• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest Sagar (Completed)

🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

AaRYaN8380

Kaal
1,204
3,132
143
Nice update
 

Incestlala

Well-Known Member
2,035
3,464
159
जब मैं थाने पहुंचा तब मालूम हुआ कि इंस्पेक्टर कोठारी थोड़ी देर पहले किसी दूसरे केस के सिलसिले में बाहर गया हुआ है और मुझे थाने में ही बैठकर उसका इन्तज़ार करने को कहा है । मैं वहीं कुढ़ता , मन मसोसता उसके कक्ष में उसका इन्तज़ार करने लगा । करीब आधे घंटे बाद वो आया । उसके चेहरे पर थकान की भाव थी । उसकी बातों से पता चला कि उसके कुलभूषण खन्ना के घर के विजिट के दौरान दोनों मियां बीवी अपने घर पर ही मिले । पुछताछ के दौरान अनुष्का ने वारदात वाले दिन जीजू के घर मौजूद होने की बात स्वीकार करी । लेकिन उसने अजय के कत्ल में खुद पर लगे इल्जाम का पुरजोर विरोध किया । उसके जीजू के घर मौजूद होने की वजह जीजू के साथ दोस्ती बताई । कुलभूषण खन्ना ने तो इस पुरे केस से अपनी अनभिज्ञता जाहिर की । वो साफ मुकर गया कि वो किसी अजय या किसी राजीव सोलंकी नाम के शख्स को जानता भी है । हालांकि कत्ल के वक्त वो घर में ही था , इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं पेश कर सका । और सबसे सनसनीखेज खबर ये थी कि उनके पास से एक ३६ केलिवर रिवाल्वर का पाया जाना जो लाइसेंसी थी । रिवाल्वर के खाने में से तीन गोलियां कम थी जिसके बारे में उसने बताया कि शुटिंग प्रेक्टिस के दौरान कहीं गायब हो गई ।

इंस्पेक्टर मेरे उपर काफी भड़का था कि समय रहते मैंने उनके बारे में खबर नहीं की । अगर मैंने समय रहते खबर किया होता और यदि उस रिवाल्वर से गोली चली होती तो रिवाल्वर के अंदर पाये गये बारूद के कण और उसके गन्ध से और अजय के शरीर में धंसे हुए गोली से उसका जांच कराया जा सकता था । मैंने शर्मिंदगी से अपनी गलती कबूल की । मेरे को लास्ट में यह वार्निंग देकर जाने दिया कि अगर मुझे इस केस से सम्बंधित कोई भी जानकारी मिले तो तुरंत उसे ख़बर करे ।

मैं वहां से दिल्ली पैराडाइज क्लब की ओर रवाना हो गया क्योंकि समय भी वहां पहुंचने का हो गया था ।

वहां पहुंचने पर मालूम हुआ कि १ मई होने के कारण आज क्लब बंद है । लेकिन आफिस खुला था । मैं आफिस गया वहां कुलभूषण खन्ना हमेशा की तरह अपने आरामदायक कुर्सी पर बैठा कोई फाइल चेक कर रहा था । मुझे देखते ही उसने अन्दर बुलाया । मैं उसके सामने एक कुर्सी पर बैठ गया ।

" तो आखिर में तुमने पुलिस के सामने अपना मुंह खोल ही दिया ।" - उसने अपने कान की लौ को सहलाते हुए कहा ।

मैं चुपचाप बैठा रहा ।

" क्यों किया ऐसा । मैंने तुम्हें पहले भी कहा था कि मैं अनुष्का से कितना मोहब्बत करता हूं । उसके साथ कुछ बुरा हो ये मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता । मैंने तुम्हें यहां नौकरी दी , तुम्हें इज्जत दी तो बदले में तुमने इस तरह मेरा शुक्रगुजार अदा किया ।" - वो अपने कान की लौ को जोर जोर से खिंचते हुए कठोर स्वर में बोला ।

मैं चुपचाप बैठा रहा ।

" मुझे तुमसे ऐसी आशा नहीं थी । मैं तुम्हें एक अक्लमंद युवक समझता था लेकिन तुम...।"

" खन्ना साहब , मैंने वही किया जो एक आम नागरिक का अपने देश के साथ.... देश के कानून के साथ फर्ज होता है । मैंने वही किया जो एक दोस्त का एक दोस्त के प्रति वफादारी और विश्वास का होता है । और मैं आपसे वादा करता हूं कि ये तब तक करता रहूंगा जब तक मेरे दोस्त के हत्यारे को कानून के गिरफ्त में..कानून के शिकंजे में न ला दूं । और हत्यारा आप की पत्नी क्या अगर मेरा बाप भी होगा तो भी करता रहूंगा ।" - मैंने भी कठोर और स्पष्ट स्वर में कहा ।

वो अपनी छोटी छोटी आंखों से मुझे एक टक देखता रहा ।

मैंने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा -" क्या आप नहीं चाहते कि क़ातिल को उसके किए की सजा मिले...क्या आपको अपने देश के विधि विधान से मतलब नहीं है....भगवान न करे लेकिन यदि आपकी पत्नी अगर क़ातिल निकले तो आपको उसके पहलू में सोने से डर नहीं लगेगा... आप सारी जिंदगी एक क़ातिल के साथ गुजारना पसंद करेंगे । और यही बात आप पर भी लागू होता है । मैं भी कोई पाक पवित्र आदमी नहीं हूं... मैंने भी समाज के नियमों के खिलाफ व्यवहार किया है लेकिन किसी की जान लेना मेरे उसूल के खिलाफ है । यदि कोई गुनाहगार है तो सजा देना परवरदिगार का काम है या फिर कानून का ।"

वो अपने चेयर पर बैठे बैठे कसमसाने लगा । कुछ देर तक चुप रहा फिर अपेक्षाकृत मध्यम स्वर मेंबोला - " लेकिन पुलिस का शक तो मुझ पर भी है ।"

" आपने खुन किया है ?

" नहीं । मैंने आज तक एक मक्खी भी नहीं मारी ।"

" तब आपको चिंता करने की क्या जरूरत है । "

" लेकिन अनुष्का..?"

" आप उनके हसबैंड है.. उनके बारे में आप अन्य बाकी लोगों से ज्यादा बेहतर जानते होंगे.. क्या आप को लगता है कि उन्होंने खून किया हो सकता है ।"

" मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है । मैं उसके बारे में नहीं कह सकता ।"

" आप निश्चित रहिए... अगर वो निर्दोष है तो उन्हें कुछ नहीं होगा । और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी तक अमर का न तो आपसे और न ही आपकी पत्नी से कोई रिश्ता साबित हुआ है । "

वो अब पहले से ज्यादा शान्त लग रहा था । उसने अपने स्टाफ को चाय लाने का आर्डर दिया ।

" खन्ना साहब , अभी थोड़ी देर पहले आप ने कहा कि आपने मुझे यहां नौकरी देकर मुझ पर अहसान किया है । मुझे इज्जत बख्श की है । इसके लिए आपको मैं एक बार से शुक्रिया कहता हूं लेकिन आप बुरा न मानें ये नौकरी मैं पार्ट टाइम कर रहा हूं....और वो भी किसी सिफारिश पर नहीं बल्कि मेरी काबिलियत के बल पर मिली है... जितनी आमद यहां होती है उन से मेरी गृहस्थी नहीं चल सकती..हो सकता है कि अगले छः महीने के अंदर मेरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई काम आ जाए और फिर मैं यहां न होऊं... और जहां तक इज्जत की बात है तो इज्जत फोकट में नहीं मिलती है बल्कि कमाइ जाती है... और इसका सबूत मेरे क्लास के यंग लड़के लड़कियां देंगे जिनसे मेरे बारे में आपने काफी छानबीन की है ।

वो हक्का बक्का मुझे देखता रहा । उसने कुर्सी से उठने की कोशिश की तो अपने मोटे विशाल कमर के कारण कुर्सी कमर से फंसाए खड़ा हो गया । उसने हाथों से कुर्सी को झटक कर अपने कमर से निकाला ।

" नहीं नहीं भई..मेरा इरादा तुम्हरा अपमान करने का नहीं था । आज घर में पुलिस आने के कारण मैं थोड़ा असहज महसूस कर रहा था । यदि मेरी बातों से तुम्हें दुःख पहुंचा हो तो मुझे क्षमा करना ।" - वो बनावटी हंसी करते हुए बोला ।

तभी स्टाफ चाय ले आया । उसके जाने के बाद हम चाय पीने लगे । चाय पीने के बाद मैंने अपना फेवरेट क्लासिक निकाल कर उसे दिया तो उसने सहर्श एक सिगरेट निकाल लिया । मैंने भी अपनी सिगरेट सुलगाई ।

" आज पहली मई के कारण यहां छुट्टी है इसलिए कोई भी नहीं आया है लेकिन मुझे कुछ अर्जेंट काम के लिए आना पड़ा । लेकिन तुम आज क्यों आ गये ?" - वो वापस कुर्सी पर बैठ गया ।

" मुझे नहीं मालूम था कि आज छूट्टी है " - मैं कुर्सी से उठता हुआ बोला -"अच्छा खन्ना साहब अब मुझे इजाजत दीजिए ।"

" सुनो , तुम्हारी सेलरी बैंक एकाउंट में भेज दी गई है । चेक कर लेना ।"

" लेकिन अभी तो मेरा महिना पुरा नही हुआ है ।" - मैं आश्चर्य करता हुआ बोला ।

" यहां सभी की सेलरी महिने की पहली तारीख को दे दी जाती है । और तुम्हारी ज्वाइनिंग पहली तारीख से ही शुरू कर दी गई है ।"

" शुक्रिया खन्ना साहब ।"

मैंने उसको नमस्कार किया और वहां से निकल गया । घर जाते समय याद आया कि मैंने माॅम को नाइटी लाने के लिए बोला था तो मैं ए.टी.एम. जा कर पैसा उठाया फिर माॅल चला गया और उनके लिए दो सुती के फुल एड़ियों तक आने वाली नाइटी खरीद लिया । फिर कुछ सोचकर श्वेता दी के लिए भी दो नाइटी खरीद लिया । मगर श्वेता दी वाली नाइटी काफी हाॅट थी । एक तो घुटने तक की थी जो सेमी ट्रांसपेरेंट थी और दूसरी बेबीडॉल नाइटी थी जो जांघ तक ही आती थी और काफी ज्यादा ट्रांसपेरेंट थी । इसकी स्ट्रीप बहुत पतली थी । यदि कोई युवती इसे पहन ले तो उसकी अस्सी प्रतिशत छाती न्यूड हो जानी थी और जांघों से नीचे का हिस्सा न्यूड था ही ।

मैं वहां से घर निकल ही रहा था कि रीतु का फोन आया । उसने बताया संजय जी उर्वशी और अपनी बहन मधुमिता के साथ घर आए हुए हैं । मैं हैरान हुआ न कोई फोन न कोई मैसेज... मैंने एक होटल से कुछ मिठाई , समोसा , भुजिया और कोल्ड ड्रिंक लिया फिर घर की ओर निकल गया ।

शाम के सात बजे थे जब मैं घर पहुंचा । सभी लोग हाॅल में ही बैठे मिले । बड़े वाले सोफे पर डैड , संजय जी और मधुमिता बैठे हुए थे जबकि उर्वशी दी और माॅम सिंगल सोफे पर बैठे हुए थे । रीतु एक अलग कुर्सी पर बैठी थी । मैंने होटल से लाई हुई सारी चीजें माॅम को दे दी । माॅम उसे लेकर किचन चली गई । फिर मैंने संजय जी को प्रणाम किया तो वो सोफे से उठ कर मुझ से गले मिले । फिर मैंने उर्वशी और मधुमिता को हग किया और दो मिनट में आने को बोलकर अपने रूम में चला गया । वहां मैंने खरीदी हुई नाइटी मेरे बिस्तर के बगल में रखी कुर्सी पर रख दी फिर हाथ मुंह धोकर निचे हाॅल चला आया ।
Superb update
 
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

DarkKnightKing

You didn't come this far to only come this far.
2,217
2,395
158
Page 10 tak parh liya. It's good ke aap ne start mein plot ko importance di hai na ke sex ko.
Hindi read karne mein problem hoti hai mujhe par phir bhi maza aaya...
Abhi k liye itna hi parhunga.. Excess of everything is bad! :D
 
Last edited:

Tony stark

Active Member
963
4,465
123
घर पहुंचते पहुंचते 6.30 बज गए थे । राह भर मुझे अमर के साथ बिताए गए पुराने पल याद आ रहे थे । वो एक हंसमुख और जिंदादिल इंसान था । उसकी किसी से कोई खास अदावत भी नहीं थी । उसके पिता किसी सरकारी विभाग में कार्यरत थे और उसी दौरान उनकी मौत भी हो गयी थी । अमर का अपने मां के अलावा कोई भी नहीं था । उनका गुज़ारा पेंशन के पैसों से ही होता था । पेंशन की राशि अच्छी खासी थी ।

आखिर अमर यहां क्या कर रहा था । वो यहां गाजियाबाद में और उस पर भी जीजा के यहां । उसने ऐसा क्या किया होगा कि किसी ने उसकी कत्ल ही कर दी ।

और पुलिस वहां कैसे पहुंच गयी । पुलिस को कैसे पता चला कि वहां किसी का कत्ल हुआ है ।

जीजा का भी हाव भाव कुछ अलग ही था । कहीं जीजा ने ही तो कत्ल नहीं किया । लेकिन क्यों ? सारे सामान बिखरे हुए क्यों थे । और सबसे बड़ी बात वो कटे बालों वाली लड़की कौन थी । वो लड़की जीजा के फ्लेट में आई कैसे । और अगर आई भी तो क्यों आईं । क्या चोरी के इरादे से आई थी और शायद उसे अमर ने चोरी करते हुए पकड़ा होगा और लड़की ने उसे शुट कर दिया हो ।

लेकिन लाख का सवाल ये था कि अमर यहां आया क्यों ।

घर पहुंचने के बाद माॅम डैड और रीतु को ड्राइंगरुम में बैठा पाया । उन्हें इंस्पेक्टर कोठारी के द्वारा फोन पर पुछताछ के दौरान ही सारी बातें पता चल चुकी थी ।

मैंने वहां हुए सारे वारदात को संक्षिप्त में बताया और श्वेता दी का सामान देने उनके घर गया । वहां चाचा चाची श्वेता दी और राहुल सभी थे । उनके पुछने पर फिर से वही बातें दुहराया ।

श्वेता दी ने मुझे अपने सहेली के शादी में चलने को कहा तो मैंने इनकार कर दिया । मेरा खराब मुड देखकर उन्होंने भी जोर नहीं दिया ।

वहां से मैं अमर के घर चला गया । अमर का घर हमारे यहां से आधे घंटे की दूरी पर था । जब उसके घर पहुंचा तब कुछ पड़ोसी औरतें अमर की मां के पास बैठी हुई थी । वहां का माहौल काफी गमगीन था । शायद पुलिस ने खबर कर दी थी ।

मैं अमर की मां के पास पहुंचा तो उनकी नजर मुझ पर पड़ी । वो लगभग 55 साल की दुबली पतली महिला थी । उनका पूरा चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था । मैंने उन्हें अपने गले से लगाया तो वो फफक कर रो पड़ी । मेरी आंखें भी छलक पड़ी । बहुत देर तक हम ऐसे ही रोते रहे ।

" ब.. बेटा अमर ।" उन्होंने रोते हुए कुछ कहने की कोशिश की तो मैंने बीच में ही उन्हें अपने बाजुओं से कसते हुए भर्राये हुए स्वर में बोला ।

" कुछ मत बोलो मां । अमर का इतना ही समय तक हमारा साथ था । भगवान ने उसे अपने मे समाहित कर लिया । मौत पर किसी का भी वश नहीं चलता । अब से मैं ही तेरा अमर हूं । मैं ही तेरा बेटा हूं । आज से तु मेरे साथ मेरे घर पर रहेगी । आखिरी सांसों तक मैं तेरी सेवा करूंगा ।"

वो फुट फुट कर रोये जा रही थी । मैं उसे दिलासा देते रहा । थोड़ी देर बाद मैंने कहा ।

" चल मां । चल मेरे साथ ।"

मेरे कन्धों से सिर उठाकर मुझे देखा और सिसकियां लेते हुए बोली ।

" बेटा मैं जीना नहीं चाहती । काश ! भगवान अमर की जगह मुझे बुला लेता । म.. मैं मरना चाहती हूं बेटा ।" कहकर जोर जोर से रोने लगी ।

" नहीं मां । ऐसा मत बोल । क्या मैं तुम्हारा बेटा नहीं । तुम तो जानती हो अमर मेरा दोस्त कम भाई ज्यादा था । आप ही तो कहती थी मैं तुम्हारा दुसरा बेटा हूं । और अभी तो अमर के क़ातिल को सजा दिलवाना है । चल उठ । मेरे साथ चल ।"

काफी देर तक रोती रही । फिर अपने आंसुओं को पोछते हुए कही ।

" नहीं बेटा । ये घर छोड़ कर मैं कहीं नहीं जाउंगी । इस घर से अमर और उसके पिता की यादें जुड़ी हुई है । अब यही मैं अपनी बाकी बची खुची जिन्दगी भी काट लुंगी । जा । तु घर जा । कल अमर की दाह संस्कार भी करनी है ।"

थोड़ी देर बाद उनको गले लगा कर मैं वहां से भारी मन बिदा हो गया । घर आया किसी ने भी खाना नहीं खाया था । उस दिन मेरे घर खाना ही नहीं बना । सभी थोड़ी थोड़ी जुस पी कर अपने अपने कमरों में चले गए ।

नींद आ नहीं रही थी । दिन भर की घटनाक्रम के बारे में सोचता रहा । करवट बदलते बदलते कब सोया, याद नहीं ।

*****

3


सुबह जब मैं ड्राइंगरुम में पहुंचा तब माॅम breakfast की तैयारी कर रही थी । डैड टीबी के पास बैठे खबर देख रहे थे । रीतु आज सुबह ही कालेज चली गई थी ।

मैंने डैड को गुड मार्निंग वीश किया । माॅम को हग किया और डैड के बगल सोफे पर बैठ गया । कुछ औपचारिक बातें के दरमियान नाश्ता किया फिर मैं अपने बाइक से पुलिस चौकी चला गया ।

इंस्पेक्टर कोठारी वहां नहीं था । वहां अपनी हाजिरी दे और उनके बुलाये हुए स्कैच मैन की सहायता से कटे बालों वाली लड़की का स्कैच बनवा कर अजय के घर चला गया । रास्ते में मोबाइल रिचार्ज कराया । फिर पैराडाइज क्लब के मैनेजर को फोन कर के बताया कि मैं अगले दिन join करुंगा ।

पोस्टमार्टम के बाद डेड बॉडी शाम को चार बजे मिली । अन्तिम संस्कार करते करते आठ बज गए । फिर वापस घर आ गया ।

आज का दिन भी काफी भाग दौड़ करके बीता था इसलिए डीनर के पश्चात मैं जल्दी सो गया ।

अगले दिन सुबह उठकर फ्रेश होकर थोड़ा work out किया और ड्राइंगरुम में जा कर बैठ गया । पुलिस थाने की हाजिरी की । आज इंस्पेक्टर कोठारी मौजूद था । मेरे पुछने पर उसने बताया कि उन्हें कत्ल की सुचना किसी गुमनाम शहरी ने थाने के लैंड लाइन फोन पर दी थी । नम्बर ट्रैश करने पर मालूम हुआ कि वो एक PCO का नम्बर है जो तुम्हारे जीजा के घर से थोड़ी दूर पर है । फोन किस व्यक्ति ने किया ये PCO. वाला नहीं बता पाया ।

थोड़ी देर बाद मैं वहां से अमर के मां के पास चला गया । थोड़ी देर रुक कर मैं वहां से निकल गया ।

शाम को पांच बजे कनाटप्लेस पैराडाइज क्लब पहुंचा और मैनेजर से मिला । मैनेजर का नाम कुलभूषण खन्ना था । वो एक पचपन साल का गंजे सिर वाला भीमकाय व्यक्ति था । उसके आंख काफी छोटे-छोटे थे । उसकी एक आदत थी कि वह जब बोलता था तो अपनी कनपटी को सहलाने लगता था ।

उससे कुछ देर तक formal बातों के उपरांत मैं कराटे वाले कक्ष में गया । वहां कुछ तीस बत्तीस लड़के लड़कियां थी । लड़कियों की संख्या ज्यादा थी । आज देश में जिस तरह की हालात हैं उस लिहाज से तो लड़कियों को self protection बहुत ही जरूरी बनती है ।

वहां जितने भी student दिखे सभी हाई फाई फेमिली से belong लगते दिखे । और हो भी क्यों नहीं । क्लब जो काफी महंगा था ।

वहां मैंने दो घंटे ट्रेनिंग दी । फिर मैनेजर को अभिवादन कर घर चला आया ।

हफ्ते दस दिन तक यही रूटिन रहा । धीरे धीरे अमर के मौत का गम भी कुछ हल्का हुआ । दोनों टाईम आन्टी ( अमर की मां ) के पास जाता और उनकी ज़रुरी के कामों में मदद करता ।

पुलिस ने भी मेरे और जीजा को clean chit दे दिया । उनके पास हमारे खिलाफ न कोई सबूत था और ना कोई गवाह । जिस रिवाल्वर से मौत हुई थी वो भी बरामद नहीं हो पाई थी । हमारे पास मर्डर करने का कोई सटीक कारण भी नहीं था । और वो कटे बालों वाली लड़की भी गायब थी ।

लेकिन मैं एक आस में था कि क़ातिल को मैं ढुंढ निकालूंगा और उसके किये की सजा अवश्य दूंगा ।

रात के खाने के बाद मैं अपने कमरे में गया । नाइट ड्रेस पहनी और बिस्तर पर लेट गया । ये दस बारह दिन मेरे लिए काफी भारी पड़े थे । मन को divert करने के लिए सोचा क्यों न आज अपनी favourite books पढ़ी जाय । मैं उठा और आलमारी से incest कहानियों का बैग ले बिस्तर पर लेट गया ।

तभी मुझे ध्यान आया कि इस मे से कुछ दिन पहले एक किताब गायब थी । मैंने सारी किताबें चेक की । गायब वाली किताब इन किताबों के बीच मोजूद थी । मतलब जिसने भी ये किताब ली थी उसने पढ़ कर वापस रख दी थी ।

लेकिन इस बार एक दुसरी किताब गायब थी ।
KAHANI KI SURUWAT BAHOT HI ACHHI RAHI, MAINE ABHI PADHNA SURU KIYA HAI, DEKHTE HAIN AAGE KYA HOTA HAI

BAS EK CHHOTA SA SAWAL, AGAR UCHIT LAGE TO JAWAB DIJIYEGA

SWETA KE APNE GHAR ME EK KATLA HO GAYA, USKA PATI AUR BHAI SANDEH KE GHERE ME AA GAYE HAIN PHIR BHI WO APNI SAHELI KI SHADI ME CHALI GAI, JAISE USE KUCH FARK HI NAHI PADA

AISA KYUN ????
 
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories
Top