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Adultery तेरे प्यार मे.... (Completed)

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Suraj13796

💫THE_BRAHMIN_BULL💫
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मैंने कभी नहीं कहा कि निशा मर जाएगी अंत मे
यहां से जाने के बाद कबीर अंजू से ही पूछेगा समाधि के बारे मे. वसीयत के चौथे पन्ने का राज जल्दी ही खोलेंगे. राय सहाब ने समाधि का झूठ क्यों बोला इस पर विचार करने की जरूरत है

आपने जो कहा है उस से मेरा दिल गदगद हो गया
अगर निशा इस कहानी में नही मरेगी तो बाकी सब सह लेंगे,
अब कोई दिक्कत नहीं है जिसको मन हो कबीर को जितना चूतिया बना सकता है बना ले,
अब राज 100 update के बाद भी खुलेगा तो भी कोई दिक्कत नहीं

because nisha is love , आज तक किसी कैरेक्टर पर इतना crush नही आया जितना निशा पर आया है,
she is kind of lady i wish for

आज से 2–4 साल बाद जब फिर से कहानी पढ़ने आऊंगा तब और इत्मीनान से पढूंगा क्योंकि मुझे मालूम होगा की ये कहानी पढ़ कर सुकून ही मिलेगा, इतना सारा तकलीफ सह कर भी निशा कबीर एक हो गए

बस एक request और है कबीर–अंजू, कबीर–निशा का सीन जरूर लिखना, वरना कहानी अधूरी अधूरी सी लगती है
thank you ❣️🙏
 
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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#111

भाभी और मेरे बीच ख़ामोशी छाई हुई थी , पर दिल में तूफान आया हुआ था .

भाभी- जानती हूँ तुझे यकीन नहीं आयेगा पर तेरी दोस्ती के आगे भी दुनिया है कबीर.

मैं- ऐसी क्या वजह थी जिसके लिए मंगू ने परकाश को मारा

भाभी- वजह है कबीर, वजह है राय साहब है वो वजह. प्रकाश राय साहब को ब्लैकमेल कर रहा था. बाद जब हद से आगे बढ़ गयी तो राय साहब ने अपना काँटा निकाल लिया

मैं- और आपको कैसे पता चला ये .

भाभी- मैंने राय साहब और मंगू को बात करते समय सुना था .

मैं- पिताजी के टुकडो पर पलने वाले नौकर ने ही पिताजी को ब्लेकमेल किया पर क्यों

भाभी- इसकी तह तो नहीं निकाल पाई पर प्रकाश श्याद वसीयत के चौथे पन्ने के हक़ की मांग कर रहा था .

मैं- पर चौथे पन्ने में कुछ भी तो नहीं था .

भाभी- कबीर मैं कभी नहीं चाहती थी की तुम इस परिवार के अतीत को देखो पर मैं रोक नहीं पाई. आज मैं बेचैन हूँ , मैं आने वाले कल को देख रही हूँ . और उस कल को मैं देखना नहीं चाहती.

मैं- आने वाला कल खूबसूरत होगा भाभी

भाभी- राय साहब को अपना गुरुर सबसे प्यारा है वो कभी नहीं झुकेंगे

मैं- आसमान भी झुकता है , झुकाने वाला चाहिए.

भाभी- इसी बात से तो मैं डरती हूँ.

मैं- मंगू से आज ही बात करूँगा मैं

भाभी- ये ठीक समय नहीं

मैं- बात करना बेहद जरुरी है , अंजू को मालूम हुआ तो आग लग जाएगी और जलना मुझे पड़ेगा. मंगू की क्या मज़बूरी है की वो राय साहब का पालतू बन गया है ये जानना ही होगा. राय साहब के पापो में उसका भी हाथ है .

मैं- त्रिदेव की कहानी बता क्यों नहीं देती भाभी मुझे तुम

भाभी- तू अपने जीवन की नयी शुरात करने जा रहा है कबीर. मैं एक बार फिर कहूँगी इन बातो को जानने की जिद छोड़ और आगे बढ़. वो चार दीवारे जिन्हें तुम घर कहते हो, वो घर मर चूका है कबीर. उसके जनाजे के बोझ को तुम उठा नहीं पाओगे . सपना देखा है तुमने, उसे पूरा करो. अंजू आदमखोर नहीं है विश्वास करना मेरी बात पर.

भाभी के जाने के बाद भी बहुत देर तक मैं उनकी कही बाते समझने की कोशिश करता रहा . वसीयत का चौथा पन्ना जिसे मैं देख नहीं पाया था राय साहब ने जो बताया वो मैंने मान लिया था .

“तुम अकेले नहीं हो जिसने अपने राज यहाँ छिपाए है , तुमसे पहले और भी थे जिन्होंने अपनी जिन्दगी इस जंगल में जी है ”



“तेरे हिस्से का सच तेरी दहलीज में है ”

मेरा सर इतना भारी हो गया था की मैं पागल ही हो जाता अगर वहां से नहीं चलता तो. जेब में पड़ी चाबी मेरे घर का हिस्सा ही तो थी . चाचा की अमानत जिसका न जाने क्या मोल था . घर आने के बाद मैं नहाया और आंच के पास बैठ गया . अंजू से दो चार बार नजरे मिली तो सही पर बात नहीं हो पाई.

रात का अन्धकार मुझे लील ही जाने वाला था की , सामने खड़ी उसे देख कर बस देखता ही रह गया. डाकन एक बार फिर से मेरी दहलीज पर खड़ी निहार रही थी मुझे. मैंने एक नजर बाप के कमरे पर डाली एक नजर ऊपर चौबारे पर और उसकी तरफ चल दिया. उसने पीठ मोड़ी और बाहर की तरफ चली की मैंने उसका हाथ पकड़ लिया .

“अपने घर आई है तू , कब तक बचेगी ” मैंने कहा

निशा-बचना तो तुझे है मेरे सनम . ये जिन्दगी जो तू दांव पर लगाये हुए है ये मेरी अमानत है .

मैं- तो फिर अपनी अमानत को थाम ले बाँहों में , चोरी छिपे क्यों मिलना फिर ज़माने को बता दे की इश्क किया है इस डाकन ने .

निशा- बस तुझे देखना चाहती थी .

मैं- थाम ले फिर इस रात को और देख जी भर के मुझे . आ मेरे साथ इन खुशियों में शामिल हो .

निशा- तू जानता है न मुझे खुशिया रास नहीं आती

मैं- आदत डाल ले तू अब

मैंने निशा को अपनी तरफ खींचा और आगोश में भर लिया. उसकी सांसे मेरी साँसों में उलझने लगी.

निशा- क्या चाहते हो

मैं- तुमसे प्यार करना

निशा- करती तो हूँ तुमसे प्यार

मैं- जताती क्यों नहीं फिर

निशा- आ चल फिर साथ मेरे, यहाँ की हवा ठीक नहीं

मैं- चल फिर.

उसका हाथ थामे मैं उसके साथ चलते हुए खेतो पर आ गया.

निशा- मुझे मालुम हुआ की कल फिर तू भिड़ा उस आदमखोर से

मैं- हाथ लगते लगते रह गया .

निशा- कबीर, अब जब हम दोनों जिन्दगी के ऐसे मोड़ पर है,तुझे ये समझना होगा की तुझ को अगर कुछ हो गया तो फिर मेरा क्या होगा. पहले कभी मेरा हाल ऐसा ना हुआ पर कुछ दिनों से मैं डरती हूँ तुझे खोने से.

मैं- तू मेरे साथ है तो फिर क्या हो सकता है मुझे . पर मुझे तुझसे कुछ बताना है .

निशा- सुन रही हूँ

मैंने उसे तमाम बाते बताई, वसीयत के चौथे पन्ने का जिक्र भी किया . बहुत देर तक वो सोच में डूबी रही फिर बोली- चल, देखते है सुनैना की समाधी को .

मैं- इस वक्त

निशा- हाँ अभी इसी वक्त.

हम दोनों चल दिए. जंगल में अन्दर घुसते गए. और फिर एक जगह आकर निशा ने गलत राह पकड़ ली.

मैं- इधर कहा जा रही है.

निशा- सुनैना की समाधी नहीं देखनी क्या

मैं- पर वो तो उस रस्ते पर है न

निशा ने अजीब नजरो से देखा मुझे और बोली- कल के हमले के बाद शायद हिल गए हो तुम या फिर अँधेरे का असर है . आ जल्दी से .

मैं कुछ नही बोला बस उसके पीछे चलता गया . कुछ देर बाद वो एक जगह रुकी जहाँ पर बड़े पत्थरों से एक समाधी बनाई गयी थी जिसे चिना नहीं गया था . कच्चे पत्थर रखे थे एक के ऊपर एक .

निशा- तो आ गए हम

मैं- निशा ये सुनैना की समाधी नहीं है

निशा- क्या बोल रहा है तू कबीर. बंजारों की समाधी का नहीं मालूम क्या तुझे कच्ची चिनाई वो ही तो करते है . और फिर मुझे नहीं मालूम होगा क्या इस जगह के बारे में

मैं- अगर ये सुनैना की समाधी है तो फिर वो जगह क्या है .

निशा- कौन सी जगह

मैं- वसीयत के चौथे पन्ने का सच वही छिपा है निशा, हमें अभी के अभी वहां पर जाना होगा.
ओ तेरी ये तो कहानी हि कुछ ओर हो गई भाई,
इसका मतलब समाधी कही ओर है ओर जिसे राय ए समाधी बताया था वो तो सला मामला गड़बड़ हैं।।
जबरदस्त लेखनी सस्पेंस के साथ।।
👌🏻👌🏻👌🏻
 

HalfbludPrince

मैं बादल हूं आवारा
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Chalo is puri kahani me kahi to humara andaza sahi baitha humne pichle Review Me hi kaha tha ki bhabhi raay sahab ka naam lengi, kabhi kabhi lagta hai pitaji ne paiso ke bal par sabko kharid rakha hai bahan hawas shant karti hai or bhai baaki ke kaam pura karta hai kyuki wajah koi bhi ek waykti apna zamir kaise bech sakta hai.

Bhabhi ki chinta jayaz hai kyuki kal kabir or pitaji aamne saamne honge or shayad tab pitaji jawab de nahi paayege or unka wayktitv unhe jhukne nahi denga or iska parinaam bura hi honga. Bhabhi sab jaanti hai unhone sab dekha hai kabir ka dil na tut jaaye har kisi se bharosa na uth jaaye shayad isiliye chup rahti hai, waise hum abhi bhi samjhne ki koshish kar rahe hai.


Nisha jaha kabir ko le gayi agar wah sunaina ki samadhi hai to fir raay sahab ne jo dikhaya wo kya tha ya sirf gumraah karne ki sazish lekin anju ne bhi kaha tha samadhi ke niche sona hai do log galat kaise ho sakte hai. In sab ke bich do pal umadte pyaar ke badiya the..
माना कि राय सहाब बाहुबली आदमी है पर ये कहानी है रिश्तों की प्यास जिस्मों की है इस कहानी मे. जो कुछ हो रहा है वो आपस मे ही हो रहा है. भाभी कबीर का भला चाहती है इसलिए उसे बार बार समझाती है
 

HalfbludPrince

मैं बादल हूं आवारा
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main isme kuchh point or add krna chahunga.. kochwaan ke jungle wale incident me bhi koi stri thi jo koi geet gunguna rhi thi.. wahan bhi Maine bhabhi pr sandeh zaahir kiya tha.. uske baad sarpanch ke bete wale incident me bhi bhabhi pr sandeh zaahir kiya tha.. or jis raat darwaze pr khoon se kabir ke shirt pr lga tha tb bhi bhabhi pr hi sandeh kiya tha.. qki uss raat chachi or champa ek sath so rhi thi.. to ye dono to hongi nahi.. baki bacha abhimanyu toh uss raat shayad woh gaon me nhi tha jahan tk mujhe yaad hai... rahi baat ray sahab ki to woh chodu Ho skte hai lekin adamkhor nahi jesa ki fozi Bhai ji ne saaf kr diya hai jaani dushman ke sajeev kumar wala isme koi scene nhi hai...
Bhabhi pr shq ka reason bhi hai ki woh hmesha raat ko jaagti hui milti thi...
Ek baar woh khet me gai thi Tab ek bache ki lash bhi mila tha.. Bhabhi uss trf hi kyo gai thi bache ki lash usko hi kyo? Dikha... Bhabhi Ray sahab or champa ki sachaai kabir ko hi kyo btaai? Ab prakash ka murderer mangu hai ye bhi kabir ko hi kyo btaya... Beshq bhabhi kabir ki shubh chintak ho lekin woh hi adamkhor prateet Ho rhi hai Inn Sari kadiyon ko jod kr.. Ek baat OR gaur krne wali hai ki jab abhimanyu yahan nahi hota Tab adamkhor Kuch jyada hi active Ho jata hai.. Jese abhi ke incident dekh lo raat me abhimanyu nahi tha adamkhor ka hamla hua... Ye sab chizen ek trf hi ishaare krte hai...
संदेह करने से कुछ नहीं होता मित्र प्रमाण की आवश्यकता होती है. भाभी जानती है कि कबीर निशा से ब्याह करके ही मानेगा तो वो राय सहाब की किस्से बता कर तोड़ दे रही है कबीर को ताकि समय आने पर कबीर बाप की कमी बता सके
 
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HalfbludPrince

मैं बादल हूं आवारा
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Ye bhabhi Kabir ko chutiya bana rahi hai...ye bhabhi chhinar rai sahab se marwane gayi thi ki unke bedroom me live porn dekhane gayi thi, Jo wo mangu aur rai sahab ko bate karte hue sun li ....ye bhabhi sali bahut bate sunti hai yaha waha ki lekin jab dekho tab Ghar me hi rahti hai....chakkkar Kya hai Sala...aur ye bate ek baar me pura pura nahi batati hai ,kishto me batati hai aur bolati hai ki dekh Kabir ye bate sab chhod de, abe sali jab chhodana hi hai to Kya g@nd marawane ke liye batai ki mangu hi katil hai....aur ye sali hamesha wahi kyo rahati hai jaha Rai sahab kisi ko pel rahe hote hai jaise Champa, Rama, aur pata nhi kaun kaun abhi to mangu wali bhi kand suni ye....
Ye bhabhi na hokar news ho gayi hai Jo Kabir ke g@nd me ungali karti rahti hai news Bata Bata ke....aur ye sasura Kabir ko ye bhi nhi pata tha ki sunaina ka kabra kidhar hai...jangal me maa chudane ke liye itne salo se rah raha hai....
निसंदेह भाभी कबीर की शुभचिंतक है इसलिए वो आगाह कर रही है उसे की आने वाला कल देखे ना कि बीता हुआ कल
 

HalfbludPrince

मैं बादल हूं आवारा
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निशा जितनी confident होकर बोली है इस से लग रहा को वो भी बंजारन को टोली से है, जैसे अक्सर वो यहां आती है

जब बार बार भाभी बोलती है निशा vs राय साहब को लेकर की राय साहब का गुरुर नही मानेगा तो पता नहीं क्यों मुझे हमेशा ऐसा लगता है की past में जो खून खराबा हुआ उस से राय साहब और निशा में दुश्मनी होगी या कुछ तो होगा जिस से राय साहब नहीं चाहेगा की निशा उसके घर की बहु बने

खैर ये राज शायद कबीर को मालूम है और उसने अपने परिवार/राय साहब और निशा में निशा को चुना है जो की बहुत अच्छी बात है

लेकिन फौजी भाई अंत में किसी अनहोनी की आशंका देकर जो mood off कर देते है, फिर ये सारे राज, ये प्रेम कहानी सब बर्बाद लगने लगता है, कही समय बर्बाद तो नही हो रहा मेरा ये सोच कर
अभी तक तो बहुत अच्छी है कहानी
आगे देखते है
निशा क्या है क्या नहीं है ये आप जान जाएंगे बस ब्याह वाले एपिसोड के बाद. कबीर बस इतना जानता है कि निशा कौन है. मेरा विश्वास रखिए अंत मे प्रेम ही बचेगा
 

HalfbludPrince

मैं बादल हूं आवारा
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Ye Kabir jab dekho Rai sahab ko gali bakta rahata hai ..ye bhi apni chhoti maa(chachi) ko pel hi raha hai....sarla ko pel hi rha hai...anju par nigah phiraye baitha hai....aur ye chaman chutiya chacha ko dhundh raha hai ....agar chacha mil Gaye aur pata Chala ki unki Bibi Kabir se chudi to badale me Nisha ko pel denge to iss Kabir ke g@nd me mirch hi lag Jani hai....agar maan lo Nisha ko pata Chala ye bate to wo agar Kabir ke G me 1 feet ka danda dal di to...na baitha jayega na utha....
चाची के साथ बने सम्बंध कबीर के मजे के लिए नहीं थे उसका और चाची का रिश्ता बहुत मजबूत है ये समझिए हाँ सरला के बारे मे आपने सही कहा.
 

HalfbludPrince

मैं बादल हूं आवारा
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भाभी नंदनी कबीर की माँ जैसी बन कर उसे भड़काती है वो भी अपने समय अनुसार अपनी शायद चाल के अनुसार और वो भी ऐसा ही है सब की बात सच मान लेता है

भाभी ने प्रकाश का कातिल बता दिया और निशा ने सुनयना की असली कब्र दिखा दी पे ये कबीर खुद बस चुतेँ मारने लायक ही रह गया ? चाची सरला से दिल भर गया तो अब अंजू ही सही पर शायद इसको यह नही पता वो भी खेली खिलाई चुदी चुदायी खिलाड़िन है इसको कच्चा खा जायेगी

शुकर है ये पुलिस में नही है वर्ना कोई भी केस हल ना कर पाने के जुर्म में सस्पेंड ही होता :happy:

निशा डायन जी के आते ही कबीर का दिमाग चलने लगता है तो उसे रोज़ ही मिल लीता करे चुम्मा चाटी तो हो ही जायेगी बासी चुतो से तो अच्छी ही है
कबीर बस कबीर है और यही बात बड़ी बात है. निशा उस से बस थोड़े दिन की दूरी पर ही है
 
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