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Recent content by Sifar

  1. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    अध्याय ~ 19 वक्त.. कभी एक सा नहीं रहता और ना ही रुकता है, किसी के लिए भी। अभिमन्यु और उसके परिवार ने पिछले पांच वर्षों में इस तथ्य का अनुभव कर लिया था। पिछला एक सप्ताह भले ही उनके लिए किसी दशक के समान बीता हो परंतु अब जीवन धारा तीव्र होने का समय आ चुका था। अभिमन्यु ने अब तक जितनी मुसीबतों का...
  2. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    Firstly, welcome to the thread. I thought it's imperative to get the Vibhor arc done first, and not deviate to sexual scenes. That's why there are none till now. But I got you with them in future updates. Keep reading!
  3. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    अध्याय ~ 18 रात गहरी हो चुकी थी। घर के आंगन में अब सिर्फ़ तुलसी चौरे पर रखे दिये की हल्की सी लौ जाग रही थी। सुबह पूजा में प्रयोग हुए गेंदे अब भी वहीं पर मुरझा रहे थे, और उनकी बासी महक हवा में घुली थी। संध्या अपने कमरे की खिड़की के पास बैठी थी, हाथों में एक पुराना दुपट्टा लिए, जो उसके पति...
  4. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    अध्याय ~ 17 रात का खाना खत्म हुआ तो संध्या अपने कमरे की ओर चली गई, और निशा हमेशा की तरह छत पर चांद से मन की बातें करने निकल पड़ी। उधर ऋतु अपनी अलमारी में कपड़े सहेज रही थी, वही कपड़े जो आज दोपहर वो अभिमन्यु के साथ अपने मायके से ले आई थी और इधर अभिमन्यु, मीरा के कमरे के बाहर खड़ा था, किसी गहरी...
  5. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    अध्याय ~ 16 जब से मैंने होश संभाला, तभी से मैं हवेली को देखती आई हूं। उसकी ऊंचाई, भव्यता और उसकी मुझसे दूरी, हमेशा मुझे आकर्षित करती थी। मैं जब भी हवेली को देखती, तो मुझे लगता कि वही वो स्वर्ग है जिसके बारे में सब लोग बात करते हैं। तब मेरे मन में सवाल आता कि उस स्वर्ग में रहने वाले लोग कैसे...
  6. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    अध्याय ~ 15 सुबह जब ऋतु की आंख खुली तो उसने खुद को अभिमन्यु की बाहों में लिपटा पाया। उसका सर अब भी उसके सीने पर था, और अभिमन्यु का हाथ उसकी कमर पर। उसने थोड़ा हिलने की कोशिश की परंतु, अभिमन्यु की पकड़ इतनी मज़बूत थी कि वो ज़रा भी हिल नहीं पाई। वैसे तो उसे बहुत तेज़ "बाथरूम" आया था, पर वो उसकी...
  7. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    Corrected.
  8. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    Meera ke alawa ek aur bhi hai... :declare:
  9. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    अध्याय ~ 14 *चटाक्कक्क्कक* एक थप्पड़ की गूंज थी ये, जो संध्या ने अभिमन्यु के चेहरे पर रसीद किया था। आज, 20 सालों में पहली बार, संध्या ने अभिमन्यु पर हाथ उठाया था। जब अभिमन्यु नहाकर निकला, तो संध्या के कहे अनुसार ही उसने अपनी पीठ पर न पानी गिरने दिया, और न ही अभी कमीज़ पहनी। वो संध्या के कमरे...
  10. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    सर्वप्रथम, आपका कहानी में स्वागत और आपको मेरा साधुवाद। ये प्रथम बार है, कि मैं किसी मंच पर ऐसा कुछ लिख रहा हूं। सत्य कहुँ तो, इससे पहले मैंने केवल दो ही बार सार्वजनिक मंच पर दो ही किस्से लिखे हैं, दोनों शायद पांच हज़ार शब्दों से कम लंबाई के। इसी कारण, अभी मुझे कहानी की रचना तथा उसकी बारीकियों की...
  11. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    अध्याय ~ 13 मीरा.. आज सुबह से घर पर ही थी। सुबह जब वो निशा को "बस" में बैठाकर लौटी, तो वापिस आते हुए वो खेतों की तरफ जाना ना भूली। उसे उम्मीद थी कि शायद अभिमन्यु राजगढ़ से लौट आया होगा, पर वहां कोई न था। वो उदास तो हुई, लेकिन फिर अचानक ही उसे एक ख्याल आया। क्यों न आज अभिमन्यु का मनपसंद खाना...
  12. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    अध्याय ~ 12 यशपुर.. पांच सदियाँ गुज़र चुकी थीं उस वाकये को, जब ठाकुर यशवर्धन सिंह ने इस ज़मीन को खरीद, एक गांव यहां बसाया था। तभी से उन्होंने और उनके वंशजों ने पूरी कर्तव्यनिष्ठा से यशपुर और इसके निवासियों को संभाला था। इन्हीं में से एक नाम था ~ ठाकुर शमशेर सिंह का। उनके पिता और शायद गांव वाले...
  13. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    अध्याय ~ 11 निशा.. एक अट्ठारह बरस की कन्या, जिसने अपने छोटे से जीवन काल में अनेकों उतार - चढ़ाव देखे थे। उसने यशपुर की हवेली में जन्म लिया, बचपन से ही उसे बेहद प्यार करने वाले माता - पिता, बड़ी बहन और सभी रिश्तेदार मिले। सबसे बढ़कर, उसके पास खुद से बस दो ही साल बड़ा एक ऐसा भाई था, जो कच्ची उम्र...
  14. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    अध्याय ~ 10 वो दिन.. होली का दिन था! यशपुर और पास के सभी गांव, रंगों में नहाए हुए थे। पर हवेली कुछ शांत सी थी। शमशेर सिंह और अर्जुन की मृत्यु, पिछले वर्ष इन्हीं दिनों में हुई और ऐसे में होली मनाना, सवाल ही नहीं उठता! यूँ तो हवेली अब बिल्कुल भी पहले जैसी नहीं रही थी, पर फिर भी, कुछ थे इस घर में...
  15. Sifar

    Incest चक्रव्यूह

    अध्याय ~ 9 "छोटे.. मालिक!!" आज सोमवार का दिन था। पिछले दो - तीन दिनों में अभिमन्यु खेतों के काम में बहुत मशगूल रहा था.. परसों उसने सारी उपज को बाज़ार ले जाने की तैयारी कर ली थी, और कल वो राजगढ़ की तरफ निकल था। बिक्री के काम निपटाते हुए और वहां कुछ जान - पहचान के लोगों से मिलने में, उसे काफी...
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