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Incest "सगी बहना, अनजानी चाहत"

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Sand1947

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Than6
कोटा में पढ़ाई का प्रेशर ऐसा था —
सुबह 6 बजे क्लास, रात 11 बजे सेल्फ स्टडी,
और बीच में नोट्स, टेस्ट, रैंकिंग की अंधी स्पर्धा।
हर बच्चा टॉपर बनना चाहता था,
हर टेस्ट में कट-ऑफ के नंबर पार करने की होड़,
और जो पीछे रह जाता, वो डिप्रेशन में चला जाता।
कोटा की हवा में सिर्फ एक ही जुनून था —
'IIT निकालना है, चाहे कुछ भी हो जाए।'
पर इसी भागदौड़ में,
जवा का मन बार-बार विजया की तरफ भागता था।"

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"विजया की यादें —
वो बचपन की नोक-झोंक,
वो उसकी बढ़ती देह,
वो MC के दिनों की बेचैनी,
वो ब्रा और पैंटी की गंध,
वो प्रकाश अंकल का हाथ उसकी छाती पर,
और माँ का उसे अलग कमरे में भेज देना —
सब कुछ जवा के दिमाग में घूमता रहता था।
वो सोचता —
'विजया अब क्या कर रही होगी?
क्या वो भी मुझे याद करती होगी?'
पर जवा जानता था —
उसे पहले IIT क्रैक करना है,
फिर विजया के सामने अपनी चाहत रखनी है।"

"वो अपने आप से कहता —
'पहले JEE निकालूँ, फिर उसे बताऊँ…
कि मैं उसे बचपन से चाहता हूँ…'
पर उसके अंदर एक बेचैनी थी —
कि जब तक वो IIT निकालेगा,
विजया की चूत की गर्मी किसी और के हाथ लग जाएगी।
इसलिए वो रात-रात जागकर पढ़ता,
और सपने में विजया की नंगी देह देखता,
जो उसे पढ़ाई से भी ज़्यादा
उसकी जान लगती थी…" 😉🔥


"और उधर विजया भी अपनी 12वीं की तैयारी में मगन थी —
पढ़ाई, किताबें, और कॉपियाँ —
पर उसके दिमाग में जवा बार-बार आता।
वो उसे भाई की तरह मिस करती थी,
पर उसके अंदर वो भाई वाली दीवानगी नहीं थी —
जो जवा के दिल में थी।
पर अब विजया को अपनी बढ़ती जवानी का एहसास हो चला था —
या ये कहो कि ज़माने ने कर दिया था।"

"उसे कोई नहीं मसलना चाहता था —
PT सर, किसी न किसी बहाने,
उसे यहाँ-वहाँ छूने की कोशिश करते,
और स्कूल की बस में तो हालत और खराब थी —
बस में चढ़ते ही सारे लड़के उसके पीछे पड़ जाते,
कभी धक्का, तो कभी बहाने से हाथ फिसल जाता।"

"और माँ —
जिनकी पैनी नज़र हर वक्त विजया पर रहती,
उन्होंने उसके इतने ढीले कपड़े सिलवा दिए,
कि उसके उभार छिप जाएँ।
पर लाल ही गुड़गुड़ी में कहाँ छिपता है —
उसके यौवन के विशाल पहाड़
फिर भी दिख ही जाते थे,
और हर कोई उनका दीवाना था —
यहाँ तक कि उसका सगा भाई भी।"

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"विजया के पीछे लड़कों की लाइन लगी थी —
कोई SMS करता, कोई WhatsApp पर परेशान करता,
और प्रकाश अंकल तो बदनाम हो चुके थे,
पर अब कभी मौसाजी, कभी फुफाजी —
'बेटा-बेटा' कहकर उसकी गोलाइयों का मज़ा ले चुके थे।

लड़कियाँ तो nahii bigadein
पर ये मदरचोद मर्द
उसे चैन से जीने कहाँ देते थे।"

"और इसी सब के बीच,
वक्त निकलता जा रहा था —
विजया की बोर्ड की परीक्षा आ गई,
और जवा का JEE एंट्रेंस टेस्ट भी —
अब घड़ी करीब थी,
और दोनों की ज़िंदगी की चाल

अलग-अलग दिशा में जा रही थी।"
Thanks for update 😍 😍 😍 😍 😍
 

Rebel.desi

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इधर विजया की 12वीं की परीक्षाएँ खत्म हुईं,
और उधर जवा का IIT एंट्रेंस टेस्ट भी हो गया।
अब दोनों को बस रिजल्ट का इंतज़ार था —
पढ़ाई की घुटन, कोचिंग की भागदौड़,

और सालों की मेहनत —
सब कुछ अब ठहराव पर आ गया था।"

"माँ-बाबू ने सोचा —
'बच्चों ने बहुत मेहनत की है…
चलो कुछ दिनों के लिए कहीं घूमने चलते हैं…'
और फिर प्लान बना — गोवा का।
हवाई जहाज़ से जाना, बीच के किनारे रहना,
और कुछ दिनों के लिए सारी टेंशन भूल जाना।"

"गोवा —
पहुँचते ही हरी-भरी हवा, नमकीन समंदर की खुशबू,
और सूरज की तेज़ किरणें —
सब कुछ नया था, पर बहुत सुकून भरा।
होटल का कमरा समंदर की तरफ खुलता था,
और बालकनी से बीच की लहरें दिखती थीं।
माँ-बाबू ने जल्दी ही रेस्तराँ की तरफ रुख किया,
पर जवा और विजया बीच पर चले गए —
पहली बार, बिना किसी रुकावट के।"


Screenshot-20260818-121518-Chrome
"विजया ने पहली बार बिकिनी पहनी —
गुलाबी रंग की, जो उसके 38D उभारों पर कसकर बैठी,
और उसकी गदराई गाँड को और उभार दिया।
जवा की नज़र बस उसी पर थी —
उसकी बहना, जो अब एक पूरी औरत लग रही थी।
उसने धूप का चश्मा लगाया,
पर उसके पीछे की नज़रें
विजया के हर उभार को पी रही थीं।"

"बीच पर नंगे पैर चलना,
ठंडी लहरों का छूना,
और भीगी बालू में दोनों का साथ चलना —
सब कुछ एक सपने जैसा था।
विजया ने जब पानी में उछलकर हँसी,
तो जवा का लंड बिना इजाज़त के खड़ा हो गया।
वो खुद को संभालने की कोशिश करता,
पर हर बार नाकाम रहता।"

"शाम को —
होटल की छत पर,
मोमबत्तियाँ जल रही थीं,
और समंदर की लहरों की आवाज़ थी।
जवा ने विजया का हाथ पकड़ा —
'विजया… मैं कुछ कहना चाहता हूँ…'
विजया की नज़र उसके हाथ पर पड़ी,
पर उसने हाथ नहीं छुड़ाया।
'बोलो…'
पर जवा चुप रहा —
क्योंकि वो अभी भी डर रहा था,
कि अगर कुछ गलत कह दिया,
तो ये गोवा की सुबह
कभी वापस नहीं आएगी…" 😉🔥
"जवा हमेशा डरता था —
कि अगर उसने कुछ कहा और विजया नाराज़ हो गई,
तो उसके जीने का मकसद ही खत्म हो जाएगा।
इसलिए उसने प्लान बनाया —
'जब तक JEE क्रैक नहीं करता,
तब तक चुप रहूँगा…वह उसे खोना नहीं चाहता था !!
फिर जो होगा, देखा जाएगा।'"
."गोवा के बीच पर —
पैराग्लाइडिंग का मौका मिला।
विजया आगे थी, जवा पीछे —
और हार्नेस में बँधे दोनों
जब हवा में उड़े,
तो जवा ने मौका देखा —
और जानबूझकर डरने का नाटक करते हुए
अपने हाथ विजया के उभारों पर रख दिए।
'मुझे डर लग रहा है, बहना… थाम लो…'
पर उसके हाथों ने उसकी चूचियों को दबोच रखा था —
हवा के झोंके, ऊँचाई,
और भाई के हाथों की गर्मी —
विजया का दिल तेज़ धड़कने लगा।"

"वो कुछ कह नहीं पाई —
उसकी साँसें भारी हो गईं,
उसके शरीर में एक अनजानी बिजली दौड़ी।
उसने मज़ा, डर, रोमांच और गिल्ट —
सब एक साथ महसूस किया,
और हवा की ठंडक —
उसके दिमाग में chemical locha हो रहा था —
पर उसने जवा का हाथ नहीं हटाया।
जवा ने और कसकर पकड़ा,
जैसे वो गिरने से बच रहा हो —
पर असल में वो उसके उभारों का रस ले रहा था।"


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"जब वो नीचे उतरे —
तो माँ की नज़र
सीधे जवा के फूले हुए लंड पर चली गई —
जो अभी भी खड़ा हुआ था।
माँ ने एक नज़र देखा,
फिर आँखें फेर लीं,
और बिना कुछ कहे
हल्की-सी मुस्कान देकर चली गईं —
मानो वो समझ गई हों,
कि इस घर में अब कुछ बदलने वाला है।" 😉🔥
 

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"आज जवा का जन्मदिन था —
सुबह-सवेरे माँ-बाबू ने उसे गले लगाकर चूमा और आशीर्वाद दिया।
विजया ने भी बधाई दी, पर वो दूर से ही मुस्कुरा दी —
कोई गले मिलना नहीं, कोई किस नहीं।
जवा का मन थोड़ा उदास हो गया, पर उसने कुछ कहा नहीं।"

"सुबह की सैर पर —
दोनों बीच पर चल रहे थे,
जब जवा ने पूछा —
'माँ-बाबू ने मुझे किस करके विश किया…
तूने क्यों नहीं किया?'
विजया चौंकी —
'ऐसे ही… मुझे नहीं लगा…'
'पर तू हर साल करती थी…'
विजया ने आँखें घुमाईं —
'हम बच्चे नहीं रहे, भैया…
माँ-बाबू के सामने अच्छा नहीं लगता…'
पर जवा ने जिद की —
'चल, अब तो कर दे… मुझे बहुत बुरा लग रहा है…'
विजया ने हँसते-हँसते उसके गाल पर एक हल्का सा चूमा —
और तुरंत पीछे हट गई।
पर उसी पल, जवा के बरमूडा में उसका बाबूराव
तनकर सलामी देने लगा।"

"फिर वो लौट आए —
पूरे दिन परिवार संग घूमे,
और शाम को फिल्म देखने का प्लान बना —
'मैं हूँ ना' — शाहरुख की वो फिल्म,
जिसके दोनों दीवाने थे।
माँ-बाबू ने कहा —
'तुम लोग फिल्म देखो, हम गिफ्ट शॉपिंग करते हैं…'
और दोनों सिनेमा हॉल में चले गए।"


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"अंधेरे में —
जवा ने विजया का हाथ पकड़ा,
और अब पूरी फिल्म के दौरान
उसका हाथ छोड़ा नहीं।
कभी गलती से, कभी जानबूझकर —
उसकी उँगलियाँ विजया के उभारों को छूती रहीं।
विजया इग्नोर करती रही,
पर उसके दिल की धड़कन बढ़ रही थी।
फिल्म के क्लाइमेक्स से ठीक पहले —
जब हॉल में अंधेरा था,
जवा ने उसके दायें उभार को जोर से दबोचा।


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विजया झटके से उठी और उसके हाथ पर एक चपत लगाई —
'नॉटी बॉय…
क्या तू अपनी सगी बहन के साथ ऐसा करता है?
बिहेव योरसेल्फ…!'
जवा शर्म से पानी-पानी हो गया —
'सॉरी… सॉरी…'
पर उसके मन में वही शरारत बाकी थी।"

"रात को —


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स्विमिंग पूल के किनारे,
केक सजा था,
और होटल की टीम ने
'हे इज़ अ जॉली गुड फेलो' और 'हैप्पी बर्थडे' गाना शुरू कर दिया।
विजया ने लाल रंग का टाइट सूट पहना था —
जो उसके उभारों और गोलाई को पूरी तरह उभार रहा था,
और डार्क रेड लिपस्टिक ने उसे और हॉट बना दिया था।


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पर जवा केक नहीं काट रहा था —
बस शर्मा रहा था।
विजया समझ गई —
वो उसके पास गई,
चाकू पकड़ाया,
और धीरे से उसके गाल पर एक किस कर दिया —


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लाल लिपस्टिक का निशान उसके गाल पर अंकित हो गया।"

Screenshot-20260823-122732-Chrome

"जवा अंदर तक हिल गया —
उसकी आँखें चमक गईं,
और माँ की नज़रें कुछ कहने को थीं,
पर बाबू अपना तीसरा पेग लगाने में मशगूल थे।
सब हँस पड़े —
और उस रात,
गोवा की ठंडी हवा में,
केक की मिठास और विजया की लिपस्टिक —

दोनों ने जवा के दिल में एक नई आग जला दी…" 😉🔥
 
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Rebel.desi

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"माँ ने दो बार नोटिस किया था —
पहली बार जब पैराग्लाइडिंग के दौरान जवा के बरमूडा में वो उभार साफ दिखा था,
और दूसरी बार आज — जब विजया ने जवा के गाल पर चूमा
और उसकी लिपस्टिक का निशान उसके गाल पर अंकित हो गया।
माँ को समझ आ गया —
ये बचपन का प्यार नहीं, बल्कि जवानी का उभार था।"


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"माँ मनोविज्ञान में स्नातक थीं —
उन्हें सिगमंड फ्रायड का सिद्धांत याद था —
कि इस उम्र में हार्मोनल बदलाव
बच्चों को किसी भी विपरीत लिंग की ओर आकर्षित कर देते हैं,
चाहे वो उनकी बहन हो, माँ हो, या कोई और।
फ्रायड कहते हैं —
'इस उम्र में लड़के अपनी माँ या बहन की ओर आकर्षित हो सकते हैं,
और लड़कियाँ अपने पिता या भाई की ओर।'
यही 'इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स' और 'ओडिपस कॉम्प्लेक्स' है —
जो हर इंसान के अवचेतन में कहीं न कहीं मौजूद होता है।"

"पर माँ ने ये बात अपने पति को नहीं बताई —
क्योंकि वो जानती थीं,
कि कुछ बातें समझने की होती हैं,
बताने की नहीं।
वो सिर्फ नज़रें रखेंगी,
और समय आने पर
बिना शोर मचाए
इस उलझन को सुलझा लेंगी —
अपने तरीके से।"


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"माँ अभी केवल 38 की थीं —
पर उनकी देह अभी भी पूरी जवान थी।
वैवाहिक जीवन की पूरी परिपक्वता,
और 2 बच्चों की माँ होने के बाद भी
उनकी कमर ढीली नहीं थी,
न ही उनके उभार झुके थे।
बल्कि एक नव योवना की तरह खड़े और तने थे ..विजया के उभार उन्ही पे गये थे
गाँव की हर औरत उनसे ईर्ष्या करती थी —
क्योंकि वो 38 में भी 30 की तरह लगती थीं।
पर वो अपनी इस जवानी को
कभी उघाड़कर नहीं रखती थीं —
बल्कि सादगी के पीछे छुपाकर रखती थीं।"

"पर माँ ने सोचा —
'अभी बच्चों से इस बात का ज़िक्र करना ठीक नहीं है…'
क्योंकि वो जानती थीं —
दोनों अपने करियर के क्रूशियल पॉइंट पर थे —
जवा का IIT का रिजल्ट आना था,
और विजया का कॉलेज एडमिशन।
ज़रा सी भी गलत सोच
उनका मन भटका सकती थी,
और उनकी पढ़ाई पर असर डाल सकती थी।"

"और ये भी हो सकता था —
कि ये उनका व्यवहार मात्र हो,
जो हार्मोन्स की वजह से उभरा हो,
और कुछ दिनों बाद
दोनों इसे भूल जाएँ।
माँ ने चुप रहने का फैसला किया —
नज़रें रखने की,
पर ज़बान न हिलाने की —
क्योंकि उन्हें पता था,
कि कुछ बातें खुद ब खुद ठीक हो जाती हैं,
अगर उन्हें समय दिया जाए।" 😔🌿😔🌿
 

Rebel.desi

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"रात हो गई थी —
होटल के कमरे में,
गोवा की ठंडी हवा बालकनी से अंदर आ रही थी।
जवा अंदर आया और फिल्म का गाना गुनगुनाने लगा —
'किसका है ये तुमको इंतज़ार, मैं हूँ ना…'
फिर उसने विजया की ओर इशारा करते हुए कहा —
'देख लो इधर भी एक बार, मैं हूँ ना…'
विजया ने तकिया उठाकर उसकी तरफ फेंका —
'बकवास… सो जाओ…'
दोनों खिलखिलाकर हँस पड़े।"

"रात भर —
हल्की-हल्की छेड़छाड़ चलती रही।
कभी जवा उसके बालों को छेड़ता,
तो कभी विजया उसे पैर मारती।
दोनों के बीच वो पुरानी नोक-झोंक थी,
पर उसमें एक नई गर्मी भी थी —
जो दोनों समझ रहे थे,
पर स्वीकार नहीं कर रहे थे।"

"सुबह के करीब चार बजे —
जवा की नींद खुली।
उसका लंड पूरा तना हुआ था,
और बेचैनी से भरा हुआ था।
वो बाथरूम गया,
ठंडे पानी से चेहरा धोया,
और राहत पाने की कोशिश की —
पर जब वो लौटकर आया,
तो उसकी नज़र विजया पर पड़ी —
जो नींद में करवट बदल रही थी,
उसकी टी-शर्ट थोड़ी ऊपर चढ़ गई थी,
और उसकी गहरी साँसें
जवा के लंड को और बेचैन कर रही थीं।"

" "बाथरूम से लौटकर जवा की नज़र विजया पर पड़ी —
उसकी टी-शर्ट ऊपर चढ़ गई थी,
और उसके उभार हल्की-हल्की साँसों के साथ उठ-गिर रहे थे।
जवा का लंड अभी भी बेचैन था,
और उसका हाथ बिना सोचे
उसके उभारों की तरफ बढ़ गया —
पर जैसे ही उसकी उँगलियाँ उसके गर्म कपड़े को छूने वाली थीं,
वो रुक गया।"

**"क्योंकि उसे एक पल के लिए अपनी सुबह की याद आई —
जब विजया ने उसे चूमा था,
और उसके गाल पर लिपस्टिक का निशान था।
उसे याद आया —
कि ये उसकी सगी बहन है,
जिसे वो बचपन से जानता है,
जिसने हर राखी उसके हाथ बाँधी,
और जिसकी मुस्कान उसके लिए सबसे प्यारी है।"

"तो क्या उसे अभी ऐसा करना सही होगा?
नहीं।
क्योंकि अगर वो नींद में उसके उभारों को छूता,
तो ये ज़बरदस्ती होती —
और जो प्यार से न मिले, वो चूत भले ही मिल जाए,
पर बहना का दिल नहीं मिलता।


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इसलिए जवा ने अपना हाथ वापस खींचा,
और उसके बालों को सहलाते हुए उसको एक प्यारा सा चुम्बन दिया
सोचा —
'जब वो चाहेगी, तब सही होगा…
अभी नहीं…'"

"और वो वापस अपनी जगह आ गया,
पर उसकी आँखें पूरी रात
विजया की तरफ ही रहीं —
प्यास, मर्यादा, और प्यार के बीच
एक अनकही रात।" 😔🌿😉🔥🌿
 

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"गोवा की तीन रातों का सफर खत्म हुआ —
और चारों दतिया अपने घर लौट आए।
आज रिजल्ट का दिन था —
सुबह से ही दोनों लैपटॉप खुले थे,
और साइट बार-बार हैंग हो रही थी।

माँ-बाबू की धड़कनें तेज़ थीं,
और दोनों बच्चों का दिल
जैसे धक-धक कर रहा था —
एक तरफ बाबू और विजया,
तो दूसरी तरफ जवा और माँ।"


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"अचानक —
विजया की स्क्रीन पर नंबर आए —
97.8% !
विजया चीख पड़ी —
और बाबू ने उसे हवा में उठा लिया।
उसी पल, दूसरी स्क्रीन पर
जवा का AIR रैंक आया —
355 — General Category में,
जो बहुत शानदार था —
टॉप IIT पक्का!
माँ ने उसे कसकर गले लगाया,
और बाबू ने दोनों बच्चों को साथ बिठाकर
गले लगा लिया।"

"हगिंग और किसिंग का दौर चल रहा था —


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जवा ने माँ को गाल पर चूमा,और फिर उसके गरदन पर एक गहरा चुम्बन 💋 किया....माँ थोड़ा शर्मा गई पर ख़ुशी का मौहाल था तो किसी ने नोटिस नहीं किया
तो विजया ने बाबू को माथे पर।
पर जब बाबू थोड़ा दूर हुए,
तो माँ की नज़र जवा और विजया पर पड़ी —
जो एक-दूसरे को देख रहे थे,
जैसे वो भी किस करना चाहते हैं,
पर रुके हुए हैं।
माँ ने आँख मारकर
जवा को इशारा किया —


Screenshot-20260823-130327-Pinterest
और जवा ने धीरे से
विजया के गाल पर चूमा —
एक हल्का, गर्म, और अधूरा चूमा।
विजया की आँखें चमक गईं —
और उसने भी उसे गले लगाकर
उसके कान में फुसफुसाया —
'भैया… आप तो हीरो बन गए…'" 😉🔥
 

Rebel.desi

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"जवा के घर तो जैसे बधाइयों का ताँता लग गया —
रिश्तेदार, पड़ोसी, परिचित — सब आने लगे।
और फिर तो मीडिया वाले भी आ गए —
उसके घर के बाहर भीड़ लग गई।
जवा सेलिब्रिटी बन गया था —
हर कोई उसके साथ फोटो खिंचवाना चाहता था,


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और हर कोई उसकी तारीफ कर रहा था।"

"कोचिंग वाले भी आए —
अपने साथ पैसे लेकर,
और बोले —
'बस एक फोटो चाहिए…
दिखाना है कि ये हमारी कोचिंग से पढ़ा है…'
जवा ने मुस्कुराकर
उनके साथ फोटो खिंचवा ली,
पर उसके मन में कुछ और चल रहा था।"

"और फिर कोटा से भी कॉल आया —
कोचिंग वाले चाहते थे —
'आप पूरे परिवार के साथ कोटा आइए…
हम आपका होटल और वापसी का टिकट देंगे…
हमें आपसे बात करनी है…'
माँ-बाबू खुश थे,
पर जवा की नज़रें
विजया पर थीं —
जैसे वो उससे पूछ रहा हो —
'जाएँ?'
और विजया ने हल्की-सी मुस्कान देकर
मानो कहा —
'क्यों नहीं…'"


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"उस रात —
जश्न का माहौल था,
और छेड़-छाड़ भी थी।
विजया जब खाना ला रही थी,
तो जवा ने उसका हाथ पकड़ा —
'विजया… तूने मुझे किस क्यों नहीं किया?'
विजया शरमा गई —
'लोग देख रहे हैं, भैया…'
'तो क्या हुआ?
आज तो मैं हीरो हूँ…'
और विजया ने झटके से
उसके गाल पर एक किस किया,
और भाग गई —
पर उस किस की गर्मी
जवा के पूरे शरीर में फैल गई।"

"इसी तरह —
जश्न, हँसी, मस्ती,
और थोड़ी-सी कामुक चुहल के बीच,
सफलता ने पूरे परिवार को
एक-दूसरे के और करीब ला दिया था।" 😉🔥
 
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