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Adultery शीला की लीला -५५ साल की शीला की जवानी (Completed)

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vakharia

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बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
शीला ने रसिक के साथ साथ रघू और जीवा के तगडे लंड का इंतजाम अपने भोसडे को शांत करने के लिये कर लिया
रुखी के मन से भी रसिक का डर निकल गया उसकी करतुतों के बारें में जानकर
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
Thanks bhai ❤️💕💖💕❤️
 

vakharia

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Gazab ki hahakari kamuk update he vakharia Bhai,

Sheela ki jawani ka asli ras to ab raghu aur jiva piyenge............

Sheela ki halat bahu hi jayada kharab hone wali he aaj rat............

Keep posting Bro
Thanks ❤️💖❤️❤️
 

vakharia

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Rajizexy

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घड़ी में तीन बज रहे थे.. थकान के उतरते ही वह तीनों फिर से एक दूसरे को छेड़ने लगे.. शीला सिगरेट के कश लगाते हुए धुएं को जीवा और रघु के मुंह पर छोड़ रही थी... सिगरेट की राख को जीवा के लंड पर गिराते हुए उसने कहा "मुझे अब मेरी चुत और गांड में एक साथ लंड डलवाना है.. चलो आ जाओ दोनों.. और लग जाओ काम पर.. अब ज्यादा समय नही है हमारे पास.. जल्दी करो"

ns
पड़ोस में रहती अनु मौसी... रात के इस समय.. शीला के घर की दीवार पर कान रखकर.. सारी बातें सुन रही थी..
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शीला के गले से हल्की सी चीख निकल गई.. "आह्हहहह... !!" पर रघु ने जरा सा भी दयाभाव नही दिखाया.. और एक जोरदार धक्के के साथ अपना पूरा लंड शीला की गांड में घुसा दिया.. शीला की सेन्डविच बन गई.. और वह तीनों बड़ी ही मस्ती से चोदने लगे.. शीला के मुंह से सिसकियाँ निकल रही थी... और अपने दोनों सुराखों में चुदवाते वक्त उसका सारा ध्यान घड़ी के काँटों पर ही था..

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दो दो विकराल लंड के भीषण धक्के खा खा कर शीला की गांड और भोस दोनों ही थक चुके थे.. शीला पसीने से तरबतर हो गई थी.. फिर भी उछल उछल कर चुदवा रही थी.. उसकी उछलने की गति बढ़ने के साथ ही जीवा समझ गया की शीला झड़ने की कगार पर थी.. इसलिए.. जिस तरह धोनी ने २०११ की वर्ल्डकप फाइनल की मेच में सिक्सर लगाई थी... वैसे ही जीवा ने अपने लंड से एक जोरदार शॉट लगाया..

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शीला को कमर से कसकर पकड़कर जीवा ने अपने ताकतवर हाथों से शीला को हवा में उठा लिया.. लगभग एक फुट ऊपर.. और वैसे ही उसे हवा में पकड़े रख.. नीचे से जबरदस्त धक्का लगाया शीला की भोसड़े में.. "ओह.. ह.. ह.. ह.. ले मेरी शीला रानी.. आहहहहहह..!!" कहते हुए जीवा ने पिचकारी मार दी.. शीला की चुत में गरम गरम वीर्य गिरते ही वह ठंडी होने लगी.. शीला ने अपनी गांड की मांसपेशियों को बेहद कस लिया और उसी के साथ रघु का लंड भी उसकी गांड के अंदर बर्बाद होते हुए झड़ गया...

तीनों ऐसे हांफ रहे थे जैसे मेरेथॉन दौड़कर आयें हों.. शीला की गांड और चुत दोनों में से वीर्य टपक रहा था.. गांड में अभी भी दर्द हो रहा था फिर भी शीला बहुत खुश थी.. आखिरकार उसका दो मर्दों से चुदने का सपना सच हो गया था..

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चार बजने में सिर्फ पाँच मिनट की देरी थी.. और तभी शीला के घर की डोरबेल बजी..

"इसकी माँ का.. रसिक ही होगा, जीवा.. अब क्या करेंगे?" शीला डर गई.. पूरे घर की हालत उसके भोसड़े जैसी ही थी.. सब तहस नहस हो रखा था... अब क्या होगा?

शीला ने तुरंत रघु और जीवा को कहा " तुम दोनों किचन में छुप जाओ.. में रसिक को लेकर बेडरूम में जाऊँगी तब तुम लोग धीरे से निकल जाना.. और हाँ.. बाइक को बिना चालू किए थोड़े दूर ले जाना.. और फिर स्टार्ट करना.. नही तो उस रंडवे को पता चल जाएगा.. जाओ जल्दी से.. "

शीला ने बेडरूम से जीवा और रघु को भगाया.. वह दोनों अपने कपड़े काँख में दबाकर किचन की ओर भागे.. उन दोनों के मुरझाए लटकते लंड देखकर शीला की हंसी निकल गई..

कपड़े पहनने का समय नही था.. और वैसे भी रसिक के अंदर आते ही फिर से उतारने थे.. ऐसा सोचकर शीला ने बिना ब्लाउस और घाघरे के.. अपने नंगे जिस्म पर सिर्फ साड़ी लपेट ली.. और अपने बबलों को साड़ी के नीचे दबाते हुए दरवाजा खोला...

"अरे, कविता तू... ??" शीला बोखला गई.. कपड़ों को ठीक करते हुए उसने पूछा

कविता पड़ोस में रहते अनु मौसी के बेटे पीयूष की पत्नी थी.. ४ महीनों पहले ही उनकी शादी हुई थी। अच्छा हुआ की बहुत अंधेरा था.. नही तो शीला को इस तरह देखकर, पता नही कविता क्या सोचती!!

"शीला भाभी, मेरे मामाजी ससुर को हार्ट-अटेक आया है.. और पीयूष मेरे सास ससुर के साथ उनके शहर गए है.. मम्मीजी ने मुझ से कहा था की अगर अकेले में डर लगे तो आपके घर आकर सो जाऊँ.. २ घंटों की ही बात है.. आपको अगर एतराज न हो तो क्या में आपके घर सो जाऊँ??" निर्दोष भाव से कविता ने इजाजत मांगी

शीला मन ही मन कांप उठी.. आज तो इज्जत का जनाज़ा निकल जाएगा.. माँ चुद जाने वाली थी..

"हाँ हाँ.. क्यों नही.. मैं हूँ ना तेरे साथ.. चिंता मत कर!!" शीला का शैतानी दिमाग काम पर लग गया... अब इस समस्या का कोई हल तो निकालना ही पड़ेगा.. वह सोचने लगी... क्या करूँ!!!!

"कविता, एक काम करते है.. " शीला ने अपने पत्ते बिछाना शुरू किया

"हाँ कहिए ना भाभी!!"

"मेरा बिस्तर हम दोनों के लिए छोटा पड़ेगा.. एक साथ सो नही पाएंगे... ऐसा करते है की तेरे ही घर हम दोनों सो जाते है"

"मैं आपको वही कहने वाली थी पर संकोच हो रहा था की कैसे कहूँ... वैसे भी मुझे अपने बिस्तर के बगैर नींद नही आती.. " कविता ने कहा

"तू अपने घर जा... मैं बाथरूम होकर अभी आती हूँ.. "

"जल्दी आना भाभी... मुझे अकेले में बहोत डर लगता है.. " कविता बोली

"हाँ.. हाँ.. तू जा.. मैं तुरंत पहुँचती हूँ.. "

बच गए!! शीला ने राहत की सांस ली.. वह तुरंत किचन में गई.. जीव और रघु को कहा "जल्दी निकलो तुम दोनों... रसिक नही था.. मेरी पड़ोसन थी.. "

"हाँ... वो तो हमने आप दोनों की बातें सुनी.. हम जा रहे है.. फिर किसी दिन.. बुलाते रहना.. भूल मत जाना" जीवा ने कहा

"कैसे भूल सकती हूँ!! जरूर बुलाऊँगी.. आप दोनों निकलों.. और वह देसी दारू की थैलियाँ लेते जाना.."

रघु वो थैलियाँ लेने अंदर गया तब जीवा ने शीला को बाहों में भरकर चूम लिया.. उसके आगोश में शीला दबकर रह गई.. उसने पतलून के ऊपर से जीवा लंड पकड़ लिया... "गजब का लंड है रे तेरा जीवा.. " जीवा ने शीला के साड़ी में लिपटे स्तनों को मसल दिया और उसके गाल पर हल्के से काटते हुए अपने प्रेम से उसे सराबोर कर दिया.. वापिस आए रघु भी शीला को पीछे से लिपट पड़ा.. शीला ने उसके लंड को भी प्यार से सहलाया..

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दोनों गए.. शीला की धड़कनें शांत हो गई.. अब दूसरी समस्या यह थी की रसिक का क्या करें!!

तभी रसिक की साइकिल की घंटी बजने की आवाज आई.. हाथ के इशारे से उसे घर के अंदर आने के लिए कहते हुए शीला अंदर आई.. जैसे ही रसिक घर के अंदर आया.. शीला उससे लिपट पड़ी.. और अपने स्तनों को रसिक की छाती पर रगड़ने लगी..

रसिक का लंड तुरंत ही सख्त हो गया. शीला ने घुटनों पर बैठकर उसका लंड पतलून से निकाला और चूसने लग गई.. काले डंडे जैसा उसका पूरा लंड शीला की लार से लसलसित होकर चमकने लगा..

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"रसिक, मुझे आज बहोत ही जल्दी है.. बगल वाले अनु मौसी के घर उसके बेटे की बीवी अकेली है.. उन्हे अचानक शहर के बाहर जाना पड़ा.. तू फटाफट मुझे चोदे दे.. और निकल.. फिर में घर बंद कर भागूँ.. वहाँ कविता मेरा इंतज़ार कर रही है"

"ठीक है भाभी, पर बिस्तर पर चलते है ना!! यहाँ कोई देख लेगा!!" रसिक ने कहा

रसिक का लंड मुठ्ठी में भरकर आगे पीछे करते हुए शीला ने कहा "उतना टाइम नही है रसिक.. जल्दी कर.. पेल दे फटाफट" कहते हुए शीला ने दीवार पर अपने हाथ टेक दिए और साड़ी को ऊपर उठा लिया.. रसिक उसके पीछे आ गया और शीला की जांघों को थोड़ा सा चौड़ा कर अपने लंड को उसकी चुत में घुसाकर धक्के लगाने लगा.. उसे मज़ा तो नही आ रहा था पर क्या करता!!


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"देख रसिक.. जल्दी कर.. और हाँ.. तुरंत घर मत पहुँच जाना वरना रूखी को शक हो जाएगा" शीला का गणित रसिक समझ नही पाया और वह बिना समझे हाँ हाँ करता जा रहा था.. उसके घर पर उसकी बीवी जीवा और रघु से चुदवा रही होगी.. और यहाँ वह शीला की हाँ में हाँ मिलाते चोदे जा रहा था

अपने कूल्हों को ऊपर उठाते हुए शीला ने कहा "अरे जल्दी कर न रसिक!! कितनी देर लगा रहा है तू? क्या टेस्ट मेच की तरह खेल रहा है!! देख आज तो में फंसी हुई हूँ.. इसलिए जल्दी करना पड़ रहा है.. पर कल तू जल्दी आ जाना.. फिर इत्मीनान से मजे करेंगे.. ठीक है.. कल चार बजे आ जाना"

"ठीक है भाभी.. " शीला की चुत में लंड अंदर बाहर करते हुए रसिक ने कहा

रसिक ने धक्के लगाने की गति बढ़ा दी.. "वाहह... आह्हह.. मज़ा आ रहा है.. घुसा अंदर तक.. ईशश.. " शीला की सिसकियाँ सुनकर रसिक झड़ गया.. शीला ने तुरंत उसका लंड अपनी चुत से बाहर निकाला.. और रसिक के सामने ही ब्लाउस और घाघरा पहनने लगी..

"भाभी आपने कपड़े नही पहने थे?" रसिक के मन में सवाल उठा

"कितनी गर्मी है.. और वैसे भी तू आने वाला था इसलिए कपड़े उतारकर तैयार बैठी थी.. तू बेकार की बातें बंद कर और निकल यहाँ से!!" शीला ने अपने जूठ को छिपाते हुए कहा

रसिक के निकलते ही शीला ने अपने घर को ताला लगाया.. और अनु मौसी के घर की तरफ दौड़ते हुए गई..


पर तब तक बहोत देर हो गई थी.. कविता ने यह सारा द्रश्य देख लिया था.. !! भाभी अब तक क्यों नही आए!! देखने के लिए वह शीला के घर के तरफ आई.. और शीला को खुले दरवाजे के पास रसिक से चुदवाते हुए देख लिया.. और अपने घर में वापिस आकर अचरज से सोचने लगी.. उसने जो देखा था वह अकल्पनीय था.. शीला भाभी?? एक दूधवाले के साथ? बाप रे.. विश्वास ही नही होता..."
Awesome sexy👙👠💋 update
🌟🌟🌟🌟🌟🌟
💯💯💯💯
💦💦💦
 

vakharia

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Napster

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"पिंटू यहाँ पहुंचे तब मुझे फोन कर देना.. और मैं जब कहूँ तभी तू आना.. ठीक है!!"

"ओके भाभी.. पर भाभी.. मुझे डर लग रहा है.. ऐसे ससुराल में अपने प्रेमी को मिलने बुलाना.. कितना रिस्की है!!" कविता थोड़ी सी सहमी हुई थी

"अरे तू फिकर मत कर.. मजे करने हो.. प्रेमी से चुदवाना हो तो थोड़ा जोखिम तो उठाना ही पड़ेगा.." कहते हुए शीला अपने घर की ओर निकल गई

पूरा घर अस्त-व्यस्त पड़ा था.. अभी भी देसी दारू की बदबू आ रही थी.. शीला ने तुरंत ही अगरबत्ती जलाई.. जन्नत-ए-फ़िरदौस का इत्र छिड़का.. पूरा कमरा सुगंधित हो गया..

किचन में जीवा और रघु के कारनामों की निशानी हर जगह दिख रही थी.. शीला ने सफाई करके सब ठीक-ठाक कर दिया.. मेहमानों के लिए नाश्ता भी तैयार कर दिया.. और सब कुछ फिर से चेक कर लिया.. कल रात की कोई निशानी कहीं छूट न गई हो!!

अब तक कविता का फोन क्यों नही आया? शीला सोच रही थी.. काफी देर लगा दी पिंटू ने आने में.. पता नही वो चूतिया कहाँ गांड मरवा रहा होगा? ऐसा मौका जब हाथ लगने वाला हो तब कौन बेवकूफ देर करता है!! लोग कब समय का महत्व समझेंगे!! शीला मन ही मन पिंटू को गालियां दे रही थी..

तभी फोन बजा.. कविता का ही फोन था..

"भाभी, पिंटू आ गया.. में उसे सीधे आपके घर ही भेज रही हूँ" कविता की आवाज में घबराहट थी

"तू चिंता मत कर.. भेज दे उसे.. मैं हूँ ना.. कुछ नही होगा" शीला ने ढाढ़स बांधते हुए कविता से कहा

थोड़ी ही देर में.. एक अठारह उन्नीस साल का.. हल्की हल्की मुछ वाला जवान लड़का, शीला के घर की डोरबेल बजाकर खड़ा रहा.. शीला ने अपने बड़े बोबलों को साड़ी से ठीक से ढंका और दरवाजा खोला.. उसे डर था की कहीं पिंटू ने उसकी शॉपिंग मॉल जैसी उन्नत चूचियाँ देख ली तो कविता के छोटे स्तन उसे रास्ते की रेहड़ी जैसे लगेंगे..

"आ जाओ.. तुम ही हो ना पिंटू?" जानते हुए भी अनजान बन रही थी शीला

"जी हाँ.. मैं ही हूँ पिंटू" शरमाते हुए उस लड़के ने कहा.. वह अंदर आकर सोफ़े के कोने पर बैठ गया

शीला उसके लिए पानी लेकर आई.. थोड़ा सा पानी पीकर उसने ग्लास वापिस दिया.. शरारती शीला ने ग्लास लेटे वक्त पिंटू का हाथ पकड़कर दबा दिया..

"इतना शरमा क्यों रहा है? जरा आराम से बैठ.. मैंने बिस्तर भी सजा दिया है.. तुम दोनों के लिए" अनुभवी रंडी की अदा से साड़ी के पल्लू को छाती में दबाते हुए शीला ने कहा.. सफेद रंग के ब्लाउस के अंदर उसने ब्रा नही पहनी थी.. अरवल्ली की पर्वत शृंखला के दो पहाड़ों जैसे स्तनों को पिंटू हतप्रभ होकर देखता ही रह गया.. उसका गला सूखने लगा

"तू आराम से बैठ.. अपना ही घर समझ इसे.. " कातिल मुस्कान के साथ, भारी कूल्हे मटकाती हुई शीला किचन की ओर चली गई। उसके नितंबों की लचक देखकर पिंटू के होश उड़ गए

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किचन में ग्लास रखकर शीला वापिस आई और सामने रखी कुर्सी पर बैठ गई.. उसने अपने हाथों को इस तरह जोड़ रखा था की उसके दोनों स्तन उभरकर बाहर झांक रहे थे..

"आज से पहले तूने कभी ये किया है पिंटू?" शीला ने पूछा

गर्दन घुमाकर पिंटू ने "नही" का इशारा किया

तभी कविता आ गई.. शीला को बात अधूरी छोड़नी पड़ी यह उसे अच्छा नही लगा.. कविता अगर थोड़ी देर से आती तो वह इस शर्मीले लड़के के साथ कुछ गरमागरम बातें कर पाती

कविता और पिंटू को एकांत देने के हेतु से शीला घर के बाहर निकल गई। दूध या सब्जी कुछ लेना तो था नही.. सिर्फ कुछ लेने के बहाने वह घर से बाहर निकल गई.. अब क्या करूँ?? कहाँ जाऊँ? कैसे टाइम पास करूँ?? शीला सोच रही थी... तभी उसके करीब से कोई गुजरा और शीला की कमर पर चिमटी काटते हुए कहा

"किसके खयालों में यहाँ रास्ते के बीच खड़ी हुई है!! मदन भैया के बारे में ज्यादा मत सोच.. वो तो विदेश में किसी गोरी के साथ मजे कर रहे होंगे"

शीला ने चोंककर पीछे देखा.. वह चेतना थी.. उसकी पुरानी पड़ोसन

"अरे चेतना तू ?? कितने साल हो गए तुझे देखे हुए.. कितनी मोटी हो गई है तू.. लगता है तेरा पति बड़ा अच्छे से रोज इंजेक्शन दे रहा है"

चेतन ने हँसते हुए कहा "हाँ.. इंजेक्शन का ही कमाल है ... पर तू बिना इंजेक्शन की इतनी खुश कैसे लग रही है!! कहीं किसी पराये इंजेक्शन का सहारा तो नही ले रही हो ना!! कमीनी हरामखोर.. मैं सालों से जानती हूँ तुझे.. तू इतने लंबे समय तक बिना कुछ किए रह ही नही सकती.. सच सच बता मुझे"

चेतना और शीला पुरानी सहेलियाँ थी.. दोनों बहुत अच्छी मित्रता थी.. उन दोनों के पति भी दोस्त थे.. शीला और चेतन एक दूसरे के साथ बीपी की सी.डी. की लेन-देन भी चलती रहती थी.. और जब दोनों के पति ऑफिस जाते थे तब दोनों एक दूसरे के साथ खूब मस्ती भी किया करती थी। कुछ समय बाद चेतना और उसका पति, नए घर में शिफ्ट हो गए.. फिर मिलना बहुत काम हो गया.. आज काफी सालों के बाद दोनों मिलकर खुश हो गए

चेतना: "अब मुझे यहीं बीच रास्ते खड़ा ही रखेगी या घर ले जाकर चाय भी पिलाएगी!!"

शीला अब फंस गई.. घर में तो कविता और पिंटू.. ना जाने क्या कर रहे होंगे.. पर शीला और चेतना के संबंध काफी घनिष्ठ थे.. शीला उसे कोने में ले गई और कहा

"यार चेतना.. अभी मेरे घर नहीं जा सकते"

चेतना: "क्यों? कीसे घुसाकर रखा है घर पर?"

शीला ने हँसते हँसते कहा "घुसाकर तो रखा है.. पर मेरे लिए नही.. मेरे पड़ोस में एक नवविवाहित लड़की रहती है.. कविता.. उसका प्रेमी उसे मिलने आया है.. वो दोनों बैठकर बातें कर रहे है मेरे घर पर"

चेतना: "साली बहनचोद.. तू अब दल्ली भी बन गई?"

शीला: "नही यार.. अब हालात ही ऐसे थे की मुझे मदद करनी पड़ी"

चेतना: "हम्म.. तब तो जरूर तेरा कोई राज जान लिया होगा उस लड़की ने.. सच सच बता !!"

शीला: "तू थोड़ा इत्मीनान रख.. सब बताती हूँ तुझे"

शीला ने शुरुआत से लेकर अंत तक.. रूखी, जीवा, रघु औ रसिक की सारी कहानी चेतना को विस्तारपूर्वक बताई..

बातें करते करते अचानक शीला की नजर उनकी गली के नाके पर गई.. और उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई

"बाप रे.. ये लोग अभी कहाँ से टपक पड़े??!!" सामने से कविता का पति पीयूष और उसके सास ससुर आते दिखाई दिए..

"मुझे अभी के अभी उस कविता को खबर करनी पड़ेगी..वरना लोड़े लग जाएंगे.. चेतना, तू घर चल.. फिर आराम से बाकी की बातें करते है.. "

दोनों सहेलियाँ दौड़कर शीला के घर पहुंची.. अपनी चाबी से लेच-लोक खोलकर शीला ने दरवाजा खोल दिया..

इन दोनों को देखकर, कविता और पीयूष चोंक पड़े.. कविता नंग-धड़ंग पिंटू की गोद में बैठकर ऊपर नीचे करते हुए सोफ़े पर ही चुदवा रही थी। पिंटू की पतलून घुटनों तक उतरी हुई थी.. और कविता के ब्लाउस से उसके सफेद कबूतर जैसे गोरे स्तन बाहर निकले हुए थे।

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कविता को शीला भाभी के सामने नग्न होने में कोई शर्म नही थी.. पर पिंटू की हालत खराब हो गई.. वह बिचारा दो अनजान औरतों के सामने नंगे चुदाई करते हुए देख लिया गया था। एक ही पल में उसका लंड मुरझाकर पिचक गया..

शीला ने कविता की तरफ देखकर कहा "तेरे सास ससुर और पीयूष घर पहुँच रहे है.. तू भाग यहाँ से.. जल्दी घर जा"

"अरे बाप रे!! इतनी देर में वापिस भी आ गए!!" कविता ने अपने कपड़े ठीक किए और पीछे के रास्ते बाहर भागी.. पिंटू उल्टा घूम गया और अपनी पतलून पहनने लगा..

शर्मसार होते हुए पिंटू ने कहा "सॉरी भाभी.. आप लोग ऐसे अचानक आ जाएंगे इसका मुझे अंदाजा नही था"

"हम नही.. वो लोग अचानक आ टपके.. इसमें कोई क्या कर सकता है?? कोई बात नही.. तू आराम से बैठ और ये बता.. मज़ा आया की नही?"

"अरे भाभी.. क्या कहूँ आप से!! मेरे लिए तो ये पहली बार था.. और कविता मुझे कुछ सिखाती ही नहीं की कैसे करना है..!! मैं कुंवारा हूँ.. पर वो तो शादीशुदा है ना!! उसे तो मुझे सिखाना चाहिए ना!!"

शीला: "मतलब? तुम लोगों ने ज्यादा कुछ नही किया??"

चेतना: "शीला, बेचारा नादान है.. अभी तो.. उसका छोटा सा है.. नून्नी जैसा.." अपनी उंगली से पिंटू के लंड की साइज़ का इशारा करते हुए चेतन ने कहा

शीला: "तूने देख भी लिया इतनी देर में? मैं ही देख नही पाई.. पिंटू.. तू चिंता मत कर.. मैं तुझे सब सीखा दूँगी.. बता.. सीखेगा मुझसे??"

चेतना: "मैं भी मदद करूंगी सिखाने में.. "

चेतना के स्तन देखकर पिंटू ललचा गया..

शीला: "देख पिंटू.. कविता तुझसे चुदवाने आई.. तो क्या वह अपने पति को बता कर आई थी क्या!! नहीं ना!! बस वैसे ही तू भी कविता को मत बताना.. की तू हमसे सिख रहा है"

पिंटू के चेहरे पर अब भी झिझक थी..

चेतना: "अबे चूतिये.. इतनी दूर से आया है.. और बिना चोदे वापिस लौट जाएगा?? ना तुझे चोदना आता है.. और ना ही तेरी छोटी सी पूपली में कोई दम.. बेटा.. इतनी छोटी नून्नी से किसी लड़की को कैसे खुश कर पाएगा!!"

पिंटू शर्म से लाल लाल हो गया.. उस बेचारे नादान लड़के को ऐसी अभद्र भाषा सुनकर बुरा लग गया.. आँख से आँसू टपकने लगे..

शीला: "चेतना बेवकूफ.. तुझे बात करने का तरीका नही आता क्या!! पिंटू का लंड छोटा है तो क्या हुआ??"

शीला पिंटू के पास आकर बैठ गई.. उसकी जांघ पर हाथ फेरते हुए उसने पिंटू का हाथ अपने गुंबज जैसे स्तनों पर रख दिया और बोली

"चिंता मत कर पिंटू.. चेतना तो पागल है.. देख.. छोटी उम्र में सब के अंग छोटे छोटे ही होते है.. तू कविता के स्तन के मुकाबले मेरे स्तन देख.. कितना फरक है!! ये तो होता ही है.. इसमे चिंता करने लायक कोई बात नही है"

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सुनकर पिंटू को थोड़ा अच्छा लगा.. उसने शीला की छातियों से अपना हाथ हटा लिया..

"भाभी, मैं आपसे ये सब सीखूँगा तो कविता बुरा मान जाएगी.. "

पिंटू की दूसरी तरफ चेतना आकर बैठ गई.. और शीला का अनुकरण करते हुए वह भी पिंटू की दूसरी जांघ को सहलाने लगी.. धीरे से उसने अपने ब्लाउस की एक तरफ की कटोरी खोल दी.. पिंटू बेचारा हक्का बक्का रह गया.. !!

शीला: "अरे पिंटू, तुझे कहाँ कुछ गलत करना है.. तुझे तो बस सीखना है.. है ना!! और तू यहाँ कविता की लेने आया है.. तो क्या ये कविता के पति को पसंद आएगा!! नहीं ना!!"

पिंटू: "पर भाभी, कविता के पति को ये कहाँ पता चलने वाला है??"

शीला: "वही तो कह रही हूँ.. तू हम दोनों के पास ट्यूशन ले रहा है.. ये बात कविता को कहाँ पता चलने वाली है!! देख बेटा.. हर कोई ऐसे ही सीखता है.. अगर तुझे भी सीखना हो तो बताया.. हमारी कोई जबरदस्ती नहीं है तुझ पर.."

शीला और पिंटू के बीच इस संवाद के दौरान चेतना ने अपने ब्लाउस के दो हुक खोल दिए.. और अपने स्तनों को बाहर निकाल दिया.. पिंटू तो चेतना के बड़ी निप्पलों वाले स्तन देखकर उत्तेजित हो गया.. और उसके अंदर का किशोर विद्यार्थी जाग उठा..उसकी छोटी सी नुन्नी में जान आने लगी।

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चेतना ने पिंटू के लंड पर हाथ सहलाते हुए शीला से कहा "ये तो मस्त हो गया शीला.. देख तो जरा.. पतला है तो क्या हुआ!!"

शीला ने भी पिंटू का लंड हाथ में लेकर दबाकर देखा

"आह आहह भाभी.." कहते हुए पिंटू चेतना के नग्न स्तनों को पकड़कर मसलने लगा.. शीला ने पिंटू की आधी उतरी पतलून को पूरी उतार दी.. और पिंटू का लंड पकड़कर हिलाने लगी.. पिंटू सिसकियाँ भरता गया और चेतना के स्तनों को दबाता गया.. शीला ने भी अपने ब्लाउस के बटन खोल दिए और अपनी गुलाबी निप्पल को पिंटू के मुंह में देते हुए कहा

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"थोड़ा चूस ले बेटा.. तो चोदने की ताकत आ जाएगी"

पिंटू छोटे बच्चे की तरह शीला की निप्पल चूसने लगा.. "बच बच" की आवाज करते हुए कभी वह शीला की निप्पल चूसता तो कभी चेतना की.. चेतना ने अपनी निप्पल छुड़वाई.. और उसका लंड चूसना शुरू कर दिया

शीला: "अबे चूतिये.. तुझे चोदना तो नहीं आता.. लेकिन चूसना भी नहीं आता क्या!! चूसते हुए ऐसे काट रहा है जैसे पपीता खा रहा हो.. ठीक से चूस"

पिंटू बेचारा.. नादान था.. ज्यादा देर अखाड़े में इन दोनों पहलवानों के सामने टीक पाने की उसकी हैसियत नहीं थी.. चेतना के मुंह में ही उसका लंड वीर्य-स्त्राव कर बैठा.. चेतना बड़ी मस्ती से.. अनुभवी रांड की तरह.. पिंटू के लंड को चाट चाट कर साफ करने लगी। पिंटू तो शीला के मदमस्त खरबूजे जैसे स्तनों में खो सा गया था.. कविता के छोटे छोटे कबूतर जैसे स्तनों के मुकाबले शीला के उभारों ने उसका दिल जीत लिया था।

चेतना: "छोकरा नादान है.. पर तैयार हो जाएगा.. थोड़ा सा ट्रेन करना पड़ेगा"

शीला: "कितना माल निकला उसके लंड से?"

चेतना: "एक चम्मच जितना.. पर मेरे पति के वीर्य के मुकाबले स्वाद में बड़ा ही रसीला था" अपनी उँगलियाँ चाटते हुए चेतना ने कहा

शीला: "हम्म.. बच्चा बोर्नवीटा पीता होगा तभी उसका माल इतना स्वादिष्ट है!!" कहते हुए शीला हंस दी.. "लंड पतला जरूर है.. पर है मजबूत.. अंबुजा सीमेंट जैसा.. देख देख.. झड़ने के बाद भी पूरी तरह से नरम भी नहीं हुआ"

चेतन ने झुककर पिंटू के अर्ध जागृत लंड की पप्पी ले ली..

"अरे पिंटू, तूने कविता की चुत चाटी है कभी?" अपना घाघरा उतारते हुए शीला ने पिंटू से पूछा.. शीला की गोरी गोरी मदमस्त जांघों को देखकर पिंटू का लंड उछलने लगा..

पिंटू: "एकाध बार किस किया है.. पर अंदर से चाटकर नहीं देखा कभी"

शीला: "देख पिंटू, अगर औरत को खुश करना है तो सब से पहला पाठ यह सिख ले.. चुत को चौड़ी करके अंदर तक जीभ डालते हुए चाटना सीखना पड़ेगा.. "

पिंटू बड़े ही अहोभाव से इन दोनों मादरजात नंगी स्त्रीओं को देखता रहा.. जैसे स्कूल के मैडम से अभ्यास की बातें सिख रहा हो.. शीला और चेतना पिंटू को प्रेम, कामवासना, चुदाई, मुख मैथुन वगैरह के पाठ पढ़ाने लगे.. तीनों एक दूसरे के सामने पूरी तरह नंगी अवस्था में थे.. उत्तेजित होकर शीला और चेतना, पिंटू के जिस्म को जगह जगह पर चूमते हुए उसके शरीर से खेलने लगे। पिंटू का लंड अब सख्त होकर झूलने लगा..

शीला: "देख ले ठीक से पिंटू.. इस तरह चुत को चाटते है" कहते हुए शीला ने चेतना को लिटा दिया और उसकी चुत पर अपनी जीभ फेरने लगी

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चेतना: "ओह्ह शीला.. बहोत मज़ा आ रहा है यार.. "

चेतना की निप्पल उत्तेजना के मारे सख्त कंकर जैसी हो गई थी। पिंटू एकटक शीला और चेतना की इन हरकतों को देख रहा था।

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चेतना: "ठीक से देख ले पिंटू.. आह्ह.. बिल्कुल इसी तरह कविता की पुच्ची को चाटना.. नहीं तो तेरी कविता किसी और से सेटिंग करके अपनी चटवा लेगी"

काफी देर तक शीला ने चेतना के भोसड़े के हर हिस्से को चाटा.. अब उसने एक साथ चार उँगलियाँ अंदर घुसेड़ दी और चाटती रही

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चेतना ने थोड़े गुस्से से कहा "बहनचोद.. क्या देख रहा है!! कम से कम मेरी चूचियाँ तो मसल दे.. ऐसे ही निठल्ले की तरह बैठा रहेगा तो कुछ नहीं होगा तेरा.. !!"

सुनते ही पिंटू ने तुरंत चेतना के स्तनों को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया.. शीला की चुत चटाई से आनंदित होते हुए.. अपने चूतड़ों को उछाल उछाल कर चेतना झड गई.. पिंटू सब कुछ बड़े ही ध्यान से देख रहा था।

चेतना की चुत से मुंह हटाते हुए शीला ने कहा "देखा पिंटू!! लंड छोटा हो या बड़ा.. पतला हो या मोटा.. कुछ फरक नहीं पड़ता.. अगर अच्छे से चुत चाटने की कला सिख ली..तो अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड को खुश रख पाएगा"

पिंटू: "पर भाभी.. लड़की को असली मज़ा तो तब ही आता है ना अगर लंड लंबा और मोटा हो!!" बड़ी ही निर्दोषता से पिंटू ने पूछा

चेतना: "बात तो तेरी सही है बेटा.. मुझे यह बता.. की तुझे ५ रुपये वाली कुल्फी पसंद है या १० रुपये वाली?"

पिंटू: "जाहीर सी बात है.. १० रुपये वाली"

शीला: "बिल्कुल वैसे ही.. हम औरतों को भी १० रुपये वाली कुल्फी ज्यादा पसंद है.. पर उसका यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है की हमें ५ रुपये वाली कुल्फी से मज़ा नहीं आता.. कुल्फी छोटी हो तो उसे धीरे धीरे चूसकर मज़ा लेना भी आता है.. और कई बिनअनुभवी औरतों को १० रुपये वाली कुल्फी भी ठीक से खाना नहीं आता.. पिघलाकर नीचे गिरा देती है"

पिंटू: "पर भाभी.. अगर मुझे अपना लंड मोटा और तगड़ा बनाना हो तो क्या करू?"

इतना समझाने के बावजूद पिंटू घूम फिर कर वहीं आ गया.. शीला ने अपना सिर पीट लिया..

शीला: "अबे लोडुचंद.. जैसे जैसे तू बड़ा होगा वैसे वैसे तेरा वो भी बड़ा हो जाएगा.. चिंता मत कर.. देख.. अब जिस तरह मैंने चेतना की चुत चाटी थी वैसे ही तू मेरी चाटकर दिखा.. देखूँ तो सही तूने कितना सिख लिया.. समज ले की यह तेरी परीक्षा है.. अगर ठीक से नहीं चाटी तो मैं कविता को सबकुछ बताया दूँगी"

कविता का नाम सुनते ही पिंटू भड़क गया.. और शीला की जांघें चौड़ी करके बीच में बैठ गया.. शीला का फैला हुआ भोसड़ा देखकर पिंटू सोच रहा था.. कहाँ मेरी कविता की मोगरे के फूल जैसी नाजुक चुत.. और कहाँ ये धतूरे के फूल जैसा शीला भाभी का भोसड़ा !!

शीला: "यही सोच रहा है ना की कविता के मुकाबले कितनी बड़ी है मेरी!! जब मैं कविता की उम्र की थी तब मेरी भी कविता की तरह मस्त संकरी सी थी.. पर मेरे पति ने ठोक ठोक कर ऐसे रानीबाई की बावरी जैसा बना दिया.. वो तो कविता की चुत भी उसका पति चोद चोद कर चौड़ी कर ही देगा.. तू चाटना शुरू कर.. जल्दी कर बहनचोद.. इतना गुस्सा आ रहा है की तेरी गांड पर एक लात मारकर तुझे गली के नुक्कड़ पर फेंक दूँ.. " कहते हुए शीला ने अपने गुफा जैसे भोसड़े पर पिंटू को मुंह दबा दिया..

पिंटू भी शीला को खुश करने के इरादे से.. चुत चटाई की नेट-प्रेक्टिस करते हुए.. चब चब चाटने लगा.. शीला के तानों ने अपना काम कर दिया.. पिंटू कोई कसर छोड़ना नहीं चाहता था.. अपनी जीभ को अंदर तक घुसेड़कर उसने शीला के भोसड़े को धन्य कर दिया.. कराहते हुए शीला अपनी गदराई जांघों को आपस में घिसने लगी..

बगल में बैठी चेतना अपने स्तनों को शीला के बबलों से रगड़ने लगी.. और शीला ने उसे खींचकर अपने होंठ चेतना के होंठों पर रखते हुए चूम लिया..

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शीला ने अपनी दोनों विशाल जांघों के बीच पिंटू को दबोच लिया.. अपना स्खलन हासिल करने के बाद ही उसने पिंटू को जांघों की मजबूत पकड़ से मुक्त किया.. शीला की पकड़ से छूटते ही पिंटू दूर खड़ा होकर हांफने लगा.. बाप रे!! ये तो औरत है या फांसी का फंदा.. जान निकल जाती अभी.. पिंटू कोने में जाकर बैठ गया..

उसे बैठा हुआ देखकर चेतना उसके पास आई.. और उसे कंधे से पकड़कर खड़ा किया


चेतना: "बेटा.. डरने की जरूरत नहीं है.. देख कितनी मस्त गीली हो गई है शीला की चुत!! जा.. उसके छेद में अपना लंड पेल दे.. और धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर.. और सुन.. पूरा जोर लगाना.. ठीक है.. तुझे बस ऐसा सोचना है की ट्यूशन पहुँचने में देर हो गई है और तू तेज गति से साइकिल के पेडल लगा रहा है.. जा जल्दी कर"
बहुत ही मस्त लाजवाब और मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गया
पिंटू और कविता को एकांत देने के लिये शीला बाहर चली गयी वहा उसे पुरानी सहेली चेतना मिल गयी बातें कर ही रहे थे की कविता के घर वालें दिखे तो भाग कर घर पहुंच कर चुदाई करते कविता को उसके घर भगा दिखा बेचारे पिंटू के खडे लंड पर बिजलीया गीर गयी फिर शीला और चेतना का खेल शुरु हो गया नवसिखिए पिंटू को चुदाई का ज्ञान देने के साथ साथ उनके भी भोसडे के लिये एक खिलौना मिल गया
खैर देखते हैं आगे क्या होता
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 
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