Story character
“गुरूदेव.. ये चंडूलिका कौन है?”
प्रश्न सुनते ही गोपू भी बाबा के सामने चांदू के पास आ कर बैठ गया.
दोनों का कौतुक देख बाबा मुस्कराए.
बोले,
“बहुत शक्तिशाली होती है ये चंडूलिका.. इनसे पार पाना हर किसी के बस की बात नहीं. इनसे या तो बहुत ही उच्च कोटि का सिद्ध पुरुष या सिद्ध साधक ही जीत सकता है या फिर ईश्वर का कोई विशेष कृपा प्राप्त व्यक्ति.”
“ओह.. ऐसा?! ये तो इसी से पता चलता है कि ये कितनी खतरनाक है.”
“ह्म्म्म.”
“पर गुरूदेव... ये आखिर है कौन?”
बाबा मुस्कराए.. पर स्वेच्छा से नहीं... ये इस बात का संकेत था कि अब बाबा जो बोलने जा रहे हैं वो अप्रत्याशित होगा. क्षणमात्र में उनका चेहरा पहले से भी अधिक गम्भीर हो गया.
गम्भीर आवाज़ में ही बोले,
“रानी चुड़ैल!”
सुनते ही दोनों शिष्य अपने स्थान पर बैठे बैठे ही उछल पड़े.