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Incest आह..तनी धीरे से.....दुखाता.

whether this story to be continued?

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  • no

    Votes: 1 2.2%

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Lovely Anand

Love is life
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आह ....तनी धीरे से ...दुखाता
(Exclysively for Xforum)
यह उपन्यास एक ग्रामीण युवती सुगना के जीवन के बारे में है जोअपने परिवार में पनप रहे कामुक संबंधों को रोकना तो दूर उसमें शामिल होती गई। नियति के रचे इस खेल में सुगना अपने परिवार में ही कामुक और अनुचित संबंधों को बढ़ावा देती रही, उसकी क्या मजबूरी थी? क्या उसके कदम अनुचित थे? क्या वह गलत थी? यह प्रश्न पाठक उपन्यास को पढ़कर ही बता सकते हैं। उपन्यास की शुरुआत में तत्कालीन पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सेक्स को प्रधानता दी गई है जो समय के साथ न्यायोचित तरीके से कथानक की मांग के अनुसार दर्शाया गया है।

इस उपन्यास में इंसेस्ट एक संयोग है।
अनुक्रमणिका
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भाग 126 (मध्यांतर)
 
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Lovely Anand

Love is life
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उपस्थित श्रीमान...
जिन पाठकों की उंगलियों में दर्द हो उनका इतना भी चलेगा।।
Just joking..
I always want two way intreaction for such useless ans sexual stories...
 
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Lutgaya

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लवली भाई अब डाल भी दो
🤔🤗अपडेट
 
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Lucky..

“ɪ ᴋɴᴏᴡ ᴡʜᴏ ɪ ᴀᴍ, ᴀɴᴅ ɪ ᴀᴍ ᴅᴀᴍɴ ᴘʀᴏᴜᴅ ᴏꜰ ɪᴛ.”
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Black horse

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कामशास्त्र की पढ़ाई में कुछ बच्चे पीछे छूट रहे हैं.
यदि वह क्लास अटेंड कर रहे हैं तो कृपया हुंकारी भरते रहे। कही ऐसा तो नही हो रहा है कि कहानी सुनकर नींद आ जा रही हो....
जागते रहे....
सच में। समय निकाल कर, मूड बना कर, आपकी कहानी पढ़ने का मज़ा ही अलग होता हैं।
वैसे तो सब नियति के हाथों में हैं।
जब जब जो जो होता हैं, तब तब सो सो होता हैं।
 

pprsprs0

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komaalrani

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नियति का चक्र, पुरुष की नियत और क्या नियत है कौन जाने, नियति के सिवाय,

कहानी तेजी से वक्र गति पर रस्ते बदल रही है मोड़ पर मोड़,

और कहानी से जुड़े हम सब अंतर्द्वंद, विशेष रूप से सुगना के तन मन के अंतर्द्वंद के साक्षी हैं,

नियति ने यह तय किया की रूपवती यौवन के बोझ से लदी, सुगना, का ब्याहता पति उसे छोड़कर बम्बई में उसकी सौतन की सेज का सिंगार बने,

ससुर जिनके जिम्मे घर गृहस्थी होती, गृहस्थ आश्रम के धर्म से पलायन कर हो गए,

गाँव के ताने, स्त्री के तन की मन की भूख, माँ बनने की चाहत और बाँझ होने के कलंक से बचने की कोशिश, सास ने उसे अपने देवर की सेज का रास्ता दिखा दिया,

यह सब ताना बाना नियति ने ही बिना और आज एक विषम दो रहे पर वह खड़ी है, उसके अभिशप्त पुत्र पर भगिनी या जननी के साथ सम्भोग का शाप,... और उसके लिए उसकी एक बेटी का होना जरूरी है, पर कौन होगा पिता,...

जो उसके पुत्र का पिता है नियति उसे बार बार पास लाके दूर कर दे रही है, और समय भी कम है,


असल में अगर अंतरद्वंद न हों , कांफ्लिक्ट न हों तो अक्सर कहानी एकदम सपाटबयानी का शिकार हो के रह जाती है , शायद इसलिए नियति बार बार या झटके देती है,

इन्सेस्ट इस फोरम की सबसे ज्यादा लोकप्रिय श्रेणियों में है , और मुझे यह कहानी इसलिए अच्छी लगती है की इसमें इन्सेस्ट नहीं है पर यह उन वर्जित संबंधों आसपास ही मडराती है ,


इन्सेस्ट की वैधिक परिभाषा है , उनमे दैहिक संबंध, जिनसे विवाह नहीं हो सकता, जैसे भाई बहन, माता पिता इत्यादि, श्वसुर बहू संबध भी उसी में आते हैं.

श्वसुर अर्थात पति का पिता। और इस कहानी में सरयू सिंह जी, सुगना के पति के पिता नहीं, चाचा हैं।

कुछ संबध जोकिंग रिलेशन माने जाते हैं, जैसे देवर भाभी या जीजा साली और पति के न रहने पर देवर के साथ शादी की परपंरा है एयर वो इन्सेस्ट में नहीं आता, इस लिए कजरी और सरयू सिंह के संबध भी देवर भाभी के हैं , ऐसा देवर जिसने परित्यक्ता भाभी और उसके परिवार को पालन करने के लिए शादी नहीं की.

भाभी कजरी , जिसका पति उसकी गोद में बच्चा डालकर, पुत्र पत्नी की जिम्मेदारी छोड़कर चला गया.

लाली और सोनू भी न सगे न कजिन,... पर गाँव की परम्पराओं के अनुसार देखें तो सुगना और सरयू सिंह का रिश्ता बहू ससुर जैसा है और लाली सोनू का गाँव के नाते भाई बहिन का ही ,

और यही एक सेक्सुअल टेंशन को जन्म देती है, वर्जनाओं को लांघती नहीं लेकिन बस उसके आस पास चलती है पर इस बार अंतर्द्वंद में, उसे इसने छू लिया,

और एक नया निर्णय का संकट सुगना के लिए,...

हाँ यौवन की देहरी पर खड़ी सुगना की छोटी बहन की छोटी सी भूमिका में जो आपने उसे पहली बार 'स्पर्श' कराया, जाने अनजाने में,... वो भी बहुत ही बढ़िया था , और एक साथ कई स्तरों पर झंकृत कर गया।
 
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komaalrani

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हाँ एक बात और, मैं पूर्वांचल की हूँ, गाँव गंवई वाली, (जहाँ के आसपास की यह कहानी है)

शादी के मंडप में वहां एक हरिस ( हल का फल ) गाड़ा जाता है या लगाया जाता है मंडप के मुख्य, मध्य बांस के साथ

और इसी के साथ साथ पांच सुग्गे ;लकड़ी के , जो बढ़ई गढ़ कर दे जाता है,

सुग्गा या तोता कामदेव का वाहन है और शादी के दौरान, पुष्पधन्वा तो अनंग है , इसलिए वही काम के प्रतीक के रूप में,



कई बार मुझे लगता है सुगना की तन की चाह, मन की आह कहीं उन सुग्गों से तो नहीं जुडी,

आखिर मन्मथ ने देवो का काम तो सिद्ध किया स्वयं दग्ध हो गए, पर रति ?
 

Lovely Anand

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नियति का चक्र, पुरुष की नियत और क्या नियत है कौन जाने, नियति के सिवाय,

कहानी तेजी से वक्र गति पर रस्ते बदल रही है मोड़ पर मोड़,

और कहानी से जुड़े हम सब अंतर्द्वंद, विशेष रूप से सुगना के तन मन के अंतर्द्वंद के साक्षी हैं,

नियति ने यह तय किया की रूपवती यौवन के बोझ से लदी, सुगना, का ब्याहता पति उसे छोड़कर बम्बई में उसकी सौतन की सेज का सिंगार बने,

ससुर जिनके जिम्मे घर गृहस्थी होती, गृहस्थ आश्रम के धर्म से पलायन कर हो गए,

गाँव के ताने, स्त्री के तन की मन की भूख, माँ बनने की चाहत और बाँझ होने के कलंक से बचने की कोशिश, सास ने उसे अपने देवर की सेज का रास्ता दिखा दिया,

यह सब ताना बाना नियति ने ही बिना और आज एक विषम दो रहे पर वह खड़ी है, उसके अभिशप्त पुत्र पर भगिनी या जननी के साथ सम्भोग का शाप,... और उसके लिए उसकी एक बेटी का होना जरूरी है, पर कौन होगा पिता,...

जो उसके पुत्र का पिता है नियति उसे बार बार पास लाके दूर कर दे रही है, और समय भी कम है,


असल में अगर अंतरद्वंद न हों , कांफ्लिक्ट न हों तो अक्सर कहानी एकदम सपाटबयानी का शिकार हो के रह जाती है , शायद इसलिए नियति बार बार या झटके देती है,

इन्सेस्ट इस फोरम की सबसे ज्यादा लोकप्रिय श्रेणियों में है , और मुझे यह कहानी इसलिए अच्छी लगती है की इसमें इन्सेस्ट नहीं है पर यह उन वर्जित संबंधों आसपास ही मडराती है ,


इन्सेस्ट की वैधिक परिभाषा है , उनमे दैहिक संबंध, जिनसे विवाह नहीं हो सकता, जैसे भाई बहन, माता पिता इत्यादि, श्वसुर बहू संबध भी उसी में आते हैं.

श्वसुर अर्थात पति का पिता। और इस कहानी में सरयू सिंह जी, सुगना के पति के पिता नहीं, चाचा हैं।

कुछ संबध जोकिंग रिलेशन माने जाते हैं, जैसे देवर भाभी या जीजा साली और पति के न रहने पर देवर के साथ शादी की परपंरा है एयर वो इन्सेस्ट में नहीं आता, इस लिए कजरी और सरयू सिंह के संबध भी देवर भाभी के हैं , ऐसा देवर जिसने परित्यक्ता भाभी और उसके परिवार को पालन करने के लिए शादी नहीं की.

भाभी कजरी , जिसका पति उसकी गोद में बच्चा डालकर, पुत्र पत्नी की जिम्मेदारी छोड़कर चला गया.

लाली और सोनू भी न सगे न कजिन,... पर गाँव की परम्पराओं के अनुसार देखें तो सुगना और सरयू सिंह का रिश्ता बहू ससुर जैसा है और लाली सोनू का गाँव के नाते भाई बहिन का ही ,

और यही एक सेक्सुअल टेंशन को जन्म देती है, वर्जनाओं को लांघती नहीं लेकिन बस उसके आस पास चलती है पर इस बार अंतर्द्वंद में, उसे इसने छू लिया,

और एक नया निर्णय का संकट सुगना के लिए,...

हाँ यौवन की देहरी पर खड़ी सुगना की छोटी बहन की छोटी सी भूमिका में जो आपने उसे पहली बार 'स्पर्श' कराया, जाने अनजाने में,... वो भी बहुत ही बढ़िया था , और एक साथ कई स्तरों पर झंकृत कर गया।
सुगाना का मर्म समझने के लिए धन्यवाद.....
 

Lovely Anand

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सुग्गा या तोता कामदेव का वाहन है और शादी के दौरान, पुष्पधन्वा तो अनंग है , इसलिए वही काम के प्रतीक के रूप में,

सुग्गा और पुष्पधन्वा के बारे में फुरसत पाकर विस्तृत ज्ञान दीजिएगा....
 
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