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Romance Love in College. दोस्ती प्यार में बदल गई❣️ (completed)

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Update 10.

वीर: (मुस्कान के साथ) देखते हैं भाई थोड़े दिन रुक जा पता लग जाएगा ।
ये लोग ऐसे ही बात करते रहते हैं, फिर क्लास शुरू हो जाती है, लंच में सब लोग पहले कैंटीन में जाते हैं, लेकिन आज कुछ भी अप्रिय घटना नहीं घटी। ऐसे ही एक-एक करके दिन गुजर रहे थे की एक दिन.....!

अब आगे:

अगले दिन सुबह के नौ बजे क्लास में सब लोग बैठे हुए पढ़ रहे थे! (आज कल वीर का भी मन प्रिया के बार-2 कहने से पढ़ने को होने लगा था) तो वीर भी मन लगा कर पढ़ रहा था।

तभी त्रिपाठी जी और स्पोर्ट्स कोच दोनो क्लास में आते हैं। त्रिपाठी जी और हमारे क्लास टीचर के बीच कुछ बात होती है, तभी कॉल्स टीचर बोलते हैं:

सभी छात्र ध्यान से सुनें, अगले हफ्ते कॉलेज टूर मनाली के लिए जा रहा है! जो भी छात्र अपना नाम लिखाना चाहता है तो उसे अपना नाम त्रिपाठी सर या कोच सर को दे देना !!
नाम देने का समय 4 दिन का है, उसके बाद नाम नहीं लिखा जाएगा,
नाम के साथ 5000/- रुपये की राशि भी जमा करवा देना।

सनी: क्यू वीरे हो जाए तक धीना धिन..

वीर: हो जाये बन्धु ! पर अकेले जाओगे? प्रिया को भी तो पूछ ले!!

सनी: ये हुई ना बात! बेरो थो मन्ने(पता था मुझे) तू उसके बिना कहीं नहीं जाने वाला..इसीलिए तो मैं बोलता हूं कि ये कुछ तो और है !(मुस्कुराते हुए). साले वो भी अकेली थोड़ी जाएगी, उसको बोलना कंचन को भी साथ ले ले।

वीर: हसते हुए : मैं भी जाने थो बेटा तू भी कुछ बोलेगो (मुस्कुराते हुए मुझे भी पता था बेटा कि तू भी कुछ तो बोलेगा!),
देख वो मैं नहीं कर सकता वो तो केवल प्रिया ही कर सकती है उसको मनाने का काम।
क्यू की वो उसकी दोस्त है, और मैंने तो ज्यादा बात भी नहीं की कभी उससे।

सनी: ये नहीं चलेगा बंधु! तेरे वाली तेरे साथ जाएगी तो मुझे भी कोई कंपनी मिलनी चाहिए।

वीर: (कुछ सोचते हुए) हम्म! समझ गया बेटा माजरा क्या है? तो आग इधर लगी है! और कमीना मुझे बोलता है, कि तुझे ये हुआ वो हुआ!!

सनी: अबे ऐसा कुछ नहीं है मैं तो कंपनी के लिए बोल रहा था और कुछ नहीं।

वीर: रहने दे बेटा, मुझसे होशियारी नहीं चलेगी! तेरी हर रग से वाकिफ हूं मैं, साथ-2 में बड़े हुए हैं भाई मुझसे कुछ नहीं छुप सकता तेरा।

सनी: (नजरे चुराके) छोड़ ना भाई तेरी तो आदत हो गई है झूठी टांग खींचने की।

वीर: चल जा क्या याद रखेगा छोड़ देता हूँ आज! पर ये मत समझना तू मुझे गोली दे सकता है।

ना किसी से दुश्मनी है, सबसे अपनी यारी है,
मेरा तो बादमें देखेंगे, पहले तेरी बारी है!
कोई भी ना टिक सके सामने, ऐसी अपनी यारी है,
कर ले बेटा अपने दिल की, काहे हिम्मत हारी है..”


चल लंच में प्रिया से बात करते हैं। तू उसको मनाने में मेरी मदद करदेना! पता नहीं जाएगा या नहीं.

सनी: भाई मानेगी कैसे नहीं हम मना लेंगे।

क्लास चलती रहती है, इसी तरह लंच हो जाता है! और वो दोनों दोस्त खड़े हो गए कैंटीन जाने के लिए ।।

वीर ने एक नज़र सुप्रिया की और देखा तो पाया कि वो वही अपनी सहेली के साथ ही बैठी थी।

वीर: प्रिया आज कैंटीन नहीं चल रही क्या घंटी लगे हुए इतना टाइम हो गया।

सुप्रिया: (रहस्यमय -मुस्कान) ना वीर आज मूड नहीं है तुम दोनों जाओ..

वीर: ?? यार अब ऐसा क्यों कर रही है? चल चुप-चाप तू नहीं जाएगी तो मैं भी नहीं जाऊँगा.

सुप्रिया: चलो श्रीमान ! जैसे मेरे बिना तो रात को खाना भी नहीं खाते होगे आप? हे..हे..हे....चलो क्या याद रखोगे किस रहीस से पाला पड़ा है तुम्हारा।

ये बोलते हुए खड़े हो जाती है और अपनी सहेली को साथ लेकर कैंटीन की और निकल जाती है वीर के साथ। सबलोग कैंटीन में बैठ कर कॉफी पी रहे थे..
तभी वीर बोलता है कि प्रिया टूर का क्या करना है?

प्रिया: मैं क्या बताऊं (मुस्कुराते हुए) तुम देख लो जाना है तो फोरम भर दो! मैं तो जाउंगी नहीं. वो क्या है ना घर पर भी काम रखता है, माँ के पास रुकना पड़ता है पापा भी मना कर देंगे वैसे।

वीर: यार प्रिया ऐसे मत कर ना चिकुड़ी!! तू नहीं जाएगी तो मैं भी नहीं जाऊँगा! ये पक्की बात है.

प्रिया: (हाथ पे मुक्का मरते हुए, झूठे गुस्से से) तुझे कितनी बार बोला है तोते. कि मुझे इस नाम से मत बुलाया कर यहां सबके सामने अब मैं बिल्कुल भी नहीं जाऊंगी। तू हर बार ऐसे ही रो धो कर मुझे मना लेता है।

वीर:

“काश तू पूछे मुझसे मेरा हाल-ए-दिल, मैं तुझे भी रुला दू तेरे सितम सुना सुना कर."

और

"कटी हुई टहनियां कहा छाव देती है,
हद से ज्यादा उम्मीदें हमेशा घाव देती है ..”

जा प्रिया तूने भी दिखाया दी अपनी दोस्ती अब ये वीर कभी तुझे मजबूर नहीं करेगा।

प्रिया: कर दी ना गंवारों वाली बात बस हमेंसा का यही रोना है तेरा! जब देखो ये रोने धोने वाली शायरी सुनाकर इमोशनल ब्लैकमेल करता रहता है,
(कुछ सोच के) ठीक है-ठीक है अब रो मत माँ को पटाऊँगी शाम को और वो बाबा से बात कर लेगी, तो शायद हो जाए।

वीर: ये हुई ना बात मेरी चीकू..! सोरी प्रिया वाली. वैसे कंचन को भी साथ ले-ले.

प्रिया: (कंचन की और मुस्कुराहट से देख कर) वो क्यों भला?


वीर: वो क्या है ना तेरा भी तो मन लगना चाहिए।

प्रिया: पर ये तो मना कर रही है!! ये टूर पर जाती नहीं है, मतलब इसको पसंद नहीं है।

ये सुनते ही सनी का मुंह उतर जाता है, जिसे देख कर वीर प्रिया को प्लीज वाला इशारा करता है और आंख से सनी की तरफ इशारा करता है जो प्रिया समझ जाती है।

प्रिया: सुन यार कंचन तू भी चल ना मजा आएगा, मैं भी वहा अकेली बोर हो जाऊंगी ये लोग तो अपनी मस्ती मजाक में लगे रहेंगे मैं किससे बात करूंगी?

कंचन: ठीक है प्रिया जब तुम इतना बोल ही रही हो तो मैं भी चलूंगी, आख़िर तू ही तो मेरी एकलौती दोस्त है।

इतना सुनते ही सनी जोश जोश में जोर से चिल्लाता है ।

सनी: हुर्रे..... :rock1:सभी उसकी तरफ देखने लगे,
तब उसे एहसास हुआ कि वो क्या कह रहा है। और तुरन्त माफ़ी माँगता है।
सॉरी मुझे बस इसी बात की खुशी हो रही है कि हमारा ग्रुप साथ में जा रहा है, इसके लिए।

ये देख कर कंचन को भी हंसी आती है जब सनी की नजर कंचन पर पड़ती है तो वो अपनी नजर झुका लेती है।


तो दोस्तों इस अपडेट को यहीं विराम देते हैं और अगले अपडेट में आपको मनाली की ख़ूबसूरती मिलेगी..

अपने सुझाव और अपनी समीक्षा जरूर दे. dhanyawaad.


जारी है...:writing:
Ristrcted
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Solid update bus updates me size ko thoda or bada kar do mitr toh story ka romanch duguna ho jayega…..
Thank you very much bhai for your support, :hug:
update size badhiya hota per samay ke abaav me jaldi post kar diya👍
 

park

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Update 10.

वीर: (मुस्कान के साथ) देखते हैं भाई थोड़े दिन रुक जा पता लग जाएगा ।
ये लोग ऐसे ही बात करते रहते हैं, फिर क्लास शुरू हो जाती है, लंच में सब लोग पहले कैंटीन में जाते हैं, लेकिन आज कुछ भी अप्रिय घटना नहीं घटी। ऐसे ही एक-एक करके दिन गुजर रहे थे की एक दिन.....!

अब आगे:

अगले दिन सुबह के नौ बजे क्लास में सब लोग बैठे हुए पढ़ रहे थे! (आज कल वीर का भी मन प्रिया के बार-2 कहने से पढ़ने को होने लगा था) तो वीर भी मन लगा कर पढ़ रहा था।

तभी त्रिपाठी जी और स्पोर्ट्स कोच दोनो क्लास में आते हैं। त्रिपाठी जी और हमारे क्लास टीचर के बीच कुछ बात होती है, तभी कॉल्स टीचर बोलते हैं:

सभी छात्र ध्यान से सुनें, अगले हफ्ते कॉलेज टूर मनाली के लिए जा रहा है! जो भी छात्र अपना नाम लिखाना चाहता है तो उसे अपना नाम त्रिपाठी सर या कोच सर को दे देना !!
नाम देने का समय 4 दिन का है, उसके बाद नाम नहीं लिखा जाएगा,
नाम के साथ 5000/- रुपये की राशि भी जमा करवा देना।

सनी: क्यू वीरे हो जाए तक धीना धिन..

वीर: हो जाये बन्धु ! पर अकेले जाओगे? प्रिया को भी तो पूछ ले!!

सनी: ये हुई ना बात! बेरो थो मन्ने(पता था मुझे) तू उसके बिना कहीं नहीं जाने वाला..इसीलिए तो मैं बोलता हूं कि ये कुछ तो और है !(मुस्कुराते हुए). साले वो भी अकेली थोड़ी जाएगी, उसको बोलना कंचन को भी साथ ले ले।

वीर: हसते हुए : मैं भी जाने थो बेटा तू भी कुछ बोलेगो (मुस्कुराते हुए मुझे भी पता था बेटा कि तू भी कुछ तो बोलेगा!),
देख वो मैं नहीं कर सकता वो तो केवल प्रिया ही कर सकती है उसको मनाने का काम।
क्यू की वो उसकी दोस्त है, और मैंने तो ज्यादा बात भी नहीं की कभी उससे।

सनी: ये नहीं चलेगा बंधु! तेरे वाली तेरे साथ जाएगी तो मुझे भी कोई कंपनी मिलनी चाहिए।

वीर: (कुछ सोचते हुए) हम्म! समझ गया बेटा माजरा क्या है? तो आग इधर लगी है! और कमीना मुझे बोलता है, कि तुझे ये हुआ वो हुआ!!

सनी: अबे ऐसा कुछ नहीं है मैं तो कंपनी के लिए बोल रहा था और कुछ नहीं।

वीर: रहने दे बेटा, मुझसे होशियारी नहीं चलेगी! तेरी हर रग से वाकिफ हूं मैं, साथ-2 में बड़े हुए हैं भाई मुझसे कुछ नहीं छुप सकता तेरा।

सनी: (नजरे चुराके) छोड़ ना भाई तेरी तो आदत हो गई है झूठी टांग खींचने की।

वीर: चल जा क्या याद रखेगा छोड़ देता हूँ आज! पर ये मत समझना तू मुझे गोली दे सकता है।

ना किसी से दुश्मनी है, सबसे अपनी यारी है,
मेरा तो बादमें देखेंगे, पहले तेरी बारी है!
कोई भी ना टिक सके सामने, ऐसी अपनी यारी है,
कर ले बेटा अपने दिल की, काहे हिम्मत हारी है..”


चल लंच में प्रिया से बात करते हैं। तू उसको मनाने में मेरी मदद करदेना! पता नहीं जाएगा या नहीं.

सनी: भाई मानेगी कैसे नहीं हम मना लेंगे।

क्लास चलती रहती है, इसी तरह लंच हो जाता है! और वो दोनों दोस्त खड़े हो गए कैंटीन जाने के लिए ।।

वीर ने एक नज़र सुप्रिया की और देखा तो पाया कि वो वही अपनी सहेली के साथ ही बैठी थी।

वीर: प्रिया आज कैंटीन नहीं चल रही क्या घंटी लगे हुए इतना टाइम हो गया।

सुप्रिया: (रहस्यमय -मुस्कान) ना वीर आज मूड नहीं है तुम दोनों जाओ..

वीर: ?? यार अब ऐसा क्यों कर रही है? चल चुप-चाप तू नहीं जाएगी तो मैं भी नहीं जाऊँगा.

सुप्रिया: चलो श्रीमान ! जैसे मेरे बिना तो रात को खाना भी नहीं खाते होगे आप? हे..हे..हे....चलो क्या याद रखोगे किस रहीस से पाला पड़ा है तुम्हारा।

ये बोलते हुए खड़े हो जाती है और अपनी सहेली को साथ लेकर कैंटीन की और निकल जाती है वीर के साथ। सबलोग कैंटीन में बैठ कर कॉफी पी रहे थे..
तभी वीर बोलता है कि प्रिया टूर का क्या करना है?

प्रिया: मैं क्या बताऊं (मुस्कुराते हुए) तुम देख लो जाना है तो फोरम भर दो! मैं तो जाउंगी नहीं. वो क्या है ना घर पर भी काम रखता है, माँ के पास रुकना पड़ता है पापा भी मना कर देंगे वैसे।

वीर: यार प्रिया ऐसे मत कर ना चिकुड़ी!! तू नहीं जाएगी तो मैं भी नहीं जाऊँगा! ये पक्की बात है.

प्रिया: (हाथ पे मुक्का मरते हुए, झूठे गुस्से से) तुझे कितनी बार बोला है तोते. कि मुझे इस नाम से मत बुलाया कर यहां सबके सामने अब मैं बिल्कुल भी नहीं जाऊंगी। तू हर बार ऐसे ही रो धो कर मुझे मना लेता है।

वीर:

“काश तू पूछे मुझसे मेरा हाल-ए-दिल, मैं तुझे भी रुला दू तेरे सितम सुना सुना कर."

और

"कटी हुई टहनियां कहा छाव देती है,
हद से ज्यादा उम्मीदें हमेशा घाव देती है ..”

जा प्रिया तूने भी दिखाया दी अपनी दोस्ती अब ये वीर कभी तुझे मजबूर नहीं करेगा।

प्रिया: कर दी ना गंवारों वाली बात बस हमेंसा का यही रोना है तेरा! जब देखो ये रोने धोने वाली शायरी सुनाकर इमोशनल ब्लैकमेल करता रहता है,
(कुछ सोच के) ठीक है-ठीक है अब रो मत माँ को पटाऊँगी शाम को और वो बाबा से बात कर लेगी, तो शायद हो जाए।

वीर: ये हुई ना बात मेरी चीकू..! सोरी प्रिया वाली. वैसे कंचन को भी साथ ले-ले.

प्रिया: (कंचन की और मुस्कुराहट से देख कर) वो क्यों भला?


वीर: वो क्या है ना तेरा भी तो मन लगना चाहिए।

प्रिया: पर ये तो मना कर रही है!! ये टूर पर जाती नहीं है, मतलब इसको पसंद नहीं है।

ये सुनते ही सनी का मुंह उतर जाता है, जिसे देख कर वीर प्रिया को प्लीज वाला इशारा करता है और आंख से सनी की तरफ इशारा करता है जो प्रिया समझ जाती है।

प्रिया: सुन यार कंचन तू भी चल ना मजा आएगा, मैं भी वहा अकेली बोर हो जाऊंगी ये लोग तो अपनी मस्ती मजाक में लगे रहेंगे मैं किससे बात करूंगी?

कंचन: ठीक है प्रिया जब तुम इतना बोल ही रही हो तो मैं भी चलूंगी, आख़िर तू ही तो मेरी एकलौती दोस्त है।

इतना सुनते ही सनी जोश जोश में जोर से चिल्लाता है ।

सनी: हुर्रे..... :rock1:सभी उसकी तरफ देखने लगे,
तब उसे एहसास हुआ कि वो क्या कह रहा है। और तुरन्त माफ़ी माँगता है।
सॉरी मुझे बस इसी बात की खुशी हो रही है कि हमारा ग्रुप साथ में जा रहा है, इसके लिए।

ये देख कर कंचन को भी हंसी आती है जब सनी की नजर कंचन पर पड़ती है तो वो अपनी नजर झुका लेती है।


तो दोस्तों इस अपडेट को यहीं विराम देते हैं और अगले अपडेट में आपको मनाली की ख़ूबसूरती मिलेगी..

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जारी है...:writing:
Nice and superb update....
 

ellysperry

Humko jante ho ya hum bhi de apna introduction
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Update 10.

वीर: (मुस्कान के साथ) देखते हैं भाई थोड़े दिन रुक जा पता लग जाएगा ।
ये लोग ऐसे ही बात करते रहते हैं, फिर क्लास शुरू हो जाती है, लंच में सब लोग पहले कैंटीन में जाते हैं, लेकिन आज कुछ भी अप्रिय घटना नहीं घटी। ऐसे ही एक-एक करके दिन गुजर रहे थे की एक दिन.....!

अब आगे:

अगले दिन सुबह के नौ बजे क्लास में सब लोग बैठे हुए पढ़ रहे थे! (आज कल वीर का भी मन प्रिया के बार-2 कहने से पढ़ने को होने लगा था) तो वीर भी मन लगा कर पढ़ रहा था।

तभी त्रिपाठी जी और स्पोर्ट्स कोच दोनो क्लास में आते हैं। त्रिपाठी जी और हमारे क्लास टीचर के बीच कुछ बात होती है, तभी कॉल्स टीचर बोलते हैं:

सभी छात्र ध्यान से सुनें, अगले हफ्ते कॉलेज टूर मनाली के लिए जा रहा है! जो भी छात्र अपना नाम लिखाना चाहता है तो उसे अपना नाम त्रिपाठी सर या कोच सर को दे देना !!
नाम देने का समय 4 दिन का है, उसके बाद नाम नहीं लिखा जाएगा,
नाम के साथ 5000/- रुपये की राशि भी जमा करवा देना।

सनी: क्यू वीरे हो जाए तक धीना धिन..

वीर: हो जाये बन्धु ! पर अकेले जाओगे? प्रिया को भी तो पूछ ले!!

सनी: ये हुई ना बात! बेरो थो मन्ने(पता था मुझे) तू उसके बिना कहीं नहीं जाने वाला..इसीलिए तो मैं बोलता हूं कि ये कुछ तो और है !(मुस्कुराते हुए). साले वो भी अकेली थोड़ी जाएगी, उसको बोलना कंचन को भी साथ ले ले।

वीर: हसते हुए : मैं भी जाने थो बेटा तू भी कुछ बोलेगो (मुस्कुराते हुए मुझे भी पता था बेटा कि तू भी कुछ तो बोलेगा!),
देख वो मैं नहीं कर सकता वो तो केवल प्रिया ही कर सकती है उसको मनाने का काम।
क्यू की वो उसकी दोस्त है, और मैंने तो ज्यादा बात भी नहीं की कभी उससे।

सनी: ये नहीं चलेगा बंधु! तेरे वाली तेरे साथ जाएगी तो मुझे भी कोई कंपनी मिलनी चाहिए।

वीर: (कुछ सोचते हुए) हम्म! समझ गया बेटा माजरा क्या है? तो आग इधर लगी है! और कमीना मुझे बोलता है, कि तुझे ये हुआ वो हुआ!!

सनी: अबे ऐसा कुछ नहीं है मैं तो कंपनी के लिए बोल रहा था और कुछ नहीं।

वीर: रहने दे बेटा, मुझसे होशियारी नहीं चलेगी! तेरी हर रग से वाकिफ हूं मैं, साथ-2 में बड़े हुए हैं भाई मुझसे कुछ नहीं छुप सकता तेरा।

सनी: (नजरे चुराके) छोड़ ना भाई तेरी तो आदत हो गई है झूठी टांग खींचने की।

वीर: चल जा क्या याद रखेगा छोड़ देता हूँ आज! पर ये मत समझना तू मुझे गोली दे सकता है।

ना किसी से दुश्मनी है, सबसे अपनी यारी है,
मेरा तो बादमें देखेंगे, पहले तेरी बारी है!
कोई भी ना टिक सके सामने, ऐसी अपनी यारी है,
कर ले बेटा अपने दिल की, काहे हिम्मत हारी है..”


चल लंच में प्रिया से बात करते हैं। तू उसको मनाने में मेरी मदद करदेना! पता नहीं जाएगा या नहीं.

सनी: भाई मानेगी कैसे नहीं हम मना लेंगे।

क्लास चलती रहती है, इसी तरह लंच हो जाता है! और वो दोनों दोस्त खड़े हो गए कैंटीन जाने के लिए ।।

वीर ने एक नज़र सुप्रिया की और देखा तो पाया कि वो वही अपनी सहेली के साथ ही बैठी थी।

वीर: प्रिया आज कैंटीन नहीं चल रही क्या घंटी लगे हुए इतना टाइम हो गया।

सुप्रिया: (रहस्यमय -मुस्कान) ना वीर आज मूड नहीं है तुम दोनों जाओ..

वीर: ?? यार अब ऐसा क्यों कर रही है? चल चुप-चाप तू नहीं जाएगी तो मैं भी नहीं जाऊँगा.

सुप्रिया: चलो श्रीमान ! जैसे मेरे बिना तो रात को खाना भी नहीं खाते होगे आप? हे..हे..हे....चलो क्या याद रखोगे किस रहीस से पाला पड़ा है तुम्हारा।

ये बोलते हुए खड़े हो जाती है और अपनी सहेली को साथ लेकर कैंटीन की और निकल जाती है वीर के साथ। सबलोग कैंटीन में बैठ कर कॉफी पी रहे थे..
तभी वीर बोलता है कि प्रिया टूर का क्या करना है?

प्रिया: मैं क्या बताऊं (मुस्कुराते हुए) तुम देख लो जाना है तो फोरम भर दो! मैं तो जाउंगी नहीं. वो क्या है ना घर पर भी काम रखता है, माँ के पास रुकना पड़ता है पापा भी मना कर देंगे वैसे।

वीर: यार प्रिया ऐसे मत कर ना चिकुड़ी!! तू नहीं जाएगी तो मैं भी नहीं जाऊँगा! ये पक्की बात है.

प्रिया: (हाथ पे मुक्का मरते हुए, झूठे गुस्से से) तुझे कितनी बार बोला है तोते. कि मुझे इस नाम से मत बुलाया कर यहां सबके सामने अब मैं बिल्कुल भी नहीं जाऊंगी। तू हर बार ऐसे ही रो धो कर मुझे मना लेता है।

वीर:

“काश तू पूछे मुझसे मेरा हाल-ए-दिल, मैं तुझे भी रुला दू तेरे सितम सुना सुना कर."

और

"कटी हुई टहनियां कहा छाव देती है,
हद से ज्यादा उम्मीदें हमेशा घाव देती है ..”

जा प्रिया तूने भी दिखाया दी अपनी दोस्ती अब ये वीर कभी तुझे मजबूर नहीं करेगा।

प्रिया: कर दी ना गंवारों वाली बात बस हमेंसा का यही रोना है तेरा! जब देखो ये रोने धोने वाली शायरी सुनाकर इमोशनल ब्लैकमेल करता रहता है,
(कुछ सोच के) ठीक है-ठीक है अब रो मत माँ को पटाऊँगी शाम को और वो बाबा से बात कर लेगी, तो शायद हो जाए।

वीर: ये हुई ना बात मेरी चीकू..! सोरी प्रिया वाली. वैसे कंचन को भी साथ ले-ले.

प्रिया: (कंचन की और मुस्कुराहट से देख कर) वो क्यों भला?


वीर: वो क्या है ना तेरा भी तो मन लगना चाहिए।

प्रिया: पर ये तो मना कर रही है!! ये टूर पर जाती नहीं है, मतलब इसको पसंद नहीं है।

ये सुनते ही सनी का मुंह उतर जाता है, जिसे देख कर वीर प्रिया को प्लीज वाला इशारा करता है और आंख से सनी की तरफ इशारा करता है जो प्रिया समझ जाती है।

प्रिया: सुन यार कंचन तू भी चल ना मजा आएगा, मैं भी वहा अकेली बोर हो जाऊंगी ये लोग तो अपनी मस्ती मजाक में लगे रहेंगे मैं किससे बात करूंगी?

कंचन: ठीक है प्रिया जब तुम इतना बोल ही रही हो तो मैं भी चलूंगी, आख़िर तू ही तो मेरी एकलौती दोस्त है।

इतना सुनते ही सनी जोश जोश में जोर से चिल्लाता है ।

सनी: हुर्रे..... :rock1:सभी उसकी तरफ देखने लगे,
तब उसे एहसास हुआ कि वो क्या कह रहा है। और तुरन्त माफ़ी माँगता है।
सॉरी मुझे बस इसी बात की खुशी हो रही है कि हमारा ग्रुप साथ में जा रहा है, इसके लिए।

ये देख कर कंचन को भी हंसी आती है जब सनी की नजर कंचन पर पड़ती है तो वो अपनी नजर झुका लेती है।


तो दोस्तों इस अपडेट को यहीं विराम देते हैं और अगले अपडेट में आपको मनाली की ख़ूबसूरती मिलेगी..

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जारी है...:writing:
Lajawaab update bhai 👍🏻
 

Sanju@

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नोट: ईस कहानी के पात्रों के नाम काल्पनिक है.

कहानियां बहुत बनती हैं, लेकिन आज मै आपको एक सच्ची कहानी सुनाना चाहता हूँ। कहानी रघुवीर ओर सुप्रिया की .
एक शहर में दो दोस्त रहते थे । उनका नाम रघुवीर और सुप्रिया था। यह दोनों बहुत अच्छे दोस्त होते है। बचपन से एक दूसरे के साथ रहते थे। दोनो के घर पास में ही थे ।
रघुवीर बहुत आलसी होता है। रघुवीर कभी अपना काम टाइम पर नहीं करता, सारे काम सुप्रिया से करवाता था। सुप्रिया कर भी देती थी। रघुवीर को गाने सुनना और गेम खेलना, ओर शायरी करना बहुत पसंद था। और सुप्रिया पढाई में बहुत होशियार होती है। रघुवीर प्यार से सुप्रिया को प्रिया और सुप्रिया रघुवीर को प्यार से वीर बुलाती थी.
सुप्रिया को पढ़ाई करना और रघुवीर से बातें करना पसंद था। इन दोनों के बीच कोई नहीं आता था सब रघुवीर से डरते थे । ऐसे ही समय बीतता है और दोनों बड़े हो जाते हैं। रघुवीर के अंदर कोई सुधार न होता देख के रघुवीर के मम्मी पापा को बहुत चिंता रहती थी। डांटने पर सुप्रिया हर बार रघुवीर को बचा लेती थी। पर यह कब तक चलता दोनों कॉलेज आ गए थे। रघुवीर एक क्लास पीछे था सुप्रिया से क्युंकि रघुवीर फ़ैल हो गया था। रघुवीर के पापा ने रघुवीर को बहुत सुनाया और रघुवीर कुछ नहीं बोलता चुप-चाप अपने रूम में चला जाता था। उतने में सुप्रिया आ जाती है। और रघुवीर के पापा सुप्रिया से कहते है बेटा अब तू ही इसे समझा। तब सुप्रिया रघुवीर के पास जाती है और रघुवीर को पढाई करने के लिए बोलती है। सुप्रिया रघुवीर को कहती है आगे तुमने पढ़ाई नहीं की तो मैं तेरी कोई हेल्प नहीं कर सकती। रघुवीर बहुत सीरियस हो गया था पापा ने बहुत गुस्सा किया आज रघुवीर पर। रघुवीर ने सुप्रिया से कहा यार मुझसे नहीं होती पढ़ाई, सुप्रिया कहती है मैं तेरी हेल्प करुगी हम दोनों साथ में पढ़ाई करेंगे। तो रघुवीर मान जाता है। और हर रोज दोनों पढ़ाई करते। सुप्रिया रघुवीर को पढ़ाई में पूरी मदद करती।
जारी है...✍️
बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है
 

Sanju@

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सुप्रिया को आज भी कॉलेज का पहला दिन याद है उसकी रेगिंग हो रही थी (फ्लैश बैक): सुप्रिया आज वीर के साथ ना जा कर अपनी सहेली के साथ गई थी,
कॉलेज का पहला दिन और पहले दिन क्या हो सकता है कॉलेज में आप सब जानते हो। रेगिंग. कॉलेज के गेट के अंदर घुसते ही तीन लड़के ओर 2 सीनियर लड़किया खड़ी थी.. महेश, सुभाष, मोहित, मीनू, काव्या.
मोहित पास के ही गांव के सरपंच का नेता था। अपने बाप के पैसे का उपयोग करेंके गुंडागर्दी करता रहता था. कुछ ज्यादा ही घमंड था उसे अपने बाप के पैसे का। उसने घुसते ही सुप्रिया ओर उसकी सहेली को रोक लिया।
मोहित: "वाह आज से पहले ऐसा सुंदर और कसा हुआ माल पहले कभी नहीं देखा"

सुप्रिया से ए-लड़की इधर आ! क्या नाम है तेरा?
सुप्रिया: (हाथ जोड़ के नमस्ते) जी मै सुप्रीया और ये मेरी दोस्त कंचन है भैया जी.
मोहित: (हँसते हुए) अबे बाहर गाँव से आई है क्या सैंया को भैया बुला रही है?
सुप्रिया: ये क्या बदतमीजी है? मैं तुम्हारी शिकायत करूंगी।
मोहित: जा कर दे. या चाहे तो अपने बाप को भी बुला ले तेरा उद्धार तो मैं ही करुंगा छमिया। हाये क्या चीज़ है... साला हाथ लगाओ तो हाथ जले या मुँह लगाओ तो मुँह जले ऐसा गरम माल। चल एक डील करते हैं तू मेरी गर्लफ्रेंड बन जा,
दोनों मिल के मजे करेंगे!! और फिर वैसे भी तू इतनी सुंदर है अच्छी लगी तो सादी भी कर लेंगे।
सुप्रिया: बदतमीज.. थप्पड़ मारने को आगे बड़ी..
मोहित: हाथ पकड़ते हुए अरे मेरी रानी इतनी गरमी।
तुझे छेड़ने में मजा आएगा। ये बोलके उसके दोनो हाथ पकड़ लेता है.
तभी वहा उनका एक टीचर आता है त्रिपाठी सर
त्रिपाठी सर : ये क्या हो रहा है? छोड़ो उस लड़की को.
मोहित: निकल ले बहनचोद. भूल गया क्या सेकंड ईयर में मेरे बाप ने क्या हाल किया था तेरा?
त्रिपाठी मुँह झुकाए चुप-चाप निकल जाता है।
मोहित: अब तुझे मुझसे कौन बचाएगा? एक काम करो दोनों लड़की अपना दुपट्टा उतारो या सामने वाली बेंच पर रख दो।
सुप्रिया: और उसकी सहेली दोनों रोने लगती है..
और मोहित उसको चुप कराने के बहाने उसके कंधे पर जबरदस्ती हाथ रखता है।
तभी उसके पीछे... से आवाज आती है.
हाथ हटा ले खजूर वरना उसी हाथ से धोयेगा और उसी हाथ से खाना पड़ेगा।
मोहित
...?????

जारी है :writing:
फ्लैश बैक बहुत ही शानदार है सुप्रिया अपनी सहेली के साथ कॉलेज गई और रैगिंग हो गई
सरपंच का लौंडा और उसके दोस्त तो बहुत ही बदतमीज़ी करने लग गए हैं अब ये सब पीटने वाले हैं
 
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Sanju@

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Update 3
अब आगे:
मोहित घूम के देखा तो सामने एक 6 फिट 2 इंच का हट्टा कट्टा लड़का खड़ा था।
मोहित: कौन है बे तू?

रघुवीर: वैसे तो मेरा नाम रघुवीर है पर तू मुझे अपना बाप भी समझ सकता है।
मोहित: अबे साले जनता भी है किस से बात कर रहा है? ऐसा गायब कर दूंगा जैसे गधे के सिर से सीग.


रघुवीर: “लहजे में बत्तमीजी और चेहरे पर नकाब लिए फिरते है, जिनके खुद के खाते ख़राब हैवो मेरा हिसाब लिए फिरते है”
और सुन: “हाथ में खंजर ही नहीं आँखों में पानी भी चाहिए हमें दुश्मन भी थोड़ा खानदानी चाहिए”

क्यू बे चमन साफ-सफाई का काम करता है क्या? अबे झाड़ू तो साथ में रखा कर ताकि पता रहे सबको। मोहित: साले शिवचरण चौधरी का नाम सुना है क्या? उनका लड़का हू मै रातो रात गायब हो जाएगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा। और जिसके लिए तू मुझसे जुबान जोरी कर रहा है उसको तो मैं ही भोगूंगा।

इतना सुनते ही रघुवीर अपना आपा खोने लगता है और गुस्से से उसका आखे लाल हो जाती है।
वो धीरे-धीरे मोहित की तरफ बढ़ने लगता है।
रघुवीर: बस कुत्ते, बहुत बोल लीया तूने, अगर तू मुझे कुछ कहता तो मैं तुझे माफ कर देता लेकिन तुमने जिसे बोला है उसके लिए तुम जैसे 100 को भी मार सकतऻ हू मैं.
इतना बोलके रघुवीर ने मोहित की गर्दन पकड़ के उसे हवा में उठा दिया ओर सामने की दीवार पर जोर से दे मारा. उसने जैसे ही उसने उठने की कोसिस की तभी उसके पेट में जोर की लात पड़ी और मुंह से खून की उल्टी निकली।
मोहित की हालत खराब होने लगी थी या रघुवीर उसे किसी की भी परवाह किए बिना मारे जा रहा था।
तभी किसी ने उसका हाथ पकड़ा! जब रघुवीर ने पलट के देखा तो वो कोई नहीं बल्कि सुप्रिया थी.
सुप्रिया: छोड़ उसे वीर, वो मर जायेगा! दिख नहीं रहा क्या कितना खून बह रहा है उसका?
रघुवीर: ऐसे कैसे छोड़ दु प्रिया? जब तक इसकी गांड नहीं तोड़ता ठीक से तब तक नहीं छोडूंगा आज।
सुप्रिया: छोड़ उसे वीर तुझे मेरी कसम है!!
(वीर गुस्से में) बस प्रिया बस कुछ भी करती पर अपनी कसम तो ना देती। रघुवीर गुस्से से: तुमने मुझे रोक के अच्छा नहीं किया प्रिया। और तू सुन बे लपरझंडिस. आज के बाद अगर इसके आस-पास भी नजर आया तो वो दिन तेरा अंतिम दिन होगा। ये कह के उसकी तरफ़ थूकता हुआ वीर वहाँ से चला जाता है। सुप्रिया और कंचन दोनो भी उसके पीछे क्लास की और निकल जाती है।
क्लास शुरू हुई पहला पीरियड शुरू हुआ टीचर ने सबका इंट्रो लिया।

इसी तरह क्रम से सब शिक्षक आते गए सबका एक दूसरे से परिचय होता रहा ज्यादा कुछ पढ़ाई तो नहीं हुई पर पहला दिन ऐसे ही बीत गया।
अगले दिन जब कॉलेज में गए तो सब शांत थे जब सब वीर को अलग नजर से देख रहे थे कुछ लड़कियां थी जो उसे देख कर मुस्कुरा सकती थी और आपस में खुसर-फुसर कर रही थी।
जो कि सुप्रिया के मन को नहीं भा रहा था। 😀
मोहित कल सुबह की घटना के बाद से कहीं दिखाई नहीं दिया था।
हम लोग क्लास की तरफ जा रहे थे तो रास्ते में त्रिपाठी सर मिले वो रघुवीर को अपनी तरफ आने का इशारा किया और एक और चल दिये।
त्रिपाठी कैंटीन के बाहर बेंच पर बैठ कर: आओ रघुवीर यहां बैठो मेरे पास। रघुवीर: सर, कुछ जरूरी काम था क्या?
त्रिपाठी: कुछ खास नहीं, बस तुमसे कुछ बातें करने का मन किया तो यहां ले आया। रघुवीर: कहिये सर, मैं क्या सेवा कर सकता हूँ आपकी?
त्रिपाठी: देखो रघुवीर सेवा कुछ नहीं है, मैं तो कल की हुई घटना के बारे में बात करना चाहता था। देखो कल जो भी हुआ, वो नहीं होना चाहिए था इसमे कोई शक नहीं, और मेरी व्यक्तिगत राय है कि उसे (मोहित) को जो तुमने पीटा है वो उसको सबक सिखाने के लिए अच्छा भी है।
लेकिन मैं तुमसे ये कहूंगा कि तुम जरा सावधान रहना! वो किसी भी हद तक नीचे गिर सकता है !!

रघुवीर: सर मैं आपकी बात ध्यान रखूंगा, लेकिन एक बात जरूर पूछना चाहूंगा कि आप उससे डरते क्यों हैं? और कृपया मेरी बात का बुरा मत मानना।
त्रिपाठी: इसके पीछे मेरी मजबूरी है बेटे, अगर मैं तुझे बता दूं और तुमने किसी को बता दिया तो मेरी बदनामी हो जाएगी।

जारी है...✍️
हीरो ने मोहित की जबरदस्त ठुकाई कर दी वो तो प्रिया ने कसम देकर मोहित को बचा लिया वरना मोहित तो गया सही है प्यारा ऐसा ही होता है किसी के लिए जान दे सकते हो तो किसी की जान भी ले सकते हैं sir आग खुश हैं अब देखते हैं sir की डरने की क्या वजह है???
 

Sanju@

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Update 4
रघुवीर: सर मैं आपकी बात ध्यान रखूंगा, लेकिन एक बात जरूर पूछना चाहूंगा कि आप हमसे डरते क्यों हैं? और कृपया मेरी बात का बुरा मत मानना।
त्रिपाठी: इसके पीछे मेरी मजबूरी है बेटे, अगर मैं तुझे बता दूं और तुमने किसी को बता दिया तो मेरी बदनामी हो जाएगी।
अब आगे:
रघुवीर: सर क्या मजबूरी है कृपा आप मुझे बताएं, और अगर मैं आपकी कुछ मदद कर सकूं तो अपना आपको धन्य समझूंगा। त्रिपाठी: नहीं बेटे ऐसी कोई बात नहीं, पर तुम मुझे वचन दो कि ये बात तुम तक रहेगी।
रघुवीर: सर मैं वादा करता हूं कि आप जो भी मुझसे कहोगे वो बात किसी को पता नहीं लगेगी।

त्रिपाठी: देखो बेटा बात 4-5 साल पुरानी है, एक बार वो लड़का (मोहित) किसी लड़की को पकड़ के कॉलेज की छत पर ले गया था,
और उसकी इज्जत पर हाथ डाल रहा था, उसका समय मै वहा सीढीयों के पास से गुजर रहा था !
की मैंने किसी की घुट्टी-घुटी चीख सुनी, मैंने आजू-बाजू के कमरो को चैक करके देखा, और फिर मुझे फिर से वही आवाज सीढीयों के आस-पास सुनायी दी, तो मुझे कुछ शक हुआ और मैं छत पर चला गया वहा पर मुझे वो आवाज और ज्यादा साफ सुनायी देने लगी, मैंने इधर- उधर देखने लगा तो छत पर पानी की बड़ी टंकी बनी हुई थी उसके पीछे मुझे मोहित किसी लड़की के ऊपर चढ़ा हुआ मिला और एक हाथ से उसने उस लड़की का मुंह बंद करने के लिए कोसिस कर रहा था। लड़की के कपडे अस्त व्यस्त थे और वो रो रही थी,
तभी मैंने पीछे से आवाज लगाई: कोन है वाहा और ये क्या हो रहा है? मोहित: पलट कर देखते हुए सर, आप यहां से चले जाओ सर,
त्रिपाठी: निर्लज्ज तुम्हें शर्म नहीं आती? छोड़ दे लड़की को!!
मोहित: कुछ भी कर लो त्रिपाठी सर, आज बड़ी मुश्किल से हाथ लगी है ये साली ने बहुत तड़पाया है,
त्रिपाठी: बेशर्म अपने गुरु की कोई शर्म नहीं तुझे? ये कहते हुए उसका हाथ पकड़ के उठाया और खीच के एक थप्पड़ मारा।
मोहित: बस त्रिपाठी बस तूने अपनी हद पार कर दी है, तू जानता नहीं है मैं कौन हूं? वरना तेरी इतनी हिम्मत ना होती!!
आज तक जिसने भी मुझे हाथ लगाया वो अपनी पावो पर चलके अपने घर नहीं गया! मेरा बाप बाहुबली सरपंच है, तुझ जैसे पता नहीं कितनों को पेला है हमने,
और मेरे को तुमने थप्पड़ मारा तुझ जैसा एक मामुली टीचर की इतनी हिम्मत? इसका परिणाम तुझे भुगतान पड़ेगा!!
त्रिपाठी: अब तू यहां से निकल ले और सीधा प्रिंसिपल के ऑफिस में मिल क्यों कि मैं वही जा रहा हूं! नहीं तो अभी आवाज लगा कर सभी छात्रों और पुलिस को सूचना देता हूं त्रिपाठी: अब तू यहां से निकल ले और सीधा प्रिंसिपल के ऑफिस में मिल क्यों कि मैं वही जा रहा हूं।

मोहित गुस्से से त्रिपाठी की और देखता हुआ वहां से चला जाता है रास्ते में उसके दोस्त मिलते हैं जिसके साथ वो कैंटीन में जाके बैठता है, जहां थोड़ी देर में एक चपरासी आता है!
चपरासी: मोहित भैया आपको प्रिंसिपल बुला रहे हैं। मोहित: अरे यार (ये भो...ला पहुच गया लगता है वहा! उसको तो बाद में देखता हूँ!) चलो मैं आ रहा हूँ।
ये बोल कर वह प्रिंसिपल ऑफिस की तरफ चला जाता है। मोहित प्रिंसिपल ऑफिस के बाहर पहुंच के गेट खट-खटाता है।
मोहित: मैं अन्दर आ सक्ता हूँ सर? प्रिंसिपल: हा तुम अंदर आसकते हो! मोहित जैसा ही अंदर जाता है तो वहां उसे त्रिपाठी जी ओर वो लड़की, दोनों खड़े हुए दिखाते हैं।
मोहित : जी सर आपने बुलाया मुझे? प्रिंसिपल: हाँ ये मैं क्या सुन रहा हूँ मोहित? क्या ये सच है कि तुमने इस लड़की की इज्जत पर हाथ डाला है? मोहित: नहीं सर ऐसी कोई बात नहीं है! त्रिपाठी जी और ये लड़की झूठ बोल रही है!! प्रिंसिपल: पर मैंने तो त्रिपाठी सर का नाम भी नहीं लिया? इसका मतलब इनलोगो ने जो भी कहा है वो सब सच है!! मोहित: नहीं सर, मैं बस छत पर घूमने गया था, ओर ये लड़की मुझे वहां मिली, ये मुझे पैसे के बदले गलत काम करने को बोल रही थी, मेरे मना करने पर उसने शोर मचाने की धमकी दी, जब मैंने नहीं माना तो इसने सच में शोर मचाना सुरू कर दिया! इसने सोचा कि इसे ऐसा करने से मैं इसे पैसे दे दूंगा. ईतने में त्रिपाठी सर आ गये।

प्रिंसिपल: खामोश!! तुम क्या मुझे बेवकूफ समझते हो अगर मैं चाहूं तो अभी के अभी तुम्हें इस कॉलेज से निकाल सकता हूं, और तुम्हारे खिलाफ उत्पीड़न का मामला भी बन सकता है।
पर मेरे लिए ऐसा केवल इस लड़की के कारण से नहीं कर रहा हूँ! क्यू की इसने मुझे मना किया है और कहा है कि ये एक गरीब मजदूर की बेटी है और इज्जत ही इसके लिए सब कुछ है। ये नहीं चाहती कि इसका नाम किसी भी प्रकार के काम में आए जो अनुचित हो।

जारी है...✍️
बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है लगता है लड़की की इज्जत का मामला है
 
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Thanks sanju bhai :hug: Kaha busy rehte ho aajkal? Maine pichli story me bhi aapko yad kiya par aap nahi aaye.
Aur is story me bhi 4 update baad aaye ho:D
Raj भाई busy था टाइम ही नही मिल पा रहा है पिछली स्टोरी नही पढ़ने के लिए sorry टाइम मिला तो जरूर पढूंगा
 
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