्त देख कर लो ग्रह प्रवेश और क्या?
कर्मा: अरे मैं बताऊं सबसे अच्छा दिन?
कर्मा ने बोला तो सब उसकी ओर देखने लगे,
नीलेश: हां बता।
कर्मा: 23 मार्च को करते हैं,
महिपाल: 23 मार्च को ऐसा क्या है?
शैलेश: अरे बिल्कुल सही सोचा है कर्मा तूने, अरे 23 मार्च को भैया और भाभी की सालगिरह होती है, इससे बढ़िया दिन क्या होगा क्यों भैया?
राजन: अरे कह तो सही रही हो शैलेश बाबू।
राजपाल: तो यही तय रखो 10-12 दिन ही तो हैं
कर्मा: पर सिर्फ ग्रह प्रवेश नहीं होगा, बड़ी दावत करते हैं, सभी रिश्तेदारो को बुलाते हैं।
नीलेश: कर्मा सही कह रहा है, काफी समय हो गया कोई दावत हुई भी नहीं है घर में, पर अब सुनो ये बात औरतों में नहीं जानी चाहिए़ खास कर इसकी मम्मी तक।
कर्मा: अरे वाह पापा मां को सरप्राइज़ दोगे।
नीलेश: हां वही देंगे, जो तू बोला।
इस पर सब हंसने लगते हैं,
राजन: तो फिर कल से ही तैयारी पर जुट जाते हैं, एक खेत को सपाट करवा देते हैं टेंट वगैरह लगवाने के लिए।
नीलेश: अरे खेत नहीं, इस बार की दावत खास होगी और खास जगह होगी।
शैलेश: खास जगह कहां भैया?
इस पर नीलेश मुस्कुराते हैं।
जहां इनकी दावत की तैयारियां चल रही हैं मैं बताता हूं कि आखिरी बार जो आपने देखा कैसे अंजली ने अपने पापा से चुदवाया था उस रात को दो महीने बीत चुके थे और इन दो महीनो में दोनों परिवार काफी करीब आ चुके थे, नीलेश के और बाकी सब के परिवार को तरह ही महिपाल के परिवार में भी अब कोई पर्दा नहीं बचा था। सब खुल कर एक दूसरे के साथ मज़ा कर रहे थे, कुछ नए रिश्ते भी बने थे ज़्यादा गहराई में न जाते हुए मैं आपको झलकियों में सब दिखा देता हूं, बाकी आप लोग समझदार हैं।
अंजली ने अपने होने वाले ससुर नीलेश की सेवा पहले ही शुरू कर दी थी। वो उनके लंड को मुंह में लेकर इतना गहरा चूस देती कि नीलेश की आंखें ऊपर चढ़ जातीं —गले तक उतारकर, आंखों में आंसू और मुंह से रस टपकाते हुए।
नीलेश ने भी अपनी होने वाली बहू अंजली के तीनों छेदों — मुंह, बुर और गांड — का पूरा स्वाद चख लिया था। ऐसी जवान, कसी हुई, रसीली बहू पाकर नीलेश का लंड हमेशा फूलकर खड़ा रहता। वो अंजली को घंटों चोदते, उसके चूचे दबाते, गांड पर थप्पड़ मारते उसे सहलाते और खूब लाड़ करते
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वहीं नीलेश ने भी अपनी होने वाली बहू के तीनों छेदों का स्वाद अच्छे से चख लिया था, और ये कहना गलत नहीं होगा कि ऐसी बहू पाकर नीलेश और उनका लंड दोनों ही फूले नहीं समा रहे थे,
दूसरी ओर कर्मा भी अपनी सास सविता और सलहज रानी से मेलजोल बढ़ाने में पीछे नहीं था। वो दोनों औरतें उसके मोटे, लंबे लंड की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़तीं। रानी और सविता मिलकर कर्मा के बदन को खूब चूसती चाटती — एक उसके लंड को चूसती तो दूसरी उसके मुंह पर बैठ जाती। कभी सविता उसके लंड की सवारी करती तो कभी रानी।
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रानी और सविता दोनों ही कर्मा और उसके मोटे लंड की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ती थी और छोड़ें भी कैसे आखिर होने वाला दामाद जो था, कर्मा भी दोनों औरतों को कसकर चोदता था।
बीच-बीच में महिपाल का पूरा परिवार चोदमपुर में रातें बिताने आता। अब जब सब खुल चुके थे, तो पीयूष और महिपाल ने चोदमपुर की जवान कलियों — किरन, पल्ली, नीतू और लाड़ो — का पूरा मजा लिया। ये चारों गरम-गरम लड़कियां उनके लंडों को अपनी बुर और गांड में लेकर चीख-चीखकर चुदतीं। महिपाल और पीयूष को अपनी किस्मत पर यकीन नहीं होता कि इतनी सुंदर, कामुक और भरी-पूरी देह वाली लड़कियां उन्हें मिल गईं।
रानी और प्रेमा दोनों बहुएं मर्दों की सेवा में हमेशा तैयार रहतीं। दोनों की जोड़ी बहुत खतरनाक थी — एक साथ दो-दो लंड चूसतीं, गांड और बुर एक साथ चुदवातीं। कभी प्रेमा अपने ससुर और देवर के साथ रानी को बांटती तो कभी रानी अपने पति और ससुर के साथ प्रेमा को।
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सविता अपने समधियों के बीच सबसे लोकप्रिय हो गई थी। अकेली समधन होकर भी वो इतने सारे मर्दों को संतुष्ट करती — एक के बाद एक लंड लेकर, मुंह में, बुर में, गांड में। कभी-कभी तो सबको एक साथ सन्तुष्ट करती, उसकी चीखें अक्सर घरों में गूंजती रहती थी उसे अपनी जीवन का ये पढ़ाव बहुत भा रहा था। एक साथ जब मर्द उसके बदन को निचोड़ते तो उसे लगता वो जवान हो रही है
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अंजली ससुराल की जिम्मेदारियां सीख रही थी। वो किरन के साथ लेस्बियन मस्ती करती, अपनी ननद की चूत चाटती। मौसा-ससुर या चाचा-ससुर के साथ अपनी ननद को मिलाकर चुदवाती।
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उसे सब काम अच्छे से आता था, बढ़ों के साथ साथ वो जवानों का भी पूरा ख्याल रखती थी, अनुज और सागर तो ऐसी भाभी पाकर बहुत खुश थे और अपनी होने वाली भाभी के साथ खूब समय बिताते थे
अनुज और सागर अपनी भाभी को पाकर फूले नहीं समाते — कभी अकेले, कभी कर्मा के साथ मिलकर तीनों अंजली को चोदते। अंजली तीनों लंडों की सेवा करती — एक मुंह में, एक बुर में, एक गांड में। सभ्या की उत्तराधिकारी बनने के सभी गुण अंजली सीख रही थी सभ्या भी उसे बड़े प्यार से सब कुछ बताती और सिखाती थी
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कभी कभी कर्मा भी अपने भाइयों के साथ मिलकर अंजली के साथ खूब खेलता और अंजली तीनों की खूब सेवा करती थी,
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इसी तरह से काम और कामलीला में पिछले दो महीने बीत चुके थे इसी बीच स्कूल के भी सारे कागजात तैयार हो चुके थे और आज स्कूल की नींव भी पड़ने की शुरुआत हो चुकी थी, वहीं नीलेश और सभ्या की सालगिरह पर लोगों ने एक बड़ी दावत रखने का निर्णय लिया था और ये बात तब तक सिर्फ मर्दों में रहने वाली थी,
अगले 10-12 दिन चोदमपुर में खूबसूरत और चुदाई भरी तैयारियों में ऐसे ही गुजर गए। मर्द लोग दिन-रात एक करके सारी व्यवस्था चुपके से कर रहे थे, ताकि औरतों को भनक तक न लगे। नीलेश ने खुद फोन उठा-उठाकर सभी खास रिश्तेदारों को निमंत्रण दिया।
दावत वाले दिन सुबह सबसे पहले गृह प्रवेश की पूजा हुई। औरतों को बस इतना ही बताया गया था कि “आज घर का ग्रह प्रवेश है, दिन में पूजा होगी।” सब औरतें खुश-खुश पूजा में शामिल हुईं। सभ्या तो और भी ज्यादा खुश थी नया घर जो बन कर तैयार था, पूजा समाप्त होते ही सबने खाना-पीना किया।
कर्मा, अनुज, सागर, पीयूष और बाकी जवान लड़कों ने मिलकर नीलेश द्वारा बताई हुई उस “खास जगह” को पूरी तरह साफ-सुथरा कर दिया। वो जगह गांव से थोड़ी दूर, एक खूबसूरत बाग के बीच में बनी छोटी सी हवेली थी जो नीलेश ने सभ्या के लिए ही बनवाई थी (अपडेट 159देखें और जानकारी के लिए), जो अब पूरी तरह नई जैसी चमक रही थी। फर्श चमकाए गए, दीवारों पर रंग-बिरंगी लाइटें लगाई गईं, बीच में बड़ा-सा स्टेज बनवाया गया, चारों तरफ कुर्सियां आदि बिछाई गईं । मेहमानों के ठहरने के लिए अलग-अलग कमरे तैयार किए गए, खाने-पीने का पूरा इंतजाम — शराब कोलड्रिंक, मिठाई, फल — सब कुछ तैयार था सुबह से ही हलवाई लग गए थे और स्वादिश्ट खाना बना कर तैयार कर दिया था शैलेश एक बड़ा सा केक ले आए थे। मेहमानों को सीधा वहीं ले जाया जा रहा था,
शाम ढलते ही असली खेल शुरू होने वाला था।
कर्मा ने पहले ही अंजली, किरन और पल्ली को चुपके से बता दिया था — “शाम को कुछ बहुत खास है। सब औरतों को तैयार कर दो, खासकर मां को। उन्हें इतना सजाओ कि देखने वाला बस देखता रह जाए।
शाम का समय आ गया। सूरज ढल चुका था और हवेली की लाइटें जल उठी थीं। अंजली, किरन और पल्ली तीनों मिलकर सभ्या को सजा रही थीं। सभ्या लाल रंग की भारी साड़ी में बेहद आकर्षक लग रही थी।
अंजली सभ्या के बाल संवार रही थी, किरन उसके गले में भारी सोने का हार डाल रही थी और पल्ली उसके कान में झुमके लगा रही थी। सभ्या बार-बार पूछ रही थी,
सभ्या: “अरे बच्चों बताओ तो सही, इतना क्यों सजा रही हो मुझे? ग्रह प्रवेश तो हो गया ना? अब ये सब क्या है?”
अंजली मुस्कुराते हुए उसके गाल पर किस करते हुए बोली, “अरे मां, अपनी मां को और सुंदर बना रही हूं आप क्यों परेशान हो रही हो।
किरन ने सभ्या की कमर पर हाथ फेरते हुए शरारत से कहा, “हां बुआ, आज तुम इतनी सुंदर लगोगी की फूफाजी देखते ही शुरू हो जाएंगे।
सभ्या शर्म से लाल हो गई, लेकिन खुश भी थी। “अरे पागल लड़कियां, तुम लोगों को भी न जाने क्या हो गया है।
सब औरतें तैयार हो चुकी थीं, लेकिन उन्हें अभी भी सिर्फ इतना पता था कि “शाम को कुछ खास प्रोग्राम है”।
जारी रहेगी
अरे भाई ये क्या किया आपने लोगों के बातों में आगयों हों क्या मैनें सोचा कि अंजलि कि सेक्स लाइफ के बारेमे आराम से लिखोगे एक एक मर्द के साथ धीरे धीरेमहिपाल ने आगे बढ़ कर अंजली को बाहों में उठाया, तो अंजली की आंखे कुछ पल के लिए खुली पर खुद को अपने पापा की बाहों में देखा तो फिर से बंद कर ली, महिपाल ने उसे ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया, और सविता ने चादर ओढ़ा दी। दोनों कमरे से बाहर निकले इस एहसास के साथ की ये एक नया सवेरा हो रहा था उनके जीवन में एक नए जीवन की शुरुआत थी।
अपडेट 262
चोदम पुर की एक और सुहानी सुबह थी, कर्मा के घर में अभी खामोशी थी क्योंकि अधिकतर लोग घर पर नहीं थे, आज उन सब के लिए बहुत खुशी का दिन था सब सुबह सुबह ही नहा धो कर तैयार निकल हुए थे अभी सिर्फ गुंजन और सभ्या थे, सभ्या साड़ी बांध रही थी,
सभ्या: अरे गुंजन ये पीछे पिन लगा देना, मुई लग ही नहीं रही,
गुंजन: अरे जीजी तुम्हारे पीछे पिन लगाने को तो न जाने कितने तैयार बैठे हैं आओ लगा दें।
गुंजन ने सभ्या के पिछवाड़े को मसलते हुए कहा,
सभ्या: तुझे भी न हर समय मज़ाक ही चढ़ा रहता है, चल जल्दी पिन लगा, नहीं तो सूखा बेलन घुसा दूंगी तेरी गांड में।
गुंजन: हाय दैय्या, बेरहम नंद।
गुंजन सभ्या की साड़ी में पीछे से पिन लगाते हुए बोली, इतने में बाहर से सागर की आवाज़ आई, और अगले ही पल वो कमरे में था
सागर: अरे बुआ अभी तैयार नहीं हुई तुम वहां सब लोग इंतजार कर रहे हैं।
सभ्या: अरे बस हो गई लल्ला, ये तेरी मां है न ये ही देर करवा रही है।
गुंजन: ओ हो मैं तो देर करवा ही रही हूं, खुद के पतीले इतने बड़े कर लिए हैं कि साड़ी नहीं टिकती और हमारी गलती है। गुंजन हंसते हुए बोली,
सभ्या: अब चल नहीं तो तेरे पतीले सुजा दूंगी मैं।
सागर अब जल्दी चलो यार फूफाजी का फोन आ रहा है, आओ बैठो।
सागर मोटरसाइकिल पर बैठते हुए चश्मा लगाते हुए बोला,
सभ्या: इसे देखो गांव में भी इसे पूर हीरो बनके घूमना है, बैठ गुंजन।
सागर: अरे बुआ कभी कभी तो मौका मिलता है अब तुम रोक मत लगाओ और जल्दी बैठो।
सभ्या: हां लल्ला बैठ रही हूं,
जल्दी ही सागर दोनों को बिठाकर मोटर साइकिल से गांव के बाहर की ओर चल दिया, रास्ते भर दोनों बातें करती जा रही थी,
कुछ ही देर में सागर ने मोटर साइकिल को गांव के बाहर एक खेत के पास लगा दिया जहां बाकी सब लोग पहले से मौजूद थे और इंतज़ार कर रहे थे,
सविता: अरे बड़ी देर लगा दी बहन जी।
सभ्या: अरे बहन जी जिस दिन सोचो सब जल्दी निपटा लें उसी दिन देर हो जाती है।
गुंजन: ये साड़ी तो बड़ी खिल रही है तुम पर सविता जीजी।
नीलेश: अरे अब और बातों में मत लग जाओ अब मुहूर्त निकल जाएगा।
सभ्या: हां हां भाई चलो चलो।
कर्मा: अनुज और सागर सबकी वीडियो आनी चाहिए अच्छे से।
अनुज: हां भैया,
नीलेश: चलो भाई पहले सारी लड़कियां और फिर सारी औरतें काम पर लग जाओ।
नीलेश के कहने पर अंजली, किरन, पल्ली, लाड़ो, नीतू इन सब ने एक एक ईंट उठाई और खुदी हुई नींव में लगानी शुरू कर दी। सब ने ज़ोर से ताली मारकर अपनी खुशी जाहिर की।
वहीं बगल में खड़े महिपाल और शैलेश बातें कर रहे थे,
महिपाल: शैलेश बाबू आखिर हम लोगों की मेहनत रंग लाई और स्कूल का काम शुरू हो ही गया,
शैलेश: अरे वो तो होना ही था भाई साहब, अच्छे काम के लिए कर रहे हैं ऊपर से हमारी मेहनत।
महिपाल: शैलेश भाई समझ नहीं आता, कि आपका और नीलेश भाई का कैसे धन्यवाद करूं? मेरे इस सपने में आप लोग जुड़े और आपकी वजह से ही ये आज सच हो रहा है।
इतने में पीछे से नीलेश बोले: अरे महिपाल भाई अब तो समधी होने वाले हैं अब कहां इन बातों में पड़ते हो, जो हमारा है वो तुम्हारा है।
उधर लड़कियों के बाद अब औरतें भी एक एक ईंट लगा रही थी, ये नीलेश ने ही उपाय बताया था कि सभी लड़कियों और औरतों से ईंट लगवा कर शुभ काम की शुरुआत की जाएगी। ईंट लगने के बाद पूरे गांव में मिठाई बांटी गई, वहीं अपने करीबी परिवारों की दावत भी हुई। ये सब होने के बाद नीलेश, महिपाल, शैलेश, राजन, नाना, और जमुना, राजपाल और दीनू सब बाग में बैठे बातें कर रहे थे लड़के कर्मा, पीयूष, अनुज, सागर सरजू बिरजू और जग्गू भी वहीं थे
नाना: बड़के बाबू घर का काम भी पूरा हो गया है कब का सोचा है ग्रह प्रवेश?
नाना ने नीलेश से पूछा,
नीलेश: हां बाबा तुम बताओ क्या करें अब तैयार है तो क्यों देर करें?
राजपाल: अरे तो कोई शुभ मुहूर्त देख कर लो ग्रह प्रवेश और क्या?
कर्मा: अरे मैं बताऊं सबसे अच्छा दिन?
कर्मा ने बोला तो सब उसकी ओर देखने लगे,
नीलेश: हां बता।
कर्मा: 23 मार्च को करते हैं,
महिपाल: 23 मार्च को ऐसा क्या है?
शैलेश: अरे बिल्कुल सही सोचा है कर्मा तूने, अरे 23 मार्च को भैया और भाभी की सालगिरह होती है, इससे बढ़िया दिन क्या होगा क्यों भैया?
राजन: अरे कह तो सही रही हो शैलेश बाबू।
राजपाल: तो यही तय रखो 10-12 दिन ही तो हैं
कर्मा: पर सिर्फ ग्रह प्रवेश नहीं होगा, बड़ी दावत करते हैं, सभी रिश्तेदारो को बुलाते हैं।
नीलेश: कर्मा सही कह रहा है, काफी समय हो गया कोई दावत हुई भी नहीं है घर में, पर अब सुनो ये बात औरतों में नहीं जानी चाहिए़ खास कर इसकी मम्मी तक।
कर्मा: अरे वाह पापा मां को सरप्राइज़ दोगे।
नीलेश: हां वही देंगे, जो तू बोला।
इस पर सब हंसने लगते हैं,
राजन: तो फिर कल से ही तैयारी पर जुट जाते हैं, एक खेत को सपाट करवा देते हैं टेंट वगैरह लगवाने के लिए।
नीलेश: अरे खेत नहीं, इस बार की दावत खास होगी और खास जगह होगी।
शैलेश: खास जगह कहां भैया?
इस पर नीलेश मुस्कुराते हैं।
जहां इनकी दावत की तैयारियां चल रही हैं मैं बताता हूं कि आखिरी बार जो आपने देखा कैसे अंजली ने अपने पापा से चुदवाया था उस रात को दो महीने बीत चुके थे और इन दो महीनो में दोनों परिवार काफी करीब आ चुके थे, नीलेश के और बाकी सब के परिवार को तरह ही महिपाल के परिवार में भी अब कोई पर्दा नहीं बचा था। सब खुल कर एक दूसरे के साथ मज़ा कर रहे थे, कुछ नए रिश्ते भी बने थे ज़्यादा गहराई में न जाते हुए मैं आपको झलकियों में सब दिखा देता हूं, बाकी आप लोग समझदार हैं।
अंजली ने अपने होने वाले ससुर नीलेश की सेवा पहले ही शुरू कर दी थी। वो उनके लंड को मुंह में लेकर इतना गहरा चूस देती कि नीलेश की आंखें ऊपर चढ़ जातीं —गले तक उतारकर, आंखों में आंसू और मुंह से रस टपकाते हुए।
नीलेश ने भी अपनी होने वाली बहू अंजली के तीनों छेदों — मुंह, बुर और गांड — का पूरा स्वाद चख लिया था। ऐसी जवान, कसी हुई, रसीली बहू पाकर नीलेश का लंड हमेशा फूलकर खड़ा रहता। वो अंजली को घंटों चोदते, उसके चूचे दबाते, गांड पर थप्पड़ मारते उसे सहलाते और खूब लाड़ करते
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वहीं नीलेश ने भी अपनी होने वाली बहू के तीनों छेदों का स्वाद अच्छे से चख लिया था, और ये कहना गलत नहीं होगा कि ऐसी बहू पाकर नीलेश और उनका लंड दोनों ही फूले नहीं समा रहे थे,
दूसरी ओर कर्मा भी अपनी सास सविता और सलहज रानी से मेलजोल बढ़ाने में पीछे नहीं था। वो दोनों औरतें उसके मोटे, लंबे लंड की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़तीं। रानी और सविता मिलकर कर्मा के बदन को खूब चूसती चाटती — एक उसके लंड को चूसती तो दूसरी उसके मुंह पर बैठ जाती। कभी सविता उसके लंड की सवारी करती तो कभी रानी।
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रानी और सविता दोनों ही कर्मा और उसके मोटे लंड की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ती थी और छोड़ें भी कैसे आखिर होने वाला दामाद जो था, कर्मा भी दोनों औरतों को कसकर चोदता था।
बीच-बीच में महिपाल का पूरा परिवार चोदमपुर में रातें बिताने आता। अब जब सब खुल चुके थे, तो पीयूष और महिपाल ने चोदमपुर की जवान कलियों — किरन, पल्ली, नीतू और लाड़ो — का पूरा मजा लिया। ये चारों गरम-गरम लड़कियां उनके लंडों को अपनी बुर और गांड में लेकर चीख-चीखकर चुदतीं। महिपाल और पीयूष को अपनी किस्मत पर यकीन नहीं होता कि इतनी सुंदर, कामुक और भरी-पूरी देह वाली लड़कियां उन्हें मिल गईं।
रानी और प्रेमा दोनों बहुएं मर्दों की सेवा में हमेशा तैयार रहतीं। दोनों की जोड़ी बहुत खतरनाक थी — एक साथ दो-दो लंड चूसतीं, गांड और बुर एक साथ चुदवातीं। कभी प्रेमा अपने ससुर और देवर के साथ रानी को बांटती तो कभी रानी अपने पति और ससुर के साथ प्रेमा को।
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सभी मर्द भी दोनों बहुओं का साथ पाकर बहुत खुश रहते थे और संतुष्ट होकर ही निकलते थे।
सविता अपने समधियों के बीच सबसे लोकप्रिय हो गई थी। अकेली समधन होकर भी वो इतने सारे मर्दों को संतुष्ट करती — एक के बाद एक लंड लेकर, मुंह में, बुर में, गांड में। कभी-कभी तो सबको एक साथ सन्तुष्ट करती, उसकी चीखें अक्सर घरों में गूंजती रहती थी उसे अपनी जीवन का ये पढ़ाव बहुत भा रहा था। एक साथ जब मर्द उसके बदन को निचोड़ते तो उसे लगता वो जवान हो रही है
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वहीं अंजली अपने ससुराल में आने वाली जिम्मेदारी कैसे उठानी है और लोगों के साथ मेलजोल बढ़ाना सीख रही थी, आखिर पूरे घर को उसे ही चलाना था इसलिए वो इस बात को काफी गंभीरता से लेती थी
अंजली ससुराल की जिम्मेदारियां सीख रही थी। वो किरन के साथ लेस्बियन मस्ती करती, अपनी ननद की चूत चाटती। मौसा-ससुर या चाचा-ससुर के साथ अपनी ननद को मिलाकर चुदवाती।
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उसे सब काम अच्छे से आता था, बढ़ों के साथ साथ वो जवानों का भी पूरा ख्याल रखती थी, अनुज और सागर तो ऐसी भाभी पाकर बहुत खुश थे और अपनी होने वाली भाभी के साथ खूब समय बिताते थे
अनुज और सागर अपनी भाभी को पाकर फूले नहीं समाते — कभी अकेले, कभी कर्मा के साथ मिलकर तीनों अंजली को चोदते। अंजली तीनों लंडों की सेवा करती — एक मुंह में, एक बुर में, एक गांड में। सभ्या की उत्तराधिकारी बनने के सभी गुण अंजली सीख रही थी सभ्या भी उसे बड़े प्यार से सब कुछ बताती और सिखाती थी
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कभी कभी कर्मा भी अपने भाइयों के साथ मिलकर अंजली के साथ खूब खेलता और अंजली तीनों की खूब सेवा करती थी,
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इसी तरह से काम और कामलीला में पिछले दो महीने बीत चुके थे इसी बीच स्कूल के भी सारे कागजात तैयार हो चुके थे और आज स्कूल की नींव भी पड़ने की शुरुआत हो चुकी थी, वहीं नीलेश और सभ्या की सालगिरह पर लोगों ने एक बड़ी दावत रखने का निर्णय लिया था और ये बात तब तक सिर्फ मर्दों में रहने वाली थी,
अगले 10-12 दिन चोदमपुर में खूबसूरत और चुदाई भरी तैयारियों में ऐसे ही गुजर गए। मर्द लोग दिन-रात एक करके सारी व्यवस्था चुपके से कर रहे थे, ताकि औरतों को भनक तक न लगे। नीलेश ने खुद फोन उठा-उठाकर सभी खास रिश्तेदारों को निमंत्रण दिया।
दावत वाले दिन सुबह सबसे पहले गृह प्रवेश की पूजा हुई। औरतों को बस इतना ही बताया गया था कि “आज घर का ग्रह प्रवेश है, दिन में पूजा होगी।” सब औरतें खुश-खुश पूजा में शामिल हुईं। सभ्या तो और भी ज्यादा खुश थी नया घर जो बन कर तैयार था, पूजा समाप्त होते ही सबने खाना-पीना किया।
कर्मा, अनुज, सागर, पीयूष और बाकी जवान लड़कों ने मिलकर नीलेश द्वारा बताई हुई उस “खास जगह” को पूरी तरह साफ-सुथरा कर दिया। वो जगह गांव से थोड़ी दूर, एक खूबसूरत बाग के बीच में बनी छोटी सी हवेली थी जो नीलेश ने सभ्या के लिए ही बनवाई थी (अपडेट 159देखें और जानकारी के लिए), जो अब पूरी तरह नई जैसी चमक रही थी। फर्श चमकाए गए, दीवारों पर रंग-बिरंगी लाइटें लगाई गईं, बीच में बड़ा-सा स्टेज बनवाया गया, चारों तरफ कुर्सियां आदि बिछाई गईं । मेहमानों के ठहरने के लिए अलग-अलग कमरे तैयार किए गए, खाने-पीने का पूरा इंतजाम — शराब कोलड्रिंक, मिठाई, फल — सब कुछ तैयार था सुबह से ही हलवाई लग गए थे और स्वादिश्ट खाना बना कर तैयार कर दिया था शैलेश एक बड़ा सा केक ले आए थे। मेहमानों को सीधा वहीं ले जाया जा रहा था,
शाम ढलते ही असली खेल शुरू होने वाला था।
कर्मा ने पहले ही अंजली, किरन और पल्ली को चुपके से बता दिया था — “शाम को कुछ बहुत खास है। सब औरतों को तैयार कर दो, खासकर मां को। उन्हें इतना सजाओ कि देखने वाला बस देखता रह जाए।
शाम का समय आ गया। सूरज ढल चुका था और हवेली की लाइटें जल उठी थीं। अंजली, किरन और पल्ली तीनों मिलकर सभ्या को सजा रही थीं। सभ्या लाल रंग की भारी साड़ी में बेहद आकर्षक लग रही थी।
अंजली सभ्या के बाल संवार रही थी, किरन उसके गले में भारी सोने का हार डाल रही थी और पल्ली उसके कान में झुमके लगा रही थी। सभ्या बार-बार पूछ रही थी,
सभ्या: “अरे बच्चों बताओ तो सही, इतना क्यों सजा रही हो मुझे? ग्रह प्रवेश तो हो गया ना? अब ये सब क्या है?”
अंजली मुस्कुराते हुए उसके गाल पर किस करते हुए बोली, “अरे मां, अपनी मां को और सुंदर बना रही हूं आप क्यों परेशान हो रही हो।
किरन ने सभ्या की कमर पर हाथ फेरते हुए शरारत से कहा, “हां बुआ, आज तुम इतनी सुंदर लगोगी की फूफाजी देखते ही शुरू हो जाएंगे।
सभ्या शर्म से लाल हो गई, लेकिन खुश भी थी। “अरे पागल लड़कियां, तुम लोगों को भी न जाने क्या हो गया है।
सब औरतें तैयार हो चुकी थीं, लेकिन उन्हें अभी भी सिर्फ इतना पता था कि “शाम को कुछ खास प्रोग्राम है”।
जारी रहेगी
अरे भाई ये क्या किया आपने लोगों के बातों में आगयों हों क्या मैनें सोचा कि अंजलि कि सेक्स लाइफ के बारेमे आराम से लिखोगे एक एक मर्द के साथ धीरे धीरे
पर आप तो आप हो शायद आपको भी बोर आगया होगा आपके नए कथा के लिए समय लेरहे हो शायद
स्टोरी मे थोड़ा twist लावों की थोड़ा इंटरेस्ट आजाएं सबको
मेरा सोच ये था कि राजपाल और महिपाल दोनों भाई है उनका कुछ फ्लैशबैक कुछ झगड़ों के कारण अलग हुए हो प्रेमी और रानी उन्हें साथ लाने की प्रयास हो बाकी लोगोंको हे आराम से पता हो दोनों भाई फिर से एक साथ रहने की ठान ली हो
ऐसे ऐसे कही ख्याल है कहानी मे इंटरेस्ट आने के बजाय अगर आपको कुछ मदद चाहिए तो DM करो (अगर) मैने कहा.
ठीक है अब अपडेट के बारे मे बाप के साथ वाली तो बहुत बढ़िया लगा है, एक होने वाले ससुर के साथ सिंगल एपिसोड दिए तो और भी बढ़िया लगता था.
सिर्फ मेरे विचार है अगर आपको कुछ तकलीफ हुई तो माफी चाहूंगा.