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Horror कामातुर चुड़ैल! (Completed)

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Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
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Nice update

Very nice update
Baat ghar tak pahunch hi gyi ab dekhte hain aage kya hota hai aur samraat ke peechhe chudail kyo pad gyi

लगता तो यही है कि आरती के बारे में बात हो रही है........... लेकिन कोई और भी हो सकती है :hint: :D

Bahut hi badhiya update diya hai Riky007 bhai....
Nice and lovely update....

यार सब बड़ा ही दनादन हो रहा है। 🚄🚄

एक समस्या लग रही है - अभी अभी बारहवीं पास किए लड़के की शादी कैसे हो सकती है? ❓सम्राट बालिग़ है, लेकिन क़ानूनन (<20) कैसे? ❓
अब इक्कीस की उम्र में बारहवीं पास किया है तो बड़ा ही फ़िसड्डी निकला लड़का! 🤣 हाँ, यह ज़रूर हो सकता है कि सम्राट नहीं, किसी और लड़के की बात हो रही हो। 👍

अगर ये बात है, तो आरती की बात नहीं हो सकती। अगर आरती की बात हो रही है, तो ये अनिल भाई तो विद्युत् गति से भी तेज निकले! ⚡⚡
आज ही लड़की को देखे, और आज ही उसकी कुण्डली निकाल लाए! 🤣🤣🤣🤣

मतलब - लड़का और लड़की दोनों ही सम्राट और आरती से अलग हैं।

मैंने बाल की खाल निकाल दी है - उसके लिए माफ़ करना भाई! 🙏
मनोरंजक कहानी है, लेकिन! 👍

Fantastic lajawab gajab awesome mind blowing kya update diya hai bro aag laga di hai

isiliye bolte ki baap baap hota hai sari chalaki dhari ki dhari rah gayi inna strong network hai :D:

अति सुंदर रचना 👌👌

:music: do dil mil rahe he magar chupke chupke

Bhai mujhe iss tarah ke dark sex bahut pasand hai.. main ye chudel bhoot wagera imaginary sex ka bahut bada diwana hoon. Asa karta hoon aap ant tak kamuk kahani likhie. Ek writee ke nate samjh sakta hoon ek ek update dene ke lie kitna bakt lagta hai

update please

स्वाति से मिल ले

great going ricky bhai, dekhte hai wo khazana dhoondhne kab jate hai,

Weating too next update

हाॅरर स्टोरी का यह मतलब नही कि पहले सीन्स से ही भूत प्रेत अपना तांडव दिखाना शुरू कर दे ! पहले एक कहानी बिल्ड अप हो , कुछ फैमिली ड्रामा हो , कुछ रोमांस वगैरह भी हो और फिर आहिस्ता आहिस्ता भूत प्रेत की एंट्री पुरे हाॅरर के साथ स्टोरी मे हो।
और मुझे लगता है आपने शुरुआत बिल्कुल वैसा ही किया है।
एक सवाल था , सम्राट का चुड़ैल के साथ सेक्स करना रियल था या वह भी एक स्वप्न था ?
अगर रियल था तो फिर उन चीजों को वो याद क्यों नही कर रहा है ? वो भयभीत क्यों नही हुआ ?
जैसे एक रात उसने बुरा सपना देखा और काफी भयभीत भी हुआ ।
वैसे स्टोरी बिल्कुल सही जा रही है ।
सभी अपडेट बेहद ही खूबसूरत थे।
आउटस्टैंडिंग रिकी भाई।
अपडेट पोस्टेड... 🙏🏽
 

Sanju@

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बात सर्दियों की है, रात 9 बजे, एक बड़े से घर में मौजूद सारे सदस्य बैठे टीवी देख रहे थे।

देव, घर के मुखिया (45), और शहर के जाने माने उद्योगपति।

सुषमा, उनकी पत्नी (42), गृहणी।

नूपुर, बड़ी बहू (21), बड़े बेटे राजा (22), सेना में कैप्टन, की पत्नी।

सम्राट, छोटा बेटा (20), अभी कॉलेज में पढ़ता है, और अपने पिता के काम को भी जरूरत के समय देखता है। (नायक)

राजा अभी अपनी ड्यूटी पर है, शादी के दूसरे दिन ही उसको किसी सीक्रेट मिशन के लिए बुला लिया गया है, और पिछले 1 महीने से वो वापस नही आया है।

धीरे धीरे सब अपने अपने कमरों में सोने को जानें लगे, और अंत में वहां बस सम्राट बचता है वहां, रात के करीब १२ बजे वो भी टीवी बंद करते हुए अपने कमरे में सोने चला जाता है।

उसका कमरा घर की ऊपरी मंजिल में था, जहां बस एक गेस्ट रूम ही था, घर के बाकी सदस्यों के कमरे नीचे ही बने हुए थे।

सम्राट जैसे ही अपने कमरे में आता है, उसे अपने बेड पर एक बहुत ही खूबसूरत २०-२२ साल की युवती बैठी दिखाई देती है जिसने एक जींस और टॉप पहना हुआ था, लड़की एकदम दूध की तरह साफ रंग की थी, जिसका चेहरा बेहद आकर्षक था। उसका बदन जैसे सांचे में ढाला हुआ था। हल्का भरा बदन और उस अपर एकदम अनुपात अनुसार वक्ष और नितम्ब, जिनका आकार न कम न ही ज्यादा था। और सबसे हसीन थीं उसकी आंखे, झील से गहरी नीली आंखें, जिनमे कोई एक बार बार देखे तो डूबता चला जाय...


sexy-devil
उस युवती को देख सम्राट थोड़ा आश्चर्यचकित हो कर पूछता है, "आप कौन, और इस समय मेरे घर में कैसे आईं?"

युवती (मुस्कुराते हुए बेड से उठ कर सम्राट के करीब आती है): मैं कौन, और यहां कैसे आई, इन बातों में वक्त क्यों बर्बाद करना? आओ और बस मेरी बाहों में समा जाओ।
:congrats:start a new story
 

drx prince

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अपडेट #५

अब तक आपने पढ़ा -

अगले दिन जैसे ही वो नाश्ते की टेबल पर पहुंचता है तो उसे देव और सुमित्रा की बातें सुनाई पड़ती हैं जो किचन से आ रही होती हैं।

देव: अनिल ने बोला की उसने लड़की देखी है, दोनो की जोड़ी अच्छी है, उसने लड़की के घर का भी सब पता कर लिया है और कल हम मिलने चल रहे हैं उनसे, अब इस घर में शहनाई बजने में देर नहीं करनी चाहिए.....

अब आगे :-

सुमित्रा: आप बिलकुल सही कह रहे हैं, मैं सम्राट को तैयार होने बोल देती हूं, सब लोग चलते हैं वहां।


देव: हां ये सही है।

इतना सुन कर सम्राट की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता और वो आरती को मैसेज कर देता है कि मां पापा तुम्हारे घर आ रहे हैं, अपने रिश्ते की बात करने।

तभी सुमित्रा जी रसोई से बाहर आती हैं और सम्राट को देखते ही

सुमित्रा: अरे सम्राट बेटा, जल्दी से तैयार हो जाओ, हम किसी खास जगह जाना है, और जरा ढंग के कपड़े पहनना।

सम्राट (अनजान बनते हुए): कहां मां?

सुमित्रा (मुस्कुराते हुए): चलो तो, सब पता चल जायेगा।

थोड़ी देर में तीनो तैयार हो कर कार से निकल जाते हैं।

इधर आरती भी सम्राट का मैसेज पढ़ कर खूब खुश हो जाती है और अच्छे से तैयार हो कर अपनी बालकनी में खड़े हो कर सबका इंतजार करने लगती है।

देव जी खुद ही कार चला रहे थे, और जैसे जैसे आरती का घर नजदीक आ रहा था, वैसे वैसे सम्राट की खुशी बढ़ती ही जा रही थी। मगर कार आरती की गली में न मुड़ कर सीधे ही चली जाती है, और सम्राट के मुंह से निकल जाता है: अरे पापा, आप गलत जा रहे हैं शायद?

देव जी (सम्राट को घूरते हुए): अनिल ने तुझे भी पता बताया था क्या??

सम्राट (घबराते हुए): न.. नही, वो दरअसल मुझे लगा हम फैक्ट्री जा रहे हैं।

इधर आरती भी कार को सीधे जाते देख मायूस हो जाती है, और सम्राट को फोन लगाने लगती है।

उधर सम्राट को भी कुछ समझ नही आता और वो आरती का फोन काट देता है। कुछ समय बाद गाड़ी एक घर के सामने रुकती है, और वहां एक सज्जन जो देव जी के उम्र के ही थे, सबका स्वागत करते हैं।

देव जी: नमस्कार वशिष्ठ जी, ये है मेरी पत्नी सुमित्रा। और ये सम्राट है।

सब एक दूसरे का अभिवादन करते है और घर के अंदर जाते हैं।

वशिष्ठ जी एक बैंक में उच्च पद पर थे, उनकी पत्नी अनिता, और एक ही बेटी, नुपुर थी। छोटा सा परिवार था इनका। नूपुर अपने नाम की तरह ही खुशमिजाज और हरफनमौला थी। वो सम्राट से कोई २ साल की बड़ी थी, और अभी ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में आई थी।

सभी औपचारिकताओं के बाद सुमित्रा ने सम्राट को एक तरफ आने का इशारा किया, दोनो मां बेटे बाहर की ओर जा कर बात करते हैं।

सुमित्रा: तो कैसी लगी नूपुर?

सम्राट: अच्छी लगी मां, लेकिन वो मुझसे बड़ी है तो कैसे??

सुमित्रा: तुझे बड़ी है तो क्या हुआ? है तो लायक न अपने घर की बहू बनने के?

सम्राट: तो क्या आप लोग ने तय कर लिया है?

सुमित्रा: हां हम दोनो का तो पक्का है, पर तेरी रजामंदी जरूरी है।

सम्राट: मां, एक बात है, वो मैं किसी और को पसंद करता हूं, और वो भी मुझे पसंद करती है। लेकिन जो आप और पापा कहेंगे, मैं वही करूंगा।

सुमित्रा आंखे बड़ी करके सम्राट को देखती है। और पूछती है: तू कहना क्या चाहता है??

सम्राट: यही मां, की में किसी और को पसंद करता हूं।

सुमित्रा (सम्राट का कान पकड़ते हुए): तेरी शादी कौन कर रहा है अभी बेवकूफ? और कौन है वो लड़की?

सम्राट (झेंपते हुए): फिर? हम यहां क्यों?

सुमित्रा: अपने भाई से पहले तुझे शादी करनी है, वो भी अभी इतनी सी उम्र में ही? रुक अभी तेरे पापा को बताती हूं।

सम्राट: अरे मां कान छोड़ो, में तो शादी से बचने के लिए ऐसा बोला, और आप लोग ने भी तो कुछ बताया नही, और मुझसे क्यों पूछ रहे हो आप? भैया से पूछो।

सुमित्रा: राजा ने तुझे ही कहा था ना की पहले तू हां करेगा, तभी वो लड़की देखेगा।

सम्राट: ओह मां मैं तो भूल ही गया था। और प्लीज अब तो कान छोड़ो मेरा।

सुमित्रा उसका काम छोड़ कर फिर पूछती है: हां अब बता नूपुर कैसी लगी, और वो लड़की कौन है?

सम्राट: नूपुर भाभी मुझे अच्छी लगी मां, और वो कोई नही है मैने बस शादी से बचने के लिए झूठ बोला था।

सुमित्रा: अभी समय नही है, लेकिन तू बचेगा नही, तुझे बताना ही पड़ेगा, समझा?

सम्राट: अच्छा अभी अंदर चलो मां, वरना पापा गुस्सा करेंगे।

दोनो अंदर जाते हैं, और सुमित्रा अपनी तरफ से हां बोल देती है, राजा को भी वहीं से खबर कर दी जाती है, तो वो भी २ दिन में आने की बात कहता है। सभी २ दिन बाद फिर से मिलने का फैसला करते हैं।

सम्राट अंदर से बहुत खुश होता है जब उसे पता चलता है कि नूपुर उसकी भाभी बनने वाली है, और उसका और आरती का सीक्रेट अभी सीक्रेट ही है। वो मौका लगते है आरती को फोन लगता है, पर उसका फोन स्विच ऑफ आता है।

वहां से निकल कर सम्राट अपनी बाइक उठा कर सीधे आरती के घर की ओर जाता है, वो साथ साथ आरती का फोन भी लगता है जो लगातार स्विच ऑफ आ रहा होता है। वो फिर शिवानी को फोन लगा कर आरती से बात कराने को कहता है, क्योंकि शिवानी और आरती का घर आस पास ही था। शिवानी कुछ देर बाद सम्राट को बताती है की आरती घर पर नही है, और किसी को बताई भी नही जा कि वो जहां जा रही है।

सम्राट कुछ सोचता है और फिर अपनी बाइक ले कर घाट पर जाता है, क्योंकि उसे पता होता है कि आरती चाहे खुश हो या दुखी, वो घाट पर अपना समय जरूर बिताती है। और जैसा सम्राट ने सोचा था, आरती वहीं घाट पर उसे मिलती है। आरती ने रो रो कर अपनी आंखे सूजा ली थी। सम्राट उसके पास बैठ जाता है।

आरती: अब क्यों आए हो यहां, जाओ जिससे शादी हो रही है उसके पास बैठो।

सम्राट: अरे मेरी बिल्लो, मुझे बहुत बड़ी गलत फहमी हो गई थी, और एक बात सुनो, चाहे जो भी हो जाय, शादी तो मैं बस तुमसे ही करूंगा, या फिर जान ही दे दूंगा।

ये सुनते ही आरती सम्राट के मुंह पर अपना हाथ रख देती है: मरे तुम्हारे दुश्मन, और आगे से ऐसी बात करना भी नही, वरना तुमसे पहले मेरी जान जायेगी।

ये सुनते ही सम्राट आरती को कस कर गले से लगा लेता है।

कुछ देर बाद आरती उसको धक्का दे कर कहती है: हटो दूर मुझसे, प्यार का नाटक मुझसे और शादी किसी और से कर रहे हो?

सम्राट (आरती का हाथ पकड़ते हुए): अरे मेरी मां, मुझे गलतफहमी हो गई थी, पहले तो भैया की शादी होगी ना? उनके लिए ही मां पापा लड़की देखने गए थे।

आरती (मुस्कुराते हुए): मतलब वो तुम्हारी बात नहीं कर रहे थे?

सम्राट: नही यार, वो अनिल अंकल का नाम बीच में आया तो मैं हमारे बारे में सोचने लगा था।

ये सुन कर आरती सम्राट के गले लग जाती है।

कुछ देर दोनो वहां रुक कर वापस घर लौट जाते हैं।

२ दिन बाद राजा घर आता है, और अगले दिन नूपुर से मिलता है। दोनों एक दूसरे को पसंद कर लेते हैं। और शादी की तारीख भी २० दिन बाद की ही निकल जाती है, दोनो परिवार सहमत हो जाते हैं और आनन फानन में शादी की तैयारी होने लगती है।

शादी का दिन भी पलक झपकते ही आ जाता है और राजा और नूपुर की शादी खूब धूम धाम से होती है, सभी खूब एंजॉय करते हैं।


शादी के ३ दिन बाद ही राजा को उसके बेस से फोन आता है, और उसे वापस ड्यूटी पर आने को कहा जाता है, जहां उसे किसी जरूरी मिशन पर जाने को कहा जाता है। देव जी ये सुन कर बहुत नाराज होते है, और राजा को रिजाइन करने को कहते हैं। नूपुर उनको समझती है कि अभी उसे जाने दे क्योंकि राजा के लिए अभी उसका कर्तव्य ज्यादा जरूरी है। राजा भी कहता है कि अभी जाने दीजिए, मिशन पूरा होते ही वो रिजाइन दे कर वापस आ जायेगा।

नूपुर भारी मन से राजा को विदा करती है। उसकी नम आंखें देख सभी उदास हो जाते हैं। सम्राट जिसे नूपुर अपनी बड़ी बहन की तरह लगने लगी थी, वो हर समय उसके आगे पीछे घूम कर उसका मन बहलाने की कोशिश करता रहता था, जिससे नूपुर का भी मन लगा रहता था।

इसी तरह दिन बीत रहे थे। नूपुर के कारण सम्राट अपने दोस्तों को ज्यादा समय नहीं दे पा रहा था, हां आरती के साथ वो किसी न किसी तरह से समय निकाल मिल ही लेता था वो। एक दिन ऐसे ही सारे दोस्त आपस में मिले तो तो फिर से महेंद्रगढ़ जाने की बात छिड़ी, और २ दिन बाद का प्रोग्राम बन गया क्योंकि अमावस्या उसी दिन पड़ रही थी।

सम्राट नूपुर को ये प्रोग्राम बताता है तो वो सम्राट के लिए खुश होती है। पर सम्राट उसे भी चलने कहता है, जिसे वो मना कर देती है, पर सम्राट सा कहती है कि उसे कोई हॉरर मूवी दिखाने, सम्राट उसके लिए अगले रात का कहता है।

अगली रात को सम्राट अपने कमरे में मूवी लगता है और नूपुर के साथ बैठ कर देखने लगता है, देव जी और सुमित्रा सोने चले जाते हैं। ये एक हॉलीवुड मूवी थी, दोनो मूवी देखने में मगन हो जाते हैं, तभी उसमे एक हॉट सीन आ जाता है, जिसे देख कर दोनों ही कुछ गरम हो जाते हैं, और एक दूसरे की ओर देखते हैं। नूपुर एकदम से आगे बढ़ कर सम्राट के होंटो से अपने होंठ मिला देती है.....
Wah kya update diya bhai dono ne ek dusre ko kiss kar liya bhabhi devar ka romance
Sab mil kar Mahendragarh ja rhe hain jarur unki mulakat us tasweer wali ladki se vanhi par hogi
 

Sanju@

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अपडेट २#

अब तक आपने पढ़ा..

युवती (मुस्कुराते हुए बेड से उठ कर सम्राट के करीब आती है): मैं कौन, और यहां कैसे आई, इन बातों में वक्त क्यों बर्बाद करना? आओ और बस मेरी बाहों में समा जाओ।
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अब आगे....



सम्राट उसकी ओर आश्चर्य से देखता है, और उसकी नजरें जैसे ही युवती से मिलती हैं, सम्राट की सुधबुध खो सी जाती है, और वो युवती सम्राट को अपनी बाहों में भर लेती है, और उसके आधारों को चूमने लगती है। सम्राट जो की किसी और दुनिया में गुम हो चुका था, वो भी उस युवती का साथ देने लगता है।

दोनो में एक होड़ लगी थी कि कौन दूसरे के अधरों का रसपान ज्यादा कर सकता है। तभी उस युवती ने अपनी जीभ को सम्राट के मुंह में धकेल दिया जिससे सम्राट को नया अनुभव मिला और वो उसकी जीभ के स्वाद का मजा लेने लगा। साथ ही साथ उसके हाथ युवती केबदन पर घूमते हुए उसके उभारों को महसूस करने लगे। युवती सम्राट को उसके बेड पर ले कर आती है, और आधारों को छोड़ कर उसकी शर्ट को उतारने लगती है। उधर सम्राट की हालत ऐसी होती है जैसे उससे किसी ने उसका सबसे प्यारा खिलौना छीन लिया हो, मगर तभी वो युवती उसके सीने को चूमते हुए अपने एक हाथ से सम्राट की पैंट को भी खोलने लगती है।

सम्राट बेसब्र हो कर अपने हाथ से उसके स्तनों को दबाने लगता है, तो वो युवती उठ कर अपनी टीशर्ट उतार देती है, और उसके उन्नत स्तन सम्राट के आंखों के सामने आ कर उसकी आमंत्रण देने लगते हैं, सम्राट आगे बढ़ते हुए एक स्तन पर अपना मुंह लगता है, और दूसरे के हाथों से सहलाने लगता है, युवती अपने एक हाथ से उसके सर को अपने वक्षों पर दबाते हुए दूसरे से सम्राट के लंड को मसलने लगती है, जिससे सम्राट की सिसकारी निकल पड़ती है। थोड़ी देर बाद वो युवती फिर से उठती है और अपनी जींस भी निकाल फेकती है, और दुबारा से सम्राट की छाती पर बैठ जाती है मगर इस बार उसके मुंह की तरफ पीठ करके, और आगे झुक कर सम्राट के लंड को अपनी जीभ से चाटने लगती है, सम्राट ने ये सब पढ़ा और देखा भर था, पर जीवन में पहले बार उसके साथ पहली बार हो रहा था, उतेजना के आसमान पर पहुंच चुका था वो।

युवती की गुलाबी फूल जैसी साफ और चिकनी योनि सम्राट के मुंह के सामने थी, और वो योनि के मदहोश करने वाली गंध उसकी उत्तेजना को और बढ़ा ही रही थी। और अभी तक के अर्जित ज्ञान को इकट्ठा करते हुए, उसने अपने मुंह योनि से लगाया और उससे बहते हुए काम रस का को चखने लगा। उससे इतनी उत्तेजना बर्दास्त नही हुई और वो भरभरा कर युवती के मुंह में झड़ गया। युवती ने भी उसके वीर्य को पूरी तरह से गटकते हुए उसके लंड को पूरी तरह से चाट कर साफ कर दिया।

फिर वो वापस घूम कर सम्राट के मुंह की तरफ आ गई और उसके पूरे चेहरे पर चुम्बानो की झड़ी लगा दी, और धीरे धीरे नीचे आते हुए उसकी गर्दन को चूमने और चाटने लगी, उसकी गरमा गरम खुरदुरी जीभ ने तुरंत अपना असर दिखाना शुरू कर दिया जो सम्राट के लंड में दिखना शुरू हो गया, गर्दन से नीचे आते हुए वो अब उसके सीने पर वही हरकत करने लगी, और एकदम से उसके चुचकों को अपने मुंह में भर कर चूस लिया, इसी के साथ सम्राट एक बार फिर उत्तेजना के शिखर पर पहुंच गया। युवती ने ये महसूस करते ही अपनी योनि को उसके लंड पर लगाते हुए उस पर सवार हो गई।

सम्राट को ऐसा लगा जैसे उसका लुंड किसी गरम भट्टी में चला गया हो, योनि की दीवारों ने लंड को जकड़ कर रखा था, युवती ने जोर लगा कर लंड को अपने भीतर लेना चालू किया और दोनो की सिसकारी एक साथ फूट पड़ी, दोनो के चेहरे पर दर्द की लकीर दिखने लगी, मगर कामोतेजना की आग के आगे वो दर्द जरा भी टिक न पाया, और बिस्तर पर एक घमासान सा छिड़ गया, दोनो एक दूसरे को अपने अंदर लेने की होड़ में लग गए। कभी सम्राट ऊपर तो कभी युवती ऊपर, दोनो एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे थे। ये घमासान करीब आधे घंटे तक चला और दोनो लगभग एक साथ ही स्खलित हुए।

इसी के साथ सम्राट थकान से चूर हो कर उस युवती बाहों में सो गया।


कुछ समय बाद बाहर सड़क पर एकदम अंधेरे में एक काला साया एक ओर जाते हुए दिखता है, और जिस दिशा में वो साया जा रहा होता है, वहां अंधकार और भयानक हो जाता है, सड़क के किनारे जलते बल्ब खुद ब खुद बुझ जा रहे थे, सड़क के आवारा कुत्ते जो शायद ही किसी पर न भौंकते हों, दुम दबा कर पता नही किस कोने में जा छुपे थे। वो साया कोने पर मौजूद एक कब्रिस्तान के अंदर गया, और एक अट्टहास सा गूंज गया, और एक आवाज, जो कह रही थी, "मैं कल फिर आऊंगी।"
Amazing update
Kya erotic seen create Kiya hai sahi ja rahe ho
 
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Sanju@

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अपडेट ३#

अब तक आपने पढ़ा...

वो साया कोने पर मौजूद एक कब्रिस्तान के अंदर गया, और एक अट्टहास सा गूंज गया, और एक आवाज, जो कह रही थी, "मैं कल फिर आऊंगी।"

अब आगे:


कुछ महीनों पहले....

आज सम्राट के स्कूल का आखिरी दिन था, उसका बारहवीं का रिजल्ट आ चुका था और अब पूरी क्लास स्कूल छोड़ कॉलेज की जिंदगी शुरू होने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। आज स्कूल ने रिजल्ट में अच्छा करने वालों को सम्मानित करने के लिए सबको बुलाया था। सम्राट ने लड़कों में सबसे ज्यादा नंबर लाय थे तो उसे भी सम्मानित किया गया था। उससे ज्यादा नंबर आरती के आए थे, आरती एक बला की खूबसूरत लड़की है, जिसे सम्राट बचपन से ही पसंद करता है, मगर आज तक ये कहने की हिम्मत उसे नही हुई। दोनो के घर भी आस पास ही थे और बचपन से दोनो साथ ही खेले और बड़े थे, फिर भी सम्राट आज तक हिम्मत नही कर पाया आरती से कुछ कहने की।

शिव और गोपाल सम्राट के चढ्ढी बड़ी यानी की बचपन के दोस्त और सब एक साथ ही पढ़ते थे, उन्होंने सम्राट को उदास देख उससे पूछा, "क्या बात है भाई, आज सब इतने खुश हैं, तू फिर भी मुंह लटकाए बैठा है?"

सम्राट: "भाई आज स्कूल का आखिरी दिन है, अब पता नही हम सब साथ में पढ़े या अलग अलग कॉलेज में जाए, बस यही सोच कर परेशान हूं।"

गोपाल: ये सोच के परेशान है या आरती के बारे में सोच के परेशान है कि वो किसी और जगह पढ़ने न चली जाए, हमारा तो पहले से ही डिसाइडेड है की **** कॉलेज से पहले बीबीए और फिर एमबीए करके अपना बिजनेस सम्हालना है।

शिव: हां यही बात है, देख सम्राट, आज बोल दे, कब तक फट्टू बना घूमता रहेगा?

सम्राट: हां भाई आज कुछ तो करना ही पड़ेगा।

तभी उनको आरती आती हुई दिखती है, तो सम्राट उठ कर उसकी ओर जाता है।

सम्राट: आरती, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।

आरती: हैं बोलो सम्राट?

सम्राट: यहां नही, कहीं अकेले में, प्लीज!!

आरती कुछ सोच कर मुस्कुराते हुए: अच्छा बोलो कहा चलना है?

सम्राट उसको ले कर एक क्लास में घुस जाता है।

आरती: हां अब बोलो सम्राट, ऐसी क्या बात करनी है कि ऐसे एकांत में ले कर आए हो?

सम्राट कुछ घबराते हुए: वा वो क्या है न आरती, वो में ये कह रहा था न कि, वो मैं, मैं तुमसे कह रहा था...


आरती: अरे अब मैं तुम वो से आगे भी बढ़ो जल्दी।

सम्राट: अच्छा बोलता हूं पर एक वादा करो पहले, मैं जो भी कहूं, उससे हमारी दोस्ती पर कोई फर्क नही पड़ता चाहिए।

आरती (मुस्कुराते हुए): वो तो पड़ेगा ही।

सम्राट: अरे यार, फिर मैं नही बोलूंगा।

आरती: क्या नही बोलोगे? मेरे दोस्त हो तुम, और मुझसे ही छुपाओगे?

सम्राट (हड़बड़ाते हुए): दोस्त हूं तो क्या ये भी बता दूं कि तुमसे प्यार करता हूं.... उफ्फ ये क्या बोल दिया मैने (सर पर हाथ मरते हुए)

आरती (थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए): ये नही बोलना था तो क्या बोलना था? और किस बात को बोलने के लिए इधर आए थे हम?

अब सम्राट पूरी तरह से घबरा जाता है: देखो आरती, अगर जो तुमको बुरा लगा हो तो मैं माफी चाहता हूं, पर प्लीज अपनी दोस्ती पर कोई बात न आए।

आरती: और अगर जो बुरा न लगा हो तो?

सम्राट: तो भी, समझो यार... क्या? मतलब तुमको इससे कोई एतराज नहीं, मतलब तुम भी??

आरती: अरे बुद्धू, मैं तो कबसे वेट कर रही थी कि तुम कब ये मुझे बोलोगे?

सम्राट: आरती मैं डरता था कि कहीं तुम ना न बोल दो, बस इसीलिए, लेकिन आज बहुत हिम्मत करके बोला तुमको, क्योंकि क्या पता आज के बाद हम कब मिलें?

आरती: कब मिलें क्या मतलब? तुम *** कॉलेज में ही एडमिशन लोगे न, फिर?

सम्राट: मतलब तुम भी उसी में एडमिशन लोगी? ओह माय गॉड!! पर तुम तो शायद बाहर जाने वाली थी ना?

आरती: थी बाबा, लेकिन जब तुम यहां हो तो भला मैं दूसरी जगह कैसे रहूंगी?? और वैसे भी राम्या और शिवानी, मुझसे कोई बात नही छुपाती, उन्होंने बताया की तुम तीनों वहां पढ़ोगे, और इसीलिए हम तीनों ने भी वहीं पढ़ने का सोचा।

सम्राट: तो फिर चलो सब साथ में सेलिब्रेट करते हैं।

आरती: बिल्कुल।

क्लास से बाहर निकलते ही शिव राम्या और गोपाल शिवानी भी बाहर उनका वेट कर रहे थे।

शिवानी: तो आखिर लैला मजनू को एक दूसरे के बारे में पता चल ही गया?

सम्राट (शर्माते हुए): इन दोनो के चलते आरू को सब पता था, पर इन दोनो ने मुझे आज तक नही बताया। (फिर शिव और गोपाल दोनो को घूर कर देखने लगता है)

राम्या: अरे नाराज न हो, इनको भी अभी ही पता चला है कि आरु भी तुमको चाहती है पहले से। हमने आज तक इनको बताया ही नहीं। (और इसी के साथ तीनो लड़कियां हसने लगती हैं)

सम्राट, झेपते हुए: अच्छा चलो, कहां चला जाय आज एंजॉय करने केलिए??

शिवानी: तुम दोनो आज अकेले समय बिताओ, हम सब कल साथ में पब चलेंगे।

आरती: नही, हम आज ही चलेंगे, बाकी सम्राट मेरा और मैं सम्राट की ही हूं, सारा समय हमारा ही है।

ये सुन कर सब मुस्कुरा कर अपनी सहमति देते हैं, और फिर सब पब के लिए निकल जाते हैं। वहां खूब मस्ती करने के बाद सारे लोग नदी के किनारे जा कर सूर्यास्त का नजारा लेते हुए बातें कर रहे हैं।

गोपाल: यार मैं सोच रहा हूं कि हम सब मिल कर कहीं घूमने चलें, किसी एडवेंचर ट्रिप पर।

सम्राट: ये तो बढ़िया आइडिया है, क्यों आरू?

आरती: हां, लेकिन कहां जाया जाए?

शिव: महेंद्रगढ़ चलें?

राम्या: वो जहां लोग कहते है की किसी गुप्त कमरे में कोई खजाना छुपा है?

शिव: हां, वही, मेरे चाचा आजकल वहीं पोस्टेड हैं, वो पुरातत्व विभाग में ही हैं न, उनको इंचार्ज बना कर भेजा है वहां, मुझे कई बार बुला चुके हैं।

गोपाल: वाह चलो फिर खजाना भी ढूंढ लिया जाएगा।

शिव: बात करता हूं कोई खास दिन ही जाना होगा उसके लिए, अमावस्या को शायद।

सम्राट: चलो फिर उनसे बात करके दिन फिक्स करते हैं।


फिर सब अपने अपने घर को चले जाते हैं।

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रात का कोई पहर था, सम्राट एक पुराने महल के अंदर अकेला भटक रहा था, तभी वो एक कमरे में जाता है, और उसके अंदर जाते ही कमरे में उजाला हो जाता है, और उसकी नजर सामने दीवाल पर लटकी एक तस्वीर पर जाती है, जिसमे एक बला की खूबसूरत युवती थी, जिसकी आंखे बेहद खूबसूरत थी। देखते ही देखते वो युवती उस तस्वीर से बाहर आ कर सम्राट के सामने खड़ी हो जाती है, और अपनी बाहें फैलाते हुए कहती है: आखिर तुम आ ही गए कुमार। कितने बरसों से मैं तुम्हारा इंतजार कर रही हूं यहां.....
लाजवाब अपडेट है
एक फिल्म की तरह लग रहा है
 

Sanju@

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देखते ही देखते वो युवती उस तस्वीर से बाहर आ कर सम्राट के सामने खड़ी हो जाती है, और अपनी बाहें फैलाते हुए कहती है: आखिर तुम आ ही गए कुमार। कितने बरसों से मैं तुम्हारा इंतजार कर रही हूं यहां.....


अब आगे...

तभी सम्राट की नींद खुल जाती है और वो पसीने पसीने हो चुका था, एसी में भी इतना पसीना देख वो भी चौंक गया। घड़ी देखी तो सुबह के ४ बजे थे। वो सपने के बारे सोचने लगता है, था तो वो एक सपना ही, मगर उसे सच के जैसा लगा, वो युवती भी उसे कुछ जानी पहचानी लगी थी। ऐसे ही सोचते हुए उसकी नींद पूरी तरह से उड़ चुकी थी और वैसे भी आधे घंटे बाद उसको उठना ही है, तो अभी ही क्यों नही। वो जोगिंग के लिए निकल जाता है।

ऐसे ही कुछ दिन बीत जाते हैं, दोस्तों के साथ मस्ती मजाक और आरती के साथ सकून भरे लम्हे उसे उस सपने को भूला देते हैं। एक दिन जैसे ही वो जोगिंग से वापस आया तो उसके पिता, देव जी ड्राइंग रूम में तैयार बैठे थे।

देव: अरे बेटा, आ गया जोगिंग से?

सम्राट: गुड मॉर्निंग पापा, आप इतनी सुबह कहीं जा रहे हैं क्या?

देव: हां बेटा, फैक्ट्री के कुछ ऑर्डर्स लेने दिल्ली जाना है, तुम आज फैक्ट्री चले जाना।

तभी सुषमा जी रसोई से बाहर आते हुए: आईए नाश्ता बन गया है, जल्दी आ कर लीजिए।

देव: हां आया, चलो बेटा तुम भी सब लोग साथ में नाश्ता करेंगे।

सभी, देव, सम्राट और सुषमा जी नाश्ता करते हैं, और कुछ देर बाद देव अपने ड्राइवर के साथ दिल्ली के लिए निकल जाते हैं।

थोड़ी देर बाद सम्राट भी अपनी कार से फैक्ट्री की ओर चल देता है, उसने आरती को पहले ही कॉल करके बता दिया था कि वो उसे उसके घर के पास मिलेगा, जो फैक्ट्री के रास्ते में ही पड़ता था। एक चौराहे पर आरती उसको मिल जाती है और दोनो कार से सम्राट की फैक्ट्री की ओर चल देते हैं।

फैक्ट्री में पहुंचते ही एक अधेड़ आदमी गेट के पास खड़ा था, जिसे देख कर सम्राट मुस्कुराते हुए: नमस्ते रघु काका।

(रघुवीर, देव के साथ शुरू से ही हैं, उन्हीं के हमउम्र हैं, फैक्ट्री का सारा काम काज यही देखते हैं। इनका रुझान पूजा पाठ में ज्यादा है। राजा और सम्राट को बच बचपन से ही देखते आए हैं, और दोनो को बहुत प्यार भी करते हैं, और वो दोनो भी इनका बहुत सम्मान करते हैं।)

रघु: नमस्ते छोटे मालिक।

सम्राट: काका, आपसे कितनी बार कहा है कि मुझे छोटे मालिक मत बोला कीजिए।

रघु: अच्छा सम्राट बेटे, क्या करूं बरसों की आदत है।

सम्राट: अब आदत बदलिए काका, और इनसे मिलिए, आरती मेरी दोस्त। और आरती ये रघु काका, इस फैक्ट्री के करता धर्ता।

आरती: नमस्ते काका।

रघु: खुश रहो बेटा, और सम्राट बेटा ये आपकी दोस्त है या? अब आपको बचपन से जनता हूं, कम से कम मुझसे तो न छुपाओ।

सम्राट (शर्माते हुए): काका आप तो सब जान गए लेकिन अभी पापा को ये बात मत बताइएगा।

रघु: अरे बेटा, आप मेरे बेटे जैसे हैं, जब तक आप नही कहेंगे ये बात किसी को नही बताऊंगा, जैसे आप दोनो ऑफिस में बैठिए, मैं कुछ खाने को भिजवाता हूं।

सम्राट: नही काका, वो बाद में अभी तो काम करना है पहले।

रघु: ठीक है, आरती बेटा आप आइए मेरे साथ, मैं आपको फैक्ट्री दिखता हूं।

सम्राट ऑफिस की तरफ निकल जाता है, और आरती रघु के साथ फैक्ट्री देखने।

१ घंटे बाद रघु आरती को लेकर ऑफिस में आता है,जहां सम्राट भी लगभग अपना काम खत्म कर चुका होता है।

रघु: सम्राट बेटा, काम हो गया आपका?

सम्राट: जी काका लगभग हो ही गया है।

थोड़ी देर बाद सम्राट का काम खत्म हो जाता है, और वो आरती के साथ बाहर अपनी कार में आ कर बैठ कर निकल जाता है।

आरती: अब कहां चलना है?

सम्राट: बस देखते जाओ।

और ये बोल कर वो कार को स्पीड बढ़ा देता है, कुछ समय बाद दोनो एक पहाड़ी के ऊपर पहुंच जाते हैं, जहां से शहर का बड़ा ही खूबसूरत नजारा दिख रहा था, बहुत ही शांत जगह थी वो, और एकांत में भी।

वहां पहुंच कर दोनो एक दूसरे के गले लग जाते हैं। और कुछ देर में दोनो के होंठ एक दूसरे से जुड़ जाते हैं।

जोश में आ कर सम्राट के हाथ आरती की पीठ से होते हुए उसके स्तनों की ओर बढ़ते हैं, और जैसे ही आरती को ये अहसास होता है वो किस तोड़ते हुए सम्राट का हाथ पकड़ लेती है और मुस्कुराते हुए न में गर्दन हिला देती है।

आरती: नही सम्राट, ये सब शादी के बाद। मुझे पता है की हमारी उम्र है एंजॉय करने की, लेकिन अभी के लिए इतना ही काफी है। कुछ शादी के लिए भी बचा कर रखना होगा हमें।

सम्राट: बिल्कुल आरती, बिना तुम्हारी सहमति के कुछ भी नहीं। लेकिन कम से कम तुमको मैं अपनी बाहों में तो ले सकता हूं ना?

आरती खुद से उसके गले लगते हुए: बिल्कुल, इसके लिए कब मना है?

ऐसे ही कुछ समय बिताने के बाद दोनो वापस चल देते हैं।

शहर पहुंचते ही आरती कहती है कि उसे भूख लगी है, तो सम्राट एक रोड साइड होटल के किनारे रोक कर कुछ खाने पीने का सामान लेने लगता है, और आरती भी उतर कर अपने हाथ पैर सीधा करने के लिए थोड़ा आगे जा कर घूमने लगती है।

तभी सम्राट के कंधे पर एक हाथ आता है, और वो पलट कर देखता है। सामने अनिल अंकल थे, जो उसके पापा के सबसे अच्छे दोस्त थे।

अनिल जी: अरे सम्राट बेटा, इधर क्या कर रहे हो?

सम्राट (हड़बड़ाते हुए) : कुछ नही अंकल, किसी काम से इधर आया था, तो भूख लग गई। आप यहां?

अनिल: अरे बेटा, निशा का एग्जाम है, सेकंड सिटिंग में, उसे ही छोड़ने जा रहा था, लेकिन गाड़ी में कोई प्राब्लम हो गई, तुमको देखा तो सोचा तुम्हारी हेल्प ले लूं।

सम्राट: अरे अंकल, इसमें हेल्प वाली कौन बात है, आप आदेश करें।

(इसी बीच आरती को समझ आ गया कि कोई जानने वाला मिल गया है, इसीलिए वो सम्राट को इशारा करके कुछ आगे चली गई)

अनिल: तो फिर तुम निशा को उसके कॉलेज तक छोड़ दो फिर, मैं गाड़ी ठीक करवाने का इंतजाम करता हूं।

सम्राट हामी भर देता है, और अनिल निशा को बुलाने चला जाता है, आरती भी उधर ही खड़ी होती है। तभी बारिश होने लगती है, तो अनिल आरती को देख पूछता है, "बेटा आप क्या ऑटो का वेट कर रहे हो?"

आरती: जी अंकल।

अनिल: पर इधर ऑटो बहुत देर में मिलेगा, आपको कोई ऐतराज न हो तो आप उस गाड़ी से चली जाओ, मेरी बेटी भी जायेगी उसमे। वरना आप भीग जाएगी।

आरती: थैंक्यू अंकल, सच में इधर ऑटो जल्दी नही मिलते, मैं आपकी बेटी साथ चली जाती हूं।

निशा और आरती दोनो को साथ आता देख सम्राट को आश्चर्य होता है। तभी निशा आगे आ कर बैठ जाती है, और आरती पीछे।

निशा: हेलो सम्राट!! आजकल मिलते भी नही तुम?

(निशा, अनिल की बेटी है जो सम्राट से एक साल बड़ी है और अभी कॉलेज से b com फर्स्ट ईयर कर रही है। दोनो बचपन से एक दूसरे के जानते हैं, और लगभग हमउम्र होने के कारण दोस्त जैसे हैं)

सम्राट: हाय निशा, असल में मेरा इंटर था तो उसी में बिजी था मैं, कुछ दिन पहले ही तो फ्री हुआ हूं, तो पापा ने अपने साथ फैक्ट्री में लगा लिया। और तुम बताओ कैसी हो? और ये कौन?

निशा: मैं बढ़िया, और सॉरी ये आरती हैं, इनको शहर में जाना है और ऑटो नही मिला तो पापा ने कहा की साथ ले चलने।

सम्राट: ओह, अच्छा है, वरना भीग जाती यहां।

ये बोल कर सम्राट कार बढ़ा देता है, और निशा से इधर उधर की बात करते हुए ड्राइव करता है। साथ ही साथ बैक मिरर से आरती से भी उसकी आंखों आंखों में बात होती रहती है। थोड़ी देर में निशा का कॉलेज आ जाता है।

निशा: अच्छा अब मैं चलती हूं।

सम्राट, पीछे मुड़ कर: आरती आप कहां जाएंगी?

आरती: वो चौक तक, यहां से ऑटो मिल जायेगा, तो मैं भी उतर जाती हूं

निशा: अरे, आप बैठो, सम्राट उधर ही जायेगा, बस आगे आ कर बैठ जाओ, वरना ये बेचारा ड्राइवर लगेगा।

ये सुन कर सब हंसने लगते हैं, और निशा उतार जाती है। आरती भी आगे आ कर बैठ जाती है, और दोनो निशा को बेस्ट ऑफ़ लक बोल आगे बढ़ जाते हैं।

आरती: बाल बाल बचे आज तो।

सम्राट: अभी इतनी खुश न हो, ये निशा बहुत तेज है, अगर जो उसे जरा भी शक होगा तो वो अनिल अंकल को बता देगी, और वो पापा को।

आरती: फिर??..

सम्राट: फिर का फिर देखेंगे, अभी घर चलो।

सम्राट आरती को उसके घर के पास छोड़ अपने घर आ जाता है।


अगले दिन जैसे ही वो नाश्ते की टेबल पर पहुंचता है तो उसे देव और सुमित्रा की बातें सुनाई पड़ती हैं जो किचन से आ रही होती हैं।


देव: अनिल ने बोला की उसने लड़की देखी है, दोनो की जोड़ी अच्छी है, उसने लड़की के घर का भी सब पता कर लिया है और कल हम मिलने चल रहे हैं उनसे, अब इस घर में शहनाई बजने में देर नहीं करनी चाहिए.....
Amzing update
बात घर तक पहुंच गई है लगता तो यही है कि आरती की बात हो रही है लेकिन क्या पता कोई और भी हो सकती हैं
 

Thakur

असला हम भी रखते है पहलवान 😼
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अगले दिन जैसे ही वो नाश्ते की टेबल पर पहुंचता है तो उसे देव और सुषमा की बातें सुनाई पड़ती हैं जो किचन से आ रही होती हैं।

देव: अनिल ने बोला की उसने लड़की देखी है, दोनो की जोड़ी अच्छी है, उसने लड़की के घर का भी सब पता कर लिया है और कल हम मिलने चल रहे हैं उनसे, अब इस घर में शहनाई बजने में देर नहीं करनी चाहिए.....

अब आगे :-


सुषमा: आप बिलकुल सही कह रहे हैं, मैं सम्राट को तैयार होने बोल देती हूं, सब लोग चलते हैं वहां।


देव: हां ये सही है।

इतना सुन कर सम्राट की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता और वो आरती को मैसेज कर देता है कि मां पापा तुम्हारे घर आ रहे हैं, अपने रिश्ते की बात करने।

तभी सुषमा जी रसोई से बाहर आती हैं और सम्राट को देखते ही

सुषमा: अरे सम्राट बेटा, जल्दी से तैयार हो जाओ, हम किसी खास जगह जाना है, और जरा ढंग के कपड़े पहनना।

सम्राट (अनजान बनते हुए): कहां मां?

सुषमा (मुस्कुराते हुए): चलो तो, सब पता चल जायेगा।

थोड़ी देर में तीनो तैयार हो कर कार से निकल जाते हैं।

इधर आरती भी सम्राट का मैसेज पढ़ कर खूब खुश हो जाती है और अच्छे से तैयार हो कर अपनी बालकनी में खड़े हो कर सबका इंतजार करने लगती है।

देव जी खुद ही कार चला रहे थे, और जैसे जैसे आरती का घर नजदीक आ रहा था, वैसे वैसे सम्राट की खुशी बढ़ती ही जा रही थी। मगर कार आरती की गली में न मुड़ कर सीधे ही चली जाती है, और सम्राट के मुंह से निकल जाता है: अरे पापा, आप गलत जा रहे हैं शायद?

देव जी (सम्राट को घूरते हुए): अनिल ने तुझे भी पता बताया था क्या??

सम्राट (घबराते हुए): न.. नही, वो दरअसल मुझे लगा हम फैक्ट्री जा रहे हैं।

इधर आरती भी कार को सीधे जाते देख मायूस हो जाती है, और सम्राट को फोन लगाने लगती है।

उधर सम्राट को भी कुछ समझ नही आता और वो आरती का फोन काट देता है। कुछ समय बाद गाड़ी एक घर के सामने रुकती है, और वहां एक सज्जन जो देव जी के उम्र के ही थे, सबका स्वागत करते हैं।

देव जी: नमस्कार वशिष्ठ जी, ये है मेरी पत्नी सुषमा। और ये सम्राट है।

सब एक दूसरे का अभिवादन करते है और घर के अंदर जाते हैं।

वशिष्ठ जी एक बैंक में उच्च पद पर थे, उनकी पत्नी अनिता, और एक ही बेटी, नुपुर थी। छोटा सा परिवार था इनका। नूपुर अपने नाम की तरह ही खुशमिजाज और हरफनमौला थी। वो सम्राट से कोई २ साल की बड़ी थी, और अभी ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में आई थी।

सभी औपचारिकताओं के बाद सुषमा ने सम्राट को एक तरफ आने का इशारा किया, दोनो मां बेटे बाहर की ओर जा कर बात करते हैं।

सुषमा: तो कैसी लगी नूपुर?

सम्राट: अच्छी लगी मां, लेकिन वो मुझसे बड़ी है तो कैसे??

सुषमा: तुझे बड़ी है तो क्या हुआ? है तो लायक न अपने घर की बहू बनने के?

सम्राट: तो क्या आप लोग ने तय कर लिया है?

सुषमा: हां हम दोनो का तो पक्का है, पर तेरी रजामंदी जरूरी है।

सम्राट: मां, एक बात है, वो मैं किसी और को पसंद करता हूं, और वो भी मुझे पसंद करती है। लेकिन जो आप और पापा कहेंगे, मैं वही करूंगा।

सुषमा आंखे बड़ी करके सम्राट को देखती है। और पूछती है: तू कहना क्या चाहता है??

सम्राट: यही मां, की में किसी और को पसंद करता हूं।

सुषमा (सम्राट का कान पकड़ते हुए): तेरी शादी कौन कर रहा है अभी बेवकूफ? और कौन है वो लड़की?

सम्राट (झेंपते हुए): फिर? हम यहां क्यों?

सुषमा: अपने भाई से पहले तुझे शादी करनी है, वो भी अभी इतनी सी उम्र में ही? रुक अभी तेरे पापा को बताती हूं।

सम्राट: अरे मां कान छोड़ो, में तो शादी से बचने के लिए ऐसा बोला, और आप लोग ने भी तो कुछ बताया नही, और मुझसे क्यों पूछ रहे हो आप? भैया से पूछो।

सुषमा: राजा ने तुझे ही कहा था ना की पहले तू हां करेगा, तभी वो लड़की देखेगा।

सम्राट: ओह मां मैं तो भूल ही गया था। और प्लीज अब तो कान छोड़ो मेरा।

सुषमा उसका काम छोड़ कर फिर पूछती है: हां अब बता नूपुर कैसी लगी, और वो लड़की कौन है?

सम्राट: नूपुर भाभी मुझे अच्छी लगी मां, और वो कोई नही है मैने बस शादी से बचने के लिए झूठ बोला था।

सुषमा: अभी समय नही है, लेकिन तू बचेगा नही, तुझे बताना ही पड़ेगा, समझा?

सम्राट: अच्छा अभी अंदर चलो मां, वरना पापा गुस्सा करेंगे।

दोनो अंदर जाते हैं, और सुषमा अपनी तरफ से हां बोल देती है, राजा को भी वहीं से खबर कर दी जाती है, तो वो भी २ दिन में आने की बात कहता है। सभी २ दिन बाद फिर से मिलने का फैसला करते हैं।

सम्राट अंदर से बहुत खुश होता है जब उसे पता चलता है कि नूपुर उसकी भाभी बनने वाली है, और उसका और आरती का सीक्रेट अभी सीक्रेट ही है। वो मौका लगते है आरती को फोन लगता है, पर उसका फोन स्विच ऑफ आता है।

वहां से निकल कर सम्राट अपनी बाइक उठा कर सीधे आरती के घर की ओर जाता है, वो साथ साथ आरती का फोन भी लगता है जो लगातार स्विच ऑफ आ रहा होता है। वो फिर शिवानी को फोन लगा कर आरती से बात कराने को कहता है, क्योंकि शिवानी और आरती का घर आस पास ही था। शिवानी कुछ देर बाद सम्राट को बताती है की आरती घर पर नही है, और किसी को बताई भी नही जा कि वो जहां जा रही है।

सम्राट कुछ सोचता है और फिर अपनी बाइक ले कर घाट पर जाता है, क्योंकि उसे पता होता है कि आरती चाहे खुश हो या दुखी, वो घाट पर अपना समय जरूर बिताती है। और जैसा सम्राट ने सोचा था, आरती वहीं घाट पर उसे मिलती है। आरती ने रो रो कर अपनी आंखे सूजा ली थी। सम्राट उसके पास बैठ जाता है।

आरती: अब क्यों आए हो यहां, जाओ जिससे शादी हो रही है उसके पास बैठो।

सम्राट: अरे मेरी बिल्लो, मुझे बहुत बड़ी गलत फहमी हो गई थी, और एक बात सुनो, चाहे जो भी हो जाय, शादी तो मैं बस तुमसे ही करूंगा, या फिर जान ही दे दूंगा।

ये सुनते ही आरती सम्राट के मुंह पर अपना हाथ रख देती है: मरे तुम्हारे दुश्मन, और आगे से ऐसी बात करना भी नही, वरना तुमसे पहले मेरी जान जायेगी।

ये सुनते ही सम्राट आरती को कस कर गले से लगा लेता है।

कुछ देर बाद आरती उसको धक्का दे कर कहती है: हटो दूर मुझसे, प्यार का नाटक मुझसे और शादी किसी और से कर रहे हो?

सम्राट (आरती का हाथ पकड़ते हुए): अरे मेरी मां, मुझे गलतफहमी हो गई थी, पहले तो भैया की शादी होगी ना? उनके लिए ही मां पापा लड़की देखने गए थे।

आरती (मुस्कुराते हुए): मतलब वो तुम्हारी बात नहीं कर रहे थे?

सम्राट: नही यार, वो अनिल अंकल का नाम बीच में आया तो मैं हमारे बारे में सोचने लगा था।

ये सुन कर आरती सम्राट के गले लग जाती है।

कुछ देर दोनो वहां रुक कर वापस घर लौट जाते हैं।

२ दिन बाद राजा घर आता है, और अगले दिन नूपुर से मिलता है। दोनों एक दूसरे को पसंद कर लेते हैं। और शादी की तारीख भी २० दिन बाद की ही निकल जाती है, दोनो परिवार सहमत हो जाते हैं और आनन फानन में शादी की तैयारी होने लगती है।


शादी का दिन भी पलक झपकते ही आ जाता है और राजा और नूपुर की शादी खूब धूम धाम से होती है, सभी खूब एंजॉय करते हैं।


शादी के ३ दिन बाद ही राजा को उसके बेस से फोन आता है, और उसे वापस ड्यूटी पर आने को कहा जाता है, जहां उसे किसी जरूरी मिशन पर जाने को कहा जाता है। देव जी ये सुन कर बहुत नाराज होते है, और राजा को रिजाइन करने को कहते हैं। नूपुर उनको समझती है कि अभी उसे जाने दे क्योंकि राजा के लिए अभी उसका कर्तव्य ज्यादा जरूरी है। राजा भी कहता है कि अभी जाने दीजिए, मिशन पूरा होते ही वो रिजाइन दे कर वापस आ जायेगा।

नूपुर भारी मन से राजा को विदा करती है। उसकी नम आंखें देख सभी उदास हो जाते हैं। सम्राट जिसे नूपुर अपनी बड़ी बहन की तरह लगने लगी थी, वो हर समय उसके आगे पीछे घूम कर उसका मन बहलाने की कोशिश करता रहता था, जिससे नूपुर का भी मन लगा रहता था।

इसी तरह दिन बीत रहे थे। नूपुर के कारण सम्राट अपने दोस्तों को ज्यादा समय नहीं दे पा रहा था, हां आरती के साथ वो किसी न किसी तरह से समय निकाल मिल ही लेता था वो। एक दिन ऐसे ही सारे दोस्त आपस में मिले तो तो फिर से महेंद्रगढ़ जाने की बात छिड़ी, और २ दिन बाद का प्रोग्राम बन गया क्योंकि अमावस्या उसी दिन पड़ रही थी।

सम्राट नूपुर को ये प्रोग्राम बताता है तो वो सम्राट के लिए खुश होती है। पर सम्राट उसे भी चलने कहता है, जिसे वो मना कर देती है, पर सम्राट सा कहती है कि उसे कोई हॉरर मूवी दिखाने, सम्राट उसके लिए अगले रात का कहता है।


अगली रात को सम्राट अपने कमरे में मूवी लगता है और नूपुर के साथ बैठ कर देखने लगता है, देव जी और सुमित्रा सोने चले जाते हैं। ये एक हॉलीवुड मूवी थी, दोनो मूवी देखने में मगन हो जाते हैं, तभी उसमे एक हॉट सीन आ जाता है, जिसे देख कर दोनों ही कुछ गरम हो जाते हैं, और एक दूसरे की ओर देखते हैं। नूपुर एकदम से आगे बढ़ कर सम्राट के होंटो से अपने होंठ मिला देती है.....
Achhi jugalbandi ho rahi he samrat n aarati ki :love:
Par samrat ke paon fisalne lage he uska anjam kya hoga?
 

parkas

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अगले दिन जैसे ही वो नाश्ते की टेबल पर पहुंचता है तो उसे देव और सुषमा की बातें सुनाई पड़ती हैं जो किचन से आ रही होती हैं।

देव: अनिल ने बोला की उसने लड़की देखी है, दोनो की जोड़ी अच्छी है, उसने लड़की के घर का भी सब पता कर लिया है और कल हम मिलने चल रहे हैं उनसे, अब इस घर में शहनाई बजने में देर नहीं करनी चाहिए.....

अब आगे :-


सुषमा: आप बिलकुल सही कह रहे हैं, मैं सम्राट को तैयार होने बोल देती हूं, सब लोग चलते हैं वहां।


देव: हां ये सही है।

इतना सुन कर सम्राट की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता और वो आरती को मैसेज कर देता है कि मां पापा तुम्हारे घर आ रहे हैं, अपने रिश्ते की बात करने।

तभी सुषमा जी रसोई से बाहर आती हैं और सम्राट को देखते ही

सुषमा: अरे सम्राट बेटा, जल्दी से तैयार हो जाओ, हम किसी खास जगह जाना है, और जरा ढंग के कपड़े पहनना।

सम्राट (अनजान बनते हुए): कहां मां?

सुषमा (मुस्कुराते हुए): चलो तो, सब पता चल जायेगा।

थोड़ी देर में तीनो तैयार हो कर कार से निकल जाते हैं।

इधर आरती भी सम्राट का मैसेज पढ़ कर खूब खुश हो जाती है और अच्छे से तैयार हो कर अपनी बालकनी में खड़े हो कर सबका इंतजार करने लगती है।

देव जी खुद ही कार चला रहे थे, और जैसे जैसे आरती का घर नजदीक आ रहा था, वैसे वैसे सम्राट की खुशी बढ़ती ही जा रही थी। मगर कार आरती की गली में न मुड़ कर सीधे ही चली जाती है, और सम्राट के मुंह से निकल जाता है: अरे पापा, आप गलत जा रहे हैं शायद?

देव जी (सम्राट को घूरते हुए): अनिल ने तुझे भी पता बताया था क्या??

सम्राट (घबराते हुए): न.. नही, वो दरअसल मुझे लगा हम फैक्ट्री जा रहे हैं।

इधर आरती भी कार को सीधे जाते देख मायूस हो जाती है, और सम्राट को फोन लगाने लगती है।

उधर सम्राट को भी कुछ समझ नही आता और वो आरती का फोन काट देता है। कुछ समय बाद गाड़ी एक घर के सामने रुकती है, और वहां एक सज्जन जो देव जी के उम्र के ही थे, सबका स्वागत करते हैं।

देव जी: नमस्कार वशिष्ठ जी, ये है मेरी पत्नी सुषमा। और ये सम्राट है।

सब एक दूसरे का अभिवादन करते है और घर के अंदर जाते हैं।

वशिष्ठ जी एक बैंक में उच्च पद पर थे, उनकी पत्नी अनिता, और एक ही बेटी, नुपुर थी। छोटा सा परिवार था इनका। नूपुर अपने नाम की तरह ही खुशमिजाज और हरफनमौला थी। वो सम्राट से कोई २ साल की बड़ी थी, और अभी ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में आई थी।

सभी औपचारिकताओं के बाद सुषमा ने सम्राट को एक तरफ आने का इशारा किया, दोनो मां बेटे बाहर की ओर जा कर बात करते हैं।

सुषमा: तो कैसी लगी नूपुर?

सम्राट: अच्छी लगी मां, लेकिन वो मुझसे बड़ी है तो कैसे??

सुषमा: तुझे बड़ी है तो क्या हुआ? है तो लायक न अपने घर की बहू बनने के?

सम्राट: तो क्या आप लोग ने तय कर लिया है?

सुषमा: हां हम दोनो का तो पक्का है, पर तेरी रजामंदी जरूरी है।

सम्राट: मां, एक बात है, वो मैं किसी और को पसंद करता हूं, और वो भी मुझे पसंद करती है। लेकिन जो आप और पापा कहेंगे, मैं वही करूंगा।

सुषमा आंखे बड़ी करके सम्राट को देखती है। और पूछती है: तू कहना क्या चाहता है??

सम्राट: यही मां, की में किसी और को पसंद करता हूं।

सुषमा (सम्राट का कान पकड़ते हुए): तेरी शादी कौन कर रहा है अभी बेवकूफ? और कौन है वो लड़की?

सम्राट (झेंपते हुए): फिर? हम यहां क्यों?

सुषमा: अपने भाई से पहले तुझे शादी करनी है, वो भी अभी इतनी सी उम्र में ही? रुक अभी तेरे पापा को बताती हूं।

सम्राट: अरे मां कान छोड़ो, में तो शादी से बचने के लिए ऐसा बोला, और आप लोग ने भी तो कुछ बताया नही, और मुझसे क्यों पूछ रहे हो आप? भैया से पूछो।

सुषमा: राजा ने तुझे ही कहा था ना की पहले तू हां करेगा, तभी वो लड़की देखेगा।

सम्राट: ओह मां मैं तो भूल ही गया था। और प्लीज अब तो कान छोड़ो मेरा।

सुषमा उसका काम छोड़ कर फिर पूछती है: हां अब बता नूपुर कैसी लगी, और वो लड़की कौन है?

सम्राट: नूपुर भाभी मुझे अच्छी लगी मां, और वो कोई नही है मैने बस शादी से बचने के लिए झूठ बोला था।

सुषमा: अभी समय नही है, लेकिन तू बचेगा नही, तुझे बताना ही पड़ेगा, समझा?

सम्राट: अच्छा अभी अंदर चलो मां, वरना पापा गुस्सा करेंगे।

दोनो अंदर जाते हैं, और सुषमा अपनी तरफ से हां बोल देती है, राजा को भी वहीं से खबर कर दी जाती है, तो वो भी २ दिन में आने की बात कहता है। सभी २ दिन बाद फिर से मिलने का फैसला करते हैं।

सम्राट अंदर से बहुत खुश होता है जब उसे पता चलता है कि नूपुर उसकी भाभी बनने वाली है, और उसका और आरती का सीक्रेट अभी सीक्रेट ही है। वो मौका लगते है आरती को फोन लगता है, पर उसका फोन स्विच ऑफ आता है।

वहां से निकल कर सम्राट अपनी बाइक उठा कर सीधे आरती के घर की ओर जाता है, वो साथ साथ आरती का फोन भी लगता है जो लगातार स्विच ऑफ आ रहा होता है। वो फिर शिवानी को फोन लगा कर आरती से बात कराने को कहता है, क्योंकि शिवानी और आरती का घर आस पास ही था। शिवानी कुछ देर बाद सम्राट को बताती है की आरती घर पर नही है, और किसी को बताई भी नही जा कि वो जहां जा रही है।

सम्राट कुछ सोचता है और फिर अपनी बाइक ले कर घाट पर जाता है, क्योंकि उसे पता होता है कि आरती चाहे खुश हो या दुखी, वो घाट पर अपना समय जरूर बिताती है। और जैसा सम्राट ने सोचा था, आरती वहीं घाट पर उसे मिलती है। आरती ने रो रो कर अपनी आंखे सूजा ली थी। सम्राट उसके पास बैठ जाता है।

आरती: अब क्यों आए हो यहां, जाओ जिससे शादी हो रही है उसके पास बैठो।

सम्राट: अरे मेरी बिल्लो, मुझे बहुत बड़ी गलत फहमी हो गई थी, और एक बात सुनो, चाहे जो भी हो जाय, शादी तो मैं बस तुमसे ही करूंगा, या फिर जान ही दे दूंगा।

ये सुनते ही आरती सम्राट के मुंह पर अपना हाथ रख देती है: मरे तुम्हारे दुश्मन, और आगे से ऐसी बात करना भी नही, वरना तुमसे पहले मेरी जान जायेगी।

ये सुनते ही सम्राट आरती को कस कर गले से लगा लेता है।

कुछ देर बाद आरती उसको धक्का दे कर कहती है: हटो दूर मुझसे, प्यार का नाटक मुझसे और शादी किसी और से कर रहे हो?

सम्राट (आरती का हाथ पकड़ते हुए): अरे मेरी मां, मुझे गलतफहमी हो गई थी, पहले तो भैया की शादी होगी ना? उनके लिए ही मां पापा लड़की देखने गए थे।

आरती (मुस्कुराते हुए): मतलब वो तुम्हारी बात नहीं कर रहे थे?

सम्राट: नही यार, वो अनिल अंकल का नाम बीच में आया तो मैं हमारे बारे में सोचने लगा था।

ये सुन कर आरती सम्राट के गले लग जाती है।

कुछ देर दोनो वहां रुक कर वापस घर लौट जाते हैं।

२ दिन बाद राजा घर आता है, और अगले दिन नूपुर से मिलता है। दोनों एक दूसरे को पसंद कर लेते हैं। और शादी की तारीख भी २० दिन बाद की ही निकल जाती है, दोनो परिवार सहमत हो जाते हैं और आनन फानन में शादी की तैयारी होने लगती है।


शादी का दिन भी पलक झपकते ही आ जाता है और राजा और नूपुर की शादी खूब धूम धाम से होती है, सभी खूब एंजॉय करते हैं।


शादी के ३ दिन बाद ही राजा को उसके बेस से फोन आता है, और उसे वापस ड्यूटी पर आने को कहा जाता है, जहां उसे किसी जरूरी मिशन पर जाने को कहा जाता है। देव जी ये सुन कर बहुत नाराज होते है, और राजा को रिजाइन करने को कहते हैं। नूपुर उनको समझती है कि अभी उसे जाने दे क्योंकि राजा के लिए अभी उसका कर्तव्य ज्यादा जरूरी है। राजा भी कहता है कि अभी जाने दीजिए, मिशन पूरा होते ही वो रिजाइन दे कर वापस आ जायेगा।

नूपुर भारी मन से राजा को विदा करती है। उसकी नम आंखें देख सभी उदास हो जाते हैं। सम्राट जिसे नूपुर अपनी बड़ी बहन की तरह लगने लगी थी, वो हर समय उसके आगे पीछे घूम कर उसका मन बहलाने की कोशिश करता रहता था, जिससे नूपुर का भी मन लगा रहता था।

इसी तरह दिन बीत रहे थे। नूपुर के कारण सम्राट अपने दोस्तों को ज्यादा समय नहीं दे पा रहा था, हां आरती के साथ वो किसी न किसी तरह से समय निकाल मिल ही लेता था वो। एक दिन ऐसे ही सारे दोस्त आपस में मिले तो तो फिर से महेंद्रगढ़ जाने की बात छिड़ी, और २ दिन बाद का प्रोग्राम बन गया क्योंकि अमावस्या उसी दिन पड़ रही थी।

सम्राट नूपुर को ये प्रोग्राम बताता है तो वो सम्राट के लिए खुश होती है। पर सम्राट उसे भी चलने कहता है, जिसे वो मना कर देती है, पर सम्राट सा कहती है कि उसे कोई हॉरर मूवी दिखाने, सम्राट उसके लिए अगले रात का कहता है।


अगली रात को सम्राट अपने कमरे में मूवी लगता है और नूपुर के साथ बैठ कर देखने लगता है, देव जी और सुमित्रा सोने चले जाते हैं। ये एक हॉलीवुड मूवी थी, दोनो मूवी देखने में मगन हो जाते हैं, तभी उसमे एक हॉट सीन आ जाता है, जिसे देख कर दोनों ही कुछ गरम हो जाते हैं, और एक दूसरे की ओर देखते हैं। नूपुर एकदम से आगे बढ़ कर सम्राट के होंटो से अपने होंठ मिला देती है.....
Bahut hi shaandar update diya hai Riky007 bhai...
Nice and lovely update.....
 

kamdev99008

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रिकी भाई अपडेट तो बढ़िया चल रहा था.......... मेंने सोचा चुड़ैल आएगी...........
लेकिन ये तो भाभी ही आ गईं

किस्सी लेने ........... देखें कितनी दूर जाते हैं दोनों
 
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