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Incest परिवार बिना कुछ नहीं।

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Thanks for your support and comments।
Curently। iam in Jammu, as per government instructions internet service has been banned . Now i am using wifi . If wifi password will be change then i am not able to post any update.
But story will be completed definitely
 

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शाम को पूरे परिवार की मुलाकात शाम की चाय पर होती हैं । करण चाई पीते हुए : इतनी अच्छी चाई किसने बनाई है ?
माही खुश होते हुए : भैया सिर्फ एक में तो इतनी अच्छी चाय बना सकती हूं इस घर में "।
भाई मेरा इनाम कहां हैं अच्छी चाय बनाने का ?
करण : मिल जाएगा जल्दी है । उसके ही बारे में बात करते हैं ।मैंने आज पूरे दिन बहुत गहन विचार किया और आखिरकार मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि हमे एक अच्छा सा लड़का देख कर माही की शादी कर देनी चाहिए "
इस बात से जहां एक ओर समर, राम्या और काम्या के चेहरे खुशी से खिल जाते है वहीं माही उदास हो जाती हैं और बोलती हैं : मुझे नहीं करनी शादी अब । जो मेरी किस्मत में था हो गया ।
काम्या: लेकिन किस्मत बदल भी तो सकती हैं माही । जरूरी नहीं कि इंसान हादसों के बाद जीना छोड़ दे।"
करण: मेरी बात समझने की कोशिश करो , में को भी कर रहा हूं तुम्हारे अच्छे के लिए कर रहा हूं
माही: में आपकी सब बात मानने के लिए तैयार ही भाई लेकिन शादी नहीं करनी मुझे किसी भ शर्त पर । ये मेरा फाइनल निर्णय हैं "
और इतना बोलने के साथ ही उसकी रुलाई फुट पड़ती हैं और वो अपना चेहरा छुपा कर उपर भाग जाती हैं।
सभी अवाक से उसे देखते रह जाते हैं और वो सब भी उदास हो जाते हैं । माहौल एक दम गंभीर हो चुका था, कोई कुछ नहीं बोल रहा था तभी काम्या पहल करती है: राम्या तुम मेरे साथ किचन में चलो और मेरी हेल्प करो।
समर तुम ये कुछ जरूरी सामान ले कर बाजार से आओ। "
और उसके हाथ में एक लिस्ट थमा देती हैं ।
और फिर करण की और देखते हुए : आप जाइए और माही को मनाए , और जब आप नीचे आए तो वो आपके साथ मुस्कुराती हुई आनी चाहिए । "
करण धीरे धीरे भारी क़दमों से उपर जाता है और पूरी हिम्मत समेट कर माही का डोर नॉक करता है तो अंदर से कोई उत्तर नही आता।
करण: माही प्लीज़ गेट खोल,
माही सिसकते हुए : जाइए आप , मुझे नहीं करनी शादी,
करण: अरे पहले दरवाजा तो खोल, बैठकर आराम से बात करते हैं"
माही: नहीं मुझे कोई बात नहीं करनी आपसे। मैं क्या आप पर बोझ बन गई हूं
और ऐसा बोलकर जोर जोर से रोने लगती हैं ।
करण: अच्छा जो तू कहेंगी वो ही होगा , लेकिन प्लीज़ प्लीज़ गेट तो खोल"
माही: नहीं पहले मेरी कसम खाओ आप ।
करण कुछ दी सोचता हैं और और बोलता हैं ठीक है माही तुम्हारी कसम। जो तुम चाहोगी वो ही होगा लेकिन मेरी प्यारी गुड़िया अब तो दरवाजा खोल।
माही खुश होते हुए दरवाजा खोल देती हैं, करण देखता है कि उसका पूरा चेहरा आंसुओ से भीग गया था और रोने के कारण आंखे लाल हो गई थी।
वो आगे बढ़कर उसे गले लगा लेता और उसकी पीठ थपकने लगता हैं तो माही की रुलाई फुट जाती हैं और वो करण को जोर से अपनी बांहों में भरकर रोने लगती हैं
करण का भी मन भारी हो जाता है और उसकी आंखो में भी आंसू आ जाते हैं लेकिन वो खुद को संभालते हुए : मत रो मेरी बहन, मै तुम्हारी आंखों में आंसू नहीं देख सकता , और उसका आंसुओ से भीगा हुआ चेहरा ऊपर उठाकर उसके आंसू पीने लगता हैं तो माही अपने भाई का प्यार देख कर खुश हो जाती हैं और खुशी के मारे उसको कस कर अपने आप से चिपका लेती हैं और अपने आंसू रोकने लगती हैं

करण उसकी कमर को ऐसे ही सहलाता रखता है, माही के ज्यादा जोर से चिपकने के कारण उसकी बूब्स करण के सीने में गाड़ गए थे और उनके कठोर निप्पल उसे अपने सीने में चुभते हुए महसूस हो रहे थे। उफ्फ कितने बड़े और मस्त हैं उसकी बहन की चूचियां । जैसे ही उसे रात का दृश्य याद आता है तो उसकी आंखो के सामने माही की नंगी चूची आ जाती हैं, जिसका असर सीधे उसके लन्ड पर होता है और वो अपना सिर उठाना शुरू कर देता है ।
 

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वो एक हाथ से धीरे धीरे उसकी कमर सहला रहा था । माही की रुलाई पूरी तरह से रुक चुकी थी । अब कमर पर घूमता उसके भाई का हाथ उसे अच्छा लग रहा था।
माही की नाजुक और चिकनी कमर का एहसास पाकर उसका लन्ड अब बुरी तरह से अकड़ गया था जो अब माही चूत पर अड़ा पड़ा था। जैसे ही करण के लन्ड का एहसास उसे अपनी चूत पर होता है उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं वो शर्म के मारे करण से और जोर से चिपक जाती हैं जिस कारण लन्ड उसकी चूत को अच्छे से रगड़ रहा था। इस कामुक रगड़ से उसके मुंह से आहत निकाल जाती हैं जिसे करण साफ सुनता हैं और वो जोश में आते हुए अपने दोनो हाथ सलवार के उपर से ही उसके उठे हुए भारी चूतड़ों पर के जाता है और उन्हें दबा देता है जिसका सीधा असर माही की चूत पर होता है और उसमें तरंगे उठने लगती हैं ।
तभी करन दोनो हाथो से उसका चेहरा ऊपर उठाता है और पहले उसकी आंखो में देखता है तो और फिर उसके नाजुक सेक्सी लिप्स को देखता है और अपने होंठो पर जीभ फिराने लगता है ।
जैसे ही माही उसकी नजरो का पीछा करती हैं तो उसे एहसास हो जाता है कि उसके भाई की नजरे उसके लिप्स पर हैं तो वो शर्म से पानी पानी हो जाती हैं और वो अपनी जीभ निकाल कर अपने होंठो को गीला करती हैं और अपनी नजरे झुका लेती हैं और उसकी छाती में घुसे बरसाने लगती हैं ।
करण को ग्रीन सिग्नल मिल गया था।
वो बेसब्री से उसका चेहरे उपर करता हैं और अपने प्यासे जलते हुए लिप्स को अपने बहन के नाजुक, कामुक और रसीले होंठो से चिपका देता हैं । जैसे ही माही को अपने होती पर अपने भाई के होंठो का एहसास होता है उसकी सांसे जैसे रुक सी जाती हैं और वो अपनी चूत को बुरी तरह से उसके पूरे तरह से खड़े हुए लन्ड पर रगड़ती हैं और उसके होंठो को चूमती हुई कमरे से बाहर भाग जाती हैं ।
जैसे ही माही बाहर आती हैं अभी हुए हादसे को याद करके उसके होंठो पर स्माइल आ जाती हैं और वो भागते हुए नीचे आ जाती हैं । जैसे ही काम्या उसके होंठो और मुस्कान देखती हैं तो वो भी खुशी के मारे उसे अपने गले लगा लेती हैं ।
उधर जैसे ही माही उसकी बांहों से निकल कर बाहर जाती हैं उसे जैसे होश आता है और सोचता हैं कि ये भगवान है क्या हो गया।
ऐसा नहीं होना चाहिए था वो मेरी सगी बहन हैं ।
तभी उसे अपने खड़े हुए लन्ड का एहसास होता है जो कि पेंट के उपर से साफ नजर आ रहा था और पूरी तरह से अकड़ा हुआ था , उसे हैरानी होती है तभी उसे माही की हरकत याद आती हैं कि कैसे उसने खुद अपनी चूत को उसके लन्ड पर दबाया था और अपने होंठो पर जीभ फिराकर उसे ग्रीन सिग्नल दिया था। उफ्फ कितने गरम थे उसके होंठ , मानो जलते हुए अंगारे हो और साथ ही साथ कितने रसभरे थे। काश मैं अच्छे से चूस पाता।
और ऐसा सोचते हुए उसका लन्ड पेंट में ऐसे उछलता है जिसे उसे फाड़कर बाहर आ जायगा।
करण उसे हाथ से हल्के से दबाता हैं और बोलता हैं कि थोड़ा सब्र किया कर लन्ड महाराज । वो मेरी बहन कि चूत हैं "
लेकिन लन्ड को क्या फर्क पड़ता है चूत होनी चाहिए चाहे वो मा की हो या बहन की उसका काम तो बस चोदना होता है ।
31109
 
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फोटो कैसे एड होगे ??
क्या कोई भाई हेल्प करेगा मेरी ??
 

zopion

Happiness of life : to love & be loved
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:congrats: dear for starting new thread
plot is awesome & kamya is specially too tharki
friend i have just one question who is hero of the story ???
 
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Reactions: ronny aaa

ronny aaa

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Shandar update hai bhaii
Pariwarik story mein Samar ka bhi koi role hai ya Samar bas naam ke liye story mein hai
 
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