महक अभी भी पूरी तरह नंगी थी। उसकी चूत और गांड बुरी तरह सूजी हुई थीं, चलने में भी दर्द हो रहा था। सुंदरी और परम को देखते ही वह मुस्कुराई और माँ की तरफ देखते हुए शरारती स्वर में बोली,
“क्यों माँ...? अपना भूल गई क्या...? इसी लौड़े से पिछले 20 सालों से चुदवा रही हो... और आज भी सारे लोग तेरी चूत के दीवाने बने हुए हैं। देख... तेरी चूत आज भी कितनी टाइट और आकर्षक लग रही है... सेठजी, उनके दोस्त, परम... सब तेरी इसी चूत के गुलाम हैं।” प्रस्तुतकर्ता फनलवर है।
सुंदरी शर्म से लाल हो गई। उसने महक की सूजी हुई चूत और गांड को देखा और बोली,
“चुप कर पागल... तू खुद कितनी बड़ी रंडी बन गई है... कल रात तेरे बाप ने तेरी चूत और गांड दोनों को फाड़ डाला... और तेरे बाप ने फिर से तेरी चूत का भोसड़ा बना दिया... अब तू चल भी ठीक से नहीं पा रही...”
महक हँसते हुए माँ के पास आई, उसकी भारी चूचियों को दोनों हाथों से दबाते हुए बोली,
“हाँ माँ... मैं रंडी बन गई हूँ... लेकिन तुमसे तो बहुत कम... तुम तो 20 साल से एक ही लंड की गुलाम हो... परम का लंड देखते ही तुम्हारी चूत पानी छोड़ने लगती है... बोलो ना माँ... सच-सच बताओ... परम का लंड सबसे अच्छा लगता है ना?”
सुंदरी ने शर्माते हुए महक की चूत पर हाथ फेरते हुए कहा,
“हाँ बेटी... परम और तेरे बाप का लंड सबसे मस्त है... मोटा, लंबा और बहुत ताकतवर... जब ये मेरी चूत में घुसता है तो लगता है जैसे स्वर्ग में पहुँच गई हूँ...”
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बेटा-माँ का संवाद (परम और सुंदरी)
परम ने माँ का हाथ पकड़कर उन्हें अंदर खींच लिया और दरवाजा बंद कर दिया। सुंदरी को दीवार से सटाकर खड़ा करते हुए उसने उनकी साड़ी ऊपर कर दी।
“तू भी माँ बड़ी रंडी हो गई है... चल... 5 दिन से तू मेरे लंड से नहीं चुदी है... सुबह-सुबह सबसे प्यारी चूत का मजा ले लूँगा...”
परम ने सुंदरी की पेटीकोट खींचकर नीचे किया, अपना सख्त लंड निकाला और सीधे माँ की चूत पर रख दिया। एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लंड अंदर चला गया।
“आआह्ह्ह... परम... धीरे बेटा... तेरी माँ की चूत अभी भी सेठजी के वीर्य से भरी हुई है...” सुंदरी कराह उठी।
परम तेज-तेज धक्के मारते हुए बोला,
“माँ... आज तेरी चूत बहुत ढीली लग रही है... कितने लंडों ने कल रात तेरी चूत मारी? बोल... कितने मर्दों ने तेरी चूत को भोसड़ा बनाया?” फनलवर रचित।
सुंदरी ने परम की कमर पकड़कर कूल्हे हिलाते हुए शर्माते हुए जवाब दिया,
“चार... चार लंड ने मेरी चूत मारी बेटा... सेठजी ने सबसे पहले... फिर उनके दो दोस्तों ने... और आखिर में तू...”
परम ने और जोर से ठोका,
“माँ... तू अब पूरी रंडी बन गई है... तेरी चूत अब एक लंड से संतुष्ट नहीं होती... बोल... कितने लंड चाहिए तेरी चूत को...? सेठजी का... उनके दोस्तों का... या मेरा...?”
सुंदरी ने आँखें बंद करके कराहते हुए कहा,
“तेरा... और तेरे बाप का... बस ये दो ही काफी हैं... लेकिन जब-जब कोई नया मोटा लंड मिलता है... मेरी चूत पागल हो जाती है बेटा... मुझे रोक नहीं पाती...”
परम ने माँ को बिस्तर पर लिटाया, टाँगें कंधों पर रखीं और गहरी चुदाई करते हुए बोला,
“तो आज मैं तेरी चूत को इतना फाड़ दूँगा कि तीन दिन तक तू ठीक से चल नहीं पाएगी...”
सुंदरी ने परम की पीठ पर नाखून गड़ाते हुए चीखी,
“हाँ बेटा... फाड़ दो... अपनी रंडी माँ की चूत फाड़ दो... जितना जोर से मार सको... मारो...!”
परम तेज-तेज धक्के मारने लगा, लेकिन कुछ ही देर बाद उसे महसूस हुआ कि सुंदरी को पूरा मजा नहीं आ रहा है। उसकी चूत अभी भी सेठजी के वीर्य से भरी हुई थी और थोड़ी ढीली महसूस हो रही थी।
परम ने लंड निकालते हुए पूछा, “माँ... लौड़ा निकाल दूँ क्या? बाद में चोदूँगा...”
सुंदरी ने तुरंत परम की कमर पकड़ ली और बोली,
“नहीं परम... तेरे लौड़े जैसा मजा तो किसी के साथ नहीं आता... चल... अपनी माँ की चूत को अच्छे से फाड़...”
सुंदरी ने कमर हिलानी शुरू कर दी और परम का लंड अपनी चूत में पंप करने लगी।
“कल से तेरा ये 5वाँ लंड है जो मुझे चोद रहा है... अब चुदाई का पूरा मजा दे और ले... मार अपनी प्यारी माँ की चूत को... और सुजा दे... अपने बाप की तरह... देख, तेरी बहन की चूत की हालत कैसी कर दी है तेरे बाप के लंड ने... बेचारी ठीक से चल नहीं सकती...”
परम ने जोर-जोर से ठुकाई शुरू कर दी। सुंदरी की चीखें कमरे में गूँजने लगीं। एडिट मैत्री ने किया।
महक और मुनीम यह सब देख रहे थे। महक ने पापा का हाथ पकड़कर उन्हें दूसरे कमरे में ले गई।
अब परम और सुंदरी अकेले थे। परम ने माँ को बिस्तर पर लिटाया, टाँगें कंधों पर रखीं और गहरी चुदाई करने लगा।
“साले... कौन-कौन मादरचोद किस्मत वाले हैं जिन्होंने तेरी मस्त चूत का मजा लिया?” परम ने धक्के मारते हुए पूछा।
सुंदरी हाँफते हुए बोली, “बेटा... बहुत मजा आया... चार लोगों से एक साथ चुदवाने में... तू चुदाई का मजा ले, सब बताती हूँ...”
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