फिर बेडरूम के दरवाज़े पर जाकर धीरे-धीरे दस्तक दी। कुछ बोला, मैं सुन नहीं सका। आख़िर रेनू ने दरवाज़ा खोला, अभी भी पूरी नंगी, आँखें सूजी हुईं। दोनों ने दो-तीन मिनट धीरे-धीरे बात की। मुझे लगा, रेनू माफ़ी माँग रही थी, और शाद भी शायद। उसने ज़बरदस्ती नहीं की, ये मुझे बहुत अच्छा लगा। फिर शाद कंधे झुकाए...