Continued....
हरीश.......नीतू, सिर्फ इस जन्म में नहीं, अगले हर जन्म में भी मैं तुम्हारा चिरऋणी रहूँ तो भी तुम्हारे प्रेम का ऋण नहीं चुका पाऊँगा।
नीतू....जी, पति-पत्नी के बीच इस “ऋण” शब्द की कोई जगह नहीं होती। उनके बीच केवल प्यार.....प्रेम और विश्वास होता है।
हरीश......तुम सही कह रही हो, लेकिन...