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सीढ़ियो से चलते हुए उसके कूल्हे जिस तरह से मटक रहे थे वो एक शानदार सींन था भीमा धीरे-धीरे उन नज़रों को देखता हुआ अपने आपको संभलता हुआ कामया के पीछे-पीछे सीढ़िया चढ़ता जा रहा था
जिस तरह से कामया सीढ़िया चढ़ रही थी और जितना मटक मटक कर अपने जिश्म को लहरा रही थी वो शायद कोई औरत कपड़ों में भी नहीं...
और नजर झुकर खड़ा हो गया था पर अपने लिंग को कामया के हाथों से छुड़ाने की जरा भी कोशिश नहीं किया था कामया की हथेली में उसका लिंग पानी छोड़ने के बाद सिकुड़ने लगा था पर उसके हाथों में उसका वीर्य अब भी चमक रहा था वो नीचे सिर किए हुए कामया के हाथों में अपने लिंग को देख रहा था और उसकी गोरी गोरी जाँघो...
कामया- क्या आज ही सारा काम खतम करना है
एक उत्तेजित और हुकुम देने वाली आवाज किचेन ने गूँज उठी थी भीमा की नजर एक बार कामया के चहरे पर गई थी कितना रुआब था उसके चहरे पर कितनी निडर हो गई थी वो पहले तो आवाज ही नहीं निकलती थी सिर्फ़ हाँ हूँ और उऊफ और आह के सिवा कुछ नहीं
कामया- लाखा कहाँ है …...
कामया- क्या हुआ मम्मी जी
मम्मी जी ऐसे नींद से जागी थी
मम्मी जी- नहीं एयेए अंदर आ
और थाली से आरती कर कामया को सहारा दिए घर के अंदर ले आई थी कामया ने मम्मी जी के साथ-साथड्राइंग रूम में प्रवेश किया था घर बड़ा सजा हुआ लगता था पर वही घर जहां वो इतने दिनों तक रही थी और अपने सपनो को पूरा करने...
और कामया के देखते-देखते मनसा ने एक बार कामया की ओर गोर से देखा और दूसरे कमरे की ओर ले जाने लगी थी कामया भी मनसा के पीछे-पीछे दूसरे कमरे में आ गई थी एक बड़े से टेबल के दोनों ओर कुछ महिलाए खड़ी थी और एक बड़ा सा ऊँचा सा चेयर रखा था डाइनिंग रूम जैसा कुछ था टेबल पर कँडल जल रहे थे मनसा ने इशारे से...
पर मुस्कुराती हुई मनसा ठीक वैसे ही बैठी रही थी अपनी हथेलयो को बस उसके गाल और गले तक पहुँचा भर दिया था इससे क्या होगा जो चाहिए था वो करो कामया का दिल बड़े ही जोर से धड़क रहा था हर अंग एक नई कहानी लिखने को बेकरार था हर एक कोना खिल उठा था हर एक हिस्सा अलग अलग तरह की फरमाइश कर रहा था इतने सारे हाथों...
कामया भी बिना कोई ना-नुकरके खड़ी थी और टेबल की ओर देखती हुई मनसा की ओर देखा जैसे पूछ रही हो अब क्या , …
मनसा ने मुस्कुराते हुए उसे उस टेबल पर लेटने को कहा कामया आगे बढ़ कर उस टेबल पर बैठी ही थी कि मनसा ने उसके ऊपर ढका हुआ कपड़ा धीरे से खींचकर अलग कर लिया था कामया के लेट-ते ही दो महिलाए वहां...
पर एक साथ पीछे से भी उसके अंदर तक जाने की कोशिस ने उसे आचरज में डाल दिया था वो कुछ समझती , इससे पहले ही उसके गुदा द्वार पर एक आक्रमण और हो गया था तेल में डूबा उसका शरीर इतना मुलायम और फिसलता हुआ सा था की लगता था कि जहां जो घुसाओ वो वही घुस जाएगा और हुआ भी यही धीरे-धीरे योनि के साथ साथ उन महिलाओ...
थोड़ी देर में ही सभी नार्मल हो गये थे और कामया को छोड़ कर अलग हो गये थे
मनसा- आइए रानी साहिबा अब तेल से मालिश के लिए तैयार हो जाइ ए
कामया- नहाने के बाद तेल से मालिश … …
मनसा- अभी स्नान कहाँ हुआ है अभी तो सिर्फ़ आपके शरीर को गीला भर किया है अभी तो मालिश होगी फिर उबटन लगेगा फिर उबटान को...
कामया अब तक थोड़ा सा नार्मल हो चुकी थी जहां तहाँ हाथों का घूमना अब उसे अच्छा लगने लगा था अब तक उसके शरीर ने सिर्फ़ मर्दाना हाथों का स्पर्श ही जाना था पर आज महिलयो के स्पर्श से उसे एक नई बात का पता चला था कि कितना नरम और सुखद स्पर्श था यह कितना जाना पहचाना और बिना किसी जिग्याशा लिए हुए हर कोने को...