पार्ट 9
अब धनंजय सिंह अकेला हों गया छोटे मोटे गुंडे थे वो भी भाग गया जीस बंगले मै 100आदमी रहते थे आज बंगला खाली पड़ा उल्टा जिस जग्गू पर भरोसा किया वो पकड़ा गया कालू भी वहां से भाग निकला पता नहीं कहा गया
टेबल पर शराब की बोतल, पिस्तौल, और रेनू की बचपन की फोटो उसकी आंखों में आंसू थे
बेटी इतना कमाया तेरे लिए आज सब कुछ लुट जाएगा एक इस मयंक की वजह से
पुलिस किसी भी वक्त आ सकती है पूरा गांव बाहर खड़ा है रात से सरपंच भाग न जाय
कांपते हाथ से फोन उठाया।
रेनू बेटा डायल किया 3 रिंग के बाद फोन उठा।
रेनू__नींद में... हेलो? पापा इतनी सुबह? क्या हुआ आप ठीक तो हो
धनंजय सिंह__आवाज बैठी हुई, टूटे स्वर में... बेटी... रेनू...
मैं हार गया बेटी। सब खत्म हो गया।
रेनू __एकदम बैठ गई... पापा क्या हुआ? आपकी तबियत सही नहीं है क्या
धनंजय सिंह__रोते हुए... तबीयत नहीं बेटी, किस्मत खराब है।
कल रात मैंने मयंक को मरवाने के लिए आदमी भेजे थे।
पकड़े गए उन्होंने मेरा नाम ले दिया।
अब पुलिस आएगी जेल जाऊंगा। 20 साल... शायद पूरी जिंदगी
फोन पर खामोशी
रेनू__तो... तो मयंक सच बोल रहा था? आपने सच में स्कूल का पैसा...?
मयंक तो उसे पहले सब कुछ बता चुका था उस दिन जब सुबह कॉलेज जा रह रास्ते मै रेनू मिल गई थी उसने पूरी बात रेनू को बता दी
धनंजय सिंह__ हां बेटी खा लिया। 35 लाख।
तेरी लंदन की फीस, ये बंगला, गाड़ी... सब उसी पैसे से।
मैं चोर हूं बेटी। तेरे दोस्त ने सही कहा।
पूरे गांव के सामने नंगा हो गया हूं मैं।
रेनू फूट-फूटकर रो पड़ी
रेनू __रोते हुए... पापा, आपने ऐसा क्यों किया?
मैं तो समझती थी आप भगवान हो। गांव के राजा।
मयंक 2 महीने से मेरा दोस्त है पापा। उसने मेरी जान बचाई थी।उन गुंडों से भी बचाया था तब से मै उसको जानती हु
और आप... आप उसकी जान लेने चले गए?
धनंजय सिंह__ स.. बेटी, सत्ता का नशा था।
लगता था मैं जो करूंगा, कोई नहीं पूछेगा।
पर एक लड़के ने पूछ लिया। तेरे दोस्त ने।
बेटी, मैं आज सरेंडर कर रहा हूं।
DM ऑफिस जाऊंगा। सब कुबूल करूंगा।
धनंजय सिंह __बस तुझ से एक भीख मांगने लिय फोन किया.
धनंजय सिंह__ बेटी... नफरत मत करना मुझसे
मैं बुरा बाप हूं, पर हूं तो बाप ही।
तेरी शादी के सपने देखे थे। डोली उठाने का ख्वाब था
अब जेल की सलाखों से देखूंगा।
पर बेटी, अगर तूने कह दिया "नफरत करती हूं"...
तो जीते जी मर जाऊंगा।
बोल बेटी... क्या तू अपने चोर बाप से नफरत करेगी?
रेनू__आंसू पोंछकर, कांपती आवाज में... पापा...
आपसे नफरत नहीं कर सकती। खून का रिश्ता है।
पर इज्जत... इज्जत नहीं कर पाऊंगी पापा।
आपने सिर्फ पैसा नहीं खाया, भरोसा खाया।
मेरा, मयंक का, पूरे गांव का।
धनंजय सिंह__ बेटी... तो माफ नहीं करेगी?
रेनू__पापा, माफी भगवान देगा। मैं बेटी हूं।
आप सरेंडर करो। सजा काटो। एक-एक पैसा लौटा ओ।
स्कूल की छत अपने हाथ से बनवाओ।
जिस दिन 200 बच्चे उस स्कूल से हंसते हुए निकलेंगे...
उस दिन समझूंगी आपने पाप धो लिया।
उस दिन आऊंगी आपसे मिलने जेल में।
पर आज नहीं पापा। आज दोस्त का साथ दूंगी।
क्योंकि आपने बाप का फर्ज नहीं निभाया, पर मयंक ने दोस्त का निभाया। फोन कट।_
धनंजय सिंह फर्श पर बैठ गया। फोटो सीने से लगाकर फूट-फूटकर रोया।
10 मिनट बाद उठा। कुर्ता पहना। टोपी लगाई।
दरवाजे पर पुलिस की गाड़ी आ चुकी थी।
खुद चलकर गेट तक गया। हाथ आगे कर दिए।
धनंजय सिंह__ इंस्पेक्टर साब, हथकड़ी लगा दो।
मैं धनंजय सिंह, ***गांव का पूर्व सरपंच... सरेंडर कर रहा हूं।
गांव में खबर फैली__सरपंच ने हथियार डाल दिए
तीन दिन केस चला सबूत पक्के थे -
1. मोहन की गवाही + ओरिजिनल फाइल
2. जग्गू की गवाही- "हत्या की कोशिश"
3. राजेश की गवाही - "15 हजार रिश्वत ओर ब्लैकमेल
4संजना की गवाही जमीन हड़प ली उसकी उसके साथ बलात्कार
5 कनिका चौधरी के दस्तावेज - "35 लाख घोटाला"
जज साहब ने फाइल बंद की। चश्मा उतारा।
जज__ धनंजय सिंह, आप गांव प्रधान थे रक्षक थे आपने 200 बच्चों की जान दांव पर लगाई जनता के भरोसे का खून किया
IPC 409 - सरकारी गबन, IPC 307 - हत्या का प्रयास,
IPC 120B - आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम।
जज__ अदालत आपको उम्रकैद की सजा सुनाती है।
जब तक जिंदा रहेंगे, जेल में रहेंगे।
35 लाख की रिकवरी आपकी संपत्ति बेचकर होगी।
ये फैसला नजीर बनेगा - जो बच्चों की छत खाएगा, वो जिंदगी भर सलाखें गिनेगा
कटघरे में धनंजय सिंह गिर पड़ा। 20 साल में पहली बार घुटनों पर।
पीछे बैठी सुमित्रा की आंखें भर आईं - खुशी की नहीं, अफसोस की मयंक चुप। राजेश ने सिर झुका लिया।
रेनू की आंखों में आंसू थे वो तो रही थी कनिका ने उसे संभाला
कोर्ट के बाहर मीडिया फैसला सुनकर बाहर निकली रेनू को माइकपर घेर लिए।
रिपोर्टर__ मैडम, आपके पिता को उम्रकैद हुई। कुछ कहना चाहेंगी?
रेनू__चश्मा उतारकर, आंखें लाल... हां कहूंगी।
आज मेरा बाप मरा नहीं, पर बाप का घमंड मर गया।
अदालत ने सजा दी, पर सबसे बड़ी सजा मैंने दी -
मै कभी भी जेल मै मिलने नहीं जाऊंगी
आज भी नहीं मिली
आवाज भर्र गई
रेनू__पर सुन लो - मैं चोर की बेटी नहीं हूं।
मैं उस लड़की की बेटी हूं जिसने पापा को सरेंडर करवाया।
जिसने मयंक का साथ दिया।
मेरे पापा जेल में सड़ेंगे, उनकी सारी प्रॉपर्टी को बेंच के स्कूल बनाऊंगा यही मेरा इंसाफ है।
मीडिया सन्न मयंक दूर खड़ा देख रहा था कुछ बोला नहीं।
जेलर__ कैदी नंबर 420, तेरा सामान घर से आया है।
एक पोटली। खोली - अंदर रेनू की बचपन की फोटो, गीता, और एक चिट्ठी
_चिट्ठी खोली:_
> "पापा,
> आज आपको उम्रकैद हुई। रोई नहीं।
> आपने कहा था - 'नफरत मत करना'।
> नफरत नहीं है पापा। दया है।
> आप 20 साल राजा रहे, अब 20 साल कैदी रहोगे।
> पर अगर जेल से भी एक ईंट ईमानदारी की लगवा दो,
> तो आ जाऊंगी मिलने।
> वरना मेरी आखिरी मुलाकात आज ही समझो।
> - आपकी बेटी, रेनू"
धनंजय सिंह चिट्ठी सीने से लगाकर फूट-फूटकर रोया।
पहली बार "सरपंच" नहीं, "बाप" रोया था।
रेनू__सुमित्रा के पैर छूकर... आंटी, जा रही हूं
सुमित्रा__ सिर पर हाथ फेरकर... बेटी, क्यों जा रही?
तेरा घर है ये। तेरा गांव।
रेनू_ आंखों में आंसू रोककर... आंटी ये गांव मेरा था।
जब तक पापा "सरपंच " थे। अब पापा "कैदी" हैं।
मैं "कैदी की बेटी" हूं।
सब्जी वाली चाची देखकर मुंह फेर लेती है
बच्चे उंगली उठाते हैं - "चोर की बेटी जा रही है"।
काकी, मैं लड़ सकती हूं दुनिया से, पर हर रोज ताने से नहीं।
मयंक चुपचाप खड़ा था। वो रेनू के पास आया
मयंक__ धीरे से... रेनू, रुक जा गांव तेरा भी है वैसे भी स्कूल तो तू ही बनवा रही है फिर क्यों जा रही है
तूने सच्चाई साथ दिया था। तू गवाह नहीं बनी, पर गद्दार भी नहीं बनी
रेनू ने भी मयंक के दिल मै कही ना कही जगह बना ली वो उसके लिय अपने बाप से लड़ गई ये करना हर कोई नहीं कर सकता
रेनू__ मुस्कुराकर, पर आंखें भीगी... मयंक, तूने दोस्ती निभाई
बाप के खिलाफ जाकर भी मुझे "बेटी" रहने दिया।
पर मयंक, हर बार बस से उतरूंगी तो लोग कहेंगे -
"देखो, वो आ गई जिसने बाप को जेल भिजवाया"।
मैं मजबूत हूं, पर इतनी नहीं
मयंक__ रेनू, तो क्या दोस्ती भी बस स्टैंड तक थी
रेनू__मयंक की तरफ एक कदम बढ़कर... दोस्ती जिंदगी भर की है पागल ये सोचना भी मत जब शहर आवो गे तो मिलोगे जरूर हा कुछ भी काम हो मेरे लिए तो फोन जरूर कारण मुझे एक बार
याद रखना जब भी लग सच्चाई के रास्ते मै तुम अकेले हो उस समय रेनू को भी याद करना जो सच के साथ खड़ी थी और तब भी तुम्हारे साथ मिलूंगी
बस आ गई
कनिका चौधरी__ रेनू को गले लगाकर... बेटी, तू शेरनी है।
भाग नहीं रही, उड़ रही है। जा। अपना आसमान ढूंढ।
राजेश__ सिर झुकाकर... बिटिया, माफ कर देना।
हम गांव वाले... हमसे गलती हो जाती है। छोटी छोटी बाते हो जाती है
रेनू__ सबको हाथ जोड़कर... गलती आपकी नहीं है चाचा।
गलती सिस्टम की है।ओर यह किस किस के मुहे पकड़ूंगी
ओ रही सही को सही बोल सबका अधिकार है
सुमित्रा _ रेनू को गल्ले लगाकर तू भी मेरी बेटी है जब तुझे लगे कि गांव की याद आए आ जाना मेरे हर के दरवाजे तेरे लिए खुले मिलेंगे
बस में चढ़ गई। खिड़की से हाथ हिलाया।
मयंक न भी हाथ हिलाया । कुछ बोला नहीं।
बस देखता रहा जब तक बस धूल में गायब नहीं हो गई
सुमित्रा__ मयंक के कंधे पर हाथ रखकर... रो मत बेटा।
जो उड़ने के लिए बने हैं, उन्हें पिंजरे में नहीं रखते
रेनू चली गई, पर जीत छोड़ गई
पूरे दिन मयंक कनिका के घर पे ओर गांव की पंचायत मै था
शाम को मयंक गर आया तो सुमित्रा स्नान कर रही थी बाथरूम (शावर+बाथटब)मयंक को पेशाब लगी इसलिए सीधा बाथरूम मै गुस्सा ओर सामने देखा सुमिता ब्रा पैंटी में खड़ी थी, वैसे तो मयंक ने बचपन से सुमित्रा को ऐसी रूप में देखा था कपड़े बदलते देखा था लेकिन अब सब कुछ बदल चुका था अब मयंक की नजर मै सुमित्रा सिर्फ़ मां नहीं थी वो उसने एक औरत के रूप में अपनी प्रमिका को देखता था वही सुमित्रा का नजरिया भी बिल्कुल बदल चुका है,
उसकी नजर मयंक पर गई ओर दूसरी नजर सीधे उसके लन्ड पर गई जो एक दम तन कर खड़ा था अंडर वियर मै,
सुमित्रा की तो सांस ही अटक गई थी, दोनों बस एक दूसरे के घूरे जा रहे थे मयंक को समझ नही आ रहा था क्या करे सुमित्रा भी बिना कुछ बोले खड़ी थी,
मयंक आगे बढ़ता गया सुमित्रा बस उसे देखे जा रही थी ,मयंक ने सुमित्रा के कमर मै हाथ डाला ओर अपनी तरफ खींचा, सुमित्रा की बड़े बड़े बूब्स मयंक के सीने से टकरा गई,
मयंक का लन्ड सुमित्रा के पेट पर तगड़ टकड़ा था मयंक ने का कर सुमित्रा को खुद से भींच लिया और अपने हॉट सुमित्रा के होठो पर रख दिय सुमित्रा एक दम शॉक्ड ओर शांत खड़ी थी उसने कोई हरकत नहीं की घी मयंक ने एक बार भी अपनी तरफ से कुछ नहीं किया था
मयंक ने जोश में सुमित्रा के हॉट काट लिया और उसके बूब्स को जोर भींच दिया सुमित्रा ने मयंक को दूर धकेला और एक जोर डर थप्पड़ मयंक के गाल पर जड़ दिया ,थप्पड़ इतना जोर दार था कि पूरा कमरे मै गूंज उठा मयंक जिसे बहुत तेज मूट आया हुवा था मयंक अंडरवियर मै मूत दिया
वो इतना डर गया था कि उसकी आंखों से आंसू और लन्ड से मूत निकल गया था मयंक कुछ देर वही खड़ा रहो सोचता रहा समझ में नहीं आ रहा था मां तो मै इतने आगे बढ़ गए मुझे साथ भी देती थी कभी रोक भी नहीं फिर आ ऐसा क्या हु
सुमित्रा को गुरु जी वाली बात याद आती तुम्हे इसकी मां बनकर बड़ा करना है तुम्हे इसे दुनिया की हकीकत बताना है इसको कभी भी पता नहीं चलना चाहिए कि तुम इसकी असली मां नहीं हो
मयंक बाहर चला गया वो तो पेशाब करने आया था वो तो सुमित्रा की धप्पड़ से कर ली तीनसुमित्र भी शॉवर चला कर बहुत देर तक ठंडे पानी में नहाती रही ओर रोती रही
क्यों रो रही थी ये तो सुमित्रा ही बता सकती थी , वो तो मयंक के साथ खुश थी उसके साथ गर्म हो जाती थी फिर आज क्या हुआ मयंक को देखकर मोहित हो गई थी फिर उसने मयंक को थप्पड़ क्यों मारा ?
सुबह मयंक अपने समय पे उठा ओर कॉलेज जाने के रेडी हो गया दोनों मां बेटा मै कोई बात नहीं कर राह था सुमित्रा ने नाश्ता दिया मयंक ने नाश्ता किया ओर निकल गया कॉलेज
सुमित्रा मन मैं आज मुझसे इतना नाराज हो गया कि बेटा आज बोला भी नहीं ये अपना रास्ता नहीं भूल जाए क्या करूँ मै क्या मैं गुरु जी से बात करु नहीं नहीं उसमें अभी एक महीना ओर है वहां जाने के लिए
वो भी स्कूल गई ओर दो दिन ऐसे ही निकल गए लेकिन इन दो दिनों मै उनके बीच कोई बात नहीं हुई
नहीं ऐसा नहीं होगा मेरा बेटा मुझे नहीं भूल सकता मैं उसे भूलने नहीं दूंगी
शाम को मयंक खाना खाने के अपने बिस्तर पर आंख बंद किए हुए लेटे था था और सोच रहा था मां से कैसे माफी मांगे आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ मां बेटे बिना बोले रह यह मां ने कभी गुस्सा किया हो मां की नाराजगी उसे बहुत तकलीफ दे रही थी उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी मां का सामना करने की
तभी उसके रूम का डोर खुला मयंक ने हल्की सी आंख खोल कर देखा तो उसे 440 वाट का झटका लगा सामने का नजारा ही इतना खूबसूरत था जिस देखकर को खुद कामदेव सम्मोहित हो जाए सामने सुमित्रा खड़ी थी एक रेड कलर की साड़ी में ब्लाउज इतना छोटा की 60% बूब्स तो बाहर ही दिख रहे थे सुमित्रा हाथ में पल्लू लिए खड़ी थी मयंक बिना पल के झटके बस सुमित्रा को ही देखे जा रहा था
मयंक खड़ा हो गया था और उसके लन्ड तो उससे पहले खड़ा था सुमित्रा धीरे-धीरे चलती हुई मयंक के पास आई दोनों आमने-सामने खड़े थे मयंक की हालत खराब थी वही सुमित्रा की धड़कन भी बहुत बड़ी हुई थी दोनों के बीच फैसला बस एक उंगली की मोटाई जितना था मयंक को खुद को कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था लेकिन उसको पिछली बार का थप्पड़ याद आ गया और दोनों 10 मिनट तक ऐसे ही खड़े रहे
फिर सुमित्रा नहीं खामोशी को तोड़ा
सुमित्रा __बस यही कंट्रोल चाहिए मुझे तुझ में मेरे बेटे
मयंक __अचंभे में समझा नहीं आप क्या कहना चाहती हो मां
सुमित्रा __नहीं समझे अब सही समझाने का टाइम आ गया बेटा तुम्हें क्या लगता है मैं तुम्हें उसे दिन थप्पड़ क्यों मारा
मयंक__ वह मैंने वो वो गलत हरकत की थी सॉरी मां मुझे माफ कर दो मैं बहक गया था मुझसे गलती हो गई
सुमित्रा__ तुम गलत बात के लिए माफी मांग रहे हो गलत सोच में भी जी रहे हो
मयंक__आप कहना क्या चाह रही है मुझे कुछ समझ ना आ राह है आप क्या समझाना चाहते हो
सुमित्रा __तुम मेरे करीब आए और मुझे किस किया अगर किस करने पर थप्पड़ मारना होता तो पहली बार में ही मार द देतीं या उसे दिन मार देती जिस रात तुम मुझसे चिपक कर अपना वह मेरी गांड पर रगड़ रहे थे यह तुम भी जानते हो कि मैं तुम्हें नहीं रोका बल्कि बढ़ावा दिया था
मयंक __फिर क्या गलती थी मेरी
सुमित्रा__ गलती थी तुम देख के मुझे लगा मेरी परवरिश कमजोर रह गई मै तुझे कन्ट्रोल करना नहीं सिखाया तुम मुझे देख के बहके गए थे ऐसे तो किसी भी औरत को देख के बहके जावोगे किसी के भीं चुंगल फंस मैं जावोगे
मयंक__ उसे रात भी तो बहक गया था तब क्यों नहीं मारा
सुमित्रा उसे रात मैंने साथ में तुझे साथ दिया मेरी मर्जी शामिल थी लेकिन उसे दिन तुम मुझे मेरी मर्जी जाने बिना ही तुम आगे बड़ गए तुम बस बहक गए और मुझे चूमने लगे
मयंक&_ लेकिन आपने कोई विरोध भी तो नहीं किया मुझे कैसा मालूम चलता कि आप ये सब नहीं चाहती
सुमित्रा __साथ भी तो नहीं दिया
मयंक__ तुम मुझे कैसे पता चलता है कि आप साथ देना चाहती हो या नहीं अब कहना क्या चाहती हो वह बोलो ना
सुमित्रा__ जब कोई मर्द किसी औरत को चूम रहा हो और औरत शांत खड़ी हो उसके दो कारण होते हैं या तो वह नहीं चाहती मर्द उसे चूमे या फिर उसकी कोई मजबूरी है वो चुप है या वह इस असमज मे में है कि वह जो कर रही है वो गलत है या सही है वो चुनाव नहीं कर पा रही है
तुमने आगे बढ़कर किस किया यह मर्द होने की ओर मजबूत मर्द की पहचान है लेकिन अगर औरत ने साथ नहीं दिया वहां तुम्हारी समझदारी काम आती है तुम्हें वहीं रुक कर यह देखना चाहिए था और वो क्या चाहती है अगर वह मजबूर है और तुम वहीं रुक गए तो औरत के नजरों में तुम्हारी इज्जत और बाद जाएगी और किसी न किसी दिन वो खुद तुम्हार तुम्हारे पास आएगी और यदि यदि वह असमझ में है तो उसकी दुविधा दूर करो अगर सुविधा दूर हो गए तो फिर तो तुम्हारे पास आएगी अगर नहीं आई तो समान करेगी और वक्त के साथ तुम्हारे हालत के साथ में वह तुम्हारी होगी
लेकिन अगर तुमने उसकी बिना मर्जी के कुछ किया तो तुमसे दूर चली जाएगी अगर दूर ना भी दे तो उसने तुम्हारे साथ रिश्ता बना भी लिया तो तो भी मौका मिलते ही वह किसी और की हो जाएगी तुम्हारी कभी नहीं हो पाएगी
उसे दिन तुमने अपने मन की भावनाओं को सनी मेरे मन की नहीं और बेटा औरत की मर्जी के हमेशा इज्जत करना उसके साथ जबरदस्ती करने कभी भी मत जाना
मयंक__ समझ गया मां अब मुझे गलती का एहसास है
(सुमित्रा मन मैं__ तेरी परवरिश की जिम्मेदारी मेरी है बेटे तुम उन सब पापियों को नष्ट करना होगा जो तेरे मां बाप को मारा है उनको एक एक चुन चुन कर मरना होगा उनको कुत्ते की मौत मारना )
सुमित्रा____बेटे कभी भी हालातों को अपने कंट्रोल में करना ही बेहतर होता दूसरों के कंट्रोल मै कभी मत जाना
मयंक मां अब कभी ऐसा नहीं होगा
सुमित्रा __जब भी तुझे लागे तेरा मन बहकने रहा है तू मेरे पास आ जाना मैं तुझे सही रास्ता दिखाऊंगी
मयंक __ठीक है मां अब आप जैसा बोलो वैसा ही होगा
फिर सुमित्रा आगे बाद कर अपने पास खींच लिया सुमित्रा के बूब्स मयंक के मुहे में दब गए मयंक सुमित्रा ने नशीली आंखों से मयंक को देखा तो दिल की धड़कन बढ़ गई तो सुमित्रा ने मयंक को बालों में हाथ घुमाया और सर नीचे झुका कर अपने होता उसके होठों से मिला दिए उ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ फ़ फ़ फ़ फ़ फ़ मयंक की तो हालात ही खराब हो गई थी इतने मुलायम हॉट खुद मयंक के होठों को अपनी गिफ्ट में लिए हुए थे कोई हड़बड़त नहीं बड़े प्यार से सुमित्रा मयंक को होठों को अपनी गिफ्ट में लिए हुए थे चूम रही थी मयंक सीधा खड़ा था उसे हाथ चलते हुए डर रह थे लेकिन उसके हॉट चलने लगे थे
थोड़ी मस्ती की नहीं की तभी मयंक के घर के सामने एक गाड़ी आकर रुकी उसमें से उतरी कनिका चौधरी
मयंक ओर सुमित्रा बाहर देखा तो सामने कनिका चौधरी खड़ी थी
मयंक__अरे आंटी आप इस टाइम क्या बात है
कनिका__ क्यों नहीं आ सकती क्या तेरा काम हो गया तो क्या हम अब मिल भी नहीं सकते क्या तुम तो हमारे कुछ लगते नहीं हो यही कहना चाहते हो
मयंक__अरे अरे आंटी रुक जाए मुझसे गलती हो गई आपको ऐसा पूछ लिया
सुमित्रा __आवो कनिका आपका ही घर है ये कौन होता है पूछना वाला
मयंक__अब मां आप भी मेरी टांक खींच रही हो
फिर बहुत बाते की जाते जाते समय कनिका बोली रविवार के दिन मेरे घर आना हैं तुमको मयंक ओर हा खाना मत खा आ ना
मयंक __ठीक है आंटी आ जाऊंगा
फिर कनिका वहां से चली जाती है
शहर के बाहर एक खाली मकान पड़ा था मकान नहीं हवेली बोल सकते है
शायद पिछले 15 साल से बंद पड़ी थी इस मकान बाहर झाड़ियां बबूल सब उग गए थे अंडर जाना के रास्ता भी नहीं उसके गेट सामने गाड़ी खड़ी थी उस गाड़ी मै दो आदमी बेटे थे वो देख रह थे एक बोर्ड को
जिसपे लिखा था _'''"""सिंह फार्म हाउस"""""""
आदमी1___15साल हो गए अभी तक पता नहीं लगा सके उसका
आदमी 2__मुझे लगता है अब टाइम आ गया है उसका भी सामने आने का
आदमी 1__उसका जन्मदिन मै तो अभी एक महीना ओर है 1 जनवरी को तो है
आदमी2 __चल चलते है
मयंक ओर सुमित्रा सोने लगे मयंक सुमित्रा के चिपक के सो गया
सुमित्रा __क्या बात है बड़ा प्यार हो रहा है
मयंक ___क्या करें आप को प्यार करने का तो बहुत मन करता है आप तो प्यार करने देती नहीं वैसे आज आप बहुत सेक्सी लग रही है
सुमित्रा की बात सुन के पहले तो सुमित्रा शर्मा जाती है फिर झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहती है
मयंक__सेक्सी के बच्चे रुक अभी बताती हूं मैं तुझे की मैं कैसे लग रही हु
मयंक __जो भी बताना है तो बता सकती है होना तो लाइट चालू करदू ऐसे तो दिखेगा नहीं
सुमित्रा मन मै ये ना आज कल कुछ ज्यादा ही बोलने लग गया है पागल कहीं का सो जा
कनिका घर पहुंचते ही सोने की तैयारी करने लगी खाना तो उसने पहले ही खा लिया पति मोहन चौधरी ***शहर मै रहते है लेकिन हफ्ते में एक बार आते है रविवार को उस दिन मार्केट बंद रहता है इसलिए शनिवार रात वो आ जाते है
गए शनिवार को जब मोहन चौधरी गर पे आए तो उसकी खूबसूरत बीवी कनिका लगा रही थी उसे पता था कि उसके पति आने वाले है आज इसलिए वो पहले से तैयारी कर रही थी वो एक सुखी सम्पन्न परिवार की बेटी थी ओर एक अच्छे परिवार में शादी हुई थी क्योंकि मोहन भी बिज़नेस मैंने आदमी था वो बहुत खुश थी क्यों कि पति भी बहुत अच्छा मिला था ऐस ओ आराम की कोई कमी नहीं थी सास ससुर छोटे बेटे के साथ रहते थे जो शहर मै बिजनेश करता है कपड़ा का बिजनेश करता है है ओर वही रहते है वो यह गांव म रहती है एक तो ये पूर्व सरपंच रही है ओर इसके ससुर की जमीन भी है उस भी देख लेती है उसका पति उससे बहुत प्यार करता है पर शादी के 8 साल बाद भी उनके कोई बच्चा नहीं थाकुछ समय की पहले जब वो शहर गए थे उसके ससुर के घर थे तो वहां अपने सास ससुर को मोहन के साथ बच्चों के बेटे मै बात करते सुना था,वो बहुत मायूस हो गई थी ये सुन कर
दोनों पति पत्नी डॉक्टर को चेक भी कराया जिसमें पता चला कि मोहन में शुक्राणु की कमी है जिसके चलते ये प्रोलंब हो रही है डॉक्टर ने टेस्ट ट्यूब बेबी का सुझाव दिया था पर मोहन के शुक्राने बहुत ज्यादा कमजोर होने की वजह से उन्होंने किसी डोनर का सहारा लेने का सुझाव दिया था रात को जब पति पत्नी सो रह थे तो मोहन ने सुझाव दिया मोहन ने कनिका को अपने सीने से चिपका या ओर उसके सिर पे सहलाते हुए बात छेड़ी
मोहन__ एक बात कहु कनु ( मोहन घर में कनिका केके कनु ही कहता है)बुरा तो नहीं मानोगी डॉक्टर ने टेस्ट ट्यूब बेबी की सलाह दी हैजिस्मे वो किसी ओर का स्पैम इस्तेमाल करेंगे बच्चा तो मां या बाप या दोनों का मिलाजुला रूप लेता है हमें कैसा पता चलेगा कि ये स्पैम किसका है कैसा दिखता है ऐसे वीर्य का डोनेशन लोग आजकल पेसो के लिए करते हैवो ऐसे शराबी का ऐसा कोई भी ऐरे गेरे का होगा एक अखबार में मैने ऐसे ही एक व्यक्ति का इंटरव्यू पढ़ा था वो तकरीबन 60से 70वर्ष का था वो बोला इस उम्र मै भी वो बाप बना है दिखने में मरियल सा ओर कोई बीमारी हो ऐसा दिख रहा था
कनिका__ (वो भी सोच में पढ़ती है)आप कहना क्या चाहते है
मोहन __ में ये चाहता हु कि हम ऐसे व्यक्ति का स्पर्म ले जिसे हम पसंद करे
कनिका(उठ कर उसके सामने बैठ जाति है)ये कैसे मुमकिन है ओर हम ऐसे किसका
मोहन__तुम सोचो अगर कोई अगर कोई खूबसूरत ओर अच्छे व्यक्ति का बच्चा होगा तो वो भी वैसा ही होगा ना क्या तुम नहीं चाहेगी ऐसा
मयंक&_ (कनिका को भी
उनकी बात सही लगी पर ये कैसे मुमकिन है उसे समझ नहीं आ रहा था फिर अचानक उसके दिमाग की बत्ती जल)क्यों ने आपने किसी के बारे सोचा है मुझे लगता है तुम ने किसी को पसंद किया है इस काम के लिए है ना
मोहन__है तुम सही सोच रही हो है कोई मेरी नजर में पर बात इतनी ही नहीं है और भी है जो कुदरत ने रचा है हम ऐसे टेस्ट ट्यूब में करेंगे तो कुछ न कुछ गड़बड़ हो सकती है में ये चाहता हु कि ये सब कुदरती तरीके से हो
कनिका__(पहले तो उसको कुछ समझ नहीं आया पर जब उसकी बात को गौर से सोचा तो उसका मुंह खुला का खुला रह गया) क्या तुम ये केह रह हो कि में उसके साथ( गुस्से में)
तुम ऐसा सोच भी कैसे सकते हो मोहन
मोहन__(बहुत ही ज्यादा गंभीर स्वर में)देखो कनु तुम्हारे लिए ये जितना मुश्किल है उतना ही मेरे लिए भी ये मुश्किल है पर एक बार मेरी बात को जरा गौर से सोचो फिर कोई निर्णय लेना
कनिका__पर में आप के अलावा किसी और के साथ
मोहन___हम कर भिन्क्य सकते है कनु अगर हमे बच्चा चाहिए तो ये करना ही पड़ेगा
कनिका__ऐसे कैसे में कैसे किसी के भी साथ ओर पता नहीं वो कैसा हो आप ने सोचा हैं मतलब तुम्हारी नज़र में ऐसा कोई है कौन है वो
मोहन_तुम जानती हो उसे मयंक दिखने में बहुत खूबसूरत है बॉडीगार्ड भी होशियार भीं बहुत है देखा नहीं कैसे धनंजय को जेल मै डाल दिया बिना कुछ करे ओर लंबा भी बहुत है देखो कनु मैं तुम पर कोई फोर्स नहीं करूंगा पर कुछ सोच निर्णय लेना
ओर भीं बहुत बाते हुई इनके बीच आखिर मै कनिका मान गई ओर इसलिए कनिका ने संडे को मयंक को गर पे बुलाया
प्लीज़ दोस्तो अगर कहानी पसंद नहीं तो बोल दो मै लिखना बंद कर दु
पसन्द है तो भी बोलो कमेंट मै जवाब ज़रूर दे