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Incest कैसे कैसे परिवार

prkin

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prkin

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आपकी लेखनी में ना जाने क्यों मुझे Smoothdad की झलक नज़र आ रही है, उन्होंने "ससुर कमीना, बहु नगीना" लिखी थी।
गॉसिप बंद होने के बाद वो हमसे बिछड़ गए और उनकी कहानी अधूरी रह गयी !

वैसे कामोत्तेजना और भावनाओं के भवर में फंसे किरदार एक अलग ही छाप छोड़ जाते है, फिर आपकी अद्भुत लेखनी के कारण पता ही नहीं चलता की अपडेट कब समाप्त हो गया।
अगली कड़ी की प्रतीक्षा में . . . . .
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prkin

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Aisi kahaani ko first page par hona chahiye, Waah shabd nahi hai mere paas aapki writing skills + emotions ke liye,
I will wait for next update .....
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prkin

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कैसे कैसे परिवार की कहानी आगे बढ़ाएं धन्यवाद
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prkin

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मुझे तो दोनों कहानियां अच्छी लग रही हैं, और चाहता हूँ कोई कहानी पूरी न हो बस आप लिखते रहो, हम पढ़ते रहें.... जब तक है जां.. 🙂
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prkin

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Lib am

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आठवाँ घर: स्मिता और विक्रम शेट्टी
अध्याय ८.३.७


अब तक:

महक आज अपनी भावी ससुराल में रुकी थी और उसे अपने भावी सास और ससुर से समागम करने का प्रथम अवसर प्राप्त होने जा रहा था. श्रेया और मोहन इस समय श्रेया के घर पर थे जहाँ सामूहिक पारिवारिक चुदाई की योजना थी. मेहुल नूतन के पास था और उसकी एक बार चुदाई कर चुका था, परन्तु अब नूतन की गांड मारने के लिए उत्सुक था. स्मिता और विक्रम कई दिन बाद अकेले घर में थे और इसका वो सम्पूर्ण लाभ उठाना चाहते थे.
“देखो, मुझे तो मोहन से ही पहले चुदवाने की इच्छा है. तुम सब अपना देख लो. जब मोहन और मेरा हो जायेगा तब आगे अन्य मिश्रण देखेंगे.”
“मुझे श्रेया दीदी…” विवेक ने कहा.
“चलो स्नेहा, अब मेरी लाड़ली ही मेरा प्यार पायेगी.” अविरल ने स्नेहा को बाँहों में भरते हुए कहा.

अब आगे:
************
सुजाता का घर:

सुजाता ने अपने दामाद मोहन को चुना और अन्य को अपना साथी चुनने के लिए छोड़ दिया. विवेक ने फटाफट अपनी इच्छा श्रेया के लिए दिखा दी और अविरल को स्नेहा का साथ मिला. परन्तु ये भी तय हुआ कि इसके बाद जिसे भी जिसके साथ मन करे वो चुदाई कर सकता है. सुजाता ने मोहन को आगे बढ़कर हाथ में हाथ दिया. अनजाने ही उसका ध्यान मोहन के लंड पर गया. अब मोहन किसी भी रूप से कम नहीं था पर न जाने क्योंकर सुजाता ने उसकी तुलना मेहुल से कर ही ली. उसकी आँखों ने श्रेया को देखा जो उसे ही देख रही थी. माँ बेटी में एक मूक सहमति बनी. श्रेया भी जानती थी कि मेहुल के लंड का आकार उन सबसे बड़ा तो है ही, उसकी चुदाई करने की क्षमता भी अधिक है. श्रेया ने सिर हिलाकर अपनी माँ को समझाया कि वो इस तुलना में न पड़े.
सुजाता ने अपना चेहरा मोहन के सीने में छुपा लिया, वो संयत होने के बाद ही उससे आँख मिलाने वाली थी. मोहन के कोमल स्पर्श ने उसकी पीठ को सहलाया तो सुजाता को इस बात का आभास हुआ कि जो भी है, सम्भवतः उसकी बेटी को श्रेष्ठतर भाई ही मिला है. मोहन मन से बहुत ही सरल और सुशील था. उसने अपने सिर को ऊपर उठाया तो मोहन ने उसका माथा चूमा और फिर होंठों से होंठ मिला दिए. एक गहरे चुंबन में सास और दामाद डूब गए.

श्रेया और विवेक भी एक दूसरे के आलिंगन में चुंबनरत थे. दोनों कई दिन बाद जो मिले थे. वैसे स्नेहा श्रेया के घर चली जाती थी, पर परिवार के अन्य लोग इतना नहीं जाते थे. श्रेया का भी आना कुछ समय से कम हो गया था और इसी कारण भाई बहन का प्रेम उफान पर था.
“कोई लड़की मिली भाई आपको मेरी भाभी के लिए?” श्रेया ने पूछा.
“कहाँ दीदी, आप तो जानती ही हो. समुदाय में जब तक किसी लड़की की माँ की ओर से बात नहीं बढ़ेगी, तब तक अपना सिग्नल डाउन ही रहेगा.” विवेक ने कुछ असंतोष से कहा.
“अगले कुछ महीनों में इस समस्या का भी समाधान होने वाला है. तुम्हें पता है न कि इस बार के चुनाव में मम्मी और मेरी सासू माँ दोनों के नाम प्रस्तावित किये गए हैं. सासू माँ ने तो आवेदन डाला है, मम्मी ने कुछ किया क्या?”
“कह तो रही थीं, पापा से बात हुई थी हो सकता है डाला हो. वैसे दोनों में से एक को तो हटना होगा. दोनों तो नहीं चुनी जा सकतीं.”
“हाँ, पर मैं चाहूंगी कि मम्मी बनें, सासू माँ को मैं मना लूँगी हटने के लिए. और वैसे तुम्हारा सिग्नल डाउन नहीं बल्कि अप ही लग रहा है मुझे तो.” श्रेया ने विवेक के लंड को हाथ में लेकर सहलाते हुए कहा.
“वो आपके लिए ही है. नहीं तो..”
“छोड़ ये सब. आज बस प्रेम की बात कर.” ये कहकर दोनों के होंठ फिर जुड़ गए.
स्नेहा के साथ अविरल अब तक इन सब से आगे निकल चुका था. वो स्नेहा को लिटाकर उसकी चूत चाटने में व्यस्त था. स्नेहा की चूत के आसपास के हर भाग को चाटने के बाद अब वो उसकी चूत के अंदर का रस ले रहा था. स्नेहा भी अपने पिता के इस अद्भुत और अपार प्रेम से विव्हल उनका सिर हल्के से पकड़े हुए उन्हें उत्साहित कर रही थी. उसकी हल्की सिसकारियां अविरल को भी उत्साहित कर रही थीं और वो भी अपनी पूरी जीभ को अंदर डालने का भरसक प्रयत्न कर रहा था. इस चूत के रस से उसका कभी मन नहीं भरता था.
हाँ जब स्नेहा का विवाह हो जायेगा, तब न जाने अविरल क्या करेगा. एक बात थी कि स्नेहा रहेगी इसी नगर में तो इतनी दूरी नहीं होगी. पर फिर भी अब जैसी बात भी नहीं रहेगी. सुजाता कुछ दिन से समुदाय में उसके विवाह का प्रस्ताव देने के लिए उत्सुक थी. पर अविरल चाहता था कि उसके ब्यूटी पार्लर का काम और सुचारु रूप से चल निकले तभी इस ओर विचार किया जाये.

स्मिता का घर:

स्मिता और विक्रम दोनों स्नान करने के लिए और वहां भी दोनों की अठखेलियाँ रुकी नहीं. एक दूसरे को छेड़ते हुए, गुदगुदाते हुए, सहलाते हुए, चूमते हुए दोनों लम्बे समय तक पानी की बौछार से भीगते रहे. नहाना तो एक बहाना मात्र था, उन्हें एक दूसरे का सानिध्य इतना प्रसन्न कर रहा था कि वे एक दूसरे से एक पल भी दूर नहीं रहना चाह रहे थे. कल समीकरण फिर बदल जायेंगे, और आज ही उनका था और इसका वो सम्पूर्ण लाभ उठाना चाह रहे थे. स्नान होते होते दोनों के शरीर कामाग्नि से जल रहे थे. पानी की शीतलता भी उनकी इस अग्नि को शांत करने में असमर्थ थी. दोनों ने बिना अपने शरीर को पोंछे हुए ही कमरे में प्रवेश किया. पानी चू कर नीचे गिर रहा था पर उन्हें इसका भान भी न था. वे केवल एक दूसरे में ही खोये हुए थे.
बिस्तर पर स्मिता को बैठाकर विक्रम उसके साथ बैठा और फिर चुंबनों का आदान प्रदान आरम्भ हो गया. परन्तु इस बार इसके साथ ही उनके हाथ एक दूसरे के शरीर पर भी रेंग रहे थे. पर वे और कितनी देर तक संयम रखते. विक्रम ने धीरे से स्मिता को बिस्तर पर सीधा लिटाया और फिर उसके साथ लेटे हुए उसे चूमता रहा. फिर वो उठा और उसने स्मिता की याचना भरी आँखों में झाँका और उसके पैरों के बिच में आकर उन्हें फैलाया और चूत में दो उँगलियाँ डालकर उन्हें अंदर बाहर करने लगा. स्मिता ने एक झुरझुरी ली और ऐसा प्रतीत हुआ मानो वो झड़ गई हो. पर विक्रम बिना रुके अपनी अपनी उँगलियों से उसकी चूत से खेलता रहा और स्मिता की आँखों में झांकता रहा.
उसने अपनी जीभ से स्मिता के भग्नाशे को छेड़ा और इस बार स्मिता का शरीर ऐंठ गया और रस की एक फुहार छूट गई. इसके बाद विक्रम ने अपनी उँगलियों निकालीं और अपनी जीभ से स्मिता के चूत के आसपास चाटते हुए उसकी चूत की पंखुड़ियों को भी चाटा। भगनाशे पर अधिक ध्यान रखते हुए वो केवल जीभ मात्र से स्मिता के साथ खेल रहा था. स्मिता की सिसकारियां और हाथों के सिर पर दबाव से विक्रम को समझ आ रहा था कि स्मिता भी पूरा आनंद ले रही है.

नूतन और मेहुल:

अब मेहुल उस समय की प्रतीक्षा करते हुए अपनी ड्रिंक पीने लगा जब नूतन उसे अपनी गांड मारने के लिए हरी झंडी दिखाएगी. तभी उसके मन में एक विचार आया कि इस समय का वो सदुपयोग कर सकता है, शोनाली के परिवार और क्लब के बारे में जानने के लिए. एक हाथ से नूतन के मम्मे को सहलाते हुए उसने ड्रिंक को एक ओर रखा और दूसरे मम्मे को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा. नूतन भी इस रंग में रंग गई और उसने भी अपना ग्लास एक और रख दिया.
जहाँ एक ओर मेहुल क्लब के बारे में जानने के लिए उत्सुक था, वहीँ दूसरी ओर मेहुल के बाहर जाने के समय नूतन ने शोनाली से बात की थी. शोनाली ने उसे क्लब के बारे में अधिक से अधिक जानकारी देने के लिए कहा. विशेषकर कुछ सदस्यों के बारे में. नूतन को ये समझने में देर न लगी कि शोनाली ये जानना चाहती है कि क्या मेहुल इस प्रकार के संबंधों से हतोत्साहित या विचलित होता है, या उत्तेजित अथवा सामान्य रहता है. मेहुल ये नहीं जानता था कि उसके पीछे ये बात हो चुकी है. वो स्वयं क्लब के बारे में जानने के लिए उत्सुक था, और शोनाली के बारे में भी.
“क्लब के बारे में कुछ और बताइये न? मेरी उत्सुकता बहुत बढ़ गई है?” मेहुल ने पूछा तो नूतन को पंछी जाल में फंसता हुआ प्रतीत हुआ.
“बहुत कुछ है. हर सदस्या के अपने स्वाद हैं. हालाँकि कुछ एक अनुपात में सीधी भी हैं. परन्तु क्लब की कुछ पार्टियों के बाद वे भी अपने नए अनुभवों के आधार पर नए स्वाद ढूंढ़ लेती हैं. इस माह की पार्टी में तुम्हें ये पता चल ही जायेगा. वैसे हर पार्टी की एक थीम होती है.”
मेहुल बड़े ध्यान से सुन भी रहा था और नूतन के मम्मों से भी खेल रहा था. नूतन को शोनाली की बात याद थी. उसने पहले उसी दिशा में बात करने की ठानी. उसके बाद वो अधिक विकृत कृत्यों पर प्रकाश डालेगी.
मेहुल, “तो इस बार की पार्टी की थीम क्या है?”
नूतन ने मेहुल के होंठ चूमे, “परिवार.”
मेहुल चौंका फिर उसने भी नूतन के होंठ चूमे. “ये कैसी थीम है?”
“थीम के आधार पर एक शो होता है. तुमने अभी क्लब का हॉल नहीं देखा है जहाँ पार्टियां होती हैं. वहाँ इस प्रयोजन के हेतु एक मंच है. क्लब में कुछ सदस्याएं और रोमियो एक ही परिवार से हैं. वैसे तुम पार्थ और शोनाली के बारे में जान ही चुके हो. शोनाली पार्थ की बुआ है. सचिन जिसने तुम्हें परिचित कराया है, उसकी माँ रमोना भी क्लब की सदस्या है. एक नानी नाती की जोड़ी है, हालाँकि नानी अभी बाहर जाने वाली हैं तो इस पार्टी में नहीं आएंगी. शोनाली के ही मोहल्ले में रहती हैं वो.”
“कुछ सदस्याओं ने अपने विस्तृत परिवार के लड़कों को रोमियो बनवाया है. मामी, चाची, बुआ, मौसी इत्यादि ने रोमियो बनवाये हैं. दूसरी और यही कार्य कुछ रोमियो ने भी किया है. हालाँकि ये कम है क्योंकि क्लब की फीस सबके सामर्थ्य की नहीं है. इसमें गोपनीयता भी नितांत आवश्यक है.”
मेहुल सुन रहा था और नूतन उसके चेहरे के भाव पढ़ रही थी. मेहुल के आरम्भिक आश्चर्य के बाद उसने कोई विरोधी भाव नहीं दर्शाया तो नूतन को शोनाली के लिए एक समाचार मिल गया. मेहुल भी समझ गया था कि नूतन उसे देख रही है तो उसने अपनी भावनाओं को छुपा लिया. पर शोनाली के मोहल्ले की नानी से उसका ध्यान अन्य सात घरों पर गया. उसे ये समझ आ गया कि इसका भेद अगली पार्टी में अवश्य खुल जायेगा. नानी न भी आये पर नाती तो आएगा ही.
“तो इस प्रकार के छह जोड़े इस बार अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे और फिर पार्टी आरम्भ हो जाएगी.”
“और अगर आप बता सकें तो कुछ बताएंगी कि किस महिला को क्या रास आता है जिससे कि मैं उनके सुख के लिए सही रास्ता अपनाऊँ।” मेहुल ने घुमाकर बोला पर नूतन समझ गई कि अब उसे मेहुल को उन विकृत कृत्यों से परिचित करवाने का उपयुक्त समय है.
“हम्म. वैसे कुछ महिलाएं कभी कभी क्लब न जाकर मेरे या मंजुला के घर आना रुचिकर समझती हैं. इसका कारण होता है कि रोमियो और प्रबंधकों के सिवाय कोई और पुरुष या स्त्री का क्लब में प्रवेश वर्जित है. इसी कारण वे हम दोनों में से किसी एक के घर का उपयोग करती हैं. उनके द्वारा इसके लिए विशेष परोजन किया जाता है, और उनके द्वारा चुने हुए रोमियो भी उनकी सेवा के लिए आते हैं.”
मेहुल कुछ कुछ समझ रहा था. उसे अपनी प्रिंसिपल मैडम के घर की सच्चाई जो पता थी. फिर भी उसने आगे कुरेदना चाहा और नूतन ने उसका हाथ पकड़ा.
“चलो, मैं तुम्हें वो कमरा दिखती हूँ जहाँ उन की सेवा की जाती है.”
नूतन मेहुल को अगले कमरे में ले गई जो उसके शयनकक्ष से बड़ा था. इसका पूरा व्यय क्लब ने ही दिया है. कमरे में एक बड़ी सी अलमारी थी, एक बड़ा विशाल बिस्तर, चार एक सीट के सोफे भी रखे हुए थे. कमरे को देखकर मेहुल को ये भी समझ आ गया कि इसमें वीडियो रिकॉर्ड करने का भी प्रावधान होगा, पर उसने कुछ कहा नहीं. कमरे के साथ एक स्नानघर भी था. एक और अलमारी भी थी. नूतन ने अब तक कुछ नहीं कहा था.
“इसका उपयोग कब होता है? मुझे इसका कोई आशय नहीं दिखता।” मेहुल ने कहा.
नूतन ने उसे एक सोफे पर बैठाया और बड़ी अलमारी खोली. उसमे अनेकानेक प्रकार के सेक्स से संबंधित खिलौने थे. उन्हें बहुत व्यवस्थित रूप से रखा गया था. पर मेहुल ने एक ऐसा उपकरण देखा जिससे उसे इस कमरे का प्रयोजन समझ में आ गया. हुक में कुछ पिंजड़े रूपी यंत्र थे, जो पुरुष के लिंग के रूप के थे. अर्थात इनका प्रयोग किसी पुरुष के लंड को बंदी बनाने के लिए होता था. पाँच या छह विभिन्न आकार के पिंजड़े थे. नूतन ने अब तक उसकी ओर देखा नहीं था. इसी के साथ उसमे बड़े आकार के दो-मुंहे नकली लंड भी रखे हुए थे. वो उस अलमारी को दिखाकर कुछ समझाने वाली नहीं थी. उसे आशा थी कि मेहुल स्वयं इनका उपयोग समझे. और पूछने पर ही वो उत्तर देगी.
“मुझे कुछ कुछ समझ आ रहा है. कुछ सदस्याएं लेस्बियन संबंध भी रखती हैं परन्तु दूसरी महिला क्लब की सदस्या नहीं हैं. इसीलिए यहाँ आती हैं. उन्हें क्लब के रोमियो भी प्राप्त हो जाते हैं और लेस्बियन सुख भी.”
“सही समझे हो. और कुछ?”
“जो पिंजड़े हैं उनका प्रयोग सम्भवतः उन सदस्यों के पति या अन्य व्यक्ति द्वारा किया जाता है. हमारे रोमियो से चुदवाती हैं और उन्हें इनमे बंद करके उन्हें प्रताड़ित करती हैं. पर कोई भी पुरुष ऐसे व्यवहार को कैसे सहन करता है?”
“मनुष्य की मानसिक विकृतियों को समझना आज तक सम्भव नहीं हो पाया है. हमारे क्लब में ऐसी दो सदस्याएं हैं, एक के पति बहुत आयु प्राप्त कर चुके हैं और अब उन्हें केवल अपनी पत्नी, जो उनसे अधिक छोटी नहीं हैं, को जवान लड़कों से चुदवाते हुए देखकर ही आनंद आता है. वो पिंजड़ा नहीं पहनते, क्योंकि उनका लंड कुछ ही देर में स्खलित हो जाता है. पर दूसरी के पति मध्यम आयु के हैं और प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं. उन्हें इसमें बंद रखा जाता है. और जब रोमियो उनकी चुदाई कर चुके होते हैं तब वो अपनी पत्नी को चोदते हैं.”
मेहुल समझ रहा था कि नूतन के इस कमरे का क्या महत्व है.
अनायास ही उसके मुंह से निकल पड़ा, “इनके वीडियो कहाँ रखती हो आप?”
इस बार चौंकने की बारी नूतन की थी.
“तुम्हें, तुम्हें कैसे पता कि वीडियो भी हैं?”
“कमरे की बनावट, सजावट और प्रकाश का वितरण इस बात को दर्शाता है कि इस कमरे में कैमरे लगे हैं. कितने ये तो आप जानती होगी, पर चार या अधिक हैं.”
“तुम सच में बुद्धिमान हो. हाँ इनकी रिकॉर्डिंग हैं. देखना चाहोगे?”
“हाँ पता तो चले कि मुझे किस प्रकार की सेवा के लिए चुना जायेगा?”
“ठीक है. पर ये बात हम दोनों के सिवाय किसी को ज्ञात नहीं होनी चाहिए.”
“ये मेरा वचन है.”
इसके बाद उसी अलमारी के अंदर एक बक्से में से नूतन ने एक यू एस बी की हार्ड डिस्क निकाली.
“चलो मेरे ही कमरे में देखेंगे. इसमें अन्य दृश्य भी हैं.”
दोनों कमरे में लौट गए. नूतन ने देखा कि ड्रिंक्स अब पीने योग्य नहीं थीं तो उसने उन्हें फेंककर नए पेग बनाये और डिस्क को अपने टीवी से जोड़ा और टीवी पर उस डिस्क के अध्याय दिखने लगे.
“क्या देखोगे?”
“जो आप दिखाओगी. मेरे लिए तो सब कुछ नया ही है.”
नूतन बिस्तर पर ड्रिंक ले कर बैठ गई, मेहुल ने भी वही किया. फिर नूतन कुछ देर तक उन अध्यायों को छानती रही. अंत में उसने एक अध्याय चुना.

सुजाता का घर:

मोहन और सुजाता का चुंबन और भी प्रगाढ़ हो गया था. अपनी सास को चोदे हुए मोहन को भी कुछ अधिक ही समय हो गया था. उसका गदराया मांसल शरीर किसी को भी चुदाई के लिए उद्यत करने का सक्षम था. सुजाता इसका पूरा लाभ भी उठाती थी. समुदाय के कई लड़के उसके बिस्तर की शोभा बढ़ा चुके थे. कुछ एक बार तो उसने अपनी सिखाये गए तीन चार लड़कों को भी एक साथ आमंत्रित किया था. पर उसने ये पाया कि उसे अधिक के साथ चुदाई करने में कोई विशेष आनंद नहीं आता था. इसी कारण से उसने इस प्रकार के सामूहिक चुदाई को विशेष दिनों के लिए ही सीमित कर दिया था. परन्तु उन दिनों की कोई परिभाषा नहीं की थी.
मोहन उसे उसी दिन से अच्छा लगा था जब उसने समुदाय में प्रवेश लिया था. उस दिन तो मोहन से चुदने का अवसर नहीं मिल पाया था, परन्तु जब उसे कामक्रीड़ा सीखने के लिए चुना गया तब उसने मोहन के व्यक्तित्व में एक आकर्षण पाया था. सौभाग्य से उसने श्रेया के विवाह का जब आवेदन दिया तो उसमें से एक मोहन ही था. दो अन्य प्रत्याशी भी थे, पर उन्हें सुजाता ने औपचारिकता के लिए ही चोदा था. अंत में मोहन को जब चुना गया तो श्रेया भी प्रसन्न हुई थी. पर उसे मोहन से चुदने का केवल एक बार ही अवसर मिला था इसके पहले कि विवाह तय हुआ. फिर तो विवाह होने तक दोनों केवल चूमा चाटी से ही एक दूसरे को संतुष्ट करते रहे.
न जाने क्यों सुजाता स्वयं को स्मिता से श्रेष्ठ मान बैठी. उसे पता था कि ऐसा व्यवहार उचित नहीं है और अविरल ने भी उसे समझाया था. पर सुजाता रुक नहीं पाती थी. स्मिता ने समुदाय में इस बात को नहीं बताया अन्यथा सुजाता के लिए समस्या खड़ी हो सकती थी. पर मेहुल ने उसे ऐसा पाठ पढ़ाया कि उसकी सारी अकड़ निकल गई. उसने स्मिता से क्षमा भी मांगी.
आज वही मोहन उसके शरीर से फिर एक बार खेल रहा था. उसने सुजाता को स्मिता के बगल में ही लिटाया और फिर अपने ससुर की ओर एक बार देखते हुए सुजाता की चूत में अपना मुंह लगा दिया और उसकी रसीली चूत को चाटने लगा. सुजाता ने अपना हाथ उसके सिर पर रखा और आनंद से आँखें मींच लीं.
स्नेहा भी अब तक अपने पिता की चूत चुसाई से उत्तेजित हो चुकी थी और इसके आगे बढ़ना चाहती थी. उसने अपने पिता अविरल के सिर को हटाने का प्रयास किया तो अविरल समझ गया कि अब उसकी बेटी चुदने के लिए उत्सुक है. एक अच्छे पिता के समान उसने स्नेहा की चूत में से अपना मुंह हटाया और खड़ा होकर स्नेहा को सही स्थिति में आने के लिए कहा. स्नेहा बिस्तर पर पीछे की ओर चली गई और अपने पैरों को फैला लिया. अविरल ने स्नेहा की खिली चूत को एक बार देखा और अपने फनफनाते लौड़े को चूत पर लगाकर एक धक्का लगाया. लंड चूत की गहराइयों में समाता चला गया. बाप बेटी दोनों ने एक आनंद भरी आह भरी. स्नेहा ने अपने दोनों पैरों की कैंची बनाकर अपने पिता की कमर को कस लिया.
अविरल ने धक्के लगाने आरम्भ किये और कुछ ही देर में एक अच्छी गति पा ली. स्नेहा भी कमर उछालते हुए अपने पिता के लंड को अपनी पूरी गहराई में उतारने का प्रयास कर रही थी. अविरल ने आगे झुकते हुए स्नेहा के होंठों से होंठ मिला लिए. बिना अपनी लय को तोड़े हुए दोनों चुंबन में लीन हो गए. कुछ देर में अविरल ने अपने होंठ अलग किये और इस बार उन्हें स्नेहा के मम्मों को चूसने के लिए उपयोग किया. स्नेहा की आनंद भरी सिसकारी निकली और उसने अविरल के सिर को अपने स्तन पर दबा लिया.
श्रेया और विवेक भी पीछे नहीं थे. श्रेया ने विवेक के लंड को चूस चूसकर उसे इतना उत्तेजित कर दिया था कि अब विवेक रुकने की स्थिति में नहीं था. उसने श्रेया को बिस्तर पर धकेला और उसके ऊपर चढ़कर उसकी चूत में एक ही बार में पूरा लंड पेल दिया.
“उउउह, लगता है मेरा भाई उफ्फ्फ…” श्रेया अपनी बात पूरी भीन कर पाई थी कि विवेक ने उसका मुंह अपने मुंह से बंद कर दिया. विवेक को इस बात से बिलकुल आपत्ति नहीं थी कि श्रेया अभी अपने मुंह से उसके ही लंड को चूस चुकी थी. कामांध विवेक ने उसे चूमते हुए तीव्र गति से चुदाई आरम्भ कर दी. श्रेया भी अपने भाई के उत्साह से अछूती न रही और उसने भी अपनी कमर उछालते हुए उसका साथ दिया. दोनों बहनें एक साथ कमर उछालते हुए अपने पिता और भाई के लंड का आनंद ले रही थीं.
तो उनकी माँ कैसे पीछे रहती. पर सुजाता ने मोहन से अपनी गांड मरवाने की इच्छा की तो मोहन ने भी इसमें सम्मति जताई. तो सुजाता घोड़ी के आसन में आ गई. सुजाता की गांड के छेद को थूक और उँगलियों से कुछ देर तक खोलने के बाद मोहन ने अपने लंड से उसकी गांड की गहराई नाप दी. श्रेया मोहन के पास विवेक के लंड से चुद रही थी और उसके पास स्मिता अपने पिता से. इस समय किसी को प्रेम से चोदने या चुदने की इच्छा नहीं थी. उसके लिए अगली बार सोचा जाना था. इस चुदाई में केवल शरीर की भूख को मिटाना था और उसमे तीनों जोड़े बढ़ चढ़कर अपनी शक्ति और उत्साह का प्रदर्शन कर रहे थे.
कमरे में आहों, कराहों और सिसकारियों की ऊष्मा थी. चुदाई की सुगंध से कमरा महक रहा था. शरीर पसीने से लथपथ होने लगे थे. और तीनों जोड़े पूरी त्वरता और गति से चुदाई का आनंद ले रहे थे.
इस समय कमरे का वातावरण ऐसा था मानो यहां कोई युद्ध लड़ा जा रहा हो. योद्धा अपनी अपनी शक्ति के प्रदर्शन में लगे हुए थे. ये किसी भी प्रकार से प्रेम नहीं था. केवल वासना और शरीर की संतुष्टि ही एकमात्र उद्देश्य था. दोनों प्रतिद्वंदी अपने विरोधी को हराने का प्रयास कर रहे थे. परन्तु सफल कोई न हो रहा था. कोई अस्त्र त्यागने के बारे में सोच नहीं रहा था.
परन्तु प्रकृति के अपने नियम हैं और किसी को भी असीम शक्ति अथवा बल प्रदान नहीं किया जाता. इसी कारण एक लम्बे समय के बात गति शिथिल होने लगी. महिलाएं अब अपने रस को निस्तारण कर चुकी थीं और केवल पुरुष ही शेष थे. मोहन ने सुजाता की गांड मारते हुए उसके नितम्बो को इतनी शक्ति से पकड़ा हुआ था कि वो लाल हो चुके थे. उसके धक्कों ने भी इसमें अपना यथोचित योगदान किया था. सुजाता को आज की मोहन की ये शक्तिशाली चुदाई बहुत रास आई थी. मोहन अधिकतर गांड भी प्रेम से ही मारता था. परन्तु आसपास चल रहे दृश्य ने उसे भी उद्वेलित कर दिया था.
मोहन ही पहले झड़ा भी और उसके पीछे पीछे अविरल ने अपनी बेटी की चूत भर दी. अंत में विवेक के रस की प्यासी श्रेया की भी चूत को उसका प्रिय रास मिल ही गया.
तीनों जोड़े एक दूसरे को चूमते हुए एक दूसरे से लिपटे रहे. समय जैसे थमा हुआ था. उन्हें पता था कि आज रात हर मिश्रण में चुदाई का आनंद मिलेगा और इसके लिए वे पूर्ण रूप से तत्पर थे.

सुनीति का घर:

सुनीति ने उन दोनों को देखा तो कुछ शर्मा सी गई. विशेषकर महक की आँखों की चमक और लालसा देखकर. आज उसे अपनी भावी बहू के सानिध्य का आनंद मिलने वाला था और महक को देखकर वो समझ गई कि उसे दोनों प्रकार के सुख का अनुभव है.
महक की झिझक देखते हुए सुनीति ने ही आगे बढ़ने का बीड़ा उठाया. आगे बढ़कर उसने महको को अपनी बाँहों में भर लिया. महक भी सिकुड़कर उससे लिपट गई.
“शर्मा रही हो? तुम तो समुदाय में बहुत समय से सक्रिय हो, तो शर्म कैसी?”
“जी मम्मी जी, वो मेरे सास ससुर नहीं थे न. न कोई संबंधी ही थे. तो वहाँ इतना सक्नॉच नहीं था. अब बात कुछ और है.”
“मैं समझ सकती हूँ. पर हमारा भी परिवार तुम्हारी ही जीवन शैली में लिप्त है. तो शीघ्र ही इस संकोच को दूर करो और सम्मिलित हो जाओ.”
ये कहते हुए सुनीति ने महक के चेहरे को उठाया और उसके होंठ चूम लिए. मानो एक बाँध रुका था, जैसे ही दोनों के होंठ मिले तो टूट गया और एक दूसरे के चुंबन में दोनों लीन हो गयीं. और इस बात का ध्यान ही नहीं रहा कि दोनों के तौलिये उनका शरीर छोड़कर गिर चुके थे. आशीष इस लुभावने दृश्य को देखकर अद्भुत आनंद का अनुभव कर रहा था. सुनीत के सौंदर्य से वो अनिभिज्ञ नहीं था पर महक ने भी उसे आकर्षित किया. उसके लंड ने इस बात का सम्मान किया और उठकर अपना प्रयोजन दर्शाया.
महक को चूमते हुए सुनीत उसे बिस्तर की ओर ले चली और उसे बिस्तर पर लिटाकर उसके होंठों से स्वयं को हटाते हुए नीचे उसकी चूत को अपने होंठों से चूमने लगी. उसके बाद अपनी जीभ और उँगलियों से अपनी भावी बहू की चूत का अवलोकन करने में व्यस्त हो गई. अचानक उसे ध्यान आया कि उसके पति भी वहीं उपस्थित हैं. उसने सर उठाकर देखा तो आशीष अभी भी तौलिये में ही थे, हालाँकि उनका लंड उसमे भी टैंट बनाये हुए था.
“आइये, न मेरे साथ अपनी बहू की चूत का स्वाद लीजिये. और वो तौलिये हटा दीजिये, आप उसमे बहुत अटपटे दिख रहे हैं.”
आशीष ने तौलिया हटाया तो महक ने उनके लंड को देखकर संतोष की साँस ली. हालाँकि वो उन्हें समुदाय में प्रवेश के समय देख चुकी थी, पर अब निकट के दर्शन थे.
आशीष सुनीति के साथ बैठ गया और अपने सामने परोसी हुई चिकनी चूत को देखने लगा. सुनीति ने महक की चूत से मुंह और जीभ हटाई और एक ओर होकर अपने पति को स्थान दिया. आशीष ने महक की गीली चूत पर चमकती अपनी पत्नी के द्वारा चाटी हुई चूत को देखा और फिर फाँकों को फैलाकर अपनी जीभ से उसे चाटने लगा. महक अब एक भिन्न ही अनुभति कर रही थी. इस प्रकार उसकी चूत को एक साथ दो लोगों ने कभी नहीं चाटा था. अब आशीष और सुनीति एक एक करके उसकी चूत के रस को पी रहे थे.
सुनीति: “मैं अपनी बहूरानी को भी अपना स्वाद दे देती हूँ. तब तक आप उसकी गांड का भी स्वाद ले लो. आज उसका भी आपको उद्धार जो करना है.”
आशिष ने ये सुना तो उसका लंड फड़क उठा. अपने हाथों से महक के नितम्बों को उठाकर उसने अपनी जीभ से उसकी गांड को हल्के से चाटा तो महक की सिसकारी निकल गई. अब आशीष उसकी चूत के ऊपर के भाग से गांड के निचले भाग तक अपनी जीभ से चाटने लगा. बीच में वो चूत में भी जीभ डाल देता और कभी गांड में भी. महक के मुंह पर अब सुनीति ने अपनी चूत लगा दी थी तो महक कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं थी.
सुनीति: “सुनिए. मैं लेटकर महक से अपनी चूत चुसवाती हूँ. आपको इस प्रकार उसकी चूत और गांड तक पहुंचने में सरलता होगी.”
आशीष हटा, सुनीति लेटी और इस बार महक उसकी चूत में मुंह डालकर ये सिद्ध करने में जुट गई कि वो एक आदर्श बहू की भूमिका में सटीक बैठेगी. उसके पीछे उसके भावी ससुर ने फिर से उसकी चूत और गांड चाटने का कार्यक्रम आरम्भ कर दिया. आशीष से अब रुका नहीं जा रहा था. उसने सर हटाकर महक के आगे सुनीति को देखा और आँखों से विनती की कि उसे भी कुछ ध्यान चाहिए.
सुनीति: “महक बेटी. अब अपने पापाजी के लंड को भी चुदाई के उपयुक्त कर दो. बहुत देर से रुके हुए हैं वो भी.”
महक ने इस बार पहली बार अपना सुझाव दिया.
महक: “मम्मीजी, चलिए हम दोनों इस कार्य को करते हैं.”
आशीष प्रसन्न हो गया और लेट गया. उसके एक ओर सुनीति आ गई और दूसरी ओर महक. दोनों सुंदरियों के बीच आशीष स्वयं को भाग्यशाली समझ रहा था. सुनीति ने लंड को पकड़ा और महक की ओर किया.
“पहले तुम, नहीं तो स्वाद और सुगंध कम हो जाएगी.”
महक ने अपने भावी ससुर के लंड को प्रेम से चाटा और फिर मुंह में लेकर चूसने लगी. आशीष उसके सिर पर हाथ फेरने लगा. कुछ समय बाद महक ने लंड को छोड़ा और अपनी भावी सास की ओर कर दिया.
“धन्यवाद मम्मीजी. स्वाद और सुगंध बहुत अच्छी है. आप बहुत भाग्यशाली हैं.”
“वो तो हूँ.” ये कहते हुए आशीष के लंड को मुंह में लेकर सुनीति चूसने लगी.
कुछ समय तक इसी प्रकार से भावी सास बहू भावी ससुर के लंड को चूसती चाटती रहीं. अब आशीष चुदाई के लिए तत्पर था और महक और सुनीति भी.
“महक, आओ, अब पहले तुम्हारी चूत का ही आनंद दे दो इनको.”
रात अभी शेष थी

क्रमशः

अगले अपडेट में:


१. सुनीति के घर में महक
२. सुजाता के घर में पारिवारिक सम्भोग
३. नूतन के घर में मेहुल।

और भी बहुत कुछ.
बहुत ही शानदार अपडेट, मेहुल का राज अब खुलना चाहिए सबके सामने और स्नेहा के साथ भी उसका प्रेम और विवाह प्रस्ताव होना चाहिए।
 
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