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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

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DREAMBOY40

सपनों का सौदागर 😎
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UPDATE 047
UNFOLDING SECRETS

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UPDATE is posted on page no 1522
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Sis lover

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Update 21

शाम को करीब 7.30 बजे मै घर आया । पापा आज जल्दी घर आ गये थे

पापा - कहा गया था राज
मै - पापा वो कल चाची भोपाल जा रही है तो उन्ही से मिलने गया था और चाची ने बोला कि खानेपीने का ध्यान रखने के लिए ।

बुआ - अरे उसकी चिन्ता मत कर मै कल चली जाऊंगी छोटे के यहा ,,, मैं देख लुंगी खाना पीना

मा बुआ से - क्या दीदी आप भी ,,,, हमारे रहते हुए आप वहा खाना बनाने जाओगी ,,, जैसे सबका खाना बनेगा देवर जी का भी बना देंगे

बुआ - हा लेकिन वो दुकान छोड के नही ना आयेगा
मा - अरे उसकी चिन्ता नही है कोई खाना लेके चला जायेगा ,,,खुश

पापा - हा जीजी ,, रागिनी ठीक कर रही है आपको परेसान होने की जरुरत नही है।

बुआ - अच्छा ठीक है बाबा
फिर सब हसने लगे और खाना खाया गया

अब ये हुआ की कौन कहा सोयेगा क्योकि बारिश का मौसम था तो छत पर सोने की दिक्कत थी ।
फिर प्लान हुआ कि बुआ और दीदी एक साथ सो जाये । मै अपने स्टोररुम मे और अनुज मा पापा के साथ

लेकिन ऐन मौके पर अनुज बोला नही मुझे ऊपर ही सोना है तो मा बोली - तो ऐसा कर राज तु चल हमारे साथ सो जाना

मै थोड़ा खुश होते हुए - वाह आज कूलर के पास सोने को मिलेगा हिहिही

पापा - बावरा हो गया है ये
अब पापा को क्या पता मेरे नीचे सोने की खुशी क्या है ।

फिर मै पहले के जैसे ही बोला - मा फिर मै जा रहा हू सोने ,,, कल सुबह चाची को छोडने बस स्टैंड जाना है

मा - हा बेटा तु आराम कर मै किचन का काम खतम करके आती हू ।
पापा - हा मै भी जीजी से थोड़ा बात चित करके आता हूँ

मै मन ही मन खुश हुआ और अपना मोबाईल किया फिर नीचे चला गया
मै निचे आया और पापा के कमरे मे गया फिर मैने कुलर के तरफ की साइड ली ।उसका एक कारण ये था कि कुलर के जस्ट बगल नाइट बल्ब लगा था , जिससे अगर मै करवट लेके सोता तो बडे आराम से मा और पापा का खेल देख सकता था ,ऊपर से नाइट बल्ब की रोशनी मेरे शरीर के पीछे से आती तो सामने वाले को मेरा चेहरा क्लियर नही दिखता ।

मै खुस हुआ और बेड पर लेट कर मोबाईल चलाने लगा ।
मैने चंदू की बतायी सेक्स स्टोरी साइट पर जाकर कुछ सेक्स स्टोरी पढी ,,,मेरा तो मूड बन गया और लोवर मे तनाव आ गया ।

मैने ऐसे ही एक पारिवारिक सेक्स स्टोरी खोली ,,, जिसमे भाई बहन के रिस्ते को लेकर बहुत ही रोमांचक अनुभव वाले सेक्स सीन लिखे गये । और उस स्टोरी मे जब रक्षाबधन का जिक्र आया तो मै अपनी कलपनाओ मे खो गया ।
मुझे मौसी-मामा , पापा-बुआ, निशा-मै जैसे couple के सेक्स अनुभव आने लगे और मै सोचने लगा क्या हो अगर पापा और चाचा दोनो मिल कर रक्षाबन्धन के दिन शीला बुआ जैसी अपनी गदरायी बहन को पेले । और इसी कल्पना मे मै खो गया

कि बुआ को पापा और चाचा मिल कर चोद रहे है । पापा बुआ के निचे उनकी चुत मे लंड डाले और चाचा बुआ की गदरायी गांड मे लण्ड डाल कर चोद रहे हैं,,,,, और बेड पर राखी से सजी थाली हिल रही है ।
आह्हह क्या कामुक सीन है बुआ की उभरी गांड में चाचा चौडे जा रहे हैं आह्हह अह्ह्ज बुआ आह्हह उफ्फ्फ उह्ह्ह उम्म्ंम आह्ह बुआ चुदवा लो मुझ्से भी आह्हह उह्ह्ह
तभी मुझे अह्सास हुआ की मेरी ज्न्घो पर कुछ रिस रहा है और जब मैने निचे देखा तो पता चला कि मैं अपनी कलपना मे इतना उत्तेजित हो गया था कि कब लण्ड को लोवर के ऊपर से हिला कर अंदर ही झड़ गया पता ही नहीं चला ।

फिर मैने मोबाइल मे देखा तो 9 बजने को है लेकिन मा और पापा आये नही सोने
इस बात मै तब्ज्जो ना देते हुए अपनी कल्पना के बारे मे सोचने लगा क्या ऐसा हो सकता है ,, अगर ऐसा हो जाये तो कितना मज़ा आयेगा और बुआ उफ्फ्फ क्या गांड है उनकी ,,,लेगी मे उनकी गांड देख कर आज तो मन कर रहा था पेल दू सालि को ....
मेरा तो एक ही दिन मे ये हाल है पता नहीं बुआ के घर वालो का क्या हाल होता होगा ऐसा गदराया माल रोज रोज देख कर,,ह्य्य्य्य अह्ह्ह्ह बुआ

मुझे छत से निचे आये करीब एक घन्टे हो चुके थे इसी बीच मा के पायलो की आवाज सुनाई दी

मै समझ गया कि पापा और मा निचे आ रहे है । मै तुरंत डाटा बंद किया और फोन किनारे रख कर सोने का नाटक करने अपनी पुरानी आदतो के अनुसार ।

थोडी देर मे मा और पापा के बिच की बातचित हल्की हल्की मेरे कानो तक आने लगी फिर दरवाजा खुला और कदमो की आहट मे थोड़ा सतर्क होकर सोने की ऐक्टिंग करने लगा ,,,,
पापा - लगता है राज सो गया
मा - हा आज बहुत दिन बाद बेचारा अच्छे से सोने को पा रहा है ,,, कितना मेहनती है मेरा बेटा और कोई शिकायत तक नही करता कभी

पापा- हा रागिनी हम बहुत किस्मत वाले हैं
मा - मै क्या कहती हू जी आप वो चौराहे वाला घर जल्दी बनवाओ ,,,कब तक मेरा बेटा ऐसे स्टोर रूम मे सोयेगा

पापा- हा वो मैने एक ठेकेदार से बात कर की है बरिश का मौसम खतम हो तब काम शुरू करवाने को बोला है ,,,क्योकि बारिश मे नीव मजबूत बनाने मे बहुत दिक्कत आती है

मा - अरे वाह ये तो बहुत अच्छी बात है ,,,,, मै तो बहुत खुश हूँ नये घर को लेके

पापा - क्यू जान इस घर को भूल जाओगी ,,,हमारी सुहागरात तो यही मनी थी ,हहह्हहाह

मा - क्या आप भी ,,,,चुप रहिये बेटा यही सो रहा है और आप

पापा - अच्छा वो दिन भूल गयी जब रज्जो दीदी के साथ खुली छत पर दोनो बहने मिल कर चुदवा रही थी

मै मन ही मन मा और पापा की मीठी नोक्झोक से खुश हो रहा था क्योंकि यहा मुझे एक घमासान चुदाई का माहौल बनता दिख रहा था जिसमे कुछ खट्टी मीठी बातचित का चटकारा भी मिलना था

मा - क्या आप भी चुप रहिये न ,,, राज सो रहा है हिहिहिहिह
पापा- अरे मेरी जान जब कर चुकी हो तो शर्माना कैसा ,,, और राज सो गया है देखो
फिर पापा ने मुझे हिलाया
मेरी थोडी फटी लेकिन मैने भी थूक गतकते हुए खुद को सम्भाला ,,, जब पापा ने छोडा तब राहत मिली

मा - फिर भी ,,,, वो
पापा - कोई दिक्कत नही होगी जान ,,, उस दिन की तरह

मा - उस दिन तो रज्जो दीदी थी तो दिक्कत नही हुई न
पापा- आह्ह मेरी जान रज्जो दिदी की बात न करो
मा - ओहो अभी भी आहे भर रहे हो दीदी के
पापा - अरे मेरी जान तुम्हारी रज्जो दीदी माल ही ऐसी है ,, रन्डी भी फेल है उनके भरे गदराये जिस्म के आगे

मा - वैसे आपकी शिला जीजी भी कम नही है ,,, लगता है नंदोई जी जम कर लेते है उनकी भी

पापा- हा जान जीजी का भी जवाब नही
मा - अह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं क्या कर रहे हो छोडो ना

मै अचानक से सोचने लगा ये बातो के बीच मे सिसिकिया कब से सुरु हो गई और मैं ये देखने के लिए थोडी गरदन ऊपर की और आंखे खोली

ठीक मेरे सर के एक फिट बगल मे पापा जोकि बनियान और कच्छे मे थे वो मा को जो पेतिकोट और ब्लाऊज पहने थी ,,, उनके पेट को सहलाते हुये कंधे को चूम रहे थे ।

मुझे स्पष्ट रूप से दिख नही रहा था लेकिन मा की आहे बता रही थी कि पापा का मा की जिस्मो पर मर्दन किया रोमांचक था ।

मा - आह्हह उम्म्ंम्ं इह्ह बस करिये राज के पापा ,,, मुझसे रहा नहीं जायेगा

पापा - मत रोक मेरी जान,, आ तेरे प्यास मै बुझा दू
मा - आह्हह लेकिन अपने बेटे के सामने कैसे खुद को आपके लिए पेश करु ,,,, अह्ह्ह्ह हम्म्म्म

पापा- मत सोच देख वो सो रहा और पापा ने मा को मेरी तरफ घुमाया
मैने झट से आंखे बंद कर ली
फिर उनदोनो की आहे सुरु हो गयी ।
मै मन मे - यार ऐसे तो मै देख भी नही सकता क्या करु
तभी मेरे मन में एक विचार आया और मैने दाया हाथ उठा कर अपने ललाट पर रख दिया
और कोहनी के बिच थोड़े से गैप से आंखे खोल कर नजारा देखने लगा


अहहह क्या कयामत थी
पापा ने मा को पीछे से पकड़ा हुआ था और मा का ब्लाऊज पुरा खुला था ,,,मा की दोनो चुचिया पापा के हाथ मे थी
और पापा मा के गरदन और कंधो को चूमते हुए मा की चुचियो को ऐसे मिज रहे थे मानो रसभरे मौसमी को हाथो मे भर गार रहे हो ।

ये नजारा देख मेरे पैंट मे तनाव आने लगा ,,, और उसे मा और पापा से छिपाने के लिए मैने पैर फ़ोल्ड करके लेते हुए मा पापा की रासलीला देखने लगा

फिर पापा ने मा तख्ते पर हाथो के बल झुका दिया और खुद निचे बैठ गये

मेरी मा मेरे से महज एक फुट की दूरी पर अपने कोहनियों के बल झुकी थी और उसके 40 साइज़ के पपीते जैसे नरम चुचे बिस्तर से महज कुछ इन्च उपर हवा मे झूल रहे थे ।

इसी बीच मा उछल कर पुरा बेड पर पेट के बल गिर पडी और तेजी से सासे लेने लगी ।
और जब मेरी नजर पापा पर गयी तो देखा पापा ने अपना मुह मा की नंगी गुदाज गांड मे फसा रखा है

मा - आह्हह उफ्फ़फ्फ ह्य्य्य्य मै मर जाऊंगी राज के पापा ,,,अझ्ह्ह्ह्ह ओफ्फ्फ

पापा- आज मुझे पहले तुम्हारी गांड चोदनी है जान
मा - क्या बात है मेरे राजा आज डायरेक्ट वही, आपको तो मेरी रसिली चुत ही पसंद होती है हमसा ,,,, कही शिला दीदी की उभरी गांड देख कर मन तो नही न कर रहा है

पापा मा के चुतडो को सहलाते हुए - अह्ह्ह्ह हा जान,, आज जबसे शिला दीदी की उभरी गांड को चुस्त लेगी मे देखा तबसे लण्ड अंगड़ाई ले रहा है ।

मा - अरे इतना ही मन तो कहो बुला दू ,,,आज उन्ही को चोद लो हिहिही

पापा - तु कितनी अच्छी है रागिनी मेरे दिल के जज्बातो को समझती है ,,,काश मै शिला दीदी की जबरदस्त गदरायी गांड मे अपना लण्ड डाल पाता ,,,,और फिर पापा क्छ्छे के ऊपर से ही अपना खड़ा लण्ड मा की पहाड़ जैसी उठी गांड की दरार मे रगड़ने लगे ।

मा पागल हो गई- आह्ह अब क्यू तरसा रहे हो दिदी की वजह से ,,चोद दो न मुझे मेरे राजा

पापा - ऐसे सुखे सुखे डाल दू क्या मेरी जान ,, आ इसको गिला तो कर
फिर मा बिस्तर से उठ गयी और निचे बैठ कर पापा का लण्ड 2 मिंट तक चुस कर गिला किया

पापा - आहहह मेरी जान आजा घोड़ी बन जा
फिर मा बेड पर वापस अपने कोहनियों के बल झुक गई और पापा ने थोड़ा थूक मा की गांड के छेद पर अपना हाथ लगाया और लण्ड को मा की गांड पर सेट करके आगे झुक कर लण्ड को मा की गांड मे दबा दिया और थोड़ा सा लण्ड मा की गांड मे गया

मा - सीईई उउउउऊ उम्म्ंम्ं माहहह ,,,आज इतना टाइट क्यू है जी आपका

पापा- वो जिजी का असर लग रहा है,,, मै तो आज तुम्को जीजी समझ के ही चोदने वाला हू ,,,
फिर पापा ने एक धक्का मारा और लण्ड मा की गांड मे रगडता हुआ अन्दर समा गया

मा -अह्ह्ह्ह्ह उईई माहह ,,, सच मे आज बहुत मोटा लग रहा है जी ,,,, अब रुको मत चोदो कस कर मुझे
पापा - ह्ह्य्य्य हा जान ये ले ,,और पापा तेज़ी से मा की गुदाज गांड को पकड कर चुदाई करने लगे हैं ।

पापा की जांघ मा की चुतडो पर फट फट की आवाज के साथ टकरा रही थी जो पापा के मजबूत धक्के को बया कर रही थी ।

हर धक्के के साथ मा की चुचिया उछल जाती थी,,,,,ये नजारा देख कर मेरा लण्ड पूरी तरह से अकड गया मै चाह कर भी उसको ऐडजस्ट नही कर सकता था

इधर पापा तेज़ धक्को से मा की गांड की खुदाई कर रहे थे,,और मा की सिसकिया तेज हो गई थी
आखिरकार 10 मिंट तक जम कर मा की गांड चोदने के बाद पापा मा के अन्दर ही झड़ गये और उनके पीठ पर लेट कर हाफ्ने लगे ।

पापा - ह्ह्हुय्य्य ,,, मज़ा आ गया मेरी जान आज तो
मा - हा आज तो आप अलग ही मूड मे थे और आपका वो भी मोटा लग रहा था,हिहिहिही पापा मा की पीठ को चूमते हुए - तू चीज़ ही मेरी जान
मा - अच्छा मेरी वजह से या शिला दीदी की ,,,, हिहिहिही

पापा - आह्हह रागिनी मेरी जान तू सब समझ जाती है ,,, लेकिन ऐसी किस्मत कहा

मा - अरे तो ट्राई कर लो मेरी जान और वैसे भी 2 दिन के लिए मै राज के साथ मायके जाऊंगी तो मौका देख कर दीदी को ,,,हिहिहिही

पापा - अरे वो तो सिर्फ राज ही जायेगा न तुम्हारे साथ
मा - अरे तो सब मै ही करू,,,तुम्हारी दीदी है तुम समझो कैसे पटाना है

पापा- चलो ठीक है देखता हू कुछ
मा - कहो तो डिरेक्ट पूछ लू की आप उनको चोद्ना चाहते हैं,,,हिहिही
पापा मा को घुमा के हग करते हुए- अच्छा और तेरे पूछने पर हा कर देंगी क्या
मा - हा तो नही करेंगी लेकिन कुछ रेपोन्स जरुर करेगी

चलो मै तुम्हारे लिये इस 3 दिन मे कोई न कोई जुगाड कर के जाती हू
पापा मा की चुचियो की मस्ल्ते हुए - आहहह सच मेरी जान तू कितनी अच्छी है

मा - आह्हह ज्यादा मक्खन न लगाओ और मुझे चोदो मेरी चुत को भी लण्ड चाहिये आप तो अपना काम कर लिये न

पापा - आह्ह हा मेरी जान क्यो नही आजाओ मेरे ऊपर फिर ना जाने कितनी जोरदार धक्को के साथ पापा ने मा को चोदा

और मै बेबस होकर अपने लण्ड को इस करवट से उस करवट ऐडजस्ट करता रहा

आखिरकार जब वो दोनो थक कर सो गये तब मैने उनलोगो की तरफ पीठ करके हल्का सा लण्ड को सहलाया ही था कि भल्भ्ला कर मेरा सारा सोमरस बहने लगा और मेरी जांघो से रिस के मेरे आन्डो तक चला गया और मै भी ऐसे ही किसी तरह सो गया

अब देखते है क्या होता है आगे
आपके सुझावों और विचारों का इंतजार रहेगा ।
मस्त चूदाई की कहानी है दोस्त मजा आ रहा है।
 

Sis lover

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Update 022

अगली सुबह करीब 6 बजे मेरी निद खुली
मैने देखा मेरे बगल मेरी मा पेट के बल बिना ब्लाऊज के सिर्फ पेतिकोट मे सोयी है
और उनकी उभरी हुई गांड के दरार मे उनका पेतिकोट फसा हुआ है,,, उनकी चिकनी कमर और मुलायम पीठ ,,,आह्हह देखते ही लण्ड सलामी देने लगा ,,,,,
फिर मैने एक नजर पापा पर डाली वो सीधे एक जांघिये मे सोये थे पेट पर हाथ रखे हुए

मै मन मे - पापा कितने किस्मत वाले हैं मा और मौसी को चोदने के बाद अब बुआ को भी पेलने का प्लान है ,, काश मैं भी बुआ को भोग पाता
तभी मैने सोचा क्यू ना सुबह सुबह बुआ के दर्शन कर लू
फिर मैने लोवर मे लण्ड को ऐडजस्ट किया और हल्का सा करवट लेके उठने वाला था कि मा जग गयी

मा - अरे बेटा कहा जा रहा है
मा भूल गयी की रात मे उसने ऊपर कुछ नही पहना है और मेरी तरफ घूम गयी

मै मा के बडे रसिले पपीते जैसे चुचे देख कर थम सा गया और मेरी नजारे उनकी भूरे रंग के मून्क्के जैसे चुचको पर रुक गयी ,,, जब मैने मा को जवाब नही दिया तो उन्होने मेरी नजर का पीछा किया और वो समझ गयी की मेरा ध्यान कहा है
और फिर मुस्कुराते हुए अपनी स्थिति पर थोडी सफाई देते हुए बोली - अरे वो बेटा रात मे गर्मी थी ज्यादा तो ब्लाऊज निकाल दिया था

मैने देखा मा मुझे देख कर मेरे व्यवहार पर मुस्कुरा कर जवाब दे रही है तो मैने भी हौसला करके कहा- हा मा देखा था मैने रात मे आप पुरे कपड़े निकाल दी थी लेकिन ,,,,

मा शर्मा गयी क्योकि वो समझ गयी मेरे कहने का मतलब फिर भी अंजान बनने का नाटक करते हुए बोली - क्या लेकिन बेटा ???

मै थूक गटक कर थोड़ा मा के करीब खिसक कर बोला - लेकिन फिर भी आप लोग वो सब कर रहे थे इतनी गरमी मे भी ।।। मै बहुत ही मासूमियत से बोला

मा थोडा शर्मायी की मैने सारा खेल देखा और सुना था लेकिन उनको इस बात से थोड़ा uncomfortable भी मह्सूस हो रहा था कि मै क्या सोच रहा हूंगा । तो मा बोली - तू तो सो गया था ना

मै - हा मा मै सो गया था लेकिन
मा - लेकिन क्या
मै - मा वो आप इतना तेज़ बोल रहे थे कि निद खुल गयी
मेरे इतना बोल्ते ही मा सीधे लेट गयी और छत पर देखते हुए मुस्कुराने लगी
सीधे लेटने से उनकी चुचिया छत की तरफ नोक बनाये सख्त थी
मै उनकी सख्त चुचियो को देख कर उत्तेजित होने लगा और लोवर मे लण्ड को ऐडजस्ट करने ल्गा

फिर मा सीधे लेते हुए मेरे तरफ सर घुमा कर थोड़ा तिरछी नजरो से देखते हुए पूछी- जब तु उठा तो मै क्या कर रही थी राज
और वापस छत की तरफ देखने लगी ,इस समय उनकी सांसे तेज हो गयी थी और उनकी चुचिया ऊपर निचे हो रही थी
मै फिर से लण्ड को ऐडजस्ट किया और मा की नंगी चुची को देख थूक गटकते हुए बोला - वो वो मा आप बेड पर झुकी थी और पापा नीचे बैठ कर आपके उसमे सर डाले थे ।
इतना बोल के मैने अपनी नजरे निचे कर ली

मा - धत्त पागल,, मतलब तू शुरू से ही जग रहा था
मै - हा शायद लेकिन मा ,,,
मा - हा बोल
मै - पापा आपके,,,,,फिर मैने गांड की तरफ इशारा करते हुए ,,, वहा पर चुम्मी क्यू कर रहे थे

मा शर्मा गयी और मुह पर हाथ रख ली
मै - आपको बहुत अच्छा लग रहा था न मा
मा - धत्त बदमाश अपनी मा से कोई ऐसी बात करता है ,,,
मै - मुझे ये सब कौन बतायेगा अब मम्मी पापा से ना पूछू तो किस्से पूछू

मा थोडी सोच मे पद गयी - ठीक है लेकिन अभी जरुरी नही है समय आयेगा तो बताउन्गी मै तुझे ,,,
मा - अभी तेरी शादी तो नही न हो रही है
मै अनजान बनते हुए - अच्छा तो ये सब शादी के बाद ही कर सकते है क्या
मा - हा बेटा ,, वो भी सिर्फ अपनी बीबी के साथ समझा

मा मुझे नादान बालक समझ कर समझा रही थी तो मैने मा को लपटने का ये मौका कैसे छोडने वाला था
मै - तो फिर पापा ने मौसी के साथ कैसे किया वो सब ,,,थोड़ा जिज्ञसुक भाव मे पुछा
मेरे ये सवाल करते ही मा के चेहरे का रंग ही उड़ गया
मा हडबडी मे बोली - तू तू तुझे कैसे बता ये सब

मै बिना कोई नये भाव के मासूमियत से बोला - उस दिन छत पर देखा था रात मे

मा की सांसे तेज़ हो गयी थी लेकिन वो मुझे कुछ बोल भी नही सकती थी क्योकि गलती उन्ही की थी और मेरे चेहरे का भाव एक मासूम जिज्ञासुक बच्चे के जैसा था ,,,

मा मेरी तरफ घूम साथ ही उन्के करवट लेते ही उनकी दोनो चुचिया बिस्तर की तरफ लटक गयी
फिर मा मुझे बोली- बेटा तुने किसी और को नही न बताया ना उस रात के बारे मे
मै - नही मा मै क्यू ब्ताऊगा किसी को ,,, ये सब छिपा कर करने वाली चीजे है ना

मा थोडी राहत की सांस ली - अच्छा किया बेटा और ये बात तू किसी से नही करेगा जो कुछ जानना पूछना होगा मुझसे पूछ लेना

मै खुश होते हुए - ठीक है मा
फिर वापस से मा की चुचियो को घुरने लगा

मा ने मुझे ऐसे देखा तो बोली - क्यू पीने का मन है क्या मेरे लल्ला
मै बड़ी मासूमियत से हा मे सर हिलाया
फिर मा ने मेरे गाल पर सहलाते हुए एक नजर पापा को देखा तो वो ऐसे ही सोये हुए है
फिर मा मेरी तरफ खिसक गई और इशारा किया मै उनकी चूचियो को चुसू

मै इतना अच्छा ऑफ़र कैसे मना कर पाता और झुक कर मा की चुचियो को दोनो हाथो से पकड़ा और उन्के निप्प्ल तन कर सामने आ गये फिर मैने जीभ निकाल मा मुनक्के जैसे निप्प्ल को चाटने लगा
और जीभ को नुकीला कर उनकी निप्प्ल के चारो तरफ के भूरे घेरे मे गोल गोल जीभ चलाने लगा और बिच बिच मे निप्प्ल को जोर से चुस भी लेता

मा आंखे बंद कर मेरे सर को अपने बड़े बड़े चुची मे दबाए हल्की हल्की सिसकियाँ ले रही थी
तो मैने भी मौके की नजाकट को समझा और चुचियो को चुस्ते हुए मा की कमर को पकड कर अपनी तरफ खिच लिया जिससे मेरा लोवर मे खड़ा लण्ड मा जांघो के बिच टकरा गया और मैने भी मा तरफ आगे कमर खिसका कर मा की चुचियो मे एक को एक हाथ से दबाते हुए दुसरे को मुह मे भर कर चूसने ल्गा

मा की मदहोसी बढने लगी वो मेरे सर के साथ साथ मेरे पीठ पर भी हाथ फेरने लगी
मै भी समझ गया मा अभी मेरे नियन्त्रण मे है कुछ पल के लिए
तो क्यो ना थोदा आगे बढ़ा जाय
फिर मैने भी अपना हाथ मा के कमर से उनकी पेतिकोट मे कसी चुतडो पर ले जा कर उनकी गोलाई मापने लगा

मेरा मा के चुतडो पर स्पर्श उनको मेरे लण्ड के और करीब ले आया ,,, मैने भी अपनी कमर को ओर मा की तरफ किया जिस्से मेरा लोवर मे खड़ा लण्ड मा की गुदाज जांघो मे घुस गया
अब मैने मा के चुतडो को पकड कर अपनी तरफ खीचते हुए अपनी कमर हल्की हल्की चलाते हुए मा के चुचो को चूसने ल्गा

जिससे मा की उत्तेजना भी मेरे तरह बढ़ गयी वो भी मेरी कमर को पकड कर तेज़ी से अपनी जांघ को मेरे लण्ड पर घिसने लगी ,, नतीजन मा और मै करीब 1 मिंट मे अंदर ही अंदर झडने लगे और एक दुसरे को झटके देने लगे
फिर हम थक कर एक दुसरे से चीपके रहे
फिर मा बोली - बेटा उठ जा तू ऊपर फ्रेश हो ले
मै मा को छोड़ना नही चाहता था ना जाने कैसा एक जुडाव हो गया मा से
मै - मा अभी आपसे ढेर सारी बाते करनी है और बहुत सारे सवाल हैं
मा मेरे सर पर हाथ फेरते हुए मुस्कुराइ - बेटा सब बताउन्गी अभी तू जा फ्रेश हो ले , कहीं तेरे पापा न जग जाये , हम लोग दोपहर में बात करेंगे इस बारे मे और किसी से कुछ बताना मत

मै खुश होते हुए हा मे सर हिलाया और ऊपर चला गया और सीधा बाथरूम मे घुस गया

अब देखते आगे क्या होता है

दोस्तो बिजली की समस्या होते हुए भी आपसे किये वादे को मान देते हुए ये एक छोटा सा अपडेट दिया है । अपना प्यार और सपोर्ट बनाये रखे ।
आपकी प्रतिक्रियायो और सुझाव का स्वागत है ।
मां भी साली बेटाचोद है और बेटा भी मादरचोद
 

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मस्त चूदाई की कहानी है दोस्त मजा आ रहा है।
Keep enjoying dost
 

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Sanju@

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UPDATE 110

CHODAMPUR SPECIAL UPDATE

पीछले अपडेट मे आपने पढ़ा जहा एक तरफ जानिपुर मे राज की मौसी रज्जो को ये पता चल गया था कि उसका नंदोई राजन उसको नंगी देख कर अपना रस टपका चुका था और वही चमनपुरा मे चंपा ने राज को अपना ऐसा जलवा दिखाया कि एक ही बार मे राज बाबू ढेर गये । फिलहाल राज के घर पर कोई मेहमान आया है तो देखते है राज की जुबानी वहा का हाल ।

अब आगे


मा किचन मे जाने लगी और पापा को नहाने जाने को बोला ,,ऐन मौके हमारे घर की बेल बजती है।
हम तीनो की नजरे आपस मे मीलती है और हम एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते है ।

मा ह्स कर - जा बेटा देख शकुन्तला दिदी आई होंगी ।

मै - हा वही होंगी
मै दरवाजे की ओर जाने तभी मा पापा से - और आप ऐसे ही रहेंगे क्या


पापा ने एक अंगदायी ली और बोले - अरे अब भाभी आई है तो रुक कर नहा लेता हू

मा ह्स कर - मै खुब समझ रही हू आपकी चालाकी

इधर तब तक राज शकुन्तला को लिवा कर हाल मे आता है ।
मा - अरे दीदी आप ,,आईये बैठीए मै पानी लाती हू।

पापा एक नजर शकुन्तला पर डालते है जो आज साडी पहन कर आई थी और पल्लू के अन्दर से झांकते ब्लाउज के बटन का रंग देखने का प्रयास करते है ।

पापा - और बताईए भाभी क्या हाल चाल है
शकुन्तला - सब ठीक है भाईसाहब,
मा तब तक हाल मे पानी लेके आती है - अरे दीदी कभी कभी काजल बिटिया को भी भेज दिया करिये ।

शकुन्तला - आने को तो तुम भी आ सकती हो ,कभी आती हो
मा ह्स कर - हा अब दुकान से घर , घर से दुकान ,,फुर्सत नही मिलती ,,वैसे रोहित कब तक आ रहा है ।

शकुन्तला अपने बेटे की चर्चा सुन कर काफी लालयित हुई - हा वो अगले हफते आने वाला है ।

मा खुश होकर - अरे वाह फिर तो हम लोग भी मिल लेंगे ,, कभी मिलना नही हुआ उससे

शकुन्तला - हा हा क्यू नही ,,जैसे ही वो आयेगा मै खुद खबर करूंगी ।

पापा ह्स कर - अरे हा वैसे भाई साहब क्या करते है ,,मुलाकात तो उसने भी नही हुई क्यू रागिनी

शकुन्तला पापा के सवाल से एक दम चुप हो गयी
मा ने शकुन्तला की हालत देखी तो वो समझ गयी तो उसने फौरन बात को बदल दिया ।

मा - अरे दीदी आप पानी पीजिए ,, और राज बेटा वो जरा झोला लाओ जिसमे दीदी का समान है ।

पापा ने बहुत गौर से मा को बात बदलते देखा और मुझे भी कुछ अटपटा सा लगा ।
फिर मै अपने कमरे से वो पैन्टी का पैकेट लाकर मम्मी को दिया ।

मा शकुन्तला को वो पैकेट देने लगी तो पापा - अरे रागिनी एक बार दिखा तो दो खोल कर भाभी को ,वो भी संतुष्ट रहेगी ना ।

शकुन्तला शर्मा कर पापा को देख कर मुस्कुराने लगी ,,मै और मा तो पापा की नियत से अन्जान थे नही तो हम भी मुस्कुराने लगे ।

शकुन्तला - अरे नही कोई बात नही मै घर देख लूंगी ।
पापा - अरे भाभी बस दो मिंट की बात है । खोलो रागिनी

फिर मा ने मुस्कुरा कर वो पैकेट खोल कर एक पैंटी निकाल कर शकुन्तला को दी ।

शकुन्तला बडी झिझक कर पापा को देखते हुए वो पैंटी मा के हाथ से ली और उसे देखने लगी तभी उसकी नजर पैंटी के लेबल पर गयी जिस्पे साइज़ 42 लिखा था ।

शकुन्तला थोडा सोचते हुए - अरे रागिनी ये तो 42 नम्बर है ना

मा ह्स्ते हुए - अरे आपने अपनी कच्छी की हालत देखी भी थी दीदी ,,कैसे लास्टीक ढीली हो गयी थी ,, मेरे ख्याल से आपका साइज़ बढा है इसिलिए 42 दे रही हू ।


मा की बाते सुनकर शकुन्तला की आंखे बडी हो गयी और वो एक नजर पापा को देखती है जो मुस्कुरा रहे थे और फिर शर्मा कर खुद भी मुस्कुराने लगती है ।

शकुन्तला पापा की ओर इशारा कर - क्या रागिनी तू भी हिहिहिही देख कर तो बोल


मा हस कर - क्या दीदी इसमे क्या शर्माना आप भी ना ,कपडे तो है और क्या ? हिहिहिही

फिर ऐसे ही हमारी थोडी बाते चली और फिर शकुन्तला अपने घर चली गयी ।

मा हस कर - कर ली ना अपने मन,,आपको बड़ा शौक है दूसरो की कच्छीया देखने ,, आपको तो कास्मेटिक वाले दुकान पर ही बैठना चाहिये, ठरकी कही के हिहिही

मा की बाते सुन कर मै हस पडा और पापा मुस्कुरा कर अपने उपर खिच लेते है ।

पापा - अरे जान थोडा मस्ती मजाक तो चलता ही है ,,आखिर भाभी है मेरी हाहहहा

मा पापा की बाहो मे कसमसा कर - ओह्ह हो अब छोडिए ,,मुझे खाना ब्नाना है ,,

पापा मा के गाल को चूम कर - अरे छोड दूँगा जान ,,पहले ये बताओ कि तुमने भाईसाहब के बारे मे पूछने से क्यू रोका ।

पापा की बातो पर मैने भी सहमती दिखाई तो मा सिरिअस होकर पापा की गोद से उतरते हुए - वो क्या है ना जी , शकुन्तला दीदी के पति करीब 15 सालो से दुबई मे है और वही सेटल है और अभी पिछले साल पता चला कि उन्होने वही किसी खातुन से शादी कर ली है ।


मा की बाते पापा और मै चौक गये ।
पापा - क्या सच मे ,,,

मा - हा जी ,,इसिलिए पिछ्ले ही शकुन्तला दीदी ने अपना ससुराल छोड दिया और अपने बेटे के पास रहने चली गयी थी । फिर जब यहा चमनपुरा मे उनके बेटे रोहित ने घर बनवा दिया तो वो अपनी बहू के साथ यहा चली आई ।

मा की बाते सुन कर पापा और मै बहुत शौक मे थे । कि आखिर इतना अच्छा परिवार कोई छोड कैसे सकता है वो भी अपना भी बेटा और बीवी को ।

मामले को गंभीर होता देख मा बोली - चलो भाई तुम लोगो ने तो मजा ले लिया अब खाना अकेले मुझे बनाना है ।

मै चहक कर - मा मै भी मदद करू
पापा भी खुश होकर - हा जानू आज तुम रहने दो, आज खाना हम बनायेन्गे , क्यू बेटा

मै खुशी से - हा क्यू नही पापा हिहिहिहीही

फिर हम सब किचन मे चले गये और मा को वही मैने डायनिंग टेबल पर बिठा दिया । मा हस कर हमे क्या कया करना है बताती रही और हम वैसे वैसे खाना बनाते रहे ।

रोटीओ मे कभी मिनी श्रीलंका तो कभी आस्ट्रेलिया बनता , मगर जिद थी तो बनाना ही था । कौन सा कोई बाहरी आने वाला था ।

20 रोटिया और आलू गोभी सब्जी बनाने मे हम बाप बेटे की हालत खराब हो गयी ।
लेकिन जैसा भी था मस्ती भरा समय बिता । खाने के बाद मा ने बर्तन खाली किये और फिर हम सब अपने रात के कामो मे लग गये ।


लेखक की जुबानी

एक तरफ चमनपुरा मे ये सब घटित हो रहा था वही जानीपुर मे राज के मौसी के यहा भी मस्तिया कम नही थी ।

घर मे रज्जो ने सबसे कामो की वसूली करवाई और सोनल की शादी को लेके बहुत खिचाई हुई । पल्लवी तो थी ही चुलबुली , उसने भी थोडे बहुत मजे लिये ।

शाम को 7 बजे तक सारे लोग एकजुट हुए और कल के लिए प्लानिंग होने लगी कि कैसे कैसे काम होना है ।

रमन और अनुज अभी भी दुकान से वापस नही आये थे क्योकि शहर की दुकानो पर बिक्री देर रात तक चल्ती है ।

सोनल और पल्लवि किचन मे चले गये क्योकि रात के खाने का इन्तेजाम होना ।

कमलनाथ ने मौका देखकर राजन को उपर चलने का इशारा किया जिसे रज्जो समझ गयी ।

रज्जो - कहा जी कहा जी ,,हम्म्म
कमलनाथ अंगड़ाई लेने के हाथ उपर किया कि रज्जो की नजर अपने पति के कुर्ते के बाहर झांकी दारु की शिसी के लेबल पर गयी ।

कमलनाथ -बस ऐसे ही टहलने और क्या ।
रज्जो मुस्कुरा कर - ठीक है जाईये ,,अभी ममता के हाथ से चखना भिजवा रही हू ।

कमलनाथ रज्जो की बात पर चौक गया और फटाक से हाथ निचे कर दारु के शिसी को पकड कर चेक किया कि समान है या नही ।

कमलनाथ की इस हरकत से रज्जो हसने लगी - अरे जाईये ,,कब्जा नही करूंगी मै उसपे ,,मेरा कब्जा कही और है वो ममता जानती है ,,,क्यू ममता सही है ना

ममता अपने भाभी का मतलब समझ गयी और उसे सुबह बाथरूम के पास अपनी भाभी से हुई बातचीत याद आ गयी ।

ममता मुस्कुरा कर अंजान बनते हुए - नही तो भाभी मुझे ऐसा कुछ नही पता

राजन - कैसा कब्जा भाभी जी हमे तो बताईए

ममता को मानो मौका मिल गया रज्जो को छेड़ने का तो वो हस्ते हुए - हा हा भाभी बताओ ना कैसा कब्जा

रज्जो भी कहा कम थी वो हस्कर - है जीजा जी एक जगह , जहा से मुझे हटा कर ममता खुद कब्जा चाहती है ,,,क्यू ममता बता दू हिहिहिही

ममता की हालत खराब हो गयी और वो एक बार फिर से खुद को कोसने लगी कि आखिर वो क्यू अपने भाभी से उलझ पड़ती है ।

ममता बात को बदलते हुए - क्या भाभी आप कब्जा कब्जा की हो , इनको जाने दीजिये ,,चलिये किचन मे खाना बनाना है अभी ।

रज्जो ममता की मजबूरी पर ह्स्ते हुए उठकर किचन मे जाने लगी ।

कमलनाथ - सुनो रमन की मा ,, वो जरा नमकीन वाला पैकेट दे दोगी क्या ।

रज्जो ममता को लेके किचन मे चली गयी और खुद एक नमकीन का पैकेट और डिसपोजल ग्लास लेके आई ।

रज्जो वो समान राजन को देते हुए - जीजा जी लिजिए ,, आपकी जिम्मेदारी है कि ज्यादा ना पिए ठीक है ।

रज्जो की बात पर राजन बहुत हल्की आवाज मे बोला - हा अब ज्यादा पी लेंगे तो आपकी ठुकाई नही हो पायेगी ना

रज्जो ना मानो आखिर के श्बदो को भाप लिया हो तो वो तपाक से बोल पडी - कुछ कहा आपने जीजा जी

राजन हड़बड़ा कर - अब ब नही भाभी ,, वो मै सोच रहा था कि बच भी गया तो क्या मतलब ,, खुली बोतल खराब हो जायेगी

रज्जो हस कर -अरे तो क्या हुआ एक एक पैग हम दोनो लगा लेंगे हिहिहिहिही

कमलनाथ - कभी हमारे साथ ये ऑफ़र नही रखा

रज्जो इतरा कर - अब जीजा जी मेहमान है ,,इनके लिए तो ऑफ़र रखना ही पडेगा ।

राजन रज्जो के इतराने से सिहर गया कि उसकी सलहज तो खुल्लम खुलल लाईन दे रही है । मगर क्यू ।

रज्जो ह्स कर - तो जीजा जी लगायेंगे ना मेरे साथ हिहिही

राजन ने सोचा इससे अच्छा मौका क्या हो सकता है ,,आज थोडा बहुत नशे के नाटक कर इनकी गुदाज गदराई जिस्मो का मजा तो ले ही सकता हू ।

राजन - हा हा क्यू नही ,,लेकिन खाने के बाद हिहिही

रज्जो - आप जब कहे जीजा जी ,हिहिही

फिर रज्जो किचन मे चली गयी और राजन कमल्नाथ के साथ उपर उसके कमरे मे ही चला गया ।

फिर कमलनाथ ने पैग बनाए और आधी शिसी ही खतम की । आज का माल और भी तगडा था तो कमलनाथ वही बैठे हुए बाते करते हुए सोफे पर ही सो गया ।
राजन ने समय देखा तो 9 बजे गये थे तो उसने आधी खाली बोतल बंद की और उसे अपने कुरते मे रख लिया ।

फिर वो गुनगुनाते हुए निचे हाल मे उतर आये ।

तभी ममता हाल मे अपने पति को देख कर - अरे आ गये,,भैया कहा है ?? आप चलिये किचन मे बैठीये भाभी खाना लगा रही है ।

राजन ममता को कुछ सम्झाता उससे पहले ही ममता सीढियो से उपर अपने भैया को बुलाने के लिए चली गयी ।

कमरे मे जाते ही ममता को उसके भैया सोये हुए दिखे ।

ममता उन्के पास गयी तो उसे शराब की हल्की गन्ध आई तो उसने बुरा सा मुह बना कर - ओह्हो ये भैया भी ना ,,खाना भी नही खाये और सो गये ।

ममता कमलनाथ के सामने जाकर खड़ी हो गयी और झुक कर उसका कन्धा पकड कर हिलाते हुए- भैया उठिए ,,,चलिये खाना नही खाना क्या

दो चार हिलाने पर कमलनाथ की नीद खुली मगर नशे से उसकी आंखे पूरी नही खुल रही थी और दारु का असर भी बहुत था ।

कमलनाथ को अपनी धुन्धली आन्खो से अपने सामने झुकी हुई ममता को रज्जो समझ लिया - अरे जानू तुम आ गयी काम खतम करके ,,,, चलो ना अब मेरा लण्ड चुसो ,, लो मै खोल रहा हू ,,,

ममता की सासे अटक गयी कि उसके भैया नशे मे उसे पहचान नही रहे ।
डर से उसकी आवाज नही निकल रही थी ,,वो क्या बोले और वो जल्दी से अपना हाथ छुड़ा कर निचे भाग गयी ।

वही कमलनाथ जल्दी जल्दी बड़ब्डाते हुए अपना पैजामा खोल कर लण्ड बाहर निकाल देता है और फिर वैसे ही बडबड़ाते हुए सो जाता है ।
कमरे से भागते हुए ममता आखिर की सीढिओ से पहले रुकती है और अपनी सांसे बराबर कर अभी उपर हुए हादसे हो सोच कर हसने लगती है ।

ममता मन मे - उफ्फ्फ ये भाईयाआआ भीईई ना हिहिहिहिही

ममता हाल मे आती है और फिर किचन मे खाने के लिए बैठ जाती है । अनुज और रमन भी आ चुके थे ।

ममता - भाभी वो भैया सो गये , शायद खाना नही खायेन्गे

रज्जो अपना माथा पीट कर - मतलब आज भी ज्यादा ले लिये ।

रज्जो राजन से - क्या जीजा जी आपको ध्यान देना चाहिए ना

राजन - अब ब मैने तो रोका लेकिन वो माने नही ,,, अब मै क्या कर सकता था ।

रज्जो - हमम चलिये छोडिए खाना खाते है हम लोग

फिर सबने खाना खाया और धीरे धीरे सारे लोग अपने अपने कमरो मे जाने लगे । सिवाय राजन , ममता और रज्जो के ।
राजन वही हाल मे बैठ कर किचन मे खड़ी अपनी सल्हज रज्जो को निहार रहा था और अपना लण्ड कस रहा था ।

वही किचन मे ममता को अपने भैया की चिंता हो रही थी कि वो बिना खाये ही सो गये ।

रज्जो बर्तन धुलते हुए - क्या हुआ ममता क्या सोच रही हो ?
ममता - वो भाभी ,,भैया ने कुछ खाया नही
रज्जो ह्स कर - क्या तू भी ,,उनकी आदत है वो जाने दे ।

ममता - लेकिन फिर भी भाभी रोज रोज ऐसे तो उनकी तबियत खराब हो जायेगी

रज्जो हस कर - नही रे , वो हमेशा नही पीते बस घर पर फ्री रहते है तो हो जाता है कभी कभी हिहिही

रज्जो ममता को मुरझाए देख मुस्कुराई- अगर इत्नी ही चिन्ता है तो एक थाली मे खाना लेले और जा अपने भैया को खिला देना और वही सो जाना

ममता रज्जो की बात पर मुस्कुराइ- फिर आप कहा सोयेन्गी हिहिही

रज्जो ह्स कर - आज तो मेरा जीजा जी के साथ पैग लगाने का मूड है हिहिहिजी

ममता चौक कर - क्या सच मे आप दारु पियेन्गी

रज्जो हस कर - अब अपने नंदोई का दिल कैसे तोड दू

ममता मुह बना कर - छीईईई फिर तो मै नही आने वाली उनके कमरे मे आज ,,,,

रज्जो हस कर - मै तो कह ही रही हू तू आज अपने भैया के साथ सो जा हिहिही

ममता उखड़ कर - क्या भाभी आप भी ,, मै आज पल्लवी के साथ ही सो जाती हू ,,

रज्जो हस कर - जैसी तेरी मर्जी हिहिहिहिही

ममता हाल मे आई और गुस्से मे तिलमिला कर राजन को देखा तो उसे कुछ समझ नही आया और वो सीधा पल्लवि के कमरे की ओर बढ गयी ।

राजन को कुछ समझ नही आया और वो भौचक ही देखता रहा ।

वही किचन मे रज्जो ने सारा काम खतम कर हाथ पोछते हुए हाल मे आती है ।

राजन - वो ममता को क्या हुआ
रज्जो मुस्कुरा कर - उसको मुझे आपके साथ देख कर जलन हो रही है हिहिहिही

राजन असमंजस मे मुस्कुराते हुए - मै समझा नही

रज्जो हस कर - हिहिहिही अरे वो मैने उसको हमारे पैग लगाने के बारे मे बता दिया तो वो पल्लवि के पास सोने चली गयी ।

राजन हस कर - ओह्ह्ह हाहहहा कोई बात नही ,,उसे भी मेरा पीना पसंद नही
रज्जो हस कर - कोई बात नही मै हू ना साथ देने के लिए हीहिहिही ,,तो चले

राजन उठ कर - हा क्यू ही
रज्जो मुस्कुरा कर - ठीक है आप ऊपर चलिये कमरे मे ,,यहा बच्चे आ गये तो उनके सामने अच्छा नही लगेगा ,,,

राजन ने भी रज्जो की बात पर सहमती दिखाइ तो रज्जो हस कर बोली - ठीक है फिर आप चलिये मै ग्लास और कुछ खाने का लाती हू हिहिही

राजन मुस्कुरा कर उपर की ओर चल दिया ।

राजन सीढिया चढ़ते हुए आगे की प्लानिंग करते हुए सोच रहा था - अच्छा हुआ ममता चली गयी , नही तो उसके सामने मै कुछ कर नही पाता ,,,और देखता हू आज कितना काम बन पाता है ।

धीरे धीरे राजन उपर आया तो पहले कमलनाथ का कमरा था जो हल्का खुला था । राजन मे एक नजर कमरे मे मारा तो कमलनाथ वैसे ही सोया हुआ था ।

राजन मन ही मन हस कर - इनको देखो ,,,इतनी गदराई मालदार बीवी के रहते दारु के नशे मे पडा है हाहाहाहा ,, आज अगर मौका मिल गया तो आज ही पेल दूँगा भाभी जी को ,,, लेकिन क्या इतनी जल्दीबाजी ठीक रहेगी । कुछ योजना तो बनानी पडेगी ।

राजन वही विचार करते हुए अपने कमरे मे गया और फिर एक योजना के तहत अपने सारे कपडे निकाल के एक जान्घिये और फुल बाजू की बनियान डाल ली । फिर रज्जो के आने का इन्तजार करने लगा ।

जैसे ही रज्जो की आहट मिलती ही वो वैसे ही बिस्तर के पास खडे होकर अपने कपडे फ़ोल्ड करने लगता है ।
इतने मे रज्जो एक ट्रे मे ग्लास और थोडा च्खना लेके पर्दा हटाकर राजन को आवाज देते हुए कमरे मे प्रवेश कर जाती है । मगर राजन की हालात देख कर वो फौरन मुह फेर लेती है ।

राजन नाटक करते हुए - अरे आप आ गयी क्या ,,,ओह्हो ये तौलिया नही मिल रहा है । रुकियेगा भाभी थोडा ।

रज्जो वही खडी खडी मुस्कुरा रही थी और कुछ सोच कर बोली - अरे नही मिल रहा है कोई बात नही , आईये बैथिये ।

रज्जो बिना राजन की ओर देखे सोफे पर बैठ कर सामने की टेबल पर ट्रे रखा ।

राजन भी अपना कुर्ता लेके, उससे अपने रोयेंदार सख्त जान्घो को धक कर बैठ गया ।
रज्जो को भी थोडी सुविधा हुई ।

राजन अपने कपड़ो के लिए बहाना बनाता हुआ - वो सोचा कि अब सोने का समय है तो कपडे निकाल दू ,,मगर तौलिया नही मिला

रज्जो मुस्कुरा कर - अरे कोई बात नही ,,, चलिये फिर शुरु करिये

राजन हस कर - मै बनाऊ फिर
रज्जो हस कर - हा आप ही बनाईए ,,मैने बनाने लगी तो नशा ज्यादा हो जायेगा आपको हिहिही

राजन रज्जो की बात से सम्भला और उसे याद आया कि उसे बहकना नही है बल्कि मौके का फ़ायदा लेना है ।

राजन हस कर - अरे नही नही मेरे रहते अब आपको काहे की तकलिफ ,, आप साथ दे रही हैं वही काफी है ।

फिर राजन एक हल्का पैग बनाया और रज्जो को पेश किया ।

रज्जो - शुक्रिया ,

एक सिप लेके ग्लास रख दी । हम्म्म बहुत नोर्मल है ये तो
राजन - हा लेकिन भाईसाहब का ब्राण्ड बहुत तेज है ,, पकड रहा है ।

धीरे धीरे बाते शुरु हुई कि किसने कब पहली बार शुरु की थी और करीब आधे घंटे मे रज्जो को बहुत ही हलका नशा होने लगा था ।

राजन - लग रहा है भाभी आपको नशा हो रहा है हिहिहिही ,,

रज्जो हस कर - हिहिहिही अरे ठीक है जीजा जी कोई बात नही ,,,अभी एक पैग और चलेगा

राजन इस बार और भी हल्का डोज वाला बनाया और रज्जो के हाथ मे थमाया , अचानक रज्जो के हाथ से वो दिस्पोजल ग्लास सरका और उसकी साड़ी पर ही गिर गया ।


राजन - ओह्ह हो भाभी ,,,ये तो गिर गया ,,,साडी खराब हो जायेगी ।

रज्जो - अरे कोई बात नही जीजा जी आप बैथिए मै अभी अपने कमरे मे जाकर इसको बदल देती हू ।।

राजन इस मौके को हाथ से जाने नही देना चाहता था इसिलिए - अरे कहा जा रही है ,, अच्छा खासा मूड बना लिया हिहिहिहिही ,,,यही ममता की कोई सादी पहन लिजिए ।

रज्जो मुस्कुराई और मन मे बुदबुदाइ - जान रही हू नंदोई जी आपकी चालाकी ,, ऐसा जलवा दिखाऊंगी की याद रखोगे अपनी सल्हज को ।

रज्जो - हा सही कह रहे , फिर रज्जो खडी हुई और पहले अपना पल्लू और फिर कमर से सारी साड़ी निकाल ली । फिर पेतिकोट मे ही कुल्हे मटकाते हुए आल्मरि तक गयी । चुकी राजन ने पहले ही तौलिये को अल्मारी मे रख कर चाभी छिपा दी थी इसिलिए आल्मारि बंद थी ।

रज्जो- अरे ये तो बंद है
राजन - अरे हा चाभी ममता के पास होगी ,,, रुकिये मै लाता हू

रज्जो मुस्कुरा राजन की ओर चलती हुई आई - अरे कोई बात नही ,, ऐसे ही ठीक है कौन यहा कोई बाहरी है हिहिही

राजन ने भी चैन की सास ली और अबतक उसने अपना कुर्ता भी जान्घ से हटा दिया था जिससे उसके जान्घिये मे उभार हल्का हल्का दिख रहा था ।

रज्जो राजन को देख कर मुस्कुराई- लाईए मै बनाती हू पैग
फिर रज्जो ने पैग बना के राजन को दिया ।
राजन हस कर - वैसे आप भाईसाहब के साथ क्यू नही लेती हिहिहिजी

रज्जो थोडा खुल के- परसो देख ही रहे थे ना उनकी हालत हिहिहिही वो बस अनाब स्नाब बोलते है ।

राजन एक नजर रज्जो के फैले हुए कूल्हो पर डाला और सिप लेते हुए- सही ही तो बोलते है भाई साहब हिहिहिही

रज्जो समझ गयी राजन की बात - क्या जीजा जी आप भी, कुछ भी बोलते है । हिहिहिही

राजन रज्जो की मोटी मोटी चुचियो को निहारते हुए हल्का सा जान्घिये के उपर से लण्ड के सर को दबाया और बोला - अब क्या कहू भाभी ,, मेरा बोलना उचित नही है ऐसे मामलो मे हिहिहिहीही आप समझ ही रही होंगी ।

रज्जो की नजर राजन के हाथ पर गयी जिस्से वो अपना लण्ड सहला रहा था ।
रज्जो हस कर- हा देख रही हू कि अब आपको ममता की जरुरत मह्सूस हो रही हैं हिहिहिही क्यू जीजा जी

राजन रज्जो को खुलता देख कर - क्यू आपको भाईसाहब के पास नही जाना क्या हाहहहा

रज्जो सिप लेते हुए और नजरे राजन के हाथो पर रखे हुए बोली - वो तो सो गये है ,,उनसे कहा कुछ होगा हिहिही

राजन रज्जो की हरकतो पर बराबर नजर बनाये रखा था और जब उसने देखा कि रज्जो लगातार उसके हाथो की क्रिया को घूरे जा रही है तो उसने अच्छे से लण्ड को पकड कर जान्घिये के उपर से ऐसे सहलाना शुरु किया जिससे लण्ड की मोटाई लम्बाई रज्जो को अच्छे से दिखे ।

राजन की इस क्रिया से रज्जो सिहर उठी ।
रज्जो मुस्कुरा कर - लग रहा है आपकी तलब ज्यादा है ,,,तभी शादी के बाद से मेरी ननद रानी के तबले को बड़ा कर दिया हिहिही

राजन ममता का मजाक समझ गया और बोला - वैसे कसर तो भाई साहब ने भी नही छोड़ी है कोई हिहिहीहीही
रज्जो राजन की बातो से शरमा के मुस्कुराने लगती है ।
फिर वो अपना ग्लास खतम कर उठने लगती है ।

राजन - अरे क्या हुआ कहा जा रही हैं भाभी जी

रज्जो ने बाथरूम जाने के इशारे वाली ऊँगली दिखाई और मुस्कुराइ

राजन हस कर - हाहाहा ,,चलिये मै भी चलता हू ,,मै भी फ्रेश हो लूंगा

फिर राजन अपने पैग का ग्लास लेके रज्जो के पीछे पीछे चल देता है । रज्जो उपर की सीढि लेके जान बुझ कर अपने चुतड मटका कर चल रही थी और राजन बडे ध्यान से उसके गाड का दोलन निहार रहा
छत पे पहुचते ही बहुत हल्की चांदनी रात मे ठंडी हवा चल रही थी। हलका हल्का सा ही कुछ दिख रहा था ।

छत पर जाते ही अरगन पर पडी तौलिये को देखकर रज्जो बोली - हिहिही देखिये ,,यहा है तौलिया

राजन ने मुस्कुरा कर हा तो कहा, लेकिन वो जानता था कि ये उसका तौलिया नही है ।


वही रज्जो अपने कुल्हे हिलाते बाथरुम तक गयी और लाईट जलाकर बिना दरवाजा बंद किये जान बुझ कर वही बैठ गयी ।

राजन बाथरूम के बाहर ही खड़ा हो गया और थोडी ही देर मे रज्जो ने सुरीली धुन छेड़ दी । राजन मन मुग्ध हो गया और दरवाजे पर आकर एक बार अन्दर झाका तो रज्जो की फैली हुई गाड देख कर उसका लण्ड तन गया और वो अपना लण्ड जांघिये के उपर से मुठियाने लगा ।

रज्जो उठी और राजन फौरन हट गया ।

रज्जो बाहर आई - जाईये आप भी फ्रेश हो लिजिए

राजन ने अपना पैग रज्जो को थमाते हुए - इसे जरा पकड़ेगी भाभी मुझे नाड़ा खोलना पडेगा ना

रज्जो हस कर राजन का ग्लास ले लेती है और राजन मस्ती मे बाथरूम मे जाके नाड़ा खोलने के बजाय उसे कस देता है ।

दो तिन मिंट तक रज्जो कोई प्रतिक्रिया ना पाकर दरवाजे के पास आकर - जीजा जी सब ठीक है ना

राजन - हा वो जरा मेरा नाड़ा तंग हो गया है खुल नही रहा

रज्जो हस कर - मै मदद करू क्या
राजन की तो चान्दी हो गयी ।
राजन - हा अगर आपको एतराज ना हो तो ,

रज्जो फौरन बाथरूम मे आई ग्लास को राजन को देते हुए - ये पकड़ीये आप इसे मै खोलती हू ।

रज्जो झुक कर राजन के नाडे के गांठ को खोलने लगी मगर उसकी नजरे बराबर जान्घिये मे खडे लण्ड के तनाव पर बनी थी

यहा सच मे राजन का प्रेसर तेज था और वो खुद चाह रहा था किसी तरह नाड़ा खुल जाये । उसकी मस्ती अब उसपे ही भारी थी ।

रज्जो कुछ समय झुक रही तो उसके कमर मे दर्द होने लगा ,,इसिलिए वो एड़ियो के बल राजन के ठीक सामने बैठ गयी और गांठ खोलने लगी ।

राजन की लण्ड ने लीकेज शुरु कर दिया था ,,वो कभी भी अपना नियन्त्रण खो सकता था ।
राजन परेशान होकर कर - क्या हुआ भाभी ,,जल्दी करिये बहुत तेज उम्म्ंम्म्ं

रज्जो हड़ब्डा कर - हा हा बस खुल रहा है ,,लो खुल गया

रज्जो के इत्ना बोल के जांघिया निचे की ही थी और लण्ड अभी पूरी तरह से बाहर निकला ही नही था कि राजन के सबर का बान्ध फुट पड़ा, उसके सुपाडे से पेसाब की तेज धार जन्घिये को चिरते और छिटकारे मारते हुए रज्जो के गले और छातियो पर जाने लगी ।

रज्जो चिल्लाई - यीईई जिजाआआआ जीईई ये क्याह्ह्ह्ह

राजन को रज्जो की बात का ध्यान आया तो उसने निचे देखा और फौरन अपनी मुठ्ठि से सुपाड़े को दबा लिया,,जिससे पेसाब के छीटें और छिटके ,,,कुछ रज्जो के चेहरे पर बाकी राजन की बनियान और जान्घिये मे

राजन फौरन दुसरी ओर घुम गया और पेसाब की तेज धार छोड़ते हुए एक राहत ही सास ली


राजन ने पेसाब करके जांघिया को उपर किया और हल्का सिंगल गांठ ही दिया था ।

राजन रज्जो को देखकर जो अभी निचे ही बैथी हुई अपने सीने से पेसाब को हटाने की कोसिस कर रही थी ।

राजन - माफ कीजिएगा भाभी जी वो अन्जाने मे ,,मुझसे रोका नही गया ,,,हे भगवान ये क्या अनर्थ हो गया मुझसे ।

राजन रज्जो को पकड कर उठाते हुए - उठिए भाभी जी आप आईये

तभी रज्जो को उठाने के चक्कर मे राजन का जांघिया सरक जाता है और रज्जो खिलखिला पडती है ।

रज्जो - पहले खुद का समान सम्भालिये हिहिही
राजन फौरन अपना जांघिया उठा कर उसे अच्छे से बान्धता है ।

राजन - माफ कीजिएगा भाभी जी वो गलती से हो गया , आईये इधर मै धुला देता हू

रज्जो मुस्कुरा कर राजन को देख रही होती है । उसका ब्लाउज भी थोडा भीग गया था ।

राजन और रज्जो एक पानी भरे टब के पास आते है तो राजन मग से पानी निकाल कर रज्जो के सामने गिराता है जिसे रज्जो अपनी अंजुली मे भर कर गले और सीने को धोने की कोशिस करती है ।

वही राजन का लण्ड रज्जो की लटकी हुई चुचियो को देख कर टनटना गया था ।

राजन - मेरे ख्याल से आपको नहा लेना चाहिए भाभी जी

रज्जो एक नजर राजन के पेसाब से भिगे कपडे देख कर - नहाने की जरुरत तो आपको भी है हिहिहिही

राजन - हा सही कह रही है , ऐसे गंदगी लेके निचे जाना उचित नही है , मगर हमारे कपडे भी तो नही

रज्जो हस कर - अब भी आपको कपड़ो की पडी है हिहिहिही

राजन रज्जो की बात समझ गया ।
रज्जो ह्स कर - आप न्हायिये , मै तैलिया लेके आती हू


रज्जो बाथरुम से निकल गयी और राजन ने सोचा की अब क्या फर्क पडने वाला है इसिलिए वो फटाफट अपने सारे कपडे निकाल कर नंगा हुआ और टोटी चालू कर नहाने लगा ।

इतने मे रज्जो तौलिया लेके बाथरूम के दरवाजे तक गयी तो देखा कि राजन उसकी ओर पीठ करके नंगा खड़ा है और साबुन लगा रहा है ।

रज्जो मुस्कुराइ और राजन के नहा कर बाहर आने का इन्तेजार करने लगी ।
थोडी देर बाद राजन नहा कर दरवाजे की ओर घुमा था रज्जो उसकी ओर पिठ करके खड़ी थी ।

राजन दरवाजे का ओट लेके - हा भाभी तौलिया दीजिये

रज्जो मुस्कुरा कर उसे तौलिया दी और राजन उसे लपेट कर बाहर आ गया ।

राजन - आप नहा लिजिए भाभी ,,मै अभी बदन पोछ कर देता हू आपको

रज्जो मुस्कुराई और बाथरूम मे घुसकर दरवाज बंद कर लिया ,,,राजन की उम्मीदो पर पानी फिर गया मानो ,,,

वही एक तरफ जहा उपर खुले छत पर नंदोई सलहज का ये कामुक ड्रामा हो रहा था वही पल्लवि और सोनल के साथ सोयी ममता अपने भैया को लेके बहुत ही बेचैन थी ।

और उसे नीद नही आ रही थी कि उसके भैया बिना खाये सो गये है । ममता गाव से जुडी थी और खुद खेती करती थी तो उसे बिल्कुल नही पसंद था कि शराब या गलत आदतो की वजह से अनाज का अनादर करे और फिर उसके भैया भुखे सोये ये उसे रास नही आ रहा था ।

इसिलिए उसने ठाना कि उसे एक बार फिर अपने भैया के पास जाना चाहिए खाना लेके ।
एक नयी उम्मीद के साथ किचन मे गयी और एक थाली मे खाना निकाल के एक जग पानी लेके उपर कमरे की ओर गयी ।

ममता ने नजर अपने कमरे की ओर मारी तो उसे राजन और रज्जो का ख्याल आया कि वो लोग भी आज दारु पी रहे होंगे ।
इसिलिए मुह बिच्का कर ममता सीधा खाना लेके अपने भैया कमलनाथ के कमरे मे गयी ।

उसने कमलनाथ पर बिना ध्यान दिये सामने की टेबल पर खाना रखा और अपने भैया के बगल मे बैठते हुए बडे प्यार से कमलनाथ को पुचकारा

ममता - भैया उठो ,,, भईआआ ऊ
ममता की आवाज रुक गयी ,,उसकी सांसे तेज होने लगी , क्योकि उसकी नजरे इस वक़्त उसके भैया के पैजामे से बाहर निकले लण्ड पर थी । जिसे वो आंखे फाडे देखे जा रही थी ।


जारी रहेगी
आप सभी की प्रतिक्रयाओ का इंतजार रहेगा

अपडेट कैसा लगा जरुर बताये
बहुत ही कामुक और गरमागरम अपडेट है
 
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