अध्याय १
उत्तर भारत के एक नदी के किनारे बसा तबलापुर गाँव प्रकृति का एक अनमोल नगीना था, चारों ओर घने जंगल इसे एक हरे-भरे कवच में लपेटे रखते थे, जहाँ चीड़, देवदार, और बुरांश के ऊँचे पेड़ हवा में सरसराते थे, और बाँस की लंबी-लंबी टहनियाँ हवा में नाचती थीं। सुबह की किरण जब पहाड़ों के पीछे से उगती...