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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

komaalrani

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छुटकी -होली दीदी की ससुराल में

भाग १११ पंडित जी और बुच्ची की लिख गयी किस्मत पृष्ठ ११३८

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komaalrani

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Ab to guddi samajh main accept kar li hai ki pehli bhaiya.....phir koi or...

Ab to katik ki kutiya ban na taye hai
एकदम सही कहा आपने बुच्ची के लिए

कातिक की कुतिया मतलब बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय
 

Luckyloda

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. चुनिया -बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी

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तेरी अम्मा के नखड़े मैं सारे उठाउंगी, तेरी माई के नखड़े मैं सारे उठाउंगी ,


और मुड़ के सुरजू की माई की ओर सर झुका के दोनों हाथ जोड़ के फिर से एक चक्कर मार के ठुमका लगा के गाया

तेरी अम्मा के नखड़े मैं सारे उठाउंगी, तेरी माई के नखड़े मैं सारे उठाउंगी ,

सुरजू की माई खूब खुश, उन्होंने हाथ उठा के आशीर्वाद दिया और चुनिया ने बुच्ची को देख के पास में जा के गाना आगे बढ़ाया



बुच्ची की ओर मुड़ के बोली लेकिन, और बुच्ची ने भौहे मटकायी,.... जैसे पूछ रही हो क्या?

और चुनिया ने क्या कमर मटकायी, क्या चक्कर मारा और फिर माला जैसे एकदम बन्ना बने बुच्ची के पास ले जा के गाया




बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी

तेरी अम्मा के नखड़े मैं सारे उठाउंगी, तेरी माई के नखड़े मैं सारे उठाउंगी ,

लेकिन तेरी बहना पे अपने भाई को चढ़ाउंगी, तेरी बुच्ची पे अपने गप्पू को चढ़ाउंगी


बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी



और अब वो जोर से हो हो हुयी, लड़कियों ने मुंह में ऊँगली डाल के सीटी मारी, ढोलक खूबी तेज से टनकने लगी, बुच्ची जैसे सोच में पड़ गयी, ये शर्त माने न माने

लेकिन चुनिया ने फिर गाया


बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी

तेरी अम्मा के नखड़े मैं सारे उठाउंगी, तेरी माई के नखड़े मैं सारे उठाउंगी ,

लेकिन तेरी बहना पे अपने भाई को चढ़ाउंगी, तेरी बुच्ची पे अपने गप्पू को चढ़ाउंगी


बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी



और बन्ना बनी बुच्ची को पकड़ने की कोशिश की लेकिन बुच्ची मुस्कराते हुए, उसकी बाहों से फिसलकर निकल गयी, और दूर खड़ी होक उसे जीभ चिढ़ाते हुए अंगूठा दिखाने लगी,

कोई भौजाई बोली, " अरे बन्ने मान जा, तेरा भी फायदा तेरी बहना का भी फायदा, लम्बा मोटा औजार मिलेगा, गपागप घोंटेंगी

दूसरी बोली, दूल्हे की बहन पर तो दुल्हिन के मायके वालों का पहला हक होता है

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और चुनिया ने फिर अपनी बात साफ़ की


बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी

सेजों पे तुझे मजा कराउंगी, तुझे मैं मस्ती खूब कराउंगी

लेकिन तेरी बहना का जोबन अपने भाई से मिजवाउंगी

तेरी बुच्ची का जोबन गप्पू से मलवाउंगी


और अब मामला एकदम खुल के था, टॉप तो दोनों के ऊपर उठ गए थे, लेकिन रामपुर वाली भाभी ने गाने का लेवल एकदम से बढ़ा दिया और अब सब औरतें, लड़कियां मजे ले लेकर गा रही थीं,



बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी, बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी

सेजों पे तुझे मजा कराउंगी, तुझे मैं मस्ती खूब कराउंगी

बन्ना पहले वादा करले पीछे माला डालूंगी,सेजों पे तुझे मजा कराउंगी,

लेकिन पहले तेरी बहना को, तेरी बुच्ची को घोड़ी बनवाऊंगी, तेरी बुच्ची को कातिक की कुतिया बनवाऊंगी,

तेरी बुच्ची को घोड़ी बनवाऊंगी, तेरी बुच्ची को कातिक की कुतिया बनवाऊंगी,




और बुच्ची जो खूब मजे ले रही थी, खुद निहुर के घोड़ी बन गयी,

और चुनिया, उसके पीछे, और एक झटके में बुच्ची की शलवार का नाड़ा भी खुला और शलवार सरक के घुटने तक, और गाना फिर तेज हो गया था, चुनिया और गप्पू की बड़ी बहन, रामपुर वाली भौजी गा रही थीं , साथ में अब सब लड़कियां, औरतें


लेकिन पहले तेरी बहना को, तेरी बुच्ची को घोड़ी बनवाऊंगी, तेरी बुच्ची को कातिक की कुतिया बनवाऊंगी,

तेरी बुच्ची को घोड़ी बनवाऊंगी, तेरी बुच्ची को कातिक की कुतिया बनवाऊंगी,

अपने गप्पू से तेरी बुच्ची को खूब चुदवाउंगी , गपागप चुदवाउंगी




और सब लोग मान गए बुच्ची और चुनिया की जोड़ी को, स्साला क्या कोई मरद चोदेगा, जिस तरह से चुनिया ने सबके सामने बुच्ची की टाँगे फैलायीं, बीच में अपनी दोनों टाँगे फंसा दी, की धक्के पड़ने पर स्साली सिकोड़ न ले, और फिर एक हाथ कमर पे और दूसरा जोबन पे और रगड़ रगड़ के, गिन गिन के धक्के मारे,, चुनिया की भी शलवार किसी लड़की ने खींच के नीचे, और अब दोनों सहेलियों की चुनमुनिया आपस में रगड़ खा रही थी, लेकिन चुनिया ने कुछ उसके कान में भी कहा, प्यार से भी धमका के,

" स्साली, बोल हाँ, सबके सामने, नहीं तो एक साथ तीन ऊँगली अंदर करूंगी, जो तुझे अपने सुरजू भैया से अपनी झिल्ली फड़वाने का शौक है न बस यहीं फट जायेगी सबके सामने और तेरे भैया को फटी फटी मिलेगी, "
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" कमीनी, हाँ तो कर दिया है, अब कैसे करूँ, स्साली ऊँगली किया न तो कुट्टी, पक्की वाली और तेरा भाई भी देखता रह जाएगा, "


बुच्ची गुस्से से धीमे धीमे फुसफुसाते बोली, लेकिन डर उसे लग रहा था, कहीं सच में ये छिनार,

" चल एक बार और हाँ बोल दे, सबके सामने जोर से "

चुनिया ने दोनों जांघों के बीच एक हथेली डाल के अपनी सहेली की कुँवारी एकदम कच्ची सहेली को रगड़ते बोला

" लेकिन तू ऊँगली नहीं करेगी, और पहले अपने भैया से उसके बाद पक्का चल तू भी क्या याद करेगी, गप्पू बेचारा इत्ते दिन से पीछे पड़ा है तो उसका भी मन रख दूंगी। "

मुस्कराते हुए बुच्ची बोली


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और एक बार फिर से गप्पू की बड़ी बहन, रामपुर वाली भौजी दुहरा रही थीं, जोर जोर से गा रही थीं



लेकिन पहले तेरी बहना को, तेरी बुच्ची को घोड़ी बनवाऊंगी, तेरी बुच्ची को कातिक की कुतिया बनवाऊंगी,

तेरी बुच्ची को घोड़ी बनवाऊंगी, तेरी बुच्ची को कातिक की कुतिया बनवाऊंगी,


अपने गप्पू से तेरी बुच्ची को खूब चुदवाउंगी , गपागप चुदवाउंगी

और अबकी बुच्ची ने एक बार फिर जोर से हाँ हाँ हाँ कहा पूरे पांच बार, और चारो ओर देखकर, रामपुर वाली भौजी को भी सुनाते हुए ,



वो हाँ तो सबने सुनी और सब समझ गए किस बात की हाँ है लेकिन ये बात भी कई लोगो ने सुनी जो बुच्ची ने बोली थी,

" पहले अपने भैया से उसके बाद पक्का चल तू भी क्या याद करेगी, गप्पू का भी मन रख दूंगी। "

और जिन लोगों ने सुनी उसमे इमरतिया, मुन्ना बहू, मंजू भाभी, रामपुर वाली भाभी के आलावा भी घर की कई भौजाइयां, लड़कियां और काम करनेवाली थीं,



बस अपनी जीत का जैसे एलान करते हुए चुनिया ने बुच्ची का कुर्ता पूरी तरह अब खींच के उतार दिया, खड़ी होक लहराया और पूरी ताकत से जो फेंका तो सीधे मुन्ना बहू की गोद में और उन्होंने दबोच लिया।
Are wah..... apna kaam bhi karwa liya rampur wali bhabhi ne....
 

Luckyloda

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नाच, सूरजु की माई

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और सूरजु की छोटी मामी को उन्होंने खींच लिया साथ में, ढोलक मंझली मामी और उनकी वही रामपुर वाली बहू, चुनिया की बड़ी बहन ने सम्हाली,

लगाई जाओ राजा धक्के पे धक्का, लगाई जाओ राजा धक्के पे धक्का

क्या सुहाग रात को सूरजु के मामा ने सूरजु की मम्मी को धक्के मार मार के उनकी सील तोड़ी होगी, जिस तेजी और ताकत से सूरजु की मामी अपनी ननद सूरजु की माई को धक्के मार रही थीं

और रामपुर वाली भौजी ने जैसे ही गाने की अगली लाइन गयी, सूरजु की माई की चोली तार तार हो गयी, उतरी बाद में फटी पहले,



दो दो बटन हैं कस के दबाओ, दो दो बटन हैं कस के दबाओ,

और पीछे से उनकी एक ननद लगती थीं, अहिराने की, लेकिन रिश्ता तो रिश्ता, बस पीछे से ब्लाउज पकड़ा, खुला बाद में बटन सब पहले टूटे और जैसे हजार हजार वाट के दो दूधिया बल्ब, गोरी तो सूरजु की माई खूब थी हीं, उन्ही का रंग सूरजु को मिला था और ऊपर से खाई पि देह

जोबन दोनों ३६ डी डी, एकदम कड़े कड़े, ब्लाउज हट गया था तब भी एकदम तने, पता नहीं कितने मरदों का हाथ पड़ा था लेकिन तब भी टनटनाये,

पर ये आजादी पल भर की थी, जैसे उनके भाई ने उनकी भाभी का जोबन लुटा था, सूरजु की मामी का तो बस उसी तरह से की सूरजु मामी के दोनों हाथ सूरजु की माई के जोबन पे

सूरजु की माई के मायके की किसी भाभी ने ललकारा,

" अरे तनी निचले मंजिल का दर्शन कराओ "

और अब मंझली मामी जैसे तैयार खड़ी थीं उन्होंने पीछे से पेटीकोट पकड़ के उठा दिया

एकदम चिक्क्न मुक्कन, जैसे दुलहिनिया की सहेलियां, सुहागरात के दिन दुल्हन की झांटे एकदम साफ़ कर के भेजती हैं की साजन को ज्यादा ढूंढना न पड़े, हाँ रंग धक्के खा खा के हलका सा सांवला, लेकिन बहुत हल्का, बल्कि गेंहुआ सा और खूब फूली हुयी फांके पावरोट की तरह ऊपर सिंहासन पर बैठी वो जादू की बटन, क्लिटॉरिस,

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और उसके चिक्क्न मुक्कन होने पे इमरतिया का भी बड़ा खेल था

इमरतिया की उँगलियों में जादू था, जादू तो उसके रूप रंग और जोबन में भी जबरदस्त था जो सिर्फ गाँव के लौंडो को ही नहीं ललचाता था बल्कि कन्या रस की मस्ती वाली औरतों के भी मुंह में पानी ले आता था,

और इसबात को इमरतिया भी भरपूर जानती थी, और उसका फायदा लेना भी, तो जब पहली बार बड़के घर से बुलावा आया, बड़की ठकुराइन ने तेल लगाने को मालिश करने को बोला, तो वो समझ गयी, बड़की ठकुराइन की भट्ठी में कितनी आग सुलग रही है, पैरों की एड़ी से जो मालिश इमरतिया ने शुरू की और टखनों से होती हुयी जब जाँघों तक पहुंची तो दो बातें समझ में आ गयी,

उसके देवर की माई की जाँघों में बहुत ताकत है और दूसरे जाँघों के बीच के कुंए की प्यास बहुत गहरी है,

जानबूझ के इमरतिया की उँगलियाँ जैसे गलती से उन रस की दोनों फांको तक छू के रह गयी, पर अगले दिन तड़पती हुयी सूरजु की माई ने खुल के कह ही दिया, जब उन्हें लगा की सिर्फ सिसकी लेने से काम नहीं चलेगा,

" हे करो न "

" का करूँ, बड़की ठकुराइन "

मुस्करा के इमरतिया बोली लेकिन अगले पल जैसे ही बाज ने झपट्टा मारा हो इमरतिया की हथेली ने उनकी दोनों रसीली फांकों को दबोच लिया और क्या रगड़ा मसला, थोड़ी देर में ही बुर ने पानी फेंक दिया, उनकी आँखे उनीदी हो गयी और उन्होंने खुद कबूल कर लिया, सालों बाद ऐसा पानी निकला।

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लेकिन इमरतिया कम छिनार नहीं थी, दो दिन उसने नागा करवाया, और तीसरे दिन उसके देवर, सूरजु सिंह भौजी के दरवाजे पे हाजिर, माई बुलवाई हैं।

और उस दिन तो और उसके अगले दिन से तो इमरतिया और बड़की ठकुराइन एकदम खुल गयीं, मिलते ही दोनों की साडी उतरा के अलगनी पर, पेटीकोट कमर तक, और अब मामला उँगलियों तक सिमित नहीं रहता, कभी इमरतिया अपनी चुनमुनिया सूरजु सिंह की महतारी की चुनमुनिया पे रगड़ती तो कभी अपनी जीभ से, कोई दिन नहीं था, जब दो तीन पानी बड़की ठकुराईन का न झड़ता हो, उन्हें अपनी जवानी के दिन याद आ गए थे

और इमरतिया और सूरजु सिंह की माई में छेड़खानी भी होती थी, और वो भी सूरजु सिंह को लेकर, कभी जब इमरतिया ज्यादा तड़पाती तो बड़की ठकुराइन बोलतीं,

" एक दिन अपने बेटवा को चढ़ाउंगी तोहरे ऊपर तोहार कुल गर्मी निकाल देगा, "

" अरे मालकिन, आपके मुंह में घी गुड़ हमार तो देवर है, एकबार ओकर अखाडा छूट गया न तो मैं खुद ही उसके ऊपर चढ़ के उसे चोद दूंगी , लेकिन यह गाँव क लौंडन तो भौजाई के पहले, "

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उनकी बात काट के हँसते हुए बड़की ठकुराइन बोलीं, " सही कहती हो, सब के सब नंबरी बहनचोद हैं "

अरे बहनचोद होंगे तो होंगे, हम खुदे अपने देवर के ऊपर, " दोनों फांको को फैला के बुरिया में ठकुराइन के टप टप कडुवा तेल टपकाते इमरतिया की बात फिर सूरजु की माई ने काट दी और बोलीं

" अरे माना हमरे मुन्ना क कउनो सगी बहिन नहीं है लेकिन फुफेरी, चचेरी, ममेरी की कौन कमी है, तो भौजाई क काम ही है देवर को बहनचोद बनाना "

" एकदम और असली कच्ची कोरी, कच्ची अमिया बिन चुदी बहिनिया ढूंढ के अपने देवर से फड़वाउंगी उसकी, लेकिन मैं कह रही थी मेरा देवर सिर्फ बहनचोद ही नहीं पक्का मादरचोद भी बनेगा। "


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और अबकी ठहाका मार के बड़की ठकुराइन हंसी, " अरे तोहरे देवर क बस का ना है, देखा नहीं केतना लजाधुर है, देख तो पाता नहीं है का चोदेगा वो, "

और अब इमरतिया की दो उँगलियाँ ठकुराइन की दवात में घुस गयी थीं और गोल गोल चक्कर काट रही थीं, हसन एक बोलीं

" देवर भले लजाधुर है लेकिन ओकर भौजाई हम हैं ना, आँख पे पट्टी बांध देंगे कस के, और पहले हम चढ़ के चोदेगे, और फिर उनकी महतारी को चढ़ाएंगे, तब पता चलेगा मेरे देवर की ताकत, अरे जिस भोंसडे में से निकला है उसमे तो जरूर घुसेगा, तभी असल चोदू बनेगा "



और जब सूरजु का बियाह तय हुआ, बल्कि लड़की वाले आये तब से, और तभी उनकी माई ने अखाड़ा भी छुड़वा दिया और लंगोट की कसम भी, गुरु ने आजाद कर दिया, की अब गृहस्थ का काम करो, ब्रम्हचर्य से मुक्ति, तब से और इमरतिया की मस्ती चढ़ गयी। लेकिन थाउरिआं की परेशानी बढ़ गयी और किससे कहतीं तो उन्होंने इमरतिया से कहा,

" तोहरे देवर में जांगर को तो कउनो कमी नहीं है लेकिन एकदम ही सीधा, ओकरी उम्र तक तो गाँव के लौंडे दस पांच क नाडा खोल लेते हैं कुल कबड्डी खेल खेल के सीख लेते हैं, लेकिन तोहार देवर तो अइसन अखाडा और पहलवानी में, यह सब मामले में एकदम नेउसीखिया "



बात उनकी एकदम सही थी और इमरतिया को भी इस गाँव का क्या अपने गाँव का भी रिवाज मालूम था, गाँव के बबुआने के लड़के, ठीक से खड़ा भी नहीं होता था, फड़फड़ाना शुरू करता था तो भी कोई काम वाली, कोई घास करने वाली, हाथ लगा के, पकड़ के खड़ा कर के खुद चढ़ के उसे जवानी का पाठ पढाना शुरू कर देती थी, और एक दो के साथ मस्ती के बाद तो कभी गन्ने के खेत में तो कभी अरहर के खेत में , कभी पटा के फंसा के, कभी लालच दे के तो कभी थोड़ा बहुत जबरदस्ती, और कोई माँ के पास उनके शिकायत ले भी गया तो वो वो हंस के टाल देतीं, " अरे अभी जवानी चढ़ रही है अब न मजा ले तो कब ले "। और बियाह के पहले शायद ही कोई लड़का बचता हो जो दस बारह, दस बारह बार नहीं, दस बारह लड़कियों औरतों के साथ जम के कब्बडी कहल चूका होता तो पहली रात उसके लिए कोई नयी चीज नहीं होती
Oooo to yaha se suraj ki training ki tayari ki baat aayi..

Chalo der aaya durust aaye .....
 

Luckyloda

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सूरजु की माई -- इमरतिया
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पर सूरजु की पूरी अब तक की जवानी तो अखाड़े में और गुरु ने कहा था की औरत के आगे नजर झुका के, तो इमरतिया के अलावा सूरजु किसी से बात भी नहीं करते थे, और उनकी माँ को यही बात सता रही थी,

पर इमरतिया ने जिम्मा ले लिया था अपने देवर को बियाह के पहले नंबरी चोदू बनाने का और कोक शास्त्र के ८४ आसनो की प्रैक्टिस कराने का

और जैसे ही बियाह सुरुजू का पक्का हुआ, लड़की वाले आये बरीक्षा ( एंगेजमेंट ) कर के गए, सूरजु के गुरु ने उन्हें अखाड़े की कसम से, ब्रम्हचर्य की शपथ से आजाद कराया, अखाड़े का लंगोट अखाड़े में रह गया, बस उस दिन से दुनो बौरा गयीं, सूरजु सिंह क माई और भौजाई, बड़की ठकुराईन और इमरतिया दोनों, जैसे कभी सूरजु को देखतीं या उसके बारे में बोलतीं, सीधे चुदाई ही सूझती, और इमरतिया तो खैर असल भुआजी मात, अइसन भौजाई थी, तो देवर के बियाह की बात से गरमाना ही था, देवर को सीखा पढ़ा के, चढ़ा के, देवरानी के लिए तैयार करना था, लेकिन इमरतिया से ज्यादा बड़की ठकुराइन की बुरिया में आग लगी थी और इमरतिया अब उन्हें खुल के छेड़ती भी थी, सूरजु का नाम ले ले कर,

झाड़ते समय अब वो रुक जाती और बड़की ठकुराइन से बोलती, "पहले बोल हमरे देवर से चुदवाओगी"

" अरे झाड़ न स्साली, हमरे बेटवा क चोदी, अरे जो बड़ा बड़ा चूतड़ मटका के चलती हो न तो तोहार गांड भी मारेगा, " गरमा के सूरजु की माई बोलतीं

" अरे हमार देवर है जो चाहे वो करे, अब तो लंगोटा खुल गया है, बुर भी मरवाउंगी, गाँड़ भी लेकिन तू पहले बोला साफ़ साफ़ तब आज झाड़ूंगी " इमरतिया उन्हें और तंग करती,

" अरे ठीक है तोहार देवर, जो तू चाहे करवावा, अच्छा चुदवा लेब " हंस के वो कबूल करतीं और गच्चाक से दो उँगलियाँ सूरजु की माई क बुर में, स्साली क बुर अभी भी एकदम टाइट, इमरतिया ने गाँव की कितनी कुँवार लड़कियों की होली में, सावन में झूले पे ऊँगली की लेकिन उन सबसे टाइट ठकुराइन की थी, कुछ तो उनको सब ट्रिक आती थी, चुनमुनिया का ख्याल भी करती थीं अपने, और कुछ इमरतिया को जड़ी बूटी का भी ज्ञान था, मर्दो वाली भी लड़कियों वाली भी, चार बच्चो की भोंसड़ी वाली भी, एकदम नया माल लगती, और बड़की ठकुराइन ने तो सिर्फ एक जना था और वो भी बीस साल पहले,

लेकिन इमरतिया तब भी ठकुराइन को तंग करती, दोनों जोबना पे तेल लगाते बोलती,

" अरे स्साली, रंडी क जनी, बेटा चोद, कबूल करो, किरिया खा तीन बार की अपने बेटवा से चुदवाओगी, सूरजु क लंड घोटगी यह भोंसडे में "

" अरे झाड़ दे स्साली, बोल तो दिया, चल किरिया खाती हूँ, कसम ले ले घोंटूंगी उसका लंड, अब तो झाड़ दे "



और झाड़ते समय भी इमरतिया वही सब बोलती, " अरे असली मजा तो तब आएगा, जब हमरे देवर क मोट लंड जाई, अब तक क कुल लंड भुला जाओगी स्साली "



झड़ते समय दोनों एक से एक गालियां और दिन में कम से कम दस बार कबुलवाती सूरजु क माई से, और कई बार तो सबके समाने भी बुलाती , " बहनचोद तो कुल लौंडे हैं यह गाँव क, लेकिन हमार देवर पक्का मादरचोद है, "

और सूरजु क माई गेंहू कूटने पीसने वालियों के सामने ही इमरतिया को चिढ़ातीं, " मादरचोद है तो तोहार झांट काहें सुलग रही है , तुम भी चुदवा लो न, कइसन भौजाई हो, हमार देवर होत तो एक दिन भी नागा नहीं करती। "--

तो सूरजु क माई को जब उनकी भौजाइयों और ननदों ने पकड़ के खड़ा किया, साड़ी तो कब की उतर गयी थी, पेटीकोट भी कमर तक, खूब चिकनी गोरी गोरी केले के तने ऐसी जाँघे, मांसल, रसीली और उस के बीच, रौशनी में चमकती, दमकती पावरोटी ऐसी फूली फूली बुर, दोनों फांके एकदम चिपकी, समझदार औरतें देख के समझ गयी थीं, न जाने कितने लौंड़े का धक्का इसने खाया होगा,



अरे सूरजु की नानी ने उनकी माई को जब उनकी पहली माहवारी हुयी, तभी बाल बनाते समय समझाया था,

" भूख लगने पर मरद जैसे रोटी नहीं गिनते, कितनी खायी, वैसे जवानी चढ़ते समय, औरत लंड नहीं गिनती कितने घोंटे। अरे बिधना इतना मेहनत करके जांघो के बीच ये सुन्दर छेद बनाया और किस लिए, सिर्फ लंड खाने के लिए। " और सूरजु की माई ने अपनी माई की वो बात गाँठ बाँध ली, न रिश्ता न नांता, लंड तो लंड। लेकिन अभी भी उनकी चुनमुनिया इतनी टाइट थी, और उससे भी बढ़कर हरदम गीली, मखमल की तरह मुलायम, उसे देख के नयी नयी गौने उतरी बहूये भी लजा गयीं, ऐसी टाइट और गीली तो उनकी भी नहीं रहती।



रामपुर वाली भौजी, वैसे तो रिश्ते में उनकी बहू लगती थी, उनके मायके की, लेकिन मजाक के मामले में एकदम सूरजु क माई क टक्कर की, पीछे से जकड के अपनी हथेली अपनी सास की बुर पे रगड़ते हुए पूछ रही थीं,

" बताइये बातोये सब लोग, अब इसमें कितने गए हैं ये पूछने का मतलब नहीं, लेकिन अब अगला लंड किसका जाएगा, बताइये बताइये , दूल्हा की माई की बुरिया में "

और पूरी ताक्त से बुलबुल की चोंच खोल दी, और बुर के अंदर अभी भी, सैकड़ों लंड का धक्का खा के भी लाल गुलाबी और रस से भीगी रामपुर वाली भाभी ने फिर सवाल दोहराया,

" दूल्हे की माई क बुरिया में केकर लंड जाई, बोला बोला, अइसन रसीली गुलाबी गुलाबी बुरिया केकर लौंड़ा खायी "


" अरे दूल्हे क माई क बुरिया में, दूल्हे का लंड जाई, हमरे तोहरे देवर क लंड, इनके बेटवा क लंड " जोर से हँसते हुए मुन्ना बहू बोली,
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" और हमरे भतीजा क, दूल्हा का, बरात तबतक न जाई जबतक दूल्हे के लंड पे दूल्हे क माई न चढ़ेंगी, " कांति बुआ ने कस के अपनी भौजाई के जोबन रगड़ते हुए कहा।

लेकिन सूरजु का माई भी खूब मजा ले रही थीं, उन्होंने छुड़ाने की कोशिश नहीं की बल्कि, रामपुर वाली भाभी, और मुन्ना बहू को चैलेंज किया,

" अरे इतना भौजाई हैं, अभी तक अपने देवर क लंड घोंटी नहीं है, पहले भौजाई लोग बताये उनके देवर क लौंड़ा है केतना बड़ा, "

मुन्ना बहू और रामपुर वाली भाभी की निगाह इमरतिया की ओर पड़ी, और इमरतिया क मुस्कराहट ने कबूल कर लिया की वः देवर के खूंटे पे चढ़ चुकी है बल्कि पूरा बित्ता फैला के इमरतिया ने इशारा भी कर दिया की उसके देवर का सूरजु का लंड, पूरे बित्ते का, बल्कि उससे भी बड़ा है , और कलाई मुन्ना बहू की पकड़ के उसकी मोटाई भी बता दी,

औरतों के मुंह से चीख निकल गयी, और बुच्ची, चुनिया और उस की समौरिया वाली गाँव की लड़कियों की बिल गीली ho गयी एक ओर से सूरजु की माई को उनकी ननद, सूरजु की बुआ कांति बुआ ने पकड़ रखा था, और दूसरी ओर से उनकी भौजाई, सूरजु क छुटकी मामी ने, दबोच रखा था, और सूरजु क मामी बोलीं,

" हमरे ननद क कम मत समझा, गदहा, घोडा, कुत्ता सब का लंड चुकी हैं सूरजु क महतारी तो तोहरे देवर के लंड भी सट्ट से घोंटेंगी और वो भी आड़े तिरछे, चोरी छिपे नहीं, खुल के सब के सामने, माटी कोड़ने जाएंगे न बस वहीँ खुले खेत में, भरी बगिया में, भौजाई लोग अपने देवर क लंड खड़ा करना, और हम इनकी ननद भौजाई मिल के चढ़ा देंगे, तोहरे देवर के लंड पे। "

लेकिन जबरदस्त जवाब दिया, रामपुर वाली भाभी ने, वो सूरजु का माई का बुरिया अभी भी फैलाये थीं, तो अपनी सास को गरिया के चिढ़ाते बोलीं,

" अरे तोहार लोगन क देवर, नहीं जो उनका खड़ा करना पड़ेगा , हमरे देवर का तो हरदम खड़ा रहता है, खासतौर से मामी, बुआ और महतारी को देख के, और तोहरे ननद क बुरिया कितना पनिया रही है, खाली हमरे देवर क लंड क नाम सुन के, अरे घबड़ाइये मत, बहन चोद तो कुल मरद होते हैं, हमार देवर पक्का मादरचोद है "



लेकिन तब तक सूरजु की चाची और उनकी एक दो देवरानी ने मिल के कांति बुआ को दबोच लिया और अब उनकी बिल खुल गयी और सूरजु की माई का पेटीकोट डाउन हो गया, वो अपनी ननद को चिढ़ाने में लग गयीं

अब एक बार फिर से सूरजु की माई मतलब गाँव की चाची, ताई, लोगों का पलड़ा भारी था और बुआ लोगों की रगड़ाई शुरू हो गयी, और सूरजु की माई ने कांति बुआ की खिंचाई करते हुए कहा, बिना ये सोचे की उनकी भतीजी बुच्ची और उस की उम्र की लड़कियां भी हैं,



" भूल गयी गौने के पहले कैसे तोहरे दोनों छेद में तोहार दू दू भाई कैसे मजा लिए थे, आगे वाले छेद में सूरजु क बाबू और गंडिया में सूरजु क चाचा, फिर बदल बदल के, "



अब तो गाँव की चाचियों, ताइयों ने इतनी जोर का ठहाका लगाया, कई तो उस समय थीं भी जब यह बात हुयी थी, कांति बुआ की शादी हो गयी थी, गौना नहीं हुआ था, हाँ अगहन में तारीख रखी गयी थी, उसी साल होली में, सूरजु की माई के गौने आये तीन साल हो गए थे, और कांति बुआ ने गाँव की लड़कियों के साथ मिल के होली में भौजी की रगड़ाई का प्लान बनाया था, लेकिन सूरजु क माई, अपनी जेठानी देवरानी से मिल के, सूरजु क एक मौसी आयी थीं, एकदम कुवार, गौना का बियाह भी नहीं हुआ था और साली को देख के सूरजु क बाबू और चच्चा क रोज फड़फड़ाता था। बस सूरजु क माई ने जुगाड़ करवा दिया, शर्त भी बता दी, आँख पे पट्टी बांध के पेलना होगा, अभी थोड़ा लजाती है,



बस सूरजु क मौसी ने, अपने जिज्जा का सूरजु के बाबू का चूस चूस के, उनका भी बम्बू जबरदंग था, और फिर अपने दुपट्टा से कस के उनक आँख पे पट्टी बाँध दी, और सूरजु के बाबू के उस खड़े लंड पे चढ़ाई गयीं,

सूरजु क बुआ, उनकी कुल भौजाई पकड़ के, उनके मुंह पे पट्टी बाँध के

और चीख पुकार कर रही थी सूरजु का मौसी, जिससे सूरजु का बाबू सोचें की आपन कोरी साली की फाड़ रहे हैं

और जब बांस पूरा घुस गया तो सूरजु की माई, अपने देवर को, सूरजु के चाचा को,आँख पे पट्टी बाँध के खुद अपने हाथ से उनका लंड पकड़ के कांति बुआ की कोरी गांड पे सटा दी , सूरजु की चाची ने अपनी ननद की गांड कस के फैला दी औरकरारा धक्का मारा कांति बुआ के भाई ने



सूरजु की माई ने पट्टी खोल दी , कांति बुआ के मुंह से और क्या जोर से चोकरी वो, लेकिन दोनों भाई ने मिल के रगड़ रगड़ के अपनी बहिनिया की बुर भी चोदी और गांड भी मारी, फिर बदल बदल के, हाँ दुबारा जब दोनों भाई झड़ रहे थे तो दोनों के आँख की पट्टी उनकी भौजाइयों ने खोल दी, और झड़ते समय कौन बाहर निकालता है, भले बहन की ही बुर और गांड क्यों न हो

जबतक सूरजु की माई ये किस्सा सुना रही थीं की एक ज्योतिषी आये /आयीं

ज्योतिषी जी लगता है सीधे बनारस से आये थे, पोथी पत्रा समेटे, माथे पे त्रिपुण्ड, खूब गोरे, थोड़े स्थूल, धोती जैसे तैसे बाँधी, ऊपर से कुरता पहने, एक हाथ में चिमटा भी,खड़का के बोले, " अलख निरंजन, अलख निरंजन, किसी को बच्चा न हो रहा हो, कोई लंड के बिन तरस रही हो, बाबा सब का हल करेंगे, सबकी परेशानी दूर करें
गे, सबका भाग बाँचेंगे "
Are wah... gajab... maja aa gya .....



Ab dekho baba kya kahte hai....
 

komaalrani

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Ye geet to chaar chand laga rahe hai
सब के सब बुच्ची के पीछे पड़े हैं, कोई उसपे अपने देवर को चढ़वाना चाहता है तो कोई भाई को
 

komaalrani

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बहुत ही सुंदर नाच गान चल रहा है.... देखो तो क्या वादा लिया जा रहा है मीठी मिठाई के लालच में...
इस कहानी में और ख़ास तौर से इस भाग में अनेक लोकगीतों का प्रयोग किया गया है, अब अक्सर ये सब सुनने को नहीं मिलते लेकिन पहले की गाँव की शादियां बिना गाने के और वो भी हर रसम के अलग अलग के बिना हो ही नहीं सकती थीं
 

arushi_dayal

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वाह कोमल जी मजा आ गया। शादी ब्याह का माहौल और शब्दों का ऐसा ताना बाना...ये काम सिर्फ और सिर्फ आप ही कर सकती हैं।
हमारे पंजाबियों के यहां शादी में भी हंसी मजाक, छेड़-छाड़ और गाली वगेरह चलती है लेकिन कभी ऐसा माहौल मैंने कभी नहीं देखा। ननद महतारी और भाभी की ऐसी खिंचाई नहीं कभी देखी नहीं कभी सुनी। सच में ऐसा होता है क्या?

अपनी बुच्ची मान गई रखेगी गप्पू का मन
पर पहले चूत में लेगी वो अपने भैया का लन
जब अम्मा पूछी भौजी से लौड़े की लम्बाई
बित्ते भर से ऊपर होगा वोआँखों से समझाई
नाग निकला पिटारे से आएगी सबकी बारी
फ़िर वो मामा
की लड़की या अपनी महतारी
 

Shetan

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Bua ke sath to conspirecy ho gayi..


Dekhte hai ye jyotish kon ban ke aaya hai.

Or sidhe " अलख निरंजन, अलख निरंजन, किसी को बच्चा न हो रहा हो, कोई लंड के बिन तरस रही हो, बाबा सब का हल करेंगे, सबकी परेशानी दूर करेंगे, सबका भाग बाँचेंगे " bolne lage.maza aayega aage.

Or iss iss donkach jaise mahol main or kya kya hota hai.


Overall the update was awesome.

Agle rusprad update ki pratiksha
आप के रेव्यू ला जवाब है.

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Shetan

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कोमलजी. मै देर से जरूर आई. पर तीनो स्टोरी के सारे अपडेट पढ़ लिए. और हर अपडेट पर रेव्यू है.

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Sutradhar

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वाह कोमल जी मजा आ गया। शादी ब्याह का माहौल और शब्दों का ऐसा ताना बाना...ये काम सिर्फ और सिर्फ आप ही कर सकती हैं।
हमारे पंजाबियों के यहां शादी में भी हंसी मजाक, छेड़-छाड़ और गाली वगेरह चलती है लेकिन कभी ऐसा माहौल मैंने कभी नहीं देखा। ननद महतारी और भाभी की ऐसी खिंचाई नहीं कभी देखी नहीं कभी सुनी। सच में ऐसा होता है क्या?

अपनी बुच्ची मान गई रखेगी गप्पू का मन
पर पहले चूत में लेगी वो अपने भैया का लन
जब अम्मा पूछी भौजी से लौड़े की लम्बाई
बित्ते भर से ऊपर होगा वोआँखों से समझाई
नाग निकला पिटारे से आएगी सबकी बारी
फ़िर वो मामा
की लड़की या अपनी महतारी

वाह आरुषि जी

बहुत दिनों बाद आपका आगमन हुआ और आते ही शानदार कविता, जैसी की आशा थीं।

कोमल जी की कहानियों को सजाने में आपका और शैतान जी का गजब का योगदान रहा है।

जहां एक और शैतान जी चित्रों के माध्यम से कहानी के पात्रों को मूर्त रूप दे देती हैं वहीं आप कहानी को काव्यमय।

पाठक वृंद आपकी तिकड़ी से धन्य हैं।

पुनः आपका स्वागत।

सादर
 
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