If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.
निश्चित ही आपका ऑब्जरवेशन काबिले तारीफ है एक बार जो प्रश्न आपके मन में उठा था वही मेरे मन में भी आया था।
सुगना की रात्रि स्नान की आदत पुरानी है विशेषकर बनारस आने के बाद इसका जिक्र उसके लखनऊ प्रवास के दौरान भी किया गया है अतः यहां सोने से पहले किए जाने वाले स्नान का उल्लेख कोई नया नहीं है और...
धन्यवाद...Aapka aagman is Kahani ke पटल per Kai dinon bad hua .....swagat ha...i aapane jo prashn uthaya hai uska Uttar विधाता ने पहले ही लिखा हुआ बस नियति को उसके पन्ने पलटने की कोशिश कर रही है...
Aapki pratikriya ke liye dhanyvad .... सुगना की मनोदशा के बारे में बताती हुई कुछ पंक्तियां नीचे दी गई हैंभाग 123 से उद्धृत"सुगना को खुद पर ही शक हो गया तो क्या वह स्वयं अपनी मां पदमा की संतान नहीं है…. उसकी धर्मपरायण मां पदमा व्यभिचारी होगी ऐसा सोचना सुगना के लिए पाप था। पदमा सुगना के लिए...
भाग १२४अब तक आपने पढ़ा..और सुगना का घाघरा आखिरकार बाहर आ गया अपनी मल्लिका को अर्द्ध नग्न देखकर सोनू बाग बाग हो गया ….सोनू सुगना के किले के गर्भ गृह के बिल्कुल करीब पहुंच चुका था और उसने अपना सर सुगना के पैरों की तरफ झुका कर जांघों के बीच झांकने की कोशिश की..सुगना की रानी होंठो पर...
आरुषि दयाल जी एक बात कहना चाहूंगा आपने जो फोटो पोस्ट किए हैं वह self-explanatory है आपने उनकी जो व्याख्या की है खासकर डिटेल में शायद उसकी आवश्यकता न थी आप द्वारा भेजे जा रहे फोटोग्राफ्स निश्चित ही बेहद अच्छे और कामुक है पाठक गण उसको देख कर आप के मैसेज का अंदाजा लगा सकते हैं उम्मीद करता हूं आप...
OkThanksSentआपने बिल्कुल सही कहा आरसी दलाल जी द्वारा दिए जा रहे पोस्ट वाकई में काबिले तारीफ है... इस कहानी पर चार चांद लगाने में ऐसे ही पाठकों की अहम भूमिका रहती है।Thanksथैंक्सऐसा नहीं है मित्र पर मैं अपने रीडर्स का साथ और उनके कमेंट अवश्य चाहता हूHa ha haजरूर
बेहद सुंदर बस सोनू थोड़ा और खूबसूरत होता...सेक्सीसेंटयार यह पिक्चर तो बेहतरीन है और यह कविता भी...आपने बिल्कुल सच कहाग्रेटआप सभी पाठकों को बहुत-बहुत धन्यवाद इसी तरह अपना सहयोग और साथ बनाए रहे आरुषि दयाल को इस कहानी के पटल पर लगातार मनोरंजक और उत्तेजक छायाचित्र तथा कविताएं...
आप द्वारा भेजी जा रही कविताएं और छायाचित्र इस कहानी में चार चांद लगा रहे मुझे स्वयं आपकी प्रतिक्रिया है पढ़कर बेहद आनंद आता है इसी प्रकार अपना जुड़ाव दिखाते रहे मैं बाकी पाठकों से भी ऐसी ही अपेक्षाएं करता हूंआप सभी को कहानी से जुड़ने और जुड़े रहने के लिए धन्यवाद