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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

DREAMBOY40

सपनों का सौदागर 😎
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रागिनी अनुज स्पेशल
EROTIC SUNDAY

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COMING SOON
इरोटिका का धमाका
Be ready for Erotic Sunday of this journey
:jerker:




 
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Sis lover

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Update 47 {(MEGA)}

मै मामी के साथ सामान लिये मामी की साडी मे थिरकते चुतडो को निहारते हुए जा रहा था । फिर हम स्टोर रूम तक गये तो मामी ने स्टोररूम का ताला खोलने के लिए अपनी कमर मे खोसी हुई चाभियो के गुच्छे को निकाला , लेकिन चाभी के गुछे के छल्ले का पिन उनकी साडी से फसा हुआ था और मामी ने थोडा जोर देके खीचा था जिससे उनकी साडी का कुछ हिस्सा उन्की कमर से बाहर की तरफ निकल गया और उनकी नीले रंग की पेतिकोट दिखने लगी ,,,लेकिन मामी बिना उसे अंदर खोसे वैसे ही झट से अंदर घुसी और मै भी उन्के पीछे अंदर चला गया और फिर मामी पास के एक टेबल पर सामान रखने को कहा और मै वापस सामान रख कर उनकी तरफ घुमा तो वो एक बडे बक्से को खोल कर उसमे झाक रही थी और एक गठरी निकाली जो एक पुरानी लुंगी की थी ।

मामी - राज पहले वो कम्बल इसमे डालो
मै कम्बल का गत्ठर उथा कर बक्से मे एक किनारे रख दिया
फिर शाल की गठरी को भी बक्से मे डाल दिया

मै - ये गथरी भी डाल दू मामी
मामी - नही इसे उठा लो और कमरे मे ले चलो
इधर हम काम मे लगे थे और उधर मामी की साडी धीरे धीरे काम करने से खुल रही थी । अब करीब बीते भर जितना मामी का पेतिकोट दिखने लगा ।
लेकिन मामी का इसपे कोई ध्यान नही था फिर हम बाहर निकले और जब मामी ने दरवाजा बंद करके ताला मारा और फिर जब चाभी खोसने के लिये कमर मे हाथ डाला तो

मामी - हाय दईया ये कब निकल गया
मै ह्सते हुए - वो तो जब हम अन्दर घुसे तभी निकल गया हिहिहिही

मामी - और आप जनाब मज़े से नजारा देख रहे है । ये नही की बता दे , कोई देख लेता तो
मै हस्ते हुए - लेकिन मामी कुछ दिख कहा रहा है हिहिहिही

मामी - क्यू और भी खोल कर देखना है क्या अभी
मै - मैने तो देखा ही है ना
मामी - अच्छा वो कब
मै - बचपन मे भुल गयी क्या आप मुझे नहाते समय छेड़ती तो मै भी आपको नहाते समय परेसान करता था हिहिहिही

मामी - हम्म्म्म बहुत बाते याद है क्या बचपन की
मै - मै हा सब
मामी - अच्छा फिर तो वो भी याद होगा न जब आप सीढ़ी से गिरे थे और आपके पीछवाड़े पर चोट लगी थी ,, एक हफ्ता तक मालिश मुझे करनी पडी थी

मै शर्मा कर - हा याद है कैसे भूल सकता हू ,, बदले मे मैने भी तो मालिश की है काफी बार आपकी कमर मे
मामी - हम्म्म बहुत याद आ रही है क्या मालिश कहो तो आज भी कर दू
मै - कर दो ना मामी मै तो तैयार ही हू ,,,लेकिन आगे पीछे दोनो तरफ करना पडेगा । हिहिहिहिहिही


ये बोल कर मै मामी के कमरे की तरफ भागा और मामी भी मेरे पीछे साडी पकड कर भागती हुई आई
लेकिन मै पहले पहच गया था और मामी दौड़ कर आते ही सांसे बराबर करने लगी

उनकी तेज सांसो से उनकी चुचिया उपर निचे हो रही थी । फिर मेरी नजर जब मामी के कमर पर गयी तो देखा कमर से पूरी साडी खुल चुकी थी और पेतिकोट मे कसे चुतड का उभार नजर आने ल्गा ।

मामी - अब आया ना पकड मे
मै ह्सते हुए - उससे पहले अपनी साडी पकड़ो मामी हिहिहिही

मामी ने जैसे ही निचे देखा तो माथे पर हाथ रख लिया । मामी ने तेज़ी से अपनी लसराती साडी को समेटा और कमरे मे घुस गयी। मै भी हस्ते हुए उनके पीछे पीछे चला गया ।

कमरे मे मामी ने जल्दी से साडी को खोला और सही करने लगी
सामने खड़ा मै उनकी गहरी नाभि को निहार कर मुह मे पानी ला रहा था । मामी अभी नीले ब्लाउज और पेतिकोट मे थी और उनका दुधिया गोरा बदन मुझे मदहोश किये जा रहा था । ब्लाऊज के कसे 38 साइज़ के चुचो की घाटी मुह मे पानी ला रही थी । मै मामी मे खोया हुआ था और कब मामी ने मुझे घूरता हुआ देख लिया मुझे पता ही नही चला

मामी - कहिये तो बटन खोल दू जहापनाह ,,, जन्नत के दिदार बन्द दरवाजे से क्यू करना
मै झेप कर - क्क्क्क्क्क्याआआ क्या , क्या कह रही थी मामी आप
मामी हस्ते हुए - अरे कह रही थी अगर कहिये तो बटन खोल दू आधा अधूरा दर्शन क्यू

मै शर्माकर घूम गया
मामी - सपने मे अपनी मामी को अपना बाबूराव चुस्वाते शर्म नही आई तो अब क्यू शर्मा रहे हो ।

मै घूम कर - वो सपना था ना मामी
तब तक मामी ने अपनी साडी फ़ोल्ड करके रख दी
मै - आप साडी नही पह्नोगे क्या
मामी - देख रही हू मेरे राजा बाबू को मेरे कपड़े पहनने से कही कोई दुख ना हो इसिलिए हिहिहिही ,,,,
मै - मतलब
मामी - अरे अभी पहन लुंगी थोडा काम कर लू पहले जल्दी जल्दी
फिर मामी वैसे ही ब्लाऊज और पेतिकोट मे काम करने लगी ,,जब भी वो झुकती मेरी नजर या तो उनकी उभरी गाड़ या फिर आधी झुल्ती चुचियो पर होती है और ये बात मामी भी नोटिस कर बिच बिच मे मुझे चिढा भी देती ।
फिर जब सारे सामान सेट हो गये तब लास्ट मे मैने मामी से पुछा - मामी ये गठरी क्यू लाई हो

मामी मुस्कुरा कर खुद खोलकर देख लो
फिर मैने वो गठरी खोलने ल्गा इस बीच मामी अपने आलमारी से सामान निकालने लगी । जैसे ही मैने वो गठरी खोली तो मै चौक गया ,, उसमे सिर्फ ब्रा पैंटी भरे थे जो की देखने मे भी पुराने लग रहे थे ।

मामी - क्यू क्या हुआ देख लिया ना
मै - मामी इतने सारे अंडरगार्मेंट्स किसके और कितने पुराने हैं,,

मामी - ये सब मेरे है
मै - क्या सब ,,लेकिन जब पुराने है तो फेक देना चाहिए ना
मामी - कहा जाऊ फेकने तूम ही बताओ , यहा गाव मे कोई ऐसे महगे मॉडल नही पहनता है , अगर कोई देख लेगा तो जान जायेगा कि मेरे ही है ।काफी साल पहले हुआ था ऐसे एक बार हमारे यहा काम करने वाली एक औरत ने बताया कि कुछ शराबी मेरे अन्दर के कपडे नहर के पास पा गये थे और मेरा नाम लेके गलत गलत बाते बोल रहे थे।तब से मै बाहर नही फेकति हू ।
और पहने हुए कपडे जला नही सकती ना ही इनका पोछा बन सकता है ।

मै - ओफ्फ्फ ये बात है , लेकिन ये सब देखो कितनी छोटी है क्या ये भी आपकी है ,, मैने एक मरून पैंटी को उठा कर मामी को दिखाया

मामी शर्मा कर - हा बाबा सब मेरे है
मै - लेकिन इतनी छोटी कैसे पहन लेते हो आप
मामी - अरे ये 8 10 साल हो गये इसको और ये देख ये उससे भी छोटी है हीहीहि
मै - हा मामी ,,, इसपे तो 32इन्च लिखा है ,, अभी आपका साइज़ क्या है

मामी - क्यू तुम क्या करोगे मेरा साइज़ जान कर
मै - अरे बस पूछ रहा हू मामी , नही बताना तो कोई बात नही

मामी - अरे ऐसी कोई बात नही है ,,,वैसे ले देख ले ये है मेरा साइज़ इस महिने का
मामी ने आल्मारि से निकाली हुई एक गुलाबी रंग की पैंटी मुझे उल्टी करके दिखाई जिसपे 38 इन्च का साइज़ लिखा था

मै आंखे बड़ी कर के देख रहा था । फिर मौसी ने दो ब्रा और पैंटी को गठरी मे रखा और बाँधने लगी

मै - अरे अरे इसे क्यू रख रही हो अभी तो ये नये लग रहे है
मामी ने उस पैंटी को उठाया और फैलाकर गाड़ के साइड वाले कपड़े पर एक होल दिखाया

मामी - देखो इसिलिए,,और कोई सवाल
मै - नही नही रख दो फिर
तभी मुझे गठरी से साइड निकली हुई एक लाल रग की डोरी दिखी जिसे मैने बाहर खीचा तो वो एक पैंटी थी जो एक पतली डोरी वाली थी ,,,और उस्मे सिर्फ चुत ढकने का कपडा ल्गा था बाकी एक डोरी गाड़ की दरार से कमर तक जाती ।

मै उसे फैला कर मामी को दिखाते हुए - ये क्या मामी

मामी हस्ते - ये कुछ नही है रखो तुम अब
मै जिद करते हुए - बताओ ना मामी प्लीज
मामी हस्ते हुए - ये भी पैटी है मेरी ,, पिछ्ले महीने लाये थे तुम्हारे मामा

मै गौर से देखने का नाटक करते हुए - ये तो करधन जैसी लग रही है और आप इसे कैसे पहनती थी

मामी - बस 2 3 बार ही पहना है
मै - ये आपको हो ही नही सकती और आप कह रहे हो की आपने पहना है ,, जरुर छोटे होने के कारण इसे भी गठरी मे डाल दिया ना

मामी - नही पागल साइज़ एक दम सही था ,,लेकिन इसको पहनने के बाद भी लगता ही नही था कि कुछ पहना है इसीलिये

मै - आप अभी भी झुट बोल रही हो ना , मै नही मानता की ये आपको होगा ,और मेरी खुद की दुकान है मामी इन सब की ।

मामी - तो तुम क्या चाहते हो मै पहन के दिखाऊ
मै - और कोई तरीका है क्या साबित करने का ,,,और अगर आपको ये हो गया तो मै आज का इनाम नही लुन्गा

मामी - अच्छा जी आपको नही लगता की शर्त कुछ हल्की है
मै - हा तो जो आप कहोगे मै करूँगा
मामी - पक्का ना , फिर पीछे मत हटना
मै हा बिलकुल क्यू नही ।

मै तो मामी के नंगे गोरे गाडो का दिदार करने के लिए कुछ भी दे सकता था ये तो सब एक शर्त थी ।
मामी उठी और दरवाजा अच्छे से बन्द किया ।

मामी - सोच लो हीरो अगर हार गये तो पलटना मत
मै - उसकी जरुरत ही नही आयेगी मुझे पुरा यकीन है ।
मामी - ठीक है
फिर मामी ने मेरे सामने ही अपने पेतिकोट के अंदर दोनो तरफ हाथ डाला जिससे उनका पेतिकोट घुटनो तक उठा गया और मामी की गोरी गोरी पिंडलीया दिखने लगी और एक भी बाल नही थे । एकदम मुलायम दूध सी चमकती टाँगे देख कर मुह लार से भरने ल्गा ,,मन तो कर रहा था की अभी मामी को झपटकर चोद दू ।

तभी मामी थोडा सामने की तरफ झुकी और पेतिकोट के अन्दर हाथ डाले थोडी देर बाद पहनी हुई पैंटी बाहर निकाली जो की नेवी ब्लू रंग की थी । इस दौरान मामी के चुचो की घाटियो की गहराई देख कर मैने और आहे भरी ।
फिर मामी ने वो पैंटी बेड पर रखी ,,जो दिखने मे कित्नी मुलायम लग रही थी कि मन कर रहा था अभी उसे उठा कर सूंघ लू ,,,ये सब सोच कर ही मुझे नशा होने ल्गा था और लोवर मे टेन्ट बनना शुरू हो गया था ।
फिर मामी मेरे हाथ से वो पतली डोरी वाली पैंटी ली और उसे बारी बारी से एक एक पैर मे डाला और उपर चढ़ाने लगी । इस बार पैंटी चढ़ाने मे मामी का पेतिकोट आधे जांघो तक गया ।
आहहह मामी की गदरायी जान्घे अब तक मेरे द्वारा देखे गए उन्के बदन के हर हिस्से से भी ज्यादा गोरी थी । मन तो कर रहा था कि अभी झुक कर चाट जाऊ ,,, पुरा मुह पानी से भरने ल्गा था ।

अब तक मामी ने पैंटी उपर चढा ली और बोली - देखा हो गया ना
मै - क्या पता हुआ भी है या आधे रास्ते अटका कर रखी हो आप शर्त जितने के लिए

मामी - अब क्या खोल कर दिखाऊ
मै - जब तक देखून्गा नही तब तक कैसे पता चलेगा

मामी - लेकिन उसके लिए मुझे पेतिकोट खोलना पडेगा
मै - कोई बात नही खोल दो ,,,वैसे भी मैने सब देखा ही है
मामी चौक कर - कब
मै - सपने हिहिहिही
मामी - धत्त पागल, सपने मे तो तुम क्या से क्या कर लिये मेरे साथ
मै - अब हाथ आया मौका कैसे जाने देता ,
मामी - बदमाश , कही फिर से मौका पाकर मुझे असलियत मे वही सब करने लगे तो ,,मै तो लूट जाउंगी ना
मै - मतलब आप नही दिखाओगे , यानी की शर्त हार गये आप
मामी - नही ऐसा नही होगा
मै - ठीक है फिर जल्दी दिखाओ देखो 1 बजने को है गीता बबिता के आने का टाईम हो रहा है
मामी - वो सब 3 बजे बाद आती है ।
मै - आप दिखा रहे हो या नही
मामी - अच्छा ठीक है मेरे हीरो नाराज ना हो ,,तुम्हारे लिये तो मै सारे कपडे निकाल दू
मै हस्ते हुए - हीहीहि दिख रहा है कैसे बहाने बना रहे हो आप
मामी - वो ना दिखाने का कारण कुछ और है राज
मै - क्या बताओ
मामी - वो नही बता सकती
मै - ठीक है फिर दिखा दो शायद मुझे जो देख्ना है वो दिख जाये और आप जिस कारण से नही दिखा रही थी वो कारण भी मिल जाये

मामी - हा यही करना पडेगा
तुम थोडा दुर हो जाओ ,,नही तो क्या पता खुला माल पाकर डाका डाल दो तब हीहीहि

फिर मामी बेड की तरफ गयी और मेरे तरफ अपनी गाड़ की करके आगे को तरफ झुक कर धीरे धीरे अपना पेतिकोट उपर करने लगी ,, पहले वो गोरी गोरी पिंडलीया ,, फिर दुधिया जान्घे और जैसे ही मामी ने अपनी गाड़ के उपर से पेतिकोट को कमर तक चढ़ाया तो मै आंखे फाडे मामी को गोरी चमड़ी वाली तो दुधिया तरबूज जैसी मोटी मोटी गाडो के बिच फसी एक डोरी को देखा
मेरा सुपाडा चमडे से बाहर आगया । मै थूक गटकते हुए एक बार अप्नी लण्ड को सह्लाया और फिर मामी की तरफ देखा जो मुझे गरदन घुमाये देख रही थी कि कैसे मैं लण्ड को सहलाते हुए उनकी दुधिया सफेद गाडो को निहार रहा हू
मामी मुस्कुराती हुई - देख लिये हीरो तो फाटक गिरा दू
मै - अरे कहा है आपकी पैंटी दिख ही नही रही ,, और वो डोरी कहा है
मामी मुस्कुराते हुए - अरे मेरे भोले राजा बाबू जरा ध्यान से देखिये कहीं खो तो नही गया

मै थोडा मुह बना कर - सच मे नही दिख रहा है मामी ,, आपने पहना ही नही है मेरे ख्याल से

तभी मामी सीधि हुई और पेतिकोट को निचे किया और झट से नाड़ा खोल कर निचे गिरा दिया ,,, और मेरे सामने मामी लगभग आधी नंगी सामने आ गयी थी ,,,और नंगी कमर , नंगी जान्घे और चुत को ढकने की नाकाम कोसिस करती वो छोटी सी पैंटी । मामी के दधिया बदन पर वो लाल पैंटी बहुत जंच रही थी और पैंटी के बगल से उनकी काली झाटे बाहर की तरफ फैली हुई थी जो उन्का रूप और निखारे जा रही थी ।

मामी - देखा पहनी हू ना
मै - हा लेकिन पीछे क्यू नही दिख रही है
मामी मुस्कुरा कर - वो पीछे फसी हुई है तो कैसे दिखेगी
मै - कहा फसी है
मै झट से मामी की तरफ गया और उन्के पीछे कमर के बीच से एक डोरी मामी के तरबूज जैसी गाड़ के बीच के दरारो मे जाती हुई दिखी

मै - हा हा मिला , और उंगली डाल कर वो डोरी को बाहर की तरफ खीचा तो वो मामी के दरारो को चौड़ा करते हुए बाहर आई ,, फिर मैने उसे वापस छोड दिया जिससे रबर की वो डोरी सीधा मामी के एक मोटे गुदाज गाड़ के पाट पर चट्ट से लगी ।

मामी - अह्ह्ह क्या कर रहे हो राज दूखता है
मामी इस्से पहले अपना हाथ पीछे लाती मैने खुद अपना बाया हाथ से मामी के उसी चुतड को जहा डोरी लगी थी सहलाने लगा ।
अह्ह्ज कितना नरम , मक्खन से स्पर्श हुआ और मानो मै झड़ ही जाऊंगा
मै - सॉरी सॉरी मामी वो डोरी पतली थी तो सरक गयी ।

मामी - सॉरी के बच्चे मेरा पिछवाडा लाल कर दिया आह्ह मा अभी भी दर्द है अह्ह्ह
मै झुक कर मामी की गाड़ पर फुक मारने लगा और हाथ से सहलाने ल्गा
मामी मेरी इस हरकत से हसने लगी
मामी - बस बस हो गया अब चांस मारने की जरुरत नही है हीहीहि
मै - क्या मामी मुझे चांस लेना होता तो ऐसे थोडी ना लेता
मामी - अच्छा तो जनाब बतायेगे कैसे
मैने सोचा इससे अच्छा मौका मिल ही नही सकता और मामी तो खुद आफर कर रही है

मैने एक तेज का थप्पड़ छप्प से मामी दाई चूतड़ पर बाये हथ से मारा और हाथ मे जकड़ कर मसलने ल्गा

मामी पूरी तरह से सिहर गयी और एक तेज सिसकी भी निकल गयी ।
मामी - अह्ह्ह मा क्या हीरो आज का बदला ले रहे हो क्या
मै मामी की गाड़ को सहलाते हुए बोला - अरे बदला लेना होता तो ऐसे थोडी ना लेता
मामी सिसकते हुए - फिर कैसे लेते मेरे राजा बाबू आह्ह्ह्ह उम्म्ंमममं

मै मामी को मदहोश होता देख
उनकी नंगी कमर मे अपना दाहिना हाथ डाल कर उन्के नाभि को सहलाए हुए पेड़ू के पास हल्की उंगलिया घुमाने लगा,,, मामी मेरे कन्धे के सहारे टिक गयी और मीठी मीठी आहे भरने लगी ।
मै - बताऊ मामी कैसे बदला लेता
मामी - सीईई उम्म्ंम्ं हा बताओ ना मेरे राआआआजाआअह्ह्ह बाबू उम्म्ंम्ं
मैने मामी के गाड़ के दरारो मे उंगली पेल दी और अपना दाया हाथ से मामी के मुलायम चुचो को ब्लाऊज के उपर से मसल्ते हुए एक एक बटन खोलने ल्गा
मामी - क्या कर रहे हो राजा बाबू , इसे क्यू खोल रहे हो
मै - बदला ले रहा हू ना मामी
मामी - अह्ह्ह लेकिन मै तो तुम्हारे कपडे नही निकाले ना
मै - हा लेकिन मुझे नंगा देख कर फ़ोटो निकाला ना
मामी सिस्कते हुए - अह्ह्ह्ह क्या तुम मेरी भी तस्वीर निकालोगे उम्म्ंम्ं इस्स्स्स
मै लगातार मामी की गाड़ कुदेर रहा था ।

मै - हा क्यू नही ले सकता अपनी हेरोइन की तस्वीर
मामी - क्यू नही मेरे राजाआह्ह्ह्ह्ह लेलो ना जैसे मन हो
फिर मैने मामी के ब्लाऊज को पुरा निकाल दिया और पीछे से ब्रा का हुक भी निकाल दिया ।

अब मामी के बदन मे एक पतली सी पैंटी थी जो नाम भी की थी ।
फिर मैने मामी को घुमा कर बेड पर लिटा दिया ,,मामी भी अपने दोनो हाथ उपर उठाए बिस्तर पर गिर गयी
अह्ह्ह मा क्या दधिया बदन था मामी का ,,, लण्ड लोवर मे तुफान म्चाये हुए था और मामी की हिल्ती गोरी गोरी चुचिया इतनी रसिली थी ।

फिर मैने जेब से मोबाईल निकाला और कुछ हॉट तस्बिरे निकाली मामी की
मामी - अब हो गया ना हीरो
मै - अभी कहा
मामी - ले तो ली न तस्वीर अपनी हॉट ऐण्ड सेक्सी हेरोइन की हीहीहि

मै सारा फोक्स मामी के चुत पर ले गया और मेरी नजर को देख कर मामी समझ गयी कि मै क्या चाहता हू

मामी तुरंत चुत के उपर हाथ रखते हुए - नही नही राज प्लीज इसे नही खोल्ना अब
मै - क्यू
मामी - देख नही रहे कित्ने बाल है वहा ,, कितना गन्दा दिख रहा है भ्क्क्क
मै - अच्छा यही वो कारण जिसके लिए आप पेतिकोट नही निकाल रही थी
मामी - हम्म्म्म , अच्छा नही दिखता है ना
मै - वो तो खोलने के बाद पता चलेगा की कैसा है
मामी - प्लीज राज नही

मै - देखो अगर आप चाहते हो मै उसकी तस्वीर ना लू तो आपको मेरा एक काम करना पडेगा
मामी - हा बोलो ना मै सब करने को तैयार हू
मै - पक्का ना सोच लो
मामी - हा पक्का
मै - तो ठीक है आपको वो करना होगा जो आज सुबह मैने देखा था सपने मे

मामी ह्स्ते हुए - धत्त मै जानती थी तुम मौके फाय्दा जरुर लोगे
मै - अब या तो फ़ोटो निक्ल्वाओ या जो बोला है वो करो

मामी मुस्कुराती हुई उठी और एक नजर मेरे लोवर मे खडे लण्ड को देखा और मुस्कुराते मेरा लोवर निचे किया फिर मेरा अंडरवियर भी निचे खीचा जीससे मेरा खड़ा लण्ड उछल कर तन गया मामी के सामने

मामी आखे फाडे थूक गटक कर बोली - ये तो सुबह से बड़ा है
मै - हा अपनी हीरोइन के हुस्न को देख कर सलामी दे रहा है
मामी - अच्छा ये बात है फिर तो मै अपने फैन का ख्याल रखुन्गी ही , हिहिहिही
फिर मामी ने जीभ को निकाला और मेरे सुपाडे को चाटा और लण्ड को मुह मे भर लिया ,,
मै - अह्ह्ह मामी सीईई उह्ह्ह्ह अह्ह्ह
मामी मुझे देखते हुए पुरा का पुरा लण्ड मुह मे भरना शुरू कर दी और मेरे पेट पर एक हाथ से सहलाने लगी ।
मै जोश मे आकर अपनी टीशर्त निकाल दी ,,और मामी गपागप मेरे लण्ड लो चूसे जा रही थी ।
मै - अह्ह्ह मामी क्या मस्त चुस रही हो मेरा लण्ड आह्ह मज़ा आ रहा है

मामी लण्ड को मुह से निकाल कर अपनी जीभ को मेरे सुपाडे के निचली नशो मे रगड़ते हुए बोली - क्यू मेरे राजा मज़ा आ रहा है ना सपनो जैसा

मै - अह्ह्ह मामी म्ज़ा तो बहुत आ रहा है लेकिन
मामी - लेकिन क्या मेरे हीरो
मै - लेकिन मैने सिर्फ़ यही ब्स थोडी ना किया था सपने मे अह्ह्ह उम्म्ंम
मामी मेरे लण्ड की सुरुकते हुए - अच्छा और क्या क्या किया था मेरे राजा बताओ ना

फिर मै झट से मामी को उठाया और घुमा कर उनकी पीठ को अपने सीने से लगाते हुए , लपक कर उनकी मुलायम चुचियो को दोनो हाथो मे जकड़ उनको मिजते हुए बोला - अह्ह्ह ऐसे ही सपने मे आपकी इन मुलायम चुचियो को मिज रहा था ,,,

इधर एक तरफ बेदर्दी से मामी के चुचे मसल रहा था वही मेरा लण्ड मामी के गाड़ के उपरी सिरे को छू रहा था

मामी - अह्ह्ह इमम्म्ंं उह्ह्ह्ह इतनी तेज मिज रहे थे क्या मेरे राजाआह्ह्ह्ह

मै मामी के मुलायम दाने वाले गुलाबी निप्प्ल को उंगलियो से खिचते हुए बोला - बिलकुल ऐसे मसल रहा था मेरी रानी आपके चुचे
मामी - उफ्फ़फ्फ अह्ह्ह मेरे राजा जी कहा से सीखी उम्म्ंम स्स्स्स इस्स्स उफ्फ्फ अह्ह्ह्ज और रगडो मेरे राजा और मसलो
मामी आपने दोनो हाथ मेरे हाथो पर रख कर अपनी चुची रगड़ रही थी और बार बार अपनी गाड़ मेरे लण्ड से टकरा देती
फिर मै मामी को झटके से अपनी तरफ पल्टा और उनके गुलाबी पतले होठो को अपने होठो मे लेके चुसने ल्गा ,,इस दौरान मेरा लण्ड सिधा मामी के पेड़ू पर घिस रहा था और मेरे दोनो हाथ मामी की तरबूज जैसे चुतडो को फैला रहे थे । किस्स मे मामी मेरा भरपूर साथ दे रही थी ।
फिर मैने झुक कर मामी के एक म्म्मे को पकड़ा और उसकी गुलाबी निप्प्ल को चुस्ते हुए मामी की गाड़ मे उंगली से खोद रहा था
मामी के दुधिया म्म्मे मेरे हाथों की जोरदार मस्लन से लाल हो गये थे और मेरे होठो का स्पर्श अपनी मुलायम चुचो पर पाकर मामी मेरे सर को अपनी छाती मे दबाने लगी

मामी - अह्ह्ह राजा और चुसो और हा ऐसे ही उम्म्ंम्ं इतना न्शा आज तक नही हुआ मुझे अह्ह्ह उम्म्ंम उफ्फ्फ स्सीई उम्म्ं
मामी का एक हाथ वापस से मेरे लण्ड को थाम चुका था
मै मामी को सीधा अपने साम्ने किया और एक बार उन्के होठो को चुमा फिर बोला - मामी मेरी जान,,
मामी - हा बोलो ना मेरे राजा
मै - मामी मुझे आपकी झाटो से भरी ये चुत चाटनी है , मामी के चुत को पैंटी के उपर से सहलाते हुए बोला

मामी - सीई अह्ह्ह्ह सच मे तुम्हे मेरी झाटो से भरी चुत पसंद है मेरे हीरो
मै मामी के गरदन को चुमते हुए उन्के कान मे जाकर बोला - हा जानू ,, बोलो ना चुसवओगी अपनी झाटो वाली गुलाबी चुत
मामी मदहोश होते हुए - सीई उम्मममंं अह्ह्ह्ह्ज्ज्ज हा मेरे राजा चुस लो अपनी रानी की चुत

फिर मै झट से मामी को बिस्तर पर लिता दिया और उनकी पतली सी पैंटी को निकाल कर फेक दिया ।
अह्ह्ह क्या मस्त काले घुघराले झान्तो से घिरी चुत थी जो गोरी गोरी जांघो पर और खिल रही थी
हल्की हल्की मामी के सोमरस की बुन्दे मामी के काले झाटो को एक अलग ही चमक दे रही थी ।
मै झुक कर मामी के जांघो को चौड़ा किया और उन्के एक गोरी मखमल सी मुलायम जांघ पर अपने चेहरे को सहलाने ल्गा ,,और चूमते हुए मामी की चुत की तरफ बढने लगा ।
जैसे जैसे मै मामी की चुत की तरफ जाता वो उनकी सिस्क बढ़ती जाती
फिर वो पल आया जब पहली बार मैने मामी के चुत की खुस्बु ली और लपालप से जीभ को उनकी झाटो मे चुत के दाने खोजते हुए फेराने ल्गा

मामी - सीई अह्ह्ह्ह मेरे राजा उम्म्ंम्ं उफ्फ्फ्फ खा जाओ मेरी चुत को उम्म्ंम
मामी गाड़ पटकने लगी थी
कुछ ही पलो मे मामी के बुर के होठ मेरे होठो के गिरफ्त मे आ गये और मैने दोनो हाथो से मामी की झाटो को साइड करके मामी के चुत के होठो को अपने मुह मे चुबलाना शुरु किया

मामी गाड़ पटक रही थी - अह्ह्ह्ज उह्ह्ह हाअय्य्य मा मर गयीईईई खा जा मेरे बुर को मेरे राजा ,,, कहा था तू अब तक रे अह्ह्ह्ह और चुस मेरे हीरो अह्ह्ह्ह खा जा अपनी रानी की चुत

मै ल्पालप मामी की चुत मे जीभ डालकर अंदर घुमाये जा रहा था ,,कुछ ही पलो मे खट्टे मीठे पानी का सैलाब मेरे मुह मे आया

मामी - अह्ह्ह्ह अह्ह्ह मै झड़ रही हू मेरे राजा अह्ह्ह बचा ले मुझे अह्ह्ह मा उफ्फ़ हाय्य दईया ये दर्द उम्म्ंम मा उफ्फ्फ चाट ले मेरे चुत को मेरे हीरो
जैसे ही मै मामी की चुत से हटा , मामी झट से उठी और ग्प्प से वापस मेरे लण्ड को मुह मे भर कर चूसते हुए अपनी चुचिया मिजने लगी

मै -ओह्ह्ह मेरी रानी इतनी प्यासी हो लण्ड के लिए अह्ह्ह और चुसो अभी तो आपके इस गुलाबी भोस्दे मे भी तो घुसना है अह्ह्ह लोगी ना मामी मेरा लण्ड अपनी बुर मे
मामी - अह्ह्ह हा मेरे राजा क्यू नही गुउउउऊ गुउउऊ गुउऊ सुउउर्रृऊऊऊऊपपपपप अह्ह्ह्ज कितना मोता लौडा है मेरे राजा ,,,बहुत मज़ा आ रहा है
मै - चुस लो मेरी जान अह्ह्ह इह्ह्ह ओह्ह्ह उम्म्ंम इसस और और हा अह्ह्ह

फिर मै मामी को अलग किया और घोड़ी ब्ना कर उन्के गाड़ को चूम्ने लगा

मै - आह्ह मामी सच मे इत्नी गोरी गाड़ मैने किसी की नही देखी
मामी - अच्छे से देख लो मेरे राजा और चोदो मुझे

मै झट से अपना गिला लण्ड मामी की चुत मे सेट किया और एक जोरदार धक्के से अंदर पेल दिया

मामी - अह्ह्ह्ह मा उह्ह्ह साले सच मे भोस्डा समझा है क्या ,,,आराम से चोद ना हाय्य्य मा,,, अह्ह्ह सीई उम्म्ं उफ्फ्च हा ऐसे ही अह्ह्ह हा हल्का हल्का अभी करो मेरे राजा अह्ह्ह उह्ह्ह्ह हम्म्म्म्ं

मै - क्या हुआ रानी ज्यादा तेज लण्ड डाल दिया क्या
मामी - हा मेरे राजा लेकिब भी मज़ा आ गया था हा ऐसे ही और चोदो मुझे अह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है उफ्फ्फ्फ कितना गर्म लौडा है मेरे हीरो का उह्ह्ह अह्ह्ह
मैं मामी की गाड़ को मस्ल्ते हुए चोद रहा था ,,, बहुत ही मज़ा आ रहा था
फिर मैने पोजिसन बदली और मामी के जांघो को अपने कन्धों पर डाल कर लण्ड को वापस मामी की चुत मे उतार दिया

मामी - ओह्ह्ह मा उफ्फ्फ ये तो पेट तक जा रहा है हा थोडा तेज अह्ह्ह हा हा हा ऐसे ही ऐसे ही अह्ह्ह्ह मा ओह्ह्ह मा रुकना मत मेरे राजा और चोदो और और तेजज़्ज़्ज़ अह्ह्ह

मै थप थप थप थप थप थप थप थप थप थप थप थप थप करके धक्के मामी की बुर मे ल्गाये जा रहा और खुद चरम सीमा पर पहुंच गया था

मै - अह्ह्ह मामी मेरा आयेगा
मामी - अंदर नही मेरे मुह मे डाल दो आह्ह जल्दी जल्दी
मै झट से उठा और लण्ड मामी के मुह पर ले जाकर हिलाने ल्गा और कुछ ही बार मे मेरा माल मामी के मुह पर गिरने ,, फिर मामी के मुह मे लण्ड डाल दिया जिसे वो चुस कर छोड दी औए अपने चेहरे पर ल्गे मेरे वीर्य को चाटते हुए मुस्कुरा रही थी

मै झुक कर उन्की एक चुची को मुह मे लेके चूसा और छोडदिया

मामी - ले लिया बदला न अब हू
मै - हा ले तो लिया लेकिन अभी और लेना है

मामी हस्ते हुए - बदमाश मै जान्ती थी अगर तुम्को मौका मिला तो तुम मुझे नही छोडने वाले
मै - फिर भी मुझे मौका दिया
मामी मुस्कुरा कर - आपने राजा बाबू को उदास कैसे कर सकती थी
मै - मुझे उदास नही देख सकती थी की मेरे लण्ड ने बेकाबू किया था सुबह से हीहीहि

मामी - नही तो ऐसा कुछ नही है
मै - आपका प्ता नही लेकिन मुझे आपकी मोटी तरबूजे जैसी गाड़ ने बहका दिया और आपकी ये दूधिया चुचे और झाटो से भरी चुत के क्या कहने

मामी शर्मा गयी - अब ब्स भी करो ये सब हमेशा अच्छा नही लगता है
मै झट से घुटनो के बल हुआ और आधे सोये लण्ड को मामी के मुह पे रख के उनकी चूची को मसलते हुए बोला - तो चलो ना मामी फिर से एक बार सेक्सी बाते करते है ।

मामी मेरा मतलब समझ गयी और मेरे लण्ड को चुस कर खड़ा किया ,,वापस से मैने मामी को एक बार और चोदा फिर हम लोग फ्रेश होकर करीब 2:30 बजे खाना खाने किचन मे चले गये ।


देखते है दोस्तो आने वाले अपडेट मे अब क्या कुछ नया होने वाला
आप सभी की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा
पढ कर अपनी राय कहानी के लिए जरुर दे ।
धन्यवाद

सूचना - अगले दो दिन के लिए मै कुछ विभागीय कार्य से बाहर जा रहा हू । सरकारी नौकरी के अलग ही फंडे है दोस्तो । शुक्रवार को वापस आने के बाद ही अगला अपडेट दे पाऊन्गा ।
आआआअह मामी की मस्त चूत।
 

Sis lover

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Update 52 ( MEGA )

रात मे सोने के विचार से सारे लोग परेशान तीन उम्मीद भरी नजरे मुझसे आस लगाये थी ।
वही दुसरी तरफ विमला मौसी और मामा के बीच अलग ही नैन इशारे हो रहे थे । मेरे दुसरे बगल मे बैठी कोमल अपनी मा को मुस्कुराता देख कुछ खास खुश नही नजर आ रही थी । क्योकि वो भली भांति परिचित थी अपनी मा के करतुतों से कि जाने से पहले वो मेरे मामा से जरुर चुदेगी ।
वही अगर कोई सबसे ज्यादा कोई खुश था वो गीता बबिता थी , मासूम सी अल्हड़ जवानी मे घुस्ती मदमस्त लडकिया जिनको अभी एक दिन पहले ही तो जिस्मो का सुख से रुबरू होने का अह्सास मिला था तो वो भी मेरे जाने से पहले से ट्यूबवेल के उस हवस भरे खेल का मज़ा लेना चाहती थी ।
मै मन इसी उधेड़बुन मे था कि कैसे कोई रास्ता निकालू
कुछ तो करना ही पडेगा ।
इसी समय नाना खाना खा कर उठे और मुझसे कहा
नाना - बेटा तू थक तो नही गया है ना
मै मुस्कुरा कर - नही नाना जी कहिये क्या बात है ,
नाना - जरा खाना खा कर मेरे कमरे मे आना तुझसे कुछ बात करनी है ।
मै - जी नाना
फिर हम सब खाना खाये और मै खाना खाने के बाद निकल गया नाना के पास
कमरे मे नाना बिस्तर पर बैठे थे टेक लगाये और तम्बाकु रगड़ रहे थे । ये उनकी रोज की दिनचर्या मे शामिल था कि खाने के बाद तंबाकू खाना

मुझे देखते ही मुस्कुराये और बिस्तर पर बैठने को बोला
मै उन्के पाव के पास बैठा
नाना - और बेटा तू भी लेगा तम्बाकू
मै हस्ते हुए - अरे नही नही नाना जी मै नही खाता ये सब
नाना - धत्त पगले जिसने तम्बाकू ना खाया तो मर्द कैसा रे
मै अचरज से - क्यू , जो नही खाते वो मर्द नही होते
नाना - तू अभी नही समझेगा , जब तेरे भी बदन को औरत का स्पर्श मिलेगा तब तू जानेगा कि ये तम्बाकू किस काम का है हाहाहा

मुझे नाना के साथ ऐसे कोई संवाद की उम्मीद नही थी इस लिए मै सही मायने मे शर्मा कर बिना कुछ बोले शर्माने लगा ।
नाना - अरे मेरे शर्मा मत , मर्द तो ऐसी बाते करते ही है बेटा , तू मुझे अपना दोस्त समझा कर
मै जिज्ञासा भरे भाव से भौहे सिकोड़ कर - दोस्त ???
नाना - हा भई दोस्त , तुझे पता है नाना पोते मे और दादा पोते मे बहुत गहरी दोस्ती होती है
मै मुस्कुरा कर - हीहीहि क्या नाना आप भी
नाना - तू मान नही रहा है अरे मेरे दादा तो यहा कि कहते थे कि औरत से कैसे बात करनी चाहिए उनको खुश कैसे करना है
मै इस बार और शर्म से लाल हुआ
नाना - देख बेटा मेरे लिये मेरे पोते ही मेरी वंश की शाखाएँ है और मै नही चाहता की तू अनाड़ी ही रह जाये।

मै - कैसा अनाडी नाना जी , मै समझा नही
नाना मुस्कुरा कर - लगता हकि तेरी कोई लड़कियो मे दोस्त नही है अब तक तभी तू ऐसे नासमझो के जैसे बाते करता है ।
मै - है ना नाना जी ,
नाना - हहाहह्हाअह्हा , कौन वो कोमल
मै - हम्म्म्म क्यू
नाना - अरे बुड़बक मै स्कूल की दोस्ती की नही , प्रेमिका की बाते कर रहा हू , क्या कहते वो तू लोग उसको ,,हा गर्लफ्रैंड हाहाहाहहा

मै मुस्कुरा कर शर्मा गया
नाना- तो बता है कोई तेरी गर्लफ्रैंड
मै मुस्कुरा कर शर्माते हुए ना मे सर हिलाया
नाना - मुझे लगा ही था कि तू क्यू नही समझ पाया ,,,, अरे तू तो लण्ड को भी नुनी ही बुलाता होगा ,,हाहाहहहहा
मै शरमा कर - क्या नाना ,,,मुझे पता है कि किसको क्या कहते है इतना भी भोला नही हू मै ,,,, और आपने यही सब बाते करने के लिए बुलाआ मुझे
नाना हस्ते हुए - हाहाहहा , अरे नही बेटा काम तो कुछ और था लेकिन अभी तेरे लिए कोई और ज्ञान जरुरी हो गया
मै अचरज भाव से - कैसा ज्ञान नाना जी ,,
नाना - बेटा ऐसे बात कोई भी मा बाप अपने बेटो से नही करते है । इसलिये तो दादा या नाना को अपने नाती पोता का दोस्त बनना पड़ता है । हाहाह्हाहा
मै नाना की बाते सुन कर मुस्कुरा रहा था
नाना - तू बता आखिर तुझे किस तरह की लडकी पसंद आती है , मान ले तुझे शादी करनी हो तो

मै अबतक की बातो से समझ गया था कि नाना मेरे साथ सेक्स की बातो पर खुल कर बाते करना चाह्ते है । मगर इतनी जल्दी नही खुलना चाहता था और ना ही ऐसे मज़ेदार बातो का मज़ा किरकिरा करना चाहता था ।

मै - अब ऐसे कैसे बताऊ कोई सामने रहे तब ना
नाना - हम्म्म अच्छा मान ले तेरी मौसी , तेरी मा या मामी या वो तेरी दोस्त कोमल या फिर उसकी मा वो विमली ,,, मे सबका रिस्ता तेरे लिये आया हो तो किसे चुनेगा

मै हस्ते हुए - क्या नाना जी आप भी , मेरी मौसी मा और मामी का रिस्ता क्यू आयेगा मेरे लिए
नाना - अरे तू रिस्ता ना देख ये बता उन पांचो मे किसका बदन तुझे पसन्द है ,,
मै मुस्कुरा कर - नाना सारे लोग अपने जगह पर सही है
नाना - अच्छा वो कैसे
मै संकोचवश - वो वो
नाना - अरे खुल कर बता ना बेटा अपने दोस्त से क्या शर्म
मै मुस्करा कर - देखो नाना मा हल्की सावली है लेकिन उनका चंचल स्वभाव और भरा बदन पसंद है , मामी बहुत खुबसुरत है , कोमल मेरे हमउम्र मे है और अच्छी लडकी है और विमला मौसी थोडे नये जमाने के हिसाब से रहती है तो वो भी ठीक है।

नाना - और तेरी रज्जो मौसी का क्या , उसमे क्या खास है
मै - वो मुझे उनका भारी बदन अच्छा ल्गा उन्का सब बड़ा बड़ा है जो मुझे पसंद आया

नाना मुस्कुराये और धोती मे हुकार भरते लण्ड को सहला कर - हम्म्म्म बात तो तेरी सही है
मेरी नजर नाना के हाथो पर गयी और नाना ने मुझे खुद का लण्ड सहलाते देखा तो हसते हुए बोले - हाह्हाह्हा देखा तम्बाकू का असर बेटा, बुढापे मे भी मुसल को खड़ा कर देता है और अभी तो जोश इतना हो रहा है कि दो गदरायी औरत अभी चोद दू हाहहा

मै शरम से निचे देखने लगा
इसीबिच गीता मुझे बुलाने नाना के कमरे मे आ गई
गीता - चलो भैया हमारे साथ भी बाते करो ना
नाना - हा अब जा बेटा हमारी बाते आगे फिर कभी होगी हाहाहाह्हा
मै - जी नाना
फिर हम दोनो जाने लगे तो नाना ने पीछे से आवाज दी
नाना - बेटा जरा अपनी रज्जो मौसी को बोल देना कि मैने आवाज दी है और तुम सब सो जाना

मै समझ गया कि आखिर क्यू नाना ने रज्जो मौसी की बुलाने को कहा लेकिन उससे जरुरी ये था कि उनकी तबियत ठीक नहीं थी तो क्या फिर भी वो ये सब करेंगे ।
खैर मै गीता को कमरे मे आने को बोल कर मौसी के कमरे मे गया ,,,जहा मा और मौसी बैठी सोफे पर कुछ बाते कर रही थी ।

मुझे देख कर दोनो के चेहरे खिल गये
मौसी - अरे राज बेटा वो दोनो सो गयी क्या
मै - नही मौसी वो नाना ने आपको बुलाया है
मा - लेकिन दीदी बाऊजी की तबियत ठीक नहीं है न तो कैसे
मौसी - उन्की तबियत तम्बाकू खाते ही ठीक हो जाती है रे छोटी हिहिहिही
मा - भ्क्क्क और जो डॉक्टर ने बोला वो ,,,
मौसी - चार दिन बादाम वाला दूध मिला नही की सब चुस्त दुरुस्त हीहीहि
मा हस्ते हुए लेकिन मन मे एक नयी खुशी को समेटे जिसे सिर्फ मै और मा ही समझ सकते थे - अच्छा
मौसी - चल ठीक है अभी आती हू
फिर मौसी नाना के रूम मे निकल गयी और वही मा मुझे देखा और फिर शर्माने लगी । वो समझ चुकी थी कि इस समय हम दोनो के मन मे क्या था ।
मै - मा अब खुश हो ना
मा शर्मा कर - तू ना चुप रह और जल्दी से उन दोनो को सुला कर मेरे पास आ जा ,,
मै खुश होकर मा के गाल को चुमा - ठीक है मा आता हू अभी ।
मा - वो अपना मोबाईल देके जा जरा घर की खोज खबर लेलू

मै मा को मोबाइल दिया और निकल गया गीता बबिता के रूम मे
कमरे मे जाकर मैने दरवाजा बंद किया और उन्के बेड पर चला गया ।
दोनो बिस्तर पर बैठे हुए बाते कर रही थी और मुझे देखते ही बबिता बोली

बबिता - आओ भैया बैठो
मै - क्यू तुम दोनो को सोना नही है देखो 9:30 बजने वाले है
गीता - ब्क्क्क भैया हमलोग वो खेल खेलने वाले थे ना ,,और आप कल चले भी जओगे ।
गीता बहुत ही गिरे मन से बोली
मै मुस्कुरा कर - हम्म्म तो बैठी क्यू हो चलो शुरू हो जाओ
गिता - सच भैया
मै - हा मेरी मीठी
गीता को बाहो मे भर कर गाल को काटते हुए बोला

बबिता हस्ते हुए - हिहिहिही पहले कपडे तो निकालो ना भैया
मै - वो भी मै ही करू हा
गिता उठी और झट से मेरे पैर के पास जमीन पर घुटनो के बल आ गई
गिता - चलो खड़ा हो जाओ आप
मै ह्सा और खड़ा हो गया
गीता ने मेरे लोवर को पकड़ा और घूतने तक खीचा जिससे आधा खड़ा हुआ लण्ड का सामने आ गया वही बबिता बगल मे बिस्तर पर घोड़ी बन कर गरदन आगे करके मेरे लण्ड को निहार रही थी ।

गीता ने एक नजर मुझे देखा और उत्साह मे बबिता को देख कर मुस्कुराई और उठे मेरे लण्ड को चूम लिया ,जिससे मेरा लण्ड झटके खाने लगा
वही मौका पाकर बगल मे घोड़ी बनकर मेरे लण्ड को झाकती बबिता ने एक हाथ से मेरे आडो को सहलाना शुरू कर दिया और गीता मेरे आधे झुके लण्ड के सुपाडे होठो मे भर ली ।
जल्द ही मेरा लण्ड तनने लगा और बबिता के कोमल हाथो मे आड़ो के मसलने से मेरे लण्ड मे खुन का बहाव तेज होने लगा जिससे गिता के मुह मे मेरा लण्ड कसना शुरू कर दिया ।
अब बबिता ने आड़ो के साथ चमडी को पीछे ले जाने लगी जिससे गिता मेरे सुपाडे को और मुह खोल कर अन्दर लेती
मै सिसकियाँ लेते हुए मेरी जवान कसी हुई बहानो के मज़े लेने ल्गा ।
मेरी नजर जब बबीता पर गयी तो वो गीता को लण्ड चुस्ते हुए ही निहार रही है और जैसे जैसे गीता मेरे लण्ड को मुह मे भरती वैसे ही बबिता के खुले मुह लण्ड के चूसने की कलपना करके हिलते रहते ।
हवस धीरे धीरे बबिता पर बढ़ने लगा जिसका अंदाजा मुझे अपने आड़ो पर पड़ रही उसके हाथ की तेज मसलन से साफ पता चल रहा था ।
फिर मै रहम कर गीता के सर को पकड कर पीछे किया और बबिता की तरफ घूम गया ।

बबिता मुझे देखी और मुस्कुराई फिर एक हाथ से लण्ड की चमडी को आगे पीछे करते हुए मेरी आँखो मे देखा और फिर आंखे बंद कर बडे चाव से मुह खोल कर लण्ड को भर लिया और चूसने लगी । मै बबिता के बालो मे हाथ फेरते हुए सिसकता रहा और अपनी कमर को आगे बढ़ाते हुए लण्ड को उसके गले मे उतारने की कोसिस करता तो वो मेरे पेट को हाथ से रोक देती जिसका इशारा होता कि वो इससे ज्यादा नही ले सकती थी।

वही मेरे पीछे गीता वैसे बैठे बैठे ही मेरे चुतडो को सहलाने लगी ,,जिससे मुझे गुदगुड़ी होने लगी । जिससे मेरे सिस्कियो मे मीठी सी मुस्कान भी आ चुकी थी ।
मै अभी झडना नही चाह्ता था तो बबिता को भी खुद से अलग किया और वो जीभ लपल्पती अपने लार को चाटते हुए अलग हुई मुझ्से ।
फिर मै बबिता को खड़ा किया और उसके टीशर्ट को निकालने लगा
अन्दर उसने कुछ नही पहना था जिससे उसकी चुचिया की गुलाबी चुचक खिलकर मेरे सामने थे । मै झुक कर जीभ निकालते हुए एक बार बबिता की दाई चुची के निप्प्ल को छुआ और होठो मे भर लिया ,

बबिता - सीईईई उह्ह्ह्ह भैया अह्ह्ह्ज उम्म्ंम्ं
बबिता की आवाज सुन कर मुझे आभास हुआ की गीता निचे से खड़ी हो गयी और अपने कपडे निकालने लगी ।
वही मै बबिया की कमर को थामे उसकी चुचिया चुस रहा था और वो मेरे सर को अपने चुचीयो पर रगड़ने लगी ।
इसी बीच गीता मेरे टीशर्ट को उपर की तरफ करने लगी और पीछे से ही मेरे पीठ से चिपक गयी ।
कुछ पल के लिए मेरे सारे क्रिया कलाप रुक गये क्योकि गीता के मुलायम चुचियो का अपनी पीठ पर अह्सास पाते ही मै सिहर गया । वही वो हाथ को आगे ले जाकर वापस मेरे लण्ड को पकड लिया और नीचे उसकी जन्घे मेरे जांघो को छू रही थी ।
खुद को थोडा सम्भाल कर मै वापस बबिता के चुचियो पर टुट पडा
एक तरफ जहां मै बबिता के चुचे चुस रहा वही गीता अपने पेट मेरे चुतडो पर नचा कर मुझे गुदगुदी सा अह्सास दिला रही थी और अपने चुचियो को मेरे पीठ पर रगड़ रही थी ।
मै गीता की कामुक हरकत से उतेजित होकर सारी भड़ास बबिता के चुचियो पर निकाल रहा था इसी दौरान गीता घूमी और अपने गुदाज गाड़ को मेरे चुतडो पर रगड़ते हुए सिसकने लगी
गीता- अह्ह्ह्ह भैया कितना मज़ा आ रहा है गाड़ रगड़ने मे उफ्फ्फ हिहिहीहीहि कित्नी मुलायम गाड़ है आपकी भैया अह्ह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ्फ इस्स्स्स्स अह्ह्ह

मै भी गीता के इस नये स्पर्श से मदहोश होने लगा इसी बीच किसी ने दरवाजा खटखटा कर हमारी मस्ती को नजर लगा दी
कौन हो सकता था अब क्योकि सारे लोग तो अपने कमरे मे थे सिवाय मा के जो अकेली थी । कही वही तो नहीं ना हो ।

मैने झट से दोनो को अलग किया और इशारे मे कपडे पहन कर सोने का नाटक करने को बोला और मै भी अपने खडे लंड पर लोवर पहन कर दरवाजे तक गया और दरवाजा खुला तो जो सामने दिखा उसकी इस समय होने की उम्मीद मैने नही की ।

सामने कोमल खड़ी थी और अंदर झाक कर एक बार बेड पर देखा तो गीता बबिता उसे सोती हुई नजर आई ।
फिर मेरी नजर मुझसे मिली तो
मै - अरे कोमल तुम यहा इस वक्त
कोमल मुस्कुरा कर - हा वो कोई था नही कमरे मे सोचा देखू तुम क्या कर रहे हो ।

मै दरवाजा खोला और उसको कमरे मे आने का इशारा कर दरवाजा बंद करते हुए बोला - क्या हुआ कोमल तुम्हारी मा कहा गयी ।
कोमल - वो मा किसी से बात करने के लिए छत पर गयी है तो मै अकेले क्या करती
मै एक नजर गीता बबिता को देखा और फिर कोमल को देख कर मुस्कुराते हुए - कोई बात नहीं कोमल आओ बैठो यहा
मैने कोमल को बेड के सामने सोफे पर बैठने को कहा
वो बैठी और मै उसके सामने बेचैनी से टहल रहा था क्योकि मुझे डर था कही गीताबबिता के सामने कोमल कोई गड़बड़ ना करे
कोमल - क्या हुआ राज तुम ऐसे घूम क्यू रहे हो बैठ जाओ

उसकी आवाज सुन कर मै उसकी तरफ घुमा तो उसकी नजर मेरे लोवर मे तने हुए लण्ड पर गयी ,,,

कोमल मुस्कुरा कर - वैसे क्या कर रहे थे जनाब अकेले मे जो ये फिर से ,,, मेरे लण्ड की तरफ इशारा किया

मै हड़बड़ी मे बार बार गीता बबिता को देख कर वो वो करने लगा
कोमल - अरे रिलैक्स राज वो सो गयी है ना , बताओ
मै - हा वो मै रोज रात मे इसकी मालिश करता हू ना इसिलिए
कोमल मुह पर हाथ रख कर मुस्कुराते हुए बोली - अरे बुधु तो इतना संकोच मे क्यू बोल रहे , अभी थोडी देर पहले तक तो मेरे से खुल कर बाते कर रहे थे और अगर मालिश की बात थी तो मुझसे कह देते ना तुम

मै कोमल की बाते सुनके परेशान था कि क्यू ये यहा आई और इसको कूछ गडबड़ करने से कैसे रोकू ,, कयोंकि अगर गिता बबिता को भनक लग गयी तो वो अपनी बेवकूफ़ी मे उसका क्या मतलब निकालेगी वो तो राम ही जाने

मै इस सोच मे डुबा था की कोमल ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बिस्तर पर बिठाया और मुझे रिलैक्स करते हुए - अरे तुम परेशान ना हो वो दोनो सो गई है ।
मै - हम्म्म्म्ं
कोमल - राज मुझे तुमसे कुछ कहना है
मै बार बार गीता बबिता को देख कर बस हू हा हम्म्म यही जवाब दे रहा था
मै - हा बोलो ना कोमल
कोमल - मै सोच रही थी कि क्यू ना घर जाने से पहले हम लोग यहा एक बार और मस्ती कर ले
मै हड़बड़ी मे - क्या क्याआआआ कह रही हो कोमल तुम ,,और कोमल को बिस्तर पर सोयी गीता बबिता की तरफ इशारा करते हुए बोला
कोमल - मै वो सब अभी नही चाहती हू राज , मै तो बस
मै - हम्म्म्म क्या
कोमल शर्मा कर - मै तो बस तुम्हारे मुसल को एक बार और प्यार करना चाहती हू
मै कोमल को बिस्तर पर इशारा कर - यार कोमल समझो तुम हम घर पर भी कर सकते है और वो फिर मुझे तुम्हारा वो घर का काम करना ही है तो प्लीज

मै प्लीज प्लीज करता रहा लेकिन कोमल ने मेरी एक ना सुनी और फर्श पर घुटनो के बल आ कर मेरे लण्ड को मेरे लोवर से बाहर निकाला और चूसना शुरू कर दी ।
मै एक बार फिर से हवा में तैरने लगा,,,फिर मेरी नजर बिस्तर पर गयी तो मेरी जुबान बाहर आने वाली स्थिति थी क्योकि इस समय गीता करवट लेके कोमल को मेरा लंड चुस्त्र देख रही थी जबकि बबिता गिता के कन्धे के सहारे आगे होकर मुझसे इशारे मे बोल रही थी की ये सब क्या है ।

मै दोनो को चुप रहने का इशारा करते हुए आंखे मूंद लिया क्योकि कोमल मेरे सुपाड़े को अपने गले में लटकती घंटी से टच करवा रही और सुउउउरररररररुउउऊप्प्प्प सुउउउईयररररुउउईप्प्प करके मेरे लण्ड को चुस रही थी ।
मै इक बार फिर से हवस की उचाईयो को छूने लगा । और कोमल का सर पर हाथ फेरते हुए उसे और जोशिले व्यंग्य से लण्ड की तरफ दबाने लगा तभी दरवाजे पर एक और खट खट हुई ।

गीता बबिता झट से वापस से सोने का नाटक करने लगे । यहा मेरी और कोमल की स्थिति ऐसी की काटो तो खून नहीं वाली थी ।

कोमल ना चाहते हुए भी मेरे लंड से अलग हुई
कोमल हड़बड़ी मे - क्क्काआआऔनन होगा राज
मै - कही तुम्हारी मा तो नही ना गयी तुमको खोजते हुए
कोमल सहम गयी क्योकि इत्नी रात मे मेरे साथ बंद कमरे मे

डर तो मुझे भी था
मै - कोमल तुम जल्दी से बेड के निचे घुस जाओ मै देखता हू कि कौन है ।
कोमल जल्दी से बेड के निचे गयी और मै वापस से अपनी मरियल किस्मत को कोसता हुआ गीले लंड पर लोवर चढ़ा कर चल दिया दरवाजा खोलने



देखते हैं दोस्तो अब क्या नये हंगामे होने वाले है ।
पढकर अपनी राय जरुर दे
आपके हिसाब से दरवाजे पर कौन हो सकता है ।

आप सभी की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा
वाह क्या सीन बन रहा है।
 

Sis lover

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UPDATE 73



पापा के कहने के बाद सभी अलग अलग कमरो मे चले गए ।
निशा और सोनल एक साथ एक बेडरूम मे
मा , चाची और विमला एक बेडरूम मे
और बाकी सारे जेन्स गेस्ट रूम मे चले गये ।

अक्सर होली मे लोग बडे शहरो मे नये कपडे सिलाते है लेकिन हम मिडिल क्लास के लोगो अपनी पुरानी जीन्स और जेब फटी शर्ट भी होली के दिन नयी लगने लगती है ।

जैसा ही आम छोटे शहरो मे होता है , मैने भी अपने पीछले साल के गर्मी वाले हाफ़ लोवर डाले और एक पुरानी टीशर्ट पहन ली जिसकी निचे की फोल्डिंग खुली थी और एक दो जगह होल बने हुए थे ।

वही अनुज मेहमानो के आने वजह से खुद को थोडा अच्छे साफ कपड़ो मे रखते हुए एक शर्त और जीन्स पहन लिया जो कि दिवाली पर ही लिया था उसने ।
राहुल भी शर्मिला था या कहू अनुज के साथ मिल कर उसने भी हालही मे खरीदे कपड़े पहने थे ।

वही पापा ने तो होली के स्पेशल सफेद कुर्ता पजामा सिलाया और चाचा ने भी सेम पापा के जैसे ही सिलाया था । मानो दोनो मे मिल के साथ मे कपड़े लेके सिलवाये हो लेकिन ऐसा नही था और पापा तो हर साल होली के लिए कपडे सिल्वाते है क्योकि वो अब टाउन मे नामी सेठ मे थे और शाम तक अपने कमेटी के बडे लोगो और दोस्तो के साथ उठना बैठना होता था इसिलिए ।


बाकी हम सब तैयार होकर हाल मे आये ।
पापा चाचा ने अपने मोबाईल बंद करके वही गेस्टरूम मे रख दिया लेकिन मैने नही रखा क्योकि मुझे काफी तस्वीरे निकाल्नी थी वो भी रंग बिरंगी

हाल मे आते ही मैने सारे जेन्स को साथ मे खड़ा कर एक सेल्फी ली ।
तब तक सामने के एक बेडरूम से मा विमला और चाची निकली

ओहो क्या बात थी
विमला ने पहले की तरह ही जैसा वो कपड़े पहना करती थी , हल्के गुलाबी कुर्ती और सफेद लेगी मे थी और एक सफेद दुपट्टे को एक साइड से क्रॉस करके कमर मे बाँधा हुआ था । लेकिन उसकी 40 के उभरे हुए चुतड ने कुर्ती को उठा रखा था और लेगी मे कसी जान्घे और कुल्हे , चुतड़ की निचले गोलाई के साथ साफ साफ दिख रही थी

वही चाची भी मॉडर्न लूक मे एक धानी रंग की कुर्ती प्लाजो सेट मे बिना दुपट्टे के थी जिससे उनकी 36की चुचीयो ने कुर्ती और सीने के बिच गैप बना कर अपनी घाटीया दिखा रही थी और वो पापा के सामने मा के पीछे होकर थोडी छिप कर थी ।
वही मा ने एक बैगनी सूती ब्लाउज के साथ हल्के अंगूरी रंग की सिफान की साड़ी पहने हुए थी । जिसमे उनका कामुक जिस्म का कताछ और भी निखर रहा था । सूती ब्लाउज मे भरे हुए चुचे साडी के पल्लू से झाक रहे थे और चुचियो की घाटी उस पारदर्शी सिफान की साडी के बाहर से भी दिख रही थी।
आज तीनो के तीनो क्या कमाल लग रही थी , लण्ड खड़ा करके रख दिया था

मा - अरे एक दो तस्बिरे हमारे साथ भी लेलो जी
मा की बाते सुन कर पापा - कहो तो फ़ोटोग्राफर बुला देता हू वैसे भी किसी हेरोइन से कम नही लग रही हो रागिनी

मा , पापा की बात सुन के शर्मा गयी और पापा को आंख दिखा कर - क्या जी बच्चे हैं फिर भी आप

पापा ह्स्ते हुए - अरे भाग्यवान आज होली है और आज कोई शर्म नही रखना चाहिए ,

पापा चाची को देखते हुए बोले - और राहुल की मम्मी तुम भी मत शर्माओ आओ सबके साथ तस्वीरे जो जाये

चाचा - हा शालिनी यहा कोई दिक्कत नही है तुम चिन्ता ना करो आओ यहा

फिर मा पापा के सामने आई और पापा उन्हे अपने थोडा सा बगल मे किया। ठीक वैसे ही चाची आगे और चाचा उन्के कन्धे पकडे हुए उन्के पीछे और फिर बगल मे विमला मौसी फिर राहुल और अनुज एक दुसरे के कन्धे मे हाथ डाले हुए खडे हुए
मै सबके सामने आकर एक जगह चुनी जहा से सारे लोग एक ही सेल्फी मे आ जाये और फिर स्माइल बोलकर दो तीन सेल्फी ली

फिर मैने राहुल को बोला की वो तस्वीरे निकाले और मै विमला मौसी के पीछे खड़ा हो कर सामने देखते हुए स्माइल करने लगा कि मुझे विमला के बदन ने आती परफ्युम की खुस्बु ने उसके जिस्म को स्कैन करने पर मजबुर कर दिया और ना चाहते हुए भी सबकी मौजूदगी मे मैंने विमला के पिछवाड़े पर नजर मारी और गुलाबी कुर्ती मे उभरी गाड़ की गोलाई ने मुझे और मेरे लण्ड दोनो को एक अन्गडाई लेने को मजबुर कर दिया और मैं विमला के थोडा सट कर विमला की मखमली गाड़ की गोलाई को सहलाने लगा
पहले विमला सहम गई लेकिन फिर उसे अह्सास हुआ कि मै हू तो वो अपनी कोहनी से हल्का सा मार के आंख दिखाती हुई मुस्कुरा रही थी वही मै उसे एक शरारत भरी मुस्कान देके उसके गाड़ के मुलायाम पाट को एक बार अच्छे से दबा कर छोड दिया और फिर तस्बिरे निकलवाने लगा ।
इसी बीच सोनल और निशा स्कर्ट और टॉप मे कमरे से बाहर आई।

सोनल जो कि लॉन्ग आसमानी टॉप और मैटी पिंक मे लॉन्ग स्कर्ट पहने हुए थी वही निशा भी रानी कलर की टीशर्ट और एक हरे रंग की प्रिंटेड स्कर्ट पहने थी ।

सोनल - अरे अरे पापा हम लोग भी है ना
पापा हस के - हा बेटा आओ ना यहा आओ तुम
फिर पापा के आगे एक तरफ मा और एक तरफ दीदी खड़ी हुई और पापा ने दोनो के कमर मे हल्के हाथ डाल दिया जिससे पहले तो सोनल हिचकी लेकिन फिर नोर्मल होकर तस्वीरे निकलवाई
पापा को देख के चाचा ने भी चाची और निशा के साथ ऐसे ही पोज मे तस्वीरे निकलवाई

फिर हम सब भाई बहनो ने एक दूसरे से चिपका चिपकी करते हुए और एक दुसरे के गालो पर किस्स करते , और पाऊट करते हुए काफी तस्वीरे निकाली और फिर हम सब उपर की छत पर जाने लगे ।
जैसे ही हम सीढियो की ओर जाने को हुए की राहुल और अनुज मे होड़ हुई की कौन उपर पह्ले जायेगा और वो दौड़ लगाते हुए तेजी से उपर भागे और तभी मेरे दिमाग मे एक आइडिया आया

मै भी उन्के पीछे दौडता हुआ तेजी से उपर गया और जल्दी से अनुज और राहुल को अपना प्लान बताया ।

इधर अनुज ने राहुल से उसका मोबाईल लिया और झट से डीजे के पास गया फिर एक होली का मस्त गाना लगा दिया वो भी भोजपूरी ट्यून मे
भोजपुरी धुन पर खेसारी लाल की जबरदस्त होली की आईटम सोंग सुन कर मै भी मस्ती मे झूम गया और अपने फोन का कैमरा चालू किया

वही राहुल भी झट से एक बाल्टी भर अबीर लेके जीने के दरवाजे पर बने रैक पर जाकर खड़ा हो गया ।

मै सबके आने का इन्तेजार करने लगा और जैसे ही पापा चचा मम्मी चाची आगे आये मैने खुब तेज आवाज मे ह्ल्ल्ला करते हुए बोला - होली है !!!!!!

और तभी राहुल मे हाथ मे ली बाल्टी उल्टी करके स्ब्के उपर मिक्स रंग वाली अबीर गिरानी सुरु कर दी और सारे लोग ह्स्ते चिल्लाते भागते हुए छत के बीच मे आये और अबीर से सराबोर हो गये । लेकिन सोनल और निशा वही अन्दर ही रुक गये ।

पापा और चाचा जल्दी जल्दी अपने बाल झाड़ने मे लगे थे और
मा अपना पल्लू सिने से हटा कर ब्लाउज मे घुसे अबीर को सामने की तरफ झूक कर झाड़ रही थी जिससे उसकी मोटी चुचियो पर अबीर और फैलने लगा
विमला भी अपने सर झाड़े
लेकिन स्ब्से ज्यादा अगर किसी की दिक्कत थी वो थी चाची को
उनकी खुली कुर्ती और सीने के बिच खुली घाटियो मे अबीर स्ब्से ज्यादा भर गया था और वो तो मुथ्थीया भर कर निकाल रही थी ।

वही ये सब चीजे मै रिकॉर्ड करते हुए हस रहा था ।

मा हस कर झल्लाते हुए - ये क्या मज़ाक है राज
मै मा के सामने कैमरा ले जाकर हाथ मे लिये अबीर उन्के गालो पर मलते हुए कहा- हैप्पी होली मा येईईईईईईए

मा परेशान होकर मेरी तरफ आई और मै झट से मोबाईल बंद कर ह्स्ते हुए भागा । मा ने स्टॉल से हरे रंग की अबीर दोनो हाथ मे लेके मेरे तरफ भागी और विमला को बोली - पकड इसे विमला

मै ह्स्ते हुए भागरहा था पर
ज्यादा दुर नही जा पाया था कि विमला ने मुझे एक तरफ से दबोच लिया और ऐसा पकड़ा की मेरे हाथ भी उसके बाजुओ के गिरफ्त मे थे वही मेरे छटपटाने से उसकी मुलायम चुचिया मेरे पीठ मे गुदगुदी करने लगी और हसी इत्नी आ रही थी कि मै चाह कर भी कोई ताकत नही लगा पा रहा था और इसी ने मम्मी आई और दोनो हाथो से मेरे चेहरे को अबीर से रंग दिया ।

दो गदराई औरतो ने मिल कर मानो मेरी इज्ज्ज्त पर हमला कर दिया था और उन्के मदमस्त स्पर्श ने मेरे लन्ड मे तनाव ला दिया था ।

फिर विमला ने मुझे छोडा और वो मा के साथ हस्ते हुए स्टॉल पर चली गयी ।

इधर अनुज एक से एक अस्लील भोजपूरी गाना चला रहा था ।

सब केहू आपन चोख पिचकारी हूरे के चाहेला ।
हम सबकर भला चाहिला हमार सब बुरे चाहेला ।।


यहा गाने पर कहा कोई ध्यान दे रहा था । सब अपने मे मस्त थे ।

तभी पापा बोले - अरे बेटा थोडा हमारे समय का भी कोई मस्त गाना लगाओ

तभी मुझे एक मस्त गाने का ध्यान आया और मैने झट से यूट्यूब से एक 70s का सुपरहित राजेश खन्ना का होली का गाना चला दिया

जिसके शुरुवाती धुन सुन कर पापा चहक उठे और हाथो मे अबीर लेके मा के तरफ जाते हुए गाने की धुन पर लटके झटके लगाते हुए और गाने के साथ खुद भी तेज आवाज मे सुर मिलाते हुए गाना गाने लगे - हे आज ना छोड़ेंगे
दीपकक धी ढिपकक धी
दीपकक धी ढिपकक

मा पापा को अप्नी तरफ आता देख खुद को बचाने के लिए अपने गाल छिपाने लगी लेकिन पापा ने जबरजस्ती गाल गुलाबी करने लगे ।
और फिर मा के गाली को गुलाबी करते हुए - हा आज न छोड़ेंगे बस हमजोली ,,, खेलेंगे हम होली , खेलेंगे हम होली

मा पापा की हरकतो से शर्मा गयी और छत के दुसरी तरफ स्टॉल से दुर भागने लेकिन पापा गाने से सुर मिलाते हुए मा को प्यार जताते हुए पीछे से पकड कर उनकी नंगी क्मर और मुलायम पेट पर अबीर मल्ते हुए गाना गाते है - चाहे भीगे तेरी चुनरिया ,, चाहे भीगे रे चोली खेलेंगे हम होलीईईईईई
होली है!!!!!!
ये बोल कर पापा हवा मे अबिर उड़ा देते है और मा का हाथ पकड़कर नाचने लगते है ।

पापा की मस्ती देख कर अनुज भी मस्ती मे आकर मुझे अबीर लगाता है तो मै उसको राहुल से पकडवा कर स्टॉल तक लाता हू और निचे लिता कर एक एक रंग का अबीर ऐसे लगाता हू मानो शादी मे हल्दी ल्गाया जा रहा हो और हम सब की हरकते देख कर चाचा चाची विमला , और सोनल निशा सब मस्त थी ।
वही सोनल पहल करके थोडे अबिर लेके पहले चचा चाची को ल्गाती है और उन्के पैर छूकर आशीर्वाद लेती फिर विमला के पास जाकर उसको भी गालो मे रंग लगा कर उसके भी आशीवाद लेती है और ठीक वैसे ही निशा भी अपने मम्मी पापा को रंग ल्गा कर उन्के आशीर्वाद लेते हुए विमला को ल्गाती है और विम्ला उस्का माथा चूम कर उसको खुश रहने को कहती है

लेकिन जब मेरी नजर मेरी साफ सुथरी बहनो पर जाती है तो मै राहुल और अनुज को इशारा करके उनको घेरने को कहता हू , लेकिन सोनल मुझे ऐसा करते देख समझ जाती है और स्तर्क होने लगती है

लेकिन मै भी कम नही था भर कर मुठी मे अबीर लेके उसको पकड कर झुकाते हुए मुह पर हरा अबीर दर दिया और गालो को चूम भी लिया ,,,

सोनल ह्स्ते हुए - कमिने रुक बताती हू
इधर वो अबीर लेने गयी और यहा निशा को निचे लिटा कर अनुज और राहुल जमकर उस्के बालो गालो और गरदन पर रंग लगा के छोड दिया ,, जमीन पर गिरने से उसका टीशर्ट उपर होगया और उसकी नाभि दिखने लगी थी

वही सोनल मेरे तरफ अबीर लेके आती है तो मै उस्के सामने आंखे बंद कर बाहे फैला कर खड़ा हो जाता हू और फिल्मी होते हुए शाहरुख के अंदाज मे बोलता हु - आओ लगा लो मै नही रोकूँगा तुम्हे

इधर मम्मी पापा भी वाप्स स्टॉल तक आ गये थे ।
मेरे मस्त होकर रंग लगवाने के हरकत से सब हस रहे थे और मै आंखे बन्द किये सोनल के मुलायाम हाथो से अपने चेहरे पर अबीर लगने का इन्तेजार कर रहा था कि तभी मुझे मेरे लोवर की लास्टीक मे पीछे की तरफ से खिचाव मामूल पडा और मैने आन्खे खोली तो देखा सोनल सामने खड़ी हस रही थी और जब तक मै कुछ समझकर पीछे घूमता किसी के मुलायम हाथ मेरी नंगी चुतडो के गालो को गुलाल से ठण्डा कर रहे थे और मेरी नजर जब घूमी तो वो मा थी जो मेरे लोवर मे हाथ डाल कर मेरे पिछवाड़े मे अबीर डाल रही थी

मा को देखते ही मै झटक कर उनसे दुर हुआ और अपने लोवर की लास्टीक फैला के पिछ्वाडा झाड़ने लगा और मुझे ऐसा करते देख सारे लोग
हस हस कर लोटने लगे ।

मा मुह पे हाथ रखे हस कर भागने लगी और कभी विमला के पीछे छिपने लगी तो कभी चाची के और जब चाची के पीछे गयी तो मै चाची के सामने से उनको लपक कर पकड चाहा इस चक्कर मे चाची और मै डिसबैलेंस होकर गिरने लगे और चाची बगल मे खडे पापा के हाथ को पकड कर सहारा लेने चक्कर मे उनका पैजामा खिच दिया और फिर हम फर्श पर आ गए पापा के पायजामे क साथ ही

पापा ने झट से वापस पैजमा उपर चढ़ाया और हम खडे खडे हसने लगे ।

चाची शर्म से लाल हो गयी थी और वो पापा को सॉरी बोलती है तो पापा उनको रिलैक्स होंने का इशारा करते है ।
इधर हसी का महोल चल ही रहा होता है की मा छोटी वाली बाल्टी मे अबीर भर कर स्टॉल वाली टेबल पर चढ़ते हुए चुपके से चाचा के सर पर बाल्टी उडेल देती है

मा हस्ते हुए - देवर जी बडे साफ साफ लग रहे थे अब मज़ा आया हिहिहुही
इतने चाचा ने मा की कलाई पकड ली और निचे उतार कर दुसरे हाथ मे गुलाबी अबीर लेके छिटा मारते हुए मा के गरदन और छातियो पर मारते हुए बोले - म्ज़ा तो अब आया है भौजी हाहाहा हाह
और शुरु हो गयी देवर भौजी वाली मस्तीया रंग भरी वो उनको पुरे छत पे दौडाने लगे

इधर विमला अकेले किनारे खडे हस रही थी और पापा की नजर उसपे गयी तो वो भी बडे इत्मीनान से हाथो मे रंग लेके विम्ला की तरफ गये

पापा हस कर - अरे बहन जी थोडा बहुत आप भी मज़ा लिजिए आईये हम भी आपको गुलाल लगा देते है
विम्ला शर्मा कर नही नही करती रही लेकिन पापा एक हाथ से थोडा थोडा गुलाल विम्ला के गालों पर हल्के हाथो से लगा कर होली की बधाई दी
तो बदले मे विमला उनका हाथ पकड कर स्टॉल तक ले आई

और अबीर से भरी थाली मे केसरिया रंग हाथो मे भर के पापा के पुरे चेहरे पर मलते हुए कहा- आपको भी होली की बहुत बहुत बधाई भाईसाहब
पापा का चेहरा जब अबीर से भर गया तो वो भी बदले मे विम्ला की कलाई पकड कर बोले - आपने तो कुछ ज्यादा ही बधाई देदी बहन जी , आईये थोडा हिसाब बराबर कर लेते है

इधर पापा ने भी वापस से अबीर लेके विमला के गरदन और मूलायम गालो पर अबीर अच्छे से मला

इधर सारे लोग मस्ती मे मगन थे और डीजे पे गाना तेजी से चल रहा था जिसे मन हो रहा था मिठाइया खा रहा था पानी पी रहा था और मै भी ऐसा खोया था कि जो भी मिलता उसके साथ चिल्ला के रंग लगाते हुए नाच रहा था ।

फिर मुझे थोडा पेसाब मह्सुस हुआ तो मै स्टॉल से हट कर पीछे की तरफ पेसाब करने जाने ल्गा
डीजे पर बज रहे गाने पर झुमता हुआ मस्त बाथरूम् खोला और मुतना चालू किया और जेब से मोबाईल निकाल कर देखा तो चंदू के काफी मिसकाल आये थे और मैसेज मे काफी गालिया भरी हुई थू की
कहा है तू , फोन क्यू नही उठा रहा , उसने मेरी मा बहन को भी काफी इज्ज्ज्त भरे लहजे मे कुछ अच्छे सामाजिक शब्द लिखे थे

मुझे उसका मैसेज पढ कर हसी आई और मैने उसको एक मैसेज करके बोल दिया कि मै नये घर पर हू और यही होली खेल रहा हू, शाम को पंडाल मे मिलूंगा


फिर मैने मोबाइल वापस जेब मे रखा की तभी डीजे पर एक गाना खतम हुआ और दुसरा शुरु होने का था कि मुझे किसी के खिलखिलाने की आवाज आई बाहर से ही

मै चौका और बाथरूम से निकल कर बाथरूम के बगल और छत की चारदिवारी के बिच मे जो खाली जगह थी वहा बाथरूम की दिवाल से लग कर हल्का सा झाका

तो चाचा मा को पीछे से पकड के उनकी नाभि मे अबीर मल रहे थे और मा उन्हे ना ना कर रही थी । मा को चाचा की बाहो मे छतपताता देख मेरा लण्ड खड़ा हो गया

चाचा - आज मना मत करो भौजी आज तो मै इनको रंग लगा कर ही रहुन्गा
मा - तो लगा लो ना कहो तो चोली खोल दू हिहिहुही
चाचा मा की बात से खुश होकर उन्की मुलायम नाभि वाले हिस्से के पेट को हाथ मे दबोचते हुए कहा - बड़ी जल्दी है भौजी आपको चोली खोलने की हा

मा मुस्कुराते हुए छटकती रही वही चचा ने मा का पल्लू हटा के मा की चुचियो पर गुलाबी अबीर मल दिया और बलाऊज के उपर से चुचियो को मिजने लगे
मा चाचा के स्पर्श से पागल होने लगी और वो चाचा की बाहो मे ढीली पडने लगी

चाचा - आह भाउजी आपकी छाती तो काफी मुलायम है अह्ह्ह

मा हफते हुए - बस करिये देवर जी कोई आ जायेगा अह्ह्ह उम्म्ंम

चाचा को ध्यान आया कि वो कहा खो गये थे तो उन्होने मा को छोडा और मा झट से हस्ती हुई भाग गयी और मै भी वहा से वापस बाथरुम मे घुस गया कि वो मुझे ना देख पाये

फिर थोडा रुक कर वापस स्टॉल की तरफ आया तो सारे लोग म्स्त थे लेकिन पापा और विमला कही नजर नही आ रहे थे ।


मै इधर उधर काफी देखा लेकिन वो नजर नाही आये
आखिर कहा गये होगे मै सोच ही रहा था की निशा मेरे पीछे से आकर मेरे गालो मे अबिर मला और हस्ते हुए बोली - क्या हीरो हमारे साथ नही खेलोगे क्या होली हिहिहिह

मै सब छोड कर उसकी तरफ भागा और वो भी ह्स्ते हुए भागी और मैने निशा को पकड कर अच्छे से उसके गालो गरदन मे अबीर मल्ते हुए उसकी चुचियो को छिप कर दबा कर छोड दिया और इधर मा ने चाचा के साथ चाची को दबोच लिया ,,, राहुल अनुज सोनल के पीछे लगे थे और उसे छत पर दौडा कर दुसरे तरफ ले गये ।

मैने सबको बिजी देखकर धीरे से निशा को डीजे के पीछे ले गया और उसकी चुचियो को मिजते हुए थोडी देर उसके उसके होठो को चुस कर स्टॉल की तरफ आ गया ,,,
जहा मा ने चाची के कुर्ती मे हाथ डाल कर उनकी चुची को मल कर रंग लगा रही थी और चाचा चाची के पैर पकडे हुए मा को चढा रहे थे- हा हा भौजी और लगाओ , हमसे बड़ा शर्माती है हाहाहहा

जैसे हम बाहर आये निशा यहा का सीन देख कर शर्मा कर छज्जे की तरफ चली गयी ।

वही छत के दुसरी तरफ बाथरूम के पास अनुज ने बाल्टी मे पानी वाला रंग घोल दिया था और पिचकारी दीदी और राहुल के उपर चला रहा था ।

इनसब के बीच मुझे वापस पापा और विमला नजर नही आये



To be continue in next update
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दोनों अपनी चूदाई का प्रोग्राम बना रहे होंगे।
 

Sis lover

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UPDATE 73



पापा के कहने के बाद सभी अलग अलग कमरो मे चले गए ।
निशा और सोनल एक साथ एक बेडरूम मे
मा , चाची और विमला एक बेडरूम मे
और बाकी सारे जेन्स गेस्ट रूम मे चले गये ।

अक्सर होली मे लोग बडे शहरो मे नये कपडे सिलाते है लेकिन हम मिडिल क्लास के लोगो अपनी पुरानी जीन्स और जेब फटी शर्ट भी होली के दिन नयी लगने लगती है ।

जैसा ही आम छोटे शहरो मे होता है , मैने भी अपने पीछले साल के गर्मी वाले हाफ़ लोवर डाले और एक पुरानी टीशर्ट पहन ली जिसकी निचे की फोल्डिंग खुली थी और एक दो जगह होल बने हुए थे ।

वही अनुज मेहमानो के आने वजह से खुद को थोडा अच्छे साफ कपड़ो मे रखते हुए एक शर्त और जीन्स पहन लिया जो कि दिवाली पर ही लिया था उसने ।
राहुल भी शर्मिला था या कहू अनुज के साथ मिल कर उसने भी हालही मे खरीदे कपड़े पहने थे ।

वही पापा ने तो होली के स्पेशल सफेद कुर्ता पजामा सिलाया और चाचा ने भी सेम पापा के जैसे ही सिलाया था । मानो दोनो मे मिल के साथ मे कपड़े लेके सिलवाये हो लेकिन ऐसा नही था और पापा तो हर साल होली के लिए कपडे सिल्वाते है क्योकि वो अब टाउन मे नामी सेठ मे थे और शाम तक अपने कमेटी के बडे लोगो और दोस्तो के साथ उठना बैठना होता था इसिलिए ।


बाकी हम सब तैयार होकर हाल मे आये ।
पापा चाचा ने अपने मोबाईल बंद करके वही गेस्टरूम मे रख दिया लेकिन मैने नही रखा क्योकि मुझे काफी तस्वीरे निकाल्नी थी वो भी रंग बिरंगी

हाल मे आते ही मैने सारे जेन्स को साथ मे खड़ा कर एक सेल्फी ली ।
तब तक सामने के एक बेडरूम से मा विमला और चाची निकली

ओहो क्या बात थी
विमला ने पहले की तरह ही जैसा वो कपड़े पहना करती थी , हल्के गुलाबी कुर्ती और सफेद लेगी मे थी और एक सफेद दुपट्टे को एक साइड से क्रॉस करके कमर मे बाँधा हुआ था । लेकिन उसकी 40 के उभरे हुए चुतड ने कुर्ती को उठा रखा था और लेगी मे कसी जान्घे और कुल्हे , चुतड़ की निचले गोलाई के साथ साफ साफ दिख रही थी

वही चाची भी मॉडर्न लूक मे एक धानी रंग की कुर्ती प्लाजो सेट मे बिना दुपट्टे के थी जिससे उनकी 36की चुचीयो ने कुर्ती और सीने के बिच गैप बना कर अपनी घाटीया दिखा रही थी और वो पापा के सामने मा के पीछे होकर थोडी छिप कर थी ।
वही मा ने एक बैगनी सूती ब्लाउज के साथ हल्के अंगूरी रंग की सिफान की साड़ी पहने हुए थी । जिसमे उनका कामुक जिस्म का कताछ और भी निखर रहा था । सूती ब्लाउज मे भरे हुए चुचे साडी के पल्लू से झाक रहे थे और चुचियो की घाटी उस पारदर्शी सिफान की साडी के बाहर से भी दिख रही थी।
आज तीनो के तीनो क्या कमाल लग रही थी , लण्ड खड़ा करके रख दिया था

मा - अरे एक दो तस्बिरे हमारे साथ भी लेलो जी
मा की बाते सुन कर पापा - कहो तो फ़ोटोग्राफर बुला देता हू वैसे भी किसी हेरोइन से कम नही लग रही हो रागिनी

मा , पापा की बात सुन के शर्मा गयी और पापा को आंख दिखा कर - क्या जी बच्चे हैं फिर भी आप

पापा ह्स्ते हुए - अरे भाग्यवान आज होली है और आज कोई शर्म नही रखना चाहिए ,

पापा चाची को देखते हुए बोले - और राहुल की मम्मी तुम भी मत शर्माओ आओ सबके साथ तस्वीरे जो जाये

चाचा - हा शालिनी यहा कोई दिक्कत नही है तुम चिन्ता ना करो आओ यहा

फिर मा पापा के सामने आई और पापा उन्हे अपने थोडा सा बगल मे किया। ठीक वैसे ही चाची आगे और चाचा उन्के कन्धे पकडे हुए उन्के पीछे और फिर बगल मे विमला मौसी फिर राहुल और अनुज एक दुसरे के कन्धे मे हाथ डाले हुए खडे हुए
मै सबके सामने आकर एक जगह चुनी जहा से सारे लोग एक ही सेल्फी मे आ जाये और फिर स्माइल बोलकर दो तीन सेल्फी ली

फिर मैने राहुल को बोला की वो तस्वीरे निकाले और मै विमला मौसी के पीछे खड़ा हो कर सामने देखते हुए स्माइल करने लगा कि मुझे विमला के बदन ने आती परफ्युम की खुस्बु ने उसके जिस्म को स्कैन करने पर मजबुर कर दिया और ना चाहते हुए भी सबकी मौजूदगी मे मैंने विमला के पिछवाड़े पर नजर मारी और गुलाबी कुर्ती मे उभरी गाड़ की गोलाई ने मुझे और मेरे लण्ड दोनो को एक अन्गडाई लेने को मजबुर कर दिया और मैं विमला के थोडा सट कर विमला की मखमली गाड़ की गोलाई को सहलाने लगा
पहले विमला सहम गई लेकिन फिर उसे अह्सास हुआ कि मै हू तो वो अपनी कोहनी से हल्का सा मार के आंख दिखाती हुई मुस्कुरा रही थी वही मै उसे एक शरारत भरी मुस्कान देके उसके गाड़ के मुलायाम पाट को एक बार अच्छे से दबा कर छोड दिया और फिर तस्बिरे निकलवाने लगा ।
इसी बीच सोनल और निशा स्कर्ट और टॉप मे कमरे से बाहर आई।

सोनल जो कि लॉन्ग आसमानी टॉप और मैटी पिंक मे लॉन्ग स्कर्ट पहने हुए थी वही निशा भी रानी कलर की टीशर्ट और एक हरे रंग की प्रिंटेड स्कर्ट पहने थी ।

सोनल - अरे अरे पापा हम लोग भी है ना
पापा हस के - हा बेटा आओ ना यहा आओ तुम
फिर पापा के आगे एक तरफ मा और एक तरफ दीदी खड़ी हुई और पापा ने दोनो के कमर मे हल्के हाथ डाल दिया जिससे पहले तो सोनल हिचकी लेकिन फिर नोर्मल होकर तस्वीरे निकलवाई
पापा को देख के चाचा ने भी चाची और निशा के साथ ऐसे ही पोज मे तस्वीरे निकलवाई

फिर हम सब भाई बहनो ने एक दूसरे से चिपका चिपकी करते हुए और एक दुसरे के गालो पर किस्स करते , और पाऊट करते हुए काफी तस्वीरे निकाली और फिर हम सब उपर की छत पर जाने लगे ।
जैसे ही हम सीढियो की ओर जाने को हुए की राहुल और अनुज मे होड़ हुई की कौन उपर पह्ले जायेगा और वो दौड़ लगाते हुए तेजी से उपर भागे और तभी मेरे दिमाग मे एक आइडिया आया

मै भी उन्के पीछे दौडता हुआ तेजी से उपर गया और जल्दी से अनुज और राहुल को अपना प्लान बताया ।

इधर अनुज ने राहुल से उसका मोबाईल लिया और झट से डीजे के पास गया फिर एक होली का मस्त गाना लगा दिया वो भी भोजपूरी ट्यून मे
भोजपुरी धुन पर खेसारी लाल की जबरदस्त होली की आईटम सोंग सुन कर मै भी मस्ती मे झूम गया और अपने फोन का कैमरा चालू किया

वही राहुल भी झट से एक बाल्टी भर अबीर लेके जीने के दरवाजे पर बने रैक पर जाकर खड़ा हो गया ।

मै सबके आने का इन्तेजार करने लगा और जैसे ही पापा चचा मम्मी चाची आगे आये मैने खुब तेज आवाज मे ह्ल्ल्ला करते हुए बोला - होली है !!!!!!

और तभी राहुल मे हाथ मे ली बाल्टी उल्टी करके स्ब्के उपर मिक्स रंग वाली अबीर गिरानी सुरु कर दी और सारे लोग ह्स्ते चिल्लाते भागते हुए छत के बीच मे आये और अबीर से सराबोर हो गये । लेकिन सोनल और निशा वही अन्दर ही रुक गये ।

पापा और चाचा जल्दी जल्दी अपने बाल झाड़ने मे लगे थे और
मा अपना पल्लू सिने से हटा कर ब्लाउज मे घुसे अबीर को सामने की तरफ झूक कर झाड़ रही थी जिससे उसकी मोटी चुचियो पर अबीर और फैलने लगा
विमला भी अपने सर झाड़े
लेकिन स्ब्से ज्यादा अगर किसी की दिक्कत थी वो थी चाची को
उनकी खुली कुर्ती और सीने के बिच खुली घाटियो मे अबीर स्ब्से ज्यादा भर गया था और वो तो मुथ्थीया भर कर निकाल रही थी ।

वही ये सब चीजे मै रिकॉर्ड करते हुए हस रहा था ।

मा हस कर झल्लाते हुए - ये क्या मज़ाक है राज
मै मा के सामने कैमरा ले जाकर हाथ मे लिये अबीर उन्के गालो पर मलते हुए कहा- हैप्पी होली मा येईईईईईईए

मा परेशान होकर मेरी तरफ आई और मै झट से मोबाईल बंद कर ह्स्ते हुए भागा । मा ने स्टॉल से हरे रंग की अबीर दोनो हाथ मे लेके मेरे तरफ भागी और विमला को बोली - पकड इसे विमला

मै ह्स्ते हुए भागरहा था पर
ज्यादा दुर नही जा पाया था कि विमला ने मुझे एक तरफ से दबोच लिया और ऐसा पकड़ा की मेरे हाथ भी उसके बाजुओ के गिरफ्त मे थे वही मेरे छटपटाने से उसकी मुलायम चुचिया मेरे पीठ मे गुदगुदी करने लगी और हसी इत्नी आ रही थी कि मै चाह कर भी कोई ताकत नही लगा पा रहा था और इसी ने मम्मी आई और दोनो हाथो से मेरे चेहरे को अबीर से रंग दिया ।

दो गदराई औरतो ने मिल कर मानो मेरी इज्ज्ज्त पर हमला कर दिया था और उन्के मदमस्त स्पर्श ने मेरे लन्ड मे तनाव ला दिया था ।

फिर विमला ने मुझे छोडा और वो मा के साथ हस्ते हुए स्टॉल पर चली गयी ।

इधर अनुज एक से एक अस्लील भोजपूरी गाना चला रहा था ।

सब केहू आपन चोख पिचकारी हूरे के चाहेला ।
हम सबकर भला चाहिला हमार सब बुरे चाहेला ।।


यहा गाने पर कहा कोई ध्यान दे रहा था । सब अपने मे मस्त थे ।

तभी पापा बोले - अरे बेटा थोडा हमारे समय का भी कोई मस्त गाना लगाओ

तभी मुझे एक मस्त गाने का ध्यान आया और मैने झट से यूट्यूब से एक 70s का सुपरहित राजेश खन्ना का होली का गाना चला दिया

जिसके शुरुवाती धुन सुन कर पापा चहक उठे और हाथो मे अबीर लेके मा के तरफ जाते हुए गाने की धुन पर लटके झटके लगाते हुए और गाने के साथ खुद भी तेज आवाज मे सुर मिलाते हुए गाना गाने लगे - हे आज ना छोड़ेंगे
दीपकक धी ढिपकक धी
दीपकक धी ढिपकक

मा पापा को अप्नी तरफ आता देख खुद को बचाने के लिए अपने गाल छिपाने लगी लेकिन पापा ने जबरजस्ती गाल गुलाबी करने लगे ।
और फिर मा के गाली को गुलाबी करते हुए - हा आज न छोड़ेंगे बस हमजोली ,,, खेलेंगे हम होली , खेलेंगे हम होली

मा पापा की हरकतो से शर्मा गयी और छत के दुसरी तरफ स्टॉल से दुर भागने लेकिन पापा गाने से सुर मिलाते हुए मा को प्यार जताते हुए पीछे से पकड कर उनकी नंगी क्मर और मुलायम पेट पर अबीर मल्ते हुए गाना गाते है - चाहे भीगे तेरी चुनरिया ,, चाहे भीगे रे चोली खेलेंगे हम होलीईईईईई
होली है!!!!!!
ये बोल कर पापा हवा मे अबिर उड़ा देते है और मा का हाथ पकड़कर नाचने लगते है ।

पापा की मस्ती देख कर अनुज भी मस्ती मे आकर मुझे अबीर लगाता है तो मै उसको राहुल से पकडवा कर स्टॉल तक लाता हू और निचे लिता कर एक एक रंग का अबीर ऐसे लगाता हू मानो शादी मे हल्दी ल्गाया जा रहा हो और हम सब की हरकते देख कर चाचा चाची विमला , और सोनल निशा सब मस्त थी ।
वही सोनल पहल करके थोडे अबिर लेके पहले चचा चाची को ल्गाती है और उन्के पैर छूकर आशीर्वाद लेती फिर विमला के पास जाकर उसको भी गालो मे रंग लगा कर उसके भी आशीवाद लेती है और ठीक वैसे ही निशा भी अपने मम्मी पापा को रंग ल्गा कर उन्के आशीर्वाद लेते हुए विमला को ल्गाती है और विम्ला उस्का माथा चूम कर उसको खुश रहने को कहती है

लेकिन जब मेरी नजर मेरी साफ सुथरी बहनो पर जाती है तो मै राहुल और अनुज को इशारा करके उनको घेरने को कहता हू , लेकिन सोनल मुझे ऐसा करते देख समझ जाती है और स्तर्क होने लगती है

लेकिन मै भी कम नही था भर कर मुठी मे अबीर लेके उसको पकड कर झुकाते हुए मुह पर हरा अबीर दर दिया और गालो को चूम भी लिया ,,,

सोनल ह्स्ते हुए - कमिने रुक बताती हू
इधर वो अबीर लेने गयी और यहा निशा को निचे लिटा कर अनुज और राहुल जमकर उस्के बालो गालो और गरदन पर रंग लगा के छोड दिया ,, जमीन पर गिरने से उसका टीशर्ट उपर होगया और उसकी नाभि दिखने लगी थी

वही सोनल मेरे तरफ अबीर लेके आती है तो मै उस्के सामने आंखे बंद कर बाहे फैला कर खड़ा हो जाता हू और फिल्मी होते हुए शाहरुख के अंदाज मे बोलता हु - आओ लगा लो मै नही रोकूँगा तुम्हे

इधर मम्मी पापा भी वाप्स स्टॉल तक आ गये थे ।
मेरे मस्त होकर रंग लगवाने के हरकत से सब हस रहे थे और मै आंखे बन्द किये सोनल के मुलायाम हाथो से अपने चेहरे पर अबीर लगने का इन्तेजार कर रहा था कि तभी मुझे मेरे लोवर की लास्टीक मे पीछे की तरफ से खिचाव मामूल पडा और मैने आन्खे खोली तो देखा सोनल सामने खड़ी हस रही थी और जब तक मै कुछ समझकर पीछे घूमता किसी के मुलायम हाथ मेरी नंगी चुतडो के गालो को गुलाल से ठण्डा कर रहे थे और मेरी नजर जब घूमी तो वो मा थी जो मेरे लोवर मे हाथ डाल कर मेरे पिछवाड़े मे अबीर डाल रही थी

मा को देखते ही मै झटक कर उनसे दुर हुआ और अपने लोवर की लास्टीक फैला के पिछ्वाडा झाड़ने लगा और मुझे ऐसा करते देख सारे लोग
हस हस कर लोटने लगे ।

मा मुह पे हाथ रखे हस कर भागने लगी और कभी विमला के पीछे छिपने लगी तो कभी चाची के और जब चाची के पीछे गयी तो मै चाची के सामने से उनको लपक कर पकड चाहा इस चक्कर मे चाची और मै डिसबैलेंस होकर गिरने लगे और चाची बगल मे खडे पापा के हाथ को पकड कर सहारा लेने चक्कर मे उनका पैजामा खिच दिया और फिर हम फर्श पर आ गए पापा के पायजामे क साथ ही

पापा ने झट से वापस पैजमा उपर चढ़ाया और हम खडे खडे हसने लगे ।

चाची शर्म से लाल हो गयी थी और वो पापा को सॉरी बोलती है तो पापा उनको रिलैक्स होंने का इशारा करते है ।
इधर हसी का महोल चल ही रहा होता है की मा छोटी वाली बाल्टी मे अबीर भर कर स्टॉल वाली टेबल पर चढ़ते हुए चुपके से चाचा के सर पर बाल्टी उडेल देती है

मा हस्ते हुए - देवर जी बडे साफ साफ लग रहे थे अब मज़ा आया हिहिहुही
इतने चाचा ने मा की कलाई पकड ली और निचे उतार कर दुसरे हाथ मे गुलाबी अबीर लेके छिटा मारते हुए मा के गरदन और छातियो पर मारते हुए बोले - म्ज़ा तो अब आया है भौजी हाहाहा हाह
और शुरु हो गयी देवर भौजी वाली मस्तीया रंग भरी वो उनको पुरे छत पे दौडाने लगे

इधर विमला अकेले किनारे खडे हस रही थी और पापा की नजर उसपे गयी तो वो भी बडे इत्मीनान से हाथो मे रंग लेके विम्ला की तरफ गये

पापा हस कर - अरे बहन जी थोडा बहुत आप भी मज़ा लिजिए आईये हम भी आपको गुलाल लगा देते है
विम्ला शर्मा कर नही नही करती रही लेकिन पापा एक हाथ से थोडा थोडा गुलाल विम्ला के गालों पर हल्के हाथो से लगा कर होली की बधाई दी
तो बदले मे विमला उनका हाथ पकड कर स्टॉल तक ले आई

और अबीर से भरी थाली मे केसरिया रंग हाथो मे भर के पापा के पुरे चेहरे पर मलते हुए कहा- आपको भी होली की बहुत बहुत बधाई भाईसाहब
पापा का चेहरा जब अबीर से भर गया तो वो भी बदले मे विम्ला की कलाई पकड कर बोले - आपने तो कुछ ज्यादा ही बधाई देदी बहन जी , आईये थोडा हिसाब बराबर कर लेते है

इधर पापा ने भी वापस से अबीर लेके विमला के गरदन और मूलायम गालो पर अबीर अच्छे से मला

इधर सारे लोग मस्ती मे मगन थे और डीजे पे गाना तेजी से चल रहा था जिसे मन हो रहा था मिठाइया खा रहा था पानी पी रहा था और मै भी ऐसा खोया था कि जो भी मिलता उसके साथ चिल्ला के रंग लगाते हुए नाच रहा था ।

फिर मुझे थोडा पेसाब मह्सुस हुआ तो मै स्टॉल से हट कर पीछे की तरफ पेसाब करने जाने ल्गा
डीजे पर बज रहे गाने पर झुमता हुआ मस्त बाथरूम् खोला और मुतना चालू किया और जेब से मोबाईल निकाल कर देखा तो चंदू के काफी मिसकाल आये थे और मैसेज मे काफी गालिया भरी हुई थू की
कहा है तू , फोन क्यू नही उठा रहा , उसने मेरी मा बहन को भी काफी इज्ज्ज्त भरे लहजे मे कुछ अच्छे सामाजिक शब्द लिखे थे

मुझे उसका मैसेज पढ कर हसी आई और मैने उसको एक मैसेज करके बोल दिया कि मै नये घर पर हू और यही होली खेल रहा हू, शाम को पंडाल मे मिलूंगा


फिर मैने मोबाइल वापस जेब मे रखा की तभी डीजे पर एक गाना खतम हुआ और दुसरा शुरु होने का था कि मुझे किसी के खिलखिलाने की आवाज आई बाहर से ही

मै चौका और बाथरूम से निकल कर बाथरूम के बगल और छत की चारदिवारी के बिच मे जो खाली जगह थी वहा बाथरूम की दिवाल से लग कर हल्का सा झाका

तो चाचा मा को पीछे से पकड के उनकी नाभि मे अबीर मल रहे थे और मा उन्हे ना ना कर रही थी । मा को चाचा की बाहो मे छतपताता देख मेरा लण्ड खड़ा हो गया

चाचा - आज मना मत करो भौजी आज तो मै इनको रंग लगा कर ही रहुन्गा
मा - तो लगा लो ना कहो तो चोली खोल दू हिहिहुही
चाचा मा की बात से खुश होकर उन्की मुलायम नाभि वाले हिस्से के पेट को हाथ मे दबोचते हुए कहा - बड़ी जल्दी है भौजी आपको चोली खोलने की हा

मा मुस्कुराते हुए छटकती रही वही चचा ने मा का पल्लू हटा के मा की चुचियो पर गुलाबी अबीर मल दिया और बलाऊज के उपर से चुचियो को मिजने लगे
मा चाचा के स्पर्श से पागल होने लगी और वो चाचा की बाहो मे ढीली पडने लगी

चाचा - आह भाउजी आपकी छाती तो काफी मुलायम है अह्ह्ह

मा हफते हुए - बस करिये देवर जी कोई आ जायेगा अह्ह्ह उम्म्ंम

चाचा को ध्यान आया कि वो कहा खो गये थे तो उन्होने मा को छोडा और मा झट से हस्ती हुई भाग गयी और मै भी वहा से वापस बाथरुम मे घुस गया कि वो मुझे ना देख पाये

फिर थोडा रुक कर वापस स्टॉल की तरफ आया तो सारे लोग म्स्त थे लेकिन पापा और विमला कही नजर नही आ रहे थे ।


मै इधर उधर काफी देखा लेकिन वो नजर नाही आये
आखिर कहा गये होगे मै सोच ही रहा था की निशा मेरे पीछे से आकर मेरे गालो मे अबिर मला और हस्ते हुए बोली - क्या हीरो हमारे साथ नही खेलोगे क्या होली हिहिहिह

मै सब छोड कर उसकी तरफ भागा और वो भी ह्स्ते हुए भागी और मैने निशा को पकड कर अच्छे से उसके गालो गरदन मे अबीर मल्ते हुए उसकी चुचियो को छिप कर दबा कर छोड दिया और इधर मा ने चाचा के साथ चाची को दबोच लिया ,,, राहुल अनुज सोनल के पीछे लगे थे और उसे छत पर दौडा कर दुसरे तरफ ले गये ।

मैने सबको बिजी देखकर धीरे से निशा को डीजे के पीछे ले गया और उसकी चुचियो को मिजते हुए थोडी देर उसके उसके होठो को चुस कर स्टॉल की तरफ आ गया ,,,
जहा मा ने चाची के कुर्ती मे हाथ डाल कर उनकी चुची को मल कर रंग लगा रही थी और चाचा चाची के पैर पकडे हुए मा को चढा रहे थे- हा हा भौजी और लगाओ , हमसे बड़ा शर्माती है हाहाहहा

जैसे हम बाहर आये निशा यहा का सीन देख कर शर्मा कर छज्जे की तरफ चली गयी ।

वही छत के दुसरी तरफ बाथरूम के पास अनुज ने बाल्टी मे पानी वाला रंग घोल दिया था और पिचकारी दीदी और राहुल के उपर चला रहा था ।

इनसब के बीच मुझे वापस पापा और विमला नजर नही आये



To be continue in next update
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दोनों अपनी चूदाई का प्रोग्राम बना रहे होंगे।
 

Sis lover

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अब तक

सोनल - मतलब तू हमारे बारे कुछ गलत नही सोचता
मै मुस्कुराते हुए ना मे सर हिलाया

सोनल - तो मतलब हम इसके साथ कुछ भी करे तुझे कोई दिक्कत नही होगी


मै सोचने के भाव मे आ गया और कभी सोनल की कातिल मुस्कान के साथ इतराते चेहरे को देखता तो कभी निशा के शर्मा से नजरे चुरा कर मुस्कुराते हसिन चेहरे को
कभी एक पल को निशा की गुलाबी निप्प्ल वाली चुची को देखकर उसके मुलायम स्पर्श पाने को सिहर उठता तो एक सोनल के मोटी डार्क निप्पल वाली चुची को हथेली मे भर के मिजने का मन करता
आगे ना जाने ये सोनल की शरारत क्या गुल खिलाने वाली थी और क्या कुछ बदलने वाला था हमारी जिन्दगी मे


अब आगे
मै हैरत भरे भाव मे दोनो को देखकर एक छिपी मुस्कान के साथ - हा हा दीदी ,,मुझे क्या दिक्कत हो

तभी सोनल ने हाथ आगे करके मेरा खड़ा लण्ड को मुठ्ठि मे भर लिया और यहा मेरी सासे उपर निचे होने लगी और लण्ड मे कसाव बढ़ने के साथ दीदी के गर्म मुलायम हाथ के स्पर्श से मेरे नशो मे एक बिजली सी दौड़ गयी और मै एक गहरी सास लेते हुए सिहर गया ।

वही निशा शॉक से अपने मुह पद हाथ रख ली की सोनल ने क्या कर दिया एक बहन ने अपने ही भाई का लण्ड पकडे हुए है
निशा हैरत के भाव मे - दीदी ये आ आप क क क्या कर रही है ?????

सोनल - नही निशा आज मुझे परख लेने दे कि इसका इसके अरमानो पर कितना नियन्त्रण है

निशा झिझकर - क्या दीदी जाने दो ना हो जाता है ये सब ,,, ये सब नेचुरल है होना ,,

सोनल अब निशा को लपेटते हुए - क्या कहना चाहती है तू निशा ,,, तूझे भी सेक्स भावना आ रही है क्या इसका खड़ा हुआ देख कर

अब निशा के पास कोई जवाब नही था वो बिच मे बोल के फस गयी थी

निशा शर्मा कर थोडा ह्स्ते हुए - ये क्या कह रही हो दीदी भाई है वो मेरा मुझे क्यू आयेगी ऐसी भावना

सोनल गुस्से का भाव लाके - मुझे तो लग रहा है कि तू भी इसके जैसी ही है तभी ऐसी बाते कर रही है

इतना बोल कर वो निशा हाथ पकड कर उसको निचे घूटनो के बल मेरे लण्ड के सामने बिठा दिया

निशा जिज्ञासा भरे भाव सोनल को नजरे उपर कर देखते हुए पुछती है - ये कया कर रही हो दीदी

सोनल - मुझे तेरा भी नियंत्रण चेक करना पडेगा ,,,मुझे तो तेरी खुद की नियत नही ठीक लग रही है

निशा हस्ते हुए - क्या दीदी आप क्या बोले जा रही हो

तभी सोनल मेरे पीछे खडे होके अपना हाथ आगे लाके मेरे लण्ड निचे से सुपाडे तक हाथ फिराया जिससे मै हिल गया वही दीदी की नंगी चुचियो के नुकीले मेरे पिठ पर चुबने लगे जिससे मेरा पुरा बदन गनगना गया

वही सोनल वापस मेरे चमडी को सुपाडे से निचे खिच के निशा को बोलती है - ध्यान से देख निशा ,,,और बता एक बहन की नजर से तुझे क्या महसूस हो रहा है

निशा ह्स्ते हुए - धत्त दीदी , मुझे शर्म आ रही है

सोनल - मतलब मौका मिले तो तू बहक जायेगी अपने भाई के साथ ही हा

निशा थोडा सिरिअस होके अपने कामुज भावनाओ को छिपाते हुए के - क्या दीदी ये क्या कह रही हो मुझे इसको देख के क्या इसको छू भी लू तो भी मुझे कुछ नही होगा ,,,जैसे आपको नही हो रहा है असर वैसे मुझे भी नही होगा

सोनल - हमम ठीक है फिर पकड
मै चौक के - दीदी !!!!

सोनल - तू चुप रह , निशा तू पकड इसको
निशा सोनल के डांट से सहम गयी और हाथ बढ़ा कर मेरे लण्ड को सहलाने लगी ।
अब मेरे बदन मे अलग ही जोर पड़ रहा था ,,काफी समय से एक जगह खडे होने से मेरे पैर कापने लगे थे और वही निशा बड़ी मादकता से मेरे लण्ड को मुठ्ठि मे कस कर सहला रही थी ।

वही मै अपने पैर ठीक करने के लिए थोडा हिलदुल कर आगे बढ़ा और निशा के चेहरे के पास तक गया । धीरे धीरे कमरे का माहौल बेहद कामूक होने लगा ,,,और सोनल भी पीछे से अपनी चुचिया मेरे पिठ पर घिसते हुए सामने हाथ लाकर मेरे पेड़ू वाले हिस्से को सहला रही थी और उसका चेहरा मेरे कन्धे पर बहुत हल्की मादक आहे भर रहा था ,,,वही निशा भी मेरे लण्ड के स्पर्श के खो गयी ,,, और धिरे धीरे उसने अपने भाव चेहरे पर लाने शुरु कर दिये

मौका देख के मैने अपनी गाड़ के पाटो को सख्त करते हुए लण्ड को और भी तीखा कर निशा के बालो पर हाथ रखा और लण्ड की तरफ बहुत हल्का सा जोर लगाया और मदहोश निशा ने मुह खोल के धीरे से लण्ड को आधा मुह मे भर कर धीरे धीरे चूसना शुरु कर दिया
समय देख कर सोनल मेरे पीछे से हट मेरे बगल मे आई और मै उसके कमर मे हाथ डाल कर अपने करीब करता हुआ उसके होठो को चुस लेता हू
वही इनसब से अंजान निशा , मादकता से भरके बड़ी ही कामुकता से आंखे बन्द किये मेरे लण्ड को बहुत बहुत अन्दर बाहर कर रही थी । जिससे उसके होठो का मुलायाम स्पर्श मुझे झकझोर दे रहा था
वही सोनल ने धिरे से अपना हाथ बढ़ा कर निशा के बालो मे उसके सर पर हल्का जोर देते हुए और ज्यादा लण्ड मुह मे भरने के लिए दबाती है । जिससे मुह मे लण्ड भरे निशा नजरे उपर कर सोनल को देखती है और सोनल मुस्कुरा कर उसे इत्मीनान होने का इशारा कर उसके बालो मे हाथ फेरती है ।

जिससे लण्ड के नशे मे धुत निशा वापस मेरे लण्ड को वैसे ही मादक भरे अंदाज मे धीरे धीरे चूसने लगती है ।
यहा मै सोनल की एक चुची को पकड कर मिजते हुए उसके होठ चुसना शुरु कर देता हू जिस्से सोनल तडप उठती है और मेरे होठो को अपने होठो से चुस्ते हुए खीचने लगती है
वही मेरा दुसरा हाथ सोनल की गाड़ को सहला रहा था
इधर मै और सोनल मस्त थे तभी मुझे आभास हुआ की निशा ने मेरे लण्ड को चूसना बन्द कर दिया और तभी मुझे मेरे और सोनल के चेहरे के बिच एक और चेहरा घुसते हुए मह्सुस होता है और तभी आंखे खुलती है मेरी और देखता हूं निशा भी मेरे होठो को चूसने के फिराक मे झपट रही थी

तो सोनल खुद अलग होके निशा को मौका देती है और मौका मिलते ही निशा मुझ पर झपट पड़ती है और मै भी उसकी कमर मे हाथ डाल कर उसके अपनी तरफ खीच के उसके होठो को चुस्ने लगता हू और हाथ निचे ले जाकर उसकी लोवर मे हाथ घुसा कर उसके गाड़ के मुलायम पात को फैलाते हुए मिजने लगा जिस्से निशा और भी उत्तेजित होकर मेरे होठो को चुस्ने लगी ।
इधर दीदी ने निचे जा चुकी थी और लण्ड को मुह मे भर कर पुरे हवसी ढंग से लण्ड की चमडी को खिच के सुपाडे को सुरकते हुए लण्ड को गले तक उतार रही थी ।

इधर मै अपना सारा सिहरन और उत्तेजना निशा की मुलायम गाड़ पर उतार रहा था और धीरे धीरे उसका लोवर और पैंटी जांघो तक कर उसके गाड़ के सुराख को छेड़ने लगा जिससे तडप कर निशा मेरे होठो को छोड कर मेरे कंधो को थामे सिसकियाँ लेने लगी और मौका देख कर मैं झुककर उस्की गुलाबी निप्प्ल वाली चुची को मुह मे भर लिया जिससे निशा और भी तडप उठी

निशा - अह्ह्ह मा बचाओ दीदी अह्ह्ह उफ्फ्फ अह्ह्ह सीई उम्म्ंम्ं अह्ह्ह भाई धीरे उह्ह्ह
मै बिना कुछ बोले निशा की गाड़ कुदेरते हुए उसकी चुचिया पिए जा रहा था
इधर सोनल के लगातर हवसी ढंग से लण्ड चूसने से मेरे पैर मेरा साथ नही दे रहे थे तो मै निशा को छोडा और सोनल का सर पीछे कर उसके मुह से लण्ड निकाला और खसक कर पास के दीवाल का टेक ल्गा लिया और इसिबिच मदहोश हुई निशा ने झट से अपनी पैंटी और लोवर को निकाल दिया और वापस से मुझ पर झपट पड़ती है और इस बार सामने से अपनी नंगी चुत को मेरे लण्ड के सुपाडे पर घुमाते हुए अपनी जीभ मेरे मुह मे घुमाती है जिससे मै उतेजीत होकर उस्की एक टाँग उठा के कमर तक रख के उसके होठ चुसते हुए और उसकी कमर मे हाथ डाले उसके चुत के निचे हिस्से मे लण्ड को रगड़ कर पीछे गाड़ तक ले जाता

वही मौका पाकर सोनल वापस नीचे बैठ के अपनी जीभ निकाल के मेरे आड़ो को चूसने लगी और
अपनी जीभ मेरे लण्ड के निचले नशो पर फेरते हुए चाटने लगी ,,,कभी कभी मेरे लण्ड के सुपाडे को चाटते चाटते उसकी जीभ निशा की गाड़ के सुराख को छू जाती जिससे निशा मुझे और कस कर दबोच लेती ।

जल्द ही निशा के कूल्हो मे दर्द उठने लगा और वो अपना पैर निचे कर दी और मैने उसको घुमा कर पीछे से पकड़ते हुए उसकी चुचीयो को मिजना शुरु कर दिया और कसमसाने लगी

और फिर मैने झुक कर अपना लण्ड पीछे से उसकी गाड़ के निचे और जांघो के बिच से सामने चुत से लकीर पर निकाला और उसको खुद से चिपका कर उसकी चूचियो को नोचते हुए उसके कंधे को चूमने ल्गा

निशा दर्द और लण्ड के स्पर्श से सिहर गयी और वही सोनल मेरे सुपाडे को निशा की चुत के निचे निकला पाकर फौरन गदरन आगे कर अपनी जीभ निकाल कर मेरे सुपाडे पर जीभ घुमाने लगी और उसको मुह मे भरने की कोसीस मे सोनल के होठ निशा के चुत के दाने को छूने लगे जिससे निशा अपनी कमर उचका देती

इधर जैसे ही सोनल के जीभ निशा के दानो पर पड़े तो निशा हिछूक के - अह्ह्ह दीदी उम्म्ं उफ्फ्फ्च भाई आराम से नोच क्यू रहे है देखो लाल हो गया है उम्म्ंम्म्ं हा ऐसे करो ना उफ्फ्फ अह्ह्ह दीदी क्या कर रही हो उफ्फ्फ

मैने नजर निचे की देखा सोनल मेरे लंड को पकड उसे निचे झुका दिया है और अपने होठो मे निशा की झान्तो से भरी चुत को दबा कर चुबला रही है और साथ मे मेरे लण्ड की चमडी को आगे पीछे कर रही है ।

मुझे समझ नही आ रहा था कि सोनल और निशा के साथ सेक्स इतना अतभुत होगा
जल्दी ही निशा का बदन कापने लगा और वो अपनी पैर के उंगलियो के बल खड़ी होकर अपनी चुत सोनल के मुह पर रगड़ने लगी और सोनल भी मेरे लण्ड को छोड कर निशा की जांघो को थामे पुरा जोर लगा के उसकी चुत को चुस रही थी

निशा ने एक हाथ मेरे कंधो मे डाला और दुसरे हाथ से सोनल के बाल खीचते हुए कापने लगी - अह्ह्ह्ह दीदी अह्ह्ह उह्ह्ह मा उफ्फ़फ्फ आह्ह आह्ह और और रुकना मत मत भाई पकडे रहो मुझे आह्ह आह्ह
मै खुश होकर निशा को उसकी कमर मे हाथ डाल कर अच्छे से सम्भालते हुए उसकी चुचियो के निप्प्ल पर हल्के हाथो से अपने हथेली के खुरडरे स्पर्श से छुता हू जिस्से निशा और उतेजीत हो जाती है और कापते पैरो के साथ अपनी कमर उचकाने लगती है

निशा - ओ माय गॉड दीदी अह्ह्ह आह्ह ओ गॉड ओ मम्मी अह्ह्ज मा उफ्फ्फ अह्ह्ह आह्ह और और और हा हा ऐसे चुसो दीदी ओ मां अह्ह्ह निकाल दो ना उह्ह्ह्ह अह्ह्ह
निशा अपनी जांघो के दर्द और नशो मे उठी उसके कामरस के प्रवाह से मेरे बाहो मे शिथिल पड़ गयी और जल्द ही उसकी कमर ने झटका देना छोड दिया
वही सोनल ने निशा की चुत साफ करते हुए खड़ी हुई तो मै उसको अपनी तरफ खिच कर उसके होठ और जीभ चुसने लगता हू ,,मुझे भी निशा की चुत की भीनी खुशबू और स्वाद की थोडी बहुत अनुभूति हो जाती है ।
वही निशा धीरे धीरे मेरे बाहो से सरक से दीवाल का टेक लेके फरश पर पाव पसारे बैठ जाती है ।
और मै सोनल के जिस्मो को मलने लगता हू ।
और उसको घुमा कर पीछे से पकडते हुए उसकी मोटी चुचियो को मिजते हुए उसके डार्क निप्प्ल को मरोडने लगता हू वही सोनल अप्नी गाड़ मेरे खड़ा लण्ड पर रगड़ने लगती है और मै भी अपने हाथ आगे ले जाकर उसकी चुत को लोवर मे हाथ डाले सहलाने लगा जिससे सोनल और ज्यादा मचलने लगती है ।

मै उसको छोड कर झट से निचे बैठ कर उसका लोवर और पैंटी निचे कर देता हू और उसको दीवाल की तरफ झुकाते हुए अपना मुह सोनल की गाड़ मे लगा देता हू

सोनल अपने एड़ियो को उचका कर अपने गाड़ के पाटो को सख्त कर लेती है और मै उस्क्क जान्घो पर अपने चेहरा घुमाता हू और जल्द ही वापस सोनल अपने गाड़ को ढिला कर देती है ।
इस बार मै दोनो हाथो से सोनल के मुलायाम गुलगले गाड़ के पाटो को फैला कर अपनी जीभ को नुकिला कर सिधा उसके सुराख को छूने लगता हू जिस्से सोनल और अकड जाती है और अपने जांघो को और खोलकर चुतड को मेरे नथनो पे रगड़ने लगती है ।
मै अब लपालप जीभ घुमाते हुए उस्के गाड़ के सास लेते छेद पर जीभ चलाते हुए उसकी चुत के रिस्ते निचले हिस्से को चाटने लगता हू और अपनी चुत के नीचले हिस्सो पर मेरे जीभ का स्पर्श पाकर सोनल अपनी गाड़ उचका अपनी जांघो को और ज्यदा खोल देती है जिससे मेरे जीभ उसकी गर्म चुत मे घुस जाती है और सोनल गनगना जाती है ।

मै वापस खड़ा होके सोनल के कान मे बोलता हू - दीदी चलो ना 69 करते है

सोनल एक मादक भरे मुस्कान मे सिहर का हा मे गरदन हिला देती है और मै खुशी से उसके गाड़ के पाट को सहला कर फर्श पर लोट जात हू और सोनल अपनी गाड़ मेरे मुह पे रखते हुए 69 की पोजीशन मे आ जाती है ।

मै एक गहरी सास के साथ सोनल की चुत और गाड़ की मादक खुस्बु लेके उसके कूल्हो को थामते हूए गरदन उठा कर अपनी जीभ को सोनल के चुत पर चलाना शुरु कर दिया और वही सोनल मे मेरे लण्ड के चमडी को खिचते हुए अपनी अंदाज मे लण्ड को किसी रन्दी के जैसे चूसने लगी ।

मै लगातार अप्नी जीभ सोनल के चुत औए गाड़ के सुराख पर चलाता और कभी कभी ज्यादा गरदन उचि कर अप्नी जीभ उसकी गरम रिसती चुत मे घुसा कर अन्दर का माल चाट लेता । ऐसा करते समय सोनल अप्नी चुत मेरे मुह और दर देती थी और लण्ड को गले तक ले जाती है जल्द ही मेरा लण्ड उसकी लार से भीग गया और मुझे पुरा मन होने ल्गा की दीदी की चुत मे अब लण्ड उतार दू उस्के लिये मै लगातार जीभ से सोनल के बुर की खुदाई किये जा रहा था और तभी सोनल ने मेरे मुह पर बैठ कर अच्छे से चुत के दाने को रगड़ते हुए अपनी कमर झटका कर सीसक्ने लगी और जल्द ही मेरे मुह मे उस्का माल टपकने ल्गा ।


तभी मुझे अपने जांघो के पास एक गरमी सी मह्सूस हुई और सोनल की खुसफुसाहत भी और मै देखने के लिये आगे गरदन ऊचा किया तो सामने निशा खड़ी दिखी कुछ बोलता तब तक वो मेरा लण्ड अपने हाथ मे पकडते हुए अपनी चुत पर सेट कर अपनी गाड़ पे बल दते हुए मेरे लण्ड को अपनी सुखी चुत मे उतार लिया और मेरी चमडी खिचती हुई दर्द भरी आहहह मुझे देते गयी और मै तडप उठा ,,,वही निशा के आखो से आसू छलक प्डे

निशा दर्द से मेरे खडे लण्ड पर जोश मे बैठ तो गयी थी लेकिन उसके कुल्हे और जान्घे दर्द से उभर गये और वो दर्द भरे चेहरे से बोली - आअह्ह्झ मा दीदीईई बहुत दर्द हो रहा है उफ्फ्फ

इधर सोनल झट से मेरे मुह पर से उठी और निशा के बगल मे बैथ के उसकी कमर के नीचले हिस्सो को सहलाने लगी ।
वही निशा मेरे पेट पे हाथ रखे अपनी गाड़ उचका कर धीरे धीरे मेरे लण्ड को दर्द की वजह से छोडना चाह रही थी

सोनल निशा को दुलारते हुए - ब्स ब्स निशा अब नही होगा दर्द,रुक जा बाहर मत निकल

निशा दर्द भरी आवाज मे आसू छलकाती हुई - बहुत जलन हो रहा है दीदी अह्ह्ह

सोनल उसकी पिठ और कमर को सहलाते हुए - धीरे धीरे निचे जाओ निशा कुछ नही होगा ,,, हा आराम से बिल्कुल

इधर निशा सोनल के कहे अनुसार वापस से मेरे लण्ड पर बैठते हुए अपनी चुत मे उसे निगलने लगी और जब जड तक मेरे लण्ड को ले लिया तो एक गहरी सास लेते हुए खुद के आसू साफ करते हुए हसने लगी ।

सोनल उसके आसूओ से भिगे गाल काटते हुए बोली - देखा कुछ नही हुआ

निशा शर्मा रही थी और सोनल के होठो को चूमते हुए बोली - थैंक यू दिदी ,,,अब क्या करु

सोनल ह्स कर -अब धीरे धीरे उपर निचे करके अपने ये गाड़ हिला ,,,सोनल निशा के गाड़ को सहलाते हुए बोली

निशा ह्स्ते हुए अपनी गाड़ को हल्का हल्का हिलाना शुरु किया - अह्ह्ह दीदी उम्म्ं गुदगुड़ी हो रही है अन्दर अह्ह्ह उम्म्ंम

सोनल - अब आया ना मज़ा हीही

वही निशा झुक के मेरे उपर लेट गयी और मेरे होठ चुस्ते हुए बोली - आई लव यू राज
मै उसके गाड़ को सहलाते हुए अपनी कमर उचका कर उसके चुत मे लण्ड को पेलेते हुए कहा -आई लव यू टू दीदी

और धीरे धीरे मैने उस्की कमर को थामे स्पीड बढ़ाते हुए सटासट पेलना शुर कर दिया और जल्द ही उसकी चुत ने मेरे लिये जगह बना ली और उसको मजा आने लगा ,,,वही सोनल बैठी हुई कभी मेरे आड़ो को सहलाती तो कभी सोनल के गाड़ के सुराख को चाटती

कुछ समय की जोरदार कसी हुई चुत मे चोदने और पहले भी लण्ड चुस्वाने से जल्द ही मै झड़ने के करीब था
मै जल्दी से खुद को रोका और निशा को उतार दिया

फिर खड़ा होकर मै अपना लण्ड हिलाते हुए बोला दीदी मेरा आने वला है

मेरे झड़ने की बात सुन के दोनो जल्दी जल्दी मेरे कदमो मे आई और जीभ निकाल कर मेरे पिचकारी का इन्तजार करने लगी

मैने भी अपनी एड़ियो को उचका के अपने गाड़ के पाट को सख्त किया और लण्ड के सुपाडे के नीचली नश को आखिरी सास तक रोकते हुए एक लम्बी आह के साथ वीर्य से भरी ब्ड़ी पिचकारी सोनल के मुह पर छोड दी और दुसरी धार के लिये निशा ने अपना मुह आगे किया और मैने अपना लन्द उसके जीभ पर रख कर हिलाया सारा माल उसकी मुह मे भर दिया और बाकी का माल सोनल ने लण्ड को मुह मे भर कर निचोड लिया । फिर एक दुसरे के होठो को चुसते हुए माल की हेरा फेरि करते हुए हसने लगी ।
मै थक कर दीवाल का टेक लगाते हुए बैठ गया और उनकी हसी मे शामिल हो गया ।


जारी रहेगी
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ओह भाई क्या अपडेट है मजा आ गया बस ऐसे ही लिखते रहो।
 
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