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dhparikh

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Update :54(चरम सुख की शिक्षा - भाग ३)


प्रज्ञा , दादी के द्वारा यूँ उसके झांटो को कस के खींचे जाने से चीत्कार भर उठी । उसका रोम रोम एक बहुत ही नया एहसास से भर गया, जिसे शायद उसने आज तक कभी महसूस ही नहीं किया था । दादी ने प्रज्ञा के योनि का अवलोकन बहुत ही अच्छा से किया , और दादी अपने आप को आश्वस्त कर चुकी थी कि उसकी छोटी पोती का कौमार्य एकदम सुरक्षित है , ओर उसे अभी तक किसी ने भंग नहीं किया है । आपको तो याद ही होगा कि दादी ने प्राची की शादी से पहले भी ये देखा था कि वो असली कुँवारी है या नहीं और उसने भी अपने दादी को निराश नहीं किया था ।

दरअसल दादी मानती है कि लड़कियों का सबसे बड़ा तौफा, जो वो अपने पति को दे सकती है, वो है उनका कौमार्य का भेंट। वो लड़कियों की पवित्रता की निशानी जैसा था उनके लिए । दादी को दोनों पोती पे पूरा विश्वास था, कि उनकी पोतियां बाहर कभी भी ऐसा काम नहीं करेगी, जिससे घर की बदनामी हो जाए । और दोनों पोती उनके इस विचार पे खरे उतरी थी ।

दादी अभी अपने छोटी पोती की मालिश कर रही थी, जो कि अब उनके सामने पूरी नंगी तो हो ही चुकी थी । प्रज्ञा का बदन दमक रहा था । दादी का मानना था कि ये दमक एक कुंआरी लड़की का ही हो सकता है । जो लड़कियां सेक्स करने लगती है , उनमें ये नयापन और ये दमकदार अंदाज कम हो जाता है ।

दादी प्रज्ञा के जननांग के पाटों को अब ढीला छोड़ दी थी । दादी ने जैसे ही प्राची के झांटो को छोड़ा, उसके चूत की पंखुड़ियां आपस में फिर से मिल गई और पाटा बंद हो गया । दादी ने अब तेल अपने हथेली में सीसी से थोड़ा सा उड़ेला और प्राची के योनि के अगल बगल के के अंदरूनी अंगो में लगाने लगी , उसके जांघों से ले कर, प्रज्ञा के नाभि तक, दादी ने प्रज्ञा की जम के मालिश किया । बीच बीच में दादी की उंगलियां भी प्राची के घने काले झांटो में फंस जा रहे थे ।

दादी ने प्रज्ञा से बोला : मेरी बच्ची,कैसा लग रहा है ?

प्रज्ञा: ( आँखे मूंदे हुए ) : दादी , आपके हाथों में जादू है । बहुत मजा और सुकून मिल रहा है दादी ।

दादी : अच्छा मेरी बच्ची, इन बड़े बालों को क्यों नहीं काटती तू ? ये तुझे बर्दाश्त कैसे होते है ? गर्मी में तो इतना खुजली देता है ये, कि पूछो मत , फिर भी तेरे योनि पे इतने बाल, क्यों बेटी ?

प्रज्ञा के लिए ये सवाल थोड़ा उसके चेहरे पे सावलिया निशान ही दे गया : क्यों दादी , इसे कटनी भी परति है क्या ? मुझे तो पता ही नहीं था ।

दादी : हाँ,बेटी ये अपनी अपनी चॉयस है । कई लड़कियां काट भी लेती है , और कई नहीं भी , मगर मेरे हिसाब से तो, ये जगह तू जितना साफ रखेगी उतना ही अच्छा रहेगा ना । अपना हाइजिन भी तो कोई चीज होती है ना। और तो और, ये ज्यादातर मर्दो को साफ़ सुथरी ही पसंद होती है ।

प्रज्ञा : ओह ओक दादी , फिर मै इसे साफ कर लूंगी ।

दादी : ठीक है बेटी ।

प्रज्ञा : पर दादी ये साफ कैसे करना होगा ? कैंची से, तो एक एक कर के , इतना घना बाल काटने में तो कितना टाइम जाएगा ।

दादी : अरे बाबू , तू चिंता मत कर , ये तो रेजर से २ मिनट में साफ ही जाएंगे ।

प्रज्ञा : ओह , वो पापा जो दाढ़ी बनाने के लिए इस्तेमाल करते है ।

दादी : हां वैसा ही , तेरे दीदी को भी मैने शादी से पहले एक दिलवाया था । उसे तेरे पापा के लिए अपनी योनि साफ रखनी होती है ना, ताकि पापा और दीदी के संभोग के समय ,उन्हें कोई परेशानी ना हो , लड़के को योनि चाटना बहुत पसंद होता है, अगर योनि साफ नहीं रहेगी तो वो कैसे चाटेंगे ।

प्राची : ओह ओक दादी , फिर मै दीदी से रेज़र लेके साफ कर लूंगी । और दादी क्या पापा ने भी दीदी की योनि चाटी होगी ।

दादी : ठीक है , लेकिन पहली बार किसी से मदद जरूर लेना , दीदी से या मुझसे भी के सकती है , एक बार मैं बता दूंगी तो फिर आसानी से तू खुद कर पाएगी । और शायद तेरे पापा ने जरूर ही तेरे दीदी की योनि चाटी तो होगी , ३ महीने से संभोग हो रहा था दोनों के बीच , तो ये तो जरूर हुआ होगा ।

प्रज्ञा : वाह दादी तब तो दीदी बहुत लक्की है ना, ठीक है मैं बालों की सफाई आपसे की करवा लूंगी , लेके आऊं क्या रेजर ?

दादी : अरे नहीं नहीं, मैने तो तुझे बाद में करने के लिए बोला है। अभी तो तेरी मालिश कर देती हु ।

प्रज्ञा : जी दादी , जैसा आप ठीक समझे।

दादी दुवारा अपने काम में लग गई और दादी के हाथ प्रज्ञा के जांघों से फिसलते हुई उसकी योनि के तरफ जाने लगी ।

दादी ने पहली बार प्रज्ञा के चुत को एक हल्का सा स्पर्श किया । प्रज्ञा तो मानो इस तरह किसी दूसरे का हाथ अपने चूत पे महसूस कर के गिनगिना सी गई । उसके मुंह से एक आह.... निकल गया ।

अब जा के प्रज्ञा समझ गई था कि , जब वो दीदी की मालिश कर रही थी, तो कैसा अनुभव हुआ होगा उन्हें । वो एकदम ठीक वैसा ही महसूस कर रही थी । उधर दादी अपने पोती को आज एक नए ज्ञान से अवगत करने का कोई कसर नहीं छोड़ने वाली थी ।

दादी ने अब प्रज्ञा के योनि के, ऊपर उठे फूलान पे, अपने हाथ पहुंचा दिये और उसे तेल से हल्का सा तर कर के ,एकदम मद्धम मद्धम मसाज़ करने लगी ।

Lazy Thrifty Fishingcat
प्रज्ञा एकदम ही बावरी सी हो गई थी । उसका मन एक अलग मादक नसे से भर गया था, और उसके आंखों में लाल डोरे उभर आए थे। सांसे भी अनियंत्रित हो गए थे और उसके छाती पे उगे नए-नए ,फुले-फुले , गोल-गोल दो फूल, हर गहरी सांसों के साथ ही ऊपर-नीचे होने लगे । दादी प्रज्ञा का जोश महसूस कर पा रही थी । दादी ने देखा कि प्रज्ञा के योनि द्वार फड़कने लगे थे । अब दादी ने पोती को चरम सुख का मज़ा देने का पूरा मन बना लिया था ।

दादी प्रज्ञा के योनि के दाने पे अपने हाथ ले गई और उसे अपने चुटकी में भर के , दादी ने थोड़ा दबाया। इससे प्राची एकदम चीत्कार उठी । एक सी..... सी सिसकी उसके मुंह से निकली जो पूरे कमरे में गूंज गई । दादी प्रज्ञा के सारे हाव-भाव देख रही थी । शायद दूसरी कोई महिला होती, और वो लेस्बियन नहीं भी होती, फिर भी वो प्रज्ञा के खूबसूरती में फिसल जरूर जाती। मगर दादी इतना संयम रखना अब सीख गई थी । वैसे भी अब उसकी उम्र में ये सब उसे शोभा भी नहीं देता ।

दादी अब अपने पोती के योनि द्वार को अच्छे से तेल लगा के ऊपर से नीचे तक अपने उंगलियों से छेड़ रही थी । प्रज्ञा भाग्यशाली थी कि उसका पहला फिंगरिंग करना ,उसे एक बहुत ही अनुभवी हाथों से हो रहा था । प्रज्ञा का जी अब उसके काबू में नहीं था और अलग तरह से मचलने लगा । ये एक नया एहसास था उसके लिए । दादी अपना काम शिद्दत से कर रही थी । प्रज्ञा के घने काले झांटो के बीच छुपे योनि को दादी ने ढूँढ निकल था और अब चूत के संपूर्ण चिरान पे दादी का उंगली नाचने लगा था । दादी का वश चलता तो वो , प्रज्ञा के योनि में अपना उंगली डाल के उसे चुदाई का मज़ा या एक टयूशन दे देती मगर उन्होंने ऐसा नहीं है क्योंकि वो जानती थी कि प्रज्ञा अभी सील पैक लड़की है , और उंगली भी उसके योनि में घुसने से उसका कौमार्य भंग ना हों जाए , इसलिए वो थोड़ा ध्यान रख रही थी।

दादी अपने अंगुलियों को प्रज्ञा के योनि पे अब बहुत जोरों से रगड़ने लगी । दादी थोड़ा थोड़ा योनि के मुहाने पे उंगली से प्रेशर भी बना रही थी , ऐसे लग रहा था जैसे प्रज्ञा की चुदाई हो रही हो । हां मगर ध्यान भी रख रही कि उनके उंगली से ही प्रज्ञा की सील न टूट जाए ।

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प्रज्ञा को तो बस इतना पता था, कि उसने ऐसा कभी महसूस नहीं किया , और अभी जो वो महसूस कर रही है , वो शायद दुनिया का सबसे अच्छा एहसास हो रहा था उसके लिए ।
Delectable Fuchsia Alligatorsnappingturtle
दादी अपने पोती के चेहरे पे बदलती हाव - भाव पढ़ती जा रही थी । वो लगभग अब १० मिनट से प्रज्ञा के गुप्तांग अच्छे से मल मल के मालिश कर रही थी । उसका आँख अचानक ही आधा बंद और आधा खुला जैसा हो गया, और प्रज्ञा के आँखों के पुतलियां एकदम ऊपर हो गई । और प्रज्ञा का पूरा शरीर थरथराने लगा था । दादी को आशंका हो रहा था, कि अब प्रज्ञा अपने जीवन में पहली बार चरम सुख प्राप्त करने के कगार पे आ चुकी है। प्रज्ञा ने अपने मुट्ठी से बेड को ,अपने हथेली से, भींच के ज़ोर से पकड़ लिया था । प्रज्ञा अचानक ही चिल्ला उठी और एक मूत के धार जैसा फव्वारा उसे चुत से छूट पड़ा । वो प्रज्ञा का काम रस था । जी हाँ प्रज्ञा स्क्वाट कर सकती थी ।
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उसके योनि से इतना ज़्यादा रस निकला कि दादी का साड़ी, उनका बेड शीट और यहाँ तक की , कुछ बूंदे दादी के मुंह पे भी पर गया । प्रज्ञा कमर उठा उठा के हिलकोरे खाने लगी । दादी का पुरा बिस्तर ही गीला हो गया और प्रज्ञा के योनि से फच फ़चा के सफेद गढ़ा तरल भी निकला। प्रज्ञा इतना छटपटाने के बाद शांत हो गई । पहली बार आज उसे अपने गुप्तांग का सही मतलब या उसका मजा समझ आया था । प्रज्ञा के चेहरे पे एक बहुत सकून भरा शान्ति साफ़ झलक रहा था । प्रज्ञा, जिंदगी में पहली बार झड़ चुकी थी।


अगला अपडेट जल्द ही......
Nice update.....
 

rockwin

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आपकी लेखनी सचमुच प्रभावशाली है। आपने जिस खूबसूरती से भावनाओं, आकर्षण और संवेदनशीलता को शब्दों में पिरोया है, वह पाठक को पूरी तरह कहानी के भीतर ले जाती है।

यह केवल एक कहानी नहीं लगी, बल्कि दो पात्रों के बीच का भावनात्मक जुड़ाव, उनकी मनःस्थिति और उनके रिश्ते की गहराई जीवंत होकर सामने आई। आपकी भाषा प्रवाहपूर्ण, सजीव और बेहद प्रभावशाली है। हर दृश्य में संवेदना और सौंदर्य का संतुलन बना रहा, जिसने कहानी को यादगार बना दिया।

ऐसी परिपक्व और भावनात्मक लेखनी बहुत कम देखने को मिलती है। आपकी रचनात्मकता और अभिव्यक्ति दोनों ही प्रशंसा के योग्य हैं। भविष्य में भी आपकी ऐसी ही उत्कृष्ट रचनाएँ पढ़ने की प्रतीक्षा रहेगी। हार्दिक बधाई!
 
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rockwin

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sexsarkar ji

रविवार का इंतज़ार खत्म ?????

आज आ रहा है नया अपडेट?!
और इस बार... अपडेट लंबा है! 😍

SEX होगा, रोमांच होगा, भावनाएँ होंगी... और कहानी ऐसे मोड़ लेगी कि पढ़ते-पढ़ते समय का पता ही नहीं चलेगा।
 
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रविवार का इंतज़ार खत्म ?????

आज आ रहा है नया अपडेट?!
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SEX होगा, रोमांच होगा, भावनाएँ होंगी... और कहानी ऐसे मोड़ लेगी कि पढ़ते-पढ़ते समय का पता ही नहीं चलेगा।
माफ़ी चाहता हु rockwin ji , आज कोई अपडेट नहीं दे पाया , आज थोड़ा बाहर चला गया था तो समय नहीं मिल पाया । मैं जल्दी ही नया अपडेट लाऊँगा।
 

sexsarkar

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रविवार का इंतज़ार खत्म ?????

आज आ रहा है नया अपडेट?!
और इस बार... अपडेट लंबा है! 😍

SEX होगा, रोमांच होगा, भावनाएँ होंगी... और कहानी ऐसे मोड़ लेगी कि पढ़ते-पढ़ते समय का पता ही नहीं चलेगा।
माफ़ी चाहता हु rockwin ji , आज कोई अपडेट नहीं दे पाया , आज थोड़ा बाहर चला गया था तो समय नहीं मिल पाया । मैं जल्दी ही नया अपडेट लाऊँगा।
 
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sexsarkar

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आपकी लेखनी सचमुच प्रभावशाली है। आपने जिस खूबसूरती से भावनाओं, आकर्षण और संवेदनशीलता को शब्दों में पिरोया है, वह पाठक को पूरी तरह कहानी के भीतर ले जाती है।

यह केवल एक कहानी नहीं लगी, बल्कि दो पात्रों के बीच का भावनात्मक जुड़ाव, उनकी मनःस्थिति और उनके रिश्ते की गहराई जीवंत होकर सामने आई। आपकी भाषा प्रवाहपूर्ण, सजीव और बेहद प्रभावशाली है। हर दृश्य में संवेदना और सौंदर्य का संतुलन बना रहा, जिसने कहानी को यादगार बना दिया।

ऐसी परिपक्व और भावनात्मक लेखनी बहुत कम देखने को मिलती है। आपकी रचनात्मकता और अभिव्यक्ति दोनों ही प्रशंसा के योग्य हैं। भविष्य में भी आपकी ऐसी ही उत्कृष्ट रचनाएँ पढ़ने की प्रतीक्षा रहेगी। हार्दिक बधाई!
आप जैसे प्रशंसको के लिए ही मै कहानी को लिख पाता हु । ऐसे फ़ीडबैक मुझे प्रोत्साहित करते है ही नया अपडेट दु। आज तो रात काफ़ी हो गई है नहीं तो एक नया अपडेट जरूर दे देता। आपके इस सराहना भरे कॉमेंट के लिए धन्यवाद।
 

sexsarkar

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Update: 55 (संयम का बांध टूटा: भाग-1)

दादी अपने पोती की कलाबाजियां खाती नंगी बदन को देख के स्तब्ध रह गई।

उसके योनि से जो छलछला के काम जल निकला , दादी उसे देख समझ गई थी कि प्रज्ञा आम लड़कियों जैसी नहीं ,वो बिलकुल अलग लड़की है और जो भी पुरूष एक बार प्रज्ञा के कला से बाकीफ़ हो गया , उसे तो फिर किसी ओर महिला संग संभोग करने का मन ही नहीं करेगा । वो बस प्रज्ञा की ही खोजेगा। प्रज्ञा झरने के एकदम निवस्त्र और निढाल अपने दादी के गोद में सर रखे परी हुई थी ।

दादी ने आज उसे एक ऐसा ज्ञान दिया था और उसे उस ज्ञान का ऐसा पहला अनुभव मिला था कि उसका रोम रोम तृप्त हो गया था । वो 18 वर्ष की नवयौवना का पहला चरम सुख प्राप्ति था ये। दादी भी इस बात से फुले नहीं समा रही थी कि उसकी पोती को वो आज जीवन का एक नया पहलू समझा चुकी थी ।

स्त्री के लिए इन कलाओं में पारंगत होना बहुत ही जरूरी होता है , ताकि वो अपने खुशी का ख्याल खुद रख सके , क्योंकि बहुत सी स्त्री ऐसी है, जिन्हें मर्द अच्छा नहीं मिलता या जल्दी झड़ जाता है , और तो जीवन भर भी चरम सुख महसूस ही नहीं कर पाती ।

दादी अपने पोती के सर पे हाथ फेरते हुए : कैसा लगा मेरी बच्ची? कैसा महसूस हुआ तुझे तेरा पहला चरम सुख ?

प्रज्ञा अपने निढ़ाल परे शरीर से थोड़ा बल दिखाते हुए बोली : दादी , मैने आज से पहले ऐसा कभी नहीं फिल किया था । मैं तो अपना सुध बुद्ध भी खो गई थी दादी । अपने मेरे योनि पे इस तरह से उंगलियां फिराई की मै तो एक अलग ही दुनिया में पहुंच गई थी दादी । आपके हाथों में जादू तो नहीं ?

दादी : कोई जादू नहीं मेरी पोती , कोई जादू नहीं। ये तो एक स्त्री की अपनी क्षमता है कि वो चरम सुख पा सकती है और स्वर्ग सा अनुभव कर सकती है।

प्रज्ञा : हाँ दादी , मै तो स्वर्ग में ही पहुंच गई थी । पर दादी वो चरम सुख मिलने के समय जो मेरी पेशाब निकल गई ना, उसके लिए मै शर्मिंदा हु । देखिये ना आपका सारा बिस्तर, चादर और यह तक की आपके कपड़ों पे भी मेरा पेशाब गिर गया है। मुझे माफ के दीजिए दादी । मुझे अपने आप पे काबू ही नहीं रहा । मैं बस उस आनंद भरे पल में बह सी गई । मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि मैने पेशाब के दिया है।

दादी ,प्राची के नादानी पे हंसती हुई : हाहा...अरे ये किसने कहा कि ये तेरी मूत है ? ये तो काम जल है बेटी , जो कि १००० लड़कियों में से किसी एक के पास ,सेक्स करने के दौरान निकलता है।

प्रज्ञा : मतलब दादी , मै समझी नहीं ।

दादी : अरे वो एक बहुत ही अदभुत चीज़ है , जिसका कला हर महिला के पास नहीं होता , उसे अंग्रेजी में "squirting" कहा जाता है , यानी महिला वीर्यस्खलन।

प्रज्ञा : पर दादी ये सबको क्यों नहीं होता ?

दादी : देख बेटी चरम सुख के समय , सब स्त्री को उनके योनि के अंदर ही पानी निकलता है । मगर बहुत कम स्त्री का ही पानी छलछला के बाहर निकलता है , और तू उनमें से से है ।

दोनों दादी और पोती ऐसे ही बाते करते रहीं। प्रज्ञा थक के चूर हो चुकी थी , उसे पहली बार चरम सुख जो मिला था । वो अपने कमरे में जा के दोपहर के समय थोड़ा सो गई। उधर दादी अपने बिस्तर को साफ सुथरा कर के आराम करने लगी । वही प्राची भी अपने कमरे में सोई हुई थी । दादी अपने दोनों पोतियों का मार्ग दर्शन अच्छे से कर रही थी ।

ऐसा ही दिन चलता रहा , प्रज्ञा अपने दीदी , प्राची का बहुत ख्याल रख रही थी । प्राची की अच्छी खातिरदारी और देखभाल के कारण उसका वजन भी बढ़ने लगा था ।

आज उसे अपने पापा से मिलन किए हुए 15 दिन बीत चुके थे , यानी उसे अपने प्रेग्नेंट होने का खबर ठीक 15 दिन पहले ही मिला था । पापा ने इन 15 दिनों में प्राची की पूरी सुख सुविधाओं का ध्यान रखना शुरू कर दिया था । और करते भी क्यों ना, आखिर उनकी अपनी बेटी थी , और पहली बार प्रेग्नेंट हुई थी , और वो उस होने वाले बच्चे का पिता और नाना दोनों होने वाले थे । अब प्राची का ध्यान रखना उनके लिए एकदम अनिवार्य कामों के लिस्ट में शामिल हो गया था , सुबह शाम वो प्राची को मालिश करते , उसे हंसाते और खुश रखने का कोशिश करते । ये सब कभी उन्होंने , प्राची के मम्मी के साथ भी किया था और उस समय प्राची उनकी बेटी बन के दुनिया में आई थी । आज ये क्या विधि का विधान था कि उसी अपनी बेटी को उन्होंने ही फिर गर्भवती कर दिया था और उनकी अपनी खुद की बेटी, उनका संतान को जन्म देने वाली थी ।

इन 15 दिनों में पापा की हवस और प्यास बढ़ती ही जा रही थी । उन्होंने तो अब हनीमून का प्लान वो कैंसिल कर दिया था । अगर वो कैंसिल नहीं होगा तो इस समय वो मनाली के किसी खूबसूरत रिज़ॉर्ट में अपनी बेटी को जी भर के चोद रहे होते ,पहाड़ों और वादियों के बीच।

खैर अब उनको सब्र रखना होगा । वो भी 9 महीनों तक ,और उसके बाद भी शायद प्राची को चोदने के लिए उन्हें 1-2 महीने का इंतज़ार करना ही पड़ता , क्योंकि एक महिला बच्चे को जन्म देने के बाद कुछ दिनों तक सेक्स तो नहीं ही करना चाहेंगी।

पापा को अपने बेटी को प्रेग्नेंट कर देना अब भारी पर रहा था । हालांकि वो अपनी प्यास प्राची के मुंह में अपना लौड़ा दे के , चुसवाँ के , पूरा कर लेते थे कभी कभी । पर उनको प्राची के साथ , रात रात भर चुदाई करते हुए रात बिता देना ,बहुत याद आता था । वो हर रात 5-6 राउंड की बहुत ही जबर्दस्त चुदाई जो वो अपने बेटी के साथ करते थे , वो उस चुदाई को बहुत ज्यादा मिस कर रहे थे ।

उधर प्रज्ञा भी अपने दादी के हाथों से चरम सुख का शिक्षा लेने के बाद अब खुद कभी कभी अपने गुप्तांग से खेलने लगी थी । एकांत पा के वो अपने कमरे में ही कभी कभी अपने नारीत्व का आनंद लेने लगी थी ।

खैर समय बीतता गया । एक रात पापा प्राची के साथ अपने कमरे में बैठ उसकी पैरों में तेल मालिस कर रहे थे। उन्हें प्राची का बदन छूते हुए उसका मालिश करना बहुत मज़ा दे रहा था । उनका मन चंचल होता जा रहा था । ये कैसी परिस्थिति थी , कि वो अपने पत्नी के साथ रह सकते थे , उसे छू सकते थे , मगर उसके योनि में अपने लिंग का प्रवेश नहीं कर सकते थे ।

प्राची आंखे मूंदे परी हुई थी , उसका चेहरा देख के भी कोई भी बता सकता था कि उसका चेहरा शांत जरूर है । मगर उसके दिल में एक उफान मचा है । काम की लालसा उसके चेहरे पे साफ झलक रही थी , पापा के हाथ जैसे जैसे उसके बदन पे तेल से तर फिसल रहे थे , वैसे वैसे उसकी मुख पे एक्सप्रेशन और भावनाओं का अलग अलग रंग दिख रहा था ।

पापा लगभग अगले 15 मीनट तक प्राची की मालिश करते रहे ,फिर तेल का डब्बा अलग रख के ,प्राची के बगल में ही लेट गये ।

पापा : बेटी !

प्राची जो आधी नींद में जा चुकी थी , पापा के आवाज सुनते ही पूरा जाग गई : जी पापा।

पापा: बेटी , कही मैने तुम्हे प्रेग्नेंट कर के गलती तो नहीं कर दी ? तू अभी मात्र 19 साल की है , और मेरी हवस की प्यास बुझाने के लिए तुझे कितना कुछ करना पर है। 19 साल की नन्ही सी जान होने के बाद भी , मुझ जैसे 40 साल के आदमी का तगड़ा बमपिलाट लन्ड के नीचे तड़पते हुए पूरी रात मुझसे चुदावाना । बस मेरी खुशी के लिए ! तेरा इतना दर्द सहना । और अब ये , 19 साल के उमर में अपने पापा की बच्चे को पालना । ये सब कितना जल्दी हो गया । शायद मुझे शादी के लिए मानना ही नहीं चाहिए था ।

प्राची : पापा , आप ऐसा क्यों सोचते है , मै आपकी बेटी थी , भले ही मेरी उमर कम है मगर अब मैं आपकी पत्नी हूं। मुझे आपसे प्यार है पापा, और आपके बच्चे को अपने कोख में पलने में मुझे कोई भी शिकायत नहीं है । हवस तो मेरी भी अपने पूरा किया है पापा। आपके जैसे मर्द तो , शायद ही किसी स्त्री को मिलता है, जो ५-६ राउंड तक जाता है । मै तो उसे एंजॉय करती थी पापा। अब आपके बच्चे को पालूंगी तो मुझे खुशी ही होगा । अपने कोई गलती नहीं की है पापा। मै आपको पति बना के बहुत भाग्यशाली महसूस करती हु ।



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rajeev13

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इस कहानी को एक अलग आयाम भी दिया जा सकता है। यदि प्राची को पुत्र होता है, तो वह भी उसी विकृत पारिवारिक मानसिकता का शिकार बनकर बड़ा होता है और इस कुप्रथा (Incest'GRAST') को आगे बढ़ाने का माध्यम बनता है। इस प्रकार वह अनजाने में अपने ही वंश की भयावह परंपरा को निभाता है!
 
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