jangali1o7
💣 JANGALI 💣
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Ma beta ki vartalap aur kuch kamuk ched chadnext update me kya ho sakta hai comment jarur karen
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1 NO. Updateऋषभ का शरीर उत्तेजना से काँप रहा था। उसने अपने हाथ में पकड़े हुए अपने सख्त, मोटे लंड को जोर-जोर से सहलाना शुरू किया। उसकी आँखों के सामने ममता का वह चेहरा घूम रहा था जब वह उसके लंड को अपने मुँह में भरकर उसे चूस रही थी।
वह कल्पना मात्र से ही पागल हो रहा था। तभी उसके दिमाग में एक शरारत सूझी। उसने सोचा कि क्यों न इस आग को और भड़काया जाए, और वह भी तब जब ममता बगल के कमरे में हो।
उसने अपना फोन उठाया और ममता को मैसेज किया। ममता, जो वास्तव में नींद से कोसों दूर थी और अपनी चूत की धड़कन महसूस कर रही थी, ने तुरंत फोन देखा।
ऋषभ: हाय
ममता: "हाय, क्या हुआ बेटा? इतनी रात को मैसेज क्यों कर रहे हो?"
ऋषभ: नींद नहीं आ रही है।
ममता: नींद तो मुझे भी नहीं आ रही है।
ममता: तुझे नींद क्यों नहीं आ रही?
ऋषभ: बस आज दोपहर में जो हुआ वही सीन घूम रहा है।
ममता कुछ पल के लिए ठहर गई, उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या जवाब दे। उसका चेहरा लाल हो रहा था, हाथ काँप रहे थे।
ऋषभ: क्या हुआ माँ?
ममता: कुछ नहीं...
ऋषभ: मेरा तो आज दिन बन गया शायद इसलिए नींद नहीं आ रही है।
ममता: शायद मुझे भी।
ऋषभ: आपको सबसे अच्छा क्या लगा?
ममता: तू बता।
ऋषभ: आपके जीभ की गर्मी, मेरे लंड पर, और आपको...
ये पढ़ते ही ममता के शरीर में सिहरन दौड़ गई, और शर्माते हुए ये लिखा।
ममता: मुझे भी...
ऋषभ: आपको क्या, मैं समझा नहीं।
ममता: मुझे नहीं पता पर अच्छा लगा।
ऋषभ: माँ शर्माओ मत, थोड़ा खुलकर बोलो ना।
ममता: तेरा मेरे नीचे किस करना...
ऋषभ: कहाँ नीचे?
ममता: मुझे नहीं पता रेशू, मुझे बहुत शर्म आ रही है।
ऋषभ: कहाँ, आपकी चूत पर?
ममता: हाँ...
ऋषभ: तो ये बोलो ना, माँ एक बात बोलूँ?
ममता: हाँ बोल।
ऋषभ: आपकी चूत का पानी बहुत टेस्टी है माँ।
ममता का पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई हो। उसका शरीर काँप रहा था, चेहरा जल रहा था शर्म से।
ममता: धत... शर्माते हुए।
ऋषभ: सच माँ।
ममता: बेटा, ऐसा मत बोल, मुझे बहुत शर्म आ रही है, हाथ काँप रहे हैं।
ऋषभ: माँ, आपकी चूत कितनी गीली हो गई थी दोपहर को, याद है? मेरी जीभ से चाटते वक्त वो रस कैसे बह रहा था।
ममता: आह... मत याद दिला।
ऋषभ: बोलो ना माँ, कैसा लगा जब मैंने आपकी चूत चाटी?
ममता: अच्छा लगा... पर शर्म आ रही है लिखते हुए।
ऋषभ: और जब आपने मेरा लंड मुँह में लिया, वो गर्माहट कैसी थी?
ममता: बहुत गर्म... रेशु , ऐसा मत पूछ।
ऋषभ: माँ, आपकी जीभ ने मेरे लंड को कैसे चूसा, वो याद करके मेरा लंड फिर खड़ा हो रहा है।
ममता: बेटा रुक जा, नहीं मुझसे अब कंट्रोल नहीं होगा |
ऋषभ: यही तो मैं चाहता हूँ
ऋषभ: बताओ, आपकी चूत अब भी गीली है?
ममता: हाँ... शर्म से मर रही हूँ।
ऋषभ: अगर मैं अभी आ जाऊँ तो क्या करोगी?
ममता: कुछ नहीं... ।
ऋषभ: माँ, आपकी चूत का स्वाद अभी भी मेरी जीभ पर है।
ममता: दयानाथ, ऐसा मत लिख, मैं काँप रही हूँ शर्म से।
ऋषभ: कल्पना करो मैं आपकी चूत में उंगली डालकर रस निकाल रहा हूँ।
ममता: आह... बंद करो, मुझे बहुत शर्म आ रही है।
ऋषभ: बोलो माँ, आपको मेरा लंड कितना पसंद है?
ममता: बहुत...
ऋषभ ने बिना समय गंवाए अपने पूरी तरह तन चुके, नसों से उभरे हुए लाल और मोटे लंड की एक क्लोज-अप फोटो खींची और भेज दी। नीचे उसने लिखा:
ऋषभ: "देखिए माँ, आपकी यादों ने इसे कितना सख्त कर दिया है। यह लंड बस आपकी चूत की गर्मी और आपकी जीभ का स्वाद माँग रहा है। क्या आप देख सकती हैं कि यह आपके लिए कितना बेताब है?"
ममता ने जैसे ही वह फोटो देखी, उसकी साँसें अटक गईं। उसने स्क्रीन पर उस विशाल अंग को देखा और उसकी आँखों के सामने अंधेरा छा गया। उसकी जांघें अपने आप आपस में रगड़ने लगीं और उसकी चूत से रस का एक फव्वारा फूट पड़ा।
वह बिस्तर पर करवटें बदलने लगी, उसका हाथ अनजाने में ही अपनी नाइटी के अंदर उसकी गीली चूत की ओर बढ़ गया।
ममता: "ऋषभ! यह... यह तुम क्या कर रहे हो? अगर किसी ने देख लिया तो? और यह... इतना बड़ा और सख्त... आह! मेरा शरीर काँप रहा है इसे देखकर।मुझे बहुत शर्म आ रही है बेटा, ऐसा मत करो।"
ममता: "आह... ऋषभ... तुम्हारी बातें मुझे पागल कर रही हैं। हाँ, मुझे याद है... तुम्हारी वह गर्माहट। जब मैं उसे अपने मुँह में लेती हूँ, तो मुझे लगता है कि मैं तुम्हारा पूरा अस्तित्व अपने अंदर उतार रही हूँ। मुझे तुम्हारी उस गंध और उस स्वाद से प्यार है।
मैं अभी चाहती हूँ कि तुम यहाँ होते और मैं तुम्हारे लंड को अपनी जीभ से सहलाती। लेकिन बेटा, मैं इतनी शर्मा रही हूँ, यह सब लिखना मेरे लिए मुश्किल है।"
ऋषभ: "सिर्फ जीभ नहीं माँ... मुझे बताओ कि जब मैं अपना यह मोटा लंड तुम्हारी उस तंग और गीली चूत में धकेलता हूँ, तो तुम्हें कैसा महसूस होता है? मुझे याद है कैसे तुम चीख रही थी, कैसे तुम्हारी चूत ने मेरे लंड को जकड़ लिया था।
क्या अभी भी वह जगह खाली है? क्या वह मुझे पुकार रही है?"
ममता ने अपनी उंगलियों की गति तेज कर दी। वह अब अपनी चूत को जोर-जोर से सहला रही थी, उसकी साँसें तेज हो गई थीं। शर्म से उसकी आवाज काँप रही थी।
ममता: "हाँ... आह... मेरी चूत तुम्हारे लिए तड़प रही है। यह इतनी गीली हो चुकी है कि बिस्तर की चादर नम हो गई है। मुझे वह अहसास चाहिए जब तुम एक झटके में पूरा अंदर घुसते हो और मेरी गहराई को छूते हो।
मुझे महसूस करना है कि तुम्हारा वह सख्त लंड मेरी दीवारों को फाड़ते हुए अंदर जा रहा है। ऋषभ... मुझे अभी तुम्हारे लंड की जरूरत है! लेकिन शर्म आ रही है, मैं इतनी बुरा महसूस कर रही हूँ।"
ऋषभ: "ओह माँ... आप कितनी कामुक हो गई हैं। मैं यहाँ अपने लंड को सहला रहा हूँ और सोच रहा हूँ कि काश मैं तुम्हारी चूत के अंदर होता।
मैं कल्पना कर रहा हूँ कि मैंने तुम्हें बिस्तर पर पेट के बल लिटाया हुआ है और मैं पीछे से तुम्हारे कूल्हों को पकड़कर अपने लंड को तुम्हारी चूत में पूरी ताकत से धकेल रहा हूँ। धप... धप... धप... मांस के टकराने की वह आवाज और तुम्हारी कराहें... आह!"
ममता ने मैसेज पढ़ते ही अपनी कमर को ऊपर उठाया और अपनी उंगलियों को और गहराई तक घुसाया।
ममता: "आह्ह्ह! हाँ... वही... मुझे वैसे ही करो। मुझे पीछे से पकड़ो और मुझे बिस्तर से चिपका दो। मुझे महसूस करना है कि तुम मुझे पूरी तरह से अपना बना रहे हो।
मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे चूचों को
पीछे से मसलो और अपने लंड से मेरी चूत को पूरी तरह भर दो। मैं तुम्हारी दासी बनना चाहती हूँ, ऋषभ... मुझे और गंदा महसूस कराओ! माफ करना बेटा, मैं इतनी शर्मा रही हूँ कि लिखते हुए हाथ काँप रहे हैं।"
ऋषभ: "आप मेरी दासी नहीं, आप मेरी रानी हैं, लेकिन बिस्तर पर आप सिर्फ मेरी एक प्यासी औरत हैं। मैं कल्पना कर रहा हूँ कि मैं तुम्हारे निप्पल्स को अपने मुँह में लेकर उन्हें जोर-जोर से चूस रहा हूँ और साथ ही साथ मेरा लंड तुम्हारी चूत में अंदर-बाहर हो रहा है।
मैं तुम्हारी चूत के उस सबसे संवेदनशील हिस्से को रगड़ रहा हूँ। क्या आपको महसूस हो रहा है माँ? क्या आप चरम सीमा के करीब हैं?"
ममता: "हाँ... आह... मैं... मैं बस पहुँचने वाली हूँ! ऋषभ, तुम्हारी बातें मुझे पागल कर रही हैं। मेरी चूत धड़क रही है... यह बहुत ज्यादा गीली है। मैं चाहती हूँ कि तुम अभी इसी वक्त कमरे में आओ और मुझे फाड़ दो!
मुझे तुम्हारा वीर्य अपनी चूत के अंदर महसूस करना है। मुझे तुम्हारा गरम cum चाहिए! लेकिन शर्म से मेरा चेहरा जल रहा है, ऐसा मत लिखो।"
ऋषभ ने यह पढ़कर अपने लंड को और तेजी से झटका दिया।
वह अब अपने चरम पर था।
ऋषभ: "मैं भी पहुँच रहा हूँ माँ... आह... मैं कल्पना कर रहा हूँ कि मैं तुम्हारी चूत के सबसे गहरे हिस्से में अपना सारा वीर्य छोड़ रहा हूँ। मैं तुम्हें अंदर से पूरी तरह भर रहा हूँ। आपका शरीर काँप रहा है और आप मेरा नाम चिल्ला रही हैं... 'ऋषभ... और जोर से... मुझे भर दो'!"
ममता ने एक जोरदार झटका महसूस किया और उसकी उंगलियाँ उसकी चूत के अंदर ही जम गईं। वह चरम सुख की लहरों में बह गई। उसने फोन को सीने से लगा लिया और लंबी-लंबी साँसें लेने लगी।
ममता: "आह्ह्ह... ऋषभ... तुमने मुझे... तुमने मुझे पागल कर दिया। मैं पूरी तरह से खाली हो गई हूँ। मेरा शरीर अभी भी काँप रहा है। मैं बहुत शर्मा रही हूँ, यह सब सोचकर।"
ऋषभ: "मुझे पता है माँ। मैंने अभी-अभी अपने हाथ में अपना सारा वीर्य छोड़ दिया है, यह सोचते हुए कि मैं आपकी चूत के अंदर हूँ। हम दोनों एक-दूसरे को बिना छुए संतुष्ट नहीं हो सकते , मेरे लन्ड की भूख अब और बढ़ गई है।"
ममता: "हाँ... यह सिर्फ एक शुरुआत है। अब मैं सो नहीं पाऊँगी। मैं बस उस पल का इंतजार करूँगी जब तुम सच में मेरे अंदर होगे। लेकिन बेटा, मुझे बहुत डर लगता है ।"
ऋषभ: "जल्द ही माँ... बहुत जल्द। अब सो जाइए, क्योंकि कल हमें फिर से उसी आग में जलना है।" कुछ डरने की जरूरत नहीं है ।
ममता ने फोन बंद किया और अंधेरे कमरे में लेटी रही, उसकी चूत अभी भी धड़क रही थी और उसके मन में ऋषभ के उस विशाल लंड की छवि बसी हुई थी।
वह जानती थी कि अब वह पूरी तरह से अपने बेटे की वासना की गुलाम बन चुकी है।
Slow and steady dono apni manjil ki taraf badh rahe hain.दिन भर की भागदौड़, एक्सीडेंट का सदमा और अस्पताल के चक्करों के बाद शाम ढल चुकी थी। घर में एक अजीब सी शांति थी, लेकिन यह शांति केवल बाहरी थी।
ममता के मन के अंदर एक तूफान मचा था। एक तरफ उसे अपने पति राजेश की चिंता थी, और दूसरी तरफ ऋषभ की वह फुसफुसाहट उसके कानों में गूँज रही थी— "आज सिर्फ आपका चेकअप होगा ।"
ममता ने अपनी साड़ी के पल्लू को बार-बार उँगलियों से मरोड़ा। वह जानती थी कि वह एक खतरनाक खेल खेल रही है, लेकिन ऋषभ की मर्दानगी और उसकी बेबाक इच्छाओं ने उसे इस कदर अपना दीवाना बना दिया था कि अब उसे सही और गलत का फर्क महसूस होना बंद हो गया था।
रात के खाने का समय हुआ। ममता और रीना पहले से ही थकी हुई थीं, इसलिए ऋषभ ने पहल की। उसने बाहर से अच्छा खाना ऑर्डर किया ताकि माँ और बुआ को आराम मिल सके। डाइनिंग टेबल पर पूरा परिवार इकट्ठा था—राजेश, ममता, रीना,और ऋषभ।
बातें सामान्य थीं, लेकिन टेबल के नीचे एक अलग ही खेल चल रहा था। ऋषभ ने जानबूझकर अपना पैर ममता की जांघ से सटा दिया। ममता ने जैसे ही उस गर्म स्पर्श को महसूस किया, उसके हाथ से पानी का गिलास हल्का सा कांपा। उसने ऊपर देखा,
तो ऋषभ उसे एक ऐसी शिकारी नज़र से देख रहा था जैसे वह उसे अभी इसी वक्त निगल जाएगा। ममता ने अपनी नज़रें झुका लीं, लेकिन उसके शरीर के निचले हिस्से में एक मीठी सी लहर दौड़ गई। उसकी चूत में फिर से वही गीलापन महसूस होने लगा।
खाना खत्म करने के बाद, ममता अपनी आदत के अनुसार बर्तन उठाने के लिए उठी। लेकिन इससे पहले कि वह उन्हें छू पाती, ऋषभ ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"नहीं माँ, आप आराम करो। आज आप पहले ही बहुत थक चुकी हो। मैं उठा लेता हूँ," ऋषभ ने बड़े प्यार से कहा, लेकिन उसकी पकड़ में एक अधिकार था।
राजेश ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ ममता, बेटा सही कह रहा है। तुम जाओ और थोड़ा आराम करो।"
ऋषभ ने बर्तन उठाए और किचन की ओर बढ़ा। जब वह ममता के पास से गुज़रा, तो उसने बहुत सफाई से अपनी उँगलियों से ममता के कूल्हों को हल्का सा दबाया।
यह स्पर्श इतना तेज़ और अचानक था कि ममता की साँसें अटक गईं। वह वहीं जम गई, जबकि रीना और राजेश को इस बात की भनक तक नहीं लगी।
धीरे-धीरे रात गहरी हुई। सभी अपने-अपने कमरों में चले गए। लेकिन ऋषभ की बेचैनी चरम पर थी। वह अपनी माँ के शरीर की खुशबू और उसकी तड़प को महसूस कर सकता था। सोने से पहले, उसने एक औपचारिक कदम उठाया। वह पहले बुआ रीना के कमरे में गया।
"बुआ जी, अब आपकी मोच कैसी है? दर्द तो नहीं हो रहा?" ऋषभ ने बड़ी मासूमियत से पूछा।
रीना ने मुस्कुराकर जवाब दिया, "अब ठीक है बेटा, बस थोड़ा सा दर्द है। तू जा, सो जा अब।"
ऋषभ ने उन्हें गुडनाइट कहा और वहाँ से निकला। अब उसका लक्ष्य वह कमरा था जहाँ उसकी सबसे बड़ी चाहत, उसकी माँ ममता, मौजूद थी। वह धीरे से कदम बढ़ाता हुआ ममता और राजेश के कमरे की ओर बढ़ा।
जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, उसने देखा कि राजेश और ममता बिस्तर पर बैठे बातें कर रहे थे। कमरे में हल्की पीली रोशनी थी, जिसने ममता की खूबसूरती को और भी निखार दिया था। वह अपनी साड़ी में लिपटी हुई, बिखरे बालों के साथ बेहद कामुक लग रही थी।
"माँ, मैं बस यह देखने आया था कि आपका ज़ख्म कैसा है? दर्द तो नहीं हो रहा?" ऋषभ ने कमरे में प्रवेश करते हुए पूछा।
ममता ने ऋषभ की आँखों में देखा। उन आँखों में प्यार नहीं, बल्कि एक भूखी वासना थी। ममता का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उसने धीमी आवाज़ में कहा, "ठीक है बेटा... अब दर्द नहीं है।"
उसी समय, राजेश को महसूस हुआ कि उसे बाथरूम जाना है। वह बिस्तर से उठा और ऋषभ की ओर देखते हुए बोला, "मैं अभी बाथरूम जा रहा हूँ। तुम दोनों तब तक बातें करो, मैं बस दो मिनट में आता हूँ।"
राजेश के कमरे से बाहर निकलते ही, कमरे का माहौल पूरी तरह बदल गया। जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ, ऋषभ के अंदर का जानवर जाग उठा। वह बिजली की गति से ममता की ओर झपटा और उसने ममता को अपनी मज़बूत बाँहों में जकड़ लिया।
ममता संभल पाती, उससे पहले ही ऋषभ ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होठों पर एक ज़ोरदार, गहरा और भूखा किस (Kiss) कर दिया।
"उम्ममम!" ममता के गले से एक दबी हुई आवाज़ निकली।
ऋषभ ने उसके होठों को इतनी तीव्रता से चूमा कि ममता के होश उड़ गए। वह उसकी जीभ को अपने मुँह में घुसाने की कोशिश कर रहा था, उसके होठों को चूस रहा था जैसे वह बरसों की प्यास बुझा रहा हो।
ममता अचानक हुए इस हमले से एकदम सिहर गई। उसका पूरा शरीर कांपने लगा। एक तरफ उसे यह अहसास बेहद सुखद लग रहा था, तो दूसरी तरफ उसे डर था कि राजेश बाहर ही है।
उत्तेजना और डर के इस मिश्रण ने ममता को बेकाबू कर दिया और उसकी उत्तेजना में एक चीख निकल गई— "आह्ह्ह!"
यह चीख इतनी अचानक और तीव्र थी कि बाथरूम में मौजूद राजेश चौंक गया। उसे लगा कि शायद ममता को फिर से चोट लगी है या कुछ गलत हुआ है।
ऋषभ ने बिजली की फुर्ती से खुद को ममता से अलग किया और एक सेकंड के भीतर खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की।
राजेश ने तुरंत दरवाज़ा खोला और तेज़ी से बाहर आया।
"क्या हुआ? ममता! क्या हुआ?" राजेश ने घबराकर पूछा।
ममता ने अपना चेहरा मासूम बनाया और राजेश की ओर देखा। ममता की साँसें अभी भी तेज़ चल रही थीं, उसके होंठ सूजे हुए थे और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
ऋषभ ने बहुत ही सहजता से जवाब दिया, "कुछ नहीं पापा, बस माँ के ज़ख्म को चेक कर रहा था। शायद पट्टी थोड़ी ढीली थी या उसे अचानक दर्द महसूस हुआ, इसलिए वह चीख पड़ीं।"
राजेश ने राहत की साँस ली। उसने ममता की ओर देखा, जो अभी भी अपनी साँसें नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थी।
"क्या सच में दर्द हुआ ममता?" राजेश ने चिंता से पूछा।
ममता ने अपनी नज़रें चुराईं और धीमी आवाज़ में कहा, "हाँ... हाँ, बस अचानक से एक तेज़ टीस उठी। अब ठीक है।"
राजेश ने ऋषभ की पीठ थपथपाई, "शुक्रिया बेटा, तूने ध्यान रखा। अब तुम जाओ और सो जाओ, मैं देखता हूँ माँ को।"
ऋषभ ने मुस्कुराते हुए राजेश को नमस्ते किया और कमरे से बाहर निकल गया। लेकिन बाहर निकलते समय उसने मुड़कर ममता को एक ऐसी नज़र से देखा,
जिसने ममता के शरीर में आग लगा दी। वह नज़र कह रही थी— "यह तो बस ट्रेलर था माँ, असली फिल्म अभी बाकी है।"
जब ऋषभ कमरे से बाहर गया, तो ममता बिस्तर पर गिर पड़ी। उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि उसे लग रहा था कि राजेश को उसकी धड़कनें सुनाई दे जाएँगी।
उसकी चूत पूरी तरह से भीग चुकी थी और वह अपनी जांघों को आपस में रगड़ने लगी। उसे उस एक किस ने इस कदर उत्तेजित कर दिया था कि अब उसे नींद आना नामुमकिन था।
वह छत की ओर देखते हुए सोचने लगी कि वह कितनी गिर चुकी है, लेकिन साथ ही वह उस गिरावट का आनंद ले रही थी। उसे पता था कि ऋषभ अब उसे नहीं छोड़ेगा, और वह खुद भी अब इस वर्जित प्रेम की गुलाम बन चुकी थी।
owww what a sexy oral orgasm.जैसे ही कार क्लिनिक के सामने रुकी, ममता का पूरा शरीर कांप रहा था। उसकी जांघों के बीच का वह गीलापन अब असहनीय हो चुका था। ऋषभ ने कार का इंजन बंद किया और एक गहरी, भारी सांस ली।
उसने ममता की ओर देखा; उसकी आँखें शर्म से झुकी हुई थीं, लेकिन उसकी साँसें तेज़ थीं, जो साफ़ बता रही थीं कि वह अंदर से कितनी उत्तेजित है।
ऋषभ ने कार का दरवाज़ा खोला ,ऋषभ आगे आगे और पीछे पीछे ममता क्लिनिक की और चल पड़ी । क्लिनिक पूरी तरह खाली था। राजू भी अपनी पत्नी के इलाज के लिए जा चूका था।
ऋषभ ने जैसे ही मुख्य दरवाज़े को अंदर से लॉक किया, उस 'क्लिक' की आवाज़ ने ममता के दिल की धड़कन को और तेज़ कर दिया। अब वे दुनिया से पूरी तरह कट चुके थे।
ऋषभ ने ममता को अपनी ओर घुमाया और उसे दीवार से सटा दिया। ममता ने घबराहट में अपनी नज़रें ऊपर कीं, "रेशु... कोई आ गया तो... हम यह क्या कर रहे हैं?"
ऋषभ ने उसकी बात को अनसुना कर दिया और उसके चेहरे को अपने हाथों में भर लिया। उसने ममता के माथे को चूमते हुए फुसफुसाया, "अब कोई नहीं आएगा माँ। आज सिर्फ मैं हूँ और आप हैं। आपकी यह तड़प, आपकी यह शर्म... मैं सब कुछ मिटा देना चाहता हूँ।"
आज सिर्फ मैं हूँ और आप हैं। आपकी यह तड़प, आपकी यह शर्म... मैं सब कुछ मिटा देना चाहता हूँ।"
इतना कहकर ऋषभ ने ममता के होठों पर एक हिंसक और प्यासा हमला किया। यह किस पहले वाली किस से कहीं ज़्यादा गहरा और कामुक था। ऋषभ की जीभ ममता के मुँह के अंदरघुसकर उसकी जीभ से खेल रही थी।![]()
ममता ने पहले तो विरोध करने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही वह अपनी इच्छाओं के आगे हार गई और उसने भी ऋषभ की गर्दन को अपनी बाँहों में जकड़ लिया। वह सिसकियाँ भरने लगी, "उम्मम... रेशु... रुक जा... नहीं, मत रुक... लेकिन... हाँ... और करो..."
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ऋषभ का हाथ अब ममता की साड़ी के पल्लू की ओर बढ़ा और एक झटके में उसने पल्लू को नीचे गिरा दिया। ममता की ब्लाउज़ के बटन उसकी भारी छातियों के दबाव से जैसे फटने को तैयार थे।
ऋषभ ने अपनी उंगलियों से उन बटनों को एक-एक करके खोलना शुरू किया। जैसे ही ब्लाउज़ खुला, ममता की गोरी, भारी और उभरी हुई छातियाँ ऋषभ की नज़रों के सामने थीं।
ममता की भारी छातियाँ अब पूरी तरह से आज़ाद थीं, जो उत्तेजना के कारण ऊपर-नीचे हो रही थीं। ऋषभ ने अपनी नज़रें उन उभरे हुए निप्पलों पर टिका दीं।
उनके बीच के गहरे भूरे रंग के निप्पल उत्तेजना के कारण सख्त हो चुके थे।
"हे भगवान... आप कितनी सुंदर हैं माँ," ऋषभ ने आह भरते हुए कहा और तुरंत झुककर उसके एक उसने धीरे से अपनी जीभ का सिरा ममता के एक निप्पल पर छुआया, जिससे ममता के पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई।
"आह्ह्ह! रेशु!" ममता के मुँह से एक ज़ोरदार चीख निकली, जिसे उसने अपने हाथ से दबा लिया। ऋषभ उसे इतनी ज़ोर से चूस रहा था कि ममता की कमर अपने आप धनुष की तरह मुड़ गई।
उसकी जीभ निप्पल के चारों ओर गोल-गोल घूम रही थी और कभी-कभी वह उसे अपने दाँतों से हल्का सा काट लेता, जिससे ममता के मुँह से दबी हुई कराहें निकलने लगीं।
उसकी जांघें कांपने लगीं और उसकी चूत से अब रस की धारा बहकर उसकी साड़ी को गीला कर रही थी।
ऋषभ ने अब अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ाया और ममता की साड़ी के अंदर हाथ डालकर उसकी जांघों को सहलाते हुए सीधे उसकी चूत के उस हिस्से पर पहुँचा, जहाँ उसने पैंटी पहनी हुई थी।
पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। ऋषभ ने अपनी उंगलियों से उस गीले कपड़े के ऊपर से ही उसकी क्लिटोरिस (clitoris) को रगड़ना शुरू किया।
ममता की आँखें बंद हो गईं और वह ऋषभ के कंधे पर अपना सिर टिकाकर कराहने लगी, "ओह्ह्ह... रेशु... बहुत तेज़... बहुत तेज़ हो रहा है... मैं... मैं पागल हो जाऊँगी..."
ऋषभ ने बिना समय गँवाए ममता की पैंटी को एक तरफ खींच दिया और अपनी उंगलियाँ उसकी गर्म और चिपचिपी चूत के अंदर डाल दीं।
जैसे ही उसकी उंगलियाँ अंदर गईं, ममता ने एक लंबी आह भरी और उसके शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई।
"कितनी गीली हैं आप माँ... आप तो मेरे लिए ही तरस रही थीं," ऋषभ ने शरारत से कहा और अपनी उंगलियों को अंदर-बाहर करना शुरू किया।
ममता की चूत की दीवारें ऋषभ की उंगलियों को कसकर जकड़ रही थीं। वह शर्मिंदा थी कि वह अपने बेटे के सामने इतनी बेबस हो रही है, लेकिन उसकी देह की भूख उसकी शर्म पर भारी पड़ रही थी।
"आह्ह्ह... रेशु..." ममता ने अपनी आँखें बंद कर लीं।
ऋषभ ने अब अपना मुँह खोला और ममता के पूरे निप्पल को अपने अंदर भर लिया। वह उसे इतनी गहराई और तीव्रता से चूस रहा था जैसे कोई प्यासा रेगिस्तान में पानी की तलाश कर रहा हो।
उसकी जीभ निप्पल के चारों ओर गोल-गोल घूम रही थी और कभी-कभी वह उसे अपने दाँतों से हल्का सा काट लेता, जिससे ममता के मुँह से दबी हुई कराहें निकलने लगीं।
ऋषभ ने दूसरे चूची को अपने हाथ से ज़ोर से मरोड़ा, जिससे ममता की कमर अपने आप ऊपर की ओर उठी। वह अपने बेटे के मुँह की गर्मी और उसकी जीभ के स्पर्श से पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी।
लेकिन ऋषभ की प्यास अभी बुझी नहीं थी। वह धीरे-धीरे नीचे की ओर सरका। उसने ममता की साड़ी को कमर से ऊपर की ओर धकेल दिया, जिससे उसकी सफेद, मखमली जांघें और वह गीली पैंटी साफ़ नज़र आने लगी।
ममता ने शर्म के मारे अपनी जांघों को बंद करने की कोशिश की, लेकिन ऋषभ ने अपनी ताकत से उसके पैरों को फैला दिया।
"शर्म छोड़ो माँ... आज मैं आपको वह सुख दूँगा जो आपने कभी नहीं देखा," ऋषभ ने फुसफुसाते हुए कहा।
उसने अपनी नाक ममता की पैंटी के गीले कपड़े पर रगड़ी। वहाँ से आने वाली ममता की अपनी चूत की प्राकृतिक और कामुक गंध ने ऋषभ को पागल कर दिया।
उसने अपनी जीभ से पैंटी के कपड़े के ऊपर ही ममता की क्लिटोरिस (clitoris) को चाटना शुरू किया। कपड़े के पार से भी जीभ की वह नमी और रगड़ ममता के लिए असहनीय थी।
वह पागलों की तरह कराहने लगी, "ओह्ह्ह... रेशु... वहाँ... उम्मम... बहुत अच्छा लग रहा है..."
अब ऋषभ ने अपनी उंगलियों से पैंटी को एक तरफ खींचकर उसकी गुलाबी और रसभरी चूत को पूरी तरह उजागर कर दिया। ममता की चूत से पारदर्शी रस की बूंदें टपक रही थीं,
जिससे वह हिस्सा चमक रहा था। ऋषभ ने बिना एक पल गँवाए अपनी जीभ को ममता की चूत के उस सबसे संवेदनशील हिस्से—उसकी क्लिटोरिस—पर टिका दिया।
जैसे ही ऋषभ की गर्म और गीली जीभ ने उस छोटे से दाने को सहलाया, ममता के शरीर में बिजली का एक ज़ोरदार झटका लगा।
उसने ऋषभ के बालों को अपनी उंगलियों में जकड़ लिया और ज़ोर से चिल्लाई, "आह्ह्ह्ह! रेशु! तू... तू क्या कर रहा है... उम्मम... रुक मत... और तेज़ चाट!
"वह पागलों की तरह कराहने लगी, "ओह्ह्ह... रेशु... वहाँ... उम्मम... बहुत अच्छा लग रहा है... मैं... मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती..."
ऋषभ अब पूरी तरह से समर्पित था। उसने अपनी जीभ को चूत की दरारों के अंदर गहराई तक घुसाना शुरू किया। वह ममता की चूत को ऐसे चाट रहा था जैसे वह कोई स्वादिष्ट मिठाई हो।
उसकी जीभ चूत की दीवारों को रगड़ रही थी और बीच-बीच में वह अपनी जीभ को तेज़ी से ऊपर-नीचे चला रहा था। ममता की जांघें कांप रही थीं और वह चेकअप टेबल पर अपनी पीठ रगड़ रही थी।
उसने ऋषभ के बालों को अपनी उंगलियों में जकड़ लिया और ज़ोर से चिल्लाई, "आह्ह्ह्ह! रेशु! तू... तू क्या कर रहा है... उम्मम... रुक मत... और तेज़ चाट... हाँ... वैसे ही... और गहराई तक..."
ऋषभ ने अब अपनी जीभ को चूत के अंदर और गहराई तक धकेलने की कोशिश की, जबकि उसके हाथ ममता के स्तनों को बुरी तरह मरोड़ रहे थे। ममता की साँसें अब उखड़ चुकी थीं।
उसे महसूस हो रहा था कि उसका पूरा अस्तित्व सिर्फ उस जीभ के स्पर्श में सिमट गया है। वह बार-बार चरम सुख (orgasm) के करीब पहुँच रही थी, लेकिन ऋषभ उसे वहीं रोककर उसकी तड़प को और बढ़ा रहा था।
उसने अपनी जीभ से चूत के रस को पूरी तरह चूस लिया और फिर से एक ज़ोरदार झटका दिया। ममता ने एक लंबी चीख मारी और उसके शरीर में कई संकुचन हुए।
वह पहली बार सिर्फ ओरल सेक्स से ही चरम सुख के करीब पहुँच गई थी। उसकी चूत से रस का एक फव्वारा छूटा, जिसे ऋषभ ने बड़े चाव से चखा।
ऋषभ ने अपना चेहरा ऊपर उठाया, उसके होंठ ममता के रस से गीले थे। उसने एक शरारती मुस्कान के साथ ममता की आँखों में देखा, जो अब पूरी तरह से वासना और समर्पण में डूबी हुई थीं।
ऋषभ की आँखों में वह शरारत और जीत की चमक थी, जिसे देखकर ममता का रोम-रोम कांप उठा। वह अभी भी उस चरम सुख की लहरों में झूल रही थी, लेकिन अब उसके अंदर एक अलग तरह की भूख जाग उठी थी।
उसने महसूस किया कि ऋषभ का भारी और सख्त लंड उसकी पैंट के अंदर पूरी तरह से तन चुका है और बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा है।
ममता ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और ऋषभ की पैंट की ज़िप को नीचे सरकाया। जैसे ही ज़िप खुली, ऋषभ का मोटा, गरम और नसों से उभरा हुआ लंड(land) एक झटके के साथ बाहर आ गया।
वह इतना सख्त था कि उसकी नोक से पारदर्शी काम-रस (pre-cum) की एक बूंद टपक रही थी। ममता ने पहली बार अपने बेटे के इस अंग को इतने करीब से और इतनी उत्तेजना में देखा था।
"ओह्ह्ह... रेशु... यह कितना बड़ा और सख्त है... इतना मोटा... मैंने कभी नहीं सोचा था," ममता ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में अब पूरी तरह से समर्पण और वासना थी।
ममता धीरे से घुटनों के बल नीचे बैठ गई। उसने अपने दोनों हाथों से ऋषभ के लंड के निचले हिस्से को मजबूती से पकड़ा। उसकी हथेलियों को ऋषभ के लंड की गर्माहट महसूस हो रही थी।
उसने अपनी जीभ निकाली और धीरे से लंड की नोक (glans) को छुआ। ऋषभ के मुँह से एक गहरी आह निकली और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं।
ममता ने अब अपना मुँह खोला और धीरे-धीरे ऋषभ के पूरे लंड को अपने अंदर लेना शुरू किया। जैसे ही उसका गरम और गीला मुँह ऋषभ के सख्त लंड पर चढ़ा, ऋषभ ने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर की ओर झटका।
ममता ने उसे पूरी गहराई तक अपने गले में उतारने की कोशिश की। वह उसे इतनी शिद्दत से चूस रही थी जैसे वह दुनिया की सबसे कीमती चीज़ हो।
"आह्ह्ह... माँ...
उम्मम... बहुत गहरा... बहुत अच्छा है... तुम... तुम मेरी माँ... और फिर भी इतना प्यारा मुँह..." ऋषभ कराहते हुए बोला।
ममता ने अपनी जीभ का इस्तेमाल करना शुरू किया। वह लंड के ऊपरी हिस्से और उसके नीचे की संवेदनशील नस को अपनी जीभ से सहला रही थी। वह बार-बार अपने होंठों को सिकोड़कर उसे जोर-जोर से चूस रही थी, जिससे एक चप-चप की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।
वह अपनी माँ होने की मर्यादा को पूरी तरह भूल चुकी थी; अब वह सिर्फ एक प्यासी औरत थी जो अपने बेटे के पुरुषत्व को अपने मुँह में महसूस करना चाहती थी।
"हाँ... रेशु... तुम... तुम मेरे मुँह में... इतना गहरा... मैं तुम्हारी माँ हूँ... लेकिन... लेकिन तुम्हारा लंड मेरा सबसे प्यारा है..." ममता ने कराहते हुए कहा और अपनी गति बढ़ा दी।
वह तेज़ी से अपना मुँह ऊपर-नीचे कर रही थी, जिससे ऋषभ का लंड उसके गले के पिछले हिस्से को छू रहा था। ऋषभ ने ममता के बालों को अपनी उंगलियों में जकड़ लिया और उसे और गहराई तक धकेलने लगा।
ममता को हल्का सा दम घुटने जैसा महसूस हुआ, लेकिन इस अहसास ने उसकी उत्तेजना को और बढ़ा दिया। उसने अपनी आँखें खोलकर ऊपर ऋषभ की ओर देखा, उसकी आँखों में वासना का सैलाब था।
ऋषभ अब बेकाबू हो रहा था। वह ममता के मुँह की गर्मी और उसकी जीभ की नमी में पूरी तरह डूब चुका था। ममता ने अब अपने एक हाथ से ऋषभ के अंडकोषों (balls) को धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया और दूसरे हाथ से लंड के आधार को मरोड़ा।
"ओह्ह्ह... माँ... मैं... मैं अब और नहीं रुक पाऊंगा... मैं अंदर ही गिरा दूँगा!" ऋषभ की आवाज़ भारी हो गई थी।
ममता ने यह सुनकर और भी तेज़ी से चूसना शुरू कर दिया। वह चाहती थी कि ऋषभ का सारा रस उसके मुँह में समा जाए। उसने अपनी जीभ को लंड की नोक पर तेज़ी से घुमाया और एक आखिरी, गहरा और ज़ोरदार खिंचाव लिया।
तभी ऋषभ ने एक ज़ोरदार चीख मारी और उसका शरीर अकड़ गया। वह पूरी ताकत से ममता के गले के अंदर अपना गरम और गाढ़ा वीर्य (cum) छोड़ने लगा।
ममता ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की, बल्कि उसने और भी ज़ोर से चूसना जारी रखा ताकि एक भी बूंद बर्बाद न हो।
ऋषभ का गाढ़ा, सफेद और गरम रस ममता के मुँह और गले में भर गया। ममता ने उस स्वाद को महसूस किया और उसे धीरे-धीरे निगल लिया।
जब ऋषभ का लंड ढीला हुआ, तब ममता ने उसे अपने मुँह से बाहर निकाला। उसके होंठों और ठुड्डी पर कुछ सफेद वीर्य लगा हुआ था, जो उसे और भी कामुक बना रहा था।
ममता ने अपनी जीभ से अपने होंठों पर लगे उस रस को चाटा और एक शरारती मुस्कान के साथ ऋषभ की ओर देखा। दोनों की साँसें तेज़ थीं और कमरे में एक ऐसी गंध फैली थी जो सिर्फ और सिर्फ forbidden passion की थी।
Ahhhhhh what a erotic phone sex. Mera bhi nikal gaya.ऋषभ का शरीर उत्तेजना से काँप रहा था। उसने अपने हाथ में पकड़े हुए अपने सख्त, मोटे लंड को जोर-जोर से सहलाना शुरू किया। उसकी आँखों के सामने ममता का वह चेहरा घूम रहा था जब वह उसके लंड को अपने मुँह में भरकर उसे चूस रही थी।
वह कल्पना मात्र से ही पागल हो रहा था। तभी उसके दिमाग में एक शरारत सूझी। उसने सोचा कि क्यों न इस आग को और भड़काया जाए, और वह भी तब जब ममता बगल के कमरे में हो।
उसने अपना फोन उठाया और ममता को मैसेज किया। ममता, जो वास्तव में नींद से कोसों दूर थी और अपनी चूत की धड़कन महसूस कर रही थी, ने तुरंत फोन देखा।
ऋषभ: हाय
ममता: "हाय, क्या हुआ बेटा? इतनी रात को मैसेज क्यों कर रहे हो?"
ऋषभ: नींद नहीं आ रही है।
ममता: नींद तो मुझे भी नहीं आ रही है।
ममता: तुझे नींद क्यों नहीं आ रही?
ऋषभ: बस आज दोपहर में जो हुआ वही सीन घूम रहा है।
ममता कुछ पल के लिए ठहर गई, उसे कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या जवाब दे। उसका चेहरा लाल हो रहा था, हाथ काँप रहे थे।
ऋषभ: क्या हुआ माँ?
ममता: कुछ नहीं...
ऋषभ: मेरा तो आज दिन बन गया शायद इसलिए नींद नहीं आ रही है।
ममता: शायद मुझे भी।
ऋषभ: आपको सबसे अच्छा क्या लगा?
ममता: तू बता।
ऋषभ: आपके जीभ की गर्मी, मेरे लंड पर, और आपको...
ये पढ़ते ही ममता के शरीर में सिहरन दौड़ गई, और शर्माते हुए ये लिखा।
ममता: मुझे भी...
ऋषभ: आपको क्या, मैं समझा नहीं।
ममता: मुझे नहीं पता पर अच्छा लगा।
ऋषभ: माँ शर्माओ मत, थोड़ा खुलकर बोलो ना।
ममता: तेरा मेरे नीचे किस करना...
ऋषभ: कहाँ नीचे?
ममता: मुझे नहीं पता रेशू, मुझे बहुत शर्म आ रही है।
ऋषभ: कहाँ, आपकी चूत पर?
ममता: हाँ...
ऋषभ: तो ये बोलो ना, माँ एक बात बोलूँ?
ममता: हाँ बोल।
ऋषभ: आपकी चूत का पानी बहुत टेस्टी है माँ।
ममता का पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई हो। उसका शरीर काँप रहा था, चेहरा जल रहा था शर्म से।
ममता: धत... शर्माते हुए।
ऋषभ: सच माँ।
ममता: बेटा, ऐसा मत बोल, मुझे बहुत शर्म आ रही है, हाथ काँप रहे हैं।
ऋषभ: माँ, आपकी चूत कितनी गीली हो गई थी दोपहर को, याद है? मेरी जीभ से चाटते वक्त वो रस कैसे बह रहा था।
ममता: आह... मत याद दिला।
ऋषभ: बोलो ना माँ, कैसा लगा जब मैंने आपकी चूत चाटी?
ममता: अच्छा लगा... पर शर्म आ रही है लिखते हुए।
ऋषभ: और जब आपने मेरा लंड मुँह में लिया, वो गर्माहट कैसी थी?
ममता: बहुत गर्म... रेशु , ऐसा मत पूछ।
ऋषभ: माँ, आपकी जीभ ने मेरे लंड को कैसे चूसा, वो याद करके मेरा लंड फिर खड़ा हो रहा है।
ममता: बेटा रुक जा, नहीं मुझसे अब कंट्रोल नहीं होगा |
ऋषभ: यही तो मैं चाहता हूँ
ऋषभ: बताओ, आपकी चूत अब भी गीली है?
ममता: हाँ... शर्म से मर रही हूँ।
ऋषभ: अगर मैं अभी आ जाऊँ तो क्या करोगी?
ममता: कुछ नहीं... ।
ऋषभ: माँ, आपकी चूत का स्वाद अभी भी मेरी जीभ पर है।
ममता: दयानाथ, ऐसा मत लिख, मैं काँप रही हूँ शर्म से।
ऋषभ: कल्पना करो मैं आपकी चूत में उंगली डालकर रस निकाल रहा हूँ।
ममता: आह... बंद करो, मुझे बहुत शर्म आ रही है।
ऋषभ: बोलो माँ, आपको मेरा लंड कितना पसंद है?
ममता: बहुत...
ऋषभ ने बिना समय गंवाए अपने पूरी तरह तन चुके, नसों से उभरे हुए लाल और मोटे लंड की एक क्लोज-अप फोटो खींची और भेज दी। नीचे उसने लिखा:
ऋषभ: "देखिए माँ, आपकी यादों ने इसे कितना सख्त कर दिया है। यह लंड बस आपकी चूत की गर्मी और आपकी जीभ का स्वाद माँग रहा है। क्या आप देख सकती हैं कि यह आपके लिए कितना बेताब है?"
ममता ने जैसे ही वह फोटो देखी, उसकी साँसें अटक गईं। उसने स्क्रीन पर उस विशाल अंग को देखा और उसकी आँखों के सामने अंधेरा छा गया। उसकी जांघें अपने आप आपस में रगड़ने लगीं और उसकी चूत से रस का एक फव्वारा फूट पड़ा।
वह बिस्तर पर करवटें बदलने लगी, उसका हाथ अनजाने में ही अपनी नाइटी के अंदर उसकी गीली चूत की ओर बढ़ गया।
ममता: "ऋषभ! यह... यह तुम क्या कर रहे हो? अगर किसी ने देख लिया तो? और यह... इतना बड़ा और सख्त... आह! मेरा शरीर काँप रहा है इसे देखकर।मुझे बहुत शर्म आ रही है बेटा, ऐसा मत करो।"
ममता: "आह... ऋषभ... तुम्हारी बातें मुझे पागल कर रही हैं। हाँ, मुझे याद है... तुम्हारी वह गर्माहट। जब मैं उसे अपने मुँह में लेती हूँ, तो मुझे लगता है कि मैं तुम्हारा पूरा अस्तित्व अपने अंदर उतार रही हूँ। मुझे तुम्हारी उस गंध और उस स्वाद से प्यार है।
मैं अभी चाहती हूँ कि तुम यहाँ होते और मैं तुम्हारे लंड को अपनी जीभ से सहलाती। लेकिन बेटा, मैं इतनी शर्मा रही हूँ, यह सब लिखना मेरे लिए मुश्किल है।"
ऋषभ: "सिर्फ जीभ नहीं माँ... मुझे बताओ कि जब मैं अपना यह मोटा लंड तुम्हारी उस तंग और गीली चूत में धकेलता हूँ, तो तुम्हें कैसा महसूस होता है? मुझे याद है कैसे तुम चीख रही थी, कैसे तुम्हारी चूत ने मेरे लंड को जकड़ लिया था।
क्या अभी भी वह जगह खाली है? क्या वह मुझे पुकार रही है?"
ममता ने अपनी उंगलियों की गति तेज कर दी। वह अब अपनी चूत को जोर-जोर से सहला रही थी, उसकी साँसें तेज हो गई थीं। शर्म से उसकी आवाज काँप रही थी।
ममता: "हाँ... आह... मेरी चूत तुम्हारे लिए तड़प रही है। यह इतनी गीली हो चुकी है कि बिस्तर की चादर नम हो गई है। मुझे वह अहसास चाहिए जब तुम एक झटके में पूरा अंदर घुसते हो और मेरी गहराई को छूते हो।
मुझे महसूस करना है कि तुम्हारा वह सख्त लंड मेरी दीवारों को फाड़ते हुए अंदर जा रहा है। ऋषभ... मुझे अभी तुम्हारे लंड की जरूरत है! लेकिन शर्म आ रही है, मैं इतनी बुरा महसूस कर रही हूँ।"
ऋषभ: "ओह माँ... आप कितनी कामुक हो गई हैं। मैं यहाँ अपने लंड को सहला रहा हूँ और सोच रहा हूँ कि काश मैं तुम्हारी चूत के अंदर होता।
मैं कल्पना कर रहा हूँ कि मैंने तुम्हें बिस्तर पर पेट के बल लिटाया हुआ है और मैं पीछे से तुम्हारे कूल्हों को पकड़कर अपने लंड को तुम्हारी चूत में पूरी ताकत से धकेल रहा हूँ। धप... धप... धप... मांस के टकराने की वह आवाज और तुम्हारी कराहें... आह!"
ममता ने मैसेज पढ़ते ही अपनी कमर को ऊपर उठाया और अपनी उंगलियों को और गहराई तक घुसाया।
ममता: "आह्ह्ह! हाँ... वही... मुझे वैसे ही करो। मुझे पीछे से पकड़ो और मुझे बिस्तर से चिपका दो। मुझे महसूस करना है कि तुम मुझे पूरी तरह से अपना बना रहे हो।
मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे चूचों को
पीछे से मसलो और अपने लंड से मेरी चूत को पूरी तरह भर दो। मैं तुम्हारी दासी बनना चाहती हूँ, ऋषभ... मुझे और गंदा महसूस कराओ! माफ करना बेटा, मैं इतनी शर्मा रही हूँ कि लिखते हुए हाथ काँप रहे हैं।"
ऋषभ: "आप मेरी दासी नहीं, आप मेरी रानी हैं, लेकिन बिस्तर पर आप सिर्फ मेरी एक प्यासी औरत हैं। मैं कल्पना कर रहा हूँ कि मैं तुम्हारे निप्पल्स को अपने मुँह में लेकर उन्हें जोर-जोर से चूस रहा हूँ और साथ ही साथ मेरा लंड तुम्हारी चूत में अंदर-बाहर हो रहा है।
मैं तुम्हारी चूत के उस सबसे संवेदनशील हिस्से को रगड़ रहा हूँ। क्या आपको महसूस हो रहा है माँ? क्या आप चरम सीमा के करीब हैं?"
ममता: "हाँ... आह... मैं... मैं बस पहुँचने वाली हूँ! ऋषभ, तुम्हारी बातें मुझे पागल कर रही हैं। मेरी चूत धड़क रही है... यह बहुत ज्यादा गीली है। मैं चाहती हूँ कि तुम अभी इसी वक्त कमरे में आओ और मुझे फाड़ दो!
मुझे तुम्हारा वीर्य अपनी चूत के अंदर महसूस करना है। मुझे तुम्हारा गरम cum चाहिए! लेकिन शर्म से मेरा चेहरा जल रहा है, ऐसा मत लिखो।"
ऋषभ ने यह पढ़कर अपने लंड को और तेजी से झटका दिया।
वह अब अपने चरम पर था।
ऋषभ: "मैं भी पहुँच रहा हूँ माँ... आह... मैं कल्पना कर रहा हूँ कि मैं तुम्हारी चूत के सबसे गहरे हिस्से में अपना सारा वीर्य छोड़ रहा हूँ। मैं तुम्हें अंदर से पूरी तरह भर रहा हूँ। आपका शरीर काँप रहा है और आप मेरा नाम चिल्ला रही हैं... 'ऋषभ... और जोर से... मुझे भर दो'!"
ममता ने एक जोरदार झटका महसूस किया और उसकी उंगलियाँ उसकी चूत के अंदर ही जम गईं। वह चरम सुख की लहरों में बह गई। उसने फोन को सीने से लगा लिया और लंबी-लंबी साँसें लेने लगी।
ममता: "आह्ह्ह... ऋषभ... तुमने मुझे... तुमने मुझे पागल कर दिया। मैं पूरी तरह से खाली हो गई हूँ। मेरा शरीर अभी भी काँप रहा है। मैं बहुत शर्मा रही हूँ, यह सब सोचकर।"
ऋषभ: "मुझे पता है माँ। मैंने अभी-अभी अपने हाथ में अपना सारा वीर्य छोड़ दिया है, यह सोचते हुए कि मैं आपकी चूत के अंदर हूँ। हम दोनों एक-दूसरे को बिना छुए संतुष्ट नहीं हो सकते , मेरे लन्ड की भूख अब और बढ़ गई है।"
ममता: "हाँ... यह सिर्फ एक शुरुआत है। अब मैं सो नहीं पाऊँगी। मैं बस उस पल का इंतजार करूँगी जब तुम सच में मेरे अंदर होगे। लेकिन बेटा, मुझे बहुत डर लगता है ।"
ऋषभ: "जल्द ही माँ... बहुत जल्द। अब सो जाइए, क्योंकि कल हमें फिर से उसी आग में जलना है।" कुछ डरने की जरूरत नहीं है ।
ममता ने फोन बंद किया और अंधेरे कमरे में लेटी रही, उसकी चूत अभी भी धड़क रही थी और उसके मन में ऋषभ के उस विशाल लंड की छवि बसी हुई थी।
वह जानती थी कि अब वह पूरी तरह से अपने बेटे की वासना की गुलाम बन चुकी है।
Waiting for next action during lunch break.अगली सुबह जब सूरज की पहली किरणें खिड़की के पर्दों को चीरते हुए कमरे में आईं, तो ममता की आँखें खुलीं।
वह बिस्तर पर लेटी रही, उसकी देह में अब भी रात की उस उत्तेजक बातचीत की सिहरन बाकी थी।
जैसे ही उसने अपनी आँखें मूँदीं, उसे ऋषभ के वे शब्द याद आने लगे— "आपकी चूत का पानी बहुत टेस्टी है माँ।"
यह सोचते ही ममता के शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। उसने अनजाने में अपनी जाँघों को आपस में रगड़ा और महसूस किया कि उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी।
रात भर की उस गंदी और कामुक चैट ने उसके भीतर की दबी हुई इच्छाओं को जगा दिया था। वह उठी, फ्रेश हुई, लेकिन नहाते समय भी जब पानी उसकी जाँघों से नीचे उतर रहा था, तो उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे ऋषभ की उँगलियाँ उसकी चूत के अंदर गहराई तक जा रही हों।
ममता जब किचन में पहुँची, तो उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक और शर्म थी। उसने गैस जलाई और चाय का पानी रखा, लेकिन उसका मन कहीं और था।
वह बार-बार अपने फोन की तरफ देख रही थी, यह सोचकर कि ऋषभ क्या सोच रहा होगा। वह याद करने लगी कि कैसे उसने रात को शर्माते हुए स्वीकार किया था कि उसे ऋषभ का अपनी चूत को चाटना पसंद आया था।
'हे भगवान, मैं यह क्या कर रही हूँ? मैं एक माँ हूँ और मैं अपने बेटे के साथ ऐसी बातें कर रही हूँ... मैं कितनी बेशर्म होती जा रही हूँ,' उसने मन ही मन सोचा।
लेकिन इस सोच के साथ ही उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आ गई और उसकी चूत से रस की एक और बूंद टपकी, जिसने उसकी साड़ी के भीगे हुए हिस्से को और चिपचिपा बना दिया।
वह अपनी इस कामुकता पर खुद हैरान थी, पर उसे यह अहसास बहुत सुखद लग रहा था।
तभी अचानक पीछे से रीना आई और उसने ममता के कंधे पर हाथ रखा। ममता झटके से चौंक गई, मानो वह किसी बड़े अपराध में पकड़ी गई हो।
"क्या बात है भाभी? आज सुबह-सुबह बहुत मुस्कुरा रही हो! कोई खास बात है क्या?" रीना ने शरारत भरे लहजे में पूछा।
ममता थोड़ा घबरा गई, उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
उसने जल्दी से अपना चेहरा सामान्य करने की कोशिश की और हकलाते हुए बोली, "अ... अरे नहीं रीना, बस कुछ पुरानी बातें याद आ गई थीं, इसलिए।"
रीना ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, "अरे भाभी, मुझे भी बताओ ना! ऐसी कौन सी बात है जिसने आपको इतना खुश कर दिया? आप तो एकदम ब्लश कर रही हैं।"
ममता ने अपनी नज़रें चुराईं और जल्दी से बर्तनों की तरफ मुड़ गई ताकि रीना उसके लाल चेहरे को और न देखे।
"अरे कुछ नहीं रीना, तू बेकार में बातें बना रही है। तू यह बता कि आज नाश्ते में क्या बनाऊँ? कुछ अच्छा सा सोच।"
रीना मुस्कुराई और बोली, "भाभी, जो आपको पसंद हो वही बना लीजिए। वैसे मेरा मन है कि आज कुछ चटपटा हो... क्यों न आज पनीर पकौड़े बना दें? सबको पसंद भी आएंगे और मौसम भी अच्छा है।"
ममता ने सहमति में सिर हिलाया, "हाँ, ठीक है। पनीर पकौड़े ही बनाते हैं।"
अब दोनों किचन में जुट गईं। ममता पनीर काट रही थी और रीना बेसन का घोल तैयार कर रही थी। काम करते-करते भी ममता का ध्यान बार-बार ऋषभ की तरफ जा रहा था।
वह सोच रही थी कि जब ऋषभ नाश्ते की टेबल पर आएगा, तो वह उसकी आँखों में क्या देखेगी।
क्या वह उसे वही इशारा करेगा जो उसने रात को चैट में किया था? यह सोचकर ही ममता की सांसें तेज हो गईं और उसने चुपके से अपनी साड़ी के पल्लू से अपनी गीली चूत को सहलाया।
तभी सीढ़ियों से उतरने की आवाज़ आई। राजेश और ऋषभ जाग चुके थे और नाश्ते के लिए टेबल की तरफ आ रहे थे।
राजेश अपनी usual धीमी चाल से आ रहा था, जबकि ऋषभ की चाल में एक अलग ही आत्मविश्वास और मर्दानगी थी।
उसकी सफेद टी-शर्ट उसके चौड़े कंधों पर कसी हुई थी, जिससे उसकी मज़बूत बॉडी साफ़ झलक रही थी।
जैसे ही ऋषभ टेबल पर बैठा, उसकी नज़र सीधे ममता पर पड़ी। ममता ने जब उसकी आँखों में देखा, तो उसे महसूस हुआ कि ऋषभ की नज़रों में वही भूख है जो रात को उसके मैसेज में थी।
ऋषभ ने एक पल के लिए अपनी नज़रें ममता की कमर और उसके कूल्हों की तरफ घुमाईं और फिर एक हल्की सी, रहस्यमयी मुस्कान दी।
ममता का शरीर काँप गया। उसने जल्दी से प्लेट में पकौड़े परोसने शुरू किए। राजेश ने प्यार से कहा, "ममता, आज खुश लग रही हो, क्या बात है?"
ममता ने झेंपते हुए जवाब दिया, "बस जी, आज मन अच्छा है।"
सबने नाश्ता करना शुरू किया। टेबल पर हंसी-मज़ाक चल रहा था।
राजेश और रीना अपनी पुरानी बातों में मशगूल थे, लेकिन ममता और ऋषभ के बीच एक खामोश, कामुक युद्ध चल रहा था।
जब ममता ऋषभ को पानी का गिलास देने के लिए झुकी, तो ऋषभ ने जानबूझकर अपना पैर ममता की जाँघ से सटा दिया।
ममता के मुँह से एक हल्की सी आह निकलने ही वाली थी कि उसने खुद को संभाल लिया।
वह अंदर से पूरी तरह पिघल रही थी। उसकी चूत अब पूरी तरह से रस से तरबतर हो चुकी थी और उसे महसूस हो रहा था कि वह बस अभी इसी वक्त ऋषभ की गोद में गिर जाए।
तभी रीना ने बातचीत का रुख बदला और पूछा, "भाभी, आज पट्टी का क्या प्रोग्राम है? चोट अभी भी है, उसे साफ़ करवाना और नई पट्टी बंधवाना ज़रूरी है।"
यह सुनते ही ममता का दिल ज़ोर से धड़का। उसे याद आया कि उसकी चोट की देखभाल ऋषभ और ज्योति कर रहे हैं।
वह थोड़ी असहज हो गई क्योंकि उसे पता था कि जब ऋषभ उसकी पट्टी करेगा, तो वह फिर से उसके शरीर को छुएगा, और इस बार वह खुद को रोक नहीं पाएगी।
ऋषभ ने सहजता से जवाब दिया, "मैं लंच ब्रेक में घर आ जाऊँगा। फिर हम दोनों साथ चलेंगे और ज्योति के क्लिनिक पर उसकी पट्टी करवा दूँगा। ज्योति मेरी अच्छी दोस्त है, वह बहुत सावधानी से कर देगी।"
राजेश ने कहा, "हाँ, यह सही रहेगा। ऋषभ, तुम लंच में आ जाओ, हम सब साथ में खाना खाएंगे।"
ऋषभ ने सिर हिलाया और तुरंत अपना फोन निकाला। उसने अपने असिस्टेंट राजू को फोन लगाया।
"हेलो राजू, सुनो। आज लंच टाइम के आसपास थोड़ा गैप रखना। पेशेंट्स की अपॉइंटमेंट थोड़ी कम लेना या उन्हें थोड़ा एडजस्ट करना, क्योंकि मुझे एक ज़रूरी काम से घर जाना है और फिर बाहर जाना होगा।"
राजू ने जवाब दिया, "जी डॉक्टर साहब, मैं देख लेता हूँ। ओके सर।"
फोन रखने के बाद ऋषभ ने फिर से ममता की तरफ देखा।