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“जब इतना दिन नहीं चोदा तो अब इसको शादी के पहले नहीं चोदूँगा... इसके पति को चूत बिल्कुल कुंवारी मिलेगी।” परम ने मन ही मन फुसफुसाया।

फिर पिछली बार की तरह परम ने रेखा के स्तनों को दोनों हाथों में लिया, उन्हें जोर से दबाया, निप्पलों को चूसा और खींचा। उसने नीचे झुककर रेखा की चूत के होंठों को चबाया, जीभ से क्लिटोरिस को चाटा और धीरे से काट भी लिया। रेखा ने कमर ऊपर उठा ली।

“ओह्ह... परम... काट डालेगा क्या! आह्ह्ह... कब से तेरा इंतजार कर रही हूँ... आह्ह्ह राजा... आह्ह... तू जादूगर है... आह्ह... मार डाल... आज अपनी कसम तोड़ दे... मुझे अब बर्दाश्त नहीं होगा... चोद मुझे... फाड़ डाल मेरी चूत को... तू मेरा प्यारा है... मैं तेरी घरवाली हूँ... चोद मुझे...”
फनलवर की प्रस्तुति।

रेखा की कराह सुनकर बड़ी बहू जाग गई। उसने खुद को ढकने की कोशिश की। लेकिन परम ने चादर खींच ली और रेखा की चूत को चाटना जारी रखा। बड़ी बहू ने नीचे देखा और देखा कि परम ने चूत के होंठ चौड़े कर दिए हैं और चूत के अंदर गहरे लाल रंग का माल बहुत सेक्सी लग रहा था। उसने अपनी नजरें और नीचे झुकाईं और परम का थड़कता हुआ लंड देखकर उत्तेजित हो गई, जो पहले ही उसकी चूत और मुँह में ठूँस चुका था, लेकिन उसकी चूत फिर से उसे अंदर लेना चाहती थी।

उसे डर था कि रेखा की मौजूदगी में परम उसे चोदेगा नहीं। उसने देखा कि रेखा अपना शरीर ऊपर उठा रही थी और अचानक परम उठ खड़ा हुआ। उसने रेखा की टाँगें दोनों हाथों से पकड़ीं और उन्हें दूर धकेल दिया। उसने अपना लौड़ा रेखा की गांड पर टिकाया और लंड पर हाथ रखे बिना ही परम ने एक ज़ोर का धक्का दिया और लंड गांड के छेद में फिसल गया।

“साली की गांड बिल्कुल ढीली हो गई है... कितना गांड मारा है परम ने!” बड़ी बहू ने कहा और रेखा से पूछा,.

“कुतिया... इतना मोटा और लंबा लंड कैसे घुसा तेरी गांड में!”

बड़ी बहू ने अपनी चूत को सहलाया और बोली,

“मुझे तो लगता है... मेरी चूत में भी नहीं घुसेगा... कितना मोटा सुपारा है साले का...”

“आह्ह परम... जमकर मार... आह्ह्ह... और जोर से... जोर से... गांड और चूत में आग लग गई है... ओह्ह्ह्ह...” रेखा कराहती रही।

और बड़ी बहू ने देखा कि परम का लंबा लंड रेखा की गांड के अंदर गायब हो गया और वह यह देखकर आश्चर्यचकित हो गई कि कैसे 15 मिनट तक रेखा ने लंड के जोर को गांड में झेला। फिर रेखा ने उसे खींच लिया। रेखा ने अपने आप को आगे की ओर खींचा जिससे लंड उसकी गांड से बाहर आ गया।

परम रेखा के शरीर के ऊपर आ गया। उसने अपना लंड उसकी कमर और पेट पर रगड़ा, फिर स्तनों के बीच रखा और रेखा ने दोनों तरफ से दबाकर उसकी बोब्लो को चोदने में उसकी मदद की। कुछ मिनट तक बोब्लो को चोदने के बाद उसने अपना लौड़ा रेखा के मुँह में डाल दिया।

लेकिन रेखा के अंतरंग मुखमैथुन, चूसने और लंड को सहलाने के बावजूद उसका वीर्य नहीं निकला।
संपादिका मैत्री पटेल है।

आखिरकार रेखा ने उसे धक्का देकर दूर कर दिया। उसकी गांड अब थक सी गई थी। उसकी गांड में अब दम नहीं था कि परम के धक्कों को झेल सके। बड़ी बहू ने देखा तो रेखा की गांड परम के लंड की साइज की बन गई थी , बहुत बड़ा छेद बना दिया है इस नापाक ने मेरी ननंद का। बहुत बार गांड मारी है उसने मेरी फुल सी ननंद की।


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“क्या हो गया? आज रस नहीं पिलाओगे...?” रेखा ने परम के लंड को सहलाते हुए पूछा।

“मैं क्या करूँ रानी! निकल ही नहीं रहा...!” परम ने हाँफते हुए कहा। निर्मात्री फनलवर है।

रेखा ने मुस्कुराते हुए बड़ी बहू की तरफ देखा और बोली,

“मुझे लगता है, इसको (लंड) को चूत के रस की जरूरत है।”

रेखा ने बड़ी बहू की निप्पल को सहलाते हुए कहा,

“देख... भाभी की चूत कितनी प्यासी है... बहुत भूखी है... चल राजा... भाभी को ठंडा कर दे। मेरा भैया इस रांड को चोद नहीं पाता...”

“चल भाभी... आपकी चूत दिखा मेरे यार को और उसके लंड से पानी गिरा दे। दीखता नहीं बेचारा... मेरा पति है अभी और उसके लंड से माल नहीं निकल रहा और मेरी गांड भी जवाब दे गई है। अब तेरा सहारा है... तेरी चूत दे मेरे इस प्यारे से लंड को...”

रेखा ने कहा और उसने बड़ी बहू के दोनों हाथ पकड़ लिए।

बड़ी बहू ने खुद को रेखा और परम के चंगुल से छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन परम ने उसकी कमर को मजबूती से पकड़ लिया और 4-5 जोरदार धक्के लगा दिए। लंड चूत के अंदर तक चला गया।

आखिरकार लंड और चूत दोनों एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते थे।

रेखा को खुशी हुई जब उसने देखा कि भाभी चुदाई का आनंद ले रही है और अपने कूल्हे हिलाकर जवाब देने लगी है।

“भाभी... मजा आ रहा है ना...?”

“हाँ रेखा... बहुत मस्त लंड है तेरे यार का... और बहुत प्यार से दम लगाकर चुदाई करता है... मजा आ गया... तेरे भैया ने कभी ऐसा नहीं चोदा... तू भी चुदवा ले... परम की रंडी बनने का भी एक अलग ही मजा है रेखा...”

“बस... भाभी... मुझे एक बार ससुराल से वापस आने दे... फिर तो रात-दिन परम को अपनी चूत के अंदर बंद करके रखूँगी... तब तक तुम और पूनम जितना चाहो परम के लंड का मजा ले लो...”

बड़ी बहू ने अपनी टाँगें ऊपर उठाईं और कूल्हे को झटका दिया।

“परम को बोल ना कि वो छोटी भाभी को भी चुदाई का मजा दे... तेरा छोटा भैया उसको रंडी बनाना चाहता है... अपने दोस्तों से चुदवाना चाहता है... साला खुद तो बीबी को खुश नहीं कर सकता...”

भाभी की चूत से अब फच-फच की आवाजें आने लगी थीं।

“ठीक है भाभी... कल छोटी भाभी को लेकर आना... उसे भी परम से चुदवा दूँगी। वैसे भाभी... तेरी चूत ने काफी रस छोड़ दिया है जो इतनी आवाजें कर रही है...” रेखा ने जवाब दिया।
कथाकार फनलवर है।

रेखा को क्या मालूम कि उसकी दोनों भाभी को खूब चोदा जा चुका है।

इस तरह बात करते-करते परम भाभी की चुदाई कर रहा था। आखिर भाभी भी थक गई और परम को अपने शरीर से हटाने लगी। और बोली,

“परम... अब मेरी चूत में ज्यादा रस नहीं बचा... तेरे लंड ने तो कमाल कर दिया है... मेरी चूत अब कल तक अपना चुतरस नहीं बना पाएगी... कितनी बार झड़ चुकी हूँ... अब छोड़ मुझे... मेरे माल की माँ-बहन एक कर दी इस नालायक प्यारा सा लंड ने...”

लेकिन परम ने भाभी के कंधों को जोर से पकड़कर खूब जोर-जोर से धक्का मारने लगा। उसे लगा कि उसका पानी निकलने वाला है। परम ने चुतरस वाला लंड बाहर निकाला और रेखा के मुंह में घुसेड़ कर धना-धन धक्का लगाने लगा।

परम ढीला हो गया। और थोड़ा रस रेखा के मुँह में गिराने के बाद लंड बाहर निकाला और भाभी के मुँह में पेल दिया।


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चलिए दोस्तों आगे बढ़ते है................
 
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सेठजी और किरण सुबह के तीन बजे.......

सेठजी किरण के पास आकर खड़े हो गए। किरण की चिकनी, बिना बाल वाली, नन्ही चूत देखकर उनका लंड फड़फड़ाने लगा। वो सुंदरी और छोटी बहू दोनों को भूल गए। यह होने स्वाभाविक था।
फनलवर की प्रस्तुति।

सेठजी ने अपना धोती खोला। उनका मोटा, भारी लंड बाहर निकला, गंजा सुपारा चमक रहा था।

सेठजी ने किरण की चूत को सहलाया। किरण को कुछ भी पता नहीं चला। सेठजी को लगा वो बिना बाल वाली चूत को सहला रहे हैं। आज सुबह ही सुंदरी ने किरण की झांट साफ की थी और उसके बाद मुनीम ने उसे चोदा था। मुनीम ने उसे पाँव-रोटी जैसी चूत बना के छोड़ा था।

सेठजी की गर्मी बढ़ती जा रही थी। अब वे चूत को सहलाने के साथ-साथ चुची को भी मसल रहे थे। सेठजी का लंड बिल्कुल टाइट हो गया। किरण अभी भी नींद में बेहोश थी।

थोड़ी देर के लिए सेठजी ने चूत पर से हाथ हटाया और दोनों हाथों से दोनों चुचियों को पैक करके 4-5 बार मसला। सेठजी को लगा कि किरण की चुचियाँ महक और पूनम की चुचियों से ज्यादा टाइट हैं, हाँ उनकी निप्पल जैसी स्पंजी और बड़ी नहीं हैं।

निप्पल दबाते-दबाते सेठजी ने अपनी साली की बेटी को चूम लिया। परम ने किरण को चोद-चोदकर इतना थका दिया था कि वो जागी नहीं। सेठजी ने प्यार से दोनों निप्पलों को चूसा, थोड़ी देर तक चूसते रहे, काटते रहे और चबाते रहे।

अब सेठजी को बर्दाश्त के बाहर होने लगा था। उन्हें कल शाम की बात याद आई जब वो महक को अकेली देखकर इतना गर्म हो गए थे कि महक ने एक बार लंड को दबाया और पानी निकल गया। लेकिन फिर सेठजी को गर्व महसूस हुआ कि बाद में महक को जमकर चोदा और चोद-चोदकर संतुष्ट किया। अब संतुष्ट किया या खूद संतुष्ट हुए यह तो सेठजी ही बता सकते है, या फिर महक।

महक की चुदाई को याद कर सेठजी किरण के पैरों के बीच बैठ गए। उन्होंने लंड को चूत पर दबाया और अपनी दो उँगलियों से चूत के होंठों को फैलाया और लंड को थोड़ा और चूत के छेद पर दबाया। लंड का ऊपरी भाग, सुपारा उसकी चूत में घुस गया।

(अब जहाँ मुनीम का सुपारा जिस चूत में सैर कर गया हो, उस चूत में कोई और सुपारा घुसे तो क्या असर होने वाला था...)

सेठ जी को हैरत हुई की उनके लंड का सुपारा भी किरण पर कोई असर नहीं दिख रही थी। सेठजी किरण के ऊपर फैल गए और उसके कंधों को दोनों हाथों से पकड़कर 3-4 जोरदार धक्के मारे।

“ओह्ह्ह परम... इतना जोर से नहीं...” किरण को पहले लगा कि परम फिर से चोद रहा है, लेकिन तुरंत ही किरण को फील हुआ कि जो लंड उसकी चूत के अंदर है वो पतला है और उसके शरीर पर जो आदमी है वो परम से बहुत भारी है।

किरण ने आँखें खोलीं। वह यह देखकर हैरान हो गई कि उसके मौसा जी पूरी लाइट जलाकर उसे चोद रहे हैं। वह चिल्लाना चाहती थी और उसने अपना मुँह खोलने की कोशिश की।
फनलवर का निर्माण।

सेठजी ने अपने भारी और बड़े हाथ उसके मुँह पर रखकर कहा,

“देख बेटी... मैं तो यहाँ किसी और के लिए आया था... लेकिन तुम्हारी मस्त नंगी जवानी को देखकर अपने आप को रोक नहीं पाया और लंड चूत में पेल दिया...अब लैंड को शांत करना तेरी जिम्मेदार है बेटी।”

सेठजी ने उसके गालों को सहलाया और चूमा और आगे बोले,

“और अब जब लंड और चूत ने एक-दूसरे को पसंद कर लिया है तो तुम भी चुदाई का मजा लो। देखो... हर चूत की यह जिम्मेदारी है कि घर के लंडों को ठंडा रखे। है ना! बस तुम भी मेरा लंड लेकर ठंडा होने दो... कब से बेचारा चूत के लिए तरस रहा है...”

उसने कुछ जोर के धक्के दिए और गति धीमी कर दी।



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सेठजीने आगे कहा,

“आज अगर मेरी जगह कोई भी होता... यानी की तेरा बाप और भैया भी होता तो तुम्हें नंगी देखकर जरूर चोद डालता...और चोदना भी चाहिए, बेटी बस थोड़ी देर और चोदने दो।”

उसने चुदाई जारी रखी और बोला,

“सच-मुच रानी... तेरे जैसी गरम और टाइट चूत मैंने अब तक नहीं चोदी...” सुने एक-दो और धक्के चूत में दे मारे। हालाकि किरण को उस धक्को से ज्यादा परेशानी नहीं हो रही थी की उसे चिल्लाना पड़े।
निर्मात्री फनलवर है।

सेठजी किरण को मस्का मारकर खुश कर रहा था। असल में किरण महक और पूनम की तुलना में बहुत कम चुदी थी।

“रानी... तू डर मत... किसी को कुछ पता नहीं चलेगा... तू चुदाई का मजा ले...” इतना कहते हुए सेठजी ने जमकर अपनी साली की बेटी को चोदा।

“लेकिन मौसाजी... यह गलत है...” किरण ने हाँफते हुए कहा।

“क्या गलत है! लगता है की तुझे तेरी माँ ने सिखाया नहीं की चूत का काम है लंड को ढीला रखना या करना। जब तुम्हारे पास माल है तो कोई तो जोहरी चाहिए ना! और तुझे क्या करना है बेटी... थोड़ी देर अपने पैरों को फैलाकर रख... मैं तेरी चूत को चोद के चला जाऊँगा... किसी को कानो कान खबर तक नहीं होगी की मैंने तुम्हें चोद दिया है...तुम्हे घर के लंड को ढीला रखने के लिए नहीं सिखाया है?”

“वो सब तो ठीक है मौसाजी... पर जो कर रहे हैं वो ठीक नहीं है... और मेरी माँ ने यह तो नहीं कहा था की अपने माल को मौसाजी को भी भेंट करना होगा...अपने ही खुद के मौसाजी के आगे पैरो को फैला के उनके लंड को.....”

“कोई बात नहीं बेटी... शायद तेरी माँ यह सब सिखाना भूल गई होगी... अब मैं तुम्हें सिखा रहा हूँ ना कि इस घर में कोई कुछ नहीं है बेटी... सब लंड और चूत का खेल है...”

इस बातों में सेठजी ने लंड को पूरा समा लिया था। बस अब कुछ धक्कों की ही बात रह गई थी।
फनलवर की रचना।

किरण ने अपने पैरों को जोड़ने की नाकाम कोशिश की। पर सेठजी के हाथों से उसके पैर छूट नहीं सके। वैसे देखा जाए तो उसने कुछ खास मेहनत भी नहीं की थी।

“चलिए मौसाजी... मेरे माल में से अपना लंड निकाल दीजिए... मुझे मेरे माल को मौसाजी से नहीं चुदवाना...”

“अब तेरे इस माल में मेरा लोडा अंदर तक जा चुका है... बस थोड़ी देर रुक जाओ... मेरा लंड से धार निकल लो... तुम्हें कुछ चाहिए होगा तो मैं देने के लिए तैयार हूँ...”

“बस करो मौसाजी... मैं कोई वेश्या नहीं हूँ... मेरा माल सिर्फ मेरे कुछ चुनिंदा लोगों के लंड के लिए है...” उसने लंड को पकड़कर बाहर की ओर लेने का प्रयास किया, लेकिन वह जानती थी कि थोड़े धक्कों की ही बात है। खुद भी सैर कर ले मौसाजी के लंड की।

“अरे मैंने कब कहा की तुम वेश्या हो! बस घर की बात है... घर का लंड है और घर की चूत... खेलने दो लंड और चूत को बेटी...”

“मौसाजी... कोई आएगा तो मर जाना पड़ेगा... मेरे माल का अब कुछ हो नहीं सकता... आपने बिना पूछे ही मेरे माल में अपना लंड उतार दिया है...यह बात सरा सर गलत है। हमारे में भी एक व्यवहार और नियम भी तो है की चूत की परमिशन के बिना कोई भी लंड शांत नहीं कर सकता। आप शायद भूल गए है।”

“बेटी... कोई नहीं आएगा... और अगर कोई आएगा भी तो मैं हूँ ना संभालने के लिए... तू चिंता मत कर... बस पैर फैलाकर अपना माल ढीला कर ताकि मेरा लंड तेरे इस माल को चोद सके...नियम की बाते बाद में भी हो सकती है।”

लेकिन परम की मस्त चुदाई के बाद किरण को कोई खास मजा नहीं आ रहा था। लेकिन जब लौड़ा चूत में घुस गया तो क्यों ना मजा ले, यह सोचकर किरण भी सिसकारी मारने लगी।
संपादिका मैत्री पटेल।



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“ओह्ह्ह मौसाजी... चोदिए... जमकर चोदो अपनी बेटी को...चलिए डालिए आपका लंड इसमें...” किरण ने सिसकारी भरते हुए कहा।

सेठजी ने किरण के निप्पल को जोर से मसलते हुए पूछा,

“किरण... बोल... परम ने तेरी चूत कितनी बार मारी...?”

किरण ने सेठजी को गले लगाते हुए जवाब दिया,

“कल रात... यहीं पर परम ने मेरी सील तोड़ी थी... और फिर दोबारा चोदा था... और आज आपके आने के पहले फिर से चोद कर... पता नहीं साला कहाँ गया...और मस्त कर के गया...क्या करती मैं भी चुद ही गई उससे।”

उसने सेठजी को गले लगाया और कहा,

“परम लास्ट में मेरी गांड में उँगली डालके सो गया था... पर अभी नहीं है... चूत टाइट है ना...?”

“हाँ रानी... बहुत टाइट है... मजा ले...देख लंड को मजा आना चाहिए बस, तेरी चूत भी तो तुम्हे मजा देगी, चिंता मत कर।”

सेठजी ने उसके छोटे-छोटे कूल्हों को पकड़कर ऊपर की ओर धकेल दिया। सेठजी ने उसके कूल्हों को पकड़कर चुदाई जारी रखी। वो जोर-जोर से धक्के मार रहा था। सेठजी का 90 किलो का ताकतवर वजन किरण की चूत में होने के बावजूद, सेठजी उसे परम या मुनीम की तरह उत्तेजित नहीं कर सके।

लेकिन सेठजी किरण की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सके और उन्होंने चूत में डिस्चार्ज कर दिया। उसे बहुत आराम और खालीपन महसूस हुआ।

“मौसा जी... बहुत मजा दिया आपने...” किरण ने सेठजी को खुश करने के लिए कहा। उसने सेठजी को धक्का देकर नीचे गिरा दिया और उनके ऊपर लेट गई। लेकिन मन ही मन उन्हें कोस भी रही थी। ज्यादा मजे उसे आई तो नहीं थी, पर क्या करती मौसा को खुश भी रखना था। और आखिरकार एक लंड जो कभी कोई नहीं मिला तो यह मैसजी का लंड से अपने माल की सर्विस करवा सकती है।

“ओह मौसा जी... आपने बहुत मस्ती दी... जब तक मैं यहाँ हूँ... रोज़ मुझे चोदना पड़ेगा... परम मुझे चोदे या ना चोदे... आपका ये लौड़ा मुझे चूत में रोज़ चाहिए...”

उसने सेठजी को 69 पोजीशन में घुमाया और करीब 10 मिनट तक उनका लंड चूसा। फिर सेठजी ने उसे बाहों में ले लिया। वह बहुत खुश था कि किरण जैसी जवान लड़की ने उसकी चुदाई की सराहना की और कहा कि उसने परम से बेहतर चुदाई की।

उसके पास उसे देने के लिए कुछ भी नहीं था।

“बेटी... तूने मुझे बहुत खुश किया है... बोल... क्या चाहिए... जो मांगेगी... दूँगा...”

“आपने भी मुझे बहुत मस्ती दी... परम से भी ज्यादा... बस मुझे रोज आपका लौड़ा चाहिए...”

“फिर भी... कल मेरे रूम में मुझसे मिलना... मैं तुम्हें कुछ दूँगा...और चोदुंगा भी। तेरी माँ से भी मस्त है तुम तो।”

हालाँकि सेठजी ने कल किरण को आते हुए देखा था और पहले भी देखा था, लेकिन उन्होंने कभी भी साधारण दिखने वाली लड़की के साथ चुदाई करने के बारे में नहीं सोचा था। और अब यह लड़की ही उसे जबरदस्त आनंद देती थी और उसे 20 मिनट से अधिक समय तक अपने अंदर रोके रख सकती थी। सेठजी को याद नहीं आ रहा था कि उन्होंने सुंदरी समेत किसी और को 10 मिनट से ज्यादा चोदा हो या नहीं। वह किरण को कोई उचित उपहार देना चाहता था।

“ठीक है मौसाजी... आऊँगी... और आपके उस कुछ के साथ-साथ आपका ये मस्त लंड भी लूँगी...”

सेठजी ने उसे गले लगा लिया। वह जाना चाहता था। वह उठा और बोल्ट खोल दिया। लेकिन किरण ने उसे पीछे खींच लिया और कुछ देर उसके साथ सोने और फिर से चोदने को कहा। सेठ ने सोचा कि कुछ देर गले मिलने के बाद वह अपने कमरे में चला जाएगा, लेकिन किरण के साथ वह भी सो गया।


सुबह

सेठजी को अपने पिछवाड़े पर एक कोमल शरीर का अहसास हुआ, तो जाग उठे। वह मुड़ा और देखा कि छोटी बहू अपनी निप्पल उस पर रगड़ रही है।

“ओह... भेन्चोद... रानी... तुम कहाँ थी... कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ...” उसने शिकायत की।

“और भोसडिके इसी चूत के चक्कर के लिए इस कली (Bud) को चोद डाला!” छोटी बहू ने कहा।


********************************************************************............

यही तक दोस्तों ।

बाकि आपके कोमेंट्स आने के बाद।


जय भारत।।

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सेठजी और किरण सुबह के तीन बजे.......

सेठजी किरण के पास आकर खड़े हो गए। किरण की चिकनी, बिना बाल वाली, नन्ही चूत देखकर उनका लंड फड़फड़ाने लगा। वो सुंदरी और छोटी बहू दोनों को भूल गए। यह होने स्वाभाविक था। फनलवर की प्रस्तुति।

सेठजी ने अपना धोती खोला। उनका मोटा, भारी लंड बाहर निकला, गंजा सुपारा चमक रहा था।

सेठजी ने किरण की चूत को सहलाया। किरण को कुछ भी पता नहीं चला। सेठजी को लगा वो बिना बाल वाली चूत को सहला रहे हैं। आज सुबह ही सुंदरी ने किरण की झांट साफ की थी और उसके बाद मुनीम ने उसे चोदा था। मुनीम ने उसे पाँव-रोटी जैसी चूत बना के छोड़ा था।

सेठजी की गर्मी बढ़ती जा रही थी। अब वे चूत को सहलाने के साथ-साथ चुची को भी मसल रहे थे। सेठजी का लंड बिल्कुल टाइट हो गया। किरण अभी भी नींद में बेहोश थी।

थोड़ी देर के लिए सेठजी ने चूत पर से हाथ हटाया और दोनों हाथों से दोनों चुचियों को पैक करके 4-5 बार मसला। सेठजी को लगा कि किरण की चुचियाँ महक और पूनम की चुचियों से ज्यादा टाइट हैं, हाँ उनकी निप्पल जैसी स्पंजी और बड़ी नहीं हैं।

निप्पल दबाते-दबाते सेठजी ने अपनी साली की बेटी को चूम लिया। परम ने किरण को चोद-चोदकर इतना थका दिया था कि वो जागी नहीं। सेठजी ने प्यार से दोनों निप्पलों को चूसा, थोड़ी देर तक चूसते रहे, काटते रहे और चबाते रहे।

अब सेठजी को बर्दाश्त के बाहर होने लगा था। उन्हें कल शाम की बात याद आई जब वो महक को अकेली देखकर इतना गर्म हो गए थे कि महक ने एक बार लंड को दबाया और पानी निकल गया। लेकिन फिर सेठजी को गर्व महसूस हुआ कि बाद में महक को जमकर चोदा और चोद-चोदकर संतुष्ट किया। अब संतुष्ट किया या खूद संतुष्ट हुए यह तो सेठजी ही बता सकते है, या फिर महक।

महक की चुदाई को याद कर सेठजी किरण के पैरों के बीच बैठ गए। उन्होंने लंड को चूत पर दबाया और अपनी दो उँगलियों से चूत के होंठों को फैलाया और लंड को थोड़ा और चूत के छेद पर दबाया। लंड का ऊपरी भाग, सुपारा उसकी चूत में घुस गया।

(अब जहाँ मुनीम का सुपारा जिस चूत में सैर कर गया हो, उस चूत में कोई और सुपारा घुसे तो क्या असर होने वाला था...)

सेठ जी को हैरत हुई की उनके लंड का सुपारा भी किरण पर कोई असर नहीं दिख रही थी। सेठजी किरण के ऊपर फैल गए और उसके कंधों को दोनों हाथों से पकड़कर 3-4 जोरदार धक्के मारे।

“ओह्ह्ह परम... इतना जोर से नहीं...” किरण को पहले लगा कि परम फिर से चोद रहा है, लेकिन तुरंत ही किरण को फील हुआ कि जो लंड उसकी चूत के अंदर है वो पतला है और उसके शरीर पर जो आदमी है वो परम से बहुत भारी है।

किरण ने आँखें खोलीं। वह यह देखकर हैरान हो गई कि उसके मौसा जी पूरी लाइट जलाकर उसे चोद रहे हैं। वह चिल्लाना चाहती थी और उसने अपना मुँह खोलने की कोशिश की।
फनलवर का निर्माण।

सेठजी ने अपने भारी और बड़े हाथ उसके मुँह पर रखकर कहा,

“देख बेटी... मैं तो यहाँ किसी और के लिए आया था... लेकिन तुम्हारी मस्त नंगी जवानी को देखकर अपने आप को रोक नहीं पाया और लंड चूत में पेल दिया...अब लैंड को शांत करना तेरी जिम्मेदार है बेटी।”

सेठजी ने उसके गालों को सहलाया और चूमा और आगे बोले,

“और अब जब लंड और चूत ने एक-दूसरे को पसंद कर लिया है तो तुम भी चुदाई का मजा लो। देखो... हर चूत की यह जिम्मेदारी है कि घर के लंडों को ठंडा रखे। है ना! बस तुम भी मेरा लंड लेकर ठंडा होने दो... कब से बेचारा चूत के लिए तरस रहा है...”

उसने कुछ जोर के धक्के दिए और गति धीमी कर दी।



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सेठजीने आगे कहा,

“आज अगर मेरी जगह कोई भी होता... यानी की तेरा बाप और भैया भी होता तो तुम्हें नंगी देखकर जरूर चोद डालता...और चोदना भी चाहिए, बेटी बस थोड़ी देर और चोदने दो।”

उसने चुदाई जारी रखी और बोला,

“सच-मुच रानी... तेरे जैसी गरम और टाइट चूत मैंने अब तक नहीं चोदी...” सुने एक-दो और धक्के चूत में दे मारे। हालाकि किरण को उस धक्को से ज्यादा परेशानी नहीं हो रही थी की उसे चिल्लाना पड़े।
निर्मात्री फनलवर है।

सेठजी किरण को मस्का मारकर खुश कर रहा था। असल में किरण महक और पूनम की तुलना में बहुत कम चुदी थी।

“रानी... तू डर मत... किसी को कुछ पता नहीं चलेगा... तू चुदाई का मजा ले...” इतना कहते हुए सेठजी ने जमकर अपनी साली की बेटी को चोदा।

“लेकिन मौसाजी... यह गलत है...” किरण ने हाँफते हुए कहा।

“क्या गलत है! लगता है की तुझे तेरी माँ ने सिखाया नहीं की चूत का काम है लंड को ढीला रखना या करना। जब तुम्हारे पास माल है तो कोई तो जोहरी चाहिए ना! और तुझे क्या करना है बेटी... थोड़ी देर अपने पैरों को फैलाकर रख... मैं तेरी चूत को चोद के चला जाऊँगा... किसी को कानो कान खबर तक नहीं होगी की मैंने तुम्हें चोद दिया है...तुम्हे घर के लंड को ढीला रखने के लिए नहीं सिखाया है?”

“वो सब तो ठीक है मौसाजी... पर जो कर रहे हैं वो ठीक नहीं है... और मेरी माँ ने यह तो नहीं कहा था की अपने माल को मौसाजी को भी भेंट करना होगा...अपने ही खुद के मौसाजी के आगे पैरो को फैला के उनके लंड को.....”

“कोई बात नहीं बेटी... शायद तेरी माँ यह सब सिखाना भूल गई होगी... अब मैं तुम्हें सिखा रहा हूँ ना कि इस घर में कोई कुछ नहीं है बेटी... सब लंड और चूत का खेल है...”

इस बातों में सेठजी ने लंड को पूरा समा लिया था। बस अब कुछ धक्कों की ही बात रह गई थी।
फनलवर की रचना।

किरण ने अपने पैरों को जोड़ने की नाकाम कोशिश की। पर सेठजी के हाथों से उसके पैर छूट नहीं सके। वैसे देखा जाए तो उसने कुछ खास मेहनत भी नहीं की थी।

“चलिए मौसाजी... मेरे माल में से अपना लंड निकाल दीजिए... मुझे मेरे माल को मौसाजी से नहीं चुदवाना...”

“अब तेरे इस माल में मेरा लोडा अंदर तक जा चुका है... बस थोड़ी देर रुक जाओ... मेरा लंड से धार निकल लो... तुम्हें कुछ चाहिए होगा तो मैं देने के लिए तैयार हूँ...”

“बस करो मौसाजी... मैं कोई वेश्या नहीं हूँ... मेरा माल सिर्फ मेरे कुछ चुनिंदा लोगों के लंड के लिए है...” उसने लंड को पकड़कर बाहर की ओर लेने का प्रयास किया, लेकिन वह जानती थी कि थोड़े धक्कों की ही बात है। खुद भी सैर कर ले मौसाजी के लंड की।

“अरे मैंने कब कहा की तुम वेश्या हो! बस घर की बात है... घर का लंड है और घर की चूत... खेलने दो लंड और चूत को बेटी...”

“मौसाजी... कोई आएगा तो मर जाना पड़ेगा... मेरे माल का अब कुछ हो नहीं सकता... आपने बिना पूछे ही मेरे माल में अपना लंड उतार दिया है...यह बात सरा सर गलत है। हमारे में भी एक व्यवहार और नियम भी तो है की चूत की परमिशन के बिना कोई भी लंड शांत नहीं कर सकता। आप शायद भूल गए है।”

“बेटी... कोई नहीं आएगा... और अगर कोई आएगा भी तो मैं हूँ ना संभालने के लिए... तू चिंता मत कर... बस पैर फैलाकर अपना माल ढीला कर ताकि मेरा लंड तेरे इस माल को चोद सके...नियम की बाते बाद में भी हो सकती है।”

लेकिन परम की मस्त चुदाई के बाद किरण को कोई खास मजा नहीं आ रहा था। लेकिन जब लौड़ा चूत में घुस गया तो क्यों ना मजा ले, यह सोचकर किरण भी सिसकारी मारने लगी।
संपादिका मैत्री पटेल।



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