जोरू का गुलाम भाग २५८- एम् ३ पृष्ठ १६२३
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बचपन की इस तरह की कई यादें होंगी...जोरू का गुलाम भाग १५५
पीछे की सीट पर,बहिनिया इनकी
मैं रियर व्यू मिरर में देख रही थी ,इनकी ममेरी बहन इनकी गोद में उसका स्कूल का ब्लाउज उठा हुआ , और ये ब्रा के ऊपर से उसकी कच्ची अमिया कुतरते हुए ,...
स्साली की कच्ची अमिया थीं भी जबरदस्त ,..
मुझसे रहा नहीं गया ,मैंने अपनी ननद को छेड़ा ,
" गुड्डी यार तेरे भैया तुझसे ज्यादा तेरी ब्रा को प्यार करते हैं , देख उसे चूम चाट रहे हैं और अंदर तेरे टिकोरे बिचारे मचल रहे हैं। "
मेरे साजन के लिए इतना इशारा बहुत था ,उस टीनेजर की फ्रंट ओपन ब्रा खोलने का ,
ब्रा उतरी ,मैंने पीछे हाथ किया और और गुड्डी रानी की ब्रा मेरी मुट्ठी में।
अब ये कबूतर ब्रा में बंद होनेवाले नहीं थे। गुड्डी के सूटकेस से बाकी ब्रा पैंटी तो मैंने इनके मायके में ही उतार के छोड़ दी थी , बस यही जो उसने पहनी थी वही बची थी ,...
और अब बिना पीछे मुड़े मैंने रसमलाई की ओर इशारा किया , गुड्डी की पैंटी भी अब मेरे हाथ में थी।
और मेरी छिनार ननद अब बिना पैंटी ब्रा के और उसके भैय्या ने अब जो ब्लाउज उठाया तो मुट्ठी में आ जाने वाले छोटे छोटे गोरे गोरे चूजे ,और बस ललछौंहे से दिख रहे मुंह उठाये निप्स ,...
ये कहानी इन्ही कच्ची अमियों से तो ही शुरू हुयी थी।
मुझे आम बहुत पसंद थे ,पिछले साल यही दिन तो थे , ... मैं आम खा रही थी और इसी छोरी ने ज्ञान दिया ,
"मेरे भैय्या, आम छू भी नहीं सकते ,…"
" अरे तूने कभी अपनी ये कच्ची अमिया उन्हें खिलाने की कोशिश की , कि नहीं , शर्तिया खा लेते " चिढ़ाते हुए मैं बोली।
जैसे न समझ रही हो वैसे भोली बन के उसने देखा मुझे।
" अरे ये , " और मैंने हाथ बढ़ा के उसके फ्राक से झांकते , कच्चे टिकोरों को हलके से चिकोटी काट के चिढ़ाते हुए इशारा किया और वो बिदक गयी।
और आज वही कच्ची अमिया उसके भइया प्यार से कुतर रहे थे।
स्साली , कुतरवाने और कटवाने को तो वो पहले से ही तैयार थी ,लेकिन उस बिचारी की क्या गलती ,मेरा साजन ही एकदम, शर्मीला कुछ जरूरत से ज्यादा ही सीधा
वो हाईस्कूल में थी और उसको भी मालूम रहा होगा की उसके ये भइया कितने ललचाते हैं उसके कच्चे टिकोरों के लिए ,
उन्होंने खुद बताया था की शादी में कही वो लोग , जाड़े का समय ,... मोटी रजाई ,.. और पावर कट,... इन्होने अपनी ममेरी बहन के पतली कॉटन फ्राक के ऊपर से नए नए नए आये कच्चे टिकोरों को पहले हलके से छुआ , जब वो कुनमुनाई भी नहीं ,तो हलके हलके सहलाने लगे। और फिर थोड़ा सा दबाया भी ,.. वो चुपचाप लेटी रही।
उस रात उन्होंने थोड़ी और हिम्मत की उसके नए नए आये निप्स ,जो अब एकदम खड़े थे ,उसे भी पकड़ के दबा दिया। अगर किसी लौंडिया का मन नहीं करता तो क्या वो सब करने देती , कुछ नहीं तो करवट ही बदल लेती,सरक के उनसे दूर हो जाती।
पर गुड्डी ने करवट बदली , ... पर उनकी ओर। और यही नहीं अपनी एक टांग और हाथ उनके ऊपर रख दिया।
अब इससे ज्यादा वो क्या सिग्नल देती , कोई और होता तो सीधे फ्राक के अंदर हाथ डाल के खुल के दबाता मसलता , फ्राक के अंदर नीचे से हाथ डाल के चुनमुनिया उसकी दबाता , उसके हाथ में अपना खूंटा पकड़ाता ,... पर ये बिचारे घबड़ा के उन्होंने हाथ भी हटा लिया। और मेरी ननद ने अगले दिन पहला मौक़ा मिलते ही एकदम सही कमेंट किया इनके ऊपर ,
" भैय्या तुम्हे रात को ठीक से नींद नहीं आ रही थी क्या ,मुझे भी नहीं आ रही थी। "
इन्होने जब इतना ब्लश किया की लौंडिया मात तो उस हाईस्कूल वाली ने इनके गाल मसलते हुएमुस्करा के बोल ही दिया ,
" भैय्या जितना मैं तुम्हे सीधा समझती थी न ,... तुम उससे भी ज्यादा सीधे हो। एकदम ,.. "
मन उसका भी उतना ही कर रहा था था , बल्कि शायद ज्यादा , शाम को इनसे बोली केयर फ्री लाने को और ये निकले ही थे की गुड्डी का मेसज आ गया ,
'नो नीड। आंटीजी चली गयी हैं। "
अब इससे ज्यादा कोई लड़की क्या सिग्नल देती इतनी परसनल बात , ... और अब पिच तैयार है बैटिंग करने के लिए। शादी का घर जहां किसी को पता ही नहीं चलता की कौन कहाँ है क्या कर रहा है ,...
पर ये भी न ,... इतना सही मौका और चूक गए।
पर अब मेरी ननद रानी नहीं बचने वाली थी। उनकी नथ वही उतारेगा जिस का नाम उस पर लिखा था , मेरे सैंया का।
तड़पन और बढने से चाहत और बढ़ेगी....नथ ननदिया की उतरेगी, ...पर
पर अब मेरी ननद रानी नहीं बचने वाली थी। उनकी नथ वही उतारेगा जिस का नाम उस पर लिखा था , मेरे सैंया का।
गुड्डी रानी की चूत चुदेगी और उनके भैय्या से ही।
पर आज नहीं।
कुछ तो तड़पा लूँ अपनी ननद को , उसने भी बहुत तड़पाया है मेरे साजन को।
लेकिन आज नहीं।
आज की रात नहीं ,
……………………………….
एक तो उनकी बैटरी डिस्चार्ज हो गयी थी पूरी मेरी जेठानी के साथ पिछली रात कबड्डी खेल के , तीन चार राउंड।
कोई छेद तो उन्होंने अपनी भौजाई का छोड़ा नहीं था , वो भी पूरी ताकत से रगड़ रगड़ कर ,
बुर ,गांड , मुंह,चूँची और मलाई तो उन्होंने
बालों ,गालों और दोनों निपल्स तक पर ,... दिन भर भी उन्होंने आराम नहीं किया।
उनकी ममेरी बहन पे चढाने पहले उनको अच्छी तरह से आराम भी कराना था और पूरी तरह रिचार्ज भी ,
जैसे बेसबरे सांड की तरह उस कच्ची कली पर ,
उस टीनेजर की कसी चूत को हचक हचक के सिर्फ चोदना नहीं था ,बल्कि फाड़ के रख देना था।
उनकी ममेरी बहन की चीख घर के बाहर तक जाए , चिल्ला चिल्ला के उस कुँवारी किशोरी का बुरा हाल हो जाए
जब उस छिनार ननद की फटे।
मैंने एक बार फिर रियर व्यू मिरर एडजस्ट किया ,
दोनों लव् बर्ड एकदम मस्ती में
उन्होंने अपनी टीनेजर बहना की हाईस्कूल वाली यूनिफार्म की ब्लाउज को पूरा ऊपर सरका दिया था और एक हाथ से एक चूजे को मीज रहे थे और दूसरा उनके होंठो के बीच ,चुसुक चुसुक कर चूस रहे थे।
और वो छिनरी उनकी ममेरी बहन सिसक रही थी ,
दोनों सोच रहे थे की आज रात बस घर पहुँचने पर ,
पर ऐसे नहीं होना था।
आज और इन्तजार करना होगा दोनों को
उस छिनार को मालूम पड़ जाना चाहिए मेरे घर पहुँचते ही की इस घर में कौन तय करता है , और सबसे बढ़ के
पहले ही दिन वो समझ जाए की ,
उसे कब टाँगे फ़ैलानी हैं , किसके सामने फैलानी हैं, ये सिर्फ अगर कोई तय करेगा तो वो मैं करुँगी।
चुदेगी तो वो है ही, आखिर ले उसे किस लिए चल रही हूँ,...रोज चुदेगी,... बिना नागा चुदेगी,... पर किससे चुदेगी, कब चुदेगी, कहाँ चुदेगी,... कैसे चुदेगी,... उस स्साली को आज ही मालूम पड़ जाना चाहिए की वो मैं तय करुँगी,... और जहाँ जब कहूँगी, जिसके सामने कहूँगी,... उसे अपनी टाँगे फैलानी होंगी, निहुरना होगा,..
दूसरे मैं चाहती थी थोड़ा उन दोनों की प्यास,तड़पन और बढे।
ये नहीं की आज ये दोनों सो जाएंगे ,
न मैं सोऊंगी न सोने दूंगी
और न उसकी फटने दूंगी ,न उसके भइया को झड़ने दूंगी।
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उफ्फ .... आखिर ये कल कब आएगा....पर वो कल
ये नहीं की आज ये दोनों सो जाएंगे , न मैं सोऊंगी न सोने दूंगी
और न उसकी फटने दूंगी ,न उसके भइया को झड़ने दूंगी।
आज की रात ,
एक ओर मैं और दूसरी ओर उनकी कुँवारी बहना ,
बीच में वो सैंडविच बने।
उनकी तो हालत खराब होनी है आज रात ,
एक ओर उस कुँवारी किशोरी के मीठे मीठे चुम्मे ,नए आये जुबना की रगड़ घिस्स
और दूसरी ओर से मैं भी अपनी उँगलियों से कभी उनकी छाती पर ,कभी उनके निपल्स पर
कभी मेरे होंठ उनके ईयर लोब्स पर ,
और उनका तन्नाया बौराया खूंटा, उनकी बहिनिया के, मुंह में
हिलने नहीं दूंगी उन्हें सूत भर भी
मैं ऊपर चढ़ कर, आज चुदेँगे वो चोदूगी मैं। हचक हचक कर ,ज़रा उनकी बहना देखे ,सीखे
हाँ बस झड़ने नहीं दूंगी उन्हें।
पर झडेंगी हम दोनों , और सबसे पहले उनकी बहना।
आखिर इतने मुश्किल से उसे पटा के ले चल रही हूँ ,कब से अपनी वो चुनमुनिया बचा के बैठी है ,मेरी छुटकी ननदिया।
और उसे झाड़ेंगे उसे उसके 'सीधे साधे भैया " बचपन से उसके आशिक। उसकी कच्ची अमिया के दीवाने ,
पहले तो ब्लाइंडफोल्ड ,
फिर उसके बचपन के आशिक की उँगलियाँ ,... गुड्डी रानी के किशोर उभार और कटाव ,
ऊंचाइयां और गहराइयाँ , जिस जिस जगह पर छूने से उनकी ममेरी बहिनिया मजे से पागल हो जाये।
सिसक सिसक के ,तड़प तड़प के ,
सिर्फ उनकी ऊँगली ,कभी हलके से छू लेंगे वो तो बस कभी रेशम की तरह हलके से सहला देंगे और कभी कस के मीज मसल देंगे ,
और फिर एक पंख या ,... या ,... या इनका सिल्कन स्कार्फ ,
अगन जगाती वो हलकी सी छुअन।
उस बिचारी को नहीं मालूम पडेगा , अगली छुअन , वो स्पर्श कहाँ किस जगह आने वाला है ,जिस जगह वो एकदम उम्मीद नहीं कर रही होगी सीधे वहीँ।
वो सिसकती रहेगी ,तड़पती रहेगी , ... और यही तड़पन , यही सिसक देखने के लिए तो मैं तड़प रही थी ,..
और फिर आइस क्यूब्स ,
इनके हाथों में बल्कि होंठों में , ...एकदम जादू ,..
गुड्डी के होंठों पर ,गालों पर, नए नए आये गदराये जुबना पर,
गुड्डी रानी के कंचे की तरह कड़े निप्स पर
और ,... और ,.. नीचे ,... और नीचे ,
दोनों गुलाबी दरवाजों पर , हलके से प्रेस कर गुड्डी की चुनमुनिया की चोंच पर
लेकिन बस मैं उसे झड़ने नहीं दूंगी ,जब वो आलमोस्ट किनारे पर पहुँच जायेगी ,..
असली मजा तो उसे तड़पाने में आएगा।
और जब तड़प तड़प कर ,.. वो खुद बोलेगी , बार बार बोलेगी तो ,
वही उसके भैया , अपने होंठो से कभी अपनी बहना के जुबना पर , तो कभी सीधे क्लिट पर ,
उनकी जीभ कुंवारे निचले दरवाजे पर , एक बार दो बार तीन बार
जब वो झड़ झड़ के थेथर हो जायेगी ,लथपथ हो जायेगी ,
तब ,... और उसके बाद एक बार और झाड़ के ही ,...
गुड्डी की लम्बी लम्बी गहरी साँसे , हार कर थक कर रस से लथपथ ,... वो किशोरी ,...
और उसके बाद उनके अनुभवी ,मंजू बाई और मम्मी के ट्रेन किये गए होंठ
गुड्डी की भौजाई की प्यास बुझाएंगे , उन की बहन के बगल में
लेकिन वो
वो ऐसे ही भूखे प्यासे ,... कल रात तक ,
और फिर अबतक की सबसे जबरदस्त कुश्ती होगी जब वो फाड़ेंगे अपनी बहना की कच्ची कुँवारी चूत ,वो भी इस तरह की
वो चीखेगी ,चिल्लायेगी, रोयेगी
पर ,...
पर वो कल।
…………………………………………………………………..
"अरे भाभी ,सैंया तो आपके हैं मेरे तो प्यारे प्यारे भैया है।"छुटकी बहिनिया
मेरी निगाह पीछे की ओर ही थी।
गुड्डी की हाई स्कूल की यूनिफार्म का सफ़ेद ब्लाउज पूरा उठा हुआ था ,उसके कच्चे उरोज
एक उसके भैया की मुट्ठी में जोर जोर से वो मीज रहे थे मसल रहे थे अपनी छुटकी बहिनिया की चूँची।
दूसरा उनके होंठों के बीच ,चुसुक चुसुक के चूस रहे थे।
उसके भइया का दूसरा हाथ भी खाली नहीं था ,गुड्डी की स्कूल की छोटी सी नीली स्कर्ट उठी थी और उनका हाथ सीधे गुड्डी की गुलाबो पर
कभी बस छू लेते तो कभी हलके से मसल देता।
गुड्डी का कोमल कोमल मेंहंदी लगा हाथ भी उनके जींस फाड़ते बल्ज को ऊपर से छू रहा था ,दबा रहा था ,सहला रहा था।
मैंने उसे उकसाया ,
" हे अरे तू बहुत ही सीधी है , तेरे भइया कम सैंया ने तेरे जुबना खोल दिए हैं ,तेरे खजाने में ऊँगली कर रहे हैं , और अभी भी ,..कैसी मेरी ननद है ,मेरा नाम डुबो रही है। अभी भी उनके मूसलचंद बंद पड़े है ,उसे कुछ हवा पानी तो ,.."
गुड्डी सच में मेरी असल में ननद ,.. मेरी बात काट के ,आँख नचाती वो शोख टीन बोली ,
" अरे भाभी ,सैंया तो आपके हैं मेरे तो प्यारे प्यारे भैया है। "
और झट से उस बहना ने अपने प्यारे प्यारे भैया की जींस की ज़िप खोल दिया ,
स्प्रिंग वाले चाकू की तरह उसके भइया के मूसलचंद बाहर।
पर उस बिचारे की आजादी पल भर की ,
उनकी बहन की कोमल मुट्ठी में बंद , और वो लगी मुठियाने।
एक झटके में ही उसने चमड़ा खींच कर सुपाड़ा खोल दिया,और झुक कर अपनी रसीली जीभ से
अपने भैय्या का पी होल , ( पेशाब वाला छेद ) बस छू दिया और मुड़ कर उनकी ओर शरारती शोख निगाहों से देखने लगी।
और अबकी वो झुकी तो
गप्प ,
उनका सुपाड़ा उनकी शोख शरीर किशोरी बहन के मुंह में, वो चूस रही थी ,चुभला रही थी।
और मेरे फोन पर व्हाट्सएप का संकेत बजा , एक दो नहीं पूरे आठ दस ,
दिया।
ओह... तो दिवाली का प्रोग्राम फिक्स हो गया...दिया
और मेरे फोन पर व्हाट्सएप का संकेत बजा , एक दो नहीं पूरे आठ दस ,
दिया।
वही संस्कारी किचेन जहाँ घर में कदम रखते ही मुझे दस बार बता दिया गया था की लहसुन प्याज भी नहीं आता और वो लोग हमारे घर की लोगों की तरह शराबी कबाबी नहीं है ,
वहीँ ,जहां मेरी शादी के बाद की इनकी पहली बर्थडे पर , मैंने ढूंढ कर एगलेस पेस्ट्री मंगाई ,सब पर बड़ी बड़ी हरी हरी बिंदी लगी थी
लेकिन उसे भी मुझसे ही इसी किचेन के डस्टबिन में फिंकवा गया , कि ,... क्या पता ,...
और वही जेठानी, जिनकी दिन किस शुरआत ही मुझे और मुझसे ज्यादा मेरी मम्मी को दस बात सुनाने से होती थी ,वही शराबी कबाबी और यही की पढ़ने लिखने से संस्कार नहीं आ जाते ,
आज उसी किचेन में ,कीमा भूना जा रहा था , और भूनने वाली हमारी संस्कारी जेठानी ,एकदम निसूति और वो भी जबरदस्ती नहीं ,हंस हंस कर ,
और उनके पीछे वही इमरान और ताहिर ,
एकदम टन टन्ना टन
और मान गयी मैं दिया को ,अगली पिक्चर देख कर ,
दिया के फेवरिट भैया और मेरे सैंया से २० नहीं तो १९ भी नहीं थे।
और मेरी जेठानी एकसाथ दोनों लंड पे ,..लग रहा था दोनों को मुंह में लेने को बेताब हैं ,दोनों उन्हें बारी बारी से चटा रहे थे तो कभी साथ साथ
और जेठानी जी चाट रही थीं। जेठानी का चेहरा एकदम साफ़ और उन दोनों केऔजार एकदम क्लोज अप में ,खुले हुए सुपाड़े
और फिर किचेन की एक और फोटो ,जेठानी सिंक पकड़ कर निहुरि हुयी और उनकी गांड में इमरान का धंसा हुआ ,और अबकी जेठानी के चेहरे पर सिर्फ दर्द ,
और जेठानी का चूतड़ चांटों से एकदम लाल
कीमा बन कर रखा हुआ था।
साथ में दो ख़बरें थी ,
पहली बात थी चंपा बाई के कोठे की जहाँ दस दिन बाद पायल झनकारते हुए मेरी जेठानी को दस दिन के बाद चढ़ना था ,
वहां उनकी फोटो लग गयी थी और बोली लगनी शुरू हो गयी थी ,पहली रात के लिए।
और सबसे अच्छी बात थी ,मेरी जेठानी की छोटी कजिन जिसने मेरे सारे प्लान में पलीता लगाने में कसर नहीं छोड़ी थी ,पढ़ती अभी हाईस्कूल में थी लेकिन
उसकी फोटो जेठानी से दिया ने बल्कि दिया के भाई ने उगलवा ली थी और हाँ वो फेसबुक पे भी थी ,इंस्टाग्राम पर भी।
दिया की एक 'सहेली ' ने ( जो असल में लड़का था और लड़की की आई डी बनाकर फेसबुक पर लौंडिया पटाता था ) उसे दस बार लाइक कर दिया था , और उस की फ्रेंड्स रिक्वेस्ट भी उस बाला ने स्वीकार कर ली थी।
बस वक्त की बात थी ,
और ऊपर से जेठानी को हड़काकर पटा कर के उस कन्या कुमारी को दिवाली में बुलाने की बात तय हो गयी थी , उस खादी भण्डार टाइप वाली ने हाँ भीकर लिया था।
बस दिया ने एक शर्त रखी थी इस दिवाली में मैं आऊं न आऊं लेकिन ये ,मेरे सैंया जरूर आएं
अबकी दिवाली के जुए में वही बालिका दांव पर होगी ,
और उसके दिए में एक साथ दो दो बाती,
अगवाड़े पिछवाड़े की नथ एकसाथ , दिया के दोनों भैया
और अगली लाइन में दिया ने बात साफ़ भी कर दी ,
मेरे सैंया और और मेरे देवर ,यानी दिया के भैय्या।
मैंने थम्स अप का साइन दिया ,अपने आई फोन में दिवाली की डेट ढूंढ कर इनके मायके के नाम पर शेड्यूल कर लिया और दिया को मेसज कर दिया एक चेंज भी कर दिया।
यस ,लेकिन मैं भी आउंगी। रात भर दिया के दोनों भैय्या
और अगले दिन भावज ननदिया।
व्हाटएप बंद कर मैंने पीछे देखा
वहां सीन ज्यादा आगे बढ़ा नहीं था
गुड्डी के होंठ अभी भी अपने भइया के सुपाड़े को चुभलाने में मगन थे।
इस रोड जर्नी के बाद तो गुड्डी... नंगे हीं घर में घुसेगी....Bahot mast ja rahi hain roady journey.
ये तो मेरा भी अनुरोध है....Bas ek cheez chahiye jaise suhagraat ke liye shadi ki rasm nibhani hoti hain waise hi guddi ko bhi randi banae ke liye koi nayi rasam nibhani hogi kya??
जेठानी का प्रोग्राम भी चालू.....दिया
और मेरे फोन पर व्हाट्सएप का संकेत बजा , एक दो नहीं पूरे आठ दस ,
दिया।
वही संस्कारी किचेन जहाँ घर में कदम रखते ही मुझे दस बार बता दिया गया था की लहसुन प्याज भी नहीं आता और वो लोग हमारे घर की लोगों की तरह शराबी कबाबी नहीं है ,
वहीँ ,जहां मेरी शादी के बाद की इनकी पहली बर्थडे पर , मैंने ढूंढ कर एगलेस पेस्ट्री मंगाई ,सब पर बड़ी बड़ी हरी हरी बिंदी लगी थी
लेकिन उसे भी मुझसे ही इसी किचेन के डस्टबिन में फिंकवा गया , कि ,... क्या पता ,...
और वही जेठानी, जिनकी दिन किस शुरआत ही मुझे और मुझसे ज्यादा मेरी मम्मी को दस बात सुनाने से होती थी ,वही शराबी कबाबी और यही की पढ़ने लिखने से संस्कार नहीं आ जाते ,
आज उसी किचेन में ,कीमा भूना जा रहा था , और भूनने वाली हमारी संस्कारी जेठानी ,एकदम निसूति और वो भी जबरदस्ती नहीं ,हंस हंस कर ,
और उनके पीछे वही इमरान और ताहिर ,
एकदम टन टन्ना टन
और मान गयी मैं दिया को ,अगली पिक्चर देख कर ,
दिया के फेवरिट भैया और मेरे सैंया से २० नहीं तो १९ भी नहीं थे।
और मेरी जेठानी एकसाथ दोनों लंड पे ,..लग रहा था दोनों को मुंह में लेने को बेताब हैं ,दोनों उन्हें बारी बारी से चटा रहे थे तो कभी साथ साथ
और जेठानी जी चाट रही थीं। जेठानी का चेहरा एकदम साफ़ और उन दोनों केऔजार एकदम क्लोज अप में ,खुले हुए सुपाड़े
और फिर किचेन की एक और फोटो ,जेठानी सिंक पकड़ कर निहुरि हुयी और उनकी गांड में इमरान का धंसा हुआ ,और अबकी जेठानी के चेहरे पर सिर्फ दर्द ,
और जेठानी का चूतड़ चांटों से एकदम लाल
कीमा बन कर रखा हुआ था।
साथ में दो ख़बरें थी ,
पहली बात थी चंपा बाई के कोठे की जहाँ दस दिन बाद पायल झनकारते हुए मेरी जेठानी को दस दिन के बाद चढ़ना था ,
वहां उनकी फोटो लग गयी थी और बोली लगनी शुरू हो गयी थी ,पहली रात के लिए।
और सबसे अच्छी बात थी ,मेरी जेठानी की छोटी कजिन जिसने मेरे सारे प्लान में पलीता लगाने में कसर नहीं छोड़ी थी ,पढ़ती अभी हाईस्कूल में थी लेकिन
उसकी फोटो जेठानी से दिया ने बल्कि दिया के भाई ने उगलवा ली थी और हाँ वो फेसबुक पे भी थी ,इंस्टाग्राम पर भी।
दिया की एक 'सहेली ' ने ( जो असल में लड़का था और लड़की की आई डी बनाकर फेसबुक पर लौंडिया पटाता था ) उसे दस बार लाइक कर दिया था , और उस की फ्रेंड्स रिक्वेस्ट भी उस बाला ने स्वीकार कर ली थी।
बस वक्त की बात थी ,
और ऊपर से जेठानी को हड़काकर पटा कर के उस कन्या कुमारी को दिवाली में बुलाने की बात तय हो गयी थी , उस खादी भण्डार टाइप वाली ने हाँ भीकर लिया था।
बस दिया ने एक शर्त रखी थी इस दिवाली में मैं आऊं न आऊं लेकिन ये ,मेरे सैंया जरूर आएं
अबकी दिवाली के जुए में वही बालिका दांव पर होगी ,
और उसके दिए में एक साथ दो दो बाती,
अगवाड़े पिछवाड़े की नथ एकसाथ , दिया के दोनों भैया
और अगली लाइन में दिया ने बात साफ़ भी कर दी ,
मेरे सैंया और और मेरे देवर ,यानी दिया के भैय्या।
मैंने थम्स अप का साइन दिया ,अपने आई फोन में दिवाली की डेट ढूंढ कर इनके मायके के नाम पर शेड्यूल कर लिया और दिया को मेसज कर दिया एक चेंज भी कर दिया।
यस ,लेकिन मैं भी आउंगी। रात भर दिया के दोनों भैय्या
और अगले दिन भावज ननदिया।
व्हाटएप बंद कर मैंने पीछे देखा
वहां सीन ज्यादा आगे बढ़ा नहीं था
गुड्डी के होंठ अभी भी अपने भइया के सुपाड़े को चुभलाने में मगन थे।
रोने-धोने... चीखने चिल्लाने वाला म्यूजिक हीं कर्ण प्रिय लगता है....पर वो कल
ये नहीं की आज ये दोनों सो जाएंगे , न मैं सोऊंगी न सोने दूंगी
और न उसकी फटने दूंगी ,न उसके भइया को झड़ने दूंगी।
आज की रात ,
एक ओर मैं और दूसरी ओर उनकी कुँवारी बहना ,
बीच में वो सैंडविच बने।
उनकी तो हालत खराब होनी है आज रात ,
एक ओर उस कुँवारी किशोरी के मीठे मीठे चुम्मे ,नए आये जुबना की रगड़ घिस्स
और दूसरी ओर से मैं भी अपनी उँगलियों से कभी उनकी छाती पर ,कभी उनके निपल्स पर
कभी मेरे होंठ उनके ईयर लोब्स पर ,
और उनका तन्नाया बौराया खूंटा, उनकी बहिनिया के, मुंह में
हिलने नहीं दूंगी उन्हें सूत भर भी
मैं ऊपर चढ़ कर, आज चुदेँगे वो चोदूगी मैं। हचक हचक कर ,ज़रा उनकी बहना देखे ,सीखे
हाँ बस झड़ने नहीं दूंगी उन्हें।
पर झडेंगी हम दोनों , और सबसे पहले उनकी बहना।
आखिर इतने मुश्किल से उसे पटा के ले चल रही हूँ ,कब से अपनी वो चुनमुनिया बचा के बैठी है ,मेरी छुटकी ननदिया।
और उसे झाड़ेंगे उसे उसके 'सीधे साधे भैया " बचपन से उसके आशिक। उसकी कच्ची अमिया के दीवाने ,
पहले तो ब्लाइंडफोल्ड ,
फिर उसके बचपन के आशिक की उँगलियाँ ,... गुड्डी रानी के किशोर उभार और कटाव ,
ऊंचाइयां और गहराइयाँ , जिस जिस जगह पर छूने से उनकी ममेरी बहिनिया मजे से पागल हो जाये।
सिसक सिसक के ,तड़प तड़प के ,
सिर्फ उनकी ऊँगली ,कभी हलके से छू लेंगे वो तो बस कभी रेशम की तरह हलके से सहला देंगे और कभी कस के मीज मसल देंगे ,
और फिर एक पंख या ,... या ,... या इनका सिल्कन स्कार्फ ,
अगन जगाती वो हलकी सी छुअन।
उस बिचारी को नहीं मालूम पडेगा , अगली छुअन , वो स्पर्श कहाँ किस जगह आने वाला है ,जिस जगह वो एकदम उम्मीद नहीं कर रही होगी सीधे वहीँ।
वो सिसकती रहेगी ,तड़पती रहेगी , ... और यही तड़पन , यही सिसक देखने के लिए तो मैं तड़प रही थी ,..
और फिर आइस क्यूब्स ,
इनके हाथों में बल्कि होंठों में , ...एकदम जादू ,..
गुड्डी के होंठों पर ,गालों पर, नए नए आये गदराये जुबना पर,
गुड्डी रानी के कंचे की तरह कड़े निप्स पर
और ,... और ,.. नीचे ,... और नीचे ,
दोनों गुलाबी दरवाजों पर , हलके से प्रेस कर गुड्डी की चुनमुनिया की चोंच पर
लेकिन बस मैं उसे झड़ने नहीं दूंगी ,जब वो आलमोस्ट किनारे पर पहुँच जायेगी ,..
असली मजा तो उसे तड़पाने में आएगा।
और जब तड़प तड़प कर ,.. वो खुद बोलेगी , बार बार बोलेगी तो ,
वही उसके भैया , अपने होंठो से कभी अपनी बहना के जुबना पर , तो कभी सीधे क्लिट पर ,
उनकी जीभ कुंवारे निचले दरवाजे पर , एक बार दो बार तीन बार
जब वो झड़ झड़ के थेथर हो जायेगी ,लथपथ हो जायेगी ,
तब ,... और उसके बाद एक बार और झाड़ के ही ,...
गुड्डी की लम्बी लम्बी गहरी साँसे , हार कर थक कर रस से लथपथ ,... वो किशोरी ,...
और उसके बाद उनके अनुभवी ,मंजू बाई और मम्मी के ट्रेन किये गए होंठ
गुड्डी की भौजाई की प्यास बुझाएंगे , उन की बहन के बगल में
लेकिन वो
वो ऐसे ही भूखे प्यासे ,... कल रात तक ,
और फिर अबतक की सबसे जबरदस्त कुश्ती होगी जब वो फाड़ेंगे अपनी बहना की कच्ची कुँवारी चूत ,वो भी इस तरह की
वो चीखेगी ,चिल्लायेगी, रोयेगी
पर ,...
पर वो कल।
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