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Is kahani me seema Deepika ki maa ko bahar samaziye. Vese ye kahani me hero nahi heroine leed kar rahi he. Fir bhi hero ki bhavnao ka khayal rakha he. Lady co cold. My mane with beautiful.Shetan जी, दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं। पिछले कुछ बड़े अपडेट देने के बाद आपने थोड़ा अल्पविराम ले लिया है तो आशाएं फिर बढ़ गई है की एक जबरदस्त अपडेट लगभग तैयार होगा।
जिस तरह कहानी पिछले कुछ अंशों में प्रगत हुई है वो निश्चय ही रोमांचक है। जिस तरह मियोमी और वर्णिका ने चालाकी से खुद को क्रमशः शमीर और वीर का "तोहफा" बनाया है, सुषुमि और करिश्मा जैसी शातिर चुडैलों को भी अपनी बुद्धिमत्ता और धड़ास का प्रमाण दे दिया है की वे भी, किसी भी प्रकार से, किसी से कम नही है।
उधर रीता (राजिया) को भी अंततः जीत की असलियत का पता चल ही गया, और अब उस से भी एक नए खेल की आशा बन गई है। रूपाली और बेला तो उसके साथ है ही, तो ये देखना दिलचस्प होगा कि जीत के झंडे अब कैसे उखड़ते हैं। साथ ही ये भी देखना है की अब रीता वापस आ कर शमीर से माफी मांगेगी या नहीं, क्योंकि उसके बार बार चेताने की बाद भी ये जीत पर अंधा भरोसा जताती रही। उल्टा शमीर को ही भला बुरा सुना दिया कई बार। यद्यपि शमीर को तो अब इस बात को उतना मलाल नहीं होना चाहिए, पर अगर दोस्तों के बीच थोड़ी नोकझोक पढ़ने को मिले तो अच्छा लगेगा, और शमीर को भी मौका नहीं छोड़ना चाहिए रीता की टांग खींचने का। आखिर रीता ने भी शमीर को बहुत तरसाया और सताया था।
वहां कामिनी(कुमुत्रा) ने भी हाकिम पर अपना फंदा कसना प्रारंभ कर दिया है। वैसे तो हाकिम स्वाभाव से ही बेवकूफ, और डरपोक है (एक शब्द में चू**या), पता नही अब तक कैसे कामिनी और लियाका से ( और सच कहें तो सीमा से भी) बचा रहा। येड़ा बन के अब तक बहुत पेड़ा खा लिया, खैर अब तो उसका अंत समीप है क्योंकि "अमर - अकबर - एंथोनी" ( रूपाली, रजिया, और कुमुत्रा) की तिकड़ी ने उसे तीनों ओर से घेर ही लिया है। और उसकी तो वैसे ही फट गई है।
उधर अज्जू के मन से मृत्यु का भय निकलने के पश्चात वो भी अद्भुत कार्य को करने में सफलता प्राप्त कर चुका है। भविष्य में उसके और पराक्रम देखने मिलेंगे सुषुमि के कर्तव्यनिष्ठ सेवक के रूप में ऐसी अपेक्षा बन गई है। लियाका ने उसे जियारा को परास्त करने की जुगत तो बता ही दी है, वो कैसे अब रण में काम आती है इसकी उत्सुकता बढ़ गई है।
इन सब में सीमा और दीपिका की कहानी को अभी थोड़ी ढील मिली हुई है, आशा है भविष्य में दोनो ही कुछ रोमांचक मोड़ लेकर टपकेंगी वीर, करिश्मा, और तान्या के जीवन में। यूं तो वीर ने कुछ कुछ जोहर दिखाने शुरू कर दिए हैं, पर अभी भी उसे कुछ अविश्वनीय करने की आवश्यकता है अपने आपको नायक होना सार्थक करने के लिए। हो सके तो उसके लिए कुछ "अकल्पनीय" कल्पना रचिए। शमीर के चरित्र का विकास अच्छा चल रहा है, पर इस बीच वीर बस एक "Fuck-boy" ना बन जाए इस बात का ध्यान रखिएगा।
इस बार नामों में "गड़बड़झाला" नहीं है, ये देखकर लगा सचमुच आप अपने प्रशंसकों की टिप्पणियों पर विचार करते हो, और त्रुटियों को सुधारने के लिए कटिबद्ध दिख रहे हो। समीक्षा पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद्।
आगे बहुत से रोमांचक, रोचक, और आश्चर्यजनक अपडेट की प्रतीक्षा में,
एक तुच्छ प्रशंसक।
Lots of love..
Muje bahot achha laga ki aapne chhoti chhoti barikiyo par dhyan rakha. Me aage likh rahi hu. Par late ho raha he. Kosis karungi ki jaldi kar saku. Aaj time mila fir bhi kuchh likh hi nahi pai.









