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To Chanda ne aakhir apne mnn ki ker Lee bechara Shakti Singh ki saare Shakti peeth gyउंगली करने के कारण वह फिर से स्खलित होने के कगार पर आ गई... एक जोर की कराह मारकर वह झड गई और उस स्खलन के कारण उसके शरीर की माँसपेशियाँ बेहद तंग हो गई... शक्तिसिंह के लंड पर इतना दबाव पड़ा की वह न चाहते हुए भी स्खलित हो गया... चन्दा की गांड का अंदरूनी हिस्सा गुनगुने वीर्य से लसलसित हो गया... चन्दा ने एक कदम आगे बढ़ाया... और शक्तिसिंह का लंड पुचुक की आवाज करते हुए उसकी गांड से निकल गया... थकी हुई चन्दा, वहीं जमीन पर ढेर हो गई..
हांफ रही चन्दा की बगल में शक्तिसिंह भी आराम से लेट गया... आसमान के तारे गिनते हुए कब दोनों की आँख लग गई पता ही न चला..
भोर की पहली किरण आँखों पर पड़ते ही, शक्तिसिंह की नींद खुली... वह आँखें मलते हुए बैठ गया... उसकी बगल में पूर्ण नग्नावस्था में चन्दा, घोड़े बेचकर सो रही थी... उसने हड़बड़ाकर चन्दा को जगाया.. अंगड़ाई लेकर जागी चन्दा ने शक्तिसिंह को कंधों से अपने ऊपर खींच लिया और जमीन पर फिर से लेट गई।
"क्या कर रही है री तू? छावनी पर चलना नही है क्या? सब के जागने से पहले अगर हम वहाँ नही पहुंचे तो लेने के देने पड़ जाएंगे..!! चल छोड़ मुझे... और कपड़े पहन ले..." शक्तिसिंह अपने आप को चन्दा की गिरफ्त से छुड़ाते हुए बोला
उसकी बात को अनसुना कर, चन्दा ने फिर से शक्तिसिंह को अपनी छातियों की ऊपर खींच लिया
"शक्ति.. रात को तूने पीछे से हमला कर मुझे थका दिया.. पर में तो अभी भी प्यासी हूँ" अपनी चुत की ओर इशारा करते हुए चन्दा ने कहा
"तेरी प्यास फिर कभी बुझा दूंगा... अभी इसके लीये वक्त नहीं है" शक्तिसिंह फिर से उठने लगा..
चन्दा एकदम से चीते की तरह झपटी और शक्तिसिंह को जमीन पर गिराकर उस पर सवार हो गई..
"दृष्ट.. तूने अपना लिंग ठंडा कर लिया.. और अब मेरी आग बुझाने के लिए तेरे पास वक्त नहीं है... में तुझे ऐसे नही छोड़ूँगी" हँसते हुए चन्दा ने कहा... और फिर अपनी कठोर चूचियों को उसकी छाती पर रगड़ने लगी...
जिस बात का शक्तिसिंह को डर था वही हुआ... उसका लंड ताव में आने लगा.. फिलहाल तो लंड चन्दा के जिस्म के बोझ तले दबा हुआ था... अपने चूतड़ों तले सख्ती का एहसास होते ही चन्दा के चेहरे पर मुस्कान छा गई.. वह पीछे की तरफ हटी और शक्तिसिंह के लंड को बाहर निकाला.. दिन की रोशनी में उसका कलाई जितना मोटा लंड बड़ा ही मनोहर लग रहा था...
चन्दा ने अपने मुंह से लार निकालकर, चुत के होंठों पर मल दी... अपने चूतड़ उठाए और शक्तिसिंह के लंड पर चुत के होंठों को रख दिया... हल्का सा वज़न देने पर शक्तिसिंह का पौना लंड अंदर चला गया...
चन्दा के मुंह से आह्ह निकल गई.. इतने पुष्ट लंड को पहली बार अपनी चुत में लेकर वह सिहरने लगी... अब वक्त था तेज धक्के लगाने का... मजबूत जांघों वाली चन्दा ने ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया...
इस शक्तिशाली स्त्री को वासना से लिप्त होकर लंड पर कूदते देख शक्तिसिंह भी उत्तेजित हो गया... वह आराम से जमीन पर लेटे लेटे इस घमासान उछलकूद को दर्शक बनकर देखता रहा... साथ ही साथ वह चन्दा की चूचियों को मसलता रहा...
उस घनघोर वन की झाड़ियों में चन्दा की सिसकियाँ और कराहने की आवाज गूंजने लगी.. पेड़ की शाख पर बैठा बंदरों का झुंड, इंसानों की इस अनोखी चुदाई को बड़े ही कुतूहल से देख रहा था... चन्दा की उत्तेजना अब प्रखरता पर पहुँच रही थी... वह कामवेश में शक्तिसिंह की छाती पर चपेट लगाते जा रही थी... उसकी चुत का रस द्रवित होकर शक्तिसिंह के अंडकोशों का अभिषेक कर रहा था...
करीब दस मिनट तक अंधाधुन कुदाई के बाद भी जब चन्दा न झड़ी तब शक्तिसिंह ने अपनी उंगलियों को उसके दाने की मदद करने भेजा... वह सोते सोते चन्दा के दाने को बेरहमी से रगड़ने लगा... इस दोहरे आक्रमण के सामने चन्दा ने हथियार टेक दिए... और गुर्राते हुए वह झड़ गई.. शक्तिसिंह के जिस्म से नीचे उतरकर जैसे ही वह नीचे लेटी की शक्तिसिंह उसपर चढ़ गया... चन्दा की दोनों टाँगे फैलाते हुए उसने अपने लंड को चन्दा की गीली साँवली चुत में घुसेड़ दिया... और आनन-फानन में धक्के लगाने लगा.. १०-१२ धक्कों में ही शक्तिसिंह के अंडकोशों ने अपनी पूरी शक्ति लगाकर सारा वीर्य लंड के मार्ग से, चन्दा की चुत में दे मारा...
शक्तिसिंह चन्दा की छातियों पर काफी देर तक लेटा रहा... दोनों अब पूर्णतः संतृप्त हो चुके थे। कुछ देर पश्चात दोनों ने अपने वस्त्र पहने और छावनी की ओर चल दिए...
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Dekhte hai aage or ky ky hone wala hai
Bhai in Maa Beto ka kuch program or aage kaise suru hoga






