नारंग साहब ने मेरे एक क्वोट को कहा पर दूसरे क्वोट पर उदासीनता दिखा दी ।
भई , मोहब्बत बच्चो का खेल नही है और न ही जवानो की कोई जागीर है । इस मोहब्बत पर हम बुजुर्गों का भी उतना ही अधिकार है जितना जवानो की है - और यह बात मै नही आई एस जौहर साहब ने शागिर्द फिल्म मे अपने शागिर्द जाॅय मुखर्जी को कहा था ।
बहरहाल नारंग साहब और शीतल की नोंक झोंक दिल्लगी से बढ़कर एडल्टरी तक पहुंच गई है और यह राज साहब के लिए खतरे की घंटी है ।
जब बात यूरिनल तक पहुंच जाए तो यह खतरे की ही घंटी है । इस सब्जेक्ट पर अंकिता रानी ने एक इरोटिक प्रसंग दिया था जब जवान भाई और बहन एक साथ बाथरूम मे यूरिन करते है लेकिन वगैर किसी के प्राइवेट पार्ट को देखे हुए , मतलब भाई आगे और बहन उसके ठीक पीछे और दोनो का यूरिन आगे निकल कर एक हो जाता है ।
शायद इससे मिलता हुआ या कुछ हटकर ऐसा ही वाक्या नारंग साहब और शीतल के दरम्यान देखने को मिले ।
प्रकृति का एक नियम है कि अगर आप को कुछ लेना है तो बदले मे कुछ देना भी होता है । नारंग साहब ने अगर राज से उसकी पत्नी छिन ली तो बदले मे नारंग साहब को अपनी वैसी ही चीज राज को देनी भी पड़ेगी । अर्थात नारंग साहब को राज को या तो अपनी बीवी उमा की कुर्बानी देनी होगी या अपनी पुत्री सोनी को । इस से कम से कम इस खेल मे कोई गिल्टी महसूस नही करेगा , और अगर करेगा भी तो कुछ कम ही करेगा ।
एक और बात कहनी थी - शीतल को अपने उस फ्रैंड को अनफाॅलो नही करना था जिस ने उसे एक नई सेक्सुअल एहसास से परिचित कराया हो ।
नारंग साहब हो या राज - इनफिडिलिटि पर विवाहितों का एतराज यूनिवर्सल है । मर्द की बेवफाई पर औरत का भड़कना नेचुरल फिनाॅमिना है ।
ऐसी ही एक महिला ने अपनी एक पक्की , राजदां सखी से सवाल किया - " तेरा क्या ख्याल है , मेरा पति मेरे से बेवफाई करेगा ? "
सखी ने कहा - " उसके पास पौरुषदंड है ? "
" है । "
" करेगा । "
लिहाजा जब ईश्वर ने ही मर्द को पोलीगेमिस्ट बनाया था तो मर्द क्या कर सकता था !
मौका हाथ से जाने देना मर्द की बुनियादी फितरत के खिलाफ है । सयाने लोग कहते हैं कि प्रलोभन से बचना चाहिए , लेकिन मर्द मानस तो खास ख्याल रखता है कि कोई प्रलोभन उससे बच न निकले ।
यानि घर की मुर्गी दाल बराबर और बाहर की दाल चंगेरी ।
आउटस्टैंडिंग अपडेट डियर ।
