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Bhai log… suno to zara, dil se dil tak confession hai. Mera naam bhi amit hi hai (sach mein). Yeh kahani maine apni bhanji Riya ko padhayi thi… bilkul issi tarah, phone par bhej kar. Usne padhte-padhte mujhe message kiya, “Mama ji… yeh Sheenu wali story mein jo feel ho raha hai na, wohi feel...
अरे भाई, कहानी तो अभी तो असली आग पकड़ने वाली है!
पगड़ी की रस्म, रात का अंधेरा, बीना का पूरी तरह टूटकर बेटे के सामने लोटना, गुड्डी का माँ को राजू के बिस्तर तक खींचकर लाना, और फिर तीनों का एक साथ भूसे पर त्रिरंड बन जाना… ये सब तो अभी बाकी है ना!
Writer भैया कहाँ गायब हो गए?
जल्दी से अगला भाग...
अध्याय 1: स्कूल की घंटियाँ और पहली लड़ाई
सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंडरी स्कूल, शहर के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक था। बड़ा सा गेट, हरे-भरे मैदान, लंबी-लंबी इमारतें और उसमें भागते-दौड़ते बच्चे — हर कोना कुछ कहता था।
मई का महीना था। गर्मी अपने चरम पर, लेकिन बच्चों की शरारतें कभी मौसम...