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उस दिन के बाद से दीपक दीपक रोज़ ऑफिस से आकर मुझे पिक करने लगा मेरी भी मजबूरी थी मैं कोई बखेड़ा नहीं खड़ा करना चाहती थी वैसे भी जीवन में एक के बाद एक घटनाये हो रही थी, दादी के जाने का दुःख ताज़ा था इसलिए घर में भी मन नहीं लगता था ज़्यादा, आपसे बात करके अच्छा लगता था क्यूंकि आप से होने वाली बातें मेरी पर्सनल लाइफ से रिलेटेड नहीं होती थी, आपसे बात करके मूड ठीक रहता था लेकिन दीपक के डेली पिक करने के कारन मैं आपसे भी बात नहीं कर पाती थी, साथ ही मैं एक छोटी सी कास्मेटिक शॉप पर काम करती हूँ ये बताना भी अच्छा नहीं लग रहा था सिलए मैंने आपसे झूट बोला की मैं नई नौकरी ढूंढ रही हूँ,
डेली रात में दीपक से बात करती थी लकिन दो चार दिन बाद मैंने महसूस किया की दीपक मुझसे बात करने के थोड़ी देर बाद अपना फ़ोन अपनी बहन को पकड़ा कर गायब हो जाता था, पहले तो मैंने कोई धयान नहीं दिया लेकिन एक दिन जब वो मुझे पिक करने आया तो मैंने उसकी जेब में दो मोबाइल देखे, मैं समझ गयी की ये फ़ोन अपनी बहन को पकड़ा कर दूसरे फ़ोन से किसी और लड़की से बात करता है, ये मेरे लिए अच्छी खबर थी, जितना वो दूसरी लड़कियों के साथ बिजी रहता उतना मेरी जान बची रहती, रोज़ बात करने के कारन मेरी काजल से अच्छी दोस्ती हो गयी थी, कभी कभार काजल मुझसे मिलने मेरे स्टोर पर आजाती थी।
एक दिन काजल स्टोर खुलने के थोड़ी देर बाद ही मुझसे मिलने आगयी, इस टाइम मैं अकेली होती थी मालिक दोपहर के आस पास आते थे, तो मैंने काजल को बिठा कर इधर उधर की बात करने लगी लेकिन काजल का धयान और कहीं था, थोड़ी देर बेचैनी से इधर उधर देखने के बाद उसने धीरे से कहा
काजल : भाभी मुझे आपसे एक काम था,
मैं : हाँ बोलो क्या बात है
काजल : मुझे ना एक सेक्सी सा ब्रा पेंटी का सेट दे दो इस से पहले आपके स्टोर में आपकी सहेली या मालिक आये,
मैं : मैं क्या मतलब तुझे सेक्सी सा?
काजल : दीदी, समझो ना, आजकल स्कूल में सब लड़किया मस्त सेक्सी सी ब्रा पैंटी डाल के आती है और मैं वही बुढ़िया के जैसा, अच्छा नहीं लगता, मम्मी से बोलने की हिम्मत नहीं होती और दुकान में जाकर बोलने में शर्म आती है तो आप प्लीज मुझे दे दो, मैं पैसे लायी हूँ,
मुझे कुछ समझ नहीं आरहा था की क्या करू लेकिन फिर मैंने सोचा ब्रा पेंटी ही तो है दे देती हूँ
मैंने एक दो अच्छे और ब्राइडल वाले में से हनीमून वाले सेट दिखाए जिसमे से एक पिंक कलर का सेट उसने पसंद कर लिया, डिज़ाइन बहुत सेक्सी था, बहुत ही छोटी लास वाली ब्रा थी और उसी लास से बानी पेंटी थी जो पीछे से बहुत पतली थी, लेकिन उसने पसंद किया था तो मैंने भी कुछ नहीं बोला और पैक करने लगी तो उसने रोक दिया और मेरे हाथ से पैकेट ले कर दूकान में अंदर की साइड में बने हुए काउंटर के पीछे चली गयी और काउंटर के पीछे बैठ कर जल्दी जल्दी चेंज कर उसने नई ब्रा और पेंटी पहन ली, उसके बाद वो मेरे पास रुकी नहीं और दुकान से निकल कर चली गयी , मुझे शक हो गया की ज़रूर इसका कोई चक्कर है वरना ये ऐसी हरकत नहीं करती। लेकिन मैं चुप रही कौन सा मैं उसकी सच में भाभी लगती थी, आखिर उसका भाई ना जाने कब से और कितनी लड़कियों के साथ सो चूका था कुछ असर तो बहन के अंदर भी आएगा।
उस दिन के बाद मैंने काजल पर नज़र रखने लगी, एक रात बात करते करते उसके मुँह से निकल गया की वो शिव चौक पर चौमिन खाने जाती है शाम के समय, शिव चौक मेरे स्टोर क पास ही पड़ता था, शाम के टाइम कभी कभी मालिक हमे नाश्ता करने का थोड़ा टाइम देते थे, मैंने उस टाइम शिव चौक जाना स्टार्ट कर दिया, 2-३ दिन कुछ नहीं हुआ लेकिन चौथे दिन मेरी मेहनत रंग लायी और मैंने काजल को चाऊमीन की रेहड़ी पर एक लड़के के संग चौमिन कहते देख लिया, मैंने कुछ नहीं कहा और चुप चाप वह से वापस आगयी, अगला दिन संडे का था तो मैंने दिन में काजल को फ़ोन किया और इधर उधर की बात करके सीधा मुद्दे की बात पर आयी और साफ़ लहजे में पूछा
मैं : काजल तेरे बॉयफ्रैंड का क्या नाम है
काजल (चौंकते हुए ) क्या मतलब भाभी ?
मैं : भोली मत बन काजल, मुझे सब पता है बस मैं नाम पूछ रही हूँ
काजल : (घबराते हुए ) भाभी आपने भैय्या को तो नहीं बताया ना ?
मैं : पागल है क्या ? ऐसी बात भला बताई जाती है क्या किसी को ?
काजल : थैंक यू भाभी ! उसका नाम रंजीत है, अच्छा लड़का है भाभी, प्लीज भाई को मत बताना
मैं : चिंता ना कर मैंने नहीं बताउंगी किसी को, लेकिन तू मुझे ये बता की उस दिन ब्रा पेंटी इसी के लिए खरीदी थी ? क्या तूने इसके साथ काण्ड कर लिया क्या ?
काजल : नहीं नहीं भाभी, कुछ नहीं किया, बस किस किया है केवल, और वो ब्रा पेंटी इस लिए ली थी क्यूंकि ये बहुत दिने से पीछे पड़ा था की एक पिक्चर भेजो अंदर की, लेकिन मैं टाल रही थी, फिर उस दिन इसने अपने सिर की कसम दे दी तो मुझे बात माननी पड़ी लेकिन मेरे पास ढंग की ब्रा पेंटी नहीं थी तो आपसे खरीद कर लायी।
मैं : हम्म ठीक है, लेकिन इस से ज़ायदा नहीं अभी तेरी उम्र काम है इन सब से दूर रह
काजल : ठीक है भाभी, जैसा आप बोलोगी वैसा ही करूँगा बस आप प्लीज भाई को कुछ मत बोलना नहीं तो वो मुझे जान से मार देगा।
मैं : घबरा मत पगली मैंने तुझे कुछ नहीं होने दूंगी, भाभी बाद में हूँ पहले तेरी सहेली हूँ, लेकिन एक शिकायत है तेरे से, मैंने तुझे इतना मानती हूँ लेकिन तू मुझसे बात छुपाती है।
काजल : भाभी अब आपको सब बता दिया है आगे से कुछ नहीं छुपाउंगी, आप जो पूछो मैं बता दूंगी आपको
मैं : हाँ अब बता दिया है लेकिन, एक बात तूने अब भी छुपा राखी है मुझसे
काजल : कौन सी बात
मैं : तेरी भाई की बात, की रात में वो किसी और लड़की से भी बात करता है
काजल : (झेंपते हुए ) आपको कैसे पता भाभी ?
मैं : वो छोड़, मुझे पूरी बात बता नहीं तो मैं साझुंगी की तू मेरी पक्की सहेली नहीं है।
काजल : मैं आपकी पक्की सहेली हूँ भाभी, हाँ सच है की भाई आजकल किसी लड़की से साड़ी रात बात करता है, पहले भी कभी कभी एक दो लड़की से करता था लेकिन इस वाली से बहुत टाइम से कर रहा है और रेगुलर करता है,
मैं : क्या नाम है इसका ?
काजल : (धीरे से ) विभा, भैय्या के साथ ही काम करती है और वो आपको भी जानती है,
मैंने धीरे धीरे काजल से साड़ी जानकारी ले ली, मैंने ये सब इसीलिए किया था, दीपक ने बहुत कुछ किया हुआ था लड़कियों के साथ लेकिन मेरे सामने वो ऐसे दिखता था मानो उसकी लाइफ में मेरे अलावा और कोई नहीं है, मुझे उस से पीछा छूटने का यही रास्ता नज़र आया की मैं दीपक को रेंज हाथो विभा के साथ पकडू और फिर उस से अपना रिश्ता तोड़ ख़तम कर लू।
डेली रात में दीपक से बात करती थी लकिन दो चार दिन बाद मैंने महसूस किया की दीपक मुझसे बात करने के थोड़ी देर बाद अपना फ़ोन अपनी बहन को पकड़ा कर गायब हो जाता था, पहले तो मैंने कोई धयान नहीं दिया लेकिन एक दिन जब वो मुझे पिक करने आया तो मैंने उसकी जेब में दो मोबाइल देखे, मैं समझ गयी की ये फ़ोन अपनी बहन को पकड़ा कर दूसरे फ़ोन से किसी और लड़की से बात करता है, ये मेरे लिए अच्छी खबर थी, जितना वो दूसरी लड़कियों के साथ बिजी रहता उतना मेरी जान बची रहती, रोज़ बात करने के कारन मेरी काजल से अच्छी दोस्ती हो गयी थी, कभी कभार काजल मुझसे मिलने मेरे स्टोर पर आजाती थी।
एक दिन काजल स्टोर खुलने के थोड़ी देर बाद ही मुझसे मिलने आगयी, इस टाइम मैं अकेली होती थी मालिक दोपहर के आस पास आते थे, तो मैंने काजल को बिठा कर इधर उधर की बात करने लगी लेकिन काजल का धयान और कहीं था, थोड़ी देर बेचैनी से इधर उधर देखने के बाद उसने धीरे से कहा
काजल : भाभी मुझे आपसे एक काम था,
मैं : हाँ बोलो क्या बात है
काजल : मुझे ना एक सेक्सी सा ब्रा पेंटी का सेट दे दो इस से पहले आपके स्टोर में आपकी सहेली या मालिक आये,
मैं : मैं क्या मतलब तुझे सेक्सी सा?
काजल : दीदी, समझो ना, आजकल स्कूल में सब लड़किया मस्त सेक्सी सी ब्रा पैंटी डाल के आती है और मैं वही बुढ़िया के जैसा, अच्छा नहीं लगता, मम्मी से बोलने की हिम्मत नहीं होती और दुकान में जाकर बोलने में शर्म आती है तो आप प्लीज मुझे दे दो, मैं पैसे लायी हूँ,
मुझे कुछ समझ नहीं आरहा था की क्या करू लेकिन फिर मैंने सोचा ब्रा पेंटी ही तो है दे देती हूँ
मैंने एक दो अच्छे और ब्राइडल वाले में से हनीमून वाले सेट दिखाए जिसमे से एक पिंक कलर का सेट उसने पसंद कर लिया, डिज़ाइन बहुत सेक्सी था, बहुत ही छोटी लास वाली ब्रा थी और उसी लास से बानी पेंटी थी जो पीछे से बहुत पतली थी, लेकिन उसने पसंद किया था तो मैंने भी कुछ नहीं बोला और पैक करने लगी तो उसने रोक दिया और मेरे हाथ से पैकेट ले कर दूकान में अंदर की साइड में बने हुए काउंटर के पीछे चली गयी और काउंटर के पीछे बैठ कर जल्दी जल्दी चेंज कर उसने नई ब्रा और पेंटी पहन ली, उसके बाद वो मेरे पास रुकी नहीं और दुकान से निकल कर चली गयी , मुझे शक हो गया की ज़रूर इसका कोई चक्कर है वरना ये ऐसी हरकत नहीं करती। लेकिन मैं चुप रही कौन सा मैं उसकी सच में भाभी लगती थी, आखिर उसका भाई ना जाने कब से और कितनी लड़कियों के साथ सो चूका था कुछ असर तो बहन के अंदर भी आएगा।
उस दिन के बाद मैंने काजल पर नज़र रखने लगी, एक रात बात करते करते उसके मुँह से निकल गया की वो शिव चौक पर चौमिन खाने जाती है शाम के समय, शिव चौक मेरे स्टोर क पास ही पड़ता था, शाम के टाइम कभी कभी मालिक हमे नाश्ता करने का थोड़ा टाइम देते थे, मैंने उस टाइम शिव चौक जाना स्टार्ट कर दिया, 2-३ दिन कुछ नहीं हुआ लेकिन चौथे दिन मेरी मेहनत रंग लायी और मैंने काजल को चाऊमीन की रेहड़ी पर एक लड़के के संग चौमिन कहते देख लिया, मैंने कुछ नहीं कहा और चुप चाप वह से वापस आगयी, अगला दिन संडे का था तो मैंने दिन में काजल को फ़ोन किया और इधर उधर की बात करके सीधा मुद्दे की बात पर आयी और साफ़ लहजे में पूछा
मैं : काजल तेरे बॉयफ्रैंड का क्या नाम है
काजल (चौंकते हुए ) क्या मतलब भाभी ?
मैं : भोली मत बन काजल, मुझे सब पता है बस मैं नाम पूछ रही हूँ
काजल : (घबराते हुए ) भाभी आपने भैय्या को तो नहीं बताया ना ?
मैं : पागल है क्या ? ऐसी बात भला बताई जाती है क्या किसी को ?
काजल : थैंक यू भाभी ! उसका नाम रंजीत है, अच्छा लड़का है भाभी, प्लीज भाई को मत बताना
मैं : चिंता ना कर मैंने नहीं बताउंगी किसी को, लेकिन तू मुझे ये बता की उस दिन ब्रा पेंटी इसी के लिए खरीदी थी ? क्या तूने इसके साथ काण्ड कर लिया क्या ?
काजल : नहीं नहीं भाभी, कुछ नहीं किया, बस किस किया है केवल, और वो ब्रा पेंटी इस लिए ली थी क्यूंकि ये बहुत दिने से पीछे पड़ा था की एक पिक्चर भेजो अंदर की, लेकिन मैं टाल रही थी, फिर उस दिन इसने अपने सिर की कसम दे दी तो मुझे बात माननी पड़ी लेकिन मेरे पास ढंग की ब्रा पेंटी नहीं थी तो आपसे खरीद कर लायी।
मैं : हम्म ठीक है, लेकिन इस से ज़ायदा नहीं अभी तेरी उम्र काम है इन सब से दूर रह
काजल : ठीक है भाभी, जैसा आप बोलोगी वैसा ही करूँगा बस आप प्लीज भाई को कुछ मत बोलना नहीं तो वो मुझे जान से मार देगा।
मैं : घबरा मत पगली मैंने तुझे कुछ नहीं होने दूंगी, भाभी बाद में हूँ पहले तेरी सहेली हूँ, लेकिन एक शिकायत है तेरे से, मैंने तुझे इतना मानती हूँ लेकिन तू मुझसे बात छुपाती है।
काजल : भाभी अब आपको सब बता दिया है आगे से कुछ नहीं छुपाउंगी, आप जो पूछो मैं बता दूंगी आपको
मैं : हाँ अब बता दिया है लेकिन, एक बात तूने अब भी छुपा राखी है मुझसे
काजल : कौन सी बात
मैं : तेरी भाई की बात, की रात में वो किसी और लड़की से भी बात करता है
काजल : (झेंपते हुए ) आपको कैसे पता भाभी ?
मैं : वो छोड़, मुझे पूरी बात बता नहीं तो मैं साझुंगी की तू मेरी पक्की सहेली नहीं है।
काजल : मैं आपकी पक्की सहेली हूँ भाभी, हाँ सच है की भाई आजकल किसी लड़की से साड़ी रात बात करता है, पहले भी कभी कभी एक दो लड़की से करता था लेकिन इस वाली से बहुत टाइम से कर रहा है और रेगुलर करता है,
मैं : क्या नाम है इसका ?
काजल : (धीरे से ) विभा, भैय्या के साथ ही काम करती है और वो आपको भी जानती है,
मैंने धीरे धीरे काजल से साड़ी जानकारी ले ली, मैंने ये सब इसीलिए किया था, दीपक ने बहुत कुछ किया हुआ था लड़कियों के साथ लेकिन मेरे सामने वो ऐसे दिखता था मानो उसकी लाइफ में मेरे अलावा और कोई नहीं है, मुझे उस से पीछा छूटने का यही रास्ता नज़र आया की मैं दीपक को रेंज हाथो विभा के साथ पकडू और फिर उस से अपना रिश्ता तोड़ ख़तम कर लू।