
Position | Benifits | |
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Winner | ||
1st Runner-Up | ||
2nd Runner-UP | 1000 Rupees + 5000 Likes + 7 Days Sticky Thread (Stories) | |
3rd Runner-Up | 5 Months Prime Membership + 3000 Likes | |
Best Supporting Reader (top 3) |
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Members reporting CnP Stories with Valid Proof | 500 Likes for each report |

Mast storyअपडेट - 14
गगन, राघव, रिशु और मलिक एक-दूसरे को इशारा करते हैं, और चारो विक्की के पीछे चल पड़ते हैं।
कुछ दूर चलने के बाद विक्की को
महसूस होता है कि चारों उसका पीछा कर रहे हैं।
शक होता ही वो कदम तेज़ कर देता है, लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है।
चारों एक साथ हमारे पर झपटा मार देते हैं। विक्की जंगल की तरफ भागने लगता है।
मलिक बोलता है, "आह, साला काम
आसान हो गया। इसी जगह इसका हिसाब करते हैं।"
राघव गुस्सा होकर कहता है, "बकबक काम कर, पहले इसे पकड़ो!"
रिशु और राघव विक्की को पकड़ लेते हैं।
तब तक गगन और मालिक भी वहां आ जाते हैं।
रिशु हंसी दबते हुए कहता है,आज काफ़ी दिनों बाद अकेले हाथ लगा है।
गगन ताना मारते हुए बोलता है, "हम लोग उस लड़की को छेड़ रहे थे, तुझे क्या परेशानी थी? तेरी बहन लगती थी क्या?"
विक्की गुस्से से जवाब देता है, "गगन, जुबान संभाल कर बात कर।"
मालिक हंसी उड़ाते हुए बोलता है, "अभी हमारे कब्जे में है, फिर भी इसकी अकड़ नहीं गई।"
विक्की गुस्से में कहता है, "तुम लोगों की औकात मुझे पता है।"
गगन चिल्लाता है, "चुप कर, पहले इसे सीधा करते हैं!"
राघव, “इसकी अकड़ तो बहुत ही ज्यादा है।”
रिशु और राघव मिलकर विक्की को हाथ-पैर से पकड़ लेते हैं।
मालिक एक ज़ोर का मुक्का उसके पेट में दे मारता है।
विक्की दर्द से कहार उठता है,
“एक बाप के हो तो एक-एक करके आओ… तब पता चलेगा कौन कितने पानी का है!”चारो हंसने लगते हैं.
“बस कुछ मिनट रुक,” गगन बोलता है, “अभी पता चल जाएगा कौन कौन कितने बाप का है।”
गगन विक्की को एक और गुस्सा मरने ही वाला होता है, तभी अचानक मालिक ज़मीन पर धाराशायी हो जाता है।
बाकी तीन हैरान हो कर देखते रह जाते हैं।
पीछे से आवाज आती है—
"क्यों रे? अपने दूसरे बाप को भूल गये क्या?"
राघव चौंककर बोलता है, "ये... ये यहां कैसे आ गया?"
रिशु भी घबराया हुआ है, "गगन तो बोल रहा था ये शहर के बाहर है!"
राघव और रिशु विक्की का पकड़ छोड़ देते हैं।
रवि गरजता हुए, "खड़े क्या हो? मारो इनको!"
विक्की तुरंत राघव पर झपट पड़ता है
और हाथपाई शुरू हो जाती है।
रवि गगन से टक्कर लेता है और उसे ज़मीन पर गिरा देता है।
विक्की रिशु को एक ज़बरदस्त थप्पड़ जोड़ता है; रिशु वही गिर कर बेहोश हो जाता है।
मालिक उठ कर रवि पर वार करने ही लगता है कि विक्की एक ज़ोर की लात मार कर उसे फिर से गिरा देता है।
चारो अपनी जान बचा कर भाग जाते हैं।लड़ाई ख़तम हो चुकी थी।
मलिक- रवि और विक्की तुझे ये लड़ाई महँगी पड़ेगी
रवि या विक्की दोनों एक हां तब की तब देखेंगे।
विक्की और रवि दोनों एक-दूसरे को देख रहे हैं।
विक्की जाके रवि के गले मिल गया है कहा था इतने 2 दिनों से
रवि ने सांस संभालते हुए,क्या करु साली दोस्ती है ऐसी आना पड़ेगा।
विक्की- यार उस दिन के लिए सॉरी मुझे तेरे साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए था।
तभी वहा पर ज्योति पहुंचती है।
ज्योति- विक्की तुम ठीक हो तुम्हें चोट तो नहीं आई,
(विक्की यार ये फिर आ गयी मेरा दिमाग खाने)
विक्की- क्या है फिर आ गई मेरा दिमाग खाने तेरा पास कोई और काम नहीं,
ज्योति- दिमाग खाने नहीं तेरा हाल चाल लेने आई हूं,
विक्की- हां हम लोग ठीक हैं अभी सुबह हाल ले चुकी हैं ना अब निकल,
ज्योति- हां जा रही हूं तुझसे कौन बोल रहा है।
विक्की- हां चल निकल एक तो तेरे ही चक्कर में ये सब हो रहा है और तू मत बोला कर।
इतनी सी बात में ज्योति की आंख में आंसू आ जाता है वो वहां से भाग के चली जाती है।
रवि- अबे ये तूने क्या किया
विक्की- अबे सुबह से ये मेरा दिमाग खाए जा रही है.
रवि- अबे यार तू कम से कम उसका शुक्रिया अदा तो कर देता,
विक्की- मै क्या करु,
रवि- अबे यार कल जब तेरे को मारने की प्लानिंग चल रही थी तब ज्योति मेरे पास आई थी शाम को
(अब ज्योति और रवि की जुवानी में,
ज्योति- हाय रवि
रवि- हाय,क्या है?
ज्योति- वो विक्की नहीं दिख रहा है तुम्हारे साथ कोई बात हुई है क्या,
रवि- नहीं तुम काम बताओ निकालो
ज्योति बिस्तार में सब रवि को बता देती है और जाने लगती है।
रवि- सुनो ज्योति मेरी उसे मेरी थोड़ी खट पट हो गई और कुछ नहीं और धन्यवाद मदद करने के लिए,
ज्योति- तुमने जो मेरी मदद की थी उसके आगे ये तो कुछ भी नहीं)
रवि उसको सब कुछ विस्तार से बताता है।
विक्की अबे यार ये भारी गलती हो गई।
रवि- चल कोई ना कल उसको स्कूल में सॉरी बोल देना।
विक्की- हां वो तो लेकिन यार तू ना होता तो आज मेरा तो काम लग जाता।
फ़िर रवि और विक्की दोनों घर की या निकल चुके।
विक्की घर पूछता है तब शाम हो चुकी थी।
निधि ने दरवाजा खोला तो विक्की मुस्कुराते हुए अंदर आया।
निधि -"आ गया बेटा... कहा था इतनी देर से वही आवारा के साथ होगा"
विक्की -“नहीं माँ थोड़ा काम था इसलिए देर हो गई,
निधि हल्की सी हंसी रुकती हुई बोली,
हाँ मुझे मालूम है? चल, पहले फ्रेश हो जा…मैं खाना लगाती हूं।”
विक्की ऊपर कपड़े बदलने चला गया, और उधर निधि ने खाना लगाया वक्त अजीब सी घबराहट और एक्साइटमेंट महसूस कर रही थी।
आज उसने थोड़ी सादगी से सेक्सुअल दिखने का सोचा था—ब्लाउज का एक बटन खोला, पल्लू हल्का सा ढीला... बस इतना कि देखने वाले को समझ न आए पर नजर हट भी न पाए।
जब विक्की नीचे आया और टेबल पर बैठा, निधि उसके सामने आ कर बैठी।
पल्लू हल्की सी फ़िसल गया... जैसे अंजाने में, पर शायद अंजाने में नहीं।
और उसके दूध की ऊपर सतह और क्लीवेज दिखने लगी।
विक्की का चेहरा एक पल के लिए रुक सा गया। उसका लंद खड़ा हो गया और
उसकी आँखों में हल्की सी हया और हल्की सी शर्म दोनों दिखाई दिये।
निधि ने उसकी प्रतिक्रिया महसूस की, पर कुछ बोले बिना सिर्फ हल्का सा मुस्कुरा दिया।
थोड़ी देर बाद वो खड़ी होकर किचन में चली गई।
विक्की ने खाना ख़त्म किया और बर्तन ले कर किचन में आया।
निधि स्लैब के पास खड़ी थी।
जब विक्की उसके पास पहुंचा पीछे से चिपक गया और उन दोनों के बीच का फासला बहुत कम रह गया- इतना कि निधि को उसकी गरम सांस अपने कंधे के पास महसूस हुई.और विक्की का लण्ङ सीधे निधि की गांड से टकरा रहा था जिसे दोनों लोग फील कर रहे थे पर बोला कोई नहीं रहा था।
निधि को समझने में ज्यादा समय नहीं लगा कि उस पल विक्की क्या महसूस कर रहा था...
और शायद वो भी उस पल को रोकना नहीं चाहती थी।
फ़िर कोमल की आवाज़ देने से दोनों लोग होश में आए विक्की वाहा से बिना रुके अपने कमरे चला गया वही निधि किचन के काम में लग गई।
रात होने पर कोमल किताब पढ़कर मजा लेती है और निधि और विक्की दोनों लोग शाम शाम के हादसे को याद करते हैं।
विक्की आज खुश था शायद उसे जल्दी निधि मिल जाएगी यहीं हाल निधि का था।दोनों लोग एक दूसरे को याद कर के सो गए।