• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Thriller The cold night (वो सर्द रात) (completed)

🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
50,448
84,829
354
🤭What an story yaar 🤔 starting thodi si ha thodi si ajib thi ...than its beacoms into a suspance....now this into a love great idea great writer
Great vareat kuch nahi hai yar it's not too good but okay, 👍 you can say, because yaha pe ache achhe writer aur unki story hai,avsji HalfbludPrince aka foji, Werewolf aur bhi kai naam hai, mai to inse seekh raha hu ki kuch likh saku bas, wase tumhare muh se sunke accha laga ki tumhe pasand aai ye stori:D. Thank you so so much for your amazing support and review ❤️ 🧡❣️💗💕💓💖
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
50,448
84,829
354
Raj_sharma भाई जी, लीजिए - हम भी आपकी कहानी पर पहुँच ही गए। :)

पहले छः अपडेट शायद मुख्य पात्रों को जमाने में लग गए : रोमेश - सीमा, और विजय - वैशाली। इन्ही पात्रों के इर्द गिर्द चलेगी कहानी। ये हालिया दो अपडेट ही शायद मुख्य कहानी का हिस्सा हैं। तो उसी की बातें करते हैं।

सावंत राव को अपनी हत्या होने का अंदेशा है, और सबसे पहले चीफ़ मिनिस्टर जनार्दन नागा रेड्डी पर ही शक जाता है। लेकिन जैसा कि अनगिनत कहानियाँ पढ़ने से हमको ट्रेनिंग मिली है कि जिस पर ऑब्वियस शक़ हो, वो खूनी नहीं होता - तो उस लॉजिक से मुख्यमंत्री जी शायद ये खून न करें/करवाएँ। लेकिन रोमेश के हिसाब से सावंत का मर्डर मुख्यमंत्री ही करवाने वाला है। ख़ैर, तो बचे, चन्दन दादा और मेधा-रानी। अभी उनकी तरफ़ से पत्ते फेंके जाने बाकी हैं, इसलिए कुछ कहा नहीं जा सकता। सबसे बड़ी बात, क़त्ल किसका होगा, वो नहीं पता। अंदेशा होना एक अलग बात है, लेकिन टार्गेट होना अलग। क्या पता इतना शोर मचा कर मिस्टर राव ही किसी को अपने रास्ते से हटा देना चाहते हों?

रोमेश की प्रसिद्धि बात का बतंगड़ होने के कारण हुई है - जिसको उसने छुड़ाया, वो पहले से ही बेगुनाह था। यह बात लोगों को समझ आनी चाहिए। गुनहगार को वो नहीं छुड़ाता शायद। लेकिन जो भी केस उसको अप्प्रोच कर रहे हैं, वो सभी गुनहगार लग रहे हैं। क़रीमुल्लाह ने खून किया, इसलिए रोमेश उसका केस नहीं लेना चाहता। यह बात सीमा ने भी साफ़ कर दी। राव वाले केस में अभी तक मर्डर हुआ ही नहीं है, लिहाज़ा कोई मुल्ज़िम/मुज़रिम है ही नहीं।

सीमा इतनी ख़र्चीली क्यों है, समझ में नहीं आया। शौक़ होना अलग बात है, फ़िज़ूलख़र्ची अलग! और अगर उसकी नौकरी छूट गई थी, तो अन्य नौकरियाँ भी मिल सकती हैं। भूतपूर्व एयरहोस्टेस को हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में नौकरी मिलना कठिन नहीं होना चाहिए। उसके कज़िन से रोमेश की मुलाकात भी नहीं हुई है, जो बड़े ही रहस्य की बात है। देर रात क्लब में जाना… थोड़ा पेंचीदा चरित्र लग रहा है सीमा का। हाँलाकि सामान्य तौर पर देखने पर वो अच्छी, और मित्रवत महिला मालूम होती है। तो चक्कर क्या है? क्या वो कोई हाई-क्लास प्रॉस्टिट्यूट है? लेकिन ऐसे रहस्य छुपाने कठिन हैं, ख़ास कर जब विजय स्वयं पुलिस में है।

वैशाली का विजय की मंगेतर बनने का सफर बड़ा ही तेज रहा। कोई संकेत ही नहीं मिला। इसलिए कहानी का वो पहलू भी इंटरेस्टिंग है। लेकिन चूंकि कहानी थ्रिलर है, तो शायद इन बातों पर ध्यान न गया हो।

न जाने क्यों लगता है कि कोई गुनाह ‘घर’ में ही होगा/होने वाला है।

सबसे अच्छी बात मुझे जो पसंद आई वो है कहानी की रफ़्तार। घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ता है। जो ठीक भी है। हर बात का डिटेल्ड वर्णन करना ज़रूरी नहीं है। सधी हुई भाषा है, तीखा (शार्प) लेखन है। पढ़ने में आनंद आता है, और आगे के लिए रूचि बनती है।

बहुत बढ़िया Raj_sharma भाई! :applause: :applause:
सबसे पहले आपका एक बार फिर से स्वागत है:welcome:और दूसरे आपके इस प्यारे रिव्यू के लिए आभार!! जैसा की मै पहले भी कहता आया हूं की मै कोई लेखक नही हूं, अपितु मुझे पढना ज्यादातर पसंद है, मे इच्छुक था कि कुछ लिखूं तो लिखना शुरु कर दिए, अब वो सही है या गलत ये भी आप जैसे दिग्गज निर्णय लें। वैसे जैसा की आपने कहा ये संभव है, कि कोई अपराध धर मे भी हो जाए। रही बात तीव्रता की तो आप सबका सहयोग रहा तो, अवश्य ही हम इस कहानी को शीघ्र ही पूर्ण कर लेंगे भाई,
फिर से एक बार इस रिव्यू के लिए धन्यवाद ❣:hug:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
50,448
84,829
354

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
50,448
84,829
354
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

Rekha rani

Well-Known Member
2,556
10,906
159
# 8

रोमेश घर पर ही था , शाम हो गयी थी। वह आज सीमा के साथ किसी अच्छे होटल
में डिनर के मूड में था, उसी समय फोन की घंटी बज उठी, फोन खुद रमेश ने उठाया।

''एडवोकेट रोमेश सक्सेना स्पीकिंग।''

''नमस्ते वकील साहब, हम माया दास बोल रहे हैं।''

''माया दास कौन?''

''आपकी श्रीमती ने कुछ बताया नहीं क्या, हम चीफ मिनिस्टर जे.एन.साहब के पी.ए. हैं।''

''कहिए कैसे कष्ट किया?''

"कष्ट की बात तो फोन पर बताना उचित नहीं होगा, मुलाकात का वक्त तय कर लिया
जाये, आज का डिनर हमारे साथ हो जाये, तो कैसा हो?"

"क्षमा कीजिए, आज तो मैं कहीं और बिजी हूँ।''

''तो फिर कल का वक़्त तय कर लें, शाम को आठ बजे होटल ताज में दो सौ पांच नंबर सीट हमारी ही है, बारह महीने हमारी ही होती है।''

रोमेश को भी जे.एन. में दिलचस्पी थी , उसे कैलाश वर्मा का काम भी निबटाना था , यही सोचकर उसने हाँ कर दी।

''ठीक है, कल आठ बजे।''

"सीट नंबर दो सौ पांच ! होटल ताज!'' माया दास ने इतना कहकर फोन कट कर दिया।

कुछ ही देर में सीमा तैयार होकर आ गई। बहुत दिनों बाद अपनी प्यारी पत्नी के साथ वह बाहर डिनर कर रहा था, वह सीमा को लेकर चल पड़ा। डिनर के बाद दोनों काफी देर तक जुहू पर घूमते रहे। रात के बारह बजे कहीं जा कर वापसी हो पायी।
अगले दिन वह माया दास से मिला।
माया दास खद्दर के कुर्ते पजामे में था, औसत कद का सांवले रंग का नौजवान था,
देखने से यू.पी. का लगता था, दोनों हाथों में चमकदार पत्थरों की 4 अंगूठियां पहने हुए था और गले में छोटे दाने के रुद्राक्ष डाले हुए था।

"हाँ , तो क्या पियेंगे? व्हिस्की, स्कॉच, शैम्पैन?''

"मैं काम के समय पीता नहीं हूँ, काम खत्म होने पर आपके साथ डिनर भी लेंगे, कानून की भाषा के अंतर्गत जो कुछ भी किया जाये, होशो -हवास में किया जाये, वरना कोई एग्रीमेंट वेलिड नहीं होता।"

"देखिये, हम आपसे एक केस पर काम करवाना चाहते हैं।" माया-दास ने केस की बात सीधे ही शुरू कर दी।

''किस किस्म का केस है?"

"कत्ल का।"

रोमेश सम्भलकर बैठ गया।

"वैसे तो सियासत में कत्लो-गारत कोई नई बात नहीं। ऐसे मामलों से हम लोग सीधे खुद ही निबट लेते हैं, मगर यह मामला कुछ दूसरे किस्म का है। इसमें वकील की जरूरत पड़ सकती है। वकील भी ऐसा, जो मुलजिम को हर रूप में बरी करवा दे।"

"और वह फन मेरे पास है।''

''बिल्कुल उचित, जो शख्स इकबाले जुर्म के मुलजिम को इतने नाटकीय ढंग से बरी करा सकता है, वह हमारे लिए काम का है। हमने तभी फैसला कर लिया था कि केस आपसे लड़वाना होगा।''

"मुलजिम कौन है? और वह किसके कत्ल का मामला है?"

''अभी कत्ल नहीं हुआ, नहीं कोई मुलजिम बना है।''

''क्या मतलब?" रोमेश दोबारा चौंका।

मायादास गहरी मुस्कान होंठों पर लाते हुए बोला,

"कुछ बोलने से पहले एक बात और
बतानी है। जो आप सुनेंगे, वह बस आप तक रहे। चाहे आप केस लड़े या न लड़े।"

''हमारे देश में हर केस गोपनीय रखा जाता है, केवल वकील ही जानता है कि उसका मुवक्किल दोषी है या निर्दोष, आप मेरे पेशे के नाते मुझ पर भरोसा कर सकते हैं।''

''तो यूं जान लो कि शहर में एक बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति का कत्ल जल्द ही होने जा रहा है, और यह भी कि उसे कत्ल करने वाला हमारा आदमी होगा। मरने वाले को भी पूर्वाभास है, कि हम उसे मरवा सकते हैं। इसलिये उसने अपने कत्ल के बाद का भी जुगाड़ जरूर किया होगा। उस वक्त हमें आपकी जरूरत पड़ेगी। अगर पुलिस कोई दबाव में आकर पंगा ले, तो कातिल अग्रिम जमानत पर बाहर होना चाहिये। अगर उस पर मर्डर
केस लगता है, तो वह बरी होना चाहिये। यह कानूनी सेवा हम आपसे लेंगे, और धन की सेवा जो आप कहोगे, हम करेंगे।''

"जे.एन. साहब ऐसा पंगा क्यों ले रहे हैं?"

"यह आपके सोचने की बात नहीं, सियासत में सब जायज होता है। एक लॉबी उसके खिलाफ है, जिससे उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने का प्रपंच चलाया हुआ है।

''एम.पी . सावंत !"

माया-दास एकदम चुप हो गया,उसके चेहरे पर चौंकने के भाव उभरे, ललाट की रेखाए तन गई, परंतु फिर वह जल्दी ही सामान्य होता चला गया।

''पहले डील के लिए हाँ बोलो, केस लेना है? और रकम क्या लगेगी। बस फिर पत्ते खोले जायेंगे, फिर भी हम कत्ल से पहले यह नहीं बतायेंगे कि कौन मरने वाला है।''

माया दास ने कुर्ते की जेब में हाथ डाला और दस हज़ार की गड्डी निकालकर बीच मेज पर रख दी, ''एडवांस !''

"मान लो कि केस लड़ने की नौबत ही नहीं आती।"

"तो यह रकम तुम्हारी।"

"फिलहाल यह रकम आप अपने पास ही रखिये, मैं केस हो जाने के बाद ही केस की स्थिति देखकर फीस तय करता हूँ।"

"ठीक है, हमें कोई एतराज नहीं। अगले हफ्ते अखबारों में पढ़ लेना, न्यूज़ छपने के तुरंत बाद ही हम तुमसे संपर्क करेंगे।''

डिनर के समय माया दास ने इस संबंध में कोई बात नहीं की। वह समाज सेवा की बातें करता रहा, कभी-कभी जे.एन. की नेकी पर चार चांद लगाता रहा।

"कभी मिलाएंगे आपको सी.एम. से।"

"हूँ",
मिल लेंगे। कोई जल्दी भी नहीं है।"

रमेश साढ़े बारह बजे घर पहुँचा। जब वह घर पहुँचा, तो अच्छे मूड में था, उसके कुछ किए बिना ही सारा काम हो गया था। उसने माया दास की आवाज पॉकेट रिकॉर्डर में टेप कर ली थी, और कैलाश वर्मा के लिए इतना ही सबक पर्याप्त था। यह बात साफ हो गई कि सावंत के मर्डर का प्लान जे.एन. के यहाँ रचा जा रहा है। उसकी बाकी की पेमेंट खरी हो गई थी।

वह जब चाहे, यह रकम उठा सकता था। उसे इस बात की बेहद खुशी थी।
जब वह बेडरूम में पहुँचा, तो सीमा को नदारद पा कर उसे एक धक्का सा लगा। उसने नौकर को बुलाया।

''मेमसा हब कहाँ हैं?"

"वह तो साहब अभी तक क्लब से नहीं लौटी।''

"क्लब ! क्लब !! आखिर किसी चीज की हद होती है, कम से कम यह तो देखना चाहिये कि हमारी क्या आमदनी है।''

रोमेश ने सिगरेट सुलगा ली और काफी देर तक बड़बड़ाता रहा।

"कही सीमा , किसी और से?'' यह विचार भी उसके मन में घुमड़ रहा था, वह इस विचार को तुरंत दिमाग से बाहर निकाल फेंकता, परन्तु विचार पुनः घुमड़ आता और उसका सिर पकड़ लेता।

निसंदेह सीमा एक खूबसूरत औरत थी। उनकी मोहब्बत कॉलेज के जमाने से ही परवान चढ़ चुकी थी। सीमा उससे 2 साल जूनियर थी। बाद में सीमा ने एयरहोस्टेस की नौकरी कर ली और रोमेश ने वकालत। वकालत के पेशे में रोमेश ने शीघ्र ही अपना सिक्का जमा लिया। इस बीच सीमा से उसका फासला बना रहा, किन्तु उनका पत्र और टेलीफोन पर संपर्क बना रहता था।

रोमेश ने अंततः सीमा से विवाह कर लिया, और विवाह के साथ ही सीमा की नौकरी भी छूट गई। रमेश ने उसे सब सुख-सुविधा देने का वादा तो किया, परंतु पूरा ना कर सका। घर-गृहस्थी में कोई कमी नहीं थी, लेकिन सीमा के खर्चे दूसरे किस्म के थे। सीमा जब घर लौटी, तो रात का एक बज रहा था। रोमेश को पहली बार जिज्ञासा हुई कि देखे उसे छोड़ने कौन आया है? एक कंटेसा गाड़ी उसे ड्रॉप करके चली गई। उस कार में कौन था, वह नजर नहीं आया।

रोमेश चुपचाप बैड पर लेट गया।
सीमा के बैडरूम में घुसते ही शराब की बू ने भी अंदर प्रवेश किया। सीमा जरूरत से ज्यादा नशे में थी। उसने अपना पर्स एक तरफ फेंका और बिना कपड़े बदले ही बैड पर धराशाई हो गई।

''थोड़ी देर हो गई डियर।'' वह बुदबुदाई,

''सॉरी।''

रोमेश ने कोई उत्तर नहीं दिया।
सीमा करवट लेकर सो गई।

सुबह ही सुबह हाजी बशीर आ गया। हाजी बशीर एक बिल्डर था, लेकिन मुम्बई का बच्चा-बच्चा जानता था, कि हाजी का असली धंधा तस्करी है। वह फिल्मों में भी फाइनेंस करता था, और कभी-कभार जब गैंगवार होती थी, तो बशीर का नाम सुर्खियों में आ जाता था।

''मैं आपका काम नहीं कर सकता हाजी साहब।"

"पैसे बोलो ना भाई ! ऐसा कैसे धंधा चलाता है? अरे तुम्हारा काम लोगों को छुड़ाना है। वकील ऐसा बोलेगा, तो अपन लोगों का तो साला कारोबार ही बंद हो जायेगा।"
वह बात कहते हुए हाजी ने ब्रीफकेस खोल दिया।

''इसमें एक लाख रुपया है। जितना उठाना हो , उठा लो। पण अपुन का काम होने को मांगता है। करी-मुल्ला नशे में गोली चला दिया। अरे इधर मुम्बई में हमारे आदमी ने पहले कोई मर्डर नहीं किया। मगर करी-मुल्लाह हथियार सहित दबोच लिया गया वहीं के वहीं। और वह क्या है, गोरेगांव का थाना इंचार्ज सीधे बात नहीं करता। वरना अपुन इधर काहे को आता।''

''इंस्पेक्टर विजय रिश्वत नहीं लेता।"

''यही तो घपला है यार! देखो, हमको मालूम है कि तुम छुड़ा लेगा। चाहे साला कैसा ही मुकदमा हो।''

''हाजी साहब, मैं किसी मुजरिम को छुड़ाने का ठेका नहीं लेता, उसको अंदर करने का काम करता हूँ।"

"तुम पब्लिक प्रॉसिक्यूटर तो है नहीं।"

"आप मेरा वक्त खराब न करें, किसी और वकील का इंतजाम करें।"

"ये रख।"

उसने ब्री फकेस रोमेश की तरफ घुमाया।
रोमेश ने उसे फटाक से बंद किया,

''गेट आउट! आई से गेट आउट!!''

''कैसा वकील है यार तू।'' बशीर का साथी गुर्रा उठा, “बशीर भाई इतना तो किसी के आगे नहीं झुकते, अबे अगर हमको खुंदक आ गई तो।"

बशीर ने तुरंत उसको थप्पड़ मार दिया।

''किसी पुलिस वाले से और किसी वकील से कभी इस माफिक बात नहीं करने का। अपुन लोगों का धंधा इन्हीं से चलता है। समझा !'' हाजी ने ब्रीफकेस उठा लिया,

''रोमेश भाई, घर में आई दौलत कभी ठुकरानी नहीं चाहिये। पैसा सब कुछ होता है, हमारी नसीहत याद रखना।"

इतना कहकर हाजी बाहर निकल गया। उसके जाते ही सीमा, रोमेश के पास टपक पड़ी।

"एक लाख रुपये को फिर ठोकर मार दी तुमने रोमेश ! वह भी हाजी के।"

''दस लाख भी न लूँ।'' रोमेश ने सीमा की बात बीच में काटते हुए कहा ।

''तुम फिर अपने आदतों की दुहाई दोगे, वही कहोगे कि किसी अपराधी के लिए केस नहीं लड़ना। तलाशते रहो निर्दोषों को और करते रहो फाके।"

"हमारे घर में अकाल नहीं पड़ रहा है कोई। सब कुछ है खाने पहनने को। हाँ अगर कमी है, तो सिर्फ क्लबों में शराब पीने की।''

"तो तुम सीधा मुझ पर हमला कर रहे हो।''

"हमला नहीं नसीहत मैडम ! नसीहत! जो औरतें अपने पति की परवाह किए बिना रात एक-एक बजे तक क्लबों में शराब पीती रहेंगी, उनका फ्यूचर अच्छा नहीं होता । डार्कहोता है।"

"शराब तुम नहीं पीते क्या? क्या तुम होटलों में अपने दोस्तों के साथ गुलछर्रे नहीं उड़ाते? रात तो तुम ताज में थे। अगर तुम ताज में डिनर ले सकते हो, शराब पी सकते हो , तो फिर मुझे पाबंदी क्यों?"

"मैं कारोबार से गया था।"

"क्या कमाया वहाँ? वहाँ भी कोई अपराधी ही होगा। बहुत हो चुका रोमेश ! मैं अभी भी खत्म नहीं हो गई, मुझे फिर से नौकरी भी मिल सकती है।"

"याद रखो सीमा , आज के बाद तुम शराब नहीं पियोगी।''

"तुम भी नहीं पियोगे।"

"नहीं पियूँगा।"

''सिगरेट भी नहीं पियोगे।"

"नहीं , तुम जो कहोगी, वह करूंगा। मगर तुम शराब नहीं पियोगी और अगर किसी क्लब में जाना भी हो, तो मेरे साथ जाओगी। वो इसलिये कि नंबर एक, मैं तुमसे बेइन्तहा प्यार करता हूँ, और नंबर दो, तुम मेरी पत्नी हो।"

अगर उसी समय वैशाली न आ गई होती , तो हंगामा और भी बढ़ सकता था। वैशाली के आते ही दोनों चुप हो गये और हँसकर अपने-अपने कामों में लग गये।

वैशाली कोर्ट से लौटी , तो विजय से जा कर मिली । दोनों एक रेस्टोरेंट में बैठे थे ।

"शादी के बाद क्या ऐसा ही होता है विजय ?"

"ऐसा क्या ?"
"बीवी क्लबों में जाती हो। बिना हसबैंड के शराब पीती हो। और फिर झगड़ा, छोटी -छोटी बात पर झगड़ा। लाइफ में क्या पैसा इतना जरूरी है कि पति-पत्नी में दरार डाल दे?''

''पता नहीं तुम क्या बहकी-बहकी बातें कर रही हो?''

''दरअसल मैंने आज भैया-भाभी की सब बातें सुनली थीं । फ्लैट का दरवाजा खुला था , मैं अंदर आ गई थी, और मैंने उनकी सब बातें सुन लीं।''

''भैया -भाभी ?"

''रोमेश भैया की।"

''ओह ! क्या हुआ था?" विजय ने पूछा।

''हाजी बशीर एक लाख रुपये लेकर आया था, उसका कोई आदमी बंद हो गया है, रोमेश भैया बता रहे थे, तुम्हारे थाने का केस है।''

''अच्छा ! अच्छा !! करीमुल्ला की बात कर रहा होगा। रात उसने एक आदमी को नशे में गोली मार दी, हमें भी उसकी बहुत दिनों से तलाश थी, मगर यह बशीर वहाँ कैसे पहुंच गया?''

वैशाली ने सारी बातें बता डालीं ।

''ओह ! तो यह बात थी।'' विजय ने गहरी सांस ली।

''क्या हम लोग इसमें कुछ कर सकते हैं? कोई ऐसा काम जो रोमेश भैया और भाभी में झगड़ा ही ना हो।''

''एक काम हो सकता है।'' विजय ने कुछ सोचकर कहा, ''रोमेश की मैरिज एनिवर्सरी आने वाली है, इस मौके पर एक पार्टी की जाये और फिर रोमेश के हाथों एक गिफ्ट भाभी को दिलवाया जाये, गिफ्ट पाते ही सारा लफड़ा ही खत्म हो जायेगा।''

''ऐसा क्या ?''

''अरे जानेमन, कभी-कभी छोटी बात भी बड़ा रूप धारण कर लेती है, एक बार सीमा भाभी ने झावेरी वालों के यहाँ एक अंगूठी पसंद की थी, उस वक्त रोमेश के पास भुगतान के लिए पैसे न थे, और उसने वादा किया कि शादी की आने वाली सालगिरह पर एक अंगूठी ला देगा। यह अंगूठी रोमेश आज तक नहीं खरीद सका। कभी-कभार तो इस अंगूठी का किस्सा ही तकरार का कारण बन जाता है, अंगूठी मिलते ही भाभी खुश हो जायेगी और बस टेंशन खत्म।''

''मगर वह अंगूठी है कितने की ?''
''उस वक्त तो पचास हज़ार की थी, अब ज्यादा से ज्यादा साठ हज़ार की हो गई होगी।''

''इतने पैसे आएंगे कहाँ से ?"

"कोई चक्कर तो चलाना ही होगा।''


जारी रहेगा......✍️✍️
शानदार अपडेट,
कहानी अभी रफ्तार पकड़ रही है और इंटरस्टिंग बनती जा रही है,
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
50,448
84,829
354
Bahut hi badhiya or thrilling update

Savant rao ka katl hone wala ha or jo katl karne wala ha usne ronesh ko approach kiya ha ki katil ko chhudane ke liye chal kya raha ha dono taraf se romesh ko approach hui ha romesh ke kiye to asani se case sulajh gaya usne maya das ko mana to kar diya jisse sawant rav ko bacha sake or uski payment bhi mil sake lekin dekhte han kya pata katla kisi or ka ho jaye ya fir savant rao ko koi or mar de dekhte han

Idhar romesh ne somu ko kya bacha liya sab uske pas mujrimo ko chhudane ke kiye aa rahe han lekin koi nahi janta ki somu to nirdosh tha lekin ye to apradhi ko chhudane ke liye aa rahe han jo romesh kabhi nahi karna chahega chhahe koi kitne hi paise de de use

Idhar seema ka alg chhakkar ha romes ki life me pahle hi itni uljhane han or uper se biwi alag se pareshan kar rahi ha idhar romesh ko seema per shak ho gaya ha lekin seema aisa kyon kar rahi ha idhar seema ke secret cousin ke bare me bhi mahi bataya gaya ha


Idhar vaishali or vijay apna dimag chala rahe han romesh or seema ke bich sab sulah karne ke liye dekhte kamyab ho oate han ya nahi
Thank you very much for your wonderful review andsupport bhai :hug:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
50,448
84,829
354
शानदार अपडेट,
कहानी अभी रफ्तार पकड़ रही है और इंटरस्टिंग बनती जा रही है,
Thank you very much for your valuable review Rekha rani ji:hug:
 

Werewolf

Supreme
20,580
123,670
259
Great vareat kuch nahi hai yar it's not too good but okay, 👍 you can say, because yaha pe ache achhe writer aur unki story hai,avsji HalfbludPrince aka foji, Werewolf aur bhi kai naam hai, mai to inse seekh raha hu ki kuch likh saku bas, wase tumhare muh se sunke accha laga ki tumhe pasand aai ye stori:D. Thank you so so much for your amazing support and review ❤️ 🧡❣️💗💕💓💖
Ju ne kab padh li meri story!? :waiting1:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
50,448
84,829
354
Ju ne kab padh li meri story!? :waiting1:
Yahi to Raj ka Raj hai bhai :D Silent rah kar bhi to padh sakta hai koi, or doosri baat mai na bhi padhu to duniya to bolti hai bhai, aise hi 4000 +page's nahi bhare pade hai waha:?:
 
Last edited:
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories
Top