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आपके रीप्लाई के लीए खूब धन्यवाद। अब हम आपकी सभी कहानियां पढ कर पुरा लुफ्त उठायेंगे । लेकीन समय कम मीलने की वजह से पढाई धीरे धीरे होगी।
Ji bahot bahot shukriya dost.

Aapko jab samay mile, koi jaldi nahi. Aapni raay dena na bhule bas.

Shukriya
 

Funlover

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बहुत ही उम्दा और कामुक अपडेट दिए हैं दोनों एक दम जबरदस्त! अब दोनों माँ बेटी एक नंबर की **** बन गई है ! कितने भी आ जाओ सबको को संभाल लेंगी!

👏🏻👏🏻👏🏻 बहुत ही शानदार लिख रही हैं आप !!
जी आपका बहोत बहोत धन्यवाद दोस्त.................

देखते है आगे माँ-बेटी कैसे कहानी ओ आगे ले जाती है....................
 
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Funlover

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शानदार अपडेट लिखे है । कहानी की स्थति घटना के हिसाब से सीन क्रिएट करना वाकई एक आर्ट है । खास कर शादी समारोह में होने वाले क्रियाकलापो के मध्य से कामुकता और सेक्सी सीन की कल्पना करना बहुत कठिन है । आपने जिस तरह से एक सुलझे हुए राइटर की तरह सारी चीजों को बारीकी और सटीकता से संभव किया है वह काबिले तारीफ और काबिले गौर है । बड़ी बहू छोटी बहू की मंशा, बड़ी बहू द्वारा परम को अपनी साड़ी उतार कर देना ताकि परम भेष बदल कर उसके कमरे में आसानी से पहुंच जाए । रेखा की मौसी और उसकी नई ब्याही हुई दोनो लड़कियों और सेठ के दोनो लड़के जिन्हें अभी तक इस समारोह में आने के बाद कोई औरत नही मिली थी वो दोनो उन नवविवाहिताओं को समागम के लिए जिस हिसाब से साधने में लगे है यह बहुत सटीकता से चित्रण किया है । मैं पहले भी लिखा है शादी समारोह में बहुत से खेल खेल जाते है कुछ पर्दे के आगे और बहुत कुछ पर्दे के पीछे । एक शानदार अपडेट के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।

आपके इतने विस्तृत और उत्साहवर्धक शब्दों के लिए हृदय से धन्यवाद।

यह जानकर बहुत खुशी हुई कि आपको कहानी का प्रवाह, दृश्य-निर्माण और पात्रों की मनोस्थिति का चित्रण प्रभावी लगा। मेरा हमेशा यही प्रयास रहता है कि हर दृश्य कहानी की आवश्यकता के अनुसार स्वाभाविक लगे और प्रत्येक पात्र की सोच, उद्देश्य तथा परिस्थितियाँ कथानक को आगे बढ़ाएँ। शादी जैसे जीवंत माहौल में एक साथ कई घटनाओं और पात्रों को संतुलित ढंग से प्रस्तुत करना वास्तव में चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए आपकी यह सराहना मेरे लिए बहुत मायने रखती है।

आपने जिन प्रसंगों और पात्रों का उल्लेख किया, उन्हें पढ़कर यह महसूस हुआ कि कहानी का वातावरण और घटनाओं का प्रभाव पाठक तक सही रूप में पहुँचा है। यही किसी भी लेखक के लिए सबसे बड़ा संतोष होता है।

आपके स्नेह, विश्वास और निरंतर प्रोत्साहन के लिए एक बार फिर से हार्दिक धन्यवाद। आशा है कि आने वाले अपडेट भी आपको इसी तरह रोचक, सशक्त और यादगार लगेंगे।


अगर कही गलती या अतिउत्साह में प्रवाह से बाहर निकल जाती हूँ तो please मेरा ध्यान दोरे..................... आप सभी रीडर्स का साथ-सहकार से ही यह कहानी अब तक चल रह है।


आभार................
 

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चलिए दोस्तों कहानी में आगे बढ़ते है ..............................
 
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गुड्डी ने शरमाते हुए, लेकिन आँखों में शैतानी भरकर जवाब दिया,

“सब देवर ऐसा ही करते हैं अपनी-अपनी भाभी के साथ... पीछे से पकड़ना, गले लगाना, छूना... कभी-कभी तो...”

“अरे वाह! तुमको कैसे मालूम?” बड़े भाई ने मुस्कुराते हुए पूछा और साहसपूर्वक गुड्डी का एक हाथ पकड़कर अपने दोनों हाथों के बीच ले लिया। फिर जानबूझकर उसका हाथ अपनी जाँघ पर रख दिया — ठीक उस जगह के पास जहाँ उसका लंड अंडरवियर में फड़क रहा था।

गुड्डी का हाथ गरम हो गया। वह शर्मा गई, लेकिन हाथ हटाने की कोशिश भी नहीं की।
फनलवर की प्रस्तुति।

दूसरी लड़की (दीदी) ने छोटे भाई की तरफ देखकर हँसते हुए कहा,

“गुड्डी ठीक ही तो कहती है... सब देवर भाभी के साथ थोड़ा-बहुत मज़ाक, मस्ती तो चलती ही है...”

उसने छोटे भाई की ओर देखा और शरारत भरी आवाज़ में बोली,

“छोटे भैया... आप भी तो अपनी भाभी के साथ खूब खुशियाँ मनाते थे... मुझे सब मालूम है...”

“अच्छा! छोड़ो...” छोटे भाई ने हँसते हुए पूछा, “ये बताओ तुम दोनों अपने पति से खुश हो?”

दोनों लड़कियाँ एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराईं और फिर शर्मा गईं। उनके चेहरे लाल हो गए। साफ़ झलक रहा था कि बात सेक्स की तरफ जा रही है।

बड़े भाई ने गुड्डी को और करीब खींचते हुए पूछा,

“शरमाती क्यों हो? अब तो तुम लोगों की शादी हो चुकी है। बोलो ना... तुम्हारे पति तुम्हें खुश रखते हैं कि नहीं? रात में... अच्छे से चोदते हैं या बस अपना काम करके सो जाते हैं?”

दीदी ने शर्मा कर सिर झुका लिया, लेकिन गुड्डी ने हिम्मत करके कहा,

“रोज़ तो चोदते हैं... लेकिन...”

“लेकिन क्या?” छोटे भाई ने दीदी की कमर पर हाथ रखते हुए पूछा और उसे अपनी ओर खींच लिया। अब दीदी उसकी गोद के बहुत करीब थी।

गुड्डी ने शर्माते हुए कहा,

“हालाँकि मेरा पति मुझे रोज़ चोदता है... लेकिन मुझे और ज़्यादा... और ज़ोरदार चुदाई चाहिए... वो जल्दी झड़ जाता है...”

दीदी भी अब बोल पड़ी,

“मेरा पति तो मेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ अंदर तक नहीं रख पाता... बस दो-तीन धक्के और...”

दोनों भाईयों की आँखें चमक उठीं। बड़े भाई ने गुड्डी की जाँघ पर हाथ फेरते हुए कहा,

“तो फिर तुम लोग क्या चाहती हो? हम जैसे देवरों से...?”

गुड्डी ने शरमा कर छोटे भाई की तरफ देखा और बोली,

“भैया... आप लोग तो खूब मस्ती करते हैं... कोलकाता में... अपनी रखैलों और रंडियों के साथ... हमें सब मालूम है...”

“क्या मतलब? कैसी मस्ती?” बड़े भाई ने जानबूझकर पूछा।
निर्मात्री फनलवर है।

“अब बनिए मत... हम लोगों को सब मालूम है,” दीदी ने खुलकर कहा, “भैया, बहाना मत बताइए... बताइए ना... आप लोग कोलकाता में अपनी रखैल और रंडी के साथ क्या-क्या मस्ती करते हैं? वो औरतें क्या-क्या करती हैं जो हम घर की औरतें नहीं कर पातीं?”

बड़े भाई ने गुड्डी की जाँघ को और ऊपर सहलाते हुए, गंदी मुस्कान के साथ बोला,

“वो औरतें सब कुछ करती हैं... लंड चूसती हैं, गांड मरवाती हैं, एक साथ दो-तीन लंड लेती हैं... रस पीती हैं... नंगी होकर नाचती हैं... जो तुम गृहणियाँ शर्म के मारे नहीं कर पातीं...”

छोटे भाई ने दीदी की कमर पर हाथ फेरते हुए कहा,

“अगर तुम औरतें भी वो सब करो जो हम मर्दों को अच्छा लगता है, तो फिर क्यों हम चुदाई के लिए दूसरी औरतों के पास जाएँगे?”

दोनों लड़कियाँ एक-दूसरे को देखकर शर्मा गईं, लेकिन उनकी साँसें तेज़ हो गई थीं। उनकी चूतें गीली होने लगी थीं।

गुड्डी ने धीरे से पूछा,

“क्या-क्या करती हैं वो औरतें...?”
फनलवर की रचना।



***********************************************.


जुड़े रहिये दोस्तों।




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छोटे भाई ने दीदी को अपनी गोद में और करीब खींच लिया। उसकी एक जाँघ अब छोटे भाई की जाँघ पर थी। उसने दीदी की कमर पर हाथ फेरते हुए धीमी, कामुक आवाज़ में शुरू किया:

“देखो दीदी... वो रंडियाँ जो हम मर्दों को सबसे ज्यादा पसंद आती हैं, वो सब कुछ करती हैं। पहले तो वो नंगी होकर डांस करती हैं... धीरे-धीरे कपड़े उतारती जाती हैं... स्तन हिलाती हैं, गांड लहराती हैं, अपनी चूत को उँगलियों से सहलाती हैं... ताकि हमारा लंड खड़ा हो जाए।”
फनलवर की पेशकश।

उसने दीदी की जाँघ पर हाथ ऊपर सरकाते हुए आगे कहा,

“फिर वो हमारे सामने घुटनों पर बैठ जाती हैं... लंड को दोनों हाथों में पकड़कर पहले चूमती हैं... जीभ से लंड की नसों पर चाटती हैं... सुपारे को मुंह में लेकर चूसती हैं... जैसे कोई आम चूस रही हों... लार टपकाती हुई गले तक ले जाती हैं... गहरी गले तक... और आँखों में देखती हुई चूसती रहती हैं...”

दीदी की साँसें तेज हो गईं। छोटे भाई ने उसकी जाँघ के अंदरूनी हिस्से को सहलाते हुए जारी रखा,

“फिर वो लंड को अपनी चूत पर रगड़ती हैं... गीला करके अंदर ले लेती हैं... कभी ऊपर बैठकर उछलती हैं... कभी कुत्ते की तरह घुटनों पर होकर गांड हिलाती हैं... और चुदाई के दौरान गंदी-गंदी बातें करती हैं... ‘चोदो... और जोर से चोदो... मेरी चूत फाड़ दो... गांड में डाल दो... रस पिला दो...’”

छोटे भाई ने दीदी के कान में फुसफुसाते हुए कहा,

“और सबसे मजेदार बात... वो लंड का पानी भी पी जाती हैं... गरम-गरम वीर्य... मुंह में लेकर निगल जाती हैं... कुछ तो चेहरे पर, स्तनों पर... सब जगह फैलाती हैं... और मुस्कुराती हुई कहती हैं — ‘और दो... और पानी दो...’”

दीदी की चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी। वह शर्मा रही थी, लेकिन उसका शरीर उत्तेजना से काँप रहा था।

इतनी देर में बड़े भाई ने गुड्डी को अपनी गोद में और कसकर बिठा लिया और अपनी कहानी शुरू की:

“अब मैं बताता हूँ... गुलाबो नाम की एक औरत थी... वो हमारे ड्राइवर की पत्नी है, लेकिन हमने उसे अपनी प्राइवेट रखैल बना रखा है। गुलाबो स्टेज पर नाचती है... नंगी होकर... अपनी चूत और गांड दिखाती हुई... मर्दों के सामने घुटनों पर बैठकर दस-दस लंड चूसती है... फिर स्टेज पर ही चार-पाँच आदमियों से एक साथ चुदवाती है...”

बड़े भाई ने गुड्डी की चुची के ऊपर से हाथ फेरते हुए कहा,

“हम दोनों भाईयों ने गुलाबो को न सिर्फ़ बिस्तर पर... बल्कि दिन के उजाले में कार की पिछली सीट पर भी बार-बार चोदा है। वो कार में बैठकर ही अपनी साड़ी ऊपर कर लेती है... हमारा लंड अपनी चूत में डाल लेती है... और पूरे रास्ते चुदती रहती है...”

दोनों भाईयों की बातें इतनी उत्तेजक थीं कि दोनों लड़कियों को पता ही नहीं चला कि कब उनके कपड़े उतर गए। बड़े भाई ने गुड्डी की चूत पर हाथ रख दिया, छोटे भाई ने दीदी की चूत पर।

दोनों भाई अब अपनी चचेरी बहनों की चूत चूसने लगे।
लेखिका फनलवर है।

गुड्डी और दीदी दोनों कराह उठीं। उनके पति ने कभी उनकी चूत में जीभ नहीं डाली थी। यह पहला अनुभव था।

“आह्ह्ह... भैया... क्या कर रहे हो... उफ्फ... बहुत अच्छा लग रहा है...” दीदी ने छोटे भाई के सिर को अपनी चूत पर दबाते हुए कराहा।

बड़े भाई ने गुड्डी की चूत चाटते हुए कहा,

“अब तुम भी वो सब करोगी जो रंडियाँ करती हैं... हम तुम्हें सिखाएंगे...”

अब पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं था।

****************************************************.



आज के लिए यही तक दोस्तों।



बाकी आपके कोमेंट्स आने के बाद.......................


Funlover की ओर से
जय भारत।।



 

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“गुड्डी ठीक ही तो कहती है... सब देवर भाभी के साथ थोड़ा-बहुत मज़ाक, मस्ती तो चलती ही है...”

उसने छोटे भाई की ओर देखा और शरारत भरी आवाज़ में बोली,

“छोटे भैया... आप भी तो अपनी भाभी के साथ खूब खुशियाँ मनाते थे... मुझे सब मालूम है...”

“अच्छा! छोड़ो...” छोटे भाई ने हँसते हुए पूछा, “ये बताओ तुम दोनों अपने पति से खुश हो?”

दोनों लड़कियाँ एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराईं और फिर शर्मा गईं। उनके चेहरे लाल हो गए। साफ़ झलक रहा था कि बात सेक्स की तरफ जा रही है।

बड़े भाई ने गुड्डी को और करीब खींचते हुए पूछा,

“शरमाती क्यों हो? अब तो तुम लोगों की शादी हो चुकी है। बोलो ना... तुम्हारे पति तुम्हें खुश रखते हैं कि नहीं? रात में... अच्छे से चोदते हैं या बस अपना काम करके सो जाते हैं?”

दीदी ने शर्मा कर सिर झुका लिया, लेकिन गुड्डी ने हिम्मत करके कहा,

“रोज़ तो चोदते हैं... लेकिन...”

“लेकिन क्या?” छोटे भाई ने दीदी की कमर पर हाथ रखते हुए पूछा और उसे अपनी ओर खींच लिया। अब दीदी उसकी गोद के बहुत करीब थी।

गुड्डी ने शर्माते हुए कहा,

“हालाँकि मेरा पति मुझे रोज़ चोदता है... लेकिन मुझे और ज़्यादा... और ज़ोरदार चुदाई चाहिए... वो जल्दी झड़ जाता है...”

दीदी भी अब बोल पड़ी,

“मेरा पति तो मेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ अंदर तक नहीं रख पाता... बस दो-तीन धक्के और...”

दोनों भाईयों की आँखें चमक उठीं। बड़े भाई ने गुड्डी की जाँघ पर हाथ फेरते हुए कहा,

“तो फिर तुम लोग क्या चाहती हो? हम जैसे देवरों से...?”

गुड्डी ने शरमा कर छोटे भाई की तरफ देखा और बोली,

“भैया... आप लोग तो खूब मस्ती करते हैं... कोलकाता में... अपनी रखैलों और रंडियों के साथ... हमें सब मालूम है...”

“क्या मतलब? कैसी मस्ती?” बड़े भाई ने जानबूझकर पूछा।
निर्मात्री फनलवर है।

“अब बनिए मत... हम लोगों को सब मालूम है,” दीदी ने खुलकर कहा, “भैया, बहाना मत बताइए... बताइए ना... आप लोग कोलकाता में अपनी रखैल और रंडी के साथ क्या-क्या मस्ती करते हैं? वो औरतें क्या-क्या करती हैं जो हम घर की औरतें नहीं कर पातीं?”

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“वो औरतें सब कुछ करती हैं... लंड चूसती हैं, गांड मरवाती हैं, एक साथ दो-तीन लंड लेती हैं... रस पीती हैं... नंगी होकर नाचती हैं... जो तुम गृहणियाँ शर्म के मारे नहीं कर पातीं...”

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“अगर तुम औरतें भी वो सब करो जो हम मर्दों को अच्छा लगता है, तो फिर क्यों हम चुदाई के लिए दूसरी औरतों के पास जाएँगे?”

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“देखो दीदी... वो रंडियाँ जो हम मर्दों को सबसे ज्यादा पसंद आती हैं, वो सब कुछ करती हैं। पहले तो वो नंगी होकर डांस करती हैं... धीरे-धीरे कपड़े उतारती जाती हैं... स्तन हिलाती हैं, गांड लहराती हैं, अपनी चूत को उँगलियों से सहलाती हैं... ताकि हमारा लंड खड़ा हो जाए।” फनलवर की पेशकश।

उसने दीदी की जाँघ पर हाथ ऊपर सरकाते हुए आगे कहा,

“फिर वो हमारे सामने घुटनों पर बैठ जाती हैं... लंड को दोनों हाथों में पकड़कर पहले चूमती हैं... जीभ से लंड की नसों पर चाटती हैं... सुपारे को मुंह में लेकर चूसती हैं... जैसे कोई आम चूस रही हों... लार टपकाती हुई गले तक ले जाती हैं... गहरी गले तक... और आँखों में देखती हुई चूसती रहती हैं...”

दीदी की साँसें तेज हो गईं। छोटे भाई ने उसकी जाँघ के अंदरूनी हिस्से को सहलाते हुए जारी रखा,

“फिर वो लंड को अपनी चूत पर रगड़ती हैं... गीला करके अंदर ले लेती हैं... कभी ऊपर बैठकर उछलती हैं... कभी कुत्ते की तरह घुटनों पर होकर गांड हिलाती हैं... और चुदाई के दौरान गंदी-गंदी बातें करती हैं... ‘चोदो... और जोर से चोदो... मेरी चूत फाड़ दो... गांड में डाल दो... रस पिला दो...’”

छोटे भाई ने दीदी के कान में फुसफुसाते हुए कहा,

“और सबसे मजेदार बात... वो लंड का पानी भी पी जाती हैं... गरम-गरम वीर्य... मुंह में लेकर निगल जाती हैं... कुछ तो चेहरे पर, स्तनों पर... सब जगह फैलाती हैं... और मुस्कुराती हुई कहती हैं — ‘और दो... और पानी दो...’”

दीदी की चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी। वह शर्मा रही थी, लेकिन उसका शरीर उत्तेजना से काँप रहा था।

इतनी देर में बड़े भाई ने गुड्डी को अपनी गोद में और कसकर बिठा लिया और अपनी कहानी शुरू की:

“अब मैं बताता हूँ... गुलाबो नाम की एक औरत थी... वो हमारे ड्राइवर की पत्नी है, लेकिन हमने उसे अपनी प्राइवेट रखैल बना रखा है। गुलाबो स्टेज पर नाचती है... नंगी होकर... अपनी चूत और गांड दिखाती हुई... मर्दों के सामने घुटनों पर बैठकर दस-दस लंड चूसती है... फिर स्टेज पर ही चार-पाँच आदमियों से एक साथ चुदवाती है...”

बड़े भाई ने गुड्डी की चुची के ऊपर से हाथ फेरते हुए कहा,

“हम दोनों भाईयों ने गुलाबो को न सिर्फ़ बिस्तर पर... बल्कि दिन के उजाले में कार की पिछली सीट पर भी बार-बार चोदा है। वो कार में बैठकर ही अपनी साड़ी ऊपर कर लेती है... हमारा लंड अपनी चूत में डाल लेती है... और पूरे रास्ते चुदती रहती है...”

दोनों भाईयों की बातें इतनी उत्तेजक थीं कि दोनों लड़कियों को पता ही नहीं चला कि कब उनके कपड़े उतर गए। बड़े भाई ने गुड्डी की चूत पर हाथ रख दिया, छोटे भाई ने दीदी की चूत पर।

दोनों भाई अब अपनी चचेरी बहनों की चूत चूसने लगे।
लेखिका फनलवर है।

गुड्डी और दीदी दोनों कराह उठीं। उनके पति ने कभी उनकी चूत में जीभ नहीं डाली थी। यह पहला अनुभव था।

“आह्ह्ह... भैया... क्या कर रहे हो... उफ्फ... बहुत अच्छा लग रहा है...” दीदी ने छोटे भाई के सिर को अपनी चूत पर दबाते हुए कराहा।

बड़े भाई ने गुड्डी की चूत चाटते हुए कहा,

“अब तुम भी वो सब करोगी जो रंडियाँ करती हैं... हम तुम्हें सिखाएंगे...”

अब पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं था।

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Ashiq Baba

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वाह क्या खूब सीन लिखा है । मुझे बिताए हुए 80 और 90 के दशक के दौर याद आ गया । ये वो वक्त था जब शोशल मीडिया जे नाम पर बस न्यूज पेपर हुआ करता था या फिर वो घुमक्कड़ दोस्त वुर बुजुर्ग जो बड़े शहरों में जाने की बातें वर्षों तक हर महफ़िल में नमक मिर्च और बत्तीस मसाले मिला कर सुनाया करते थे । हम में से कोई यार कभी दिल्ली बॉम्बे कलकत्ता या किसी बड़े शहर में जाता था तो वहाँ के रण्डी खाने, टूरिस्ट पैलेस बड़े मार्केट होटल खास कर जिसमे लडकिया सर्विस देती या सैलून जिसमे लडकिया कटिंग शेव करती थी । उनके ऐसे लंबे लंबे किस्से कहानिया और खर्चा बताया करते थे । अब उस जमाने मे मोबाइल ही नही होते थे जो सेल्फी ले कर दिखाते तो हम सभी अपनी अपनी इमेजिन से उस जगह की परिस्थितियों को समझते थे । अब छीटे शहरों कस्बो गांव के रहवासी इन किस्सों के बहुत रसिया होते थे । कहीँ टपरी पर बैठ कर चाय और सिगरेट का दौर चलता रहता और किससे कहानिया और लड़कियों के बारे में चटकारे ले लेकर किस्सागोई चलती रहती थी । ऐसा ही कुछ गुड्डी और उसकी छोटी बहन ने सेठ के बिगड़ैल दोनो लड़को से कलकत्ता की रण्डियों के बारे में ये बात पुख्ता करने के लिए पूछ लिया कि दोनों भाई रंडीबाज तो है ही सारे रिश्तेदारों को पता है मगर उन रंडियों में आखिर ऐसा क्या है जो हम घरेलू महिलाओं में नही है । आखिर क्या खास बात या राज है जो लोग इतना पैसा लुटाते है ।
खैर दोनो भाई इस शादी समारोह में आम के बाद से किसी ना किसी मादा की तलाश में तो थे ही आखिर दोनो को ही एक एक नवयौवना मिल ही गई है तो खेल तो खेलेंगे ही । आगे क्या क्या होता है देखते है । एक उबलते दूध से अपडेट के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।
 
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