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Fantasy गंदी राजनीति

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कहानी कैसी लगी बताइये जरूर

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मयंक सुबह 5 बजे उठ गया
सुमित्रा__ बेटा, संभलकर जाना मोहन सरपंच का खास है।
अकेला मत भिड़ना


मयंक__मां का आशीर्वाद लेकर... मां, डर गया तो गांव डूब जाएगा।
कनिका आंटी ने बताया मोहन के पास सारे कागज हैं। उसने ही तो पूरा मैट्रियल भेजा था
एक बार बिल मिल जाए तो बस फिर देखता हु ये सरपंच क्या करेगा


कनिका चौधरी ने रात को ही बता गया था - "मोहन ऑफिस में 9 से 10 बजे अकेला होता है


सुबह 09:05 बजे मयंक "मोहन के ऑफिस में पहुंच जाता है
ओर एक बात याद रखना ये मोहन दूसरा है कनिका का पति नहीं उनका भी नाम मोहन ही है


मोहन AC ऑफिस में बैठा। टेबल पर बीयर की बोतल, फाइलें बिखरीं जैसे रात मै। पार्टी हुई हो यहां पे
मयंक बिना दरवाजा खटखटाए अंदर घुसा।


मोहन__भौंचक्का होकर. अरे तू मयंक? अंदर कैसे घुसा?
निकल यहां से।


मयंक__ दरवाजा बंद करके... मोहन काका, बैठो 2 मिनट की बात चिल्लाओगे मत मैं चिल्लाने पे आ गया तो बाहर सब सुन लेंगे
मयंक__सीधे मुद्दे पे आता हु काका जी मुझे जो भी मैट्रियल स्कूल मै गया उसका बिल चाहिए सरपंच धनजय सिंह के साइन किए हुए पेपर्स दे दो
मोहन_कुर्सी से उठकर... देख छोकरे, सरपंच जी का नाम मत ले वरना तेरी टांगें तुड़वा दूंगा। निकल।


मयंक__(फोन मै एक वीडियो चलाता है ) आप अगर नहीं देना चाहते हो तो ठीक है मै ये वीडियो पुलिश को दे देता हु


मोहन __वीडियो देख के मोहन घबरा गया क्या चाहता है तू जो बोलेगा वैसा करूंगा


मयंक__ये देखो काका। आपके "A ग्रेड सीमेंट" की हकीकत।
टेंडर PH/2026/15 में लिखा है - 50 लाख का काम।
हकीकत में 15 लाख का माल लगा। 35 लाख कहां गया?
मोहन का चेहरा उतर गया


मोहन__आवाज धीमी करके... देख मयंक, तू जवान है, जोशीला है।
समझता नहीं। ये सिस्टम ऐसे ही चलता है।
सरपंच जी को भी हिस्सा जाता है, ऊपर DM तक जाता है।
तू अकेला क्या उखाड़ लेगा? सरपंच से 1 लाख दिल दूंगा मुंह बंद रख ले अच्छा होगा


मयंक__फोन रिकॉर्डिंग ऑन करके टेबल पर रख दिया...
काका, पैसे नहीं चाहिए। कागज चाहिए।
नकली बिल, सरपंच के फर्जी साइन, मटेरियल की लिस्ट।
वो दो। नहीं तो ये रिकॉर्डिंग वीडियो...
सीधा कनिका चौधरी के पास। वो कल DM के पास जा रही हैं फिर आप सोच लो आपका क्या होगा


_मोहन पसीने से तरफ दरवाजे की तरफ देखा


मोहन__गिड़गिड़ाकर... मयंक, फंस जाऊंगा मैं। सरपंच मुझे मार देगा मेरा भी घर है, बच्चे हैं।


मयंक__ टेबल पर हाथ मारकर... तो स्कूल के 200 बच्चे पढ़ते है उन बच्चों का क्या काका
उनका घर नहीं है क्या? छत गिरेगी तो कौन मरेगा?
कागज दो या जेल जाओ। चुनाव तुम्हारा।


मोहन की कलम कांप रही थी। अलमारी की तरफ देखा
मोहन__मेरा नाम नहीं चाहिए मयंक नहीं तो क्या होगा पता
मयंक__नहीं आयेगा विश्वास करो मेरे ऊपर जैसा मै बोलूं वैसा करते जाओ अभी आप किसी को भी मत बताना उस औरत को भी नहीं समझे जो वीडियो है समझे


मोहन ने कांपते हाथों से अलमारी खोली। फाइल निकाली।


मोहन__ मयंक, ये लो। PH/2026/15 की असली फाइल।
इसमें सब है - नकली बिल, सरपंच के साइन, कमीशन की लिस्ट।
DM तक का नाम है। पर मयंक, कसम खा... मेरा नाम मत लेना
बोल देना "गुमनाम सूत्र" से मिला


मयंक__ फाइल लेकर... काका, नाम नहीं लूंगा लेकिन जैसा वैसा आपको करना है


तभी बाहर गाड़ी की आवाज। हॉर्न।


मोहन__घबरा गया... मयंक, सरपंच आ गया! जल्दी निकल पीछे के रास्ते से फाइल ले जा याद रखना मेरा नाम मत लेना कहा पर भी


मयंक फाइल छुपाकर पीछे के दरवाजे से निकल गया
उसको फाइल मिल गई इसलिए कॉलेज न जाकर सीधा घर चला गया
घर पहुंचा घर माहौल ही कामुक था शायद सुमित्रा स्कूल आई थी
सुमित्रा __आज जल्दी आ गए बेटा क्या जो काम करने गए वो हो गया
मयंक __हा मां हो गया ये लो छिपा के रख किसी के भी सामने नहीं आनी चाहिए नहीं पूरा खेल समाप्त हो जाएगा


कुछ देर बेटन के बाद वो उठी मयंक सामने ही अपनी साडी उतारने लगी, मयंक सुमित्रा को कपड़े बदलते देख के बाहर जाने लगा तो सुमित्रा ने उसे आवाज लगाई और बोली मयंक बेटा साड़ी को समेटे के रख दे मुझे टाइम लग जाएगा मयंक वापस रुक गया, सुमित्रा का ब्लाउज न्यू डिजाइन का था जो उसकी क्लीवेज को साफ दर्शा रहा था ,उसका पेटीकोट भी बहुत टाइट था नॉर्मली औरते ढीले ढीले पेटीकोट पहनती थी लेकिन सुमित्रा जब स्कूल जाती तो टाइट पेटीकोट पहनती इससे उसकी गांड़ का उभार अलग ही दिखता था और इस टाइट पेटीकोट में से सुमित्रा की गांड़ अलग ही दिख रही थी , और उसकी वो चिकनी पतली कमर मयंक का बुरा हाल हो रखा था,


मयंक __(कुछ सोच कर) मां मेरे पापा को क्या हुआ था
सुमित्रा__क्यों क्या बात है बेटा आज कोई कुछ बोला क्या तुझे
मयंक__नहीं कोई कुछ नहीं बोला लेकिन आप कभी बताती भी नहीं ना
सुमित्रा __समय आने दे बेटा मै बता दूंगी भरोसा नहीं है तुझे तेरी मां इतना भी
मयंक__हा मा आप पर तो पूरा भरोसा है लेकिन जब कोई कुछ कहता है तो दिमाग है तो दिमाग गुम जाता है,
आप कुछ बताती भी नहीं


सुमित्रा__समय आने दे सब बता दूंग तुझे


मयंक__हमारे परिवार के बारे में पापा के बारे में कल भी उधर दो औरतें बातें कर रही थी पता नहीं इसका बाप कौन है मैं तो कभी देखी नहीं इधर 2 साल से एकली रह रही है अपने बेटे के साथ.


सुमित्रा ने थप्पड़ मार कर एक मयंक को चुप हो जा बोली ना तुझ में जब समय आएगा तो पूरा बता दूंगी तेरा पापा कोई ऐर गेरे नहीं थे
मयंक को अपनी गलती का एहसास हुआ वह जोश में कुछ ज्यादा ही बोले गया था उसने तुरंत सुमित्रा के पेड़ पकड़ लिया और बोला सॉरी मन मेरा वह इरादा नहीं था आप हमेशा पापा को अच्छे बोलते हैं लेकिन मैंने कभी पापा को देखा नहीं
मैं तो वह दो औरतें अलग ही बातें कर रही थी कॉलेज में भी लड़के लड़कियां अजीब अजीब बातें करते हैं मैं तो अपने मुंह से बोल भी नहीं सकता-बहुत गुस्सा आता है इसलिए मेरे दिमाग में भी सब सवाल जन्म लेने लगे।
पता नहीं पिछले 2 दिन से बहुत ऐसी बातें करते हैं उसमें हमारे गांव के भी दो-तीन लड़के हैं एक तो वह सरपंच का पास में रहता है ना कालू उसका बेटा एक उसके पड़ोस में और रहता है वह भी
सुमित्रा __बेटा हर चीज एक समय पर करनी जरूरी है क्योंकि समय बड़ा बलवान है बेटा समय आने दे सब सत्य बताऊँगी आज से मेरा एक कहना करना बेटा जब तक मैं कुछ बताऊं ना तू किसी से पूछेगा भी नहीं और इस बारे में बात भी नहीं करेगा मेरे से भी और किसी से भी और किसी से उलझेगा भी नहीं
मयंक __ठीक है मां मै समय का इंतजार करूंगा अब से आपको कुछ भी नहीं पूछूंगा आप से भी नहीं दूसरे किसी से भी नहीं जब आपका मन करे तब आप बता देना


सुमित्रा __वैसे बेटा क्या बात करो रही थी वो दोनों



औरत1__ अरे देख उस सुमित्रा का बेटा आ रहा है देख कितना बड़ा हो गया
औरत 2__पता नहीं किसका है ये ओर आजकल तो सरपंच से भी लड़ रहा है ये
औरत 1 __मै तो इसके बाप को आजतक नहीं देखी


औरत2__मर्दों को रिझाना ही काम है



औरत1__अरे ये तो किसी मर्द को घास ही नहीं डालती


औरत2__ अरे मैन बहुत कुछ सुना है इसके बारे में एक नंबर की छीनाल है
औरत 1__अरे पता नहीं ये भी सुमित्रा का है या नहीं इसके उमर भी ज्यादा है दोनों एक ही उम्र के लगते है


औरत 2__ किधर से आ रह हो बेटे
मयंक __कॉलेज से ही चाची
औरत 1__ठीक है बेटा तेरी मां दिखाई नहीं देती आजकल कहा रहती है पता नहीं
मयंक__वो स्कूल मै लग गई दो महीना हो गया खाना बनती है वहां इसलिए
औरत __ठीक है बेटा
बाद मै मैं आ गया मा ये ही बातें मेरा दिमाग खराब हो गया यह तभी सुमित्रा ने ब्लाउज़ भी खोल दिया


मयंक का तो गला ही सूक गया मयंक ने बहुत बार सुमित्रा को ब्लाउज पेटीकोट यहां तक ब्रा मै भी देखा है लेकिन तब वैसी फीलिंग नहीं थी लेकिन आज उसका लन्ड रुकने का नाम ही ले रहा था , वो खुद को कंट्रोल कर रहा था लेकिन लन्ड को दिमाग नहीं होता इसलिए उसने उठना शुरू कर दिया , जिससे उसके पेंट में उभार दिखने लगा था जीसको सुमित्रा ने भी देख लिया जैसे कि सुमित्रा नजर मयंक के उभरते हुए लन्ड पर गई है तो उसे एहसास हव कि उसकी क्या पोजिशन है ओर मयंक क्या दिख रहा है सुमित्रा के फेस पर मुस्कान आ गायिन खुद को ठीक करने की कोशिश नहीं की,
मयंक की हालत का पूरा मजा ले रही थीउसने माहौल को ओर कामुक बनाने के लिए कब्जुक गई जिससे उसकी गांड़ पूरी उभर कर बाहर आ गई मयंक का लन्ड अपनी औकात मै आ गया थाहै


मयंक__मन मै__ उऊऊ फ़फ़फ़ मां यह क्या कर रही हो मेरी हालत खराब हो रही है मन कर रहा ह कपड़े फाड़ कर चढ़ जाओ ऊपर ही क्या हो रहा है मुझेअपनी ही मां के बारे माई सब सोच रहा हु लेकिन जब मां खुशामद अपने हुस्न का दीदार करा रही हैं तो मैं क्यो डरु ,
नहीं नहीं क्या पता वह नॉर्मल हो नहीं ज्यादा सोच रहा हूं लेकिन कोई मां अपने बेटे को अपनी गांड़ ऐसी दिखाती है क्या
लेकिन है तो औरत ही जरूरत भी होती होगी और सच भी है मैं कभी अपने पापा को तो देखा नहीं इतना बड़ा हो गया मयंक अपनी सोच में इतना घुस गया आ गई और बोली


सुमित्रा __कहा खो गया मेरा बेटा कुछ चाहिए क्या


मयंक__हड़बड़ाकर नहीं मैं कुछ नहीं बस ऐसे ही


सुमित्रा__-मुस्कुराते हुए यह मेरा ब्लाउज के हुक खोल दे बहुत टाइट हो रखा है मेरे हाथ नहीं पहुंच रहे हैं देख मेरी छाती भींज पड़ी है इनमें


मयंक ने सुमित्रा के बूब्स की तरफ देखा जो ब्लाउज से बाहर उभरते हुए दिखे


मयंक __मन इतना टाइट क्यों पहनती हो।


मयंक __बेटा अगर मैं भी ऐसे ही गांव की दूसरी औरतों की तरह पूरी कवर्ड होकर बाहर निकलूंगी तो कोई भी नौकरी नहीं देगा आजकल दुनिया से लड़ने के लिए सबसे पहले खुद की झिझक को खत्म करना होता है


मयंक __लेकिन मां अपने शरीर को दिखाना ऐसी नुमाइश करना जरूरी तो नहीं है


मयंक__नुमाइश करना सही नहीं है लेकिन अपनी खुशी के लिए पहनना बुरा भी नहीं है अच्छा यह बता जब तुम्हारी कॉलेज में कोई पेरेंट्स आते हैं तो उन मै कुछ ऐसे होंगे जो बिल्कुल गांव की वेशभूषा में आएंगे कुछ अच्छे मॉडर्न कपड़ों में तो तुम्हें कौन ज्यादा सही लगता है



मयंक __जो मॉडर्न कपड़ों में आते हैं


सुमित्रा__ वो क्यों


मयंक __उनका तरीका उनकी बातचीत उनका कॉन्फिडेंस अच्छा होता है वह साफ-सुंदर लगते हैं


सुमित्रा __बेटा सब तू गांव के लोग भी होते हैं लेकिन आज की पीढ़ी के हिसाब से खुद को डालना होता है इसलिए मैं रहती जरूर इस गांव में हूं यहां के लोग बहुत पुराने सोच के हैं लेकिन मैं तो पूरा नींद नहीं हूं और मुझे ऐसे देखकर मेरे स्कूल के बच्चे मुझे खुश रहते हैं टीचर भी खुश रहते हैं समझे और कपड़ों में बुरे नहीं होती बस नजर क्या देख रही है उसमें होती है लोग पूरे कवर्ड कपड़ों में भी कमेंट्स कर देते है इसलिए खुद को आज के हिसाब से जीना सीखो समझे


मयंक __जी मै समझ गया


सुमित्रा__समझ गए तो जल्दी से मेरा ब्लाउज उतार मतलब खोल


मयंक अपने काम के हाथों से सुमित्रा के ब्लाउज का हुक खोलना शुरू किया और उसका हाथ सुमित्रा की नंगी कमर पर टच हो रहा था


मयंक__मां आपकी स्किन कितनी सॉफ्ट है




सुमित्रा __अच्छा छूकर देख और बता कितनी सॉफ्ट है


मयंक मैं सुमित्रा की पीठ पर हाथ घूमना शुरू किया मन बिल्कुल मकन जैसी है मयंक हाथ से सुमित्रा का शरीर कांप उठा उसक रोंगटे खड़े हो गए


मयंक__मां आपको ठंड लग रही है क्या आपके तो रोंगटे खड़े हो रखे है




सुमित्रा __नहीं बेटा ठंड नहीं बस ऐसे ही कभी-कभी होता है


फिर सुमित्रा ने अपना ब्लाउज उतार दिया और मयंक के सामने खड़ी हो गई सुमित्रा के बूब्स उसकी रेड ब्रा मै से आदि बाहर दिख रही थी जिस पर रोंगटे खड़े हुए थे। उऊऊ फफ़फ़फ़ क्या खूबसूरत नजारा था


सुमित्रा __यहां से देख यह और भी सॉफ्ट होगा



सुमित्रा ने अपने बूब्स और पेट की तरफ इशारा किया मयंक ने अपना हाथ सुमित्रा के पेट पर रख दिया सुमित्रा के मुंह से आह निकल गई उसने अपने होंठ अपने दांतों मै दबा लिय मयंक का दूसरा हाथ जैसे ही सुमित्रा कि दूसरे बूब्स तक जाने लगा तो बाहर बाहर से किसी की आवाज चाहिए मयंक बार चला गया सुमित्रा ने भी जल्दी अपने कपड़े पहने और वह भी बाहर आकर देखा तो सामने शांति खड़ी थी


शांति __अरे बेटा मयंक सुमित्रा कहां है
मयंक __अन्दर है चाची बोलो कुछ काम था क्या
शांति __ऐसे ही आ गई बेटा बात करने तब तक सुमित्रा भी बाहर आ जाती है
सुमित्रा __आज ये रास्ता कैसे भूल गई शांति
शांति__ऐसा कुछ नहीं रास्ता नहीं भूली वो तुम्हे तो सुबह जल्दी चली जाती हो स्कूल इसलिए ओर शाम को समय नहीं मिलता खेत से। आती हु तब तक शाम हो जाती है
सुमित्रा __अच्छा ठीक है कैसे है तेरे खेत मै फसल
शांति_ठीक है मै तो एक बात सुनी थी इसलिए आई ये मयंक उस सरपंच से क्यों उलझ रहा है तेरे अंकल ने बताया मुझे तो
मयंक__मै कहा उलझ रहा हु चाची बस स्कूल के पैसे आए सरपंच ने पूरे ही खा लिए थे इसलिए उसका बोला था
शांति__बेटा होशियार रहना ये सरपंच बहुत खराब आदमी है कल तेरे अंकल को बुलाया उन्होने मुझे सही तो नहीं बताया लेकिन मुझे सक है तेरे लिए ही बुलाया होगा उसने चलो अब चलती हु खाना भी बनाना हे मुजे


सरपंच के घर
धनंजय सिंह__कालू 4 लड़के को भेज ये गाड़ी लेके उस कुत्ते को लेके आ हाथ पर तोड़ देना ओर एक बात सुन किसी भी लड़के को पहचाना नहीं चाइये उनको ये भी बोल देना कि मेरा नाम नहीं आना चाहिए 50 हजार हर एक को दूंगा बोल देना काम सुबह से पहले होना चाहिए


कालू__ सरपंच जी, गांव जाग गया है रिस्क है।


धनंजय सिंह__ गुर्राकर... रिस्क मेरा राज खत्म हो रहा है!
एक लौंडे ने नंगा कर दिया। अब डर नहीं, खौफ चाहिए।
जा! और हां... मुंह पर कपड़ा बांधना। कोई पहचान ना ले


मयंक के घर
शाम तक दोनों मां बेटे बात नहीं की
रात को मयंक बड़ी हिम्मत करके के सुमित्रा को बड़े प्यार से बाहों मै भर लिया सुमित्रा की जांग मयंक की दोनों जांघों के बीच आ गई मयंक का लन्ड सुमित्रा को अपनी जांघों पर
महसूस हो रहा था बस ये अहसास काफी था सुमित्रा को गर्म करने के लिए मयंक चुते ही सुमित्रा का शरीर गर्म हो जाता है मायंक का एक हाथ बूब्स के ऊपर था


सुमित्रा__बड़ा प्यार आ रहा था आज मां पर


मयंक __प्यार तो हमेशा ही रहता ही रहता है


सुमित्रा__अच्छा बच्चू रोज तो नहीं सोता मां के पास


मयंक __अब मै बड़ा हो गया हु ना इसलिए रोज नहीं सोता


सुमित्रा __है बड़ा तो तू हो गया है उपर से लेकर नीचे तक लेकिन मां के लिए बच्चे बड़े भी होते


मयंक ___जानता हु मां ,


ओर चिपक गया अब मयंक भी थोड़ा गर्म होने लगा था उसका लन्ड में सुरसुराहट होने लगी थी जिससे वो खड़ा होने लगा था लन्ड के खड़ा होने का एहसास सुमित्रा को भी हो रहा था दोनों अभी दिन मै ही तो सात मै थे वो याद आ गया मयंक ने अपना हाथ सुमित्रा के बूब्स पे रख दबा दिया सुमित्रा कि आह निकल गई सुमित्रा ने करवट ले ली जिससे जहां मयंक की बाजू से बूब्स दबी हुई थी अब सीधा मयंक को पांचू अंगुलियों बूब्स के ऊपर आ गई तीर सुमित्रा की गांड़ मयंक के लन्ड पर रगड़ रही थी


सुमित्रा ने थोड़ा दबाव पीछे को दिया ओर बोली


सुमित्रा__बहुत बड़ा हो गया है
मयंक ने भी सुमित्रा के बूब्स को हल्का दबाया ओर लन्ड का दबाव गांड़ पर दिया ओर बोला
मयंक __सब अपेकब ही है मां आपने ही तो इतना बड़ा किया है


सुमित्रा __अच्छा इतना बड़ा होकर भी मां पास आता तो नहीं


मयंक__ आपने ने कभी पास बुलाया ही नहीं तो कैसे आता


मयंक __मैने कब दूर किया तुजे तू ही नहीं आता


मयंक __मां समय कहा मिलता है अभी तो पूरे दिन उस सरपंच के पीछे लगा हुआ हु ना


मयंक__मां अब हम बहुत दूर चल जाएंगे इस गांव से


सुमित्रा __क्यों तुझे ये गांव अच्छा नहीं लगता क्या


मयंक__मां इस गांव अपना है कौन
जिसके साथ अच्छा लगेगा हम तो वैसे भी सबसे अलग ही रहते है क्यों कही बाहर रहा जाए जाह आप ओ मै आराम से रह सके
सुमित्रा __पहले तुम इस सरपंच को सीधा करो फिर चलेंगे
मयंक खुश हो गया इसी खुशी मै उसने सुमित्रा के बूब्स जोर से मस्ल दिए


सुमित्रा __मरेगा क्या अपनी मां को बहुत ताकत आ गई है तुम्हें


मयंक __सॉरी मां वो ख़ुशी मै


सुमित्रा __है जानती हु तेरी खुशी ओर ये नीचे वाली खुशी किस लिय है जो इतना उछाल रहा है वो


सुमित्रा का इशारा समझते ही मयंक झेंप सा गया अब तक दोनों चुप चाप इसका मजा ले रहे थे दोनों को पता था हम क्या कर रह है पर फिर भी मजा ले रहे थे लेकिन सुमित्रा ने इस बार बार मयंक को शरारती अन्दाज मै टोक दिया


मयंक __वो मां ये तो बस सोरी मां


सुमित्रा__अरे मैं ने तुझे डाटा थोड़ी न है , तू जवान हो रहा है तो ऐसा हो जाता है कोई नही मै तुम्हारी मां हु ओर सबसे पहले एक दोस्त इसलिए कोई भी बात बिना झिझके मुझसे कह सकता है तू


मयंक सुमित्रा से चिपक कर सो गया सुमित्रा के बूब्स पे अभी भी उसका हाथ था ओर लैंड सुमित्रा की गांड़ मै न सुमित्रा ने उसे हटाने की कोई कोशिश की न ही मयंक ने,
दोनों मां बेटे सो गए दुनिया से बेखबर इनको पता नहीं दुश्मन तो गाट गाले बेटा है घर के सामने
तभी घर के सामने कुछ हिलने की आवाज आई मयंक की निंद टूट चुकी थी
तभी घर के सरसराहट हुई मयंक को 4आदमियों परछाई दिखी मयंक ने देख लिया चार आदमी है


गुंडा1 __ फुसफुसाकर... यही है सो रहा है यही दबा दो साले को


एक गुंडा दीवार फांदकर अंदर आया। मयंक की चारपाई की तरफ बढ़ा जैसे ही मुंह पर हाथ रखा...


मयंक नींद में नहीं था एक लात गुंडे के पेट में मारी ओर गुंडा दो फिट दूर जाके गिरा
गुंडा "आह" करके गिरा लाठी छूट गई


मयंक__चिल्लाकर... मां ये कुत्ते हम मारने आए है
जब तक वो तीनों गुंडे आते सुमित्रा ओर मयंक दोनों खड़ हो जाते है


बाकी 3 गुंडे भी दीवार फांद गए मयंकओर सुमित्रा को घेर लिया
लेकिन तभी एक लाठी की आवाज आती है ओर सीधे एक गुंडे के शीर पर पड़ती है गुंडा वही नीचे गिर जाता है इतन मै मयंक को समय मिल जाता है ओर वो भी लाठी हाथ में ले लेता है


मयंक ने एक गुंडे को दबोच लिया... बता किसने भेजा बोल ना मादर चोद किसने भेजा
3 भाग गए। एक को राजेश ने पकड़ लिया


गुंडा__ कालू का साला हु उसने भेजा उसको सरपंच ने बोला था मेरी गलती हो गई साहब माफ कर दो


पूरा गांव जाग गया। औरतें-लोग लालटेन लेकर आ गए गांव के बीच बड़ा चौक पड़ता है उसमें कालू के आले को जिसका नाम जग्गू है उसको बीच में बिठा दिया
गांव वालों ने पुलिश को फोन कर दिया थोड़ी देर पुलिश आ गई
वहां कनिका चौधरी भी आ गई
कनिका__मयंक कैसा है तू ओर तुझे लगी तो नहीं
मयंक __नहीं नहीं इनकी औकात नहीं मुझे मर सके


मयंक__रात में घर मैं घुसकर मारने की कोशिश की थी सर


पुलिस इंस्पेक्टर__ पहलवान का कॉलर पकड़कर... बोल, किसके कहने पर आया तेरे ऊपर अटेम्प्ट टू मर्डर का केस होगा 7 साल की जेल होगी


पहलवान__ गिड़गिड़ाकर... साब माफ करो! सरपंच जी ने भेजा 50 हजार दिए ओर कहा मयंक हाथ पर तोड़ कर को नदी में फेंक दो!


गांव केलोगोंने नारे लगाना शुरू कर दिया
सरपंच मुर्दाबाद
सरपंच मुर्दाबाद
सरपंच मुर्दाबाद
सरपंच मुर्दाबाद
इंस्पेक्टर_कनिका जी, अब केस फाइल करदु है। धारा 307


कनिका __मयंक बेटा, तेरा बयान दर्ज होगाये गुंडा सरकारी गवाह बनेगा


मयंक__इंस्पेक्टर साब, एक बात सरपंच को अभी मत पकड़ना उसे भागने दो।
और हां, उसकी बेटी रेनू को कुछ मत कहना। वो बेगुनाह है।


पुलिश जग्गू को पकड़कर ले गई पुलिश स्टेशन ओर
सरपंच मुझे पकड़ने क्यों नहीं आए ओर क्या प्लान किया है उस कमीनें ने


सुबह के चार बजे एक औरत गांव के बीच मै निकल कर मयंक के घर जा रही थी उसने जब ये शोर सुना तो वो उधर ही पुराने खंडर मै छुप गई
जब मयंक ओर सुमित्रा दोनों गांव के चौपाल से वापस आए
दोनों मां बेटे बात कर रह थे कि तभी वो औरत गर के अंदर आयी काली सोल डाली हुई


मयंक__कौन हो तुम वही खड़े हो जाओ
औरत __डर कर माफ करना बेटा मै संजना हु
सुमित्रा__अरे सुमित्रा तुम यहां क्या कर रही जीवो भी इस टाइम क्या तेरी सास की लड़ाई हुई क्या फिर
संजना__नहीं दीदी लड़ाई बढ़ाई कुछ नहीं हुई है
मयंक__तो क्या हुआ अपबय टाइम यहां आई है कुछ तो कारण होगा न चाची
संजना ने दरवाजा बंद किया ओर बोली मै भी आप के दोनों मां बेटे के साथ हु इस सरपंच की लड़ाई मै मुझे भी बहुत याचना दी है कुत्ते ने
सुमित्रा __बेटा मयंक तुम जा पानी लेके आ संजना तुम यहां बेटों नीचे ही बिस्तर किए हुए थे उनके क्योंकि दोनों मां बेटे नीचे हो सोते है
मयंक पानी लेके आता है वो
अब बोला क्या हुआ विस्तार से पूरी बात बताओ


हमारे गाँव में सरपंच ओर उसके भाई रहते थे, उनके नाम धनजय सिंह आपको पता हे
मेरी शादी हुई थी जब सरपंच से पैसे उधर लिए थे


मेरे पति उनके पास गया और उनसे बहुत हाथ- पैर जोड़ के पैसे उधार देने को बोले बहुत मिन्नत करने के बाद पेसो के लिए मान तो गए लेकिन एक शर्त रख दी जमीन एक हिस्सा मेरे नाम कर न पड़ेगा
मेरे पति ने एक हिस्सा उसके नाम कर दिया


हमारी शादी हो गई सब अच्छा चल रहा था
इसी बीच मेरे पति का एक्सीडेंट हो गया चार साल तक हम दे नहीं पाए इसलिए उनका ब्याज से ब्याज बहुत बढ़ गया


बहुत समय बीत गया था इसलिए सरपंच ने पैसे वापिस करने को कहने लगे।
पर पेरे पति को इस बारे में कोई सुध नहीं थी।


बार बार पैसे मांगने के बाद भी मेरे पति ने कोई जवाब नहीं दिया।मेरे पति रगन
सुरेश डर रहा था कि अब वो उनके पैसे कैसे चुकायेग


तब सुरेश ने उनको बोला कि साहब जमीन का एक हिस्सा है आप रख लो
एक दिन सरपंच के आदमियों ने मेरी पूरी जमीन पर कब्जा कर लिया और ये जमीन पूरी सरपंच के नाम है


मेरे पति सुरेश बाहर थे इसलिए मैं सरपंच के घर गई मेरी सास भी साथ मै थी
संजना__ _ सरपंच जी वो आपके आदमी हमारी पूरी जमीन कब्जा मै ले लिया आपका तो एक हिस्सा था न



सरपंच __ तब एक था डार्लिंग उसका ब्याज भी तो बड़ा है इसलिए अब सारी जमीन मेरी हुई
मेरी सास __ हम कहा जाएंगे सरपंच जी ऐसा मत करो हमारे साथ
सरपंच __ठीक है जमुना तुझे पता है मुझे क्या चाहिए वो तू देदे मै एक हिस्सा छोड़ के तेरी वापस तुझे दे दूंगी
मेरी सा __ अब मेरी उम्र कहा है सरपंच जी ये सब करने की
सरपंच__जमुना तुझे से करेगा भी कौन तेरी बहु का क्या नाम है संजना
मेरी सास ठीक है सरपंच जी मै बात करती हु
फिर मेरी सास ने मुझे वहां भेजने के मजबूर किया वो मै गई एक बार तो सरपंच ने किया फिर मेरा वीडियो भी बना लिया उसके बाद तो कितनों के साथ ही मुझे सोना पड़ा न जमीन मिली। ना ही मुझे इस गांव मेरे पति आपस आ पाए मै बदनाम कर दूंगा धमकी देता रहता है
अभी थोड़े दिन पहले राजेश के साथ सुलाया था उस कमीनें ने फिर वाली पूरी बात स्मित्रको बताती है
मयंक__टिक है चाची अभी आप सामने नहीं आना कोर्ट मै गवाह आपको देना पड़ेगा
 
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पार्ट 9
अब धनंजय सिंह अकेला हों गया छोटे मोटे गुंडे थे वो भी भाग गया जीस बंगले मै 100आदमी रहते थे आज बंगला खाली पड़ा उल्टा जिस जग्गू पर भरोसा किया वो पकड़ा गया कालू भी वहां से भाग निकला पता नहीं कहा गया


टेबल पर शराब की बोतल, पिस्तौल, और रेनू की बचपन की फोटो उसकी आंखों में आंसू थे
बेटी इतना कमाया तेरे लिए आज सब कुछ लुट जाएगा एक इस मयंक की वजह से
पुलिस किसी भी वक्त आ सकती है पूरा गांव बाहर खड़ा है रात से सरपंच भाग न जाय


कांपते हाथ से फोन उठाया।
रेनू बेटा डायल किया 3 रिंग के बाद फोन उठा।


रेनू__नींद में... हेलो? पापा इतनी सुबह? क्या हुआ आप ठीक तो हो


धनंजय सिंह__आवाज बैठी हुई, टूटे स्वर में... बेटी... रेनू...
मैं हार गया बेटी। सब खत्म हो गया।


रेनू __एकदम बैठ गई... पापा क्या हुआ? आपकी तबियत सही नहीं है क्या


धनंजय सिंह__रोते हुए... तबीयत नहीं बेटी, किस्मत खराब है।
कल रात मैंने मयंक को मरवाने के लिए आदमी भेजे थे।
पकड़े गए उन्होंने मेरा नाम ले दिया।
अब पुलिस आएगी जेल जाऊंगा। 20 साल... शायद पूरी जिंदगी


फोन पर खामोशी


रेनू__तो... तो मयंक सच बोल रहा था? आपने सच में स्कूल का पैसा...?
मयंक तो उसे पहले सब कुछ बता चुका था उस दिन जब सुबह कॉलेज जा रह रास्ते मै रेनू मिल गई थी उसने पूरी बात रेनू को बता दी


धनंजय सिंह__ हां बेटी खा लिया। 35 लाख।
तेरी लंदन की फीस, ये बंगला, गाड़ी... सब उसी पैसे से।
मैं चोर हूं बेटी। तेरे दोस्त ने सही कहा।
पूरे गांव के सामने नंगा हो गया हूं मैं।


रेनू फूट-फूटकर रो पड़ी


रेनू __रोते हुए... पापा, आपने ऐसा क्यों किया?
मैं तो समझती थी आप भगवान हो। गांव के राजा।
मयंक 2 महीने से मेरा दोस्त है पापा। उसने मेरी जान बचाई थी।उन गुंडों से भी बचाया था तब से मै उसको जानती हु
और आप... आप उसकी जान लेने चले गए?


धनंजय सिंह__ स.. बेटी, सत्ता का नशा था।
लगता था मैं जो करूंगा, कोई नहीं पूछेगा।
पर एक लड़के ने पूछ लिया। तेरे दोस्त ने।
बेटी, मैं आज सरेंडर कर रहा हूं।
DM ऑफिस जाऊंगा। सब कुबूल करूंगा।


धनंजय सिंह __बस तुझ से एक भीख मांगने लिय फोन किया.


धनंजय सिंह__ बेटी... नफरत मत करना मुझसे
मैं बुरा बाप हूं, पर हूं तो बाप ही।
तेरी शादी के सपने देखे थे। डोली उठाने का ख्वाब था
अब जेल की सलाखों से देखूंगा।
पर बेटी, अगर तूने कह दिया "नफरत करती हूं"...
तो जीते जी मर जाऊंगा।
बोल बेटी... क्या तू अपने चोर बाप से नफरत करेगी?


रेनू__आंसू पोंछकर, कांपती आवाज में... पापा...
आपसे नफरत नहीं कर सकती। खून का रिश्ता है।
पर इज्जत... इज्जत नहीं कर पाऊंगी पापा।
आपने सिर्फ पैसा नहीं खाया, भरोसा खाया।
मेरा, मयंक का, पूरे गांव का।


धनंजय सिंह__ बेटी... तो माफ नहीं करेगी?


रेनू__पापा, माफी भगवान देगा। मैं बेटी हूं।
आप सरेंडर करो। सजा काटो। एक-एक पैसा लौटा ओ।
स्कूल की छत अपने हाथ से बनवाओ।
जिस दिन 200 बच्चे उस स्कूल से हंसते हुए निकलेंगे...
उस दिन समझूंगी आपने पाप धो लिया।
उस दिन आऊंगी आपसे मिलने जेल में।
पर आज नहीं पापा। आज दोस्त का साथ दूंगी।
क्योंकि आपने बाप का फर्ज नहीं निभाया, पर मयंक ने दोस्त का निभाया। फोन कट।_


धनंजय सिंह फर्श पर बैठ गया। फोटो सीने से लगाकर फूट-फूटकर रोया।
10 मिनट बाद उठा। कुर्ता पहना। टोपी लगाई।
दरवाजे पर पुलिस की गाड़ी आ चुकी थी।
खुद चलकर गेट तक गया। हाथ आगे कर दिए।


धनंजय सिंह__ इंस्पेक्टर साब, हथकड़ी लगा दो।
मैं धनंजय सिंह, ***गांव का पूर्व सरपंच... सरेंडर कर रहा हूं।


गांव में खबर फैली__सरपंच ने हथियार डाल दिए



तीन दिन केस चला सबूत पक्के थे -
1. मोहन की गवाही + ओरिजिनल फाइल
2. जग्गू की गवाही- "हत्या की कोशिश"
3. राजेश की गवाही - "15 हजार रिश्वत ओर ब्लैकमेल
4संजना की गवाही जमीन हड़प ली उसकी उसके साथ बलात्कार
5 कनिका चौधरी के दस्तावेज - "35 लाख घोटाला"


जज साहब ने फाइल बंद की। चश्मा उतारा।


जज__ धनंजय सिंह, आप गांव प्रधान थे रक्षक थे आपने 200 बच्चों की जान दांव पर लगाई जनता के भरोसे का खून किया
IPC 409 - सरकारी गबन, IPC 307 - हत्या का प्रयास,
IPC 120B - आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम।


जज__ अदालत आपको उम्रकैद की सजा सुनाती है।
जब तक जिंदा रहेंगे, जेल में रहेंगे।
35 लाख की रिकवरी आपकी संपत्ति बेचकर होगी।
ये फैसला नजीर बनेगा - जो बच्चों की छत खाएगा, वो जिंदगी भर सलाखें गिनेगा


कटघरे में धनंजय सिंह गिर पड़ा। 20 साल में पहली बार घुटनों पर।
पीछे बैठी सुमित्रा की आंखें भर आईं - खुशी की नहीं, अफसोस की मयंक चुप। राजेश ने सिर झुका लिया।
रेनू की आंखों में आंसू थे वो तो रही थी कनिका ने उसे संभाला


कोर्ट के बाहर मीडिया फैसला सुनकर बाहर निकली रेनू को माइकपर घेर लिए।


रिपोर्टर__ मैडम, आपके पिता को उम्रकैद हुई। कुछ कहना चाहेंगी?


रेनू__चश्मा उतारकर, आंखें लाल... हां कहूंगी।
आज मेरा बाप मरा नहीं, पर बाप का घमंड मर गया।
अदालत ने सजा दी, पर सबसे बड़ी सजा मैंने दी -
मै कभी भी जेल मै मिलने नहीं जाऊंगी
आज भी नहीं मिली


आवाज भर्र गई


रेनू__पर सुन लो - मैं चोर की बेटी नहीं हूं।
मैं उस लड़की की बेटी हूं जिसने पापा को सरेंडर करवाया।
जिसने मयंक का साथ दिया।
मेरे पापा जेल में सड़ेंगे, उनकी सारी प्रॉपर्टी को बेंच के स्कूल बनाऊंगा यही मेरा इंसाफ है।


मीडिया सन्न मयंक दूर खड़ा देख रहा था कुछ बोला नहीं।


जेलर__ कैदी नंबर 420, तेरा सामान घर से आया है।


एक पोटली। खोली - अंदर रेनू की बचपन की फोटो, गीता, और एक चिट्ठी


_चिट्ठी खोली:_


> "पापा,
> आज आपको उम्रकैद हुई। रोई नहीं।
> आपने कहा था - 'नफरत मत करना'।
> नफरत नहीं है पापा। दया है।
> आप 20 साल राजा रहे, अब 20 साल कैदी रहोगे।
> पर अगर जेल से भी एक ईंट ईमानदारी की लगवा दो,
> तो आ जाऊंगी मिलने।
> वरना मेरी आखिरी मुलाकात आज ही समझो।
> - आपकी बेटी, रेनू"


धनंजय सिंह चिट्ठी सीने से लगाकर फूट-फूटकर रोया।
पहली बार "सरपंच" नहीं, "बाप" रोया था।





रेनू__सुमित्रा के पैर छूकर... आंटी, जा रही हूं


सुमित्रा__ सिर पर हाथ फेरकर... बेटी, क्यों जा रही?
तेरा घर है ये। तेरा गांव।


रेनू_ आंखों में आंसू रोककर... आंटी ये गांव मेरा था।
जब तक पापा "सरपंच " थे। अब पापा "कैदी" हैं।
मैं "कैदी की बेटी" हूं।
सब्जी वाली चाची देखकर मुंह फेर लेती है
बच्चे उंगली उठाते हैं - "चोर की बेटी जा रही है"।
काकी, मैं लड़ सकती हूं दुनिया से, पर हर रोज ताने से नहीं।


मयंक चुपचाप खड़ा था। वो रेनू के पास आया


मयंक__ धीरे से... रेनू, रुक जा गांव तेरा भी है वैसे भी स्कूल तो तू ही बनवा रही है फिर क्यों जा रही है
तूने सच्चाई साथ दिया था। तू गवाह नहीं बनी, पर गद्दार भी नहीं बनी
रेनू ने भी मयंक के दिल मै कही ना कही जगह बना ली वो उसके लिय अपने बाप से लड़ गई ये करना हर कोई नहीं कर सकता
रेनू__ मुस्कुराकर, पर आंखें भीगी... मयंक, तूने दोस्ती निभाई
बाप के खिलाफ जाकर भी मुझे "बेटी" रहने दिया।
पर मयंक, हर बार बस से उतरूंगी तो लोग कहेंगे -
"देखो, वो आ गई जिसने बाप को जेल भिजवाया"।
मैं मजबूत हूं, पर इतनी नहीं


मयंक__ रेनू, तो क्या दोस्ती भी बस स्टैंड तक थी


रेनू__मयंक की तरफ एक कदम बढ़कर... दोस्ती जिंदगी भर की है पागल ये सोचना भी मत जब शहर आवो गे तो मिलोगे जरूर हा कुछ भी काम हो मेरे लिए तो फोन जरूर कारण मुझे एक बार


याद रखना जब भी लग सच्चाई के रास्ते मै तुम अकेले हो उस समय रेनू को भी याद करना जो सच के साथ खड़ी थी और तब भी तुम्हारे साथ मिलूंगी


बस आ गई


कनिका चौधरी__ रेनू को गले लगाकर... बेटी, तू शेरनी है।
भाग नहीं रही, उड़ रही है। जा। अपना आसमान ढूंढ।


राजेश__ सिर झुकाकर... बिटिया, माफ कर देना।
हम गांव वाले... हमसे गलती हो जाती है। छोटी छोटी बाते हो जाती है


रेनू__ सबको हाथ जोड़कर... गलती आपकी नहीं है चाचा।
गलती सिस्टम की है।ओर यह किस किस के मुहे पकड़ूंगी
ओ रही सही को सही बोल सबका अधिकार है
सुमित्रा _ रेनू को गल्ले लगाकर तू भी मेरी बेटी है जब तुझे लगे कि गांव की याद आए आ जाना मेरे हर के दरवाजे तेरे लिए खुले मिलेंगे
बस में चढ़ गई। खिड़की से हाथ हिलाया।
मयंक न भी हाथ हिलाया । कुछ बोला नहीं।
बस देखता रहा जब तक बस धूल में गायब नहीं हो गई


सुमित्रा__ मयंक के कंधे पर हाथ रखकर... रो मत बेटा।
जो उड़ने के लिए बने हैं, उन्हें पिंजरे में नहीं रखते
रेनू चली गई, पर जीत छोड़ गई
पूरे दिन मयंक कनिका के घर पे ओर गांव की पंचायत मै था


शाम को मयंक गर आया तो सुमित्रा स्नान कर रही थी बाथरूम (शावर+बाथटब)मयंक को पेशाब लगी इसलिए सीधा बाथरूम मै गुस्सा ओर सामने देखा सुमिता ब्रा पैंटी में खड़ी थी, वैसे तो मयंक ने बचपन से सुमित्रा को ऐसी रूप में देखा था कपड़े बदलते देखा था लेकिन अब सब कुछ बदल चुका था अब मयंक की नजर मै सुमित्रा सिर्फ़ मां नहीं थी वो उसने एक औरत के रूप में अपनी प्रमिका को देखता था वही सुमित्रा का नजरिया भी बिल्कुल बदल चुका है,


उसकी नजर मयंक पर गई ओर दूसरी नजर सीधे उसके लन्ड पर गई जो एक दम तन कर खड़ा था अंडर वियर मै,


सुमित्रा की तो सांस ही अटक गई थी, दोनों बस एक दूसरे के घूरे जा रहे थे मयंक को समझ नही आ रहा था क्या करे सुमित्रा भी बिना कुछ बोले खड़ी थी,
मयंक आगे बढ़ता गया सुमित्रा बस उसे देखे जा रही थी ,मयंक ने सुमित्रा के कमर मै हाथ डाला ओर अपनी तरफ खींचा, सुमित्रा की बड़े बड़े बूब्स मयंक के सीने से टकरा गई,
मयंक का लन्ड सुमित्रा के पेट पर तगड़ टकड़ा था मयंक ने का कर सुमित्रा को खुद से भींच लिया और अपने हॉट सुमित्रा के होठो पर रख दिय सुमित्रा एक दम शॉक्ड ओर शांत खड़ी थी उसने कोई हरकत नहीं की घी मयंक ने एक बार भी अपनी तरफ से कुछ नहीं किया था


मयंक ने जोश में सुमित्रा के हॉट काट लिया और उसके बूब्स को जोर भींच दिया सुमित्रा ने मयंक को दूर धकेला और एक जोर डर थप्पड़ मयंक के गाल पर जड़ दिया ,थप्पड़ इतना जोर दार था कि पूरा कमरे मै गूंज उठा मयंक जिसे बहुत तेज मूट आया हुवा था मयंक अंडरवियर मै मूत दिया


वो इतना डर गया था कि उसकी आंखों से आंसू और लन्ड से मूत निकल गया था मयंक कुछ देर वही खड़ा रहो सोचता रहा समझ में नहीं आ रहा था मां तो मै इतने आगे बढ़ गए मुझे साथ भी देती थी कभी रोक भी नहीं फिर आ ऐसा क्या हु


सुमित्रा को गुरु जी वाली बात याद आती तुम्हे इसकी मां बनकर बड़ा करना है तुम्हे इसे दुनिया की हकीकत बताना है इसको कभी भी पता नहीं चलना चाहिए कि तुम इसकी असली मां नहीं हो



मयंक बाहर चला गया वो तो पेशाब करने आया था वो तो सुमित्रा की धप्पड़ से कर ली तीनसुमित्र भी शॉवर चला कर बहुत देर तक ठंडे पानी में नहाती रही ओर रोती रही


क्यों रो रही थी ये तो सुमित्रा ही बता सकती थी , वो तो मयंक के साथ खुश थी उसके साथ गर्म हो जाती थी फिर आज क्या हुआ मयंक को देखकर मोहित हो गई थी फिर उसने मयंक को थप्पड़ क्यों मारा ?



सुबह मयंक अपने समय पे उठा ओर कॉलेज जाने के रेडी हो गया दोनों मां बेटा मै कोई बात नहीं कर राह था सुमित्रा ने नाश्ता दिया मयंक ने नाश्ता किया ओर निकल गया कॉलेज


सुमित्रा मन मैं आज मुझसे इतना नाराज हो गया कि बेटा आज बोला भी नहीं ये अपना रास्ता नहीं भूल जाए क्या करूँ मै क्या मैं गुरु जी से बात करु नहीं नहीं उसमें अभी एक महीना ओर है वहां जाने के लिए
वो भी स्कूल गई ओर दो दिन ऐसे ही निकल गए लेकिन इन दो दिनों मै उनके बीच कोई बात नहीं हुई
नहीं ऐसा नहीं होगा मेरा बेटा मुझे नहीं भूल सकता मैं उसे भूलने नहीं दूंगी


शाम को मयंक खाना खाने के अपने बिस्तर पर आंख बंद किए हुए लेटे था था और सोच रहा था मां से कैसे माफी मांगे आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ मां बेटे बिना बोले रह यह मां ने कभी गुस्सा किया हो मां की नाराजगी उसे बहुत तकलीफ दे रही थी उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी मां का सामना करने की


तभी उसके रूम का डोर खुला मयंक ने हल्की सी आंख खोल कर देखा तो उसे 440 वाट का झटका लगा सामने का नजारा ही इतना खूबसूरत था जिस देखकर को खुद कामदेव सम्मोहित हो जाए सामने सुमित्रा खड़ी थी एक रेड कलर की साड़ी में ब्लाउज इतना छोटा की 60% बूब्स तो बाहर ही दिख रहे थे सुमित्रा हाथ में पल्लू लिए खड़ी थी मयंक बिना पल के झटके बस सुमित्रा को ही देखे जा रहा था


मयंक खड़ा हो गया था और उसके लन्ड तो उससे पहले खड़ा था सुमित्रा धीरे-धीरे चलती हुई मयंक के पास आई दोनों आमने-सामने खड़े थे मयंक की हालत खराब थी वही सुमित्रा की धड़कन भी बहुत बड़ी हुई थी दोनों के बीच फैसला बस एक उंगली की मोटाई जितना था मयंक को खुद को कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था लेकिन उसको पिछली बार का थप्पड़ याद आ गया और दोनों 10 मिनट तक ऐसे ही खड़े रहे


फिर सुमित्रा नहीं खामोशी को तोड़ा
सुमित्रा __बस यही कंट्रोल चाहिए मुझे तुझ में मेरे बेटे


मयंक __अचंभे में समझा नहीं आप क्या कहना चाहती हो मां


सुमित्रा __नहीं समझे अब सही समझाने का टाइम आ गया बेटा तुम्हें क्या लगता है मैं तुम्हें उसे दिन थप्पड़ क्यों मारा


मयंक__ वह मैंने वो वो गलत हरकत की थी सॉरी मां मुझे माफ कर दो मैं बहक गया था मुझसे गलती हो गई


सुमित्रा__ तुम गलत बात के लिए माफी मांग रहे हो गलत सोच में भी जी रहे हो
मयंक__आप कहना क्या चाह रही है मुझे कुछ समझ ना आ राह है आप क्या समझाना चाहते हो


सुमित्रा __तुम मेरे करीब आए और मुझे किस किया अगर किस करने पर थप्पड़ मारना होता तो पहली बार में ही मार द देतीं या उसे दिन मार देती जिस रात तुम मुझसे चिपक कर अपना वह मेरी गांड पर रगड़ रहे थे यह तुम भी जानते हो कि मैं तुम्हें नहीं रोका बल्कि बढ़ावा दिया था


मयंक __फिर क्या गलती थी मेरी


सुमित्रा__ गलती थी तुम देख के मुझे लगा मेरी परवरिश कमजोर रह गई मै तुझे कन्ट्रोल करना नहीं सिखाया तुम मुझे देख के बहके गए थे ऐसे तो किसी भी औरत को देख के बहके जावोगे किसी के भीं चुंगल फंस मैं जावोगे
मयंक__ उसे रात भी तो बहक गया था तब क्यों नहीं मारा


सुमित्रा उसे रात मैंने साथ में तुझे साथ दिया मेरी मर्जी शामिल थी लेकिन उसे दिन तुम मुझे मेरी मर्जी जाने बिना ही तुम आगे बड़ गए तुम बस बहक गए और मुझे चूमने लगे


मयंक&_ लेकिन आपने कोई विरोध भी तो नहीं किया मुझे कैसा मालूम चलता कि आप ये सब नहीं चाहती


सुमित्रा __साथ भी तो नहीं दिया


मयंक__ तुम मुझे कैसे पता चलता है कि आप साथ देना चाहती हो या नहीं अब कहना क्या चाहती हो वह बोलो ना


सुमित्रा__ जब कोई मर्द किसी औरत को चूम रहा हो और औरत शांत खड़ी हो उसके दो कारण होते हैं या तो वह नहीं चाहती मर्द उसे चूमे या फिर उसकी कोई मजबूरी है वो चुप है या वह इस असमज मे में है कि वह जो कर रही है वो गलत है या सही है वो चुनाव नहीं कर पा रही है


तुमने आगे बढ़कर किस किया यह मर्द होने की ओर मजबूत मर्द की पहचान है लेकिन अगर औरत ने साथ नहीं दिया वहां तुम्हारी समझदारी काम आती है तुम्हें वहीं रुक कर यह देखना चाहिए था और वो क्या चाहती है अगर वह मजबूर है और तुम वहीं रुक गए तो औरत के नजरों में तुम्हारी इज्जत और बाद जाएगी और किसी न किसी दिन वो खुद तुम्हार तुम्हारे पास आएगी और यदि यदि वह असमझ में है तो उसकी दुविधा दूर करो अगर सुविधा दूर हो गए तो फिर तो तुम्हारे पास आएगी अगर नहीं आई तो समान करेगी और वक्त के साथ तुम्हारे हालत के साथ में वह तुम्हारी होगी


लेकिन अगर तुमने उसकी बिना मर्जी के कुछ किया तो तुमसे दूर चली जाएगी अगर दूर ना भी दे तो उसने तुम्हारे साथ रिश्ता बना भी लिया तो तो भी मौका मिलते ही वह किसी और की हो जाएगी तुम्हारी कभी नहीं हो पाएगी
उसे दिन तुमने अपने मन की भावनाओं को सनी मेरे मन की नहीं और बेटा औरत की मर्जी के हमेशा इज्जत करना उसके साथ जबरदस्ती करने कभी भी मत जाना


मयंक__ समझ गया मां अब मुझे गलती का एहसास है


(सुमित्रा मन मैं__ तेरी परवरिश की जिम्मेदारी मेरी है बेटे तुम उन सब पापियों को नष्ट करना होगा जो तेरे मां बाप को मारा है उनको एक एक चुन चुन कर मरना होगा उनको कुत्ते की मौत मारना )


सुमित्रा____बेटे कभी भी हालातों को अपने कंट्रोल में करना ही बेहतर होता दूसरों के कंट्रोल मै कभी मत जाना


मयंक मां अब कभी ऐसा नहीं होगा


सुमित्रा __जब भी तुझे लागे तेरा मन बहकने रहा है तू मेरे पास आ जाना मैं तुझे सही रास्ता दिखाऊंगी


मयंक __ठीक है मां अब आप जैसा बोलो वैसा ही होगा


फिर सुमित्रा आगे बाद कर अपने पास खींच लिया सुमित्रा के बूब्स मयंक के मुहे में दब गए मयंक सुमित्रा ने नशीली आंखों से मयंक को देखा तो दिल की धड़कन बढ़ गई तो सुमित्रा ने मयंक को बालों में हाथ घुमाया और सर नीचे झुका कर अपने होता उसके होठों से मिला दिए उ ऊ ऊ ऊ ऊ ऊ फ़ फ़ फ़ फ़ फ़ मयंक की तो हालात ही खराब हो गई थी इतने मुलायम हॉट खुद मयंक के होठों को अपनी गिफ्ट में लिए हुए थे कोई हड़बड़त नहीं बड़े प्यार से सुमित्रा मयंक को होठों को अपनी गिफ्ट में लिए हुए थे चूम रही थी मयंक सीधा खड़ा था उसे हाथ चलते हुए डर रह थे लेकिन उसके हॉट चलने लगे थे



थोड़ी मस्ती की नहीं की तभी मयंक के घर के सामने एक गाड़ी आकर रुकी उसमें से उतरी कनिका चौधरी
मयंक ओर सुमित्रा बाहर देखा तो सामने कनिका चौधरी खड़ी थी
मयंक__अरे आंटी आप इस टाइम क्या बात है
कनिका__ क्यों नहीं आ सकती क्या तेरा काम हो गया तो क्या हम अब मिल भी नहीं सकते क्या तुम तो हमारे कुछ लगते नहीं हो यही कहना चाहते हो
मयंक__अरे अरे आंटी रुक जाए मुझसे गलती हो गई आपको ऐसा पूछ लिया
सुमित्रा __आवो कनिका आपका ही घर है ये कौन होता है पूछना वाला
मयंक__अब मां आप भी मेरी टांक खींच रही हो
फिर बहुत बाते की जाते जाते समय कनिका बोली रविवार के दिन मेरे घर आना हैं तुमको मयंक ओर हा खाना मत खा आ ना
मयंक __ठीक है आंटी आ जाऊंगा
फिर कनिका वहां से चली जाती है


शहर के बाहर एक खाली मकान पड़ा था मकान नहीं हवेली बोल सकते है


शायद पिछले 15 साल से बंद पड़ी थी इस मकान बाहर झाड़ियां बबूल सब उग गए थे अंडर जाना के रास्ता भी नहीं उसके गेट सामने गाड़ी खड़ी थी उस गाड़ी मै दो आदमी बेटे थे वो देख रह थे एक बोर्ड को
जिसपे लिखा था _'''"""सिंह फार्म हाउस"""""""
आदमी1___15साल हो गए अभी तक पता नहीं लगा सके उसका
आदमी 2__मुझे लगता है अब टाइम आ गया है उसका भी सामने आने का
आदमी 1__उसका जन्मदिन मै तो अभी एक महीना ओर है 1 जनवरी को तो है
आदमी2 __चल चलते है
मयंक ओर सुमित्रा सोने लगे मयंक सुमित्रा के चिपक के सो गया
सुमित्रा __क्या बात है बड़ा प्यार हो रहा है


मयंक ___क्या करें आप को प्यार करने का तो बहुत मन करता है आप तो प्यार करने देती नहीं वैसे आज आप बहुत सेक्सी लग रही है


सुमित्रा की बात सुन के पहले तो सुमित्रा शर्मा जाती है फिर झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहती है


मयंक__सेक्सी के बच्चे रुक अभी बताती हूं मैं तुझे की मैं कैसे लग रही हु


मयंक __जो भी बताना है तो बता सकती है होना तो लाइट चालू करदू ऐसे तो दिखेगा नहीं


सुमित्रा मन मै ये ना आज कल कुछ ज्यादा ही बोलने लग गया है पागल कहीं का सो जा




कनिका घर पहुंचते ही सोने की तैयारी करने लगी खाना तो उसने पहले ही खा लिया पति मोहन चौधरी ***शहर मै रहते है लेकिन हफ्ते में एक बार आते है रविवार को उस दिन मार्केट बंद रहता है इसलिए शनिवार रात वो आ जाते है


गए शनिवार को जब मोहन चौधरी गर पे आए तो उसकी खूबसूरत बीवी कनिका लगा रही थी उसे पता था कि उसके पति आने वाले है आज इसलिए वो पहले से तैयारी कर रही थी वो एक सुखी सम्पन्न परिवार की बेटी थी ओर एक अच्छे परिवार में शादी हुई थी क्योंकि मोहन भी बिज़नेस मैंने आदमी था वो बहुत खुश थी क्यों कि पति भी बहुत अच्छा मिला था ऐस ओ आराम की कोई कमी नहीं थी सास ससुर छोटे बेटे के साथ रहते थे जो शहर मै बिजनेश करता है कपड़ा का बिजनेश करता है है ओर वही रहते है वो यह गांव म रहती है एक तो ये पूर्व सरपंच रही है ओर इसके ससुर की जमीन भी है उस भी देख लेती है उसका पति उससे बहुत प्यार करता है पर शादी के 8 साल बाद भी उनके कोई बच्चा नहीं थाकुछ समय की पहले जब वो शहर गए थे उसके ससुर के घर थे तो वहां अपने सास ससुर को मोहन के साथ बच्चों के बेटे मै बात करते सुना था,वो बहुत मायूस हो गई थी ये सुन कर
दोनों पति पत्नी डॉक्टर को चेक भी कराया जिसमें पता चला कि मोहन में शुक्राणु की कमी है जिसके चलते ये प्रोलंब हो रही है डॉक्टर ने टेस्ट ट्यूब बेबी का सुझाव दिया था पर मोहन के शुक्राने बहुत ज्यादा कमजोर होने की वजह से उन्होंने किसी डोनर का सहारा लेने का सुझाव दिया था रात को जब पति पत्नी सो रह थे तो मोहन ने सुझाव दिया मोहन ने कनिका को अपने सीने से चिपका या ओर उसके सिर पे सहलाते हुए बात छेड़ी


मोहन__ एक बात कहु कनु ( मोहन घर में कनिका केके कनु ही कहता है)बुरा तो नहीं मानोगी डॉक्टर ने टेस्ट ट्यूब बेबी की सलाह दी हैजिस्मे वो किसी ओर का स्पैम इस्तेमाल करेंगे बच्चा तो मां या बाप या दोनों का मिलाजुला रूप लेता है हमें कैसा पता चलेगा कि ये स्पैम किसका है कैसा दिखता है ऐसे वीर्य का डोनेशन लोग आजकल पेसो के लिए करते हैवो ऐसे शराबी का ऐसा कोई भी ऐरे गेरे का होगा एक अखबार में मैने ऐसे ही एक व्यक्ति का इंटरव्यू पढ़ा था वो तकरीबन 60से 70वर्ष का था वो बोला इस उम्र मै भी वो बाप बना है दिखने में मरियल सा ओर कोई बीमारी हो ऐसा दिख रहा था


कनिका__ (वो भी सोच में पढ़ती है)आप कहना क्या चाहते है


मोहन __ में ये चाहता हु कि हम ऐसे व्यक्ति का स्पर्म ले जिसे हम पसंद करे


कनिका(उठ कर उसके सामने बैठ जाति है)ये कैसे मुमकिन है ओर हम ऐसे किसका
मोहन__तुम सोचो अगर कोई अगर कोई खूबसूरत ओर अच्छे व्यक्ति का बच्चा होगा तो वो भी वैसा ही होगा ना क्या तुम नहीं चाहेगी ऐसा


मयंक&_ (कनिका को भी
उनकी बात सही लगी पर ये कैसे मुमकिन है उसे समझ नहीं आ रहा था फिर अचानक उसके दिमाग की बत्ती जल)क्यों ने आपने किसी के बारे सोचा है मुझे लगता है तुम ने किसी को पसंद किया है इस काम के लिए है ना



मोहन__है तुम सही सोच रही हो है कोई मेरी नजर में पर बात इतनी ही नहीं है और भी है जो कुदरत ने रचा है हम ऐसे टेस्ट ट्यूब में करेंगे तो कुछ न कुछ गड़बड़ हो सकती है में ये चाहता हु कि ये सब कुदरती तरीके से हो


कनिका__(पहले तो उसको कुछ समझ नहीं आया पर जब उसकी बात को गौर से सोचा तो उसका मुंह खुला का खुला रह गया) क्या तुम ये केह रह हो कि में उसके साथ( गुस्से में)
तुम ऐसा सोच भी कैसे सकते हो मोहन


मोहन__(बहुत ही ज्यादा गंभीर स्वर में)देखो कनु तुम्हारे लिए ये जितना मुश्किल है उतना ही मेरे लिए भी ये मुश्किल है पर एक बार मेरी बात को जरा गौर से सोचो फिर कोई निर्णय लेना
कनिका__पर में आप के अलावा किसी और के साथ


मोहन___हम कर भिन्क्य सकते है कनु अगर हमे बच्चा चाहिए तो ये करना ही पड़ेगा


कनिका__ऐसे कैसे में कैसे किसी के भी साथ ओर पता नहीं वो कैसा हो आप ने सोचा हैं मतलब तुम्हारी नज़र में ऐसा कोई है कौन है वो



मोहन_तुम जानती हो उसे मयंक दिखने में बहुत खूबसूरत है बॉडीगार्ड भी होशियार भीं बहुत है देखा नहीं कैसे धनंजय को जेल मै डाल दिया बिना कुछ करे ओर लंबा भी बहुत है देखो कनु मैं तुम पर कोई फोर्स नहीं करूंगा पर कुछ सोच निर्णय लेना
ओर भीं बहुत बाते हुई इनके बीच आखिर मै कनिका मान गई ओर इसलिए कनिका ने संडे को मयंक को गर पे बुलाया






प्लीज़ दोस्तो अगर कहानी पसंद नहीं तो बोल दो मै लिखना बंद कर दु
पसन्द है तो भी बोलो कमेंट मै जवाब ज़रूर दे
 
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mis1234

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Itna accha likh rahe ho mitra, Phir kuch band karna chahte ho!

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Tq sir बट क्या लोगो की प्रतिक्रिया नहीं आती ऐसा लगता है उनको अच्छी नहीं लग रही है
 
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