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Bhai ab to har update maza de raha nice update broUPDATE 218
अमन के घर
दोपहर के खाने के बाद ममता, दुलारी और संगीता को लेकर कुछ खरीदारी के लिए बाजार निकल गयी ।
मदन अपने कमरे मे आराम फरमा रहा था तो रिन्की दुलारि के कमरे मे दो घन्टे से सो रही थी जबसे अमन ने उसकी चुत फाडी थी ।
इधर अमन भी सोनल के साथ कुछ प्रेम भरे पल बाट रहा था । सोनल भी कल के लिए अपने घर वालो से मिलने के लिए उत्साहित थी
दोनो प्रेमी आपस मे एकदूसरे से लिपटे हुए थे और अमन की दिलीइच्छा थी कि इस बार निशा भी आये ।
सोनल उसे छेड़ते हुए तुनक कर - आपको तो उसके काले अंगूर का ही रस पीना है , यहा मेरी गुलाबी मीठी किस्मिस की कली सूख रही है उसका नही ध्यान
अमन सोनल के प्यार भरे ताने से भितर से सिहर उठा और उसका खुन्टा लोवर मे हरकत करने लगा । उसने सोनल को अपनी ओर कसा और अपने तम्बू का बम्बू उसकी साडी के उपर से उसकी चुत पर चुभोता हुआ - ओह्ह्ह मेरी जान तेरे इस गुलाबी किस्मिस के दाने को अभी गीला कर देता हु
ये बोलकर अमन ने सोनल की मोटी उभरी हुई ब्लाउज से झाकती छातियो पर हाथ फेरा और सोनल सिहर उठी - अह्ह्ह मेरे राजाह्ह्ह्ह उम्म्ंम सीईई ना जाने आपमे क्या जादू है बाबू छूते हो और ये खड़ी हो जाती है
अमन उसकी मुलायम दूध से भरी मोटी पपीते सी छातियो को हाथ मे भर कर मिजता हुआ ब्लाउज के उपर से निप्प्ल वाली जगह को मुह मे भर काटता है - उम्म्ंमममं सीईई ओह्ह मेरी जान तुम्हारी इन्ही रसदार boobs का ही तो दीवाना हु मै उम्म्ंम
सोनल- अह्ह्ह माय बेबी उम्म्ंम सक इट उह्ह्ह मेरा बाबू उम्म्ंम ओह्ह आराम से ईईइस्स्स्स
तभी दरवाजे पर दसतक हुई और दोनो अलग हुए , इस अचरज और शंका भरे भाव से घर की औरते तो बाजार गयि है फिर कौन उपर आकर उन्हे परेशान करेगा
तभी अमन का दिमाग ठनका और उसे अपने बाप की याद आई । वो जल्दी से उठ कर खड़ा हुआ और हड़बड़ाहट भरे लहजे मे - उठो उठो , पापा है !
ससुर के आने की बात पर सोनल की भी हालत खराब हुई जल्दी जल्दी वो भी खड़ि होकर अपने जोबनो पर आन्चल डाला और साडी सही करने लगी ।
अमन ने अपना लन्ड सेट करने को कोसिस की मगर कोसिस नाकाम ही रही , उसका लन्ड मोटे रॉड की तरह अभी भी उसके लोवर मे उभरा हुआ साफ नजर आ रहा था ।
बड़ी मुश्किल से दरवाजे के ओट मे खुद को छिपाते हुए उसने दरवाजा खोला और सामने मुरारी था ।
सारी हकीकत से परिचित होने के बाद भी अमन ने उस्से सवाल किया - अरे पापा आप यहा ? फ़ोन कर देते !
मुरारी झिझक भरे लहजे मे अमन के पीछे खड़ी सोनल को एक नजर देखा जो सन्सकार बस मुस्कराती हुई अपने सर पल्लू कर रही थी
और अनायास मुरारि की नजर अपनी नयी नवेली बहु के चिकने पेट के किनारो पर चली गयि , जिसकी कोमलता और मलाई सी गोरी चमडी देख कर मुरारी एक पल के लिए सम्मोहीत सा हो गया , मगर अगले ही पल उसने खुद को उस नजारे से अलग किया - अह फ़ोन किया था मैने , तुने उठाया नही ।तुझ्से थोडा काम है जरा निचे आना
ये बोलकर मुरारी घूम कर वापस जाने लगा और फिर घूम कर - और वो समान कल मगाया था वो लेते आना ।
जाते जाते एक बार फिर मुरारी ने सोनल की चिकनी कमर पर नजर मारनी चाही मगर इस बार देखा तो सोनल मे सब कुछ अच्छे से ढक रखा था । उस पल भर मे ही मुरारी समझ गया कि सोनल ने उसकी चोरी पकड ली और वो बिना अपनी बहू की ओर देखे चुपचाप निकल गया ।
सोनल ने पार्सल के बारे पूछा तो अमन के बात बदल दी और वो पैकेट लेकर निकल गया नीचे
वही मुरारी अपने कमरे मे बेचैन टहल रहा था जैसे ही अमन कमरे मे दाखिल हुआ उसकी चेहरे पर मुस्कान छा गयी - आ गया बेटा आ आ बैठ
अमन मुस्कुरा कर सोफे पर बैठ गया और मुरारी हसता हुआ - माफ करना बेटे मैने तेरे और बहू के एकांत के पल में डिस्टर्ब कर दिया ।
अमन लजाता हुआ मुस्कुरा कर - क्या पापा ऐसा कुछ नही कर रहे थे हम लोग , सची मे
मुरारि - वो जब तु दरवाजे के पीछे छिपा था तभी मै समझ गया है हाहाहा अरे मुझसे क्या शर्माना , ऐसा तो मेरे साथ भी हुआ है कई बार हिहिहिही
अमन - हैं सच मे ? कब ?
मुरारी- अरे वो तब जवानी के दिनो की बात थी , गाव वाले घर मे मुश्किल से तो तेरी मा के साथ समय मिलता था और ज्यादातर तो हाहहहा
अमन - क्या ज्यादातर ?
मुरारी हस्ता हुआ - अरे वो तुम जवान लोग आपस मे आजकल क्या बोलते हो ? एलकेपीडी ...
अमन हसता हुआ - वो केएलपीडी होता है पापा हाहाहा
मुरारी हस्ता हुआ - हा वही खड़े लन्ड पर धोखा हाहाहा यही मतलब है ना उसका
मुरारि के यूँ खुल कर मजाक करने से अमन थोडा सा लाज से झेप जाता है और मुस्कुरा कर - जी
मुरारी अपनी बात आगे बढ़ाता हुआ - और उसपे से तेरी मा , खूब नखरिली हाहाहा मुझे सताने मे ना जाने क्या मजा आता है उसे ।
" वो तो सबकी बिवियाँ करती है ", अमन बहुत महिन सा बुदबुदाया मगर मुरारि के तेज कानो ने उसकी आवाज को पकड़ लिया ।
मुरारि हस्ता हुआ - अच्छा तो बहू भी कुछ नही है हाहाहा , वैसे रात मे क्या हुआ ?
अमन के कान खड़े हो गये कि ये क्या पूछ रहा है उसका बाप ।
अमन - मतलब ?
मुरारी धीमी आवाज मे उसके पास होकर - अरे वो रात मे दिया था ना , वो यूज किया कि नही ?
अमन लाज भरि मुस्कुराहट के साथ - हम्म्म किया ।
मुरारी का खुन्टा एकदम कड़क होने लगा उसे जानने की उत्सुकता भी थी और झिझक भी हो रही थी
हिम्मत कर मुरारी ने पूछ ही लिया - कितनी बार
अमन मुस्कुरा कर - आपने जितनी बार कहा था
मुरारी का लण्ड एकदम से फड़फडा उठा - और बहू , उसने ऐतराज नही किया ?
अमन - उहू ... मेरे ख्याल से उतना नानुकुर सब बिवियां करती होगी बस उतना ही उसने भी किया ।
मुरारी हसता हुआ - वैसे पूछना तो नही चाहिये लेकिन कैसा लगा तुझे उस समय
अमन के चेहरे पर मुस्कुराहट थी मगर शर्म से लाल होते उसके गाल भी साफ नजर आ रहे थे - अह अब कैसे बताऊ , आपको तो पता है कैसा लगता है । इसमे बताने जैसा क्या है पापा ?
मुरारी पैर फैला कर अंगड़ाई लेता है और पजामे मे बना हुआ उस्का तम्बू साफ साफ अमन को दिखता है - अह्ह्ह अब क्या बताऊ अमन तुझे और बहू को देखता हु तो अपने जवानी के दिन की यादे ताज़ा हो जाती है । शुरुआती दिनो की वो मीठी शरारतें , घर मे चोरी छिपकर तेरी मा के देह से छिपकना खेलना उम्म्ं वो यादे उफ्फ़फ्फ
अमन खिलखिलाता है तो मुरारी मुस्कुरा कर - हा भाई सच कह रहा हु , तुझे तो तेरा अपना कमरा मिला है , गाव मे होता तो पता चलता कैसे रात के सन्नाटे मे सासे थाम कर सिसकिया घोट कर चुदाई करते हैं ।
अमन हस रहा था
मुरारी- लेकिन उस तकलिफ मे भी मजा होता था जब हम अपनी मस्तियाँ पूरी करने मे कामयाब हो जाते थे । जब मै तेरी मा के भीतर झड़ जाता था सारी खुन्नस सारी शिकायते सब बह जाती थी ।
अमन गला साफ करता हुआ चोर नजरो से अपने बाप को उसकी यादो मे खोया हुआ अपना मोटा मुसल पजामे के उपर से मसलता देखता है और खुद भी अंगड़ाई लेकर अपना लन्ड मसल कर सीधा करता हुआ - आह्ह पापा लो ये आपका पार्सल
मुरारी- अरे हा खोल खोल देखता हु जरा
अमन फटाफ़ट से पैकेज खोलता है और फिर उसमे से ब्रा पैंटी को निकाल कर अपने पापा को देता है ।
मुरारी उस नरम मुलायम महिन सूत वाले कपड़ों के बने ब्रा और पैंटी का मखमलीपन अपनी उंगलियो मे मह्सूस करता हुआ उन्हे अपने नथुनो तक ले जाता है - उम्म्ंम्ममम्ंम्ं वाह एकदम फ्रेश है
अमन अपने पापा की कामुकता को अजीब नजरो से निहारता है - क्या सुँघ रहे हो पापा
मुरारी हस कर - ओह मुझे ये नये ताजे कपड़ो की खुशबू अच्छी लगती है और जब इसमे तेरी के देह की खुस्बू भीन जायेगी उह्ह्ह्ह तब तो येहहह ओह्ह्ह्ह्ह
अमन अपनी मा के जिस्म की खुस्बू के नाम से ही गनगना गया और उसका मुसल हथौड़ा सा हो गया । गुपचुप से उसने अपना मुसल खुजाया ।
मुरारी- और इसका कलर बहुत खिलेगा तेरी मा पर और इस रंग की चुन्नी भी तो है उसके पास
अमन - चुन्नी ? इसपे चुन्नी का क्या काम ?
मुरारी खिलखिला कर हसता हुआ अमन के कंधे पर हाथ घुमाता है - हाहाहाहा तु भले ही इस जमाने का है मगर शादीशुदा जीवन के मजे लेने मे पीछे ही रहेगा अपने बाप से
अमन - मै समझा नही पापा , आखिर ब्रा पैंटी के साथ उसकी मैचींग चुन्नी का क्या काम?
मुरारी- क्या काम!! बेटा तुझे एक बार की बात बताता हु
हुआ यूँ था कि शादी के कुछ महीने बाद एक रिस्तेदार के यहा शादी मे घर के बाकी जन गये हुए थे और चूकि तेरी मा अभी नयी ब्याही आई थी तो उसको साल भर तक किसी के यहा जाने पर मनाही थी और उसकी देख रेख का ख्याल रखने के लिए मुझे रुकना पड़ा था
अमन - अरे वाह फिर
मुरारी अमन की चहकपने पर हसकर - बताता हु भाई सुन
पूरे 3 रोज के लिए घर के सारे लोग गये थे और मैने तेरी मा को इस बात के लिए मनाने लगा कि वो फिर से शादी वाला लाल जोडा पहने , बहुत नानुकुर और प्यार जताने पर वो मान ही गयी
अमन - मतलब फिर से सुहागरात हिहिही
मुरारी- हा ऐसा ही कुछ फिर मुझे ख्याल आया क्यूँ ना उसके लाल जोड़े को पुरा करने के लिए लाल रंग की ब्रा पैंटी भी ला दूँ और उसी रोज मै बाजार जाकर ले आया ।
उस रोज तेरी मा बहुत खुश थी लेकीन जब मैने कहा कि मुझे इसे पहन कर दिखा तो वो शर्मा कर मना करने लगी।
अपने पापा की बातें और अपनी मा को लाल रंग की ब्रा पैंटी मे सोच कर ही अमन का लन्ड बौरा गया , वो अपना मुसल रगड़ते हुए सिसका - फिर पापा क्या हुआ , क्या मा पहन कर आई ?
मुरारी- हा बेटा और वो नजारा आजतक नही भुला उफ्फ्फ जैसे ही मै कमरे मे दाखिल हुआ मेरा मन मचल उठा , दिल खुशी से उछलने लगा , सामने तेरी मा बिस्तर के पास खड़ी थी उसने अपने सर पर शादी की विदाई वाली लाल चुनरी ओढ़ कर घूँघट कर रखी थी और गले से निचे उसका गोरा संगमरमरी बदन मेरे दिये तोहफो से सजा हुआ था ।
वो छींट वाली प्रिंट की ब्रा उसके तंदुरुस्त दूध पर कसे हुए थे और वो पतले पट्टी वाली लाल कच्छी उसकी जांघो के बीच से जैसे कमल सी खिल उठी थी ।
अमन का दिल अपने पापा की बाते सुन कर जोरो से धड़कने लगा उसका लन्ड अपनी मा को लाल ब्रा पैंती मे सोच कर पुरा फडकने लगा , चेहरे पर कामुकता साफ साफ हावि दिख रही थी । वही मुरारी बड़ी बेबाकी और बेहिचक होकर अमन को सारी बाते बता रहा था
मुरारी- सच कह रहा हु बेटा अगर तु उस समय अपनी मा को देख लेता तो तु भी उसका दिवाना हो जाता हाय्य्य
और उसने अमन की ओर देखा जो आंखे बन्द किये तेज तेज सासे ले रहा था और उसका हाथ उसके लन्ड को भींच रहा था । मुरारि समझ गया कि अमन अपनी मा को अपनी कल्पना मे देख रहा है ।
मुरारी- बस आज रात वो यादे ताज़ा होने वाली है ,आज की रात मै उसे फिर तैयार होने को कहुगा
अमन - हा पापा मै भी
मुरारी चौककर - क्या मतलव
अमन हस कर - अरे मतलब आज मै भी सोनल को ऐसे ही तैयार होने को कहूँगा , वैसे क्या मा ने सारे साज सृंगार किये थे या बस चुन्नी ली थी ।
मुरारी हस कर - अरे सबर कर ले , कल मै तुझे उसकी फोटो दिखाऊँगा फिर तु समझ जायेगा
अमन की आंखे चमक उठी - क्या सच पापा ?
मुरारी मन मे उभरते लालच को दबाता हुआ - हा उसमे क्या है , तु उसका ही बेटा है गैर थोड़ी ।
मुरारी ने इस बात के साथ अपना दाव खेल दिया था इस उम्मीद मे कि शायद ममता के बदले अमन सोनल की भी तसविरे उसे दिखाये और अपनी हीरोईन सी सेक्सी गोरी चिट्टी बहू को ऐसे तैयार होकर देखने के बारे मे सोच कर मुरारि का जजबात उबाल मारने लगे
मगर उसने अपने जजबात को काबू मे रखा और संयम से इंतजार करना सही समझा ।
राज के घर
रागिनी अनुज को लेकर दोपहर का टिफ़िन लेके बाजर के लिए निकल गयी थी , निशा भी किचन के काम निपटाने के बाद नहाने के लिए उपर जा चुकी थी
वही रागिनी के रूम मे शिला और रज्जो आपस मे मिलाप कर रही थी , शिला अपनी बड़ी सी तरबूज सी गाड़ फैलाये कुर्ती उठाए आगे झुकी हुई थी
रज्जो उसकी नंगी गोरी गाड़ को सहलाती हुई उसके नरम मुलायम चुतड पर पन्जा जड़ती है जिससे शिला सिस्क पड़ती है - अह्ह्ह्ह भाभीईई उम्म्ंम्ं ओह्ह्ह मान जाओ ना प्लीज एक बार
रज्जो उसकी गाड़ की दरारो मे उंगलिया घुसाती हुई सुराख मे उंगली पेल दी - अह्ह्ह तुम समझ नही रही हो दीदी उम्म्ंम रमन के पापा नाराज हो जायेन्गे
शिला - अह्ह्ह भाभीईई उह्ह्ह्ह उफ्फफ़फ़ उम्म्ंम खा जाओ उम्म्ंम्ं और चाटो उम्म्ं ये अनुज मुये ने मेरी चुत की खुजली बढा दी अह्ह्ह्ह सीईई
रज्जो शिला की टाँगे खोले उसकी चुत पर जीभ चला रहा थी और चाट रही थी ।
शिला - आह्ह भाभीईई बस तुम हा करो । वहा तुम्हे वो मजा मिलेगा वैसा तुमने कभी नही लिया होगा
रज्जो उसकी चुत से अलग हुई और अपनी नंगी छातिया मिजने लगी
शिला ने अपने पैर उसके गुदाज चुचो पर रख कर निप्प्ल पर सहलाने लगी जिस्से रज्जो की सासे उखड़ने लगी - ऊहह छोडो ना दिदी , चलो ना नहाते है आओ
ये बोल कर रज्जो उठ खड़ि हुई और अपनी कमर मे अटकी पेतिकोट को सरका कर सिर्फ पैंटी मे आ गयी और कुल्हे हिलाती मुस्कुराती हुई बाथरूम मे चली गयी ।
शिला भी अपनी कुरती उतार कर फेक दिया और तौलिया लेकर बाथरूम मे दाखिल हुई और उसकी नजर रज्जो के पर गयि
अपने जिस्म से ब्रा उतार कर पूरी नंगी हो रज्जो के करीब गयी और उसको पीछे से जकड़ लिया - अह्ह्ह भाभीई मेरी जान मान भी जाओ ना बस कुछ रोज की ही बात है
रज्जो के चुचो पर शिला के रेंगते हाथ उसने कस कर पकड़ लिये तो शिला ने उसकी चुचिया मिजनी शुरु कर दी - अह्ह्ह्ह दिदीईई उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ह्ह्ह
शिला - थोडा सा भरोसा रखो मेरी जान उम्म्ंम वहा तुम्हारा बदन और निखर जाएगा
"और तुम्हारे ये गोल मटोल तरबूज के चुतड उम्म्ंम्म्ं" , शिला निचे बैठ कर रज्जो की पैंती के गाड़ से सरकाती हुई उसे चूमती हुई निचे करने लगी ।
शिला - ओह्ह भाभी तम्हारी ये गाड़ उम्म्ं इसको ऐसे ना तरसाओ इसमे तो जमाने भर के लन्ड घुसाने की जगह है उम्म्ंंम्ंम्ं सीईई
शिला रज्जो की गाड़ मसलती हुई उसके चुसने चाटने लगती है - अह्ह्ह्ह दीदी उउम्ंंंं ओह्ह्ह पर मुझे डर लगता है अह्ह्ह रमन के पापा को क्या कहुगी मै उम्म्ं
शिला उठ खड़ी हुई और घुमाती हुई उसके लिप्स से अपने लिप्स जोड़ लिये , रज्जो ने भी उसके होठ चुसने शुरु कर दिये
दोनो रसभर अधर एकदुसरे मे घुले जा रहे थे और उनकी नगन छातियां आपस मे चुभ रही थी ,
रज्जो के हाथ शिला की मक्खन सी जांघो को उठा हुए उसके चर्बीदार चुतडो को सहला रही थी ।
रज्जो - अह्ह्ह मेरी जान मेरे सैयया मतल्ब रमन के पापा तो अभी से मेरे बिना पागल है , वो और मुझसे दूरी नही सह पायेंगे अह्ह्ह्ज समझ ना
शिला उसके गाड़ को पक्ड कर अपनी ओर उसको खिंचती हुई - तेरे उस गाड़ चतोरे साजन की फिकर ना कर उसको कैसे मनाना मै जानती हु मेरी चुदक्क्ड घोडी तू हा कर बस
रज्जो ने मुस्कुरा कर शिला को देखा - मतल्ब दीदी तुम कैसे ? शिला शर्माई और बोली - तेरे साजन बहुत कुछ तुझसे छिपाते है मेरी सजनी
रज्जो ने आगे बढा कर शिला के बुर टटोलती हुई - मतलब इस भोस्ड़े मे भी उन्होने खुन्टा गाड़ दिया उम्म्ंम
शिला मुस्कुराती हुई सिसकी तो रज्जो ने उसकी दोनो निप्प्ल पक्ड कर नोचती हुई उसे अपने अपनी बाहो के भर के उसके होठ चुसने लगी - अह्ह्ह साली रंडी तु तो मेरा ही माल खा गयी उम्म्ंम अब देख कैसे तेरा माल मै खाती हुई वो भी तेरे घर मे घुस कर
शिला खिल उठी - तो क्या सच मे भाभी तुम चलोगी
रज्जो - हा चलूँगी ना , अगर तु मेरी चुत चाट कर खुश कर दे
शिला मुस्कुरा कर उसकी बुर सहलाने लगी - उम्म्ं मेरि सेक्सी रान्ड़ इसमे मेरा ही फाय्दा है आजा
शिला सरकर निचे हो गयी और रज्जो ने उस्के मुह पर अपनी बुर रख दी
वही उपर नहाने के बाद निशा निचे आने लगी ये खोज खबर लेने कि अगर घर की बाकी औरते बिजी हो तो वो अरून के लैपटॉप मे पोर्न्ं देख पाये
चुपचाप दबे पाव वो निचे हाल मे आई और निचे पुरा सन्नाटा पसरा हुआ था और गेस्ट रूम का दरवाजा खुला
कही कोई नजर नही आया तो निशा रागिनी के कमरे की ओर बढ़ी
दरवाजा खुला हुआ था और बाथरूम से तेज सिस्किया और अवाजे गूंज रही ।
निशा ने भागकर सबसे पहले मेन गेट चेक किया और वापस आई उसकी सासे तेज चल रही थी तेज कामुक सिसकियाँ सूनकर उस्के जहन मे समझ आ रही था किसी की तगडी पेलाई चल रही थी मगर किसकी ?
उसके निप्प्ल कडक हो गये और सासे दुगनी गति से चल रही थी , कलेजा थाम कर जैसे जैसे वो दरवाजे की ओर बढ़ रही थी उसको रज्जो की साफ और स्पष्ट गाली भरी चीख सुनाई दे रही - अह्ह्ह बहिनचोद चाट ओह्ह्ह ऐसे उम्म्ं खा मेरी बुर उह्ह्ह ओह्ह आज तुझे नहला दूँगी अपनी रस से ओह्ह्ह्ह एल्ह्ह्ह उम्म्ंम
निशा के कान खड़े हो गये कि रज्जो किसकी मुह पर अपना भोस्डा रग्ड रही है और जैसे ही उसने बाथरूम मे झाका तो देखा ,
बाथरूम की फर्श पर शिला बुआ फैली हुई गरदन उठा हुए थी और रज्जो मौसी अपनी चुत उनके मुह पर दर रही थी - लेह्ह्ह साली कुतिया चाट उम्म्ंम पी जाह्ह्ब उह्ह्ह मादरचोद उह्ह्ह लेह्ह्ह ओह्ह्ह ओझ्ह शिलाअह्ह्ह मेरी जान उम्म्ंम आ रहा है ओह
निशा की आंखे फटी की फटी रह गयी कि रज्जो मौसी और शिला बुआ एक साथ ऐसे , अन्जाने मे उसके मुह यही निकला - ओह्ह गॉड बुआ मौसी आप लोग ?
दोनो चौके और निशा को देख कर खड़े हो गये शिला की हालत खराब थी वो रज्जो से फुसफुसाई - अब क्या करे
रज्जो- अरे शिकार खुद चल कर आया तो हलाल होगा
रज्जो - तु यहा कया कर रही है ये , इधर आ पहले
निशा - हा लेकिन आप लोग ऐसे ? दरवाजा बन्द कर लेते
रज्जो- तु बड़ी समझदार है उम्म्ं इधर अभी तुझे ठिक करती ह
ये बोल कर रज्जो ने उसे पकड़ कर खिंच और लोवर के उपर से उसकी चुतड़ पर थपेड लगाती हुई - किसी के कमरे मे जाने से पहले दरवाजा खटखटाना चाहिये ना
निशा - अह्ह्ह सॉरी ना मौसी , लेकिन आप लोग ये सब क्या कर रहे थे अह्ह्ज्ज
रज्जो - दीदी इसको भी अनुज की तरह सजा दो , कपडे उतारो
अनुज की तरह सजा का मतलब कुछ कुछ समझ आ रहा था निशा को - क्या मतलब अनुज की तरह सजा, उसने भी देखा क्या आप दोनो
शिला उसका लोवर खिंच कर - देखो तो कैसे सवाल जवाब कर रही है हा ,बहुत बिगड़ गयी है तु भी
ये बोल कर शिला के चुतड़ पर चट्ट से पन्जे जड़ देती है जिस्से निशा का जिस्म झनझना जाता है -अह्ह्ह बुआ मार क्यू रहे हो ओह्ह्ज उम्म्ं
इधर रज्जो ने उसकी पैंती पकड़ कर खिंचती हुई - उसके गाड़ पर थपेड़ लगाती हुई - देखो तो इस्क्प एक तो चोरी उसपे से सिना जोरि
निशा - अह्ज्ज मैने किया क्या है लेकिन
रज्जो - अरे दिदी यही तुम्हारा बड़ा वाला समान लेके गयी थी
शिला - क्या सच मे ? ये लडकी बोल कहा रखा है उसे ,
रज्जो ये ऐसे नही बोलेगी इसको कमरे मे के चलो और
फिर रज्जो उसे टांग लिया और कमरे मे घोडी बना कर उसकी पैटी खिंच कर उसकी गाड़ पर थपेड लगा कर - बोल कहा रखा है तुने उसे
निशा - आह्ह क्या बोल रही हो मौसी मै कहा लाई थी
रज्जो - मैने साफ साफ देखा था दिदी इसको कमरे से निकलते हुए ,
शिला - तभी तो मै सोचू इसकी जवानी कैसे निखर रही है आह्ह अभी से इसने घोट रखा है इतना सारा
रज्जो - बोल देगी की नही वापस
निशा - मै नही लेके गयी थी बुआ बोलो ना मौसी को
रज्जो - ये ऐसे नही मानेगी रुक
रज्जो ने उसे लिटाया और उसके मुह पर बैठ गयी - उम्म्ंम बोल ऐसे ही तेरे ये जोबन मोटे हुए है उम्म्ंम
शिला - हा रुको मै भी निचे से चेक करती हु सारी सच्चाई खुल जायेगी ये बोल कर शिला ने उस्की टांगो से पैंती खिंच कर अलग कर दी , उसकी बजबजाती बुर पर हाथ फेर कर उसके फाके अलग करती हुई - हम्म्म्म साफ साफ लग रहा है इसने घुसाया उम्म्ंम
निशा - आह्ह सीईई ओह्ह्ह बुआ क्याअह्ह्ह कर रही हो उम्मममंम्ं ओह्ह्ह
रज्जो - साली रंडी ले चाट अह्ह्ह्ह बोल मत , तेरा भेद खुल गया है अह्ह्ह उम्म्ंम
निशा मुस्कुराई और आंख मारते हुए रज्जो से हल्के से बोली - लेकीन ड्रामा करने मे माजा आ रहा है
निशा हसती हुईई - ओह्ह्ह बुआ ये क्या कर रही हो अपनी बेटी के साथ उह्ह्ह्ह मत चाटो उसकी कुवारि चुत को अह्ह्ज सीईयियो
रज्जो निशा की शरारत पर हस पड़ि और अपनी बुर को उसके मुह पर रख दी जिसे निशा चाटने लगी
वहि शिला भुखी शेरनी की तरह निशा की बुर पर टुट पड़ि थी , उसके सपने आज हकिकत हो रहे थे , दिल मे जो अरमानो का बाग लेके आई थी वो खिल रहे थे
निशा की नमकीन चुत का स्वाद पाकर वो पागल हो गयी थी - आह्ह निशा तेरी बुर सच मे बहुत गर्म है उम्म्ं ऐसी ही कुवारि चुत का रस पसम्द है उम्मममं सीईई
निशा - अह्ह्ह बुआ अह्ह्ह इतनी अच्छी है क्या उम्म्ंम खा जाओ उह्ह्ह येस्स्स उम्म्ंम फ्क्क्क्क ओह्ह्ह जीभ से भी आह्ह हा ऐसे ही उम्म्ंम फक्क्क ओह्ह्ह बुआअह्ह्ह्ह मेरी प्यारी बुआ ओह्ह्ह अह्ह्ह्ह आ रहा है उह्ह्ह्ह
रज्जो - रुक जा रुका जा ऐसे नही मुझे भी तो अपनी भतीजी के चुत का रस लेने दे आजा
ये बोल कर रज्जो उठी और निशा की टांगो मे कैची बना कर उसकी चुत पर अपनी चुत रगड़ने लगी - अह्ह्ह मौसी उह्ह्ह ये तो अलग ही मजा आ है अह्ह्ह्ज उम्म्ंम्ं कितना तप रहा है आप्का भोस्डा अह्ह्ह उह्ह्ज्ज फक्क्क्क उम्म्ंम्ं
शिला - अह झड जा बेटी झड जा अपनी मौसी के बुर पर ओह्ह्ह
निशा - हा बुआ फिर आप चाटना अपनी बेटी की वुर बोलो चातोगे ना उम्म्ंम अह्ह्ज्ज्ज सीयिओई और तेज मौसी अह्ह्ज बहुत मुलायम है अह्ह्ह रहा नही जा रहा है अह्ह्ह्ज फक्क्क्क ऐसे ही उह्ह्ह्ह आओ जा बुआ तुम भी अओझ्ह अह्ह्ज
शिला उठ कर उनके पास आ गयी और दोनौ उसकी चुचिया मुह के भर कर चुसने लगे - आह्ह बेटा उम्म्ंम पी ले ऊहह और चुस उह्झ भाभीईई अह्ह्ह काट डालोगी क्या आह्ह सीईईईई अह्ह्ह
रज्जो - ओह्ह्ह निशा अह्ह्ह सीईई आ रहा है मेरा अओह्ह्ह्ह।
निशा -हा मौसी मेरा भी उम्म्ंम अह्ह्ह्ह हहह फ्क्क्क अह्ह्ह मम्मीईई अह्ह्ह आह्ह आ रहा उह्ह्ह बुआआ हहहहह आ गया आ गया ओह्ह्ह शिट उह्ह्ह फक्क्क ऊहह फक्क्क
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रज्जो और निशा हाफने लगे और फैल लार लेट गये वही शिला बारी बारी से दोनो के बुर के मिले हुए रस को चाटने लगी ।
जारी रहेगी
Super Update BhaiUPDATE 218
अमन के घर
दोपहर के खाने के बाद ममता, दुलारी और संगीता को लेकर कुछ खरीदारी के लिए बाजार निकल गयी ।
मदन अपने कमरे मे आराम फरमा रहा था तो रिन्की दुलारि के कमरे मे दो घन्टे से सो रही थी जबसे अमन ने उसकी चुत फाडी थी ।
इधर अमन भी सोनल के साथ कुछ प्रेम भरे पल बाट रहा था । सोनल भी कल के लिए अपने घर वालो से मिलने के लिए उत्साहित थी
दोनो प्रेमी आपस मे एकदूसरे से लिपटे हुए थे और अमन की दिलीइच्छा थी कि इस बार निशा भी आये ।
सोनल उसे छेड़ते हुए तुनक कर - आपको तो उसके काले अंगूर का ही रस पीना है , यहा मेरी गुलाबी मीठी किस्मिस की कली सूख रही है उसका नही ध्यान
अमन सोनल के प्यार भरे ताने से भितर से सिहर उठा और उसका खुन्टा लोवर मे हरकत करने लगा । उसने सोनल को अपनी ओर कसा और अपने तम्बू का बम्बू उसकी साडी के उपर से उसकी चुत पर चुभोता हुआ - ओह्ह्ह मेरी जान तेरे इस गुलाबी किस्मिस के दाने को अभी गीला कर देता हु
ये बोलकर अमन ने सोनल की मोटी उभरी हुई ब्लाउज से झाकती छातियो पर हाथ फेरा और सोनल सिहर उठी - अह्ह्ह मेरे राजाह्ह्ह्ह उम्म्ंम सीईई ना जाने आपमे क्या जादू है बाबू छूते हो और ये खड़ी हो जाती है
अमन उसकी मुलायम दूध से भरी मोटी पपीते सी छातियो को हाथ मे भर कर मिजता हुआ ब्लाउज के उपर से निप्प्ल वाली जगह को मुह मे भर काटता है - उम्म्ंमममं सीईई ओह्ह मेरी जान तुम्हारी इन्ही रसदार boobs का ही तो दीवाना हु मै उम्म्ंम
सोनल- अह्ह्ह माय बेबी उम्म्ंम सक इट उह्ह्ह मेरा बाबू उम्म्ंम ओह्ह आराम से ईईइस्स्स्स
तभी दरवाजे पर दसतक हुई और दोनो अलग हुए , इस अचरज और शंका भरे भाव से घर की औरते तो बाजार गयि है फिर कौन उपर आकर उन्हे परेशान करेगा
तभी अमन का दिमाग ठनका और उसे अपने बाप की याद आई । वो जल्दी से उठ कर खड़ा हुआ और हड़बड़ाहट भरे लहजे मे - उठो उठो , पापा है !
ससुर के आने की बात पर सोनल की भी हालत खराब हुई जल्दी जल्दी वो भी खड़ि होकर अपने जोबनो पर आन्चल डाला और साडी सही करने लगी ।
अमन ने अपना लन्ड सेट करने को कोसिस की मगर कोसिस नाकाम ही रही , उसका लन्ड मोटे रॉड की तरह अभी भी उसके लोवर मे उभरा हुआ साफ नजर आ रहा था ।
बड़ी मुश्किल से दरवाजे के ओट मे खुद को छिपाते हुए उसने दरवाजा खोला और सामने मुरारी था ।
सारी हकीकत से परिचित होने के बाद भी अमन ने उस्से सवाल किया - अरे पापा आप यहा ? फ़ोन कर देते !
मुरारी झिझक भरे लहजे मे अमन के पीछे खड़ी सोनल को एक नजर देखा जो सन्सकार बस मुस्कराती हुई अपने सर पल्लू कर रही थी
और अनायास मुरारि की नजर अपनी नयी नवेली बहु के चिकने पेट के किनारो पर चली गयि , जिसकी कोमलता और मलाई सी गोरी चमडी देख कर मुरारी एक पल के लिए सम्मोहीत सा हो गया , मगर अगले ही पल उसने खुद को उस नजारे से अलग किया - अह फ़ोन किया था मैने , तुने उठाया नही ।तुझ्से थोडा काम है जरा निचे आना
ये बोलकर मुरारी घूम कर वापस जाने लगा और फिर घूम कर - और वो समान कल मगाया था वो लेते आना ।
जाते जाते एक बार फिर मुरारी ने सोनल की चिकनी कमर पर नजर मारनी चाही मगर इस बार देखा तो सोनल मे सब कुछ अच्छे से ढक रखा था । उस पल भर मे ही मुरारी समझ गया कि सोनल ने उसकी चोरी पकड ली और वो बिना अपनी बहू की ओर देखे चुपचाप निकल गया ।
सोनल ने पार्सल के बारे पूछा तो अमन के बात बदल दी और वो पैकेट लेकर निकल गया नीचे
वही मुरारी अपने कमरे मे बेचैन टहल रहा था जैसे ही अमन कमरे मे दाखिल हुआ उसकी चेहरे पर मुस्कान छा गयी - आ गया बेटा आ आ बैठ
अमन मुस्कुरा कर सोफे पर बैठ गया और मुरारी हसता हुआ - माफ करना बेटे मैने तेरे और बहू के एकांत के पल में डिस्टर्ब कर दिया ।
अमन लजाता हुआ मुस्कुरा कर - क्या पापा ऐसा कुछ नही कर रहे थे हम लोग , सची मे
मुरारि - वो जब तु दरवाजे के पीछे छिपा था तभी मै समझ गया है हाहाहा अरे मुझसे क्या शर्माना , ऐसा तो मेरे साथ भी हुआ है कई बार हिहिहिही
अमन - हैं सच मे ? कब ?
मुरारी- अरे वो तब जवानी के दिनो की बात थी , गाव वाले घर मे मुश्किल से तो तेरी मा के साथ समय मिलता था और ज्यादातर तो हाहहहा
अमन - क्या ज्यादातर ?
मुरारी हस्ता हुआ - अरे वो तुम जवान लोग आपस मे आजकल क्या बोलते हो ? एलकेपीडी ...
अमन हसता हुआ - वो केएलपीडी होता है पापा हाहाहा
मुरारी हस्ता हुआ - हा वही खड़े लन्ड पर धोखा हाहाहा यही मतलब है ना उसका
मुरारि के यूँ खुल कर मजाक करने से अमन थोडा सा लाज से झेप जाता है और मुस्कुरा कर - जी
मुरारी अपनी बात आगे बढ़ाता हुआ - और उसपे से तेरी मा , खूब नखरिली हाहाहा मुझे सताने मे ना जाने क्या मजा आता है उसे ।
" वो तो सबकी बिवियाँ करती है ", अमन बहुत महिन सा बुदबुदाया मगर मुरारि के तेज कानो ने उसकी आवाज को पकड़ लिया ।
मुरारि हस्ता हुआ - अच्छा तो बहू भी कुछ नही है हाहाहा , वैसे रात मे क्या हुआ ?
अमन के कान खड़े हो गये कि ये क्या पूछ रहा है उसका बाप ।
अमन - मतलब ?
मुरारी धीमी आवाज मे उसके पास होकर - अरे वो रात मे दिया था ना , वो यूज किया कि नही ?
अमन लाज भरि मुस्कुराहट के साथ - हम्म्म किया ।
मुरारी का खुन्टा एकदम कड़क होने लगा उसे जानने की उत्सुकता भी थी और झिझक भी हो रही थी
हिम्मत कर मुरारी ने पूछ ही लिया - कितनी बार
अमन मुस्कुरा कर - आपने जितनी बार कहा था
मुरारी का लण्ड एकदम से फड़फडा उठा - और बहू , उसने ऐतराज नही किया ?
अमन - उहू ... मेरे ख्याल से उतना नानुकुर सब बिवियां करती होगी बस उतना ही उसने भी किया ।
मुरारी हसता हुआ - वैसे पूछना तो नही चाहिये लेकिन कैसा लगा तुझे उस समय
अमन के चेहरे पर मुस्कुराहट थी मगर शर्म से लाल होते उसके गाल भी साफ नजर आ रहे थे - अह अब कैसे बताऊ , आपको तो पता है कैसा लगता है । इसमे बताने जैसा क्या है पापा ?
मुरारी पैर फैला कर अंगड़ाई लेता है और पजामे मे बना हुआ उस्का तम्बू साफ साफ अमन को दिखता है - अह्ह्ह अब क्या बताऊ अमन तुझे और बहू को देखता हु तो अपने जवानी के दिन की यादे ताज़ा हो जाती है । शुरुआती दिनो की वो मीठी शरारतें , घर मे चोरी छिपकर तेरी मा के देह से छिपकना खेलना उम्म्ं वो यादे उफ्फ़फ्फ
अमन खिलखिलाता है तो मुरारी मुस्कुरा कर - हा भाई सच कह रहा हु , तुझे तो तेरा अपना कमरा मिला है , गाव मे होता तो पता चलता कैसे रात के सन्नाटे मे सासे थाम कर सिसकिया घोट कर चुदाई करते हैं ।
अमन हस रहा था
मुरारी- लेकिन उस तकलिफ मे भी मजा होता था जब हम अपनी मस्तियाँ पूरी करने मे कामयाब हो जाते थे । जब मै तेरी मा के भीतर झड़ जाता था सारी खुन्नस सारी शिकायते सब बह जाती थी ।
अमन गला साफ करता हुआ चोर नजरो से अपने बाप को उसकी यादो मे खोया हुआ अपना मोटा मुसल पजामे के उपर से मसलता देखता है और खुद भी अंगड़ाई लेकर अपना लन्ड मसल कर सीधा करता हुआ - आह्ह पापा लो ये आपका पार्सल
मुरारी- अरे हा खोल खोल देखता हु जरा
अमन फटाफ़ट से पैकेज खोलता है और फिर उसमे से ब्रा पैंटी को निकाल कर अपने पापा को देता है ।
मुरारी उस नरम मुलायम महिन सूत वाले कपड़ों के बने ब्रा और पैंटी का मखमलीपन अपनी उंगलियो मे मह्सूस करता हुआ उन्हे अपने नथुनो तक ले जाता है - उम्म्ंम्ममम्ंम्ं वाह एकदम फ्रेश है
अमन अपने पापा की कामुकता को अजीब नजरो से निहारता है - क्या सुँघ रहे हो पापा
मुरारी हस कर - ओह मुझे ये नये ताजे कपड़ो की खुशबू अच्छी लगती है और जब इसमे तेरी के देह की खुस्बू भीन जायेगी उह्ह्ह्ह तब तो येहहह ओह्ह्ह्ह्ह
अमन अपनी मा के जिस्म की खुस्बू के नाम से ही गनगना गया और उसका मुसल हथौड़ा सा हो गया । गुपचुप से उसने अपना मुसल खुजाया ।
मुरारी- और इसका कलर बहुत खिलेगा तेरी मा पर और इस रंग की चुन्नी भी तो है उसके पास
अमन - चुन्नी ? इसपे चुन्नी का क्या काम ?
मुरारी खिलखिला कर हसता हुआ अमन के कंधे पर हाथ घुमाता है - हाहाहाहा तु भले ही इस जमाने का है मगर शादीशुदा जीवन के मजे लेने मे पीछे ही रहेगा अपने बाप से
अमन - मै समझा नही पापा , आखिर ब्रा पैंटी के साथ उसकी मैचींग चुन्नी का क्या काम?
मुरारी- क्या काम!! बेटा तुझे एक बार की बात बताता हु
हुआ यूँ था कि शादी के कुछ महीने बाद एक रिस्तेदार के यहा शादी मे घर के बाकी जन गये हुए थे और चूकि तेरी मा अभी नयी ब्याही आई थी तो उसको साल भर तक किसी के यहा जाने पर मनाही थी और उसकी देख रेख का ख्याल रखने के लिए मुझे रुकना पड़ा था
अमन - अरे वाह फिर
मुरारी अमन की चहकपने पर हसकर - बताता हु भाई सुन
पूरे 3 रोज के लिए घर के सारे लोग गये थे और मैने तेरी मा को इस बात के लिए मनाने लगा कि वो फिर से शादी वाला लाल जोडा पहने , बहुत नानुकुर और प्यार जताने पर वो मान ही गयी
अमन - मतलब फिर से सुहागरात हिहिही
मुरारी- हा ऐसा ही कुछ फिर मुझे ख्याल आया क्यूँ ना उसके लाल जोड़े को पुरा करने के लिए लाल रंग की ब्रा पैंटी भी ला दूँ और उसी रोज मै बाजार जाकर ले आया ।
उस रोज तेरी मा बहुत खुश थी लेकीन जब मैने कहा कि मुझे इसे पहन कर दिखा तो वो शर्मा कर मना करने लगी।
अपने पापा की बातें और अपनी मा को लाल रंग की ब्रा पैंटी मे सोच कर ही अमन का लन्ड बौरा गया , वो अपना मुसल रगड़ते हुए सिसका - फिर पापा क्या हुआ , क्या मा पहन कर आई ?
मुरारी- हा बेटा और वो नजारा आजतक नही भुला उफ्फ्फ जैसे ही मै कमरे मे दाखिल हुआ मेरा मन मचल उठा , दिल खुशी से उछलने लगा , सामने तेरी मा बिस्तर के पास खड़ी थी उसने अपने सर पर शादी की विदाई वाली लाल चुनरी ओढ़ कर घूँघट कर रखी थी और गले से निचे उसका गोरा संगमरमरी बदन मेरे दिये तोहफो से सजा हुआ था ।
वो छींट वाली प्रिंट की ब्रा उसके तंदुरुस्त दूध पर कसे हुए थे और वो पतले पट्टी वाली लाल कच्छी उसकी जांघो के बीच से जैसे कमल सी खिल उठी थी ।
अमन का दिल अपने पापा की बाते सुन कर जोरो से धड़कने लगा उसका लन्ड अपनी मा को लाल ब्रा पैंती मे सोच कर पुरा फडकने लगा , चेहरे पर कामुकता साफ साफ हावि दिख रही थी । वही मुरारी बड़ी बेबाकी और बेहिचक होकर अमन को सारी बाते बता रहा था
मुरारी- सच कह रहा हु बेटा अगर तु उस समय अपनी मा को देख लेता तो तु भी उसका दिवाना हो जाता हाय्य्य
और उसने अमन की ओर देखा जो आंखे बन्द किये तेज तेज सासे ले रहा था और उसका हाथ उसके लन्ड को भींच रहा था । मुरारि समझ गया कि अमन अपनी मा को अपनी कल्पना मे देख रहा है ।
मुरारी- बस आज रात वो यादे ताज़ा होने वाली है ,आज की रात मै उसे फिर तैयार होने को कहुगा
अमन - हा पापा मै भी
मुरारी चौककर - क्या मतलव
अमन हस कर - अरे मतलब आज मै भी सोनल को ऐसे ही तैयार होने को कहूँगा , वैसे क्या मा ने सारे साज सृंगार किये थे या बस चुन्नी ली थी ।
मुरारी हस कर - अरे सबर कर ले , कल मै तुझे उसकी फोटो दिखाऊँगा फिर तु समझ जायेगा
अमन की आंखे चमक उठी - क्या सच पापा ?
मुरारी मन मे उभरते लालच को दबाता हुआ - हा उसमे क्या है , तु उसका ही बेटा है गैर थोड़ी ।
मुरारी ने इस बात के साथ अपना दाव खेल दिया था इस उम्मीद मे कि शायद ममता के बदले अमन सोनल की भी तसविरे उसे दिखाये और अपनी हीरोईन सी सेक्सी गोरी चिट्टी बहू को ऐसे तैयार होकर देखने के बारे मे सोच कर मुरारि का जजबात उबाल मारने लगे
मगर उसने अपने जजबात को काबू मे रखा और संयम से इंतजार करना सही समझा ।
राज के घर
रागिनी अनुज को लेकर दोपहर का टिफ़िन लेके बाजर के लिए निकल गयी थी , निशा भी किचन के काम निपटाने के बाद नहाने के लिए उपर जा चुकी थी
वही रागिनी के रूम मे शिला और रज्जो आपस मे मिलाप कर रही थी , शिला अपनी बड़ी सी तरबूज सी गाड़ फैलाये कुर्ती उठाए आगे झुकी हुई थी
रज्जो उसकी नंगी गोरी गाड़ को सहलाती हुई उसके नरम मुलायम चुतड पर पन्जा जड़ती है जिससे शिला सिस्क पड़ती है - अह्ह्ह्ह भाभीईई उम्म्ंम्ं ओह्ह्ह मान जाओ ना प्लीज एक बार
रज्जो उसकी गाड़ की दरारो मे उंगलिया घुसाती हुई सुराख मे उंगली पेल दी - अह्ह्ह तुम समझ नही रही हो दीदी उम्म्ंम रमन के पापा नाराज हो जायेन्गे
शिला - अह्ह्ह भाभीईई उह्ह्ह्ह उफ्फफ़फ़ उम्म्ंम खा जाओ उम्म्ंम्ं और चाटो उम्म्ं ये अनुज मुये ने मेरी चुत की खुजली बढा दी अह्ह्ह्ह सीईई
रज्जो शिला की टाँगे खोले उसकी चुत पर जीभ चला रहा थी और चाट रही थी ।
शिला - आह्ह भाभीईई बस तुम हा करो । वहा तुम्हे वो मजा मिलेगा वैसा तुमने कभी नही लिया होगा
रज्जो उसकी चुत से अलग हुई और अपनी नंगी छातिया मिजने लगी
शिला ने अपने पैर उसके गुदाज चुचो पर रख कर निप्प्ल पर सहलाने लगी जिस्से रज्जो की सासे उखड़ने लगी - ऊहह छोडो ना दिदी , चलो ना नहाते है आओ
ये बोल कर रज्जो उठ खड़ि हुई और अपनी कमर मे अटकी पेतिकोट को सरका कर सिर्फ पैंटी मे आ गयी और कुल्हे हिलाती मुस्कुराती हुई बाथरूम मे चली गयी ।
शिला भी अपनी कुरती उतार कर फेक दिया और तौलिया लेकर बाथरूम मे दाखिल हुई और उसकी नजर रज्जो के पर गयि
अपने जिस्म से ब्रा उतार कर पूरी नंगी हो रज्जो के करीब गयी और उसको पीछे से जकड़ लिया - अह्ह्ह भाभीई मेरी जान मान भी जाओ ना बस कुछ रोज की ही बात है
रज्जो के चुचो पर शिला के रेंगते हाथ उसने कस कर पकड़ लिये तो शिला ने उसकी चुचिया मिजनी शुरु कर दी - अह्ह्ह्ह दिदीईई उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ह्ह्ह
शिला - थोडा सा भरोसा रखो मेरी जान उम्म्ंम वहा तुम्हारा बदन और निखर जाएगा
"और तुम्हारे ये गोल मटोल तरबूज के चुतड उम्म्ंम्म्ं" , शिला निचे बैठ कर रज्जो की पैंती के गाड़ से सरकाती हुई उसे चूमती हुई निचे करने लगी ।
शिला - ओह्ह भाभी तम्हारी ये गाड़ उम्म्ं इसको ऐसे ना तरसाओ इसमे तो जमाने भर के लन्ड घुसाने की जगह है उम्म्ंंम्ंम्ं सीईई
शिला रज्जो की गाड़ मसलती हुई उसके चुसने चाटने लगती है - अह्ह्ह्ह दीदी उउम्ंंंं ओह्ह्ह पर मुझे डर लगता है अह्ह्ह रमन के पापा को क्या कहुगी मै उम्म्ं
शिला उठ खड़ी हुई और घुमाती हुई उसके लिप्स से अपने लिप्स जोड़ लिये , रज्जो ने भी उसके होठ चुसने शुरु कर दिये
दोनो रसभर अधर एकदुसरे मे घुले जा रहे थे और उनकी नगन छातियां आपस मे चुभ रही थी ,
रज्जो के हाथ शिला की मक्खन सी जांघो को उठा हुए उसके चर्बीदार चुतडो को सहला रही थी ।
रज्जो - अह्ह्ह मेरी जान मेरे सैयया मतल्ब रमन के पापा तो अभी से मेरे बिना पागल है , वो और मुझसे दूरी नही सह पायेंगे अह्ह्ह्ज समझ ना
शिला उसके गाड़ को पक्ड कर अपनी ओर उसको खिंचती हुई - तेरे उस गाड़ चतोरे साजन की फिकर ना कर उसको कैसे मनाना मै जानती हु मेरी चुदक्क्ड घोडी तू हा कर बस
रज्जो ने मुस्कुरा कर शिला को देखा - मतल्ब दीदी तुम कैसे ? शिला शर्माई और बोली - तेरे साजन बहुत कुछ तुझसे छिपाते है मेरी सजनी
रज्जो ने आगे बढा कर शिला के बुर टटोलती हुई - मतलब इस भोस्ड़े मे भी उन्होने खुन्टा गाड़ दिया उम्म्ंम
शिला मुस्कुराती हुई सिसकी तो रज्जो ने उसकी दोनो निप्प्ल पक्ड कर नोचती हुई उसे अपने अपनी बाहो के भर के उसके होठ चुसने लगी - अह्ह्ह साली रंडी तु तो मेरा ही माल खा गयी उम्म्ंम अब देख कैसे तेरा माल मै खाती हुई वो भी तेरे घर मे घुस कर
शिला खिल उठी - तो क्या सच मे भाभी तुम चलोगी
रज्जो - हा चलूँगी ना , अगर तु मेरी चुत चाट कर खुश कर दे
शिला मुस्कुरा कर उसकी बुर सहलाने लगी - उम्म्ं मेरि सेक्सी रान्ड़ इसमे मेरा ही फाय्दा है आजा
शिला सरकर निचे हो गयी और रज्जो ने उस्के मुह पर अपनी बुर रख दी
वही उपर नहाने के बाद निशा निचे आने लगी ये खोज खबर लेने कि अगर घर की बाकी औरते बिजी हो तो वो अरून के लैपटॉप मे पोर्न्ं देख पाये
चुपचाप दबे पाव वो निचे हाल मे आई और निचे पुरा सन्नाटा पसरा हुआ था और गेस्ट रूम का दरवाजा खुला
कही कोई नजर नही आया तो निशा रागिनी के कमरे की ओर बढ़ी
दरवाजा खुला हुआ था और बाथरूम से तेज सिस्किया और अवाजे गूंज रही ।
निशा ने भागकर सबसे पहले मेन गेट चेक किया और वापस आई उसकी सासे तेज चल रही थी तेज कामुक सिसकियाँ सूनकर उस्के जहन मे समझ आ रही था किसी की तगडी पेलाई चल रही थी मगर किसकी ?
उसके निप्प्ल कडक हो गये और सासे दुगनी गति से चल रही थी , कलेजा थाम कर जैसे जैसे वो दरवाजे की ओर बढ़ रही थी उसको रज्जो की साफ और स्पष्ट गाली भरी चीख सुनाई दे रही - अह्ह्ह बहिनचोद चाट ओह्ह्ह ऐसे उम्म्ं खा मेरी बुर उह्ह्ह ओह्ह आज तुझे नहला दूँगी अपनी रस से ओह्ह्ह्ह एल्ह्ह्ह उम्म्ंम
निशा के कान खड़े हो गये कि रज्जो किसकी मुह पर अपना भोस्डा रग्ड रही है और जैसे ही उसने बाथरूम मे झाका तो देखा ,
बाथरूम की फर्श पर शिला बुआ फैली हुई गरदन उठा हुए थी और रज्जो मौसी अपनी चुत उनके मुह पर दर रही थी - लेह्ह्ह साली कुतिया चाट उम्म्ंम पी जाह्ह्ब उह्ह्ह मादरचोद उह्ह्ह लेह्ह्ह ओह्ह्ह ओझ्ह शिलाअह्ह्ह मेरी जान उम्म्ंम आ रहा है ओह
निशा की आंखे फटी की फटी रह गयी कि रज्जो मौसी और शिला बुआ एक साथ ऐसे , अन्जाने मे उसके मुह यही निकला - ओह्ह गॉड बुआ मौसी आप लोग ?
दोनो चौके और निशा को देख कर खड़े हो गये शिला की हालत खराब थी वो रज्जो से फुसफुसाई - अब क्या करे
रज्जो- अरे शिकार खुद चल कर आया तो हलाल होगा
रज्जो - तु यहा कया कर रही है ये , इधर आ पहले
निशा - हा लेकिन आप लोग ऐसे ? दरवाजा बन्द कर लेते
रज्जो- तु बड़ी समझदार है उम्म्ं इधर अभी तुझे ठिक करती ह
ये बोल कर रज्जो ने उसे पकड़ कर खिंच और लोवर के उपर से उसकी चुतड़ पर थपेड लगाती हुई - किसी के कमरे मे जाने से पहले दरवाजा खटखटाना चाहिये ना
निशा - अह्ह्ह सॉरी ना मौसी , लेकिन आप लोग ये सब क्या कर रहे थे अह्ह्ज्ज
रज्जो - दीदी इसको भी अनुज की तरह सजा दो , कपडे उतारो
अनुज की तरह सजा का मतलब कुछ कुछ समझ आ रहा था निशा को - क्या मतलब अनुज की तरह सजा, उसने भी देखा क्या आप दोनो
शिला उसका लोवर खिंच कर - देखो तो कैसे सवाल जवाब कर रही है हा ,बहुत बिगड़ गयी है तु भी
ये बोल कर शिला के चुतड़ पर चट्ट से पन्जे जड़ देती है जिस्से निशा का जिस्म झनझना जाता है -अह्ह्ह बुआ मार क्यू रहे हो ओह्ह्ज उम्म्ं
इधर रज्जो ने उसकी पैंती पकड़ कर खिंचती हुई - उसके गाड़ पर थपेड़ लगाती हुई - देखो तो इस्क्प एक तो चोरी उसपे से सिना जोरि
निशा - अह्ज्ज मैने किया क्या है लेकिन
रज्जो - अरे दिदी यही तुम्हारा बड़ा वाला समान लेके गयी थी
शिला - क्या सच मे ? ये लडकी बोल कहा रखा है उसे ,
रज्जो ये ऐसे नही बोलेगी इसको कमरे मे के चलो और
फिर रज्जो उसे टांग लिया और कमरे मे घोडी बना कर उसकी पैटी खिंच कर उसकी गाड़ पर थपेड लगा कर - बोल कहा रखा है तुने उसे
निशा - आह्ह क्या बोल रही हो मौसी मै कहा लाई थी
रज्जो - मैने साफ साफ देखा था दिदी इसको कमरे से निकलते हुए ,
शिला - तभी तो मै सोचू इसकी जवानी कैसे निखर रही है आह्ह अभी से इसने घोट रखा है इतना सारा
रज्जो - बोल देगी की नही वापस
निशा - मै नही लेके गयी थी बुआ बोलो ना मौसी को
रज्जो - ये ऐसे नही मानेगी रुक
रज्जो ने उसे लिटाया और उसके मुह पर बैठ गयी - उम्म्ंम बोल ऐसे ही तेरे ये जोबन मोटे हुए है उम्म्ंम
शिला - हा रुको मै भी निचे से चेक करती हु सारी सच्चाई खुल जायेगी ये बोल कर शिला ने उस्की टांगो से पैंती खिंच कर अलग कर दी , उसकी बजबजाती बुर पर हाथ फेर कर उसके फाके अलग करती हुई - हम्म्म्म साफ साफ लग रहा है इसने घुसाया उम्म्ंम
निशा - आह्ह सीईई ओह्ह्ह बुआ क्याअह्ह्ह कर रही हो उम्मममंम्ं ओह्ह्ह
रज्जो - साली रंडी ले चाट अह्ह्ह्ह बोल मत , तेरा भेद खुल गया है अह्ह्ह उम्म्ंम
निशा मुस्कुराई और आंख मारते हुए रज्जो से हल्के से बोली - लेकीन ड्रामा करने मे माजा आ रहा है
निशा हसती हुईई - ओह्ह्ह बुआ ये क्या कर रही हो अपनी बेटी के साथ उह्ह्ह्ह मत चाटो उसकी कुवारि चुत को अह्ह्ज सीईयियो
रज्जो निशा की शरारत पर हस पड़ि और अपनी बुर को उसके मुह पर रख दी जिसे निशा चाटने लगी
वहि शिला भुखी शेरनी की तरह निशा की बुर पर टुट पड़ि थी , उसके सपने आज हकिकत हो रहे थे , दिल मे जो अरमानो का बाग लेके आई थी वो खिल रहे थे
निशा की नमकीन चुत का स्वाद पाकर वो पागल हो गयी थी - आह्ह निशा तेरी बुर सच मे बहुत गर्म है उम्म्ं ऐसी ही कुवारि चुत का रस पसम्द है उम्मममं सीईई
निशा - अह्ह्ह बुआ अह्ह्ह इतनी अच्छी है क्या उम्म्ंम खा जाओ उह्ह्ह येस्स्स उम्म्ंम फ्क्क्क्क ओह्ह्ह जीभ से भी आह्ह हा ऐसे ही उम्म्ंम फक्क्क ओह्ह्ह बुआअह्ह्ह्ह मेरी प्यारी बुआ ओह्ह्ह अह्ह्ह्ह आ रहा है उह्ह्ह्ह
रज्जो - रुक जा रुका जा ऐसे नही मुझे भी तो अपनी भतीजी के चुत का रस लेने दे आजा
ये बोल कर रज्जो उठी और निशा की टांगो मे कैची बना कर उसकी चुत पर अपनी चुत रगड़ने लगी - अह्ह्ह मौसी उह्ह्ह ये तो अलग ही मजा आ है अह्ह्ह्ज उम्म्ंम्ं कितना तप रहा है आप्का भोस्डा अह्ह्ह उह्ह्ज्ज फक्क्क्क उम्म्ंम्ं
शिला - अह झड जा बेटी झड जा अपनी मौसी के बुर पर ओह्ह्ह
निशा - हा बुआ फिर आप चाटना अपनी बेटी की वुर बोलो चातोगे ना उम्म्ंम अह्ह्ज्ज्ज सीयिओई और तेज मौसी अह्ह्ज बहुत मुलायम है अह्ह्ह रहा नही जा रहा है अह्ह्ह्ज फक्क्क्क ऐसे ही उह्ह्ह्ह आओ जा बुआ तुम भी अओझ्ह अह्ह्ज
शिला उठ कर उनके पास आ गयी और दोनौ उसकी चुचिया मुह के भर कर चुसने लगे - आह्ह बेटा उम्म्ंम पी ले ऊहह और चुस उह्झ भाभीईई अह्ह्ह काट डालोगी क्या आह्ह सीईईईई अह्ह्ह
रज्जो - ओह्ह्ह निशा अह्ह्ह सीईई आ रहा है मेरा अओह्ह्ह्ह।
निशा -हा मौसी मेरा भी उम्म्ंम अह्ह्ह्ह हहह फ्क्क्क अह्ह्ह मम्मीईई अह्ह्ह आह्ह आ रहा उह्ह्ह बुआआ हहहहह आ गया आ गया ओह्ह्ह शिट उह्ह्ह फक्क्क ऊहह फक्क्क
।
रज्जो और निशा हाफने लगे और फैल लार लेट गये वही शिला बारी बारी से दोनो के बुर के मिले हुए रस को चाटने लगी ।
जारी रहेगी
UPDATE 218
अमन के घर
दोपहर के खाने के बाद ममता, दुलारी और संगीता को लेकर कुछ खरीदारी के लिए बाजार निकल गयी ।
मदन अपने कमरे मे आराम फरमा रहा था तो रिन्की दुलारि के कमरे मे दो घन्टे से सो रही थी जबसे अमन ने उसकी चुत फाडी थी ।
इधर अमन भी सोनल के साथ कुछ प्रेम भरे पल बाट रहा था । सोनल भी कल के लिए अपने घर वालो से मिलने के लिए उत्साहित थी
दोनो प्रेमी आपस मे एकदूसरे से लिपटे हुए थे और अमन की दिलीइच्छा थी कि इस बार निशा भी आये ।
सोनल उसे छेड़ते हुए तुनक कर - आपको तो उसके काले अंगूर का ही रस पीना है , यहा मेरी गुलाबी मीठी किस्मिस की कली सूख रही है उसका नही ध्यान
अमन सोनल के प्यार भरे ताने से भितर से सिहर उठा और उसका खुन्टा लोवर मे हरकत करने लगा । उसने सोनल को अपनी ओर कसा और अपने तम्बू का बम्बू उसकी साडी के उपर से उसकी चुत पर चुभोता हुआ - ओह्ह्ह मेरी जान तेरे इस गुलाबी किस्मिस के दाने को अभी गीला कर देता हु
ये बोलकर अमन ने सोनल की मोटी उभरी हुई ब्लाउज से झाकती छातियो पर हाथ फेरा और सोनल सिहर उठी - अह्ह्ह मेरे राजाह्ह्ह्ह उम्म्ंम सीईई ना जाने आपमे क्या जादू है बाबू छूते हो और ये खड़ी हो जाती है
अमन उसकी मुलायम दूध से भरी मोटी पपीते सी छातियो को हाथ मे भर कर मिजता हुआ ब्लाउज के उपर से निप्प्ल वाली जगह को मुह मे भर काटता है - उम्म्ंमममं सीईई ओह्ह मेरी जान तुम्हारी इन्ही रसदार boobs का ही तो दीवाना हु मै उम्म्ंम
सोनल- अह्ह्ह माय बेबी उम्म्ंम सक इट उह्ह्ह मेरा बाबू उम्म्ंम ओह्ह आराम से ईईइस्स्स्स
तभी दरवाजे पर दसतक हुई और दोनो अलग हुए , इस अचरज और शंका भरे भाव से घर की औरते तो बाजार गयि है फिर कौन उपर आकर उन्हे परेशान करेगा
तभी अमन का दिमाग ठनका और उसे अपने बाप की याद आई । वो जल्दी से उठ कर खड़ा हुआ और हड़बड़ाहट भरे लहजे मे - उठो उठो , पापा है !
ससुर के आने की बात पर सोनल की भी हालत खराब हुई जल्दी जल्दी वो भी खड़ि होकर अपने जोबनो पर आन्चल डाला और साडी सही करने लगी ।
अमन ने अपना लन्ड सेट करने को कोसिस की मगर कोसिस नाकाम ही रही , उसका लन्ड मोटे रॉड की तरह अभी भी उसके लोवर मे उभरा हुआ साफ नजर आ रहा था ।
बड़ी मुश्किल से दरवाजे के ओट मे खुद को छिपाते हुए उसने दरवाजा खोला और सामने मुरारी था ।
सारी हकीकत से परिचित होने के बाद भी अमन ने उस्से सवाल किया - अरे पापा आप यहा ? फ़ोन कर देते !
मुरारी झिझक भरे लहजे मे अमन के पीछे खड़ी सोनल को एक नजर देखा जो सन्सकार बस मुस्कराती हुई अपने सर पल्लू कर रही थी
और अनायास मुरारि की नजर अपनी नयी नवेली बहु के चिकने पेट के किनारो पर चली गयि , जिसकी कोमलता और मलाई सी गोरी चमडी देख कर मुरारी एक पल के लिए सम्मोहीत सा हो गया , मगर अगले ही पल उसने खुद को उस नजारे से अलग किया - अह फ़ोन किया था मैने , तुने उठाया नही ।तुझ्से थोडा काम है जरा निचे आना
ये बोलकर मुरारी घूम कर वापस जाने लगा और फिर घूम कर - और वो समान कल मगाया था वो लेते आना ।
जाते जाते एक बार फिर मुरारी ने सोनल की चिकनी कमर पर नजर मारनी चाही मगर इस बार देखा तो सोनल मे सब कुछ अच्छे से ढक रखा था । उस पल भर मे ही मुरारी समझ गया कि सोनल ने उसकी चोरी पकड ली और वो बिना अपनी बहू की ओर देखे चुपचाप निकल गया ।
सोनल ने पार्सल के बारे पूछा तो अमन के बात बदल दी और वो पैकेट लेकर निकल गया नीचे
वही मुरारी अपने कमरे मे बेचैन टहल रहा था जैसे ही अमन कमरे मे दाखिल हुआ उसकी चेहरे पर मुस्कान छा गयी - आ गया बेटा आ आ बैठ
अमन मुस्कुरा कर सोफे पर बैठ गया और मुरारी हसता हुआ - माफ करना बेटे मैने तेरे और बहू के एकांत के पल में डिस्टर्ब कर दिया ।
अमन लजाता हुआ मुस्कुरा कर - क्या पापा ऐसा कुछ नही कर रहे थे हम लोग , सची मे
मुरारि - वो जब तु दरवाजे के पीछे छिपा था तभी मै समझ गया है हाहाहा अरे मुझसे क्या शर्माना , ऐसा तो मेरे साथ भी हुआ है कई बार हिहिहिही
अमन - हैं सच मे ? कब ?
मुरारी- अरे वो तब जवानी के दिनो की बात थी , गाव वाले घर मे मुश्किल से तो तेरी मा के साथ समय मिलता था और ज्यादातर तो हाहहहा
अमन - क्या ज्यादातर ?
मुरारी हस्ता हुआ - अरे वो तुम जवान लोग आपस मे आजकल क्या बोलते हो ? एलकेपीडी ...
अमन हसता हुआ - वो केएलपीडी होता है पापा हाहाहा
मुरारी हस्ता हुआ - हा वही खड़े लन्ड पर धोखा हाहाहा यही मतलब है ना उसका
मुरारि के यूँ खुल कर मजाक करने से अमन थोडा सा लाज से झेप जाता है और मुस्कुरा कर - जी
मुरारी अपनी बात आगे बढ़ाता हुआ - और उसपे से तेरी मा , खूब नखरिली हाहाहा मुझे सताने मे ना जाने क्या मजा आता है उसे ।
" वो तो सबकी बिवियाँ करती है ", अमन बहुत महिन सा बुदबुदाया मगर मुरारि के तेज कानो ने उसकी आवाज को पकड़ लिया ।
मुरारि हस्ता हुआ - अच्छा तो बहू भी कुछ नही है हाहाहा , वैसे रात मे क्या हुआ ?
अमन के कान खड़े हो गये कि ये क्या पूछ रहा है उसका बाप ।
अमन - मतलब ?
मुरारी धीमी आवाज मे उसके पास होकर - अरे वो रात मे दिया था ना , वो यूज किया कि नही ?
अमन लाज भरि मुस्कुराहट के साथ - हम्म्म किया ।
मुरारी का खुन्टा एकदम कड़क होने लगा उसे जानने की उत्सुकता भी थी और झिझक भी हो रही थी
हिम्मत कर मुरारी ने पूछ ही लिया - कितनी बार
अमन मुस्कुरा कर - आपने जितनी बार कहा था
मुरारी का लण्ड एकदम से फड़फडा उठा - और बहू , उसने ऐतराज नही किया ?
अमन - उहू ... मेरे ख्याल से उतना नानुकुर सब बिवियां करती होगी बस उतना ही उसने भी किया ।
मुरारी हसता हुआ - वैसे पूछना तो नही चाहिये लेकिन कैसा लगा तुझे उस समय
अमन के चेहरे पर मुस्कुराहट थी मगर शर्म से लाल होते उसके गाल भी साफ नजर आ रहे थे - अह अब कैसे बताऊ , आपको तो पता है कैसा लगता है । इसमे बताने जैसा क्या है पापा ?
मुरारी पैर फैला कर अंगड़ाई लेता है और पजामे मे बना हुआ उस्का तम्बू साफ साफ अमन को दिखता है - अह्ह्ह अब क्या बताऊ अमन तुझे और बहू को देखता हु तो अपने जवानी के दिन की यादे ताज़ा हो जाती है । शुरुआती दिनो की वो मीठी शरारतें , घर मे चोरी छिपकर तेरी मा के देह से छिपकना खेलना उम्म्ं वो यादे उफ्फ़फ्फ
अमन खिलखिलाता है तो मुरारी मुस्कुरा कर - हा भाई सच कह रहा हु , तुझे तो तेरा अपना कमरा मिला है , गाव मे होता तो पता चलता कैसे रात के सन्नाटे मे सासे थाम कर सिसकिया घोट कर चुदाई करते हैं ।
अमन हस रहा था
मुरारी- लेकिन उस तकलिफ मे भी मजा होता था जब हम अपनी मस्तियाँ पूरी करने मे कामयाब हो जाते थे । जब मै तेरी मा के भीतर झड़ जाता था सारी खुन्नस सारी शिकायते सब बह जाती थी ।
अमन गला साफ करता हुआ चोर नजरो से अपने बाप को उसकी यादो मे खोया हुआ अपना मोटा मुसल पजामे के उपर से मसलता देखता है और खुद भी अंगड़ाई लेकर अपना लन्ड मसल कर सीधा करता हुआ - आह्ह पापा लो ये आपका पार्सल
मुरारी- अरे हा खोल खोल देखता हु जरा
अमन फटाफ़ट से पैकेज खोलता है और फिर उसमे से ब्रा पैंटी को निकाल कर अपने पापा को देता है ।
मुरारी उस नरम मुलायम महिन सूत वाले कपड़ों के बने ब्रा और पैंटी का मखमलीपन अपनी उंगलियो मे मह्सूस करता हुआ उन्हे अपने नथुनो तक ले जाता है - उम्म्ंम्ममम्ंम्ं वाह एकदम फ्रेश है
अमन अपने पापा की कामुकता को अजीब नजरो से निहारता है - क्या सुँघ रहे हो पापा
मुरारी हस कर - ओह मुझे ये नये ताजे कपड़ो की खुशबू अच्छी लगती है और जब इसमे तेरी के देह की खुस्बू भीन जायेगी उह्ह्ह्ह तब तो येहहह ओह्ह्ह्ह्ह
अमन अपनी मा के जिस्म की खुस्बू के नाम से ही गनगना गया और उसका मुसल हथौड़ा सा हो गया । गुपचुप से उसने अपना मुसल खुजाया ।
मुरारी- और इसका कलर बहुत खिलेगा तेरी मा पर और इस रंग की चुन्नी भी तो है उसके पास
अमन - चुन्नी ? इसपे चुन्नी का क्या काम ?
मुरारी खिलखिला कर हसता हुआ अमन के कंधे पर हाथ घुमाता है - हाहाहाहा तु भले ही इस जमाने का है मगर शादीशुदा जीवन के मजे लेने मे पीछे ही रहेगा अपने बाप से
अमन - मै समझा नही पापा , आखिर ब्रा पैंटी के साथ उसकी मैचींग चुन्नी का क्या काम?
मुरारी- क्या काम!! बेटा तुझे एक बार की बात बताता हु
हुआ यूँ था कि शादी के कुछ महीने बाद एक रिस्तेदार के यहा शादी मे घर के बाकी जन गये हुए थे और चूकि तेरी मा अभी नयी ब्याही आई थी तो उसको साल भर तक किसी के यहा जाने पर मनाही थी और उसकी देख रेख का ख्याल रखने के लिए मुझे रुकना पड़ा था
अमन - अरे वाह फिर
मुरारी अमन की चहकपने पर हसकर - बताता हु भाई सुन
पूरे 3 रोज के लिए घर के सारे लोग गये थे और मैने तेरी मा को इस बात के लिए मनाने लगा कि वो फिर से शादी वाला लाल जोडा पहने , बहुत नानुकुर और प्यार जताने पर वो मान ही गयी
अमन - मतलब फिर से सुहागरात हिहिही
मुरारी- हा ऐसा ही कुछ फिर मुझे ख्याल आया क्यूँ ना उसके लाल जोड़े को पुरा करने के लिए लाल रंग की ब्रा पैंटी भी ला दूँ और उसी रोज मै बाजार जाकर ले आया ।
उस रोज तेरी मा बहुत खुश थी लेकीन जब मैने कहा कि मुझे इसे पहन कर दिखा तो वो शर्मा कर मना करने लगी।
अपने पापा की बातें और अपनी मा को लाल रंग की ब्रा पैंटी मे सोच कर ही अमन का लन्ड बौरा गया , वो अपना मुसल रगड़ते हुए सिसका - फिर पापा क्या हुआ , क्या मा पहन कर आई ?
मुरारी- हा बेटा और वो नजारा आजतक नही भुला उफ्फ्फ जैसे ही मै कमरे मे दाखिल हुआ मेरा मन मचल उठा , दिल खुशी से उछलने लगा , सामने तेरी मा बिस्तर के पास खड़ी थी उसने अपने सर पर शादी की विदाई वाली लाल चुनरी ओढ़ कर घूँघट कर रखी थी और गले से निचे उसका गोरा संगमरमरी बदन मेरे दिये तोहफो से सजा हुआ था ।
वो छींट वाली प्रिंट की ब्रा उसके तंदुरुस्त दूध पर कसे हुए थे और वो पतले पट्टी वाली लाल कच्छी उसकी जांघो के बीच से जैसे कमल सी खिल उठी थी ।
अमन का दिल अपने पापा की बाते सुन कर जोरो से धड़कने लगा उसका लन्ड अपनी मा को लाल ब्रा पैंती मे सोच कर पुरा फडकने लगा , चेहरे पर कामुकता साफ साफ हावि दिख रही थी । वही मुरारी बड़ी बेबाकी और बेहिचक होकर अमन को सारी बाते बता रहा था
मुरारी- सच कह रहा हु बेटा अगर तु उस समय अपनी मा को देख लेता तो तु भी उसका दिवाना हो जाता हाय्य्य
और उसने अमन की ओर देखा जो आंखे बन्द किये तेज तेज सासे ले रहा था और उसका हाथ उसके लन्ड को भींच रहा था । मुरारि समझ गया कि अमन अपनी मा को अपनी कल्पना मे देख रहा है ।
मुरारी- बस आज रात वो यादे ताज़ा होने वाली है ,आज की रात मै उसे फिर तैयार होने को कहुगा
अमन - हा पापा मै भी
मुरारी चौककर - क्या मतलव
अमन हस कर - अरे मतलब आज मै भी सोनल को ऐसे ही तैयार होने को कहूँगा , वैसे क्या मा ने सारे साज सृंगार किये थे या बस चुन्नी ली थी ।
मुरारी हस कर - अरे सबर कर ले , कल मै तुझे उसकी फोटो दिखाऊँगा फिर तु समझ जायेगा
अमन की आंखे चमक उठी - क्या सच पापा ?
मुरारी मन मे उभरते लालच को दबाता हुआ - हा उसमे क्या है , तु उसका ही बेटा है गैर थोड़ी ।
मुरारी ने इस बात के साथ अपना दाव खेल दिया था इस उम्मीद मे कि शायद ममता के बदले अमन सोनल की भी तसविरे उसे दिखाये और अपनी हीरोईन सी सेक्सी गोरी चिट्टी बहू को ऐसे तैयार होकर देखने के बारे मे सोच कर मुरारि का जजबात उबाल मारने लगे
मगर उसने अपने जजबात को काबू मे रखा और संयम से इंतजार करना सही समझा ।
राज के घर
रागिनी अनुज को लेकर दोपहर का टिफ़िन लेके बाजर के लिए निकल गयी थी , निशा भी किचन के काम निपटाने के बाद नहाने के लिए उपर जा चुकी थी
वही रागिनी के रूम मे शिला और रज्जो आपस मे मिलाप कर रही थी , शिला अपनी बड़ी सी तरबूज सी गाड़ फैलाये कुर्ती उठाए आगे झुकी हुई थी
रज्जो उसकी नंगी गोरी गाड़ को सहलाती हुई उसके नरम मुलायम चुतड पर पन्जा जड़ती है जिससे शिला सिस्क पड़ती है - अह्ह्ह्ह भाभीईई उम्म्ंम्ं ओह्ह्ह मान जाओ ना प्लीज एक बार
रज्जो उसकी गाड़ की दरारो मे उंगलिया घुसाती हुई सुराख मे उंगली पेल दी - अह्ह्ह तुम समझ नही रही हो दीदी उम्म्ंम रमन के पापा नाराज हो जायेन्गे
शिला - अह्ह्ह भाभीईई उह्ह्ह्ह उफ्फफ़फ़ उम्म्ंम खा जाओ उम्म्ंम्ं और चाटो उम्म्ं ये अनुज मुये ने मेरी चुत की खुजली बढा दी अह्ह्ह्ह सीईई
रज्जो शिला की टाँगे खोले उसकी चुत पर जीभ चला रहा थी और चाट रही थी ।
शिला - आह्ह भाभीईई बस तुम हा करो । वहा तुम्हे वो मजा मिलेगा वैसा तुमने कभी नही लिया होगा
रज्जो उसकी चुत से अलग हुई और अपनी नंगी छातिया मिजने लगी
शिला ने अपने पैर उसके गुदाज चुचो पर रख कर निप्प्ल पर सहलाने लगी जिस्से रज्जो की सासे उखड़ने लगी - ऊहह छोडो ना दिदी , चलो ना नहाते है आओ
ये बोल कर रज्जो उठ खड़ि हुई और अपनी कमर मे अटकी पेतिकोट को सरका कर सिर्फ पैंटी मे आ गयी और कुल्हे हिलाती मुस्कुराती हुई बाथरूम मे चली गयी ।
शिला भी अपनी कुरती उतार कर फेक दिया और तौलिया लेकर बाथरूम मे दाखिल हुई और उसकी नजर रज्जो के पर गयि
अपने जिस्म से ब्रा उतार कर पूरी नंगी हो रज्जो के करीब गयी और उसको पीछे से जकड़ लिया - अह्ह्ह भाभीई मेरी जान मान भी जाओ ना बस कुछ रोज की ही बात है
रज्जो के चुचो पर शिला के रेंगते हाथ उसने कस कर पकड़ लिये तो शिला ने उसकी चुचिया मिजनी शुरु कर दी - अह्ह्ह्ह दिदीईई उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ह्ह्ह
शिला - थोडा सा भरोसा रखो मेरी जान उम्म्ंम वहा तुम्हारा बदन और निखर जाएगा
"और तुम्हारे ये गोल मटोल तरबूज के चुतड उम्म्ंम्म्ं" , शिला निचे बैठ कर रज्जो की पैंती के गाड़ से सरकाती हुई उसे चूमती हुई निचे करने लगी ।
शिला - ओह्ह भाभी तम्हारी ये गाड़ उम्म्ं इसको ऐसे ना तरसाओ इसमे तो जमाने भर के लन्ड घुसाने की जगह है उम्म्ंंम्ंम्ं सीईई
शिला रज्जो की गाड़ मसलती हुई उसके चुसने चाटने लगती है - अह्ह्ह्ह दीदी उउम्ंंंं ओह्ह्ह पर मुझे डर लगता है अह्ह्ह रमन के पापा को क्या कहुगी मै उम्म्ं
शिला उठ खड़ी हुई और घुमाती हुई उसके लिप्स से अपने लिप्स जोड़ लिये , रज्जो ने भी उसके होठ चुसने शुरु कर दिये
दोनो रसभर अधर एकदुसरे मे घुले जा रहे थे और उनकी नगन छातियां आपस मे चुभ रही थी ,
रज्जो के हाथ शिला की मक्खन सी जांघो को उठा हुए उसके चर्बीदार चुतडो को सहला रही थी ।
रज्जो - अह्ह्ह मेरी जान मेरे सैयया मतल्ब रमन के पापा तो अभी से मेरे बिना पागल है , वो और मुझसे दूरी नही सह पायेंगे अह्ह्ह्ज समझ ना
शिला उसके गाड़ को पक्ड कर अपनी ओर उसको खिंचती हुई - तेरे उस गाड़ चतोरे साजन की फिकर ना कर उसको कैसे मनाना मै जानती हु मेरी चुदक्क्ड घोडी तू हा कर बस
रज्जो ने मुस्कुरा कर शिला को देखा - मतल्ब दीदी तुम कैसे ? शिला शर्माई और बोली - तेरे साजन बहुत कुछ तुझसे छिपाते है मेरी सजनी
रज्जो ने आगे बढा कर शिला के बुर टटोलती हुई - मतलब इस भोस्ड़े मे भी उन्होने खुन्टा गाड़ दिया उम्म्ंम
शिला मुस्कुराती हुई सिसकी तो रज्जो ने उसकी दोनो निप्प्ल पक्ड कर नोचती हुई उसे अपने अपनी बाहो के भर के उसके होठ चुसने लगी - अह्ह्ह साली रंडी तु तो मेरा ही माल खा गयी उम्म्ंम अब देख कैसे तेरा माल मै खाती हुई वो भी तेरे घर मे घुस कर
शिला खिल उठी - तो क्या सच मे भाभी तुम चलोगी
रज्जो - हा चलूँगी ना , अगर तु मेरी चुत चाट कर खुश कर दे
शिला मुस्कुरा कर उसकी बुर सहलाने लगी - उम्म्ं मेरि सेक्सी रान्ड़ इसमे मेरा ही फाय्दा है आजा
शिला सरकर निचे हो गयी और रज्जो ने उस्के मुह पर अपनी बुर रख दी
वही उपर नहाने के बाद निशा निचे आने लगी ये खोज खबर लेने कि अगर घर की बाकी औरते बिजी हो तो वो अरून के लैपटॉप मे पोर्न्ं देख पाये
चुपचाप दबे पाव वो निचे हाल मे आई और निचे पुरा सन्नाटा पसरा हुआ था और गेस्ट रूम का दरवाजा खुला
कही कोई नजर नही आया तो निशा रागिनी के कमरे की ओर बढ़ी
दरवाजा खुला हुआ था और बाथरूम से तेज सिस्किया और अवाजे गूंज रही ।
निशा ने भागकर सबसे पहले मेन गेट चेक किया और वापस आई उसकी सासे तेज चल रही थी तेज कामुक सिसकियाँ सूनकर उस्के जहन मे समझ आ रही था किसी की तगडी पेलाई चल रही थी मगर किसकी ?
उसके निप्प्ल कडक हो गये और सासे दुगनी गति से चल रही थी , कलेजा थाम कर जैसे जैसे वो दरवाजे की ओर बढ़ रही थी उसको रज्जो की साफ और स्पष्ट गाली भरी चीख सुनाई दे रही - अह्ह्ह बहिनचोद चाट ओह्ह्ह ऐसे उम्म्ं खा मेरी बुर उह्ह्ह ओह्ह आज तुझे नहला दूँगी अपनी रस से ओह्ह्ह्ह एल्ह्ह्ह उम्म्ंम
निशा के कान खड़े हो गये कि रज्जो किसकी मुह पर अपना भोस्डा रग्ड रही है और जैसे ही उसने बाथरूम मे झाका तो देखा ,
बाथरूम की फर्श पर शिला बुआ फैली हुई गरदन उठा हुए थी और रज्जो मौसी अपनी चुत उनके मुह पर दर रही थी - लेह्ह्ह साली कुतिया चाट उम्म्ंम पी जाह्ह्ब उह्ह्ह मादरचोद उह्ह्ह लेह्ह्ह ओह्ह्ह ओझ्ह शिलाअह्ह्ह मेरी जान उम्म्ंम आ रहा है ओह
निशा की आंखे फटी की फटी रह गयी कि रज्जो मौसी और शिला बुआ एक साथ ऐसे , अन्जाने मे उसके मुह यही निकला - ओह्ह गॉड बुआ मौसी आप लोग ?
दोनो चौके और निशा को देख कर खड़े हो गये शिला की हालत खराब थी वो रज्जो से फुसफुसाई - अब क्या करे
रज्जो- अरे शिकार खुद चल कर आया तो हलाल होगा
रज्जो - तु यहा कया कर रही है ये , इधर आ पहले
निशा - हा लेकिन आप लोग ऐसे ? दरवाजा बन्द कर लेते
रज्जो- तु बड़ी समझदार है उम्म्ं इधर अभी तुझे ठिक करती ह
ये बोल कर रज्जो ने उसे पकड़ कर खिंच और लोवर के उपर से उसकी चुतड़ पर थपेड लगाती हुई - किसी के कमरे मे जाने से पहले दरवाजा खटखटाना चाहिये ना
निशा - अह्ह्ह सॉरी ना मौसी , लेकिन आप लोग ये सब क्या कर रहे थे अह्ह्ज्ज
रज्जो - दीदी इसको भी अनुज की तरह सजा दो , कपडे उतारो
अनुज की तरह सजा का मतलब कुछ कुछ समझ आ रहा था निशा को - क्या मतलब अनुज की तरह सजा, उसने भी देखा क्या आप दोनो
शिला उसका लोवर खिंच कर - देखो तो कैसे सवाल जवाब कर रही है हा ,बहुत बिगड़ गयी है तु भी
ये बोल कर शिला के चुतड़ पर चट्ट से पन्जे जड़ देती है जिस्से निशा का जिस्म झनझना जाता है -अह्ह्ह बुआ मार क्यू रहे हो ओह्ह्ज उम्म्ं
इधर रज्जो ने उसकी पैंती पकड़ कर खिंचती हुई - उसके गाड़ पर थपेड़ लगाती हुई - देखो तो इस्क्प एक तो चोरी उसपे से सिना जोरि
निशा - अह्ज्ज मैने किया क्या है लेकिन
रज्जो - अरे दिदी यही तुम्हारा बड़ा वाला समान लेके गयी थी
शिला - क्या सच मे ? ये लडकी बोल कहा रखा है उसे ,
रज्जो ये ऐसे नही बोलेगी इसको कमरे मे के चलो और
फिर रज्जो उसे टांग लिया और कमरे मे घोडी बना कर उसकी पैटी खिंच कर उसकी गाड़ पर थपेड लगा कर - बोल कहा रखा है तुने उसे
निशा - आह्ह क्या बोल रही हो मौसी मै कहा लाई थी
रज्जो - मैने साफ साफ देखा था दिदी इसको कमरे से निकलते हुए ,
शिला - तभी तो मै सोचू इसकी जवानी कैसे निखर रही है आह्ह अभी से इसने घोट रखा है इतना सारा
रज्जो - बोल देगी की नही वापस
निशा - मै नही लेके गयी थी बुआ बोलो ना मौसी को
रज्जो - ये ऐसे नही मानेगी रुक
रज्जो ने उसे लिटाया और उसके मुह पर बैठ गयी - उम्म्ंम बोल ऐसे ही तेरे ये जोबन मोटे हुए है उम्म्ंम
शिला - हा रुको मै भी निचे से चेक करती हु सारी सच्चाई खुल जायेगी ये बोल कर शिला ने उस्की टांगो से पैंती खिंच कर अलग कर दी , उसकी बजबजाती बुर पर हाथ फेर कर उसके फाके अलग करती हुई - हम्म्म्म साफ साफ लग रहा है इसने घुसाया उम्म्ंम
निशा - आह्ह सीईई ओह्ह्ह बुआ क्याअह्ह्ह कर रही हो उम्मममंम्ं ओह्ह्ह
रज्जो - साली रंडी ले चाट अह्ह्ह्ह बोल मत , तेरा भेद खुल गया है अह्ह्ह उम्म्ंम
निशा मुस्कुराई और आंख मारते हुए रज्जो से हल्के से बोली - लेकीन ड्रामा करने मे माजा आ रहा है
निशा हसती हुईई - ओह्ह्ह बुआ ये क्या कर रही हो अपनी बेटी के साथ उह्ह्ह्ह मत चाटो उसकी कुवारि चुत को अह्ह्ज सीईयियो
रज्जो निशा की शरारत पर हस पड़ि और अपनी बुर को उसके मुह पर रख दी जिसे निशा चाटने लगी
वहि शिला भुखी शेरनी की तरह निशा की बुर पर टुट पड़ि थी , उसके सपने आज हकिकत हो रहे थे , दिल मे जो अरमानो का बाग लेके आई थी वो खिल रहे थे
निशा की नमकीन चुत का स्वाद पाकर वो पागल हो गयी थी - आह्ह निशा तेरी बुर सच मे बहुत गर्म है उम्म्ं ऐसी ही कुवारि चुत का रस पसम्द है उम्मममं सीईई
निशा - अह्ह्ह बुआ अह्ह्ह इतनी अच्छी है क्या उम्म्ंम खा जाओ उह्ह्ह येस्स्स उम्म्ंम फ्क्क्क्क ओह्ह्ह जीभ से भी आह्ह हा ऐसे ही उम्म्ंम फक्क्क ओह्ह्ह बुआअह्ह्ह्ह मेरी प्यारी बुआ ओह्ह्ह अह्ह्ह्ह आ रहा है उह्ह्ह्ह
रज्जो - रुक जा रुका जा ऐसे नही मुझे भी तो अपनी भतीजी के चुत का रस लेने दे आजा
ये बोल कर रज्जो उठी और निशा की टांगो मे कैची बना कर उसकी चुत पर अपनी चुत रगड़ने लगी - अह्ह्ह मौसी उह्ह्ह ये तो अलग ही मजा आ है अह्ह्ह्ज उम्म्ंम्ं कितना तप रहा है आप्का भोस्डा अह्ह्ह उह्ह्ज्ज फक्क्क्क उम्म्ंम्ं
शिला - अह झड जा बेटी झड जा अपनी मौसी के बुर पर ओह्ह्ह
निशा - हा बुआ फिर आप चाटना अपनी बेटी की वुर बोलो चातोगे ना उम्म्ंम अह्ह्ज्ज्ज सीयिओई और तेज मौसी अह्ह्ज बहुत मुलायम है अह्ह्ह रहा नही जा रहा है अह्ह्ह्ज फक्क्क्क ऐसे ही उह्ह्ह्ह आओ जा बुआ तुम भी अओझ्ह अह्ह्ज
शिला उठ कर उनके पास आ गयी और दोनौ उसकी चुचिया मुह के भर कर चुसने लगे - आह्ह बेटा उम्म्ंम पी ले ऊहह और चुस उह्झ भाभीईई अह्ह्ह काट डालोगी क्या आह्ह सीईईईई अह्ह्ह
रज्जो - ओह्ह्ह निशा अह्ह्ह सीईई आ रहा है मेरा अओह्ह्ह्ह।
निशा -हा मौसी मेरा भी उम्म्ंम अह्ह्ह्ह हहह फ्क्क्क अह्ह्ह मम्मीईई अह्ह्ह आह्ह आ रहा उह्ह्ह बुआआ हहहहह आ गया आ गया ओह्ह्ह शिट उह्ह्ह फक्क्क ऊहह फक्क्क
।
रज्जो और निशा हाफने लगे और फैल लार लेट गये वही शिला बारी बारी से दोनो के बुर के मिले हुए रस को चाटने लगी ।
जारी रहेगी
Wow bhai ji kya dhasu update Diya aap ne jise pad kr land khada ho gya yrrr jald hi agla update Dena bhai jiUPDATE 218
अमन के घर
दोपहर के खाने के बाद ममता, दुलारी और संगीता को लेकर कुछ खरीदारी के लिए बाजार निकल गयी ।
मदन अपने कमरे मे आराम फरमा रहा था तो रिन्की दुलारि के कमरे मे दो घन्टे से सो रही थी जबसे अमन ने उसकी चुत फाडी थी ।
इधर अमन भी सोनल के साथ कुछ प्रेम भरे पल बाट रहा था । सोनल भी कल के लिए अपने घर वालो से मिलने के लिए उत्साहित थी
दोनो प्रेमी आपस मे एकदूसरे से लिपटे हुए थे और अमन की दिलीइच्छा थी कि इस बार निशा भी आये ।
सोनल उसे छेड़ते हुए तुनक कर - आपको तो उसके काले अंगूर का ही रस पीना है , यहा मेरी गुलाबी मीठी किस्मिस की कली सूख रही है उसका नही ध्यान
अमन सोनल के प्यार भरे ताने से भितर से सिहर उठा और उसका खुन्टा लोवर मे हरकत करने लगा । उसने सोनल को अपनी ओर कसा और अपने तम्बू का बम्बू उसकी साडी के उपर से उसकी चुत पर चुभोता हुआ - ओह्ह्ह मेरी जान तेरे इस गुलाबी किस्मिस के दाने को अभी गीला कर देता हु
ये बोलकर अमन ने सोनल की मोटी उभरी हुई ब्लाउज से झाकती छातियो पर हाथ फेरा और सोनल सिहर उठी - अह्ह्ह मेरे राजाह्ह्ह्ह उम्म्ंम सीईई ना जाने आपमे क्या जादू है बाबू छूते हो और ये खड़ी हो जाती है
अमन उसकी मुलायम दूध से भरी मोटी पपीते सी छातियो को हाथ मे भर कर मिजता हुआ ब्लाउज के उपर से निप्प्ल वाली जगह को मुह मे भर काटता है - उम्म्ंमममं सीईई ओह्ह मेरी जान तुम्हारी इन्ही रसदार boobs का ही तो दीवाना हु मै उम्म्ंम
सोनल- अह्ह्ह माय बेबी उम्म्ंम सक इट उह्ह्ह मेरा बाबू उम्म्ंम ओह्ह आराम से ईईइस्स्स्स
तभी दरवाजे पर दसतक हुई और दोनो अलग हुए , इस अचरज और शंका भरे भाव से घर की औरते तो बाजार गयि है फिर कौन उपर आकर उन्हे परेशान करेगा
तभी अमन का दिमाग ठनका और उसे अपने बाप की याद आई । वो जल्दी से उठ कर खड़ा हुआ और हड़बड़ाहट भरे लहजे मे - उठो उठो , पापा है !
ससुर के आने की बात पर सोनल की भी हालत खराब हुई जल्दी जल्दी वो भी खड़ि होकर अपने जोबनो पर आन्चल डाला और साडी सही करने लगी ।
अमन ने अपना लन्ड सेट करने को कोसिस की मगर कोसिस नाकाम ही रही , उसका लन्ड मोटे रॉड की तरह अभी भी उसके लोवर मे उभरा हुआ साफ नजर आ रहा था ।
बड़ी मुश्किल से दरवाजे के ओट मे खुद को छिपाते हुए उसने दरवाजा खोला और सामने मुरारी था ।
सारी हकीकत से परिचित होने के बाद भी अमन ने उस्से सवाल किया - अरे पापा आप यहा ? फ़ोन कर देते !
मुरारी झिझक भरे लहजे मे अमन के पीछे खड़ी सोनल को एक नजर देखा जो सन्सकार बस मुस्कराती हुई अपने सर पल्लू कर रही थी
और अनायास मुरारि की नजर अपनी नयी नवेली बहु के चिकने पेट के किनारो पर चली गयि , जिसकी कोमलता और मलाई सी गोरी चमडी देख कर मुरारी एक पल के लिए सम्मोहीत सा हो गया , मगर अगले ही पल उसने खुद को उस नजारे से अलग किया - अह फ़ोन किया था मैने , तुने उठाया नही ।तुझ्से थोडा काम है जरा निचे आना
ये बोलकर मुरारी घूम कर वापस जाने लगा और फिर घूम कर - और वो समान कल मगाया था वो लेते आना ।
जाते जाते एक बार फिर मुरारी ने सोनल की चिकनी कमर पर नजर मारनी चाही मगर इस बार देखा तो सोनल मे सब कुछ अच्छे से ढक रखा था । उस पल भर मे ही मुरारी समझ गया कि सोनल ने उसकी चोरी पकड ली और वो बिना अपनी बहू की ओर देखे चुपचाप निकल गया ।
सोनल ने पार्सल के बारे पूछा तो अमन के बात बदल दी और वो पैकेट लेकर निकल गया नीचे
वही मुरारी अपने कमरे मे बेचैन टहल रहा था जैसे ही अमन कमरे मे दाखिल हुआ उसकी चेहरे पर मुस्कान छा गयी - आ गया बेटा आ आ बैठ
अमन मुस्कुरा कर सोफे पर बैठ गया और मुरारी हसता हुआ - माफ करना बेटे मैने तेरे और बहू के एकांत के पल में डिस्टर्ब कर दिया ।
अमन लजाता हुआ मुस्कुरा कर - क्या पापा ऐसा कुछ नही कर रहे थे हम लोग , सची मे
मुरारि - वो जब तु दरवाजे के पीछे छिपा था तभी मै समझ गया है हाहाहा अरे मुझसे क्या शर्माना , ऐसा तो मेरे साथ भी हुआ है कई बार हिहिहिही
अमन - हैं सच मे ? कब ?
मुरारी- अरे वो तब जवानी के दिनो की बात थी , गाव वाले घर मे मुश्किल से तो तेरी मा के साथ समय मिलता था और ज्यादातर तो हाहहहा
अमन - क्या ज्यादातर ?
मुरारी हस्ता हुआ - अरे वो तुम जवान लोग आपस मे आजकल क्या बोलते हो ? एलकेपीडी ...
अमन हसता हुआ - वो केएलपीडी होता है पापा हाहाहा
मुरारी हस्ता हुआ - हा वही खड़े लन्ड पर धोखा हाहाहा यही मतलब है ना उसका
मुरारि के यूँ खुल कर मजाक करने से अमन थोडा सा लाज से झेप जाता है और मुस्कुरा कर - जी
मुरारी अपनी बात आगे बढ़ाता हुआ - और उसपे से तेरी मा , खूब नखरिली हाहाहा मुझे सताने मे ना जाने क्या मजा आता है उसे ।
" वो तो सबकी बिवियाँ करती है ", अमन बहुत महिन सा बुदबुदाया मगर मुरारि के तेज कानो ने उसकी आवाज को पकड़ लिया ।
मुरारि हस्ता हुआ - अच्छा तो बहू भी कुछ नही है हाहाहा , वैसे रात मे क्या हुआ ?
अमन के कान खड़े हो गये कि ये क्या पूछ रहा है उसका बाप ।
अमन - मतलब ?
मुरारी धीमी आवाज मे उसके पास होकर - अरे वो रात मे दिया था ना , वो यूज किया कि नही ?
अमन लाज भरि मुस्कुराहट के साथ - हम्म्म किया ।
मुरारी का खुन्टा एकदम कड़क होने लगा उसे जानने की उत्सुकता भी थी और झिझक भी हो रही थी
हिम्मत कर मुरारी ने पूछ ही लिया - कितनी बार
अमन मुस्कुरा कर - आपने जितनी बार कहा था
मुरारी का लण्ड एकदम से फड़फडा उठा - और बहू , उसने ऐतराज नही किया ?
अमन - उहू ... मेरे ख्याल से उतना नानुकुर सब बिवियां करती होगी बस उतना ही उसने भी किया ।
मुरारी हसता हुआ - वैसे पूछना तो नही चाहिये लेकिन कैसा लगा तुझे उस समय
अमन के चेहरे पर मुस्कुराहट थी मगर शर्म से लाल होते उसके गाल भी साफ नजर आ रहे थे - अह अब कैसे बताऊ , आपको तो पता है कैसा लगता है । इसमे बताने जैसा क्या है पापा ?
मुरारी पैर फैला कर अंगड़ाई लेता है और पजामे मे बना हुआ उस्का तम्बू साफ साफ अमन को दिखता है - अह्ह्ह अब क्या बताऊ अमन तुझे और बहू को देखता हु तो अपने जवानी के दिन की यादे ताज़ा हो जाती है । शुरुआती दिनो की वो मीठी शरारतें , घर मे चोरी छिपकर तेरी मा के देह से छिपकना खेलना उम्म्ं वो यादे उफ्फ़फ्फ
अमन खिलखिलाता है तो मुरारी मुस्कुरा कर - हा भाई सच कह रहा हु , तुझे तो तेरा अपना कमरा मिला है , गाव मे होता तो पता चलता कैसे रात के सन्नाटे मे सासे थाम कर सिसकिया घोट कर चुदाई करते हैं ।
अमन हस रहा था
मुरारी- लेकिन उस तकलिफ मे भी मजा होता था जब हम अपनी मस्तियाँ पूरी करने मे कामयाब हो जाते थे । जब मै तेरी मा के भीतर झड़ जाता था सारी खुन्नस सारी शिकायते सब बह जाती थी ।
अमन गला साफ करता हुआ चोर नजरो से अपने बाप को उसकी यादो मे खोया हुआ अपना मोटा मुसल पजामे के उपर से मसलता देखता है और खुद भी अंगड़ाई लेकर अपना लन्ड मसल कर सीधा करता हुआ - आह्ह पापा लो ये आपका पार्सल
मुरारी- अरे हा खोल खोल देखता हु जरा
अमन फटाफ़ट से पैकेज खोलता है और फिर उसमे से ब्रा पैंटी को निकाल कर अपने पापा को देता है ।
मुरारी उस नरम मुलायम महिन सूत वाले कपड़ों के बने ब्रा और पैंटी का मखमलीपन अपनी उंगलियो मे मह्सूस करता हुआ उन्हे अपने नथुनो तक ले जाता है - उम्म्ंम्ममम्ंम्ं वाह एकदम फ्रेश है
अमन अपने पापा की कामुकता को अजीब नजरो से निहारता है - क्या सुँघ रहे हो पापा
मुरारी हस कर - ओह मुझे ये नये ताजे कपड़ो की खुशबू अच्छी लगती है और जब इसमे तेरी के देह की खुस्बू भीन जायेगी उह्ह्ह्ह तब तो येहहह ओह्ह्ह्ह्ह
अमन अपनी मा के जिस्म की खुस्बू के नाम से ही गनगना गया और उसका मुसल हथौड़ा सा हो गया । गुपचुप से उसने अपना मुसल खुजाया ।
मुरारी- और इसका कलर बहुत खिलेगा तेरी मा पर और इस रंग की चुन्नी भी तो है उसके पास
अमन - चुन्नी ? इसपे चुन्नी का क्या काम ?
मुरारी खिलखिला कर हसता हुआ अमन के कंधे पर हाथ घुमाता है - हाहाहाहा तु भले ही इस जमाने का है मगर शादीशुदा जीवन के मजे लेने मे पीछे ही रहेगा अपने बाप से
अमन - मै समझा नही पापा , आखिर ब्रा पैंटी के साथ उसकी मैचींग चुन्नी का क्या काम?
मुरारी- क्या काम!! बेटा तुझे एक बार की बात बताता हु
हुआ यूँ था कि शादी के कुछ महीने बाद एक रिस्तेदार के यहा शादी मे घर के बाकी जन गये हुए थे और चूकि तेरी मा अभी नयी ब्याही आई थी तो उसको साल भर तक किसी के यहा जाने पर मनाही थी और उसकी देख रेख का ख्याल रखने के लिए मुझे रुकना पड़ा था
अमन - अरे वाह फिर
मुरारी अमन की चहकपने पर हसकर - बताता हु भाई सुन
पूरे 3 रोज के लिए घर के सारे लोग गये थे और मैने तेरी मा को इस बात के लिए मनाने लगा कि वो फिर से शादी वाला लाल जोडा पहने , बहुत नानुकुर और प्यार जताने पर वो मान ही गयी
अमन - मतलब फिर से सुहागरात हिहिही
मुरारी- हा ऐसा ही कुछ फिर मुझे ख्याल आया क्यूँ ना उसके लाल जोड़े को पुरा करने के लिए लाल रंग की ब्रा पैंटी भी ला दूँ और उसी रोज मै बाजार जाकर ले आया ।
उस रोज तेरी मा बहुत खुश थी लेकीन जब मैने कहा कि मुझे इसे पहन कर दिखा तो वो शर्मा कर मना करने लगी।
अपने पापा की बातें और अपनी मा को लाल रंग की ब्रा पैंटी मे सोच कर ही अमन का लन्ड बौरा गया , वो अपना मुसल रगड़ते हुए सिसका - फिर पापा क्या हुआ , क्या मा पहन कर आई ?
मुरारी- हा बेटा और वो नजारा आजतक नही भुला उफ्फ्फ जैसे ही मै कमरे मे दाखिल हुआ मेरा मन मचल उठा , दिल खुशी से उछलने लगा , सामने तेरी मा बिस्तर के पास खड़ी थी उसने अपने सर पर शादी की विदाई वाली लाल चुनरी ओढ़ कर घूँघट कर रखी थी और गले से निचे उसका गोरा संगमरमरी बदन मेरे दिये तोहफो से सजा हुआ था ।
वो छींट वाली प्रिंट की ब्रा उसके तंदुरुस्त दूध पर कसे हुए थे और वो पतले पट्टी वाली लाल कच्छी उसकी जांघो के बीच से जैसे कमल सी खिल उठी थी ।
अमन का दिल अपने पापा की बाते सुन कर जोरो से धड़कने लगा उसका लन्ड अपनी मा को लाल ब्रा पैंती मे सोच कर पुरा फडकने लगा , चेहरे पर कामुकता साफ साफ हावि दिख रही थी । वही मुरारी बड़ी बेबाकी और बेहिचक होकर अमन को सारी बाते बता रहा था
मुरारी- सच कह रहा हु बेटा अगर तु उस समय अपनी मा को देख लेता तो तु भी उसका दिवाना हो जाता हाय्य्य
और उसने अमन की ओर देखा जो आंखे बन्द किये तेज तेज सासे ले रहा था और उसका हाथ उसके लन्ड को भींच रहा था । मुरारि समझ गया कि अमन अपनी मा को अपनी कल्पना मे देख रहा है ।
मुरारी- बस आज रात वो यादे ताज़ा होने वाली है ,आज की रात मै उसे फिर तैयार होने को कहुगा
अमन - हा पापा मै भी
मुरारी चौककर - क्या मतलव
अमन हस कर - अरे मतलब आज मै भी सोनल को ऐसे ही तैयार होने को कहूँगा , वैसे क्या मा ने सारे साज सृंगार किये थे या बस चुन्नी ली थी ।
मुरारी हस कर - अरे सबर कर ले , कल मै तुझे उसकी फोटो दिखाऊँगा फिर तु समझ जायेगा
अमन की आंखे चमक उठी - क्या सच पापा ?
मुरारी मन मे उभरते लालच को दबाता हुआ - हा उसमे क्या है , तु उसका ही बेटा है गैर थोड़ी ।
मुरारी ने इस बात के साथ अपना दाव खेल दिया था इस उम्मीद मे कि शायद ममता के बदले अमन सोनल की भी तसविरे उसे दिखाये और अपनी हीरोईन सी सेक्सी गोरी चिट्टी बहू को ऐसे तैयार होकर देखने के बारे मे सोच कर मुरारि का जजबात उबाल मारने लगे
मगर उसने अपने जजबात को काबू मे रखा और संयम से इंतजार करना सही समझा ।
राज के घर
रागिनी अनुज को लेकर दोपहर का टिफ़िन लेके बाजर के लिए निकल गयी थी , निशा भी किचन के काम निपटाने के बाद नहाने के लिए उपर जा चुकी थी
वही रागिनी के रूम मे शिला और रज्जो आपस मे मिलाप कर रही थी , शिला अपनी बड़ी सी तरबूज सी गाड़ फैलाये कुर्ती उठाए आगे झुकी हुई थी
रज्जो उसकी नंगी गोरी गाड़ को सहलाती हुई उसके नरम मुलायम चुतड पर पन्जा जड़ती है जिससे शिला सिस्क पड़ती है - अह्ह्ह्ह भाभीईई उम्म्ंम्ं ओह्ह्ह मान जाओ ना प्लीज एक बार
रज्जो उसकी गाड़ की दरारो मे उंगलिया घुसाती हुई सुराख मे उंगली पेल दी - अह्ह्ह तुम समझ नही रही हो दीदी उम्म्ंम रमन के पापा नाराज हो जायेन्गे
शिला - अह्ह्ह भाभीईई उह्ह्ह्ह उफ्फफ़फ़ उम्म्ंम खा जाओ उम्म्ंम्ं और चाटो उम्म्ं ये अनुज मुये ने मेरी चुत की खुजली बढा दी अह्ह्ह्ह सीईई
रज्जो शिला की टाँगे खोले उसकी चुत पर जीभ चला रहा थी और चाट रही थी ।
शिला - आह्ह भाभीईई बस तुम हा करो । वहा तुम्हे वो मजा मिलेगा वैसा तुमने कभी नही लिया होगा
रज्जो उसकी चुत से अलग हुई और अपनी नंगी छातिया मिजने लगी
शिला ने अपने पैर उसके गुदाज चुचो पर रख कर निप्प्ल पर सहलाने लगी जिस्से रज्जो की सासे उखड़ने लगी - ऊहह छोडो ना दिदी , चलो ना नहाते है आओ
ये बोल कर रज्जो उठ खड़ि हुई और अपनी कमर मे अटकी पेतिकोट को सरका कर सिर्फ पैंटी मे आ गयी और कुल्हे हिलाती मुस्कुराती हुई बाथरूम मे चली गयी ।
शिला भी अपनी कुरती उतार कर फेक दिया और तौलिया लेकर बाथरूम मे दाखिल हुई और उसकी नजर रज्जो के पर गयि
अपने जिस्म से ब्रा उतार कर पूरी नंगी हो रज्जो के करीब गयी और उसको पीछे से जकड़ लिया - अह्ह्ह भाभीई मेरी जान मान भी जाओ ना बस कुछ रोज की ही बात है
रज्जो के चुचो पर शिला के रेंगते हाथ उसने कस कर पकड़ लिये तो शिला ने उसकी चुचिया मिजनी शुरु कर दी - अह्ह्ह्ह दिदीईई उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ह्ह्ह
शिला - थोडा सा भरोसा रखो मेरी जान उम्म्ंम वहा तुम्हारा बदन और निखर जाएगा
"और तुम्हारे ये गोल मटोल तरबूज के चुतड उम्म्ंम्म्ं" , शिला निचे बैठ कर रज्जो की पैंती के गाड़ से सरकाती हुई उसे चूमती हुई निचे करने लगी ।
शिला - ओह्ह भाभी तम्हारी ये गाड़ उम्म्ं इसको ऐसे ना तरसाओ इसमे तो जमाने भर के लन्ड घुसाने की जगह है उम्म्ंंम्ंम्ं सीईई
शिला रज्जो की गाड़ मसलती हुई उसके चुसने चाटने लगती है - अह्ह्ह्ह दीदी उउम्ंंंं ओह्ह्ह पर मुझे डर लगता है अह्ह्ह रमन के पापा को क्या कहुगी मै उम्म्ं
शिला उठ खड़ी हुई और घुमाती हुई उसके लिप्स से अपने लिप्स जोड़ लिये , रज्जो ने भी उसके होठ चुसने शुरु कर दिये
दोनो रसभर अधर एकदुसरे मे घुले जा रहे थे और उनकी नगन छातियां आपस मे चुभ रही थी ,
रज्जो के हाथ शिला की मक्खन सी जांघो को उठा हुए उसके चर्बीदार चुतडो को सहला रही थी ।
रज्जो - अह्ह्ह मेरी जान मेरे सैयया मतल्ब रमन के पापा तो अभी से मेरे बिना पागल है , वो और मुझसे दूरी नही सह पायेंगे अह्ह्ह्ज समझ ना
शिला उसके गाड़ को पक्ड कर अपनी ओर उसको खिंचती हुई - तेरे उस गाड़ चतोरे साजन की फिकर ना कर उसको कैसे मनाना मै जानती हु मेरी चुदक्क्ड घोडी तू हा कर बस
रज्जो ने मुस्कुरा कर शिला को देखा - मतल्ब दीदी तुम कैसे ? शिला शर्माई और बोली - तेरे साजन बहुत कुछ तुझसे छिपाते है मेरी सजनी
रज्जो ने आगे बढा कर शिला के बुर टटोलती हुई - मतलब इस भोस्ड़े मे भी उन्होने खुन्टा गाड़ दिया उम्म्ंम
शिला मुस्कुराती हुई सिसकी तो रज्जो ने उसकी दोनो निप्प्ल पक्ड कर नोचती हुई उसे अपने अपनी बाहो के भर के उसके होठ चुसने लगी - अह्ह्ह साली रंडी तु तो मेरा ही माल खा गयी उम्म्ंम अब देख कैसे तेरा माल मै खाती हुई वो भी तेरे घर मे घुस कर
शिला खिल उठी - तो क्या सच मे भाभी तुम चलोगी
रज्जो - हा चलूँगी ना , अगर तु मेरी चुत चाट कर खुश कर दे
शिला मुस्कुरा कर उसकी बुर सहलाने लगी - उम्म्ं मेरि सेक्सी रान्ड़ इसमे मेरा ही फाय्दा है आजा
शिला सरकर निचे हो गयी और रज्जो ने उस्के मुह पर अपनी बुर रख दी
वही उपर नहाने के बाद निशा निचे आने लगी ये खोज खबर लेने कि अगर घर की बाकी औरते बिजी हो तो वो अरून के लैपटॉप मे पोर्न्ं देख पाये
चुपचाप दबे पाव वो निचे हाल मे आई और निचे पुरा सन्नाटा पसरा हुआ था और गेस्ट रूम का दरवाजा खुला
कही कोई नजर नही आया तो निशा रागिनी के कमरे की ओर बढ़ी
दरवाजा खुला हुआ था और बाथरूम से तेज सिस्किया और अवाजे गूंज रही ।
निशा ने भागकर सबसे पहले मेन गेट चेक किया और वापस आई उसकी सासे तेज चल रही थी तेज कामुक सिसकियाँ सूनकर उस्के जहन मे समझ आ रही था किसी की तगडी पेलाई चल रही थी मगर किसकी ?
उसके निप्प्ल कडक हो गये और सासे दुगनी गति से चल रही थी , कलेजा थाम कर जैसे जैसे वो दरवाजे की ओर बढ़ रही थी उसको रज्जो की साफ और स्पष्ट गाली भरी चीख सुनाई दे रही - अह्ह्ह बहिनचोद चाट ओह्ह्ह ऐसे उम्म्ं खा मेरी बुर उह्ह्ह ओह्ह आज तुझे नहला दूँगी अपनी रस से ओह्ह्ह्ह एल्ह्ह्ह उम्म्ंम
निशा के कान खड़े हो गये कि रज्जो किसकी मुह पर अपना भोस्डा रग्ड रही है और जैसे ही उसने बाथरूम मे झाका तो देखा ,
बाथरूम की फर्श पर शिला बुआ फैली हुई गरदन उठा हुए थी और रज्जो मौसी अपनी चुत उनके मुह पर दर रही थी - लेह्ह्ह साली कुतिया चाट उम्म्ंम पी जाह्ह्ब उह्ह्ह मादरचोद उह्ह्ह लेह्ह्ह ओह्ह्ह ओझ्ह शिलाअह्ह्ह मेरी जान उम्म्ंम आ रहा है ओह
निशा की आंखे फटी की फटी रह गयी कि रज्जो मौसी और शिला बुआ एक साथ ऐसे , अन्जाने मे उसके मुह यही निकला - ओह्ह गॉड बुआ मौसी आप लोग ?
दोनो चौके और निशा को देख कर खड़े हो गये शिला की हालत खराब थी वो रज्जो से फुसफुसाई - अब क्या करे
रज्जो- अरे शिकार खुद चल कर आया तो हलाल होगा
रज्जो - तु यहा कया कर रही है ये , इधर आ पहले
निशा - हा लेकिन आप लोग ऐसे ? दरवाजा बन्द कर लेते
रज्जो- तु बड़ी समझदार है उम्म्ं इधर अभी तुझे ठिक करती ह
ये बोल कर रज्जो ने उसे पकड़ कर खिंच और लोवर के उपर से उसकी चुतड़ पर थपेड लगाती हुई - किसी के कमरे मे जाने से पहले दरवाजा खटखटाना चाहिये ना
निशा - अह्ह्ह सॉरी ना मौसी , लेकिन आप लोग ये सब क्या कर रहे थे अह्ह्ज्ज
रज्जो - दीदी इसको भी अनुज की तरह सजा दो , कपडे उतारो
अनुज की तरह सजा का मतलब कुछ कुछ समझ आ रहा था निशा को - क्या मतलब अनुज की तरह सजा, उसने भी देखा क्या आप दोनो
शिला उसका लोवर खिंच कर - देखो तो कैसे सवाल जवाब कर रही है हा ,बहुत बिगड़ गयी है तु भी
ये बोल कर शिला के चुतड़ पर चट्ट से पन्जे जड़ देती है जिस्से निशा का जिस्म झनझना जाता है -अह्ह्ह बुआ मार क्यू रहे हो ओह्ह्ज उम्म्ं
इधर रज्जो ने उसकी पैंती पकड़ कर खिंचती हुई - उसके गाड़ पर थपेड़ लगाती हुई - देखो तो इस्क्प एक तो चोरी उसपे से सिना जोरि
निशा - अह्ज्ज मैने किया क्या है लेकिन
रज्जो - अरे दिदी यही तुम्हारा बड़ा वाला समान लेके गयी थी
शिला - क्या सच मे ? ये लडकी बोल कहा रखा है उसे ,
रज्जो ये ऐसे नही बोलेगी इसको कमरे मे के चलो और
फिर रज्जो उसे टांग लिया और कमरे मे घोडी बना कर उसकी पैटी खिंच कर उसकी गाड़ पर थपेड लगा कर - बोल कहा रखा है तुने उसे
निशा - आह्ह क्या बोल रही हो मौसी मै कहा लाई थी
रज्जो - मैने साफ साफ देखा था दिदी इसको कमरे से निकलते हुए ,
शिला - तभी तो मै सोचू इसकी जवानी कैसे निखर रही है आह्ह अभी से इसने घोट रखा है इतना सारा
रज्जो - बोल देगी की नही वापस
निशा - मै नही लेके गयी थी बुआ बोलो ना मौसी को
रज्जो - ये ऐसे नही मानेगी रुक
रज्जो ने उसे लिटाया और उसके मुह पर बैठ गयी - उम्म्ंम बोल ऐसे ही तेरे ये जोबन मोटे हुए है उम्म्ंम
शिला - हा रुको मै भी निचे से चेक करती हु सारी सच्चाई खुल जायेगी ये बोल कर शिला ने उस्की टांगो से पैंती खिंच कर अलग कर दी , उसकी बजबजाती बुर पर हाथ फेर कर उसके फाके अलग करती हुई - हम्म्म्म साफ साफ लग रहा है इसने घुसाया उम्म्ंम
निशा - आह्ह सीईई ओह्ह्ह बुआ क्याअह्ह्ह कर रही हो उम्मममंम्ं ओह्ह्ह
रज्जो - साली रंडी ले चाट अह्ह्ह्ह बोल मत , तेरा भेद खुल गया है अह्ह्ह उम्म्ंम
निशा मुस्कुराई और आंख मारते हुए रज्जो से हल्के से बोली - लेकीन ड्रामा करने मे माजा आ रहा है
निशा हसती हुईई - ओह्ह्ह बुआ ये क्या कर रही हो अपनी बेटी के साथ उह्ह्ह्ह मत चाटो उसकी कुवारि चुत को अह्ह्ज सीईयियो
रज्जो निशा की शरारत पर हस पड़ि और अपनी बुर को उसके मुह पर रख दी जिसे निशा चाटने लगी
वहि शिला भुखी शेरनी की तरह निशा की बुर पर टुट पड़ि थी , उसके सपने आज हकिकत हो रहे थे , दिल मे जो अरमानो का बाग लेके आई थी वो खिल रहे थे
निशा की नमकीन चुत का स्वाद पाकर वो पागल हो गयी थी - आह्ह निशा तेरी बुर सच मे बहुत गर्म है उम्म्ं ऐसी ही कुवारि चुत का रस पसम्द है उम्मममं सीईई
निशा - अह्ह्ह बुआ अह्ह्ह इतनी अच्छी है क्या उम्म्ंम खा जाओ उह्ह्ह येस्स्स उम्म्ंम फ्क्क्क्क ओह्ह्ह जीभ से भी आह्ह हा ऐसे ही उम्म्ंम फक्क्क ओह्ह्ह बुआअह्ह्ह्ह मेरी प्यारी बुआ ओह्ह्ह अह्ह्ह्ह आ रहा है उह्ह्ह्ह
रज्जो - रुक जा रुका जा ऐसे नही मुझे भी तो अपनी भतीजी के चुत का रस लेने दे आजा
ये बोल कर रज्जो उठी और निशा की टांगो मे कैची बना कर उसकी चुत पर अपनी चुत रगड़ने लगी - अह्ह्ह मौसी उह्ह्ह ये तो अलग ही मजा आ है अह्ह्ह्ज उम्म्ंम्ं कितना तप रहा है आप्का भोस्डा अह्ह्ह उह्ह्ज्ज फक्क्क्क उम्म्ंम्ं
शिला - अह झड जा बेटी झड जा अपनी मौसी के बुर पर ओह्ह्ह
निशा - हा बुआ फिर आप चाटना अपनी बेटी की वुर बोलो चातोगे ना उम्म्ंम अह्ह्ज्ज्ज सीयिओई और तेज मौसी अह्ह्ज बहुत मुलायम है अह्ह्ह रहा नही जा रहा है अह्ह्ह्ज फक्क्क्क ऐसे ही उह्ह्ह्ह आओ जा बुआ तुम भी अओझ्ह अह्ह्ज
शिला उठ कर उनके पास आ गयी और दोनौ उसकी चुचिया मुह के भर कर चुसने लगे - आह्ह बेटा उम्म्ंम पी ले ऊहह और चुस उह्झ भाभीईई अह्ह्ह काट डालोगी क्या आह्ह सीईईईई अह्ह्ह
रज्जो - ओह्ह्ह निशा अह्ह्ह सीईई आ रहा है मेरा अओह्ह्ह्ह।
निशा -हा मौसी मेरा भी उम्म्ंम अह्ह्ह्ह हहह फ्क्क्क अह्ह्ह मम्मीईई अह्ह्ह आह्ह आ रहा उह्ह्ह बुआआ हहहहह आ गया आ गया ओह्ह्ह शिट उह्ह्ह फक्क्क ऊहह फक्क्क
।
रज्जो और निशा हाफने लगे और फैल लार लेट गये वही शिला बारी बारी से दोनो के बुर के मिले हुए रस को चाटने लगी ।
जारी रहेगी
Mast UpdateUPDATE 217
राहुल के घर
बन्द कमरे मे शालिनी बड़े जोश मे अपने बेटे के लन्ड पर उछल रही थी और ये चोरी चोरी वाली चुदाई ने उसके मन को और भी ज्यादा नादानिया करने को पागल कर दिया था
देखते ही देखते शालिनी अपने जिस्म से सारे कपडे उतार चुकी थी और अपने सगे जवान बेटे का कसा हुआ मोटा लन्ड हुमुच हुमच कर बुर मे ले रही थी
राहुल बस अपनी मा की कामुकता और लन्ड़ के लिए उसकी दिवानगी को देख कर भौचका था - अह्ह्ह माअह्ह्ह क्या हो गया है आज तुम्हे ओह्ह्ह्ह उम्मममं
शालिनी - अह्ह्ह मेरे लाल उह्ह्ह तेरा सुपाडा मेरी चुत मे खुब खुजली पैदा कर रहा है अह्ह्ह आज इसको निचोड कर भर लूंगी अह्ह्ह्ह
वही पीछे खड़ा अरुण अपना लन्ड हिला रहा था उसकी नजर शालीनी के हिलती उछलती नाचती मोटी गाड़ के दरारो मे झाकती सुराख पर थी । उन्के बदले हुए सुर साफ बयां कर चुके थे कि ये इनका पहली बार नही था
अरुण भाप चुका था कि उसकी मामी ने उसे ही मामा बना दिया आज और ये सोच कर ही उसका जोश चार गुना हो गया
लन्ड के टोपे को थूक से चटक करता चमकाता हुआ वो अप्ना लन्ड हिलाता हुआ आगे बढ़ा ।
उसका सारा फोकस अब शालिनी के गाड़ के गुलाबी सुराख पर था , जिस तरह से वो सास ले रहा था
ढेर सारा लार अपने टोपे मे लिभ्डाता हुआ वो दोनो के करीब आ गया
शालिनी और राहुल दोनो एकदुसरे मे रमे हुए थे , राहुल शालिनी की नंगी चुचियो मे मुह दिये हुए था और शालीनी उसके तने हुए खूँटे पर अपनी गाड़ घिस घिस कर उसे चुत की गहरायो मे ले जा रही थी , उसकी बुर बुरी तरह से रस छोड़ रही थी शालिनी मस्त हो चुकी थी राहुल के लन्ड की गर्मी से और अरुन ने सही मौका देख कर शालिनी की धीमी पड़ती गति का फायदा लेता हुआ सिधा अपने सुपाड़े की टिप उसके गाड़ के मुहाने पर लगाय और पूरी ताकत के साथ हचाक से उसके गाड़ की कसी हुई गुलाबी सुराख मे अपना मोटा टाइट लन्ड घुसेड दिया- अह्ह्ह्ह मैयाआआ ओह्ह्ह्ह्ह बहिनचोद कौन है अह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह फाड़ दिया रेह्ह्ह्ह्ह
राहुल भी अपनी मा की दरद भरि चिख से चौका और गरदन फेर का देखा तो अरुण बत्तिसी दिखा रहा था -
"क्या बे लोडू , साले तुम मा बेटे मुझे ही चुतिया बना रहे थे ", अरुण शालीनी कमर पक्डता हुआ अपना लन्ड पूरी ताकत से उसकी गाड़ पेलता हुआ बोला
शालीनी - आह्ह साले हारामी निकाल उह्ह्ह दर्द हो रहा है अरून अह्ह्जू माअह्ह्ह्ह
राहुल - हा अरुण निकाल दे अह्ह्ह मा को बहुत दर्द हो रहा है
अरुण गुस्से मे तमतमाया - भ्क्क्क बहनचोद नाटक कर रही है , रात मे ऐसे ऐसे हचक हचक कर पेलवा रही थी मुझसे पुछ साली से ,
राहुल - क्या ये सच है मा
शालिनी बेज्वाब हो गयी और दर्द से तड़प रही थी - अह्ह्ह बेटा अह्ह्ह्ह सीईई कुछ लगा ले अह्ह्ह सूखा सूखा मत घुसा अह्ह्ह्ह्ह
राहुल का मुसल अपनी मा की बात सूनकर एकदम से तनतना गया और उसकी रसिली चुचिया मिजता हुआ - अह्ह्ह मम्मीई मुझे भी बुला लेती ना साथ मे मजे करते अह्ह्ह सच मे बहुत बड़ी चुद्क्क्ड हो तुम
अरुण - अह्ह्ह मामीईई ओह्ह्ह कितनी कसी गाड़ है तुम्हारि अह्ह्ह्ह बहिनचोद ओह्ह्ह अब लो मेरा मोटा कसा लन्ड अपनी गाड़ क्यू मजा आ रहा है ना ,उम्म्ं बोल ना साली ओह्ह्ह्ह सीईई बोल ना
शालिनी को अरुण ने बुरी तरह जकड रखा था और उसकी दोनो सुराख मे अब दो जवान बास से कडक मोटे तने हुए लन्ड घचाघच हो रहे थे ।हफतो बाद उसने ये अनुभव दुबारा से किया था और उसकी बुर की दिवार भलभला कर रस बहाए जा रही थी - आह्ह हा बेटा ओह्ह्ह सीईई अह्ह्ह फ़ाड ही देगा क्या अह्ह्ह बहुत मजा आ रहा है अह्ह्ह तेरा लन्ड ही ऐसा है रे अह्ह्ह्ह उह्ह्ह तुम दोनो मिले हुए थे आ हारामीयो अह्ह्ह्ह माह्ह्व
राहुल अब बत्तिसी दिखाने लगा - अह्ह्ह मम्मीई तुम्हे देख कर किसी का भी लन्ड उछलने लगे फिर हम तो घर के थे अह्ह्ह कितनी कसी चुत है अह्ह्ह माह्ह्ह्ह ओह्ह्ह लोझ्ह और लोह्ह्ह उह्ंम्ंं
शालिनी - आह्ह मेरे लाल भर दे ना उसे अपने मोटे लन्ड से अह्ह्ह घुसा घुसा कर फाड़ दे अह्ह्ह उह्ह्ह मै तप आज पागल हो जाउंगी उह्ह्ह्ह और चोदो मुज्जे अह्ह्ज्ज हा अरुण ओह्ह्ह और कस के डाल बेटा घुसा दे उह्ह्ह्ह्ह म्माअह्झ्ह्ज सीईई उह्ह्ह्ह क्या खा कर जना था रे तेरी मा ने तुझे पुरा साढ़ पैदा की है साली ने ओह्ह्ह
अरुण - तुम भी किसी दुधारू गाय से कम नही हो मामी आपकी ये मोटे फाके वाली बुर देख कर लगता है कि मै भी ऐसे अह्ह्ह अह्ह्ह
शालिनी की आंखे फैलने लगी - अह्ह्ह कुत्ते क्या कर रहा है अह्ह्ह फट जायेगी कमिने रुक जा
अरुण - आह्ह मामी कुछ नही होगा रुको तोह्ह अह्ह्ह बहुत लचीली बुर है आपकी अह्ह्ह्ह देखो जा रहा है अह्ह्ह्ह
राहुल - आह्ह भाई आराम से बहुत तप रहा है तेरा
शालिनी बुरी तरह से काप रही थी दर्द से तड़प रही थी उसका चेहरा लाल हुआ जा रहा था और चुत का फाका दुगनी चौड़ाई मे फैलते हुए लाल हुआ जा रहा और देखते ही देखते अरुण ने शालिनी को बुर मे लन्ड घुसेड़ ही दी -अह्ह्ह हिहिही आ गया हुहुहू
शालिनी जोर से चिख चिलला रही - आह्ह मादरचोद फ़ाड दिया रे हरामी साले तेरी मा के भोस्दे मे हाथी का लन्ड डालूंगी भडवे साले अह्ह्ह मह्ह्ह्ह उह्ह्ह
राहुल ने इशारे से अरुण की ओर देखा कि अब क्या किया जाये तो अरुण ने उसे चुप रहने का कहा और धिरे से लन्ड को चलाना शुरु किया - बस मामी हो जायेगा अह्ह्ह सच मे आपकी बुर बहुत लचीली हैया हहह क्या गर्मी है अह्ह्ह्ह
शालिनी खुद का कलेजा मजबूत किये हुए थी और अरुन धीरे धीरे अपनी गति तेज करने लगा - अह्ह्ह बेटा ओह्ह्ह उम्म्ं माह्ह्ह पुरा फैला रखा है रे ओह्ह्ह उम्म्ंम लग रहा है दो दो बास की लाठी घुसा रखी है अह्ह्ह उम्म्ंम
राहुल भी अब हौले हौले निचे से झटके मारने -अह्ह्ह मेरी रंडी माह्ह ऊहह आज तक ऐसा सिर्फ़ वो वाली फिल्मो मे देखा था अह्ह्ह केह्ह्ह और लेह्ह्ह तेरे अंदर तो चार चार घुसा दू हहहह
एक बार फिर सिस्किया तेज होने लगी और शालिनी दोनो को गालिया बके जा रहा थी और दोनो पूरी तरह से जोश मे तेजी से शालिनी की बुर मे लन्ड फचर फचर पेले जा रहे थे - अह्ह्ह आह्ह रुकना मता मादरचोदो अह्ह्ह पेलो आह्ह और और उह्ह्ह ऐसे ही अह्ह्ह आहहहह आ रहा है उह्ह्ह्ह ईईई उह्ह्ह माअह्ह्ह अह्ह्ह ह्ह्ज उम्म्ंम्ं ओह्ह्ह आह्ह और और बेटा अह ऐसे ही रुकना मत इमम्म्ंम्म्ंं ओह्ह्ह उह्ह्ह्ज
दोनो के लन्ड उसकी रस की धार से नहा रहे थे और शालिनी पस्त होकर गिर पड़ी ।
अरुण ने उसकी हालत देख कर लन्ड बाहर खिंच लिया
राहुल ने भी अपनी मा को किनारे का अपने देह का बोझ कम किया
शालिनी टाँगे खोले लेटी हुई हाफ रही थी और दोनो भाई वही खड़े होकर अपना मोटा खड़ा लन्ड हिला रहे थे ।
राज के घर
11 बजने को हो रहे थे और दोपहर का खाना लगभग तैयार ही था ,किचन से रागिनी ने हाल मे बैठी हुई रज्जो और शिला को आवाज देकर बोली - अरे जीजी जरा अनुज को आवाज देदो आकर खाना खा ले ,
रागिनी की बात पर रज्जो - दीदी जाओ ना बुला लाओ उसे , मुझे सीढिया चढने का जरा भी मन नही है रात भर जमाई बाबू ने घोडी बना कर बुरा हाल कर दिया है ।
शिला - अरे भाभी बुरा हाल तो मेरा अनुज ने कर रखा है , पता है आज सुबह सुबह फिर से मेरी एक लेगिंस खराब कर दी । मै नही जाने वाली आप ही जाओ
रज्जो खिलखिलाती हुई - अरे जवान भतीजा अपनी बुआ पर फीदा पर है और तुम बहाने बना रही हो , चलो अब मै भी चल के देखती हु क्या करता है वो ।
रज्जो और शिला दोनो सीढियो से फुसुरफुसर करते हुए उपर गयि और धीरे धीरे अनुज के कमरे की ओर बढ़े और हौले से कमरे का दरवाजा खोला
शिला - इसको देखो है इसको कोई डर
रज्जो - क्या हुआ फिल्म ही देख रहा है ना
शिला हस्ती हुई - अरे भाभी उसका हाथ देखो कहा है हिहिही कौन सी फिल्म होगी समझ जाओगी
रज्जो ने अनुज को गौर से देखा तो वो अपना एक हाथ लोवर मे घुसाये हुए लैपटॉप मे देख रहा है और उसके चेहरे के भाव देख कर साफ साफ लग रहा था वो अपना लन्ड हिला रहा था ।
रज्जो - आहाहा शिला रानी लोहा गरम है मार दो हथौड़ा
शिला - मतलब ?
रज्जो - देख नही रही कैसे मसल मसल कर अपने हथियार को धार दे रहा है , अब इससे अच्छा मौका नही मिलेगा जाओ और चढ़ जाओ ।
शिला का कलेजा धकधक होने लगा
उसे अभी संकोच हो रहा था कि क्या अनुज की नादानी मे उसे भी शामिल हो जाना चाहिये , एक उलझन मे थी और बहाने तरह तरह से उसके जहन मे आ रहे थे -
एक पल को उसे अनुज के लड़कपन की परवाह भी थी तो अगले ही पल उसकी चुत की आग रज्जो भड़का दे रही थीं
रज्जो ने सही समय देख कर उसे कमरे मे धकेल दिया और दरवाजे पर तेज आहट पाते ही अनुज चौक कर सकपकाते हुए खड़ा हो गया
उसके लोवर मे बड़ा का तम्बू बना हुआ था और बिस्तर पर लैपटाप मे हार्डकोर फोरसम चुदाई की वीडियो चल रही थी ।
अनुज सामने शिला को पाकर खुश हो जाता है - अरे बुआ आप हो , मै तो डर ही गया
शिला उसको घुरती हुई गुस्सा करने का नाटक कर - यही सब के लिए तेरी मा ने लैपटॉप दिलाया है उम्म्ंम
अनुज बत्तिसी दिखाते हुए अपना सुपाडा मिजने लगा
शिला उसको अपना सुपाडा मिजता देख हस पड़ी- अरे कुछ तो शर्म कर ले कमीने मै तेरी बुआ हु , आह्ह क्या कर रहा है अंदर कर
अनुज बड़ी बेशरमी से अपना लन्ड बाहर निकाल कर शिला के आगे हिलाने लगा - अह्ह्ज बुआ तुम्हे देख कर तो और भी फूल जाता है अह्ह्ह्व्सीईई देखो ना कैसे लाल हो रहा है
शिला की धड़कने तेज हो गयी और उसकी नजर अनुज के मोटे लाल सुपाड़े पर गयि , पहली बार शिला ने सामने से उसका तना हुआ एकदम रॉड सा कडक लन्ड देखा था ,
जिस तरह से अनुज अपना लन्ड मुथिया रहा था उसके सुपाड़े की लाली और गहरा रही थी और शिला की बुर बजबजा रही थी ।
शिला ने एक नजर घूम कर दरवाजे पर देखा और उसे दरवाजे के बारीक ओट मे रज्जो की झलकती साडी दिखाई दी अब तो उसे रज्जो की मन की आवाज भी आती मह्सूस हो रही थी - कि अब रुक मत दबोच ले
शिला आगे बढ़ी और लपक कर उस्का मोटा लन्ड हाथ मे दबोच लिया -अह्ह्ह कितना गर्म है रे उम्म्म्ं सच मे तुझे इतनी अच्छी लगती हु मै उम्म्ंम
अपनी बुआ का स्पर्श पाकर अनुज एड़ियो के बल होता हुआ हवा मे उड़ने लगा - अह्ह्ह बुआह्ह्ह उह्ह्ह्ब सीईईई आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो अह्ह्ह्ह मुझे आपके साथ सब कुछ करना है अह्ह्ह मेरो सेक्सी बुआ
शिला उसका मोटा लन्ड अपनी ओर भींच कर सहलाती हुई - अह्ह्ह क्या करेगा मेरे साथ तु उम्म्ंम्ं
अनुज लपक कर शिला की दूध की मोटी थैलिया जो उसने अपने सूट में छिपा रखी उसको हाथ मेभर लिया और उन्हे दबोचता हुआ - अह्ह्ह बुआ आपकी ये दूध मसल डालूंगा मै उम्म्ंम्ं कितने नरम है अह्ह्ह्ह उह्ह्ह बुआ चुसो ना उम्म्ं चुसो मेरा लन्ड अह्ह्ह मेरी सेक्सी बुआ ओह्ह्ह सक माय डिक उह्ह्ह्ह
शिला - उम्म्ं देखो तो कैसे उतावला हो रहा है अह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह कितना टाइट है रे तेरा अह्ह्ह्ह
अनुज - आह्ह बुआ मुह मे लेलो ना उम्म्ं प्लीज बहुत जल रहा है सब कुछ
शिला घुटनो के बल होती हुई - क्या जल रहा है बेटा उम्म्ंम बोल ना
अनुज अपना लन्ड शिला के लबो तक लाकर उसके बालो पर हाथ रखते हुए - मेरा लन्ड जल रहा है बुआ अह्ह्ह इसे ठंडा कर दो ना उम्म्ंम्म आह्ह येस्स्स बुआअह ओह्ह्ह मम्मीईई उह्ह्ह्ह फक्क्क्क एस्स बुआआ ओह्ह्ह्ह उम्म्ंम्ं
अगले ही पल शिला से उसका मोटा लन्ड मुह मे भर लिया और चुसने लगी
अनुज का जिस्म अकड़ने लगा और वो अपनी बुआ के सर पक्डते हुए सिस्कने लगा - ओह्ह्ह मेरी सेक्सी बुआ ओह्ह्ह फ्क्क्क एस्स सक माय डिक बेबी उह्ह्ह एस्स उम्म्ंम्ं और चुसो बुआ उम्म्ंम कितना मस्त लग रहा है ओह्ह
वही दरवाजे के बाहर गैप से कमरे का नजारा देखती रज्जो के निप्प्ल भी कडक हो गये , उसकी हाथ अब खुद के जिस्म पर रेंगने लगे थे , बुर मे चिपचिपाहट सी होने लगी थी ।
इधर शिला लगातार लन्ड चुस और उसे और बड़ा किये जा रहि थी जिससे अनुज की सिसकियाँ और तेज हो रही थी
मगर तभी रज्जो को सीढियो पर आहट हुई मगर जबतक वो शिला को सतर्क कर पाती निशा तेज कदमो से सीढियां फांदती हुई उपर आ गयी - अरे मौसी आप यही हो , अनुज और बुआ कहा है । चलो बड़ी मा बुला रही है
कमरे मे शिला और अनुज ,निशा की आवाज सूनकर चौके और फटाफट अलग हो गये ।
जितनी जल्दी हो सका दोंनो खुद को सही करते हुए कमरे से बाहर आने लगे ।
शिला सफाई देती हुई - हा हा भाई आ रहे है ,वो तो मै इसे थोड़ी डांट लगाने लगी । कबसे बैठ कर फिल्म देख रहा था
निशा - अच्छा आप लोग जाओ , मै आती हु
रज्जो - तु कहा चली ?
निशा हसती हुई अपनी पिंक फिंगर दिखा कर - मौसी एक नम्बर हिहिहिही
शिला हस्ती हुई - धत्त पागल जा अब
वही इनसब ड्रामे के बीच अनुज का ये सोच कर लंड और कड़ा हो रहा था कि शिला बुआ जो कुछ कर रही थी सब कुछ मौसी ने बाहर खड़े होकर देखा और सुना ।
निशा के उपर जाते ही रज्जो मुस्कुराती हुई - बड़े प्यार से डांट रही थी अपने भतिजे को क्यू दीदी
शिला शर्मा कर - धत्त क्या भाभी तुम भी , चलो अब
रज्जो हस्ती हुई - मै सोच रही थी कि मै भी थोड़ा अनुज को समझा बूझा दू , क्यू अनुज तु क्या बोल रहा है ।
अनुज चहक कर रज्जो को हग करता हुआ - मौसी मै तो चाहता हु आप दोनो मिल कर मुझे डाट लगाओ हिहिही
शिला - चुप कर बदमाश कही का , चल निचे तेरी आदत बिगड़ गयी अभी तक मै पसंद थी अब मौसी उम्म्ंम
रज्जो हस कर - मेरे लाडले की पहली पसंद तो मै ही हु ,तुम्हारा नम्बर दुसरा लगा है हिहिहिही
शिला ने घुर कर अनुज को देखा और समझ गयी कि रज्जो जैसी खिडालन ने अनुज का रस चख चुकी है तभी वो इतना खुल कर है - हुह फिर अब तु अपनी मौसी के पास रहना, मेरे पास नही आना
ये बोल कर शिला तेज कदमो आगे बढ़ी और कुर्ती मे मटकती उसकी गाड़ देख कर अनुज उसकी ओर लपका और पीछे से बाहो मेभर लिया - बुआ बुआ बुआ हिहिही आप गुस्सा क्यू हो रहे हो , मौसी तो मजाक कर रही थी
शिला - नही छोड मुझे अह्ह्ह
अनुज - बुआ मै तुम्हे चोद सकता हु पर छोड़ नही सकता हिहिहिही
शिला उसके कैद से निकल कर - धत्त कमीना कही का और तुम भाभी तुम भी कम नही हो
रज्जो इस्से पहले कुछ बोलती कि निचे से एक बार फिर रागिनी की आवाज आई और सब चुपचाप होकर हस्ते हुए निचे चले गये
उपर एक चुप सन्नाटा पसर गया
वही निशा उपर से फ्रेश होकर आ रही थी और जीने से आते हुए उपर छाई शान्ति के बीच उसे कही से छोटे स्पीकर की हल्की आवाजे आ रही थी ,
निशा को लगा कही कोई मोबाईल पर बात तो नही कर रहा , पर ध्यान देने पर पाया कि ये आवाज तो अनुज के कमरे से आ रही है ।
निशा -ये लड़का लग रहा है फिल्म वैसे ही छोद कर चला आया ,
कमरे मे आई तो पाया कि उसकी नजर अनुज के हेडफॉन पर गयी जिसमे से आवाजे आ रही थी और जैसे ही वो उसकी नजर लैपटॉप पर गयि
पहले तो वो चौकी फिर मुस्कुराती हुई -ओहो तो बुआ इस फिल्म के लिये अनुज को डांट लगा रही थी हिहिही सही है बच्चू की अब खैर नही हिहिहीही
फिर निशा ने फटाफ़ट उसका लैपटॉप टटोला और उसमे एक दो पोर्न ज्लदी जल्दी वीडियो चलाये
जिसे देख कर निशा मन मचल गया और वो गहरि सासे भरती हुई अपने कडक हो चुके निप्प्ल वाले चुचो पर हाथ रख कर अपनी धड़कने थामती हुई - उफ्फ्फ ये तो खजाना है हिहिहिही , इसको तो बाद मे देखती हु
निशा ने फटाफट लैपटॉप ऑफ किया और निचे चली गयी
इधर सब खाना खा कर फीट हुए और रागिनी जबरन खाने का टिफ़िन अनुज को देकर उसके साथ दुकान के लिए निकल गयी ।
राहुल के घर
Round 02
शालिनी घुटनो के बल खड़ी थी उसके सामने दोनो भाई राहुल और अरुण लन्ड परोसे खड़े थे और शालिनी दोनो के मोटे लन्ड पकड कर बारी बारी से चुस रही थी ।
राहुल - आह्ह मम्मीईई उह्ह्ग क्या मस्त चुस रही हो अह्ह्ह सीई और लोह्ह्ह उम्म्ंम्ं
अरुण- अह्ह्ह मामी अह्ह्ह मेरा भी ओह्ह्ह येस्स्स एस्स माय सेक्सी मामी उम्म्ंम्ं सक इट ओह्ह्ह उझ्ह्ज्ज उम्म्ंम और और और आहाहा उह्ह्ह हिहिहो ऐसे ह
शालिनी अरुन का मुसक गले तक चोक करती बाहर निकाली और सहलाने लगी -अह्ह क्या हो गया है आज ओह्ह्ह माह्ह कितना टाइट कैसे और निकल भी नही रहा है
अरुन - सब आपकी उस रसिली चुत का कमाल है मामी ओह्ह्ह्ह उह्ह्ज आराम से ओह्ह्ह फोड दोगी क्या उह्ह्ह्ह
शालिनी अरुण के आड़ो को सहलाती हुई मुह मे राहुल का मुसल भर चुकी थी - आह्ह मम्मी ओह्ह्ह घोट जाओ अह्ह्ह ऐसे ही अह्ह्ह कितनी मुलायम चुची है आपकी अह्ह्हू जी कर रहा है रगड़ डालू
राहुल को झुक कर शालिनी की चुचिया मिजते देख कर अरुण का भी जी लल्चा गया और वो भी झुक्कर चुचिया छूने लगा
शालीनी समझ गयी अब इनका मूड बदल रहा है और वो खड़ी हो गयी और
दोंनो के दूध की टंकीयो पर टुट पडे
शालिनी मचल उठि वो खड़े खड़े अपनी टागे आपस मे घिसने लगी और उसकी चुत पर चींटिया रेंगने लगी - अह्ह्ह बच्चो आराम से लल्ला अह्ह्ह काटों मत ओह्ह्ह उम्म्ंम तुमने तो मेरी चुत की आग फिर से भड़का दी अह्ह्ह्ह सीईई
अरुण उसकी चुचिया चुसता हुआ लपक कर शालीनी की बुर पर हथेली घुमाने लगा - अह्ह्ह मामी आपकी बुर तो तप रही है उह्ह्ह्ह
शालिनी - हा लल्ला अह्ह्ह राहुल क्या कर रहा है
राहुल जो उसकी गाड़ के दरारो के ऊंगलियां घुसा रहा - आह्ह मम्मी मुझे भी आपकी गाड़ चाहिये
शालिनी - आह्ह बेटा बहुत कसी है वो ,तेल लेके आ ना वो आलमारी से
राहुल लपक कर जबतक आल्मारि से तेल की सीसी ढूढता तक अरुन के शालिनी को सोफे पर लिटा कर उसकी चुत मे लन्ड उतार चुका था - ओह्ह्ह हा बेटा ऐसे ही अह्ह्ह्ह और तेज उह्ह्ह बहुत टाइट है अह्ह्ह और और उह्ह्ह कितना मस्त लन्ड है रे तेरा ओह्ह्ह और और
अपनी मा की तेज सिस्किया सून कर और कमरे का ।नजारा देख कर राहुल का लन्ड फड़फ्ड़ाने लगा और वो जल्दी जल्दी दराज खोल कर तेल खोजने लगा और जल्द ही वो उसे लेकर अपनी मा के पास पहुचा
राहुल को सुपाड़े पर तेल लभेड़ता देख शालीनी - हा बेटा अच्छेह्ह अह्ह्ह सीई लगा लेह्ह्ह उम्म्ंम और मेरे पर भी लगा ओह्ह्ह अरून उम्म्ं बाबू उह्ह्ह
राहुल ने शालिनी की गाड़ के सुराख पर भी तेल लगाया और सुपाडा टिका कर हचाक से उतार दिया - अह्ह्ह मैयाहहहह ओह्ह्ह सीई कितना जल रहा है रे अह्ह्ह्ह
राहुल - बस बस मम्मी घुस गया है अह्ह्ह्ह बहुत कसा है अह्ह्ह्ह हुहू हिहिही कितना टाइट है अह्ह्ह्ह ओह्ह मेरी सेक्सी मम्मा आह्ह मेरी चुद्क्कड रन्डी मा अह्ह्ह
शालिनी एक बार फिर दोहरे लन्ड का मजा पाकर रोमांचित हो उठी - अह मेरे ।चोदू बेटा चौद अपनी मा को अह्ह्ह और और ओह्ह कितना मजा आ रहा है आह्ह ऐसे ही आज मेरी चुत और गाड़ की चटनी बना दो उह्ह्ह
अरुण - हा मेरी जान आज तो इसको फाड़ देंगे अह्ह्ह लेह्ह्ह्ह और लेह्ह्ह साली कुतिया उह्ह्ह मन कर रहा ऐसे हचर ह्चर पेलता रहू
राहुल -ओझ्ह मेरी रंडी मा कैसा लग रहा है दो दो लन्द लेके अह्ह्ह्ह
शालीनी - अह बेटा बहुत मजा आ रहा है उह्ह्ह और चोदो अह्ह निकल रहा है मेरा बेटा रुको मत अह्ह्ह्ह सीईई
राहुल और अरुण तेजी से बुर और गाड़ मे पेलने लगे , शालिनी की चुत बजबजा कर झडती रही -अह्ह्ह मादरचोदो और पेलो अह्ह्ह फाड़ दो अह्ह्ह और और उह्ह्ह्ह उम्म्ं
इधर इनकी चुदाई पीक पर थी वही दूकान मे जन्गी की बेचनी कम नही हुइ थी ।
रात मे उसके अरमान पर शालिनी पानि फेर चुकी थी और जाने कबतक उसकी नाराजगी आगे तक रहने वाली थी ।
इनसब के बिच आस की एक मात्र किरन उसे रंगी ही नजर आ रहा था
उसे अपने भैया से बात करनी पड़ेगी
इधर उसका दिमाग उलट पलट हो रहा था तो वही कमरे मे राहुल और अरुण शालिनी को उलट पुलट कर चोदने मे लगे थे
अब राहुल निचे से शालीनी की गाड़ मार रहा था और अरुण आगे से चुत
अरून के करारे तेज झटको से उसका लन्ड भाले की तरह शालिनी की चुत की जड़ मे चोट कर रहा था और शालिनी बुरी तरह चिख रही थी
दोनो कडक लन्ड आज थकने वाले नही लग रहे थे - अह्ह्ह बेटा ओह्ह्ह फिर से आ रहाहै मेरा ओह्ह्ह ओह्ह्ह और और रुकना मत अह्ह्ह्ह
अरुन - आह्ह मामी आपका पानी बहुत गर्म है अह्ह्ह उह्ह्ह्ह उम्म्ंम
शालिनी - हा बेटा ज्ल्दी कर अब तु भी निकाल ले , 12 बजने वाले है अह्ह्ह
अरुण - अभी निकल जायेगा मामी बस आपको ।थोड़ा सा दर्द सहना होगा
शालिनी - क्या कैसा दर्द
अरुन मुस्कुराया और शालिनी के रस से लिभडाया लण्ड निकाल कर शालिनी के गाड़ के सुराख पर रखने लगा ,जिसमे पहले से ही राहुल का मुसल जड़ तक घुसा हुआ था - अह्ह्ह नही नही बेटा मै नही कर पाउगीअह्ह्ह पलिज मान जा
तभी राहुल उपर कर उसकी बुर सहलाता हुआ - डरो मत मम्मी मै हु ना
शालिनी - तु क्या करेगा फटेगी मेरी ना अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह मत कर अरुण मान जा बेटा अह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह नहीईई न्हीईईईईईईईईईई उम्म्ंममममहहहह रुक जाअह्ह्ह्ह्ह मादरचोद अह्ह्ह्ह रुक रुक अब रोक दे अह्ह्ह और नही
अरुन अपना सुपाडा घुसेड़ चुका था - बस मामी अब तो बस धक्का लगाना है
राहुल - आह्ह भाई बहुत कस गया है मेरा लन्ड ओह्ह्ह
अरुण - अह्ह्ह मामी बहुत टाइट है अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह उम्म्ंमममं क्या गाड़ है मेरी चुद्दो मामी उह्ह्ह्ह आज तो फाड़ दूंगा अह्ह्ह मेरी सेक्सी रंडी मामी
शालीनी - आह्ह साले हरामी आपनी मा के भोस्डा मे डाल मे चार चार अह्ह्ह मेरी क्यू फाड़ रहा है अह्ह्ह्ह बहिनचोद निकाल दे उह्ह्ह अह्ह्ह्ह न्हीईईई ओह्ह्ह्ह मह्ह्ह्ह उझ्ह्झ्ज
निचे से राहुल ने उसकी बुर के दाने को सहलाने लगा और हौले हौले अरुण लन्ड घुसेड़ने लगा - अह्ह्ह भाई तु भी आगे पीछे कर अह्ह्ह देख जगह बन रही है अह्ह्ह ऐसे ही हिहिह8। साले लौडा गरम है तेरा भ
राहुल - अह्ह्ह भाई मा की गाड़ बहुत आग फेक रही ओह्ह्ह मम्मी आह्ह मेरी रंडी मा मजा आ रहा है ना दो दो लन्ड से फड्वा कर आह्ह बोल ना
राहुल उसकी बुर के फाके रगड़ कर उससे कबूलवाने लगा और दोनो भाई अब बारि बारि आगे पीछे कर शालिनी के गाड़ दीवारे चौड़ी करने लगे
शालिनी की चुत एक बार फिर कुलबुलाने लगी और उसकी चुत की गर्मी बढने लगी - अह्ह्ह हा बेटा आ रहा है लेकीन दर्द हो रहा है अह्ह्ह अह्ह्ह लग रहा है दो दो लाठी घुसा रखा है अह्ह्ह
राहुल - ओह्ह मा उह्ह्ह्ह तुम्हारी गाड़ क्प देख देख कर हम पागल हो जाते है आज मौका मिला तो मिल कर फ़ाड रहे है अह्ह्ह मम्मीई ओह्ह कस क्यू रही हो अह्ह्ह
शालिनी - आज पिस दूंगी इसी मे तेरा लन्दह्ह्ह्ह मुझे दर्द दिया ना अह्ह्ह लेह्ह अब तु भी तडप , अह्ह्ह्ह साले हरामी अरून मादरचोद अह्ह्ह्ह हाथ हटा मेरी बुर से अह्ह्ह अह्ह्ह्ह आ रहा हौआ हहहहह ओह्ह्ह्ह्ह फिर आ र्हा है मेरा
शालीनी चौथी बार झड रही थी दोनो के आगे और इस जोश से अरुन्ं मे तेजी से लण्ड उसकी गाड़ मे ठेलनेलगा
राहुल - आह्ह भाआई निकाल बाहर फट जायेगा अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह माह्ह्ह्ह आयेगा मेरा भी ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह अह्ह्ह
अरुण भी अपना लन्ड खिंचता हुआ - ओह्ह्ह येस्स्स मामी आओ जल्दी आ रहा है
शालिनी झट से उठ कर घुटनो के बल होने लगी और अरुण की पिचकारि छूट पड़ी
मुह आंख गला चुचिया सब नहलाने लगा , वो वीर्य की धार मे जैसे शालिनी पर मूत रहा हो और हर पिचकारि के साथ शालिनी का चेहरा सनाने लगा
तभी एक और मोटी पिचकारि से गाढ़ी मलाई उसके लसराये मुह पर गयी - ओह्ह्ह मेरी रान्ड़ मम्मीई लेह्ह आह्ह तुझे नहला दन्गा ओह्ह्ह लेह पी जा अह्ह्ह्ह मम्मीई ओह्ह्ह अह्ह्ह्ह
अरुण- अह्ह्ह मेरी सेक्सी मामी क्या मस्त खिल रही हो एक फोटो तो बन्ता है आपके इस रूप का
शालिनी भी संतुश्त थी तो अरुं के सेलफी मे सामिल हो गयी ।
जिसमे अरुण अप्ना लण्ड शालिनी केवीर्य से सने मुह के आगे रखा हुआ और वो उसके आगे मुह खोले दिख रही थी ।
मानो खा जाने का इशारा हो
शालिनी - किसी को दिखाना मत
अरुण - ना ना बिल्कुल नही मेरी जान, ये तो जाने के बाद अपनी मामी को याद रखुन्गा उसके लिये हिहिही
राहुल - भाई मेरी भी ले ना एक मा के साथ
शालिनी ने उसके साथ भी उसी अवस्था मे पोज दिया ।
शालिनी - चलो चलो अब जाओ तुम सब और मुझे नहाना पडेगा
और जैसे ही शालिनी उठी उसकी कमर मे लचक सी आई- अह्ह्ह आऊचछच उह्ह्ह मर गयी रेहहह
दोनो भाई शालिनी की ओर लपके और उसे सहारा दिया
फिर छिपते छिपाते बाथरूम मे पहुचाया
ठन्डे पानी से नहाने के बाद शालिनी के बदन मे थोड़ी स्पुर्ती आई और वो किसी तरह दोपहर के खाने परोसने की तैयारि मे लग गयी ।
जारी रहेगी

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अमन के घर
दोपहर के खाने के बाद ममता, दुलारी और संगीता को लेकर कुछ खरीदारी के लिए बाजार निकल गयी ।
मदन अपने कमरे मे आराम फरमा रहा था तो रिन्की दुलारि के कमरे मे दो घन्टे से सो रही थी जबसे अमन ने उसकी चुत फाडी थी ।
इधर अमन भी सोनल के साथ कुछ प्रेम भरे पल बाट रहा था । सोनल भी कल के लिए अपने घर वालो से मिलने के लिए उत्साहित थी
दोनो प्रेमी आपस मे एकदूसरे से लिपटे हुए थे और अमन की दिलीइच्छा थी कि इस बार निशा भी आये ।
सोनल उसे छेड़ते हुए तुनक कर - आपको तो उसके काले अंगूर का ही रस पीना है , यहा मेरी गुलाबी मीठी किस्मिस की कली सूख रही है उसका नही ध्यान
अमन सोनल के प्यार भरे ताने से भितर से सिहर उठा और उसका खुन्टा लोवर मे हरकत करने लगा । उसने सोनल को अपनी ओर कसा और अपने तम्बू का बम्बू उसकी साडी के उपर से उसकी चुत पर चुभोता हुआ - ओह्ह्ह मेरी जान तेरे इस गुलाबी किस्मिस के दाने को अभी गीला कर देता हु
ये बोलकर अमन ने सोनल की मोटी उभरी हुई ब्लाउज से झाकती छातियो पर हाथ फेरा और सोनल सिहर उठी - अह्ह्ह मेरे राजाह्ह्ह्ह उम्म्ंम सीईई ना जाने आपमे क्या जादू है बाबू छूते हो और ये खड़ी हो जाती है
अमन उसकी मुलायम दूध से भरी मोटी पपीते सी छातियो को हाथ मे भर कर मिजता हुआ ब्लाउज के उपर से निप्प्ल वाली जगह को मुह मे भर काटता है - उम्म्ंमममं सीईई ओह्ह मेरी जान तुम्हारी इन्ही रसदार boobs का ही तो दीवाना हु मै उम्म्ंम
सोनल- अह्ह्ह माय बेबी उम्म्ंम सक इट उह्ह्ह मेरा बाबू उम्म्ंम ओह्ह आराम से ईईइस्स्स्स
तभी दरवाजे पर दसतक हुई और दोनो अलग हुए , इस अचरज और शंका भरे भाव से घर की औरते तो बाजार गयि है फिर कौन उपर आकर उन्हे परेशान करेगा
तभी अमन का दिमाग ठनका और उसे अपने बाप की याद आई । वो जल्दी से उठ कर खड़ा हुआ और हड़बड़ाहट भरे लहजे मे - उठो उठो , पापा है !
ससुर के आने की बात पर सोनल की भी हालत खराब हुई जल्दी जल्दी वो भी खड़ि होकर अपने जोबनो पर आन्चल डाला और साडी सही करने लगी ।
अमन ने अपना लन्ड सेट करने को कोसिस की मगर कोसिस नाकाम ही रही , उसका लन्ड मोटे रॉड की तरह अभी भी उसके लोवर मे उभरा हुआ साफ नजर आ रहा था ।
बड़ी मुश्किल से दरवाजे के ओट मे खुद को छिपाते हुए उसने दरवाजा खोला और सामने मुरारी था ।
सारी हकीकत से परिचित होने के बाद भी अमन ने उस्से सवाल किया - अरे पापा आप यहा ? फ़ोन कर देते !
मुरारी झिझक भरे लहजे मे अमन के पीछे खड़ी सोनल को एक नजर देखा जो सन्सकार बस मुस्कराती हुई अपने सर पल्लू कर रही थी
और अनायास मुरारि की नजर अपनी नयी नवेली बहु के चिकने पेट के किनारो पर चली गयि , जिसकी कोमलता और मलाई सी गोरी चमडी देख कर मुरारी एक पल के लिए सम्मोहीत सा हो गया , मगर अगले ही पल उसने खुद को उस नजारे से अलग किया - अह फ़ोन किया था मैने , तुने उठाया नही ।तुझ्से थोडा काम है जरा निचे आना
ये बोलकर मुरारी घूम कर वापस जाने लगा और फिर घूम कर - और वो समान कल मगाया था वो लेते आना ।
जाते जाते एक बार फिर मुरारी ने सोनल की चिकनी कमर पर नजर मारनी चाही मगर इस बार देखा तो सोनल मे सब कुछ अच्छे से ढक रखा था । उस पल भर मे ही मुरारी समझ गया कि सोनल ने उसकी चोरी पकड ली और वो बिना अपनी बहू की ओर देखे चुपचाप निकल गया ।
सोनल ने पार्सल के बारे पूछा तो अमन के बात बदल दी और वो पैकेट लेकर निकल गया नीचे
वही मुरारी अपने कमरे मे बेचैन टहल रहा था जैसे ही अमन कमरे मे दाखिल हुआ उसकी चेहरे पर मुस्कान छा गयी - आ गया बेटा आ आ बैठ
अमन मुस्कुरा कर सोफे पर बैठ गया और मुरारी हसता हुआ - माफ करना बेटे मैने तेरे और बहू के एकांत के पल में डिस्टर्ब कर दिया ।
अमन लजाता हुआ मुस्कुरा कर - क्या पापा ऐसा कुछ नही कर रहे थे हम लोग , सची मे
मुरारि - वो जब तु दरवाजे के पीछे छिपा था तभी मै समझ गया है हाहाहा अरे मुझसे क्या शर्माना , ऐसा तो मेरे साथ भी हुआ है कई बार हिहिहिही
अमन - हैं सच मे ? कब ?
मुरारी- अरे वो तब जवानी के दिनो की बात थी , गाव वाले घर मे मुश्किल से तो तेरी मा के साथ समय मिलता था और ज्यादातर तो हाहहहा
अमन - क्या ज्यादातर ?
मुरारी हस्ता हुआ - अरे वो तुम जवान लोग आपस मे आजकल क्या बोलते हो ? एलकेपीडी ...
अमन हसता हुआ - वो केएलपीडी होता है पापा हाहाहा
मुरारी हस्ता हुआ - हा वही खड़े लन्ड पर धोखा हाहाहा यही मतलब है ना उसका
मुरारि के यूँ खुल कर मजाक करने से अमन थोडा सा लाज से झेप जाता है और मुस्कुरा कर - जी
मुरारी अपनी बात आगे बढ़ाता हुआ - और उसपे से तेरी मा , खूब नखरिली हाहाहा मुझे सताने मे ना जाने क्या मजा आता है उसे ।
" वो तो सबकी बिवियाँ करती है ", अमन बहुत महिन सा बुदबुदाया मगर मुरारि के तेज कानो ने उसकी आवाज को पकड़ लिया ।
मुरारि हस्ता हुआ - अच्छा तो बहू भी कुछ नही है हाहाहा , वैसे रात मे क्या हुआ ?
अमन के कान खड़े हो गये कि ये क्या पूछ रहा है उसका बाप ।
अमन - मतलब ?
मुरारी धीमी आवाज मे उसके पास होकर - अरे वो रात मे दिया था ना , वो यूज किया कि नही ?
अमन लाज भरि मुस्कुराहट के साथ - हम्म्म किया ।
मुरारी का खुन्टा एकदम कड़क होने लगा उसे जानने की उत्सुकता भी थी और झिझक भी हो रही थी
हिम्मत कर मुरारी ने पूछ ही लिया - कितनी बार
अमन मुस्कुरा कर - आपने जितनी बार कहा था
मुरारी का लण्ड एकदम से फड़फडा उठा - और बहू , उसने ऐतराज नही किया ?
अमन - उहू ... मेरे ख्याल से उतना नानुकुर सब बिवियां करती होगी बस उतना ही उसने भी किया ।
मुरारी हसता हुआ - वैसे पूछना तो नही चाहिये लेकिन कैसा लगा तुझे उस समय
अमन के चेहरे पर मुस्कुराहट थी मगर शर्म से लाल होते उसके गाल भी साफ नजर आ रहे थे - अह अब कैसे बताऊ , आपको तो पता है कैसा लगता है । इसमे बताने जैसा क्या है पापा ?
मुरारी पैर फैला कर अंगड़ाई लेता है और पजामे मे बना हुआ उस्का तम्बू साफ साफ अमन को दिखता है - अह्ह्ह अब क्या बताऊ अमन तुझे और बहू को देखता हु तो अपने जवानी के दिन की यादे ताज़ा हो जाती है । शुरुआती दिनो की वो मीठी शरारतें , घर मे चोरी छिपकर तेरी मा के देह से छिपकना खेलना उम्म्ं वो यादे उफ्फ़फ्फ
अमन खिलखिलाता है तो मुरारी मुस्कुरा कर - हा भाई सच कह रहा हु , तुझे तो तेरा अपना कमरा मिला है , गाव मे होता तो पता चलता कैसे रात के सन्नाटे मे सासे थाम कर सिसकिया घोट कर चुदाई करते हैं ।
अमन हस रहा था
मुरारी- लेकिन उस तकलिफ मे भी मजा होता था जब हम अपनी मस्तियाँ पूरी करने मे कामयाब हो जाते थे । जब मै तेरी मा के भीतर झड़ जाता था सारी खुन्नस सारी शिकायते सब बह जाती थी ।
अमन गला साफ करता हुआ चोर नजरो से अपने बाप को उसकी यादो मे खोया हुआ अपना मोटा मुसल पजामे के उपर से मसलता देखता है और खुद भी अंगड़ाई लेकर अपना लन्ड मसल कर सीधा करता हुआ - आह्ह पापा लो ये आपका पार्सल
मुरारी- अरे हा खोल खोल देखता हु जरा
अमन फटाफ़ट से पैकेज खोलता है और फिर उसमे से ब्रा पैंटी को निकाल कर अपने पापा को देता है ।
मुरारी उस नरम मुलायम महिन सूत वाले कपड़ों के बने ब्रा और पैंटी का मखमलीपन अपनी उंगलियो मे मह्सूस करता हुआ उन्हे अपने नथुनो तक ले जाता है - उम्म्ंम्ममम्ंम्ं वाह एकदम फ्रेश है
अमन अपने पापा की कामुकता को अजीब नजरो से निहारता है - क्या सुँघ रहे हो पापा
मुरारी हस कर - ओह मुझे ये नये ताजे कपड़ो की खुशबू अच्छी लगती है और जब इसमे तेरी के देह की खुस्बू भीन जायेगी उह्ह्ह्ह तब तो येहहह ओह्ह्ह्ह्ह
अमन अपनी मा के जिस्म की खुस्बू के नाम से ही गनगना गया और उसका मुसल हथौड़ा सा हो गया । गुपचुप से उसने अपना मुसल खुजाया ।
मुरारी- और इसका कलर बहुत खिलेगा तेरी मा पर और इस रंग की चुन्नी भी तो है उसके पास
अमन - चुन्नी ? इसपे चुन्नी का क्या काम ?
मुरारी खिलखिला कर हसता हुआ अमन के कंधे पर हाथ घुमाता है - हाहाहाहा तु भले ही इस जमाने का है मगर शादीशुदा जीवन के मजे लेने मे पीछे ही रहेगा अपने बाप से
अमन - मै समझा नही पापा , आखिर ब्रा पैंटी के साथ उसकी मैचींग चुन्नी का क्या काम?
मुरारी- क्या काम!! बेटा तुझे एक बार की बात बताता हु
हुआ यूँ था कि शादी के कुछ महीने बाद एक रिस्तेदार के यहा शादी मे घर के बाकी जन गये हुए थे और चूकि तेरी मा अभी नयी ब्याही आई थी तो उसको साल भर तक किसी के यहा जाने पर मनाही थी और उसकी देख रेख का ख्याल रखने के लिए मुझे रुकना पड़ा था
अमन - अरे वाह फिर
मुरारी अमन की चहकपने पर हसकर - बताता हु भाई सुन
पूरे 3 रोज के लिए घर के सारे लोग गये थे और मैने तेरी मा को इस बात के लिए मनाने लगा कि वो फिर से शादी वाला लाल जोडा पहने , बहुत नानुकुर और प्यार जताने पर वो मान ही गयी
अमन - मतलब फिर से सुहागरात हिहिही
मुरारी- हा ऐसा ही कुछ फिर मुझे ख्याल आया क्यूँ ना उसके लाल जोड़े को पुरा करने के लिए लाल रंग की ब्रा पैंटी भी ला दूँ और उसी रोज मै बाजार जाकर ले आया ।
उस रोज तेरी मा बहुत खुश थी लेकीन जब मैने कहा कि मुझे इसे पहन कर दिखा तो वो शर्मा कर मना करने लगी।
अपने पापा की बातें और अपनी मा को लाल रंग की ब्रा पैंटी मे सोच कर ही अमन का लन्ड बौरा गया , वो अपना मुसल रगड़ते हुए सिसका - फिर पापा क्या हुआ , क्या मा पहन कर आई ?
मुरारी- हा बेटा और वो नजारा आजतक नही भुला उफ्फ्फ जैसे ही मै कमरे मे दाखिल हुआ मेरा मन मचल उठा , दिल खुशी से उछलने लगा , सामने तेरी मा बिस्तर के पास खड़ी थी उसने अपने सर पर शादी की विदाई वाली लाल चुनरी ओढ़ कर घूँघट कर रखी थी और गले से निचे उसका गोरा संगमरमरी बदन मेरे दिये तोहफो से सजा हुआ था ।
वो छींट वाली प्रिंट की ब्रा उसके तंदुरुस्त दूध पर कसे हुए थे और वो पतले पट्टी वाली लाल कच्छी उसकी जांघो के बीच से जैसे कमल सी खिल उठी थी ।
अमन का दिल अपने पापा की बाते सुन कर जोरो से धड़कने लगा उसका लन्ड अपनी मा को लाल ब्रा पैंती मे सोच कर पुरा फडकने लगा , चेहरे पर कामुकता साफ साफ हावि दिख रही थी । वही मुरारी बड़ी बेबाकी और बेहिचक होकर अमन को सारी बाते बता रहा था
मुरारी- सच कह रहा हु बेटा अगर तु उस समय अपनी मा को देख लेता तो तु भी उसका दिवाना हो जाता हाय्य्य
और उसने अमन की ओर देखा जो आंखे बन्द किये तेज तेज सासे ले रहा था और उसका हाथ उसके लन्ड को भींच रहा था । मुरारि समझ गया कि अमन अपनी मा को अपनी कल्पना मे देख रहा है ।
मुरारी- बस आज रात वो यादे ताज़ा होने वाली है ,आज की रात मै उसे फिर तैयार होने को कहुगा
अमन - हा पापा मै भी
मुरारी चौककर - क्या मतलव
अमन हस कर - अरे मतलब आज मै भी सोनल को ऐसे ही तैयार होने को कहूँगा , वैसे क्या मा ने सारे साज सृंगार किये थे या बस चुन्नी ली थी ।
मुरारी हस कर - अरे सबर कर ले , कल मै तुझे उसकी फोटो दिखाऊँगा फिर तु समझ जायेगा
अमन की आंखे चमक उठी - क्या सच पापा ?
मुरारी मन मे उभरते लालच को दबाता हुआ - हा उसमे क्या है , तु उसका ही बेटा है गैर थोड़ी ।
मुरारी ने इस बात के साथ अपना दाव खेल दिया था इस उम्मीद मे कि शायद ममता के बदले अमन सोनल की भी तसविरे उसे दिखाये और अपनी हीरोईन सी सेक्सी गोरी चिट्टी बहू को ऐसे तैयार होकर देखने के बारे मे सोच कर मुरारि का जजबात उबाल मारने लगे
मगर उसने अपने जजबात को काबू मे रखा और संयम से इंतजार करना सही समझा ।
राज के घर
रागिनी अनुज को लेकर दोपहर का टिफ़िन लेके बाजर के लिए निकल गयी थी , निशा भी किचन के काम निपटाने के बाद नहाने के लिए उपर जा चुकी थी
वही रागिनी के रूम मे शिला और रज्जो आपस मे मिलाप कर रही थी , शिला अपनी बड़ी सी तरबूज सी गाड़ फैलाये कुर्ती उठाए आगे झुकी हुई थी
रज्जो उसकी नंगी गोरी गाड़ को सहलाती हुई उसके नरम मुलायम चुतड पर पन्जा जड़ती है जिससे शिला सिस्क पड़ती है - अह्ह्ह्ह भाभीईई उम्म्ंम्ं ओह्ह्ह मान जाओ ना प्लीज एक बार
रज्जो उसकी गाड़ की दरारो मे उंगलिया घुसाती हुई सुराख मे उंगली पेल दी - अह्ह्ह तुम समझ नही रही हो दीदी उम्म्ंम रमन के पापा नाराज हो जायेन्गे
शिला - अह्ह्ह भाभीईई उह्ह्ह्ह उफ्फफ़फ़ उम्म्ंम खा जाओ उम्म्ंम्ं और चाटो उम्म्ं ये अनुज मुये ने मेरी चुत की खुजली बढा दी अह्ह्ह्ह सीईई
रज्जो शिला की टाँगे खोले उसकी चुत पर जीभ चला रहा थी और चाट रही थी ।
शिला - आह्ह भाभीईई बस तुम हा करो । वहा तुम्हे वो मजा मिलेगा वैसा तुमने कभी नही लिया होगा
रज्जो उसकी चुत से अलग हुई और अपनी नंगी छातिया मिजने लगी
शिला ने अपने पैर उसके गुदाज चुचो पर रख कर निप्प्ल पर सहलाने लगी जिस्से रज्जो की सासे उखड़ने लगी - ऊहह छोडो ना दिदी , चलो ना नहाते है आओ
ये बोल कर रज्जो उठ खड़ि हुई और अपनी कमर मे अटकी पेतिकोट को सरका कर सिर्फ पैंटी मे आ गयी और कुल्हे हिलाती मुस्कुराती हुई बाथरूम मे चली गयी ।
शिला भी अपनी कुरती उतार कर फेक दिया और तौलिया लेकर बाथरूम मे दाखिल हुई और उसकी नजर रज्जो के पर गयि
अपने जिस्म से ब्रा उतार कर पूरी नंगी हो रज्जो के करीब गयी और उसको पीछे से जकड़ लिया - अह्ह्ह भाभीई मेरी जान मान भी जाओ ना बस कुछ रोज की ही बात है
रज्जो के चुचो पर शिला के रेंगते हाथ उसने कस कर पकड़ लिये तो शिला ने उसकी चुचिया मिजनी शुरु कर दी - अह्ह्ह्ह दिदीईई उम्म्ंम्म्ं अह्ह्ह्ह्ह
शिला - थोडा सा भरोसा रखो मेरी जान उम्म्ंम वहा तुम्हारा बदन और निखर जाएगा
"और तुम्हारे ये गोल मटोल तरबूज के चुतड उम्म्ंम्म्ं" , शिला निचे बैठ कर रज्जो की पैंती के गाड़ से सरकाती हुई उसे चूमती हुई निचे करने लगी ।
शिला - ओह्ह भाभी तम्हारी ये गाड़ उम्म्ं इसको ऐसे ना तरसाओ इसमे तो जमाने भर के लन्ड घुसाने की जगह है उम्म्ंंम्ंम्ं सीईई
शिला रज्जो की गाड़ मसलती हुई उसके चुसने चाटने लगती है - अह्ह्ह्ह दीदी उउम्ंंंं ओह्ह्ह पर मुझे डर लगता है अह्ह्ह रमन के पापा को क्या कहुगी मै उम्म्ं
शिला उठ खड़ी हुई और घुमाती हुई उसके लिप्स से अपने लिप्स जोड़ लिये , रज्जो ने भी उसके होठ चुसने शुरु कर दिये
दोनो रसभर अधर एकदुसरे मे घुले जा रहे थे और उनकी नगन छातियां आपस मे चुभ रही थी ,
रज्जो के हाथ शिला की मक्खन सी जांघो को उठा हुए उसके चर्बीदार चुतडो को सहला रही थी ।
रज्जो - अह्ह्ह मेरी जान मेरे सैयया मतल्ब रमन के पापा तो अभी से मेरे बिना पागल है , वो और मुझसे दूरी नही सह पायेंगे अह्ह्ह्ज समझ ना
शिला उसके गाड़ को पक्ड कर अपनी ओर उसको खिंचती हुई - तेरे उस गाड़ चतोरे साजन की फिकर ना कर उसको कैसे मनाना मै जानती हु मेरी चुदक्क्ड घोडी तू हा कर बस
रज्जो ने मुस्कुरा कर शिला को देखा - मतल्ब दीदी तुम कैसे ? शिला शर्माई और बोली - तेरे साजन बहुत कुछ तुझसे छिपाते है मेरी सजनी
रज्जो ने आगे बढा कर शिला के बुर टटोलती हुई - मतलब इस भोस्ड़े मे भी उन्होने खुन्टा गाड़ दिया उम्म्ंम
शिला मुस्कुराती हुई सिसकी तो रज्जो ने उसकी दोनो निप्प्ल पक्ड कर नोचती हुई उसे अपने अपनी बाहो के भर के उसके होठ चुसने लगी - अह्ह्ह साली रंडी तु तो मेरा ही माल खा गयी उम्म्ंम अब देख कैसे तेरा माल मै खाती हुई वो भी तेरे घर मे घुस कर
शिला खिल उठी - तो क्या सच मे भाभी तुम चलोगी
रज्जो - हा चलूँगी ना , अगर तु मेरी चुत चाट कर खुश कर दे
शिला मुस्कुरा कर उसकी बुर सहलाने लगी - उम्म्ं मेरि सेक्सी रान्ड़ इसमे मेरा ही फाय्दा है आजा
शिला सरकर निचे हो गयी और रज्जो ने उस्के मुह पर अपनी बुर रख दी
वही उपर नहाने के बाद निशा निचे आने लगी ये खोज खबर लेने कि अगर घर की बाकी औरते बिजी हो तो वो अरून के लैपटॉप मे पोर्न्ं देख पाये
चुपचाप दबे पाव वो निचे हाल मे आई और निचे पुरा सन्नाटा पसरा हुआ था और गेस्ट रूम का दरवाजा खुला
कही कोई नजर नही आया तो निशा रागिनी के कमरे की ओर बढ़ी
दरवाजा खुला हुआ था और बाथरूम से तेज सिस्किया और अवाजे गूंज रही ।
निशा ने भागकर सबसे पहले मेन गेट चेक किया और वापस आई उसकी सासे तेज चल रही थी तेज कामुक सिसकियाँ सूनकर उस्के जहन मे समझ आ रही था किसी की तगडी पेलाई चल रही थी मगर किसकी ?
उसके निप्प्ल कडक हो गये और सासे दुगनी गति से चल रही थी , कलेजा थाम कर जैसे जैसे वो दरवाजे की ओर बढ़ रही थी उसको रज्जो की साफ और स्पष्ट गाली भरी चीख सुनाई दे रही - अह्ह्ह बहिनचोद चाट ओह्ह्ह ऐसे उम्म्ं खा मेरी बुर उह्ह्ह ओह्ह आज तुझे नहला दूँगी अपनी रस से ओह्ह्ह्ह एल्ह्ह्ह उम्म्ंम
निशा के कान खड़े हो गये कि रज्जो किसकी मुह पर अपना भोस्डा रग्ड रही है और जैसे ही उसने बाथरूम मे झाका तो देखा ,
बाथरूम की फर्श पर शिला बुआ फैली हुई गरदन उठा हुए थी और रज्जो मौसी अपनी चुत उनके मुह पर दर रही थी - लेह्ह्ह साली कुतिया चाट उम्म्ंम पी जाह्ह्ब उह्ह्ह मादरचोद उह्ह्ह लेह्ह्ह ओह्ह्ह ओझ्ह शिलाअह्ह्ह मेरी जान उम्म्ंम आ रहा है ओह
निशा की आंखे फटी की फटी रह गयी कि रज्जो मौसी और शिला बुआ एक साथ ऐसे , अन्जाने मे उसके मुह यही निकला - ओह्ह गॉड बुआ मौसी आप लोग ?
दोनो चौके और निशा को देख कर खड़े हो गये शिला की हालत खराब थी वो रज्जो से फुसफुसाई - अब क्या करे
रज्जो- अरे शिकार खुद चल कर आया तो हलाल होगा
रज्जो - तु यहा कया कर रही है ये , इधर आ पहले
निशा - हा लेकिन आप लोग ऐसे ? दरवाजा बन्द कर लेते
रज्जो- तु बड़ी समझदार है उम्म्ं इधर अभी तुझे ठिक करती ह
ये बोल कर रज्जो ने उसे पकड़ कर खिंच और लोवर के उपर से उसकी चुतड़ पर थपेड लगाती हुई - किसी के कमरे मे जाने से पहले दरवाजा खटखटाना चाहिये ना
निशा - अह्ह्ह सॉरी ना मौसी , लेकिन आप लोग ये सब क्या कर रहे थे अह्ह्ज्ज
रज्जो - दीदी इसको भी अनुज की तरह सजा दो , कपडे उतारो
अनुज की तरह सजा का मतलब कुछ कुछ समझ आ रहा था निशा को - क्या मतलब अनुज की तरह सजा, उसने भी देखा क्या आप दोनो
शिला उसका लोवर खिंच कर - देखो तो कैसे सवाल जवाब कर रही है हा ,बहुत बिगड़ गयी है तु भी
ये बोल कर शिला के चुतड़ पर चट्ट से पन्जे जड़ देती है जिस्से निशा का जिस्म झनझना जाता है -अह्ह्ह बुआ मार क्यू रहे हो ओह्ह्ज उम्म्ं
इधर रज्जो ने उसकी पैंती पकड़ कर खिंचती हुई - उसके गाड़ पर थपेड़ लगाती हुई - देखो तो इस्क्प एक तो चोरी उसपे से सिना जोरि
निशा - अह्ज्ज मैने किया क्या है लेकिन
रज्जो - अरे दिदी यही तुम्हारा बड़ा वाला समान लेके गयी थी
शिला - क्या सच मे ? ये लडकी बोल कहा रखा है उसे ,
रज्जो ये ऐसे नही बोलेगी इसको कमरे मे के चलो और
फिर रज्जो उसे टांग लिया और कमरे मे घोडी बना कर उसकी पैटी खिंच कर उसकी गाड़ पर थपेड लगा कर - बोल कहा रखा है तुने उसे
निशा - आह्ह क्या बोल रही हो मौसी मै कहा लाई थी
रज्जो - मैने साफ साफ देखा था दिदी इसको कमरे से निकलते हुए ,
शिला - तभी तो मै सोचू इसकी जवानी कैसे निखर रही है आह्ह अभी से इसने घोट रखा है इतना सारा
रज्जो - बोल देगी की नही वापस
निशा - मै नही लेके गयी थी बुआ बोलो ना मौसी को
रज्जो - ये ऐसे नही मानेगी रुक
रज्जो ने उसे लिटाया और उसके मुह पर बैठ गयी - उम्म्ंम बोल ऐसे ही तेरे ये जोबन मोटे हुए है उम्म्ंम
शिला - हा रुको मै भी निचे से चेक करती हु सारी सच्चाई खुल जायेगी ये बोल कर शिला ने उस्की टांगो से पैंती खिंच कर अलग कर दी , उसकी बजबजाती बुर पर हाथ फेर कर उसके फाके अलग करती हुई - हम्म्म्म साफ साफ लग रहा है इसने घुसाया उम्म्ंम
निशा - आह्ह सीईई ओह्ह्ह बुआ क्याअह्ह्ह कर रही हो उम्मममंम्ं ओह्ह्ह
रज्जो - साली रंडी ले चाट अह्ह्ह्ह बोल मत , तेरा भेद खुल गया है अह्ह्ह उम्म्ंम
निशा मुस्कुराई और आंख मारते हुए रज्जो से हल्के से बोली - लेकीन ड्रामा करने मे माजा आ रहा है
निशा हसती हुईई - ओह्ह्ह बुआ ये क्या कर रही हो अपनी बेटी के साथ उह्ह्ह्ह मत चाटो उसकी कुवारि चुत को अह्ह्ज सीईयियो
रज्जो निशा की शरारत पर हस पड़ि और अपनी बुर को उसके मुह पर रख दी जिसे निशा चाटने लगी
वहि शिला भुखी शेरनी की तरह निशा की बुर पर टुट पड़ि थी , उसके सपने आज हकिकत हो रहे थे , दिल मे जो अरमानो का बाग लेके आई थी वो खिल रहे थे
निशा की नमकीन चुत का स्वाद पाकर वो पागल हो गयी थी - आह्ह निशा तेरी बुर सच मे बहुत गर्म है उम्म्ं ऐसी ही कुवारि चुत का रस पसम्द है उम्मममं सीईई
निशा - अह्ह्ह बुआ अह्ह्ह इतनी अच्छी है क्या उम्म्ंम खा जाओ उह्ह्ह येस्स्स उम्म्ंम फ्क्क्क्क ओह्ह्ह जीभ से भी आह्ह हा ऐसे ही उम्म्ंम फक्क्क ओह्ह्ह बुआअह्ह्ह्ह मेरी प्यारी बुआ ओह्ह्ह अह्ह्ह्ह आ रहा है उह्ह्ह्ह
रज्जो - रुक जा रुका जा ऐसे नही मुझे भी तो अपनी भतीजी के चुत का रस लेने दे आजा
ये बोल कर रज्जो उठी और निशा की टांगो मे कैची बना कर उसकी चुत पर अपनी चुत रगड़ने लगी - अह्ह्ह मौसी उह्ह्ह ये तो अलग ही मजा आ है अह्ह्ह्ज उम्म्ंम्ं कितना तप रहा है आप्का भोस्डा अह्ह्ह उह्ह्ज्ज फक्क्क्क उम्म्ंम्ं
शिला - अह झड जा बेटी झड जा अपनी मौसी के बुर पर ओह्ह्ह
निशा - हा बुआ फिर आप चाटना अपनी बेटी की वुर बोलो चातोगे ना उम्म्ंम अह्ह्ज्ज्ज सीयिओई और तेज मौसी अह्ह्ज बहुत मुलायम है अह्ह्ह रहा नही जा रहा है अह्ह्ह्ज फक्क्क्क ऐसे ही उह्ह्ह्ह आओ जा बुआ तुम भी अओझ्ह अह्ह्ज
शिला उठ कर उनके पास आ गयी और दोनौ उसकी चुचिया मुह के भर कर चुसने लगे - आह्ह बेटा उम्म्ंम पी ले ऊहह और चुस उह्झ भाभीईई अह्ह्ह काट डालोगी क्या आह्ह सीईईईई अह्ह्ह
रज्जो - ओह्ह्ह निशा अह्ह्ह सीईई आ रहा है मेरा अओह्ह्ह्ह।
निशा -हा मौसी मेरा भी उम्म्ंम अह्ह्ह्ह हहह फ्क्क्क अह्ह्ह मम्मीईई अह्ह्ह आह्ह आ रहा उह्ह्ह बुआआ हहहहह आ गया आ गया ओह्ह्ह शिट उह्ह्ह फक्क्क ऊहह फक्क्क
।
रज्जो और निशा हाफने लगे और फैल लार लेट गये वही शिला बारी बारी से दोनो के बुर के मिले हुए रस को चाटने लगी ।
जारी रहेगी