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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

komaalrani

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में ---भाग -११५ पृष्ठ ११८८

बुच्ची, नेछु की रस्म और, किस्से बुच्ची की माई के

अपडेट पोस्टेड, कृपया अपडेट पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
 
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chodumahan

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काफी दिनों से इस सीक्वेल का आग्रह था...
और आपने होली के मौके पर इसे शुरू करके ... हम पाठकों का मान रखा...
एक लेखक/लेखिका के तौर पर ये फरमाइश पूर्ण करना आपका बड़प्पन है और एक अलग हीं उच्च स्तर पर ले जाता है...

बहरहाल कोटि-कोटि धन्यवाद
 

komaalrani

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Meri pyari komal didi ..pls is story ko incest mat banao ..ye meri dono bahno ki story h ...aaap aur chutki dono mil ke sabhi mardo ko nichod lo...meri dono bahan sabka lund legi
chhutaki ka kahaani men koyi saga bhai ya aisa male relative to hain nahi jiske saath incest ho, haan Chhutaki ke Jija ya aur logon ke saath,... lekin abhi to kahani shuru huyi hai,....
 
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komaalrani

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इस कच्ची कली की तो कचकचा के लेना होगा भौजी...
रगड़ते हुए, दरेडते हुए, चीखते हुए, चिल्लाते हुए...और फटते हुए....
:kiss1::kiss1::vhappy1::vhappy1:
एकदम सही कहा आपने,

जब तक परपराये नहीं, चरचराये नहीं , छरछराये नहीं, तबक न तो लेने वाले को मज़ा,

न देने वाली को मज़ा,... ऐसे ही होगा,... लेकिन मेरा आग्रह है, जो पिछले ३ पार्ट्स , आज का जोड़ के पोस्ट किये हैं , उन्हें पढ़ के आप की सम्मति मिलती तो मैं बहुत हर्षित होती,

पर आभार आपका , पधारने के लिए सुझाव देने के लिए, और गुज़ारिश की इस कहानी पर नियमित हाज़िरी लगाते रहें
 
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chodumahan

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एकदम सही कहा आपने,

जब तक परपराये नहीं, चरचराये नहीं , छरछराये नहीं, तबक न तो लेने वाले को मज़ा,

न देने वाली को मज़ा,... ऐसे ही होगा,... लेकिन मेरा आग्रह है, जो पिछले ३ पार्ट्स , आज का जोड़ के पोस्ट किये हैं , उन्हें पढ़ के आप की सम्मति मिलती तो मैं बहुत हर्षित होती,

पर आभार आपका , पधारने के लिए सुझाव देने के लिए, और गुज़ारिश की इस कहानी पर नियमित हाज़िरी लगाते रहें
अवश्य...
लेकिन होली, दिवाली पर छुट्टी लेकर कुछ समय के लिए अपने घर लौटना और वहाँ की मिटटी की खुश्बू लेना तो बनता है...
इसलिए कुछ समय के लिए forum से दूर हों जाता हूँ....

अभी तो मैं "मोहे रंग दे" पर अपने पूर्व कथन के साथ शुरू से पढ़ने में व्यस्त हूँ जिसमें आपने कहा था कि समग्र रूप उस कहानी पर अपने कमेन्ट दूं..
वक्त निकाल कर इस पर भी अपने विचार प्रकट करूँगा...

धन्यवाद
 

komaalrani

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काफी दिनों से इस सीक्वेल का आग्रह था...
और आपने होली के मौके पर इसे शुरू करके ... हम पाठकों का मान रखा...
एक लेखक/लेखिका के तौर पर ये फरमाइश पूर्ण करना आपका बड़प्पन है और एक अलग हीं उच्च स्तर पर ले जाता है...

बहरहाल कोटि-कोटि धन्यवाद
नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है , आपने शायद गलत समझा,

लिखने वालों से पढ़ने वाले ज्यादा जरूरी होते हैं, कोई लाख कलम घसीटे,... मंच पर खड़ा होकर गाये, अभिनय करे, कविता पाठ करे,... अगर श्रोता न हों, दर्शक न हों,

मान तो पाठक बढ़ाते हैं और आप ऐसे रससिद्ध, विज्ञ उत्साहवर्धन करने वाले पाठक हों तो फिर कहना ही क्या,...


मज़बूरी मेरी कहानी की थी, ... कुछ कहानियां या कहानियों के प्रसंग ऐसे होते हैं की उनके साथ उनके विपरीत मनस्थिति वाले प्रसंगों पर लिखना कठिन हो जाता है, मैं एक उदाहरण देती हूँ , फागुन के दिन चार लम्बी कहानी या उपन्यासिका में , एक प्रसंग था, मुम्बई में रेलवे स्टेशन पर आतंकी हमले का,... और वह दृश्य इतना कारुणिक था,... एक माँ अपनी बेटी को हॉस्पिटल में , शवगृहों में , जगह जगह ढूंढती है, और उसी कहानी का वो प्रसंग जहाँ, रीत के माता पिता दोनों बॉम्ब ब्लास्ट में मारे जाते हैं , उसका बाल सखा भी,... लोग कहते हैं की स्टेशन पर हुए बॉम्ब ब्लास्ट में मारा गया, उसके भी माता पिता और वो , दोनों परिवारों में अकेली बची,... यंत्रवत,... सबके शवों का अग्निदाह करती हो, ... कई पाठकों ने कहा उनके आँखों में आंसू आ गए,... और मेरी हालत भी,... तो उस समय, ...मैंने श्रृंगारजन्य कहानियां जो उस फोरम में चल रही थीं, उन्हें रोक दिया क्योंकि उन्हें विजुलाइज कर पाना कठिन होता है।

मोहे रंग दे भी एक इंटेस स्टोरी थी ख़ास तौर से शुरू के भागों में , इरोटिका, रोमांस और बीच में विछोह साथ में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस , कन्वर्जेंस ऐसी बातों का मानवीय प्रभाव और उन पर गहन चर्चा तो उस के साथ भी इस कहानी को सुमेलित कर पाना मेरे लिए दुष्कर था.

और जोरू का गुलाम और सोलहवां सावन चल ही रही थीं।

तो मोहे रंग दे को ख़तम करने के बाद मैंने इसे शुरू किया क्योंकि दोनों की भाव भूमि एकदम अलग है

अभी भी मैंने एक छोटी कहानी, होली के रंग जो शुरू की है , वो एकदम नागरी परिवेश की है , पर वह होली की एक छोटी कहानी है,

यह कहानी भी मैं कोशिश करुँगी छोटी ही रहे,...

तो आभार आपका इस सूत्र पर पधारने के लिए,... एक तो मैं देवनागरी लिपि में लिखती हूँ, दूसरे स्टोरी के डेवलप करने में बहुत टाइम लगता है, और कहानी घटना प्रधान भी नहीं होती, ... तो पढ़ने वालों की संख्या कम होना स्वाभाविक है , पर मैंने इस फोरम के मित्रों का आभार करती हूँ की इस कहानी को उन्होंने बहुत चाव से सराहा,

और आप आ गए तो,...
 
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komaalrani

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इस कहानी का तीसरा भाग, चार पोस्ट, पिछले पन्ने पर, पढ़ने और कमेंट के लिए अग्रिम आभार
 

Mass

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Wonderful update komaalrani ji...after a long time, thoda incest..badhiya hain...aise hi incest kaa tadka bhi likhiye..mazaa aata hain..agle update kaa intezaar rahega!! Thanks.
 

komaalrani

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जबरदस्त कहानी आपकी लेखनी गजबे वाटे
बहुत बहुत आभार, आपका आना ही इस सूत्र पर प्रेरणादायक है और फिर प्रशंसा के शब्द,... धन्यवाद, बस जुड़े रहें, यही निवेदन कर सकती हूँ,...
 
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