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Romance कुछ पन्ने यादों की...

Siraj Patel

The name is enough
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:congrats: For starting new story thread
:applause: :celebconf:
Hope this story will touch our hearts :heart:
_______________________
Keep going

We will wait for the first update
 

Ashish Jain

कलम के सिपाही
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भाग 1




आहिरा... आहिरा नाम था उसका। बड़ी-बड़ी आँखे, कंधे तक बाल, और हंसती तो दोनों गालों में हल्के-हल्के डिम्पल पड़ जाते, बड़ी खुश दिल की लड़की थी वो ! उसे पढ़ाई से बहुत लगाव था, शायद भविष्य में कोई बड़ी अफसर बनना चाहती थी और मुझे कम्प्यूटर से ! आहिरा को मैंने तब अपने दिल की बात बताई थी जब मैं एक एग्जाम देने जयपुर जा रहा था और ट्रेन में बैठा ही था! उसने शायद जाने से पहले मेरी आँखे पढ़ ली थी इसीलिए वो पीछे पड़ी थी क़ि मैं उससे क्या छुपा रहा हूं उसे बताऊँ ! जब उसकी तमाम कोशिश मेरा मुँह नहीं खुलवा सकी तो उसने अंत में थर्ड डिग्री का use कर ही लिया ! उसने फ़ोन पर कहा " तुम नहीं बता रहे ना, तो ठीक है जाओ मुझसे बात मत करना " ये सुनते ही मैंने सारा गुनाह कबूल कर लिया !


18 अप्रैल 03 बज कर 08 मिनट, "आहिरा मैं तुम्हें पसंद करता हूं !" वो एक दम शांत हो गयी शायद उसे सुकून मिल गया जो वो सुनना चाहती थी वो उसने सुन लिया था... और सुन कर चली गयी !"


इन सब के बाद भी मैं और आहिरा दोस्त ही रहे ! हालांकि मैं भी अभी इससे आगे कुछ नहीं चाहता था! ! उसकी पढ़ाई वाली बातो से मेरा दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था ! मैं तो सिर्फ अपने कम्प्यूटर में उलझा रहता था ! उसकी और मेरी life style बिल्कुल अलग थी !


इतनी अलग सोच के बाद भी हम 8 महीनो तक साथ रिश्ता निभाते रहे ! ऐसा बिल्कुल नहीं था कि हमारे बीच सब ठीक रहता था हर समय... हम हर समय बच्चों की तरह लड़ते, वो नाराज़ होती तो मैं उसे मनाता और फिर रिश्ता पहले जैसा चलने लगता!


लेकिन इस बार कुछ अलग था... जैसे इस बार दिलो में बहुत ज्यादा शोर था ! वो बेपनाह इज्जत जो दोनों के मन में थी एक दूसरे के लिए उसकी जगह शायद नफरत लेने लगी थी ! जैसे गिलास में पानी भरने पर वो हवा की जगह लेने लगता है और हवा धीरे-धीरे कम होती जाती है वैसे ही नफ़रत दोनों के अंदर की इज्जत को कम करने लगी थी !


मुझे उम्मीद थी क़ि हर बार की तरह इस बार भी सब ठीक हो जायेगा ! लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ ! छोटी-छोटी बाते अब बड़ा-बड़ा रूप लेने लगी थी !


जब रिश्तों में नफरत की हवा चलने लगती है तो कई बार बिना कही बात भी सुन ली जाती है ! उसने भी कुछ ऐसा ही सुन लिया था !

.

.

.

अब सब कुछ बदल चुका था हमारी लाइफ में, बातो का मक़सद सिर्फ लड़ाई ही रह गया था ! समय के साथ सब ठीक हो जाता है, बड़ो से सुना था ये इसलिए थोड़े दिन मैंने उससे बात करना ही बंद कर दी !


...... कमरे के अँधेरे में हाथ में मोबाइल लिए उसकी तस्वीर को ऐसे निहार रहा था क़ि जैसे वो सामने ही बैठी हो... बिना कुछ सोचे समझे मैसेज कर दिया


"हेल्लो..!"

 

Kirti.s

Member
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भाग 1




आहिरा... आहिरा नाम था उसका। बड़ी-बड़ी आँखे, कंधे तक बाल, और हंसती तो दोनों गालों में हल्के-हल्के डिम्पल पड़ जाते, बड़ी खुश दिल की लड़की थी वो ! उसे पढ़ाई से बहुत लगाव था, शायद भविष्य में कोई बड़ी अफसर बनना चाहती थी और मुझे कम्प्यूटर से ! आहिरा को मैंने तब अपने दिल की बात बताई थी जब मैं एक एग्जाम देने जयपुर जा रहा था और ट्रेन में बैठा ही था! उसने शायद जाने से पहले मेरी आँखे पढ़ ली थी इसीलिए वो पीछे पड़ी थी क़ि मैं उससे क्या छुपा रहा हूं उसे बताऊँ ! जब उसकी तमाम कोशिश मेरा मुँह नहीं खुलवा सकी तो उसने अंत में थर्ड डिग्री का use कर ही लिया ! उसने फ़ोन पर कहा " तुम नहीं बता रहे ना, तो ठीक है जाओ मुझसे बात मत करना " ये सुनते ही मैंने सारा गुनाह कबूल कर लिया !


18 अप्रैल 03 बज कर 08 मिनट, "आहिरा मैं तुम्हें पसंद करता हूं !" वो एक दम शांत हो गयी शायद उसे सुकून मिल गया जो वो सुनना चाहती थी वो उसने सुन लिया था... और सुन कर चली गयी !"


इन सब के बाद भी मैं और आहिरा दोस्त ही रहे ! हालांकि मैं भी अभी इससे आगे कुछ नहीं चाहता था! ! उसकी पढ़ाई वाली बातो से मेरा दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था ! मैं तो सिर्फ अपने कम्प्यूटर में उलझा रहता था ! उसकी और मेरी life style बिल्कुल अलग थी !


इतनी अलग सोच के बाद भी हम 8 महीनो तक साथ रिश्ता निभाते रहे ! ऐसा बिल्कुल नहीं था कि हमारे बीच सब ठीक रहता था हर समय... हम हर समय बच्चों की तरह लड़ते, वो नाराज़ होती तो मैं उसे मनाता और फिर रिश्ता पहले जैसा चलने लगता!


लेकिन इस बार कुछ अलग था... जैसे इस बार दिलो में बहुत ज्यादा शोर था ! वो बेपनाह इज्जत जो दोनों के मन में थी एक दूसरे के लिए उसकी जगह शायद नफरत लेने लगी थी ! जैसे गिलास में पानी भरने पर वो हवा की जगह लेने लगता है और हवा धीरे-धीरे कम होती जाती है वैसे ही नफ़रत दोनों के अंदर की इज्जत को कम करने लगी थी !


मुझे उम्मीद थी क़ि हर बार की तरह इस बार भी सब ठीक हो जायेगा ! लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ ! छोटी-छोटी बाते अब बड़ा-बड़ा रूप लेने लगी थी !


जब रिश्तों में नफरत की हवा चलने लगती है तो कई बार बिना कही बात भी सुन ली जाती है ! उसने भी कुछ ऐसा ही सुन लिया था !

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अब सब कुछ बदल चुका था हमारी लाइफ में, बातो का मक़सद सिर्फ लड़ाई ही रह गया था ! समय के साथ सब ठीक हो जाता है, बड़ो से सुना था ये इसलिए थोड़े दिन मैंने उससे बात करना ही बंद कर दी !


...... कमरे के अँधेरे में हाथ में मोबाइल लिए उसकी तस्वीर को ऐसे निहार रहा था क़ि जैसे वो सामने ही बैठी हो... बिना कुछ सोचे समझे मैसेज कर दिया


"हेल्लो..!"

Very nice update sir ji
Phle update se andaza ho rha h ki ye aap ki baki kahaniyo ke tarah dil ko 6u lene wali story sabit hogi
 

Ashish Jain

कलम के सिपाही
265
446
79
भाग 2
पूर्वभाग : -
...... कमरे के अँधेरे में हाथ में मोबाइल लिए उसकी तस्वीर को ऐसे निहार रहा था क़ि जैसे वो सामने ही बैठी हो... बिना कुछ सोचे समझे मैसेज कर दिया


"हेल्लो..!"

अब आगे :-

"तूने क्या ये बोलना नहीं बोलना लगा रखा है मुझे फ़र्क नहीं पड़ता तू किसी से बोले या नहीं बोले ! लेकिन मेरे बारे में किसी को भी कुछ मत बोला कर... मुझे तुझसे कोई मतलब नहीं हैं... तू मेरा फ्रेंड है, शर्म आती है मुझे क़ि मैं तेरे जैसे गिरे हुए को फ्रेंड बोलती थी !"


मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी क़ि एक हैलो का ऐसा reply आयेगा ! आँखों में आँसू छलक आये थे शायद टूट गया था, मन कर रहा था क़ि उसकी इस स्पीच पर जोर-जोर से तालियां बजाऊं। रोते-रोते जब आंसुओं से गीले तकिये की ठंडक मैंने अपने गालो पर महसूस की तब खुद को संभाल कर मैंने भी प्रतिक्रिया दे दी !


" आहिरा ! अगर मैं गिरा हुआ होता ना तो शायद तुम आज मुझे गिरा हुआ बोल ही नही पाती। अगर मैं किसी से प्यार करना सीख सकता हूं तो नफ़रत सीखना तो और भी आसान है !मुझे शर्म आती है फ्रेंड बोलने में.... क्या लाइन बोलती है यार, तू खुद बोलती है या किसी से सीखी है। मैं जिस आहिरा को जानता हूं वो तो ऐसा कभी नहीं बोल सकती ! वैसे मैंने कौन सी गिरी हुई हरक़त कर दी ??"


गुस्सा था शायद उस समय मैं, इसलिए नहीं क़ि उसने ये सब क्यों बोला बस इसलिए क़ि ये सब उसने बोला। क्योंकि ये सब मेरी उम्मीद से परे था ! मुझे तो पता भी नहीं चलता क़ि आहिरा मेरे बारे में ये सब भी सोचती हैं, अगर उसने मुझे उस दिन ये सब कह ना दिया होता !


" तूने आकाश भैया से ये नहीं कहा क़ि मेरे पास क्यों आया है चला जा उस आहिरा के पास वो तेरा बहुत साथ देती है !"


ये सुनते ही अचानक अपने अतीत के कुछ पन्ने याद आ गए... और इस घटना ने मुझे इतना उलझा दिया क़ि मैं आज तक नहीं सोच पाया क़ि इसे मैं अच्छे पन्नो का नाम दूँ या बुरे पन्नो का !दरअसल आकाश मेरा बहुत अजीज दोस्त है ! मकर सक्रांति का समय था 13 जनवरी कॉलेज फीस जमा करने की अंतिम तिथि। मैं आहिरा की फ्रेंड्स के साथ मिलकर अपनी फीस जमा करा रहा था वो क्या है ना इंडिया की लाइनों में लड़कियों का नंबर जल्दी आता है। तभी आहिरा का ग्रुप आगे से आया और अपनी फ्रेंड्स से बिना बात किये निकल गया। तभी उसकी एक बचपन की सहेली जो क़ि मेरी भी बहुत अच्छी दोस्त थी उसने पूछा क़ि " क्यों रे दोनों ने अलग-अलग ग्रुप बना लिया किया !"


"नहीं रे... वो क्या है ना बात-चीत थोड़ी बंद है अभी "


ये कहते हुए मैंने गौर किया कि आकाश बहुत देर कभी मेरे पास तो कभी आहिरा के पास चक्कर निकल रहा था वो जैसे ही मेरे पास आया तो मैने मजाक में कुछ ऐसा बोल दिया जिसे मैं आज तक नहीं समझ पाया कि इसमें गलत क्या था।


" क्यों आकाश हमारे पास क्यों आया है जा ना उसी ग्रुप में !"


उसने भी बोल दिया क़ि " नहीं भाई तेरे वाले ग्रुप में हरियाली ज्यादा दिख रही है वहाँ तो सब भैया बोलने वाली है ! "


इस सब के बीच शायद मेरे ही किसी कमज़र्फ अज़ीज से ये हसंते खेलते किस्से देखा नहीं गए और उसने मेरी 10 मिनट की वार्तालाप में से 20 सेकेंड की बात को जाकर आहिरा को बता दिया, वो भी उसमे उपमा, यमक, अनुप्रास, श्लेष जितने अलंकार हो सकते थे उन सब को लगा कर !जब पेड़ की जड़े ही कमज़ोर होने लगती है तो छोटा सा हवा का झोंखा अपने आप को तूफ़ान समझने लगता है !


इसी झोखे ने इस मैसेज में हमारे पुरे रिश्ते को गिरा दिया था ! मुझे पता था ये सब किसने किया पर जब गलती ही खुद की हो तो मैं कैसे उसको दोष दे सकता था। लेकिन नाम जानते हुए भी मैंने आहिरा से पूछ लिया क़ि तुझे ये सब किसने बोला, पर मेरी कई कोशिश के बाद भी उसने नाम नहीं बताया और मैने भी अपनी उस कमज़र्फ अज़ीज पर एक शेर बोल कर सब समय के ऊपर छोड़ कर आहिरा से बातें करना बंद कर दिया..!


" ये दुनिया मोह्हबत को मोह्हबत नहीं देती

इनाम तो देती है, पर कीमत नहीं देती...

देने को तो मैं भी दे सकता हूँ गाली उस

लेकिन मेरी तहज़ीब मुझे इजाज़त नहीं देती...!"


...आहिरा मेरे साथ थी तो, कहीं नहीं थी लेकिन अब जब वो नहीं है तो लगता है कि, कहीं कहीं हैं। उसके चले जाने के बाद अब लाचारी सी है। उसका मेरी जिंदगी से चले जाना इतना मुश्किल नहीं था जितना उसे जाते हुए देखना !खैर, वक़्त गुजरता गया और मैं अनगिनित तमन्नाओ का बोझ लिए यहाँ-वहाँ भटकता रहा। मैंने फैसला किया कि आहिरा से एक बार तो मिलकर सब गलतफहमियां तो दूर करूँगा। लेकिन कहाँ कैसे कब ये नहीं पता था क्योंकि उसके बाद तो उसने मुझसे बात करना ही बंद कर दिया था ! धीरे-धीरे उसकी ये बेरुखी मेरी झुनझुलाहट बनने लगी। कभी-कभी मुझे गुस्सा आने लगा...


"अरे ऐसे थोड़ी होता है यार थोड़ी सी ग़लतफ़हमी में कोई ऐसे छोड़ कर थोड़ी ना चला जाता है, बात ही नहीं करती, attitude तो देखो, मैसेज का रिप्लाई कर देती, फ़ोन घुमा देती, कभी अकेली मिलेगी तो बताऊंगा।"


लेकिन ये दिल को दिलासा था। सच तो ये है कि मैं अब आहिरा से मिलने की उम्मीद छोड़ चुका था ! लेकिन मैं जानता था कि आहिरा की याद मुझ पर परत दर परत हावी होती जा रही थी ! मैं गुम-सुम रहने लगा था पापा ने कई बार खाने के समय पूछा, मैंने सर दर्द का बहाना बनाया पर दोस्तों से कहाँ सब छुपता हैं ! मेरे दोस्तों ने पहले तो मुझे समझाया लेकिन मुझे उदास देख देख कर झुनझुलाने लगे और आहिरा को भला-बुरा कहने लगे। आहिरा को भला-बुरा कहने वाले दोस्तों से में कतरा-कतरा रहने लगा !


इन सब के बीच मुझे शेरो-शायरी से कब मोह्हबत हो गयी पता ही नहीं चला। जॉन एलिया, मीर, ग़ालिब सब जैसे मेरे कमरे में ही रहने लग गए हो।


"आईना क्यूँ न दूँ के तमाशा कहें जिसे

ऐसा कहाँ से लाऊँ के तुझसा कहें जिसे

“ग़लिब” बुरा न मान जो वाइज़ बुरा कहे

ऐसा भी कोई है के सब अच्छा कहें जिसे "


अब भाई इंसान हूं बर्दास्त की हद होती है। एक दिन मोबाइल में खुद की तस्वीर देख कर सोचा कि यार ये तो मेरी पर्सनेलिटी है नहीं... मैं तो रात को हाईवे पर दोस्तों के साथ जोर जोर से चिल्ला कर मस्ती करने वाला बन्दा था, क्या हो रहा है ये। उसी दिन तय किया कि बस अब से आहिरा की यादे बन्द। नसीब में होगा कुछ तो खुद समझ जायेगी। खुद को यकीन दिलाने लगा कि मैं जरा भी बेचैन नहीं हूं। बल्कि उसका ही मन भर गया होगा मुझसे इसलिए वो वजह की तलाश कर रही थी ! उस पुरे महीने मैंने खुद को मशरूफ़ रखा, कुछ क़दर इस झूठ पर एतबार भी कर लिया कि मुझे फर्क नहीं पड़ता अब !एक दिन जब ग़ालिब पड़ रहा था तो एक शेर फिर मेरे सामने आ गया


"मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे..

तू देख क्या रंग है तेरा मेरे आगे"


ये पढ़ने के बाद मैंने खुद को फिर आईने में देखा। मैं अधूरा सा लग रहा था। इन दो लाइन ने मेरे खुद के लिखे झूठ से पर्दा उठा दिया था। मेरे जिन्दा दिल और रात को दोस्तों के साथ बीतने वाली जिंदगी उस दायरे में कैद हो गयी जहाँ दूर-दूर तक कोई नहीं था सिवा आहिरा के ! मैंने आहिरा से बात करने की बहुत कोशिश की लेकिन वाक़ई.. शायद वो जा चुकी थी मुझसे बहुत दूर। अब मेरे पास खुद को संभालने के अलावा कोई चारा नहीं था लेकिन मैं कोशिश भी करता तो चेहरा सब बयां कर देता ! काश.. मैं उसे समझा पता की अपने से बिखरने का दर्द क्या होता है !


हालात ये हो गए आज कि मैं हर रात बड़ी शिद्दत से आहिरा को याद करता हूँ और कभी-कभी तो रो भी देता हूं ! आहिरा को ढूंढते ढूंढते मैंने खुद में एक आहिरा बसा ली हैं। अब दर्द को सिर्फ सोचता नहीं हूं लिख भी देता हूं। मेरे अज़ीज भी मुझे पढ़कर अपना दर्द महसूस कर लेते है....


"शर्म, दहशत, झिझक, परेशानी, नाज़ से काम क्यों नहीं लेती

आप, वो, जी, मगर ये सब क्या है,तुम मेरा नाम क्यों नहीं लेती "


समाप्त

माफ़ी चाहूंगा दोस्तों लेकिन ये मेरे यादों के कुछ पन्ने ही तो हैं जिसको एक किताब बन ने से पहले ही उसकी पूरी कागजाद को मिटा दिया गया... हां कुछ ख्वाहिश अब भी बच्चे थे की बचे कूचे कुछ पन्नों को संजोट कर किताब ही ना सही एक स्मारक पत्र तो बना सकता हूं जिनमें ख्वाब अधूरे हो लेकिन दर्द बेशुमार हो , आंसू , दो पल की खुशियों में जिदंगी भर की मेहमान हो....

बस एक आजमाइश थी एक अधूरे ख्वाब को उड़ान देने की... धन्यवाद....
 

Kirti.s

Member
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Ye kya sir ji yha toh kahani start hone se phle hi khatam ho gyi or kuch panne add kr dete yaado ke toh hm bhi rubaru ho jate un yaado se.rahi baat update ki toh woh hamesha ki tarah lajawab the
 

Mathur

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Hello, Ladies  & Gentleman, 
We are so glad to Introduce Ultimate Story Contest of this year.

Jaise ki aap sabhi Jante Hain is baar Hum USC contest chala rahe hain aur Kuch Din pahle hi Humne Rules & Queries Thread ka announce kar diya tha aur ab Ultimate Story Contest ka Entry Thread air kar diya hai jo 10th, June 2020, 11:59 PM ko close hoga.

Khair ab main point Par Aate Hain Jaisa ki entry thread aired ho chuka hai isliye aap Sabhi readers aur writers se Meri personally request hai ki is contest mein aap Jarur participate kare aur Apni kalpnao ko shabdon ka rasta dikha ke yaha pesh kare ho sakta hai log use pasand kare.
Aur Jo readers nahi likhna chahte wo bakiyo ki story padhke review de sakte hai mujhe bahut Khushi Hogi agar aap is contest mein participate lekar apni story likhenge to.

Ye aap Sabhi Ke liye ek bahut hi sunhara avsar hai isliye Aage Bade aur apni Kalpanao ko shabdon Mein likhkar Duniya Ko dikha De.

Ye ek short story contest hai jisme Minimum 800 words se maximum 6000 words tak allowed hai itne hi words mein apni story complete Karni Hogi, Aur ek hi post mein complete karna hai aur Entry Thread mein post karna hai.
I hope aap mujhe niraash nahi Karenge aur is contest Mein Jarur participate Lenge.

Rules Check Karne k Liye Ye Thread Use karein :- Rules And Queries Thread

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Reviews Post Karne K liye Ye thread Use karein :- Reviews Thread
On Behalf of Admin Team
Regards :- Xforum Staff..
 
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