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भीड़ में सुनाई देने वाली आवाज़ें अक्सर समझौता होती हैं, और खामोशी में मिलने वाला सच... सुकून। हम भाग नहीं रहे, बस अपनी मंज़िल के लिए उस रास्ते को चुना है जहाँ हर कोई चलने की हिम्मत नहीं रखता
उस सन्नाटे का डर उन्हें दिखाओ जिन्हें महफिलों का लालच हो। हमने तो खामोशी से दोस्ती कर ली है। अकेलेपन का बोझ वही महसूस करते हैं जिनके पास यादों का कोई समंदर न हो। हम तो वो हैं जो उस सन्नाटे में भी अपनी धड़कनें सुन लेते हैं
इश्क की राह चुनी है, कोई समझौता नहीं... जिंदा लौट आने की हसरत अब हम रखते ही नहीं। जीने की फिक्र उन्हें होती है जो किनारे से तमाशा देखते हैं, हम तो वो हैं जो डूबकर भी इतिहास रचते हैं
उर्वशी की हालत देखकर सच में तरस आता है। वो 'पाउडर' के नशे में इतनी धुत्त है कि उसे सही-गलत का होश ही नहीं रहा। उसकी जवानी की गर्मी और नशे की ठंडी ने उसे आर्यन जैसे 'भेड़िये' के सामने डाल दिया है।
अब जो मोड़ आया है वो बहुत खतरनाक है। हुमा कमरे में बंद है, उसकी सलवार पर पवन की जीत का सफेद माल लगा है, और इमरान बाहर हैं। अब जब इमरान घर के अंदर कदम रखेंगे, तो क्या हुमा सच बताएगी? या वो दाग छुपा लेगी?
सात फेरे और 'काम की पूर्ति' वाले फेरे पर तमन्ना का शर्माना... और फिर नाक पर गिरा वो सिन्दूर की बूंद। आपने बहुत ही खूबसूरती से दिखाया कि कैसे छह महीने की आग के बाद अमन को अपनी मंजिल मिली