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Thriller कातिल रात

DEVIL MAXIMUM

"सर्वेभ्यः सर्वभावेभ्यः सर्वात्मना नमः।"
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#06

चार बजे तक हम लोग सौम्या के राजेंदर प्लेस वाले आफिस में उसके केबिन में मौजूद थे।

सौम्या ने अपनी कुर्सी से उठकर बाकायदा गले लगाकर स्वागत किया था, जब सौम्या मुझे गले से लगा रही थी तो मैने रागिनी को इशारा करके अपना जलवा दिखाया था।

जवाब में रागिनी ने बड़ी अजीब सी हरकत की थी, उसने चिढ़ाने वाले अंदाज में अपनी जीभ को हल्का सा बाहर निकाला था।

"यार तुम्हे कभी मेरी याद आती है या नही, या हमारे रिलेशन सिर्फ प्रोफेशनल है" सौम्या ने मुझें मेरी कुर्सी पर बिठाते हुए कहा।

"नही सौम्या! तुम्हे तो मैने हमेशा अपना माना है, इसलिए हक से तुम्हारे पास चला आता हूँ" मैंने सौम्या के हाथ को अपने हाथ मे लेते हुए कहा।

"अगर अपना मानते तो आज इतने महीनों के बाद मिलने नही आते, और मुझे आज भी यकीन है कि तुम बिना काम के तो नही आये होंगे" सौम्या ने कुर्सी पर बैठते हुए बोला।

"काम के सिलसिले में ये नही आये है, सौम्या मैडम, काम के सिलसिले में मैं आपसे मिलने आई हूँ" तभी रागिनी ने मुझे धर्मसंकट से निकाला।

क्यो कि सौम्या की ऐसी अपन्त्व भरी शिकायत सुनकर अब मेरा साहस नही हो रहा था कि मैं उसे बोल पाऊं की मै आज भी तुमसे काम की वजह से ही मिलने आया हूँ।

"क्यो रोमेश साहब की डिटेक्टिव एजेंसी बन्द हो रही है क्या, जो तुम्हे काम के लिये मेरे पास आना पड़ा, चिन्ता मत करो, मैं रोमेश की एजेंसी बन्द नही होने दूँगी, जब तक मैं जीवित हूँ" सौम्या ने मुस्कराते हुए बोला।

"नही! सौम्या तुम्हे गलतफहमी हो रही है, मैं एक केस के सिलसिले में तुमसे मिलने आई हूँ" रागिनी ने सौम्या के उस मजाक का जवाब दिया।

"इसका मतलब तुमने अपनी एक अलग डिटेक्टिव एजेंसी खोल ली है, यार ये तो बड़ा झोल कर दिया तुमने, अब कल को कोई केस देना होगा तो मैं किसको दूँगी, एक मेरी छोटी बहन है और एक मेरा प्रिंस चार्मिंग है" :love1: सौम्या ये बोलकर फिर से मुस्कराई।

रागिनी ने आहत नजरों से सौम्या की ओर देख़ा।

"सौम्या! पहले कॉफी मंगवा लो, क्यो कि आज तुम बहुत फनी मूड में लग रही हो" रागिनी ने सौम्या को मुस्कराते हुए बोला।

"चलो कॉफी तो पिलाऊंगी ही, पहले ये बताओ क्या काम है तुम्हे" इस बार सौम्या ने किंचित गंभीर स्वर में बोला।

"तुम्हारी कंपनी में एक देविका नाम की लड़की काम करती थी, जिसने कंपनी के साथ दो करोड़ का फ्रॉड किया था" रागिनी ने ये बोलकर सौम्या की तरफ देखा।

"हाँ! लेकिन उसे तो हमने जेल भिजवा दिया था" सौम्या को उस लड़की के बारे में याद था।

"वो लड़की इस वक़्त जेल से बाहर है, शायद जमानत पर आई हो, कल रात को वो लड़की रोमेश के घर पर आई और रोमेश का पिस्टल चुराकर वहाँ से भाग गई" रागिनी ही सौम्या को सब बता रही थी।

"क्या? रोमेश के रहते हुए रोमेश का पिस्टल लेकर भाग गई, आई कान्ट बिलीव" सौम्या ने सिर से रागिनी की बात को नकारा।

"ये सच है, इसमे थोड़ी सी मेरी बेवकूफी थी, जिस वजह से वो पिस्टल ले जाने में कामयाब हो गई" इस बार मैंने सौम्या को यकीन दिलाया।

सौम्या अवाक सी मेरी ओर देखती रह गई।

तभी चपरासी ने कॉफी और स्नैक्स की ट्रे के साथ केबिन में प्रवेश किया।

सौम्या, देविका और मेघना-6

"तुम जरूर उसकी खूबसूरती पर मर मिटे होंगे, वो ज़ालिम चीज ही ऐसी है" सौम्या अजीब सी मुस्कान के साथ बोली।:D:

"इन जनाब की यही आदत एक दिन या तो तिहाड़ भिजवायेगी, या फिर हमेशा के लिए कहीं और का टिकट करवाएगी, किसी भी खूबसूरत लड़की को देखते ही ये साहब दिमाग की बजाय किसी और तरीके से ही सोचने लग जाते है" :Dरागिनी ने मेरे कुछ बोलने से पहले ही सौम्या के सामने भाजी पाड़ा कर दिया था।

मैने आहत नजरों से रागिनी की तरफ देखा। लेकिन रागिनी के हावभाव में कोई परिवर्तन नही आया था।

"ये बात तो रागिनी सही कह रही है रोमेश, तुम कई बार बहुत लापरवाही करते हो, बस किस्मत के धनी हो जो हर बार मुसीबतों से निकल जाते हो" सौम्या और रागिनी नाम की ये दोनों खूबसूरत बालाएं जो भी बोल रही थी, वो मेरे भले के लिए ही बोल रही थी।

इसलिये मैं चाहकर भी उनकी बातों का विरोध नही कर पा रहा था, लेकिन अब मेरा उन दोनो की बात
का रुख मोड़ना जरूरी हो गया था, नही तो अभी इनका ये 'रोमेश पुराण' ख़त्म होने का नाम नही लेने वाला था।:dazed:

"मेरे ख्याल से हम यहां देविका के बारे में बात करने आये थे, न कि मेरे बारे में वार्तालाप करने आये थे" मैंने हल्का सामुस्कराते हुए बोला।

"देविका के बारे में बताने के लिये ज्यादा कुछ नही है, लेकिन वो जिंदगी जीने के लिए हर हथकंडे अपनाने में यकीन रखती थी।

"हमे उसके बैकग्राउंड के बारे में जानना है, जिससे हमें ये पता लग सके कि वो कहां कहां पाई जा सकती है" इस बार रागिनी ने बात को आगे बढ़ाया।

"वो सब जानकारी तो उसके बायोडाटा में मिल जायेगी, लेकिन उसमे उसकी कोई व्यक्तिगत जानकारी नही होगी, सब प्रोफेशनल ही होगी" सौम्या ने कुछ सोचते हुए बोला।

"मुझे धोखाधड़ी के उस केस की फ़ाइल मिल सकती है, जो तुमने उस पर किया था।

"वो तो तुम हमारी लीगल सेल से ले सकते हो, वहां रोशनी नाम की एडवोकेट मिलेगी, मैं उन्हें बोल दूँगी, लेकिन वो बहुत चालाक लड़की है, उसने गिने चुने दिनों में ही मेरी कमजोरी का पता लगा लिया था, उसके बाद उसने मुझें मेरे घर तक अप्रोच किया था, लेकिन जब से मेघना वाला केस हुआ है, मैं अब आफिस के स्टाफ को घर तक नही लेकर जाती हूँ, लेकिन वो दो तीन बार मुझे होटल के कमरे में मिली थी, तब उसके बारे में कुछ उसकी निजी बाते पता चली थी" ये बोलकर सौम्या एक पल को चुप हो गई थी।

सौम्या की कमजोरी कई बार उसके लिए बहुत घातक सिद्ध हो चुकी थी। सौम्या एक अजीबो गरीब बीमारी से पीड़ित थी, वो बीमारी थी उसका निम्फो मानियाक होना! इस बीमारी में इंसान के जिस्म की हवस कभी पूरी नही होती थी, इसी वजह से सौम्या चाहें पुरुष हो या औरत, किसी के साथ भी शारीरिक सम्बंध बनाने में गुरेज नही करती थी।

उसकी इसी लत के चलते उसके पति राजीव बंसल ने अपने पिता और अपनी सौतेली माँ के कत्ल के साथ साथ सौम्या को भी ठिकाने लगाने का सोच लिया था, वो तो आपके इस खाकसार :smarty: की बदौलत सौम्या की जान बच गई थी, अन्यथा राजीव बंसल अपने इरादों में लगभग कामयाब हो ही गया था ।

राजीव बंसल के बाद सौम्या के आफिस में ही काम करने वाली लड़की मेघना ने भी सौम्या की इसी आदत का फायदा उठाया और सौम्या के घर मे ही डेरा जमा लिया, एक बार तो मेघना ने भी सौम्या की जान लेनें की साजिस रची थी, लेकिन इस बार भी आपके इस अदना से सेवक रोमेश ने वक़्त रहते मेघना की साजिस पर से पर्दा हटा दिया था, जिस वजह से सौम्या एक बार फिर बाल बाल बची!

"मुझे पता नही उसने मुझे जो कुछ बताया था, वो सच है या झूठ, लेकिन अगर वो जानकारी तुम लोगो के कुछ काम आ सके तो मैं तुम लोगों को बता सकती हूँ" सौम्या ने ये बोलकर हमारी और देखा।"

उससे जुड़ी हर जानकारी हमारे काम की हो सकती है, अब उसने सच बोला है या झूठ ये तो हमारी जांच में पता चल ही जायेगा" मैने सौम्या की ओर देखते हुए बोला।

"जब वो दूसरी बार मुझे संग्रीला में मिली थी तो उसने मुझें बताया था कि कोई आदमी उसे ब्लैकमेल कर रहा हैं, और वो उसे अब तक दो लाख रु दे चुकी हैं, उसके बावजूद अब वो एक साथ दस लाख की डिमांड कर रहा है, उसने इस बारे में मुझ से मदद मांगी थी, लेकिन मैने उसे ठीक उसी प्रकार से मना कर दिया था, जिस प्रकार से मैने मेघना को पांच लाख देने से मना कर दिया था" सौम्या ने मुझे बताया।

"फिर जैसे मेघना ने उस बात से नाराज हो कर तुम्हारी हत्या की साजिस रची थी, ठीक वैसे ही इस बन्दी ने दूसरा रास्ता अख्तियार किया और तुम्हारे डेटा को ही तुम्हारी राइवल कंपनी को बेच दिया" रागिनी ने सौम्या को बोला।

"रागिनी कॉर्पोरेट में ये सब चलता रहता है, डेटा चोरी करवाना, टेंडर के बारे में किसी लूप होल को जानना, यहां तक कि किसी सरकारी टेंडर के बाद तो विरोधी पार्टियों से धरने प्रदर्शन करवाना तक राइवल कंपनियों के हथकंडे होते है, कॉर्पोरेट की जासूसी में आ जाओ, यहां ज्यादा मज़ा है" सौम्या ने रागिनी की ओर देखकर बोला।

"जिस दिन शहर में मर्डर होने बन्द हो जायेगे, उस दिन कॉरपोरेट के लिए जासूसी करने लगूंगी" रागिनी ने मुस्कराते हुए जवाब दिया।

"तुम्हे देविका ने सिर्फ ब्लेकमेलिंग के बारे में ही बताया था, या ब्लेकमेलर के बारे में भी बताया था" मैंने बातचीत को फिर से देविका के बारे में लाने के लिए बोला।

"पूरा नाम नही जानती मैं, बस किसी कुमार के बारे में बार बार बोल रही थी, उस दिन उसने कुछ ज्यादा ही पीली थी, इसलिए पूरी रात वो उस कुमार को ही गाली देती रही थी" सौम्या ने जब कुमार के नाम का जिक्र किया था तो मेरी नजरो के आगे कुमार गौरव का चेहरा घूम गया था।

"देविका की जानकारी के एक कुमार को तो हम भी जानते है" रागिनी भी उसी कुमार गौरव के बारे में सोच रही थी।

"वो कुमार जिंदा है, अभी तक, वो तो उस दिन नशे में उसे बार बार मार डालने की बात कर रही थी" सौम्या ने आश्चर्य से बोला।

"उसी बन्दे की गाड़ी उसने कल रात को चुराई थी, उसी गाड़ी में बैठकर वो मेरे घर आई, और फिर उसी गाड़ी में किसी के खून के धब्बे आज पुलिस को मिले है" मैने सौम्या को बोला।"

“ये तो कोई खतरनाक खेल, खेल रही है, एक तीर से कई शिकार करना चाह रही है" सौम्या ने मेरी ओर हैरानी से देखते हुए कहा।

"लेकिन लाख टके का सवाल ये है सौम्या की वो मेरा शिकार क्यो करना चाहती हैं, मेरी उससे क्या दुश्मनी है" मैंने सौम्या की ओर देखकर बोला।

"शायद कोई जेल में बन्द कोई तुम्हारा सताया हुआ इंसान तुम्हे किसी झमेले में फंसाकर तुमसे बदला लेना चाहता हो" सौम्या ने भी वही सोचा जो अभी तक हम भी सोच रहे थे।

"ठीक है सौम्या! ऐसे सताए हुए इंसान को भी जल्दी ही ढूंढ लूँगा मै, अभी तो तुम मुझे उस फ्रॉड केस की फ़ाइल दिलवाओ, और देविका का बॉयो डाटा भी दो" मै अब वहां से चलने के उपक्रम में था।

"कहीं जाने का इरादा है क्या, आज तुम दोनो मेरे साथ मेरे घर चलो, साथ मे डिनर करेगे" सौम्या ने आग्रह पूर्वक कहा।

"डिनर के लिये फिर कभी आयेगे सौम्या! अभी तो हमे उस कुमार को दोबारा टटोलना पड़ेगा, जिसके बारे में अभी तुमने बताया है" मैंने सौम्या को बोला।

"फिर कभी तो तुम साल भर के बाद ही आओगे, मेरी एक बात समझ नही आती की तुम मुझ से इतना दूर दूर क्यो भागतें हो" सौम्या ने शिकायती लहजें में बोला।

"यार मैं तो हुश्न का शैदाई इंसान हूँ, मैं क्यो तुमसे दूर भागूँगा, बस अभी तक हमारे सितारे नही मिले है" मैने ये बोलकर सौम्या को टालने का प्रयास किया।

"ठीक है रोमेश, मैं तुम्हे ज्यादा नही कहूंगी, लेकिन उस केस फ़ाइल को लेने के लिए तुम्हे फिर से आना पड़ेगा, मैं अभी एच आर डिपार्टमेंट से देविका का बॉयो डाटा मंगवा देती हूँ" ये बोलकर सौम्या ने इंटरकॉम पर किसी को कुछ हिदायत दी।

उसके बाद हम लोग देविका का बॉयो डाटा आने का इंतजार करने लगे।


जारी रहेगा______✍️
अजीब किस्सा है देविका का जाने इसका असली मकसद क्या है इस बार का
.
खेर मजेदार अपडेट रहा इस बार भी रमेश बाबू धीरे धीरे डिटेल के साथ आगे बढ़ते जा रहे है
 
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Sanju@

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#01

बारिश: (रात 8 बजे!)

इस बार दिल्ली की सर्दियों में बारिश अपना अलग ही स्यापा कर रही थी।
कहने वाले तो कहने लगे थे कि, दिल्ली भी बारिश के मामले में अब मुम्बई बनती जा रही है।

एक तो जनवरी के पहले सप्ताह की कड़ाके की सर्दी और उस पर ये बारिश का कहर।

मैं उसी सर्दी की मार से बचने के लिए इस वक़्त अपने फ्लैट में अपने बेड पर और अपनी ही रजाई में लिपट कर अपनी सर्दी को दूर भगाने का प्रयास कर रहा था।

अब आप भी सोच रहे होंगे की ये कौन अहमक इंसान है,जो बेवजह दिल्ली के मौसम का आँखों देख़ा हाल सुना रहा है। :D

वैसे तो अभी तक आपने अपने इस सेवक को पहचान ही लिया होगा , लेकिन फिर भी मैं आपको बता दूं कि मैं “रोमेश!” दिल्ली में एक छोटा मोटा जासूसी का धंधा करता हूँ…न न मैं कोई राॅ का एजेंट नही हूँ,मैं तो एक प्राइवेट डिटेक्टिव हूँ, जो सिर्फ कत्ल के केस में ही अपनी टांग घुसाता है। :yo:

जासूसी के बाकी धंधो मसलन, शक धोखा, पीछा, तलाक जैसे सड़क छाप धंधों से मैं दूर ही रहता हूँ।

बन्दे को बचपन से ही जासूसी उपन्यास पढ़ने का शौक इस कदर था, की जिस उम्र में मुझें स्कूल की किताबें पढ़नी चाहिए थी,उस उम्र में मैं दिन रात जासूसी किस्से कहानिया पढ़ा करता था।:dazed:

इसी वजह से अपुन का मन भी सिर्फ जासूसी में ही अपना मुकाम बनाने का करने लगा था।

वैसे तो आपका ये सेवक जासूसी में दिल्ली से लेकर मेरठ आगरा ,मुम्बई और राजस्थान तक अपने झंडे गाड़ चुका था ,और आज किसी परिचय का मोहताज नही था , लेकिन मेरी एक नकचढ़ी सेक्रेटरी है,जिसका नाम रागिनी है, वो बन्दे की इस काबलियत की जरा भी कदर नही करती है,:beee: उसकी नजर में अपन आज भी घर की मुर्गी दाल बराबर है, लेकिन उसकी महिमा का बखान मैं बाद में करूँगा, इस वक़्त आपके इस जिल्ले-इलाही के फ्लैट को कोई बुरी तरह से पीट रहा था।

दरवाजा इतनी बेतरतीबी से पीटा जा रहा था कि, मानो कोई दरवाजा तोड़कर अंदर घुसना चाहता हो, मैं हड़बड़ाकर अपनी रजाई में से निकला और दराज में से अपनी पिस्टल निकालकर अपने बरमूडा में फँसाई और तेज कदमो दरवाजे की ओर बढ़ा और दरवाजे के पास जाकर ठिठक गया।

"कौन है,क्यो दरवाजा तोड़ने पर आमादा हो "मैंने बन्द दरवाजे के पीछे से ही बोला।

"दरवाजा खोलो ! मैं बहुत बड़ी मुसिबत में हूँ" ये किसी लड़की की घबराई हुई आवाज थी।

अब एक तो लड़की और ऊपर से मुसीबतजदा, और ऊपर से गुहार भी उस इंसान से लगा रही थी,जो मुसीबतजदा लड़कियों का सबसे बड़ा खैरख्वाह था,:smarty: तो अब दरवाजा खोलना तो बनता था, सो मैंने दरवाजा खोला और फोरन से पेश्तर खोला।

दरवाजा खोलते ही मुझे यू लगा मानो कोई आंधी तूफान कमरे में घुस आया हो, वो लडकी डेढ़ सौ किलोमीटर की रफ्तार से कमरे में घुसी और सीधा मेरे बेड पर बैठ गई।

मै किंककर्तव्यमूढ़ सा बस उस
लड़की की ओर देखता रहा, उस मोहतरमा में एक बार भी मुझ से अंदर आने के लिए पूछना गवांरा नही समझा था।

"दरवाजा बंद करो न, ऐसे क्या देख रहे हो, कभी कोई लडकी नही देखी क्या" उस लड़की की आवाज जैसे ही मेरे कानो में पड़ी, मैंने हड़बड़ा कर दरवाजे को बन्द कर दिया।

दरवाजा बंद करते ही मेरी नजर उस लड़की पर पहली बार पूरी नजर पड़ी थी। लड़की उची लंबे कद
की बेइंतेहा खूबसूरत थी।

उसके कटीले नैन नक्श पर उसका मक्खन में सिंदूर मिला रंग तो कयामत ही ढा रहा था।

उसे ध्यान से देखते ही मेरे दिल की घण्टिया किसी मंदिर के घड़ियाल की तरह से बजने लगी थी।:love2:

पता नही साला ये अपनी उम्र का तकाजा था या अभी तक कुंवारा रहने का नतीजा था कि,आजकल अपुन को हर लड़की खूबसूरत लगती थी। :loveeyed2:

मुझे इस तरह से कुत्ते की तरह से अपनी तरफ घूरते हुए देखकर वो लड़की अब बेचैनी से अपना पहलू बदलने लगी थी।:D

"हो गया हो तो, अब इधर भी आ जाओ" उस लड़की को शायद ऐसी कुत्ती निग़ाहों का अच्छा खासा तजुर्बा था।

होता भी क्यो नही, जो जलवा उसकी खूबसूरती का था, उसके मद्देनजर तो जिसने भी डाली होगी मेरे जैसी कुत्ति नजर ही डाली होगी।

लेकिन आपके इस सेवक ने लड़की के बोलते ही अपनी इस छिछोरी हरकत पर ब्रेक लगाई,और चहलकदमी करता हुआ उसके सामने आकर खड़ा हो गया।

एक तो साला सर्दी का मौसम, ऊपर से कड़कड़ाती बरसात, और अब ये कहर बरपाती मेरे ही बेड पर बैठी हुई मोहतरमा, मेरी जगह कोई और होता तो अभी तक इस खूबसूरत बला के साथ पूरी रात की योजना अपने ख्यालों में बना चुका होता, लेकिन अपनी नजर भले ही कितनी भी कुत्ती हो, दिल शीशे की तरह से साफ है।:declare:

"कौन हो तुम, और इतनी बरसात में मेरे पास क्यो आई हो" मै अब उसकी सुंदरता के खुमार से कुछ कुछ निकलते हुए बोला।

"मेरी जान खतरे में है,मुझे कोई मारना चाहता है" उस लड़की की आवाज में फिर से घबराहट का पुट आ चुका था।

"लेकिन आपको मेरे बारे में किसने बताया कि मैं मुसीबतजदा हसीनाओं की मदद आधी रात को भी सिर के बल चल कर करता हूँ" मैं अब अपनी जासूस वाली फोम में आता जा रहा था।

"मैं आपको नही जानती, मेरे पीछे तो कुछ लोग लगे हुए थे, मैं तो उनसे बचने के लिए आपके फ्लैट का दरवाजा पीटने लगी थी" उन मोहतरमा ने जो बोला था, वो मेरे लिए अनपेक्षित था ।

ऐसे कोई जबकि सर्दियो के दिनों में आठ बजते ही आधी रात का आलम लगने लगता है, क्यो किसी अंजान के घर मे ऐसे घुसेगा और न सिर्फ घुसेगा बल्कि आकर आराम से आकर बेड पर भी बैठ जाएगा।

"आप हो कौन, और कौन लोग है जो आपकीं जान लेना चाहते है" मैंने एक स्वभाविक सवाल किया।

"मेरा नाम अनामिका है, मै यही आपके इलाके के सेक्टर ग्यारह में रहती हूँ, मैं इधर किसी काम से आई थी, लेकिन जब मैं घर वापिस जा रही थी, तो मैंने देखा कि चार लोग मेरा पीछा कर रहे थे, मैं उन्हें देख कर घबरा गई और भागने लगी, तभी आपके फ्लैट पर नजर पड़ी, आपकी लाइट भी जली हुई थी, तो आपके फ्लैट का दरवाजा पीटने लगी" अनामिका ने बोला।

"उन लोगो को आपने पहले भी कभी अपने पीछे आते हुए देखा है, या आज ही देखा था" मै अब उससे सवाल जवाब करने के मूड में आ गया था।

"उन लोगो को तो मैंने आज ही देखा था, लेकिन मुझे कई दिनों से लग रहा है कि कोई मेरा पीछा कर रहा है" अनामिका ने रहस्यमय तरीके से बोला।

"ऐसा लगने का कोई कारण भी तो होना चाहिए, क्या आपको किसी से अपनी जान का खतरा है" मैंने उसके जवाब में से ही सवाल ढूंढा।

"खतरा तो मेरी जान को बहुत है, मुझे नही पता कि मौत किस पल मेरा शिकार कर ले" अनामिका की आवाज से ही ये बोलते हुए उसका डर झलक रहा था।

"कौन लेना चाहता है तुम्हारी जान" मैंने फिर से उसी सवाल को घुमा फिरा कर पूछा।

"धीरज!पूरा नाम उसका धीरज खत्री है" अनामिका ने मुझे उस बन्दे का नाम बताया।

"आप धीरज को कैसे जानती है" मेरा ये पूछना स्वभाविक था।

"किसी समय वो मेरा बॉयफ्रेंड था, लेकिन जल्दी ही मुझे ये एहसास ही गया कि मैंने गलत आदमी से प्यार कर लिया है, उसके बाद मैंने उससे अपने रिलेशन ख़त्म कर लिये, और दूसरी जगह शादी कर ली, उसके बाद से वो बन्दा मेरी जान का दुश्मन बना हुआ है" अनामिका ने पूरी बात बताई।

"देखिए मैं एक डिटेक्टिव हूँ… मेरा पाला हर रोज ऐसे लोगो से ही पड़ता है, आप मेरा ये कार्ड रख लीजिए, और कल मेरे आफिस आकर मुझे सभी कुछ डिटेल में बताइये, हो सकता है, इसके बाद आपका बॉयफ्रेंड फिर कभी आपको परेशान न करे" मैंने उसको विश्वास दिलवाने वाले शब्दो मे बोला।

"अगर आपने सच मे मेरा उस आदमी से पीछा छुड़ा दिया तो, आपको आपके वजन के बराबर नोट से तोल दूँगी" अनामिका ने उत्साहित स्वर में बोला।

"लेकिन मैडम इतना बता दीजिए कि वो नोट दस के होंगे या दो हजार के होंगे" मैंने उसकी बात का झोल पकड़ते हुए बोला।:D

मेरी बात सुनकर वो नाजनीन न केवल मुस्कराई बल्कि खिलखिलाकर हँस भी पड़ी।

"आप बहुत हाजिर जवाब हो रोमेश साहब" अनामिका ने मेरा नाम मेरे विजिटिंग कार्ड पर पढ़ते हुए बोला।

"चलिये अब मैं आपको आपके घर छोड़ देता हूँ, वैसे भी रात अब गहरी होती जा रही है" मैंने अनामिका की तरफ देख कर बोला।

"काफी शरीफ आदमी मालूम पड़ते हो रोमेश साहब, वरना मौसम तो आशिकाना है" उस जालिम ने एकाएक ऐसी बात बोलकर मेरे दिल के तारों को झंकृत कर दिया।

"इस मौसम की वजह से ही तो बोल रहा हूँ, आपके कपडे गीले हो चुके है, घर आपका पास में ही है, मैं अपको घर छोड़ देता हूँ, ताकि आप इन गीले कपड़ो से छुटकारा पा सको" मैंने अनामिका की बात को एक नया मोड़ दिया।

"लेकिन मैं अभी घर नही जाना चाहती हूँ, मेरे पति भी आज घर पर नही है, और मुझे ऐसे हालात में डर भी बहुत लगेगा"

अनामिका अब सीधे सीधे मेरे गले पड़ रही थी। जबकि मेरी छटी इंद्री मुझे बार बार सचेत कर रही थी।

मुझे न जाने क्यो ये लडकी खुद को जो बता रही थी,वो नही लग रही थी।

लेकिन इस बार उसने जो बहाना बनाया था, उसने मुझे कुछ बोलने लायक नही छोड़ा था।

"लेकिन देवी जी, ये बन्दा यहां अकेला रहता है, कल को किसी को पता चलेगा तो आपकी बदनामी नही होगी" मैने वो बात बोली, जो आजकल के जमाने मे अपनी अहमियत खो चुकी थी।

मेरी इस बात को अनामिका की हँसी ने सही भी साबित कर दिया था।

"किस जमाने मे जी रहे हो रोमेश बाबू, आजकल किसके पास इतनी फुर्सत है कि कोई मेरी रातों का हिसाब रखें कि मैं अपनी रात कहाँ किसके साथ बिताकर आ रही हूँ.. यार अब ये फालतू की बाते बन्द करो, और अगर एक कप कॉफी पिला सकते हो तो पिला दो" अनामिका मेरे गले पड़ने में कामयाब हो चुकी थी।

मैं मरता क्या न करता के अंदाज में अपने किचन की ओर चल दिया।

कॉफी की जरूरत तो मुझे भी थी। इसलिए मैंने कॉफी के लिये कोई आना कानी नही की।

मैंने अपने बरमूडा से अपनी पिस्टस्ल को निकाल कर दराज में डाला और कॉफी बनाने के वास्ते किचन की ओर चल दिया।

मै कोई दस मिनट के बाद काफी बनाकर जब बैडरूम में पहुंचा तो अनामिका वहां नही थी।

मैंने इधर उधर नजर दौड़ाई, लेकिन वो कहीं नजर नही आई। मैंने बाथरूम की तरफ देखा, उसका दरवाजा भी बाहर से ही लॉक था।

मैने दरवाजे पर नजर डाली, दरवाजा इस वक़्त हल्का सा खुला हुआ था। मुझे तत्काल इस बात का ध्यान हो आया कि दरवाजा मैंने अनामिका के घर मे घुसते ही बन्द कर दिया था।

अब दरवाजा खुला होने का मतलब था कि चिड़िया फुर्र हो चुकी थी।

मैंने दोनो कॉफी के कप टेबल पर रखे, और अपने बेड पर धम्म से बैठ गया।

मेरी समझ मे नही आ रहा था की मेरे फ्लैट में आने का उसका मकसद क्या था, और वो जिस तरह से एकाएक गायब हुई है, उसके पीछे उसका उद्देश्य क्या था।

अचानक ही मेरे दिमाग मे एक बिजली सी कौंधी और मै अपनी जगह से उछल कर खड़ा हो गया।

मैंने तत्काल कमरे में अपनी नजर घुमाई। घर की सभी चीजें अपने स्थान पर यथावत थी।

फिर मैंने दराजो को खंगालना शुरू किया। दराज में नजर पड़ते ही मेरे होश फाख्ता हो चुके थे।

आपके इस सेवक की पिस्टल दराज से गायब थी।


जारी रहेगा________✍️
:congrats: start new story
 
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