आपने बात ठीक उठायी है
गीता के पिता का जिक्र आया है इस कहानी में कई बार
पेज ३१७ भाग ४२ में
किस्से माँ के
उसी के दूसरी पोस्ट जिसकी हेडिंग है किस्सा माँ की होली का
उसमें
बुआ का गौना तीन चार महीने पहले ही हुआ था और उन्होंने फूफा जी को खूब गन्दी वाली गारियाँ और कोहबर में उन्होंने और रगड़ाई की, फूफा जी ने भी मौका पा के जोबन नापा और बोल के गए थे होली में आयंगे, तो माँ ने खुद उनको सुना के कहा, आपकी पिचकारी पिचका के रख दूंगी।
बस सुबह सुबह, बुद्धू बना के माँ की ननद और सास ने, माँ को डबल भांग वाली ठंडाई पिला दी,... वैसे भी वो गरमाई थीं,
पति उनके १५ दिन से गायब थे, बंबई और बोल के गए थे होली में आएंगे , दो चार दिन पहले, लेकिन,....
( गितवा की जुबानी है ये कहानी )
और फिर
और मेरे बाबू भी, पता चला की कोई मालगाड़ी गिर गयी थी तो उनकी ट्रेन घूम घाम के डेढ़ दिन लेट,...
तो रात को तो उन्होंने माँ की क्लास ली ही,
तो बस दो तीन पोस्ट और इन्तजार कर लीजिये
हाल खुलासा बयान होगा अभी से कुछ बोलने से गड़बड़ा जाएगा,... बहुत सी बातें आएँगी लेकिन अभी
अगली पोस्ट में फुलवा की ननद का किस्सा